आजकल सोशल मीडिया पर एक बड़ा हो-हल्ला मचा हुआ है कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सीमा के अंदर घुसपैठ कर ली है। WhatsApp और X पर कुछ ऐसी वीडियो आग की तरह फैल रही हैं, जिनमें सेना के जवान आमने-सामने धक्का-मुक्की करते दिख रहे हैं। आम जनता पैनिक में है कि क्या सच में बॉर्डर पर हालात खराब हैं।
लेकिन Apni Vani का काम सिर्फ ट्रेंडिंग न्यूज़ छापना नहीं, बल्कि झूठ के पर्दे को फाड़ कर असली सच सामने लाना है। आज हम इस पूरे मामले का डीप एनालिसिस करेंगे और समझेंगे कि आखिर यह बॉर्डर का खेल क्या है।
वायरल वीडियो का पूरा सच और फेक न्यूज़ की फैक्ट्री
जब हमने इन वायरल वीडियो की गहराई से फैक्ट-चेकिंग की, तो सच्चाई बिल्कुल अलग निकली। इंटरनेट पर घूम रही ये वीडियो हाल-फिलहाल की नहीं, बल्कि सालों पुरानी हैं। इनमें से ज्यादातर फुटेज 2022 के तवांग क्लैश या उससे भी पुरानी झड़पों की हैं जिन्हें नया बता कर शेयर किया जा रहा है। भारतीय सेना और सरकार ने साफ कर दिया है कि अभी अरुणाचल प्रदेश सेक्टर में ऐसी कोई बड़ी घुसपैठ या झड़प नहीं हुई है।
असल में कुछ सोशल मीडिया पेजेस और टीआरपी के भूखे लोग पुरानी वीडियो को वायरल करके सिर्फ व्यूज और फॉलोअर्स बटोर रहे हैं। यह हमारे सिस्टम की सबसे बड़ी नाकामी है कि फेक न्यूज़ इतनी आसानी से देश की सुरक्षा के नाम पर फैलाई जाती है।
LAC क्या है और बॉर्डर लाइन पर कंफ्यूजन क्यों होता है?
ऐसे फेक दावे बार-बार इसलिए वायरल होते हैं क्योंकि आम लोगों को भारत और चीन के बॉर्डर सिस्टम के बारे में सही जानकारी नहीं है। भारत और पाकिस्तान की तरह, भारत और चीन के बीच कोई आपसी सहमति वाली और ठीक से मार्क की गई अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं है, बल्कि एक ‘लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल’ (LAC) है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह LAC जमीन पर या नक्शे पर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। भारत का अपना LAC का नज़रिया है और चीन का अपना।जब दोनों सेनाएं अपने-अपने नज़रिए के हिसाब से पेट्रोलिंग करती हैं, तो कई बार एक ही जगह पर आमने-सामने आ जाती हैं। इसे सेना की भाषा में घुसपैठ नहीं, बल्कि ‘ओवरलैपिंग पेट्रोलिंग’ या ‘फेस-ऑफ’ कहा जाता है।

चीन आखिर सीमा और मैकमोहन लाइन क्यों नहीं मानता?
अरुणाचल प्रदेश के हिस्से में जो बॉर्डर लाइन है, उसे ‘मैकमोहन लाइन’ कहा जाता है। यह लाइन 1914 में शिमला समझौते के तहत ब्रिटिश इंडिया और तिब्बत के बीच तय की गई थी। लेकिन चीन का हमेशा से यह विस्तारवादी और दोगला रवैया रहा है कि वह इस समझौते को नहीं मानता। चीन का कहना है कि तिब्बत कभी स्वतंत्र था ही नहीं जो ऐसी कोई संधि साइन कर सके।
इसी अजीब लॉजिक की वजह से चीन पूरे अरुणाचल प्रदेश को ‘दक्षिण तिब्बत’ बता कर उस पर अपना फर्जी दावा ठोकता है और वहां के गांवों के नाम बदलने की नाकाम कोशिश करता रहता है। चीन जानबूझकर LAC पर कंफ्यूजन बनाए रखता है ताकि वह भारत पर मनोवैज्ञानिक दबाव डाल सके।
हमारी ज़िम्मेदारी और असली सवाल
जब भी ऐसी अफवाहें उड़ती हैं, तो सबसे पहले हमें अपनी भारतीय सेना पर पूरा भरोसा रखना चाहिए जो -20 डिग्री तापमान में देश की हिफाज़त कर रही है। ऐसे पुराने वीडियो को बिना सोचे समझे फॉरवर्ड करना एक नागरिक के तौर पर हमारी सबसे बड़ी बेवकूफी है। हमें बॉर्डर के दुश्मनों से ज्यादा इन फेक न्यूज़ फैलाने वाले अंदरूनी दुश्मनों से बचना होगा।
अब आप बेबाक होकर बताइये: क्या इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और फेक न्यूज़ फैलाने वाले पेजों पर देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने के जुर्म में सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट्स में ज़रूर दें!