बिहार के कृषि क्षेत्र में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव हो रहा है। किसानों को सरकारी योजनाओं का सीधा और पारदर्शी लाभ देने के लिए बिहार सरकार ने ‘फार्मर रजिस्ट्री’ का काम शुरू कर दिया है।
कृषि विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में अब तक 50 लाख से अधिक किसानों की डिजिटल फार्मर रजिस्ट्री पूरी की जा चुकी है। इसका दूसरा चरण जोरों पर है, जो 30 जून 2026 तक चलेगा। लेकिन यह फार्मर रजिस्ट्री आखिर है क्या? इससे एक आम किसान को क्या फायदा होगा? ‘Apni Vani’ की इस विस्तृत एग्रीकल्चर रिपोर्ट में आइए इन सभी सवालों के जवाब एकदम आसान भाषा में समझते हैं।
‘फार्मर रजिस्ट्री’ (Farmer Registry) आखिर है क्या?
फार्मर रजिस्ट्री दरअसल केंद्र सरकार के ‘एग्रीस्टैक’ (AgriStack) मिशन का एक बहुत बड़ा हिस्सा है। सरल भाषा में कहें तो यह किसानों का एक डिजिटल डेटाबेस है।
जिस तरह हर आम आदमी की पहचान के लिए आधार कार्ड होता है, ठीक उसी तरह अब किसानों की पहचान के लिए ‘फार्मर आईडी’ बनाई जा रही है। इस रजिस्ट्री में किसान का आधार, उनके खेत का ब्यौरा (जमीन की रसीद/LPC) और बैंक खाता एक साथ लिंक किया जा रहा है, ताकि सारा डेटा एक ही जगह डिजिटल रूप में सुरक्षित रहे।
30 जून तक चलेगा दूसरा चरण, जल्दी करें!
बिहार सरकार ने सभी जिलों के कृषि पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि 30 जून से पहले ज्यादा से ज्यादा किसानों का रजिस्ट्रेशन पूरा किया जाए।
जो किसान इस तारीख तक अपनी रजिस्ट्री नहीं करवा पाएंगे, उन्हें भविष्य में कई सरकारी योजनाओं से हाथ धोना पड़ सकता है। सरकार हर पंचायत और गांव स्तर पर कृषि कार्यकर्ताओं किसान सलाहकारों के माध्यम से कैंप लगाकर यह काम पूरा करवा रही है।
फार्मर रजिस्ट्री कराने के 5 सबसे बड़े फायदे
अगर आप सोच रहे हैं कि इस रजिस्ट्रेशन से क्या मिलेगा, तो इसके फायदे जानकर आप भी आज ही अपना रजिस्ट्रेशन करवाएंगे:
- योजनाओं का सीधा पैसा (DBT): अब पीएम किसान सम्मान निधि हो या राज्य सरकार की कृषि इनपुट सब्सिडी, सारा पैसा बिना किसी बिचौलिए के सीधे आपके रजिस्टर्ड बैंक खाते में आएगा।
- सस्ती दर पर खाद और बीज: सरकार द्वारा मिलने वाले Subsidy बीज और खाद लेने के लिए अब बार-बार कागज जमा नहीं करने पड़ेंगे। आपकी फार्मर आईडी से ही सारा काम हो जाएगा।
- फसल बीमा में आसानी: बाढ़ या सूखे से फसल बर्बाद होने पर फसल सहायता योजना का लाभ और मुआवजा सीधा और सबसे पहले रजिस्टर्ड किसानों को ही मिलेगा।
- पैक्स में फसल बेचना हुआ आसान: समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं या धान बेचने के लिए अब मंडियों और पैक्स में लंबी लाइन नहीं लगानी पड़ेगी। आपका सारा डेटा पहले से सिस्टम में मौजूद रहेगा।
- फर्जी किसानों की होगी छुट्टी: इस सिस्टम के लागू होने से ऐसे फर्जी लोग, जो किसान न होते हुए भी योजनाओं का फायदा उठा रहे थे, वे पूरी तरह से बाहर हो जाएंगे और असली हकदार को उसका हक मिलेगा।

रजिस्ट्रेशन के लिए किन डॉक्यूमेंट्स की पड़ेगी जरूरत?
जो किसान अभी तक इस योजना से नहीं जुड़े हैं, वे अपने पंचायत के ‘कॉमन सर्विस सेंटर’ (CSC) या कृषि सलाहकार से संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए आपको सिर्फ ये 4 जरूरी चीजें चाहिए:
- किसान का चालू मोबाइल नंबर (जो बैंक से लिंक हो)।
- जमीन की ताज़ा रसीद या एलपीसी (LPC)।
- बैंक पासबुक की फोटोकॉपी।
- आधार कार्ड।
Apni Vani की बात
यह योजना बिहार की किसानी को आधुनिक बनाने और बिचौलिया प्रथा को हमेशा के लिए खत्म करने का एक ब्रह्मास्त्र है। 30 जून की आखिरी तारीख करीब है, इसलिए कोई भी किसान इस सुनहरे मौके से न चूके।
अगर आपके परिवार या गांव में कोई किसानी करता है, तो एक जागरूक नागरिक होने के नाते यह आपकी जिम्मेदारी है कि इस खबर को उनके व्हाट्सएप ग्रुप्स में तुरंत शेयर करें। खेती-किसानी से जुड़ी हर बड़ी और सच्ची खबर के लिए ‘Apni Vani’ के साथ जुड़े रहें!