बिहार में सांप काटने से होने वाली मौतों पर अब एक बड़ा बदलाव होने वाला है। राज्य विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि सर्पदंश से मृत्यु पर मिलने वाले मुआवजे को 4 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये किया जाए। यह फैसला ग्रामीण इलाकों में किसानों और मजदूरों के लिए वरदान साबित होगा, जहां मानसून के दौरान सांपों का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। अभी तक आपदा प्रबंधन विभाग सिर्फ 4 लाख देता था, लेकिन अब वन्यजीव हमले के बराबर मान्यता मिलेगी।
सर्पदंश मुआवजा बढ़ाने का पूरा बैकग्राउंड

यह मुद्दा बिहार विधानसभा में जोरदार बहस के बाद उभरा। भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने सदन में सवाल उठाया कि वन्यजीव हमले पर 10 लाख मुआवजा मिलता है, तो सांप काटने पर क्यों सिर्फ 4 लाख? स्पीकर प्रेम कुमार ने बैठक बुलाई और वन्यजीव विभाग को सांप को वन्यजीव श्रेणी में शामिल करने की प्रक्रिया तेज करने को कहा। बिहार के खेतों-खलिहानों में सालाना सैकड़ों मौतें होती हैं, खासकर जून-सितंबर में। यह बदलाव उन परिवारों को आर्थिक सुरक्षा देगा जो पहले आर्थिक संकट में डूब जाते थे। प्रक्रिया पूरी होते ही अस्पताल के डेथ सर्टिफिकेट पर आधारित 10 लाख सीधे खाते में आएंगे।
वर्तमान मुआवजा व्यवस्था में क्या बदलाव आएगा?
पहले सर्पदंश को प्राकृतिक आपदा माना जाता था, जिसमें 4 लाख की सीमा थी। अब सांप को वन्यजीव घोषित करने से यह 10 लाख हो जाएगा, ठीक वैसे ही जैसे बाघ या हाथी हमले पर मिलता है। विधानसभा परिसर में हुई इस बैठक में स्पीकर ने साफ कहा कि ग्रामीण बिहार के हाशिए पर रहने वाले लोगों को न्याय मिलना चाहिए। नीलगाय जैसे अन्य खतरे पर भी चर्चा हुई, जहां फसल नुकसान के लिए शिकारियों की संख्या 400 तक बढ़ाई जाएगी। यह नीतिगत सुधार बिहार सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है, जो पटना से लेकर गांव तक पहुंचेगा।
बिहार के ग्रामीणों पर सर्पदंश का असर और महत्व
बिहार में प्रतिवर्ष 20,000 से ज्यादा सांप काटने के मामले दर्ज होते हैं, जिनमें 10% घातक साबित होते हैं। मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर जैसे जिलों में किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। पहले मुआवजा मिलने में देरी और कम राशि से परिवार टूट जाते थे। अब 10 लाख की यह राशि शिक्षा, इलाज और आजीविका के लिए सहारा बनेगी। स्वास्थ्य विभाग को भी एंटी-वेनम स्टॉक बढ़ाने के निर्देश मिले हैं। यह कदम न सिर्फ न्याय देगा, बल्कि जागरूकता अभियान को भी बढ़ावा मिलेगा।

आगे की प्रक्रिया और लाभार्थियों के लिए टिप्स
मुआवजा पाने के लिए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट जरूरी होगी, जिसमें सर्पदंश स्पष्ट लिखा हो। जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में आवेदन 30 दिनों के अंदर करना होगा। सरकार डिजिटल पोर्टल लॉन्च करने पर विचार कर रही है ताकि प्रक्रिया पारदर्शी बने। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई वाली सरकार इस फैसले से ग्रामीण वोटबैंक को मजबूत करने की कोशिश में भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सर्पदंश रोकथाम पर फोकस बढ़ेगा। अगर आप प्रभावित हैं, तो स्थानीय बीडीओ से संपर्क करें।
मेटा टाइटल: बिहार सांप काटने मौत मुआवजा 10 लाख: स्पीकर प्रेम कुमार का बड़ा फैसला | Bihar Snake Bite Compensation 2026
