बोधगया, बिहार: अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल बोधगया में मंगलवार को उस वक्त अफरा-तफरी और ‘लॉकडाउन’ जैसी स्थिति देखने को मिली, जब वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम अपनी उच्च स्तरीय टीम के साथ महाबोधि मंदिर पहुंचे। सुरक्षा के ऐसे कड़े इंतजाम किए गए कि आम पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को घंटों तक ट्रैफिक जाम और रूट डायवर्जन का सामना करना पड़ा। हालांकि यह दौरा भारत-वियतनाम के कूटनीतिक रिश्तों के लिए एक मील का पत्थर है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसके ‘साइड इफेक्ट्स’ भी चर्चा का विषय बने रहे।
एयरपोर्ट से मंदिर तक छावनी में तब्दील हुआ इलाका
वियतनाम के राष्ट्रपति के तीन दिवसीय भारत दौरे के दौरान बिहार के गया को विशेष महत्व दिया गया है। राष्ट्रपति तो लाम जैसे ही मंगलवार को गया अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर उतरे, सुरक्षा के मद्देनजर पूरे इलाके को सील कर दिया गया। एयरपोर्ट पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने उनका स्वागत तो किया, लेकिन इस भव्य स्वागत के पीछे की सुरक्षा घेराबंदी ने आम राहगीरों को परेशान कर दिया। एयरपोर्ट से लेकर बोधगया मंदिर तक के मुख्य मार्गों पर कई घंटों तक आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित रही, जिससे चिलचिलाती धूप में लोग फंसे नजर आए।
महाबोधि मंदिर में आम श्रद्धालुओं की ‘नो-एंट्री’
राष्ट्रपति के स्वागत के लिए महाबोधि मंदिर परिसर को अभेद्य किले में बदल दिया गया था। जब राष्ट्रपति मंदिर के भीतर पूजा-अर्चना और विश्व शांति की कामना कर रहे थे, उस दौरान आम श्रद्धालुओं और विदेशी पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। सुरक्षा बलों की तैनाती इतनी सघन थी कि मंदिर की ओर जाने वाली हर गली और चौराहे पर कड़ी निगरानी रखी जा रही थी। प्रशासन ने सुरक्षा के नाम पर जो ‘किलेबंदी’ की, उससे दूर-दराज से आए उन पर्यटकों को भारी निराशा हुई जिन्हें मंदिर के मुख्य द्वार से ही वापस लौटा दिया गया।
ट्रैफिक डायवर्जन और प्रशासनिक सख्ती का असर
प्रशासन ने राष्ट्रपति के दौरे को लेकर पहले से ही रूट चार्ट जारी किया था, लेकिन जमीनी हकीकत उम्मीद से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण रही। कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू होने के कारण वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा जरूरी है, लेकिन बिना किसी पुख्ता वैकल्पिक व्यवस्था के सड़कों को ब्लॉक कर देने से रोजाना के कामकाज पर बुरा असर पड़ा। विशेषकर गया-बोधगया मुख्य मार्ग पर सन्नाटा पसरा रहा और दुकानों के शटर भी सुरक्षा कारणों से कई जगहों पर बंद करवा दिए गए थे।

धार्मिक जुड़ाव बनाम स्थानीय चुनौती
वियतनाम और भारत के बीच बौद्ध धर्म एक मजबूत कड़ी है। राष्ट्रपति तो लाम का यह दौरा दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वियतनाम से बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु और श्रद्धालु हर साल बोधगया आते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे से बिहार के पर्यटन क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर और अधिक पहचान मिलेगी। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बीच स्थानीय बुनियादी ढांचे और आम जनता की सुविधा को नजरअंदाज करना सही है?
कूटनीति सफल, पर प्रबंधन पर सवाल?
राष्ट्रपति का यह दौरा सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और मुख्यमंत्री व अन्य अधिकारियों ने इसे बिहार के लिए गर्व की बात बताया। मंदिर प्रबंधन और प्रशासनिक अधिकारियों ने इस दौरे को एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा है। हालांकि, सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के लिए आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती साबित होगा, ताकि भविष्य में होने वाले ऐसे हाई-प्रोफाइल दौरों के दौरान आम आदमी को इस तरह की परेशानी न झेलनी पड़े।