E-rickshaw Hacking App: 1 मोबाइल ऐप से कैसे रुक रहे चलते वाहन? जानें उज्जैन स्कैम की पूरी सच्चाई!

E-rickshaw Hacking App

तकनीकी का इस्तेमाल जब अपराध के लिए होता है, तो सबसे ज़्यादा नुकसान हमेशा सड़क पर मेहनत करने वाले आम और गरीब इंसान को उठाना पड़ता है। हाल ही में मध्य प्रदेश के उज्जैन से एक ऐसा ही चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है।

एक चीनी मोबाइल ऐप के जरिए चलते हुए ई-रिक्शा को बीच सड़क पर हैक करके बंद किया जा रहा है। इंटरनेट पर इसे भले ही मज़ाक या ‘प्रैंक’ समझा जा रहा हो, लेकिन हकीकत में यह गरीब ई-रिक्शा चालकों को लूटने की एक सोची-समझी साजिश और संगठित स्कैम है।

कैसे काम करता है BAT-BMS ऐप और हैकिंग का पूरा खेल?

आजकल ई-रिक्शा में आधुनिक लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल होता है। इन बैटरियों के तापमान और पावर को मैनेज करने के लिए बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) लगा होता है। कई कंपनियों की इन बैटरियों में ब्लूटूथ की सुविधा इनबिल्ट होती है।

हैकर्स इसी तकनीकी खामी का सीधा फायदा उठाते हैं। वे ‘BAT-BMS’ नामक एक चीनी ऐप डाउनलोड करते हैं। यह ऐप आस-पास चल रहे ई-रिक्शा के ब्लूटूथ सिग्नल को बिना किसी सिक्योरिटी कोड के स्कैन कर लेता है और कनेक्ट हो जाता है। कनेक्ट होते ही हैकर्स अपने मोबाइल की स्क्रीन से एक बटन दबाकर बैटरी का पावर बंद कर देते हैं, जिससे सड़क पर दौड़ता हुआ ई-रिक्शा अचानक झटके से रुक जाता है।

उज्जैन में कैसे अंजाम दिया जा रहा था यह गोरखधंधा?

उज्जैन की नीलगंगा थाना पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले में नवली गांव के रहने वाले 18 वर्षीय रितेश भानूपा को हिरासत में लिया है। इस गैंग का काम करने का तरीका बेहद शातिर था। जानकारी के मुताबिक, ये घटनाएं ज्यादातर देर रात सुनसान इलाकों में अंजाम दी जाती थीं।

पहले ये लोग ई-रिक्शा को हैक करके बंद कर देते थे। जब गरीब चालक घबरा जाता और परेशान हो जाता, तो ये ‘मददगार’ या ‘टेक्निकल एक्सपर्ट’ बनकर वहां पहुंचते थे। फिर कुछ ही मिनटों में उसी ऐप से गाड़ी चालू करने का नाटक करके, अपनी ‘मेहनत’ के नाम पर चालकों से 200 से 300 रुपये ऐंठ लेते थे।

पूछताछ में यह बात सामने आई है कि इस अकेले आरोपी ने अब तक करीब 22 चालकों को अपना शिकार बनाया था। लगातार सामने आ रही ऐसी शिकायतों के बाद, असंगठित ई-रिक्शा चालक-परिचालक संघ ने पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग की थी, जिसके बाद यह गिरफ्तारी हुई।

सिस्टम पर सवाल: कंपनियों की लापरवाही का खामियाजा कौन भुगतेगा?

Apni Vani का हमेशा से मानना है कि हर घटना के पीछे एक बड़ा सिस्टम होता है। यह सिर्फ एक 18 साल के लड़के की हैकिंग का मामला नहीं है, बल्कि हमारी तकनीकी नीतियों और मैन्युफैक्चरिंग स्टैंडर्ड्स पर एक बड़ा तमाचा है।

क्या चीन में बना एक साधारण सा ऐप इतनी आसानी से भारतीय सड़कों पर दौड़ रहे वाहनों के बैटरी सिस्टम को कंट्रोल कर सकता है? क्या ई-रिक्शा और बैटरी बनाने वाली कंपनियों ने बिना किसी पासवर्ड प्रोटेक्शन या सिक्योरिटी एन्क्रिप्शन के खुले ब्लूटूथ सिस्टम बाज़ार में उतार दिए? मुनाफा कमाने की इस अंधी दौड़ में कंपनियों ने इन गरीब चालकों को साइबर ठगों के रहम-ओ-करम पर छोड़ दिया है।

E-rickshaw Hacking App
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चालकों और आम जनता के लिए पुलिस की चेतावनी

आज के डिजिटल युग में सिर्फ सावधान रहना ही एकमात्र बचाव है। उज्जैन पुलिस ने जनता और ई-रिक्शा चालकों के लिए कुछ सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं:

  • किसी पर भरोसा न करें: यदि आपका ई-रिक्शा अचानक सुनसान जगह पर बंद हो जाए, तो घबराएं नहीं और मदद का दिखावा करने वाले किसी भी अनजान व्यक्ति को पैसे या ऑनलाइन पेमेंट न दें।
  • सही जगह संपर्क करें: वाहन में तकनीकी खराबी आने पर केवल कंपनी के अधिकृत सर्विस सेंटर या असली टेक्नीशियन से ही संपर्क करें।
  • तुरंत रिपोर्ट करें: अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति जबरन मदद की पेशकश कर पैसे मांगता है, तो उसकी फोटो, वीडियो या वाहन का नंबर सुरक्षित रखें और तुरंत डायल 100/112, साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी थाने में सूचना दें।
  • कानूनी कार्रवाई: पुलिस ने सख्त हिदायत दी है कि इस तरह के बैटरी डिसेबल करने वाले वीडियो बनाने या इंटरनेट पर सर्कुलेट करने वालों पर भी IT Act के तहत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

Apnivani की बात

टेक्नोलॉजी का विकास ज़रूरी है, लेकिन अगर उसमें सुरक्षा की गारंटी न हो, तो वह एक हथियार बन जाती है।

अब आप बताइये: क्या इस स्कैम के लिए सिर्फ वो 18 साल का ठग ज़िम्मेदार है, या फिर वो बड़ी बैटरी कंपनियां भी उतनी ही गुनहगार हैं जिन्होंने बिना सिक्योरिटी चेक के घटिया सिस्टम बेचे? अपनी राय कमेंट्स में ज़रूर दें!

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