नीतीश कुमार का नाम ‘वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में दर्ज, 10 बार CM पद की शपथ लेकर तोड़े सारे रिकॉर्ड!

नीतीश कुमार

बिहार की राजनीति में हमेशा केंद्र बिंदु रहने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर सबको चौंका दिया है। लेकिन इस बार वजह कोई सियासी उलटफेर नहीं, बल्कि एक अंतराष्ट्रीय सम्मान है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ‘वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ (लंदन) से सम्मानित किया गया है।

यह सम्मान उन्हें किसी साधारण उपलब्धि के लिए नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक अनोखा कीर्तिमान स्थापित करने के लिए मिला है।

क्यों मिला यह खास सम्मान?

नीतीश कुमार भारत के पहले और एकमात्र ऐसे राजनेता बन गए हैं, जिन्होंने 10 बार किसी राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। भारतीय राजनीति के इतिहास में आज तक किसी भी नेता ने इतनी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं संभाली है। इसी अभूतपूर्व उपलब्धि को देखते हुए ‘वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ (लंदन) ने उन्हें प्रमाण पत्र (Certificate of Excellence) देकर सम्मानित किया है।

मुख्य बात: यह रिकॉर्ड सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक अनोखी राजनीतिक घटना है।

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कैसे मिली यह उपलब्धि?

हाल ही में मिली जानकारी के अनुसार, वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की और उन्हें यह प्रतिष्ठित प्रमाण पत्र सौंपा। इस प्रमाण पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि नीतीश कुमार ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत सर्वाधिक बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का विश्व कीर्तिमान स्थापित किया है।

नीतीश कुमार: 10 शपथों का सफर

नीतीश कुमार का यह सफर आसान नहीं रहा है। सन् 2000 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने से लेकर 2024 तक, उन्होंने कई बार गठबंधन बदले, सरकारें गिर्इं और बनीं, लेकिन बिहार की सत्ता की धुरी उन्हीं के इर्द-गिर्द घूमती रही।

यहाँ एक नज़र डालते हैं उनके सफर पर:

  • उन्होंने पहली बार 2000 में शपथ ली थी (हालांकि वह सरकार सिर्फ 7 दिन चली)।
  • इसके बाद 2005, 2010, 2015, 2017, 2020, 2022 और 2024 में अलग-अलग समय पर राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार उन्होंने शपथ ली।
  • जनवरी 2024 में जब उन्होंने एनडीए (NDA) के साथ मिलकर 9वीं बार सरकार बनाई, तो वह पहले ही रिकॉर्ड बना चुके थे, लेकिन यह आंकड़ा अब 10 शपथों के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दर्ज हो गया है।

वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स (लंदन) क्या है?

वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स (WBR) एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो दुनिया भर में असाधारण उपलब्धियों, अद्वितीय रिकॉर्ड्स और मानव प्रयासों को प्रमाणित और सूचीबद्ध करता है। इसका मुख्यालय लंदन, यूनाइटेड किंगडम में है। जब यह संस्था किसी राजनेता को सम्मानित करती है, तो यह उस नेता के प्रभाव और लंबी राजनीतिक पारी का प्रमाण होता है।

बिहार के लिए गौरव या राजनीति का आईना?

नीतीश कुमार के समर्थकों (JDU कार्यकर्ताओं) के लिए यह गर्व का क्षण है। उनका कहना है कि “सुशासन बाबू” ने अपनी कार्यशैली और स्वीकार्यता के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 10 बार शपथ लेना यह भी दर्शाता है कि बिहार की राजनीति में पिछले दो दशकों में कितनी अस्थिरता और गठबंधन के बदलाव देखे गए हैं।

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चाहे नजरिया जो भी हो, आंकड़ों के खेल में नीतीश कुमार अब ‘वर्ल्ड चैंपियन’ बन चुके हैं।

नीतीश कुमार का नाम ‘वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में शामिल होना यह साबित करता है कि भारतीय राजनीति में उनका कद और प्रासंगिकता अभी भी बरकरार है। 10 बार शपथ लेना महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक चतुराई और बिहार की जनता के बीच उनकी पकड़ का सबूत है। अब देखना यह है कि यह रिकॉर्ड भविष्य में कोई और नेता तोड़ पाता है या नहीं।

क्या आप नीतीश कुमार की इस उपलब्धि को बिहार के लिए गर्व की बात मानते हैं? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर लिखें!

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नीतीश कुमार का इस्तीफा😱—लेकिन 20 नवंबर को सीएम……:-Bihar Political Earthquake:

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बिहार की राजनीति एक बार फिर बड़े भूचाल का सामना कर रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को अपने पूरे मंत्रिपरिषद के साथ राज्यपाल को अचानक इस्तीफा सौंप दिया, साथ ही विधानसभा भंग करने की भी सिफारिश कर दी। इस कदम ने न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया—आखिर इस “पॉलिटिकल रीसेट” की जरूरत क्यों पड़ी?

नया पावर इक्वेशन:

NDA के साथ वापसी, साझा सत्ता का फॉर्मूला तैयार सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार एक बार फिर NDA के सपोर्ट से मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। BJP–JDU के बीच 50-50 सत्ता साझेदारी पर सहमति बन चुकी है और लोजपा, HAM समेत अन्य घटक दलों को भी नई सरकार में जगह मिलने की संभावना है।
20 नवंबर को पटना के गांधी मैदान में होने वाला भव्य शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियाँ बनाएगा—जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई बड़े नेता शामिल होंगे।

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10वीं बार CM—नीतीश का नया रिकॉर्ड और सत्ता का संकेत

नीतीश कुमार अपने राजनीतिक करियर में 10वीं बार मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने जा रहे हैं—जो उन्हें बिहार की राजनीति का सबसे स्थिर और प्रभावशाली चेहरा साबित करता है। नई कैबिनेट में इस बार युवा चेहरों और अनुभवी नेताओं का मिश्रण देखने को मिल सकता है, ताकि प्रशासनिक गति और विकास एजेंडा दोनों मजबूत किया जा सके।

विपक्ष का वार बनाम NDA का जवाब

जहाँ विपक्ष इसे “कुर्सी बचाने की राजनीति” बता रहा है, वहीं समर्थकों का दावा है—
“स्थिरता, सुशासन और गठबंधन धर्म के लिए यह रीसेट जरूरी था।”
बिहार के लोग अब यह देखना चाहते हैं कि नई सरकार अगले पाँच साल का रोडमैप कितनी मजबूती से तय करती है।

जनता की नज़रें विकास पर

नई सरकार की चुनौती साफ है—
रोजगार, शिक्षा, अपराध नियंत्रण, बाढ़ प्रबंधन और बुनियादी ढांचे जैसे बड़े मुद्दों पर ठोस काम।
20 नवंबर के बाद बिहार की दबंग राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है—क्या यह अध्याय उम्मीदों को सच करेगा, या फिर सिर्फ समीकरणों का खेल बनेगा?

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