Abhishek Banerjee Attacked In Bengal:  सांसद पर सोनारपुर में जानलेवा हमला, हेलमेट पहनकर बचानी पड़ी जान, जानें पूरी घटना और 5 बड़े अपडेट

Abhishek Banerjee Attacked In Bengal

पश्चिम बंगाल में चुनाव खत्म होने के बाद भी राजनीतिक हिंसा का खूनी खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को बंगाल की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर में एक हिंसक भीड़ ने जानलेवा हमला कर दिया।

इस घटना के दौरान जो तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, वे बेहद विचलित करने वाले हैं। एक चुने हुए सांसद को अपनी जान बचाने के लिए बीच सड़क पर हेलमेट पहनना पड़ा। ‘ApniVani’ की इस विशेष ग्राउंड रिपोर्ट में आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर यह हमला क्यों हुआ, इसके पीछे किसका हाथ बताया जा रहा है और पुलिस ने अब तक कितनों को गिरफ्तार किया है।

सोनारपुर में आखिर क्यों गए थे अभिषेक बनर्जी?

यह पूरी घटना तब शुरू हुई जब अभिषेक बनर्जी, चुनाव के बाद हुई हिंसा में मारे गए TMC कार्यकर्ता संजू करमाकर के परिवार से मिलने के लिए सोनारपुर राजपुर नगर पालिका के वार्ड 9 पहुंचे थे।

उनका काफिला जैसे ही वहां पहुंचा, एक उग्र भीड़ ने उन्हें घेर लिया। प्रदर्शनकारी लगातार ‘चोर-चोर’ के नारे लगा रहे थे और उनके आगे बढ़ने का रास्ता रोक रहे थे। बनर्जी एक मोटरसाइकिल से वहां पहुंचे थे, जिसे भीड़ की धक्का-मुक्की में जमीन पर गिरा दिया गया।

अंडे, पत्थर और चप्पलें… भीड़ ने पार की सारी हदें

हालात उस वक्त पूरी तरह बेकाबू हो गए जब भीड़ ने सांसद पर अंडे, पत्थर और चप्पलें फेंकनी शुरू कर दीं। हमलावरों ने अभिषेक बनर्जी के साथ हाथापाई की, उनकी शर्ट फाड़ दी और उनके सीने पर मुक्के भी मारे।

खुद को पत्थरों से बचाने के लिए अभिषेक बनर्जी को आनन-फानन में एक क्रिकेट हेलमेट पहनना पड़ा। उन्होंने बाद में बयान दिया कि हमलावरों का मुख्य मकसद उनकी हत्या करना था।

‘पुलिस नदारद थी’ : TMC ने लगाया BJP पर साजिश का आरोप

TMC ने इस पूरे हमले का सीधा आरोप भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर लगाया है। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि यह एक BJP के द्वारा कराया गया हमला था और हैरान करने वाली बात यह थी कि जब उन पर हमला हुआ, तब मौके पर कोई स्थानीय पुलिस मौजूद नहीं थी।

वह लगभग एक घंटे तक पीड़ित परिवार के घर में फंसे रहे। काफी हंगामे के बाद भारी संख्या में केंद्रीय बलों और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उन्हें वहां से सुरक्षित बाहर निकाला। दूसरी ओर, BJP के नेताओं ने इस घटना से पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि यह जनता का स्वाभाविक गुस्सा था और पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है।

अस्पताल में हाई-वोल्टेज ड्रामा और ममता बनर्जी का गुस्सा

हमले के बाद अभिषेक बनर्जी को इलाज के लिए कोलकाता के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। लेकिन वहां भी एक अलग ड्रामा देखने को मिला।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद आरोप लगाया है कि पुलिस और कुछ अज्ञात अधिकारियों की धमकियों के कारण निजी अस्पतालों ने अभिषेक बनर्जी को भर्ती करने से मना कर दिया। ममता बनर्जी ने कहा, “यह कैसी व्यवस्था है जहां विपक्ष के नेता को इलाज का अधिकार भी नहीं है?”। अंततः अभिषेक बनर्जी को वापस उनके घर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की एक टीम उनका इलाज कर रही है।

पुलिस का एक्शन: हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारियां

इस राष्ट्रीय स्तर की घटना और भारी राजनीतिक दबाव के बाद बंगाल पुलिस पूरी तरह से हरकत में आ गई है।

बारुईपुर के SP शुभेंद्र कुमार ने स्पष्ट किया है कि वीडियो फुटेज के आधार पर हमलावरों की पहचान की जा रही है। सूत्रों से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस गंभीर मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लगभग 5 संदिग्ध उपद्रवियों को हिरासत में लिया है मैं और उनसे पूछताछ की जा रही है।

इस घटना की निंदा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी जैसे बड़े राष्ट्रीय नेताओं ने भी की है, जिन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों को कभी भी हिंसा से नहीं सुलझाया जा सकता।

ApniVani की बात

बंगाल में राजनीतिक वर्चस्व की यह लड़ाई अब एक बेहद खतरनाक और हिंसक रूप ले चुकी है। दिनदहाड़े एक सांसद पर ऐसा हमला राज्य की कानून-व्यवस्था पर बड़े सवालिया निशान खड़े करता है। प्रशासन को जल्द से जल्द सभी आरोपियों को सलाखों के पीछे डालना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।

आपकी क्या राय है?

क्या आपको लगता है कि बंगाल में कभी राजनीतिक हिंसा का यह खूनी दौर खत्म होगा? अपने विचार नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं और इस अहम खबर को शेयर करें!

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Kolkata ED Raid: ममता, IPAC और ‘गायब’ सबूत! 5 घंटे का हाई-वोल्टेज ड्रामा, क्या सच छिपाने पहुंची थीं दीदी?

Kolkata ED

क्या एक मुख्यमंत्री का काम जाँच एजेंसी के काम में दखल देना है? या फिर ‘रेड’ वाली जगह पर खुद जाकर बैठ जाना है? आज यानी 8 जनवरी 2026 को कोलकाता में जो हुआ, उसने भारतीय राजनीति और संघीय ढांचे (Federal Structure) को शर्मसार कर दिया है। कोलकाता में चुनावी रणनीतिकार संस्था IPAC के ऑफिस और उसके प्रमुख प्रतीक जैन (Pratik Jain) के घर पर Kolkata ED (प्रवर्तन निदेशालय) की रेड चल रही थी।

तभी कुछ ऐसा हुआ जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंच गईं। ED का आरोप है कि इस दौरान “सबूत मिटाए गए”, जबकि ममता इसे “साजिश” बता रही हैं। आखिर सच क्या है? आइए, इस रिपोर्ट में जानते हैं आज के इस हाई-वोल्टेज ड्रामे की पूरी कहानी।

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सुबह की रेड और शाम का बवाल: क्या हुआ आज?

मामला सुबह शुरू हुआ जब ED की टीम ने कथित वित्तीय अनियमितताओं (Financial Irregularities) को लेकर IPAC के कोलकाता स्थित दफ्तर और प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी शुरू की। प्रतीक जैन, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चुनावी अभियानों को संभालने वाले प्रमुख व्यक्ति माने जाते हैं।

  • शाम होते-होते खबर आई कि ममता बनर्जी खुद प्रतीक जैन के घर पहुंच गई हैं।
  • जैसे ही सीएम वहां पहुंचीं, उनके समर्थकों की भारी भीड़ जमा हो गई।
  • पुलिस और केंद्रीय बलों (CAPF) के बीच धक्का-मुक्की की तस्वीरें सामने आईं।
  • माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि ED अधिकारियों को अपनी सुरक्षा की चिंता सताने लगी।

ED का सनसनीखेज दावा: “CM की आड़ में सबूत हटाए गए”

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर मोड़ तब आया जब ED ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। रिपोर्ट्स (Times of India, The Hindu) के मुताबिक, ED ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री के वहां पहुंचने के बाद मची अफरा-तफरी का फायदा उठाया गया।

ED के प्रमुख आरोप:

  • भीड़ और वीवीआईपी मूवमेंट की आड़ में कुछ महत्वपूर्ण डिजिटल डिवाइस (Digital Devices) और दस्तावेज मौके से हटा दिए गए।
  • अधिकारियों को अपना काम करने से रोका गया।
  • यह सीधे तौर पर सबूत मिटाने (Tampering with Evidence) का मामला है।
  • ममता का तर्क: “यह राजनीतिक प्रतिशोध है”
  • दूसरी तरफ, ममता बनर्जी ने वही पुराना तर्क दिया है जो हर नेता फंसने पर देता है—”राजनीतिक साजिश”।

बाहर आकर उन्होंने मीडिया से कहा कि केंद्र सरकार एजेंसियों का इस्तेमाल करके विपक्ष की आवाज दबाना चाहती है। उनका कहना है कि IPAC और प्रतीक जैन को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है क्योंकि वे TMC के लिए काम करते हैं।

लेकिन सवाल यह है कि अगर यह सिर्फ परेशान करना था, तो कोर्ट में लड़ने के बजाय सीएम को खुद रेड वाली जगह पर जाने की क्या जरूरत थी?

भारतीय राजनीति का कड़वा सच: भ्रष्टाचार करो और फिर सीनाजोरी!

अब आते हैं उस मुद्दे पर जो हर आम भारतीय के मन में चुभ रहा है। आज की घटना ने यह साबित कर दिया है कि भारत के राजनेता कानून को अपनी जेब में रखते हैं।

जरा सोचिए, अगर किसी आम आदमी के घर पुलिस या इनकम टैक्स की रेड पड़े, तो क्या कोई मुख्यमंत्री उसे बचाने उसके घर जाएगा? नहीं! तो फिर प्रतीक जैन या IPAC के लिए इतना स्पेशल ट्रीटमेंट क्यों?

हमारे नेताओं का पैटर्न देखिए:

  • पहले सत्ता में रहकर जमकर भ्रष्टाचार (Corruption) करो।
  • जब एजेंसियां जांच करें, तो उसे “लोकतंत्र पर हमला” बता दो।
  • और जब पकड़े जाने का डर हो, तो भीड़ तंत्र (Mobocracy) का सहारा लेकर सबूत गायब करवा दो।
  • क्या यह देश का संविधान है? क्या एक सीएम पद की गरिमा यह शोभा देती है कि वह एक जांच के बीच में बाधा बनें?

क्या सबूतों को बचा पाएगी ED?

फिलहाल ED ने स्थानीय कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई है और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित करने की मांग की है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जो नुकसान होना था, क्या वह हो चुका है?

सूत्रों का कहना है कि ED के पास बैकअप डेटा मौजूद हो सकता है, लेकिन ‘फिजिकल एविडेंस’ का गायब होना केस को कमजोर कर सकता है। यह लड़ाई अब सिर्फ कोलकाता की सड़कों पर नहीं, बल्कि कोर्ट रूम में लड़ी जाएगी।

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राजनितिक साजिशो का जाल

8 जनवरी 2026 का दिन याद रखा जाएगा, लेकिन किसी अच्छी वजह से नहीं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। जब रक्षक ही भक्षक के बचाव में उतर आएं, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए?

जनता को अब यह समझना होगा कि ये “राजनीतिक साजिश” के नारे सिर्फ अपनी काली कमाई और काले कारनामों को छिपाने का एक ढाल हैं। अगर नेता ईमानदार हैं, तो उन्हें जांच से डर क्यों लगता है? और अगर डर लगता है, तो मतलब साफ है—दाल में सिर्फ कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।

आपकी राय: क्या ममता बनर्जी का रेड के दौरान वहां जाना सही था? या यह सत्ता का दुरुपयोग है? कमेंट में अपनी बेबाक राय जरूर लिखें।

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