Epstein Files में मोदी जी का नाम? भारत ने ‘कचरा’ बताकर खारिज किया विदेशी प्रोपगैंडा, जानें क्या है पूरा सच

Epstein Files

सोशल मीडिया के इस दौर में ‘फेक न्यूज़’ की आग कितनी तेजी से फैलती है, इसका ताज़ा उदाहरण जेफरी एपस्टीन फाइल्स (Jeffrey Epstein Files) से जुड़ा नया विवाद है। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) द्वारा 30 जनवरी 2026 को जारी किए गए 35 लाख से अधिक पन्नों के नए दस्तावेजों के बाद भारत में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। दरअसल, इन फाइल्स में कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम का ज़िक्र होने का दावा किया गया, जिसे भारत सरकार ने पूरी तरह से ‘आधारहीन’ और ‘कचरा’ (Trashy) करार दिया है।

Epstein Files
Epstein Files में मोदी जी का नाम

विदेश मंत्रालय का कड़ा प्रहार: “एक अपराधी की मनगढ़ंत बातें”

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने शनिवार, 31 जनवरी 2026 को एक आधिकारिक बयान जारी कर उन मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें पीएम मोदी का नाम एपस्टीन से जोड़ने की कोशिश की गई थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हमने तथाकथित एपस्टीन फाइल्स से संबंधित एक ईमेल संदेश की खबरें देखी हैं, जिसमें प्रधानमंत्री और उनकी 2017 की इज़राइल यात्रा का संदर्भ दिया गया है।”

जायसवाल ने आगे स्पष्ट किया कि जुलाई 2017 में प्रधानमंत्री की इज़राइल की आधिकारिक यात्रा एक ऐतिहासिक तथ्य है, लेकिन उसके अलावा ईमेल में किए गए अन्य सभी दावे एक सजायाफ्ता अपराधी की दिमागी उपज और ‘ट्रैश’ हैं। भारत ने इसे ‘घोर तिरस्कार’ (Utmost Contempt) के साथ खारिज कर दिया है।

क्या है ईमेल विवाद की असली सच्चाई?

अमेरिकी जांच एजेंसी द्वारा जारी दस्तावेजों में एक ईमेल सामने आया है जो 2017 का बताया जा रहा है। इस ईमेल में जेफरी एपस्टीन कथित तौर पर अपने प्रभाव का दिखावा करने के लिए ‘नेम-ड्रॉपिंग’ (बड़े नामों का इस्तेमाल) कर रहा था। विशेषज्ञों का कहना है कि एपस्टीन जैसे लोग अपनी साख बढ़ाने के लिए अक्सर वैश्विक नेताओं के नाम का दुरुपयोग करते थे।

दस्तावेजों के विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक अपराधी द्वारा की गई चर्चा थी, जिसका पीएम मोदी या भारत सरकार से कोई लेना-देना नहीं है। अमेरिकी अधिकारियों ने भी स्पष्ट किया है कि किसी फाइल में नाम होने का मतलब यह कतई नहीं है कि वह व्यक्ति किसी गलत गतिविधि में शामिल था।

Epstein Files
Epstein Files में मोदी जी का नाम

विपक्ष के सवालों पर सरकार का पलटवार

भारत में इस मुद्दे ने तब तूल पकड़ा जब विपक्षी दल कांग्रेस के नेताओं ने इसे ‘राष्ट्रीय शर्म’ बताते हुए सरकार से स्पष्टीकरण मांगा। हालांकि, भाजपा और सरकार समर्थकों ने इसे भारत की छवि खराब करने की एक अंतरराष्ट्रीय साजिश बताया है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, AI-जनरेटेड तस्वीरों और एडिटेड स्क्रीनशॉट्स के जरिए इस खबर को सनसनीखेज बनाने की कोशिश की गई है।

सावधान रहें फेक न्यूज़ से यह पहली बार नहीं है जब पीएम मोदी की वैश्विक छवि को निशाना बनाया गया हो। G20 और अन्य वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती धाक से परेशान कुछ तत्व ऐसी अफवाहों को हवा दे रहे हैं। गूगल न्यूज़ और अन्य विश्वसनीय स्रोतों ने भी पुष्टि की है कि एपस्टीन की किसी भी ‘क्लाइंट लिस्ट’ या ‘क्राइम लिस्ट’ में किसी भी भारतीय नेता का कोई प्रमाणिक नाम नहीं है।

Read more

नीतीश कुमार का नाम ‘वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में दर्ज, 10 बार CM पद की शपथ लेकर तोड़े सारे रिकॉर्ड!

नीतीश कुमार

बिहार की राजनीति में हमेशा केंद्र बिंदु रहने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर सबको चौंका दिया है। लेकिन इस बार वजह कोई सियासी उलटफेर नहीं, बल्कि एक अंतराष्ट्रीय सम्मान है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ‘वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ (लंदन) से सम्मानित किया गया है।

यह सम्मान उन्हें किसी साधारण उपलब्धि के लिए नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक अनोखा कीर्तिमान स्थापित करने के लिए मिला है।

क्यों मिला यह खास सम्मान?

नीतीश कुमार भारत के पहले और एकमात्र ऐसे राजनेता बन गए हैं, जिन्होंने 10 बार किसी राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। भारतीय राजनीति के इतिहास में आज तक किसी भी नेता ने इतनी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं संभाली है। इसी अभूतपूर्व उपलब्धि को देखते हुए ‘वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ (लंदन) ने उन्हें प्रमाण पत्र (Certificate of Excellence) देकर सम्मानित किया है।

मुख्य बात: यह रिकॉर्ड सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक अनोखी राजनीतिक घटना है।

नीतीश कुमार

कैसे मिली यह उपलब्धि?

हाल ही में मिली जानकारी के अनुसार, वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की और उन्हें यह प्रतिष्ठित प्रमाण पत्र सौंपा। इस प्रमाण पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि नीतीश कुमार ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत सर्वाधिक बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का विश्व कीर्तिमान स्थापित किया है।

नीतीश कुमार: 10 शपथों का सफर

नीतीश कुमार का यह सफर आसान नहीं रहा है। सन् 2000 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने से लेकर 2024 तक, उन्होंने कई बार गठबंधन बदले, सरकारें गिर्इं और बनीं, लेकिन बिहार की सत्ता की धुरी उन्हीं के इर्द-गिर्द घूमती रही।

यहाँ एक नज़र डालते हैं उनके सफर पर:

  • उन्होंने पहली बार 2000 में शपथ ली थी (हालांकि वह सरकार सिर्फ 7 दिन चली)।
  • इसके बाद 2005, 2010, 2015, 2017, 2020, 2022 और 2024 में अलग-अलग समय पर राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार उन्होंने शपथ ली।
  • जनवरी 2024 में जब उन्होंने एनडीए (NDA) के साथ मिलकर 9वीं बार सरकार बनाई, तो वह पहले ही रिकॉर्ड बना चुके थे, लेकिन यह आंकड़ा अब 10 शपथों के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दर्ज हो गया है।

वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स (लंदन) क्या है?

वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स (WBR) एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो दुनिया भर में असाधारण उपलब्धियों, अद्वितीय रिकॉर्ड्स और मानव प्रयासों को प्रमाणित और सूचीबद्ध करता है। इसका मुख्यालय लंदन, यूनाइटेड किंगडम में है। जब यह संस्था किसी राजनेता को सम्मानित करती है, तो यह उस नेता के प्रभाव और लंबी राजनीतिक पारी का प्रमाण होता है।

बिहार के लिए गौरव या राजनीति का आईना?

नीतीश कुमार के समर्थकों (JDU कार्यकर्ताओं) के लिए यह गर्व का क्षण है। उनका कहना है कि “सुशासन बाबू” ने अपनी कार्यशैली और स्वीकार्यता के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 10 बार शपथ लेना यह भी दर्शाता है कि बिहार की राजनीति में पिछले दो दशकों में कितनी अस्थिरता और गठबंधन के बदलाव देखे गए हैं।

नीतीश कुमार

चाहे नजरिया जो भी हो, आंकड़ों के खेल में नीतीश कुमार अब ‘वर्ल्ड चैंपियन’ बन चुके हैं।

नीतीश कुमार का नाम ‘वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में शामिल होना यह साबित करता है कि भारतीय राजनीति में उनका कद और प्रासंगिकता अभी भी बरकरार है। 10 बार शपथ लेना महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक चतुराई और बिहार की जनता के बीच उनकी पकड़ का सबूत है। अब देखना यह है कि यह रिकॉर्ड भविष्य में कोई और नेता तोड़ पाता है या नहीं।

क्या आप नीतीश कुमार की इस उपलब्धि को बिहार के लिए गर्व की बात मानते हैं? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर लिखें!

Read more

पीएम मोदी का ओडिशा दौरा : ₹60,000 करोड़ के पैकेज से स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और कौशल विकास को बड़ी सौगात

पीएम मोदी

पीएम मोदी ने शनिवार को ओडिशा को अब तक की सबसे बड़ी विकास सौगात देते हुए ₹60,000 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इन परियोजनाओं में स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और ग्रामीण आवास जैसे अहम क्षेत्र शामिल हैं। मोदी ने कहा कि ये कदम “विकसित भारत, विकसित ओडिशा” की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।

स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा निवेश

ओडिशा के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएँ मुहैया कराने के लिए पीएम मोदी ने एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज (बेरहामपुर) और वीआईएमएसएआर (संबलपुर) को सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में अपग्रेड करने की आधारशिला रखी। इन अस्पतालों में आधुनिक ट्रॉमा केयर यूनिट्स, मातृ एवं शिशु देखभाल केंद्र, डेंटल कॉलेज और बेड क्षमता में बढ़ोतरी होगी। मोदी ने कहा कि अब ओडिशा के मरीजों को जटिल इलाज के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा।

ग्रामीण आवास में 50,000 परिवारों को पक्का घर

आवास योजना के तहत प्रधानमंत्री ने अंत्योदय गृह योजना के 50,000 लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र वितरित किए। इसके तहत कमजोर वर्गों — जैसे विकलांग, विधवा, और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों — को पक्के मकान और आर्थिक सहायता दी जाएगी। पीएम मोदी ने कहा – “गरीब का सपना है अपना घर। हमारी सरकार यह सपना पूरा करने के लिए हर संभव मदद कर रही है।”

पीएम मोदी

शिक्षा और अनुसंधान में ₹11,000 करोड़ का निवेश

प्रधानमंत्री ने आठ IITs (तिरुपति, पलक्कड़, भिलाई, जम्मू, धारवाड़, जोधपुर, पटना और इंदौर) के विस्तार का शिलान्यास किया। इस पर करीब ₹11,000 करोड़ का निवेश होगा। इससे अगले चार वर्षों में 10,000 नए छात्रों के लिए सीटें तैयार होंगी और आठ नए रिसर्च पार्क बनाए जाएंगे। मोदी ने कहा कि ये कदम भारत को नवाचार और अनुसंधान का वैश्विक केंद्र बनाएंगे।

कौशल विकास और युवाओं पर फोकस

युवाओं को रोजगार और प्रशिक्षण के अवसर देने के लिए पीएम मोदी ने ओडिशा स्किल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट फेज-II की शुरुआत की। इसके तहत संबलपुर और बेरहामपुर में वर्ल्ड स्किल सेंटर्स खोले जाएंगे। यहाँ छात्रों को एग्रीटेक, नवीकरणीय ऊर्जा, रिटेल, समुद्री क्षेत्र और हॉस्पिटैलिटी जैसे उभरते क्षेत्रों में ट्रेनिंग मिलेगी। इसके साथ ही 130 उच्च शिक्षा संस्थानों में मुफ्त वाई-फाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस योजना से प्रतिदिन 2.5 लाख छात्रों को मुफ्त डेटा पैक का लाभ मिलेगा।

पीएम मोदी

 

डबल इंजन सरकार उम्मीदें पूरी कर रही है

बीजेपी सांसद बैजयंत जय पांडा ने कहा कि ओडिशा को जो विकास चाहिए था, वह अब डबल इंजन सरकार से पूरा हो रहा है। “आज स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा, आवास से लेकर कौशल विकास तक हर क्षेत्र में बड़े प्रोजेक्ट शुरू हुए हैं। यह ओडिशा के सुनहरे भविष्य की नींव है।”

विकसित भारत, विकसित ओडिशा

मोदी ने कहा कि ये सभी प्रोजेक्ट मिलकर ओडिशा को आत्मनिर्भर बनाएंगे और युवाओं को नए अवसर देंगे। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएँ और राज्य को विकास की नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएँ। कुल मिलाकर, पीएम मोदी का यह दौरा केवल परियोजनाओं का शिलान्यास भर नहीं, बल्कि ओडिशा के लिए एक समग्र विकास पैकेज साबित हुआ है, जिसमें ₹60,000 करोड़ से अधिक का निवेश स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल और आवास जैसी मूलभूत ज़रूरतों को पूरा करने पर केंद्रित है।

Read more

PM मोदी ने लॉन्च किया National Makhana Board: बिहार के किसानों को मिलेगा Global Market का रास्ता

National Makhana Board

16 सितंबर 2025 को बिहार के पूर्णिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने National Makhana Board का शुभारंभ किया। यह कदम केंद्र सरकार के Budget 2025 के अंतरगत उठाया गया है, जिसका उद्देश्य  किसानों को सीधा लाभ पहुंचाना, उत्पादन और प्रोसेसिंग को बढ़ावा देना और भारत के Makhana Export को दुनिया के बड़े बाज़ारों तक ले जाना … Read more

Vice-president election 2025 : NDA के सी.पी. राधाकृष्णन की ऐतिहासिक जीत, विपक्ष को करारी शिकस्त – जानिए कैसे पलटा सियासी खेल

Vice-president election

9 सितंबर 2025 को हुए भारत के vice-president election ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सियासत में  रणनीति जीत के लिए बहुत ज़रूरी है.इस चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन ने विपक्षी INDIA गठबंधन के उम्मीदवार, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी को 152 … Read more