9 सितंबर 2025 को हुए भारत के vice-president election ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सियासत में रणनीति जीत के लिए बहुत ज़रूरी है.इस चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन ने विपक्षी INDIA गठबंधन के उम्मीदवार, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी को 152 वोटों के भारी अंतर से हराकर निर्णायक जीत दर्ज की।
क्या था चुनाव का कारण?
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद यह चुनाव जरूरी हो गया और पूरे देश की निगाहें संसद भवन की ओर टिक गईं।
कौन थे उम्मीदवार?
- NDA की ओर से: सी.पी. राधाकृष्णन (पूर्व गवर्नर, महाराष्ट्र)
- INDIA गठबंधन की ओर से: जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी (पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज)

चुनावी प्रक्रिया और मतदान
781 सांसदों के लिए सीक्रेट बैलट के जरिए वोटिंग हुई, जिसमें करीब 98% रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया। कुल 752 वोट वैध पाए गए, जिसमें सी.पी. राधाकृष्णन को 452 वोट (~60%) बी. सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट (~40%) सिर्फ 15 वोट अमान्य घोषित हुए। राधाकृष्णन को 152 वोटों से बड़ी जीत मिली, जो यह दर्शाता है कि एनडीए में जबरदस्त एकता रही, जबकि विपक्ष अंदरूनी मतभेदों से जूझता रहा।
क्या रहा खास इस Vice-president election में?
विपक्ष में फूट और क्रॉस वोटिंग : सूत्रों के मुताबिक कई विपक्षी सांसदों ने NDA उम्मीदवार को वोट दिया। PM मोदी समेत सभी बड़े नेता मतदान में शामिल हुए, जिससे इस चुनाव को और अधिक अहमियत मिली। राधाकृष्णन की जीत को “2047 तक विकसित भारत” के संकल्प से जोड़ा गया, जिसे उन्होंने राष्ट्रवादी विचारधारा की जीत बताया।
नतीजों के बाद क्या बोले नेता?
जैसे ही नतीजे घोषित हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राधाकृष्णन को तुरंत बधाई दी और कहा कि यह भारत के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है। वहीं, राधाकृष्णन ने इसे “नीति, नेतृत्व और राष्ट्रवाद” की जीत बताया।
निष्कर्ष:
सी.पी. राधाकृष्णन की यह जीत केवल एक संवैधानिक पद तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने भारत की वर्तमान राजनीतिक दिशा, विपक्ष की कमजोरी और NDA की मज़बूत पकड़ को भी उजागर कर दिया। संसद के ऊपरी सदन में अब NDA की स्थिति और मजबूत हो गई है, जो आगामी नीतिगत फैसलों को प्रभावित कर सकती है। क्या opposition इस से कुछ सीखेगा या आगे भी ऐसे ही हालात रहेंगे।
Also Read : Bengal Politics Biggest Showdown : क्यों ममता के सामने BJP विधायकों की No Entry?
