गृह मंत्रालय का नया प्रोटोकॉल: वंदे मातरम के सभी 6 छंद अब सरकारी कार्यक्रमों में अनिवार्य, जानें पूरा नियम

गृह मंत्रालय

फरवरी 2026 का यह समय भारतीय संसदीय और सांस्कृतिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय (MHA) ने एक क्रांतिकारी निर्णय लेते हुए राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के लिए एक नया और विस्तृत प्रोटोकॉल आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है। इस नए आदेश के तहत अब सभी सरकारी और आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल शुरुआती अंश नहीं, बल्कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित मूल गीत के सभी छह छंदों का गायन अनिवार्य होगा। यह कदम राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान को एक समान धरातल पर लाने और देश की सांस्कृतिक विरासत को मुख्यधारा में गहराई से स्थापित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

वंदे मातरम प्रोटोकॉल 2026: क्या है गृह मंत्रालय का नया आदेश?

गृह मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम दिशानिर्देशों के अनुसार, अब किसी भी आधिकारिक समारोह की शुरुआत या समापन (प्रोटोकॉल के अनुसार) में वंदे मातरम का पूर्ण संस्करण प्रस्तुत किया जाएगा। इस पूरे गायन की अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित की गई है। अब तक आधिकारिक कार्यक्रमों में आमतौर पर वंदे मातरम का केवल पहला छंद ही गाया जाता था, जिसे राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा प्राप्त था, लेकिन उसके लिए कोई विस्तृत लिखित नियमावली नहीं थी।

गृह मंत्रालय
गृह मंत्रालय का नया प्रोटोकॉल

नया नियम स्पष्ट करता है कि जब भी राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान एक साथ प्रस्तुत किए जाएंगे, तो पहले ‘वंदे मातरम’ के सभी छह अंतरे (25 लाइनें) गाए जाएंगे, और उसके उपरांत ही राष्ट्रगान होगा। यह व्यवस्था राष्ट्रपति और राज्यपालों के औपचारिक कार्यक्रमों, तिरंगा फहराने के समारोहों और संसद के विशेष सत्रों में सख्ती से लागू होगी।

सावधान की मुद्रा और गायन की अवधि

इस नए प्रोटोकॉल की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वंदे मातरम के गायन के दौरान अब सभी उपस्थित व्यक्तियों को ‘सावधान’ (Attention) की मुद्रा में खड़ा होना अनिवार्य होगा। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि चूंकि यह राष्ट्रगीत है और इसे राष्ट्रगान के समान संवैधानिक दर्जा प्राप्त है, इसलिए इसके पूर्ण गायन के दौरान अनुशासन और मर्यादा का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

अधिकारियों के अनुसार, बैंड या वाद्य यंत्रों के साथ इसकी प्रस्तुति से पहले एक विशेष बिगुल या ड्रम की ध्वनि दी जाएगी, जो सभा को सूचित करेगी कि राष्ट्रगीत प्रारंभ होने वाला है। हालांकि, मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि सिनेमा हॉल या अन्य मनोरंजन स्थलों पर इसे अनिवार्य नहीं किया गया है, लेकिन सरकारी परिसरों और शैक्षणिक संस्थानों में इसे प्रोत्साहित किया जाएगा।

ऐतिहासिक महत्व और सांस्कृतिक पुनरुत्थान

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखित ‘वंदे मातरम’ स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारियों का मूल मंत्र था। इसके छह छंदों में भारत की भौगोलिक सुंदरता, आध्यात्मिक शक्ति और वीरता का वर्णन है। गृह मंत्रालय का मानना है कि केवल एक छंद गाने से इस महान रचना का पूर्ण भाव प्रकट नहीं होता था। सभी छह छंदों को अनिवार्य करके सरकार नई पीढ़ी को इस गीत के उस हिस्से से परिचित कराना चाहती है जो अब तक विस्मृत था। इसमें माँ दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती के रूप में भारत भूमि की वंदना की गई है, जो हमारी साझा विरासत का प्रतीक है।

गृह मंत्रालय
गृह मंत्रालय का नया प्रोटोकॉल

स्कूलों और संस्थानों पर प्रभाव

गृह मंत्रालय की सिफारिश है कि देश भर के स्कूलों और कॉलेजों में दैनिक प्रार्थना सभाओं के दौरान इस पूर्ण संस्करण का अभ्यास किया जाए। इसके लिए शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से एक विशेष ट्यून और मानक ऑडियो संस्करण भी जारी किया जा रहा है, ताकि देश के हर कोने में एक ही लय और सुर में वंदे मातरम गूंज सके। डिजिटल इंडिया के तहत, सरकार इसे विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और सरकारी पोर्टल्स पर भी उपलब्ध कराएगी ताकि लोग इसके सही उच्चारण और लय को सीख सकें।

गृह मंत्रालय
गृह मंत्रालय का नया प्रोटोकॉल

राष्ट्रीय एकता की नई परिभाषा

यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं है, बल्कि यह ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सशक्त करने वाला कदम है। वंदे मातरम के सभी 6 छंदों का गायन हमें हमारे गौरवशाली अतीत की याद दिलाता है और भविष्य के प्रति संकल्पित करता है। यदि आप भी किसी आधिकारिक आयोजन का हिस्सा बनते हैं, तो इस नए प्रोटोकॉल का सम्मान करें और राष्ट्र की इस अनमोल धरोहर को सहेजने में अपना योगदान दें।

Read more

वन्दे मातरम् के हुए 150 वर्ष पूरे, देश भर में हो रहा है महामहोत्सव का आयोजन

राष्ट्रगीत

क्या जन गण मन ही है हमारा राष्ट्रगीत? वन्दे मातरम् के हुए 150 वर्ष पूरे!हो रहा है महामहोत्सव का आयोजन? भारत का प्रतिष्ठित राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् आज 150 वां वर्ष पूरा कर रहा है — यह समय सिर्फ एक गीत का नहीं, बल्कि हमारे स्वतंत्रता-संग्राम, राष्ट्रीय एकता और संस्कृति की अदम्य आवाज़ का महोत्सव है।

रचना और प्रारंभिक यात्रा

इस गीत को Bankim Chandra Chatterjee ने 9 नवंबर 1875 को बंगदर्शन नामक साहित्यिक पत्रिका में प्रकाशित किया था। बाद में यह गीत उनकी प्रसिद्ध कृति Anandamath (1882) में शामिल हुआ। गीत का अर्थ है: “माँ भूमि, मैं तुझे प्रणाम करता हूँ” (“Mother, I bow to Thee”)।

स्वतंत्रता-संग्राम में महत्व

इस गीत ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज उठाने में एक प्रेरक भूमिका निभाई। Rabindranath Tagore ने इसे 1896 में Indian National Congress के अधिवेशन में प्रथम सार्वजनिक रूप से गाया। 1905 में “Bande Mataram” संप्रदाय की स्थापना हुई और यह गीत जन-आन्दोलन में एक नारा बन गया।

आज की प्रासंगिकता & उत्सव

24 जनवरी 1950 को, Dr. Rajendra Prasad की अध्यक्षता में रूपरेखा बनी कि ‘जना गण मन’ (Nation Anthem) के साथ ‘वन्दे मातरम्’ को समान सम्मान मिलेगा। देशभर में 7 नवंबर 2024 से 7 नवंबर 2026 तक इस गीत के वर्ष-भर महोत्सव का आयोजन किया गया है।

वन्दे मातरम्
Vande Mataram

समारोहों में समावेश हैं: उद्घाटन कार्यक्रम, विशेष डाक टिकट और सिक्का जारी करना, विद्यालयों-कॉलेजों-सांस्कृतिक संस्थानों में सामूहिक गान-प्रदर्शनी-वाद-विवाद।

क्यों आज भी मायने रखता है?

‘वन्दे मातरम्’ सिर्फ आधिकारिक गीत नहीं — यह एक भाव-जागृति है, जिसने विविधता-भरे भारत को एक सूत्र में बाँधा। यह गीत हमें याद दिलाता है कि मां-भूमि का सम्मान, बलिदान, एकता और राष्ट्रीय गर्व कितने महत्वपूर्ण हैं। आज की पीढ़ी-के लिए — यह प्रेरणा है कि हम सिर्फ भूतकाल के ही नहीं, भविष्य के भी निर्माणकर्ता हैं।

‘वन्दे मातरम्’ — यह केवल शब्द-अनुच्छेद नहीं, बल्कि हमारी आत्मा, इतिहास और आने वाले कल का मंत्र है। 150 साल बाद भी ये शब्द हमें जोड़ते हैं, गर्व से भरते हैं और अगली पीढ़ी को स्वाभिमान-और-जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाते हैं।

Read more