उत्तर प्रदेश में पेपर लीक का बड़ा कांड, सहायक प्रोफेसर भर्ती परीक्षा रद्द, एसटीएफ ने किया बड़े रैकेट का भंडाफोड़

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उत्तर प्रदेश में एक बार फिर पेपर लीक की खबरों ने लाखों युवाओं के सपनों पर पानी फेर दिया है। सहायक प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में धांधली की पुष्टि होने के बाद योगी सरकार ने कड़ा फैसला लेते हुए पूरी परीक्षा को रद्द कर दिया है। एसटीएफ (STF) की जांच में एक ऐसे गिरोह का पता चला है जिसने तकनीक और सेटिंग के जरिए भर्ती प्रक्रिया में सेंध लगाई थी।

परीक्षा रद्द होने की मुख्य वजह: आखिर कैसे लीक हुआ पेपर?

उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित की जा रही सहायक प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को लेकर पिछले कुछ दिनों से संशय बना हुआ था। परीक्षा के आयोजन के कुछ ही घंटों बाद सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों से पेपर के कुछ हिस्से वायरल होने की खबरें सामने आने लगी थीं।

शुरुआती जांच में मामला संदिग्ध लगने पर मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर Special Task Force (STF) को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई। एसटीएफ ने अपनी प्राथमिक रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रश्नपत्र के कुछ सेट कुछ विशेष केंद्रों और व्हाट्सएप ग्रुपों पर लीक कर दिए गए थे। इसी रिपोर्ट के आधार पर शासन ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए परीक्षा को तुरंत प्रभाव से रद्द करने का निर्णय लिया है।

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एसटीएफ का बड़ा एक्शन: ‘मास्टरमाइंड’ समेत कई गिरफ्तार

एसटीएफ की जांच में यह बात सामने आई है कि यह कोई छिटपुट घटना नहीं थी, बल्कि एक सुव्यवस्थित तरीके से चलाया जा रहा रैकेट था।

कैसे काम कर रहा था यह रैकेट?

प्रिंटिंग प्रेस से सेटिंग: एसटीएफ सूत्रों के अनुसार, रैकेट के तार उस प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े होने की आशंका है जहाँ पेपर छप रहे थे।

सॉल्वर गैंग की एंट्री: परीक्षा केंद्रों पर असली अभ्यर्थियों की जगह ‘सॉल्वर’ बिठाने की योजना भी बनाई गई थी।

लाखों में डील: खबर है कि एक-एक सीट के लिए अभ्यर्थियों से 15 से 20 लाख रुपये तक की मांग की गई थी।

अब तक की छापेमारी में प्रयागराज, लखनऊ और मेरठ से कुल 12 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनके पास से कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, एडमिट कार्ड और नकद बरामद किए गए हैं।

अभ्यर्थियों में रोष: भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता

सहायक प्रोफेसर की यह भर्ती कई वर्षों के इंतजार के बाद आई थी। प्रदेश के हजारों पीएचडी और नेट (NET) क्वालीफाइड उम्मीदवार इस परीक्षा के लिए दिन-रात तैयारी कर रहे थे। परीक्षा रद्द होने से न केवल उनका समय बर्बाद हुआ है, बल्कि आर्थिक और मानसिक तनाव भी बढ़ा है।

प्रयागराज में तैयारी कर रहे एक अभ्यर्थी ने बताया, “हम सालों तक एक वैकेंसी का इंतजार करते हैं, फिर परीक्षा की तारीख आती है और अंत में पता चलता है कि पेपर लीक हो गया। यह केवल परीक्षा रद्द होना नहीं है, बल्कि हमारे

भविष्य का गला घोंटना है।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सख्त रुख

पेपर लीक की घटनाओं पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि दोषियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाए और उनकी संपत्ति कुर्क की जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वासन दिया है कि अगले 6 महीनों के भीतर पूरी पारदर्शिता के साथ दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी और इसके लिए अभ्यर्थियों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।

नई परीक्षा तिथि और आगामी रणनीति

हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी नई तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन सूत्रों की मानें तो शिक्षा विभाग और आयोग नए सिरे से परीक्षा केंद्रों का चयन करेगा।

आगामी परीक्षा के लिए संभावित सुरक्षा बदलाव:

डिजिटल लॉकिंग सिस्टम: प्रश्नपत्रों को डिजिटल लॉक वाले बॉक्स में भेजा जाएगा जो केवल परीक्षा के समय ही खुलेंगे।

नया प्रिंटिंग पार्टनर: भविष्य की परीक्षाओं के लिए प्रिंटिंग प्रेस के चयन में और अधिक सख्ती बरती जाएगी।

जैमर्स का उपयोग: सभी परीक्षा केंद्रों पर हाई-टेक जैमर्स लगाए जाएंगे ताकि मोबाइल नेटवर्क काम न कर सके।

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उत्तर प्रदेश में पेपर लीक का इतिहास और चुनौतियाँ

यूपी में पेपर लीक की समस्या नई नहीं है। इससे पहले यूपी पुलिस सिपाही भर्ती और आरओ/एआरओ (RO/ARO) जैसी बड़ी परीक्षाओं में भी इसी तरह की धांधली देखी गई थी। बार-बार होती इन घटनाओं ने सरकारी सिस्टम और सुरक्षा इंतजामों पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं। जानकारों का मानना है कि जब तक बिचौलियों और आयोग के भीतर छिपे ‘विभीषणों’ पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक इस समस्या का पूर्ण समाधान मुश्किल है।

क्या आपको लगता है कि पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून और ‘बुलडोजर कार्रवाई’ काफी है, या सिस्टम में किसी बड़े बदलाव की जरूरत है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।

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