Ram Mandir Court Case Latest News: अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी विवाद, सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक की पूरी खबर

Ram Mandir Court Case Latest News

अयोध्या का भव्य राम मंदिर, जो करोड़ों देशवासियों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है, इन दिनों एक बहुत बड़े विवाद के कारण सुर्खियों में है। हाल ही में राम मंदिर के दान और चढ़ावे में हेराफेरी के आरोप लगे हैं, जिसने पूरे देश और राजनीति में भूचाल ला दिया है। ‘Apni Vani’ की इस एक्सक्लूसिव और डिटेल्ड न्यूज़ रिपोर्ट में, आइए गहराई से जानते हैं कि अब तक इस मामले में क्या-क्या हुआ है, कोर्ट में कौन सी याचिकाएं दायर की गई हैं, और आज की लेटेस्ट अपडेट्स क्या हैं।

दान चोरी का पूरा मामला और एसआईटी (SIT) जांच

शुरुआत में यह आरोप लगा था कि मंदिर के दान में करीब 7 से 7.5 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। लेकिन, जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ा, दावों के मुताबिक यह रकम लगभग 200 करोड़ रुपये तक बताई जा रही है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून 2026 को एक तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। इस एसआईटी में लखनऊ के मंडलायुक्त, आईजी रैंक के अधिकारी और वित्त विभाग के विशेष सचिव शामिल हैं।

आठ लोगों की गिरफ्तारी और बैंक कर्मचारी भी शामिल

25 जून 2026 को राम जन्मभूमि पुलिस स्टेशन में चोरी और गबन को लेकर एक एफआईआर (FIR) दर्ज की गई, जिसके बाद 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया। अयोध्या की एक स्थानीय अदालत ने इन सभी आठ आरोपियों को 29 जून 2026 तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार किए गए लोगों में भारतीय स्टेट बैंक के लगभग पांच से छह कर्मचारी भी शामिल हैं। पुलिस ने इन आरोपियों के पास से 79 लाख 85 हजार रुपये से ज्यादा की नकदी भी बरामद की है।

ट्रस्ट के बड़े पदों से इस्तीफे

इस विवाद का असर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के शीर्ष नेतृत्व पर भी पड़ा है। मंदिर के दान में कथित गबन की जांच के बीच, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। यह एक बहुत बड़ा कदम है, जो बताता है कि मामला कितना गंभीर हो चुका है।

सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट में क्या चल रहा है?

यह मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालतों की चौखट तक पहुंच चुका है।

  • सुप्रीम कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट में वकीलों द्वारा एक याचिका दायर की गई है, जिसमें इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के नेतृत्व वाली एक विशेष जांच टीम (SIT) से कराने की मांग की गई है। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की बेंच ने इस मामले पर गौर करने की सहमति दे दी है और अगली सुनवाई 29 जून 2026 को तय की गई है।
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट: दूसरी तरफ, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में भी एक जनहित याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई चल रही है। इस याचिका में सीएजी से पूरे फंड का ऑडिट कराने और चढ़ावे (जिसमें सोना-चांदी भी शामिल है) की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
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राजनीतिक घमासान और कांग्रेस की मांगें

इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी चरम पर है। कांग्रेस पार्टी ने इस मामले को लेकर केंद्र और यूपी सरकार पर कड़ा हमला बोला है। कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि राम मंदिर ट्रस्ट को तुरंत भंग कर दिया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि इस विवाद के सामने आने के बाद राम मंदिर में रोजाना आने वाला दान 10-15 लाख रुपये से गिरकर महज 80 हजार रुपये रह गया है। विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में मामले की पूरी जांच की मांग रखी है।

आगे क्या होगा?

अयोध्या का यह चंदा चोरी विवाद अब केवल एक कानूनी मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं और आस्था से जुड़ा हुआ है। अब सबकी निगाहें 29 जून को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई और एसआईटी की अगली रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपती है या नहीं।

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Ayodhya Dharma Dhwaja Rising: Ram Mandir शिखर पर इतिहास का सबसे पवित्र क्षण!

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इतिहास का नया अध्याय — धर्मध्वज से सजा Ram Mandir शिखर 25 नवंबर 2025 को अयोध्या ने वह क्षण देख लिया, जिसका इंतज़ार करोड़ों सनातनियों ने दशकों से किया था। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के 191 फीट ऊँचे मुख्य शिखर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भव्य धर्म ध्वज (Dharma Dhwaja) का आरोहण हुआ—शुद्ध केसरिया रंग, सूर्य चिह्न, पवित्र ॐ, और कोविदारा वृक्ष के प्रतीकों से सजी यह ध्वजा रामायण की सूर्यवंशी परंपरा और सनातनी अस्मिता का दिव्य प्रतीक बन गई।

मुहूर्त अनुसार, विवाह पंचमी की पावन तिथि पर सुबह 11:52 से 12:35 के शुभ समय में यह ध्वजारोहण सम्पन्न हुआ—और अयोध्या का आसमान “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा।

देश–विदेश के दिग्गज संत, प्रमुख अतिथि और ऐतिहासिक भव्यता

इस कार्यक्रम ने अयोध्या को आध्यात्मिक और राष्ट्रीय गौरव का केंद्र बना दिया। ध्वजारोहण समारोह में शामिल रहे— प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, RSS प्रमुख मोहन भागवत, यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के संत–महंत, शंकराचार्य, अखाड़ा परिषद के प्रमुख, संघर्ष के साक्षी परिवार, ऋषि–महात्मा, और 7,000 विशेष अतिथि

शहर भर में 50+ LED स्क्रीन, विशाल ध्वजा शोभायात्राएँ, फूलों की वर्षा, और सप्त मंदिरों—शिव, हनुमान, सूर्य, गणेश, माता अन्नपूर्णा—में वैदिक अनुष्ठानों ने समारोह को दिव्य तेज़ से भर दिया।

संस्कृति, आस्था और एकता का नया युग—अयोध्या का संदेश वैश्विक दुनिया तक धर्मध्वजा को सिर्फ एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पुनर्जागृति और वैश्विक सनातन एकता का संदेश कहा गया है।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा—

“धर्मध्वज केवल परंपरा का पुनर्स्थापन नहीं, बल्कि भारत की चेतना, गौरव और सनातन आत्मा का उदय है।” कार्यक्रम में छप्पन भोग, महाआरती, पुष्पवर्षा, भजन-कीर्तन और सप्तमंदिर पूजा के साथ अयोध्या का हर कोना दैवीय उत्सव में डूब गया। यह आयोजन बता गया—अयोध्या अब सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक नेतृत्व, राष्ट्रीय गर्व और विश्वगुरु भारत का प्रतीक है।

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Hindu Rashtra Flag on Ram Mandir Shikhar” — Ayodhya तैयार सबसे बड़े धर्म–समारोह के लिए

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25 November को इतिहास बदलेगा — अयोध्या Ram Mandir में पहली बार फहरेगा “धर्मध्वज” अयोध्या 25 नवंबर 2025 को फिर एक ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने जा रही है—जब श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के 191 फुट ऊँचे शिखर पर “केसरिया धर्मध्वज” (हिंदू राष्ट्र ध्वज/धर्म ध्वज) पहली बार फहराया जाएगा।
इस शुभ अवसर(विवाह पंचमी)पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत स्वयं धर्मध्वज का लोकार्पण करेंगे।

ध्वज 22 फीट लंबा और 11 फीट चौड़ा होगा, जिसमें सूर्य प्रतीक, ॐ, एवं कोविदार वृक्ष अंकित हैं—जिनका उल्लेख वाल्मीकि रामायण से लेकर पुराणों तक मिलता है।ध्वज आधुनिक तकनीक वाले 360° wind-rotating pole पर लगाया जाएगा, जो तेज हवाओं में भी सुगमता से लहराता रहेगा।
देशभर के मंदिरों में इस आयोजन का Live Telecast होगा और सोशल मीडिया पर इसे “New Era of Dharma” कहा जा रहा है।

अयोध्या में भक्ति की बाढ़ —

21 से 25 नवंबर तक पाँच दिवसीय महोत्सव
धर्मध्वज आरोहण से पहले पूरा अयोध्या पाँच दिनों से दिव्य धार्मिक रंग में डूबा हुआ है—
अखंड वेद–पाठ और हवन,पुष्प-वर्षा,रामधुन, कीर्तन, शोभा यात्रा और श्रीराम जन्मभूमि के साथ छह प्रमुख मंदिरों — शिव, गणेश, सूर्य, हनुमान, माता भगवती और माता अन्नपूर्णा में विशेष अनुष्ठान।
सैकड़ों ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चार, सजावट, और पूरे नगर में दीप–मालाएं, अयोध्या को एक प्रकाश के शहर में बदल चुकी हैं।

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धर्मध्वज — सनातनी एकता, आस्था और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक

मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के अनुसार,
“यह सिर्फ ध्वज नहीं—ये सनातन अस्मिता, सांस्कृतिक जागरण और हिंदू समाज की एकजुटता का प्रतीक है।”
10,000 से अधिक अतिथि, देशभर के संत–महंत, आध्यात्मिक हस्तियाँ, विभिन्न अखाड़ों के प्रमुख, और राष्ट्रीय नेता इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे।
अयोध्या का यह आयोजन धार्मिक महत्व के साथ-साथ भारत की civilizational identity और global cultural leadership का भी संकेत माना जा रहा है।

25 November बनेगा नया ‘धार्मिक Independence Day’ ?

भारत की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक गौरव के लिए यह समारोह एक नया आध्यात्मिक पल माना जा रहा है।
राम मंदिर के शिखर पर धर्मध्वज का फहरना— नये भारत के आध्यात्मिक जागृति का नया अध्याय खोलने जा रहा है।

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