Tamil Nadu Assembly NEET resolution 2026: तमिलनाडु असेंबली में प्रस्ताव पास, जानें 12वीं के मार्क्स पर एडमिशन के 4 बड़े कारण!

तमिलनाडु से मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) को लेकर देश की सबसे बड़ी राजनीतिक और शैक्षिक हलचल सामने आई है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (C Joseph Vijay) के नेतृत्व वाली टीवीके (TVK) सरकार ने मंगलवार को राज्य विधानसभा में एक अहम प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव में केंद्र सरकार से जोरदार मांग की गई है कि वह स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रमों (UG Medical Courses) में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय स्तर की नीट परीक्षा को पूरी तरह से रद्द करे।

अपनी इस विस्तृत न्यूज़ रिपोर्ट में हम तमिलनाडु सरकार के तर्कों का गहराई से विश्लेषण करेंगे और यह जानने की कोशिश करेंगे कि क्या नीट वास्तव में सही हैया फिर 12वीं के अंकों के आधार पर दाखिला होना छात्रों के हित में है।

तमिलनाडु सरकार का तर्क: आखिर क्यों रद्द हो नीट?

तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री के.जी. अरुणराज ने विधानसभा में इस प्रस्ताव को सदन के पटल पर रखा। प्रस्ताव में साफ तौर पर कहा गया है कि नीट परीक्षा प्रणाली तमिल माध्यम में पढ़ने वाले छात्रों के साथ-साथ ग्रामीण और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के छात्रों को मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने से रोकती है और उनके अवसरों को खा रही है।

विजय सरकार का तर्क है कि 12 साल की कड़ी स्कूली शिक्षा के बाद सिर्फ एक दिन की प्रवेश परीक्षा छात्रों के उच्च शिक्षा के भविष्य का निर्णायक कारक बन गई है, जो कतई न्यायसंगत नहीं है। इस प्रस्ताव को मुख्य विपक्षी दल डीएमके (DMK), एआईएडीएमके (AIADMK), कांग्रेस और वामपंथी दलों का भी पूरा समर्थन मिला, जबकि सदन में मौजूद एकमात्र भाजपा विधायक ने इसके विरोध में वॉकआउट किया।

कोचिंग सेंटर्स की लूट और पेपर लीक का भारी तनाव

सरकार ने अपने इस प्रस्ताव में शिक्षा के बाजारीकरण को भी उजागर किया है। सरकार का कहना है कि नीट की वजह से अनियंत्रित कोचिंग सेंटरों की बाढ़ आ गई है जो छात्रों से भारी भरकम फीस वसूल रहे हैं। इससे छात्रों का ध्यान अपने स्कूल के मूल पाठ्यक्रम से पूरी तरह हटकर केवल नीट की तैयारी पर केंद्रित हो गया है। इसके अलावा, प्रस्ताव में हाल ही में हुए नीट-यूजी परीक्षा के पेपर लीक, परीक्षा के रद्द होने और दोबारा आयोजित किए जाने जैसी अनियमितताओं का भी कड़ा विरोध दर्ज किया गया है। इन घटनाओं के कारण छात्रों में भारी मानसिक तनाव पैदा हुआ है और परीक्षा प्रणाली से उनका विश्वास पूरी तरह से उठ चुका है।

12वीं के अंकों पर एडमिशन की मांग और कानूनी अड़चन

विजय सरकार ने पुरजोर मांग की है कि राज्य में मेडिकल कोर्सेज में दाखिले कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा के अंकों के आधार पर ही किए जाने चाहिए। गौरतलब है कि यह बिल्कुल वही स्टैंड है जो राज्य की पिछली डीएमके (DMK) सरकार ने भी लिया था। तमिलनाडु सरकार ने केंद्र से ‘नेशनल मेडिकल कमीशन एक्ट 2019’ (National Medical Commission Act 2019) तथा अन्य संबंधित मेडिकल कानूनों में संशोधन करने का आग्रह किया है ताकि नीट को राष्ट्रीय स्तर पर हमेशा के लिए बंद किया जा सके।

इसके साथ ही, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों को समवर्ती सूची से हटाकर पूरी तरह से राज्य सूची में लाने की मांग भी फिर से तेज़ हो गई है ताकि राज्य अपनी शिक्षा नीति खुद तय कर सकें।

नीट बनाम 12वीं के मार्क्स: क्या सही है?

अब सबसे बड़ा और विश्लेषणात्मक सवाल यह उठता है कि क्या नीट की परीक्षा सही है, या फिर 12वीं बोर्ड के अंकों के आधार पर मेडिकल एडमिशन बेहतर विकल्प है?

अगर हम नीट के पक्ष का गहराई से विश्लेषण करें, तो यह परीक्षा पूरे देश में एक समान मानक तय करती है। नीट लागू होने से पहले, कई प्राइवेट मेडिकल कॉलेज कैपिटेशन फीस (भारी डोनेशन) के नाम पर धांधली करते थे, और छात्रों को मानसिक व शारीरिक रूप से परेशान होकर 7 से 9 अलग-अलग प्रवेश परीक्षाएं देनी पड़ती थीं। नीट ने उस आर्थिक धांधली पर काफी हद तक लगाम लगाई है और भ्रष्टाचार को कम करने का प्रयास किया है।

Tamil Nadu Assembly NEET resolution
apnivani

वहीं दूसरी ओर, अगर हम 12वीं के अंकों के आधार पर एडमिशन के तर्क को देखें, तो यह भी अपनी जगह बेहद मजबूत और जमीनी हकीकत से जुड़ा है। नीट ने एक ऐसी महंगी व्यवस्था को जन्म दे दिया है जहां केवल लाखों रुपये देकर महंगी कोचिंग लेने वाले छात्र ही आसानी से सफल हो पा रहे हैं। ग्रामीण और गरीब पृष्ठभूमि के छात्र, जो केवल अपनी स्कूल की पढ़ाई पर निर्भर हैं, वे इस अंधी रेस में काफी पीछे छूट जाते हैं।

12वीं के अंकों को महत्व देने से स्कूली शिक्षा का स्तर सुधरेगा और उसका सम्मान वापस लौटेगा। हालांकि, इसमें सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती यह है कि हर राज्य के शिक्षा बोर्ड (CBSE, ICSE, State Boards) का मूल्यांकन का तरीका अलग-अलग होता है, जिससे पूरे देश के लिए एक निष्पक्ष राष्ट्रीय मेरिट सूची बनाना लगभग असंभव हो जाएगा।

Apnivani की बात

वर्तमान परिदृश्य में, दोनों ही प्रणालियों की अपनी गंभीर कमियां और खूबियां हैं। लेकिन हाल के वर्षों में नीट में जिस तरह से भ्रष्टाचार, पेपर लीक और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की नाकामी देखने को मिली है, उसने इसके पूरे सिस्टम पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जब तक कोई भी परीक्षा प्रणाली शत-प्रतिशत पारदर्शी और गरीब-अमीर सभी वर्गों के लिए समान अवसर पैदा करने वाली नहीं होती, तब तक राज्यों का इस तरह का विरोध लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के हित में बिल्कुल उचित और प्रासंगिक प्रतीत होता है।

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