आधी रात का भावुक पल: असम में सुरों की बारिश, पर जुबीन दा नहीं… 18 नवंबर 2025—असम ने पहली बार अपने प्रिय आइकन जुबीन गर्ग की जयंती उनके बिना मनाई। काहिलीपारा स्थित उनके घर के बाहर आधी रात को ही फैंस की बेतहाशा भीड़ उमड़ पड़ी—मोमबत्तियाँ, स्काई लैंटरन, पोस्टर, गमोसा, और उनके गानों की गूंज ने पूरे माहौल को भावुक कर दिया।
उनकी पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग भी नम आंखों से इस श्रृद्धांजलि में शामिल हुईं—फैंस ने “Golden Boy Lives Forever” कहते हुए केक काटा और आसमान में दर्जनों लैंटरन छोड़े। हर तरफ बस एक ही भावना—“तुम नहीं हो, लेकिन सुर अभी भी सांस लेते हैं…”
सुबह से राज्यभर में श्रद्धांजलि:
स्मृति समारोह से सामाजिक सेवा तक सवेरे होते ही असम के कई जिलों में जुबीन दा को सम्मानित करने के लिए बड़े आयोजन हुए—

सोनापुर–डिमोरिया में मूर्ति अनावरण 100 नाहोर पौधारोपण रक्तदान शिविर नाम-कीर्तन एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ AASU, प्रेस क्लब, छात्र संगठनों द्वारा आर्ट इवेंट असम के मुख्यमंत्री हेमंता बिस्वा सरमा और प्रदेश कांग्रेस नेताओं ने भी विशेष श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर जुबीन को समर्पित गीत—“अमर जुबीन, प्राणर जुबीन”—भी रिलीज़ किया गया, जिसने पूरे राज्य को भावुक कर दिया।
लोगों की भावनाएँ:
संगीत ही नहीं, समाज के भी ‘हीरो’ थे जुबीन दा दूर-दराज़ जिलों, अरुणाचल–मेघालय तक से फैंस आए। गमोसा, फूल, पोस्टर और हाथ से बनाए स्केच—हर चीज़ इस बात का सबूत थी कि जुबीन गर्ग सिर्फ सिंगर नहीं,बल्कि जनता के दिल, सहारा और आवाज़ थे। सोनापुर के “जुबीन क्षेत्रा” में प्रशंसकों ने विशाल केक, फूलों की सजावट और गायन से उन्हें अनोखा सम्मान दिया।
लोगों की एक ही पुकार थी-
- “जुबीन दा, तुम्हारी धुनें कभी नहीं मरेंगी।” 🎶❤️
- सुरों का सफर: ‘मायाबिनी’ से ‘या अली’ तक अमर यादें
- पूरे दिन उनके अनगिनत सदाबहार गीत फैंस ने गाए—
- ‘मायाबिनी’, ‘या अली’, ‘मेरी आशिकी’, ‘ओ मोर प्राणेया’, और हर लाइन के साथ एक नई याद, एक नया एहसास उमड़ता रहा।
- “अमर जुबीन फैन क्लब” और AASU ने तीन दिन का स्मृति कार्यक्रम रखा—
- साइकिल रैली, संगीत कंसर्ट, पेंटिंग प्रदर्शनी और ट्रिब्यूट शो ने उनकी विरासत को फिर से जीवंत कर दिया।
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