भारत के खूबसूरत राज्य केरल से इन दिनों एक बेहद डराने वाली स्वास्थ्य रिपोर्ट सामने आ रही है। कोझिकोड जिले के लोग इन दिनों एक अजीब से खौफ के साये में जी रहे हैं। इस खौफ का नाम है ‘शिगेलोसिस’ (Shigellosis)। यह एक ऐसा खतरनाक और संक्रामक बैक्टीरियल संक्रमण है जिसने अचानक से दस्तक देकर पूरे इलाके की स्वास्थ्य व्यवस्था की नींद उड़ा दी है। ‘Apni Vani’ की इस विस्तृत स्वास्थ्य रिपोर्ट में आइए एक कहानी की तरह समझते हैं कि कैसे एक छोटे से गांव से उठी यह बीमारी अब पूरे राज्य के लिए अलर्ट बन गई है।
पेरुवायल गांव की त्रासदी और एक मासूम की दर्दनाक मौत
इस पूरी त्रासदी और संक्रमण का मुख्य केंद्र कोझिकोड जिले का एक छोटा सा गांव ‘पेरुवायल’ (Peruvayal) बना हुआ है। मार्च 2026 के इसी महीने में इस गांव के अंदर अचानक से एक के बाद एक लोग रहस्यमयी तरीके से बीमार पड़ने लगे। पेट दर्द और दस्त की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की लाइन लग गई। देखते ही देखते स्वास्थ्य विभाग के पास शिगेलोसिस के 63 मामले सामने आ गए।
लेकिन पूरे इलाके में मातम और दहशत का असली माहौल तब छा गया, जब इस जानलेवा संक्रमण की चपेट में आकर एक 3 साल की मासूम बच्ची ने दम तोड़ दिया। इतनी कम उम्र में इस बीमारी के इतने घातक साबित होने से वहां के माता-पिता अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेहद डरे हुए हैं।
एक्शन में स्वास्थ्य विभाग और पानी की सघन जांच
बच्ची की दर्दनाक मौत और लगातार बढ़ते मरीजों की संख्या को देखते हुए केरल का स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन तुरंत अलर्ट मोड पर आ गया। पूरे कोझिकोड और खासकर पेरुवायल के आसपास मेडिकल सर्विलांस यानी निगरानी को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया गया है। डॉक्टरों और जांच अधिकारियों की टीमें दिन-रात यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर इस गांव में ऐसा कौन सा दूषित कुआं या जल स्रोत है, जहां से यह जानलेवा बैक्टीरिया लोगों के घरों तक पहुंच रहा है। अस्पतालों में जीवन रक्षक दवाओं और ओआरएस (ORS) का स्टॉक बढ़ा दिया गया है।
आखिर क्या है यह जानलेवा ‘शिगेलोसिस’ संक्रमण?
अब आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि आखिर यह ‘शिगेलोसिस’ है क्या जिसने इतनी तबाही मचा रखी है। मेडिकल विज्ञान की भाषा में समझें तो यह ‘शिगेला’ नाम के बैक्टीरिया से होने वाला आंतों का एक बेहद गंभीर संक्रमण है। यह बैक्टीरिया इतना ज्यादा खतरनाक और आसानी से फैलने वाला है कि इसकी बहुत ही मामूली सी मात्रा (सिर्फ 10 से 100 बैक्टीरिया) भी किसी अच्छे-भले स्वस्थ इंसान को बिस्तर पर गिरा सकती है। यह अदृश्य दुश्मन मुख्य रूप से गंदे और दूषित पानी या फिर बाहर के अनहाइजीनिक भोजन के जरिए इंसानों के पेट में पहुंचता है और वहां तेजी से अपनी संख्या बढ़ाने लगता है।
संक्रमण के वो खतरनाक लक्षण जिन्हें पहचानना है जरूरी
इस बीमारी के लक्षण इतने स्पष्ट और तकलीफदेह होते हैं कि इन्हें नजरअंदाज करना जान पर भारी पड़ सकता है। संक्रमण के शरीर में प्रवेश करने के एक या दो दिन बाद ही मरीज को सबसे पहले खूनी दस्त शुरू हो जाते हैं, जो इसका सबसे बड़ा और खतरनाक संकेत है। इसके साथ ही मरीज का शरीर तेज बुखार से तपने लगता है और उसे ठंड के साथ कंपकंपी महसूस होती है। पेट में भयंकर दर्द, मरोड़ और लगातार उल्टी होने से शरीर पूरी तरह टूट जाता है। खासकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों में यह सारे लक्षण इतनी तेजी से शरीर का पानी सुखा देते हैं कि भयंकर डिहाइड्रेशन पैदा हो जाता है, जो अंततः जानलेवा साबित होता है।

बचाव का सिर्फ एक ही मंत्र
इतनी खतरनाक बीमारी होने के बावजूद, थोड़ी सी सतर्कता और साफ-सफाई से इस जानलेवा बैक्टीरिया को अपने घर में घुसने से रोका जा सकता है। चूंकि यह गंदगी और दूषित पानी से फैलता है, इसलिए सबसे जरूरी है कि आप और आपका परिवार केवल अच्छी तरह उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ साफ पानी ही पिएं। शौच के बाद, बच्चों का डायपर बदलने के बाद और खाना बनाने या खाने से पहले अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोने की आदत डालें।
बाहर के खुले और सड़क किनारे बिकने वाले खाने से पूरी तरह बचें और घर का बना ताजा व गर्म भोजन ही करें। सब्जियों और फलों को भी पकाने या खाने से पहले साफ पानी से धोना बहुत जरूरी है।
Apnivani की बात
केरल के कोझिकोड का यह संकट हम सभी के लिए एक बहुत बड़ी और स्पष्ट चेतावनी है कि जलजनित बीमारियों को मौसम के बदलाव के समय कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए। अगर आपके घर में किसी को भी लगातार दस्त, पेट दर्द या तेज बुखार की शिकायत हो, तो घरेलू नुस्खों में अपना कीमती समय बर्बाद करने के बजाय तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर के पास जाएं। आपकी थोड़ी सी जागरूकता और साफ-सफाई आपके परिवार की जान बचा सकती है।
इस जरूरी हेल्थ अलर्ट को अपने परिवार और दोस्तों के व्हाट्सएप ग्रुप्स में तुरंत शेयर करें ताकि सभी इस नए संक्रमण को लेकर जागरूक हो सकें!
