Mahashivratri 2026 Shubh Muhurat: कब है शिव-शक्ति के मिलन का महापर्व? जानें शुभ मुहूर्त, दुर्लभ संयोग और संपूर्ण पूजा विधि

Mahashivratri 2026 Shubh Muhurat

महाशिवरात्रि 2026 हिंदू पंचांग के अनुसार एक ऐसा दिन है, जिसका इंतजार हर शिव भक्त को बेसब्री से रहता है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार न केवल आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक है, बल्कि इस दिन ब्रह्मांडीय ऊर्जा का स्तर भी अपने चरम पर होता है। साल 2026 में महाशिवरात्रि का पर्व कई मायनों में खास होने वाला है, क्योंकि इस दिन ग्रहों की स्थिति भक्तों के लिए विशेष फलदायी रहने वाली है।

महाशिवरात्रि 2026 की सटीक तिथि और काल गणना

पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ 15 फरवरी 2026 को शाम 05:04 बजे होगा और इसका समापन 16 फरवरी 2026 को शाम 05:34 बजे होगा। चूंकि महाशिवरात्रि की मुख्य पूजा ‘निशीथ काल’ (अर्धरात्रि) में की जाती है, इसलिए व्रत और उत्सव 15 फरवरी को ही मान्य होगा। 16 फरवरी को सूर्योदय के बाद व्रती अपने व्रत का पारण (व्रत खोलना) कर सकेंगे।

Mahashivratri 2026

चार प्रहर की पूजा का समय (निशीथ काल मुहूर्त)

महाशिवरात्रि पर रात्रि के चार प्रहरों में भगवान शिव की आराधना का विधान है। 15 फरवरी की रात के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:

  • प्रथम प्रहर पूजा: शाम 06:25 से रात 09:36 तक।
  • द्वितीय प्रहर पूजा: रात 09:36 से रात 12:47 तक।
  • तृतीय प्रहर पूजा (निशीथ काल): रात 12:47 से तड़के 03:58 तक। यह सबसे मुख्य समय माना जाता है।
  • चतुर्थ प्रहर पूजा: तड़के 03:58 से सुबह 07:09 तक।

वर्ष 2026 का विशेष ज्योतिषीय संयोग

2026 की महाशिवरात्रि पर ‘सर्वार्थ सिद्धि योग’ और ‘शिव योग’ का दुर्लभ मेल बन रहा है। ज्योतिषविदों के अनुसार, रविवार के दिन शिवरात्रि होने से ‘सूर्य-शिव’ का मिलन आत्मबल और आरोग्य में वृद्धि करने वाला होता है। इस दिन की गई साधना से कुंडली के कालसर्प दोष और पितृदोष से मुक्ति पाने के मार्ग खुलते हैं।

Mahashivratri 2026

महाशिवरात्रि व्रत और पूजन की प्रामाणिक विधि

शिवरात्रि की पूजा केवल रस्म नहीं, बल्कि समर्पण का मार्ग है। इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें।

  • अभिषेक: शिवलिंग पर गंगाजल, कच्चे दूध, दही, शहद और घी का ‘पंचामृत’ अर्पित करें।
  • सामग्री: शिव जी को बिल्व पत्र (उल्टा करके), धतूरा, शमी के पत्ते, और आक के फूल चढ़ाएं। ध्यान रहे कि बिल्व पत्र कटा-फटा न हो।
  • मंत्र शक्ति: पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का निरंतर मानसिक जाप करते रहें।
  • भस्म और चंदन: महादेव को भस्म और सफेद चंदन का तिलक लगाएं, जो वैराग्य और शांति का प्रतीक है।

सुख-समृद्धि के लिए 10 विशेष महाउपाय

महाशिवरात्रि की रात्रि को ‘सिद्धि की रात्रि’ कहा गया है। आप अपनी मनोकामना अनुसार ये उपाय कर सकते हैं:

  • धन लाभ के लिए: शिवलिंग पर गन्ने के रस से अभिषेक करें।
  • विवाह बाधा दूर करने के लिए: माता पार्वती को सिंदूर और शिव जी को सफेद चंदन अर्पित करें।
  • मानसिक शांति: चंद्रमा के दोष दूर करने के लिए कच्चे दूध में काले तिल मिलाकर चढ़ाएं।
  • संतान प्राप्ति: शिव जी को घी और शक्कर का भोग लगाकर गरीबों में बांटें।
  • रोग मुक्ति: महामृत्युंजय मंत्र का सवा लाख जाप शुरू करने के लिए यह सबसे उत्तम दिन है।

व्रत के दौरान सावधानियां और आहार

महाशिवरात्रि के व्रत में संयम और शुद्धता अनिवार्य है। इस दिन अन्न का सेवन वर्जित होता है। भक्त फलाहार के रूप में फल, दूध, कुट्टू का आटा या साबूदाने का सेवन कर सकते हैं। सूर्यास्त के बाद भारी भोजन से बचें और रात्रि जागरण को प्राथमिकता दें, क्योंकि रात्रि में शिव तत्व सक्रिय रहता है।

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भारत के नए प्रशासनिक युग का उदय: PM मोदी ने ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन’ का किया उद्घाटन; अब एक ही छत के नीचे चलेगा देश

PM मोदी

भारत की राजधानी दिल्ली के इतिहास में आज 13 फरवरी 2026 की तारीख स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नए प्रशासनिक मुख्यालयों—’सेवा तीर्थ’ (नया PMO) और ‘कर्तव्य भवन 1 व 2’ का औपचारिक उद्घाटन किया। यह कदम केवल पुरानी इमारतों से नई इमारतों में शिफ्ट होना नहीं है, बल्कि यह औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतीकों (ब्रिटिश कालीन साउथ ब्लॉक) को पीछे छोड़कर एक आत्मनिर्भर और आधुनिक भारत के शासन तंत्र की ओर बढ़ने का प्रतीक है।

ब्रिटिश विरासत से ‘सेवा तीर्थ’ तक का सफर

दशकों से भारत का प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) साउथ ब्लॉक की ऐतिहासिक इमारत से संचालित हो रहा था। हालाँकि, समय के साथ पुरानी संरचनाओं में स्पेस की कमी और आधुनिक तकनीक के साथ तालमेल बैठाना चुनौतीपूर्ण हो गया था। ‘सेवा तीर्थ’ को इसी समस्या के समाधान के रूप में विकसित किया गया है। आज दोपहर करीब 1:30 बजे नामकरण के बाद शाम 6 बजे पीएम मोदी ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया। अब देश का सर्वोच्च कार्यालय अत्याधुनिक सुरक्षा, डिजिटल इंटरफेस और ‘सर्विस-फर्स्ट’ के मंत्र के साथ काम करेगा।

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भारत के नए प्रशासनिक युग का उदय

क्या है ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन’ की खासियत?

यह पूरा परिसर सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इन इमारतों को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है:

अत्याधुनिक सुरक्षा: इसमें स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम और 24×7 सर्विलांस नेटवर्क लगाया गया है।

ग्रीन बिल्डिंग स्टैंडर्ड्स: ये इमारतें 4-Star GRIHA मानकों के अनुरूप हैं, जहाँ सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) और अपशिष्ट प्रबंधन की बेहतरीन सुविधाएं मौजूद हैं।

डिजिटल वर्कप्लेस: सभी ऑफिस डिजिटल रूप से एकीकृत (Integrated) हैं, जो फाइलों की आवाजाही को कम कर त्वरित निर्णय लेने में मदद करेंगे।

मंत्रालयों का एकीकरण: ‘कर्तव्य भवन 1 और 2’ में वित्त, रक्षा, शिक्षा, कानून और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों को जगह दी गई है, जिससे अंतर-विभागीय समन्वय में लगने वाला समय काफी बचेगा।

शासन में बढ़ेगी पारदर्शिता और गति

नए परिसरों के बनने से सरकार के किराए के खर्च में करीब ₹1500 करोड़ की सालाना बचत होने का अनुमान है। मंत्रालयों के बिखरे होने के कारण जो फाइलें एक विभाग से दूसरे विभाग तक जाने में घंटों लगाती थीं, अब वे ‘कर्तव्य पथ’ पर स्थित इन एकीकृत भवनों के कारण मिनटों में संसाधित हो सकेंगी। यह “Minimum Government, Maximum Governance” के विजन की ओर एक बड़ा कदम है।

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भारत के नए प्रशासनिक युग का उदय

साउथ और नॉर्थ ब्लॉक का क्या होगा?

एक बड़ा सवाल यह था कि इन ऐतिहासिक इमारतों का भविष्य क्या होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक को अब ‘युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय’ के रूप में बदला जाएगा। यह दुनिया के सबसे बड़े संग्रहालयों में से एक होगा, जहाँ भारत के 5,000 साल पुराने इतिहास और कलाकृतियों को सहेज कर रखा जाएगा।

विकसित भारत का नया केंद्र

प्रधानमंत्री द्वारा ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन भारत के शासन को ‘अधिपत्य’ से ‘सेवा’ की ओर ले जाने का प्रयास है। जिस स्थान पर कभी औपनिवेशिक नीतियां बनती थीं, अब वहां एक आत्मनिर्भर भारत की नीतियां जन्म लेंगी। यह नई दिल्ली के स्वरूप को पूरी तरह बदलने वाला क्षण है।

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बिहार में थमा लाखों पक्के घरों का निर्माण, नीतीश सरकार ने केंद्र से मांगे 3000 करोड़ रुपये; जानें क्या है पूरा मामला

बिहार

बिहार के ग्रामीण इलाकों में अपना पक्का घर बनाने का सपना देख रहे लाखों लाभार्थियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत लंबित 3,000 करोड़ रुपये की राशि जारी करने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। यह मांग ऐसे समय में की गई है जब राज्य में तकनीकी कारणों से करीब 9 लाख से अधिक घरों का निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है।

SNA खाते का पेच और फंड में देरी

बिहार विधानसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने स्वीकार किया कि ‘सिंगल नोडल अकाउंट’ (SNA) खोलने में हुई देरी के कारण केंद्र से फंड मिलने में समस्या आ रही है। दरअसल, केंद्र सरकार के नए नियमों के अनुसार, अब सभी योजनाओं का पैसा डिजिटल निगरानी के लिए SNA खाते के जरिए ही जारी किया जाना है। बिहार में अभी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है, जिसकी वजह से करोड़ों की राशि अटकी हुई है।

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पक्के घरों

9 लाख से ज्यादा घर अभी भी अधूरे

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए बिहार को कुल 12.19 लाख आवासों का लक्ष्य मिला था। इनमें से 12.08 लाख आवासों को स्वीकृति तो दे दी गई है, लेकिन फंड की कमी के कारण

9,16,709 आवासों का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है।

मंत्री ने बताया कि लगभग 72,492 लाभार्थियों को अभी पहली किस्त मिलना बाकी है, जबकि 3.26 लाख से अधिक लोग दूसरी किस्त का इंतजार कर रहे हैं। बिना अगली किस्त मिले, गरीब परिवारों के लिए छत डालना नामुमकिन हो गया है।

केंद्र से विशेष रियायत की मांग

राज्य सरकार ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से आग्रह किया है कि जब तक SNA खाता पूरी तरह सक्रिय नहीं हो जाता, तब तक नियमों में ढील देते हुए 31 मार्च, 2026 तक की राशि पुराने माध्यम से ही जारी कर दी जाए। इससे पहले जनवरी 2026 में केंद्र ने इसी तरह की राहत देते हुए 91 करोड़ रुपये जारी किए थे, जिससे कुछ लाभार्थियों को लाभ मिला था। अब सरकार की कोशिश है कि होली और वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले बाकी 3000 करोड़ रुपये भी मिल जाएं

लाभार्थियों पर क्या होगा असर?

अगर केंद्र सरकार यह फंड जारी कर देती है, तो बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्यों में तेजी आएगी। 31 मार्च की समयसीमा के भीतर आवास पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का दावा है कि फंड मिलते ही सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों (DBT) के जरिए किस्तों का भुगतान कर दिया जाएगा, ताकि मानसून शुरू होने से पहले लोग अपने नए घरों में प्रवेश कर सकें।

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PM Modi and Nitish Kumar

प्रमुख बिंदु (Quick Facts):

मांगी गई राशि: 3,000 करोड़ रुपये।

अधूरे आवास: 9,16,709 घर।

रुकी हुई किस्तें: पहली किस्त के लिए 72,492 और दूसरी के लिए 3.26 लाख लाभार्थी लंबित।

डेडलाइन: 31 मार्च 2026 तक फंड वितरण का लक्ष्य।

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Kanpur Lamborghini Incident: रईसजादे शिवम मिश्रा की गिरफ्तारी और 12 करोड़ी लैम्बोर्गिनी के तांडव की पूरी कहानी

Kanpur Lamborghini Incident

कानपुर। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर की सड़कों पर रविवार को जो मंजर दिखा, उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। वीआईपी रोड पर एक बेकाबू लैम्बोर्गिनी (Lamborghini Revuelto) ने जिस तरह तबाही मचाई, उसने रईसजादों की लापरवाही और आम आदमी की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रमुख तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है।

वीआईपी रोड पर मौत की रफ्तार का तांडव

8 फरवरी 2026 की दोपहर कानपुर के ग्वालटोली इलाके के लिए किसी खौफनाक सपने जैसी थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, करीब 3:15 बजे एक नीले रंग की लैम्बोर्गिनी रेवुएल्टो, जिसकी कीमत बाजार में करीब 10 से 12 करोड़ रुपये बताई जा रही है, चीरती हुई रफ्तार से आई। कार इतनी अनियंत्रित थी कि उसने सबसे पहले रिंग वाला चौराहा के पास एक ऑटो रिक्शा को जोरदार टक्कर मारी।

इसके बाद बेकाबू वाहन ने सड़क किनारे खड़ी बुलेट और कई पैदल यात्रियों को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि बुलेट सवार विशाल त्रिपाठी हवा में कई फीट ऊपर उछल कर दूर जा गिरे।

Kanpur Lamborghini Incident - Shivam Mishra Arrested

गिरफ्तारी का घटनाक्रम: जब कानून के आगे झुका रईसजादा

हादसे के बाद चार दिनों तक चले ‘चूहे-बिल्ली’ के खेल का अंत 11 फरवरी को हुआ। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के बयानों को आधार बनाकर शिवम मिश्रा पर शिकंजा कसा। इससे पहले आरोपी पक्ष की ओर से कोर्ट में सरेंडर की अर्जी डाली गई थी, जिसे अदालत ने तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया।

पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के सख्त निर्देशों के बाद पुलिस की कई टीमों ने छापेमारी की और आखिरकार शिवम को हिरासत में ले लिया गया। पुलिस ने अब एफआईआर में अज्ञात की जगह शिवम मिश्रा का नाम शामिल कर लिया है।

मिर्गी का दौरा या नशे की हालत?

इस केस में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब शिवम के परिवार और वकील ने दावा किया कि हादसे के वक्त शिवम को ‘मिर्गी का दौरा’ (Seizure) पड़ा था, जिसके कारण उनका पैर एक्सीलरेटर पर दब गया और कार बेकाबू हो गई। हालांकि, पुलिस इस थ्योरी को सिरे से खारिज कर रही है। पुलिस का तर्क है कि अगर वह बीमार थे, तो उनके साथ चल रहे बाउंसर उन्हें अस्पताल ले जाने के बजाय मौके से भगाकर क्यों ले गए?

सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि बाउंसरों ने शिवम को कार से निकाला और दूसरी गाड़ी में बैठाकर फरार हो गए। पुलिस अब आरोपी का मेडिकल टेस्ट करवा रही है ताकि नशे या किसी बीमारी के दावों की पुष्टि हो सके।

Kanpur Lamborghini Incident

घायलों की स्थिति: अस्पताल में जिंदगी की जंग

हादसे में तौसीफ अहमद (ऑटो चालक), विशाल और सोनू त्रिपाठी सहित कुल 6 लोग घायल हुए हैं। हैलट अस्पताल और निजी नर्सिंग होम में पीड़ितों का इलाज जारी है। हालांकि डॉक्टरों ने सभी को खतरे से बाहर बताया है, लेकिन विशाल त्रिपाठी की हालत अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। पीड़ितों के परिवारों का कहना है कि दौलत की हनक में उनके अपनों की जान लेने की कोशिश की गई है।

सिस्टम पर सवाल और सख्त कार्रवाई

कानपुर पुलिस पर शुरुआत में सुस्ती बरतने के आरोप लगे थे, जिसके बाद ग्वालटोली एसएचओ संतोष गौर को पद से हटा दिया गया। दिल्ली रजिस्ट्रेशन वाली इस कार की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। यह मामला केवल एक सड़क दुर्घटना का नहीं है, बल्कि यह कानून की उस व्यवस्था का इम्तिहान है जहां बड़े व्यापारिक घरानों के दबाव की चर्चा अक्सर होती रहती है।

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बिहार जमीन रजिस्ट्री धमाका: अप्रैल 2026 से 4 गुना तक बढ़ेंगे रेट्स, जानें आपके जिले का हाल

बिहार जमीन रजिस्ट्री

बिहार में अपना घर बनाने या निवेश के लिए जमीन खरीदने का सपना देख रहे लोगों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य सरकार ने करीब एक दशक के लंबे इंतजार के बाद न्यूनतम मूल्यांकन दर (MVR) में आमूलचूल बदलाव करने का निर्णय लिया है। इस ऐतिहासिक फैसले के तहत, 1 अप्रैल 2026 से बिहार के सभी 38 जिलों में जमीन की रजिस्ट्री की सरकारी दरें कई गुना तक बढ़ जाएंगी। यह बदलाव न केवल रियल एस्टेट मार्केट की सूरत बदलेगा, बल्कि आम आदमी की जेब पर भी सीधा असर डालेगा।

MVR में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?

बिहार में वर्तमान में लागू सरकारी दरें (सर्किल रेट) जमीनी हकीकत और बाजार मूल्य से कोसों दूर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आखिरी बार 2013 और शहरी इलाकों में 2016 में दरों का संशोधन हुआ था। उदाहरण के तौर पर, पूर्णिया जैसे विकसित हो रहे शहरों में जहां बाजार भाव 5000-6000 रुपये प्रति वर्ग फीट है, वहीं सरकारी दर महज 1492 रुपये के आसपास अटकी है। इस भारी अंतर के कारण राज्य सरकार को हर साल करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा था। अब सरकार बाजार और सरकारी मूल्य के बीच के इस “गैप” को खत्म करने जा रही है।

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बिहार जमीन रजिस्ट्री धमाका

जिलों में सर्वे का काम अंतिम चरण में

मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के निर्देशानुसार, सभी जिलाधिकारियों (DM) की अध्यक्षता वाली समितियों ने सर्वे का कार्य लगभग पूरा कर लिया है। पूर्णिया, मुजफ्फरपुर, पटना, बेतिया और जहानाबाद जैसे जिलों में नई दरों का प्रस्ताव तैयार है। सूत्रों की मानें तो पटना के प्राइम लोकेशंस पर सर्किल रेट में 400% तक का उछाल आ सकता है। वहीं ग्रामीण इलाकों में, जहां पिछले 12 सालों से रेट नहीं बढ़े हैं, वहां भी कम से कम 2 से 3 गुना की बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।

रजिस्ट्री की लागत पर क्या होगा असर?

जैसे ही 1 अप्रैल 2026 से नई दरें प्रभावी होंगी, स्टांप ड्यूटी और निबंधन शुल्क सीधे तौर पर बढ़ जाएंगे। वर्तमान में जो रजिस्ट्री 1 लाख रुपये में हो जाती है, उसी के लिए भविष्य में 3 से 4 लाख रुपये तक चुकाने पड़ सकते हैं। इसका सबसे बड़ा असर मध्यम वर्ग और उन युवाओं पर पड़ेगा जो होम लोन लेकर प्लॉट खरीदना चाहते हैं। सर्किल रेट बढ़ने से बैंक लोन की राशि तो बढ़ सकती है, लेकिन खरीदार की ‘डाउन पेमेंट’ क्षमता पर भारी दबाव पड़ेगा।

क्या रियल एस्टेट मार्केट में आएगा भूचाल?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस घोषणा के बाद राज्य के निबंधन कार्यालयों में अभी से भीड़ बढ़नी शुरू हो गई है। लोग अप्रैल 2026 की समय सीमा से पहले अपनी रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी करना चाहते हैं। हालांकि, दूसरी तरफ इस कदम से काले धन के निवेश पर लगाम लगने की उम्मीद है। जब सरकारी रेट बाजार मूल्य के करीब होंगे, तो जमीनों की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता आएगी और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी।

विकास कार्यों को मिलेगी नई रफ़्तार

सरकार का तर्क है कि रजिस्ट्री दरों में वृद्धि से प्राप्त अतिरिक्त राजस्व का उपयोग राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में किया जाएगा। नए पुलों का निर्माण, सड़कों का चौड़ीकरण और नगर निकायों में बेहतर नागरिक सुविधाओं के लिए धन की उपलब्धता बढ़ेगी। बिहार के विकास के लिए राजस्व संग्रह को मजबूत करना अनिवार्य है, हालांकि विपक्ष और कुछ किसान संगठनों ने इसे ‘आम जनता पर अतिरिक्त कर का बोझ’ बताया है।

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बिहार जमीन रजिस्ट्री धमाका

आम खरीदारों के लिए विशेष टिप्स

अगर आप भी बिहार में जमीन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए अगले कुछ महीने काफी महत्वपूर्ण हैं। सबसे पहले अपने क्षेत्र के वर्तमान MVR की जानकारी bhumijankari.bihar.gov.in पर जाकर लें। यदि वित्तीय संसाधन उपलब्ध हैं, तो अप्रैल 2026 से पहले रजिस्ट्री कराने में ही समझदारी है। साथ ही, किसी भी सौदे से पहले वकील के माध्यम से नए प्रस्तावित रेट्स की संभावना की जांच जरूर कर लें ताकि भविष्य के बजट में कोई गड़बड़ी न हो।

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राजस्थान दौसा NH-21 कार ट्रेलर हादसा: 6 युवाओं की दर्दनाक मौत, शादी समारोह से लौटते वक्त हुई भयंकर टक्कर

राजस्थान

दौसा सड़क हादसा 10 फरवरी 2026: राजस्थान के दौसा जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को सन्नाटे में डुबो दिया। नेशनल हाईवे-21 पर सिकंदरा थाना क्षेत्र के कैलाई गांव के पास मंगलवार रात को एक स्विफ्ट डिजायर कार और ट्रेलर की जबरदस्त टक्कर हो गई, जिसमें 6 युवा दोस्तों की मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा इतना भयावह था कि कार के परखच्चे उड़ गए और हाईवे पर लंबा जाम लग गया। तेज रफ्तार और अंधेरे में लापरवाही ने इन युवाओं का पूरा परिवार उजाड़ दिया।

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राजस्थान दौसा NH-21 कार ट्रेलर हादसा

दौसा NH-21 हादसे का पूरा विवरण: कैसे हुई अनियंत्रित कार की ट्रेलर से भिड़ंत?

घटना मंगलवार देर रात की है जब आभानेरी के रानी का बास गांव से शादी समारोह में शामिल होने के बाद 6 युवक अपनी स्विफ्ट डिजायर कार से कालाखोह गांव की ओर लौट रहे थे। सिकंदरा थाना इलाके के कैलाई गांव के पास अचानक कार अनियंत्रित हो गई। चालक की लापरवाही से कार डिवाइडर से टकराई और उछलकर दूसरी लेन में जा गिरी, जहां सामने से आ रहे एक भारी ट्रेलर से जोरदार ठोकर हुई।

टक्कर इतनी तेज थी कि कार पूरी तरह चूरन हो गई। मृतकों में लोकेश (पुत्र गोवर्धन योगी), दिलखुश (पुत्र बनवारी योगी), मनीष (पुत्र हरिमोहन योगी), अंकित (पुत्र लालाराम बैरवा), समय (पुत्र रामसिंह योगी) और नवीन (पुत्र महेश योगी) शामिल हैं, सभी कालाखोह गांव के निवासी। चारों को सिकंदरा अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया, जबकि दो गंभीर घायलों को दौसा जिला अस्पताल और फिर जयपुर रेफर किया गया, लेकिन नवीन की वहां भी मौत हो गई।

राजस्थान सड़क हादसे में मृतकों के परिवार पर शोक की चादर: दोस्ती की आखिरी सैर बनी काल

ये 6 युवक बचपन से एक-दूसरे के दोस्त थे और शादी समारोह में खूब धूम मचाई थी। खुशियों के इस सफर पर अचानक मौत का काला साया आ गया। परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। लोकेश के पिता गोवर्धन योगी ने बताया कि बेटा शादी से लौटते ही घर की जिम्मेदारी संभालने वाला था। इसी तरह, नवीन जयपुर के अस्पताल में अंतिम सांस लेते हुए मां का नाम ले रहा था। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि NH-21 पर कैलाई के पास डिवाइडर की हालत खराब है और रात में खराब लाइटिंग के कारण हादसे आम हैं। पुलिस ने ट्रेलर चालक के खिलाफ लापरवाही का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए।

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राजस्थान दौसा NH-21 कार ट्रेलर हादसा

दौसा कार ट्रेलर दुर्घटना के कारण: तेज रफ्तार, अंधेरा और सड़क की खराब स्थिति

प्रारंभिक जांच में पुलिस ने तेज रफ्तार को मुख्य कारण बताया। कार डिवाइडर क्रॉस कर ट्रेलर से टकराई, जो सिकंदरा से दौसा की ओर जा रहा था। हाईवे पर ट्रैफिक जाम के कारण घंटों तक आवागमन ठप रहा। ASI हेमराज गुर्जर ने पुष्टि की कि सभी मृतक कालाखोह के थे और शादी से लौट रहे थे। डॉ. विनोद मीणा, दौसा अस्पताल प्रभारी ने 6 मौतों की पुष्टि की। विशेषज्ञों का कहना है कि राजस्थान में NH-21 पर प्रतिवर्ष सैकड़ों हादसे होते हैं, जिनमें 70% तेज गति से होते हैं। सड़क पर खुरदरी सतह और बिना बत्ती के डिवाइडर ने हालात और बदतर किए।

राजस्थान NH-21 सड़क सुरक्षा उपाय: भविष्य के हादसों से कैसे बचें?

इस दौसा हादसे ने सड़क सुरक्षा पर फिर सवाल खड़े कर दिए। NHAI को तत्काल डिवाइडर मरम्मत, LED लाइटिंग और स्पीड कैमरे लगाने चाहिए। ड्राइवरों को रात में धीमी गति अपनानी चाहिए। सरकार ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए सहायता राशि की घोषणा की। ग्रामीणों ने हाईवे पर पटरी ब्लॉक कर विरोध जताया। यह घटना पूरे राजस्थान के लिए है। क्या NH-21 अब सुरक्षित होगा?

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वैशाली: सोनपुर में अनियंत्रित CNG ऑटो ने वार्ड सदस्य को कुचला, इलाज के दौरान मौत; इलाके में भारी तनाव

सोनपुर

बिहार के वैशाली जिले के सोनपुर से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है। यहाँ एक अनियंत्रित सीएनजी (CNG) ऑटो की टक्कर से वार्ड सदस्य प्रेम कुमार की मौत हो गई है। यह घटना उस वक्त हुई जब प्रेम कुमार अपनी बाइक से घर लौट रहे थे। इस घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है, वहीं आक्रोशित ग्रामीणों ने मुआवजे और दोषी चालक की गिरफ्तारी की मांग को लेकर घंटों सड़क जाम रखा।

सोनपुर
अनियंत्रित सीएनजी (CNG) ऑटो की टक्कर

घटना का विवरण: कैसे हुआ हादसा?

यह भीषण सड़क हादसा सोनपुर थाना क्षेत्र के दुधैला बाईपास के पास घटित हुआ। जानकारी के अनुसार, शाहपुरा दियारा पंचायत के वार्ड संख्या-11 के सदस्य प्रेम कुमार (32 वर्ष) शनिवार की शाम गौला बाजार से अपना काम निपटाकर घर लौट रहे थे। इसी दौरान नयागांव की दिशा से आ रहे एक तेज रफ्तार और अनियंत्रित CNG टेंपो ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी।

टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि प्रेम कुमार अपनी बाइक समेत सड़क किनारे गहरे गड्ढे में जा गिरे। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई, लेकिन मौका पाकर ऑटो चालक वाहन छोड़कर फरार होने में कामयाब रहा।

अस्पताल में तोड़ा दम, परिवार में मचा कोहराम

दुर्घटना के बाद स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से गंभीर रूप से घायल प्रेम कुमार को आनन-फानन में नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें पटना रेफर कर दिया। पटना के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद जब प्रेम कुमार का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुँचा, तो परिजनों के चीत्कार से पूरा माहौल गमगीन हो गया। मृतक अपने पीछे पत्नी और तीन छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं, जिनके सिर से अब पिता का साया उठ चुका है।

ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: NH-19 पर लगाया भीषण जाम

वार्ड पार्षद की मौत की खबर मिलते ही ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। सोमवार को आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने दुधैला बाईपास के पास शव को सड़क पर रखकर NH-19 को पूरी तरह जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर टायर जलाकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

ग्रामीणों की मांग थी कि पीड़ित परिवार को उचित सरकारी मुआवजा दिया जाए और फरार ऑटो चालक को अविलंब गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी जाए। सड़क जाम होने के कारण हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

सोनपुर
अनियंत्रित सीएनजी (CNG) ऑटो की टक्कर

पुलिस की कार्रवाई और वर्तमान स्थिति

घटना की सूचना मिलते ही सोनपुर थाना पुलिस दलबल के साथ मौके पर पहुँची। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को काफी देर तक समझाया और आश्वासन दिया कि प्रशासन नियमानुसार मुआवजे की प्रक्रिया पूरी करेगा। पुलिस ने दुर्घटना में शामिल CNG ऑटो को जब्त कर लिया है और वाहन नंबर के आधार पर फरार चालक की तलाश में छापेमारी कर रही है। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के आधार पर बहुत जल्द दोषी को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

मृतक प्रेम कुमार: केवल जनप्रतिनिधि ही नहीं, एक कर्मठ व्यक्ति भी थे

स्थानीय लोगों ने बताया कि प्रेम कुमार केवल एक वार्ड सदस्य ही नहीं थे, बल्कि वे समाज सेवा में हमेशा अग्रणी रहते थे। वे पटना में एक डॉक्टर के यहाँ भी काम करते थे ताकि अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें। उनकी मिलनसार छवि के कारण पूरे सोनपुर और शाहपुरा दियारा क्षेत्र में उनकी एक अलग पहचान थी।

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Valentine’s Day 2026: इस बार तोहफे नहीं, ‘यादें’ करें कैद; टाइम कैप्सूल डेट से अपने प्यार को दें नया मोड़

Valentine's Day 2026 Time Capsule

लाइफस्टाइल डेस्क: साल 2026 का वैलेंटाइन डे अब सिर्फ महंगे रेस्टोरेंट में डिनर या महंगे गिफ्ट्स तक सीमित नहीं रह गया है। इस साल कपल्स के बीच ‘टाइम कैप्सूल डेट‘ का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। यह एक ऐसा तरीका है जिससे आप अपनी आज की भावनाओं को एक डिब्बे में बंद करते हैं और भविष्य के लिए सुरक्षित कर लेते हैं। अगर आप अपनी लव स्टोरी को बोरिंग नहीं होने देना चाहते, तो यह आर्टिकल आपके लिए है।

आखिर क्या है यह टाइम कैप्सूल डेट?

सरल शब्दों में कहें तो टाइम कैप्सूल एक ‘यादों का संदूक’ है। वैलेंटाइन डे पर कपल्स मिलकर एक छोटा बॉक्स तैयार करते हैं, जिसमें वे एक-दूसरे के लिए लेटर, आज की तस्वीरें और कुछ खास चीजें रखते हैं। इस बॉक्स को सील कर दिया जाता है और वादा किया जाता है कि इसे अगले 5 या 10 साल बाद ही खोला जाएगा। यह आइडिया रिश्तों में गहराई और एक्साइटमेंट दोनों लाता है।

Valentine's Day 2026

‘पहली मुलाकात’ वाला खास बॉक्स

अपनी डेट की शुरुआत उन यादों से करें जब आप पहली बार मिले थे। इस बॉक्स में उस दिन पहनी हुई कोई एक्सेसरी, पहली बार साथ ली गई सेल्फी का प्रिंटआउट या वह पहला मैसेज लिखें जिसने आपके दिल की धड़कन बढ़ाई थी। जब आप सालों बाद इसे खोलेंगे, तो आपको वही पुरानी वाली घबराहट और प्यार दोबारा महसूस होगा।

‘सपनों की चिट्ठी’ वाला आइडिया

एक कोरे कागज पर वह सब लिखें जो आप अपने पार्टनर के साथ भविष्य में करना चाहते हैं। जैसे— “अगले वैलेंटाइन तक हमें पेरिस जाना है” या “5 साल बाद हमारे पास अपना छोटा सा आशियाना होगा।” इन चिट्ठियों को कैप्सूल में डालें। यह न केवल रोमांटिक है, बल्कि यह आपके रिश्ते को एक नया लक्ष्य भी देता है।

Valentine's Day 2026

डिजिटल यादों का तड़का

चूंकि हम 2026 में जी रहे हैं, तो टाइम कैप्सूल में एक पेनड्राइव या क्यूआर कोड (QR Code) भी डाल सकते हैं। इसमें अपनी फेवरेट वीडियो क्लिप्स, वॉयस नोट्स और उन गानों की लिस्ट रखें जो आप दोनों को पसंद हैं। इसे आज सील करें और भविष्य के लिए एक ‘सरप्राइज’ की तरह छोड़ दें।

‘प्रॉमिस कार्ड्स’ एक्टिविटी

बाजार के कार्ड्स खरीदने के बजाय खुद के 5 प्रॉमिस कार्ड्स बनाएं। इसमें ऐसी बातें लिखें जो आप हमेशा निभाएंगे। जैसे— “चाहे कितनी भी लड़ाई हो, हम बात करना बंद नहीं करेंगे।” इन कार्ड्स को कैप्सूल में रखकर ऐसी जगह छुपा दें जहाँ कोई इसे छू न सके। यह एक्टिविटी आपके भरोसे को 100% मजबूत कर देगी।

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अनिल अग्रवाल क्यों ट्रेंडिंग हैं? वेदांता चेयरमैन का 75% संपत्ति दान करने का ऐतिहासिक फैसला

अनिल अग्रवाल

अनिल अग्रवाल, वेदांता ग्रुप के संस्थापक और चेयरमैन, सोशल मीडिया और न्यूज प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से ट्रेंडिंग हैं। इसका मुख्य कारण उनका हालिया ऐलान है जिसमें उन्होंने अपनी कुल संपत्ति का 75% हिस्सा समाज कल्याण के लिए दान करने की प्रतिबद्धता जताई है। बेटे अग्निवेश अग्रवाल के निधन के बाद यह भावुक और प्रेरणादायक निर्णय देशभर में चर्चा का विषय बन गया है।

अनिल अग्रवाल का दान घोषणा: पृष्ठभूमि और कारण

वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान यह बड़ा फैसल घोषित किया।इंडिया एनर्जी वीक के साइडलाइन्स पर आयोजित ग्लोबल एनर्जी लीडर्स के साथ राउंडटेबल में भाग लेने के बाद उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट शेयर की।उन्होंने कहा, “मैं प्रमोटर की भूमिका छोड़कर ट्रस्टी बनूंगा और 75% संपत्ति समाज को लौटाऊंगा।” l यह वादा उनके इकलौते बेटे अग्निवेश की इच्छाओं को पूरा करने के लिए है, जो स्कीइंग एक्सीडेंट के बाद न्यूयॉर्क में कार्डियक अरेस्ट से 49 वर्ष की आयु में चल बसे।

अनिल अग्रवाल

अनिल अग्रवाल की नेट वर्थ फोर्ब्स के अनुसार लगभग 4.9 बिलियन डॉलर (करीब 41,000 करोड़ रुपये) है। इस हिसाब से दान की राशि हजारों करोड़ में होगी। उन्होंने विशेष रूप से शिक्षा, हेल्थकेयर और सामाजिक कल्याण पर 10,000 से 15,000 करोड़ रुपये निवेश करने का प्रस्ताव पीएम मोदी के समक्ष रखा। पीएम ने उनके नुकसान पर संवेदना जताई और देशहित में काम जारी रखने की सलाह दी, जो अग्रवाल के लिए प्रेरणा बनी।

बेटे अग्निवेश अग्रवाल का निधन: दर्दनाक कहानी

जनवरी 2026 में अनिल अग्रवाल को जीवन का सबसे काला दिन झेलना पड़ा जब उनके बेटे अग्निवेश का निधन हो गया।अमेरिका में स्कीइंग के दौरान चोट लगने के बाद माउंट सिनाई हॉस्पिटल में रिकवर कर रहे अग्निवेश को अचानक कार्डियक अरेस्ट आ गया।अनिल ने एक्स पर लिखा, “यह हमारे परिवार के लिए अभूतपूर्व दुख है। कोई शब्द इस पीड़ा का वर्णन नहीं कर सकते।अग्निवेश वेदांता की सब्सिडियरी तलवंडी साबो पावर के चेयरमैन थे और पिता के साथ सामाजिक कार्यों के सपने देखते थे।

इस व्यक्तिगत त्रासदी ने अनिल अग्रवाल को दान के वादे को और मजबूत करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि बेटे के साथ किया गया वादा निभाएंगे, जिसमें कोई बच्चा भूखा न रहे, महिलाओं को अवसर मिले और युवाओं को रोजगार सुनिश्चित हो। बिहार के पटना से निकलकर वैश्विक उद्योगपति बने अग्रवाल की यह यात्रा अब परोपकार की नई मिसाल बन रही है।

वेदांता ग्रुप पर प्रभाव और भविष्य की योजनाएं

इस घोषणा के बाद वेदांता के शेयरों में तेजी देखी गई, जो 52-सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचे।ब्रोकरेज फर्मों ने डीमर्जर प्लान और मेटल सेक्टर की मजबूती पर सकारात्मक टिप्पणी की।अनिल अग्रवाल प्रमोटर पद छोड़ने के बावजूद ट्रस्टी के रूप में कंपनी से जुड़े रहेंगे, जो उत्तराधिकार की चिंताओं को कम करता है।

दान की रूपरेखा में शिक्षा और हेल्थकेयर पर फोकस होगा, खासकर ओडिशा जैसे क्षेत्रों में जहां वेदांता सक्रिय है। यह पहल स्वावलंबी भारत के सपने को साकार करेगी। अनिल अग्रवाल की सादगीपूर्ण जिंदगी जीने की इच्छा भी सराही जा रही है।

अनिल अग्रवाल

सोशल मीडिया पर ट्रेंडिंग का असर

एक्स, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #AnilAgarwalDan जैसे हैशटैग वायरल हो रहे हैं।लोग उनके फैसले को अंबानी-टाटा जैसे उद्योगपतियों से तुलना कर रहे हैं। यह ट्रेंडिंग न केवल दान पर बल्कि बिहार कनेक्शन के कारण भी है, क्योंकि अनिल पटना से हैं l न्यूज चैनल्स और यूट्यूब पर डिबेट्स चल रही हैं।

परोपकार की नई मिसाल

अनिल अग्रवाल का यह कदम भारतीय उद्योग जगत में परोपकार की नई लहर ला सकता है।उनके फैसले से लाखों जरूरतमंदों को लाभ मिलेगा।

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Supreme Court Historic Verdict: सोनम वंगचुक की एनएसए गिरफ्तारी और सोफिया कुरैशी केस पर आज आएगा बड़ा फैसला

Supreme Court Historic Verdict

नई दिल्ली : भारत की सर्वोच्च अदालत आज दो ऐसे महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई कर रही है, जिनका सीधा संबंध देश की सुरक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रशासनिक जवाबदेही से है। मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष आज जलवायु कार्यकर्ता सोनम वंगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हुई गिरफ्तारी और कर्नल सोफिया कुरैशी मामले में मध्य प्रदेश सरकार की निष्क्रियता पर गंभीर बहस हो रही है। इन दोनों मामलों ने पूरे देश का ध्यान खींचा है क्योंकि ये सीधे तौर पर संवैधानिक अधिकारों और न्याय प्रणाली की निष्पक्षता को चुनौती देते हैं।

सोनम वंगचुक मामला: क्या राष्ट्र निर्माण करने वाला हो सकता है अपराधी?

लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वंगचुक पिछले कई महीनों से जोधपुर जेल में बंद हैं। उनकी गिरफ्तारी 26 सितंबर 2025 को लद्दाख में 6ठी अनुसूची की मांग के दौरान हुई हिंसा के बाद की गई थी। केंद्र सरकार और लद्दाख प्रशासन ने उन पर भीड़ को भड़काने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने का आरोप लगाते हुए एनएसए (NSA) लगाया है।

Sonam wangchuk

आज की सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने वंगचुक का पक्ष रखते हुए कोर्ट में दलील दी कि जिस व्यक्ति ने अपना पूरा जीवन देश के गौरव और शिक्षा में लगा दिया, उसे बिना पुख्ता सबूतों के ‘अपराधी’ करार देना लोकतंत्र की हार है। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में सरकार से उन साक्ष्यों की मांग की थी, जिनके आधार पर निवारक हिरासत (Preventive Detention) को वैध माना गया है। अनुच्छेद 22(5) के उल्लंघन का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता ने मांग की है कि वांगचुक को तत्काल रिहा किया जाए, क्योंकि हिरासत का आदेश अपूर्ण तथ्यों पर आधारित है।

सोफिया कुरैशी केस: राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक देरी पर तल्ख टिप्पणी

वहीं दूसरी ओर, कर्नल सोफिया कुरैशी मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख काफी सख्त नजर आ रहा है। यह मामला मध्य प्रदेश के एक प्रभावशाली मंत्री विजय शाह द्वारा सेना की अधिकारी पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़ा है। कोर्ट ने आज राज्य सरकार से सीधा सवाल किया कि आखिर अब तक आरोपी मंत्री पर मुकदमा चलाने की मंजूरी (Prosecution Sanction) क्यों नहीं दी गई?

कर्नल सोफिया कुरैशी, जो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सेना का प्रमुख चेहरा रही हैं, उनके सम्मान की रक्षा के लिए देशभर में #JusticeForSophia की गूंज सुनाई दे रही है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सेना की गरिमा और महिलाओं के प्रति अपमानजनक भाषा को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को दो सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का कड़ा निर्देश दिया है।

Sofia Qureshi

लद्दाख आंदोलन की पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति

सोनम वंगचुक की गिरफ्तारी के पीछे लद्दाख का वह लंबा संघर्ष है, जिसमें वहां के स्थानीय लोग केंद्र शासित प्रदेश के बजाय ‘पूर्ण राज्य’ की मांग कर रहे हैं। 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसक झड़पों के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया। हालांकि, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि वंगचुक का आंदोलन हमेशा अहिंसक रहा है और उन्हें फंसाया जा रहा है। उनके एनजीओ SECMOL के विदेशी फंड की जांच भी इसी कार्रवाई का हिस्सा है, जिसे उनके समर्थक ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ बता रहे हैं।

आज की यह सुनवाई केवल दो व्यक्तियों के बारे में नहीं है, बल्कि यह इस बात का पैमाना है कि भारत में कानून का शासन किस दिशा में जा रहा है। यदि वंगचुक को राहत मिलती है, तो यह लद्दाख आंदोलन के लिए एक नई संजीवनी होगी। वहीं सोफिया कुरैशी मामले में कोर्ट का आदेश मंत्रियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

नोट: यह समाचार रिपोर्ट वर्तमान न्यायिक घटनाक्रमों और उपलब्ध साक्ष्यों के विश्लेषण पर आधारित है। (शब्द संख्या: ~650)

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