आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा: घने कोहरे के बीच ट्रेलर से टकराई डबल डेकर बस, 12 यात्री घायल

आगरा

उत्तर प्रदेश में भीषण ठंड और घने कोहरे का कहर जारी है। इसी बीच आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है। रविवार सुबह एक तेज रफ्तार डबल डेकर बस आगे चल रहे ट्रेलर से जा टकराई। इस हादसे में करीब 12 यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। कोहरे की वजह से विजिबिलिटी कम होना इस दुर्घटना का मुख्य कारण बताया जा रहा है।

कब और कहां हुआ हादसा?

यह घटना 18 जनवरी 2026 की सुबह करीब 8:00 बजे की है। हादसे के वक्त एक्सप्रेसवे पर घना कोहरा छाया हुआ था। मिली जानकारी के अनुसार, यह डबल डेकर बस गाजीपुर से दिल्ली की ओर जा रही थी। जब बस एक्सप्रेसवे के एक हिस्से से गुजर रही थी, तभी कम दृश्यता के कारण चालक आगे चल रहे ट्रेलर का अंदाजा नहीं लगा पाया और बस सीधे उसमें पीछे से जा घुसी।

हादसे का विवरण

टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कोहरे की चादर इतनी मोटी थी कि कुछ मीटर की दूरी पर भी वाहन दिखाई नहीं दे रहे थे।

घायलों की संख्या: हादसे में 12 यात्री घायल हुए हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।

राहत कार्य: सूचना मिलते ही यूपीडा (UPEIDA) की पेट्रोलिंग टीम, एंबुलेंस और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। बस में फंसे यात्रियों को शीशे तोड़कर और कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया।

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे

बचाव और उपचार

सभी घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल और मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार, घायल यात्रियों में से कुछ को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि कुछ का इलाज अभी जारी है। गनीमत यह रही कि इस भीषण टक्कर के बावजूद किसी की जान जाने की खबर नहीं है। हादसे के बाद एक्सप्रेसवे पर कुछ समय के लिए यातायात बाधित रहा, जिसे क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर बहाल किया गया।

कोहरे में सावधानी जरूरी

सर्दियों के मौसम में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे पर कोहरे के कारण हादसों की संख्या बढ़ जाती है। पुलिस और प्रशासन ने यात्रियों के लिए कुछ दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

गति सीमा का पालन: कोहरे के दौरान वाहनों की रफ्तार 40-50 किमी/घंटा से अधिक न रखें।

फॉग लाइट का उपयोग: वाहन की हेडलाइट लो-बीम पर रखें और फॉग लाइट का इस्तेमाल करें।

दूरी बनाए रखें: आगे चल रहे वाहन से सुरक्षित दूरी बनाकर चलें।

इंडिकेटर और पार्किंग लाइट: जरूरत पड़ने पर ही रुकें और पार्किंग लाइट जलाकर रखें।

यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि खराब मौसम में थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और बस चालक के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज करने की प्रक्रिया की जा रही है।

Read more

Alert: कहीं आपके घर में रखी खांसी की दवा ‘जहर’ तो नहीं? Hajipur की कंपनी सील! जानें उस 1 जानलेवा सिरप का नाम

Cough syrup with ethylene glycol

मौसम बदल रहा है, बच्चों को खांसी-जुकाम होना आम बात है। ऐसे में हम बिना सोचे-समझे मेडिकल स्टोर से ‘कफ सिरप’ (Cough Syrup) खरीद लाते हैं। हमें लगता है कि इससे बच्चे को आराम मिलेगा। लेकिन ज़रा रुकिए! क्या आपको पता है कि जिस शीशी को आप ‘अमृत’ समझकर बच्चे के मुंह से लगा रहे हैं, उसमें एथिलीन ग्लाइकॉल (Ethylene Glycol) जैसा जानलेवा जहर हो सकता है?

जी हाँ, यह डराने वाली बात नहीं, बल्कि बिहार के हाजीपुर (Hajipur) से आई एक खौफनाक हकीकत है। ड्रग विभाग ने वहां की एक बड़ी दवा कंपनी पर ताला जड़ दिया है। वजह जानकर आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी।

खांसी की दवा

हाजीपुर की दवा कंपनी में क्या मिला? (The Horror Story)

बिहार का हाजीपुर शहर, जो फार्मा हब माना जाता है, अब शक के घेरे में है। खबरों के मुताबिक, हाजीपुर स्थित एक दवा निर्माण इकाई (Pharmaceutical Unit) में छापेमारी के दौरान कफ सिरप के सैंपल फेल हो गए हैं। जांच में पाया गया कि बच्चों की खांसी के सिरप में ‘एथिलीन ग्लाइकॉल’ और ‘डायथिलीन ग्लाइकॉल’ की मात्रा मिली है। यह वही रसायन है जिसकी वजह से पिछले साल गाम्बिया और उज्बेकिस्तान में दर्जनों बच्चों की किडनी फेल होने से मौत हो गई थी।

कार्रवाई:

प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए उस कंपनी के विनिर्माण (Manufacturing) पर रोक लगा दी है और बाज़ार से उस बैच की सारी दवाइयां वापस मंगवाने का आदेश दिया है।

आखिर कौन सी है वो दवा? (Check Your Medicine Box Now)

यह सबसे जरूरी हिस्सा है। अगर आपके घर में कोई भी कफ सिरप रखा है, तो तुरंत उठिए और उसकी बोतल का लेबल (Label) चेक कीजिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस सिरप में यह जहर मिला है, वह मुख्य रूप से ‘Cough & Cold Syrup’ (जेनेरिक नाम) के नाम से बेची जा रही थी, जो हाजीपुर की फैक्ट्री में बनी थी।

आपको क्या चेक करना है?

Manufacturer Name (निर्माता): अगर बोतल के पीछे “Manufactured in Hajipur, Bihar” लिखा है और कंपनी का नाम संदिग्ध है, तो उसे तुरंत हटा दें।

Batch Number: हाल ही में बने बैच (2025-26) के सिरप जांच के दायरे में हैं।

Contents: अगर सिरप में साल्वेंट की जगह सस्ता केमिकल इस्तेमाल हुआ है, तो यह नंगी आंखों से पता नहीं चलेगा, इसलिए रिस्क न लें।

(नोट: सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने अभी ब्रांड का नाम सार्वजनिक करने से पहले बैच नंबर पर जोर दिया है, लेकिन हाजीपुर की फैक्ट्रियों से बनीं जेनेरिक दवाइयों पर अभी सख्त नजर है।)

एथिलीन ग्लाइकॉल: यह ‘जहर’ आखिर करता क्या है?

शायद आप सोच रहे होंगे कि यह केमिकल इतना खतरनाक क्यों है? दरअसल, Ethylene Glycol का इस्तेमाल कारों के इंजन को ठंडा रखने (Coolant) और ब्रेक ऑयल में होता है। यह स्वाद में मीठा होता है, लेकिन शरीर में जाते ही तबाही मचा देता है।

दवा कंपनियां इसे क्यों मिलाती हैं?

सिर्फ और सिर्फ ‘पैसा’ बचाने के लिए। कफ सिरप में ‘ग्लिसरीन’ या ‘प्रोपलीन ग्लाइकॉल’ का इस्तेमाल होना चाहिए, जो महंगा होता है। कुछ लालची कंपनियां इसकी जगह सस्ता इंडस्ट्रियल ग्रेड एथिलीन ग्लाइकॉल मिला देती हैं।

अगर यह दवा पी ली तो क्या होगा? (Symptoms to Watch)

अगर गलती से किसी बच्चे ने दूषित सिरप पी लिया है, तो उसमें ये लक्षण 24 से 48 घंटे के भीतर दिख सकते हैं:

  • पेट में तेज दर्द और उल्टी होना।
  • पेशाब का रुक जाना (यह Kidney Failure का सबसे पहला संकेत है)।
  • बच्चे का सुस्त हो जाना या बेहोश होना।
  • दिमागी संतुलन बिगड़ना।

अगर ऐसा कोई भी लक्षण दिखे, तो घर पर इलाज न करें, तुरंत बच्चे को बड़े अस्पताल लेकर भागें।

माता-पिता अब क्या करें? (3 Safety Rules)

हाजीपुर की घटना ने यह साबित कर दिया है कि हम आंख मूंदकर किसी भी दवा पर भरोसा नहीं कर सकते। अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए आज ही ये 3 गांठ बांध लें:

  • लोकल ब्रांड्स से बचें: कोशिश करें कि डॉक्टर की लिखी हुई बड़ी और नामी कंपनियों (Standard Brands) की दवा ही खरीदें। सस्ती जेनेरिक दवाइयां, जिनका नाम आपने कभी नहीं सुना, उनसे बचें।
  • “Made in…” चेक करें: दवा खरीदने से पहले देखें कि वह कहां बनी है। अगर किसी ब्लैकलिस्टेड जगह या कंपनी का नाम दिखे, तो उसे न लें।
  • सिरप की जगह टैबलेट? अगर बच्चा थोड़ा बड़ा है, तो डॉक्टर की सलाह पर सिरप की जगह टैबलेट देना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि लिक्विड दवाओं में ही मिलावट (Adulteration) का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
  • खांसी की दवा

लालच और लापरवाही की कीमत

हाजीपुर की कंपनी पर प्रतिबंध लगना एक अच्छी खबर है, लेकिन यह डरावना है कि ऐसी दवाइयां मार्केट में पहुंची कैसे? क्या इंसानी जान की कीमत कुछ रुपयों के मुनाफे से कम है? जब तक सिस्टम सुधरेगा, तब तक आपकी सुरक्षा आपके हाथ में है। अभी जाएं और अपनी दवाइयों की जांच करें। अगर आपको कोई संदिग्ध सिरप मिले, तो उसे डस्टबिन में फेंक दें।

इस खबर को अपने दोस्तों और परिवार के WhatsApp ग्रुप में तुरंत शेयर करें। आपकी एक शेयर किसी बच्चे की जान बचा सकती है।

Read more

बिहार के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 1,445 जूनियर रेजिडेंट्स की नियुक्ति, आवेदन प्रक्रिया की पूरी जानकारी

बिहार

बिहार सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को और बेहतर बनाने और सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (BCECEB) द्वारा कुल 1,445 जूनियर रेजिडेंट (Junior Resident) के पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह भर्ती विशेष रूप से उन युवा डॉक्टरों के लिए एक बड़ा अवसर है जो एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं और सरकारी क्षेत्र में अपना योगदान देना चाहते हैं। इन नियुक्तियों से राज्य के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं में व्यापक सुधार होने की उम्मीद है।

सरकारी मेडिकल कॉलेजों

महत्वपूर्ण तिथियां और आवेदन की समय सीमा

इस भर्ती प्रक्रिया के लिए समय सारणी बहुत ही स्पष्ट रखी गई है ताकि उम्मीदवार समय पर अपनी तैयारी पूरी कर सकें। आधिकारिक नोटिफिकेशन जनवरी 2026 के मध्य में जारी किया गया था, जिसके तुरंत बाद 16 जनवरी 2026 से ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इच्छुक उम्मीदवारों के पास फॉर्म भरने के लिए 6 फरवरी 2026 की रात 11:59 बजे तक का समय है। इसके अलावा, यदि आवेदन भरते समय कोई त्रुटि हो जाती है, तो बोर्ड ने 7 और 8 फरवरी को सुधार (Correction) के लिए पोर्टल खोलने का निर्णय लिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि 11 फरवरी 2026 तक मेधा सूची (Merit List) भी प्रकाशित कर दी जाएगी।

पदों का विवरण, योग्यता और चयन का आधार

स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत कुल 1,445 पदों पर यह बहाली एक वर्ष के संविदा (Contract) आधार पर की जा रही है। इस पद के लिए अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से एमबीबीएस (MBBS) की डिग्री है, जो नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) या एमसीआई द्वारा प्रमाणित होनी चाहिए। चयन की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और मेधा आधारित रखी गई है। इसमें किसी भी प्रकार की लिखित परीक्षा नहीं होगी; बल्कि उम्मीदवारों के शैक्षणिक रिकॉर्ड और प्राप्त अंकों के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी, जिसके बाद सफल अभ्यर्थियों का दस्तावेज़ सत्यापन (Document Verification) किया जाएगा।

वेतनमान और आवेदन करने की विधि

चयनित जूनियर रेजिडेंट्स को सरकार की ओर से ₹65,000 प्रति माह का आकर्षक वेतन दिया जाएगा। आवेदन करने के इच्छुक डॉक्टर BCECE बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट bceceboard.bihar.gov.in पर जाकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया के दौरान सामान्य और अन्य श्रेणियों के लिए लगभग ₹2250 का आवेदन शुल्क निर्धारित किया गया है। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है, जहाँ उम्मीदवारों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी के साथ-साथ आवश्यक शैक्षणिक प्रमाणपत्र भी अपलोड करने होंगे।

सरकारी मेडिकल कॉलेजों

बिहार के स्वास्थ्य ढांचे के लिए इस भर्ती का महत्व

यह भर्ती न केवल डॉक्टरों के लिए रोजगार का अवसर है, बल्कि बिहार की स्वास्थ्य प्रणाली के लिए भी संजीवनी के समान है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में जूनियर रेजिडेंट्स की तैनाती से अस्पतालों पर बढ़ते मरीजों के बोझ को कम किया जा सकेगा। इसके साथ ही, नवनियुक्त डॉक्टरों को राज्य के प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने का क्लीनिकल अनुभव प्राप्त होगा, जो उनके भविष्य के करियर के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध होगा। यह कदम मुख्यमंत्री के ‘सात निश्चय’ और स्वास्थ्य सुधार के संकल्पों को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

Read more

डॉक्टर बनने आई बेटी की ‘साजिश वाली मौत’: शरीर पर संघर्ष के निशान और सिस्टम की चुप्पी; क्या मिल पाएगा इंसाफ?

मौत

पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट (NEET) की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया है। जैसे-जैसे इस मामले की जांच आगे बढ़ रही है, रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस की कार्यप्रणाली और हॉस्टल के भीतर चल रहे संदिग्ध खेल ने प्रशासन पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ इस पूरे मामले का विस्तृत विवरण दिया गया है:

दरिंदगी की पुष्टि: क्या कहती है पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट?

शुरुआत में पुलिस जिस मामले को सामान्य मौत या आत्महत्या की दिशा में ले जा रही थी, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने उन दावों की धज्जियाँ उड़ा दीं। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में छात्रा के साथ रेप की पुष्टि हुई है।

साजिश वाली मौत

चोट के निशान: छात्रा के शरीर पर कई जगह गहरे जख्म मिले हैं। गर्दन, कंधे, छाती और पीठ पर रगड़ के निशान (ब्रूजेस) पाए गए हैं, जो इस बात का प्रमाण हैं कि छात्रा ने अपनी जान बचाने के लिए कड़ा संघर्ष किया था।

गंभीर चोटें: रिपोर्ट में सिर पर चोट (Head Injury) और शरीर के अंगों से भारी ब्लीडिंग की बात भी सामने आई है।

नशीले पदार्थ का शक: शरीर में ड्रग्स या नशीली गोलियों के अवशेष मिलने की भी आशंका जताई गई है, जिसके लिए विसरा सुरक्षित रखकर एम्स (AIIMS) भेजा गया है।

2. हॉस्टल संचालिका और डॉक्टर पर संगीन आरोप

छात्रा के परिजनों ने हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल, उनके पति श्रवण अग्रवाल और बिल्डिंग मालिक मनीष रंजन पर सोची-समझी साजिश के तहत हत्या और रेप का आरोप लगाया है।

रैकेट चलाने का दावा: परिजनों का आरोप है कि हॉस्टल के नाम पर वहाँ एक रैकेट चलाया जा रहा था। शाम ढलते ही हॉस्टल के बाहर लग्जरी गाड़ियों का जमावड़ा लग जाता था।

सबूत मिटाने की कोशिश: आरोप है कि डॉक्टर सतीश की मिलीभगत से छात्रा को गलत इंजेक्शन दिए गए ताकि शरीर पर मौजूद चोटों के निशानों को मिटाया जा सके।

पैसे का प्रलोभन: मृतका के पिता ने दावा किया कि संचालिका नीलम अग्रवाल ने उन्हें चुप रहने के लिए लाखों रुपये का ऑफर दिया और यहाँ तक कहा कि “जितना पैसा चाहिए ले लो, पर मामला आगे मत बढ़ाओ।”

3. पुलिस की भूमिका और रसूखदारों का दबाव

इस मामले में पुलिस की शुरुआती ढिलाई ने लोगों के गुस्से को भड़का दिया है।

लापरवाही के आरोप: स्थानीय थानेदार पर आरोप है कि उन्होंने रसूखदारों के दबाव में आकर शुरू में केस को हल्का करने की कोशिश की। हॉस्टल में सीसीटीवी (CCTV) कैमरों का न होना और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होना भी बड़ी लापरवाही मानी जा रही है।

SIT का गठन: बढ़ते जनाक्रोश और मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी (IG) जितेंद्र राणा के निर्देश पर एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है। टीम ने हॉस्टल को सील कर दिया है और वहाँ रह रही अन्य लड़कियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

4. वर्तमान स्थिति और इंसाफ की गुहार

फिलहाल, मुख्य आरोपी मनीष रंजन फरार बताया जा रहा है, जिसकी तलाश में छापेमारी जारी है। छात्रा के पिता का कहना है कि उनकी बेटी डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहती थी, लेकिन सिस्टम और अपराधियों की मिलीभगत ने उसकी जान ले ली।

साजिश वाली मौत

यह मामला अब राजनीतिक तूल भी पकड़ चुका है और पटना की सड़कों पर छात्रा को इंसाफ दिलाने के लिए लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। परिजनों की मांग है कि दोषियों को जल्द से जल्द फांसी की सजा दी जाए और लापरवाह पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।

यह रिपोर्ट उपलब्ध समाचार स्रोतों और परिजनों के बयानों के आधार पर संकलित की गई है।

Read more

UP फ्री टैबलेट योजना 2026: नए साल में छात्रों की चमकेगी किस्मत, जानें कैसे मिलेगी मुफ्त टैबलेट और लिस्ट में अपना नाम

UP

UP Free Tablet Yojana 2026: उत्तर प्रदेश के होनहार छात्रों के लिए नया साल 2026 खुशियों की सौगात लेकर आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की महत्वाकांक्षी ‘स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना’ के तहत अब राज्य के लाखों छात्रों को मुफ्त टैबलेट बांटे जा रहे हैं।

अगर आप भी यूपी के सरकारी या प्राइवेट कॉलेज के छात्र हैं और डिजिटल पढ़ाई के लिए एक अच्छे टैबलेट का इंतज़ार कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए ही है। आइए जानते हैं इस योजना की पूरी एबीसीडी—पात्रता से लेकर आवेदन प्रक्रिया तक।

क्या है यूपी फ्री टैबलेट योजना 2026?

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए इस योजना की शुरुआत की थी। साल 2026 में इस वितरण अभियान को और भी तेज़ कर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य करीब 1 से 2 करोड़ छात्रों तक डिजिटल पहुंच बनाना है। इसके लिए लगभग 3000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है।

UP फ्री टैबलेट योजना 2026

खास बात यह है कि इन टैबलेट्स में पहले से ही ई-लर्निंग ऐप्स, सरकारी योजनाओं की जानकारी और जॉब पोर्टल के लिंक्स मौजूद होंगे, ताकि छात्रों को पढ़ाई और करियर बनाने में कोई दिक्कत न आए।

किसे मिलेगा लाभ? (Eligibility Criteria)

इस योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार ने कुछ जरूरी शर्तें रखी हैं:

मूल निवास: छात्र का उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है।

शैक्षणिक योग्यता: छात्र 10वीं या 12वीं पास होना चाहिए और वर्तमान में ग्रेजुएशन (BA, BSc, BCom), पोस्ट ग्रेजुएशन, आईटीआई (ITI), डिप्लोमा, या किसी भी टेक्निकल/स्किल कोर्स में नामांकित होना चाहिए।

आय सीमा: परिवार की कुल सालाना आय 2 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।

अन्य: अगर कोई बाहरी राज्य का छात्र यूपी के किसी संस्थान में पढ़ाई कर रहा है, तो वह भी पात्र है। लेकिन यूपी का छात्र यदि दूसरे राज्य में पढ़ रहा है, तो उसे इसका लाभ नहीं मिलेगा।

जरूरी दस्तावेज (Documents Required)

आवेदन करने से पहले इन कागजातों को तैयार रखें:

• आधार कार्ड

• निवास प्रमाण पत्र (Domicile)

• आय प्रमाण पत्र (Income Certificate)

• पिछली कक्षा की मार्कशीट और वर्तमान कॉलेज का आईडी कार्ड/प्रवेश पत्र

• पासपोर्ट साइज फोटो

• कॉलेज एनरोलमेंट नंबर

आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step Process)

यूपी फ्री टैबलेट योजना के लिए आवेदन की प्रक्रिया काफी सरल है:

आधिकारिक वेबसाइट: सबसे पहले digishakti.up.gov.in या [संदिग्ध लिंक हटा दिया गया] पर जाएं।

रजिस्ट्रेशन: ‘मेरी पहचान’ पोर्टल के जरिए eKYC पूरा करें और रजिस्ट्रेशन करें।

डिटेल्स भरें: अपना नाम, मोबाइल नंबर, आधार और एनरोलमेंट नंबर जैसी जानकारी सही-सही भरें।

दस्तावेज अपलोड: मांगी गई मार्कशीट और अन्य फोटो अपलोड करें।

सबमिट: फॉर्म जमा करने के बाद कॉलेज से अपनी डिटेल्स वेरीफाई जरूर करवाएं।

लेटेस्ट अपडेट: जनवरी 2026 में क्या चल रहा है?

ताजा जानकारी के मुताबिक, जनवरी 2026 से जिलों में बैचवाइज लिस्ट जारी होना शुरू हो गई है। लखनऊ की बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी (BBAU) जैसे बड़े संस्थानों में वितरण की प्रक्रिया पहले ही गति पकड़ चुकी है। अब 2026 सत्र के नए छात्रों के लिए कॉलेज स्तर पर डेटा फीडिंग की जा रही है।

UP फ्री टैबलेट योजना 2026

प्रो टिप: छात्र अपने कॉलेज के नोडल अधिकारी या क्लर्क से संपर्क में रहें, क्योंकि टैबलेट का वितरण पोर्टल के साथ-साथ कॉलेज कैंपसों में ही फिजिकल रूप से किया जाएगा।

Disclaimer: यह जानकारी उपलब्ध सरकारी पोर्टल्स और हालिया वीडियो अपडेट्स पर आधारित है। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट digishakti.up.gov.in पर विजिट करें।

Read more

उत्तर प्रदेश में कृषि मशीनीकरण को पंख: SMAM योजना के तहत कृषि यंत्रों और ड्रोनों पर भारी सब्सिडी, आवेदन की तिथि बढ़ी

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ने और उनकी आय दोगुनी करने के लक्ष्य के साथ ‘सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन’ (SMAM) योजना के तहत एक बड़ा अवसर प्रदान किया है। इस योजना के माध्यम से किसान कृषि यंत्रों, हाई-टेक ड्रोनों और फसल अवशेष प्रबंधन (इन-सिटू मैनेजमेंट) उपकरणों पर 50% तक की भारी सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं। हाल ही में तकनीकी कारणों और किसानों की भारी मांग को देखते हुए आवेदन की अंतिम तिथि को भी आगे बढ़ाया गया है।

उत्तर प्रदेश

योजना का मुख्य आकर्षण: सब्सिडी का गणित

इस योजना के तहत किसानों को विभिन्न श्रेणियों में आर्थिक सहायता दी जा रही है:

व्यक्तिगत कृषि यंत्र: रोटावेटर, कल्टीवेटर, सीड ड्रिल और पावर टिलर जैसे उपकरणों पर लागत का 40% से 50% तक अनुदान दिया जा रहा है।

फसल अवशेष प्रबंधन: पराली जलाने की समस्या को समाप्त करने के लिए सरकार सुपर एसएमएस, हैप्पी सीडर, मल्चर और रीपर जैसे यंत्रों पर विशेष जोर दे रही है।

कृषि ड्रोन: कीटनाशकों के सटीक छिड़काव और खेतों की निगरानी के लिए ड्रोनों की खरीद पर भी भारी छूट उपलब्ध है।

कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC): जो किसान या समूह खुद का ‘फार्म मशीनरी बैंक’ खोलना चाहते हैं, उन्हें केंद्र स्थापना के लिए 40% से 80% तक की सब्सिडी का प्रावधान है।

महत्वपूर्ण तिथियां और टोकन प्रक्रिया

आवेदन की प्रक्रिया 8 जनवरी 2026 से शुरू हुई थी। किसानों की सुविधा के लिए अब पोर्टल को अतिरिक्त समय के लिए खोला गया है, जिससे जो किसान छूट गए थे, वे अपना आवेदन पूरा कर सकें।

टोकन मनी: 1 लाख रुपये से अधिक की सब्सिडी वाले बड़े यंत्रों के लिए किसानों को 5,000 रुपये की टोकन राशि ऑनलाइन जमा करनी होगी। छोटे यंत्रों के लिए यह राशि कम रखी गई है। चयन न होने की स्थिति में यह राशि वापस कर दी जाती है।

आवेदन कैसे करें? (स्टेप-बाय-स्टेप)

इच्छुक किसान उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के आधिकारिक पोर्टल https://agridarshan.up.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं:

पंजीकरण: पोर्टल पर किसान का पंजीकरण (Registration) अनिवार्य है।

यंत्र चयन: अपनी जरूरत के अनुसार यंत्र का चुनाव करें।

बुकिंग: ‘यंत्र पर अनुदान हेतु टोकन निकालें’ लिंक पर क्लिक करके बुकिंग करें।

• पारदर्शिता: लाभार्थियों का चयन पूरी तरह से ‘ई-लॉटरी’ के माध्यम से किया जाएगा, जिससे पक्षपात की कोई गुंजाइश न रहे।

उत्तर प्रदेश

किसानों के लिए लाभ

इस योजना का सबसे अधिक लाभ लघु और सीमांत किसानों को मिलेगा। मशीनीकरण से न केवल श्रम की लागत कम होगी, बल्कि खेती के कार्यों में लगने वाले समय की भी बचत होगी। विशेष रूप से मक्का सुखाने के लिए बैच ड्रायर और खाद प्रबंधन के यंत्रों को भी इस बार शामिल किया गया है, जो यूपी के कृषि परिदृश्य को

बदलने में सहायक होंगे।

विभाग की सलाह: कृषि विभाग ने किसानों को

सलाह दी है कि वे अंतिम समय की तकनीकी भीड़ से बचने के लिए जल्द से जल्द पोर्टल पर अपना टोकन जेनरेट कर लें और निर्धारित समय के भीतर अपने बिल अपलोड करें।

Read more

Mauni Amavasya 2026: आज ‘मौन’ रहकर मांगें 1 वरदान! प्रयागराज में उमड़ा आस्था का सैलाब, जानें 5 बड़े नियम जब ‘खामोशी’ सबसे बड़ी पूजा बन जाए

Mauni Amavasya

आज (18 जनवरी) की सुबह सूरज की किरणों के साथ एक अलग ही ऊर्जा लेकर आई है। कड़ाके की ठंड है, कोहरा छाया हुआ है, लेकिन उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (Prayagraj) में लाखों श्रद्धालु गंगा के ठंडे पानी में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। आज ‘मौनी अमावस्या’ (Mauni Amavasya) है। हिंदू धर्म में साल की सभी अमावस्याओं में इसे “महारानी” कहा जाता है। आज का दिन सिर्फ नहाने-धोने का नहीं, बल्कि अपनी जुबान और मन को शांत रखने (Silence) का दिन है।

माघ मेले का यह सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण स्नान पर्व है। आखिर क्यों आज के दिन करोड़ों लोग गंगा किनारे खींचे चले आते हैं? क्या है ‘मौन’ रहने का वैज्ञानिक और धार्मिक राज? आइए जानते हैं।

Mauni Amavasya

मौनी अमावस्या: आखिर आज ‘चुप’ क्यों रहना है?

‘मौनी’ शब्द की उत्पत्ति ‘मुनि’ (ऋषि) शब्द से हुई है। शास्त्रों के अनुसार, आज के दिन ही सृष्टि के पहले पुरुष ‘मनु ऋषि’ का जन्म हुआ था।

इसलिए आज के दिन ‘मौन व्रत’ (Maun Vrat) रखने की परंपरा है।

लेकिन रुकिए, मौन का मतलब सिर्फ ‘मुंह बंद रखना’ नहीं है।

* असली मतलब: इसका अर्थ है अपने मन के शोर को बंद करना। आज के दिन कड़वे शब्द न बोलना, झूठ न बोलना और मानसिक शांति बनाए रखना ही असली पूजा है।

* माना जाता है कि जो व्यक्ति आज पूरे विधि-विधान से मौन रखकर स्नान और दान करता है, उसे हजारों गायों के दान जितना पुण्य मिलता है।

प्रयागराज में आस्था का महाकुंभ (Magh Mela Connection)

अगर आप आज प्रयागराज के त्रिवेणी संगम (गंगा, यमुना और सरस्वती का मिलन) का नज़ारा देखेंगे, तो आपको अपनी आंखों पर यकीन नहीं होगा।

माघ मेला जो जनवरी की शुरुआत से चल रहा है, आज अपने चरम (Peak) पर है।

* अमृत योग: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, आज के दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों मकर राशि (Capricorn) में होते हैं। जब ये ग्रह एक साथ आते हैं, तो माना जाता है कि गंगा का जल ‘अमृत’ बन जाता है।

* कल्पवास का फल: जो कल्पवासी (टेंट में रहकर तपस्या करने वाले लोग) पिछले कई दिनों से संगम किनारे रह रहे हैं, उनके लिए आज का स्नान सबसे बड़ा पर्व है। ऐसा लगता है जैसे धरती पर स्वर्ग उतर आया हो।

आज क्या करें? (5 सुनहरे नियम)

अगर आप प्रयागराज नहीं जा पाए हैं, तो निराश न हों। आप घर बैठे भी इस दिन का पूरा फल पा सकते हैं। बस ये 5 काम जरूर करें:

* गंगाजल से स्नान: अपने नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाएं और मन में ‘हर हर गंगे’ का जाप करें।

* तिल का दान: माघ महीने में ‘तिल’ (Sesame) का बहुत महत्व है। आज तिल, तिल के लड्डू या तिल का तेल दान करना शुभ माना जाता है।

* मौन व्रत: कोशिश करें कि आज कम से कम 2-3 घंटे (या पूरा दिन) मौन रहें। मोबाइल और सोशल मीडिया के शोर से दूर रहें।

* दीपदान: शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे या तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं।

* पितृ तर्पण: अमावस्या पितरों (Ancestors) का दिन होती है। आज उनके नाम से भोजन या वस्त्र किसी गरीब को दें, इससे पितृ दोष दूर होता है।

मौन रहने का ‘साइंटिफिक’ फायदा

धर्म अपनी जगह है, लेकिन आज के दौर में मौनी अमावस्या का महत्व और बढ़ गया है।

हम दिन भर बोलते हैं, बहस करते हैं, फोन पर लगे रहते हैं। इससे हमारी मानसिक ऊर्जा (Mental Energy) खत्म होती है।

मनोवैज्ञानिक भी मानते हैं कि कुछ समय ‘चुप’ रहने से:

* दिमाग रीबूट (Reboot) होता है।

* तनाव (Stress) कम होता है।

* सोचने की शक्ति बढ़ती है।

तो आज का दिन एक तरह से आपके दिमाग का ‘Digital Detox’ है।

ग्रहों का दुर्लभ संयोग

पंचांग के अनुसार, आज कई शुभ योग बन रहे हैं। ‘सर्वार्थ सिद्धि योग’ के कारण आज किया गया कोई भी नया काम या निवेश लंबे समय तक फायदा देगा। शनि देव अपनी ही राशि में हैं और सूर्य देव भी उनके साथ आ रहे हैं, जो पिता-पुत्र के मिलन का प्रतीक है।

Mauni Amavasya

सिर्फ परंपरा नहीं, जीवन का पाठ

मौनी अमावस्या हमें सिखाती है कि कभी-कभी “चुप रहना” बोलने से ज्यादा ताकतवर होता है। प्रयागराज में डुबकी लगा रहे करोड़ों लोग सिर्फ पानी में नहीं नहा रहे, वे अपनी आत्मा को शुद्ध कर रहे हैं।

आज के दिन आप भी संकल्प लें—सिर्फ पूजा का नहीं, बल्कि अपनी वाणी को मधुर बनाने का। क्योंकि असली धर्म वही है जो दूसरों को खुशी दे, दुख नहीं।

“हे गंगा मैया, जो भी आज तेरी शरण में आए, उसके सारे पाप धो देना।”

Read more

बिहार बोर्ड परीक्षा 2026: 10वीं-12वीं की डेटशीट जारी, परीक्षा केंद्र जाने से पहले जरूर पढ़ें ये 5 बड़े नियम और जरूरी निर्देश

बिहार

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने मैट्रिक और इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा 2026 का बिगुल फूंक दिया है। बोर्ड ने न केवल परीक्षा की तिथियां घोषित कर दी हैं, बल्कि परीक्षार्थियों के लिए कड़े निर्देश भी जारी किए हैं। अगर आप भी इस साल बोर्ड परीक्षा में शामिल होने जा रहे हैं, तो शेड्यूल के साथ-साथ इन नियमों को जानना आपके लिए बेहद जरूरी है ताकि एग्जाम सेंटर पर कोई परेशानी न हो।

बिहार बोर्ड परीक्षा

कब से शुरू होंगे एग्जाम परीक्षा ?

बिहार बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि परीक्षाएं दो पालियों में आयोजित की जाएंगी। इंटर (Class 12th) की थ्योरी परीक्षाएं 2 फरवरी से 13 फरवरी 2026 तक चलेंगी। वहीं, मैट्रिक (Class 10th) की परीक्षा 17 फरवरी से 25 फरवरी 2026 के बीच संपन्न होगी। थ्योरी से पहले छात्रों को अपनी प्रैक्टिकल परीक्षाओं में शामिल होना होगा, जो जनवरी 2026 में आयोजित की जा रही हैं (इंटर: 10-20 जनवरी और मैट्रिक: 20-22 जनवरी)।

एग्जाम सेंटर के लिए सबसे महत्वपूर्ण निर्देश

बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों के लिए कुछ सख्त नियम बनाए गए हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है:

• रिपोर्टिंग टाइम का ध्यान: छात्रों को परीक्षा शुरू होने से कम से कम 30 मिनट पहले केंद्र पर पहुंचना होगा। देरी से आने वाले परीक्षार्थियों को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

• एडमिट कार्ड और पहचान पत्र: बिना एडमिट कार्ड के प्रवेश वर्जित है। एडमिट कार्ड स्कूलों में मैट्रिक के लिए 8 जनवरी से और इंटर के लिए 16 जनवरी से मिलने शुरू हो जाएंगे।

• प्रतिबंधित वस्तुएं: परीक्षा केंद्र के अंदर मोबाइल फोन, ब्लूटूथ, स्मार्ट वॉच, कैलकुलेटर या किसी भी तरह की कागजी चिट ले जाना सख्त मना है। पकड़े जाने पर छात्र को परीक्षा से निष्कासित किया जा सकता है।

• एक्स्ट्रा टाइम: परीक्षार्थियों को प्रश्न पत्र पढ़ने और निर्देशों को समझने के लिए 15 मिनट का अतिरिक्त ‘कूल-ऑफ’ समय दिया जाएगा।

कैसे पता करें अपना एग्जाम सेंटर ?

छात्रों के मन में सबसे बड़ा सवाल एग्जाम सेंटर को लेकर रहता है। बोर्ड ने साफ किया है कि परीक्षा केंद्र की सटीक जानकारी, केंद्र का नाम और कोड केवल आपके ऑफिशियल एडमिट कार्ड पर ही अंकित होगा। एडमिट कार्ड जारी होने के बाद छात्र उसे biharboardonline.bihar.gov.in से डाउनलोड कर सकते हैं या अपने स्कूल के प्रधानाध्यापक से प्राप्त कर सकते हैं।

एडमिट कार्ड में गड़बड़ी हो तो क्या करें?

यदि आपके एडमिट कार्ड में नाम, फोटो या सेंटर से जुड़ी कोई त्रुटि (Error) दिखती है, तो तुरंत अपने स्कूल से संपर्क करें। इसके अलावा छात्र बिहार बोर्ड की हेल्पलाइन नंबर 0612-2230016 पर भी कॉल कर सकते हैं। बोर्ड ने छात्रों की सुविधा के लिए एक AI चैटबॉट भी लॉन्च किया है, जहाँ से त्वरित सहायता प्राप्त की जा सकती है।

बिहार बोर्ड परीक्षा

सफलता के लिए अंतिम टिप्स

चूंकि परीक्षाएं दो पालियों (9:30 AM से 12:45 PM और 1:45 PM से 5:00 PM) में हैं, इसलिए अपनी शिफ्ट के अनुसार समय का प्रबंधन करें। बोर्ड ने सलाह दी है कि छात्र परीक्षा से एक-दो दिन पहले अपने आवंटित केंद्र पर जाकर उसकी दूरी और रास्ते का मुआयना जरूर कर लें ताकि परीक्षा के दिन हड़बड़ी न हो।

Read more

Bihar Police SI Exam 2026 Update : आज से शुरू हुई दरोगा भर्ती की प्रारंभिक परीक्षा, जानें शिफ्ट टाइमिंग और जरूरी नियम

Bihar Police SI Exam 2026

Bihar Police SI Exam 2026 Update: बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) द्वारा बिहार पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) के कुल 1799 पदों पर भर्ती के लिए प्रारंभिक परीक्षा आज, 18 जनवरी 2026 से शुरू कर दी गई है। राज्य भर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच लाखों उम्मीदवार इस प्रतियोगिता में शामिल हो रहे हैं। यह परीक्षा 21 जनवरी तक आयोजित की जाएगी, जिसके माध्यम से योग्य उम्मीदवारों का चयन राज्य के गृह विभाग के अंतर्गत किया जाना है।

परीक्षा का शेड्यूल और शिफ्ट की जानकारी

बिहार पुलिस दरोगा भर्ती की यह प्रारंभिक परीक्षा दो मुख्य तिथियों—18 जनवरी (रविवार) और 21 जनवरी 2026 (बुधवार) को निर्धारित की गई है। आयोग ने सुचारू संचालन के लिए इसे दो पालियों में विभाजित किया है। पहली पाली सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक आयोजित की जा रही है, जिसके लिए अभ्यर्थियों को सुबह 8:30 बजे ही रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया था। वहीं, दूसरी पाली दोपहर 2:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक चलेगी, जिसका रिपोर्टिंग समय दोपहर 1:00 बजे तय किया गया है। प्रत्येक प्रश्न पत्र हल करने के लिए उम्मीदवारों को 2 घंटे का समय दिया जा रहा है।

Bihar Police SI Exam 2026

चयन प्रक्रिया और परीक्षा का स्वरूप

बिहार पुलिस SI बनने का सफर चार कठिन चरणों से होकर गुजरता है। पहले चरण में प्रारंभिक परीक्षा होती है, जिसमें 200 अंकों के कुल 100 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से सामान्य ज्ञान, इतिहास, भूगोल और समसामयिक घटनाओं (Current Affairs) पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। अगले चरण यानी मुख्य परीक्षा में पहुंचने के लिए उम्मीदवारों को कम से कम 30% अंक प्राप्त करना अनिवार्य है। मुख्य परीक्षा के बाद शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) होती है, जिसमें पुरुषों को 6 मिनट में 1.6 किलोमीटर और महिलाओं को 6 मिनट में 1 किलोमीटर की दौड़ पूरी करनी होती है। इसके अलावा ऊंची कूद (High Jump) और लंबी कूद के मानक भी तय किए गए हैं।

अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश

आयोग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा केंद्र पर प्रवेश के लिए एडमिट कार्ड के साथ एक मूल फोटो पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड या वोटर आईडी) और दो पासपोर्ट साइज फोटो लाना अनिवार्य है। परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे मोबाइल फोन, ब्लूटूथ या स्मार्ट वॉच को परीक्षा केंद्र के अंदर ले जाना पूरी तरह वर्जित है। यदि किसी उम्मीदवार को एडमिट कार्ड डाउनलोड करने में समस्या आई है, तो वे पटना स्थित आयोग के कार्यालय से डुप्लिकेट कार्ड के लिए संपर्क कर सकते हैं। सभी केंद्रों पर जैमर और सीसीटीवी कैमरों के जरिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

Bihar Police SI Exam 2026

सैलरी स्ट्रक्चर और भविष्य की संभावनाएं

बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर का पद न केवल सम्मानजनक है, बल्कि इसमें वेतन भी आकर्षक मिलता है। अंतिम रूप से चयनित होने वाले उम्मीदवारों को पे-लेवल 6 के तहत वेतन और विभिन्न सरकारी भत्ते दिए जाएंगे। यह भर्ती प्रक्रिया राज्य में कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए की जा रही है। परीक्षा से जुड़ी किसी भी नई अपडेट या परिणाम की जानकारी के लिए उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट bpssc.bihar.gov.in पर नियमित रूप से विजिट करने की सलाह दी जाती है।

Read more

किसानों की चमकेगी किस्मत! PM मोदी ने शुरू की ₹24,000 करोड़ की ‘धन-धान्य कृषि योजना’, जानें किसे मिलेगा फायदा

किसानों

PM Dhan-Dhaanya Krishi Yojana: केंद्र सरकार ने देश के किसानों की आय बढ़ाने और खेती को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाया है। दिवाली के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘पीएम धन-धान्य कृषि योजना’ की औपचारिक शुरुआत की। इस योजना के लिए 24,000 करोड़ रुपये का विशाल बजट आवंटित किया गया है, जिसका सीधा असर देश के 1.7 करोड़ किसानों पर पड़ेगा।

आइए जानते हैं क्या है यह योजना और कैसे यह 100 जिलों की सूरत बदलने वाली है।

धन-धान्य कृषि योजना

क्या है पीएम धन-धान्य कृषि योजना?

यह योजना मुख्य रूप से देश के उन 100 ‘आकांक्षी जिलों’ (Aspirational Districts) पर केंद्रित है, जहाँ खेती की पैदावार यानी उत्पादकता वर्तमान में काफी कम है। वित्त वर्ष 2025-26 से अगले छह वर्षों तक चलने वाली इस योजना का लक्ष्य छोटे और सीमांत किसानों को तकनीकी और आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।

योजना के 3 मुख्य लक्ष्य: उत्पादकता से बाजार तक

इस योजना को तीन प्रमुख मापदंडों के आधार पर लागू किया जाएगा:

पैदावार बढ़ाना: उन जिलों को चुना गया है जहाँ फसल की उपज कम है, ताकि वहाँ आधुनिक बीज और तकनीक पहुंचाई जा सके।

फसल चक्र (Crop Rotation): किसानों को एक ही खेत में साल में ज्यादा फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

ऋण सुविधा: किसानों को साहूकारों के चंगुल से बचाने के लिए आसान बैंक लोन और क्रेडिट की सुविधा दी जाएगी।

1.7 करोड़ किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

योजना का सबसे बड़ा फायदा छोटे किसानों को होगा। आंकड़ों के अनुसार, इसके लाभार्थियों में 86% छोटे और सीमांत किसान शामिल हैं। योजना के तहत किसानों को 50% से 80% तक की सब्सिडी और नाबार्ड (NABARD) के माध्यम से 50,000 रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक का लोन मिल सकेगा। अनुमान है कि इस तकनीक और मदद से किसानों के मुनाफे में 20% से 50% तक की बढ़ोतरी होगी।

11 मंत्रालयों का महा-संगम

इस योजना की सबसे खास बात यह है कि यह अकेली योजना नहीं है, बल्कि इसमें केंद्र सरकार के 11 मंत्रालयों की 36 पुरानी योजनाओं को एक साथ जोड़ दिया गया है। नीति आयोग के मॉडल पर आधारित इस स्कीम में पंचायत और ब्लॉक स्तर पर अनाज भंडारण (Storage), सिंचाई और बेहतर जल प्रबंधन पर जोर दिया जाएगा।

महिलाओं और डिजिटल खेती को बढ़ावा

महिला किसान: महिलाओं के लिए विशेष ‘प्रोड्यूसर ग्रुप्स’ बनाए जाएंगे और उन्हें 10,000 से 1 लाख रुपये तक का माइक्रोफाइनेंस और ट्रेनिंग दी जाएगी।

e-NAM प्लेटफॉर्म: बिचौलियों को खत्म करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग होगा, ताकि किसान अपनी फसल सीधे सही दाम पर बेच सकें।

दलहन आत्मनिर्भरता: दालों के उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए इस योजना को ‘दलहन मिशन’ के साथ भी जोड़ा गया है।

धन-धान्य कृषि योजना

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना केवल एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने का एक मिशन है। जनवरी 2026 तक इसकी निगरानी कड़ी की जाएगी ताकि हर पात्र किसान तक इसका लाभ पहुंच सके। यदि आप बिहार या अन्य राज्यों के चिन्हित 100 जिलों में रहते हैं, तो अपने स्थानीय कृषि विभाग से संपर्क कर इस योजना का लाभ उठाने की तैयारी शुरू कर दें।

Read more