सूरत में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी 21 करोड़ की पानी की टंकी: उद्घाटन से पहले ही हुआ बड़ा हादसा

सूरत

गुजरात के सूरत जिले से भ्रष्टाचार और लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ 21 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बनी एक पानी की टंकी उद्घाटन से पहले ही ताश के पत्तों की तरह ढह गई। यह घटना न केवल सार्वजनिक धन की बर्बादी है, बल्कि निर्माण कार्य में हुई भारी अनियमितताओं का जीता-जागता प्रमाण भी है।

हादसे का पूरा विवरण

यह घटना 19 जनवरी 2026 को सूरत के मांडवी तालुका के तड़केश्वर गांव में हुई। यहाँ ‘गाय पाक पानी सन्याल योजना’ के तहत 11 लाख लीटर क्षमता वाली और 15 मीटर ऊंची पानी की टंकी का निर्माण किया गया था।

सूरत में भ्रष्टाचार

जब योजना के तहत टंकी की टेस्टिंग (परीक्षण) की जा रही थी, तब उसमें 9 लाख लीटर पानी भरते ही पूरी संरचना भरभराकर गिर गई। इस दर्दनाक हादसे में एक महिला समेत तीन मजदूर घायल हो गए। यह टंकी क्षेत्र के लगभग 33-14 गांवों को पेयजल आपूर्ति करने के लिए बनाई गई थी, जिसका ग्रामीण पिछले तीन वर्षों से इंतजार कर रहे थे।

भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण के संकेत

घटनास्थल पर बिखरे मलबे की शुरुआती जांच ही भ्रष्टाचार की कहानी बयां कर रही है। मलबे में सीमेंट की परतें हाथों से ही उखड़ रही हैं, जो सीधे तौर पर घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल की ओर इशारा करती हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि:

• ठेकेदार ने लोहे (सरिया) और सीमेंट की गुणवत्ता में भारी कटौती की।

• 21 करोड़ रुपये के बड़े बजट के बावजूद निर्माण मानकों का पालन नहीं किया गया।

• अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से जनता के टैक्स के पैसों का दुरुपयोग किया गया।

प्रशासनिक कार्रवाई और जांच

हादसे की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने तत्काल कदम उठाए हैं:

• निलंबन: डिप्टी एग्जीक्यूटिव इंजीनियर और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर जय चौधरी को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया है।

• भुगतान पर रोक: संबंधित ठेकेदार एजेंसी के सभी भुगतान रोक दिए गए हैं।

• नोटिस: PMC मार्स प्लानिंग और अन्य जिम्मेदार संस्थाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

• तकनीकी जांच: SVNIT सूरत की टीम, GERI और विजिलेंस विभाग के साथ मिलकर सैंपल की जांच कर रही है ताकि तकनीकी कमियों का पता लगाया जा सके।

21 करोड़ की पानी की टंकी

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

इस घटना ने गुजरात की राजनीति में भी उबाल ला दिया है। विपक्ष (कांग्रेस) ने सत्तापक्ष पर निशाना साधते हुए इसे “भ्रष्टाचार का मॉडल” करार दिया है। वहीं, स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह टंकी उद्घाटन के बाद गिरती, तो सैकड़ों मासूमों की जान जा सकती थी। वर्तमान में दोषियों के खिलाफ सख्त आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग जोर पकड़ रही है।

यह हादसा विकास के दावों के बीच एक कड़वी सच्चाई को उजागर करता है। जहां एक तरफ अहमदाबाद में 70 साल पुरानी टंकियों को गिराने के लिए भारी मशीनों की जरूरत पड़ती है, वहीं 21 करोड़ की यह नई टंकी अपना वजन भी नहीं सह पाई। भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाने के लिए पारदर्शी टेंडरिंग, सख्त थर्ड-पार्टी मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय करना समय की मांग है।

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दरभंगा में आठवीं की छात्रा को लेकर शिक्षक 3 महीने से फरार, पुलिस के हाथ अब भी खाली

दरभंगा

बिहार के दरभंगा जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली खबर सामने आई है। यहाँ के घनश्यामपुर थाना क्षेत्र के मनसारा गांव में एक शिक्षक अपनी ही छात्रा को लेकर पिछले तीन महीनों से फरार है। पुलिस की तमाम कोशिशों और छापेमारी के बावजूद अब तक दोनों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

क्या है पूरा मामला?

यह घटना 20 अक्टूबर 2025 की है। घनश्यामपुर थाना क्षेत्र के राजकीय उच्च विद्यालय मनसारा में पदस्थापित शिक्षक सुधांशु कुमार, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले (अकबरपुर गांव) के रहने वाले हैं, गांव में ही किराए के मकान में रहते थे। आरोप है कि शिक्षक सुधांशु कुमार आठवीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा को ट्यूशन पढ़ाने के बहाने अपने साथ लेकर फरार हो गए।

दरभंगा

परिजनों ने काफी खोजबीन की, लेकिन जब कोई जानकारी नहीं मिली तो उन्होंने घनश्यामपुर थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई। घटना को तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन छात्रा की बरामदगी न होने से परिजनों में काफी आक्रोश और डर का माहौल है।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

घनश्यामपुर थानाध्यक्ष आलोक कुमार के अनुसार, पुलिस लगातार इस मामले की जांच कर रही है। मोबाइल लोकेशन ट्रैक करने और संभावित ठिकानों पर छापेमारी के बावजूद आरोपी शिक्षक और छात्रा का पता नहीं चल सका है।

वहीं, इस मामले पर जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) विद्यानंद ठाकुर ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने मीडिया के जरिए मिली जानकारी पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि इस मामले की गहन जांच कराई जाएगी और दोषी शिक्षक के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

दरभंगा

शिक्षा जगत में आक्रोश

इस घटना ने गुरु-शिष्य के पवित्र रिश्ते को कलंकित किया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर सरकारी स्कूलों के शिक्षक ही ऐसी हरकतों में शामिल होंगे, तो अभिभावक अपनी बेटियों को स्कूल भेजने से कतराएंगे। स्थानीय लोग जल्द से जल्द छात्रा की बरामदगी और आरोपी शिक्षक की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।

मुख्य हाइलाइट्स:

• स्थान: मनसारा गांव, घनश्यामपुर, दरभंगा (बिहार)।

• मुख्य आरोपी: शिक्षक सुधांशु कुमार (निवासी: अंबेडकरनगर, यूपी)।

• पीड़ित: आठवीं कक्षा की नाबालिग छात्रा।

• कब से फरार: 20 अक्टूबर 2025 से।

• पुलिस की स्थिति: FIR दर्ज, लेकिन अभी तक कोई सुराग नहीं।

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Karnataka DGP Viral Video: खाकी पर ‘AI’ का दाग या असली पाप? 3 पुराने सेक्स स्कैंडल जो सिस्टम की पोल खोलते हैं

DGP

हम अक्सर नेताओं के चरित्र पर सवाल उठाते हैं। हम कहते हैं कि राजनीति गंदी है। लेकिन जब कानून का पालन करने वाला सबसे बड़ा अधिकारी—एक DGP (Director General of Police) स्तर का इंसान—गलत वजहों से सुर्खियों में आ जाए, तो जनता का भरोसा हिल जाता है।

कर्नाटक में इन दिनों एक वीडियो ने भूचाल ला दिया है। दावा किया जा रहा है कि वीडियो में राज्य के डीजीपी (आंतरिक सुरक्षा) के. रामचंद्र राव (K. Ramachandra Rao) अपने ही ऑफिस में महिलाओं के साथ आपत्तिजनक स्थिति में हैं।

हालांकि, डीजीपी साहब इसे “AI और डीपफेक” की साजिश बता रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने जांच के आदेश दे दिए हैं। आज हम इस खबर की गहराई में जाएंगे और देखेंगे कि कैसे कुर्सी का नशा, चाहे वो नेता हो या अफसर, सबको एक ही लाइन में खड़ा कर देता है।

Karnataka DGP Viral Video

वायरल वीडियो का सच: ऑफिस या अय्याशी का अड्डा?

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो और फोटोज ने कर्नाटक की ब्यूरोक्रेसी को शर्मसार कर दिया है।

आरोप है कि डीजीपी के. रामचंद्र राव अपने आधिकारिक कक्ष (Office) का दुरुपयोग कर रहे थे। वीडियो में उन्हें कुछ महिलाओं के साथ बेहद निजी पलों में देखा गया है।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह सब एक सरकारी दफ्तर में हो रहा था, जहां जनता की सुरक्षा के फैसले लिए जाते हैं। अगर यह वीडियो सच है, तो यह सिर्फ एक स्कैंडल नहीं, बल्कि “Code of Conduct” की धज्जियां उड़ाना है।

डीजीपी की सफाई: “यह मैं नहीं, AI है”

जैसे ही वीडियो वायरल हुआ, के. रामचंद्र राव ने वही तर्क दिया जो आजकल हर बड़ा आदमी फंसने पर देता है— “यह फेक है।”

  • उन्होंने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को पत्र लिखकर दावा किया है कि:
  • यह वीडियो AI (Artificial Intelligence) और Deepfake तकनीक का इस्तेमाल करके बनाया गया है।
  • उन्हें ब्लैकमेल करने और उनकी छवि खराब करने की साजिश रची जा रही है।
  • उन्होंने खुद इस मामले की CID जांच की मांग की है।

अब सवाल यह है कि क्या AI इतना एडवांस हो गया है, या फिर “AI” अब बड़े लोगों के लिए बचने का सबसे आसान कवच (Shield) बन गया है?

मुख्यमंत्री का एक्शन: जांच या लीपापोती?

मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने तुरंत एक्शन लिया है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की जांच CID (Crime Investigation Department) को सौंप दी है।

लेकिन जनता सवाल पूछ रही है—क्या एक जूनियर अधिकारी अपने ही विभाग के सबसे बड़े अधिकारी (DGP) के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर पाएगा? इतिहास गवाह है कि ऐसे मामलों में अक्सर सबूत मिटा दिए जाते हैं या फाइलें धूल खाती रहती हैं।

यह पहला नहीं है: जब ‘माननीयों’ ने पार की हदें (3 पुराने उदाहरण)

डीजीपी साहब का मामला सच है या झूठ, यह तो जांच बताएगी। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब सत्ता के नशे में चूर लोगों ने नैतिकता को ताक पर रख दिया हो। चाहे ‘खाकी’ हो या ‘खादी’, हमाम में सब नंगे नज़र आते हैं।

ज़रा इन 3 बड़े मामलों को याद कीजिए:

प्रज्वल रेवन्ना (पेन ड्राइव कांड – 2024):

अभी कल की ही बात है। कर्नाटक के ही हासन से सांसद प्रज्वल रेवन्ना का “सेक्स स्कैंडल” पूरी दुनिया ने देखा। हजारों वीडियो, सैकड़ों महिलाएं और वह भी एक नेता द्वारा। पहले उन्होंने भी इसे “फर्जी” बताया था, लेकिन बाद में उन्हें देश छोड़कर भागना पड़ा और अंततः जेल जाना पड़ा। यह दिखाता है कि पावर का नशा किस कदर हावी होता है।

रमेश जारकीहोली (CD कांड – 2021):

कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री थे। एक महिला के साथ उनकी सीडी सामने आई, जिसमें नौकरी के बदले शोषण का आरोप था। मंत्री जी को इस्तीफा देना पड़ा। वहां भी “हनी ट्रैप” और “फर्जी वीडियो” का शोर मचा था, लेकिन बदनामी तो हो ही गई।

राघवजी कांड (मध्य प्रदेश):

याद कीजिए मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री राघवजी को। अपने ही नौकर के साथ अप्राकृतिक संबंधों के आरोप में उनकी सीडी बनी थी। उन्हें पार्टी से निकाला गया और जेल भी जाना पड़ा।

कनेक्शन क्या है?

चाहे प्रज्वल हों, जारकीहोली हों, या अब कथित तौर पर डीजीपी राव—पैटर्न एक ही है। कुर्सी की ताकत, ऑफिस का एकांत, और यह गलतफहमी कि “हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।”

समाज के लिए चिंता का विषय

जब हम नेताओं के वीडियो देखते हैं, तो हम कहते हैं— “अरे, नेता तो होते ही ऐसे हैं।”

लेकिन जब एक IPS अधिकारी, जिसने वर्दी पहनते वक्त संविधान की शपथ ली थी, ऐसे आरोपों में घिरता है, तो डर लगता है।

अगर रक्षक ही ऑफिस में बैठकर रंगरेलियां मनाएंगे, तो बहन-बेटियों की सुरक्षा कौन करेगा?

क्या सरकारी दफ्तर अब काम की जगह नहीं, बल्कि अय्याशी के अड्डे बन गए हैं?

Karnataka DGP Viral Video

सच का सामने आना जरूरी

फिलहाल, हम डीजीपी के. रामचंद्र राव को दोषी नहीं ठहरा सकते क्योंकि जांच जारी है। हो सकता है कि सच में उन्हें फंसाया जा रहा हो। AI का खतरा वास्तविक है।

लेकिन अगर CID की जांच में यह वीडियो असली निकलता है, तो सजा ऐसी मिलनी चाहिए जो नजीर बने। सिर्फ सस्पेंड कर देना काफी नहीं होगा।

और अगर यह वीडियो फेक (Deepfake) है, तो उस बनाने वाले को पकड़ना चाहिए, क्योंकि आज डीजीपी का वीडियो बना है, कल किसी आम आदमी का भी बन सकता है।

आपकी राय: क्या आपको लगता है कि बड़े अधिकारी और नेता ‘AI’ का बहाना बनाकर अपने पाप छिपा रहे हैं? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर लिखें।

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बिहार: अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर से मुक्ति! नीतीश सरकार ने लॉन्च की ‘जनता द्वार योजना’, घर बैठे मिलेंगी 25 सेवाएं

नीतीश

बिहार में सुशासन के एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की जनता को सरकारी दफ्तरों की भागदौड़ से बचाने के लिए महत्वाकांक्षी ‘जनता द्वार योजना’ का शुभारंभ किया है। इस डिजिटल पहल के जरिए अब जाति प्रमाण पत्र से लेकर राशन कार्ड तक की सुविधाएं सीधे लोगों के मोबाइल और घर तक पहुंचेंगी।

सुशासन का नया मॉडल: क्या है ‘जनता द्वार योजना’?

मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस योजना का उद्घाटन करते हुए इसे बिहार के प्रशासनिक इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव बताया। इस योजना की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

• जनता द्वार ऐप: सरकार ने एक समर्पित मोबाइल ऐप लॉन्च किया है, जहाँ 25 से अधिक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सेवाएं एक क्लिक पर उपलब्ध होंगी।

नीतीश सरकार

• 48 घंटे में डिलीवरी: जाति, आय, निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और पेंशन संबंधी आवेदनों का निपटारा अब अधिकतम 48 घंटों के भीतर करने का लक्ष्य रखा गया है।

• IT-साक्षर केंद्र: राज्य के हर जिले में 50 ‘जनता द्वार केंद्र’ खोले जाएंगे। ये केंद्र उन लोगों की मदद करेंगे जो तकनीक के साथ सहज नहीं हैं।

• टोल-फ्री हेल्पलाइन: शिकायतों और जानकारी के लिए सरकार ने 1800-XXX-XXXX नंबर जारी किया है, जिससे अधिकारी सीधे जनता से जुड़ेंगे।

मुख्यमंत्री का संबोधन: “अब जनता नहीं, काम उनके पास जाएगा”

उद्घाटन के दौरान CM नीतीश कुमार ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि आम आदमी को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए ब्लॉक या अनुमंडल कार्यालय के चक्कर न काटने पड़ें। यह डिजिटल सशक्तीकरण की दिशा में बिहार का बड़ा कदम है।”

वहीं, डिप्टी CM सम्राट चौधरी ने इस योजना को ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया और कहा कि इससे बिचौलियों और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।

विपक्ष का रुख: स्वागत के साथ सतर्कता

विपक्ष (RJD) ने इस डिजिटल पहल का स्वागत तो किया है, लेकिन इसके क्रियान्वयन (Implementation) पर सवाल उठाए हैं। आरजेडी प्रवक्ताओं का कहना है कि कागजों पर योजनाएं अच्छी होती हैं, लेकिन असली चुनौती ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट और सर्वर की समस्याओं को दूर करना है।

नीतीश सरकार

भ्रष्टाचार पर चोट और रोजगार के अवसर

विशेषज्ञों के अनुसार, 500 करोड़ रुपये के बजट वाली इस योजना से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि ‘जनता द्वार केंद्रों’ के माध्यम से हजारों आईटी-साक्षर युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। सरकार ने अगले 6 महीनों में 1 करोड़ आवेदनों को डिजिटल माध्यम से संसाधित करने का लक्ष्य रखा है।

पटना, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे बड़े शहरों से शुरू हुई यह योजना जल्द ही बिहार के हर गांव तक पहुंचेगी। इसमें भविष्य में AI-आधारित चैटबॉट जोड़ने की भी योजना है, जो लोगों के सवालों के तुरंत जवाब देगा।

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बिहार में  मौत कोहराम: किशनगंज में ट्रक-डंपर की टक्कर के बाद जिंदा जले 3 लोग, वैशाली में भतीजे ने की चाचा की हत्या

बिहार

बिहार में पिछले चंद घंटों के भीतर दिल दहला देने वाली दो बड़ी घटनाएं सामने आई हैं। एक तरफ जहां किशनगंज में भीषण सड़क हादसे ने तीन परिवारों को उम्र भर का गम दे दिया, वहीं दूसरी तरफ वैशाली में रिश्तों के कत्ल की एक खौफनाक वारदात ने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है। इन घटनाओं ने राज्य की कानून-व्यवस्था और सड़क सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

किशनगंज: NH 327E पर मौत का तांडव, जिंदा जले तीन लोग

किशनगंज जिले के ठाकुरगंज क्षेत्र में एक रूह कंपा देने वाला हादसा हुआ। NH 327E पर एक तेज रफ्तार ट्रक और डंपर के बीच आमने-सामने की जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों वाहनों में तुरंत आग लग गई और देखते ही देखते लपटें 10 फीट ऊपर तक उठने लगीं।

ट्रक-डंपर की टक्कर

इस भयावह अग्निकांड में दोनों वाहनों के ड्राइवरों समेत तीन लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई। देखने वाले के अनुसार, आग इतनी तेज थी कि लोग चाहकर भी उनकी मदद नहीं कर सके। सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन तब तक सब कुछ जलकर राख हो चुका था। पुलिस ने जले हुए शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच जारी है।

वैशाली: पारिवारिक विवाद में भतीजे ने चाचा का गला रेता

किशनगंज के हादसे के बीच वैशाली जिले से भी एक सनसनीखेज वारदात सामने आई। वैशाली के बराटी थाना क्षेत्र के बहुआरा गांव में एक भतीजे ने अपने सगे चाचा की बेरहमी से हत्या कर दी।

आरोपी भतीजे मंजय कुमार ने पारिवारिक विवाद के चलते अपने 70 वर्षीय चाचा महताब लाल सिंह पर हसुली से हमला किया और उनका गला रेत दिया। जब महताब लाल की पत्नी (चाची) उन्हें बचाने पहुंचीं, तो आरोपी ने उन पर भी हमला कर दिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी मंजय को गिरफ्तार कर लिया है और हत्या में इस्तेमाल हथियार भी जब्त कर लिया गया है। वैशाली एसपी ने कहा है कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले की स्पीडी ट्रायल के जरिए सजा दिलाई जाएगी।

बिहार में मौत कोहराम

सुशासन के दावों पर सवाल

इन दो अलग-अलग घटनाओं ने बिहार में सुरक्षा और सामाजिक समरसता पर बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर किशनगंज की सड़कों पर आए दिन हो रहे हादसों ने परिवहन विभाग की सक्रियता पर सवाल उठाए हैं, वहीं वैशाली की घटना ने समाज में बढ़ती हिंसा और घरेलू विवादों के खौफनाक अंत को उजागर किया है।

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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा: घने कोहरे के बीच ट्रेलर से टकराई डबल डेकर बस, 12 यात्री घायल

आगरा

उत्तर प्रदेश में भीषण ठंड और घने कोहरे का कहर जारी है। इसी बीच आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है। रविवार सुबह एक तेज रफ्तार डबल डेकर बस आगे चल रहे ट्रेलर से जा टकराई। इस हादसे में करीब 12 यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। कोहरे की वजह से विजिबिलिटी कम होना इस दुर्घटना का मुख्य कारण बताया जा रहा है।

कब और कहां हुआ हादसा?

यह घटना 18 जनवरी 2026 की सुबह करीब 8:00 बजे की है। हादसे के वक्त एक्सप्रेसवे पर घना कोहरा छाया हुआ था। मिली जानकारी के अनुसार, यह डबल डेकर बस गाजीपुर से दिल्ली की ओर जा रही थी। जब बस एक्सप्रेसवे के एक हिस्से से गुजर रही थी, तभी कम दृश्यता के कारण चालक आगे चल रहे ट्रेलर का अंदाजा नहीं लगा पाया और बस सीधे उसमें पीछे से जा घुसी।

हादसे का विवरण

टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कोहरे की चादर इतनी मोटी थी कि कुछ मीटर की दूरी पर भी वाहन दिखाई नहीं दे रहे थे।

घायलों की संख्या: हादसे में 12 यात्री घायल हुए हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।

राहत कार्य: सूचना मिलते ही यूपीडा (UPEIDA) की पेट्रोलिंग टीम, एंबुलेंस और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। बस में फंसे यात्रियों को शीशे तोड़कर और कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया।

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे

बचाव और उपचार

सभी घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल और मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार, घायल यात्रियों में से कुछ को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि कुछ का इलाज अभी जारी है। गनीमत यह रही कि इस भीषण टक्कर के बावजूद किसी की जान जाने की खबर नहीं है। हादसे के बाद एक्सप्रेसवे पर कुछ समय के लिए यातायात बाधित रहा, जिसे क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर बहाल किया गया।

कोहरे में सावधानी जरूरी

सर्दियों के मौसम में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे पर कोहरे के कारण हादसों की संख्या बढ़ जाती है। पुलिस और प्रशासन ने यात्रियों के लिए कुछ दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

गति सीमा का पालन: कोहरे के दौरान वाहनों की रफ्तार 40-50 किमी/घंटा से अधिक न रखें।

फॉग लाइट का उपयोग: वाहन की हेडलाइट लो-बीम पर रखें और फॉग लाइट का इस्तेमाल करें।

दूरी बनाए रखें: आगे चल रहे वाहन से सुरक्षित दूरी बनाकर चलें।

इंडिकेटर और पार्किंग लाइट: जरूरत पड़ने पर ही रुकें और पार्किंग लाइट जलाकर रखें।

यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि खराब मौसम में थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और बस चालक के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज करने की प्रक्रिया की जा रही है।

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Alert: कहीं आपके घर में रखी खांसी की दवा ‘जहर’ तो नहीं? Hajipur की कंपनी सील! जानें उस 1 जानलेवा सिरप का नाम

Cough syrup with ethylene glycol

मौसम बदल रहा है, बच्चों को खांसी-जुकाम होना आम बात है। ऐसे में हम बिना सोचे-समझे मेडिकल स्टोर से ‘कफ सिरप’ (Cough Syrup) खरीद लाते हैं। हमें लगता है कि इससे बच्चे को आराम मिलेगा। लेकिन ज़रा रुकिए! क्या आपको पता है कि जिस शीशी को आप ‘अमृत’ समझकर बच्चे के मुंह से लगा रहे हैं, उसमें एथिलीन ग्लाइकॉल (Ethylene Glycol) जैसा जानलेवा जहर हो सकता है?

जी हाँ, यह डराने वाली बात नहीं, बल्कि बिहार के हाजीपुर (Hajipur) से आई एक खौफनाक हकीकत है। ड्रग विभाग ने वहां की एक बड़ी दवा कंपनी पर ताला जड़ दिया है। वजह जानकर आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी।

खांसी की दवा

हाजीपुर की दवा कंपनी में क्या मिला? (The Horror Story)

बिहार का हाजीपुर शहर, जो फार्मा हब माना जाता है, अब शक के घेरे में है। खबरों के मुताबिक, हाजीपुर स्थित एक दवा निर्माण इकाई (Pharmaceutical Unit) में छापेमारी के दौरान कफ सिरप के सैंपल फेल हो गए हैं। जांच में पाया गया कि बच्चों की खांसी के सिरप में ‘एथिलीन ग्लाइकॉल’ और ‘डायथिलीन ग्लाइकॉल’ की मात्रा मिली है। यह वही रसायन है जिसकी वजह से पिछले साल गाम्बिया और उज्बेकिस्तान में दर्जनों बच्चों की किडनी फेल होने से मौत हो गई थी।

कार्रवाई:

प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए उस कंपनी के विनिर्माण (Manufacturing) पर रोक लगा दी है और बाज़ार से उस बैच की सारी दवाइयां वापस मंगवाने का आदेश दिया है।

आखिर कौन सी है वो दवा? (Check Your Medicine Box Now)

यह सबसे जरूरी हिस्सा है। अगर आपके घर में कोई भी कफ सिरप रखा है, तो तुरंत उठिए और उसकी बोतल का लेबल (Label) चेक कीजिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस सिरप में यह जहर मिला है, वह मुख्य रूप से ‘Cough & Cold Syrup’ (जेनेरिक नाम) के नाम से बेची जा रही थी, जो हाजीपुर की फैक्ट्री में बनी थी।

आपको क्या चेक करना है?

Manufacturer Name (निर्माता): अगर बोतल के पीछे “Manufactured in Hajipur, Bihar” लिखा है और कंपनी का नाम संदिग्ध है, तो उसे तुरंत हटा दें।

Batch Number: हाल ही में बने बैच (2025-26) के सिरप जांच के दायरे में हैं।

Contents: अगर सिरप में साल्वेंट की जगह सस्ता केमिकल इस्तेमाल हुआ है, तो यह नंगी आंखों से पता नहीं चलेगा, इसलिए रिस्क न लें।

(नोट: सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने अभी ब्रांड का नाम सार्वजनिक करने से पहले बैच नंबर पर जोर दिया है, लेकिन हाजीपुर की फैक्ट्रियों से बनीं जेनेरिक दवाइयों पर अभी सख्त नजर है।)

एथिलीन ग्लाइकॉल: यह ‘जहर’ आखिर करता क्या है?

शायद आप सोच रहे होंगे कि यह केमिकल इतना खतरनाक क्यों है? दरअसल, Ethylene Glycol का इस्तेमाल कारों के इंजन को ठंडा रखने (Coolant) और ब्रेक ऑयल में होता है। यह स्वाद में मीठा होता है, लेकिन शरीर में जाते ही तबाही मचा देता है।

दवा कंपनियां इसे क्यों मिलाती हैं?

सिर्फ और सिर्फ ‘पैसा’ बचाने के लिए। कफ सिरप में ‘ग्लिसरीन’ या ‘प्रोपलीन ग्लाइकॉल’ का इस्तेमाल होना चाहिए, जो महंगा होता है। कुछ लालची कंपनियां इसकी जगह सस्ता इंडस्ट्रियल ग्रेड एथिलीन ग्लाइकॉल मिला देती हैं।

अगर यह दवा पी ली तो क्या होगा? (Symptoms to Watch)

अगर गलती से किसी बच्चे ने दूषित सिरप पी लिया है, तो उसमें ये लक्षण 24 से 48 घंटे के भीतर दिख सकते हैं:

  • पेट में तेज दर्द और उल्टी होना।
  • पेशाब का रुक जाना (यह Kidney Failure का सबसे पहला संकेत है)।
  • बच्चे का सुस्त हो जाना या बेहोश होना।
  • दिमागी संतुलन बिगड़ना।

अगर ऐसा कोई भी लक्षण दिखे, तो घर पर इलाज न करें, तुरंत बच्चे को बड़े अस्पताल लेकर भागें।

माता-पिता अब क्या करें? (3 Safety Rules)

हाजीपुर की घटना ने यह साबित कर दिया है कि हम आंख मूंदकर किसी भी दवा पर भरोसा नहीं कर सकते। अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए आज ही ये 3 गांठ बांध लें:

  • लोकल ब्रांड्स से बचें: कोशिश करें कि डॉक्टर की लिखी हुई बड़ी और नामी कंपनियों (Standard Brands) की दवा ही खरीदें। सस्ती जेनेरिक दवाइयां, जिनका नाम आपने कभी नहीं सुना, उनसे बचें।
  • “Made in…” चेक करें: दवा खरीदने से पहले देखें कि वह कहां बनी है। अगर किसी ब्लैकलिस्टेड जगह या कंपनी का नाम दिखे, तो उसे न लें।
  • सिरप की जगह टैबलेट? अगर बच्चा थोड़ा बड़ा है, तो डॉक्टर की सलाह पर सिरप की जगह टैबलेट देना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि लिक्विड दवाओं में ही मिलावट (Adulteration) का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
  • खांसी की दवा

लालच और लापरवाही की कीमत

हाजीपुर की कंपनी पर प्रतिबंध लगना एक अच्छी खबर है, लेकिन यह डरावना है कि ऐसी दवाइयां मार्केट में पहुंची कैसे? क्या इंसानी जान की कीमत कुछ रुपयों के मुनाफे से कम है? जब तक सिस्टम सुधरेगा, तब तक आपकी सुरक्षा आपके हाथ में है। अभी जाएं और अपनी दवाइयों की जांच करें। अगर आपको कोई संदिग्ध सिरप मिले, तो उसे डस्टबिन में फेंक दें।

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बिहार के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 1,445 जूनियर रेजिडेंट्स की नियुक्ति, आवेदन प्रक्रिया की पूरी जानकारी

बिहार

बिहार सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को और बेहतर बनाने और सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (BCECEB) द्वारा कुल 1,445 जूनियर रेजिडेंट (Junior Resident) के पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह भर्ती विशेष रूप से उन युवा डॉक्टरों के लिए एक बड़ा अवसर है जो एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं और सरकारी क्षेत्र में अपना योगदान देना चाहते हैं। इन नियुक्तियों से राज्य के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं में व्यापक सुधार होने की उम्मीद है।

सरकारी मेडिकल कॉलेजों

महत्वपूर्ण तिथियां और आवेदन की समय सीमा

इस भर्ती प्रक्रिया के लिए समय सारणी बहुत ही स्पष्ट रखी गई है ताकि उम्मीदवार समय पर अपनी तैयारी पूरी कर सकें। आधिकारिक नोटिफिकेशन जनवरी 2026 के मध्य में जारी किया गया था, जिसके तुरंत बाद 16 जनवरी 2026 से ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इच्छुक उम्मीदवारों के पास फॉर्म भरने के लिए 6 फरवरी 2026 की रात 11:59 बजे तक का समय है। इसके अलावा, यदि आवेदन भरते समय कोई त्रुटि हो जाती है, तो बोर्ड ने 7 और 8 फरवरी को सुधार (Correction) के लिए पोर्टल खोलने का निर्णय लिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि 11 फरवरी 2026 तक मेधा सूची (Merit List) भी प्रकाशित कर दी जाएगी।

पदों का विवरण, योग्यता और चयन का आधार

स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत कुल 1,445 पदों पर यह बहाली एक वर्ष के संविदा (Contract) आधार पर की जा रही है। इस पद के लिए अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से एमबीबीएस (MBBS) की डिग्री है, जो नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) या एमसीआई द्वारा प्रमाणित होनी चाहिए। चयन की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और मेधा आधारित रखी गई है। इसमें किसी भी प्रकार की लिखित परीक्षा नहीं होगी; बल्कि उम्मीदवारों के शैक्षणिक रिकॉर्ड और प्राप्त अंकों के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी, जिसके बाद सफल अभ्यर्थियों का दस्तावेज़ सत्यापन (Document Verification) किया जाएगा।

वेतनमान और आवेदन करने की विधि

चयनित जूनियर रेजिडेंट्स को सरकार की ओर से ₹65,000 प्रति माह का आकर्षक वेतन दिया जाएगा। आवेदन करने के इच्छुक डॉक्टर BCECE बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट bceceboard.bihar.gov.in पर जाकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया के दौरान सामान्य और अन्य श्रेणियों के लिए लगभग ₹2250 का आवेदन शुल्क निर्धारित किया गया है। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है, जहाँ उम्मीदवारों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी के साथ-साथ आवश्यक शैक्षणिक प्रमाणपत्र भी अपलोड करने होंगे।

सरकारी मेडिकल कॉलेजों

बिहार के स्वास्थ्य ढांचे के लिए इस भर्ती का महत्व

यह भर्ती न केवल डॉक्टरों के लिए रोजगार का अवसर है, बल्कि बिहार की स्वास्थ्य प्रणाली के लिए भी संजीवनी के समान है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में जूनियर रेजिडेंट्स की तैनाती से अस्पतालों पर बढ़ते मरीजों के बोझ को कम किया जा सकेगा। इसके साथ ही, नवनियुक्त डॉक्टरों को राज्य के प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने का क्लीनिकल अनुभव प्राप्त होगा, जो उनके भविष्य के करियर के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध होगा। यह कदम मुख्यमंत्री के ‘सात निश्चय’ और स्वास्थ्य सुधार के संकल्पों को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

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डॉक्टर बनने आई बेटी की ‘साजिश वाली मौत’: शरीर पर संघर्ष के निशान और सिस्टम की चुप्पी; क्या मिल पाएगा इंसाफ?

मौत

पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट (NEET) की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया है। जैसे-जैसे इस मामले की जांच आगे बढ़ रही है, रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस की कार्यप्रणाली और हॉस्टल के भीतर चल रहे संदिग्ध खेल ने प्रशासन पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ इस पूरे मामले का विस्तृत विवरण दिया गया है:

दरिंदगी की पुष्टि: क्या कहती है पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट?

शुरुआत में पुलिस जिस मामले को सामान्य मौत या आत्महत्या की दिशा में ले जा रही थी, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने उन दावों की धज्जियाँ उड़ा दीं। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में छात्रा के साथ रेप की पुष्टि हुई है।

साजिश वाली मौत

चोट के निशान: छात्रा के शरीर पर कई जगह गहरे जख्म मिले हैं। गर्दन, कंधे, छाती और पीठ पर रगड़ के निशान (ब्रूजेस) पाए गए हैं, जो इस बात का प्रमाण हैं कि छात्रा ने अपनी जान बचाने के लिए कड़ा संघर्ष किया था।

गंभीर चोटें: रिपोर्ट में सिर पर चोट (Head Injury) और शरीर के अंगों से भारी ब्लीडिंग की बात भी सामने आई है।

नशीले पदार्थ का शक: शरीर में ड्रग्स या नशीली गोलियों के अवशेष मिलने की भी आशंका जताई गई है, जिसके लिए विसरा सुरक्षित रखकर एम्स (AIIMS) भेजा गया है।

2. हॉस्टल संचालिका और डॉक्टर पर संगीन आरोप

छात्रा के परिजनों ने हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल, उनके पति श्रवण अग्रवाल और बिल्डिंग मालिक मनीष रंजन पर सोची-समझी साजिश के तहत हत्या और रेप का आरोप लगाया है।

रैकेट चलाने का दावा: परिजनों का आरोप है कि हॉस्टल के नाम पर वहाँ एक रैकेट चलाया जा रहा था। शाम ढलते ही हॉस्टल के बाहर लग्जरी गाड़ियों का जमावड़ा लग जाता था।

सबूत मिटाने की कोशिश: आरोप है कि डॉक्टर सतीश की मिलीभगत से छात्रा को गलत इंजेक्शन दिए गए ताकि शरीर पर मौजूद चोटों के निशानों को मिटाया जा सके।

पैसे का प्रलोभन: मृतका के पिता ने दावा किया कि संचालिका नीलम अग्रवाल ने उन्हें चुप रहने के लिए लाखों रुपये का ऑफर दिया और यहाँ तक कहा कि “जितना पैसा चाहिए ले लो, पर मामला आगे मत बढ़ाओ।”

3. पुलिस की भूमिका और रसूखदारों का दबाव

इस मामले में पुलिस की शुरुआती ढिलाई ने लोगों के गुस्से को भड़का दिया है।

लापरवाही के आरोप: स्थानीय थानेदार पर आरोप है कि उन्होंने रसूखदारों के दबाव में आकर शुरू में केस को हल्का करने की कोशिश की। हॉस्टल में सीसीटीवी (CCTV) कैमरों का न होना और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होना भी बड़ी लापरवाही मानी जा रही है।

SIT का गठन: बढ़ते जनाक्रोश और मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी (IG) जितेंद्र राणा के निर्देश पर एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है। टीम ने हॉस्टल को सील कर दिया है और वहाँ रह रही अन्य लड़कियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

4. वर्तमान स्थिति और इंसाफ की गुहार

फिलहाल, मुख्य आरोपी मनीष रंजन फरार बताया जा रहा है, जिसकी तलाश में छापेमारी जारी है। छात्रा के पिता का कहना है कि उनकी बेटी डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहती थी, लेकिन सिस्टम और अपराधियों की मिलीभगत ने उसकी जान ले ली।

साजिश वाली मौत

यह मामला अब राजनीतिक तूल भी पकड़ चुका है और पटना की सड़कों पर छात्रा को इंसाफ दिलाने के लिए लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। परिजनों की मांग है कि दोषियों को जल्द से जल्द फांसी की सजा दी जाए और लापरवाह पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।

यह रिपोर्ट उपलब्ध समाचार स्रोतों और परिजनों के बयानों के आधार पर संकलित की गई है।

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UP फ्री टैबलेट योजना 2026: नए साल में छात्रों की चमकेगी किस्मत, जानें कैसे मिलेगी मुफ्त टैबलेट और लिस्ट में अपना नाम

UP

UP Free Tablet Yojana 2026: उत्तर प्रदेश के होनहार छात्रों के लिए नया साल 2026 खुशियों की सौगात लेकर आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की महत्वाकांक्षी ‘स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना’ के तहत अब राज्य के लाखों छात्रों को मुफ्त टैबलेट बांटे जा रहे हैं।

अगर आप भी यूपी के सरकारी या प्राइवेट कॉलेज के छात्र हैं और डिजिटल पढ़ाई के लिए एक अच्छे टैबलेट का इंतज़ार कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए ही है। आइए जानते हैं इस योजना की पूरी एबीसीडी—पात्रता से लेकर आवेदन प्रक्रिया तक।

क्या है यूपी फ्री टैबलेट योजना 2026?

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए इस योजना की शुरुआत की थी। साल 2026 में इस वितरण अभियान को और भी तेज़ कर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य करीब 1 से 2 करोड़ छात्रों तक डिजिटल पहुंच बनाना है। इसके लिए लगभग 3000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है।

UP फ्री टैबलेट योजना 2026

खास बात यह है कि इन टैबलेट्स में पहले से ही ई-लर्निंग ऐप्स, सरकारी योजनाओं की जानकारी और जॉब पोर्टल के लिंक्स मौजूद होंगे, ताकि छात्रों को पढ़ाई और करियर बनाने में कोई दिक्कत न आए।

किसे मिलेगा लाभ? (Eligibility Criteria)

इस योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार ने कुछ जरूरी शर्तें रखी हैं:

मूल निवास: छात्र का उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है।

शैक्षणिक योग्यता: छात्र 10वीं या 12वीं पास होना चाहिए और वर्तमान में ग्रेजुएशन (BA, BSc, BCom), पोस्ट ग्रेजुएशन, आईटीआई (ITI), डिप्लोमा, या किसी भी टेक्निकल/स्किल कोर्स में नामांकित होना चाहिए।

आय सीमा: परिवार की कुल सालाना आय 2 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।

अन्य: अगर कोई बाहरी राज्य का छात्र यूपी के किसी संस्थान में पढ़ाई कर रहा है, तो वह भी पात्र है। लेकिन यूपी का छात्र यदि दूसरे राज्य में पढ़ रहा है, तो उसे इसका लाभ नहीं मिलेगा।

जरूरी दस्तावेज (Documents Required)

आवेदन करने से पहले इन कागजातों को तैयार रखें:

• आधार कार्ड

• निवास प्रमाण पत्र (Domicile)

• आय प्रमाण पत्र (Income Certificate)

• पिछली कक्षा की मार्कशीट और वर्तमान कॉलेज का आईडी कार्ड/प्रवेश पत्र

• पासपोर्ट साइज फोटो

• कॉलेज एनरोलमेंट नंबर

आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step Process)

यूपी फ्री टैबलेट योजना के लिए आवेदन की प्रक्रिया काफी सरल है:

आधिकारिक वेबसाइट: सबसे पहले digishakti.up.gov.in या [संदिग्ध लिंक हटा दिया गया] पर जाएं।

रजिस्ट्रेशन: ‘मेरी पहचान’ पोर्टल के जरिए eKYC पूरा करें और रजिस्ट्रेशन करें।

डिटेल्स भरें: अपना नाम, मोबाइल नंबर, आधार और एनरोलमेंट नंबर जैसी जानकारी सही-सही भरें।

दस्तावेज अपलोड: मांगी गई मार्कशीट और अन्य फोटो अपलोड करें।

सबमिट: फॉर्म जमा करने के बाद कॉलेज से अपनी डिटेल्स वेरीफाई जरूर करवाएं।

लेटेस्ट अपडेट: जनवरी 2026 में क्या चल रहा है?

ताजा जानकारी के मुताबिक, जनवरी 2026 से जिलों में बैचवाइज लिस्ट जारी होना शुरू हो गई है। लखनऊ की बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी (BBAU) जैसे बड़े संस्थानों में वितरण की प्रक्रिया पहले ही गति पकड़ चुकी है। अब 2026 सत्र के नए छात्रों के लिए कॉलेज स्तर पर डेटा फीडिंग की जा रही है।

UP फ्री टैबलेट योजना 2026

प्रो टिप: छात्र अपने कॉलेज के नोडल अधिकारी या क्लर्क से संपर्क में रहें, क्योंकि टैबलेट का वितरण पोर्टल के साथ-साथ कॉलेज कैंपसों में ही फिजिकल रूप से किया जाएगा।

Disclaimer: यह जानकारी उपलब्ध सरकारी पोर्टल्स और हालिया वीडियो अपडेट्स पर आधारित है। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट digishakti.up.gov.in पर विजिट करें।

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