PM-KISAN 19वीं किस्त 2026: कब आएंगे आपके खाते में ₹2000? यहाँ जानें तारीख, पात्रता और स्टेटस चेक करने का तरीका

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PM Kisan 19th Installment Date 2026: देश के करोड़ों किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। केंद्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना, ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ PM-KISAN के तहत 19वीं किस्त जल्द ही जारी होने वाली है। बजट 2026 के बाद किसानों को मिलने वाली यह पहली सौगात होगी, जो खेती-किसानी के खर्चों में बड़ी मदद प्रदान करेगी।

फरवरी 2026 में जारी हो सकती है 19वीं किस्त

ताजा मीडिया रिपोर्ट्स और पिछले रुझानों के अनुसार, PM-KISAN की 19वीं किस्त फरवरी 2026 के दूसरे या तीसरे सप्ताह में जारी होने की प्रबल संभावना है। जानकारों का मानना है कि 24 फरवरी 2026 के आसपास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक भव्य कार्यक्रम के माध्यम से देशभर के 9.8 करोड़ से अधिक पात्र किसानों के खातों में ₹2000 की राशि सीधे ट्रांसफर (DBT) कर सकते हैं।

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गौरतबल है कि 18वीं किस्त के 4 महीने बाद यह राशि जारी की जा रही है। पिछली बार 2025 में बिहार के भागलपुर से किस्त लॉन्च की गई थी, इसलिए इस बार भी संभावना जताई जा रही है कि बिहार या किसी अन्य चुनावी राज्य से इस योजना का अगला चरण शुरू किया जाए।

9.8 करोड़ किसानों को मिलेगा ₹22,000 करोड़ का लाभ

इस बार केंद्र सरकार कुल ₹22,000 करोड़ की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में हस्तांतरित करने की तैयारी में है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करना है। सालाना ₹6000 की इस सहायता को तीन समान किस्तों (₹2000 प्रत्येक) में दिया जाता है।

इन किसानों की अटक सकती है किस्त: eKYC है अनिवार्य

अगर आप पीएम किसान योजना के लाभार्थी हैं, तो सावधान हो जाएं। बिना eKYC अपडेट कराए आपकी 19वीं किस्त रुक सकती है। सरकार ने पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए निम्नलिखित शर्तें अनिवार्य कर दी हैं:

eKYC अपडेट: पोर्टल पर जाकर बायोमेट्रिक या OTP के जरिए eKYC पूरा करें।

भू-सत्यापन (Land Seeding): आपकी खेती की जमीन का सरकारी रिकॉर्ड में सत्यापन होना जरूरी है।

आधार-बैंक लिंकिंग: आपका बैंक खाता आधार से लिंक होना चाहिए और DBT (Direct Benefit Transfer) के लिए इनेबल्ड होना चाहिए।

बिहार और अन्य राज्यों पर विशेष प्रभाव

बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्यों में इस योजना का व्यापक असर देखा जा रहा है। अकेले पटना जैसे जिलों में 20 लाख से अधिक किसान इस लाभ की प्रतीक्षा कर रहे हैं। बिहार के किसानों के लिए सरकार विशेष कैंप लगाकर Farmer ID रजिस्ट्री और त्रुटियों को सुधारने का काम कर रही है।

PM-KISAN स्टेटस कैसे चेक करें?

अपना नाम लाभार्थी सूची में चेक करने के लिए इन स्टेप्स का पालन करें:

• सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट [संदिग्ध लिंक हटा दिया गया] पर जाएं।

• होमपेज पर ‘Know Your Status’ विकल्प पर क्लिक करें।

• अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और कैप्चा कोड दर्ज करें।

• ‘Get Data’ पर क्लिक करते ही आपकी किस्त का स्टेटस (FTO processed या Payment Success) स्क्रीन पर आ जाएगा।

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यदि आपके स्टेटस में कोई समस्या दिख रही है, तो तुरंत अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या जिला कृषि विभाग के कार्यालय से संपर्क करें।

PM-KISAN योजना न केवल किसानों की आय में वृद्धि कर रही है, बल्कि उन्हें साहूकारों के चंगुल से भी बचा रही है। 19वीं किस्त के आने से रबी की फसलों के प्रबंधन और आगामी सीजन की तैयारी में किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। योजना से जुड़ी ताजा जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल पर नजर बनाए रखें।

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बिहार में रचा जाएगा इतिहास: विराट रामायण मंदिर में आज(17) जनवरी को होगी विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना, सीएम नीतीश होंगे साक्षी

बिहार

पूर्वी चंपारण, बिहार: बिहार के धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास में आज (17) जनवरी 2026 का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। पूर्वी चंपारण जिले के कैथवलिया (चकिया-केसरिया पथ) में निर्माणाधीन ‘विराट रामायण मंदिर‘ में दुनिया के सबसे विशाल शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। इस ऐतिहासिक अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

विराट रामायण मंदिर

महा आयोजन का शुभ मुहूर्त और कार्यक्रम

यह भव्य आयोजन माघ कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि के पावन संयोग पर हो रहा है। कार्यक्रम की रूपरेखा कुछ इस प्रकार है:

सुबह 08:00 बजे: मुख्य अभिषेक और विशेष पूजा का शुभारंभ होगा। काशी (वाराणसी) से आए विद्वान पंडितों की देखरेख में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अनुष्ठान शुरू होगा।

पवित्र नदियों का जल: शिवलिंग का अभिषेक सिंधु, नर्मदा, गंडक और गंगा जैसी पवित्र नदियों के जल से किया जाएगा।

सुबह 09:00 से 11:00 बजे: इस दौरान हवन, सहस्रलिंग स्थापना और अन्य जरूरी वैदिक विधियां पूरी की जाएंगी।

दोपहर 12:00 बजे के बाद: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समारोह में शामिल होकर मंदिर परिसर का निरीक्षण करेंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके बाद भव्य महाआरती का आयोजन होगा।

शिवलिंग की खासियत: इंजीनियरिंग और आस्था का बेजोड़ संगम

यह शिवलिंग केवल आस्था का ही नहीं, बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग का भी एक अद्भुत नमूना है:

विशाल आकार: यह शिवलिंग 33 फीट ऊँचा और 33 फीट चौड़ा है। इसका कुल वजन लगभग 210 मीट्रिक टन है।

लागत और निर्माण: तमिलनाडु के महाबलीपुरम में इसे एक ही काले ग्रेनाइट पत्थर को तराश कर बनाया गया है। इसे बनाने में 10 साल का समय और करीब 3 करोड़ रुपये की लागत आई है।

विशेष माला और श्रृंगार: स्थापना के दिन महादेव को 18 फीट लंबी विशेष माला अर्पित की जाएगी, जिसमें फूल, भांग, धतूरा और बेलपत्र पिरोए गए होंगे। सजावट के लिए विशेष फूल विदेशों से मंगाए गए हैं।

कैसे हुई स्थापना की तैयारी?

इतने विशाल शिवलिंग को स्थापित करना एक बड़ी चुनौती थी। इसके लिए राजस्थान और भोपाल से 750 टन क्षमता वाली दो विशाल क्रेनें मंगाई गई हैं। तकनीकी बारीकियों को सुनिश्चित करने के लिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की टीम भी लगातार काम कर रही है। शिवलिंग को तमिलनाडु से बिहार तक 96 चक्कों वाले एक विशेष ट्रक के जरिए लाया गया है।

विराट रामायण मंदिर

विराट रामायण मंदिर का स्वरूप

जब यह मंदिर पूरी तरह बनकर तैयार होगा, तो यह कंबोडिया के अंकोरवाट मंदिर से भी बड़ा होगा।

• इसकी लंबाई 1080 फीट और चौड़ाई 540 फीट होगी।

• इसमें कुल 22 मंदिर और 18 शिखर होंगे, जिनमें मुख्य शिखर की ऊँचाई 270 फीट होगी।

श्रद्धालुओं में भारी उत्साह

इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए बड़े पैमाने पर पूजा पंडाल, वीआईपी गैलरी और सुरक्षा के इंतजाम किए हैं।

यह शिवलिंग स्थापना न केवल बिहार बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का विषय है, जो आने वाले समय में विश्व स्तर पर पर्यटन और आस्था का एक बड़ा केंद्र बनेगा।

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Bijnor Dog Miracle: 3 दिन से हनुमान जी की परिक्रमा कर रहा कुत्ता! ‘भक्ति’ है या जानलेवा बीमारी? जानिए 5 बड़े सच आस्था का चमत्कार या विज्ञान की अनदेखी?

Bijnor

क्या कोई जानवर भगवान की भक्ति कर सकता है? क्या उसे भी ‘मोक्ष’ और ‘परिक्रमा’ का ज्ञान हो सकता है? उत्तर प्रदेश के बिजनौर (Bijnor) में इन दिनों एक ऐसा नज़ारा देखने को मिल रहा है जिसने पूरे देश को हैरान कर दिया है। एक कुत्ता पिछले 3-4 दिनों से लगातार, बिना रुके, बिना खाए-पिए हनुमान जी की मूर्ति की परिक्रमा (

Circling) कर रहा है। हज़ारों लोग इसे ‘चमत्कार’ मानकर पूजा कर रहे हैं, चढ़ावा चढ़ा रहे हैं। लेकिन क्या यह सच में भक्ति है? या फिर हम एक बेजुबान की ‘तड़प’ को ‘तपस्या’ समझ बैठे हैं?

आज इस ब्लॉग में हम जानेंगे बिजनौर के इस वायरल वीडियो का पूरा सच और वह मेडिकल कारण (Medical Reason) जो शायद इस कुत्ते की जान ले रहा है।

Bijnor

बिजनौर के मंदिर में आखिर हो क्या रहा है?

  • घटना बिजनौर जिले के नगीना (Nagina) तहसील के पास स्थित नंदपुर गांव की है।
  • यहाँ के एक हनुमान मंदिर में एक कुत्ता पिछले 72 घंटों से भी ज्यादा समय से मूर्ति के गोल-गोल चक्कर काट रहा है।
  • बिना रुके: प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यह कुत्ता न तो रुक रहा है और न ही सो रहा है।
  • खाना-पीना त्यागा: ग्रामीणों ने उसे रोटी-बिस्किट देने की कोशिश की, लेकिन उसने कुछ नहीं खाया।
  • देवी मां की भी परिक्रमा: हनुमान जी के बाद अब यह कुत्ता माँ दुर्गा की मूर्ति के भी चक्कर काटने लगा है, जिससे लोगों का विश्वास और गहरा हो गया है।

‘कबूतर’ वाली घटना ने बढ़ाया अंधविश्वास

इस मामले में ‘चमत्कार’ का एंगल तब और मजबूत हो गया जब एक अजीब घटना घटी।

ग्रामीणों का दावा है कि परिक्रमा के दौरान कुत्ता कुछ देर के लिए बैठा था, तभी एक जंगली कबूतर आकर उसके सिर पर बैठ गया। कुछ देर बाद वह कबूतर वहीं मर गया।

  • बस फिर क्या था! लोगों ने इसे “दैवीय शक्ति” मान लिया।
  • कोई कह रहा है कि यह कुत्ता पिछले जन्म में कोई महान संत था।
  • कोई इसे कलयुग में हनुमान जी का साक्षात चमत्कार बता रहा है।
  • भीड़ इतनी बढ़ गई है कि पुलिस को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी।

साइंस क्या कहता है? (The Medical Truth)

अब आते हैं कड़वे सच पर। जिसे हम ‘भक्ति’ समझ रहे हैं, वह असल में “Circling Disease” या एक गंभीर Neurological Disorder हो सकता है।

पशु चिकित्सकों (Veterinary Doctors) और मेडिकल साइंस के अनुसार, जब कोई कुत्ता लगातार गोल-गोल घूमने लगता है, तो यह कोई चमत्कार नहीं, बल्कि खतरे की घंटी है। इसके मुख्य 3 कारण हो सकते हैं:

  • Brain Tumor (ब्रेन ट्यूमर): अगर दिमाग के अगले हिस्से (Forebrain) में ट्यूमर हो जाए, तो जानवर अपना संतुलन खो देता है और एक ही दिशा में घूमने के लिए मजबूर हो जाता है।
  • Head Injury (सिर में चोट): अगर कुत्ते को किसी ने सिर पर मारा हो या कोई अंदरूनी चोट लगी हो, तो दिमाग का संतुलन बिगड़ जाता है। डॉक्टरों ने बिजनौर वाले कुत्ते में भी इसकी आशंका जताई है।
  • Canine Vestibular Disease: यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें कान के अंदरूनी हिस्से (जो बैलेंस बनाता है) में इन्फेक्शन हो जाता है। इससे कुत्ते को लगता है कि दुनिया घूम रही है और वह खुद भी घूमने लगता है।

हमारा समाज: इलाज की जगह पूजा क्यों?

  • यह घटना हमारी शिक्षा व्यवस्था (Education System) और मानसिकता पर एक करारा तमाचा है।
  • जिस कुत्ते को तुरंत इलाज और ग्लूकोज की जरूरत थी, उसे लोग घेरकर वीडियो बना रहे हैं और ‘जय श्री राम’ के नारे लगा रहे हैं।
  • फिल्में और टीवी सीरियल्स ने हमारे दिमाग को ऐसा ‘वॉश’ (Brainwash) कर दिया है कि हमें हर असामान्य घटना में ‘ईश्वर’ दिखने लगता है, ‘तर्क’ (Logic) नहीं।
  • अगर किसी इंसान को दिल का दौरा पड़े और वह तड़पने लगे, तो क्या हम उसे अस्पताल ले जाएंगे या उसे ‘माता आ गई’ कहकर पूजा करेंगे? तो फिर इस बेजुबान के साथ ऐसा अन्याय क्यों?

बेजुबान की जान खतरे में है

स्थानीय पशु चिकित्सकों की टीम ने मौके पर जाकर जांच की है और आशंका जताई है कि कुत्ते की दिमागी हालत ठीक नहीं है।

लगातार घूमने से:

उसका शरीर Dehydrate (पानी की कमी) हो रहा है।

उसके पैरों और जोड़ों में भयानक दर्द हो रहा होगा।

अगर उसे जल्द ही सही इलाज (Sedation/Treatment) नहीं मिला, तो उसकी मौत हो सकती है—भक्ति से नहीं, बल्कि थकान और बीमारी से।

Bijnor

आस्था अपनी जगह, इंसानियत अपनी जगह

  • ईश्वर कण-कण में है, यह मानना हमारी संस्कृति है। लेकिन एक बीमार जानवर को भगवान मानकर उसे तिल-तिल मरने के लिए छोड़ देना—यह न तो धर्म है और न ही इंसानियत।
  • बिजनौर का यह कुत्ता ‘भक्त’ नहीं, बल्कि ‘मरीज’ है। हमें अंधविश्वास का चश्मा उतारकर उसे बचाने की जरूरत है, पूजने की नहीं।

आपकी राय: क्या प्रशासन को भीड़ हटाकर उस कुत्ते को जबरदस्ती अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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बिहार सुपौल हादसा: घर में टीवी देख रही लड़की को गोली, UD केस हत्या बना

सुपौल

सुपौल जिले के भीमनगर थाना क्षेत्र में 11वीं कक्षा की छात्रा अपेक्षा सिंह (16 वर्ष) की संदिग्ध मौत ने सनसनी फैला दी है। परिजनों ने शुरू में इसे सीढ़ियों से गिरने का हादसा बताया था, लेकिन पोस्टमॉर्टम में उसके शरीर से गोली निकलने और गोली लगने के स्पष्ट निशान मिलने से मामला हत्या का बन गया।

घटना का विवरण

घटना मंगलवार शाम करीब 4:30 से 5:00 बजे के बीच घटी। अपेक्षा घर के मुख्य हॉल में आराम से टीवी देख रही थीं। अचानक एक तेज आवाज आई, जो गिरने जैसी लगी। परिवार के सदस्य दौड़कर पहुंचे तो अपेक्षा खून से लथपथ जमीन पर पड़ी थीं। उनका सिर फटा हुआ था और शरीर पर चोट के गंभीर निशान थे। परिजनों ने तुरंत उन्हें नजदीकी अनुमंडलीय अस्पताल वीरपुर ले जाया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद मृत घोषित कर दिया। परिवार ने पुलिस को दी शिकायत में केवल सीढ़ियों से गिरने या हादसे का जिक्र किया, गोली या हिंसा का कोई उल्लेख नहीं था।

सुपौल

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट

सदर अस्पताल सुपौल में बुधवार को हुए पोस्टमॉर्टम में डॉक्टरों ने शव से गोली निकाली और मौत का कारण गोली लगना पाया।डॉ. ठाकुर प्रसाद ने पुष्टि की कि बुलेट इंजरी से मौत हुई। परिजनों ने पुलिस को दिए आवेदन में गोली का जिक्र नहीं किया था।

पुलिस जांच

भीमनगर थाने में यूडी केस दर्ज किया गया था, लेकिन रिपोर्ट के बाद पुलिस ने सभी पहलुओं पर जांच तेज कर दी | एसपी शरथ आरएस ने कहा कि परिजनों के बयान संदेह के घेरे में हैं और गोली कैसे लगी, इसकी तहकीकात हो रही है। पुलिस हर संभावना, जैसे हत्या या साजिश, की जांच कर रही है।

पुलिस ने कहा कि 48 घंटे में क्लू मिल सकता है। फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है। यह घटना बिहार के कोसी क्षेत्र में छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल उठा रही है। परिवार शोक में डूबा है, लेकिन जांच से सच्चाई सामने आएगी। कुल मिलाकर, यह मामला अब हत्या का रूप ले चुका है

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NEET PG Reservation: -40 नंबर वाले करेंगे अब आपका ऑपरेशन? डॉक्टर बनने की रेस में ‘योग्यता’ की मौत! 3 कड़वे सच 

NEET PG

ज़रा सोचिए, आप अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हैं। आपकी सर्जरी होने वाली है। आपको पता चलता है कि जिस डॉक्टर के हाथ में नश्तर (Scalpel) है, उसने अपनी डिग्री ‘काबिलियत’ से नहीं, बल्कि ‘कोटे’ और ‘कम किए गए कट-ऑफ’ की बदौलत पाई है। क्या आप अपनी जान उसे सौंपेंगे? यह सवाल डरावना है, लेकिन आज के मेडिकल सिस्टम का यह वो काला सच है जिस पर बात करने से सब डरते हैं। NEET PG (MD/MS) में जिस तरह से कट-ऑफ गिराए जा रहे हैं और रिजर्वेशन का खेल खेला जा रहा है, उसने पूरी दुनिया के सामने भारतीय चिकित्सा व्यवस्था (Medical System) की साख पर बट्टा लगा दिया है।

क्या सच में -40 या जीरो नंबर लाने वाला व्यक्ति एक ‘स्पेशलिस्ट सर्जन’ बनने के लायक है? आज इस ब्लॉग में हम सरकार, सिस्टम और उन प्रदर्शनकारियों से सीधी बात करेंगे।

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मेरिट की हत्या: जब ‘काबिलियत’ हार जाए और ‘जाति’ जीत जाए

  • खबर यह है कि मेडिकल की पोस्ट-ग्रेजुएट सीटों (MD/MS) को भरने के लिए कट-ऑफ को पाताल लोक तक गिरा दिया जाता है। पिछले साल हमने देखा कि ‘ज़ीरो परसेंटाइल’ (0 Percentile) वाले को भी एलिजिबल कर दिया गया। और अब चर्चा है कि नेगेटिव मार्क्स या बेहद कम नंबर लाने वाले (SC/ST/OBC कोटे के तहत) भी स्पेशलिस्ट डॉक्टर बन सकेंगे।
  • यह 10वीं का बोर्ड एग्जाम नहीं है। यह न्यूरोसर्जरी, कार्डियोलॉजी और ऑर्थोपेडिक्स है। यहाँ एक गलती की कीमत ‘जान’ देकर चुकानी पड़ती है।
  • जब एक जनरल कैटेगिरी का छात्र 500 नंबर लाकर भी सीट के लिए तरसता है, और दूसरी तरफ आरक्षित वर्ग का छात्र बेहद कम नंबर (यहाँ तक कि माइनस या सिंगल डिजिट) पर वही सीट पा लेता है, तो यह सवाल उठता है—क्या बीमारी मरीज की जाति देखकर हमला करती है? अगर नहीं, तो इलाज करने वाला डॉक्टर जाति के आधार पर क्यों चुना जा रहा है?

वो ‘हीन भावना’ और दंगों का सच

  • मेरा सवाल सरकार से तो है ही, लेकिन उससे भी बड़ा सवाल उन लोगों से है जो आरक्षण के लिए सड़कों पर उतर आते हैं।
  • आप MBBS कर चुके हैं। आप डॉक्टर बन चुके हैं। समाज में आप अब ‘दलित’ या ‘पिछड़े’ नहीं, बल्कि ‘डॉक्टर साहब’ हैं। आप आर्थिक रूप से सक्षम हैं। फिर भी आपको PG (स्पेशलिस्ट बनने) के लिए वैसाखी (Crutches) क्यों चाहिए?
  • जैसे ही कोई सरकार क्रीमी लेयर (Creamy Layer) की बात करती है या मेरिट की बात करती है, तुरंत ‘भारत बंद’ और आंदोलन शुरू हो जाते हैं।
  • आत्मसम्मान कहां है? क्या आरक्षण के लिए लड़ना यह स्वीकार करना नहीं है कि “हम खुद को कमजोर मानते हैं, हम बिना छूट के मुकाबला नहीं कर सकते”?
  • फायदे की लत: यह अब सामाजिक न्याय की लड़ाई नहीं रही, यह ‘सुविधा’ और ‘शॉर्टकट’ की लत बन गई है। जो सच में गरीब है, उसे फायदा मिल नहीं रहा, और जो अमीर डॉक्टर हैं, वो कोटे का लाभ उठा रहे हैं।

सम्मान की भीख नहीं मांगी जा सकती

  • आरक्षण का मूल उद्देश्य था—भेदभाव खत्म करना। लेकिन आज मेडिकल कॉलेजों में क्या हो रहा है?
  • जब एक छात्र 80% नंबर लाकर क्लास में बैठता है और उसके बगल में 20% नंबर वाला छात्र ‘कोटे’ से बैठता है, तो नज़रिया अपने आप बदल जाता है।
  • आप कानून बनाकर सीट तो दिला सकते हैं, लेकिन ‘इज्जत’ (Respect) नहीं।
  • लोग उस डॉक्टर को शक की निगाह से देखते हैं— “ये रिजर्वेशन वाला है या मेरिट वाला?”
  • यह सिस्टम खुद आरक्षित वर्ग के काबिल छात्रों का नुकसान कर रहा है। उनकी मेहनत पर भी ‘कोटे का ठप्पा’ लग जाता है।

अगर आप सच में चाहते हैं कि समाज आपको बराबरी की नज़र से देखे, तो आपको खुद आगे आकर कहना होगा— “हमें खैरात नहीं, मुकाबला चाहिए।” लेकिन अफ़सोस, वोट बैंक की राजनीति ऐसा होने नहीं देगी।

सरकार का दोगलापन: प्राइवेट सीटों का खेल

  • इसमें सरकार भी दूध की धुली नहीं है। कट-ऑफ को माइनस या जीरो तक गिराने के पीछे ‘सामाजिक न्याय’ नहीं, बल्कि ‘व्यापार’ है।
  • भारत में हजारों प्राइवेट मेडिकल सीटें हैं जिनकी फीस करोड़ों में है। मेरिट वाला छात्र इतनी फीस दे नहीं सकता। और जिनके पास पैसा है, उनके पास दिमाग (नंबर) नहीं है।
  • इसलिए सरकार कट-ऑफ गिरा देती है ताकि अमीर (चाहे किसी भी जाति का हो) पैसे फेंककर सीट खरीद सके और कॉलेज मालिकों की जेब भर सके। इस खेल में पिसता सिर्फ आम आदमी है जो सरकारी अस्पताल में इलाज कराने जाता है।
  • NEET PG

जागो, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए

  • आरक्षण स्कूल लेवल तक समझ आता है, कॉलेज तक भी बर्दाश्त किया जा सकता है। लेकिन सुपर-स्पेशलिटी (Super Speciality) में आरक्षण और गिरता हुआ कट-ऑफ देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
  • अगर अब भी हम नहीं जागे और योग्यता (Merit) को प्राथमिकता नहीं दी, तो वो दिन दूर नहीं जब भारत के पास डिग्रियां तो बहुत होंगी, लेकिन इलाज करने वाले ‘डॉक्टर’ नहीं बचेंगे।

आपकी राय: क्या डॉक्टर बनने के लिए जाति का आरक्षण होना चाहिए या सिर्फ मेरिट? कमेंट बॉक्स में अपनी राय खुलकर रखें।

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बिहार शराबबंदी तोड़ने की कोशिश: मऊ में गोपालगंज के तस्करों से 50 हजार की शराब बरामद

बिहार

मऊ (उत्तर प्रदेश) से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ पुलिस ने बिहार में शराब तस्करी की एक बड़ी कोशिश को नाकाम कर दिया है। मऊ जिले की दक्षिण टोला थाना पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए दो बिहारी शराब तस्करों को रंगे हाथ दबोचा है। ये दोनों तस्कर मूल रूप से बिहार के गोपालगंज जिले के रहने वाले हैं और करीब 50 हजार रुपये की अंग्रेजी शराब लेकर बिहार जा रहे थे।

कैसे हुई गिरफ्तारी?

यह कार्रवाई एक सटीक मुखबिर की सूचना पर की गई। दक्षिण टोला पुलिस को सूचना मिली थी कि एक सफेद रंग की टाटा पंच कार, जिस पर फर्जी नंबर प्लेट लगी है, भारी मात्रा में अवैध शराब लेकर गाजीपुर के रास्ते बिहार की तरफ निकलने वाली है।

बिहार

पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मतलूपुर मोड़ के पास घेराबंदी की। जैसे ही संदिग्ध कार वहाँ पहुँची, पुलिस ने उसे रुकने का इशारा किया। कार सवारों ने भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस टीम ने उन्हें चारों तरफ से घेर कर पकड़ लिया।

तस्करों की पहचान

पकड़े गए दोनों युवक बिहार के रहने वाले हैं और पेशेवर तरीके से तस्करी में शामिल लग रहे हैं। पुलिस द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार:

• रमन कुमार

• रोहित राय (कुछ रिपोर्ट्स में नाम राहित राय भी बताया गया है)

ये दोनों तस्कर बिहार के गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत दिघवा दुबौली गांव के निवासी हैं। पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया कि वे लंबे समय से इस काम में शामिल हैं।

क्या-क्या हुआ बरामद?

पुलिस ने जब टाटा पंच कार की तलाशी ली, तो उसमें से भारी मात्रा में अवैध सामान मिला:

• शराब: विभिन्न ब्रांडों की अंग्रेजी शराब की बोतलें बरामद हुईं, जिनकी कुल बाजार कीमत लगभग 50,000 रुपये आंकी गई है।

• वाहन: तस्करी में इस्तेमाल की जा रही टाटा पंच कार को जब्त कर लिया गया है।

• फर्जीवाड़ा: कार पर जो नंबर प्लेट लगी थी, वह फर्जी पाई गई। तस्करों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए अक्सर इस्तेमाल किए जाने वाले इस तरीके का सहारा लिया था।

तस्करी का रास्ता

पूछताछ के दौरान तस्करों ने बताया कि वे देवरिया से निकले थे और मुहम्मदाबाद गोहना में अपने एक साथी से मिलने के बाद गाजीपुर होते हुए बिहार की सीमा में घुसने वाले थे। बिहार में पूर्ण शराबबंदी होने के कारण उत्तर प्रदेश से शराब ले जाकर वहां ऊंचे दामों पर बेचना इनका मुख्य उद्देश्य था। विशेष रूप से मकर संक्रांति के त्योहार के समय बिहार में शराब की डिमांड बढ़ जाती है, जिसका फायदा ये तस्कर उठाना चाहते थे।

बिहार

पुलिस की कार्रवाई

मऊ पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम और धोखाधड़ी (फर्जी नंबर प्लेट के लिए) की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इनके नेटवर्क को खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उत्तर प्रदेश में इन्हें शराब की सप्लाई कौन दे रहा था और बिहार में ये किसे माल डिलीवर करने वाले थे।

बिहार में शराबबंदी के बाद से सीमावर्ती जिलों जैसे गोपालगंज और यूपी के मऊ, देवरिया, बलिया में पुलिस की सतर्कता काफी बढ़ गई है, फिर भी तस्कर नए-नए तरीकों से तस्करी को अंजाम देने की कोशिश करते रहते हैं।

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Mathura Hospital Horror: जेब में ‘मौत’ लेकर पहुंचा ड्राइवर! अस्पताल में मची भगदड़, जानिए 1 रोंगटे खड़े करने वाली वजह

Hospital

Hospital वह जगह है जहां लोग जान बचाने आते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के मथुरा में एक ऐसा वाकया हुआ जिसने डॉक्टरों और मरीजों को अपनी जान बचाने के लिए भागने पर मजबूर कर दिया। सोचिए, आप इमरजेंसी वार्ड में इलाज करा रहे हों और बगल के बेड पर लेटा मरीज अपनी जैकेट की जेब से जिंदा सांप निकाल कर मेज पर रख दे! जी हाँ, यह कोई फिल्मी सीन नहीं, बल्कि मथुरा जिला अस्पताल (District Hospital) की हकीकत है।

12-13 जनवरी की दरमियानी रात, एक ई-रिक्शा चालक ने वह किया जिसे सुनकर ही रूह कांप जाए। सांप के काटने के बाद वह रोया नहीं, बल्कि सांप को पकड़कर अपनी जेब में भर लाया। आखिर उसने ऐसा क्यों किया? क्या यह पागलपन था या कोई अजीबोगरीब समझदारी? आइए जानते हैं इस 12 जनवरी की रात की पूरी कहानी।

Hospital

खौफनाक शुरुआत: दीपक और वो जहरीला मेहमान

घटना मथुरा के मांट (Mant) इलाके की है। दीपक नाम का एक ई-रिक्शा चालक अपना दिन खत्म करके घर लौट रहा था। सर्दी का मौसम था, इसलिए उसने जैकेट पहन रखी थी। उसे अंदाजा भी नहीं था कि उसकी गाड़ी में एक बिन बुलाया ‘जहरीला मेहमान’ पहले से बैठा है।

जैसे ही दीपक ने कुछ हरकत महसूस की, सांप ने उसे काट लिया। आम इंसान होता तो चीखता-चिल्लाता और भाग खड़ा होता। लेकिन दीपक ने गजब की हिम्मत (या कहिए जोखिम) दिखाई। उसने सांप के भागने से पहले ही उसे दबोच लिया।

हैरानी की बात यह है कि उसने सांप को मारा नहीं। उसने उस फुफकारते हुए सांप को अपनी जैकेट की जेब में डाल लिया और सीधे जिला अस्पताल की तरफ रिक्शा दौड़ा दिया।

अस्पताल में ‘मौत’ की एंट्री: डॉक्टरों के उड़े होश

असली ड्रामा तब शुरू हुआ जब दीपक जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचा। उसकी हालत खराब हो रही थी, जहर फैल रहा था।

डॉक्टरों ने रूटीन सवाल पूछा— “किस चीज़ ने काटा है? कोई कीड़ा था या सांप?”

दीपक ने जवाब देने के बजाय अपनी जैकेट की जेब में हाथ डाला। डॉक्टरों को लगा वह कोई पर्ची या दवा निकाल रहा है। लेकिन अगले ही पल, दीपक ने वह सांप निकालकर डॉक्टर की मेज पर रख दिया।

वहां मौजूद स्टाफ की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। नज़ारा देख वार्ड में भगदड़ मच गई। तीमारदार अपने मरीजों को छोड़कर भागने लगे। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि जिस सांप ने इसे डसा है, वह उसे ही अपनी गोद में लेकर घूम रहा है।

वो 1 वजह: आखिर जेब में सांप क्यों लाया दीपक?

जब अफरा-तफरी थोड़ी शांत हुई, तो दीपक ने जो वजह बताई, उसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया।

गांव-देहात में एक पुरानी मान्यता है (जो कई बार मेडिकल लॉजिक भी होती है)— “डॉक्टर को सांप दिखा दोगे, तो इलाज सही होगा।”

दीपक का तर्क सीधा था: “साहब, अगर मैं बस बताता कि सांप ने काटा है, तो आप पूछते कौन सा सांप था? नाग था या करैत? मुझे पहचान नहीं थी। इसलिए मैं ‘सबूत’ ही साथ ले आया ताकि आप सही इंजेक्शन (Anti-venom) लगा सको।”

हालांकि, डॉक्टर इसे पागलपन मान रहे थे क्योंकि इससे उसकी और दूसरों की जान को खतरा बढ़ गया था। लेकिन दीपक के लिए यह जिंदगी और मौत की रेस थी, जिसमें वह कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था।

अब कैसी है दीपक की हालत?

गनीमत यह रही कि समय पर अस्पताल पहुंचने और (शायद सांप की पहचान हो जाने के कारण) डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू कर दिया।

* दीपक को एंटी-वेनम इंजेक्शन दिए गए हैं।

* फिलहाल वह खतरे से बाहर बताया जा रहा है, लेकिन डॉक्टरों ने उसे निगरानी (Observation) में रखा है।

* वन विभाग को सूचना दी गई है ताकि सांप को सुरक्षित जंगल में छोड़ा जा सके।

Hospital

निष्कर्ष: बहादुरी या बेवकूफी?

यह घटना सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रही है। कुछ लोग दीपक की हिम्मत की दाद दे रहे हैं, तो कुछ इसे जानलेवा बेवकूफी बता रहे हैं। लेकिन एक बात तय है—मथुरा के जिला अस्पताल के डॉक्टरों को यह रात हमेशा याद रहेगी।

सावधानी: अगर आपको कभी सांप काटे, तो कृपया उसे पकड़ने की कोशिश न करें। सांप की फोटो खींच लेना काफी है, उसे जेब में रखकर अस्पताल ले जाना आपकी जान को दोगुना खतरे में डाल सकता है।

आपका क्या मानना है? क्या दीपक ने सांप को साथ ले जाकर सही किया? कमेंट में अपनी राय जरूर लिखें।

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बिहार में ‘आतंकी’ हमले की धमकी ? पटना तथा अन्य अदालतो को RDX से उड़ाने की साजिश आई सामने ,जानिए पूरी खबर

बिहार

बिहार की न्यायिक व्यवस्था को दहलाने की एक बड़ी साजिश सामने आई है। राजधानी पटना के सिविल कोर्ट तथा राज्य के आधा दर्जन से अधिक जिला न्यायालयों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। ये संदेश ईमेल के जरिए भेजे गए ओर इस संदेश ने न केवल पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है, बल्कि आम नागरिकों और वकीलों के बीच भी दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। प्रशासन ने आनन-फानन में सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बना दिया है।

क्या है पूरा मामला?

बीते 8 जनवरी 2026 की सुबह पटना सिविल कोर्ट के रजिस्ट्रार को एक गुमनाम ईमेल प्राप्त हुआ। इस ईमेल में दावा किया गया कि कोर्ट परिसर के भीतर 3 RDX आधारित IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) प्लांट किए गए हैं। धमकी देने वाले ने खुद को ‘अरुण कुमार’ बताया और अपना संबंध कथित तौर पर प्रतिबंधित संगठन LTTE से होने का दावा किया।

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चौंकाने वाली बात यह है कि धमकी केवल पटना तक सीमित नहीं थी। गया, अररिया, किशनगंज, दानापुर और भागलपुर के सभी न्यायालयों को भी इसी तरह की डराने वाले मेल भेजे गए। संदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि शाम 4 बजे तक धमाके किए जाएंगे।

हरकत में आई प्रशासन

धमकी मिलने के तुरंत बाद पटना पुलिस और एटीएस (ATS) की टीमें सक्रिय हो गईं। पीरबहोर थाने की पुलिस के साथ बम निरोधक दस्ता (Bomb Disposal Squad) और डॉग स्क्वायड की कई टीमें पटना सिविल कोर्ट पहुंचीं।

•सबसे पहले सुरक्षा कारणों से न्यायाधीशों, वकीलों और वादियों को तुरंत परिसर से बाहर निकाला गया।

• उसके बाद कोर्ट के चप्पे-चप्पे, वकीलों के चैंबर, कैंटीन और पार्किंग स्टैंड की गहन तलाशी ली गई।

• परिणाम स्वरूप घंटों चली मशक्कत के बाद पुलिस को कोई भी संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, जिसके बाद राहत की सांस ली गई और इसे एक ‘होक्स’ (Hoax) या अफवाह करार दिया गया।

जांच में सामने आया तमिलनाडु कनेक्शन

बिहार पुलिस की प्रारंभिक जांच में एक महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगा है। पटना सिटी (सेंट्रल) एसपी दीक्षा के अनुसार, जिस ईमेल आईडी से यह धमकी भेजी गई थी, उसका डिजिटल फुटप्रिंट तमिलनाडु से जुड़ा हुआ मालूम हुआ ।

साइबर एक्सपर्ट्स के लिए दिक्कत

• VPN का उपयोग के कारण पुलिस को शक है कि अपराधी ने अपनी असली लोकेशन छिपाने के लिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) का सहारा लिया है।

• तमिल भाषा का अंश: ईमेल के कंटेंट में कुछ शब्द तमिल भाषा में लिखे थे, जो जांच को दक्षिण भारत की ओर मोड़ रहे हैं।

• मल्टी-स्टेट लिंक: इसी तरह की धमकियां उसी दिन ओडिशा, केरल और पंजाब की अदालतों को भी मिली थीं, जिससे यह एक समन्वित साइबर अटैक या पैनिक क्रिएट करने की बड़ी साजिश लगती है।

नए सुरक्षा नियम

इस घटना के बाद पटना हाई कोर्ट के निर्देश पर राज्य की सभी निचली अदालतों का सुरक्षा ऑडिट (Security Audit) शुरू कर दिया गया है। पटना सिविल कोर्ट में अब बिना गहन तलाशी के किसी को भी प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।

• CCTV निगरानी

• मेटल डिटेक्टर

• अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती

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वकीलों का कहना “बार-बार क्यों हो रहा ऐसा?”

पटना बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ वकीलों ने इस घटना पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। वकीलों का कहना है कि साल 2025 में भी दो बार इसी तरह की धमकियां मिली थीं, लेकिन आज तक मुख्य अपराधी सलाखों के पीछे नहीं पहुंचा है।

बिहार की अदालतों को मिली यह धमकी फिलहाल एक ‘अफवाह’ साबित हुई है, लेकिन इसने सुरक्षा व्यवस्था की कमियों को उजागर कर दिया है। पुलिस प्रशासन इसे गंभीरता से ले रही है और केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर ईमेल के मूल स्रोत तक पहुँचने की कोशिश कर रही है।

क्या आपको लगता है कि अदालतों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम केवल ऐसी धमकियों के बाद ही होने चाहिए, या वहां स्थायी रूप से एयरपोर्ट जैसी सिक्योरिटी होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।

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बिहार में गंगा हुई निर्मल: BSPCB की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, जानें कैसे STPs ने बदली पवित्र नदी की सूरत

गंगा

बिहार में गंगा नदी के प्रदूषण को लेकर वर्षों से जारी चिंता के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (BSPCB) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य में स्थापित किए गए नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STP) के कारण गंगा के पानी की गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार दर्ज किया गया है। अब नदी का पानी न केवल जलीय जीवों के लिए अनुकूल हो रहा है, बल्कि कई घाटों पर प्रदूषण के स्तर में भी भारी गिरावट आई है।

बिहार में गंगा की स्वच्छता: एक नया अध्याय

बिहार की जीवनदायिनी गंगा नदी, जो कभी बढ़ते शहरीकरण और अनियंत्रित सीवेज के कारण प्रदूषित हो रही थी, अब पुनर्जीवन की राह पर है। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (BSPCB) की हालिया रिपोर्ट यह संकेत देती है कि पिछले कुछ वर्षों में ‘नमामि गंगे’ परियोजना के तहत जो बुनियादी ढांचे तैयार किए गए हैं, उनका सकारात्मक असर अब जमीन पर दिखने लगा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पटना समेत बिहार के विभिन्न जिलों में एसटीपी (STP) की कार्यप्रणाली और उनकी बढ़ती क्षमता ने नदी में गिरने वाले गंदे पानी को रोकने में अहम भूमिका निभाई है। जहाँ पहले शहरों का कचरा सीधे गंगा की लहरों में मिलता था, अब उसे वैज्ञानिक तरीके से ट्रीट किया जा रहा है।

Sewage Treatment Plants (STP) का जादू: आंकड़ों की जुबानी

बिहार में गंगा नदी के किनारे बसे शहरों से रोजाना निकलने वाले सीवेज का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती रही है। आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में गंगा के किनारे स्थित शहरों से लगभग 455 MLD (मिलियन लीटर प्रतिदिन) सीवेज निकलता है। नमामि गंगे योजना से पहले, राज्य में केवल 124 MLD उपचार की क्षमता थी, जो अब बढ़कर कई गुना हो गई है।

पटना में बेऊर, कर्मलीचक और सैदपुर जैसे इलाकों में नए एसटीपी के चालू होने से गंगा में गिरने वाले ऑर्गेनिक लोड में भारी कमी आई है। BSPCB के अनुसार, नदी के पानी में घुलित ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen – DO) का स्तर बढ़ा है, जो पानी की शुद्धता का एक मुख्य मानक है।

पानी की गुणवत्ता में सुधार: क्या कहते हैं मानक?

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड गंगा के पानी की जांच 34 विभिन्न स्थानों पर पाक्षिक (Fortnightly) आधार पर करता है। हालिया जांच के परिणामों में कुछ महत्वपूर्ण बिंदु उभर कर आए हैं:

• pH लेवल और Dissolved Oxygen: गंगा के अधिकांश हिस्सों में pH मान और DO (घुलित ऑक्सीजन) का स्तर अब मानकों के अनुरूप पाया गया है। यह जलीय जीवन, विशेषकर लुप्तप्राय गंगा डॉल्फिन के लिए बहुत अच्छी खबर है।

• BOD (Biochemical Oxygen Demand): सीवेज ट्रीटमेंट के कारण BOD के स्तर में गिरावट आई है। रिपोर्ट के अनुसार, बक्सर से भागलपुर तक के कई हिस्सों में पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।

• बैक्टिरियोलॉजिकल सुधार: हालांकि ‘फिकल कोलिफॉर्म’ (Faecal Coliform) अभी भी कुछ जगहों पर चुनौती बना हुआ है, लेकिन एसटीपी के माध्यम से क्लोरिनेशन की प्रक्रिया ने इसे नियंत्रित करने में मदद की है।

पटना: स्वच्छता का मॉडल बनता शहर

राजधानी पटना में गंगा की स्थिति में सबसे अधिक बदलाव देखा गया है। पटना के बेऊर में 43 MLD क्षमता वाले एसटीपी और कर्मलीचक जैसे प्रोजेक्ट्स ने शहर के बड़े ड्रेनेज सिस्टम को गंगा में सीधे मिलने से रोक दिया है। बिहार शहरी बुनियादी ढांचा विकास निगम (BUIDCo) के अनुसार, पटना को 100% सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता वाला शहर बनाने का लक्ष्य अब अंतिम चरणों में है।

सरकार की ‘वन सिटी वन ऑपरेटर’ (One City One Operator) मॉडल वाली नीति ने इन प्लांट्स के रखरखाव और संचालन (O&M) को और अधिक प्रभावी बना दिया है। अब न केवल प्लांट बनाए जा रहे हैं, बल्कि उनकी 15 वर्षों तक की देखभाल की जिम्मेदारी भी तय की गई है।

जलीय जैव विविधता पर प्रभाव: डॉल्फिन की वापसी

पानी की गुणवत्ता सुधरने का सबसे बड़ा प्रमाण ‘गंगा डॉल्फिन’ की बढ़ती संख्या है। जब पानी में प्रदूषण कम होता है और ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है, तो मछलियों और अन्य जलीय जीवों की संख्या में वृद्धि होती है। बिहार के सुल्तानगंज से लेकर कहलगाम तक के क्षेत्र में अब डॉल्फिन का दिखना आम बात हो गई है, जो इस बात का सबूत है कि नदी का इकोसिस्टम फिर से जीवित हो रहा है।

गंगा

चुनौतियाँ अभी भी बरकरार: कोलिफॉर्म का मुद्दा

भले ही पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, लेकिन BSPCB की रिपोर्ट यह भी आगाह करती है कि ‘फिकल कोलिफॉर्म’ और ‘टोटल कोलिफॉर्म’ का स्तर अभी भी कुछ घाटों पर मानक से अधिक है। इसका मुख्य कारण कुछ छोटे नालों का अब भी सीधे नदी में गिरना और घाटों पर होने वाली मानवीय गतिविधियां हैं। बोर्ड का कहना है कि जैसे-जैसे राज्य के सभी 58 स्वीकृत प्रोजेक्ट्स पूरे होंगे, यह समस्या भी काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।

क्या आपको लगता है कि आपके शहर के पास गंगा के घाट अब पहले से ज्यादा स्वच्छ दिख रहे हैं? हमें कमेंट में जरूर बताएं!

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Patna High Court New Chief Justice: जस्टिस संगम कुमार साहू बने पटना हाईकोर्ट के 47वें मुख्य न्यायाधीश, जानें कौन हैं वो और क्या है उनका विजन

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बिहार की न्यायिक व्यवस्था में एक नए युग की शुरुआत हुई है। ओडिशा High Court के अनुभवी वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू ने Patna High Court के 47वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ले ली है। उनकी यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब राज्य की अदालतों में लंबित मामलों के निपटारे और न्यायिक सुधारों की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है।

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राजभवन में भव्य शपथ ग्रहण समारोह

बुधवार, 7 जनवरी 2026 को पटना स्थित राजभवन (लोक भवन) के ‘राजेंद्र मंडप’ में आयोजित एक गरिमापूर्ण समारोह में बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने जस्टिस संगम कुमार साहू को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार समेत कई कैबिनेट मंत्री और हाईकोर्ट के अन्य न्यायाधीश मौजूद रहे।

शपथ ग्रहण के बाद न्यायमूर्ति साहू को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके तुरंत बाद वे हाईकोर्ट पहुंचे, जहां शताब्दी हॉल में आयोजित फुल कोर्ट वेलकम सेरेमनी में अधिवक्ताओं और बार एसोसिएशन के सदस्यों ने उनका जोरदार स्वागत किया।

कौन हैं जस्टिस संगम कुमार साहू?

जस्टिस संगम कुमार साहू का कानूनी सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। उनके व्यक्तित्व और करियर से जुड़ी कुछ मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

जन्म और शिक्षा: जस्टिस साहू का जन्म 5 जून 1964 को ओडिशा के कटक में हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा नुआबाजार हाई स्कूल से पूरी की और स्टीवर्ट साइंस कॉलेज से स्नातक किया।

कानूनी पृष्ठभूमि: उन्होंने कटक लॉ कॉलेज से एलएलबी की डिग्री हासिल की। खास बात यह है कि उन्होंने अंग्रेजी और ओडिया साहित्य में एमए भी किया है, जो उनकी भाषाई पकड़ को दर्शाता है।

वकालत की शुरुआत: 26 नवंबर 1989 को उन्होंने ओडिशा स्टेट बार काउंसिल में एक वकील के रूप में अपना पंजीकरण कराया। उन्होंने अपने पिता, प्रसिद्ध आपराधिक वकील दिवंगत शरत चंद्र साहू के मार्गदर्शन में वकालत की बारीकियां सीखीं।

जज के रूप में सफर: उनकी प्रतिभा और कानूनी समझ को देखते हुए 2 जुलाई 2014 को उन्हें ओडिशा हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश और नियुक्ति

जस्टिस संगम कुमार साहू की नियुक्ति की प्रक्रिया दिसंबर 2025 में शुरू हुई थी। CJI सूर्यकांत के नेतृत्व वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 18 दिसंबर 2025 को उनके नाम की सिफारिश की थी। इसके बाद 1 जनवरी 2026 को केंद्र सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय ने राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद उनके नाम की आधिकारिक अधिसूचना जारी की।

बता दें कि अक्टूबर 2025 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस पवन कुमार भीमप्पा बाजन्त्री के सेवानिवृत्त होने के बाद से जस्टिस सुधीर सिंह कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

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पटना हाईकोर्ट के सामने चुनौतियां और प्राथमिकताएं

जस्टिस साहू के कार्यभार संभालने के साथ ही उम्मीदें बढ़ गई हैं। उनके सामने मुख्य रूप से तीन बड़ी चुनौतियां होंगी:

मामलों का भारी बोझ: पटना हाईकोर्ट भारत के सबसे पुराने और महत्वपूर्ण न्यायालयों में से एक है, लेकिन यहाँ लंबित मामलों (Pendency of Cases) की संख्या भी काफी अधिक है। जस्टिस साहू के पास क्रिमिनल और सर्विस लॉ में व्यापक अनुभव है, जो इन मामलों को तेजी से सुलझाने में मददगार साबित होगा।

डिजिटल न्याय व्यवस्था: ‘ई-कोर्ट’ प्रोजेक्ट को और सशक्त बनाना और जिला अदालतों में बुनियादी ढांचे को सुधारना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रह सकता है।

कानूनी सहायता: जस्टिस साहू ओडिशा में राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष रह चुके हैं। ऐसे में बिहार में गरीबों को मुफ्त और सुलभ न्याय दिलाने की दिशा में उनसे बड़े सुधारों की उम्मीद है।

आपको क्या लगता है, जस्टिस संगम कुमार साहू के नेतृत्व में क्या बिहार की अदालतों में लंबित मुकदमों की संख्या में कमी आएगी? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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