उत्तर प्रदेश में कृषि मशीनीकरण को पंख: SMAM योजना के तहत कृषि यंत्रों और ड्रोनों पर भारी सब्सिडी, आवेदन की तिथि बढ़ी

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ने और उनकी आय दोगुनी करने के लक्ष्य के साथ ‘सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन’ (SMAM) योजना के तहत एक बड़ा अवसर प्रदान किया है। इस योजना के माध्यम से किसान कृषि यंत्रों, हाई-टेक ड्रोनों और फसल अवशेष प्रबंधन (इन-सिटू मैनेजमेंट) उपकरणों पर 50% तक की भारी सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं। हाल ही में तकनीकी कारणों और किसानों की भारी मांग को देखते हुए आवेदन की अंतिम तिथि को भी आगे बढ़ाया गया है।

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योजना का मुख्य आकर्षण: सब्सिडी का गणित

इस योजना के तहत किसानों को विभिन्न श्रेणियों में आर्थिक सहायता दी जा रही है:

व्यक्तिगत कृषि यंत्र: रोटावेटर, कल्टीवेटर, सीड ड्रिल और पावर टिलर जैसे उपकरणों पर लागत का 40% से 50% तक अनुदान दिया जा रहा है।

फसल अवशेष प्रबंधन: पराली जलाने की समस्या को समाप्त करने के लिए सरकार सुपर एसएमएस, हैप्पी सीडर, मल्चर और रीपर जैसे यंत्रों पर विशेष जोर दे रही है।

कृषि ड्रोन: कीटनाशकों के सटीक छिड़काव और खेतों की निगरानी के लिए ड्रोनों की खरीद पर भी भारी छूट उपलब्ध है।

कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC): जो किसान या समूह खुद का ‘फार्म मशीनरी बैंक’ खोलना चाहते हैं, उन्हें केंद्र स्थापना के लिए 40% से 80% तक की सब्सिडी का प्रावधान है।

महत्वपूर्ण तिथियां और टोकन प्रक्रिया

आवेदन की प्रक्रिया 8 जनवरी 2026 से शुरू हुई थी। किसानों की सुविधा के लिए अब पोर्टल को अतिरिक्त समय के लिए खोला गया है, जिससे जो किसान छूट गए थे, वे अपना आवेदन पूरा कर सकें।

टोकन मनी: 1 लाख रुपये से अधिक की सब्सिडी वाले बड़े यंत्रों के लिए किसानों को 5,000 रुपये की टोकन राशि ऑनलाइन जमा करनी होगी। छोटे यंत्रों के लिए यह राशि कम रखी गई है। चयन न होने की स्थिति में यह राशि वापस कर दी जाती है।

आवेदन कैसे करें? (स्टेप-बाय-स्टेप)

इच्छुक किसान उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के आधिकारिक पोर्टल https://agridarshan.up.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं:

पंजीकरण: पोर्टल पर किसान का पंजीकरण (Registration) अनिवार्य है।

यंत्र चयन: अपनी जरूरत के अनुसार यंत्र का चुनाव करें।

बुकिंग: ‘यंत्र पर अनुदान हेतु टोकन निकालें’ लिंक पर क्लिक करके बुकिंग करें।

• पारदर्शिता: लाभार्थियों का चयन पूरी तरह से ‘ई-लॉटरी’ के माध्यम से किया जाएगा, जिससे पक्षपात की कोई गुंजाइश न रहे।

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किसानों के लिए लाभ

इस योजना का सबसे अधिक लाभ लघु और सीमांत किसानों को मिलेगा। मशीनीकरण से न केवल श्रम की लागत कम होगी, बल्कि खेती के कार्यों में लगने वाले समय की भी बचत होगी। विशेष रूप से मक्का सुखाने के लिए बैच ड्रायर और खाद प्रबंधन के यंत्रों को भी इस बार शामिल किया गया है, जो यूपी के कृषि परिदृश्य को

बदलने में सहायक होंगे।

विभाग की सलाह: कृषि विभाग ने किसानों को

सलाह दी है कि वे अंतिम समय की तकनीकी भीड़ से बचने के लिए जल्द से जल्द पोर्टल पर अपना टोकन जेनरेट कर लें और निर्धारित समय के भीतर अपने बिल अपलोड करें।

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Mauni Amavasya 2026: आज ‘मौन’ रहकर मांगें 1 वरदान! प्रयागराज में उमड़ा आस्था का सैलाब, जानें 5 बड़े नियम जब ‘खामोशी’ सबसे बड़ी पूजा बन जाए

Mauni Amavasya

आज (18 जनवरी) की सुबह सूरज की किरणों के साथ एक अलग ही ऊर्जा लेकर आई है। कड़ाके की ठंड है, कोहरा छाया हुआ है, लेकिन उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (Prayagraj) में लाखों श्रद्धालु गंगा के ठंडे पानी में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। आज ‘मौनी अमावस्या’ (Mauni Amavasya) है। हिंदू धर्म में साल की सभी अमावस्याओं में इसे “महारानी” कहा जाता है। आज का दिन सिर्फ नहाने-धोने का नहीं, बल्कि अपनी जुबान और मन को शांत रखने (Silence) का दिन है।

माघ मेले का यह सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण स्नान पर्व है। आखिर क्यों आज के दिन करोड़ों लोग गंगा किनारे खींचे चले आते हैं? क्या है ‘मौन’ रहने का वैज्ञानिक और धार्मिक राज? आइए जानते हैं।

Mauni Amavasya

मौनी अमावस्या: आखिर आज ‘चुप’ क्यों रहना है?

‘मौनी’ शब्द की उत्पत्ति ‘मुनि’ (ऋषि) शब्द से हुई है। शास्त्रों के अनुसार, आज के दिन ही सृष्टि के पहले पुरुष ‘मनु ऋषि’ का जन्म हुआ था।

इसलिए आज के दिन ‘मौन व्रत’ (Maun Vrat) रखने की परंपरा है।

लेकिन रुकिए, मौन का मतलब सिर्फ ‘मुंह बंद रखना’ नहीं है।

* असली मतलब: इसका अर्थ है अपने मन के शोर को बंद करना। आज के दिन कड़वे शब्द न बोलना, झूठ न बोलना और मानसिक शांति बनाए रखना ही असली पूजा है।

* माना जाता है कि जो व्यक्ति आज पूरे विधि-विधान से मौन रखकर स्नान और दान करता है, उसे हजारों गायों के दान जितना पुण्य मिलता है।

प्रयागराज में आस्था का महाकुंभ (Magh Mela Connection)

अगर आप आज प्रयागराज के त्रिवेणी संगम (गंगा, यमुना और सरस्वती का मिलन) का नज़ारा देखेंगे, तो आपको अपनी आंखों पर यकीन नहीं होगा।

माघ मेला जो जनवरी की शुरुआत से चल रहा है, आज अपने चरम (Peak) पर है।

* अमृत योग: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, आज के दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों मकर राशि (Capricorn) में होते हैं। जब ये ग्रह एक साथ आते हैं, तो माना जाता है कि गंगा का जल ‘अमृत’ बन जाता है।

* कल्पवास का फल: जो कल्पवासी (टेंट में रहकर तपस्या करने वाले लोग) पिछले कई दिनों से संगम किनारे रह रहे हैं, उनके लिए आज का स्नान सबसे बड़ा पर्व है। ऐसा लगता है जैसे धरती पर स्वर्ग उतर आया हो।

आज क्या करें? (5 सुनहरे नियम)

अगर आप प्रयागराज नहीं जा पाए हैं, तो निराश न हों। आप घर बैठे भी इस दिन का पूरा फल पा सकते हैं। बस ये 5 काम जरूर करें:

* गंगाजल से स्नान: अपने नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाएं और मन में ‘हर हर गंगे’ का जाप करें।

* तिल का दान: माघ महीने में ‘तिल’ (Sesame) का बहुत महत्व है। आज तिल, तिल के लड्डू या तिल का तेल दान करना शुभ माना जाता है।

* मौन व्रत: कोशिश करें कि आज कम से कम 2-3 घंटे (या पूरा दिन) मौन रहें। मोबाइल और सोशल मीडिया के शोर से दूर रहें।

* दीपदान: शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे या तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं।

* पितृ तर्पण: अमावस्या पितरों (Ancestors) का दिन होती है। आज उनके नाम से भोजन या वस्त्र किसी गरीब को दें, इससे पितृ दोष दूर होता है।

मौन रहने का ‘साइंटिफिक’ फायदा

धर्म अपनी जगह है, लेकिन आज के दौर में मौनी अमावस्या का महत्व और बढ़ गया है।

हम दिन भर बोलते हैं, बहस करते हैं, फोन पर लगे रहते हैं। इससे हमारी मानसिक ऊर्जा (Mental Energy) खत्म होती है।

मनोवैज्ञानिक भी मानते हैं कि कुछ समय ‘चुप’ रहने से:

* दिमाग रीबूट (Reboot) होता है।

* तनाव (Stress) कम होता है।

* सोचने की शक्ति बढ़ती है।

तो आज का दिन एक तरह से आपके दिमाग का ‘Digital Detox’ है।

ग्रहों का दुर्लभ संयोग

पंचांग के अनुसार, आज कई शुभ योग बन रहे हैं। ‘सर्वार्थ सिद्धि योग’ के कारण आज किया गया कोई भी नया काम या निवेश लंबे समय तक फायदा देगा। शनि देव अपनी ही राशि में हैं और सूर्य देव भी उनके साथ आ रहे हैं, जो पिता-पुत्र के मिलन का प्रतीक है।

Mauni Amavasya

सिर्फ परंपरा नहीं, जीवन का पाठ

मौनी अमावस्या हमें सिखाती है कि कभी-कभी “चुप रहना” बोलने से ज्यादा ताकतवर होता है। प्रयागराज में डुबकी लगा रहे करोड़ों लोग सिर्फ पानी में नहीं नहा रहे, वे अपनी आत्मा को शुद्ध कर रहे हैं।

आज के दिन आप भी संकल्प लें—सिर्फ पूजा का नहीं, बल्कि अपनी वाणी को मधुर बनाने का। क्योंकि असली धर्म वही है जो दूसरों को खुशी दे, दुख नहीं।

“हे गंगा मैया, जो भी आज तेरी शरण में आए, उसके सारे पाप धो देना।”

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बिहार बोर्ड परीक्षा 2026: 10वीं-12वीं की डेटशीट जारी, परीक्षा केंद्र जाने से पहले जरूर पढ़ें ये 5 बड़े नियम और जरूरी निर्देश

बिहार

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने मैट्रिक और इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा 2026 का बिगुल फूंक दिया है। बोर्ड ने न केवल परीक्षा की तिथियां घोषित कर दी हैं, बल्कि परीक्षार्थियों के लिए कड़े निर्देश भी जारी किए हैं। अगर आप भी इस साल बोर्ड परीक्षा में शामिल होने जा रहे हैं, तो शेड्यूल के साथ-साथ इन नियमों को जानना आपके लिए बेहद जरूरी है ताकि एग्जाम सेंटर पर कोई परेशानी न हो।

बिहार बोर्ड परीक्षा

कब से शुरू होंगे एग्जाम परीक्षा ?

बिहार बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि परीक्षाएं दो पालियों में आयोजित की जाएंगी। इंटर (Class 12th) की थ्योरी परीक्षाएं 2 फरवरी से 13 फरवरी 2026 तक चलेंगी। वहीं, मैट्रिक (Class 10th) की परीक्षा 17 फरवरी से 25 फरवरी 2026 के बीच संपन्न होगी। थ्योरी से पहले छात्रों को अपनी प्रैक्टिकल परीक्षाओं में शामिल होना होगा, जो जनवरी 2026 में आयोजित की जा रही हैं (इंटर: 10-20 जनवरी और मैट्रिक: 20-22 जनवरी)।

एग्जाम सेंटर के लिए सबसे महत्वपूर्ण निर्देश

बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों के लिए कुछ सख्त नियम बनाए गए हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है:

• रिपोर्टिंग टाइम का ध्यान: छात्रों को परीक्षा शुरू होने से कम से कम 30 मिनट पहले केंद्र पर पहुंचना होगा। देरी से आने वाले परीक्षार्थियों को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

• एडमिट कार्ड और पहचान पत्र: बिना एडमिट कार्ड के प्रवेश वर्जित है। एडमिट कार्ड स्कूलों में मैट्रिक के लिए 8 जनवरी से और इंटर के लिए 16 जनवरी से मिलने शुरू हो जाएंगे।

• प्रतिबंधित वस्तुएं: परीक्षा केंद्र के अंदर मोबाइल फोन, ब्लूटूथ, स्मार्ट वॉच, कैलकुलेटर या किसी भी तरह की कागजी चिट ले जाना सख्त मना है। पकड़े जाने पर छात्र को परीक्षा से निष्कासित किया जा सकता है।

• एक्स्ट्रा टाइम: परीक्षार्थियों को प्रश्न पत्र पढ़ने और निर्देशों को समझने के लिए 15 मिनट का अतिरिक्त ‘कूल-ऑफ’ समय दिया जाएगा।

कैसे पता करें अपना एग्जाम सेंटर ?

छात्रों के मन में सबसे बड़ा सवाल एग्जाम सेंटर को लेकर रहता है। बोर्ड ने साफ किया है कि परीक्षा केंद्र की सटीक जानकारी, केंद्र का नाम और कोड केवल आपके ऑफिशियल एडमिट कार्ड पर ही अंकित होगा। एडमिट कार्ड जारी होने के बाद छात्र उसे biharboardonline.bihar.gov.in से डाउनलोड कर सकते हैं या अपने स्कूल के प्रधानाध्यापक से प्राप्त कर सकते हैं।

एडमिट कार्ड में गड़बड़ी हो तो क्या करें?

यदि आपके एडमिट कार्ड में नाम, फोटो या सेंटर से जुड़ी कोई त्रुटि (Error) दिखती है, तो तुरंत अपने स्कूल से संपर्क करें। इसके अलावा छात्र बिहार बोर्ड की हेल्पलाइन नंबर 0612-2230016 पर भी कॉल कर सकते हैं। बोर्ड ने छात्रों की सुविधा के लिए एक AI चैटबॉट भी लॉन्च किया है, जहाँ से त्वरित सहायता प्राप्त की जा सकती है।

बिहार बोर्ड परीक्षा

सफलता के लिए अंतिम टिप्स

चूंकि परीक्षाएं दो पालियों (9:30 AM से 12:45 PM और 1:45 PM से 5:00 PM) में हैं, इसलिए अपनी शिफ्ट के अनुसार समय का प्रबंधन करें। बोर्ड ने सलाह दी है कि छात्र परीक्षा से एक-दो दिन पहले अपने आवंटित केंद्र पर जाकर उसकी दूरी और रास्ते का मुआयना जरूर कर लें ताकि परीक्षा के दिन हड़बड़ी न हो।

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Bihar Police SI Exam 2026 Update : आज से शुरू हुई दरोगा भर्ती की प्रारंभिक परीक्षा, जानें शिफ्ट टाइमिंग और जरूरी नियम

Bihar Police SI Exam 2026

Bihar Police SI Exam 2026 Update: बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) द्वारा बिहार पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) के कुल 1799 पदों पर भर्ती के लिए प्रारंभिक परीक्षा आज, 18 जनवरी 2026 से शुरू कर दी गई है। राज्य भर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच लाखों उम्मीदवार इस प्रतियोगिता में शामिल हो रहे हैं। यह परीक्षा 21 जनवरी तक आयोजित की जाएगी, जिसके माध्यम से योग्य उम्मीदवारों का चयन राज्य के गृह विभाग के अंतर्गत किया जाना है।

परीक्षा का शेड्यूल और शिफ्ट की जानकारी

बिहार पुलिस दरोगा भर्ती की यह प्रारंभिक परीक्षा दो मुख्य तिथियों—18 जनवरी (रविवार) और 21 जनवरी 2026 (बुधवार) को निर्धारित की गई है। आयोग ने सुचारू संचालन के लिए इसे दो पालियों में विभाजित किया है। पहली पाली सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक आयोजित की जा रही है, जिसके लिए अभ्यर्थियों को सुबह 8:30 बजे ही रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया था। वहीं, दूसरी पाली दोपहर 2:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक चलेगी, जिसका रिपोर्टिंग समय दोपहर 1:00 बजे तय किया गया है। प्रत्येक प्रश्न पत्र हल करने के लिए उम्मीदवारों को 2 घंटे का समय दिया जा रहा है।

Bihar Police SI Exam 2026

चयन प्रक्रिया और परीक्षा का स्वरूप

बिहार पुलिस SI बनने का सफर चार कठिन चरणों से होकर गुजरता है। पहले चरण में प्रारंभिक परीक्षा होती है, जिसमें 200 अंकों के कुल 100 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से सामान्य ज्ञान, इतिहास, भूगोल और समसामयिक घटनाओं (Current Affairs) पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। अगले चरण यानी मुख्य परीक्षा में पहुंचने के लिए उम्मीदवारों को कम से कम 30% अंक प्राप्त करना अनिवार्य है। मुख्य परीक्षा के बाद शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) होती है, जिसमें पुरुषों को 6 मिनट में 1.6 किलोमीटर और महिलाओं को 6 मिनट में 1 किलोमीटर की दौड़ पूरी करनी होती है। इसके अलावा ऊंची कूद (High Jump) और लंबी कूद के मानक भी तय किए गए हैं।

अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश

आयोग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा केंद्र पर प्रवेश के लिए एडमिट कार्ड के साथ एक मूल फोटो पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड या वोटर आईडी) और दो पासपोर्ट साइज फोटो लाना अनिवार्य है। परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे मोबाइल फोन, ब्लूटूथ या स्मार्ट वॉच को परीक्षा केंद्र के अंदर ले जाना पूरी तरह वर्जित है। यदि किसी उम्मीदवार को एडमिट कार्ड डाउनलोड करने में समस्या आई है, तो वे पटना स्थित आयोग के कार्यालय से डुप्लिकेट कार्ड के लिए संपर्क कर सकते हैं। सभी केंद्रों पर जैमर और सीसीटीवी कैमरों के जरिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

Bihar Police SI Exam 2026

सैलरी स्ट्रक्चर और भविष्य की संभावनाएं

बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर का पद न केवल सम्मानजनक है, बल्कि इसमें वेतन भी आकर्षक मिलता है। अंतिम रूप से चयनित होने वाले उम्मीदवारों को पे-लेवल 6 के तहत वेतन और विभिन्न सरकारी भत्ते दिए जाएंगे। यह भर्ती प्रक्रिया राज्य में कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए की जा रही है। परीक्षा से जुड़ी किसी भी नई अपडेट या परिणाम की जानकारी के लिए उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट bpssc.bihar.gov.in पर नियमित रूप से विजिट करने की सलाह दी जाती है।

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किसानों की चमकेगी किस्मत! PM मोदी ने शुरू की ₹24,000 करोड़ की ‘धन-धान्य कृषि योजना’, जानें किसे मिलेगा फायदा

किसानों

PM Dhan-Dhaanya Krishi Yojana: केंद्र सरकार ने देश के किसानों की आय बढ़ाने और खेती को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाया है। दिवाली के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘पीएम धन-धान्य कृषि योजना’ की औपचारिक शुरुआत की। इस योजना के लिए 24,000 करोड़ रुपये का विशाल बजट आवंटित किया गया है, जिसका सीधा असर देश के 1.7 करोड़ किसानों पर पड़ेगा।

आइए जानते हैं क्या है यह योजना और कैसे यह 100 जिलों की सूरत बदलने वाली है।

धन-धान्य कृषि योजना

क्या है पीएम धन-धान्य कृषि योजना?

यह योजना मुख्य रूप से देश के उन 100 ‘आकांक्षी जिलों’ (Aspirational Districts) पर केंद्रित है, जहाँ खेती की पैदावार यानी उत्पादकता वर्तमान में काफी कम है। वित्त वर्ष 2025-26 से अगले छह वर्षों तक चलने वाली इस योजना का लक्ष्य छोटे और सीमांत किसानों को तकनीकी और आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।

योजना के 3 मुख्य लक्ष्य: उत्पादकता से बाजार तक

इस योजना को तीन प्रमुख मापदंडों के आधार पर लागू किया जाएगा:

पैदावार बढ़ाना: उन जिलों को चुना गया है जहाँ फसल की उपज कम है, ताकि वहाँ आधुनिक बीज और तकनीक पहुंचाई जा सके।

फसल चक्र (Crop Rotation): किसानों को एक ही खेत में साल में ज्यादा फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

ऋण सुविधा: किसानों को साहूकारों के चंगुल से बचाने के लिए आसान बैंक लोन और क्रेडिट की सुविधा दी जाएगी।

1.7 करोड़ किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

योजना का सबसे बड़ा फायदा छोटे किसानों को होगा। आंकड़ों के अनुसार, इसके लाभार्थियों में 86% छोटे और सीमांत किसान शामिल हैं। योजना के तहत किसानों को 50% से 80% तक की सब्सिडी और नाबार्ड (NABARD) के माध्यम से 50,000 रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक का लोन मिल सकेगा। अनुमान है कि इस तकनीक और मदद से किसानों के मुनाफे में 20% से 50% तक की बढ़ोतरी होगी।

11 मंत्रालयों का महा-संगम

इस योजना की सबसे खास बात यह है कि यह अकेली योजना नहीं है, बल्कि इसमें केंद्र सरकार के 11 मंत्रालयों की 36 पुरानी योजनाओं को एक साथ जोड़ दिया गया है। नीति आयोग के मॉडल पर आधारित इस स्कीम में पंचायत और ब्लॉक स्तर पर अनाज भंडारण (Storage), सिंचाई और बेहतर जल प्रबंधन पर जोर दिया जाएगा।

महिलाओं और डिजिटल खेती को बढ़ावा

महिला किसान: महिलाओं के लिए विशेष ‘प्रोड्यूसर ग्रुप्स’ बनाए जाएंगे और उन्हें 10,000 से 1 लाख रुपये तक का माइक्रोफाइनेंस और ट्रेनिंग दी जाएगी।

e-NAM प्लेटफॉर्म: बिचौलियों को खत्म करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग होगा, ताकि किसान अपनी फसल सीधे सही दाम पर बेच सकें।

दलहन आत्मनिर्भरता: दालों के उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए इस योजना को ‘दलहन मिशन’ के साथ भी जोड़ा गया है।

धन-धान्य कृषि योजना

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना केवल एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने का एक मिशन है। जनवरी 2026 तक इसकी निगरानी कड़ी की जाएगी ताकि हर पात्र किसान तक इसका लाभ पहुंच सके। यदि आप बिहार या अन्य राज्यों के चिन्हित 100 जिलों में रहते हैं, तो अपने स्थानीय कृषि विभाग से संपर्क कर इस योजना का लाभ उठाने की तैयारी शुरू कर दें।

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PM-KISAN 19वीं किस्त 2026: कब आएंगे आपके खाते में ₹2000? यहाँ जानें तारीख, पात्रता और स्टेटस चेक करने का तरीका

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PM Kisan 19th Installment Date 2026: देश के करोड़ों किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। केंद्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना, ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ PM-KISAN के तहत 19वीं किस्त जल्द ही जारी होने वाली है। बजट 2026 के बाद किसानों को मिलने वाली यह पहली सौगात होगी, जो खेती-किसानी के खर्चों में बड़ी मदद प्रदान करेगी।

फरवरी 2026 में जारी हो सकती है 19वीं किस्त

ताजा मीडिया रिपोर्ट्स और पिछले रुझानों के अनुसार, PM-KISAN की 19वीं किस्त फरवरी 2026 के दूसरे या तीसरे सप्ताह में जारी होने की प्रबल संभावना है। जानकारों का मानना है कि 24 फरवरी 2026 के आसपास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक भव्य कार्यक्रम के माध्यम से देशभर के 9.8 करोड़ से अधिक पात्र किसानों के खातों में ₹2000 की राशि सीधे ट्रांसफर (DBT) कर सकते हैं।

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गौरतबल है कि 18वीं किस्त के 4 महीने बाद यह राशि जारी की जा रही है। पिछली बार 2025 में बिहार के भागलपुर से किस्त लॉन्च की गई थी, इसलिए इस बार भी संभावना जताई जा रही है कि बिहार या किसी अन्य चुनावी राज्य से इस योजना का अगला चरण शुरू किया जाए।

9.8 करोड़ किसानों को मिलेगा ₹22,000 करोड़ का लाभ

इस बार केंद्र सरकार कुल ₹22,000 करोड़ की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में हस्तांतरित करने की तैयारी में है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करना है। सालाना ₹6000 की इस सहायता को तीन समान किस्तों (₹2000 प्रत्येक) में दिया जाता है।

इन किसानों की अटक सकती है किस्त: eKYC है अनिवार्य

अगर आप पीएम किसान योजना के लाभार्थी हैं, तो सावधान हो जाएं। बिना eKYC अपडेट कराए आपकी 19वीं किस्त रुक सकती है। सरकार ने पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए निम्नलिखित शर्तें अनिवार्य कर दी हैं:

eKYC अपडेट: पोर्टल पर जाकर बायोमेट्रिक या OTP के जरिए eKYC पूरा करें।

भू-सत्यापन (Land Seeding): आपकी खेती की जमीन का सरकारी रिकॉर्ड में सत्यापन होना जरूरी है।

आधार-बैंक लिंकिंग: आपका बैंक खाता आधार से लिंक होना चाहिए और DBT (Direct Benefit Transfer) के लिए इनेबल्ड होना चाहिए।

बिहार और अन्य राज्यों पर विशेष प्रभाव

बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्यों में इस योजना का व्यापक असर देखा जा रहा है। अकेले पटना जैसे जिलों में 20 लाख से अधिक किसान इस लाभ की प्रतीक्षा कर रहे हैं। बिहार के किसानों के लिए सरकार विशेष कैंप लगाकर Farmer ID रजिस्ट्री और त्रुटियों को सुधारने का काम कर रही है।

PM-KISAN स्टेटस कैसे चेक करें?

अपना नाम लाभार्थी सूची में चेक करने के लिए इन स्टेप्स का पालन करें:

• सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट [संदिग्ध लिंक हटा दिया गया] पर जाएं।

• होमपेज पर ‘Know Your Status’ विकल्प पर क्लिक करें।

• अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और कैप्चा कोड दर्ज करें।

• ‘Get Data’ पर क्लिक करते ही आपकी किस्त का स्टेटस (FTO processed या Payment Success) स्क्रीन पर आ जाएगा।

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यदि आपके स्टेटस में कोई समस्या दिख रही है, तो तुरंत अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या जिला कृषि विभाग के कार्यालय से संपर्क करें।

PM-KISAN योजना न केवल किसानों की आय में वृद्धि कर रही है, बल्कि उन्हें साहूकारों के चंगुल से भी बचा रही है। 19वीं किस्त के आने से रबी की फसलों के प्रबंधन और आगामी सीजन की तैयारी में किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। योजना से जुड़ी ताजा जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल पर नजर बनाए रखें।

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बिहार में रचा जाएगा इतिहास: विराट रामायण मंदिर में आज(17) जनवरी को होगी विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना, सीएम नीतीश होंगे साक्षी

बिहार

पूर्वी चंपारण, बिहार: बिहार के धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास में आज (17) जनवरी 2026 का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। पूर्वी चंपारण जिले के कैथवलिया (चकिया-केसरिया पथ) में निर्माणाधीन ‘विराट रामायण मंदिर‘ में दुनिया के सबसे विशाल शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। इस ऐतिहासिक अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

विराट रामायण मंदिर

महा आयोजन का शुभ मुहूर्त और कार्यक्रम

यह भव्य आयोजन माघ कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि के पावन संयोग पर हो रहा है। कार्यक्रम की रूपरेखा कुछ इस प्रकार है:

सुबह 08:00 बजे: मुख्य अभिषेक और विशेष पूजा का शुभारंभ होगा। काशी (वाराणसी) से आए विद्वान पंडितों की देखरेख में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अनुष्ठान शुरू होगा।

पवित्र नदियों का जल: शिवलिंग का अभिषेक सिंधु, नर्मदा, गंडक और गंगा जैसी पवित्र नदियों के जल से किया जाएगा।

सुबह 09:00 से 11:00 बजे: इस दौरान हवन, सहस्रलिंग स्थापना और अन्य जरूरी वैदिक विधियां पूरी की जाएंगी।

दोपहर 12:00 बजे के बाद: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समारोह में शामिल होकर मंदिर परिसर का निरीक्षण करेंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके बाद भव्य महाआरती का आयोजन होगा।

शिवलिंग की खासियत: इंजीनियरिंग और आस्था का बेजोड़ संगम

यह शिवलिंग केवल आस्था का ही नहीं, बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग का भी एक अद्भुत नमूना है:

विशाल आकार: यह शिवलिंग 33 फीट ऊँचा और 33 फीट चौड़ा है। इसका कुल वजन लगभग 210 मीट्रिक टन है।

लागत और निर्माण: तमिलनाडु के महाबलीपुरम में इसे एक ही काले ग्रेनाइट पत्थर को तराश कर बनाया गया है। इसे बनाने में 10 साल का समय और करीब 3 करोड़ रुपये की लागत आई है।

विशेष माला और श्रृंगार: स्थापना के दिन महादेव को 18 फीट लंबी विशेष माला अर्पित की जाएगी, जिसमें फूल, भांग, धतूरा और बेलपत्र पिरोए गए होंगे। सजावट के लिए विशेष फूल विदेशों से मंगाए गए हैं।

कैसे हुई स्थापना की तैयारी?

इतने विशाल शिवलिंग को स्थापित करना एक बड़ी चुनौती थी। इसके लिए राजस्थान और भोपाल से 750 टन क्षमता वाली दो विशाल क्रेनें मंगाई गई हैं। तकनीकी बारीकियों को सुनिश्चित करने के लिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की टीम भी लगातार काम कर रही है। शिवलिंग को तमिलनाडु से बिहार तक 96 चक्कों वाले एक विशेष ट्रक के जरिए लाया गया है।

विराट रामायण मंदिर

विराट रामायण मंदिर का स्वरूप

जब यह मंदिर पूरी तरह बनकर तैयार होगा, तो यह कंबोडिया के अंकोरवाट मंदिर से भी बड़ा होगा।

• इसकी लंबाई 1080 फीट और चौड़ाई 540 फीट होगी।

• इसमें कुल 22 मंदिर और 18 शिखर होंगे, जिनमें मुख्य शिखर की ऊँचाई 270 फीट होगी।

श्रद्धालुओं में भारी उत्साह

इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए बड़े पैमाने पर पूजा पंडाल, वीआईपी गैलरी और सुरक्षा के इंतजाम किए हैं।

यह शिवलिंग स्थापना न केवल बिहार बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का विषय है, जो आने वाले समय में विश्व स्तर पर पर्यटन और आस्था का एक बड़ा केंद्र बनेगा।

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Bijnor Dog Miracle: 3 दिन से हनुमान जी की परिक्रमा कर रहा कुत्ता! ‘भक्ति’ है या जानलेवा बीमारी? जानिए 5 बड़े सच आस्था का चमत्कार या विज्ञान की अनदेखी?

Bijnor

क्या कोई जानवर भगवान की भक्ति कर सकता है? क्या उसे भी ‘मोक्ष’ और ‘परिक्रमा’ का ज्ञान हो सकता है? उत्तर प्रदेश के बिजनौर (Bijnor) में इन दिनों एक ऐसा नज़ारा देखने को मिल रहा है जिसने पूरे देश को हैरान कर दिया है। एक कुत्ता पिछले 3-4 दिनों से लगातार, बिना रुके, बिना खाए-पिए हनुमान जी की मूर्ति की परिक्रमा (

Circling) कर रहा है। हज़ारों लोग इसे ‘चमत्कार’ मानकर पूजा कर रहे हैं, चढ़ावा चढ़ा रहे हैं। लेकिन क्या यह सच में भक्ति है? या फिर हम एक बेजुबान की ‘तड़प’ को ‘तपस्या’ समझ बैठे हैं?

आज इस ब्लॉग में हम जानेंगे बिजनौर के इस वायरल वीडियो का पूरा सच और वह मेडिकल कारण (Medical Reason) जो शायद इस कुत्ते की जान ले रहा है।

Bijnor

बिजनौर के मंदिर में आखिर हो क्या रहा है?

  • घटना बिजनौर जिले के नगीना (Nagina) तहसील के पास स्थित नंदपुर गांव की है।
  • यहाँ के एक हनुमान मंदिर में एक कुत्ता पिछले 72 घंटों से भी ज्यादा समय से मूर्ति के गोल-गोल चक्कर काट रहा है।
  • बिना रुके: प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यह कुत्ता न तो रुक रहा है और न ही सो रहा है।
  • खाना-पीना त्यागा: ग्रामीणों ने उसे रोटी-बिस्किट देने की कोशिश की, लेकिन उसने कुछ नहीं खाया।
  • देवी मां की भी परिक्रमा: हनुमान जी के बाद अब यह कुत्ता माँ दुर्गा की मूर्ति के भी चक्कर काटने लगा है, जिससे लोगों का विश्वास और गहरा हो गया है।

‘कबूतर’ वाली घटना ने बढ़ाया अंधविश्वास

इस मामले में ‘चमत्कार’ का एंगल तब और मजबूत हो गया जब एक अजीब घटना घटी।

ग्रामीणों का दावा है कि परिक्रमा के दौरान कुत्ता कुछ देर के लिए बैठा था, तभी एक जंगली कबूतर आकर उसके सिर पर बैठ गया। कुछ देर बाद वह कबूतर वहीं मर गया।

  • बस फिर क्या था! लोगों ने इसे “दैवीय शक्ति” मान लिया।
  • कोई कह रहा है कि यह कुत्ता पिछले जन्म में कोई महान संत था।
  • कोई इसे कलयुग में हनुमान जी का साक्षात चमत्कार बता रहा है।
  • भीड़ इतनी बढ़ गई है कि पुलिस को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी।

साइंस क्या कहता है? (The Medical Truth)

अब आते हैं कड़वे सच पर। जिसे हम ‘भक्ति’ समझ रहे हैं, वह असल में “Circling Disease” या एक गंभीर Neurological Disorder हो सकता है।

पशु चिकित्सकों (Veterinary Doctors) और मेडिकल साइंस के अनुसार, जब कोई कुत्ता लगातार गोल-गोल घूमने लगता है, तो यह कोई चमत्कार नहीं, बल्कि खतरे की घंटी है। इसके मुख्य 3 कारण हो सकते हैं:

  • Brain Tumor (ब्रेन ट्यूमर): अगर दिमाग के अगले हिस्से (Forebrain) में ट्यूमर हो जाए, तो जानवर अपना संतुलन खो देता है और एक ही दिशा में घूमने के लिए मजबूर हो जाता है।
  • Head Injury (सिर में चोट): अगर कुत्ते को किसी ने सिर पर मारा हो या कोई अंदरूनी चोट लगी हो, तो दिमाग का संतुलन बिगड़ जाता है। डॉक्टरों ने बिजनौर वाले कुत्ते में भी इसकी आशंका जताई है।
  • Canine Vestibular Disease: यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें कान के अंदरूनी हिस्से (जो बैलेंस बनाता है) में इन्फेक्शन हो जाता है। इससे कुत्ते को लगता है कि दुनिया घूम रही है और वह खुद भी घूमने लगता है।

हमारा समाज: इलाज की जगह पूजा क्यों?

  • यह घटना हमारी शिक्षा व्यवस्था (Education System) और मानसिकता पर एक करारा तमाचा है।
  • जिस कुत्ते को तुरंत इलाज और ग्लूकोज की जरूरत थी, उसे लोग घेरकर वीडियो बना रहे हैं और ‘जय श्री राम’ के नारे लगा रहे हैं।
  • फिल्में और टीवी सीरियल्स ने हमारे दिमाग को ऐसा ‘वॉश’ (Brainwash) कर दिया है कि हमें हर असामान्य घटना में ‘ईश्वर’ दिखने लगता है, ‘तर्क’ (Logic) नहीं।
  • अगर किसी इंसान को दिल का दौरा पड़े और वह तड़पने लगे, तो क्या हम उसे अस्पताल ले जाएंगे या उसे ‘माता आ गई’ कहकर पूजा करेंगे? तो फिर इस बेजुबान के साथ ऐसा अन्याय क्यों?

बेजुबान की जान खतरे में है

स्थानीय पशु चिकित्सकों की टीम ने मौके पर जाकर जांच की है और आशंका जताई है कि कुत्ते की दिमागी हालत ठीक नहीं है।

लगातार घूमने से:

उसका शरीर Dehydrate (पानी की कमी) हो रहा है।

उसके पैरों और जोड़ों में भयानक दर्द हो रहा होगा।

अगर उसे जल्द ही सही इलाज (Sedation/Treatment) नहीं मिला, तो उसकी मौत हो सकती है—भक्ति से नहीं, बल्कि थकान और बीमारी से।

Bijnor

आस्था अपनी जगह, इंसानियत अपनी जगह

  • ईश्वर कण-कण में है, यह मानना हमारी संस्कृति है। लेकिन एक बीमार जानवर को भगवान मानकर उसे तिल-तिल मरने के लिए छोड़ देना—यह न तो धर्म है और न ही इंसानियत।
  • बिजनौर का यह कुत्ता ‘भक्त’ नहीं, बल्कि ‘मरीज’ है। हमें अंधविश्वास का चश्मा उतारकर उसे बचाने की जरूरत है, पूजने की नहीं।

आपकी राय: क्या प्रशासन को भीड़ हटाकर उस कुत्ते को जबरदस्ती अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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बिहार सुपौल हादसा: घर में टीवी देख रही लड़की को गोली, UD केस हत्या बना

सुपौल

सुपौल जिले के भीमनगर थाना क्षेत्र में 11वीं कक्षा की छात्रा अपेक्षा सिंह (16 वर्ष) की संदिग्ध मौत ने सनसनी फैला दी है। परिजनों ने शुरू में इसे सीढ़ियों से गिरने का हादसा बताया था, लेकिन पोस्टमॉर्टम में उसके शरीर से गोली निकलने और गोली लगने के स्पष्ट निशान मिलने से मामला हत्या का बन गया।

घटना का विवरण

घटना मंगलवार शाम करीब 4:30 से 5:00 बजे के बीच घटी। अपेक्षा घर के मुख्य हॉल में आराम से टीवी देख रही थीं। अचानक एक तेज आवाज आई, जो गिरने जैसी लगी। परिवार के सदस्य दौड़कर पहुंचे तो अपेक्षा खून से लथपथ जमीन पर पड़ी थीं। उनका सिर फटा हुआ था और शरीर पर चोट के गंभीर निशान थे। परिजनों ने तुरंत उन्हें नजदीकी अनुमंडलीय अस्पताल वीरपुर ले जाया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद मृत घोषित कर दिया। परिवार ने पुलिस को दी शिकायत में केवल सीढ़ियों से गिरने या हादसे का जिक्र किया, गोली या हिंसा का कोई उल्लेख नहीं था।

सुपौल

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट

सदर अस्पताल सुपौल में बुधवार को हुए पोस्टमॉर्टम में डॉक्टरों ने शव से गोली निकाली और मौत का कारण गोली लगना पाया।डॉ. ठाकुर प्रसाद ने पुष्टि की कि बुलेट इंजरी से मौत हुई। परिजनों ने पुलिस को दिए आवेदन में गोली का जिक्र नहीं किया था।

पुलिस जांच

भीमनगर थाने में यूडी केस दर्ज किया गया था, लेकिन रिपोर्ट के बाद पुलिस ने सभी पहलुओं पर जांच तेज कर दी | एसपी शरथ आरएस ने कहा कि परिजनों के बयान संदेह के घेरे में हैं और गोली कैसे लगी, इसकी तहकीकात हो रही है। पुलिस हर संभावना, जैसे हत्या या साजिश, की जांच कर रही है।

पुलिस ने कहा कि 48 घंटे में क्लू मिल सकता है। फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है। यह घटना बिहार के कोसी क्षेत्र में छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल उठा रही है। परिवार शोक में डूबा है, लेकिन जांच से सच्चाई सामने आएगी। कुल मिलाकर, यह मामला अब हत्या का रूप ले चुका है

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NEET PG Reservation: -40 नंबर वाले करेंगे अब आपका ऑपरेशन? डॉक्टर बनने की रेस में ‘योग्यता’ की मौत! 3 कड़वे सच 

NEET PG

ज़रा सोचिए, आप अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हैं। आपकी सर्जरी होने वाली है। आपको पता चलता है कि जिस डॉक्टर के हाथ में नश्तर (Scalpel) है, उसने अपनी डिग्री ‘काबिलियत’ से नहीं, बल्कि ‘कोटे’ और ‘कम किए गए कट-ऑफ’ की बदौलत पाई है। क्या आप अपनी जान उसे सौंपेंगे? यह सवाल डरावना है, लेकिन आज के मेडिकल सिस्टम का यह वो काला सच है जिस पर बात करने से सब डरते हैं। NEET PG (MD/MS) में जिस तरह से कट-ऑफ गिराए जा रहे हैं और रिजर्वेशन का खेल खेला जा रहा है, उसने पूरी दुनिया के सामने भारतीय चिकित्सा व्यवस्था (Medical System) की साख पर बट्टा लगा दिया है।

क्या सच में -40 या जीरो नंबर लाने वाला व्यक्ति एक ‘स्पेशलिस्ट सर्जन’ बनने के लायक है? आज इस ब्लॉग में हम सरकार, सिस्टम और उन प्रदर्शनकारियों से सीधी बात करेंगे।

NEET PG

मेरिट की हत्या: जब ‘काबिलियत’ हार जाए और ‘जाति’ जीत जाए

  • खबर यह है कि मेडिकल की पोस्ट-ग्रेजुएट सीटों (MD/MS) को भरने के लिए कट-ऑफ को पाताल लोक तक गिरा दिया जाता है। पिछले साल हमने देखा कि ‘ज़ीरो परसेंटाइल’ (0 Percentile) वाले को भी एलिजिबल कर दिया गया। और अब चर्चा है कि नेगेटिव मार्क्स या बेहद कम नंबर लाने वाले (SC/ST/OBC कोटे के तहत) भी स्पेशलिस्ट डॉक्टर बन सकेंगे।
  • यह 10वीं का बोर्ड एग्जाम नहीं है। यह न्यूरोसर्जरी, कार्डियोलॉजी और ऑर्थोपेडिक्स है। यहाँ एक गलती की कीमत ‘जान’ देकर चुकानी पड़ती है।
  • जब एक जनरल कैटेगिरी का छात्र 500 नंबर लाकर भी सीट के लिए तरसता है, और दूसरी तरफ आरक्षित वर्ग का छात्र बेहद कम नंबर (यहाँ तक कि माइनस या सिंगल डिजिट) पर वही सीट पा लेता है, तो यह सवाल उठता है—क्या बीमारी मरीज की जाति देखकर हमला करती है? अगर नहीं, तो इलाज करने वाला डॉक्टर जाति के आधार पर क्यों चुना जा रहा है?

वो ‘हीन भावना’ और दंगों का सच

  • मेरा सवाल सरकार से तो है ही, लेकिन उससे भी बड़ा सवाल उन लोगों से है जो आरक्षण के लिए सड़कों पर उतर आते हैं।
  • आप MBBS कर चुके हैं। आप डॉक्टर बन चुके हैं। समाज में आप अब ‘दलित’ या ‘पिछड़े’ नहीं, बल्कि ‘डॉक्टर साहब’ हैं। आप आर्थिक रूप से सक्षम हैं। फिर भी आपको PG (स्पेशलिस्ट बनने) के लिए वैसाखी (Crutches) क्यों चाहिए?
  • जैसे ही कोई सरकार क्रीमी लेयर (Creamy Layer) की बात करती है या मेरिट की बात करती है, तुरंत ‘भारत बंद’ और आंदोलन शुरू हो जाते हैं।
  • आत्मसम्मान कहां है? क्या आरक्षण के लिए लड़ना यह स्वीकार करना नहीं है कि “हम खुद को कमजोर मानते हैं, हम बिना छूट के मुकाबला नहीं कर सकते”?
  • फायदे की लत: यह अब सामाजिक न्याय की लड़ाई नहीं रही, यह ‘सुविधा’ और ‘शॉर्टकट’ की लत बन गई है। जो सच में गरीब है, उसे फायदा मिल नहीं रहा, और जो अमीर डॉक्टर हैं, वो कोटे का लाभ उठा रहे हैं।

सम्मान की भीख नहीं मांगी जा सकती

  • आरक्षण का मूल उद्देश्य था—भेदभाव खत्म करना। लेकिन आज मेडिकल कॉलेजों में क्या हो रहा है?
  • जब एक छात्र 80% नंबर लाकर क्लास में बैठता है और उसके बगल में 20% नंबर वाला छात्र ‘कोटे’ से बैठता है, तो नज़रिया अपने आप बदल जाता है।
  • आप कानून बनाकर सीट तो दिला सकते हैं, लेकिन ‘इज्जत’ (Respect) नहीं।
  • लोग उस डॉक्टर को शक की निगाह से देखते हैं— “ये रिजर्वेशन वाला है या मेरिट वाला?”
  • यह सिस्टम खुद आरक्षित वर्ग के काबिल छात्रों का नुकसान कर रहा है। उनकी मेहनत पर भी ‘कोटे का ठप्पा’ लग जाता है।

अगर आप सच में चाहते हैं कि समाज आपको बराबरी की नज़र से देखे, तो आपको खुद आगे आकर कहना होगा— “हमें खैरात नहीं, मुकाबला चाहिए।” लेकिन अफ़सोस, वोट बैंक की राजनीति ऐसा होने नहीं देगी।

सरकार का दोगलापन: प्राइवेट सीटों का खेल

  • इसमें सरकार भी दूध की धुली नहीं है। कट-ऑफ को माइनस या जीरो तक गिराने के पीछे ‘सामाजिक न्याय’ नहीं, बल्कि ‘व्यापार’ है।
  • भारत में हजारों प्राइवेट मेडिकल सीटें हैं जिनकी फीस करोड़ों में है। मेरिट वाला छात्र इतनी फीस दे नहीं सकता। और जिनके पास पैसा है, उनके पास दिमाग (नंबर) नहीं है।
  • इसलिए सरकार कट-ऑफ गिरा देती है ताकि अमीर (चाहे किसी भी जाति का हो) पैसे फेंककर सीट खरीद सके और कॉलेज मालिकों की जेब भर सके। इस खेल में पिसता सिर्फ आम आदमी है जो सरकारी अस्पताल में इलाज कराने जाता है।
  • NEET PG

जागो, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए

  • आरक्षण स्कूल लेवल तक समझ आता है, कॉलेज तक भी बर्दाश्त किया जा सकता है। लेकिन सुपर-स्पेशलिटी (Super Speciality) में आरक्षण और गिरता हुआ कट-ऑफ देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
  • अगर अब भी हम नहीं जागे और योग्यता (Merit) को प्राथमिकता नहीं दी, तो वो दिन दूर नहीं जब भारत के पास डिग्रियां तो बहुत होंगी, लेकिन इलाज करने वाले ‘डॉक्टर’ नहीं बचेंगे।

आपकी राय: क्या डॉक्टर बनने के लिए जाति का आरक्षण होना चाहिए या सिर्फ मेरिट? कमेंट बॉक्स में अपनी राय खुलकर रखें।

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