बिहार शराबबंदी तोड़ने की कोशिश: मऊ में गोपालगंज के तस्करों से 50 हजार की शराब बरामद

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मऊ (उत्तर प्रदेश) से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ पुलिस ने बिहार में शराब तस्करी की एक बड़ी कोशिश को नाकाम कर दिया है। मऊ जिले की दक्षिण टोला थाना पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए दो बिहारी शराब तस्करों को रंगे हाथ दबोचा है। ये दोनों तस्कर मूल रूप से बिहार के गोपालगंज जिले के रहने वाले हैं और करीब 50 हजार रुपये की अंग्रेजी शराब लेकर बिहार जा रहे थे।

कैसे हुई गिरफ्तारी?

यह कार्रवाई एक सटीक मुखबिर की सूचना पर की गई। दक्षिण टोला पुलिस को सूचना मिली थी कि एक सफेद रंग की टाटा पंच कार, जिस पर फर्जी नंबर प्लेट लगी है, भारी मात्रा में अवैध शराब लेकर गाजीपुर के रास्ते बिहार की तरफ निकलने वाली है।

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पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मतलूपुर मोड़ के पास घेराबंदी की। जैसे ही संदिग्ध कार वहाँ पहुँची, पुलिस ने उसे रुकने का इशारा किया। कार सवारों ने भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस टीम ने उन्हें चारों तरफ से घेर कर पकड़ लिया।

तस्करों की पहचान

पकड़े गए दोनों युवक बिहार के रहने वाले हैं और पेशेवर तरीके से तस्करी में शामिल लग रहे हैं। पुलिस द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार:

• रमन कुमार

• रोहित राय (कुछ रिपोर्ट्स में नाम राहित राय भी बताया गया है)

ये दोनों तस्कर बिहार के गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत दिघवा दुबौली गांव के निवासी हैं। पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया कि वे लंबे समय से इस काम में शामिल हैं।

क्या-क्या हुआ बरामद?

पुलिस ने जब टाटा पंच कार की तलाशी ली, तो उसमें से भारी मात्रा में अवैध सामान मिला:

• शराब: विभिन्न ब्रांडों की अंग्रेजी शराब की बोतलें बरामद हुईं, जिनकी कुल बाजार कीमत लगभग 50,000 रुपये आंकी गई है।

• वाहन: तस्करी में इस्तेमाल की जा रही टाटा पंच कार को जब्त कर लिया गया है।

• फर्जीवाड़ा: कार पर जो नंबर प्लेट लगी थी, वह फर्जी पाई गई। तस्करों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए अक्सर इस्तेमाल किए जाने वाले इस तरीके का सहारा लिया था।

तस्करी का रास्ता

पूछताछ के दौरान तस्करों ने बताया कि वे देवरिया से निकले थे और मुहम्मदाबाद गोहना में अपने एक साथी से मिलने के बाद गाजीपुर होते हुए बिहार की सीमा में घुसने वाले थे। बिहार में पूर्ण शराबबंदी होने के कारण उत्तर प्रदेश से शराब ले जाकर वहां ऊंचे दामों पर बेचना इनका मुख्य उद्देश्य था। विशेष रूप से मकर संक्रांति के त्योहार के समय बिहार में शराब की डिमांड बढ़ जाती है, जिसका फायदा ये तस्कर उठाना चाहते थे।

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पुलिस की कार्रवाई

मऊ पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम और धोखाधड़ी (फर्जी नंबर प्लेट के लिए) की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इनके नेटवर्क को खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उत्तर प्रदेश में इन्हें शराब की सप्लाई कौन दे रहा था और बिहार में ये किसे माल डिलीवर करने वाले थे।

बिहार में शराबबंदी के बाद से सीमावर्ती जिलों जैसे गोपालगंज और यूपी के मऊ, देवरिया, बलिया में पुलिस की सतर्कता काफी बढ़ गई है, फिर भी तस्कर नए-नए तरीकों से तस्करी को अंजाम देने की कोशिश करते रहते हैं।

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Mathura Hospital Horror: जेब में ‘मौत’ लेकर पहुंचा ड्राइवर! अस्पताल में मची भगदड़, जानिए 1 रोंगटे खड़े करने वाली वजह

Hospital

Hospital वह जगह है जहां लोग जान बचाने आते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के मथुरा में एक ऐसा वाकया हुआ जिसने डॉक्टरों और मरीजों को अपनी जान बचाने के लिए भागने पर मजबूर कर दिया। सोचिए, आप इमरजेंसी वार्ड में इलाज करा रहे हों और बगल के बेड पर लेटा मरीज अपनी जैकेट की जेब से जिंदा सांप निकाल कर मेज पर रख दे! जी हाँ, यह कोई फिल्मी सीन नहीं, बल्कि मथुरा जिला अस्पताल (District Hospital) की हकीकत है।

12-13 जनवरी की दरमियानी रात, एक ई-रिक्शा चालक ने वह किया जिसे सुनकर ही रूह कांप जाए। सांप के काटने के बाद वह रोया नहीं, बल्कि सांप को पकड़कर अपनी जेब में भर लाया। आखिर उसने ऐसा क्यों किया? क्या यह पागलपन था या कोई अजीबोगरीब समझदारी? आइए जानते हैं इस 12 जनवरी की रात की पूरी कहानी।

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खौफनाक शुरुआत: दीपक और वो जहरीला मेहमान

घटना मथुरा के मांट (Mant) इलाके की है। दीपक नाम का एक ई-रिक्शा चालक अपना दिन खत्म करके घर लौट रहा था। सर्दी का मौसम था, इसलिए उसने जैकेट पहन रखी थी। उसे अंदाजा भी नहीं था कि उसकी गाड़ी में एक बिन बुलाया ‘जहरीला मेहमान’ पहले से बैठा है।

जैसे ही दीपक ने कुछ हरकत महसूस की, सांप ने उसे काट लिया। आम इंसान होता तो चीखता-चिल्लाता और भाग खड़ा होता। लेकिन दीपक ने गजब की हिम्मत (या कहिए जोखिम) दिखाई। उसने सांप के भागने से पहले ही उसे दबोच लिया।

हैरानी की बात यह है कि उसने सांप को मारा नहीं। उसने उस फुफकारते हुए सांप को अपनी जैकेट की जेब में डाल लिया और सीधे जिला अस्पताल की तरफ रिक्शा दौड़ा दिया।

अस्पताल में ‘मौत’ की एंट्री: डॉक्टरों के उड़े होश

असली ड्रामा तब शुरू हुआ जब दीपक जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचा। उसकी हालत खराब हो रही थी, जहर फैल रहा था।

डॉक्टरों ने रूटीन सवाल पूछा— “किस चीज़ ने काटा है? कोई कीड़ा था या सांप?”

दीपक ने जवाब देने के बजाय अपनी जैकेट की जेब में हाथ डाला। डॉक्टरों को लगा वह कोई पर्ची या दवा निकाल रहा है। लेकिन अगले ही पल, दीपक ने वह सांप निकालकर डॉक्टर की मेज पर रख दिया।

वहां मौजूद स्टाफ की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। नज़ारा देख वार्ड में भगदड़ मच गई। तीमारदार अपने मरीजों को छोड़कर भागने लगे। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि जिस सांप ने इसे डसा है, वह उसे ही अपनी गोद में लेकर घूम रहा है।

वो 1 वजह: आखिर जेब में सांप क्यों लाया दीपक?

जब अफरा-तफरी थोड़ी शांत हुई, तो दीपक ने जो वजह बताई, उसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया।

गांव-देहात में एक पुरानी मान्यता है (जो कई बार मेडिकल लॉजिक भी होती है)— “डॉक्टर को सांप दिखा दोगे, तो इलाज सही होगा।”

दीपक का तर्क सीधा था: “साहब, अगर मैं बस बताता कि सांप ने काटा है, तो आप पूछते कौन सा सांप था? नाग था या करैत? मुझे पहचान नहीं थी। इसलिए मैं ‘सबूत’ ही साथ ले आया ताकि आप सही इंजेक्शन (Anti-venom) लगा सको।”

हालांकि, डॉक्टर इसे पागलपन मान रहे थे क्योंकि इससे उसकी और दूसरों की जान को खतरा बढ़ गया था। लेकिन दीपक के लिए यह जिंदगी और मौत की रेस थी, जिसमें वह कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था।

अब कैसी है दीपक की हालत?

गनीमत यह रही कि समय पर अस्पताल पहुंचने और (शायद सांप की पहचान हो जाने के कारण) डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू कर दिया।

* दीपक को एंटी-वेनम इंजेक्शन दिए गए हैं।

* फिलहाल वह खतरे से बाहर बताया जा रहा है, लेकिन डॉक्टरों ने उसे निगरानी (Observation) में रखा है।

* वन विभाग को सूचना दी गई है ताकि सांप को सुरक्षित जंगल में छोड़ा जा सके।

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निष्कर्ष: बहादुरी या बेवकूफी?

यह घटना सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रही है। कुछ लोग दीपक की हिम्मत की दाद दे रहे हैं, तो कुछ इसे जानलेवा बेवकूफी बता रहे हैं। लेकिन एक बात तय है—मथुरा के जिला अस्पताल के डॉक्टरों को यह रात हमेशा याद रहेगी।

सावधानी: अगर आपको कभी सांप काटे, तो कृपया उसे पकड़ने की कोशिश न करें। सांप की फोटो खींच लेना काफी है, उसे जेब में रखकर अस्पताल ले जाना आपकी जान को दोगुना खतरे में डाल सकता है।

आपका क्या मानना है? क्या दीपक ने सांप को साथ ले जाकर सही किया? कमेंट में अपनी राय जरूर लिखें।

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बिहार में ‘आतंकी’ हमले की धमकी ? पटना तथा अन्य अदालतो को RDX से उड़ाने की साजिश आई सामने ,जानिए पूरी खबर

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बिहार की न्यायिक व्यवस्था को दहलाने की एक बड़ी साजिश सामने आई है। राजधानी पटना के सिविल कोर्ट तथा राज्य के आधा दर्जन से अधिक जिला न्यायालयों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। ये संदेश ईमेल के जरिए भेजे गए ओर इस संदेश ने न केवल पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है, बल्कि आम नागरिकों और वकीलों के बीच भी दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। प्रशासन ने आनन-फानन में सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बना दिया है।

क्या है पूरा मामला?

बीते 8 जनवरी 2026 की सुबह पटना सिविल कोर्ट के रजिस्ट्रार को एक गुमनाम ईमेल प्राप्त हुआ। इस ईमेल में दावा किया गया कि कोर्ट परिसर के भीतर 3 RDX आधारित IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) प्लांट किए गए हैं। धमकी देने वाले ने खुद को ‘अरुण कुमार’ बताया और अपना संबंध कथित तौर पर प्रतिबंधित संगठन LTTE से होने का दावा किया।

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चौंकाने वाली बात यह है कि धमकी केवल पटना तक सीमित नहीं थी। गया, अररिया, किशनगंज, दानापुर और भागलपुर के सभी न्यायालयों को भी इसी तरह की डराने वाले मेल भेजे गए। संदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि शाम 4 बजे तक धमाके किए जाएंगे।

हरकत में आई प्रशासन

धमकी मिलने के तुरंत बाद पटना पुलिस और एटीएस (ATS) की टीमें सक्रिय हो गईं। पीरबहोर थाने की पुलिस के साथ बम निरोधक दस्ता (Bomb Disposal Squad) और डॉग स्क्वायड की कई टीमें पटना सिविल कोर्ट पहुंचीं।

•सबसे पहले सुरक्षा कारणों से न्यायाधीशों, वकीलों और वादियों को तुरंत परिसर से बाहर निकाला गया।

• उसके बाद कोर्ट के चप्पे-चप्पे, वकीलों के चैंबर, कैंटीन और पार्किंग स्टैंड की गहन तलाशी ली गई।

• परिणाम स्वरूप घंटों चली मशक्कत के बाद पुलिस को कोई भी संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, जिसके बाद राहत की सांस ली गई और इसे एक ‘होक्स’ (Hoax) या अफवाह करार दिया गया।

जांच में सामने आया तमिलनाडु कनेक्शन

बिहार पुलिस की प्रारंभिक जांच में एक महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगा है। पटना सिटी (सेंट्रल) एसपी दीक्षा के अनुसार, जिस ईमेल आईडी से यह धमकी भेजी गई थी, उसका डिजिटल फुटप्रिंट तमिलनाडु से जुड़ा हुआ मालूम हुआ ।

साइबर एक्सपर्ट्स के लिए दिक्कत

• VPN का उपयोग के कारण पुलिस को शक है कि अपराधी ने अपनी असली लोकेशन छिपाने के लिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) का सहारा लिया है।

• तमिल भाषा का अंश: ईमेल के कंटेंट में कुछ शब्द तमिल भाषा में लिखे थे, जो जांच को दक्षिण भारत की ओर मोड़ रहे हैं।

• मल्टी-स्टेट लिंक: इसी तरह की धमकियां उसी दिन ओडिशा, केरल और पंजाब की अदालतों को भी मिली थीं, जिससे यह एक समन्वित साइबर अटैक या पैनिक क्रिएट करने की बड़ी साजिश लगती है।

नए सुरक्षा नियम

इस घटना के बाद पटना हाई कोर्ट के निर्देश पर राज्य की सभी निचली अदालतों का सुरक्षा ऑडिट (Security Audit) शुरू कर दिया गया है। पटना सिविल कोर्ट में अब बिना गहन तलाशी के किसी को भी प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।

• CCTV निगरानी

• मेटल डिटेक्टर

• अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती

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वकीलों का कहना “बार-बार क्यों हो रहा ऐसा?”

पटना बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ वकीलों ने इस घटना पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। वकीलों का कहना है कि साल 2025 में भी दो बार इसी तरह की धमकियां मिली थीं, लेकिन आज तक मुख्य अपराधी सलाखों के पीछे नहीं पहुंचा है।

बिहार की अदालतों को मिली यह धमकी फिलहाल एक ‘अफवाह’ साबित हुई है, लेकिन इसने सुरक्षा व्यवस्था की कमियों को उजागर कर दिया है। पुलिस प्रशासन इसे गंभीरता से ले रही है और केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर ईमेल के मूल स्रोत तक पहुँचने की कोशिश कर रही है।

क्या आपको लगता है कि अदालतों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम केवल ऐसी धमकियों के बाद ही होने चाहिए, या वहां स्थायी रूप से एयरपोर्ट जैसी सिक्योरिटी होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।

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बिहार में गंगा हुई निर्मल: BSPCB की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, जानें कैसे STPs ने बदली पवित्र नदी की सूरत

गंगा

बिहार में गंगा नदी के प्रदूषण को लेकर वर्षों से जारी चिंता के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (BSPCB) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य में स्थापित किए गए नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STP) के कारण गंगा के पानी की गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार दर्ज किया गया है। अब नदी का पानी न केवल जलीय जीवों के लिए अनुकूल हो रहा है, बल्कि कई घाटों पर प्रदूषण के स्तर में भी भारी गिरावट आई है।

बिहार में गंगा की स्वच्छता: एक नया अध्याय

बिहार की जीवनदायिनी गंगा नदी, जो कभी बढ़ते शहरीकरण और अनियंत्रित सीवेज के कारण प्रदूषित हो रही थी, अब पुनर्जीवन की राह पर है। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (BSPCB) की हालिया रिपोर्ट यह संकेत देती है कि पिछले कुछ वर्षों में ‘नमामि गंगे’ परियोजना के तहत जो बुनियादी ढांचे तैयार किए गए हैं, उनका सकारात्मक असर अब जमीन पर दिखने लगा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पटना समेत बिहार के विभिन्न जिलों में एसटीपी (STP) की कार्यप्रणाली और उनकी बढ़ती क्षमता ने नदी में गिरने वाले गंदे पानी को रोकने में अहम भूमिका निभाई है। जहाँ पहले शहरों का कचरा सीधे गंगा की लहरों में मिलता था, अब उसे वैज्ञानिक तरीके से ट्रीट किया जा रहा है।

Sewage Treatment Plants (STP) का जादू: आंकड़ों की जुबानी

बिहार में गंगा नदी के किनारे बसे शहरों से रोजाना निकलने वाले सीवेज का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती रही है। आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में गंगा के किनारे स्थित शहरों से लगभग 455 MLD (मिलियन लीटर प्रतिदिन) सीवेज निकलता है। नमामि गंगे योजना से पहले, राज्य में केवल 124 MLD उपचार की क्षमता थी, जो अब बढ़कर कई गुना हो गई है।

पटना में बेऊर, कर्मलीचक और सैदपुर जैसे इलाकों में नए एसटीपी के चालू होने से गंगा में गिरने वाले ऑर्गेनिक लोड में भारी कमी आई है। BSPCB के अनुसार, नदी के पानी में घुलित ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen – DO) का स्तर बढ़ा है, जो पानी की शुद्धता का एक मुख्य मानक है।

पानी की गुणवत्ता में सुधार: क्या कहते हैं मानक?

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड गंगा के पानी की जांच 34 विभिन्न स्थानों पर पाक्षिक (Fortnightly) आधार पर करता है। हालिया जांच के परिणामों में कुछ महत्वपूर्ण बिंदु उभर कर आए हैं:

• pH लेवल और Dissolved Oxygen: गंगा के अधिकांश हिस्सों में pH मान और DO (घुलित ऑक्सीजन) का स्तर अब मानकों के अनुरूप पाया गया है। यह जलीय जीवन, विशेषकर लुप्तप्राय गंगा डॉल्फिन के लिए बहुत अच्छी खबर है।

• BOD (Biochemical Oxygen Demand): सीवेज ट्रीटमेंट के कारण BOD के स्तर में गिरावट आई है। रिपोर्ट के अनुसार, बक्सर से भागलपुर तक के कई हिस्सों में पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।

• बैक्टिरियोलॉजिकल सुधार: हालांकि ‘फिकल कोलिफॉर्म’ (Faecal Coliform) अभी भी कुछ जगहों पर चुनौती बना हुआ है, लेकिन एसटीपी के माध्यम से क्लोरिनेशन की प्रक्रिया ने इसे नियंत्रित करने में मदद की है।

पटना: स्वच्छता का मॉडल बनता शहर

राजधानी पटना में गंगा की स्थिति में सबसे अधिक बदलाव देखा गया है। पटना के बेऊर में 43 MLD क्षमता वाले एसटीपी और कर्मलीचक जैसे प्रोजेक्ट्स ने शहर के बड़े ड्रेनेज सिस्टम को गंगा में सीधे मिलने से रोक दिया है। बिहार शहरी बुनियादी ढांचा विकास निगम (BUIDCo) के अनुसार, पटना को 100% सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता वाला शहर बनाने का लक्ष्य अब अंतिम चरणों में है।

सरकार की ‘वन सिटी वन ऑपरेटर’ (One City One Operator) मॉडल वाली नीति ने इन प्लांट्स के रखरखाव और संचालन (O&M) को और अधिक प्रभावी बना दिया है। अब न केवल प्लांट बनाए जा रहे हैं, बल्कि उनकी 15 वर्षों तक की देखभाल की जिम्मेदारी भी तय की गई है।

जलीय जैव विविधता पर प्रभाव: डॉल्फिन की वापसी

पानी की गुणवत्ता सुधरने का सबसे बड़ा प्रमाण ‘गंगा डॉल्फिन’ की बढ़ती संख्या है। जब पानी में प्रदूषण कम होता है और ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है, तो मछलियों और अन्य जलीय जीवों की संख्या में वृद्धि होती है। बिहार के सुल्तानगंज से लेकर कहलगाम तक के क्षेत्र में अब डॉल्फिन का दिखना आम बात हो गई है, जो इस बात का सबूत है कि नदी का इकोसिस्टम फिर से जीवित हो रहा है।

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चुनौतियाँ अभी भी बरकरार: कोलिफॉर्म का मुद्दा

भले ही पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, लेकिन BSPCB की रिपोर्ट यह भी आगाह करती है कि ‘फिकल कोलिफॉर्म’ और ‘टोटल कोलिफॉर्म’ का स्तर अभी भी कुछ घाटों पर मानक से अधिक है। इसका मुख्य कारण कुछ छोटे नालों का अब भी सीधे नदी में गिरना और घाटों पर होने वाली मानवीय गतिविधियां हैं। बोर्ड का कहना है कि जैसे-जैसे राज्य के सभी 58 स्वीकृत प्रोजेक्ट्स पूरे होंगे, यह समस्या भी काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।

क्या आपको लगता है कि आपके शहर के पास गंगा के घाट अब पहले से ज्यादा स्वच्छ दिख रहे हैं? हमें कमेंट में जरूर बताएं!

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Patna High Court New Chief Justice: जस्टिस संगम कुमार साहू बने पटना हाईकोर्ट के 47वें मुख्य न्यायाधीश, जानें कौन हैं वो और क्या है उनका विजन

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बिहार की न्यायिक व्यवस्था में एक नए युग की शुरुआत हुई है। ओडिशा High Court के अनुभवी वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू ने Patna High Court के 47वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ले ली है। उनकी यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब राज्य की अदालतों में लंबित मामलों के निपटारे और न्यायिक सुधारों की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है।

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राजभवन में भव्य शपथ ग्रहण समारोह

बुधवार, 7 जनवरी 2026 को पटना स्थित राजभवन (लोक भवन) के ‘राजेंद्र मंडप’ में आयोजित एक गरिमापूर्ण समारोह में बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने जस्टिस संगम कुमार साहू को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार समेत कई कैबिनेट मंत्री और हाईकोर्ट के अन्य न्यायाधीश मौजूद रहे।

शपथ ग्रहण के बाद न्यायमूर्ति साहू को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके तुरंत बाद वे हाईकोर्ट पहुंचे, जहां शताब्दी हॉल में आयोजित फुल कोर्ट वेलकम सेरेमनी में अधिवक्ताओं और बार एसोसिएशन के सदस्यों ने उनका जोरदार स्वागत किया।

कौन हैं जस्टिस संगम कुमार साहू?

जस्टिस संगम कुमार साहू का कानूनी सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। उनके व्यक्तित्व और करियर से जुड़ी कुछ मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

जन्म और शिक्षा: जस्टिस साहू का जन्म 5 जून 1964 को ओडिशा के कटक में हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा नुआबाजार हाई स्कूल से पूरी की और स्टीवर्ट साइंस कॉलेज से स्नातक किया।

कानूनी पृष्ठभूमि: उन्होंने कटक लॉ कॉलेज से एलएलबी की डिग्री हासिल की। खास बात यह है कि उन्होंने अंग्रेजी और ओडिया साहित्य में एमए भी किया है, जो उनकी भाषाई पकड़ को दर्शाता है।

वकालत की शुरुआत: 26 नवंबर 1989 को उन्होंने ओडिशा स्टेट बार काउंसिल में एक वकील के रूप में अपना पंजीकरण कराया। उन्होंने अपने पिता, प्रसिद्ध आपराधिक वकील दिवंगत शरत चंद्र साहू के मार्गदर्शन में वकालत की बारीकियां सीखीं।

जज के रूप में सफर: उनकी प्रतिभा और कानूनी समझ को देखते हुए 2 जुलाई 2014 को उन्हें ओडिशा हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश और नियुक्ति

जस्टिस संगम कुमार साहू की नियुक्ति की प्रक्रिया दिसंबर 2025 में शुरू हुई थी। CJI सूर्यकांत के नेतृत्व वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 18 दिसंबर 2025 को उनके नाम की सिफारिश की थी। इसके बाद 1 जनवरी 2026 को केंद्र सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय ने राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद उनके नाम की आधिकारिक अधिसूचना जारी की।

बता दें कि अक्टूबर 2025 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस पवन कुमार भीमप्पा बाजन्त्री के सेवानिवृत्त होने के बाद से जस्टिस सुधीर सिंह कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

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पटना हाईकोर्ट के सामने चुनौतियां और प्राथमिकताएं

जस्टिस साहू के कार्यभार संभालने के साथ ही उम्मीदें बढ़ गई हैं। उनके सामने मुख्य रूप से तीन बड़ी चुनौतियां होंगी:

मामलों का भारी बोझ: पटना हाईकोर्ट भारत के सबसे पुराने और महत्वपूर्ण न्यायालयों में से एक है, लेकिन यहाँ लंबित मामलों (Pendency of Cases) की संख्या भी काफी अधिक है। जस्टिस साहू के पास क्रिमिनल और सर्विस लॉ में व्यापक अनुभव है, जो इन मामलों को तेजी से सुलझाने में मददगार साबित होगा।

डिजिटल न्याय व्यवस्था: ‘ई-कोर्ट’ प्रोजेक्ट को और सशक्त बनाना और जिला अदालतों में बुनियादी ढांचे को सुधारना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रह सकता है।

कानूनी सहायता: जस्टिस साहू ओडिशा में राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष रह चुके हैं। ऐसे में बिहार में गरीबों को मुफ्त और सुलभ न्याय दिलाने की दिशा में उनसे बड़े सुधारों की उम्मीद है।

आपको क्या लगता है, जस्टिस संगम कुमार साहू के नेतृत्व में क्या बिहार की अदालतों में लंबित मुकदमों की संख्या में कमी आएगी? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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सोमनाथ स्वाभिमान पर्व: जब 1000 साल के संघर्ष और शौर्य की गूंज से थर्राया अरब सागर, पीएम मोदी ने की शौर्य यात्रा की अगुवाई

सोमनाथ

सोमनाथ मंदिर में आज का दिन भारतीय इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के प्रभास पाटन स्थित प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर में ‘शौर्य यात्रा’ की अगुवाई कर पूरी दुनिया को भारत की अटूट आस्था और अदम्य साहस का संदेश दिया है। यह आयोजन मात्र एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि विदेशी आक्रांताओं के खिलाफ सदियों तक चले संघर्ष और जीत की गौरवगाथा है।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व: आस्था और संकल्प का महासंगम

सोमनाथ की पवित्र भूमि पर आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का आज समापन होने जा रहा है। 8 जनवरी से शुरू हुए इस चार दिवसीय महोत्सव का मुख्य आकर्षण आज की शौर्य यात्रा रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो खुद सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं, सुबह करीब 9:45 बजे इस भव्य जुलूस में शामिल हुए।

इस यात्रा का उद्देश्य उन गुमनाम योद्धाओं को श्रद्धांजलि देना है जिन्होंने सदियों तक सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। यात्रा में 108 घोड़ों का प्रतीकात्मक जुलूस निकाला गया, जो वीरता और त्याग का प्रतीक है।

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1000 साल का इतिहास और पुनरुद्धार की कहानी

यह वर्ष 2026 सोमनाथ के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इतिहास के पन्ने पलटें तो ठीक 1000 साल पहले, यानी 1026 ईस्वी में महमूद गजनवी ने इस मंदिर पर पहला बड़ा आक्रमण किया था। इसके बाद सदियों तक इसे बार-बार तोड़ा गया, लेकिन हर बार भारत की आस्था ने इसे और भव्य रूप में खड़ा कर दिया।

प्रमुख मील के पत्थर:

1026 ईस्वी: गजनवी का पहला विध्वंसक आक्रमण।

1951: लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से मंदिर का ऐतिहासिक पुनरुद्धार और तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा प्राण-प्रतिष्ठा।

2026: पुनरुद्धार की 75वीं वर्षगांठ और आक्रमण के 1000 साल पूरे होने पर ‘स्वाभिमान पर्व’ का आयोजन।

वीर हमीरजी गोहिल: जिनके बलिदान को पीएम ने किया नमन

शौर्य यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने मंदिर परिसर के बाहर स्थित वीर हमीरजी गोहिल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। हमीरजी गोहिल उन महान योद्धाओं में से एक थे, जिन्होंने अलाउद्दीन खिलजी की सेना से सोमनाथ की रक्षा करते हुए अपने प्राण त्याग दिए थे। लोक कथाओं में कहा जाता है कि हमीरजी का धड़ कटने के बाद भी वे दुश्मनों से लड़ते रहे थे।

आज की यह यात्रा उन्हीं जैसे हजारों वीरों को समर्पित है, जिनकी वजह से आज सोमनाथ मंदिर शान से अरब सागर के तट पर खड़ा है।

72 घंटे का अखंड ओंकार नाद और ड्रोन शो

पीएम मोदी कल शाम (10 जनवरी) ही सोमनाथ पहुंच गए थे। उन्होंने मंदिर में चल रहे 72 घंटे के अखंड ‘ओंकार’ मंत्र जाप में हिस्सा लिया। इसके बाद रात्रि में एक भव्य ड्रोन शो का आयोजन किया गया, जिसमें सोमनाथ के विनाश और फिर से निर्माण (The Rise of Somnath) की कहानी को आकाश में उकेरा गया। आधुनिक तकनीक और प्राचीन आस्था का यह संगम देखने लायक था।

पीएम मोदी का संबोधन: “सोमनाथ केवल पत्थर की इमारत नहीं, हमारी चेतना है”

शौर्य यात्रा और मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के बाद प्रधानमंत्री ने एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। उनके भाषण के मुख्य अंश इस प्रकार रहे:

सांस्कृतिक गौरव: पीएम ने कहा कि सोमनाथ की कहानी विध्वंस की नहीं, बल्कि ‘विजय’ की कहानी है। यह मंदिर इस बात का प्रमाण है कि सत्य और आस्था को कभी मिटाया नहीं जा सकता।

युवा पीढ़ी को संदेश: उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने इतिहास को जानें और सोमनाथ से संघर्ष की प्रेरणा लें।

विकास और विरासत: पीएम ने इस बात पर जोर दिया कि आज का भारत अपनी विरासत को सहेजते हुए आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है।

सोमनाथ

न्यूज़ एनालिसिस: क्यों महत्वपूर्ण है यह दौरा?

राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों ही दृष्टियों से पीएम मोदी का यह दौरा काफी अहम है:

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद: राम मंदिर के बाद सोमनाथ के इस भव्य आयोजन के जरिए सरकार देश की सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने का संदेश दे रही है।

वैश्विक कूटनीति: सोमनाथ के बाद पीएम मोदी अहमदाबाद में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ (Friedrich Merz) से मुलाकात करेंगे। इससे यह संदेश जाता है कि भारत अपनी परंपराओं के साथ-साथ वैश्विक संबंधों में भी नेतृत्व कर रहा है।

क्या आपको लगता है कि सोमनाथ जैसे ऐतिहासिक स्थलों के माध्यम से युवाओं को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है? हमें नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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सीरिया के अलेप्पो में भीषण गृहयुद्ध: सीरियाई सेना और SDF के बीच छिड़ी जंग, हजारों लोगों ने छोड़ा घर

सीरिया

सीरिया का ऐतिहासिक शहर अलेप्पो एक बार फिर गोलियों की गड़गड़ाहट और बम धमाकों से दहल उठा है। सीरियाई सरकार (Syrian Transitional Government) और कुर्द नेतृत्व वाली सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस (SDF) के बीच जारी इस ताजा संघर्ष ने पूरे क्षेत्र को मानवीय संकट की दहलीज पर खड़ा कर दिया है। पिछले कुछ दिनों से जारी इस भीषण जंग की वजह से अलेप्पो के रिहायशी इलाकों में मौत का सन्नाटा पसरा है और हजारों परिवार अपना सब कुछ छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में पलायन कर रहे हैं।

सीरिया

अलेप्पो में तनाव का मुख्य कारण: क्यों भिड़ी

सेना और कुर्द लड़ाके?

सीरिया में पिछले कुछ वर्षों से जारी अस्थिरता के बीच अलेप्पो शहर हमेशा से एक रणनीतिक केंद्र रहा है। वर्तमान संघर्ष की शुरुआत 6 जनवरी 2026 को हुई, जब सीरियाई सेना और SDF के बीच अलेप्पो के कुर्द बहुल इलाकों—शेख मकसूद (Sheikh Maqsoud), अशरफिया (Ashrafiyeh) और बनी ज़ैद (Bani Zaid)—के नियंत्रण को लेकर विवाद बढ़ गया।

दरअसल, मार्च 2025 में हुए एक समझौते के तहत SDF को राष्ट्रीय सेना में विलय (Merge) होना था, लेकिन इस एकीकरण की प्रक्रिया धीमी होने और आपसी अविश्वास के कारण तनाव चरम पर पहुंच गया। सीरियाई सरकार ने कुर्दों से शहर खाली करने को कहा, जिसे SDF ने सिरे से खारिज कर दिया, और देखते ही देखते यह विवाद एक खूनी जंग में तब्दील हो गया।

मानवीय गलियारा: जान बचाने की जद्दोजहद

भीषण बमबारी और गोलाबारी के बीच आम नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सीरियाई अधिकारियों ने अलेप्पो के विवादित क्षेत्रों से बाहर निकलने के लिए ह्यूमैनिटेरियन कॉरिडोर (मानवीय गलियारा) खोला है।

• पलायन का आंकड़ा: संयुक्त राष्ट्र (UN) और स्थानीय प्रशासन के अनुसार, अब तक 1,40,000 से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं।

• सुरक्षित मार्ग: सरकारी बसों और निजी वाहनों के जरिए लोगों को शेख मकसूद से निकालकर आफरीन (Afrin) और पूर्वोत्तर सीरिया के सुरक्षित इलाकों में भेजा जा रहा है।

• अस्पतालों की स्थिति: भारी गोलाबारी की वजह से अलेप्पो का प्रमुख अस्पताल ‘अल-शाहिद खालिद फज्र’ (Al-Shahid Khalid Fajr) ठप हो गया है, जिससे घायलों के इलाज में भारी समस्या आ रही है।

मौत का आंकड़ा और जमीनी हकीकत

ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, 11 जनवरी 2026 तक इस संघर्ष में 22 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। सीरियाई मानवाधिकार वेधशाला (SOHR) ने बताया कि शहर के कई हिस्सों में पानी और बिजली की सप्लाई पूरी तरह काट दी गई है, जिससे वहां फंसे लोग नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।

सैन्य ऑपरेशंस और रणनीतिक बदलाव

सीरियाई सेना ने शनिवार (10 जनवरी) को घोषणा की कि उन्होंने अशरफिया और बनी ज़ैद इलाकों पर पूरी तरह नियंत्रण कर लिया है। अब सेना का पूरा ध्यान शेख मकसूद पर है, जो कुर्दों का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है।

प्रमुख सैन्य घटनाक्रम:

• हवाई हमले और ड्रोन: सीरियाई वायुसेना ने कुर्द ठिकानों को निशाना बनाने के लिए आत्मघाती ड्रोनों का इस्तेमाल किया है।

• आत्मघाती विस्फोट: शेख मकसूद में घेराबंदी के दौरान दो कुर्द लड़ाकों द्वारा खुद को उड़ा लेने की खबरें भी सामने आई हैं।

• युद्धविराम की कोशिशें: हालांकि सरकार ने शनिवार को दोपहर 3 बजे से सैन्य ऑपरेशंस रोकने का ऐलान किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर अभी भी छिटपुट फायरिंग जारी है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: दुनिया की नजरें अलेप्पो पर

अलेप्पो की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका ने गहरी चिंता जताई है। अमेरिका के विशेष दूत टॉम बैरक ने जॉर्डन के विदेश मंत्री के साथ चर्चा की है ताकि एक स्थायी युद्धविराम सुनिश्चित किया जा सके। तुर्की, जो कुर्दों को अपने लिए खतरा मानता है, भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है, जिससे इस संघर्ष के क्षेत्रीय युद्ध में बदलने का खतरा मंडरा रहा है।

सीरिया

क्या अलेप्पो फिर से खंडहर बनेगा?

अलेप्पो ने 2011 से चल रहे गृहयुद्ध में पहले ही बहुत कुछ खोया है। ऐतिहासिक इमारतों से लेकर व्यापारिक केंद्रों तक, सब कुछ तबाह हो चुका था। अब जब शहर फिर से खड़ा होने की कोशिश कर रहा था, इस नए संघर्ष ने विकास की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने दोनों पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की है।

क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सीरिया में शांति बहाली के लिए और कड़े कदम उठाने चाहिए, या यह सीरिया का आंतरिक मामला है जिसे उन्हें खुद सुलझाना चाहिए? अपनी राय हमें कमेंट में जरूर बताएं।

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बिहार के किसानों के लिए बड़ी खबर: Farmer ID बनवाने का आखिरी मौका आज, जानें क्यों है यह जरूरी

Farmer ID

बिहार में खेती-किसानी को डिजिटल युग से जोड़ने और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए नीतीश सरकार ने ‘एग्री स्टैक’ (AgriStack) परियोजना के तहत फार्मर आईडी (Farmer ID) बनाना अनिवार्य कर दिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पंजीकरण की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 10 जनवरी 2026 कर दिया है। अगर आप एक किसान हैं और आपने अब तक अपनी डिजिटल आईडी नहीं बनवाई है, तो आज आपके पास अंतिम अवसर है।

बिहार फार्मर आईडी पंजीकरण: 10 जनवरी तक बढ़ा समय

बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री सह उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शुक्रवार को घोषणा की कि राज्य के सभी 38 जिलों में फार्मर आईडी बनाने का अभियान मिशन मोड में चल रहा है। पहले इसकी समय सीमा कम थी, लेकिन सर्वर की समस्याओं और किसानों की भारी संख्या को देखते हुए इसे 10 जनवरी तक के लिए विस्तारित किया गया है।

Farmer ID

राज्य के सभी पंचायत भवनों में आज विशेष शिविर (Camps) लगाए जा रहे हैं, जहाँ किसान जाकर अपना निबंधन करा सकते हैं। सरकार का लक्ष्य राज्य के लगभग 2 करोड़ किसानों को इस डिजिटल डेटाबेस से जोड़ना है, ताकि बिचौलियों की भूमिका खत्म हो सके।

Farmer ID क्यों है अनिवार्य? जानें इसके मुख्य लाभ

फार्मर आईडी केवल एक पहचान पत्र नहीं है, बल्कि यह किसानों के लिए सरकारी लाभ का प्रवेश द्वार है। इसके बिना भविष्य में कई योजनाओं का लाभ मिलना बंद हो सकता है।

1. PM किसान सम्मान निधि की अगली किस्त

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan) योजना के तहत मिलने वाली ₹6,000 की वार्षिक सहायता राशि अब केवल उन्हीं किसानों को मिलेगी जिनके पास वैध फार्मर आईडी होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आगामी 22वीं किस्त के लिए डिजिटल आईडी और ई-केवाईसी (e-KYC) अनिवार्य है।

2. कृषि सब्सिडी और सरकारी योजनाएं

खाद, बीज, कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सब्सिडी और डीजल अनुदान जैसी योजनाओं का लाभ अब इसी आईडी के माध्यम से मिलेगा। फार्मर आईडी होने से डेटा सीधे विभाग के पास रहेगा, जिससे वेरिफिकेशन की प्रक्रिया तेज हो जाएगी।

3. जमाबंदी और भू-अभिलेखों का शुद्धिकरण

पंजीकरण की प्रक्रिया के दौरान राजस्व कर्मी किसान की भूमि के रिकॉर्ड (Jamabandi) का मिलान करेंगे। इससे जमीन के रिकॉर्ड में मौजूद गड़बड़ियों को सुधारा जा सकेगा और स्वामित्व विवाद कम होंगे।

पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज (Documents Required)

यदि आप आज पंचायत भवन में लगने वाले शिविर में जा रहे हैं, तो अपने साथ निम्नलिखित दस्तावेज जरूर ले जाएं:

आधार कार्ड: पहचान और ई-केवाईसी के लिए।

मोबाइल नंबर: जो आधार से लिंक हो (OTP वेरिफिकेशन के लिए)।

जमीन की रसीद (लगान रसीद): जमीन के विवरण और जमाबंदी के सत्यापन के लिए।

बैंक पासबुक: DBT के माध्यम से पैसा प्राप्त करने के लिए।

रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया: कैसे बनवाएं अपनी आईडी?

बिहार सरकार ने इस प्रक्रिया को काफी सरल बनाया है। किसान दो तरीकों से पंजीकरण करा सकते हैं:

पंचायत शिविर (Offline): अपने नजदीकी पंचायत भवन में जाएं। वहां तैनात कृषि समन्वयक (Agriculture Coordinator) या राजस्व कर्मचारी आपके दस्तावेजों की जांच करेंगे और आपका डिजिटल पंजीकरण पूरा करेंगे।

ऑनलाइन पोर्टल (Online): किसान Bihar AgriStack की आधिकारिक वेबसाइट bhfr.agristack.gov.in पर जाकर भी स्वयं या किसी साइबर कैफे (CSC Center) के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

Farmer ID

अब तक के आंकड़े और दूसरे चरण की जानकारी

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बिहार में अब तक लगभग 5.85 लाख से अधिक किसानों की डिजिटल आईडी सफलतापूर्वक बनाई जा चुकी है। अकेले गया जिले में 15,000 से अधिक नए किसानों ने इस साल निबंधन कराया है।

महत्वपूर्ण सूचना: जो किसान आज (10 जनवरी) किसी कारणवश पंजीकरण नहीं करा पाएंगे, उनके लिए सरकार द्वितीय चरण का आयोजन करेगी। दूसरा चरण 18 जनवरी से 21 जनवरी 2026 तक चलेगा। हालांकि, सरकारी लाभों में देरी से बचने के लिए विशेषज्ञों की सलाह है कि प्रथम चरण में ही इसे पूरा कर लें।

क्या आपने अपनी फार्मर आईडी बनवा ली है? यदि आपको पंजीकरण में किसी तकनीकी समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो हमें कमेंट में बताएं ताकि हम आपकी मदद कर सकें।

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71 IPS अधिकारियों का तबादला, कुंदन कृष्णन बने STF चीफ, कई जिलों के SP बदले

71 IPS

बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने नए साल की शुरुआत के साथ ही प्रशासनिक महकमे में अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल किया है। गृह विभाग द्वारा शुक्रवार, 9 जनवरी 2026 की देर शाम जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्य के 71 IPS अधिकारियों का एक साथ तबादला कर दिया गया है। इस बड़े बदलाव से न केवल पुलिस मुख्यालय के समीकरण बदले हैं, बल्कि कई जिलों की सुरक्षा कमान भी नए हाथों में सौंपी गई है।

71 IPS

जिलों की नई कमान: प्रमुख SP और SSP की तैनाती

बिहार के कई महत्वपूर्ण जिलों में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए नए पुलिस कप्तानों की नियुक्ति की गई है। इस कड़ी में सुशील कुमार को गया जिले का नया वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) बनाया गया है, जबकि कांतेश कुमार मिश्रा अब मुजफ्फरपुर के SSP की जिम्मेदारी संभालेंगे। भागलपुर की सुरक्षा का जिम्मा प्रमोद कुमार यादव को सौंपा गया है और विनीत कुमार को सारण (छपरा) का नया SSP नियुक्त किया गया है।

गोपालगंज जिले के पुलिस कप्तान के रूप में विनय तिवारी की वापसी हुई है, जो अपनी विशेष कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। सीमावर्ती जिले किशनगंज में संतोष कुमार और अररिया में जितेंद्र कुमार को SP बनाया गया है। वहीं, सीवान में पूरन कुमार झा, लखीसराय में अवधेश दीक्षित और अरवल में नवजोत सिमी को जिले की कमान सौंपी गई है। राजधानी पटना के यातायात प्रबंधन को सुधारने के लिए सागर कुमार को नया ट्रैफिक SP नियुक्त किया गया है।

पुलिस मुख्यालय और विशेष इकाइयों में बदलाव

जिलों के अलावा पुलिस मुख्यालय (PHQ) के ढांचे में भी बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन को अब एसटीएफ (STF) के महानिदेशक (DG) की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है, साथ ही वे ऑपरेशन और स्पेशल ब्रांच का जिम्मा भी देखेंगे। सुनील कुमार, जो पहले स्पेशल ब्रांच में थे, अब एडीजी (मुख्यालय) के पद पर तैनात किए गए हैं। प्रीता वर्मा को बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम का अध्यक्ष सह एमडी बनाया गया है, जबकि अमित कुमार जैन मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो के नए एडीजी होंगे।

साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए रंजीत कुमार मिश्रा को आईजी (साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई) की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही, हृदयकांत को एटीएस (ATS) का नया एसपी और अनंत कुमार को पटना का रेल एसपी नियुक्त किया गया है।

71 IPS

रेंज और प्रमंडल स्तर पर नई नियुक्तियां

प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूत करने के लिए रेंज स्तर पर भी अधिकारियों को बदला गया है। विवेकानंद को पूर्णिया प्रमंडल का नया आईजी (IG) बनाया गया है, जिससे सीमांचल के जिलों में निगरानी तेज होगी। आनंद कुमार को डीआईजी (विधि-व्यवस्था, पटना) के पद पर तैनात किया गया है, जिनका मुख्य कार्य कानून-व्यवस्था की मॉनिटरिंग करना होगा। कोसी प्रमंडल की जिम्मेदारी अब डीआईजी के रूप में कुमार आशीष संभालेंगे, जबकि मनोज कुमार को पुलिस मुख्यालय में आईजी के पद पर पदस्थापित किया गया है। आर. मलार विजी को एडीजी (बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस) का अतिरिक्त प्रभार देकर सशस्त्र बलों के प्रबंधन को और मजबूती दी गई है।

आपकी क्या राय है? क्या नए पुलिस कप्तानों की तैनाती से बिहार में अपराध की स्थिति में सुधार होगा? कमेंट में अपनी राय जरूर साझा करें।

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पटना में DM ने 11 जनवरी तक कक्षा 8 तक के स्कूल किए बंद, बढ़ती ठंड को देखते हुए जारी हुआ नया आदेश

पटना

बिहार की राजधानी पटना समेत पूरा उत्तर भारत इस समय भीषण शीतलहर और कनकनी की चपेट में है। गिरते तापमान और घने कोहरे के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए पटना जिलाधिकारी (DM) ने जिले के सभी स्कूलों को बंद करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जिससे अभिभावकों और छात्रों को बड़ी राहत मिली है।

पटना DM का आधिकारिक आदेश: कौन से स्कूल रहेंगे बंद?

पटना के जिलाधिकारी ने धारा 144 (अब नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत प्रासंगिक प्रावधान) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए शैक्षणिक गतिविधियों पर रोक लगाई है।

पटना

आदेश का मुख्य विवरण

• कक्षा सीमा: नर्सरी से लेकर कक्षा 8वीं तक के सभी बच्चों के लिए शैक्षणिक गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी।

• समय सीमा: स्कूलों को फिलहाल 11 जनवरी 2026 तक बंद रखने का निर्देश दिया गया है।

• स्कूलों के प्रकार: यह आदेश पटना जिले के अंतर्गत आने वाले सभी सरकारी, निजी (Private), सहायता प्राप्त और प्री-स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा।

बड़ी कक्षाओं के लिए नियम

कक्षा 9वीं से 12वीं तक की कक्षाएं पूरी तरह बंद नहीं की गई हैं, लेकिन उनके समय में बदलाव किया गया है। ऊपर की कक्षाओं का संचालन सुबह 10:30 बजे से पहले और शाम 3:30 बजे के बाद नहीं किया जा सकेगा, ताकि छात्र ठंडी हवाओं से बच सकें।

क्यों लिया गया स्कूल बंदी का फैसला?

बिहार में पिछले 48 घंटों से पछुआ हवाओं ने ठिठुरन बढ़ा दी है। पटना का न्यूनतम तापमान गिरकर 7 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया है।

• घना कोहरा: दृश्यता (Visibility) कम होने के कारण स्कूल बसों और अन्य वाहनों के साथ दुर्घटना का खतरा बढ़ गया था।

• बच्चों का स्वास्थ्य: छोटे बच्चों में कोल्ड डायरिया, निमोनिया और सर्दी-खांसी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों ने भी छोटे बच्चों को सुबह की ठंड से बचाने की सलाह दी थी।

• कोल्ड डे की स्थिति: मौसम विभाग (IMD) ने ‘येलो अलर्ट’ जारी करते हुए अगले कुछ दिनों तक धूप न निकलने की संभावना जताई है।

मौसम विभाग का अनुमान: आगे कैसा रहेगा हाल?

मौसम विज्ञान केंद्र, पटना के अनुसार, बिहार के अधिकांश जिलों में अगले 3 से 4 दिनों तक राहत मिलने के आसार नहीं हैं।

• पछुआ हवाओं का प्रभाव

हिमालयी क्षेत्रों से आ रही ठंडी हवाओं के कारण बिहार के मैदानी इलाकों में कनकनी बनी रहेगी। पटना के अलावा गया, मुजफ्फरपुर और पूर्णिया जैसे जिलों में भी तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

• कोहरे का असर

सड़कों पर दृश्यता 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई है, जिससे न केवल सडक यातायात बल्कि ट्रेनों और फ्लाइट्स के शेड्यूल पर भी बुरा असर पड़ा है।

अभिभावकों और स्कूलों के लिए निर्देश

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई स्कूल इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

• ऑनलाइन क्लासेज: कई निजी स्कूलों ने वैकल्पिक रूप से ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करने का निर्णय लिया है ताकि बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो।

• टीचर और स्टाफ: स्कूलों को बंद करने का आदेश केवल छात्रों के लिए है। शिक्षक और अन्य गैर-शिक्षण कर्मचारी (Non-teaching staff) स्कूल आ सकते हैं और प्रशासनिक कार्य निपटा सकते हैं।

• सुरक्षा प्रोटोकॉल: जिलाधिकारी ने माता-पिता से अपील की है कि वे बच्चों को गरम कपड़े पहनाएं और बेवजह घर से बाहर न निकलने दें।

पटना

बिहार के अन्य जिलों की स्थिति

पटना ही नहीं, बल्कि बिहार के कई अन्य जिलों जैसे भागलपुर, बक्सर और छपरा में भी स्थानीय प्रशासन ने इसी तरह के आदेश जारी किए हैं। राज्य भर के आंगनवाड़ी केंद्रों को भी फिलहाल बंद रखा गया है। बोर्ड परीक्षाओं (BSEB 2026) की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है क्योंकि उनके प्रैक्टिकल एग्जाम्स भी नजदीक हैं।

क्या आपके क्षेत्र में भी ठंड के कारण स्कूलों की छुट्टियां बढ़ा दी गई हैं? हमें कमेंट बॉक्स में बताएं और अपने जिले का नाम जरूर लिखें।

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