Arohi Mim Viral Video: 3 मिनट 24 सेकंड के वीडियो का क्या है सच? जानें इस वायरल स्कैम की पूरी हकीकत

Arohi mim viral video

Arohi Mim Viral Video Link Scam: सोशल मीडिया की दुनिया में इन दिनों बांग्लादेशी अभिनेत्री और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर आरोही मिम (Arohi Mim) का नाम जबरदस्त चर्चा में है। दावा किया जा रहा है कि उनका एक निजी वीडियो इंटरनेट पर लीक हो गया है। ‘3 मिनट 24 सेकंड’ और ‘7 मिनट 11 सेकंड’ जैसे कीवर्ड्स के साथ यह खबर आग की तरह फैल रही है। लेकिन क्या वाकई ऐसा कोई वीडियो मौजूद है या यह डिजिटल दुनिया का एक नया और खतरनाक जाल है? आइए जानते हैं इस पूरे मामले की सच्चाई।

कौन हैं आरोही मिम और क्यों हो रही है चर्चा?

आरोही मिम बांग्लादेश की एक बेहद लोकप्रिय अभिनेत्री और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। अपनी एक्टिंग और शानदार कंटेंट के जरिए उन्होंने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लाखों फॉलोअर्स बनाए हैं। हाल ही में, अचानक से कुछ प्लेटफॉर्म्स पर उनके नाम से आपत्तिजनक वीडियो लीक होने के दावे किए जाने लगे। इन दावों ने न केवल उनके फैंस को चौंका दिया, बल्कि देखते ही देखते गूगल और सोशल मीडिया पर ‘Arohi Mim MMS Leak’ सर्च की बाढ़ आ गई।

Arohi Mim

क्या वाकई वीडियो लीक हुआ है?

इंटरनेट पर ‘आरोही मिम 3 मिनट 24 सेकंड’ की जिस क्लिप का जिक्र किया जा रहा है, जांच में वह पूरी तरह से फर्जी पाई गई है। साइबर विशेषज्ञों और फैक्ट-चेक रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐसा कोई भी असली वीडियो इंटरनेट पर मौजूद नहीं है। स्कैमर्स ने केवल अभिनेत्री के नाम का इस्तेमाल करके लोगों को गुमराह करने के लिए फर्जी थंबनेल और भ्रामक टाइटल्स का सहारा लिया है। यह एक सोची-समझी साजिश है जिसका मकसद लोगों की उत्सुकता का फायदा उठाना है।

सावधान! वायरल लिंक के पीछे छिपा है बड़ा खतरा

साइबर एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि जो लिंक सोशल मीडिया या व्हाट्सएप ग्रुप्स में ‘फुल वीडियो’ के नाम से शेयर किए जा रहे हैं, वे बेहद खतरनाक हो सकते हैं। इन लिंक्स पर क्लिक करने से आप ‘फिशिंग अटैक’ (Phishing Attack) का शिकार हो सकते हैं। अक्सर इन लिंक्स के जरिए आपके फोन या कंप्यूटर में मैलवेयर और वायरस घुस जाते हैं, जो आपके बैंक अकाउंट की जानकारी, निजी फोटो और पासवर्ड चोरी कर सकते हैं। यह केवल एक अभिनेत्री की बदनामी का मामला नहीं, बल्कि आपकी डिजिटल प्राइवेसी के लिए एक गंभीर ‘वेकअप कॉल’ है।

Arohi Mim

डिजिटल प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा पर सवाल

आरोही मिम का यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि डिजिटल युग में हमारी प्राइवेसी कितनी नाजुक है। स्कैमर्स अब मशहूर हस्तियों के नाम का इस्तेमाल करके आम लोगों के डेटा में सेंध लगा रहे हैं। सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में इस तरह के ‘वीडियो लीक स्कैम’ के मामले बढ़े हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से पहले सौ बार सोचें और अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स को हमेशा मजबूत रखें।

सुरक्षित रहने के लिए क्या करें?

अगर आपको भी ऐसा कोई लिंक मिलता है, तो सबसे पहले उसे तुरंत रिपोर्ट करें और डिलीट कर दें। अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर ‘टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन’ (Two-Factor Authentication) ऑन रखें। याद रखें, किसी की निजी जिंदगी से जुड़ी खबरों या वीडियो को बिना पुष्टि के शेयर करना न केवल अनैतिक है, बल्कि कानूनी रूप से अपराध भी हो सकता है। आरोही मिम मामले ने साफ कर दिया है कि इंटरनेट पर जो दिखता है, वह हमेशा सच नहीं होता।इस तरह की अफवाहों से बचें और अपनी साइबर सुरक्षा के प्रति हमेशा सतर्क रहें।

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Katihar Tea Stall News : जहाँ चाय की चुस्की के साथ परोसी जा रही थी ‘गंदी सर्विस’, जानें क्या है पूरा मामला!

Katihar Tea Stall News

Katihar Tea Stall News: बिहार के कटिहार जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। अक्सर लोग थकान मिटाने के लिए चाय की दुकान पर जाते हैं, लेकिन कटिहार की इस दुकान में चाय तो बस एक बहाना था, असली खेल तो दुकान के पीछे के कमरों में चल रहा था।

अदरक कूटने की आड़ में ‘राज’ दबाने का धंधा

कहते हैं कि यहाँ की चाय में अदरक कुछ ज्यादा ही कूटकर डाली जाती थी, लेकिन पुलिसिया जांच और ग्रामीणों के खुलासे ने बताया कि यहाँ अदरक नहीं, बल्कि ‘राज’ कूटकर दबाए जाते थे। कटिहार के एक गांव में स्थित इस चाय की दुकान की आड़ में पिछले 5 सालों से जिस्मफरोशी (Prostitution Racket) का काला कारोबार धड़ल्ले से चल रहा था।

Katihar Tea stall back room

कैसे हुआ इस ‘गंदी बात’ का खुलासा?

इस पूरे मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब स्थानीय ग्रामीणों को दुकान की गतिविधियों पर शक हुआ। गुरुवार को ग्रामीणों ने अचानक दुकान पर धावा बोल दिया।

  • हैरान करने वाला नजारा: ग्रामीणों ने दुकान के अंदर बने एक गुप्त कमरे से एक युवक को आपत्तिजनक (नग्न) अवस्था में पकड़ा।
  • महिला संचालक: दुकान की मालकिन, जिसे स्थानीय लोग ‘बसंती देवी’ के नाम से जानते हैं, वह इस पूरे धंधे को ऑपरेट कर रही थी। दुकान के पिछले हिस्से में बाकायदा चौकी लगाकर अनैतिक कार्यों के लिए केबिन बनाए गए थे।

सोशल मीडिया पर वीडियो हुआ वायरल

जैसे ही ग्रामीणों ने युवक को पकड़ा, उन्होंने उसका वीडियो बना लिया जो अब यूट्यूब और फेसबुक पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे चाय की दुकान की आड़ में समाज की मर्यादा को ताक पर रखकर यह धंधा चलाया जा रहा था। लोग सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं— “कटिहार की बसंती चाय के साथ कुछ ज्यादा ही सर्विस दे रही थी।”

Katihar Police Swat

पुलिस की छापेमारी और कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए कटिहार पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। पुलिस अधिकारी दशरथ राय ने पुष्टि की है कि दुकान के पिछले हिस्से में अवैध गतिविधियां चल रही थीं।

  • • पुलिस ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए।
  • • अवैध सप्लाई नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए जांच तेज कर दी गई है।
  • • स्थानीय लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं जिन्होंने बताया कि यहाँ लंबे समय से संदिग्ध लोगों का आना-जाना लगा रहता था।

सतर्क रहने की जरूरत

यह घटना हमें याद दिलाती है कि कभी-कभी जो दिखता है, वो सच नहीं होता। एक साधारण सी चाय की दुकान के पीछे इतना बड़ा सेक्स रैकेट चल सकता है, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अपने आसपास होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

  • मुख्य बातें (Highlights):
  • स्थान: कटिहार, बिहार।
  • आरोप: चाय की दुकान की आड़ में देह व्यापार।
  • कितने समय से: पिछले 5 वर्षों से सक्रिय।
  • कार्रवाई : पुलिस ने छापेमारी कर नेटवर्क का खुलासा किया।

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Bihar Dairy Scheme: बिहार सरकार का बड़ा तोहफा! भैंस खरीदने पर मिल रही है 75% तक सब्सिडी, ऐसे करें आवेदन और कमाएं लाखों

Bihar Dairy Scheme Buffalo

Bihar Samagra Bhains Palan Yojana 2025-26: बिहार के किसानों और बेरोजगार युवाओं के लिए पशुपालन अब मुनाफे का सौदा बनने वाला है। राज्य सरकार ने Bihar Dairy Scheme – ‘समग्र भैंस पालन योजना 2025-26‘ के तहत भैंस खरीदने से लेकर शेड बनाने तक पर भारी सब्सिडी देने का ऐलान किया है। अगर आप भी कम निवेश में अपना डेयरी बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो यह खबर आपके लिए है।

क्या है समग्र भैंस पालन योजना?

बिहार डेयरी निगम और पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग द्वारा संचालित इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में दूध उत्पादन को बढ़ावा देना और ग्रामीण इलाकों में रोजगार पैदा करना है। इस योजना के तहत खास तौर पर EBC (अत्यंत पिछड़ा वर्ग), SC और ST वर्ग के आवेदकों को 75% तक की सब्सिडी दी जा रही है, जबकि अन्य वर्गों के लिए भी आकर्षक छूट उपलब्ध है।

Bihar Dairy Buffalo

कमाई का गणित: 2 भैंसों से शुरू करें अपना बिजनेस

इस योजना के तहत यदि आप 2 उन्नत नस्ल की भैंसों की इकाई (Unit) लगाते हैं, तो वित्तीय मॉडल कुछ इस प्रकार होगा:

  • कुल लागत: लगभग ₹2,42,000 (भैंस खरीद + शेड + उपकरण)।
  • सरकारी मदद (सब्सिडी): EBC/SC/ST वर्ग के लिए करीब ₹1,71,000 की सब्सिडी।
  • किसान का निवेश: मात्र ₹71,000
  • मुनाफा: 2 भैंसों से प्रतिदिन 20 लीटर दूध उत्पादन होने पर, सुधा (COMFED) को बेचकर आप खर्च काटकर पहले साल ही ₹1.5 लाख तक का शुद्ध लाभ कमा सकते हैं।

तकनीकी सेटअप और सुविधाएं

सरकार केवल पैसा ही नहीं, बल्कि तकनीकी सहायता भी प्रदान कर रही है:

  • पक्का शेड: भैंसों के लिए 40 sq ft का पक्का शेड और 80 sq ft का खुला क्षेत्र बनाने के लिए सहायता।
  • मशीनरी पर छूट: साइलेज मेकिंग मशीन (चारा काटने वाली मशीन) पर ₹10,000 की अलग से सब्सिडी।
  • मुफ्त स्वास्थ्य सेवा: भैंसों का टीकाकरण (FMD, HS) और कृत्रिम गर्भाधान (AI) की सुविधा बिल्कुल मुफ्त मिलेगी।
  • बीमा कवर: मात्र ₹2,000 के प्रीमियम पर ₹1 लाख तक का पशु बीमा।

Buffalo Bihar Dairy Scheme

महिलाओं और युवाओं को प्राथमिकता

बिहार सरकार ने इस योजना में 30% कोटा महिलाओं के लिए आरक्षित रखा है। कटिहार, मुंगेर और गया जैसे जिलों में हाल ही में लगे विशेष कैंपों में भारी संख्या में आवेदन देखे गए हैं। सरकार का लक्ष्य 2026 तक राज्य के 20,000 परिवारों को इस योजना से जोड़ना है।

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज और पात्रता

  • आवेदक बिहार का स्थायी निवासी होना चाहिए।
  • आधार कार्ड, बैंक पासबुक और जाति प्रमाणपत्र।
  • जमीन के कागजात (जहाँ शेड बनाना है)।
  • पशुपालन का बुनियादी ज्ञान या प्रशिक्षण प्रमाणपत्र (यदि हो)।

कैसे करें आवेदन?

इच्छुक किसान भाई आधिकारिक वेबसाइट dairy.bihar.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, अपने नजदीकी बीडीओ (BDO) कार्यालय या जिला पशुपालन कार्यालय में जाकर विस्तृत जानकारी और फॉर्म प्राप्त किया जा सकता है। सहायता के लिए सरकार ने हेल्पलाइन नंबर 1800-345-6215 भी जारी किया है।

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Rajkot Horror: स्कूल वैन ड्राइवर ने 9वीं की छात्रा को बनाया हवस का शिकार, चॉकलेट का लालच देकर किया रेप

Rajkot horror

राजकोट (गुजरात): गुजरात के राजकोट से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने बच्चों की सुरक्षा और स्कूल वाहनों के ड्राइवरों पर भरोसे को तार-तार कर दिया है। यहाँ एक स्कूल वैन ड्राइवर ने 9वीं कक्षा में पढ़ने वाली 14 वर्षीय छात्रा के साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। इंटरनेट पर इसके बाद गुस्सा फूट पड़ा है और Rajkot Horror ट्रेंड कर रहा है। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया है।

Rajkot horror -School driver

कैसे दी वारदात को अंजाम?

यह पूरी घटना 19 जनवरी 2026 के आसपास की बताई जा रही है। आरोपी की पहचान 35 वर्षीय रमेश खारा के रूप में हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, रमेश पिछले कुछ समय से छात्रा को चॉकलेट और मीठी बातों के लालच में फंसा रहा था। उसने छात्रा का मोबाइल नंबर हासिल किया और व्हाट्सएप पर उससे बातचीत शुरू की। घटना के दिन, ड्राइवर ने वैन को एक सुनसान जगह पर रोका, गाड़ी की खिड़कियों पर काले पर्दे लगाए और मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी की।

पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी

पीड़िता ने हिम्मत दिखाते हुए इस घटना की जानकारी अपने परिजनों को दी, जिसके बाद 19 जनवरी को राजकोट पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल आरोपी रमेश खारा को दबोच लिया। आरोपी पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम और आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। स्थानीय मीडिया और नेशनल चैनलों जैसे ABP न्यूज़ और News18 ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है।

Symbolic representation of Girl being molested

सुरक्षा पर उठते बड़े सवाल

राजकोट में पिछले कुछ दिनों के भीतर बच्चों के खिलाफ अपराध की यह दूसरी बड़ी घटना है। हाल ही में एक और स्कूल बस ड्राइवर द्वारा 5 साल की मासूम के साथ छेड़छाड़ की खबर भी सुर्खियों में रही थी। इन घटनाओं ने अभिभावकों के मन में डर पैदा कर दिया है कि क्या स्कूल वैन और बसें बच्चों के लिए सुरक्षित हैं? पुलिस अब स्कूल वाहन चालकों के चरित्र सत्यापन (Character Verification) को लेकर सख्त कदम उठाने की बात कह रही है।

स्कूलों में ड्राइवरों की सुरक्षा जांच कैसे बढ़ानी चाहिए?”अपनी राय दे।

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पंजाब में गणतंत्र दिवस पर दहलाने की साजिश नाकाम: होशियारपुर से बब्बर खालसा (BKI) के 4 आतंकी गिरफ्तार, 2.5 किलो IED बरामद

26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस से ठीक पहले पंजाब पुलिस ने एक बहुत बड़ी आतंकी साजिश का पर्दाफाश किया है। होशियारपुर पुलिस और जालंधर काउंटर इंटेलिजेंस (CI) ने एक संयुक्त ऑपरेशन में प्रतिबंधित संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) के चार खतरनाक गुर्गों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से भारी मात्रा में विस्फोटक और हथियार बरामद हुए हैं, जिससे साफ है कि राज्य में किसी बड़ी तबाही की तैयारी थी।

गणतंत्र दिवस (Republic Day) पर था हमले का प्लान

पकड़े गए आतंकियों की पहचान दिलजोत सिंह, हरमन सिंह, अजय उर्फ मेहरा और अर्शदीप सिंह के रूप में हुई है। इन्हें होशियारपुर के गढ़शंकर इलाके से दबोचा गया। पुलिस के अनुसार, ये चारों आरोपी अमेरिका में बैठे अपने हैंडलर्स के इशारे पर काम कर रहे थे। इनका मकसद 26 जनवरी के मौके पर पंजाब में धमाके कर दहशत फैलाना और शांति भंग करना था।

पंजाब में गणतंत्र दिवस

बरामदगी: 2.5 किलो IED और घातक हथियार

पुलिस को तलाशी के दौरान इनके पास से जो सामान मिला है, वह चौंकाने वाला है:

• 2.5 किलो IED (Explosive): यह विस्फोटक RDX से लदा था, जो एक साथ कई लोगों की जान लेने में सक्षम था।

• दो पिस्टल: सुरक्षा बलों पर हमला करने या टारगेट किलिंग के लिए इन हथियारों का इस्तेमाल होना था।

• विदेशी कनेक्शन: जांच में सामने आया है कि यह विस्फोटक पाकिस्तान की सीमा से तस्करी कर लाया गया था और इसमें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का हाथ होने का अंदेशा है।

विदेशी हैंडलर्स और ISI का हाथ

पंजाब के DGP गौरव यादव ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी कि यह मॉड्यूल पूरी तरह से विदेश से संचालित हो रहा था। अमेरिका (USA) में बैठे बब्बर खालसा के हैंडलर्स इन चारों युवाओं को निर्देश दे रहे थे। यह पंजाब में ‘खालिस्तानी उग्रवाद’ को दोबारा जिंदा करने की एक नाकाम कोशिश थी, जिसे Punjab Police की सतर्कता ने समय रहते फेल कर दिया।

पंजाब में गणतंत्र दिवस

पुलिस की मुस्तैदी ने टाला बड़ा हादसा

जालंधर काउंटर इंटेलिजेंस को एक गुप्त सूचना मिली थी कि होशियारपुर के रास्ते विस्फोटक ले जाया जा रहा है। बिना वक्त गंवाए पुलिस ने नाकाबंदी की और इन चारों को धर दबोचा। अगर ये आतंकी अपनी साजिश में कामयाब हो जाते, तो पंजाब में भारी जान-माल का नुकसान हो सकता था। फिलहाल, पुलिस इन आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि इनके पूरे नेटवर्क और आने वाले अन्य संभावित खतरों का पता लगाया जा सके।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

इस घटना के बाद पूरे पंजाब में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। सार्वजनिक स्थलों, बस स्टैंडों और रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। Republic Day Plot के नाकाम होने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि पंजाब में इनके और कितने स्लीपर सेल सक्रिय हो सकते हैं।

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उज्जैन(Ujjain) के तराना में भारी हिंसा: मामूली विवाद ने लिया साम्प्रदायिक रूप, बसें फूंकीं और घरों पर पथराव

Ujjain riots

उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले का तराना कस्बा पिछले दो दिनों से साम्प्रदायिक हिंसा की आग में झुलस रहा है। गुरुवार शाम को शुरू हुआ एक मामूली विवाद शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद बड़े उपद्रव में बदल गया। भीड़ ने न केवल यात्री बसों को आग के हवाले कर दिया, बल्कि रिहायशी इलाकों में जमकर पत्थरबाजी भी की। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है और इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं।

विवाद की शुरुआत: एक मामूली कहासुनी और हमला

हिंसा की शुरुआत गुरुवार शाम करीब 7:30 बजे हुई। बताया जा रहा है कि तराना के बड़े राम मंदिर के पास स्थित सुखला गली में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के नगर मंत्री सोहेल ठाकुर और उनके साथी रजत ठाकुर खड़े थे। इसी दौरान ईशान मिर्जा नामक युवक अपने कुछ साथियों के साथ वहां पहुंचा। किसी बात को लेकर दोनों पक्षों में बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। आरोप है कि पीछे से आए कुछ युवकों ने लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से सोहेल और रजत पर हमला कर दिया। इस हमले में दोनों के सिर पर गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए उज्जैन रेफर किया गया।

Police action in Ujjain

गुरुवार रात का तांडव: 11 बसों में तोड़फोड़ और आगजनी

जैसे ही हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं पर हमले की खबर कस्बे में फैली, गुस्साए लोग सड़कों पर उतर आए। आक्रोशित भीड़ ने बस स्टैंड का रुख किया और वहां खड़ी लगभग 11 यात्री बसों पर पथराव कर दिया। उपद्रवियों ने बसों के कांच फोड़ दिए और कुछ वाहनों में आग लगा दी। घटना के बाद हिंदू संगठनों ने तराना थाने का घेराव किया और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर नारेबाजी की। हालांकि पुलिस ने उस वक्त मामला शांत कराने की कोशिश की, लेकिन तनाव कम नहीं हुआ।

जुमे की नमाज के बाद फिर भड़की हिंसा

शुक्रवार को स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब जुमे की नमाज के बाद नयापुरा इलाके में एक बार फिर दो पक्ष आमने-सामने आ गए। नमाज खत्म होते ही भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान घरों की छतों से पत्थर फेंके गए और गलियों में तलवारें लहराते युवक देखे गए। उपद्रवियों ने एक और बस को आग लगा दी और पूर्व पार्षद आजाद खान की स्क्रैप की दुकान में भी आगजनी की गई। बाजार में दहशत का माहौल बन गया और व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद कर दीं।

Ujjain religion dispute

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

बिगड़ते हालात को देखते हुए उज्जैन कलेक्टर और एसपी स्वयं मौके पर पहुंचे। कस्बे में बीएनएस की धारा 163 (पुरानी धारा 144) लागू कर दी गई है। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 300 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है। पुलिस ने अब तक मुख्य हमलावरों में से 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक मुख्य आरोपी अभी भी फरार है। सोशल मीडिया पर अफवाहों को रोकने के लिए क्षेत्र में इंटरनेट सेवा अस्थायी रूप से बंद कर दी गई है।

आम जनजीवन अस्त-व्यस्त

इस हिंसा के कारण तराना कस्बे में दहशत का सन्नाटा पसरा हुआ है। स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं और बसें जलने के कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक छोटी सी आपसी रंजिश को कुछ शरारती तत्वों ने साम्प्रदायिक रंग दे दिया, जिससे पूरे कस्बे की शांति भंग हो गई।

फिलहाल, पुलिस ड्रोन कैमरों की मदद से उपद्रवियों की पहचान कर रही है। प्रशासन ने सख्त चेतावनी दी है कि जो भी व्यक्ति शांति व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस रात भर गश्त कर रही है और पूरे कस्बे पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

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UP Blackout Mock Drill 2026: आज शाम 6 बजे पूरे प्रदेश में बजेंगे सायरन, जानें इस अभ्यास का मकसद और पूरी प्रक्रिया

Blackout

UP Blackout Mock Drill 2026: उत्तर प्रदेश के इतिहास में आज एक बड़ा और महत्वपूर्ण अभ्यास होने जा रहा है। आज यानी 23 जनवरी 2026 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 130वीं जयंती (पराक्रम दिवस) के अवसर पर यूप’ का आयोजन किया जाएगा। शाम ठीक 6:00 बजे पूरे प्रदेश में सायरन की गूंज सुनाई देगी और कुछ मिनटों के लिए इमरजेंसी जैसी स्थिति का अभ्यास किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनता को घबराने की जरूरत नहीं है, यह केवल भविष्य की आपदाओं और हवाई हमलों जैसी स्थितियों से निपटने की एक तैयारी है।

क्या है ब्लैकआउट मॉक ड्रिल और आज शाम क्या होगा?

शाम 6:00 बजे जैसे ही सायरन बजेंगे, राज्य के सभी जिलों में 2 से 10 मिनट के लिए बिजली आपूर्ति (Power Supply) बंद कर दी जाएगी। के अनुसार, इस ड्रिल का मुख्य उद्देश्य यह जांचना है कि अगर कभी दुश्मन देश द्वारा हवाई हमला या कोई बड़ी आपदा आती है, तो हमारी सिविल डिफेंस और सुरक्षा टीमें कितनी तेजी से रिस्पांस करती हैं। इस दौरान सड़कों पर आवाजाही रोकी जा सकती है और लोगों से घरों के अंदर रहने व लाइटें बंद रखने की अपील की गई है। लखनऊ में हाल ही में हुए रिहर्सल में देखा गया कि किस तरह आग बुझाने, घायलों को निकालने और फर्स्ट एड देने का अभ्यास किया गया था।

Mock drill image

हवाई हमले जैसी स्थिति का अभ्यास: सिविल डिफेंस की बड़ी भूमिका

इस महा-अभ्यास में सिविल डिफेंस, NDRF, SDRF और स्थानीय पुलिस प्रशासन मिलकर काम करेंगे। के मुताबिक, मॉक ड्रिल के दौरान कई जगहों पर कृत्रिम धमाकों की आवाज, आग लगने का दृश्य और इमारतों से लोगों को रेस्क्यू करने का नाटक रचा जाएगा। यह सब इसलिए किया जा रहा है ताकि इमरजेंसी सेवाओं जैसे एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस के बीच तालमेल को बेहतर बनाया जा सके। जानकारों का मानना है कि आज के दौर में ड्रोन और मिसाइल हमलों का खतरा बढ़ गया है, ऐसे में जनता और प्रशासन का प्रशिक्षित होना बहुत जरूरी है।

नेताजी की जयंती और ब्लैकआउट का ऐतिहासिक संबंध

23 जनवरी का दिन चुनने के पीछे एक गहरा कारण है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने हमेशा राष्ट्र की सुरक्षा और अनुशासन पर जोर दिया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी ‘ब्लैकआउट’ की रणनीति का इस्तेमाल शहरों को हवाई बमबारी से बचाने के लिए किया जाता था। में बताया गया है कि यूपी सरकार इस परंपरा के माध्यम से नई पीढ़ी को देशभक्ति और आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक करना चाहती है। यह ड्रिल यह संदेश देती है कि उत्तर प्रदेश किसी भी आपातकालीन स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार है।

Mock drill training

आम जनता के लिए जरूरी गाइडलाइन्स: क्या करें और क्या न करें?

ब्लैकआउट के दौरान आम नागरिकों को कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि अभ्यास सफल हो सके:

  • सायरन सुनकर घबराएं नहीं: शाम 6 बजे बजने वाला सायरन केवल अभ्यास की सूचना है।
  • लाइटें बंद रखें: जैसे ही बिजली कटे, अपने घरों और दुकानों की लाइटें बंद कर दें और खिड़कियों पर पर्दे डाल दें।
  • सड़क पर हैं तो रुक जाएं: यदि आप वाहन चला रहे हैं, तो सुरक्षित स्थान पर गाड़ी खड़ी कर दें।
  • अफवाहों से बचें: सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक खबरों पर यकीन न करें, यह एक आधिकारिक सरकारी ड्रिल है।
  • बुजुर्गों और बच्चों का ध्यान रखें: उन्हें पहले ही सूचित कर दें कि यह केवल एक अभ्यास (Mock Drill) है ताकि वे डरे नहीं।

यूपी में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर सभी 75 जिलों में एक साथ यह मॉक ड्रिल हो रही है। यह न केवल प्रशासन की तैयारी को परखने का तरीका है, बल्कि जनता में अनुशासन की भावना जगाने का भी प्रयास है। शाम 6:00 बजे होने वाले इस 2 मिनट के ब्लैकआउट में सहयोग करके आप भी राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बना सकते हैं। सरकार की योजना है कि भविष्य में ऐसे अभ्यास नियमित रूप से किए जाएं ताकि किसी भी असली संकट के समय जान-माल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।

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-45°C में 24 घंटे! बिना ऑक्सीजन ‘मौत’ को दी मात, रोहताश खिलेरी (Rohtash Khileri) ने रचा इतिहास… गुटखा खाने वाले युवाओं के गाल पर 1 करारा तमाचा

Rohtash khileri

आजकल हम ‘हीरो’ किसे मानते हैं? उसे जो रील (Reel) पर 15 सेकंड का मुजरा करता है? या उसे जो गली के नुक्कड़ पर सिगरेट का छल्ला बनाकर खुद को ‘कूल’ समझता है?

अगर आपकी नजर में यही ‘हीरो’ हैं, तो आपको अपनी सोच बदलने की जरूरत है। असली हीरो वो है जिसने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी पर, जहां सांस लेना भी मुश्किल है, वहां 24 घंटे बिताकर भारत का झंडा गाड़ दिया।
जी हाँ, हम बात कर रहे हैं हरियाणा के हिसार जिले के मंगाली गांव के लाल रोहताश खिलेरी (Rohtash Khileri) की। उनका यह कारनामा सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि देश के उन लाखों युवाओं के लिए एक आईना (Mirror) है, जो जवानी के जोश को नशे और अपराध में बर्बाद कर रहे हैं।

रोहताश का कारनामा: जहाँ खून जम जाए, वहां बिताए 24 घंटे

जरा कल्पना कीजिए—तापमान माइनस 45 डिग्री (-45°C), 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती बर्फीली हवाएं, और ऑक्सीजन इतना कम कि इंसान कुछ ही पल में बेहोश हो जाए।
ऐसी जानलेवा परिस्थितियों में, यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रस (Mount Elbrus – 18,510 फीट) पर रोहताश खिलेरी ने वो किया जो आज तक कोई नहीं कर पाया।

  • द रिकॉर्ड: रोहताश ने इस चोटी पर 24 घंटे लगातार रुकने का विश्व रिकॉर्ड बनाया।
  • चुनौती: सबसे बड़ी बात यह है कि उन्होंने यह कारनामा बिना ऑक्सीजन सिलेंडर के किया।
    मंगाली गांव के एक साधारण किसान परिवार से आने वाले इस लड़के ने साबित कर दिया कि अगर इरादे फौलादी हों, तो साधन मायने नहीं रखते। रोहताश बिश्नोई (खिलेरी) इससे पहले माउंट किलिमंजारो पर भी तिरंगा फहरा चुके हैं।
Rohtashkhileri
apnivani

आज का युवा: गुटखा, नशा और ‘फर्जी टशन’

अब जरा तस्वीर का दूसरा रुख देखिए। एक तरफ रोहताश हैं जो देश का नाम रोशन करने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं, और दूसरी तरफ हमारे देश का एक बड़ा युवा वर्ग है।आज गली-मोहल्लों में देखिए, 18-20 साल के लड़के क्या कर रहे हैं?

  • नशा: सुबह उठते ही मुंह में गुटखा, पान मसाला या हाथ में सिगरेट। फेफड़े फौलाद बनाने की उम्र में वे उसे धुएं से काला कर रहे हैं।
  • बर्बादी: टाइम पास के नाम पर सोशल मीडिया पर घंटों स्क्रॉल करना और अश्लील वीडियो देखना।
  • अपराध: दुख होता है यह लिखते हुए, लेकिन अखबार रेप, छेड़खानी और लूटपाट की खबरों से भरे पड़े हैं। क्या यह वही युवा शक्ति है जिस पर स्वामी विवेकानंद को गर्व था?

रोहताश पहाड़ की ऊंचाई नाप रहे हैं, और बाकी युवा अपने चरित्र की गिरावट (Downfall) नाप रहे हैं।

मर्दानगी क्या है? (What is Real Manhood?)

उन लड़कों से मेरा सीधा सवाल है जो लड़कियों को छेड़कर या रेप जैसी घिनौनी हरकत करके खुद को ‘मर्द’ समझते हैं।
क्या कमज़ोर पर ताकत दिखाना मर्दानगी है? नहीं! असली मर्दानगी वो है जो रोहताश ने दिखाई।

  • प्रकृति से लड़ना मर्दानगी है।
  • अपने शरीर को तपाना और सीमाओं से पार जाना मर्दानगी है।
  • देश का झंडा दूसरे देश की छाती पर गाड़ना मर्दानगी है।
    जो युवा नशे में धुत होकर सड़क किनारे पड़े रहते हैं, उन्हें रोहताश की फोटो देखनी चाहिए। जिस उम्र में रोहताश ने -45 डिग्री को झेल लिया, उसी उम्र में आप थोड़ी सी परेशानी आने पर डिप्रेशन में चले जाते हैं या नशा करने लगते हैं। शर्म आनी चाहिए!
Rohtash khileri on mountain
apnivani

Rohtash kesदेशभक्ति: नारों में नहीं, कारनामों में दिखती है

15 अगस्त और 26 जनवरी को बाइक पर तिरंगा लगाकर हुड़दंग मचाना देशभक्ति नहीं है। स्टेटस पर “प्राउड इंडियन” लिखना बहुत आसान है। लेकिन रोहताश जैसे लोग बताते हैं कि असली देशभक्ति क्या है।
जब रोहताश एल्ब्रस की चोटी पर ठिठुर रहे थे, तो उन्हें गर्मी किसी आग से नहीं, बल्कि अपने तिरंगे से मिल रही थी। उन्होंने अपने गांव, अपने जिले और अपने देश का मान बढ़ाया है।
सोचिए, अगर हर युवा रोहताश जैसी जिद पाल ले—चाहे वो खेल में हो, पढ़ाई में हो, या बिजनेस में—तो भारत को विश्व गुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता।

जागो युवाओं: अपना रास्ता खुद चुनो

  • आज आपके पास दो रास्ते हैं:
  • रास्ता 1: रोहताश खिलेरी बनो। संघर्ष करो, पसीना बहाओ, और दुनिया के नक्शे पर अपना नाम लिख दो।
  • रास्ता 2: पान-मसाला चबाओ, चौराहों पर समय बर्बाद करो, और एक दिन गुमनामी या जेल के अंधेरे में खो जाओ।
    चुनाव आपका है। रोहताश ने दिखा दिया है कि इंसान की क्षमता (Potential) की कोई सीमा नहीं होती। हिसार के छोटे से गांव का लड़का अगर यूरोप हिला सकता है, तो आप भी बहुत कुछ कर सकते हैं।
    बस अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाओ। रेप, लूट और नशे जैसा कीचड़ छोड़कर, पर्वतों जैसी ऊंचाई चुनो।

सलाम है इस जज़्बे को

रोहताश खिलेरी को हमारा सलाम। उन्होंने न सिर्फ पहाड़ जीता है, बल्कि यह भी बताया है कि भारतीय युवाओं के रगों में अभी भी वो खून दौड़ रहा है जो असंभव को संभव कर सकता है। बस जरूरत है उस आग को सही जगह लगाने की।
शेयर करें: इस पोस्ट को हर उस युवा तक पहुंचाएं जो अपनी राह भटक गया है। शायद रोहताश की कहानी किसी की जिंदगी बदल दे।

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Singur Farmers Crisis 2026: क्या फिर बंजर हो जाएगी ‘सोना’ उगलने वाली जमीन? आलू और धान की खेती पर मंडराया काला साया

Singur Farmers Crisis

Singur Farmers Crisis 2026: पश्चिम बंगाल का सिंगुर, जो कभी अपनी उपजाऊ जमीन और रिकॉर्ड आलू उत्पादन के लिए जाना जाता था, आज एक बार फिर दर्द और बदहाली के आंसू रो रहा है। करीब 20 साल पहले शुरू हुआ नैनो कारखाने का विवाद तो खत्म हो गया, लेकिन किसानों की किस्मत आज भी अधर में लटकी है। साल 2026 की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, सिंगुर में आलू और धान के उत्पादन में 50% से 70% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। किसानों का कहना है कि उनकी जमीन अब पहले जैसी ‘उर्वर’ नहीं रही और सरकार के वादे सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गए हैं।

क्यों बंजर हो रही है सिंगुर की जमीन? असल वजहें

सिंगुर के किसानों की सबसे बड़ी समस्या जमीन की क्वालिटी का खराब होना है। 2006-08 के दौरान टाटा नैनो प्रोजेक्ट के लिए जब जमीन का अधिग्रहण हुआ, तो वहां कंक्रीट और भारी मशीनों का इस्तेमाल किया गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जमीन तो वापस मिल गई, लेकिन मिट्टी की ऊपरी परत (Top Soil) पूरी तरह नष्ट हो चुकी है।

आज स्थिति यह है कि जिस खेत में कभी प्रति हेक्टेयर 25 टन आलू निकलता था, वहां अब मुश्किल से 12 टन की पैदावार हो रही है। धान की खेती भी अब साल में दो बार के बजाय सिर्फ एक बार ही हो पा रही है। पानी के जमाव और सिंचाई की समुचित व्यवस्था न होने के कारण हजारों किसान कर्ज के बोझ तले दब गए हैं।

राजनीति और वादों के बीच फंसा किसान

सिंगुर का मुद्दा हमेशा से पश्चिम बंगाल की राजनीति का केंद्र रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसी आंदोलन के दम पर सत्ता हासिल की थी, लेकिन 2026 में भी किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। हालांकि सरकार ने ‘कृषक बंधु’ जैसी योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन सिंगुर के जमीनी हालात को सुधारने के लिए कोई ठोस ‘पुनर्वास पैकेज’ नहीं दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पुरानी फैक्ट्रियों के अवशेष पूरी तरह हटाकर जमीन को समतल नहीं किया जाता, तब तक खेती में सुधार नामुमकिन है।

आलू और धान की फसल पर दोहरी मार

सिंगुर का आलू पूरे बंगाल में मशहूर है, लेकिन इस साल बेमौसम बारिश और बढ़ती लागत ने कमर तोड़ दी है। खाद, बीज और बिजली के दाम पिछले दो सालों में दोगुने हो गए हैं, जबकि मंडी में किसानों को सही भाव नहीं मिल रहा है। छोटे किसान (जो कुल संख्या का 60% हैं) अब खेती छोड़कर शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। बुजुर्ग और महिलाएं, जो घर पर रहकर खेती संभालती थीं, अब आर्थिक तंगी के कारण संकट में हैं।

समाधान की तलाश

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सिंगुर को बचाने के लिए युद्धस्तर पर काम करने की जरूरत है। इसके लिए कुछ सुझाव दिए गए हैं:

मिट्टी का उपचार (Soil Treatment): सरकारी स्तर पर मिट्टी का परीक्षण कर उसे फिर से उपजाऊ बनाने के लिए जरूरी पोषक तत्व और जैविक खाद मुहैया कराई जाए।

ड्रिप इरिगेशन: सिंचाई की समस्या दूर करने के लिए आधुनिक तकनीक और सब्सिडी दी जाए।

कोऑपरेटिव फार्मिंग: छोटे किसानों को एकजुट कर सहकारी खेती को बढ़ावा दिया जाए ताकि लागत कम हो सके।

बाजार तक पहुंच: किसानों को दलालों से बचाने के लिए स्थानीय स्तर पर सरकारी मंडियां (Kisan Mandis) मजबूत की जाएं।

Singur Farmers Crisis 2026

क्या सुधरेगी सिंगुर की तस्वीर?

सिंगुर के किसानों की लड़ाई सिर्फ जमीन की नहीं, बल्कि उनके आत्म-सम्मान और आजीविका की है। 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में बीजेपी और टीएमसी दोनों ही इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या भाषणों से किसानों के पेट भरेंगे? सिंगुर का संकट हमें याद दिलाता है कि औद्योगीकरण और कृषि के बीच संतुलन बनाना कितना जरूरी है।

किसान भाइयों, अगर आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो जिला कृषि कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज कराएं और सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए हेल्पलाइन 1800-180-1551 पर संपर्क करें। सिंगुर के संघर्ष की हर अपडेट के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।

क्या आपको लगता है कि सिंगुर के किसानों को कभी पूरा न्याय मिल पाएगा? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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UP SC Tractor Subsidy Scheme 2026: SC किसानों की मौज! 45 HP ट्रैक्टर पर मिल रही ₹3 लाख की भारी छूट, जानें आवेदन का तरीका

SC Tractor Subsidy Scheme

UP SC Tractor Subsidy Scheme 2026: उत्तर प्रदेश के अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के किसान भाइयों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी आई है। योगी सरकार ने खेती को आसान और आधुनिक बनाने के लिए ‘ट्रैक्टर अनुदान योजना’ के तहत भारी सब्सिडी का ऐलान किया है। इस योजना के अंतर्गत, यदि आप 45 HP (हॉर्सपावर) तक का ट्रैक्टर खरीदते हैं, तो सरकार आपको 3 लाख रुपये तक की सब्सिडी दे रही है। आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसकी आखिरी तारीख जनवरी 2026 के अंत तक है। अगर आप भी खेती के लिए अपना ट्रैक्टर खरीदना चाहते हैं, तो यह आपके पास सबसे अच्छा मौका है।

क्या है यूपी ट्रैक्टर अनुदान योजना और कितना मिलेगा लाभ?

उत्तर प्रदेश कृषि विभाग द्वारा संचालित इस योजना का मुख्य उद्देश्य दलित और पिछड़े वर्ग के किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करना है। के अनुसार, 45 HP तक के ट्रैक्टरों पर कुल कीमत का लगभग 40% से 50% तक अनुदान दिया जा रहा है, जिसकी अधिकतम सीमा 3 लाख रुपये तय की गई है।

UP SC Tractor Subsidy Scheme 2026

इसका मतलब है कि अगर आप 6-7 लाख रुपये का ट्रैक्टर चुनते हैं, तो आपको अपनी जेब से सिर्फ आधी कीमत ही देनी होगी, बाकी पैसा सरकार सीधे आपके बैंक खाते में भेजेगी। इस योजना से न केवल जुताई और बुआई का खर्च कम होगा, बल्कि किसानों की आय में भी जबरदस्त बढ़ोतरी होगी।

कौन ले सकता है इस योजना का फायदा? (पात्रता नियम)

इस योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार ने कुछ आसान शर्तें रखी हैं:

SC श्रेणी: आवेदक का उत्तर प्रदेश का मूल निवासी और अनुसूचित जाति (SC) से होना अनिवार्य है।

जमीन का स्वामित्व: किसान के नाम पर अपनी खेती योग्य जमीन (कम से कम 1 एकड़) होनी चाहिए।

नया ट्रैक्टर: यह लाभ केवल नया ट्रैक्टर खरीदने पर ही मिलेगा। जिनके पास पहले से ट्रैक्टर है, वे इसके पात्र नहीं होंगे।

उम्र सीमा: आवेदक की आयु 18 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए। के मुताबिक, महिला किसानों और स्वयं सहायता समूहों को इसमें प्राथमिकता दी जा रही है।

आवेदन के लिए जरूरी कागजात

फॉर्म भरते समय अपने पास ये दस्तावेज जरूर रखें ताकि आवेदन रिजेक्ट न हो:

• आधार कार्ड और मोबाइल नंबर (बैंक से लिंक)।

• जाति प्रमाण पत्र (SC Certificate)।

• जमीन के कागजात (खतौनी/जमाबंदी)।

• बैंक पासबुक की फोटोकॉपी।

• पासपोर्ट साइज फोटो।

ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?

आवेदन की प्रक्रिया को बहुत सरल रखा गया है, जिसे आप घर बैठे या नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC) से पूरा कर सकते हैं:

• सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट upagriculture.com या dbt.up.gov.in पर जाएं।

• होमपेज पर ‘यंत्र हेतु टोकन निकालें’ या ‘अनुदान पर कृषि यंत्र’ वाले विकल्प को चुनें।

• अपना किसान पंजीकरण नंबर दर्ज करें। यदि पंजीकरण नहीं है, तो पहले ‘नया पंजीकरण’ करें।

• ट्रैक्टर (45 HP) के विकल्प को चुनें और फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारी भरें।

• सभी जरूरी दस्तावेजों को स्कैन करके अपलोड करें और ‘सबमिट’ बटन दबाएं। के अनुसार, आवेदन के बाद विभाग द्वारा सत्यापन किया जाएगा और चयन होने पर आपको SMS के जरिए सूचित किया जाएगा।

क्यों है यह योजना किसानों के लिए गेम चेंजर?

उत्तर प्रदेश के कई जिलों जैसे बुलंदशहर, बलिया और गोरखपुर में इस योजना का असर दिखने लगा है। परंपरागत खेती (बैलों से खेती) में समय और मेहनत ज्यादा लगती थी, लेकिन अब ट्रैक्टर की मदद से किसान कम समय में ज्यादा पैदावार कर पा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 तक इस योजना के जरिए यूपी के 50% से अधिक SC किसानों के पास अपना ट्रैक्टर होगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

UP SC Tractor Subsidy Scheme 2026

आखिरी तारीख का रखें ध्यान

किसान भाइयों, ध्यान रहे कि इस योजना के तहत सीटें सीमित हैं और आवेदन की अंतिम तिथि 31 जनवरी 2026 है। इसलिए अंतिम समय की भीड़ से बचने के लिए आज ही अपना पंजीकरण सुनिश्चित करें। अधिक जानकारी के लिए आप अपने जिले के विकास भवन या प्रखंड कृषि कार्यालय (BAO) में संपर्क कर सकते हैं।

खेती को बनाएं आधुनिक, बढ़ाएं अपनी शान। यूपी सरकार दे रही ट्रैक्टर, खुशहाल होगा किसान!

अधिक जानकारी के लिए यूपी कृषि विभाग की हेल्पलाइन 1800-180-1551 पर कॉल करें।

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