खेल जगत में शोक की लहर: पीटी उषा के पति वी. श्रीनिवासन का निधन, 67 की उम्र में ली अंतिम सांस

पीटी उषा

भारतीय खेलों के इतिहास की सबसे महान एथलीट्स में से एक और वर्तमान भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष पीटी उषा पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके पति और उनके सबसे बड़े मार्गदर्शक वी. श्रीनिवासन का शुक्रवार, 30 जनवरी 2026 को तड़के निधन हो गया। वे 67 वर्ष के थे।

अचानक बिगड़ी तबीयत

मिली जानकारी के अनुसार, श्रीनिवासन केरल के कोझिकोड स्थित अपने आवास पर थे, जहां शुक्रवार सुबह वे अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। परिवार के सदस्य उन्हें तुरंत अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, उनकी मृत्यु का कारण कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) बताया जा रहा है।

पीटी उषा के पति वी

इस दुखद घड़ी में पीटी उषा दिल्ली में थीं, जहां वे संसद सत्र की कार्यवाही में शामिल होने के लिए आई हुई थीं। पति के निधन की खबर मिलते ही वे तुरंत केरल के लिए रवाना हो गईं।

उषा के करियर की ‘रीढ़ की हड्डी’ थे श्रीनिवासन

वी. श्रीनिवासन और पीटी उषा का विवाह 1991 में हुआ था। श्रीनिवासन खुद एक पूर्व कबड्डी खिलाड़ी थे और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में डिप्टी एसपी के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। करीब 35 साल के अपने वैवाहिक जीवन में श्रीनिवासन हमेशा उषा की ताकत बनकर खड़े रहे।

चाहे पीटी उषा का एथलेटिक करियर हो, उनका ‘उषा स्कूल ऑफ एथलेटिक्स’ चलाने का सपना हो या फिर उनका राजनीतिक सफर—श्रीनिवासन ने हर मोड़ पर उनका साथ निभाया। उषा ने कई बार सार्वजनिक मंचों पर कहा था कि उनकी सफलता के पीछे उनके पति का बहुत बड़ा हाथ है। उनके परिवार में एक बेटा डॉ. उज्जवल विघ्नेश है, जिनकी पिछले साल ही शादी हुई थी।

पीटी उषा के पति वी

प्रधानमंत्री मोदी और खेल जगत ने जताया शोक

श्रीनिवासन के निधन की खबर मिलते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीटी उषा से फोन पर बात की और अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। केरल के राज्यपाल और मुख्यमंत्री सहित खेल जगत की दिग्गज हस्तियों ने भी इस क्षति पर दुख जताया है।

मशहूर एथलीट टिंटू लूका ने उन्हें याद करते हुए कहा कि वे केवल उषा मैम के पति नहीं, बल्कि हम जैसे कई युवा खिलाड़ियों के लिए एक पिता समान और मार्गदर्शक थे। उषा स्कूल ऑफ एथलेटिक्स के बच्चों के लिए वे हमेशा एक ‘बैकबोन’ की तरह रहे।

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Team India का ‘महा-तूफान’: 200 रन को बनाया मजाक! सबसे तेज चेज़ का वर्ल्ड रिकॉर्ड और वो 4 आंकड़े जो दुनिया को डरा रहे हैं

Team India record

क्या आपने कल का मैच देखा? अगर नहीं, तो आपने क्रिकेट इतिहास का एक सुनहरा पन्ना मिस कर दिया है। भारतीय टीम ने साबित कर दिया है कि अब वो पुरानी ‘डिफेंसिव’ टीम नहीं रही।

ताजा खबर यह है कि टीम इंडिया (Team India) ने टी20 इतिहास में 200+ रन का टारगेट सबसे तेजी से चेज़ (Fastest Chase) करने का कारनामा अपने नाम कर लिया है। विरोधी टीम ने स्कोरबोर्ड पर 200 से ज्यादा रन टांगे, तो उन्हें लगा कि जीत पक्की है। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि सामने ‘मेन इन ब्लू’ का नया अवतार खड़ा है। सिर्फ जीत नहीं, बल्कि जिस अंदाज में (Strike Rate) भारत ने यह लक्ष्य हासिल किया, उसने दुनिया भर के क्रिकेट पंडितों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। आइए, इस ऐतिहासिक जीत और भारत के उन पिछले रिकॉर्ड्स पर नजर डालते हैं, जिन्होंने टीम इंडिया को ‘चेज़ मास्टर’ बना दिया है।

200 रन का टारगेट: पहाड़ नहीं, अब ‘मजाक’ लगता है

एक समय था जब 200 रन का लक्ष्य देखकर टीमें हथियार डाल देती थीं। लेकिन भारतीय टीम के लिए यह अब ‘बाएं हाथ का खेल’ हो गया है।

  • रिकॉर्ड तोड़ चेज़: इस मैच में भारतीय बल्लेबाजों ने पहली ही गेंद से कोहराम मचाया। पावरप्ले (शुरुआती 6 ओवर) में ही मैच का रुख तय कर दिया गया।
  • रन रेट का खेल: 10 या 12 रन प्रति ओवर की औसत से रन बनाना अब भारतीय टीम की आदत बन गई है।
  • नतीजा: जिस टारगेट को हासिल करने में टीमें 20 ओवर में भी संघर्ष करती थीं, भारत ने उसे कई गेंदे शेष रहते ही हासिल कर लिया। यह दर्शाता है कि भारतीय ड्रेसिंग रूम का माहौल कितना ‘निडर’ (Fearless) हो चुका है।

‘किंग ऑफ चेज़’: भारत के नाम सबसे ज्यादा 200+ जीत

सिर्फ तेजी ही नहीं, निरंतरता (Consistency) भी देखिए। इस जीत के साथ ही भारत टी20 इंटरनेशनल में सबसे ज्यादा बार 200+ रन का लक्ष्य हासिल करने वाली टीम बन गई है। इससे पहले यह रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के पास था, लेकिन अब भारत सबसे आगे निकल गया है। चाहे सामने ऑस्ट्रेलिया हो, वेस्टइंडीज हो या न्यूजीलैंड—अगर उन्होंने 200 बनाए हैं, तो भारत ने उसे भी बौना साबित किया है।

Team India captain with ishan kishan

हालिया रिकॉर्ड्स: जब भारत ने मचाई तबाही (Rewind Records)

टीम इंडिया की यह आक्रामकता अचानक नहीं आई है। पिछले कुछ महीनों के रिकॉर्ड देखिए, आपको समझ आ जाएगा कि यह टीम अलग मिट्टी की बनी है:

297 रन का विशाल स्कोर (Highest Total): अभी हाल ही में हैदराबाद में बांग्लादेश के खिलाफ भारत ने 297/6 का स्कोर बनाया था। यह टी20 इतिहास में किसी भी टेस्ट खेलने वाले देश का सबसे बड़ा स्कोर है। उस मैच में संजू सैमसन और सूर्यकुमार यादव ने चौके-छक्कों की बारिश कर दी थी।

एक पारी में सबसे ज्यादा बाउंड्री: टीम इंडिया ने हाल ही में एक टी20 पारी में सबसे ज्यादा चौके-छक्के मारने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया है। जब आपके पास नंबर 1 से लेकर नंबर 8 तक हिटर हों, तो यह मुमकिन है।

सबसे तेज 100 रन: भारतीय टीम ने पावरप्ले और उसके तुरंत बाद सबसे तेज 100 रन पूरा करने का रिकॉर्ड भी कई बार तोड़ा है। यह ‘गंभीर-सूर्या’ एरा (Era) की नई पहचान है।

आखिर यह बदलाव आया कैसे? (The Analysis)

क्रिकेट एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि यह बदलाव IPL और टीम मैनेजमेंट की ‘No Fear Policy’ का नतीजा है।

  • युवा जोश: यशस्वी जायसवाल, रिंकू सिंह, शुभमन गिल और अभिषेक शर्मा जैसे युवा खिलाड़ी आते ही ‘सेट’ होने का समय नहीं लेते। वे आते ही मारने में विश्वास रखते हैं।
  • मैनेजमेंट की छूट: कोच और कप्तान ने साफ कर दिया है— “आउट होने से मत डरो, बस स्ट्राइक रेट कम मत होने दो।”
Team India T20
ICC

वर्ल्ड कप के लिए खतरे की घंटी

टीम इंडिया का यह फॉर्म आने वाले वर्ल्ड कप (T20 World Cup 2026 जो भारत में ही होना है) के लिए विरोधी टीमों के लिए खतरे की घंटी है। जब कोई टीम 200 रन चेज़ करते हुए भी दबाव में न दिखे, तो उसे हराना नामुमकिन हो जाता है। गेंदबाजों के पास अब कोई जगह नहीं बची है जहां वो गेंद फेंक सकें।

यह तो बस ट्रेलर है!

टीम इंडिया का यह ‘तेज-तर्रार’ रिकॉर्ड बताता है कि भारतीय क्रिकेट अब एक नए दौर (Golden Era) में प्रवेश कर चुका है। 200 रन का चेज़ अब इतिहास है, शायद अगली बार हम 300 रन का आंकड़ा भी टूटते देखें। हम बस इतना कह सकते हैं— “विरोधी टीमों, अपनी सीट बेल्ट बांध लो, क्योंकि मौसम बिगड़ने वाला है!”

आपकी राय: क्या आपको लगता है कि यह भारतीय टी20 टीम अब तक की सबसे खतरनाक टीम है? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर लिखें।

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IND vs NZ 1st T20 : अक्षर पटेल की उंगली से बहा खून, बीच ओवर में छोड़ना पड़ा मैदान; टीम इंडिया की बढ़ी चिंता

IND vs NZ

IND vs NZ T20 : भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेली जा रही टी20 सीरीज के पहले ही मुकाबले में टीम इंडिया ने जीत के साथ आगाज तो किया, लेकिन एक बुरी खबर ने प्रशंसकों और टीम मैनेजमेंट की चिंता बढ़ा दी है। स्टार ऑलराउंडर अक्षर पटेल मैच के दौरान चोटिल होकर मैदान से बाहर चले गए, जिससे आगामी टी20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले भारतीय खेमे में खलबली मच गई है।

कैसे लगी अक्षर पटेल को चोट?

यह घटना न्यूजीलैंड की पारी के 16वें ओवर की है। अक्षर अपना चौथा और पारी का 16वां ओवर डाल रहे थे। तीसरी गेंद पर कीवी बल्लेबाज डैरील मिशेल ने सामने की तरफ एक बेहद तेज और दमदार शॉट खेला।

IND vs NZ

अक्षर ने अपने बाएं हाथ (गेंदबाजी वाले हाथ) से गेंद को रोकने की कोशिश की, लेकिन गेंद की रफ्तार इतनी अधिक थी कि वह उनकी उंगली से टकराकर बाउंड्री पार चली गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि अक्षर की इंडेक्स फिंगर (तर्जनी) तुरंत कट गई और उससे खून बहने लगा। फिजियो ने मैदान पर आकर प्राथमिक उपचार दिया, लेकिन दर्द और खून न रुकने के कारण उन्हें मैदान छोड़कर बाहर जाना पड़ा।

अभिषेक शर्मा ने पूरा किया ओवर

अक्षर के अचानक बाहर जाने के बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव ने गेंद अभिषेक शर्मा को थमाई। अभिषेक ने ओवर की शेष तीन गेंदें फेंकी। अक्षर ने उस समय तक 3.3 ओवर में 42 रन देकर ग्लेन फिलिप्स का एक अहम विकेट चटकाया था।

  • भारत का स्कोर: अभिषेक शर्मा की 84 रनों (विस्फोटक पारी) की मदद से भारत ने 20 ओवर में 238/7 का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा किया।
  • न्यूजीलैंड का जवाब: कीवी टीम 20 ओवर में 190/7 रन ही बना सकी। ग्लेन फिलिप्स ने 78 रनों की संघर्षपूर्ण पारी खेली, लेकिन वह जीत के लिए काफी नहीं थी।
  • गेंदबाजी: भारत की ओर से वरुण चक्रवर्ती और शिवम दुबे ने 2-2 विकेट लिए। अभिषेक शर्मा को उनके ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया।

टीम इंडिया के लिए क्यों बढ़ी मुश्किल?

अक्षर पटेल की चोट टीम इंडिया के लिए ‘दोहरी मार’ जैसी है:

  • टी20 वर्ल्ड कप 2026: अक्षर वर्ल्ड कप योजना का मुख्य हिस्सा हैं। बोलिंग हैंड (Bowling Hand) में चोट लगने का मतलब है कि उन्हें अपनी ग्रिप और स्पिन पर वापस काम करने में समय लग सकता है।
  • खिलाड़ियों की कमी: भारतीय टीम पहले ही तिलक वर्मा और वाशिंगटन सुंदर जैसे प्रमुख खिलाड़ियों के बिना मैदान पर उतरी है। ऐसे में अक्षर का बाहर होना टीम का संतुलन बिगाड़ सकता है।

IND vs NZ

क्या दूसरे टी20 में खेलेंगे अक्षर?

सीरीज का दूसरा मैच 23 जनवरी को खेला जाना है। बीसीसीआई (BCCI) की ओर से अभी तक अक्षर की चोट की गंभीरता पर कोई आधिकारिक मेडिकल बुलेटिन जारी नहीं किया गया है। हालांकि, कटी हुई उंगली को ठीक होने में कुछ दिन लग सकते हैं, इसलिए सावधानी बरतते हुए उन्हें अगले मैच में आराम दिया जा सकता है।

मुख्य आकर्षण:

  • स्टेडियम: वीसीए स्टेडियम, नागपुर।
  • स्कोरकार्ड: भारत (238/7) ने न्यूजीलैंड (190/7) को 48 रनों से हराया।
  • अपडेट: अक्षर पटेल की उंगली में टांके लग सकते हैं या नहीं, इस पर सबकी नजर रहेगी।

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क्रिकेट के मैदान पर अब दौड़ेगा AI! Google Gemini ने IPL के साथ की ₹270 करोड़ की मेगा डील, जानें फैंस को क्या मिलेगा खास

क्रिकेट

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के आगाज़ से पहले एक बहुत बड़ी व्यावसायिक साझेदारी की घोषणा की है। दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी गूगल के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म, Gemini, ने आईपीएल के साथ तीन साल के लिए स्पॉन्सरशिप करार किया है। यह डील न केवल पैसों के लिहाज से बड़ी है, बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि अब खेलों की दुनिया में तकनीक और AI का बोलबाला बढ़ने वाला है।

AI! Google Gemini

₹270 करोड़ की भारी-भरकम डील: अगले 3 साल के लिए पक्का हुआ साथ

ताजा रिपोर्ट्स और बीसीसीआई अधिकारियों के मुताबिक, यह समझौता करीब ₹270 करोड़ का है। यह पार्टनरशिप IPL 2026 से 2028 तक के तीन सीज़न के लिए वैध रहेगी। इस हिसाब से गूगल हर साल आईपीएल में लगभग ₹90 करोड़ का निवेश करेगा। बीसीसीआई के एक अधिकारी ने बताया कि यह डील आईपीएल की वैश्विक अपील और उसकी बढ़ती ब्रांड वैल्यू को और मजबूती प्रदान करती है।

AI और क्रिकेट का संगम: फैंस के लिए क्या बदलेगा?

गूगल जेमिनी का आईपीएल से जुड़ना सिर्फ विज्ञापनों तक सीमित नहीं होगा। माना जा रहा है कि यह साझेदारी फैंस के मैच देखने के अनुभव को पूरी तरह बदल देगी।

रियल-टाइम आंकड़े: मैच के दौरान AI की मदद से खिलाड़ियों के प्रदर्शन का सटीक और गहरा विश्लेषण देखने को मिल सकता है。

पर्सनलाइज्ड इंगेजमेंट: डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैंस के लिए खास AI टूल्स पेश किए जा सकते हैं, जिससे वे खेल के साथ और बेहतर तरीके से जुड़ सकेंगे。

आधुनिक अनुभव: ब्रॉडकास्ट और लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान इंटरएक्टिव AI कंटेंट का इस्तेमाल होने की उम्मीद है।

बाजार में बढ़ती AI कंपनियों की होड़

यह पहली बार नहीं है जब कोई AI ब्रांड क्रिकेट से जुड़ा है। इससे पहले जेमिनी की प्रतिद्वंदी कंपनी ChatGPT ने विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) के साथ ₹16 करोड़ की दो साल की डील की थी। अब आईपीएल जैसे बड़े मंच पर जेमिनी की एंट्री ने यह साफ कर दिया है कि भविष्य में AI कंपनियां स्पोर्ट्स एडवरटाइजिंग में वही जगह लेंगी, जो कभी फैंटेसी स्पोर्ट्स (जैसे Dream11) का हुआ करता था。

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IPL 2026 का पूरा शेड्यूल और अन्य स्पॉन्सर्स

IPL 2026 का आयोजन 26 मार्च से 31 मई तक किया जाएगा। वर्तमान में Tata Group के पास आईपीएल के टाइटल स्पॉन्सरशिप राइट्स बरकरार हैं। वहीं, टीम इंडिया की जर्सी के लिए अपोलो टायर्स के साथ पहले ही एक बड़ी डील हो चुकी है। गूगल जेमिनी के जुड़ने से आईपीएल अब दुनिया की सबसे आधुनिक और टेक-फ्रेंडली स्पोर्ट्स लीग बनने की राह पर है।

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ICC ka Ultimatum: ‘भारत में खेलो या बाहर बैठो!’ बांग्लादेश को दिखाया आईना, जानें 3 कड़वे सच

ICC

आईना उन्हें दिखाया, जो खुद ‘आग’ में बैठे हैं क्रिकेट के मैदान पर हार-जीत चलती रहती है, लेकिन मैदान के बाहर जो ‘ड्रामा’ बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) कर रहा है, उसने अब ICC (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल) के सब्र का बांध तोड़ दिया है।

मामला आगामी वर्ल्ड कप (2026 टी20 वर्ल्ड कप जो भारत और श्रीलंका में होना है) का है। बांग्लादेश ने भारत आने को लेकर ‘सुरक्षा’ का बहाना बनाया है। जी हाँ, आपने सही पढ़ा! वो देश, जहां पिछले कुछ महीनों में संसद भवन जला दिए गए, जहां खिलाड़ियों के घर सुरक्षित नहीं रहे, वो आज भारत की सुरक्षा पर सवाल उठा रहा है।

लेकिन इस बार ICC ने कोई ‘मीठी बात’ नहीं की। सूत्रों के मुताबिक, ICC ने बांग्लादेश को साफ शब्दों में अल्टीमेटम दे दिया है— “या तो चुपचाप भारत में आकर खेलो, या फिर टूर्नामेंट से बाहर बैठने की तैयारी कर लो।”

आखिर क्यों बांग्लादेश ने यह पैंतरा चला और कैसे ICC ने उनकी बोलती बंद की? आइए समझते हैं इस पूरे विवाद को।

ICC ka Ultimatum

बांग्लादेश का अजीब तर्क: ‘भारत सुरक्षित नहीं है’

सबसे पहले यह जान लीजिए कि बांग्लादेश ने कहा क्या है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने ICC से अनौपचारिक तौर पर कहा कि उनके खिलाड़ियों को भारत में ‘खतरा’ महसूस हो सकता है, इसलिए उनके मैच किसी न्यूट्रल वेन्यू (Neutral Venue) पर कराए जाएं।

यह वही “हाइब्रिड मॉडल” की मांग है जो पाकिस्तान अक्सर करता रहता है। बांग्लादेश को लगा कि अगर पाकिस्तान नखरे दिखा सकता है, तो हम क्यों नहीं? लेकिन वे यह भूल गए कि यह वर्ल्ड कप है, कोई द्विपक्षीय सीरीज नहीं।

दोगलेपन की हद: अपना घर जल रहा है, और इल्जाम पड़ोसी पर?

यहाँ सबसे बड़ा सवाल ‘नियत’ का है। इस खबर को सुनकर हर भारतीय क्रिकेट फैन को गुस्सा आना लाजमी है।

जरा पीछे मुड़कर देखिए—

  • अभी कुछ ही समय पहले, बांग्लादेश में तख्तापलट हुआ।
  • वहां के हालात इतने बदतर थे कि खुद ICC को महिला टी20 वर्ल्ड कप 2024 वहां से हटाकर UAE शिफ्ट करना पड़ा था।
  • वहां हिंदुओं और अल्पसंख्यकों पर हमले हुए।

जिस देश में खुद की जमीन पर क्रिकेट खेलना मुमकिन नहीं था, आज वही देश दुनिया के सबसे सुरक्षित और क्रिकेट-प्रेमी देश (भारत) पर उंगली उठा रहा है। इसे ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ नहीं तो और क्या कहेंगे?

भारत ने हमेशा पड़ोसी धर्म निभाया है, लेकिन बांग्लादेश का यह रवैया उनकी ‘एहसान फरामोशी’ को दिखाता है।

ICC का कड़क जवाब: “नखरे नहीं चलेंगे”

इस बार ICC ने साफ कर दिया है कि अब बहुत हो गया। सूत्रों का कहना है कि जय शाह (जो अब ICC में प्रमुख भूमिका में हैं) और अन्य अधिकारियों ने बांग्लादेश की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है।

ICC ने स्पष्ट कर दिया है:

* No Hybrid Model: वर्ल्ड कप का आयोजन भारत में है, तो मैच भारत में ही होंगे। कोई दुबई या श्रीलंका का विकल्प नहीं मिलेगा।

* वीजा और सुरक्षा की गारंटी: भारत सरकार पहले ही हर टीम को ‘प्रेसिडेंशियल लेवल’ की सुरक्षा देती है। जब ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी टीमें बिना डर के खेल सकती हैं, तो बांग्लादेश को क्या दिक्कत है?

* अंतिम चेतावनी: अगर बांग्लादेश टीम भेजने से मना करती है, तो ICC उनके स्थान पर किसी और टीम (Qualifiers) को मौका दे सकती है और बांग्लादेश पर भारी जुर्माना या प्रतिबंध भी लग सकता है।

पाकिस्तान की राह पर चलना पड़ेगा भारी

बांग्लादेश शायद अपने ‘दोस्त’ पाकिस्तान के नक्शे कदम पर चल रहा है। 2023 के वनडे वर्ल्ड कप में पाकिस्तान ने भी भारत न आने की धमकी दी थी। नतीजा क्या हुआ? उन्हें आना पड़ा, खेलना पड़ा और वो बुरी तरह हारकर वापस गए।

बांग्लादेश को समझना होगा कि क्रिकेट की दुनिया में भारत ‘बॉस’ है। आप भारत को नजरअंदाज करके (Revenue और Viewership के लिहाज से) क्रिकेट नहीं खेल सकते। अगर वे जिद्द पर अड़े रहे, तो नुकसान सिर्फ और सिर्फ बांग्लादेशी क्रिकेट का होगा। उनके खिलाड़ियों को बड़े मंच से हाथ धोना पड़ेm क्रिकेट खेलो, राजनीति नहीं

ICC ka Ultimatum

बांग्लादेश के लिए अब स्थिति ‘इधर कुआं, उधर खाई’ वाली है। अगर वे भारत नहीं आते, तो वर्ल्ड कप से बाहर होंगे। और अगर आते हैं, तो उन्हें अपनी उस ‘झूठी अकड़’ को निगलना पड़ेगा।

एक पड़ोसी के तौर पर हम यही सलाह देंगे—अपना घर संभालिए, वहां शांति लाइए। भारत दुनिया का सबसे मेहमान-नवाज़ देश है। यहां आइए, क्रिकेट खेलिए और प्यार लेकर जाइए। लेकिन अगर सुरक्षा का झूठा बहाना बनाएंगे, तो ICC का यह थप्पड़ याद रखिएगा।

फैसला अब बांग्लादेश के हाथ में है—सम्मान से खेलना है या शर्मिंदगी के साथ बाहर बैठना है।

आपकी राय: क्या ICC ने बांग्लादेश को अल्टीमेटम देकर सही किया? अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें!

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WPL 2026: पटियाला की ‘पॉवर-गर्ल’ कनिका आहूजा का धमाका, 194 की स्ट्राइक रेट से मुंबई इंडियंस के उड़ाए होश!

WPL

महिला प्रीमियर लीग (WPL) 2026 में युवा प्रतिभाओं का जलवा जारी है, लेकिन इस समय जिस नाम की गूंज सबसे ज्यादा सुनाई दे रही है, वह है कनिका आहूजा। पंजाब के पटियाला की इस 23 वर्षीय बाएं हाथ की बल्लेबाज और ऑफ-स्पिनर ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से साबित कर दिया है कि वह आने वाले समय में भारतीय क्रिकेट की एक बड़ी सनसनी बनने वाली हैं।

WPL

मैदान पर बरपाया कहर: 18 गेंदों में पलटी बाजी

13 जनवरी 2026 को नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में गुजरात जायंट्स (GG) और मुंबई इंडियंस (MI) के बीच मुकाबला खेला गया। इस मैच में नंबर 3 पर बल्लेबाजी करने उतरीं कनिका ने आते ही आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने दिग्गज गेंदबाज शब्नम इस्माइल की पहली ही गेंद पर चौका जड़कर अपने इरादे साफ कर दिए। कनिका ने महज 18 गेंदों पर नाबाद 35 रनों की तूफानी पारी खेली, जिसमें 4 चौके और 2 गगनचुंबी छक्के शामिल थे। 194.44 की स्ट्राइक रेट से बनाई गई इस पारी ने गुजरात की टीम को एक मजबूत स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

चोट से वापसी और गुजरात जायंट्स का भरोसा

कनिका का WPL सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 2023 में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) के लिए शानदार डेब्यू करने के बाद, वह 2024 का सीजन चोट के कारण नहीं खेल पाई थीं। हालांकि, 2025 में उन्होंने वापसी की और 2026 के मेगा ऑक्शन में गुजरात जायंट्स ने उन पर 30 लाख रुपये का दांव लगाया, जो अब बिल्कुल सही साबित होता दिख रहा है। मौजूदा सीजन के तीन मैचों में वह 169.56 की स्ट्राइक रेट से 39 रन बना चुकी हैं, जिसमें उनकी हालिया पारी सबसे प्रभावशाली रही है।

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एक उभरती हुई ‘मैच विनर’

कनिका केवल एक बल्लेबाज नहीं, बल्कि एक चतुर ऑफ-स्पिनर भी हैं। वह 2023 के एशियन गेम्स में भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय डेब्यू कर चुकी हैं और इमर्जिंग एशिया कप के फाइनल में ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ भी रह चुकी हैं। घरेलू क्रिकेट से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक, पटियाला की यह खिलाड़ी अपनी जिद और जुनून से भारतीय महिला क्रिकेट की नई लहर का प्रतिनिधित्व कर रही है। फैंस को उम्मीद है कि WPL 2026 के आने वाले मैचों में कनिका का यह ‘विराट’ अवतार और भी निखर कर सामने आएगा।

क्या आपको लगता है कि कनिका आहूजा जल्द ही भारतीय टी-20 टीम में अपनी स्थायी जगह बना पाएंगी? अपनी राय हमें कमेंट में जरूर बताएं!

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Coca-Cola Sponsors Indian Football: डूबती नैया का खेवैया बना ‘विदेशी’? अंबानी-अडानी क्यों रह गए पीछे!

Coca-Cola

क्या आपको वो पुरानी कहावत याद है— “घर का भेदी लंका ढाए”? खैर, यहाँ स्थिति थोड़ी उल्टी है। यहाँ घर वाले तो मुंह फेर कर बैठे हैं, लेकिन ‘सात समुंदर पार’ वाला एक विदेशी पड़ोसी मदद का हाथ बढ़ा रहा है। हम बात कर रहे हैं भारतीय महिला फुटबॉल टीम (The Blue Tigresses) की। वो टीम जो भारतीय फुटबॉल के सबसे बुरे दौर में भी उम्मीद की मशाल थामे हुए है। जब इस टीम को सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब देश के बड़े-बड़े अरबपति—जिनके पास IPL टीमों पर लुटाने के लिए अरबों रुपये हैं—खामोश रहे। और बाजी कौन मार ले गया? अमेरिका की कंपनी Coca-Cola।

कोका-कोला ने अगले 3 साल के लिए भारतीय महिला फुटबॉल का ‘ऑफिशियल स्पॉन्सर’ बनने का ऐलान किया है। यह खबर खुशी से ज्यादा एक ‘आईना’ है, जो हमारे देसी कॉरपोरेट्स को देखना चाहिए।

Coca-Cola

सौदा जो सिर्फ व्यापार नहीं, ‘संजीवनी’ है

सबसे पहले खबर की अहमियत समझिए। All India Football Federation (AIFF) और Coca-Cola India के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है। अगले तीन सालों तक, कोका-कोला सिर्फ जर्सी पर चिपकने वाला एक लोगो नहीं होगा, बल्कि वह भारतीय महिला फुटबॉल की रीढ़ बनेगा।

यह पैसा सिर्फ नेशनल टीम के लिए नहीं, बल्कि उन हजारों लड़कियों के लिए है जो छोटे शहरों और गांवों में नंगे पैर फुटबॉल खेलने का सपना देखती हैं। कोका-कोला का पैसा ग्रासरूट लेवल (जमीनी स्तर), यूथ लीग्स और ट्रेनिंग कैम्प्स में लगेगा। जहां भारतीय पुरुष टीम संघर्ष कर रही है, वहीं महिला टीम सीमित संसाधनों में भी जान लड़ा रही है। कोका-कोला का आना उनके लिए रेगिस्तान में पानी मिलने जैसा है।

अरबपतियों की खामोशी: रिस्क या बेरुखी?

अब उस चुभते हुए सवाल पर आते हैं— भारत के धनकुबेर कहां हैं?

भारत आज दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। हमारे पास रिलायंस, टाटा, अडानी और महिंद्रा जैसे विशाल साम्राज्य हैं। क्रिकेट के एक सीजन में ये कंपनियां जितना पैसा पानी की तरह बहा देती हैं, उसका 10% भी अगर फुटबॉल या हॉकी को मिल जाए, तो हमारी बेटियां ओलंपिक में गोल्ड मेडल की लाइन लगा दें।

लेकिन कड़वा सच यह है कि भारतीय कॉरपोरेट्स अक्सर “पके हुए फल” के इंतजार में रहते हैं।

वे वहां पैसा लगाते हैं जहां पहले से ही भीड़ हो, जहां स्टारडम हो, और जहां मुनाफा पक्का हो। महिला फुटबॉल अभी ‘संघर्ष’ के दौर में है। यहाँ पैसा लगाने का मतलब है—भविष्य के लिए बीज बोना। और दुख की बात है कि हमारी देसी कंपनियों को ‘फसल काटने’ की जल्दी है, बीज बोने और उसे सींचने का धैर्य उनके पास नहीं दिखता।

विदेशी ब्रांड्स और ‘इमोशंस’ का गणित

हम अक्सर शिकायत करते हैं कि विदेशी ब्रांड्स भारत में इतना फलते-फूलते क्यों हैं? इसका जवाब कोका-कोला की इस डील में छिपा है।

विदेशी कंपनियां एक बात बहुत अच्छे से जानती हैं— “भारत के लोगों की जेब तक पहुंचना है, तो उनके दिल के रास्ते जाओ।”

जरा सोचिए, जब एक आम भारतीय देखेगा कि उसकी देश की बेटियां कोका-कोला की जर्सी पहनकर देश का नाम रोशन कर रही हैं, तो उसके मन में उस ब्रांड के लिए क्या आएगा? इज्जत (Respect)।

वे हमारी ‘देशभक्ति’ और ‘इमोशंस’ में निवेश कर रहे हैं। अगली बार जब आप दुकान पर जाएंगे, तो शायद अनजाने में ही कोका-कोला उठा लेंगे, क्योंकि आपके दिमाग के किसी कोने में यह बात बैठी होगी कि “इसने हमारे मुश्किल वक्त में साथ दिया था।”

इसे कहते हैं Emotional Branding। हमारे देसी ब्रांड्स यहीं चूक जाते हैं। वो बैलेंस शीट देखते रह गए, और विदेशी कंपनी ‘गुडविल’ (Goodwill) लूट ले गई।

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अब जागने का वक्त है

कोका-कोला का स्वागत है। कम से कम किसी ने तो उन लड़कियों के हुनर को पहचाना जो देश के लिए पसीना बहा रही हैं। लेकिन यह घटना हमारे लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ होनी चाहिए।

सिर्फ सोशल मीडिया पर “Support Local” लिखने से देश महान नहीं बनेगा। देश तब आगे बढ़ेगा जब टाटा, बिड़ला और अंबानी जैसे हमारे अपने दिग्गज क्रिकेट के सुरक्षित घेरे से बाहर निकलेंगे और उन खेलों में पैसा लगाएंगे जिन्हें वाकई मदद की जरूरत है।

वरना वो दिन दूर नहीं जब हमारे हर जज्बात, हर खेल और हर गर्व के पल पर किसी विदेशी कंपनी का लोगो लगा होगा, और हम बस ताली बजाते रह जाएंगे।

आपकी क्या राय है? क्या भारतीय कंपनियों को रिस्क लेकर छोटे खेलों को सपोर्ट नहीं करना चाहिए? कमेंट बॉक्स में अपनी आवाज उठाएं!

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IPL vs Bangladesh: बांग्लादेश में आईपीएल के प्रसारण पर लगा बैन, मुस्तफिजुर रहमान पर छिड़ा विवाद बना बड़ी वजह

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क्रिकेट जगत में उस वक्त हड़कंप मच गया जब बांग्लादेश सरकार ने दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग, इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के प्रसारण पर अपने देश में पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया। यह चौंकाने वाला फैसला बीसीसीआई (BCCI) और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के बीच बढ़ते तनाव का नतीजा माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेशी स्टार गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल टीम से बाहर किए जाने के बाद यह विवाद इतना गहरा गया कि अब बांग्लादेशी फैंस अपने टीवी स्क्रीन पर आईपीएल के मैच नहीं देख पाएंगे।

क्या है पूरा विवाद? क्यों लगा आईपीएल पर प्रतिबंध?

बांग्लादेश के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने एक आधिकारिक आदेश जारी करते हुए देश के सभी केबल ऑपरेटरों और सैटेलाइट चैनलों को निर्देश दिया है कि वे तत्काल प्रभाव से आईपीएल का टेलीकास्ट रोक दें। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसके पीछे कुछ तकनीकी और व्यापारिक कारण बताए जा रहे हैं, लेकिन खेल गलियारों में चर्चा है कि इसकी असली जड़ मुस्तफिजुर रहमान (Mustafizur Rahman) और बीसीसीआई के बीच का हालिया घटनाक्रम है।

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मुस्तफिजुर रहमान और बीसीसीआई के बीच तकरार

विवाद की शुरुआत तब हुई जब बीसीसीआई ने कथित तौर पर मुस्तफिजुर रहमान की उपलब्धता और फिटनेस को लेकर कड़ा रुख अपनाया। मुस्तफिजुर, जो आईपीएल में एक प्रमुख विदेशी खिलाड़ी के तौर पर खेलते रहे हैं, उन्हें हाल ही में उनकी आईपीएल फ्रेंचाइजी द्वारा रिलीज या स्क्वाड से बाहर किए जाने की खबरें सामने आईं।

बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड का मानना है कि बीसीसीआई ने उनके खिलाड़ियों के साथ “दोयम दर्जे” का व्यवहार किया है। बांग्लादेशी मीडिया का दावा है कि मुस्तफिजुर को टीम से हटाना केवल क्रिकेटिंग फैसला नहीं था, बल्कि इसके पीछे बोर्ड की कुछ आंतरिक राजनीतियां शामिल थीं। इसी के विरोध स्वरूप बांग्लादेश ने आईपीएल के ब्रॉडकास्ट पर ही कैंची चला दी है।

क्रिकेट जगत पर इस बैन का क्या होगा असर?

आईपीएल के लिए बांग्लादेश एक बड़ा बाजार रहा है। ढाका, चटगांव और सिलहट जैसे शहरों में आईपीएल की दीवानगी वैसी ही है जैसी भारत के बड़े शहरों में होती है। इस बैन से न केवल ब्रॉडकास्टर्स को आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि क्रिकेट डिप्लोमेसी पर भी गहरा असर पड़ने की संभावना है।

1. ब्रॉडकास्टर्स का बड़ा आर्थिक नुकसान

आईपीएल के राइट्स खरीदने वाले चैनलों ने बांग्लादेशी विज्ञापनों से करोड़ों की कमाई की उम्मीद लगाई थी। अब जब प्रसारण रुक गया है, तो विज्ञापनदाताओं (Advertisers) और चैनलों के बीच कानूनी लड़ाई छिड़ सकती है।

2. बांग्लादेशी फैंस की नाराजगी

सोशल मीडिया पर बांग्लादेशी क्रिकेट प्रेमी दो गुटों में बंट गए हैं। एक गुट अपनी सरकार के इस फैसले को “देशभक्ति” और “खिलाड़ी के सम्मान” से जोड़कर देख रहा है, वहीं युवाओं का एक बड़ा वर्ग इस बात से दुखी है कि वे दुनिया के बेहतरीन क्रिकेटरों को खेलते हुए नहीं देख पाएंगे।

3. भारत-बांग्लादेश क्रिकेट संबंध

भारत और बांग्लादेश के बीच क्रिकेट संबंध पिछले कुछ समय से उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। चैंपियंस ट्रॉफी और एशिया कप के विवादों के बीच आईपीएल पर यह बैन दोनों देशों के क्रिकेट बोर्डों के बीच की खाई को और चौड़ा कर सकता है।

मुस्तफिजुर रहमान: ‘द फिज’ की आईपीएल यात्रा

मुस्तफिजुर रहमान, जिन्हें प्यार से ‘द फिज’ कहा जाता है, साल 2016 में आईपीएल के सबसे बड़े सितारे बनकर उभरे थे। सनराइजर्स हैदराबाद के लिए खेलते हुए उन्होंने अपनी जादुई कटर्स से दुनिया के दिग्गज बल्लेबाजों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था।

डेब्यू सीजन (2016): 16 मैचों में 17 विकेट लिए और ‘इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन’ का खिताब जीता।

अन्य टीमें: उन्होंने राजस्थान रॉयल्स, दिल्ली कैपिटल्स और चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) जैसी प्रतिष्ठित टीमों का प्रतिनिधित्व किया है।

विवाद की जड़: हाल के सीजनों में, मुस्तफिजुर की फिटनेस और बांग्लादेश नेशनल टीम के लिए उनकी प्रतिबद्धता को लेकर बीसीसीआई और बीसीबी के बीच अक्सर खींचतान होती रही है। बीसीबी अक्सर उन्हें आईपीएल के बीच से ही वापस बुला लेता था, जिससे फ्रेंचाइजी और बीसीसीआई नाखुश रहते थे।

क्या इस प्रतिबंध के पीछे राजनीतिक कारण भी हैं?

विशेषज्ञों का मानना है कि क्रिकेट के बहाने यह एक बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन (Power Play) का हिस्सा हो सकता है। 2026 की शुरुआत में दक्षिण एशिया की राजनीति जिस मोड़ पर है, वहां खेल अक्सर कूटनीति का जरिया बनते हैं। बांग्लादेश में हालिया सत्ता परिवर्तन और नई अंतरिम व्यवस्था के बाद भारत के साथ रिश्तों में आई नमी का असर अब मैदान पर भी दिखने लगा है।

यह पहली बार नहीं है जब किसी देश ने आईपीएल पर प्रतिबंध लगाया हो। पाकिस्तान में भी आईपीएल का प्रसारण लंबे समय से बंद है। हालांकि, बांग्लादेश जैसे मित्र देश द्वारा ऐसा कदम उठाना बीसीसीआई के लिए किसी झटके से कम नहीं है।

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बीसीसीआई का संभावित रुख

बीसीसीआई फिलहाल इस मामले पर ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में है। भारतीय बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “आईपीएल एक ग्लोबल ब्रांड है। किसी एक देश में प्रसारण रुकने से इसकी चमक कम नहीं होगी, लेकिन हम हमेशा चाहते हैं कि क्रिकेट हर सीमा को पार करे। मुस्तफिजुर को लेकर जो भी निर्णय लिए गए, वे नियमों के दायरे में थे।”

बीसीसीआई आने वाले दिनों में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड से इस मुद्दे पर बातचीत कर सकता है ताकि मामला और न बिगड़े। यदि यह गतिरोध जारी रहता है, तो भविष्य में होने वाली द्विपक्षीय सीरीज (Bilateral Series) पर भी संकट के बादल मंडरा सकते हैं।

आपकी इस पर क्या राय है? क्या बांग्लादेश सरकार का मुस्तफिजुर के समर्थन में आईपीएल को बैन करना सही कदम है, या खेल को इन विवादों से ऊपर रखा जाना चाहिए? अपने विचार हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताएं।

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IPL 2026: KKR को BCCI का बड़ा निर्देश, बांग्लादेशी खिलाड़ियों की होगी छुट्टी? ICC के इस फैसले से क्रिकेट जगत में हड़कंप

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इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के आगामी सीजन से पहले कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के खेमे से एक ऐसी खबर आ रही है जिसने प्रशंसकों और क्रिकेट पंडितों को चौंका दिया है। बीसीसीआई (BCCI) ने केकेआर को अपने बांग्लादेशी खिलाड़ियों को रिलीज करने का निर्देश दिया है。 यह फैसला केवल एक फ्रेंचाइजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की गहरी राजनीति और सुरक्षा कारणों के संकेत मिल रहे हैं, जो सीधे तौर पर टी20 वर्ल्ड कप के आयोजन से जुड़े हैं।

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KKR और बांग्लादेशी खिलाड़ियों का पुराना रिश्ता संकट में

कोलकाता नाइट राइडर्स और बांग्लादेशी क्रिकेटरों का नाता काफी पुराना रहा है। शाकिब अल हसन से लेकर लिटन दास तक, कई सितारों ने ईडन गार्डन्स के मैदान पर अपनी चमक बिखेरी है। हालांकि, ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, बीसीसीआई ने केकेआर प्रबंधन को स्पष्ट कर दिया है कि वे बांग्लादेशी खिलाड़ियों को अपनी टीम से रिलीज कर दें。

इस निर्देश के पीछे का मुख्य कारण खिलाड़ियों की उपलब्धता और भारत-बांग्लादेश के बीच बढ़ते कूटनीतिक और खेल संबंधी तनाव को माना जा रहा है। आईपीएल की नीलामी और टीम कॉम्बिनेशन पर इसका सीधा असर पड़ेगा, क्योंकि केकेआर को अब नए विदेशी विकल्पों की तलाश करनी होगी।

ICC का बड़ा कदम: क्या भारत से बाहर शिफ्ट होंगे बांग्लादेश के मैच?

केवल बीसीसीआई ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) भी एक बड़े बदलाव की तैयारी में दिख रही है। सूत्रों और हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईसीसी बांग्लादेश के टी20 वर्ल्ड कप मैचों को भारत से बाहर किसी अन्य देश में शिफ्ट करने पर गंभीरता से विचार कर रही है。

यह खबर उन प्रशंसकों के लिए बड़ा झटका है जो भारत के मैदानों पर बांग्लादेशी टीम को खेलते देखना चाहते थे। आईसीसी के इस संभावित फैसले के पीछे सुरक्षा चिंताएं (Security Concerns) और लॉजिस्टिक चुनौतियां प्रमुख मानी जा रही हैं। अगर यह शिफ्टिंग होती है, तो संयुक्त अरब अमीरात (UAE) या श्रीलंका जैसे देश इन मैचों की मेजबानी के लिए रेस में सबसे आगे हो सकते हैं।

बीसीसीआई के सख्त रुख के पीछे की असली वजह

बीसीसीआई का केकेआर को दिया गया यह निर्देश कई सवाल खड़े करता है। जानकारों का मानना है कि बीसीसीआई आगामी व्यस्त सीजन को देखते हुए किसी भी तरह के विवाद या खिलाड़ियों की ‘वर्कलोड मैनेजमेंट’ में जोखिम नहीं लेना चाहता।

खिलाड़ियों की एनओसी (NOC) का मुद्दा: बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) अक्सर अपने खिलाड़ियों को आईपीएल के पूरे सीजन के लिए एनओसी देने में आनाकानी करता रहा है。

सुरक्षा प्रोटोकॉल: मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए, बीसीसीआई खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता।

फ्रेंचाइजी पर दबाव: केकेआर जैसी टीम, जिसकी ब्रांड वैल्यू काफी ऊंची है, उसे अंतिम समय में खिलाड़ियों के हटने से होने वाले नुकसान से बचाना भी बोर्ड की प्राथमिकता है।

टी20 वर्ल्ड कप 2026 पर मंडराते बादल

टी20 वर्ल्ड कप का आयोजन भारत में होना तय है, लेकिन बांग्लादेश के मैचों को लेकर अनिश्चितता ने टूर्नामेंट के शेड्यूल को प्रभावित किया है। आईसीसी की एक उच्च स्तरीय बैठक में इस बात पर चर्चा हुई है कि क्या तटस्थ स्थानों (Neutral Venues) पर बांग्लादेश के मैच कराना बेहतर होगा।

यदि बांग्लादेश के मैच शिफ्ट होते हैं, तो इसका असर ब्रॉडकास्टिंग राइट्स, टिकटों की बिक्री और टूर्नामेंट की कुल रेवेन्यू पर भी पड़ सकता है। आईसीसी के अधिकारी जल्द ही इस पर अंतिम मोहर लगा सकते हैं, जिससे विश्व कप का आधिकारिक शेड्यूल पूरी तरह बदल जाएगा।

कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए आगे की राह

बीसीसीआई के इस फैसले के बाद केकेआर के लिए अब रणनीतिक बदलाव अनिवार्य हो गया है। टीम को अब ऐसे खिलाड़ियों की ओर रुख करना होगा जो पूरे सीजन के लिए उपलब्ध हों।

नए विदेशी ऑलराउंडर की तलाश: शाकिब जैसे अनुभवी खिलाड़ी की जगह भरने के लिए टीम को ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड के ऑलराउंडर्स पर दांव लगाना पड़ सकता है।

नीलामी की रणनीति: केकेआर को अब अपनी पर्स वैल्यू और स्लॉट्स को नए सिरे से संतुलित करना होगा।

प्रशंसकों की प्रतिक्रिया: कोलकाता के प्रशंसकों के बीच बांग्लादेशी खिलाड़ियों की खासी लोकप्रियता है, ऐसे में टीम प्रबंधन को इस बदलाव को लेकर समर्थकों को विश्वास में लेना होगा।

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क्रिकेट और कूटनीति: खेल पर राजनीति का असर

यह पहली बार नहीं है जब क्रिकेट के मैदान पर राजनीतिक निर्णयों का असर देखने को मिल रहा है। भारत और बांग्लादेश के बीच क्रिकेट संबंधों में आती यह खटास खेल प्रेमियों के लिए चिंता का विषय है। बीसीसीआई और आईसीसी के ये फैसले दर्शाते हैं कि खेल अब केवल बाउंड्री के अंदर तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारक काम कर रहे हैं।

बीसीसीआई का केकेआर को दिया गया निर्देश और आईसीसी द्वारा बांग्लादेश के मैचों को शिफ्ट करने का विचार, क्रिकेट जगत में एक बड़े बदलाव की आहट है। जहां केकेआर को अपनी टीम को फिर से संगठित करना होगा, वहीं आईसीसी को विश्व कप की गरिमा और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड इस पूरे घटनाक्रम पर क्या प्रतिक्रिया देता है।

क्या आपको लगता है कि सुरक्षा कारणों से मैचों को दूसरे देश में शिफ्ट करना सही फैसला है, या इससे खेल की भावना को ठेस पहुँचती है? अपनी राय हमें जरूर बताएं।

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Jammu Kashmir Cricket: 1 हेलमेट, फिलीस्तीन का झंडा और पुलिस की एंट्री! जानिए Furqan Bhat के वायरल सच की पूरी कहानी

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क्रिकेट को ‘जेंटलमैन गेम’ कहा जाता है, लेकिन जब खेल के मैदान में राजनीति या विवादित प्रतीक (symbols) आ जाएं, तो हंगामा होना तय है। कुछ ऐसा ही हुआ है Jammu Kashmir में, जहां एक स्थानीय क्रिकेट मैच अचानक से नेशनल न्यूज बन गया है। इस बार चर्चा किसी छक्के या चौके की नहीं, बल्कि एक हेलमेट की है। Jammu Kashmir Champions League के एक मैच के दौरान क्रिकेटर Furqan Bhat (फुरकान भट) ने कुछ ऐसा किया कि अब पुलिस से लेकर क्रिकेट एसोसिएशन तक सब हरकत में आ गए हैं।

सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है जिसमें फुरकान के हेलमेट पर Palestine (फिलीस्तीन) का झंडा लगा हुआ दिख रहा है। आखिर क्या है पूरा मामला? क्यों पुलिस ने खिलाड़ी को तलब किया? और क्या अब उनका करियर खतरे में है? आइए, इस ब्लॉग में सब कुछ विस्तार से जानते हैं।

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मैदान पर क्या हुआ? (The Viral Incident)

यह पूरा मामला जम्मू में चल रही Jammu and Kashmir Champions League (JKCL) का है। यह एक स्थानीय टूर्नामेंट है, जिसमें कई टीमें हिस्सा ले रही थीं।

खबरों के मुताबिक, JK11 Kings टीम के खिलाड़ी फुरकान भट जब बल्लेबाजी करने मैदान पर उतरे, तो उनके हेलमेट ने सबका ध्यान खींचा। उनके हेलमेट पर फिलीस्तीन का झंडा (Palestine Flag) लगा हुआ था।

मैच JK11 Kings और Jammu Trailblazers के बीच खेला जा रहा था। जैसे ही फुरकान की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए, यह आग की तरह फैल गए। लोग सवाल उठाने लगे कि क्या खेल के मैदान पर ऐसे राजनीतिक संदेश देना सही है?

पुलिस ने लिया कड़ा एक्शन (Police Investigation)

मामला जैसे ही तूल पकड़ने लगा, जम्मू-कश्मीर पुलिस तुरंत एक्शन में आ गई। यह मामला सिर्फ खेल के नियमों के उल्लंघन का नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और संवेदनशील मुद्दों से भी जुड़ गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने क्रिकेटर Furqan Bhat और लीग के आयोजक (Organizer) Zahid Bhat को पूछताछ के लिए तलब (summon) कर लिया है।

पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि:

क्या यह जानबूझकर किया गया था?

इसके पीछे खिलाड़ी की क्या मंशा थी?

क्या आयोजकों ने मैच से पहले खिलाड़ियों की किट (Kit) चेक नहीं की थी?

फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इससे कोई गलत संदेश न जाए या शांति भंग न हो।

क्रिकेट एसोसिएशन ने झाड़ा पल्ला (JKCA Statement)

इस विवाद के बीच Jammu and Kashmir Cricket Association (JKCA) ने अपना रुख साफ कर दिया है। उन्होंने इस टूर्नामेंट और खिलाड़ी से पूरी तरह किनारा कर लिया है।

JKCA के अधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा है कि यह ‘चैंपियंस लीग’ उनका मान्यता प्राप्त (recognized) टूर्नामेंट नहीं है। यह एक निजी तौर पर आयोजित लीग है, जिसे JKCA या BCCI से कोई मंजूरी नहीं मिली है।

JKCA के सदस्य (प्रशासन) ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता ने बताया कि फुरकान भट उनके साथ रजिस्टर्ड खिलाड़ी नहीं हैं। BCCI के नियम साफ कहते हैं कि खिलाड़ी ऐसे किसी भी टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकते जो मान्यता प्राप्त न हो। इसका मतलब है कि यह लीग पहले से ही नियमों के दायरे से बाहर चल रही थी।

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खेल में झंडे पर विवाद क्यों? (Why is it a Big Deal?)

आप सोच रहे होंगे कि एक छोटे से झंडे पर इतना बवाल क्यों? दरअसल, ICC (International Cricket Council) और BCCI के नियम खिलाड़ियों को मैदान पर किसी भी तरह के राजनीतिक, धार्मिक या नस्लीय संदेश देने से सख्त मना करते हैं।

आपको याद होगा कि भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान MS Dhoni को भी अपने ग्लव्स पर ‘बलिदान बैज’ लगाने से रोक दिया गया था। इसी तरह इंग्लैंड के मोईन अली को भी ‘Save Gaza’ का बैंड पहनने पर मना किया गया था।

खेल को राजनीति से दूर रखने के लिए ये नियम बनाए गए हैं। जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में, जहां छोटी सी बात भी बड़ा रूप ले सकती है, वहां किसी विदेशी राष्ट्र (फिलीस्तीन) का झंडा लहराना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

सोशल मीडिया पर बंटी राय

जैसे ही यह खबर बाहर आई, सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया।

एक पक्ष का कहना है कि खेल को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनाना चाहिए और खिलाड़ी पर कार्रवाई होनी चाहिए।

दूसरा पक्ष इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी (Freedom of Expression) और एकजुटता (Solidarity) से जोड़कर देख रहा है।

हालांकि, कानून और क्रिकेट के नियम भावनाओं से नहीं, बल्कि लिखित दिशानिर्देशों (Guidelines) से चलते हैं।

जांच अभी भी जारी :-

फिलहाल, फुरकान भट और आयोजकों पर पुलिस की जांच जारी है। यह घटना सभी युवा खिलाड़ियों के लिए एक सबक है कि खेल के मैदान का इस्तेमाल सिर्फ खेल प्रतिभा दिखाने के लिए होना चाहिए, न कि किसी विचारधारा को प्रमोट करने के लिए।

अब देखना यह होगा कि पुलिस की पूछताछ में क्या निकलकर आता है और क्या इस लीग पर कोई बड़ा एक्शन लिया जाएगा?

दोस्तों, इस मुद्दे पर आपकी क्या राय है? क्या खेल के मैदान पर ऐसे झंडे या सिंबल होने चाहिए? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर लिखें!

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