अगर आप जिम जाते हैं, बॉडीबिल्डिंग करते हैं या फिटनेस फ्रीक हैं, तो पिछले कुछ दिनों से आपके सोशल मीडिया फीड पर एक खबर ने आपको जरूर परेशान किया होगा। हर जगह दावा किया जा रहा है कि “भारत में क्रिएटिन (Creatine) को पूरी तरह से बैन कर दिया गया है।”
क्रिएटिन दुनिया का सबसे ज्यादा रिसर्च किया गया और सुरक्षित सप्लीमेंट माना जाता है, ऐसे में इस खबर ने सप्लीमेंट मार्केट और एथलीटों के बीच खौफ का माहौल बना दिया है। लेकिन क्या वाकई सरकार ने इस पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है, या फिर कहानी कुछ और है? ‘Apni Vani’ की इस विशेष खोजी रिपोर्ट में आइए इस पूरी वायरल न्यूज़ का ‘डबल वेरिफिकेशन’ करते हैं और जानते हैं इसके पीछे का असली सच।
क्या वाकई बैन हुआ है क्रिएटिन?
सबसे पहले और साफ शब्दों में समझ लीजिए— भारत में क्रिएटिन पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। अगर आप बिल्कुल प्योर फॉर्म यानी क्रिएटिन मोनोहाइड्रेट का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आपको डरने की कोई जरूरत नहीं है।
यह पूरी अफवाह कुछ भ्रामक खबरों और अधूरे ज्ञान के कारण फैली है। भारत सरकार या खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) ने क्रिएटिन को पूरी तरह अवैध घोषित नहीं किया है। दुकानों और ऑनलाइन स्टोर्स पर इसकी बिक्री पहले की तरह ही कानूनी रूप से जारी है।
तो फिर विवाद कहां से शुरू हुआ?
अब सवाल उठता है कि अगर बैन नहीं हुआ, तो यह खबर आई कहां से? दरअसल, FSSAI ने हाल ही में भारत के सप्लीमेंट और न्यूट्रस्युटिकल्स (Nutraceuticals) मार्केट में एक बड़ा अभियान शुरू किया है।
प्रशासन ने उन सप्लीमेंट ब्रांड्स पर शिकंजा कसा है जो नियमों का उल्लंघन कर रहे थे। बाजार में कई कंपनियां ऐसी थीं जो क्रिएटिन के नाम पर नकली, मिलावटी या बिना अप्रूवल वाले ‘ब्लेंड्स’ बेच रही थीं। कई सप्लीमेंट्स में हैवी मेटल्स (भारी धातु) और स्टेरोइड्स की मिलावट पाई गई थी। FSSAI ने केवल इन गैर-मानक और मिलावटी प्रोडक्ट्स की बिक्री और इम्पोर्ट पर रोक लगाई है, न कि शुद्ध क्रिएटिन पर।
‘प्योर मोनोहाइड्रेट’ बनाम ‘सस्ते ब्लेंड्स’ का खेल
जैसा कि आपने बिल्कुल सही अंदाजा लगाया था, असली पेंच इसके फॉर्मूलेशन में है। क्रिएटिन मोनोहाइड्रेट अपने आप में एक प्राकृतिक और सुरक्षित कंपाउंड है।
समस्या तब आती है जब कंपनियां क्रिएटिन को अन्य सिंथेटिक रसायनों, अनधिकृत फ्लेवर्स या हानिकारक उत्तेजकों के साथ मिलाकर बेचती हैं। FSSAI के नए कड़े दिशा-निर्देशों के तहत, सप्लीमेंट कंपनियों को अब अपने हर प्रोडक्ट की शुद्धता का सर्टिफिकेट देना अनिवार्य कर दिया गया है। जिन कंपनियों के पास यह लैब रिपोर्ट या FSSAI का वैध लाइसेंस नहीं है, सिर्फ उनके स्टॉक को जब्त किया जा रहा है।
लेबलिंग और डोज को लेकर नए कड़े नियम
FSSAI ने क्रिएटिन की पैकेजिंग और उसकी अनुशंसित खुराक को लेकर भी कुछ नए नियम बनाए हैं।
अब किसी भी सप्लीमेंट कंपनी को अपने डिब्बे पर साफ-साफ लिखना होगा कि प्रतिदिन इसकी कितनी मात्रा सुरक्षित है (आमतौर पर 3 ग्राम प्रति दिन)। इसके साथ ही डिब्बे पर यह चेतावनी भी होनी चाहिए कि यह प्रोडक्ट केवल वयस्कों के लिए है और किडनी की बीमारी से पीड़ित लोगों को इसके सेवन से बचना चाहिए। जिन ब्रांड्स के लेबल पर ये गाइडलाइंस नहीं थीं, उन्हें बाजार से अपने प्रोडक्ट्स वापस लेने को कहा गया है, जिसे लोगों ने गलती से ‘बैन’ समझ लिया।

फिटनेस लवर्स अब क्रिएटिन खरीदते समय क्या करें?
इस पूरे विवाद के बीच अगर आप अपने लिए क्रिएटिन खरीदना चाहते हैं, तो ‘Apni Vani’ आपको 3 सबसे जरूरी बातें चेक करने की सलाह देती है:
- FSSAI नंबर देखें: डब्बे के पीछे FSSAI का लोगो और 14 अंकों का रजिस्ट्रेशन नंबर जरूर चेक करें।
- थर्ड-पार्टी टेस्टिंग: हमेशा उन ब्रांड्स को चुनें जो ‘Informed-Choice’, ‘Labdoor’ या ‘Trustified’ जैसी स्वतंत्र संस्थाओं से सर्टिफाइड हों। यह इस बात की गारंटी है कि डिब्बे के अंदर कोई मिलावट नहीं है।
- खुले पाउडर से बचें: कभी भी किसी लोकल स्टोर से बिना सील या बिना ब्रांड का खुला हुआ क्रिएटिन पाउडर न खरीदें।
Apnivani की बात
कुल मिलाकर बात यह है कि क्रिएटिन पर कोई बैन नहीं है, बल्कि यह सरकार द्वारा नकली और मिलावटी सप्लीमेंट माफिया के खिलाफ उठाया गया एक बहुत ही सराहनीय कदम है। इससे बाजार से घटिया और नकली प्रोडक्ट्स साफ होंगे और उपभोक्ताओं को केवल असली और सुरक्षित सप्लीमेंट्स ही मिलेंगे। इसलिए सोशल मीडिया की अफवाहों पर ध्यान न दें, सुरक्षित रहें और एक सही, प्रामाणिक ब्रांड का चुनाव करके अपनी फिटनेस जर्नी जारी रखें।
क्या आप भी क्रिएटिन का इस्तेमाल करते हैं? इस नए नियम पर आपकी क्या राय है? हमें नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं और इस जरूरी जानकारी को अपने जिम वाले ग्रुप्स में तुरंत शेयर करें!
