Nitish Kumar’s security lapse: बेगूसराय में हेलीपैड पर बैल का ‘तांडव’, जान बचाने के लिए फायर ब्रिगेड पर चढ़े पुलिसकर्मी

Nitish Kumar's security lapse

बेगूसराय, बिहार: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शनिवार, 14 मार्च 2026 को बेगूसराय में आयोजित ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान एक ऐसी घटना घटी जिसने न केवल प्रशासन की तैयारियों की पोल खोल दी, बल्कि सुरक्षाकर्मियों के पसीने छुड़ा दिए। सीएम के आगमन के लिए तैयार किए गए अति-संवेदनशील हेलीपैड क्षेत्र में एक बेकाबू बैल घुस गया, जिससे वहां तैनात पुलिस महकमे में भगदड़ मच गई।

हेलीपैड बना ‘अखाड़ा’, पुलिसकर्मियों को जान के लाले पड़े

घटना बेगूसराय के बीआईएडीए (BIADA) कैंपस की है, जहाँ मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर लैंड करने वाला था। सुरक्षा के कड़े इंतजामों का दावा किया जा रहा था, लेकिन लैंडिंग से कुछ समय पहले ही एक विशाल बैल सुरक्षा घेरा तोड़कर सीधे हेलीपैड के बीचों-बीच पहुँच गया। वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने जब उसे भगाने की कोशिश की, तो बैल हिंसक हो गया और उसने जवानों को ही दौड़ाना शुरू कर दिया।

हैरानी की बात यह रही कि बैल के डर से जवान अपनी ड्यूटी छोड़ इधर-उधर भागते नजर आए। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि एक पुलिसकर्मी ने अपनी जान बचाने के लिए वहां खड़ी फायर ब्रिगेड की गाड़ी की छत पर शरण ली। करीब 15-20 मिनट तक हेलीपैड पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

Nitish Kumar's security lapse

सुरक्षा प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ीं

मुख्यमंत्री जैसे वीवीआईपी (VVIP) की सुरक्षा के लिए ‘नो फ्लाई ज़ोन’ और ‘क्लीन पेरिमीटर’ जैसे कड़े प्रोटोकॉल होते हैं। हेलीपैड के चारों ओर बैरिकेडिंग के बावजूद एक आवारा पशु का अंदर घुस जाना जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस की बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अगर यह घटना सीएम के हेलीकॉप्टर लैंड करने के दौरान होती, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था। अंततः, लाठियों और शोर-शराबे की मदद से बैल को परिसर से बाहर खदेड़ा गया, जिसके बाद अधिकारियों ने राहत की सांस ली।

समृद्धि यात्रा का समापन और राजनीतिक गलियारों में हलचल

नीतीश कुमार अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के तीसरे चरण के तहत बेगूसराय और शेखपुरा के दौरे पर थे। इस यात्रा का उद्देश्य विकास योजनाओं की समीक्षा करना है, लेकिन इस सुरक्षा चूक ने पूरी चर्चा का रुख मोड़ दिया है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लपकते हुए सरकार पर निशाना साधा है। नेताओं का कहना है कि जो सरकार अपने मुख्यमंत्री को सुरक्षित हेलीपैड मुहैया नहीं करा सकती, वह आम जनता की सुरक्षा क्या करेगी?

Nitish Kumar's security lapse

नीतीश कुमार की सुरक्षा में बार-बार होती चूक

यह पहली बार नहीं है जब बिहार के मुख्यमंत्री की सुरक्षा में इस तरह की ढिलाई देखी गई हो।

पिछले कुछ वर्षों के इतिहास पर नजर डालें तो:

  • पटना (2025): एक युवक जेड प्लस सुरक्षा घेरा तोड़कर बंद लिफाफा देने सीएम के करीब पहुंच गया था।
  • बाढ़ (2024): सीएम के कार्यक्रम के ठीक बाद स्वागत गेट गिर गया था।
  • नालंदा (2022): जनसभा के दौरान सीएम के पास धमाका हुआ था और बख्तियारपुर में उन पर हमला भी किया गया था।

क्या सबक लेगा प्रशासन?

बेगूसराय की यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिससे बिहार पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग रहे हैं। वीवीआईपी सुरक्षा में पशु नियंत्रण (Animal Control) एक अनिवार्य हिस्सा है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। अब देखना यह है कि इस गंभीर चूक के लिए किन अधिकारियों पर गाज गिरती है और भविष्य में ऐसी शर्मिंदगी से बचने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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Girl Climbs Mobile Tower: पुलिस के फूले हाथ-पांव गोपालगंज में ‘शोले’ जैसा हाई वोल्टेज ड्रामा

Girl Climbs Mobile Tower

गोपालगंज (बिहार): प्यार में इंसान किसी भी हद तक जा सकता है, यह कहावत बिहार के गोपालगंज जिले में सच साबित हुई। यहां एक युवती ने अपने प्रेमी की पुलिस हिरासत से रिहाई सुनिश्चित करने के लिए फिल्मी अंदाज में 100 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़कर जबरदस्त हंगामा किया। घंटों चले इस ‘हाई-वोल्टेज ड्रामे’ ने न केवल ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ा दीं, बल्कि प्रशासन के भी पसीने छुड़ा दिए। इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहा है।

क्या है पूरा मामला?

यह दिलचस्प और हैरान कर देने वाला मामला गोपालगंज के भोरे थाना क्षेत्र के बनकटा जागीरदारी गांव का है। जानकारी के अनुसार, बनकटा मल गांव निवासी अर्पिता कुमारी और उसी गांव के पवन चौहान के बीच पिछले 7 सालों से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों एक-दूसरे से शादी करना चाहते थे, लेकिन उनके परिवार वाले इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे।

गुरुवार रात जब अर्पिता अचानक अपने घर से लापता हो गई, तो उसके परिजनों ने प्रेमी पवन चौहान पर अपहरण का आरोप लगाते हुए थाने में शिकायत दर्ज करा दी। पुलिस ने आनन-फानन में कार्रवाई करते हुए पवन को हिरासत में ले लिया और पूछताछ के लिए थाने ले गई।

Girl Climbs Mobile Tower

100 फीट ऊंचे टावर पर ‘मौत का खेल’

अपने प्रेमी की गिरफ्तारी की खबर सुनते ही अर्पिता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। शुक्रवार सुबह उसने गांव के पास स्थित एक ऊंचे मोबाइल टावर को चुना और उस पर चढ़ गई। टावर के ऊपर से चिल्लाते हुए अर्पिता ने धमकी दी, “अगर मेरे प्रेमी को तुरंत रिहा नहीं किया गया, तो मैं यहीं से कूदकर जान दे दूंगी।” युवती की इस जिद ने मौके पर मौजूद सैकड़ों लोगों और पुलिस बल को हक्का-बक्का कर दिया।

जब पुलिस को लानी पड़ी ‘हथकड़ी’ में रिहाई

पुलिस ने पहले तो युवती को समझा-बुझाकर नीचे उतारने की कोशिश की, लेकिन अर्पिता अपनी मांग पर अड़ी रही। स्थिति की गंभीरता और युवती की जान को खतरे में देख, पुलिस को झुकना पड़ा। नाटकीय घटनाक्रम के तहत, पुलिस ने हिरासत में लिए गए प्रेमी पवन चौहान को हथकड़ी लगी हालत में पुलिस जीप से टावर के नीचे लाया।

जैसे ही अर्पिता ने नीचे अपने प्रेमी को देखा, उसका गुस्सा शांत हुआ। पवन और पुलिस के आश्वासन के बाद अर्पिता धीरे-धीरे नीचे उतरी। नीचे आते ही पुलिस ने उसे सुरक्षित अपनी हिरासत में लिया और मेडिकल जांच के लिए भेजा।

Girl Climbs Mobile Tower

‘शोले’ की ‘बसंती’ से हो रही तुलना

सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियो को लोग धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की मशहूर फिल्म ‘शोले’ से जोड़कर देख रहे हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि फिल्म में ‘वीरू’ पानी की टंकी पर चढ़ा था, जबकि असल जिंदगी की इस कहानी में ‘बसंती’ ने मोबाइल टावर का सहारा लिया। इंस्टाग्राम, ट्विटर और यूट्यूब पर लोग तरह-तरह के कमेंट्स कर रहे हैं और इसे बिहार की सबसे अनोखी प्रेम कहानियों में से एक बता रहे हैं।

पुलिस का बयान और आगे की कार्रवाई

स्थानीय पुलिस के अनुसार, यह मामला पूरी तरह से प्रेम प्रसंग और पारिवारिक विवाद से जुड़ा है। प्रेमी पर अपहरण का जो आरोप लगाया गया था, युवती के सुरक्षित मिलने के बाद उसकी स्थिति बदल गई है। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर रही है और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए काउंसलिंग का सहारा ले रही है। प्रशासन का कहना है कि कानून के दायरे में रहकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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वैशाली: सोनपुर में अनियंत्रित CNG ऑटो ने वार्ड सदस्य को कुचला, इलाज के दौरान मौत; इलाके में भारी तनाव

सोनपुर

बिहार के वैशाली जिले के सोनपुर से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है। यहाँ एक अनियंत्रित सीएनजी (CNG) ऑटो की टक्कर से वार्ड सदस्य प्रेम कुमार की मौत हो गई है। यह घटना उस वक्त हुई जब प्रेम कुमार अपनी बाइक से घर लौट रहे थे। इस घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है, वहीं आक्रोशित ग्रामीणों ने मुआवजे और दोषी चालक की गिरफ्तारी की मांग को लेकर घंटों सड़क जाम रखा।

सोनपुर
अनियंत्रित सीएनजी (CNG) ऑटो की टक्कर

घटना का विवरण: कैसे हुआ हादसा?

यह भीषण सड़क हादसा सोनपुर थाना क्षेत्र के दुधैला बाईपास के पास घटित हुआ। जानकारी के अनुसार, शाहपुरा दियारा पंचायत के वार्ड संख्या-11 के सदस्य प्रेम कुमार (32 वर्ष) शनिवार की शाम गौला बाजार से अपना काम निपटाकर घर लौट रहे थे। इसी दौरान नयागांव की दिशा से आ रहे एक तेज रफ्तार और अनियंत्रित CNG टेंपो ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी।

टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि प्रेम कुमार अपनी बाइक समेत सड़क किनारे गहरे गड्ढे में जा गिरे। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई, लेकिन मौका पाकर ऑटो चालक वाहन छोड़कर फरार होने में कामयाब रहा।

अस्पताल में तोड़ा दम, परिवार में मचा कोहराम

दुर्घटना के बाद स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से गंभीर रूप से घायल प्रेम कुमार को आनन-फानन में नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें पटना रेफर कर दिया। पटना के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद जब प्रेम कुमार का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुँचा, तो परिजनों के चीत्कार से पूरा माहौल गमगीन हो गया। मृतक अपने पीछे पत्नी और तीन छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं, जिनके सिर से अब पिता का साया उठ चुका है।

ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: NH-19 पर लगाया भीषण जाम

वार्ड पार्षद की मौत की खबर मिलते ही ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। सोमवार को आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने दुधैला बाईपास के पास शव को सड़क पर रखकर NH-19 को पूरी तरह जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर टायर जलाकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

ग्रामीणों की मांग थी कि पीड़ित परिवार को उचित सरकारी मुआवजा दिया जाए और फरार ऑटो चालक को अविलंब गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी जाए। सड़क जाम होने के कारण हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

सोनपुर
अनियंत्रित सीएनजी (CNG) ऑटो की टक्कर

पुलिस की कार्रवाई और वर्तमान स्थिति

घटना की सूचना मिलते ही सोनपुर थाना पुलिस दलबल के साथ मौके पर पहुँची। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को काफी देर तक समझाया और आश्वासन दिया कि प्रशासन नियमानुसार मुआवजे की प्रक्रिया पूरी करेगा। पुलिस ने दुर्घटना में शामिल CNG ऑटो को जब्त कर लिया है और वाहन नंबर के आधार पर फरार चालक की तलाश में छापेमारी कर रही है। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के आधार पर बहुत जल्द दोषी को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

मृतक प्रेम कुमार: केवल जनप्रतिनिधि ही नहीं, एक कर्मठ व्यक्ति भी थे

स्थानीय लोगों ने बताया कि प्रेम कुमार केवल एक वार्ड सदस्य ही नहीं थे, बल्कि वे समाज सेवा में हमेशा अग्रणी रहते थे। वे पटना में एक डॉक्टर के यहाँ भी काम करते थे ताकि अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें। उनकी मिलनसार छवि के कारण पूरे सोनपुर और शाहपुरा दियारा क्षेत्र में उनकी एक अलग पहचान थी।

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Patna Police का ‘ऑपरेशन क्लीन’: 80 लाख की नशीली सिरप के साथ अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़, 6 गिरफ्तार

Patna

बिहार की राजधानी Patna में नशीली दवाओं के सौदागरों के खिलाफ पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी चोट की है। Patna Police की विशेष टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए ‘खांटी सिरप’ (कोडीन युक्त कफ सिरप) की एक विशाल खेप पकड़ी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की कीमत लगभग 80 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस ने इस मामले में गिरोह के मुख्य सरगना सहित 6 शातिर तस्करों को दबोचने में कामयाबी हासिल की है। यह पूरी कार्रवाई पटना सिटी के मालसलामी और दीदारगंज थाना क्षेत्रों में अंजाम दी गई।

Patna Police
Patna Police

डाक पार्सल और मसालों की आड़ में ‘सफेद जहर’ की सप्लाई

तस्करों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए तस्करी का बेहद शातिर तरीका अपनाया था। जब्त की गई सिरप की बोतलों को डाक विभाग के फर्जी पार्सल और तेज पत्तों की बोरियों के नीचे छिपाकर लाया जा रहा था। पुलिस ने छापेमारी के दौरान कुल 4485 लीटर प्रतिबंधित सिरप बरामद की, जो 289 अलग-अलग कार्टन में पैक थी। जांच में पता चला है कि यह खेप हिमाचल प्रदेश की एक फार्मा कंपनी से फर्जी कागजातों के जरिए मंगवाई गई थी और इसे पटना के स्थानीय बाजारों के साथ-साथ सीमावर्ती जिलों में सप्लाई किया जाना था।

सरगना ‘गन्नी’ सहित 6 तस्कर पुलिस की गिरफ्त में

इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता गिरोह के मास्टरमाइंड सूर्यप्रकाश उर्फ ‘गन्नी’ की गिरफ्तारी है। गन्नी पटना के कदमकुआं इलाके का रहने वाला है और लंबे समय से शहर में नशीली दवाओं के वितरण नेटवर्क को नियंत्रित कर रहा था। उसके साथ गिरफ्तार किए गए अन्य पांच आरोपियों में ट्रक ड्राइवर और लोकल एजेंट शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इन आरोपियों का जाल बिहार के कटिहार, सहरसा और वैशाली तक फैला हुआ था। ये लोग हिमाचल से माल मंगवाकर उसे ऊंचे दामों पर युवाओं और नशेड़ियों को बेचते थे।

हिमाचल प्रदेश से बिहार तक जुड़ा तस्करी का नेटवर्क

वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि बिहार में नशीली दवाओं की जड़ें अन्य राज्यों से जुड़ी हैं। डीएसपी डॉ. गौरव कुमार ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि गिरोह के सदस्य हिमाचल प्रदेश के इंडस्ट्रियल एरिया से सीधे संपर्क में थे। ट्रक (टाटा 407) और अन्य वाणिज्यिक वाहनों का उपयोग कर वे चेकपोस्टों को पार कर जाते थे क्योंकि ऊपर से डाक पार्सल या किराने का सामान लदा होता था। पुलिस अब उन कंपनियों की भी जांच कर रही है जहां से यह सिरप बिना वैध लाइसेंस के रिलीज किया गया था।

युवाओं के भविष्य पर प्रहार: बिहार में ‘खांटी’ का बढ़ता चलन

बिहार में शराबबंदी के बाद से कोडीन युक्त कफ सिरप (जिसे स्थानीय भाषा में ‘खांटी’ कहा जाता है) की मांग नशे के विकल्प के रूप में बढ़ी है। यह न केवल स्वास्थ्य के लिए घातक है, बल्कि युवाओं को अपराध की ओर भी धकेल रहा है। पटना पुलिस की इस कार्रवाई से ड्रग माफियाओं की कमर टूटी है। एसएसपी ने स्पष्ट किया है कि ‘मिशन सुरक्षा’ के तहत शहर के स्कूल-कॉलेजों और झुग्गी बस्तियों में सक्रिय छोटे डीलरों पर भी नकेल कसी जाएगी।

Patna Police
Patna Police का ‘ऑपरेशन क्लीन’

पुलिस की अपील

पटना पुलिस की यह उपलब्धि नशा मुक्त बिहार के संकल्प की ओर एक बड़ा कदम है। पुलिस ने एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में छापेमारी जारी है। पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उनके आस-पास ऐसी कोई संदिग्ध गतिविधि या नशीली दवाओं की बिक्री दिखे, तो तुरंत पुलिस हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें।

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Kaimur Shamed: सरस्वती विसर्जन में ‘अश्लीलता’ रोकने की सजा! बेटी को बीच सड़क पीटा, तमाशबीन बनाते रहे वीडियो (3 कड़वे सवाल)

Kaimur shamed in Saraswati puja

आज बिहार का कैमुर शर्मिंदा हुआ (Kaimur Shamed) है। रामगढ़ से जो खबर आई है, उसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। हम उस देश में रहते हैं जहाँ नारी को ‘देवी’ मानकर पूजा जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि उसी देवी (माँ सरस्वती) के विसर्जन जुलूस में एक ‘बेटी’ को जानवरों की तरह पीटा जाता है।
सिर्फ सोचकर ही गुस्सा आता है। उस बहादुर लड़की का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने डीजे (DJ) पर बज रहे गंदे और अश्लील गानों का विरोध किया था।

शनिवार की रात रामगढ़ के नरहन गांव में जो हुआ, वह कोई साधारण मारपीट नहीं थी। वह इस बात का सबूत है कि हम ‘भक्ति’ के नाम पर ‘गुंडागर्दी’ के दौर में जी रहे हैं।

Kaimur shamed police

क्या है पूरा मामला? (The Shameful Incident)

घटना शनिवार रात (Saturday Night) की है। रामगढ़ थाना क्षेत्र के नरहन गांव (Narhan Village) में सरस्वती पूजा के बाद मूर्ति विसर्जन का जुलूस निकाला जा रहा था।
कायदे से यह श्रद्धा का माहौल होना चाहिए था, लेकिन डीजे पर कान फोड़ने वाले वॉल्यूम में बेहद अश्लील और जातिसूचक भोजपुरी गाने बज रहे थे।
गांव की ही एक युवती से यह बर्दाश्त नहीं हुआ। उसने जुलूस रोककर कहा— “माता के विसर्जन में ऐसे गंदे गाने मत बजाओ, इसे बंद करो।”

डीजे बंद होना तो दूर, जुलूस में शामिल कुछ मनचलों और अराजक तत्वों का ‘अहं’ (Ego) हर्ट हो गया। उन्हें लगा कि एक लड़की उन्हें रोकने वाली कौन होती है?

विरोध की सजा: छेड़छाड़ और हैवानियत

सबसे बड़ी बात यह है कि समझाने के बजाय, उन दरिंदों ने युवती को बीच सड़क पर घेर लिया। पहले उसे भद्दी-भद्दी गालियां दी गईं। जब उसने विरोध किया, तो उसके साथ छेड़छाड़ (Molestation) शुरू कर दी गई। और जब वह खुद को बचाने के लिए चीखी, तो लाठी-डंडों, लात और घूंसों से उसकी बेरहमी से पिटाई की गई।
उसे तब तक मारा गया जब तक वह अधमरी होकर गिर नहीं गई। फिलहाल वह भभुआ सदर अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है।

‘नपुंसक’ भीड़: जो सिर्फ वीडियो बनाती रही

इस घटना का सबसे डरावना पहलू हमलावर नहीं, बल्कि वहां मौजूद भीड़ थी।
जिस वक्त उस बेटी को पीटा जा रहा था, वहां सैकड़ों लोग मौजूद थे। लेकिन किसी का हाथ उसे बचाने के लिए नहीं उठा। सबके हाथ में मोबाइल था। सब वीडियो (Video) बना रहे थे ताकि सोशल मीडिया पर ‘वायरल’ कर सकें।

सोचिए, उस बेटी पर क्या गुजरी होगी जब उसने देखा होगा कि उसके अपने गांव वाले, उसके पड़ोसी—सब तमाशबीन बनकर रील बना रहे हैं? यह साबित करता है कि स्मार्टफोन्स ने हमें स्मार्ट तो बना दिया, लेकिन हमारी ‘इंसानियत’ को मार दिया है।

Crowd of Saraswati puja kaimur shamed

भक्ति या गुंडागर्दी? (Devotion vs Hooliganism)

आज हमें यह सवाल पूछना ही होगा— सरस्वती पूजा में ‘चोली-घाघरा’ वाले गानों का क्या काम?
माँ सरस्वती ‘विद्या और संगीत’ की देवी हैं। उनके विसर्जन में शराब पीकर, डीजे पर अश्लील गानों पर नाचना कौन सी भक्ति है? बिहार और यूपी में यह एक बीमारी बन चुकी है।
प्रशासन की नाकामी: सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स हैं कि तेज आवाज़ और अश्लील गाने नहीं बजेंगे, लेकिन पुलिस अक्सर जुलूस के नाम पर आंखें मूंद लेती है। अगर पुलिस पहले ही सख्त होती, तो नरहन गांव में उन गुंडों की इतनी हिम्मत नहीं होती।

पुलिस एक्शन: अब तक क्या हुआ?

घटना के तूल पकड़ते ही प्रशासन की नींद टूटी है।
SP और DM की दौड़: मामले की गंभीरता को देखते हुए कैमूर के डीएम और एसपी खुद थाने पहुंचे।
FIR दर्ज: पुलिस ने पीड़िता के बयान पर एफआईआर दर्ज कर ली है।
गिरफ्तारी: वीडियो फुटेज के आधार पर एक मुख्य आरोपी को हिरासत में लिया गया है और बाकी की तलाश जारी है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या गिरफ्तारी से उस बेटी का दर्द कम हो जाएगा? क्या उसके मन से वह खौफ निकलेगा?

कब सुधरेगा समाज?

कैमूर की यह घटना (Kaimur Horror) सिर्फ एक न्यूज़ नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। अगर आज हम चुप रहे, तो कल यह हमारे घर की बेटी के साथ भी हो सकता है।
उस लड़की ने जो किया, वह ‘साहस’ था, और समाज ने जो किया, वह ‘कायरता’ थी। हमें प्रशासन से मांग करनी चाहिए कि आरोपियों को ऐसी सजा मिले कि अगली बार कोई डीजे पर अश्लीलता फैलाने से पहले सौ बार सोचे।
हमारा सवाल आपसे:
क्या विसर्जन जुलूसों में डीजे (DJ) पूरी तरह बैन हो जाना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर दें।

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बिहार में  मौत कोहराम: किशनगंज में ट्रक-डंपर की टक्कर के बाद जिंदा जले 3 लोग, वैशाली में भतीजे ने की चाचा की हत्या

बिहार

बिहार में पिछले चंद घंटों के भीतर दिल दहला देने वाली दो बड़ी घटनाएं सामने आई हैं। एक तरफ जहां किशनगंज में भीषण सड़क हादसे ने तीन परिवारों को उम्र भर का गम दे दिया, वहीं दूसरी तरफ वैशाली में रिश्तों के कत्ल की एक खौफनाक वारदात ने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है। इन घटनाओं ने राज्य की कानून-व्यवस्था और सड़क सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

किशनगंज: NH 327E पर मौत का तांडव, जिंदा जले तीन लोग

किशनगंज जिले के ठाकुरगंज क्षेत्र में एक रूह कंपा देने वाला हादसा हुआ। NH 327E पर एक तेज रफ्तार ट्रक और डंपर के बीच आमने-सामने की जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों वाहनों में तुरंत आग लग गई और देखते ही देखते लपटें 10 फीट ऊपर तक उठने लगीं।

ट्रक-डंपर की टक्कर

इस भयावह अग्निकांड में दोनों वाहनों के ड्राइवरों समेत तीन लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई। देखने वाले के अनुसार, आग इतनी तेज थी कि लोग चाहकर भी उनकी मदद नहीं कर सके। सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन तब तक सब कुछ जलकर राख हो चुका था। पुलिस ने जले हुए शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच जारी है।

वैशाली: पारिवारिक विवाद में भतीजे ने चाचा का गला रेता

किशनगंज के हादसे के बीच वैशाली जिले से भी एक सनसनीखेज वारदात सामने आई। वैशाली के बराटी थाना क्षेत्र के बहुआरा गांव में एक भतीजे ने अपने सगे चाचा की बेरहमी से हत्या कर दी।

आरोपी भतीजे मंजय कुमार ने पारिवारिक विवाद के चलते अपने 70 वर्षीय चाचा महताब लाल सिंह पर हसुली से हमला किया और उनका गला रेत दिया। जब महताब लाल की पत्नी (चाची) उन्हें बचाने पहुंचीं, तो आरोपी ने उन पर भी हमला कर दिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी मंजय को गिरफ्तार कर लिया है और हत्या में इस्तेमाल हथियार भी जब्त कर लिया गया है। वैशाली एसपी ने कहा है कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले की स्पीडी ट्रायल के जरिए सजा दिलाई जाएगी।

बिहार में मौत कोहराम

सुशासन के दावों पर सवाल

इन दो अलग-अलग घटनाओं ने बिहार में सुरक्षा और सामाजिक समरसता पर बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर किशनगंज की सड़कों पर आए दिन हो रहे हादसों ने परिवहन विभाग की सक्रियता पर सवाल उठाए हैं, वहीं वैशाली की घटना ने समाज में बढ़ती हिंसा और घरेलू विवादों के खौफनाक अंत को उजागर किया है।

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Bihar Police SI Exam 2026 Update : आज से शुरू हुई दरोगा भर्ती की प्रारंभिक परीक्षा, जानें शिफ्ट टाइमिंग और जरूरी नियम

Bihar Police SI Exam 2026

Bihar Police SI Exam 2026 Update: बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) द्वारा बिहार पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) के कुल 1799 पदों पर भर्ती के लिए प्रारंभिक परीक्षा आज, 18 जनवरी 2026 से शुरू कर दी गई है। राज्य भर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच लाखों उम्मीदवार इस प्रतियोगिता में शामिल हो रहे हैं। यह परीक्षा 21 जनवरी तक आयोजित की जाएगी, जिसके माध्यम से योग्य उम्मीदवारों का चयन राज्य के गृह विभाग के अंतर्गत किया जाना है।

परीक्षा का शेड्यूल और शिफ्ट की जानकारी

बिहार पुलिस दरोगा भर्ती की यह प्रारंभिक परीक्षा दो मुख्य तिथियों—18 जनवरी (रविवार) और 21 जनवरी 2026 (बुधवार) को निर्धारित की गई है। आयोग ने सुचारू संचालन के लिए इसे दो पालियों में विभाजित किया है। पहली पाली सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक आयोजित की जा रही है, जिसके लिए अभ्यर्थियों को सुबह 8:30 बजे ही रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया था। वहीं, दूसरी पाली दोपहर 2:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक चलेगी, जिसका रिपोर्टिंग समय दोपहर 1:00 बजे तय किया गया है। प्रत्येक प्रश्न पत्र हल करने के लिए उम्मीदवारों को 2 घंटे का समय दिया जा रहा है।

Bihar Police SI Exam 2026

चयन प्रक्रिया और परीक्षा का स्वरूप

बिहार पुलिस SI बनने का सफर चार कठिन चरणों से होकर गुजरता है। पहले चरण में प्रारंभिक परीक्षा होती है, जिसमें 200 अंकों के कुल 100 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से सामान्य ज्ञान, इतिहास, भूगोल और समसामयिक घटनाओं (Current Affairs) पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। अगले चरण यानी मुख्य परीक्षा में पहुंचने के लिए उम्मीदवारों को कम से कम 30% अंक प्राप्त करना अनिवार्य है। मुख्य परीक्षा के बाद शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) होती है, जिसमें पुरुषों को 6 मिनट में 1.6 किलोमीटर और महिलाओं को 6 मिनट में 1 किलोमीटर की दौड़ पूरी करनी होती है। इसके अलावा ऊंची कूद (High Jump) और लंबी कूद के मानक भी तय किए गए हैं।

अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश

आयोग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा केंद्र पर प्रवेश के लिए एडमिट कार्ड के साथ एक मूल फोटो पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड या वोटर आईडी) और दो पासपोर्ट साइज फोटो लाना अनिवार्य है। परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे मोबाइल फोन, ब्लूटूथ या स्मार्ट वॉच को परीक्षा केंद्र के अंदर ले जाना पूरी तरह वर्जित है। यदि किसी उम्मीदवार को एडमिट कार्ड डाउनलोड करने में समस्या आई है, तो वे पटना स्थित आयोग के कार्यालय से डुप्लिकेट कार्ड के लिए संपर्क कर सकते हैं। सभी केंद्रों पर जैमर और सीसीटीवी कैमरों के जरिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

Bihar Police SI Exam 2026

सैलरी स्ट्रक्चर और भविष्य की संभावनाएं

बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर का पद न केवल सम्मानजनक है, बल्कि इसमें वेतन भी आकर्षक मिलता है। अंतिम रूप से चयनित होने वाले उम्मीदवारों को पे-लेवल 6 के तहत वेतन और विभिन्न सरकारी भत्ते दिए जाएंगे। यह भर्ती प्रक्रिया राज्य में कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए की जा रही है। परीक्षा से जुड़ी किसी भी नई अपडेट या परिणाम की जानकारी के लिए उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट bpssc.bihar.gov.in पर नियमित रूप से विजिट करने की सलाह दी जाती है।

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71 IPS अधिकारियों का तबादला, कुंदन कृष्णन बने STF चीफ, कई जिलों के SP बदले

71 IPS

बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने नए साल की शुरुआत के साथ ही प्रशासनिक महकमे में अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल किया है। गृह विभाग द्वारा शुक्रवार, 9 जनवरी 2026 की देर शाम जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्य के 71 IPS अधिकारियों का एक साथ तबादला कर दिया गया है। इस बड़े बदलाव से न केवल पुलिस मुख्यालय के समीकरण बदले हैं, बल्कि कई जिलों की सुरक्षा कमान भी नए हाथों में सौंपी गई है।

71 IPS

जिलों की नई कमान: प्रमुख SP और SSP की तैनाती

बिहार के कई महत्वपूर्ण जिलों में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए नए पुलिस कप्तानों की नियुक्ति की गई है। इस कड़ी में सुशील कुमार को गया जिले का नया वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) बनाया गया है, जबकि कांतेश कुमार मिश्रा अब मुजफ्फरपुर के SSP की जिम्मेदारी संभालेंगे। भागलपुर की सुरक्षा का जिम्मा प्रमोद कुमार यादव को सौंपा गया है और विनीत कुमार को सारण (छपरा) का नया SSP नियुक्त किया गया है।

गोपालगंज जिले के पुलिस कप्तान के रूप में विनय तिवारी की वापसी हुई है, जो अपनी विशेष कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। सीमावर्ती जिले किशनगंज में संतोष कुमार और अररिया में जितेंद्र कुमार को SP बनाया गया है। वहीं, सीवान में पूरन कुमार झा, लखीसराय में अवधेश दीक्षित और अरवल में नवजोत सिमी को जिले की कमान सौंपी गई है। राजधानी पटना के यातायात प्रबंधन को सुधारने के लिए सागर कुमार को नया ट्रैफिक SP नियुक्त किया गया है।

पुलिस मुख्यालय और विशेष इकाइयों में बदलाव

जिलों के अलावा पुलिस मुख्यालय (PHQ) के ढांचे में भी बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन को अब एसटीएफ (STF) के महानिदेशक (DG) की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है, साथ ही वे ऑपरेशन और स्पेशल ब्रांच का जिम्मा भी देखेंगे। सुनील कुमार, जो पहले स्पेशल ब्रांच में थे, अब एडीजी (मुख्यालय) के पद पर तैनात किए गए हैं। प्रीता वर्मा को बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम का अध्यक्ष सह एमडी बनाया गया है, जबकि अमित कुमार जैन मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो के नए एडीजी होंगे।

साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए रंजीत कुमार मिश्रा को आईजी (साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई) की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही, हृदयकांत को एटीएस (ATS) का नया एसपी और अनंत कुमार को पटना का रेल एसपी नियुक्त किया गया है।

71 IPS

रेंज और प्रमंडल स्तर पर नई नियुक्तियां

प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूत करने के लिए रेंज स्तर पर भी अधिकारियों को बदला गया है। विवेकानंद को पूर्णिया प्रमंडल का नया आईजी (IG) बनाया गया है, जिससे सीमांचल के जिलों में निगरानी तेज होगी। आनंद कुमार को डीआईजी (विधि-व्यवस्था, पटना) के पद पर तैनात किया गया है, जिनका मुख्य कार्य कानून-व्यवस्था की मॉनिटरिंग करना होगा। कोसी प्रमंडल की जिम्मेदारी अब डीआईजी के रूप में कुमार आशीष संभालेंगे, जबकि मनोज कुमार को पुलिस मुख्यालय में आईजी के पद पर पदस्थापित किया गया है। आर. मलार विजी को एडीजी (बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस) का अतिरिक्त प्रभार देकर सशस्त्र बलों के प्रबंधन को और मजबूती दी गई है।

आपकी क्या राय है? क्या नए पुलिस कप्तानों की तैनाती से बिहार में अपराध की स्थिति में सुधार होगा? कमेंट में अपनी राय जरूर साझा करें।

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मुजफ्फरपुर में दिल दहला देने वाला कांड: गरीबी से हार गया पिता, 3 मासूम बेटियों के साथ की आत्महत्या, पूरे इलाके में पसरा मातम

मुजफ्फरपुर

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से आज एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। अक्सर कहा जाता है कि एक पिता अपने बच्चों के लिए पूरी दुनिया से लड़ सकता है, लेकिन मुजफ्फरपुर में आर्थिक तंगी (Financial Crisis) की मार ऐसी पड़ी कि एक पिता अपनी ही जिंदगी और अपनी तीन मासूम बेटियों की सांसों का रक्षक नहीं बन सका।

इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे इलाके में सन्नाटा है और हर किसी की आंखें नम हैं।

मुजफ्फरपुर

क्या है पूरा मामला?

घटना मुजफ्फरपुर जिले के (संबंधित थाना क्षेत्र का नाम, यदि उपलब्ध हो तो, अन्यथा ‘ग्रामीण क्षेत्र’) की है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, आज सुबह जब काफी देर तक घर का दरवाजा नहीं खुला, तो पड़ोसियों को शक हुआ। अनहोनी की आशंका में जब दरवाजा तोड़ा गया, तो अंदर का मंजर देखकर हर किसी की रूह कांप गई।

घर के अंदर पिता और उनकी तीन पुत्रियों के शव पाए गए। बताया जा रहा है कि पिता ने पहले अपनी बेटियों को जहर दिया या फंदे से लटकाया (पुष्टि बाकी), और फिर खुद भी अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।

क्यों उठाया इतना खौफनाक कदम?

पुलिस की शुरुआती जांच और आस-पास के लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस सामूहिक आत्महत्या की मुख्य वजह भीषण आर्थिक तंगी बताई जा रही है।

कर्ज का बोझ: सूत्रों का कहना है कि परिवार पिछले काफी समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा था। परिवार के मुखिया पर काफी कर्ज हो गया था जिसे चुकाने में वह असमर्थ थे।

रोजगार का संकट: काम-धंधा ठीक न चलने के कारण घर में खाने-पीने की भी किल्लत हो गई थी।

निराशा: शायद गरीबी और भविष्य की चिंता ने उस पिता को मानसिक रूप से इतना तोड़ दिया कि उसे अपनी और अपनी बच्चियों की मौत ही एकमात्र रास्ता नजर आया।

पुलिस की कार्रवाई और जांच

घटना की सूचना मिलते ही मुजफ्फरपुर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने चारों शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए SKMCH (श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल) भेज दिया है।

मुजफ्फरपुर

पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि:

“मामला प्रथम दृष्टया आत्महत्या का लग रहा है। मौके से कोई सुसाइड नोट मिला है या नहीं, इसकी जांच की जा रही है। हम हर पहलू की जांच कर रहे हैं, चाहे वह कर्ज का मामला हो या कोई पारिवारिक विवाद। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल पाएगा।”

समाज के लिए एक बड़ा सवाल

यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं है, बल्कि हमारे समाज के लिए एक बहुत बड़ा सवाल है। आखिर हम किस तरह के समाज में जी रहे हैं जहाँ एक पिता को गरीबी के कारण अपने पूरे परिवार को खत्म करना पड़ता है? आस-पास के लोगों को भनक तक नहीं लगी कि उनके पड़ोस में कोई परिवार घुट-घुट कर जी रहा है।

डिस्क्लेमर और हेल्पलाइन

जिंदगी अनमोल है। उतार-चढ़ाव हर किसी के जीवन में आते हैं, लेकिन आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं है। अगर आप या आपका कोई जानने वाला मानसिक तनाव या आर्थिक परेशानियों से गुजर रहा है, तो कृपया बात करें। सरकार और कई संस्थाएं मदद के लिए मौजूद हैं।

• पुलिस हेल्पलाइन: 112

• मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन हेल्पलाइन – 1800-599-0019

मुजफ्फरपुर

मुजफ्फरपुर की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि गरीबी सबसे बड़ा अभिशाप है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि मृतक आत्माओं को शांति मिले। इस मामले में पुलिस की जांच में आगे जो भी अपडेट आएगा, हम आप तक जरूर पहुंचाएंगे।

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सहरसा पुलिस का ‘ऑपरेशन मुस्कान’: 43 लोगों को वापस मिले चोरी हुए मोबाइल, खिलीं चेहरे की मुस्कान

सहरसा

मोबाइल आज सिर्फ बातचीत का जरिया नहीं, बल्कि हमारी निजी जिंदगी और यादों का तिजोरी बन चुका है। ऐसे में अगर फोन चोरी हो जाए या गुम हो जाए, तो परेशानी होना लाजमी है। लेकिन बिहार के सहरसा (Saharsa) जिले से एक राहत भरी खबर आई है। सहरसा पुलिस ने अपने विशेष अभियान ‘ऑपरेशन मुस्कान’ (Operation Muskan) के छठे चरण (Phase-6) के तहत बड़ी कामयाबी हासिल की है। सहरसा पुलिस ने करीब 6.5 लाख रुपये की कीमत के 43 मोबाइल फोन बरामद कर उन्हें उनके असली मालिकों को सौंप दिया है।

सहरसा

क्या है पूरा मामला?

रविवार (14 दिसंबर 2025) को पुलिस लाइन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में कोसी रेंज के डीआईजी (DIG) मनोज कुमार और एसपी (SP) हिमांशु ने मोबाइल मालिकों को उनके फोन वापस किए। अपने खोए हुए फोन को वापस पाकर लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं था।

पुलिस के मुताबिक:

• बरामद मोबाइल की संख्या: 43

• कुल अनुमानित कीमत: ₹6,46,388 (लगभग 6.5 लाख रुपये)

• अभियान का चरण: छठा (Phase-6)

कैसे बरामद हुए ये फोन?

सहरसा पुलिस की टेक्निकल सेल और डीआईयू (District Intelligence Unit) ने इस बरामदगी में अहम भूमिका निभाई।

• टेक्निकल सर्विलांस: पुलिस ने चोरी या गुम हुए फोनों के IMEI नंबर को सर्विलांस पर रखा था।

• लोकेशन ट्रैकिंग: जैसे ही इन फोनों में कोई नया सिम कार्ड डाला गया, पुलिस को लोकेशन मिल गई।

• त्वरित कार्रवाई: लोकेशन ट्रेस होते ही पुलिस टीम ने छापेमारी कर फोन बरामद कर लिया।

डीआईजी मनोज कुमार ने बताया कि ‘ऑपरेशन मुस्कान’ का मकसद सिर्फ अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि आम जनता का पुलिस पर भरोसा बढ़ाना भी है।

अब तक की बड़ी सफलता

सहरसा पुलिस के लिए यह कोई पहली सफलता नहीं है। ‘ऑपरेशन मुस्कान’ के तहत अब तक के आंकड़े इस प्रकार हैं:

• फेज 1 से 5 तक: 245 मोबाइल बरामद (कीमत करीब ₹35.42 लाख)

• फेज 6 (ताजा): 43 मोबाइल बरामद (कीमत करीब ₹6.46 लाख)

• कुल बरामदगी: 288 मोबाइल फोन

लाभार्थियों की जुबानी

अपना फोन वापस पाकर महिषी प्रखंड के इंजीनियर निरंजन किशोर ने कहा, “चार महीने पहले मेरा फोन चोरी हुआ था। मैंने उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन आज सहरसा पुलिस ने मुझे सरप्राइज दे दिया।”

वहीं, सिंधुनाथ झा, जिनका फोन 11 अगस्त को गुम हुआ था, ने भी पुलिस की कार्यशैली की जमकर तारीफ की।

सहरसा

अगर आपका फोन गुम हो जाए तो क्या करें?

अगर आप बिहार में रहते हैं और आपका फोन गुम हो जाता है, तो इन स्टेप्स को फॉलो करें:

• शिकायत दर्ज करें: सबसे पहले नजदीकी थाने में ‘सनहा’ (Sanha) दर्ज कराएं।

• CEIR पोर्टल: भारत सरकार के CEIR Portal पर जाकर फोन ब्लॉक करने की रिक्वेस्ट डालें।

• हेल्पलाइन: बिहार पुलिस की हेल्पलाइन 112 या साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।

• रसीद संभाल कर रखें: पुलिस को फोन मिलने पर आपको रसीद दिखानी होगी।

सहरसा पुलिस की यह पहल सराहनीय है। ‘ऑपरेशन मुस्कान’ ने साबित कर दिया है कि अगर पुलिस चाहे तो तकनीक की मदद से लोगों की खोई हुई खुशियां वापस ला सकती है। उम्मीद है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और जनता का विश्वास पुलिस पर और मजबूत होगा।

क्या आपका भी फोन कभी चोरी हुआ है और पुलिस ने मदद की? कमेंट में अपना अनुभव साझा करें!

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