Prashant Kishor Bihar Yatra 2026: 8 फरवरी से फिर सड़कों पर PK! देखें 6 दिनों का पूरा शेड्यूल और मास्टरप्लान

Prashant Kishor Bihar Yatra 2026

क्या प्रशांत किशोर का जादू खत्म हो गया है? या यह तूफान से पहले की शांति थी? जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने इन सवालों का जवाब देने के लिए कमर कस ली है। 2025 के विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद शांत बैठे PK अब “क्विक एक्शन मॉडल” के साथ वापसी कर रहे हैं।
पटना में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने साफ कर दिया है कि यह यात्रा जन सुराज के ‘पुनर्जनन’ (Revival) के लिए एक ऐतिहासिक कदम साबित होगी। मकसद साफ है—पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरना और जनता के गुस्से को एक मंच देना।

8 से 13 फरवरी: यह है PK का ‘एक्शन प्लान’ (Full Schedule)

प्रशांत किशोर की यह यात्रा चरणबद्ध (Phased) तरीके से होगी। पहले चरण में वे उत्तर बिहार को मथेंगे। अगर आप इन जिलों से हैं, तो जानिए PK आपके शहर कब आ रहे हैं:

  • 8 फरवरी (आगाज): यात्रा की शुरुआत पश्चिम चंपारण के बगहा से होगी। यहाँ वे पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ एक बड़ी संगठनात्मक बैठक करेंगे।
  • 9 फरवरी (जन संवाद): अगले दिन वे बेतिया पहुँचेंगे, जहाँ जनता से सीधा संवाद (Jan Samvad) होगा।
  • 10 फरवरी: कारवां पूर्वी चंपारण के मोतिहारी पहुँचेगा।
  • 11 फरवरी: मिथिला के दिल दरभंगा में PK की मौजूदगी रहेगी।
  • 12 फरवरी: वे मुजफ्फरपुर में कार्यकर्ताओं और आम लोगों से मिलेंगे।
  • 13 फरवरी (पहला चरण समाप्त): आखिरी दिन वे वैशाली जिले का दौरा करेंगे।
    इस शेड्यूल को देखकर साफ है कि PK ने उन इलाकों को चुना है जो राजनीतिक रूप से बिहार की दिशा तय करते हैं।

Prashant Kishor Bihar Yatra 2026

एजेंडा क्या है? (सिर्फ राजनीति या कुछ और?)

प्रशांत किशोर सिर्फ भाषण देने नहीं जा रहे हैं। इस बार उनका फोकस “फीडबैक और सुधार” पर है।

  • आत्ममंथन: PK का मानना है कि 2025 की हार अंत नहीं, बल्कि सीखने का एक मौका है। वे हर जिले में पार्टी की जमीनी कमजोरियों को परखेंगे।
  • असली मुद्दे: यात्रा का केंद्र ‘बेरोजगारी’, ‘पलायन’, ‘शिक्षा’ और ‘स्वास्थ्य’ जैसे वो मुद्दे होंगे जो बिहार को दशकों से साल रहे हैं।
  • बजट पर वार: हाल ही में पेश हुए बिहार बजट में ‘किसानों की उपेक्षा’ और ‘विकास असंतुलन’ को लेकर PK राज्य सरकार को घेरेंगे।

नीतीश और तेजस्वी के लिए खतरे की घंटी?

यह यात्रा NDA (नीतीश कुमार) और महागठबंधन (तेजस्वी यादव), दोनों के लिए चिंता का विषय बन सकती है।

  • NDA के लिए: जन सुराज पहले से ही सुशासन और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर नीतीश सरकार पर हमलावर है।
  • RJD के लिए: तेजस्वी यादव को सतर्क रहना होगा क्योंकि PK की नजर सीधे तौर पर ‘युवा वोट बैंक’ (Youth Vote Bank) पर है, जो RJD का कोर वोटर माना जाता है।

विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह यात्रा PK की छवि को महज एक ‘रणनीतिकार’ (Strategist) से बदलकर एक ‘वैकल्पिक जननेता’ के रूप में स्थापित करेगी।

Prashant Kishor

आगे क्या? (Future Roadmap)

यह तो बस शुरुआत है। अगर 8 से 13 फरवरी का यह पहला चरण सफल रहा, तो तुरंत दूसरे चरण की घोषणा कर दी जाएगी, जिसमें दक्षिण बिहार के जिलों को कवर किया जाएगा।
जन सुराज का लक्ष्य बिहार की सभी 243 विधानसभा सीटों पर अपना मजबूत आधार बनाना है। इस यात्रा में महिलाओं और किसानों से विशेष बातचीत होगी, जो बिहार की 12 करोड़ जनता की आवाज बन सकती है।

ApniVani का निष्कर्ष

प्रशांत किशोर की ‘बिहार यात्रा 2026’ उनके राजनीतिक करियर का टर्निंग पॉइंट हो सकती है।
हवा का रुख बदलेगा या नहीं, यह तो वक्त बताएगा। लेकिन एक बात तय है—बिहार की राजनीति अगले हफ्ते से फिर गरमाने वाली है। जो लोग बिहार की सियासत में दिलचस्पी रखते हैं, उनके लिए PK का यह ‘दूसरा अध्याय’ देखने लायक होगा।

आपकी राय: क्या आपको लगता है कि प्रशांत किशोर 2027 के लोकसभा चुनाव में कोई बड़ा उलटफेर कर पाएंगे? या बिहार की जनता फिर से पुराने गठबंधनों पर ही भरोसा करेगी? कमेंट में अपनी राय जरूर लिखें।

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Owaisi Hijab Statement: ‘हिजाब वाली PM’ के सपने पर गिरिराज सिंह और संतोष सुमन का पलटवार, बिहार में छिड़ा सियासी संग्राम

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AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के ‘हिजाब’ को लेकर दिए गए हालिया बयान ने बिहार की राजनीति में उबाल ला दिया है। ओवैसी ने महाराष्ट्र के सोलापुर में एक चुनावी सभा के दौरान कहा कि उनका सपना है कि एक दिन इस देश की प्रधानमंत्री ‘हिजाब’ पहनने वाली बेटी बने। इस बयान के बाद बिहार एनडीए (NDA) के दिग्गज नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है और इसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश करार दिया है।

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ओवैसी का बयान: संविधान की दुहाई और ‘हिजाब वाली PM’ का सपना

शुक्रवार, 10 जनवरी 2026 को सोलापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने भारत और पाकिस्तान के संविधान की तुलना की। उन्होंने कहा:

“पाकिस्तान का संविधान कहता है कि वहां केवल एक खास धर्म का व्यक्ति ही प्रधानमंत्री बन सकता है, लेकिन बाबा साहब अंबेडकर का संविधान हर भारतीय को यह हक देता है। मेरा सपना है कि एक दिन हिजाब पहनने वाली एक बेटी भारत की प्रधानमंत्री बने।”

ओवैसी ने यह भी कहा कि नफरत फैलाने वाली ताकतें ज्यादा दिनों तक नहीं टिकेंगी और एक दिन प्यार की जीत होगी।

गिरिराज सिंह का तीखा हमला: ‘गजवा-ए-हिंद’ की सोच नहीं होगी सफल

केंद्रीय मंत्री और बेगुसराय के सांसद गिरिराज सिंह ने शनिवार को पटना में मीडिया से बात करते हुए ओवैसी पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने ओवैसी की इस सोच को ‘जिहादी मानसिकता’ से जोड़ा।

गिरिराज सिंह के प्रमुख आरोप:

गजवा-ए-हिंद का एजेंडा: गिरिराज सिंह ने आरोप लगाया कि ओवैसी के मन में ‘गजवा-ए-हिंद’ की कल्पना चल रही है, जिसे भारत में कभी सफल नहीं होने दिया जाएगा।

दूसरा पाकिस्तान नहीं बनेगा: उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि कांग्रेस की तुष्टीकरण की नीतियों के कारण देश का बंटवारा एक बार हो चुका है, अब दोबारा कोई ‘पाकिस्तान’ भारत की धरती पर नहीं बनेगा।

जिन्ना का भूत: सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि अगर किसी के अंदर ‘जिन्ना का भूत’ घुस गया है, तो उसे निकाल दिया जाएगा। भारत केवल कानून और संविधान से चलेगा, किसी शरीयत से नहीं।

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संतोष सुमन की प्रतिक्रिया: “सपने देखने पर रोक नहीं, पर देश मोदी के साथ”

बिहार सरकार के मंत्री और ‘हम’ (HAM) नेता संतोष कुमार सुमन ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी। उन्होंने ओवैसी के बयान को अनावश्यक और ध्यान भटकाने वाला बताया।

संतोष सुमन ने कहा, “लोकतंत्र में हर किसी को सपना देखने का अधिकार है, लेकिन देश की जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताया है। ओवैसी केवल अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने के लिए इस तरह के संवेदनशील मुद्दों को हवा दे रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि बिहार और देश का विकास विकासवाद से होगा, न कि हिजाब या नकाब की राजनीति से।

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बिहार में क्यों गरमाया है यह मुद्दा?

बिहार की राजनीति में ओवैसी की पार्टी AIMIM एक महत्वपूर्ण फैक्टर बन चुकी है, खासकर सीमांचल के इलाकों (पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, अररिया) में।

वोट बैंक की राजनीति: एनडीए नेताओं को लगता है कि ओवैसी ऐसे बयान देकर मुस्लिम वोटों को लामबंद (Consolidate) करने की कोशिश कर रहे हैं।

2026 के समीकरण: आने वाले चुनावों को देखते हुए बीजेपी और उसके सहयोगी दल ओवैसी के हर बयान पर ‘प्रखर राष्ट्रवाद’ के साथ पलटवार कर रहे हैं।

आपकी राय क्या है? क्या आपको लगता है कि इस तरह के बयानों से जनता के बुनियादी मुद्दों (शिक्षा, रोजगार) से ध्यान भटकता है? अपनी राय हमें जरूर बताएं।

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