देश के आम नागरिकों और गृहणियों के बजट को प्रभावित करने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। घरेलू एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडर की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। रविवार से देश भर में रसोई गैस के नए रेट लागू भी हो चुके हैं।
इस बढ़ोतरी के बाद सोशल मीडिया से लेकर बाजारों तक सरकार के खिलाफ तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जनता के बढ़ते गुस्से को देखते हुए अब सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से एक बहुत बड़ी सफाई सामने आई है। सरकार का दावा है कि कीमतों में मामूली बढ़ोतरी के बावजूद उन्हें हर एक सिलेंडर पर ₹700 का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ‘Apni Vani’ की इस विशेष आर्थिक रिपोर्ट में आइए जानते हैं कि आपके शहर में अब नया रेट क्या है और सरकार के इस बड़े दावे के पीछे का असली गणित क्या है।
रविवार से लागू हुए नए रेट: अब कितने में मिलेगा सिलेंडर?
तेल कंपनियों द्वारा जारी किए गए ताजा अपडेट के मुताबिक, 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में ₹29 की बढ़ोतरी की गई है।
इस ताजा बढ़ोतरी के बाद अब घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत ₹913 से बढ़कर ₹942 हो गई है। आपको बता दें कि यह नई दरें रविवार सुबह से ही पूरे देश में प्रभावी कर दी गई हैं। जहां एक तरफ कमर्शियल सिलेंडरों के दाम अक्सर बदलते रहते हैं, वहीं घरेलू सिलेंडर के दाम बढ़ने से सीधे आम आदमी की जेब पर असर पड़ा है।
सरकार की बड़ी सफाई: ‘हर सिलेंडर पर हो रहा ₹700 का घाटा’
गैस के दाम बढ़ते ही जब चौतरफा आलोचना शुरू हुई, तो सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रालय ने इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की उत्पादन लागत इस समय आसमान छू रही है। अगर वास्तविक लागत के हिसाब से बिना किसी सब्सिडी के सिलेंडर बेचा जाए, तो इसकी कीमत ₹1600 के पार होनी चाहिए। लेकिन सरकार आम जनता को राहत देने के लिए अपनी जेब से पैसा भर रही है, जिसके कारण आज भी सरकार को प्रति सिलेंडर लगभग ₹700 का घाटा (Under-recovery) सहना पड़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतें हैं असली विलेन
मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, भारत अपनी जरूरत का अधिकांश एलपीजी विदेशों से आयात (Import) करता है। पिछले कुछ महीनों में वैश्विक तनाव और खाड़ी देशों में चल रही उथल-पुथल के कारण सऊदी अरामको (Saudi Aramco) के गैस कॉन्ट्रैक्ट प्राइस में भारी उछाल आया है। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की स्थिति और ऊंचे अंतरराष्ट्रीय दामों की वजह से तेल कंपनियों पर बोझ लगातार बढ़ रहा था। सरकार ने साफ किया कि इस ₹29 की मामूली बढ़ोतरी के जरिए सिर्फ उस भारी बोझ को थोड़ा संतुलित करने का प्रयास किया गया है, न कि मुनाफा कमाने का।

क्या आम जनता को मिलती रहेगी एलपीजी सब्सिडी?
इस मूल्य वृद्धि के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या सरकार आने वाले दिनों में सब्सिडी पूरी तरह खत्म करने वाली है?
इस पर सरकार ने आश्वस्त किया है कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को मिलने वाली सब्सिडी का लाभ पहले की तरह ही जारी रहेगा। उनके खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सब्सिडी की राशि सीधे भेजी जाती रहेगी। सरकार का लक्ष्य है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कितनी भी मंदी या तेजी आए, गरीब परिवारों के घरों में एलपीजी का कनेक्शन चालू रहना चाहिए।
Apni Vani की बात
अगर एक निष्पक्ष नजरिए से देखा जाए, तो अंतरराष्ट्रीय बाजारों के दबाव के कारण तेल कंपनियों और सरकार के सामने कीमतें बढ़ाना एक मजबूरी बन गया था। हालांकि, मिडिल क्लास और आम नौकरीपेशा परिवार के लिए ₹29 की यह बढ़ोतरी भी इस महंगाई के दौर में एक अतिरिक्त आर्थिक मानसिक तनाव की तरह है। सरकार को चाहिए कि वह टैक्स स्ट्रक्चर में थोड़ा बदलाव करके आम जनता को कुछ और सीधी राहत देने का प्रयास करे।
आपकी इस पर क्या राय है?
क्या अंतरराष्ट्रीय कीमतों का हवाला देकर घरेलू गैस के दाम बढ़ाना सही है? क्या सरकार को टैक्स कम करके जनता को राहत देनी चाहिए? अपनी बेबाक राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें और इस खबर को शेयर करें!