ट्रंप का ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर विस्फोटक दावा: “अगर मैं न होता तो भारत-पाक युद्ध में मारे जाते 3.5 करोड़ लोग”

ऑपरेशन सिंदूर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने बयानों से अक्सर वैश्विक राजनीति में हलचल मचा देते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर जो दावा किया है, उसने भारतीय गलियारों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक एक नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने अपने ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ संबोधन में सीधे तौर पर कहा कि 2025 में जब भारत और पाकिस्तान परमाणु युद्ध की कगार पर थे, तब उनके एक हस्तक्षेप ने पूरी दुनिया को एक बड़ी त्रासदी से बचा लिया।

क्या था ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और क्यों भड़का था तनाव?

ऑपरेशन सिंदूर
Trump and Shehbaz Sharif

मई 2025 का वह दौर आज भी लोगों के जेहन में ताजा है, जब पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले में 26 मासूमों की जान चली गई थी। इसके जवाब में भारत ने अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का आगाज किया। भारतीय वायुसेना के जांबाज लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने सीमा पार PoK में स्थित 9 प्रमुख आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया था। इस सटीक स्ट्राइक से पाकिस्तान बौखला गया था और दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति बन गई थी। भारत का हमेशा से यह स्टैंड रहा है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से आतंक के खिलाफ थी और युद्धविराम दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों (DGMO) के बीच सीधी बातचीत का परिणाम था।

ट्रंप का दावा: “शहबाज शरीफ ने मुझे शुक्रिया कहा”

ट्रंप ने हालिया संबोधन में दावा किया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उनसे व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया था। ट्रंप के शब्दों में, “शरीफ ने मुझसे कहा कि अगर अमेरिका दखल नहीं देता, तो इस युद्ध में कम से कम 35 मिलियन (3.5 करोड़) लोग अपनी जान गंवा देते।” ट्रंप ने जोर देकर कहा कि उन्होंने व्यापारिक प्रतिबंधों और कूटनीतिक दबाव के जरिए भारत और पाकिस्तान को पीछे हटने पर मजबूर किया। उन्होंने इसे अपने दूसरे कार्यकाल की सबसे बड़ी विदेश नीति की जीत करार दिया। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘अतिशयोक्ति’ बताया है।

भारत की प्रतिक्रिया और विपक्ष का तीखा हमला

भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं पड़ी थी। सरकार के अनुसार, 10 मई 2025 को पाकिस्तान ने खुद ही युद्धविराम की गुजारिश की थी। दूसरी ओर, भारत में विपक्षी दलों ने ट्रंप के इस बयान को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कटाक्ष करते हुए कहा कि ट्रंप अपनी बातों की ‘सेंचुरी’ पूरी करने की ओर हैं। विपक्ष का तर्क है कि अगर ट्रंप बार-बार ऐसे दावे कर रहे हैं, तो भारत सरकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका कड़ा और स्पष्ट खंडन करना चाहिए ताकि भारत की सैन्य उपलब्धियों का श्रेय कोई और न ले सके।

क्या वाकई परमाणु युद्ध का था खतरा?

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का 3.5 करोड़ मौतों का आंकड़ा महज एक राजनीतिक पैंतरेबाजी हो सकता है। यद्यपि 2025 में तनाव चरम पर था, लेकिन दोनों देशों के बीच परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की कोई आधिकारिक पुष्टि या खुफिया जानकारी सामने नहीं आई थी। ट्रंप इससे पहले भी फिनलैंड के राष्ट्रपति और संयुक्त राष्ट्र में इस तरह के दावे कर चुके हैं, लेकिन उनके पास इन दावों को पुख्ता करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है। जानकारों का कहना है कि ट्रंप अपनी छवि को एक ‘शांतिदूत’ (Peacemaker) के रूप में पेश करने के लिए इतिहास के तथ्यों को अपने हिसाब से तोड़-मरोड़ रहे हैं।

ऑपरेशन सिंदूर
Trump , Shehbaz Sharif And Modi

कूटनीतिक रिश्तों पर क्या पड़ेगा असर?

भारत और अमेरिका के संबंध वर्तमान में काफी मजबूत हैं, लेकिन ट्रंप के इस तरह के ‘एकतरफा’ दावे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) पर सवाल खड़े करते हैं। पाकिस्तान ने अभी तक इस पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है, जो ट्रंप के दावों को और भी संदिग्ध बनाता है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान मुख्य रूप से अमेरिकी घरेलू राजनीति को साधने के लिए है, ताकि वे खुद को रूस-यूक्रेन से लेकर दक्षिण एशिया तक शांति स्थापित करने वाला इकलौता नेता साबित कर सकें।

Read more