अप्रैल का महीना आते ही रबी की फसल की कटाई और मड़ाई का काम अपने चरम पर होता है। साल भर की खून-पसीने की मेहनत के बाद जब किसान अपनी ‘सोने जैसी’ गेहूं की फसल लेकर सरकारी क्रय केंद्रों (Procurement Centers) पर पहुंचता है, तो उसे सबसे ज्यादा डर सर्वर डाउन होने या कागजी कार्रवाई का लगता है।
हाल ही में उत्तर प्रदेश में किसानों को ‘फार्मर रजिस्ट्री’ (Farmer Registry) को लेकर भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। किसानों के इसी दर्द को समझते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक आदेश जारी किया है। ‘ApniVani’ की इस विशेष किसान रिपोर्ट में आइए विस्तार से समझते हैं कि यह नया आदेश क्या है और इससे आम किसानों को क्रय केंद्रों पर क्या फायदा मिलने वाला है।
सीएम योगी का मास्टरस्ट्रोक: खत्म हुई ‘रजिस्ट्री’ की बाध्यता
सरकारी क्रय केंद्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं बेचने के लिए अब तक किसानों का ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकृत (Registered) होना अनिवार्य था।
लेकिन नए और ताज़ा आदेश के मुताबिक, सीएम योगी ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर किसी किसान का ‘फार्मर रजिस्ट्री’ पर रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया है, तो भी उसे बैरंग वापस नहीं लौटाया जाएगा। किसान अब सीधे अपना गेहूं लेकर क्रय केंद्र पर जा सकते हैं और वहां मौजूद अधिकारी बिना किसी देरी के उनका गेहूं तौलेंगे।
आखिर क्यों लेना पड़ा यह बड़ा फैसला? (ग्राउंड रियलिटी)
गेहूं की फसल पककर तैयार है और मंडियों में आवक (Arrival) बहुत तेज़ हो गई है।
पिछले कई दिनों से प्रदेश के अलग-अलग जिलों से शिकायतें आ रही थीं कि ऑनलाइन पोर्टल का सर्वर धीमा चल रहा है। जनसेवा केंद्रों (CSC) पर रजिस्ट्रेशन कराने के लिए किसानों की लंबी-लंबी लाइनें लग रही थीं। मौसम विभाग ने भी आने वाले दिनों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया हुआ है। ऐसे में किसानों की फसल खुले में भीग कर खराब न हो जाए, इसे देखते हुए सरकार ने कागजी कार्यवाही को किनारे रखकर सीधे खरीद पर फोकस करने का ‘ऑन द स्पॉट’ आदेश दिया है।
अब कैसे होगी तौल और पहचा न? (नया प्रोसेस)
अगर रजिस्ट्री नहीं है, तो पहचान कैसे होगी? इसके लिए सरकार ने क्रय केंद्र प्रभारियों को नया रास्ता बताया है।
अब किसान अपने साथ सिर्फ अपना आधार कार्ड (Aadhaar Card), बैंक पासबुक की फोटोकॉपी और ज़मीन की खतौनी (Khatauni) लेकर केंद्र पर जा सकते हैं। केंद्र प्रभारी इन दस्तावेजों की मैनुअल जांच करेंगे और ऑन-द-स्पॉट (उसी समय) उनका डेटा दर्ज करके तौल पर्ची काट देंगे। किसी भी अधिकारी को यह अधिकार नहीं होगा कि वह ‘सर्वर नहीं चल रहा’ का बहाना बनाकर किसान को वापस भेजे।

48 से 72 घंटे में सीधे खाते में आएगा पैसा (DBT Update)
गेहूं बेचने के बाद सबसे बड़ी चिंता पैसे की होती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि खरीद प्रक्रिया आसान होने के बावजूद भुगतान (Payment) के नियमों में कोई ढिलाई नहीं होगी।
बिचौलियों और आढ़तियों को दूर रखने के लिए तौल होने के 48 से 72 घंटों के भीतर किसान के उसी बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के ज़रिए MSP का पूरा पैसा भेज दिया जाएगा। जिन किसानों का बैंक खाता आधार से लिंक (Aadhaar Seeded) है, उन्हें पेमेंट में कोई भी रुकावट नहीं आएगी।
ApniVani की अपील
किसानों के हक में लिया गया उत्तर प्रदेश सरकार का यह फैसला सच में काबिले तारीफ है। इससे न सिर्फ बिचौलियों की लूट पर लगाम लगेगी, बल्कि किसान को उसकी मेहनत का पूरा दाम भी समय पर मिलेगा। ‘ApniVani’ सभी किसानों से अपील करता है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और अपना गेहूं सरकारी क्रय केंद्रों पर ही बेचें।
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