Ghaziabad Suicide Case: क्या आपके बच्चों को भी है गेम की लत? 3 बहनों की मौत ने खोली आंखें (सावधान)

Ghaziabad Suicide Case Mobile Addiction

क्या आपके बच्चे भी घंटों अपने कमरे में बंद रहते हैं? क्या उनके हाथ में भी उनका ‘पर्सनल मोबाइल’ है? अगर हाँ, तो गाजियाबाद (Ghaziabad) से आई यह खबर आपके पैरों तले जमीन खिसका देगी।

आज सुबह भारत सिटी सोसाइटी में जो हुआ, वो सिर्फ एक हादसा नहीं है। एक ही घर की तीन सगी बहनों (उम्र 12, 14 और 16 साल) ने 9वीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी। पुलिस जांच में जो वजह सामने आई है, वो हत्या या डिप्रेशन नहीं, बल्कि एक ‘ऑनलाइन गेम’ और ‘मोबाइल की दुनिया’ है। आज हम इस घटना की तह तक जाएंगे और जानेंगे कि कैसे एक गेम ने तीन हंसती-खेलती जिंदगियां निगल लीं और आपके बच्चे इस खतरे से कितने दूर हैं?

9वीं मंजिल और वो खौफनाक सुबह

घटना विजयनगर इलाके की है। एक मध्यम वर्गीय परिवार, सब कुछ सामान्य था। लेकिन आज सुबह तीनों बहनों ने बालकनी से छलांग लगा दी।

  • सुसाइड नोट: पुलिस को मौके से एक नोट मिला है, जिस पर लिखा था— “Sorry Mummy Papa, हम अच्छे बच्चे नहीं बन पाए।”
  • जांच में खुलासा: पुलिस का कहना है कि ये बच्चियां पिछले 2-3 सालों से (COVID के समय से) मोबाइल पर बहुत ज्यादा समय बिता रही थीं। उन्हें एक “कोरियन टास्क-बेस्ड गेम” (Korean Game) की लत लग चुकी थी।

यह गेम उन्हें ‘वर्चुअल दुनिया’ में ले गया जहाँ ‘वर्चुअल लवर्स’ (Virtual Lovers) और अजीबोगरीब टास्क होते थे। धीरे-धीरे उन्हें असली दुनिया और अपने माता-पिता ‘बोरिंग’ लगने लगे।

Ghaziabad Case Suicide Note by the 3 children
apnivani

मनोरंजन या धीमा जहर? (Entertainment vs Trap)

यहाँ सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मोबाइल बच्चों के बेडरूम तक पहुंचा कैसे? लॉकडाउन में पढ़ाई के लिए दिए गए मोबाइल अब ‘खिलौने’ बन चुके हैं।

  • असली समस्या: मनोरंजन के लिए 1 या 2 घंटे गेम खेलना बुरा नहीं है। लेकिन जब आपका बच्चा खाना, सोना और परिवार छोड़कर सिर्फ स्क्रीन में खोया रहे, तो यह एडिक्शन (Addiction) है।
  • दिमाग हाईजैक: कम उम्र में बच्चों के दिमाग में ‘Maturity’ (परिपक्वता) नहीं होती। उन्हें लगता है कि गेम की दुनिया ही सच है। जब गेम का कोई टास्क पूरा नहीं होता या वर्चुअल दोस्त कुछ कहता है, तो वो जान देने जैसे कदम उठा लेते हैं।

क्या 10वीं से पहले ‘पर्सनल फोन’ देना जरूरी है?

इस हादसे ने एक कड़वी सच्चाई हमारे सामने रखी है। आजकल माता-पिता 6ठी या 7वीं क्लास के बच्चे को भी पर्सनल स्मार्टफोन दिला देते हैं। हमसे पूछिए, तो यह सबसे बड़ी गलती है। जब बच्चे के पास अपना पर्सनल फोन और पासवर्ड होता है, तो माता-पिता की निगरानी (Supervision) खत्म हो जाती है।

बंद कमरे में वो किससे चैट कर रहा है, कौन सा हिंसक गेम खेल रहा है, आपको भनक तक नहीं लगती। नियम बनाएं और कक्षा 10वीं तक बच्चे को पर्सनल फोन न दें। अगर जरूरत हो, तो अपना फोन दें और वो भी हॉल या कॉमन रूम में इस्तेमाल करने की शर्त पर।

Mobile Addiction children
credit – Times of India

माता-पिता सावधान! (Warning Signs)

गाजियाबाद वाला हादसा किसी के भी घर में हो सकता है, अगर हम समय रहते न चेते। अपने बच्चों में ये बदलाव आज ही चेक करें:

  • व्यवहार में बदलाव: अगर बच्चा अचानक चुप रहने लगे या छोटी बात पर आक्रामक (Aggressive) हो जाए।
  • स्क्रीन छिपाना: आपके कमरे में आते ही फोन बंद कर देना या स्क्रीन पलटा देना।
  • नींद की कमी: आँखों के नीचे काले घेरे और रात भर ऑनलाइन रहना।
  • दोस्तों से दूरी: असली दोस्तों से मिलना छोड़कर ऑनलाइन दोस्तों में ज्यादा रुचि लेना।

ApniVani क्या कहती है (Our Verdict)

गाजियाबाद की उन तीन बहनों को हम वापस नहीं ला सकते, लेकिन उनकी मौत हमें एक मौका दे रही है—सुधरने का। टेक्नोलॉजी को अपने बच्चे का ‘मालिक’ न बनने दें। उनकी नाराजगी सह लें, लेकिन उनके हाथ में वो ‘मौत का सामान’ (अनियंत्रित मोबाइल) न दें। आज ही अपने बच्चे से बात करें, उसका फोन चेक करें और उसे वर्चुअल दुनिया से बाहर निकालें।

आपकी राय: क्या सरकार को 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए गेमिंग पर सख्त कानून बनाना चाहिए? कमेंट में अपनी राय जरूर लिखें।

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Bihar Bird Flu Alert: चिकन खाने के शौकीन सावधान! अभी थाली से दूर रखें नॉन-वेज, जानें 5 खतरनाक लक्षण (Naugachia रिपोर्ट)

Bird Bird Flu Alert

अगर आप संडे को चिकन-मटन पार्टी करने की सोच रहे हैं, तो जरा रुकिए! बिहार में एक बार फिर बर्ड फ्लू (Bird Flu/Avian Influenza) का खतरा मंडराने लगा है। उत्तरी बिहार (North Bihar) के कई जिलों में पक्षियों की संदिग्ध मौत ने प्रशासन और आम जनता की नींद उड़ा दी है। ताजा मामला नौगछिया (Naugachia) इलाके का है, जहाँ बड़ी संख्या में कौवे (Crows) मृत पाए गए हैं। कौवों का इस तरह अचानक मरना किसी बड़े खतरे की घंटी से कम नहीं है।

आज की इस रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि क्या अभी चिकन और अंडा खाना सुरक्षित है? और अगर आप नॉन-वेज के शौकीन हैं, तो आपको किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

नौगछिया में हड़कंप: कौवों की मौत का रहस्य

बर्ड फ्लू की शुरुआत अक्सर जंगली पक्षियों, खास तौर पर कौवों से होती है। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, नौगछिया और आसपास के इलाकों में कई जगहों पर कौवे मृत अवस्था में मिले हैं।

  • खतरे की घंटी: जब भी किसी इलाके में कौवे मरते हैं, तो यह माना जाता है कि H5N1 वायरस हवा में फैल चुका है।
  • प्रशासन अलर्ट: पशुपालन विभाग ने सैंपल जांच के लिए भेज दिए हैं, लेकिन एहतियात के तौर पर लोगों को मृत पक्षियों से दूर रहने की सलाह दी गई है। यह वायरस बहुत तेजी से एक पक्षी से दूसरे पक्षी और फिर इंसानों में फैल सकता है।
Bird Flu in chicken
Credit-Vox

नॉन-वेज खाने वाले ध्यान दें: क्या चिकन खाना चाहिए?

यह इस वक्त का सबसे बड़ा सवाल है। क्या कड़ाही में पकने के बाद भी वायरस जिंदा रहता है? WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के अनुसार, 70 डिग्री सेल्सियस पर पकाने से वायरस मर जाता है। लेकिन खतरा खाने में नहीं, उसे घर लाने और बनाने में है। कच्चा मांस (Raw Meat) है असली दुश्मन: जब आप बाजार से कच्चा चिकन खरीदते हैं, उसे धोते हैं या काटते हैं, तो उस वक्त संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा होता है। संक्रमण का डर: कच्चे मांस के छींटे, खून या पंख के जरिए वायरस आपकी सांसों में जा सकता है।

हमारी सलाह: जब तक स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो जाती और सरकारी रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक चिकन और अंडों से दूरी बनाना ही समझदारी है। जान है तो जहान है, स्वाद के लिए अपनी सेहत से खिलवाड़ न करें।

H5N1 virus or Bird Flu Virus
Scientific American

इंसानों में कैसे फैलता है यह वायरस?

बर्ड फ्लू सिर्फ पक्षियों की बीमारी नहीं है। अगर कोई इंसान किसी संक्रमित पक्षी (मुर्गी, बत्तख या कौवा) के संपर्क में आता है, तो वह भी बीमार पड़ सकता है।

यह वायरस (H5N1) इतना खतरनाक है कि यह सीधे फेफड़ों पर हमला करता है। जो लोग पोल्ट्री फार्म में काम करते हैं या जो घर पर खुद चिकन साफ करते हैं, वे ‘हाई रिस्क’ जोन में हैं।

बर्ड फ्लू के लक्षण (Symptoms in Humans)

अगर आपने हाल ही में चिकन खाया है या पक्षियों के संपर्क में आए हैं और आपको नीचे दिए गए लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो इसे सामान्य फ्लू समझकर नजरअंदाज न करें:

  • तेज बुखार: अचानक शरीर का तापमान बढ़ना।
  • सांस लेने में तकलीफ: छाती में जकड़न और सांस फूलना।
  • मांसपेशियों में दर्द: पूरे शरीर में अकड़न महसूस होना।
  • गले में खराश और खांसी: लगातार सूखी खांसी आना।
  • आंखों में जलन (Conjunctivitis): कभी-कभी आंखों का लाल होना भी इसका लक्षण है।

अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

Bird Flu symptoms
apnivani

बचाव के उपाय: खुद को और परिवार को कैसे बचाएं?

डरने की जरूरत नहीं है, बस थोड़ी सावधानी आपको सुरक्षित रख सकती है:

  • मृत पक्षियों से दूर रहें: अगर आपके छत या आसपास कोई पक्षी मरा हुआ मिले, तो उसे नंगे हाथों से बिल्कुल न छुएं। तुरंत नगर निगम या स्वास्थ्य विभाग को सूचित करें।
  • हाथ धोते रहें: बाहर से आने के बाद और खाना खाने से पहले साबुन से हाथ अच्छी तरह धोएं।
  • मास्क का प्रयोग करें: अगर आप ऐसे इलाके में जा रहे हैं जहां पक्षियों की तादाद ज्यादा है (जैसे पोल्ट्री मार्केट), तो मास्क जरूर पहनें।
  • अधपका भोजन न करें: अगर आप अंडे या चिकन खा भी रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि वह पूरी तरह से उबला हुआ (Boiled) या पका हुआ हो। ‘हाफ-फ्राय’ या ‘कच्चा अंडा’ खाने से बचें।

ApniVani की बातें (Conclusion)

बिहार में बर्ड फ्लू की आहट ने चिंता बढ़ा दी है। नौगछिया की घटना को हल्के में नहीं लिया जा सकता। एक जागरूक नागरिक होने के नाते, यह हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम अफवाहों से बचें लेकिन सावधानी पूरी बरतें। कुछ दिनों के लिए नॉन-वेज का त्याग आपके और आपके परिवार की सुरक्षा के लिए एक बेहतर कदम हो सकता है।

आपकी राय: क्या आपको लगता है कि एहतियात के तौर पर चिकन की बिक्री पर कुछ दिन रोक लगनी चाहिए? कमेंट में अपनी राय जरूर लिखें।

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Baramulla earthquake 2026: जम्मू-कश्मीर में 4.6 तीव्रता के झटकों ने बढ़ाई दहशत

Baramulla

जम्मू-कश्मीर के Baramulla जिले में 2 फरवरी 2026 को सुबह तड़के आए 4.6 तीव्रता के भूकंप ने कश्मीर घाटी को हिला दिया। रिक्टर स्केल पर मापी गई इस तीव्रता ने लोगों को कड़ाके की सर्दी में घरों से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया, हालांकि कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, यह भूकंप Baramulla के पट्टन क्षेत्र में केंद्रित था, जिसकी गहराई लगभग 10 किलोमीटर रही। बारामूला भूकंप की यह घटना क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता को फिर से उजागर करती है।

Baramulla earthquake
जम्मू-कश्मीर में 4.6 तीव्रता के झटकों

भूकंप का समय और तीव्रता: विस्तृत जानकारी

बारामूला भूकंप सुबह ठीक 5:35 बजे IST पर आया, जब अधिकांश लोग गहरी नींद में थे। NCS की प्रारंभिक रिपोर्ट में तीव्रता 4.6 बताई गई, जबकि कुछ स्रोतों ने इसे 4.7 तक मापा। 4.6 तीव्रता वाले भूकंप में आमतौर पर हल्के से मध्यम झटके महसूस होते हैं, जो इमारतों को हिला सकते हैं लेकिन सामान्यतः नुकसान नहीं पहुंचाते। इस बारामूला भूकंप 2026 में झटके 10-15 सेकंड तक रहे, जिससे श्रीनगर तक कंपन महसूस हुआ। जम्मू कश्मीर भूकंप की यह घटना पिछले कुछ महीनों में क्षेत्र में आए कई हल्के झटकों की कड़ी का हिस्सा लगती है।

झटके महसूस हुए इन इलाकों में

बारामूला भूकंप के झटके मुख्य रूप से कश्मीर घाटी के उत्तरी और मध्य हिस्सों में महसूस किए गए। बारामूला जिले के पट्टन, सोपोर और उरी जैसे क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहे, जहां लोग चीखते-चिल्लाते घरों से बाहर भागे। श्रीनगर, पुलवामा, गांदरबल, कुपवाड़ा और हंदवाड़ा में भी हल्के झटके दर्ज हुए। कुछ रिपोर्ट्स में पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों तक कंपन पहुंचने का जिक्र है। जम्मू कश्मीर भूकंप 4.6 ने सर्द मौसम में पहले से तनावग्रस्त क्षेत्र को और सतर्क कर दिया। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) ने सभी जिलों से रिपोर्ट मांगी, लेकिन नुकसान न होने की पुष्टि हुई।

कोई हताहत या नुकसान नहीं: राहत की खबर

सौभाग्य से, बारामूला में 4.6 तीव्रता के भूकंप से कोई हताहत या संपत्ति को नुकसान नहीं हुआ। SDMA और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत अलर्ट जारी कर स्थिति का जायजा लिया। लोग घबराकर मस्जिदों और खुली जगहों पर इकट्ठा हो गए, लेकिन क्षतिग्रस्त इमारत या सड़क का कोई समाचार नहीं। यह जम्मू कश्मीर भूकंप 2026 की तीव्रता को देखते हुए सकारात्मक है। भूकंपरोधी इमारतों और जनजागरूकता ने बड़ी तबाही टलवाई।

जम्मू-कश्मीर की भूकंपीय स्थिति: क्यों संवेदनशील?

जम्मू-कश्मीर हिमालयन बेल्ट पर स्थित है, जो दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में शुमार है। बारामूला भूकंप 2026 इसकी पुष्टि करता है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर से लगातार झटके आते रहते हैं। पिछले साल क्षेत्र में कई 4+ तीव्रता वाले भूकंप दर्ज हो चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कश्मीर घाटी जोन-IV और V में आती है, जहां भूकंपरोधी निर्माण अनिवार्य है। बारामूला भूकंप ने फिर याद दिलाया कि तैयारी ही सुरक्षा है।

Baramulla earthquake
जम्मू-कश्मीर में 4.6 तीव्रता के झटकों

भविष्य के लिए सलाह: सुरक्षित रहें

बारामूला भूकंप के बाद प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। नागरिकों को ड्रॉप, कवर एंड होल्ड ऑन का पालन करना चाहिए। भूकंप ऐप्स डाउनलोड करें और इमरजेंसी किट तैयार रखें। जम्मू कश्मीर भूकंप 4.6 जैसी घटनाएं सामान्य हैं, लेकिन सतर्कता से नुकसान रोका जा सकता है। NCS लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है।

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Budget 2026 Market Crash: बजट आते ही क्यों धड़ाम हुआ शेयर बाजार और सोना-चांदी? गिरावट के 3 असली कारण जो हर निवेशक को जानने चाहिए

Budget 2026 Market Crash

1 फरवरी को जैसे ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 पेश किया, उम्मीद थी कि बाजार झूमेगा। लेकिन हुआ इसका ठीक उल्टा। सेंसेक्स और निफ्टी ने गोता लगा दिया और सोने-चांदी के भाव ऐसे गिरे जैसे किसी ने आसमान से पत्थर फेंक दिया हो। आम आदमी और छोटे निवेशक (Retail Investors) डरे हुए हैं। हर किसी के मन में बस एक ही सवाल है— “आखिर बजट तो आ गया, फिर ये भारी गिरावट क्यों?”

क्या यह डरने का वक्त है या खरीदारी का? आज हम इस गिरावट का गहरा विश्लेषण (Deep Analysis) करेंगे और आपको बताएंगे वो 3 बड़े कारण जो इस ‘खून-खराबे’ (Blood Bath) के जिम्मेदार हैं।

सोना-चांदी क्यों गिरा? (यह ‘बुरी’ नहीं, ‘अच्छी’ खबर है)

सबसे पहले बात करते हैं गोल्ड और सिल्वर की, जिनके दाम में भारी गिरावट आई है। लोग सोच रहे हैं कि सोने की वैल्यू कम हो गई, लेकिन सच कुछ और है। कस्टम ड्यूटी में कटौती (Customs Duty Cut): बजट 2026 में सरकार ने सोने और चांदी पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी (Import Tax) को घटा दिया है। जब टैक्स कम होता है, तो चीज़ें सस्ती होती हैं। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर सोना विदेश से खरीदता है। जैसे ही टैक्स कम हुआ, सोने की कीमत अपने आप 4,000 से 5,000 रुपये तक गिर गई।

सरल भाषा में यह गिरावट इसलिए नहीं है कि लोग सोना बेच रहे हैं, बल्कि इसलिए है क्योंकि सरकार ने इसे सस्ता कर दिया है। जिनके पास पहले से सोना था, उन्हें वैल्यू कम लग रही है, लेकिन जो अब खरीदना चाहते हैं, उनके लिए यह लॉटरी है।

Nirmala Sitharaman

शेयर बाजार क्यों क्रैश हुआ? (The Stock Market Crash)

शेयर बाजार का गिरना थोड़ा चिंताजनक है। इसके पीछे बजट से जुड़ी दो बड़ी निराशाएं हैं।

पहला कारण: कैपिटल गेन्स टैक्स का डर (Capital Gains Tax Hike)

शेयर बाजार के निवेशकों को सबसे ज्यादा डर ‘टैक्स’ से लगता है। इस बजट में सरकार ने शेयर बाजार से होने वाली कमाई पर टैक्स (STCG और LTCG) को थोड़ा बढ़ा दिया है। बाजार को यह बिल्कुल पसंद नहीं आया। निवेशकों को लगा कि अब उनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा सरकार ले जाएगी। इसी गुस्से और डर में बड़े निवेशकों (FIIs) ने अपने शेयर बेचने शुरू कर दिए, जिससे बाजार धड़ाम से नीचे आ गया।

दूसरा कारण: मिडिल क्लास की ‘जेब’ खाली रह गई

शेयर बाजार चलता है कंपनियों के मुनाफे से। और कंपनियां मुनाफा तब कमाती हैं जब मिडिल क्लास सामान खरीदता है। बाजार को उम्मीद थी कि सरकार मिडिल क्लास को टैक्स में बड़ी छूट देगी, जिससे लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा आएगा और वो खरीदारी करेंगे। लेकिन बजट में टैक्स स्लैब में कोई खास बदलाव नहीं हुआ। इससे यह संदेश गया कि अगले एक साल तक डिमांड (Demand) कम रह सकती है। इसलिए FMCG और ऑटो सेक्टर के शेयर टूट गए।

Narendra Modi and market crash
apnivani

‘ओवरवैल्यूएशन’ का गुब्बारा फूटना था

बजट तो बस एक बहाना था, सच्चाई यह है कि भारतीय बाजार पहले से ही बहुत महंगा(Overvalued) हो चुका था।

  • गुब्बारा: पिछले 6 महीनों से मार्केट लगातार ऊपर जा रहा था, बिना किसी ठोस कारण के। हर शेयर अपनी असली कीमत से दोगुने-तिगुने दाम पर बिक रहा था।
  • सुई: बजट ने बस उस गुब्बारे में सुई चुभाने का काम किया। बड़े निवेशक (Big Bulls) बस एक मौके की तलाश में थे कि कब प्रॉफिट बुक करें और निकल जाएं। बजट की थोड़ी सी निराशा ने उन्हें यह मौका दे दिया।

अब आपको क्या करना चाहिए? (ApniVani की सलाह)

बाजार में जब भी खून-खराबा होता है, समझदार निवेशक घबराते नहीं हैं।

  • सोना-चांदी: अगर आप शादी-ब्याह के लिए जेवर बनवाना चाहते थे, तो यह खरीदारी का बेस्ट टाइम है। ड्यूटी कम होने का फायदा उठाएं।
  • शेयर बाजार: अगर आप लम्बे समय (Long Term) के खिलाडी हैं, तो अपनी SIP बंद न करें। जब बाजार गिरता है, तो आपको कम दाम में ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं।
  • पैनिक सेलिंग: डरकर अपना पोर्टफोलियो खाली न करें। बजट का असर 1-2 हफ्ते में खत्म हो जाएगा और बाजार फिर अपनी चाल पकड़ लेगा।

क्या ये हमेशा के लिए है ?

यह गिरावट स्थायी (Permanent) नहीं है। यह बस एक ‘करेक्शन’ है जो बाजार की सेहत के लिए जरूरी था।

आपकी राय: क्या आपने इस गिरावट में खरीदारी की या डर के मारे अपने शेयर बेच दिए? कमेंट करके हमें जरूर बताएं!

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ड्राइवरों को मिली बड़ी राहत: टोल प्लाजा पर अब कोई झंझट नहीं ,1 फरवरी 2026 से FASTag KYV प्रक्रिया समाप्त

टोल प्लाजा

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने देश के करोड़ों वाहन चालकों के लिए नए साल का सबसे बड़ा तोहफा पेश किया है। 1 फरवरी 2026 से नए FASTag जारी करने की पूरी प्रक्रिया में एक क्रांतिकारी बदलाव किया गया है, जिसके तहत ‘Know Your Vehicle’ (KYV) वेरिफिकेशन को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। पहले यह अनिवार्य प्रक्रिया टोल प्लाजा पर लंबी कतारों, भारी कागजी कार्रवाई और यात्रियों के लिए अनावश्यक मानसिक परेशानी का प्रमुख कारण बनती थी।

अब नई कार, जीप या वैन खरीदने वालों को FASTag एक्टिवेट करने के बाद किसी भी अतिरिक्त भौतिक या डिजिटल सत्यापन के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यह फैसला NHAI को मिली उन हजारों शिकायतों के बाद लिया गया है, जिनमें ड्राइवरों ने वैध दस्तावेज होने के बावजूद पोस्ट-एक्टिवेशन जांच के नाम पर होने वाली देरी पर नाराजगी जताई थी।

टोल प्लाजा
FASTag KYV प्रक्रिया समाप्त

KYV प्रक्रिया क्या थी और इसे क्यों हटाया गया?

KYV या ‘अपने वाहन को जानें’ प्रक्रिया वास्तव में FASTag जारी होने के बाद वाहन के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC), बीमा और पेंडिंग चालान के विवरण को मैन्युअल या डिजिटल तरीके से दोबारा जांचने का एक सिस्टम था। इसका मुख्य उद्देश्य टैग के दुरुपयोग को रोकना था, लेकिन धरातल पर यह सिस्टम टोल गेट्स पर अक्सर 10 से 15 मिनट की अतिरिक्त देरी का कारण बन रहा था। NHAI ने अब सरकार के ‘VAHAN’ पोर्टल की बढ़ती क्षमता और डेटा की सटीकता पर भरोसा जताते हुए इसे हटाने का निर्णय लिया है।

डिजिटल इंडिया के इस दौर में अब फिजिकल KYV की कोई प्रासंगिकता नहीं रह गई है। 1 फरवरी के बाद जारी होने वाले सभी नए टैग्स पर यह राहत लागू होगी, जिससे नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक का प्रवाह और भी अधिक सुगम हो जाएगा।

किन वाहनों को मिलेगी विशेष छूट: प्राइवेट बनाम कमर्शियल

NHAI के इस नए सर्कुलर के अनुसार, यह बड़ी राहत मुख्य रूप से ‘प्राइवेट’ श्रेणी के वाहनों जैसे निजी कार, जीप और वैन मालिकों के लिए ही है। इन वाहन स्वामियों को अब टोल प्लाजा पर स्थापित KYV काउंटरों पर रुकने या अपने दस्तावेजों को स्कैन करवाने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि बस, ट्रक और मल्टी-एक्सल जैसे ‘कमर्शियल’ वाहनों के लिए पुराने नियम ही लागू रहेंगे।

वाणिज्यिक वाहनों में टैग की हेराफेरी की संभावना अधिक होने के कारण उनमें सख्त सत्यापन जारी रहेगा। NHAI के अनुसार, यदि कोई प्राइवेट वाहन चालक टैग का गलत इस्तेमाल करता पाया गया, तो उस पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

पुराने FASTag धारकों के लिए क्या बदलेगा?

अगर आपके पास पहले से ही सक्रिय FASTag है, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। 1 फरवरी के बदलावों के बाद पुराने टैग धारकों के लिए भी वेरिफिकेशन का झंझट लगभग खत्म हो गया है। अब आपको बार-बार KYV अपडेट करने के लिए किसी बैंक या टोल केंद्र के चक्कर नहीं काटने होंगे। NHAI ने स्पष्ट किया है कि जब तक आपका वाहन डेटा VAHAN पोर्टल पर सही है और आपका बीमा सक्रिय है,

तब तक आपका टैग सुचारू रूप से काम करता रहेगा। हालांकि, विशेषज्ञों की सलाह है कि पुराने टैग यूजर्स एक बार NHAI ऐप या अपने संबंधित बैंक पोर्टल पर जाकर यह सुनिश्चित कर लें कि उनका मोबाइल नंबर और वाहन विवरण सही ढंग से लिंक है।

टोल प्लाजा
FASTag KYV प्रक्रिया समाप्त

ड्राइवरों को होने वाले लाभ और भविष्य की राह

इस ऐतिहासिक कदम से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि करोड़ों लीटर ईंधन की भी बचत होगी। आंकड़ों के अनुसार, टोल प्लाजा पर रुकने और दोबारा शुरू होने में खर्च होने वाला समय कम होने से ट्रैफिक जाम में 20% तक की कमी आने की उम्मीद है। अब ई-कॉमर्स वेबसाइट्स या बैंक ऐप से FASTag खरीदना और उसे तुरंत उपयोग करना बेहद आसान हो जाएगा।

NHAI आने वाले समय में SAT (सैटेलाइट आधारित टोलिंग) जैसे और भी उन्नत सिस्टम लाने की योजना बना रहा है, जिससे भविष्य में फिजिकल टोल गेट्स की जरूरत ही खत्म हो जाएगी। कुल मिलाकर, 1 फरवरी से शुरू हो रहा यह नया नियम भारतीय सड़कों को और अधिक ‘स्मार्ट’ और यात्रियों के लिए ‘फ्रेंडली’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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Patna Police का ‘ऑपरेशन क्लीन’: 80 लाख की नशीली सिरप के साथ अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़, 6 गिरफ्तार

Patna

बिहार की राजधानी Patna में नशीली दवाओं के सौदागरों के खिलाफ पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी चोट की है। Patna Police की विशेष टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए ‘खांटी सिरप’ (कोडीन युक्त कफ सिरप) की एक विशाल खेप पकड़ी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की कीमत लगभग 80 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस ने इस मामले में गिरोह के मुख्य सरगना सहित 6 शातिर तस्करों को दबोचने में कामयाबी हासिल की है। यह पूरी कार्रवाई पटना सिटी के मालसलामी और दीदारगंज थाना क्षेत्रों में अंजाम दी गई।

Patna Police
Patna Police

डाक पार्सल और मसालों की आड़ में ‘सफेद जहर’ की सप्लाई

तस्करों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए तस्करी का बेहद शातिर तरीका अपनाया था। जब्त की गई सिरप की बोतलों को डाक विभाग के फर्जी पार्सल और तेज पत्तों की बोरियों के नीचे छिपाकर लाया जा रहा था। पुलिस ने छापेमारी के दौरान कुल 4485 लीटर प्रतिबंधित सिरप बरामद की, जो 289 अलग-अलग कार्टन में पैक थी। जांच में पता चला है कि यह खेप हिमाचल प्रदेश की एक फार्मा कंपनी से फर्जी कागजातों के जरिए मंगवाई गई थी और इसे पटना के स्थानीय बाजारों के साथ-साथ सीमावर्ती जिलों में सप्लाई किया जाना था।

सरगना ‘गन्नी’ सहित 6 तस्कर पुलिस की गिरफ्त में

इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता गिरोह के मास्टरमाइंड सूर्यप्रकाश उर्फ ‘गन्नी’ की गिरफ्तारी है। गन्नी पटना के कदमकुआं इलाके का रहने वाला है और लंबे समय से शहर में नशीली दवाओं के वितरण नेटवर्क को नियंत्रित कर रहा था। उसके साथ गिरफ्तार किए गए अन्य पांच आरोपियों में ट्रक ड्राइवर और लोकल एजेंट शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इन आरोपियों का जाल बिहार के कटिहार, सहरसा और वैशाली तक फैला हुआ था। ये लोग हिमाचल से माल मंगवाकर उसे ऊंचे दामों पर युवाओं और नशेड़ियों को बेचते थे।

हिमाचल प्रदेश से बिहार तक जुड़ा तस्करी का नेटवर्क

वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि बिहार में नशीली दवाओं की जड़ें अन्य राज्यों से जुड़ी हैं। डीएसपी डॉ. गौरव कुमार ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि गिरोह के सदस्य हिमाचल प्रदेश के इंडस्ट्रियल एरिया से सीधे संपर्क में थे। ट्रक (टाटा 407) और अन्य वाणिज्यिक वाहनों का उपयोग कर वे चेकपोस्टों को पार कर जाते थे क्योंकि ऊपर से डाक पार्सल या किराने का सामान लदा होता था। पुलिस अब उन कंपनियों की भी जांच कर रही है जहां से यह सिरप बिना वैध लाइसेंस के रिलीज किया गया था।

युवाओं के भविष्य पर प्रहार: बिहार में ‘खांटी’ का बढ़ता चलन

बिहार में शराबबंदी के बाद से कोडीन युक्त कफ सिरप (जिसे स्थानीय भाषा में ‘खांटी’ कहा जाता है) की मांग नशे के विकल्प के रूप में बढ़ी है। यह न केवल स्वास्थ्य के लिए घातक है, बल्कि युवाओं को अपराध की ओर भी धकेल रहा है। पटना पुलिस की इस कार्रवाई से ड्रग माफियाओं की कमर टूटी है। एसएसपी ने स्पष्ट किया है कि ‘मिशन सुरक्षा’ के तहत शहर के स्कूल-कॉलेजों और झुग्गी बस्तियों में सक्रिय छोटे डीलरों पर भी नकेल कसी जाएगी।

Patna Police
Patna Police का ‘ऑपरेशन क्लीन’

पुलिस की अपील

पटना पुलिस की यह उपलब्धि नशा मुक्त बिहार के संकल्प की ओर एक बड़ा कदम है। पुलिस ने एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में छापेमारी जारी है। पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उनके आस-पास ऐसी कोई संदिग्ध गतिविधि या नशीली दवाओं की बिक्री दिखे, तो तुरंत पुलिस हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें।

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होली-छठ 2026: घर जाने की राह हुई पथरीली! ट्रेनों में लंबी वेटिंग और हवाई किराए में 40% का उछाल, जानें कैसे पहुचें घर

होली

त्योहारों का सीजन आते ही प्रवासी भारतीयों और उत्तर भारतीयों के लिए अपने घर पहुंचना एक बड़ी चुनौती बन गया है। होली 2026 (3-4 मार्च) और आगामी छठ पर्व के लिए दिल्ली, मुंबई और गुजरात जैसे बड़े शहरों से बिहार और उत्तर प्रदेश जाने वाली ट्रेनों में टिकटों की भारी मारामारी शुरू हो गई है। आलम यह है कि फरवरी के आखिरी हफ्ते से लेकर मार्च के पहले हफ्ते तक प्रमुख ट्रेनों में कन्फर्म सीटें मिलना लगभग नामुमकिन हो गया है।

होली
ट्रेनों में लंबी वेटिंग

प्रमुख ट्रेनों में ‘नो रूम’: वेटिंग लिस्ट भी हुई बंद

दिल्ली से पटना, दरभंगा, मुजफ्फरपुर और वाराणसी जाने वाली ट्रेनों जैसे संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस, बिहार संपर्क क्रांति, श्रमजीवी और मगध एक्सप्रेस में 25 फरवरी से 10 मार्च तक स्लीपर और एसी कोच पूरी तरह फुल हो चुके हैं। कई ट्रेनों में तो वेटिंग लिस्ट इतनी लंबी हो गई है कि रेलवे ने ‘नो रूम’ (No Room) का बोर्ड लगा दिया है, यानी अब उनमें वेटिंग टिकट भी नहीं मिल रहे हैं।

जेब पर भारी ‘त्योहार’: किराए में 30-40% की बढ़ोतरी

यात्रियों को न केवल सीटों की कमी, बल्कि महंगे किराए का भी सामना करना पड़ रहा है।

• डायनामिक प्राइसिंग: प्रीमियम ट्रेनों में डायनामिक प्राइसिंग और तत्काल के चलते स्लीपर क्लास का टिकट 500-800 रुपये और एसी कोच का किराया 2,000 रुपये तक महंगा हो गया है।

• हवाई किराया: फ्लाइट के टिकटों में भी 40% तक की बढ़ोतरी देखी गई है। दिल्ली से पटना का जो किराया सामान्य दिनों में 4,000 रुपये के आसपास रहता था, वह पीक डेट्स पर 10,000 रुपये के पार पहुंच गया है।

होली स्पेशल ट्रेनों का इंतजार: कब आएगी लिस्ट?

यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए रेलवे बोर्ड जल्द ही ‘होली स्पेशल ट्रेनों’ की घोषणा करने वाला है।

• अपेक्षित रूट्स: आनंद विहार-सहरसा, नई दिल्ली-राजेंद्र नगर (पटना), दिल्ली-दरभंगा और मुंबई-वाराणसी जैसे रूट्स पर स्पेशल ट्रेनें चलाने की योजना है।

• लिस्ट कब आएगी: संभावना है कि 10 से 15 फरवरी के बीच रेलवे 100 से ज्यादा स्पेशल ट्रेनों का शेड्यूल जारी करेगा। पिछले पैटर्न के अनुसार, आनंद विहार और नई दिल्ली से बिहार के लिए कई जोड़ी स्पेशल गाड़ियाँ (जैसे 04093/04094) चलाई जा सकती हैं।

होली-छठ 2026
ट्रेनों में लंबी वेटिंग

यात्रियों के लिए सलाह: घर पहुंचने के स्मार्ट तरीके

• वैकल्पिक रूट्स: यदि मुख्य ट्रेनों में जगह नहीं है, तो कनेक्टिंग ट्रेनों या बस सेवाओं का उपयोग करें।

• फ्लाइट टाइमिंग: यदि आप फ्लाइट से जाना चाहते हैं, तो देर रात की फ्लाइट चुनकर आप 4-5 हजार रुपये तक बचा सकते हैं।

• वंदे भारत एक्सप्रेस: थोड़ी महंगी होने के बावजूद वंदे भारत में अन्य ट्रेनों की तुलना में सीट मिलने की संभावना थोड़ी अधिक रहती है।

• तत्काल बुकिंग: यात्रा से एक दिन पहले सुबह 10 बजे (AC) और 11 बजे (Sleeper) के लिए IRCTC ऐप पर एक्टिव रहें।

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बिहार बनेगा ग्लोबल टेक हब: नीतीश कैबिनेट ने GCC और सेमीकंडक्टर नीति को दी मंजूरी, 50 करोड़ की सब्सिडी और 2 लाख नौकरियों की सौगात!

बिहार

बिहार अब केवल खेती और श्रम शक्ति के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया की बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) और हाई-टेक उद्योगों के केंद्र के रूप में पहचाना जाएगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में दो ऐतिहासिक नीतियों— बिहार वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC) नीति-2026 और सेमीकंडक्टर नीति-2026 को मंजूरी दे दी गई है। इस बड़े फैसले का उद्देश्य बिहार को नवाचार और तकनीक का वैश्विक केंद्र बनाना है।

नीतीश कैबिनेट ने GCC और सेमीकंडक्टर

GCC नीति-2026: बड़ी कंपनियों को बुलावा और भारी सब्सिडी

नई जीसीसी नीति के तहत कॉल सेंटर, वित्तीय सेवाएं, डेटा एनालिटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई (AI) जैसे क्षेत्रों में निवेश करने वाली कंपनियों को बिहार सरकार बंपर प्रोत्साहन देगी।

50 करोड़ तक का अनुदान: जो भी कंपनियां बिहार में अपना केंद्र स्थापित करेंगी, उन्हें उनके कुल पूंजीगत व्यय (Plant & Machinery) का 30% तक अनुदान मिलेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 50 करोड़ रुपये तय की गई है।

स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता: यदि कंपनियां बिहार के स्थानीय युवाओं को रोजगार देती हैं, तो उन्हें भर्ती और पेरोल खर्च में अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जाएगा।

सेमीकंडक्टर नीति: 2 लाख रोजगार और 25,000 करोड़ का निवेश

बिहार सरकार ने भविष्य की तकनीक ‘सेमीकंडक्टर’ पर भी बड़ा दांव खेला है। इस नीति के जरिए राज्य में चिप डिजाइनिंग, फैब्रिकेशन और डिस्प्ले फैब जैसे उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा।

रोजगार का सृजन: इस नीति से राज्य में 2 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

निवेश का लक्ष्य: सरकार का लक्ष्य इसके माध्यम से लगभग 25,000

नीतीश कैबिनेट ने GCC और सेमीकंडक्टर

करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करना है। यह नीति बिहार को देश के उन चुनिंदा राज्यों की श्रेणी में खड़ा कर देगी जिनके पास अपनी समर्पित सेमीकंडक्टर पॉलिसी है।

आवेदन प्रक्रिया: कैसे उठाएं लाभ?

उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार के अनुसार, इच्छुक कंपनियां बिहार उद्योग विभाग के आधिकारिक पोर्टल (industry.bihar.gov.in) या ‘बिहार बिजनेस कनेक्ट’ के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगी।

सिंगल विंडो क्लीयरेंस: निवेशकों को भटकना न पड़े, इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए वेरिफिकेशन किया जाएगा।

दस्तावेज: कंपनियों को अपना प्रोजेक्ट रिपोर्ट, निवेश योजना और रोजगार का खाका जमा करना होगा।

सत्यापन और भुगतान: प्रोजेक्ट पूरा होने और विभाग द्वारा भौतिक सत्यापन के बाद सब्सिडी की राशि सीधे बैंक खाते में जारी की जाएगी।

बिहार की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?

इन नीतियों के लागू होने से बिहार की छवि एक ‘इंडस्ट्रियल स्टेट’ के रूप में उभरेगी। हाई-स्किल जॉब्स के कारण बिहार के युवाओं का पलायन रुकेगा और उन्हें अपने ही राज्य में उच्च वेतन वाली नौकरियां मिलेंगी। साथ ही, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) बढ़ने से राज्य के राजस्व और निर्यात में भी भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है।

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कर्ज मांगने वाले का सिर हमेशा झुका रहता है” – पाकिस्तान पीएम शहबाज शरीफ का छलका दर्द

पाकिस्तान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में देश की खराब आर्थिक हालत पर एक बड़ा और भावुक बयान दिया है। इस्लामाबाद में देश के बड़े बिजनेसमैन और एक्सपोर्टर्स को सम्मानित करने के लिए रखे गए एक कार्यक्रम में उन्होंने माना कि पाकिस्तान आज जिस दौर से गुजर रहा है, वहां उसे अपनी ‘इज्जत’ तक दांव पर लगानी पड़ रही है।

पाकिस्तान पीएम शहबाज शरीफ

मजबूरी में झुकना पड़ता है सिर

शहबाज शरीफ ने बड़े ही साफ शब्दों में कहा कि जब कोई देश दूसरों से कर्ज मांगने जाता है, तो उसे अपना सिर झुकाकर ही रहना पड़ता है। उन्होंने स्वीकार किया कि बार-बार विदेशी कर्ज (खासकर IMF से) लेने की वजह से पाकिस्तान को अपने आत्मसम्मान (Self-respect) से समझौता करना पड़ा है। पीएम ने बड़े दुख के साथ कहा कि कर्ज की शर्तों को मानने के चक्कर में देश को कई ऐसे फैसले लेने पड़े जो शायद एक आजाद देश के तौर पर उसे पसंद न आते।

आखिर क्यों आई ऐसी नौबत?

पाकिस्तान की माली हालत पिछले कई सालों से नाजुक बनी हुई है। आज के समय में पाकिस्तान पर करीब 130 अरब डॉलर से ज्यादा का विदेशी कर्ज है, जो उसकी जीडीपी (GDP) का लगभग 80% हिस्सा है।

महंगाई की मार: पाकिस्तान में महंगाई 25% से भी ऊपर पहुंच गई है।

कड़ी शर्तें: IMF (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) से लोन लेने के बदले पाकिस्तान को बिजली महंगी करनी पड़ी, टैक्स बढ़ाने पड़े और सब्सिडी खत्म करनी पड़ी।

विदेशी मुद्रा की कमी: देश के पास अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार बेहद कम बचा है।

व्यापारियों से बड़ी अपील

इस समारोह के दौरान पीएम शरीफ ने देश के उद्योगपतियों और निर्यातकों (Exporters) से एक गुजारिश की। उन्होंने कहा कि कर्ज के इस जाल से निकलने का सिर्फ एक ही रास्ता है— ‘निर्यात (Exports) बढ़ाना’। उन्होंने बिजनेस लीडर्स से अपील की कि वे दुनिया भर में पाकिस्तानी सामान बेचें ताकि देश में डॉलर आए और उन्हें बार-बार IMF के सामने हाथ न फैलाना पड़े।

पाकिस्तान पीएम शहबाज शरीफ

राजनीतिक घमासान और चुनौतियां

शरीफ का यह बयान आते ही पाकिस्तान की राजनीति में हलचल मच गई है। विपक्ष इसे सरकार की नाकामी बता रहा है, वहीं आम जनता इस बात से परेशान है कि कर्ज की किश्तें चुकाने के लिए उनकी जेबों पर बोझ डाला जा रहा है। चीन, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों ने मदद तो की है, लेकिन पाकिस्तान को खुद के पैरों पर खड़ा होने के लिए अभी एक लंबी लड़ाई लड़नी होगी।

प्रधानमंत्री का यह बयान इस बात की तरफ इशारा करता है कि पाकिस्तान अब समझ चुका है कि सिर्फ कर्ज लेकर देश नहीं चलाया जा सकता। आत्मनिर्भरता ही एकमात्र रास्ता है, वरना दुनिया के मंच पर अपनी बात मजबूती से रखना मुश्किल हो जाएगा।

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Darbhanga Bird Flu News : 10,000 कौओं की मौत के बाद H5N1 की पुष्टि, क्या इंसानों को है खतरा?

Bird Flu

बिहार के दरभंगा जिले से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। पिछले कुछ दिनों से आसमान से गिरते मृत कौओं के रहस्य से अब पर्दा उठ गया है। जांच रिपोर्ट में आधिकारिक तौर पर H5N1 वायरस (Bird Flu) की पुष्टि हो गई है। प्रशासन ने पूरे जिले में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

आखिर क्या है पूरा मामला?

Darbhanga Bird Flu

दरभंगा के नगर निगम क्षेत्र (वार्ड नंबर 31) स्थित भिगो श्मशान घाट (मुक्तिधाम) पिछले कुछ दिनों से पक्षियों के कब्रिस्तान में तब्दील हो गया था। स्थानीय लोगों ने देखा कि अचानक बड़ी संख्या में कौए पेड़ से गिरकर मर रहे हैं। देखते ही देखते यह संख्या सैकड़ों से हजारों में पहुंच गई। समाजसेवी संस्थाओं और स्थानीय पार्षदों के हस्तक्षेप के बाद जब सैंपल भोपाल की लैब भेजे गए, तो रिपोर्ट ने सबकी नींद उड़ा दी—यह खतरनाक एवियन इन्फ्लूएंजा (H5N1) था।

मौत का आंकड़ा और प्रशासनिक हलचल

शुरुआती सरकारी आंकड़ों में एक हजार कौओं की मौत की बात कही गई थी, लेकिन स्थानीय सूत्रों और रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक लगभग 10,000 पक्षी अपनी जान गंवा चुके हैं। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए:

• मुक्तिधाम परिसर के पास जेसीबी से गहरे गड्ढे खुदवाकर मृत पक्षियों को वैज्ञानिक तरीके से दफनाया है।

• संक्रमित क्षेत्र के 5 किलोमीटर के दायरे को ‘सेंसिटिव जोन’ घोषित कर दिया गया है।

• अगले आदेश तक इस क्षेत्र में पोल्ट्री (मुर्गा-बत्तख) की बिक्री और परिवहन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

क्या इंसानों के लिए भी है खतरा?

H5N1 वायरस मुख्य रूप से पक्षियों को प्रभावित करता है, लेकिन यह इंसानों में भी फैल सकता है। यदि कोई व्यक्ति संक्रमित पक्षी के सीधे संपर्क में आता है या उसके मल-मूत्र के संपर्क में आता है, तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। दरभंगा प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी मृत पक्षी को हाथ न लगाएं।

बर्ड फ्लू से बचाव के रामबाण उपाय

अगर आप दरभंगा या इसके आस-पास के क्षेत्रों में रह रहे हैं, तो ये सावधानियां जरूर बरतें:

पक्षियों से दूरी: छत, मुंडेर या सड़क पर कोई मृत पक्षी दिखे तो उसे छुएं नहीं। इसकी सूचना तुरंत हेल्पलाइन या पशुपालन विभाग को दें।

चिकन और अंडा: अगर आप मांसाहारी हैं, तो मांस और अंडे को 70°C से ऊपर अच्छी तरह पकाकर ही खाएं। अधपका मांस बिल्कुल न लें।

साफ-सफाई: बाहर से आने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं। सैनिटाइजर का प्रयोग करें और भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनें।

Darbhanga Bird Flu

पोल्ट्री फार्म से दूरी: फिलहाल कुछ दिनों के लिए पोल्ट्री फार्म या चिड़ियाघर जैसी जगहों पर जाने से बचें।

लक्षणों पर नजर: यदि आपको अचानक तेज बुखार, खांसी, गले में खराश या सांस लेने में तकलीफ महसूस हो, तो इसे सामान्य सर्दी न समझें और तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

दरभंगा में बर्ड फ्लू की दस्तक एक गंभीर चेतावनी है। प्रशासन अपना काम कर रहा है, लेकिन नागरिकों की सतर्कता ही इस वायरस की चेन को तोड़ने में मदद करेगी। अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं का पालन करें।

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