Holashtak Scientific Reason: होलाष्टक में शुभ काम क्यों हैं वर्जित? जानिए इसके पीछे के 2 बड़े धार्मिक और वैज्ञानिक रहस्य

Holashtak Scientific Reason

होली का नाम सुनते ही दिमाग में रंग, गुझिया और मस्ती का ख्याल आता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इतने बड़े और खुशियों वाले त्योहार से ठीक 8 दिन पहले अचानक बड़े-बुजुर्ग हमें हर शुभ काम करने से क्यों रोक देते हैं?

हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से लेकर होलिका दहन तक के 8 दिनों को ‘होलाष्टक’ कहा जाता है। आज (24 फरवरी 2026) से होलाष्टक शुरू हो चुके हैं। इन दिनों में शादी, गृह प्रवेश या कोई भी नया बिजनेस शुरू करने की सख्त मनाही होती है। आज ‘ApniVani’ के इस विशेष लेख में हम सिर्फ डराने वाली पुरानी कहानियां नहीं, बल्कि इसका डीप एनालिसिस करेंगे। आइए जानते हैं होलाष्टक (Holashtak) के पीछे का धार्मिक डर और इसका असली वैज्ञानिक ‘तर्क’ (Scientific reason)।

Holashtak religious reasons
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धर्म की नज़र से: 8 दिन का खौफ और यातनाएं

पौराणिक कथाओं में होलाष्टक को नकारात्मकता और कष्ट का समय माना गया है। इसके पीछे दो सबसे बड़ी मान्यताएं हैं:

  • भक्त प्रह्लाद की यातनाएं: मान्यता है कि हिरण्यकश्यप ने अपने ही बेटे भक्त प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से रोकने के लिए इन्ही 8 दिनों तक लगातार भयानक यातनाएं (Torture) दी थीं। आठवें दिन होलिका उसे अपनी गोद में लेकर आग में बैठी थी।
  • कामदेव का भस्म होना: दूसरी कथा के अनुसार, जब शिवजी गहरी तपस्या में लीन थे, तब कामदेव ने उनका ध्यान भटकाने की कोशिश की थी। क्रोध में आकर भगवान शिव ने अपना तीसरा नेत्र खोला और फाल्गुन अष्टमी के दिन ही कामदेव को भस्म कर दिया था। प्रकृति में उस वक्त एक शोक की लहर दौड़ गई थी।

इन्हीं दुखद घटनाओं के कारण हिंदू धर्म में इन 8 दिनों को शुभ कार्यों के लिए वर्जित मान लिया गया।

Holashtak Scientific Reason
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विज्ञान का ‘तर्क’: आखिर क्यों कहा गया ‘घर में रहो’?

अब आते हैं असली मुद्दे पर! हमारे पूर्वज बहुत बड़े वैज्ञानिक थे। उन्होंने धर्म के नाम पर जो नियम बनाए, उनके पीछे गहरा विज्ञान छिपा था।

  • ऋतु संधि (Weather Transition): होलाष्टक का यह वो समय होता है जब सर्दियां पूरी तरह से जा रही होती हैं और गर्मियां शुरू हो रही होती हैं। विज्ञान की भाषा में इसे ‘ऋतु संधि’ (Ritu Sandhi) कहते हैं।
  • बीमारियों का हाई-रिस्क: इस मौसम में तापमान के अचानक बदलने से हमारे शरीर की इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) सबसे ज्यादा कमजोर होती है। इसी समय हवा में चिकनपॉक्स (Mata), खसरा और वायरल इन्फेक्शन के बैक्टीरिया सबसे तेजी से पनपते हैं।
  • भीड़ से बचाने की रणनीति: जरा सोचिए, अगर होलाष्टक के इन 8 दिनों में शादियां या बड़े आयोजन होते, तो हजारों की भीड़ जमा होती। ऐसे में एक इंसान से दूसरे इंसान में वायरल बीमारियां जंगल की आग की तरह फैलतीं। इसलिए हमारे पूर्वजों ने ‘अशुभ’ का डर दिखाकर इन दिनों में भीड़ जुटाने (विवाह/गृह प्रवेश) और बिना वजह घर से बाहर निकलने पर रोक लगा दी।
Planets and mental pressure during Holashtak
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मानसिक प्रभाव: ग्रहों की चाल या डिप्रेशन?

सिर्फ शारीरिक ही नहीं, यह मौसम हमारे दिमाग पर भी असर डालता है। ज्योतिष कहता है कि होलाष्टक में सूर्य, चंद्रमा, मंगल सहित 8 ग्रह उग्र (Aggressive) अवस्था में होते हैं।

अगर हम इसे मेडिकल साइंस से जोड़ें, तो सर्दियों के खत्म होने पर शरीर में ‘सेरोटोनिन’ (Serotonin) और ‘मेलाटोनिन’ हार्मोन्स का बैलेंस बिगड़ता है। इससे इंसान के स्वभाव में चिड़चिड़ापन, थकान और उदासी (Seasonal Affective Disorder) आती है। ऐसे बिगड़े हुए मूड में कोई बड़ा फैसला (जैसे बिजनेस डील या शादी) लिया जाए, तो उसके खराब होने के चांस ज्यादा होते हैं।

Prahalad and Lord Narsimha - Holashtak Scientific Reasons

ApniVani की बात(Conclusion)

होलाष्टक कोई अंधविश्वास नहीं है, बल्कि बदलते मौसम में खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से सुरक्षित रखने का एक बेहतरीन ‘मेडिकल अलर्ट’ (Medical Alert) है। धर्म ने इसे कहानियों में इसलिए पिरोया ताकि आम इंसान भी डर की वजह से ही सही, लेकिन इन स्वास्थ्य नियमों का पालन करे। इन 8 दिनों में शांत रहें, अपनी सेहत का ध्यान रखें और होली की तैयारियों पर फोकस करें!

आपकी राय: क्या आप होलाष्टक के इस वैज्ञानिक कारण से सहमत हैं? या आपके इलाके में इसके पीछे कोई और मान्यता है? हमारे इंस्टाग्राम पेज @9vaniapni पर आएं और इस मुद्दे पर हमारे साथ चर्चा करें।

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रांची-दिल्ली एयर एंबुलेंस चतरा के जंगलों में क्रैश: मरीज और क्रू समेत 7 की मौत, रोंगटे खड़े कर देने वाली है पूरी कहानी

एयर एंबुलेंस

झारखंड के चतरा जिले से एक हृदयविदारक खबर सामने आई है। रांची से दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाली एक निजी एयर एंबुलेंस सोमवार की शाम सिमरिया के घने जंगलों में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस दर्दनाक हादसे में विमान में सवार मरीज, डॉक्टर और पायलटों समेत सभी सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना 22 फरवरी 2026 की शाम की है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।

कैसे और कब हुआ यह भीषण हादसा?

जानकारी के मुताबिक, RAPL कंपनी की बीचक्राफ्ट B90L (रजिस्ट्रेशन VT-AJV) एयर एंबुलेंस ने सोमवार शाम करीब 7:11 बजे रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी। सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन उड़ान के महज 23 मिनट बाद यानी शाम 7:34 बजे अचानक विमान का संपर्क एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से टूट गया।

एयर एंबुलेंस
एयर एंबुलेंस

विमान का आखिरी सिग्नल कोलकाता एरिया कंट्रोल को मिला था, जिसके बाद यह चतरा के सिमरिया प्रखंड स्थित बरियातू पंचायत के जंगलों में जा गिरा। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, उन्होंने जंगल की ओर से एक जोरदार धमाके की आवाज सुनी और जब तक लोग कुछ समझ पाते, विमान आग के गोले में तब्दील हो चुका था।

एक जिंदगी बचाने की कोशिश में सात जानों का सफर खत्म

इस हादसे की सबसे दुखद बात यह है कि विमान एक गंभीर रूप से झुलसे मरीज की जान बचाने के लिए दिल्ली जा रहा था। मरीज संजय कुमार (लातेहार निवासी) का शरीर करीब 63% तक जल चुका था और उन्हें बेहतर इलाज के लिए एयरलिफ्ट किया गया था। उनके साथ उनके दो परिजन, एक डॉक्टर और एक पैरामेडिक स्टाफ भी सवार थे, जो दिल्ली में नई उम्मीद तलाश रहे थे। लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था।

हादसे में जान गंवाने वालों की सूची:

• विवेक विकास भगत (मुख्य पायलट)

• सबराजदीप सिंह (को-पायलट)

• संजय कुमार (मरीज)

• अर्चना देवी (मरीज की परिजन)

• ध्रुव कुमार (मरीज के परिजन)

• डॉ. विकास कुमार गुप्ता (चिकित्सक)

• सचिन कुमार मिश्रा (पैरामेडिक/नर्स)

बचाव कार्य और प्रशासनिक पुष्टि

हादसे की सूचना मिलते ही चतरा की डिप्टी कमिश्नर कीर्तिश्री जी और पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचे। घने जंगल और रात का अंधेरा होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। रात करीब 8:05 बजे रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर (RCC) को सक्रिय किया गया। देर रात तक सभी सात शवों को मलबे से बरामद कर लिया गया। प्रशासन ने पुष्टि की है कि विमान के परखच्चे उड़ चुके थे और किसी के भी बचने की गुंजाइश नहीं थी।

हादसे की वजह: खराब मौसम या तकनीकी खराबी?

एयर एंबुलेंस
एयर एंबुलेंस

विमान क्रैश होने के सटीक कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है, लेकिन प्रारंभिक जांच में खराब विजिबिलिटी और मौसम को एक बड़ा कारण माना जा रहा है। विमानन नियामक DGCA (Directorate General of Civil Aviation) ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। ब्लैक बॉक्स मिलने के बाद ही साफ हो पाएगा कि क्या यह किसी तकनीकी खराबी का नतीजा था या फिर पायलटों को मौसम ने चकमा दिया।

शोक की लहर

इस हादसे के बाद झारखंड और दिल्ली के चिकित्सा जगत में शोक की लहर है। एक डॉक्टर और नर्स जो अपनी ड्यूटी निभाते हुए शहीद हो गए, उनकी शहादत पर हर कोई गमगीन है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।

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नीतीश कुमार बिहार में खत्म करेंगे शराबबंदी? कानून के खात्मे के लिए गढ़े जा रहे हैं नए तर्क, क्या बदल जाएगी बिहार की तस्वीर?

नीतीश कुमार

पटना: बिहार की राजनीति में इन दिनों एक ही सवाल सबसे ऊपर तैर रहा है— क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने सबसे ‘पसंदीदा’ लेकिन विवादित शराबबंदी कानून को वापस लेने वाले हैं? करीब एक दशक से बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी अब एक ऐसे चौराहे पर खड़ी है, जहां उनके अपने ही साथी और विपक्ष दोनों मिलकर इस कानून की चूलें हिलाने में लगे हैं। हालांकि, इन सबके बीच सीएम नीतीश कुमार की चुप्पी और उनकी ‘बेपरवाही’ कई बड़े राजनीतिक संकेत दे रही है।

एनडीए के अंदर से उठती बगावती आवाजें

नीतीश कुमार
Sharab band by Nitish Kumar

कभी जिस कानून का समर्थन बिहार की सभी पार्टियों ने एक सुर में किया था, आज उसी कानून पर एनडीए (NDA) के भीतर दरारें दिखने लगी हैं। बीजेपी के कई कद्दावर नेता और विधायक अब दबी जुबान में नहीं, बल्कि खुलेआम यह कहने लगे हैं कि शराबबंदी कानून बिहार में बुरी तरह विफल रहा है। तर्क यह दिया जा रहा है कि कानून कागजों पर तो सख्त है, लेकिन जमीन पर ‘होम डिलीवरी’ का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। बीजेपी विधायकों का कहना है कि इस कानून ने पुलिस को भ्रष्टाचार का नया अड्डा दे दिया है और राज्य को हजारों करोड़ के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

राजस्व का घाटा और समानांतर अर्थव्यवस्था

आंकड़ों की बात करें तो बिहार को हर साल करीब 4,000 से 5,000 करोड़ रुपये के राजस्व का सीधा नुकसान हो रहा है। जानकारों का मानना है कि पिछले 10 सालों में यह आंकड़ा 40,000 करोड़ को पार कर चुका है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि बिहार में शराब मिलनी बंद नहीं हुई है। एक ‘समानांतर अर्थव्यवस्था’ (Parallel Economy) खड़ी हो गई है, जहां माफिया और सिंडिकेट सक्रिय हैं। तर्क यह गढ़ा जा रहा है कि जो पैसा बिहार के विकास में लगना चाहिए था, वह अब शराब माफियाओं की जेब में जा रहा है। यही वजह है कि अब मांग उठ रही है कि गुजरात मॉडल की तर्ज पर बिहार में भी कुछ रियायतें दी जाएं।

क्या नीतीश कुमार वाकई बेपरवाह हैं?

इतने दबाव के बावजूद नीतीश कुमार का रुख अब भी अटल नजर आता है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश इस कानून को अपने ‘विरासत’ (Legacy) के तौर पर देखते हैं। उनके करीबियों का कहना है कि सीएम को लगता है कि शराबबंदी ने ग्रामीण इलाकों में महिलाओं का वोट बैंक उनके पक्ष में मजबूती से खड़ा किया है। जेडीयू का स्पष्ट स्टैंड है कि सामाजिक सुधार राजस्व से कहीं ज्यादा कीमती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश अपनी इस ‘हठ’ को बरकरार रख पाएंगे? या फिर गठबंधन को बचाने के लिए उन्हें बीच का रास्ता निकालना होगा?

कानून की समीक्षा या सिर्फ सियासी दांव?

नीतीश कुमार
नीतीश कुमार

हाल के दिनों में ‘समीक्षा’ शब्द बिहार की राजनीति में सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है। विपक्ष का आरोप है कि शराबबंदी के नाम पर गरीबों को जेल में ठूंसा जा रहा है, जबकि बड़े तस्कर खुलेआम घूम रहे हैं। अदालतों पर बढ़ते बोझ और जहरीली शराब से होती मौतों ने सरकार को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है। अब तर्क दिया जा रहा है कि कानून को पूरी तरह खत्म करने के बजाय, इसकी व्यावहारिक समीक्षा की जाए ताकि पर्यटन और उद्योग जगत को राहत मिल सके।

क्या होगा अगला कदम?

बिहार में शराबबंदी सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक हथियार बन चुका है। नीतीश कुमार जानते हैं कि अगर वे इसे वापस लेते हैं, तो विपक्ष उन्हें ‘यू-टर्न’ का उलाहना देगा, और अगर जारी रखते हैं, तो सहयोगियों की नाराजगी झेलनी पड़ेगी। फिलहाल, सीएम नीतीश की बेपरवाही यह दर्शाती है कि वे किसी भी दबाव में झुकने वाले नहीं हैं, लेकिन राजनीति में ‘कभी नहीं’ जैसा कुछ नहीं होता। आने वाले समय में विधानसभा के भीतर और बाहर होने वाली बहसें तय करेंगी कि बिहार का यह ड्राई स्टेट अपनी पहचान बरकरार रखेगा या फिर सुरा की वापसी होगी।

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सोनपुर एयरपोर्ट: 4200 एकड़ में बनेगा दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा एविएशन हब, नीतीश कैबिनेट की मिली मंजूरी

सोनपुर एयरपोर्ट

बिहार के विकास की उड़ानों को अब एक नया और विशाल आसमान मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई हालिया कैबिनेट बैठक में सोनपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को आधिकारिक हरी झंडी दे दी गई है। 4,200 एकड़ से अधिक भूमि पर बनने वाला यह एयरपोर्ट न केवल बिहार का, बल्कि दक्षिण एशिया के सबसे बड़े हवाई अड्डों में से एक होने का गौरव प्राप्त करेगा। सरकार ने इस महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए शुरुआती तौर पर 1,302 करोड़ रुपये के भूमि अधिग्रहण बजट को भी मंजूरी दे दी है।

बिहार का ‘डबल डेकर’ विजन और मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर

सोनपुर के दरियापुर चंवर क्षेत्र (हाजीपुर और डुमरिया के बीच) में प्रस्तावित यह एयरपोर्ट तकनीकी रूप से बेहद उन्नत होगा। इसे ‘डबल डेकर एयरपोर्ट’ की तर्ज पर विकसित करने की योजना है, जिसका लक्ष्य 2030 तक परिचालन शुरू करना है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसके दो विशाल रनवे होंगे, जिनकी लंबाई 4,200 मीटर रखी गई है। इतनी लंबाई के रनवे पर दुनिया का सबसे बड़ा यात्री विमान, Airbus A380, भी आसानी से लैंड और टेक-ऑफ कर सकेगा।

सोनपुर एयरपोर्ट
सोनपुर एयरपोर्ट

मध्य भारत और उत्तर-पूर्व का ‘नया गेटवे’

सोनपुर एयरपोर्ट की भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। यह पटना के जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से महज 15-20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगा, जिससे पटना एयरपोर्ट पर बढ़ते ट्रैफिक का दबाव कम होगा। इसके अलावा, यह उत्तर बिहार, नेपाल, भूटान, और उत्तर-पूर्वी भारत के राज्यों के लिए एक प्रमुख ट्रांजिट पॉइंट बनेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह एयरपोर्ट मध्य भारत और पूर्वी भारत के बीच एक सेतु का काम करेगा, जिससे दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों के साथ-साथ अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के लिए सीधी उड़ानें संभव हो सकेंगी।

आर्थिक क्रांति: 50 हजार से ज्यादा रोजगार के अवसर

यह प्रोजेक्ट केवल ईंट और कंक्रीट का ढांचा नहीं है, बल्कि बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगा। सांसद राजीव प्रताप रूडी के अनुसार, यह एयरपोर्ट आने वाले 10 वर्षों में बिहार को एविएशन ट्रेनिंग हब के रूप में स्थापित करेगा। इस प्रोजेक्ट से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 50,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। कार्गो हब बनने से बिहार के कृषि उत्पादों (जैसे मखाना, लीची और केला) को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक त्वरित पहुंच मिलेगी।

कनेक्टिविटी का जाल: फोरलेन और रेलवे का साथ

सोनपुर एयरपोर्ट को सड़क और रेल मार्ग से जोड़ने के लिए भी व्यापक तैयारी है। दीघवारा-शेरपुर पुल और बाकरपुर-डुमरिया घाट रोड जैसे प्रोजेक्ट्स इसे सीधे पटना और अन्य जिलों से जोड़ेंगे। इसके अलावा, एयरपोर्ट के आसपास लॉजिस्टिक्स पार्क और होटल इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) की भी चर्चा है।

सोनपुर एयरपोर्ट
सोनपुर एयरपोर्ट

बिहार की नई वैश्विक पहचान

सोनपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का निर्माण बिहार के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत है। 2030 तक तैयार होने वाले इस प्रोजेक्ट के साथ बिहार वैश्विक विमानन मानचित्र (Global Aviation Map) पर मजबूती से उभरेगा। यह न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा बल्कि बिहार के युवाओं को उनके अपने राज्य में ही विश्वस्तरीय अवसर प्रदान करेगा।

क्या आप जानना चाहते हैं कि आपके गांव या क्षेत्र की जमीन इस अधिग्रहण के दायरे में है या नहीं? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में बताएं!

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Punch Monkey Viral Video: खिलौने में मां ढूंढते अनाथ बंदर की कहानी! इंसानों को भी रुला देंगी ये 3 बातें

Punch Monkey Viral Video

क्या एक बेजान खिलौना किसी की असली ‘मां’ बन सकता है? इन दिनों सोशल मीडिया (Instagram, X, YouTube) पर एक नन्हे बंदर का वीडियो आग की तरह फैल रहा है। इस बंदर को देखकर लोग हंस नहीं रहे हैं, बल्कि उनकी आंखें नम हो रही हैं।

इस नन्हे जापानी बंदर का नाम ‘पंच’ (Punch-kun) है। यह कोई करतब नहीं दिखा रहा, बल्कि बस एक नारंगी रंग के ‘सॉफ्ट टॉय’ (खिलौने) को अपनी छाती से चिपकाए हुए घूमता है। जब भी दूसरे बड़े बंदर इसे मारते या डराते हैं, तो यह रोता हुआ भागकर अपने उसी खिलौने के गले लग जाता है।

आज ‘ApniVani’ पर हम सिर्फ इस वायरल वीडियो की कहानी नहीं बताएंगे, बल्कि इसका ‘डीप एनालिसिस’ करेंगे। आखिर इस बंदर का यह व्यवहार क्यों है? और सबसे बड़ा सवाल—हम इंसान एक बंदर के दर्द को देखकर खुद को इतना अकेला क्यों महसूस कर रहे हैं?

Punch and Ora
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कौन है ‘पंच’ और उसकी ‘ओरा-मामा’ की कहानी?

जापान के ‘इचिकावा सिटी जू’ (Ichikawa City Zoo) में जुलाई 2025 में इस जापानी मैकाक (Macaque) का जन्म हुआ था। जन्म के तुरंत बाद ही इसकी मां ने इसे अपनाने से इनकार कर दिया और इसे मरने के लिए अकेला छोड़ दिया।

जब चिड़ियाघर के कर्मचारियों ने देखा कि यह बच्चा मां की गर्मी के बिना मर जाएगा, तो उन्होंने इसे ‘IKEA’ कंपनी का एक ऑरंगुटान सॉफ्ट टॉय दे दिया। बस फिर क्या था! ‘पंच’ ने उस बेजान खिलौने को ही अपनी असली मां मान लिया। इंटरनेट की दुनिया ने इस खिलौने का नाम ‘ओरा-मामा’ (Ora-mama) रख दिया है। पंच सोता, जागता और खाता भी इसी खिलौने को पकड़कर है।

Punch toy

प्राकृतिक व्यवहार: क्या बंदर सच में खिलौने से प्यार करते हैं?

विज्ञान और जानवरों की साइकोलॉजी (Animal Psychology) के नजरिए से देखें, तो पंच का यह बर्ताव बिल्कुल प्राकृतिक है। जंगली बंदरों के बच्चे जन्म के बाद कई महीनों तक अपनी मां के पेट या पीठ से शारीरिक रूप से चिपके रहते हैं। यह उन्हें न सिर्फ शिकारियों से बचाता है, बल्कि उनके दिमाग को ‘इमोशनल सिक्योरिटी’ (भावनात्मक सुरक्षा) देता है।

जब पंच को असली मां नहीं मिली, तो उसके दिमाग ने सर्वाइवल (जिंदा रहने) के लिए उस मुलायम खिलौने को ही मां का विकल्प मान लिया। इसे विज्ञान में ‘टैक्टाइल कम्फर्ट’ (स्पर्श से मिलने वाला सुकून) कहते हैं।

Punch Kun with new family
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इंसानों से तुलना: हम पंच में खुद को क्यों देख रहे हैं?

इस वीडियो के वायरल होने की सबसे बड़ी वजह यह है कि इंसान इस बंदर में खुद की परछाई देख रहा है। इंसानी व्यवहार और पंच की कहानी में 3 बहुत गहरी समानताएं हैं:

  • अकेलेपन का डर: जैसे पंच बड़े बंदरों के बीच खुद को अकेला पाकर खिलौने के पास भागता है, वैसे ही इंसान भी डिप्रेशन या अकेलेपन में अपने ‘कंफर्ट जोन’ (Comfort Zone) में छिपने की कोशिश करता है।
  • ट्रांजिशनल ऑब्जेक्ट (Transitional Object): साइकोलॉजी के अनुसार, जब छोटे बच्चों को मां से दूर किया जाता है, तो वे अक्सर किसी ‘कंबल’ या ‘टेडी बियर’ से जुड़ जाते हैं। इंसान भी दुःख के समय किसी बेजान चीज में सुकून ढूंढता है, ठीक पंच की तरह।
  • समाज का ‘बुलिंग’ (Bullying) नेचर: हाल ही के वीडियो में देखा गया कि जब पंच दूसरे बंदरों से दोस्ती करने गया, तो उन्होंने उसे बुरी तरह पीटा और घसीटा। हमारा इंसानी समाज भी ऐसा ही है—जब कोई कमजोर इंसान समाज में अपनी जगह बनाने की कोशिश करता है, तो ताकतवर लोग अक्सर उसे दबाने की कोशिश करते हैं।

Punch Monkey Viral Video

ApniVani की बात: क्या पंच को परिवार मिल पाया?

लगातार धक्के खाने और इंटरनेट पर लोगों के रोने के बाद, अब एक अच्छी खबर भी आई है। हालिया अपडेट्स के मुताबिक, अब चिड़ियाघर के कुछ बड़े बंदरों (जिनमें ‘ओनसिंग’ नाम का एक बंदर शामिल है) ने धीरे-धीरे पंच को अपनाना शुरू कर दिया है। वो उसे गले लगाते हैं और उसके बाल संवारते (Grooming) हैं, जो बंदरों की दुनिया में ‘प्यार और स्वीकृति’ का सबसे बड़ा सबूत है।

पंच की कहानी हमें सिखाती है कि चाहे इंसान हो या जानवर, दुनिया में सर्वाइव करने के लिए सिर्फ रोटी ही नहीं, बल्कि ‘किसी के साथ और प्यार’ की भी जरूरत होती है।

आपकी राय: जब आपने ‘पंच’ को अपने खिलौने के साथ रोते हुए देखा, तो आपके मन में पहला ख्याल क्या आया? क्या जानवरों में भी इंसानों जैसी भावनाएं होती हैं? कमेंट करके जरूर बताएं!

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बिहार होमगार्ड बहाली 2026-27: 13,500 पदों पर बंपर भर्ती और बढ़ा हुआ दैनिक भत्ता, जानें पूरी प्रक्रिया

बिहार होमगार्ड बहाली 2026-27

बिहार के युवाओं के लिए सरकारी नौकरी का एक शानदार और सुनहरा अवसर सामने आया है। बिहार गृह विभाग ने राज्य की कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से होमगार्ड (गृह रक्षा वाहिनी) के पदों पर बड़े पैमाने पर बहाली शुरू करने का निर्णय लिया है। नीतीश सरकार के इस कदम से न केवल प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि हजारों बेरोजगार युवाओं को रोजगार का एक स्थायी अवसर भी प्राप्त होगा।

13,500 नए पदों पर नामांकन का लक्ष्य

बिहार होमगार्ड बहाली
बिहार होमगार्ड बहाली 2026-27

बिहार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 तक कुल 13,500 नए होमगार्ड जवानों की भर्ती करने की योजना को हरी झंडी दे दी है। विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, कुल 15,000 नामांकन के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 11,438 जवानों का चयन पूरा कर लिया गया है, जो प्रदेश के 34 अलग-अलग जिलों में अपनी सेवाएं देने के लिए तैयार हो रहे हैं। शेष पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया को युद्धस्तर पर पूरा किया जा रहा है। यह भर्ती उन युवाओं के लिए संजीवनी साबित होगी जो खाकी वर्दी पहनकर देश सेवा का जज्बा रखते हैं।

दैनिक भत्ते में ऐतिहासिक वृद्धि: अब मिलेंगे ₹1121 प्रतिदिन

इस बार की बहाली केवल पदों की संख्या के कारण ही खास नहीं है, बल्कि सरकार ने होमगार्ड जवानों के मानदेय में भी भारी बढ़ोतरी की है। पहले जहां जवानों को 774 रुपये प्रतिदिन का भत्ता मिलता था, उसे अब बढ़ाकर 1121 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है।

इसका सीधा अर्थ यह है कि यदि एक जवान महीने के 30 दिन ड्यूटी करता है, तो उसकी मासिक आय 33,635 रुपये तक पहुंच सकती है। इसके साथ ही ईपीएफ (EPF), चिकित्सा लाभ और ड्यूटी के दौरान दुर्घटना होने पर बीमा जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जा रही हैं, जिससे होमगार्ड की नौकरी अब पहले से कहीं अधिक आकर्षक और सुरक्षित हो गई है।

आधुनिक ट्रेनिंग और सेना के रिटायर्ड ट्रेनर्स का साथ

होमगार्ड जवानों को पेशेवर रूप से दक्ष बनाने के लिए विभाग ने विशेष तैयारी की है। प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भारतीय सेना के 50 सेवानिवृत्त अनुदेशकों को अनुबंध पर नियुक्त किया गया है। ये अनुभवी प्रशिक्षक जवानों को आधुनिक हथियारों के संचालन, भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के गुर सिखा रहे हैं। वर्तमान में 11,438 जवानों की बेसिक ट्रेनिंग शुरू हो चुकी है। इसके अलावा, बिहार के सभी 33 जिलों में स्थाई ट्रेनिंग सेंटर बनाने के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य भी पूरा हो चुका है।

लिपिक और अनुदेशक पदों पर भी होगी सीधी भर्ती

होमगार्ड विभाग केवल जवानों की ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक ढांचे को भी मजबूत कर रहा है। गृह रक्षा वाहिनी में 128 अधिनायक लिपिक (Clerk) के पदों पर सीधी भर्ती के लिए विज्ञापन प्रक्रियाधीन है। साथ ही, 244 अधिनायक अनुदेशक के पदों के लिए बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) को आधिकारिक प्रस्ताव भेजा जा चुका है। यह उन शिक्षित युवाओं के लिए बेहतरीन मौका है जो कार्यालयी कार्यों या शिक्षण कार्य में रुचि रखते हैं।

बिहार होमगार्ड बहाली
बिहार होमगार्ड बहाली 2026-27

आवेदन के लिए अनिवार्य योग्यता और शारीरिक मानक

यदि आप इस भर्ती में शामिल होना चाहते हैं, तो निम्नलिखित पात्रता मानदंडों को पूरा करना अनिवार्य है:

शैक्षणिक योग्यता: उम्मीदवार का किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से कम से कम 10वीं या 12वीं (इंटरमीडिएट) उत्तीर्ण होना आवश्यक है।

आयु सीमा: सामान्य वर्ग के लिए आयु 18 से 25 वर्ष निर्धारित है, जबकि आरक्षित वर्गों (SC/ST/EBC/OBC) को सरकारी नियमानुसार आयु में छूट दी जाएगी।

शारीरिक दक्षता (PET): चयन प्रक्रिया में दौड़, ऊंची कूद और गोला फेंक शामिल है। पुरुषों को 1.6 किमी की दौड़ 6 मिनट में और महिलाओं को 1 किमी की दौड़ 5.5 मिनट में पूरी करनी होगी।

कैसे करें आवेदन?

इच्छुक और योग्य उम्मीदवार बिहार गृह रक्षा वाहिनी की आधिकारिक वेबसाइट onlinebhg.bihar.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करते समय अपने मूल दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र तैयार रखें।

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राजस्थान भिवाड़ी पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट: बिहार के 7 मजदूरों की दर्दनाक मौत, अवैध कारोबार का भंडाफोड़

राजस्थान भिवाड़ी

15 फरवरी 2026 को राजस्थान के भिवाड़ी खुशखेड़ा रीको इलाके में एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भयानक धमाके ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस हादसे में बिहार के मुजफ्फरपुर और मोतिहारी के 7 मजदूर जिंदा जल गए, जबकि 4 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। गारमेंट फैक्ट्री की आड़ में चल रहे इस मौत के सौदागर कारोबार ने मजदूरों की जिंदगियां लील लीं।

धमाके का खौफनाक मंजर: सुबह 9:30 बजे मौत का तांडव

राजस्थान भिवाड़ी
राजस्थान भिवाड़ी पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट

सुबह करीब 9:30 बजे फैक्ट्री में बारूद के ढेर पर विस्फोट हो गया, जिससे भीषण आग लग गई और इमारत मलबे में बदल गई। धमाके की तीव्रता इतनी थी कि 5 किलोमीटर दूर तक लोग भूकंप समझकर भागे। शव इतने जले हुए थे कि डीएनए टेस्ट से ही पहचान हो सकी – मुजफ्फरपुर के अभिषेक कुमार, श्याम कुमार, अमरेश कुमार समेत 7 बिहारी मजदूरों की मौत कंफर्म हुई। घायलों को अलवर और दिल्ली AIIMS रेफर किया गया।

अवैध पटाखा फैक्ट्री का काला कारोबार: चाइनीज बारूद से बन रहे पटाखे

जांच में सामने आया कि कपड़ा उद्योग के लिए 2005 में अलॉटेड प्लॉट पर 2 साल से अवैध पटाखा निर्माण हो रहा था। फैक्ट्री मालिक ने इसे लीज पर दिया और गेट पर ताला लगाकर मजदूरों को कैद कर काम करवाया। चाइनीज कंपनी ‘अनहुई वानवेई ग्रुप’ के बारूद कट्टे, गनपाउडर, बजरी में चांदी का घोल मिलाकर खिलौना गन की गोलियां बनाई जा रही थीं। नाबालिग मजदूरों तक को लगाया गया था। पास के दो गोदामों से भारी विस्फोटक जब्त हुए।

बिहार कनेक्शन: गरीब मजदूरों की मजबूरी बनी मौत का सबब

मृतकों में मुजफ्फरपुर और मोतिहारी के गरीब परिवारों के मजदूर थे, जो रोजी-रोटी के लिए राजस्थान पहुंचे। परिवार टूट गए – अभिषेक की पत्नी गर्भवती थी, श्याम के 3 बच्चे अनाथ। बिहार CM नीतीश कुमार ने प्रत्येक परिवार को 4 लाख मुआवजा घोषित किया और शव प्राप्ति की व्यवस्था का आदेश दिया। 18 फरवरी तक शवों की पहचान पूरी हुई।

प्रशासन की लापरवाही: पुलिस संरक्षण में चल रहा धंधा

राजस्थान भिवाड़ी
राजस्थान भिवाड़ी पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट

रीको एरिया में पटाखा फैक्ट्री की परमिशन न होने पर भी सालों से कारोबार फल-फूल रहा था। डीएसटी प्रभारी की मिलीभगत सामने आई, जिसके बाद 4 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर टीम भंग की गई। वन मंत्री संजय शर्मा ने सख्त जांच और दोषियों पर कार्रवाई का वादा किया। 16 फरवरी को दो और अवैध फैक्ट्री पकड़ी गईं। यह हादसा सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ा रहा है।

सबक और भविष्य की चेतावनी: मजदूर सुरक्षा पर सवाल

यह घटना प्रवासी मजदूरों की असुरक्षा और अवैध उद्योगों पर सवाल खड़ी करती है। सरकार को रीको एरिया में सघन चेकिंग, मजदूर रजिस्ट्रेशन और सख्त कानून लागू करने चाहिए। बिहार से राजस्थान जाने वाले मजदूर सतर्क रहें। होली-दीवाली से पहले पटाखा कारोबार चरम पर होता है, ऐसे हादसों पर रोक जरूरी।

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बिहार उद्यमी योजना 2026: ऑनलाइन आवेदन जल्द शुरू, 10 लाख लोन पर 5 लाख सब्सिडी

बिहार उद्यमी योजना 2026

बिहार सरकार ने उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए बिहार उद्यमी योजना 2026 को नया आयाम दिया है। यह योजना बेरोजगार युवाओं, महिलाओं और अल्पसंख्यकों को स्वरोजगार के सुनहरे अवसर प्रदान करेगी। फरवरी 2026 के अंत या मार्च की शुरुआत में ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू होने वाली है, जिससे 10,000 लाभार्थी चयनित होंगे। बिहार उद्यमी योजना 2026 के तहत ₹10 लाख तक का लोन मिलेगा, जिसमें ₹5 लाख सीधी सब्सिडी के रूप में माफ हो जाएगा। यह स्कीम उद्योग विभाग द्वारा संचालित है और राज्य के आर्थिक विकास को गति देगी।

बिहार उद्यमी योजना 2026 क्या है?

बिहार उद्यमी योजना 2026
बिहार उद्यमी योजना 2026

बिहार उद्यमी योजना 2026, जिसे मुख्यमंत्री उद्यमी अनुदान योजना भी कहा जाता है, बिहार के युवाओं को उद्योग स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। योजना के अंतर्गत युवा उद्यमी, महिला उद्यमी, SC/ST, OBC और अल्पसंख्यक उद्यमी श्रेणियां शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य चालू वित्तीय वर्ष में 45 दिनों के अंदर 10,000 उद्यमियों को जोड़ना है। पोर्टल में तकनीकी खराबी के कारण देरी हुई, लेकिन अब udyami.bihar.gov.in पर सब कुछ सुचारू है। यह योजना बिहार के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में छोटे-मोटे व्यवसाय जैसे किराना स्टोर, सैलून, फूड प्रोसेसिंग यूनिट या सर्विस सेंटर शुरू करने वालों के लिए आदर्श है।

पात्रता मानदंड और आयु सीमा

इस योजना का लाभ बिहार का स्थायी निवासी कोई भी व्यक्ति ले सकता है, जो न्यूनतम इंटरमीडिएट, आईटीआई या पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारक हो। आयु सीमा सामान्यतः 18 से 50 वर्ष है, जिसमें महिलाओं और आरक्षित वर्गों को छूट मिलेगी। पहले से कोई उद्योग न चलाने वाले बेरोजगार युवा प्राथमिकता पाएंगे। SC/ST और OBC उद्यमियों के लिए विशेष कोटा है। आवेदक को व्यवसाय परियोजना रिपोर्ट तैयार करनी होगी, जो बैंक लोन स्वीकृति में सहायक बनेगी। यह योजना बिहार उद्यमी योजना 2026 ऑनलाइन आवेदन को सरल बनाती है।

लाभ और सब्सिडी की राशि

बिहार उद्यमी योजना 2026 में मुख्य आकर्षण ₹10 लाख का लोन है, जिसमें 50% यानी ₹5 लाख अनुदान के रूप में माफ कर दिया जाएगा। बाकी राशि बैंक से कम ब्याज पर चुकानी होगी। महिला उद्यमियों को अतिरिक्त 10% सब्सिडी का लाभ मिलेगा। चयनित उद्यमी को मार्केटिंग और ट्रेनिंग सपोर्ट भी प्रदान किया जाएगा। इससे बिहार में रोजगार सृजन होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनेगी। पिछले वर्षों में हजारों युवाओं ने इस स्कीम से लाभ उठाया है।

ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? स्टेप बाय स्टेप प्रक्रिया

ऑनलाइन आवेदन udyami.bihar.gov.in या udyamiuser.bihar.gov.in पर शुरू होगा। सबसे पहले रजिस्ट्रेशन करें, फिर आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, शैक्षणिक प्रमाणपत्र, बैंक पासबुक, जाति प्रमाणपत्र (यदि लागू) और व्यवसाय योजना अपलोड करें। फॉर्म भरने के बाद प्रोजेक्ट रिपोर्ट सबमिट करें। चयन जिला स्तरीय समिति द्वारा होगा, जिसमें इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन शामिल है। आवेदन की अंतिम तिथि घोषणा के 45 दिनों बाद होगी, इसलिए जल्दी अप्लाई करें। हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें यदि कोई समस्या हो।

जरूरी दस्तावेज और चयन प्रक्रिया

बिहार उद्यमी योजना 2026
बिहार उद्यमी योजना 2026

आवेदन के लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड, बैंक डिटेल्स, फोटो, शैक्षणिक सर्टिफिकेट अनिवार्य हैं। चयन प्रक्रिया में प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता, आयकर रिटर्न और स्थानीय आवश्यकता पर जोर दिया जाएगा। सफल उद्यमियों को लोन स्वीकृति पत्र जारी होगा। बिहार उद्यमी योजना 2026 नई अपडेट के तहत डिजिटल ट्रेनिंग भी जोड़ी गई है। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक साइट विजिट करें। यह स्कीम बेरोजगारी कम करने का बड़ा कदम है।

बिहार उद्यमी योजना 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां

आवेदन फरवरी 2026 के अंत से शुरू होकर अप्रैल तक चलेगा। चयन सूची मई में जारी होगी। पिछले रुझानों से जनवरी-फरवरी में ही प्रक्रिया तेज होती है। बिहार सरकार की यह पहल युवाओं को आत्मनिर्भर बनाएगी। नियमित अपडेट के लिए साइट चेक करें।

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Indian Railway Horror: चलती ट्रेन के सुरक्षित AC केबिन में छात्रा से दरिंदगी, सोता रहा प्रशासन

Indian Railway Horror

भारतीय रेलवे अक्सर महिला सुरक्षा और ‘कवच’ जैसी तकनीकों का ढिंढोरा पीटता है, लेकिन 17 फरवरी 2026 की रात ने इन तमाम दावों को लहूलुहान कर दिया। अहमदाबाद-गोरखपुर एक्सप्रेस में एक NCC कैडेट छात्रा के साथ जो हुआ, उसने यह साबित कर दिया कि ट्रेन के भीतर वर्दीधारी ही अब भक्षक बन चुके हैं। प्रशासन और रेलवे बोर्ड की सुस्ती का आलम यह है कि वारदात के दो दिन बाद भी मुख्य आरोपी टीटीई राहुल कुमार पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। क्या यात्रियों की सुरक्षा सिर्फ कागजों तक सीमित है?

मदद के बहाने बुना गया ‘मौत का जाल’

घटना उस समय की है जब एक छात्रा मऊ में अपनी NCC ‘C’ सर्टिफिकेट की परीक्षा देकर वापस गोरखपुर लौट रही थी। ट्रेन में भारी भीड़ के कारण वह छात्रा AC कोच में जाकर खड़ी हो गई। मदद करने के नाम पर टीटीई राहुल कुमार (निवासी बिहार) ने छात्रा को विश्वास में लिया। सीट दिलाने और टिकट बनाने के बहाने वह उसे फर्स्ट AC (AC-1) के केबिन में ले गया। जैसे ही छात्रा केबिन के अंदर गई, आरोपी ने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और वहां उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। एक NCC कैडेट, जो खुद देश की सुरक्षा के लिए तैयार हो रही थी, वह रेलवे के एक जिम्मेदार कर्मचारी की हवस का शिकार बन गई।

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टीटीई फरार, पुलिस के हाथ अब भी खाली

हैरानी की बात यह है कि जब पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर 112 पर कॉल किया और मामले की जानकारी दी, तब तक आरोपी टीटीई राहुल कुमार देवरिया स्टेशन पर उतरकर बड़ी आसानी से फरार हो गया। सवाल यह उठता है कि क्या रेलवे के पास ऐसा कोई प्रोटोकॉल नहीं था कि स्टेशन पर उसे तुरंत घेरा जा सकता? फिलहाल, GRP ने आरोपी पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है और पूर्वोत्तर रेलवे (NER) ने उसे निलंबित कर दिया है। लेकिन क्या निलंबन काफी है? क्या ऐसे अपराधियों को पहले ही कड़ी स्क्रीनिंग के जरिए बाहर नहीं किया जाना चाहिए था?

प्रशासनिक विफलता: कब तक जारी रहेगी ऐसी दरिंदगी?

यह पहली बार नहीं है जब रेलवे के कर्मचारियों पर इस तरह के संगीन आरोप लगे हैं। लेकिन इस बार मामला इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि यह घटना ट्रेन के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले ‘फर्स्ट क्लास केबिन’ में हुई है। सरकार ‘बेटी बचाओ’ का नारा लगाती है, लेकिन जब वही बेटी एक सरकारी विभाग के कर्मचारी की देखरेख में असुरक्षित हो, तो जवाबदेही किसकी बनती है? राहुल कुमार की गिरफ्तारी के लिए टीमें पटना और बिहार के अन्य जिलों में छापेमारी तो कर रही हैं, लेकिन आरोपी का अब तक न मिलना पुलिसिया तंत्र की विफलता को दर्शाता है।

Indian Railway Horror

महिला यात्रियों के लिए खौफ का सफर

इस घटना ने महिला यात्रियों के मन में एक गहरा डर पैदा कर दिया है। अगर एक वर्दीधारी टीटीई पर भरोसा करना अपराध है, तो महिलाएं ट्रेन में किससे मदद मांगें? रेलवे की इंटीग्रेटेड हेल्पलाइन और सुरक्षा ऐप उस समय कहां थे जब केबिन का दरवाजा अंदर से बंद था? यह घटना रेलवे प्रशासन और सरकार के चेहरे पर एक काला धब्बा है, जिसका जवाब उन्हें देश की हर उस बेटी को देना होगा जो अकेले सफर करने की हिम्मत जुटाती है।

सिर्फ इनाम घोषित करने और निलंबन करने से न्याय नहीं होगा। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि राहुल कुमार जैसे दरिंदों को ऐसी सजा मिले जो मिसाल बन जाए। साथ ही, रेलवे को अपनी चयन प्रक्रिया और ऑन-ड्यूटी स्टाफ की मॉनिटरिंग पर पुनर्विचार करने की सख्त जरूरत है।

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Nutritional Deficiency: सिर्फ रोटी चावल खाकर पेट भर रहे हैं? आपके शरीर को खोखला कर रही हैं ये 3 बड़ी गलतियां

Nutritional Deficiency

क्या आपको भी लगता है कि अगर आपने दोपहर में 4 रोटी और रात में एक प्लेट चावल खा लिया, तो आपको पूरा पोषण (Nutrition) मिल गया? क्या आप भी वजन बढ़ाने के लिए घर वालों की सलाह मानकर बस ‘भात’ (Rice) और आलू ठूंस रहे हैं? अगर हाँ, तो संभल जाइए! आज का सच … Read more