Nitish Kumar Launch Bihar Diary & Calendar 2026: ‘सात निश्चय-3’ के साथ विकसित बिहार का नया रोडमैप जारी!

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Patna, 2 January 2026: नए साल के अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने Bihar के विकास को एक नई ऊंचाई देने के लिए ‘Bihar Diary 2026’ और ‘राजकीय कैलेंडर 2026’ का विमोचन किया है। पटना स्थित ‘संकल्प’ कक्ष में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राज्य की जनता को नए साल की शुभकामनाएं देते हुए बिहार की नई विकास नीति ‘सात निश्चय-3.0’ की झलक पेश की।

यह कैलेंडर सिर्फ तारीखें बताने वाला पन्ना नहीं है, बल्कि यह 2025 से 2030 तक के ‘विकसित बिहार’ के संकल्प का एक विजुअल दस्तावेज है।

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क्या है इस साल के कैलेंडर में खास?

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (IPRD) द्वारा प्रकाशित इस कैलेंडर के हर पन्ने पर बिहार की बदलती तस्वीर और भविष्य के लक्ष्यों को दर्शाया गया है।

थीम: इस बार के कैलेंडर की मुख्य थीम ‘सात निश्चय-3’ है।

विजुअल्स: कैलेंडर के 12 पन्नों पर राज्य की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की शानदार तस्वीरें लगाई गई हैं।

अंतिम पृष्ठ: कैलेंडर के आखिरी पन्ने पर बिहार के ‘सुपर फूड मखाना’ को जगह दी गई है, जो अब बिहार की वैश्विक पहचान बन चुका है।

सात निश्चय-3.0: विकसित बिहार के 7 स्तंभ

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सात निश्चय-1 और 2 की सफलता के बाद अब ‘सात निश्चय-3’ के जरिए बिहार को देश के सबसे विकसित राज्यों की श्रेणी में लाया जाएगा। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

दोगुना रोजगार – दोगुनी आय: युवाओं के लिए 1 करोड़ नौकरियों और स्वरोजगार के अवसरों का लक्ष्य।

समृद्ध उद्योग – सशक्त बिहार: MSME और निजी निवेश को बढ़ावा देना।

खेती से खुशहाली: चौथे कृषि रोडमैप के जरिए किसानों की आय बढ़ाना।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना।

सुलभ स्वास्थ्य सेवा: गांवों तक बेहतर मेडिकल सुविधाएं और ‘नो प्राइवेट प्रैक्टिस’ नीति का कड़ाई से पालन।

आधुनिक बुनियादी ढांचा: नए एक्सप्रेस-वे, मेट्रो विस्तार और स्मार्ट शहरों का निर्माण।

सबका सम्मान – आसान जीवन: तकनीक और नवाचार के जरिए सुशासन (Good Governance)।

युवाओं और महिलाओं के लिए खास क्या है?

इस नए रोडमैप में जाति आधारित गणना 2023 में पहचाने गए 94 लाख गरीब परिवारों को प्राथमिकता दी जाएगी। महिलाओं के लिए ‘मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना’ के तहत आर्थिक मदद को और सरल बनाया गया है। साथ ही, फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए बिहार में नए फिल्म सिटी के निर्माण का विज़न भी इस डायरी में साझा किया गया है।

नीतीश सरकार का यह कैलेंडर 2026 यह संदेश देता है कि सरकार अब ‘सर्वांगीण विकास’ (All-round Development) की ओर कदम बढ़ा चुकी है। चाहे वो मखाना का निर्यात हो या आईटी पॉलिसी 2024, बिहार अब रुकने वाला नहीं है।

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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न):

• बिहार डायरी 2026 कहाँ से मिलेगी? यह सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के काउंटरों और प्रमुख सरकारी कार्यालयों में वितरण के लिए उपलब्ध होगी।

• सात निश्चय-3 कब तक चलेगा? यह योजना 2025 से 2030 तक के लिए तैयार की गई है।

क्या आप सात निश्चय-3 के तहत आने वाली नई नौकरियों की लिस्ट देखना चाहते हैं? मुझे बताएं, मैं पूरी जानकारी दे दूँगा।

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Bihar PACS Membership Campaign 2026: अब पंचायत स्तर पर मिलेंगी 25+ सरकारी सेवाएं, जानें कैसे बनें सदस्य!

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बिहार के ग्रामीण विकास और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में नीतीश सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। 2 जनवरी 2026 से राज्य के हर पंचायत में पैक्स (PACS) सदस्यता सह जागरूकता अभियान की शुरुआत होने जा रही है। अब पैक्स केवल खाद और बीज तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि ये गांव के “मिनी सचिवालय” और “सर्विस सेंटर” के रूप में काम करेंगे।

पैक्स अब सिर्फ एक समिति नहीं, बल्कि ‘मल्टी-सर्विस सेंटर’ है

सहकारिता मंत्री प्रमोद कुमार के अनुसार, बिहार में पैक्स को कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के रूप में विकसित किया गया है। अब राज्य के किसान और ग्रामीण निवासी एक ही छत के नीचे 25 से अधिक डिजिटल और बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।

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पैक्स में मिलने वाली प्रमुख 25 सेवाएं:

पैक्स अब हाई-टेक हो चुके हैं। यहाँ मिलने वाली प्रमुख सेवाओं की सूची इस प्रकार है:

• बैंकिंग सेवाएं: आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (AePS) के जरिए पैसे निकालना और जमा करना।

• डिजिटल इंडिया सेवाएं: पैन कार्ड, आधार अपडेट, और बिजली बिल का भुगतान।

• कृषि इनपुट: खाद, उन्नत बीज और कीटनाशकों की उपलब्धता।

• जन औषधि केंद्र: सस्ती और जेनेरिक दवाओं की बिक्री (302 पैक्स को मंजूरी)।

• अन्न भंडारण: ‘विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना’ के तहत गोदाम की सुविधा।

• प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र: मिट्टी जांच और आधुनिक खेती का प्रशिक्षण।

• पेट्रोल और डीजल डीलरशिप: चुनिंदा पैक्स पर अब पेट्रोल पंप भी खुल रहे हैं।

• एलपीजी वितरण: ग्रामीण इलाकों में गैस सिलेंडर की आसान पहुंच।

• सब्जी आउटलेट: ‘तरकारी’ ब्रांड के तहत ताजी सब्जियों का विपणन।

• बीमा और पेंशन: फसल बीमा (PMFBY) और ई-श्रम पंजीकरण जैसी सुविधाएं।

2 जनवरी से सदस्यता अभियान: आप कैसे जुड़ सकते हैं?

बिहार में वर्तमान में लगभग 1.38 करोड़ पैक्स सदस्य हैं। सरकार का लक्ष्य इस संख्या को और बढ़ाना है ताकि सहकारी लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

• योग्यता: आवेदन करने वाला व्यक्ति उसी पंचायत का स्थाई निवासी होना चाहिए।

• आयु सीमा: आवेदक की उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।

• प्रक्रिया: आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से सदस्य बन सकते हैं। 2 जनवरी से आपके पंचायत मुख्यालय पर विशेष कैंप लगाए जाएंगे।

किसानों को क्या होगा सीधा फायदा?

• MSP पर धान खरीद: इस सीजन में अब तक 9.53 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है, जिसका भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में 48 घंटे के भीतर किया जा रहा है।

• गोल्ड लोन की सुविधा: बिहार स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के माध्यम से अब पैक्स के जरिए गोल्ड लोन भी दिया जा रहा है।

• बिचौलियों से मुक्ति: डिजिटल होने के कारण अब खाद-बीज की कालाबाजारी पर रोक लगेगी।

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बदल रहा है ग्रामीण बिहार

पैक्स का डिजिटलीकरण और 25 सेवाओं का एकीकरण बिहार के गांवों के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है। यदि आप भी एक किसान हैं या ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं, तो 2 जनवरी के अभियान का हिस्सा जरूर बनें और पैक्स के सदस्य बनकर इन सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं।

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बिहार में नौकरियों की महा-बहार: 5,500 लाइब्रेरियन और 7,000 विशेष शिक्षकों की बहाली पर लगी मुहर

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बिहार के शिक्षा विभाग ने नए साल की दहलीज पर राज्य के बेरोजगार युवाओं को एक बड़ी सौगात दी है। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट किया कि नीतीश सरकार राज्य के शैक्षणिक ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्री जी ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि बिहार में जल्द ही 5,500 लाइब्रेरियन और लगभग 7,279 विशेष शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इस घोषणा के बाद उन लाखों अभ्यर्थियों के चेहरे पर खुशी लौट आई है, जो लंबे समय से रिक्तियों का इंतजार कर रहे थे।

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लाइब्रेरियन बहाली: 14 वर्षों का लंबा इंतजार होगा खत्म

बिहार के पुस्तकालयों की स्थिति सुधारने के लिए सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। आपको बता दें कि राज्य में साल 2010-11 के बाद से लाइब्रेरियन की कोई बड़ी बहाली नहीं हुई है। शिक्षा मंत्री ने बताया कि विभागीय स्तर पर रोस्टर क्लीयरेंस का काम लगभग पूरा कर लिया गया है। इन 5,500 पदों पर नियुक्ति के लिए पात्रता परीक्षा (Librarian Eligibility Test) का आयोजन किया जा सकता है, जिसके बाद BPSC के माध्यम से अंतिम चयन होगा। यह कदम न केवल पुस्तकालयों को पुनर्जीवित करेगा, बल्कि डिग्री धारक युवाओं के करियर को भी नई दिशा देगा।

दिव्यांग बच्चों के लिए 7,000 विशेष शिक्षकों की नियुक्ति

समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) को धरातल पर उतारने के लिए बिहार सरकार अब विशेष बच्चों की पढ़ाई पर जोर दे रही है। राज्य के विभिन्न सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे दिव्यांग बच्चों की जरूरतों को पूरा करने के लिए 7,279 विशेष शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। इन शिक्षकों का मुख्य कार्य दिव्यांग छात्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं को समझना और उन्हें सामान्य छात्रों के साथ मुख्यधारा में लाना होगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि इन पदों के लिए अधियाचना जल्द ही आयोग को भेजी जाएगी, ताकि समय रहते स्कूलों में शिक्षकों की कमी को पूरा किया जा सके।

BPSC TRE-4 और शिक्षा विभाग का आगामी रोडमैप

शिक्षक बहाली के क्षेत्र में बिहार पहले से ही देश में मिसाल पेश कर रहा है। इसी सिलसिले को जारी रखते हुए शिक्षा मंत्री ने BPSC TRE-4 (चौथे चरण की शिक्षक नियुक्ति) का भी जिक्र किया। उन्होंने संकेत दिया कि जनवरी 2026 के मध्य तक करीब 25,000 से अधिक रिक्तियों की सूची आयोग को सौंप दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले कुछ महीनों में शिक्षा विभाग के अंदर खाली पड़े सभी तकनीकी और गैर-तकनीकी पदों को भर लिया जाए, जिससे राज्य की शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता में क्रांतिकारी बदलाव आए।

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अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव और तैयारी की रणनीति

इन बड़े पदों पर होने वाली बहाली को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगिता काफी कठिन होने वाली है। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक नोटिफिकेशन का इंतजार न करें, बल्कि अपने संबंधित विषयों की तैयारी अभी से शुरू कर दें। विशेष रूप से लाइब्रेरियन पद के लिए तकनीकी ज्ञान और सामान्य अध्ययन (General Studies) पर पकड़ बनाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, उम्मीदवारों को अपने दस्तावेजों, जैसे शैक्षणिक प्रमाण पत्र और आरक्षण संबंधी कागजों को अपडेट रखने की सलाह दी गई है ताकि आवेदन के समय किसी प्रकार की तकनीकी दिक्कत न हो।

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राजगीर के होटल में ‘गंदा धंधा’: आर्केस्ट्रा के नाम पर युवतियों से जबरन देह व्यापार, पुलिस की छापेमारी में 15 लड़कियां मुक्त

राजगीर

बिहार के पर्यटन स्थल राजगीर से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ के एक नामी होटल में चल रहे सेक्स रैकेट का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई में पुलिस ने 15 युवतियों को नरक से आजाद कराया है और मौके से 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

कैसे हुआ इस बड़े रैकेट का खुलासा?

नालंदा पुलिस को पिछले कुछ समय से सूचना मिल रही थी कि राजगीर थाना क्षेत्र के धुर्वा मोड़ स्थित ‘आदित्या रेसिडेंसी’ (Aditya Residency) होटल में संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं। सूचना की पुष्टि होने के बाद डीएसपी सुनील कुमार सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया और होटल पर अचानक दबिश दी गई।

पुलिस जब होटल के कमरों में दाखिल हुई, तो वहां का नजारा देख दंग रह गई। होटल के अलग-अलग कमरों में युवतियों को रखा गया था, जिनसे जबरन गलत काम कराया जा रहा था।

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UP और बंगाल से बुलाई गई थीं लड़कियां

मुक्त कराई गई 15 युवतियों में से अधिकांश उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की रहने वाली हैं। पूछताछ में युवतियों ने जो खुलासे किए, वे चौंकाने वाले हैं:

आर्केस्ट्रा का झांसा: लड़कियों को अच्छी कमाई और आर्केस्ट्रा में डांस के नाम पर राजगीर बुलाया गया था।

मारपीट और धमकी: युवतियों का आरोप है कि होटल संचालक उन्हें डरा-धमकाकर और उनके साथ मारपीट कर जबरन देह व्यापार के धंधे में धकेलता था।

बंधक जैसा व्यवहार: उन्हें होटल से बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी और उन पर कड़ी नजर रखी जाती थी।

पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारियां

इस छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। हालांकि, होटल संचालक समेत 6 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। मुख्य आरोपी (होटल संचालक) फिलहाल फरार बताया जा रहा है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।

पुलिस ने क्या जब्त किया?

• कई आपत्तिजनक सामान।

• रजिस्टर और मोबाइल फोन (जिससे ग्राहकों से संपर्क साधा जाता था)।

• नकदी।

इलाके के होटलों में मचा हड़कंप

राजगीर जैसे पवित्र और पर्यटन स्थल पर इस तरह के अनैतिक कार्यों के खुलासे के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई के बाद राजगीर के अन्य होटल संचालकों में भी हड़कंप मच गया है। पुलिस प्रशासन ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि किसी भी होटल में ऐसी गतिविधियां पाई गईं, तो होटल को सील करने के साथ-साथ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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आगे क्या होगा?

पुलिस ने सभी 15 युवतियों का मेडिकल परीक्षण करवा लिया है। अब उन्हें कोर्ट में पेश कर उनके बयान दर्ज कराए जाएंगे, जिसके बाद उन्हें उनके परिजनों को सौंपा जाएगा या सुरक्षा गृह भेजा जाएगा।

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Bihar NEET PG Round 2 Revised Allotment 2025: BCECEB ने जारी किया संशोधित रिजल्ट, छात्र 29 दिसंबर तक पूरा करें नामांकन

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बिहार में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे उन तमाम पीजी अभ्यर्थियों के लिए राहत भरी खबर है जो पिछले कुछ दिनों से असमंजस की स्थिति में थे। बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (BCECEB) ने NEET PG राउंड 2 के लिए संशोधित (Revised) सीट अलॉटमेंट परिणाम आधिकारिक तौर पर जारी कर दिया है। यह कदम विभाग द्वारा पहले जारी किए गए परिणाम में पाई गई तकनीकी खामियों को दूर करने के बाद उठाया गया है। अब राज्य के मेडिकल कॉलेजों में नामांकन की प्रक्रिया नए सिरे से तय किए गए नियमों और सुधारों के साथ शुरू हो गई है।

तकनीकी त्रुटियों के कारण पिछला परिणाम हुआ था रद्द

आपको बता दें कि BCECEB ने इससे पहले जो आवंटन सूची जारी की थी, उसमें सॉफ्टवेयर और डेटा प्रोसेसिंग से जुड़ी कुछ गंभीर तकनीकी त्रुटियां सामने आई थीं। छात्रों की ओर से उठाई गई चिंताओं और सिस्टम की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बोर्ड ने पिछले रिजल्ट को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया था। संशोधित सूची जारी होने के बाद अब उन सभी विसंगतियों को दूर कर लिया गया है, जिससे मेधावी छात्रों को उनकी रैंक के आधार पर सही कॉलेज और स्ट्रीम आवंटित की जा सके।

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अलॉटमेंट लेटर डाउनलोड करने की समय सीमा और प्रक्रिया

संशोधित परिणाम जारी होने के बाद छात्रों के पास अपना अलॉटमेंट लेटर डाउनलोड करने के लिए बहुत ही सीमित समय बचा है। आधिकारिक सूचना के अनुसार, अभ्यर्थी 29 दिसंबर 2025 तक बोर्ड की वेबसाइट से अपना प्रोविजनल अलॉटमेंट लेटर डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए उम्मीदवारों को अपने PGMAC आईडी और पासवर्ड का उपयोग करना होगा। विशेषज्ञों का सुझाव है कि छात्र अंतिम समय में वेबसाइट पर होने वाले भारी ट्रैफिक या सर्वर की समस्या से बचने के लिए जल्द से जल्द अपना लेटर प्राप्त कर लें।

नामांकन और रिपोर्टिंग के लिए अंतिम तिथि का रखें ध्यान

सीट आवंटन प्राप्त करने के बाद अगली सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया संबंधित मेडिकल कॉलेज में उपस्थिति दर्ज कराना और दस्तावेजों का सत्यापन (Document Verification) कराना है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि 28 और 29 दिसंबर 2025 को ही रिपोर्टिंग और नामांकन की प्रक्रिया संपन्न की जाएगी। यदि कोई अभ्यर्थी निर्धारित समय सीमा के भीतर आवंटित कॉलेज में नहीं पहुंचता है, तो उसका नामांकन रद्द कर दिया जाएगा। इसके साथ ही, देरी होने की स्थिति में उम्मीदवार की सिक्योरिटी मनी भी जब्त की जा सकती है, इसलिए समय का पालन करना अनिवार्य है।

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दस्तावेजों की तैयारी और छात्रों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश

नामांकन के समय छात्रों को अपने सभी शैक्षणिक और व्यक्तिगत दस्तावेजों के ओरिजिनल कॉपी के साथ-साथ उनके दो सेट फोटोकॉपी भी साथ रखने चाहिए। इसमें NEET PG का एडमिट कार्ड, रैंक कार्ड, MBBS की मार्कशीट, इंटर्नशिप पूर्ण होने का प्रमाण पत्र और आरक्षण संबंधी कागजात मुख्य रूप से शामिल हैं। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे अपना अलॉटमेंट लेटर डाउनलोड करने के बाद उस पर दिए गए सभी निर्देशों को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि उसमें कॉलेज की विशेष रिपोर्टिंग शर्तों का उल्लेख होता है।

क्या आपको अपना पसंदीदा कॉलेज मिल गया है? या फिर आप मॉप-अप राउंड (Mop-up Round) का इंतजार कर रहे हैं? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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ISRO की ऐतिहासिक उड़ान: LVM3-M6 से BlueBird Block-2 की लॉन्चिंग के 5 सबसे अद्भुत दृश्य

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ISRO ने फिर रचा इतिहास! देखिए LVM3-M6 के ऑन-बोर्ड कैमरे से BlueBird Block-2 सैटेलाइट्स की लॉन्चिंग का पूरा सफर। रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो और मिशन की पूरी जानकारी हिंदी में। क्या आपने कभी सोचा है कि एक रॉकेट की नज़र से दुनिया कैसी दिखती है? जब टनों वजन वाला ‘बाहुबली’ रॉकेट धरती का सीना चीरकर आसमान की ओर बढ़ता है, तो वो नजारा कैसा होता है?

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक बार फिर दुनिया को चौंका दिया है। हाल ही में श्रीहरिकोटा से लॉन्च किए गए LVM3-M6 मिशन ने न केवल BlueBird Block-2 सैटेलाइट्स को सफलतापूर्वक उनकी कक्षा में स्थापित किया, बल्कि इस सफर का जो वीडियो जारी किया है, वह इंटरनेट पर वायरल हो रहा है।

इस ऑन-बोर्ड कैमरा फुटेज में लिफ्ट-ऑफ से लेकर सैटेलाइट इंजेक्शन तक का पूरा सफर कैद है। आज के इस ब्लॉग में हम आपको इस मिशन की हर बारीक डिटेल और उस वीडियो के रोमांचक पलों के बारे में बताएंगे।

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1. लिफ्ट-ऑफ: धरती छोड़ने का रोमांच

जैसे ही काउंटडाउन खत्म हुआ, भारत के सबसे शक्तिशाली रॉकेट LVM3 (Launch Vehicle Mark-3) ने अपनी पूरी ताकत के साथ उड़ान भरी।

ऑन-बोर्ड कैमरे ने दिखाया कि कैसे रॉकेट के S200 सॉलिड बूस्टर्स में आग लगी और वह धुएं के गुबार को पीछे छोड़ता हुआ ऊपर उठा। वीडियो में आप साफ देख सकते हैं कि लॉन्च पैड धीरे-धीरे छोटा होता जा रहा है और रॉकेट बादलों को चीरता हुआ नीले आसमान की तरफ बढ़ रहा है। यह दृश्य किसी हॉलीवुड फिल्म के सीन से कम नहीं था।

2. रॉकेट के नजरिए से अंतरिक्ष का सफर

इस मिशन की सबसे खास बात वह वीडियो है जो रॉकेट पर लगे कैमरों ने रिकॉर्ड किया। इसे देखते हुए ऐसा लगता है जैसे हम खुद रॉकेट पर सवार हैं।

S200 बूस्टर्स का अलग होना: लॉन्च के कुछ मिनटों बाद, दो विशाल सॉलिड बूस्टर्स रॉकेट से अलग होते हुए दिखाई देते हैं। यह दृश्य भौतिकी (Physics) और इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन नमूना है।

पृथ्वी का कर्व (Curve): जैसे-जैसे रॉकेट ऊंचाई पर पहुंचता है, कैमरे में नीली पृथ्वी का गोलाकार रूप दिखाई देने लगता है। अंतरिक्ष के काले सन्नाटे और चमकदार पृथ्वी का यह कंट्रास्ट मंत्रमुग्ध कर देने वाला है।

3. BlueBird Block-2: क्या है यह खास पेलोड?

इस मिशन का मुख्य उद्देश्य BlueBird Block-2 सैटेलाइट्स को लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित करना था। लेकिन ये सैटेलाइट्स इतने खास क्यों हैं?

ये सैटेलाइट्स AST SpaceMobile द्वारा बनाए गए हैं। इनका मकसद अंतरिक्ष से सीधे आपके मोबाइल फोन पर 5G कनेक्टिविटी पहुंचाना है। यानी भविष्य में नेटवर्क की समस्या खत्म हो सकती है, चाहे आप पहाड़ों पर हों या समंदर के बीच। LVM3-M6 ने इन भारी-भरकम सैटेलाइट्स को मक्खन की तरह अंतरिक्ष में छोड़ दिया।

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4. पे-लोड फेयरिंग का खुलना: जैसे खिलता हुआ फूल

वीडियो का सबसे रोमांचक हिस्सा वह है जब रॉकेट वातावरण से बाहर निकलता है और पेलोड फेयरिंग (Heat Shield) अलग होती है।

ऑन-बोर्ड विजुअल्स में यह किसी फूल के खिलने जैसा लगता है। जैसे ही फेयरिंग हटती है, सैटेलाइट्स पहली बार अंतरिक्ष के संपर्क में आते हैं। यह प्रक्रिया इतनी स्मूथ थी कि इसे देखकर ISRO के वैज्ञानिकों की सटीकता पर गर्व होता है।

5. ISRO और NSIL की एक और बड़ी कामयाबी

यह मिशन न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के तहत एक कमर्शियल मिशन था। LVM3, जिसे प्यार से “Fat Boy” भी कहा जाता है, ने साबित कर दिया है कि वह भारी विदेशी सैटेलाइट्स को भी आसानी से लॉन्च कर सकता है।

इस लॉन्च की सफलता ने ग्लोबल स्पेस मार्केट में भारत की स्थिति को और मजबूत कर दिया है। एलन मस्क की SpaceX जैसी कंपनियों के बीच ISRO का यह सस्ता और विश्वसनीय विकल्प पूरी दुनिया को आकर्षित कर रहा है।

6. वीडियो ने क्यों मचाई धूम?

आमतौर पर हम लॉन्च को जमीन से देखते हैं, लेकिन रॉकेट के साथ लगे कैमरे का व्यू (POV) एक अलग ही अनुभव देता है।

इंजन की लपटें।

हवा का दबाव।

शून्य गुरुत्वाकर्षण (Zero Gravity) में सैटेलाइट का तैरना।

यह सब कुछ उस वीडियो में इतनी हाई डेफिनेशन (HD) क्वालिटी में है कि इसे बार-बार देखने का मन करता है। यह वीडियो विज्ञान के छात्रों और स्पेस लवर्स के लिए किसी खजाने से कम नहीं है।

ISRO का LVM3-M6 मिशन सिर्फ एक सैटेलाइट लॉन्च नहीं था, बल्कि यह भारत की बढ़ती तकनीकी शक्ति का प्रदर्शन था। BlueBird Block-2 के सफल प्रक्षेपण से संचार के क्षेत्र में क्रांति आने वाली है।

अगर आपने अभी तक वह ऑन-बोर्ड कैमरा वीडियो नहीं देखा है, तो तुरंत ISRO के सोशल मीडिया हैंडल पर जाएं

और उस जादुई पल का अनुभव करें।

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आपका अगला कदम:

क्या आपको अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि है? हमें कमेंट में बताएं कि ISRO का कौन सा मिशन आपका सबसे पसंदीदा रहा है – चंद्रयान-3 या यह LVM3-M6? इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें!

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Bihar Minority Residential School: नीतीश सरकार का बड़ा तोहफा! अब अल्पसंख्यक छात्रों के लिए पढ़ाई और रहना बिल्कुल मुफ्त, जानें कैसे करें आवेदन

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बिहार के अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। राज्य सरकार ने किशनगंज और दरभंगा में अत्याधुनिक अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय (Minority Residential Schools) खोलने का ऐलान किया है। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ छात्रों को न केवल विश्वस्तरीय शिक्षा मिलेगी, बल्कि उनका रहना और खाना भी पूरी तरह निःशुल्क (Free) होगा।

अगर आप या आपके परिचित इस श्रेणी में आते हैं, तो यह खबर आपके भविष्य को बदल सकती है। आइए जानते हैं इस योजना की पूरी बारीकी और आवेदन की प्रक्रिया।

नीतीश

किन छात्रों को मिलेगा इसका लाभ?

बिहार सरकार की इस योजना के तहत निम्नलिखित अल्पसंख्यक समुदायों के छात्र आवेदन कर सकते हैं:

• मुस्लिम

• सिख

• ईसाई

• बौद्ध

• जैन

• पारसी

प्रमुख विशेषताएं और सुविधाएं

ये विद्यालय केवल स्कूल नहीं, बल्कि छात्रों के सर्वांगीण विकास के केंद्र होंगे। यहाँ मिलने वाली प्रमुख सुविधाएं इस प्रकार हैं:

पूरी तरह मुफ्त शिक्षा: कक्षा 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई का कोई शुल्क नहीं।

आवासीय सुविधा: रहने के लिए सुरक्षित छात्रावास (Hostel) और पौष्टिक भोजन।

स्टाइपेंड और सामग्री: छात्रों को ड्रेस, जूते-मौजे, किताबें और दैनिक उपयोग की वस्तुएं (तेल, साबुन, तौलिया आदि) भी मुफ्त दी जाएंगी।

आधुनिक लैब और कोचिंग: स्कूलों में साइंस और आर्ट्स संकाय के लिए आधुनिक प्रयोगशालाएं और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष कोचिंग की व्यवस्था होगी।

नामांकन (Admission) के लिए पात्रता और शर्तें

शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आवेदन करने से पहले इन मानदंडों को ध्यान से पढ़ें:

कक्षाएं: फिलहाल नामांकन केवल कक्षा 9वीं और कक्षा 11वीं (कला और विज्ञान संकाय) के लिए हो रहे हैं।

आयु सीमा: 9वीं कक्षा के लिए अधिकतम आयु 16 वर्ष और 11वीं के लिए 18 वर्ष निर्धारित है।

आय सीमा: छात्र के परिवार की वार्षिक आय 6 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।

आरक्षण का लाभ: * 75% सीटें ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए आरक्षित हैं।

• 50% सीटें छात्राओं (बालिकाओं) के लिए सुरक्षित रखी गई हैं।

नीतीश

आवेदन कैसे करें? (How to Apply)

आवेदन की प्रक्रिया को बेहद सरल रखा गया है ताकि सुदूर ग्रामीण इलाकों के बच्चे भी इसका लाभ उठा सकें:

ऑनलाइन आवेदन: छात्र अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.minoritywelfare.bih.nic.in पर जाकर फॉर्म भर सकते हैं।

ऑफलाइन आवेदन: फॉर्म डाउनलोड करके या संबंधित जिला अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय (Kishanganj/Darbhanga) से प्राप्त कर जमा किया जा सकता है।

महत्वपूर्ण तिथि: आवेदन करने की अंतिम तिथि 30 दिसंबर 2025 है।

चयन प्रक्रिया: नामांकन ‘मेधा सूची’ (Merit List) और प्रवेश परीक्षा के आधार पर किया जाएगा।

नीतीश सरकार का यह कदम बिहार में शिक्षा के स्तर को सुधारने और अल्पसंख्यक समुदाय के आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। अगर आप योग्य हैं, तो बिना देर किए 30 दिसंबर से पहले आवेदन जरूर करें।

क्या आप चाहते हैं कि हम आवेदन फॉर्म भरने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका बताएं? नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें!

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Bihar Police School : अब सिपाही का बेटा भी बनेगा अफसर! बिहार की सभी 40 पुलिस लाइनों में खुलेंगे नवोदय जैसे आवासीय विद्यालय

Bihar Police School

Bihar Police School : बिहार में सुशासन और पुलिस कल्याण की दिशा में नीतीश सरकार ने एक ऐसा क्रांतिकारी कदम उठाया है, जो आने वाले समय में पुलिस महकमे की तस्वीर बदल देगा। राज्य के उपमुख्यमंत्री और गृह विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे सम्राट चौधरी ने हाल ही में घोषणा की है कि अब बिहार की सभी 40 पुलिस लाइनों में नवोदय विद्यालय की तर्ज पर अत्याधुनिक आवासीय विद्यालय (Residential Schools) खोले जाएंगे। यह निर्णय उन हजारों पुलिसकर्मियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जो दिन-रात कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपने परिवार और बच्चों की खुशियों का त्याग करते हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में नया ‘पुलिस मॉडल’ और इसकी खासियतें

इस योजना की सबसे खास बात इसकी शैक्षणिक गुणवत्ता है। ये स्कूल केवल नाम के लिए नहीं, बल्कि नवोदय और सैनिक स्कूलों के पैटर्न पर विकसित किए जाएंगे। इन विद्यालयों में आधुनिक कक्षाएं, सुसज्जित लैबोरेट्रीज, विशाल लाइब्रेरी और खेल के मैदान जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं होंगी। सरकार का उद्देश्य है कि पुलिसकर्मियों के बच्चों को वैसी ही उच्च स्तरीय शिक्षा मिले जो बड़े शहरों के महंगे निजी स्कूलों में मिलती है। शुरुआत में इन स्कूलों को आठवीं कक्षा तक संचालित किया जाएगा, जिसे बाद में बढ़ाकर सीबीएसई (CBSE) मान्यता प्राप्त इंटरमीडिएट स्तर तक ले जाने की योजना है।

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तबादले की चिंता से मुक्ति और पढ़ाई में निरंतरता

दरअसल, पुलिस की नौकरी में बार-बार होने वाले तबादले (Transfers) बच्चों की शिक्षा में सबसे बड़ी बाधा बनते हैं। जब एक सिपाही या अधिकारी का स्थानांतरण किसी दूर-दराज के जिले में होता है, तो सबसे पहले उनके बच्चों का स्कूल और पढ़ाई का माहौल बदल जाता है। सम्राट चौधरी का यह विजन इसी समस्या का स्थाई समाधान है। अब पुलिस लाइन के भीतर ही स्कूल होने से, ट्रांसफर की स्थिति में भी बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होगी, क्योंकि उन्हें एक ही जिले से दूसरे जिले के ‘पुलिस स्कूल’ में आसानी से शिफ्ट किया जा सकेगा। इससे पुलिसकर्मी मानसिक रूप से निश्चिंत होकर अपनी ड्यूटी पर ध्यान दे पाएंगे।

आरक्षण और नामांकन का पारदर्शी ढांचा

इन स्कूलों में नामांकन की प्रक्रिया को भी बहुत संतुलित रखा गया है। प्रस्तावित योजना के अनुसार, इन स्कूलों में 50 प्रतिशत सीटें पुलिसकर्मियों के बच्चों के लिए आरक्षित होंगी, जिसमें शहीद जवानों, सेवानिवृत्त कर्मियों और वर्तमान में कार्यरत जवानों के बच्चों को प्राथमिकता दी जाएगी। शेष 50 प्रतिशत सीटों पर सामान्य नागरिकों के बच्चों का नामांकन होगा, जिससे समाज के सभी वर्गों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिल सकेगा। यह समावेशी दृष्टिकोण न केवल पुलिस परिवारों को लाभान्वित करेगा बल्कि स्थानीय शिक्षा के स्तर को भी ऊपर उठाएगा।

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भोजन और स्वास्थ्य: एक संपूर्ण कल्याणकारी पैकेज

शिक्षा के साथ-साथ उपमुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों के बुनियादी सुख-सुविधाओं और स्वास्थ्य पर भी विशेष जोर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनवरी 2026 तक राज्य की सभी पुलिस लाइनों में ‘जीविका दीदी की रसोई’ की शुरुआत कर दी जाएगी, ताकि जवानों को मेस में घर जैसा शुद्ध और पौष्टिक भोजन मिल सके। इसके साथ ही, पुलिसकर्मियों के लिए मेडिकल इंश्योरेंस को पूरी तरह ‘कैशलेस’ करने की तैयारी भी अंतिम चरण में है। इन समन्वित प्रयासों से स्पष्ट है कि बिहार सरकार अब पुलिस बल के केवल काम पर ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के भविष्य और स्वास्थ्य पर भी निवेश कर रही है।

बिहार पुलिस के मनोबल में होगी ऐतिहासिक वृद्धि

झारखंड के अलग होने के बाद बिहार में पुलिसकर्मियों के बच्चों के लिए ऐसे विशेष स्कूलों की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी। हजारीबाग का प्रसिद्ध विद्यालय झारखंड में चले जाने के बाद से यह मांग उठ रही थी। अब इस नई पहल से न केवल बिहार पुलिस का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि पुलिस महकमे में काम करने वाली महिला कर्मियों के लिए भी बच्चों की परवरिश और नौकरी के बीच तालमेल बिठाना आसान हो जाएगा। यह कदम बिहार में ‘पुलिसिंग विद केयर’ की नई मिसाल पेश करेगा।

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Bihar Weather Update : बिहार में ‘कोल्ड डे’ का तांडव! 24 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी, अगले 48 घंटों में और गिरेगा पारा

Bihar Weather Update

Bihar Weather Update : बिहार में कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। पिछले कुछ दिनों से सूरज की लुका-छिपी और बर्फीली पछुआ हवाओं के कारण पूरा प्रदेश ठिठुर रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) ने बिहार के मौसम को लेकर एक ताज़ा और गंभीर चेतावनी जारी की है।

24 जिलों में ‘कोल्ड डे’ का ऑरेंज अलर्ट

मौसम विभाग ने बिहार के 24 जिलों के लिए ‘कोल्ड डे’ (Cold Day) और ‘घने कोहरे’ का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 2 से 3 दिनों में न्यूनतम तापमान में  गिरावट दर्ज की जा सकती है।

इन जिलों में रेड अलर्ट और ऑरेंज अलर्ट की स्थिति:

रेड अलर्ट (अत्यधिक घना कोहरा): गया, औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर, बक्सर, भोजपुर और अरवल में अगले कुछ घंटों के लिए बहुत घने कोहरे की चेतावनी दी गई है। यहाँ दृश्यता (Visibility) 50 मीटर से भी कम रह सकती है।

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ऑरेंज अलर्ट (कोल्ड डे): पटना, मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, सीवान, सारण, गोपालगंज, सीतामढ़ी, शिवहर, दरभंगा, मधुबनी समेत 24 जिलों में शीत दिवस की स्थिति बनी रहेगी।

क्यों बढ़ रही है कनकनी?

हिमालयी क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी और वहां से आ रही ठंडी पछुआ हवाओं ने बिहार के मैदानी इलाकों में ठिठुरन बढ़ा दी है। नमी का स्तर ऊँचा होने और धूप नहीं निकलने के कारण दिन का अधिकतम तापमान भी सामान्य से काफी नीचे (लगभग 5°C से 6°C कम) चल रहा है, जिसे तकनीकी भाषा में ‘कोल्ड डे’ कहा जाता है।

ठंड का असर: स्कूल बंद और ट्रेनों की रफ्तार थमी

  • शिक्षा: भीषण ठंड को देखते हुए पटना, मुजफ्फरपुर, शिवहर और गया समेत कई जिलों के जिलाधिकारियों ने स्कूलों को 26 दिसंबर तक बंद करने का आदेश दिया है।
  • परिवहन: घने कोहरे के कारण पटना से गुजरने वाली 30 से अधिक ट्रेनें अपने निर्धारित समय से 5 से 10 घंटे की देरी से चल रही हैं। वहीं, विमानों की लैंडिंग में भी विजिबिलिटी कम होने की वजह से परेशानी आ रही है।

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गया रहा सबसे ठंडा शहर

पिछले 24 घंटों में गया बिहार का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहाँ न्यूनतम तापमान 8°C के आसपास दर्ज किया गया। वहीं, राजगीर में तापमान 6.6°C तक गिर गया है, जो कि शिमला के मौजूदा तापमान के बराबर है।

सावधानी और बचाव के उपाय:

• अनावश्यक बाहर न निकलें: विशेषकर बच्चे और बुजुर्ग सुबह और रात की ठंड से बचें।

• हीटर और अलाव: अलाव जलाते समय वेंटिलेशन का ध्यान रखें ताकि कार्बन मोनोऑक्साइड का खतरा न हो।

• वाहन चलाते समय सावधानी: कोहरे में फॉग लाइट का उपयोग करें और वाहन की गति धीमी रखें।

बिहार में फिलहाल ठंड से राहत मिलने के आसार नहीं हैं। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से 25 दिसंबर के बाद मौसम में और बदलाव आ सकता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें और सुरक्षित रहें।

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Railway Fare Hike : अब ट्रेन सफर हुआ महंगा! नॉन-AC पर ₹10 और AC पर सरचार्ज, लेकिन सुविधाओं का क्या? जानिए 5 कड़वे सच

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Indian Railway ने किराए में बढ़ोतरी कर दी है। नॉन-AC में 10 रुपये और AC में 2 पैसे/किमी की बढ़ोतरी हुई है। लेकिन क्या सुविधाएं सुधरीं? पढ़िए वेटिंग लिस्ट, लेट लतीफी और जनरल डिब्बों के हाल पर यह विस्तृत रिपोर्ट। भारतीय रेल, जिसे देश की ‘लाइफलाइन’ कहा जाता है, अब आम आदमी की जेब पर और भारी पड़ने वाली है। ताज़ा खबरों के मुताबिक, रेलवे ने किराए में चुपके से बढ़ोतरी कर दी है। एक तरफ जहां प्लेटफॉर्म टिकट के दाम पहले ही आसमान छू रहे थे, वहीं अब यात्रा का मूल किराया भी बढ़ा दिया गया है।

सरकार और रेलवे बोर्ड का तर्क हमेशा की तरह “बेहतर सुविधाओं और विकास” का है। लेकिन जमीनी हकीकत पर नजर डालें, तो यात्री आज भी उन्हीं पुरानी समस्याओं से जूझ रहे हैं जिनसे वे दस साल पहले जूझ रहे थे। आइए जानते हैं क्या है नया किराया और क्या है वो कड़वी सच्चाई जिसे हर यात्री झेल रहा है।

समझिए गणित: आपकी जेब से अब कितना एक्स्ट्रा जाएगा?

Railway के नए नोटिफिकेशन के अनुसार, किराए में दो तरह से बढ़ोतरी की गई है:

नॉन-AC (General & Sleeper) : अब नॉन-एसी क्लास के हर टिकट पर 10 रुपये का सीधा सरचार्ज या बढ़ा हुआ किराया जोड़ा गया है। सुनने में 10 रुपये कम लग सकते हैं, लेकिन एक गरीब मजदूर या डेली पैसेंजर के लिए महीने का हिसाब लगाने पर यह एक बड़ी रकम बन जाती है।

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AC क्लास : वातानुकूलित श्रेणियों (AC 3-Tier, 2-Tier, 1st Class) के लिए किराए में 2 पैसे प्रति किलोमीटर की बढ़ोतरी की गई है। यानी अगर आप 1000 किलोमीटर का सफर कर रहे हैं, तो आपकी टिकट का दाम अपने आप बढ़ जाएगा।

ट्रेनें कम, भीड़ ज्यादा: जनरल डिब्बों का ‘नरक’ जैसा हाल

किराया बढ़ने पर सबसे पहला सवाल यही उठता है कि क्या ट्रेनें बढ़ाई गईं? जवाब है – नहीं। आज भी लोकल पैसेंजर ट्रेनों (Passenger Trains) और जनरल बोगियों की हालत किसी से छिपी नहीं है। जनरल डिब्बों में पैर रखने की जगह नहीं होती। लोग टॉयलेट के पास बैठकर या दरवाजों पर लटककर जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। पैसेंजर ट्रेनों की संख्या घटाई जा रही है और ‘स्पेशल’ के नाम पर ज्यादा किराया वसूला जा रहा है, लेकिन सुविधाएं वही ‘भेड़-बकरी’ वाली हैं।

‘Confirm Ticket’ एक सपना: वेटिंग लिस्ट का मायाजाल

आप 4 महीने पहले टिकट बुक करें या 4 दिन पहले, Waiting List का झंझट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। त्योहारों की बात तो छोड़िये, सामान्य दिनों में भी कन्फर्म सीट मिलना लॉटरी जीतने जैसा हो गया है। तत्काल (Tatkal) का टिकट बुक करना किसी युद्ध लड़ने से कम नहीं है। चंद सेकंड में सारी सीटें गायब हो जाती हैं। हजारों यात्री वेटिंग टिकट लेकर प्लेटफॉर्म पर खड़े रहते हैं, और टीटीई के पास सीट नहीं होती। तो फिर किराया बढ़ाने का औचित्य क्या है जब सीट ही न मिले?

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ट्रेन लेट, तो हर्जाना कौन देगा?

Railway के नियमों के मुताबिक अगर आप टिकट कैंसिल करते हैं, तो कैंसिलेशन चार्ज (Cancellation Charge) तुरंत काट लिया जाता है। लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू देखिये:

अगर ट्रेन 10-12 घंटे लेट हो जाए, तो यात्री को क्या मिलता है? कुछ नहीं। सर्दियों में कोहरे के नाम पर और गर्मियों में मेंटेनेंस के नाम पर ट्रेनें घंटों नहीं, बल्कि दिनों तक लेट हो रही हैं। यात्री का समय बर्बाद होता है, उसकी कनेक्टिंग ट्रेन छूट जाती है, लेकिन रेलवे की तरफ से कोई जवाबदेही नहीं होती। पैसा पूरा लिया जाता है, लेकिन समय की कोई गारंटी नहीं।

कैंसिलेशन के नाम पर ‘लूट’

सबसे ज्यादा गुस्सा यात्रियों को तब आता है जब मजबूरी में टिकट कैंसिल करना पड़ता है। अगर ट्रेन कैंसिल हो जाए या डाइवर्ट हो जाए, तो रिफंड (Refund) लेने के लिए भी पापड़ बेलने पड़ते हैं। और अगर यात्री अपनी मर्जी से टिकट कैंसिल कराए, तो अच्छी-खासी रकम ‘क्लर्कल चार्ज’ और जीएसटी के नाम पर काट ली जाती है। वेटिंग टिकट, जो कन्फर्म ही नहीं हुआ, उसे कैंसिल कराने पर भी पैसा कटता है। यह सिस्टम आम आदमी की समझ से परे है।

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विकास चाहिए, लेकिन सुविधा भी

हम आधुनिकीकरण या ‘वंदे भारत’ जैसी नई ट्रेनों के खिलाफ नहीं हैं। देश को आगे बढ़ना चाहिए। लेकिन रेलवे का असली आधार वो करोड़ों यात्री हैं जो स्लीपर और जनरल क्लास में सफर करते हैं।

सिर्फ किराया बढ़ा देने से विकास नहीं होता। जब तक हर यात्री को सम्मानजनक तरीके से सीट नहीं मिलती, ट्रेनें समय पर नहीं चलतीं और वेटिंग लिस्ट का डर खत्म नहीं होता, तब तक यह बढ़ा हुआ किराया जनता को ‘जुर्माना’ ही लगेगा।

आपकी राय: क्या आप इस किराए बढ़ोतरी से सहमत हैं? या आपको लगता है कि रेलवे को पहले अपनी सुस्त व्यवस्था सुधारनी चाहिए? कमेंट बॉक्स में अपनी भड़ास जरूर निकालें!

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