बिहार में सांप काटने से मौत पर 10 लाख मुआवजा: नया ऐलान, ग्रामीण परिवारों को मिलेगी बड़ी राहत

बिहार में सांप काटने से मौत

बिहार में सांप काटने से होने वाली मौतों पर अब एक बड़ा बदलाव होने वाला है। राज्य विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि सर्पदंश से मृत्यु पर मिलने वाले मुआवजे को 4 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये किया जाए। यह फैसला ग्रामीण इलाकों में किसानों और मजदूरों के लिए वरदान साबित होगा, जहां मानसून के दौरान सांपों का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। अभी तक आपदा प्रबंधन विभाग सिर्फ 4 लाख देता था, लेकिन अब वन्यजीव हमले के बराबर मान्यता मिलेगी।

सर्पदंश मुआवजा बढ़ाने का पूरा बैकग्राउंड

बिहार में सांप काटने से मौत
King cobra

यह मुद्दा बिहार विधानसभा में जोरदार बहस के बाद उभरा। भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने सदन में सवाल उठाया कि वन्यजीव हमले पर 10 लाख मुआवजा मिलता है, तो सांप काटने पर क्यों सिर्फ 4 लाख? स्पीकर प्रेम कुमार ने बैठक बुलाई और वन्यजीव विभाग को सांप को वन्यजीव श्रेणी में शामिल करने की प्रक्रिया तेज करने को कहा। बिहार के खेतों-खलिहानों में सालाना सैकड़ों मौतें होती हैं, खासकर जून-सितंबर में। यह बदलाव उन परिवारों को आर्थिक सुरक्षा देगा जो पहले आर्थिक संकट में डूब जाते थे। प्रक्रिया पूरी होते ही अस्पताल के डेथ सर्टिफिकेट पर आधारित 10 लाख सीधे खाते में आएंगे।

वर्तमान मुआवजा व्यवस्था में क्या बदलाव आएगा?

पहले सर्पदंश को प्राकृतिक आपदा माना जाता था, जिसमें 4 लाख की सीमा थी। अब सांप को वन्यजीव घोषित करने से यह 10 लाख हो जाएगा, ठीक वैसे ही जैसे बाघ या हाथी हमले पर मिलता है। विधानसभा परिसर में हुई इस बैठक में स्पीकर ने साफ कहा कि ग्रामीण बिहार के हाशिए पर रहने वाले लोगों को न्याय मिलना चाहिए। नीलगाय जैसे अन्य खतरे पर भी चर्चा हुई, जहां फसल नुकसान के लिए शिकारियों की संख्या 400 तक बढ़ाई जाएगी। यह नीतिगत सुधार बिहार सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है, जो पटना से लेकर गांव तक पहुंचेगा।

बिहार के ग्रामीणों पर सर्पदंश का असर और महत्व

बिहार में प्रतिवर्ष 20,000 से ज्यादा सांप काटने के मामले दर्ज होते हैं, जिनमें 10% घातक साबित होते हैं। मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर जैसे जिलों में किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। पहले मुआवजा मिलने में देरी और कम राशि से परिवार टूट जाते थे। अब 10 लाख की यह राशि शिक्षा, इलाज और आजीविका के लिए सहारा बनेगी। स्वास्थ्य विभाग को भी एंटी-वेनम स्टॉक बढ़ाने के निर्देश मिले हैं। यह कदम न सिर्फ न्याय देगा, बल्कि जागरूकता अभियान को भी बढ़ावा मिलेगा।

बिहार में सांप काटने से मौत
Snake bite

आगे की प्रक्रिया और लाभार्थियों के लिए टिप्स

मुआवजा पाने के लिए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट जरूरी होगी, जिसमें सर्पदंश स्पष्ट लिखा हो। जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में आवेदन 30 दिनों के अंदर करना होगा। सरकार डिजिटल पोर्टल लॉन्च करने पर विचार कर रही है ताकि प्रक्रिया पारदर्शी बने। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई वाली सरकार इस फैसले से ग्रामीण वोटबैंक को मजबूत करने की कोशिश में भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सर्पदंश रोकथाम पर फोकस बढ़ेगा। अगर आप प्रभावित हैं, तो स्थानीय बीडीओ से संपर्क करें।

मेटा टाइटल: बिहार सांप काटने मौत मुआवजा 10 लाख: स्पीकर प्रेम कुमार का बड़ा फैसला | Bihar Snake Bite Compensation 2026

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Solar Eclipse 2026: बिहार में सूर्य ग्रहण आज! जानीये समय, प्रभाव और दर्शनीय चमत्कार की पूरी जानकारी

Solar Eclipse 2026

बिहार के लाखों लोगों के लिए 17 फरवरी 2026 का दिन खास होने वाला है, क्योंकि साल का पहला सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse 2026) आसमान में चमकेगा। यह खगोलीय घटना दोपहर 3:26 बजे से शुरू होकर शाम 6:47 बजे तक चलेगी, जिसमें चरम पर ‘रिंग ऑफ फायर’ का अद्भुत नजारा दिखेगा। बिहार में आंशिक सूर्य ग्रहण पूरे जोश के साथ दृश्यमान होगा, जो विज्ञान प्रेमियों, ज्योतिषियों और आमजन को आकर्षित करेगा। इस ब्लॉग में हम सूर्य ग्रहण 2026 के समय, प्रभाव, सुरक्षा उपायों और धार्मिक महत्व की विस्तृत जानकारी देंगे, ताकि आप इसे सुरक्षित रूप से एंजॉय कर सकें।

सूर्य ग्रहण 2026 का सटीक समय बिहार में

बिहार में सूर्य ग्रहण आज दोपहर 3:26 बजे स्पर्शकाल से प्रारंभ होगा, जब चंद्रमा सूर्य के सामने आना शुरू करेगा। ग्रहण का मध्यकाल शाम 5:03 बजे होगा, जहां ‘रिंग ऑफ फायर’ यानी वलयाकार सूर्य ग्रहण का सबसे रोमांचक क्षण दिखेगा। मोक्षकाल शाम 6:47 बजे समाप्त होगा, जिसकी कुल अवधि लगभग 4 घंटे 32 मिनट है। पटना, गया, भागलपुर और मुजफ्फरपुर जैसे शहरों में यह स्पष्ट दिखाई देगा। भारतीय समयानुसार यह घटना पूरे उत्तर भारत को प्रभावित करेगी, खासकर बिहार के खुले मैदानों में। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह एनुलर सूर्य ग्रहण है, जो दक्षिण गोलार्ध से शुरू होकर भारत तक पहुंचा है।

Surya grahan 2026

रिंग ऑफ फायर का चमत्कार: क्या है खास?

‘रिंग ऑफ फायर’ सूर्य ग्रहण का वह पल है जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता, बल्कि उसके चारों ओर आग की अंगूठी जैसा प्रकाश दिखता है। बिहार में शाम 5:03 बजे यह नजारा सबसे प्रमुख होगा, जो करीब 5-6 मिनट तक रहेगा। यह घटना 2026 की सबसे प्रमुख खगोलीय घटना है, जो चिली और अर्जेंटीना से होकर भारत पहुंची। बिहार के स्कूल-कॉलेज बंद होने और बोर्ड परीक्षा के बीच यह ग्रहण अतिरिक्त चर्चा का विषय बनेगा। दूरबीन या विशेष चश्मे से देखने पर यह और भी शानदार लगेगा, लेकिन नंगी आंखों से कभी न देखें।

धार्मिक महत्व और सूतक काल का असर

हिंदू ज्योतिष में सूर्य ग्रहण को अशुभ माना जाता है, इसलिए सूतक काल दोपहर 1:56 बजे से शुरू हो चुका है। इस दौरान पूजा-पाठ, भोजन और शुभ कार्य वर्जित हैं। ग्रहण के बाद स्नान, दान और गंगा स्नान का विशेष महत्व है। बिहार के मंदिरों जैसे महाबोधि मंदिर और विष्णुपद में विशेष पूजा आयोजित हो रही है। ज्योतिषी मानते हैं कि यह ग्रहण कर्क राशि वालों के लिए लाभकारी हो सकता है, लेकिन मेष और तुला राशि वालों को सावधानी बरतनी चाहिए। ग्रहण समाप्ति पर चंद्रमा दान करने से पितृ दोष दूर होता है।

Surya grahan bihar

बिहार में सूर्य ग्रहण देखने के सुरक्षा टिप्स

सूर्य ग्रहण को सुरक्षित देखने के लिए कभी नंगी आंखों से न देखें, इससे आंखों को नुकसान हो सकता है। विशेष सोलर फिल्टर चश्मा, पिनहोल प्रोजेक्टर या मोबाइल से अप्रत्यक्ष देखें। बिहार सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता अभियान चलाया है। मौसम विभाग ने साफ आसमान की भविष्यवाणी की है, लेकिन बादल छा जाएं तो धैर्य रखें। बच्चों को घर में रखें और ग्रहण के दौरान बिजली के उपकरण बंद रखें। NASA की लाइव स्ट्रीमिंग भी उपलब्ध है।

वैज्ञानिक दृष्टि से सूर्य ग्रहण का महत्व

वैज्ञानिकों के लिए यह ग्रहण सूर्य मंडल की गतिविधियों का अध्ययन करने का सुनहरा अवसर है। बिहार विश्वविद्यालय और पटना साइंस सेंटर में विशेष अवलोकन केंद्र बनाए गए हैं। यह घटना पृथ्वी के अक्षीय झुकाव और चंद्र कक्षा से जुड़ी है। भविष्य में अगला प्रमुख सूर्य ग्रहण 2027 में होगा। पर्यावरण प्रेमी इसे जलवायु परिवर्तन अध्ययन से जोड़ रहे हैं।

बिहार में ग्रहण की तैयारी और अपडेट्स

बिहार में ग्रहण को लेकर प्रशासन अलर्ट है। पटना में ट्रैफिक डायवर्जन और हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। सोशल मीडिया पर #SuryaGrahan2026 ट्रेंड कर रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत स्तर पर जागरूकता फैलाई जा रही है। यह घटना बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा के साथ संयोग से जुड़ी है, जिससे छात्र उत्साहित हैं। कुल मिलाकर, यह सूर्य ग्रहण 2026 बिहार के इतिहास में यादगार बनेगा। अधिक अपडेट्स के लिए बने रहें।

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बिहार में थमा लाखों पक्के घरों का निर्माण, नीतीश सरकार ने केंद्र से मांगे 3000 करोड़ रुपये; जानें क्या है पूरा मामला

बिहार

बिहार के ग्रामीण इलाकों में अपना पक्का घर बनाने का सपना देख रहे लाखों लाभार्थियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत लंबित 3,000 करोड़ रुपये की राशि जारी करने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। यह मांग ऐसे समय में की गई है जब राज्य में तकनीकी कारणों से करीब 9 लाख से अधिक घरों का निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है।

SNA खाते का पेच और फंड में देरी

बिहार विधानसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने स्वीकार किया कि ‘सिंगल नोडल अकाउंट’ (SNA) खोलने में हुई देरी के कारण केंद्र से फंड मिलने में समस्या आ रही है। दरअसल, केंद्र सरकार के नए नियमों के अनुसार, अब सभी योजनाओं का पैसा डिजिटल निगरानी के लिए SNA खाते के जरिए ही जारी किया जाना है। बिहार में अभी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है, जिसकी वजह से करोड़ों की राशि अटकी हुई है।

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पक्के घरों

9 लाख से ज्यादा घर अभी भी अधूरे

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए बिहार को कुल 12.19 लाख आवासों का लक्ष्य मिला था। इनमें से 12.08 लाख आवासों को स्वीकृति तो दे दी गई है, लेकिन फंड की कमी के कारण

9,16,709 आवासों का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है।

मंत्री ने बताया कि लगभग 72,492 लाभार्थियों को अभी पहली किस्त मिलना बाकी है, जबकि 3.26 लाख से अधिक लोग दूसरी किस्त का इंतजार कर रहे हैं। बिना अगली किस्त मिले, गरीब परिवारों के लिए छत डालना नामुमकिन हो गया है।

केंद्र से विशेष रियायत की मांग

राज्य सरकार ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से आग्रह किया है कि जब तक SNA खाता पूरी तरह सक्रिय नहीं हो जाता, तब तक नियमों में ढील देते हुए 31 मार्च, 2026 तक की राशि पुराने माध्यम से ही जारी कर दी जाए। इससे पहले जनवरी 2026 में केंद्र ने इसी तरह की राहत देते हुए 91 करोड़ रुपये जारी किए थे, जिससे कुछ लाभार्थियों को लाभ मिला था। अब सरकार की कोशिश है कि होली और वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले बाकी 3000 करोड़ रुपये भी मिल जाएं

लाभार्थियों पर क्या होगा असर?

अगर केंद्र सरकार यह फंड जारी कर देती है, तो बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्यों में तेजी आएगी। 31 मार्च की समयसीमा के भीतर आवास पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का दावा है कि फंड मिलते ही सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों (DBT) के जरिए किस्तों का भुगतान कर दिया जाएगा, ताकि मानसून शुरू होने से पहले लोग अपने नए घरों में प्रवेश कर सकें।

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PM Modi and Nitish Kumar

प्रमुख बिंदु (Quick Facts):

मांगी गई राशि: 3,000 करोड़ रुपये।

अधूरे आवास: 9,16,709 घर।

रुकी हुई किस्तें: पहली किस्त के लिए 72,492 और दूसरी के लिए 3.26 लाख लाभार्थी लंबित।

डेडलाइन: 31 मार्च 2026 तक फंड वितरण का लक्ष्य।

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बिहार जमीन रजिस्ट्री धमाका: अप्रैल 2026 से 4 गुना तक बढ़ेंगे रेट्स, जानें आपके जिले का हाल

बिहार जमीन रजिस्ट्री

बिहार में अपना घर बनाने या निवेश के लिए जमीन खरीदने का सपना देख रहे लोगों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य सरकार ने करीब एक दशक के लंबे इंतजार के बाद न्यूनतम मूल्यांकन दर (MVR) में आमूलचूल बदलाव करने का निर्णय लिया है। इस ऐतिहासिक फैसले के तहत, 1 अप्रैल 2026 से बिहार के सभी 38 जिलों में जमीन की रजिस्ट्री की सरकारी दरें कई गुना तक बढ़ जाएंगी। यह बदलाव न केवल रियल एस्टेट मार्केट की सूरत बदलेगा, बल्कि आम आदमी की जेब पर भी सीधा असर डालेगा।

MVR में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?

बिहार में वर्तमान में लागू सरकारी दरें (सर्किल रेट) जमीनी हकीकत और बाजार मूल्य से कोसों दूर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आखिरी बार 2013 और शहरी इलाकों में 2016 में दरों का संशोधन हुआ था। उदाहरण के तौर पर, पूर्णिया जैसे विकसित हो रहे शहरों में जहां बाजार भाव 5000-6000 रुपये प्रति वर्ग फीट है, वहीं सरकारी दर महज 1492 रुपये के आसपास अटकी है। इस भारी अंतर के कारण राज्य सरकार को हर साल करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा था। अब सरकार बाजार और सरकारी मूल्य के बीच के इस “गैप” को खत्म करने जा रही है।

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बिहार जमीन रजिस्ट्री धमाका

जिलों में सर्वे का काम अंतिम चरण में

मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के निर्देशानुसार, सभी जिलाधिकारियों (DM) की अध्यक्षता वाली समितियों ने सर्वे का कार्य लगभग पूरा कर लिया है। पूर्णिया, मुजफ्फरपुर, पटना, बेतिया और जहानाबाद जैसे जिलों में नई दरों का प्रस्ताव तैयार है। सूत्रों की मानें तो पटना के प्राइम लोकेशंस पर सर्किल रेट में 400% तक का उछाल आ सकता है। वहीं ग्रामीण इलाकों में, जहां पिछले 12 सालों से रेट नहीं बढ़े हैं, वहां भी कम से कम 2 से 3 गुना की बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।

रजिस्ट्री की लागत पर क्या होगा असर?

जैसे ही 1 अप्रैल 2026 से नई दरें प्रभावी होंगी, स्टांप ड्यूटी और निबंधन शुल्क सीधे तौर पर बढ़ जाएंगे। वर्तमान में जो रजिस्ट्री 1 लाख रुपये में हो जाती है, उसी के लिए भविष्य में 3 से 4 लाख रुपये तक चुकाने पड़ सकते हैं। इसका सबसे बड़ा असर मध्यम वर्ग और उन युवाओं पर पड़ेगा जो होम लोन लेकर प्लॉट खरीदना चाहते हैं। सर्किल रेट बढ़ने से बैंक लोन की राशि तो बढ़ सकती है, लेकिन खरीदार की ‘डाउन पेमेंट’ क्षमता पर भारी दबाव पड़ेगा।

क्या रियल एस्टेट मार्केट में आएगा भूचाल?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस घोषणा के बाद राज्य के निबंधन कार्यालयों में अभी से भीड़ बढ़नी शुरू हो गई है। लोग अप्रैल 2026 की समय सीमा से पहले अपनी रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी करना चाहते हैं। हालांकि, दूसरी तरफ इस कदम से काले धन के निवेश पर लगाम लगने की उम्मीद है। जब सरकारी रेट बाजार मूल्य के करीब होंगे, तो जमीनों की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता आएगी और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी।

विकास कार्यों को मिलेगी नई रफ़्तार

सरकार का तर्क है कि रजिस्ट्री दरों में वृद्धि से प्राप्त अतिरिक्त राजस्व का उपयोग राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में किया जाएगा। नए पुलों का निर्माण, सड़कों का चौड़ीकरण और नगर निकायों में बेहतर नागरिक सुविधाओं के लिए धन की उपलब्धता बढ़ेगी। बिहार के विकास के लिए राजस्व संग्रह को मजबूत करना अनिवार्य है, हालांकि विपक्ष और कुछ किसान संगठनों ने इसे ‘आम जनता पर अतिरिक्त कर का बोझ’ बताया है।

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बिहार जमीन रजिस्ट्री धमाका

आम खरीदारों के लिए विशेष टिप्स

अगर आप भी बिहार में जमीन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए अगले कुछ महीने काफी महत्वपूर्ण हैं। सबसे पहले अपने क्षेत्र के वर्तमान MVR की जानकारी bhumijankari.bihar.gov.in पर जाकर लें। यदि वित्तीय संसाधन उपलब्ध हैं, तो अप्रैल 2026 से पहले रजिस्ट्री कराने में ही समझदारी है। साथ ही, किसी भी सौदे से पहले वकील के माध्यम से नए प्रस्तावित रेट्स की संभावना की जांच जरूर कर लें ताकि भविष्य के बजट में कोई गड़बड़ी न हो।

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Patna Police का ‘ऑपरेशन क्लीन’: 80 लाख की नशीली सिरप के साथ अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़, 6 गिरफ्तार

Patna

बिहार की राजधानी Patna में नशीली दवाओं के सौदागरों के खिलाफ पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी चोट की है। Patna Police की विशेष टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए ‘खांटी सिरप’ (कोडीन युक्त कफ सिरप) की एक विशाल खेप पकड़ी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की कीमत लगभग 80 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस ने इस मामले में गिरोह के मुख्य सरगना सहित 6 शातिर तस्करों को दबोचने में कामयाबी हासिल की है। यह पूरी कार्रवाई पटना सिटी के मालसलामी और दीदारगंज थाना क्षेत्रों में अंजाम दी गई।

Patna Police
Patna Police

डाक पार्सल और मसालों की आड़ में ‘सफेद जहर’ की सप्लाई

तस्करों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए तस्करी का बेहद शातिर तरीका अपनाया था। जब्त की गई सिरप की बोतलों को डाक विभाग के फर्जी पार्सल और तेज पत्तों की बोरियों के नीचे छिपाकर लाया जा रहा था। पुलिस ने छापेमारी के दौरान कुल 4485 लीटर प्रतिबंधित सिरप बरामद की, जो 289 अलग-अलग कार्टन में पैक थी। जांच में पता चला है कि यह खेप हिमाचल प्रदेश की एक फार्मा कंपनी से फर्जी कागजातों के जरिए मंगवाई गई थी और इसे पटना के स्थानीय बाजारों के साथ-साथ सीमावर्ती जिलों में सप्लाई किया जाना था।

सरगना ‘गन्नी’ सहित 6 तस्कर पुलिस की गिरफ्त में

इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता गिरोह के मास्टरमाइंड सूर्यप्रकाश उर्फ ‘गन्नी’ की गिरफ्तारी है। गन्नी पटना के कदमकुआं इलाके का रहने वाला है और लंबे समय से शहर में नशीली दवाओं के वितरण नेटवर्क को नियंत्रित कर रहा था। उसके साथ गिरफ्तार किए गए अन्य पांच आरोपियों में ट्रक ड्राइवर और लोकल एजेंट शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इन आरोपियों का जाल बिहार के कटिहार, सहरसा और वैशाली तक फैला हुआ था। ये लोग हिमाचल से माल मंगवाकर उसे ऊंचे दामों पर युवाओं और नशेड़ियों को बेचते थे।

हिमाचल प्रदेश से बिहार तक जुड़ा तस्करी का नेटवर्क

वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि बिहार में नशीली दवाओं की जड़ें अन्य राज्यों से जुड़ी हैं। डीएसपी डॉ. गौरव कुमार ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि गिरोह के सदस्य हिमाचल प्रदेश के इंडस्ट्रियल एरिया से सीधे संपर्क में थे। ट्रक (टाटा 407) और अन्य वाणिज्यिक वाहनों का उपयोग कर वे चेकपोस्टों को पार कर जाते थे क्योंकि ऊपर से डाक पार्सल या किराने का सामान लदा होता था। पुलिस अब उन कंपनियों की भी जांच कर रही है जहां से यह सिरप बिना वैध लाइसेंस के रिलीज किया गया था।

युवाओं के भविष्य पर प्रहार: बिहार में ‘खांटी’ का बढ़ता चलन

बिहार में शराबबंदी के बाद से कोडीन युक्त कफ सिरप (जिसे स्थानीय भाषा में ‘खांटी’ कहा जाता है) की मांग नशे के विकल्प के रूप में बढ़ी है। यह न केवल स्वास्थ्य के लिए घातक है, बल्कि युवाओं को अपराध की ओर भी धकेल रहा है। पटना पुलिस की इस कार्रवाई से ड्रग माफियाओं की कमर टूटी है। एसएसपी ने स्पष्ट किया है कि ‘मिशन सुरक्षा’ के तहत शहर के स्कूल-कॉलेजों और झुग्गी बस्तियों में सक्रिय छोटे डीलरों पर भी नकेल कसी जाएगी।

Patna Police
Patna Police का ‘ऑपरेशन क्लीन’

पुलिस की अपील

पटना पुलिस की यह उपलब्धि नशा मुक्त बिहार के संकल्प की ओर एक बड़ा कदम है। पुलिस ने एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में छापेमारी जारी है। पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उनके आस-पास ऐसी कोई संदिग्ध गतिविधि या नशीली दवाओं की बिक्री दिखे, तो तुरंत पुलिस हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें।

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Darbhanga Bird Flu News : 10,000 कौओं की मौत के बाद H5N1 की पुष्टि, क्या इंसानों को है खतरा?

Bird Flu

बिहार के दरभंगा जिले से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। पिछले कुछ दिनों से आसमान से गिरते मृत कौओं के रहस्य से अब पर्दा उठ गया है। जांच रिपोर्ट में आधिकारिक तौर पर H5N1 वायरस (Bird Flu) की पुष्टि हो गई है। प्रशासन ने पूरे जिले में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

आखिर क्या है पूरा मामला?

Darbhanga Bird Flu

दरभंगा के नगर निगम क्षेत्र (वार्ड नंबर 31) स्थित भिगो श्मशान घाट (मुक्तिधाम) पिछले कुछ दिनों से पक्षियों के कब्रिस्तान में तब्दील हो गया था। स्थानीय लोगों ने देखा कि अचानक बड़ी संख्या में कौए पेड़ से गिरकर मर रहे हैं। देखते ही देखते यह संख्या सैकड़ों से हजारों में पहुंच गई। समाजसेवी संस्थाओं और स्थानीय पार्षदों के हस्तक्षेप के बाद जब सैंपल भोपाल की लैब भेजे गए, तो रिपोर्ट ने सबकी नींद उड़ा दी—यह खतरनाक एवियन इन्फ्लूएंजा (H5N1) था।

मौत का आंकड़ा और प्रशासनिक हलचल

शुरुआती सरकारी आंकड़ों में एक हजार कौओं की मौत की बात कही गई थी, लेकिन स्थानीय सूत्रों और रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक लगभग 10,000 पक्षी अपनी जान गंवा चुके हैं। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए:

• मुक्तिधाम परिसर के पास जेसीबी से गहरे गड्ढे खुदवाकर मृत पक्षियों को वैज्ञानिक तरीके से दफनाया है।

• संक्रमित क्षेत्र के 5 किलोमीटर के दायरे को ‘सेंसिटिव जोन’ घोषित कर दिया गया है।

• अगले आदेश तक इस क्षेत्र में पोल्ट्री (मुर्गा-बत्तख) की बिक्री और परिवहन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

क्या इंसानों के लिए भी है खतरा?

H5N1 वायरस मुख्य रूप से पक्षियों को प्रभावित करता है, लेकिन यह इंसानों में भी फैल सकता है। यदि कोई व्यक्ति संक्रमित पक्षी के सीधे संपर्क में आता है या उसके मल-मूत्र के संपर्क में आता है, तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। दरभंगा प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी मृत पक्षी को हाथ न लगाएं।

बर्ड फ्लू से बचाव के रामबाण उपाय

अगर आप दरभंगा या इसके आस-पास के क्षेत्रों में रह रहे हैं, तो ये सावधानियां जरूर बरतें:

पक्षियों से दूरी: छत, मुंडेर या सड़क पर कोई मृत पक्षी दिखे तो उसे छुएं नहीं। इसकी सूचना तुरंत हेल्पलाइन या पशुपालन विभाग को दें।

चिकन और अंडा: अगर आप मांसाहारी हैं, तो मांस और अंडे को 70°C से ऊपर अच्छी तरह पकाकर ही खाएं। अधपका मांस बिल्कुल न लें।

साफ-सफाई: बाहर से आने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं। सैनिटाइजर का प्रयोग करें और भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनें।

Darbhanga Bird Flu

पोल्ट्री फार्म से दूरी: फिलहाल कुछ दिनों के लिए पोल्ट्री फार्म या चिड़ियाघर जैसी जगहों पर जाने से बचें।

लक्षणों पर नजर: यदि आपको अचानक तेज बुखार, खांसी, गले में खराश या सांस लेने में तकलीफ महसूस हो, तो इसे सामान्य सर्दी न समझें और तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

दरभंगा में बर्ड फ्लू की दस्तक एक गंभीर चेतावनी है। प्रशासन अपना काम कर रहा है, लेकिन नागरिकों की सतर्कता ही इस वायरस की चेन को तोड़ने में मदद करेगी। अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं का पालन करें।

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Kaimur Shamed: सरस्वती विसर्जन में ‘अश्लीलता’ रोकने की सजा! बेटी को बीच सड़क पीटा, तमाशबीन बनाते रहे वीडियो (3 कड़वे सवाल)

Kaimur shamed in Saraswati puja

आज बिहार का कैमुर शर्मिंदा हुआ (Kaimur Shamed) है। रामगढ़ से जो खबर आई है, उसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। हम उस देश में रहते हैं जहाँ नारी को ‘देवी’ मानकर पूजा जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि उसी देवी (माँ सरस्वती) के विसर्जन जुलूस में एक ‘बेटी’ को जानवरों की तरह पीटा जाता है।
सिर्फ सोचकर ही गुस्सा आता है। उस बहादुर लड़की का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने डीजे (DJ) पर बज रहे गंदे और अश्लील गानों का विरोध किया था।

शनिवार की रात रामगढ़ के नरहन गांव में जो हुआ, वह कोई साधारण मारपीट नहीं थी। वह इस बात का सबूत है कि हम ‘भक्ति’ के नाम पर ‘गुंडागर्दी’ के दौर में जी रहे हैं।

Kaimur shamed police

क्या है पूरा मामला? (The Shameful Incident)

घटना शनिवार रात (Saturday Night) की है। रामगढ़ थाना क्षेत्र के नरहन गांव (Narhan Village) में सरस्वती पूजा के बाद मूर्ति विसर्जन का जुलूस निकाला जा रहा था।
कायदे से यह श्रद्धा का माहौल होना चाहिए था, लेकिन डीजे पर कान फोड़ने वाले वॉल्यूम में बेहद अश्लील और जातिसूचक भोजपुरी गाने बज रहे थे।
गांव की ही एक युवती से यह बर्दाश्त नहीं हुआ। उसने जुलूस रोककर कहा— “माता के विसर्जन में ऐसे गंदे गाने मत बजाओ, इसे बंद करो।”

डीजे बंद होना तो दूर, जुलूस में शामिल कुछ मनचलों और अराजक तत्वों का ‘अहं’ (Ego) हर्ट हो गया। उन्हें लगा कि एक लड़की उन्हें रोकने वाली कौन होती है?

विरोध की सजा: छेड़छाड़ और हैवानियत

सबसे बड़ी बात यह है कि समझाने के बजाय, उन दरिंदों ने युवती को बीच सड़क पर घेर लिया। पहले उसे भद्दी-भद्दी गालियां दी गईं। जब उसने विरोध किया, तो उसके साथ छेड़छाड़ (Molestation) शुरू कर दी गई। और जब वह खुद को बचाने के लिए चीखी, तो लाठी-डंडों, लात और घूंसों से उसकी बेरहमी से पिटाई की गई।
उसे तब तक मारा गया जब तक वह अधमरी होकर गिर नहीं गई। फिलहाल वह भभुआ सदर अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है।

‘नपुंसक’ भीड़: जो सिर्फ वीडियो बनाती रही

इस घटना का सबसे डरावना पहलू हमलावर नहीं, बल्कि वहां मौजूद भीड़ थी।
जिस वक्त उस बेटी को पीटा जा रहा था, वहां सैकड़ों लोग मौजूद थे। लेकिन किसी का हाथ उसे बचाने के लिए नहीं उठा। सबके हाथ में मोबाइल था। सब वीडियो (Video) बना रहे थे ताकि सोशल मीडिया पर ‘वायरल’ कर सकें।

सोचिए, उस बेटी पर क्या गुजरी होगी जब उसने देखा होगा कि उसके अपने गांव वाले, उसके पड़ोसी—सब तमाशबीन बनकर रील बना रहे हैं? यह साबित करता है कि स्मार्टफोन्स ने हमें स्मार्ट तो बना दिया, लेकिन हमारी ‘इंसानियत’ को मार दिया है।

Crowd of Saraswati puja kaimur shamed

भक्ति या गुंडागर्दी? (Devotion vs Hooliganism)

आज हमें यह सवाल पूछना ही होगा— सरस्वती पूजा में ‘चोली-घाघरा’ वाले गानों का क्या काम?
माँ सरस्वती ‘विद्या और संगीत’ की देवी हैं। उनके विसर्जन में शराब पीकर, डीजे पर अश्लील गानों पर नाचना कौन सी भक्ति है? बिहार और यूपी में यह एक बीमारी बन चुकी है।
प्रशासन की नाकामी: सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स हैं कि तेज आवाज़ और अश्लील गाने नहीं बजेंगे, लेकिन पुलिस अक्सर जुलूस के नाम पर आंखें मूंद लेती है। अगर पुलिस पहले ही सख्त होती, तो नरहन गांव में उन गुंडों की इतनी हिम्मत नहीं होती।

पुलिस एक्शन: अब तक क्या हुआ?

घटना के तूल पकड़ते ही प्रशासन की नींद टूटी है।
SP और DM की दौड़: मामले की गंभीरता को देखते हुए कैमूर के डीएम और एसपी खुद थाने पहुंचे।
FIR दर्ज: पुलिस ने पीड़िता के बयान पर एफआईआर दर्ज कर ली है।
गिरफ्तारी: वीडियो फुटेज के आधार पर एक मुख्य आरोपी को हिरासत में लिया गया है और बाकी की तलाश जारी है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या गिरफ्तारी से उस बेटी का दर्द कम हो जाएगा? क्या उसके मन से वह खौफ निकलेगा?

कब सुधरेगा समाज?

कैमूर की यह घटना (Kaimur Horror) सिर्फ एक न्यूज़ नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। अगर आज हम चुप रहे, तो कल यह हमारे घर की बेटी के साथ भी हो सकता है।
उस लड़की ने जो किया, वह ‘साहस’ था, और समाज ने जो किया, वह ‘कायरता’ थी। हमें प्रशासन से मांग करनी चाहिए कि आरोपियों को ऐसी सजा मिले कि अगली बार कोई डीजे पर अश्लीलता फैलाने से पहले सौ बार सोचे।
हमारा सवाल आपसे:
क्या विसर्जन जुलूसों में डीजे (DJ) पूरी तरह बैन हो जाना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर दें।

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Katihar Tea Stall News : जहाँ चाय की चुस्की के साथ परोसी जा रही थी ‘गंदी सर्विस’, जानें क्या है पूरा मामला!

Katihar Tea Stall News

Katihar Tea Stall News: बिहार के कटिहार जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। अक्सर लोग थकान मिटाने के लिए चाय की दुकान पर जाते हैं, लेकिन कटिहार की इस दुकान में चाय तो बस एक बहाना था, असली खेल तो दुकान के पीछे के कमरों में चल रहा था।

अदरक कूटने की आड़ में ‘राज’ दबाने का धंधा

कहते हैं कि यहाँ की चाय में अदरक कुछ ज्यादा ही कूटकर डाली जाती थी, लेकिन पुलिसिया जांच और ग्रामीणों के खुलासे ने बताया कि यहाँ अदरक नहीं, बल्कि ‘राज’ कूटकर दबाए जाते थे। कटिहार के एक गांव में स्थित इस चाय की दुकान की आड़ में पिछले 5 सालों से जिस्मफरोशी (Prostitution Racket) का काला कारोबार धड़ल्ले से चल रहा था।

Katihar Tea stall back room

कैसे हुआ इस ‘गंदी बात’ का खुलासा?

इस पूरे मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब स्थानीय ग्रामीणों को दुकान की गतिविधियों पर शक हुआ। गुरुवार को ग्रामीणों ने अचानक दुकान पर धावा बोल दिया।

  • हैरान करने वाला नजारा: ग्रामीणों ने दुकान के अंदर बने एक गुप्त कमरे से एक युवक को आपत्तिजनक (नग्न) अवस्था में पकड़ा।
  • महिला संचालक: दुकान की मालकिन, जिसे स्थानीय लोग ‘बसंती देवी’ के नाम से जानते हैं, वह इस पूरे धंधे को ऑपरेट कर रही थी। दुकान के पिछले हिस्से में बाकायदा चौकी लगाकर अनैतिक कार्यों के लिए केबिन बनाए गए थे।

सोशल मीडिया पर वीडियो हुआ वायरल

जैसे ही ग्रामीणों ने युवक को पकड़ा, उन्होंने उसका वीडियो बना लिया जो अब यूट्यूब और फेसबुक पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे चाय की दुकान की आड़ में समाज की मर्यादा को ताक पर रखकर यह धंधा चलाया जा रहा था। लोग सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं— “कटिहार की बसंती चाय के साथ कुछ ज्यादा ही सर्विस दे रही थी।”

Katihar Police Swat

पुलिस की छापेमारी और कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए कटिहार पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। पुलिस अधिकारी दशरथ राय ने पुष्टि की है कि दुकान के पिछले हिस्से में अवैध गतिविधियां चल रही थीं।

  • • पुलिस ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए।
  • • अवैध सप्लाई नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए जांच तेज कर दी गई है।
  • • स्थानीय लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं जिन्होंने बताया कि यहाँ लंबे समय से संदिग्ध लोगों का आना-जाना लगा रहता था।

सतर्क रहने की जरूरत

यह घटना हमें याद दिलाती है कि कभी-कभी जो दिखता है, वो सच नहीं होता। एक साधारण सी चाय की दुकान के पीछे इतना बड़ा सेक्स रैकेट चल सकता है, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अपने आसपास होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

  • मुख्य बातें (Highlights):
  • स्थान: कटिहार, बिहार।
  • आरोप: चाय की दुकान की आड़ में देह व्यापार।
  • कितने समय से: पिछले 5 वर्षों से सक्रिय।
  • कार्रवाई : पुलिस ने छापेमारी कर नेटवर्क का खुलासा किया।

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पूर्णिया में अतिक्रमण हटाने गए CO से भिड़ी पूर्व पार्षद की बेटी, जमकर हुई हाथापाई!

Purnea co photo

पूर्णिया: बिहार के पूर्णिया जिले में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने सबको हैरान कर दिया। सरकारी जमीन को खाली कराने पहुँचे अंचलाधिकारी (CO) और पूर्व पार्षद की बेटी के बीच तीखी बहस देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए मुकदमा दर्ज कर लिया है।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरी घटना पूर्णिया शहर के एक व्यस्त इलाके की है। नगर निगम की टीम पुलिस बल के साथ अवैध कब्जों को हटाने पहुँची थी। जैसे ही बुलडोजर ने अपना काम शुरू किया, स्थानीय लोग विरोध करने लगे। इसी बीच पूर्व पार्षद की बेटी रानी देवी वहां पहुँच गईं और कार्रवाई का विरोध करने लगीं।

रानी देवी का आरोप था कि प्रशासन बिना किसी पूर्व सूचना के उनके घर के सामने का हिस्सा तोड़ रहा है। बातचीत के दौरान मामला इतना बढ़ गया कि रानी देवी और अंचलाधिकारी (CO) के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। देखते ही देखते दोनों के बीच हाथापाई होने लगी, जिसे देख वहां मौजूद पुलिसकर्मी और लोग दंग रह गए।

CO aur purva parshad ki beti ke bich jhadap

सरकारी काम में बाधा और FIR

CO राकेश कुमार ने आरोप लगाया कि महिला ने न सिर्फ उनके साथ बदतमीजी की, बल्कि सरकारी काम में बाधा डालते हुए उन पर हमला भी किया। इस हंगामे के कारण अतिक्रमण हटाने का काम काफी देर तक रुका रहा। घटना के बाद CO ने स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा डालने और मारपीट की धाराओं के तहत पूर्व पार्षद की बेटी के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।

परिवार का पक्ष

दूसरी ओर, पूर्व पार्षद के परिवार का कहना है कि प्रशासन पक्षपात कर रहा है। उनका दावा है कि जिस जमीन को अतिक्रमण बताया जा रहा है, उसके कागजात उनके पास हैं। रानी देवी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अधिकारी उनकी बात सुनने को तैयार नहीं थे और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया, जिसके बचाव में उन्हें आगे आना पड़ा।

Purnea me atikarman htane ka kaam

शहर में चर्चा का विषय

पूर्णिया में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोग इसे प्रशासन की मनमानी बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि किसी को भी कानून हाथ में लेने का हक नहीं है, चाहे वह रसूखदार परिवार से ही क्यों न हो।

प्रशासन की चेतावनी

जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अतिक्रमण हटाओ अभियान रुकने वाला नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि शहर को जाम मुक्त बनाने के लिए सड़कों के किनारे से अवैध कब्जे हटाना जरूरी है। जो भी व्यक्ति इस प्रक्रिया में बाधा डालेगा, उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पुलिस इस मामले की बारीकी से जांच कर रही है और वायरल वीडियो के आधार पर गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। अब देखना यह है कि इस कानूनी लड़ाई में आगे क्या मोड़ आता है।

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बिहार: अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर से मुक्ति! नीतीश सरकार ने लॉन्च की ‘जनता द्वार योजना’, घर बैठे मिलेंगी 25 सेवाएं

नीतीश

बिहार में सुशासन के एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की जनता को सरकारी दफ्तरों की भागदौड़ से बचाने के लिए महत्वाकांक्षी ‘जनता द्वार योजना’ का शुभारंभ किया है। इस डिजिटल पहल के जरिए अब जाति प्रमाण पत्र से लेकर राशन कार्ड तक की सुविधाएं सीधे लोगों के मोबाइल और घर तक पहुंचेंगी।

सुशासन का नया मॉडल: क्या है ‘जनता द्वार योजना’?

मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस योजना का उद्घाटन करते हुए इसे बिहार के प्रशासनिक इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव बताया। इस योजना की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

• जनता द्वार ऐप: सरकार ने एक समर्पित मोबाइल ऐप लॉन्च किया है, जहाँ 25 से अधिक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सेवाएं एक क्लिक पर उपलब्ध होंगी।

नीतीश सरकार

• 48 घंटे में डिलीवरी: जाति, आय, निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और पेंशन संबंधी आवेदनों का निपटारा अब अधिकतम 48 घंटों के भीतर करने का लक्ष्य रखा गया है।

• IT-साक्षर केंद्र: राज्य के हर जिले में 50 ‘जनता द्वार केंद्र’ खोले जाएंगे। ये केंद्र उन लोगों की मदद करेंगे जो तकनीक के साथ सहज नहीं हैं।

• टोल-फ्री हेल्पलाइन: शिकायतों और जानकारी के लिए सरकार ने 1800-XXX-XXXX नंबर जारी किया है, जिससे अधिकारी सीधे जनता से जुड़ेंगे।

मुख्यमंत्री का संबोधन: “अब जनता नहीं, काम उनके पास जाएगा”

उद्घाटन के दौरान CM नीतीश कुमार ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि आम आदमी को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए ब्लॉक या अनुमंडल कार्यालय के चक्कर न काटने पड़ें। यह डिजिटल सशक्तीकरण की दिशा में बिहार का बड़ा कदम है।”

वहीं, डिप्टी CM सम्राट चौधरी ने इस योजना को ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया और कहा कि इससे बिचौलियों और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।

विपक्ष का रुख: स्वागत के साथ सतर्कता

विपक्ष (RJD) ने इस डिजिटल पहल का स्वागत तो किया है, लेकिन इसके क्रियान्वयन (Implementation) पर सवाल उठाए हैं। आरजेडी प्रवक्ताओं का कहना है कि कागजों पर योजनाएं अच्छी होती हैं, लेकिन असली चुनौती ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट और सर्वर की समस्याओं को दूर करना है।

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भ्रष्टाचार पर चोट और रोजगार के अवसर

विशेषज्ञों के अनुसार, 500 करोड़ रुपये के बजट वाली इस योजना से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि ‘जनता द्वार केंद्रों’ के माध्यम से हजारों आईटी-साक्षर युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। सरकार ने अगले 6 महीनों में 1 करोड़ आवेदनों को डिजिटल माध्यम से संसाधित करने का लक्ष्य रखा है।

पटना, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे बड़े शहरों से शुरू हुई यह योजना जल्द ही बिहार के हर गांव तक पहुंचेगी। इसमें भविष्य में AI-आधारित चैटबॉट जोड़ने की भी योजना है, जो लोगों के सवालों के तुरंत जवाब देगा।

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