पूर्णिया में अतिक्रमण हटाने गए CO से भिड़ी पूर्व पार्षद की बेटी, जमकर हुई हाथापाई!

Purnea co photo

पूर्णिया: बिहार के पूर्णिया जिले में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने सबको हैरान कर दिया। सरकारी जमीन को खाली कराने पहुँचे अंचलाधिकारी (CO) और पूर्व पार्षद की बेटी के बीच तीखी बहस देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए मुकदमा दर्ज कर लिया है।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरी घटना पूर्णिया शहर के एक व्यस्त इलाके की है। नगर निगम की टीम पुलिस बल के साथ अवैध कब्जों को हटाने पहुँची थी। जैसे ही बुलडोजर ने अपना काम शुरू किया, स्थानीय लोग विरोध करने लगे। इसी बीच पूर्व पार्षद की बेटी रानी देवी वहां पहुँच गईं और कार्रवाई का विरोध करने लगीं।

रानी देवी का आरोप था कि प्रशासन बिना किसी पूर्व सूचना के उनके घर के सामने का हिस्सा तोड़ रहा है। बातचीत के दौरान मामला इतना बढ़ गया कि रानी देवी और अंचलाधिकारी (CO) के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। देखते ही देखते दोनों के बीच हाथापाई होने लगी, जिसे देख वहां मौजूद पुलिसकर्मी और लोग दंग रह गए।

CO aur purva parshad ki beti ke bich jhadap

सरकारी काम में बाधा और FIR

CO राकेश कुमार ने आरोप लगाया कि महिला ने न सिर्फ उनके साथ बदतमीजी की, बल्कि सरकारी काम में बाधा डालते हुए उन पर हमला भी किया। इस हंगामे के कारण अतिक्रमण हटाने का काम काफी देर तक रुका रहा। घटना के बाद CO ने स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा डालने और मारपीट की धाराओं के तहत पूर्व पार्षद की बेटी के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।

परिवार का पक्ष

दूसरी ओर, पूर्व पार्षद के परिवार का कहना है कि प्रशासन पक्षपात कर रहा है। उनका दावा है कि जिस जमीन को अतिक्रमण बताया जा रहा है, उसके कागजात उनके पास हैं। रानी देवी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अधिकारी उनकी बात सुनने को तैयार नहीं थे और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया, जिसके बचाव में उन्हें आगे आना पड़ा।

Purnea me atikarman htane ka kaam

शहर में चर्चा का विषय

पूर्णिया में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोग इसे प्रशासन की मनमानी बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि किसी को भी कानून हाथ में लेने का हक नहीं है, चाहे वह रसूखदार परिवार से ही क्यों न हो।

प्रशासन की चेतावनी

जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अतिक्रमण हटाओ अभियान रुकने वाला नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि शहर को जाम मुक्त बनाने के लिए सड़कों के किनारे से अवैध कब्जे हटाना जरूरी है। जो भी व्यक्ति इस प्रक्रिया में बाधा डालेगा, उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पुलिस इस मामले की बारीकी से जांच कर रही है और वायरल वीडियो के आधार पर गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। अब देखना यह है कि इस कानूनी लड़ाई में आगे क्या मोड़ आता है।

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महाराष्ट्र निकाय चुनाव 2026: क्या ‘एवेंजर्स’ दिलाएंगे जीत? राजनीति में AI और सुपरहीरोज की धमाकेदार एंट्री

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महाराष्ट्र के आगामी नगर निकाय चुनावों (BMC Elections 2026) में प्रचार का अंदाज पूरी तरह बदल गया है। अब रैलियों और पर्चों से ज्यादा शोर सोशल मीडिया पर ‘आयरन मैन’ और ‘हल्क’ जैसे सुपरहीरोज मचा रहे हैं, जो फिल्मी पर्दे से निकलकर सीधे चुनावी दंगल में उतर आए हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाए गए ये वीडियो इंटरनेट पर तहलका मचा रहे हैं और वोटर्स के बीच चर्चा का मुख्य विषय बन गए हैं।

महाराष्ट्र निकाय चुनाव 2026: प्रचार का हाई-टेक अवतार

महाराष्ट्र की राजनीति हमेशा से अपने ट्विस्ट और टर्न के लिए जानी जाती है, लेकिन 15 जनवरी 2026 को होने वाले नगर निकाय चुनावों ने प्रचार के मामले में एक नई मिसाल पेश की है। मुंबई (BMC), पुणे (PMC), और नासिक जैसे बड़े शहरों में इस बार मुकाबला सिर्फ महायुति और महाविकास अघाड़ी के बीच नहीं है, बल्कि तकनीक के मोर्चे पर भी है।

हाल ही में इंस्टाग्राम और फेसबुक पर ऐसे दर्जनों वीडियो वायरल हुए हैं जिनमें एवेंजर्स (Avengers) के किरदारों को स्थानीय राजनीतिक दलों का प्रचार करते देखा जा रहा है। कहीं ‘थैनोस’ चुनावी नामांकन भरता दिख रहा है, तो कहीं ‘आयरन मैन’ मराठी में किसी खास पार्टी के लिए वोट मांग रहा है। यह AI तकनीक का वह जादू है जिसने चुनाव प्रचार को एक ‘फिल्मी एंटरटेनमेंट’ बना दिया है।

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‘एवेंजर्स’ और ‘सुपरहीरोज’ की एंट्री: वायरल वीडियो का सच

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इन वीडियोज में हॉलीवुड के मशहूर सुपरहीरोज को महाराष्ट्र के नेताओं के साथ या उनके समर्थकों के रूप में दिखाया जा रहा है। यह कंटेंट मुख्य रूप से Generative AI और Deepfake तकनीक का उपयोग करके बनाया गया है।

क्यों पसंद किए जा रहे हैं ये वीडियो?

युवा वोटर्स से जुड़ाव: पहली बार वोट देने वाले युवा (Gen Z) इन किरदारों से खुद को जोड़ पाते हैं।

क्रिएटिविटी और ह्यूमर: उबाऊ भाषणों के बजाय व्यंग्य और मनोरंजन के जरिए अपनी बात कहना लोगों को पसंद आ रहा है।

स्थानीय तड़का: हॉलीवुड किरदारों को शुद्ध मराठी या स्थानीय बोलियों में बात करते देखना कौतूहल पैदा करता है।

इन वीडियो में आयरन मैन, हल्क, थैनोस और कैप्टन अमेरिका जैसे किरदारों को पार्टी के झंडे और चुनाव चिन्ह के साथ चुनावी रैलियां करते दिखाया गया है। हालांकि, कई स्वतंत्र क्रिएटर्स का दावा है कि ये वीडियो किसी पार्टी के आधिकारिक कैंपेन का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स द्वारा ‘इंगेजमेंट’ के लिए बनाए गए हैं।

AI का चुनावी इस्तेमाल: वरदान या चुनौती?

नगर निकाय चुनावों में AI का उपयोग केवल सुपरहीरोज तक सीमित नहीं है। इस बार राजनीतिक दल डेटा एनालिटिक्स और पर्सनलाइज्ड मैसेजिंग के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं।

AI का रणनीतिक उपयोग

कस्टमाइज्ड वॉयस कॉल्स: AI की मदद से उम्मीदवारों की आवाज में लाखों मतदाताओं को व्यक्तिगत कॉल किए जा रहे हैं।

वोटर डेटा एनालिसिस: AI एल्गोरिदम के जरिए यह समझा जा रहा है कि किस वार्ड में कौन सा मुद्दा सबसे ज्यादा प्रभावी है।

मल्टीलिंगुअल कैंपेन: एक ही वीडियो संदेश को AI टूल के जरिए विभिन्न भाषाओं और बोलियों में बदलकर प्रसारित किया जा रहा है।

आंकड़े बताते हैं कि 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद, 2026 के इन निकाय चुनावों में AI पर होने वाला खर्च करीब 30-40% तक बढ़ गया है। अकेले मुंबई (BMC) चुनावों के लिए डिजिटल कैंपेनिंग का बजट करोड़ों में पहुंच गया है।

चुनाव आयोग की सतर्कता और नैतिकता के सवाल

जहाँ एक तरफ AI ने प्रचार को मजेदार बनाया है, वहीं इसने डीपफेक (Deepfakes) और गलत सूचना (Misinformation) का खतरा भी बढ़ा दिया है। चुनाव आयोग (State Election Commission) के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि कैसे असली और नकली कंटेंट के बीच फर्क किया जाए।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सुपरहीरोज का उपयोग तो मासूम मनोरंजन लग सकता है, लेकिन अगर AI का उपयोग विपक्षी नेताओं की छवि खराब करने वाले ‘फेक वीडियो’ बनाने में किया गया, तो यह लोकतंत्र के लिए घातक हो सकता है। चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे चुनावी सामग्री पर ‘AI-Generated’ लेबल लगाना अनिवार्य करें।

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2026 के निकाय चुनावों का मुख्य समीकरण

इस बार के चुनाव केवल तकनीक नहीं, बल्कि बड़े राजनीतिक गठबंधनों की अग्निपरीक्षा भी हैं:

महायुति: भाजपा, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की NCP एक साथ मजबूती से मैदान में हैं।

महाविकास अघाड़ी (MVA): उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT), शरद पवार की NCP (SP) और कांग्रेस मिलकर चुनौती दे रहे हैं।

राज ठाकरे का फैक्टर: मनसे (MNS) ने भी सोशल मीडिया और AI का भारी इस्तेमाल करते हुए अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।

महत्वपूर्ण जानकारी:

मतदान की तारीख: 15 जनवरी, 2026

नतीजे: 16 जनवरी, 2026

कुल मतदाता (मुंबई): 1.03 करोड़ से अधिक

क्या आपको लगता है कि AI और सुपरहीरोज वाले ये वीडियो आपके मतदान के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं? हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं!

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Vice-president election 2025 : NDA के सी.पी. राधाकृष्णन की ऐतिहासिक जीत, विपक्ष को करारी शिकस्त – जानिए कैसे पलटा सियासी खेल

Vice-president election

9 सितंबर 2025 को हुए भारत के vice-president election ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सियासत में  रणनीति जीत के लिए बहुत ज़रूरी है.इस चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन ने विपक्षी INDIA गठबंधन के उम्मीदवार, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी को 152 … Read more