अंधेरी केमिकल रिसाव हादसा: दो घायलों की पहचान हुई, दोनों की हालत अब भी नाज़ुक

केमिकल

हादसे का संक्षिप्त सारांश :

  • मुंबई के अंधेरी MIDC में केमिकल रिसाव से बड़ा हादसा हुआ।
  • हादसे में एक युवक की मौत हो गई।
  • दो घायल — नौशाद अंसारी (28) और सबा शेख (17) — की पहचान हुई।
  • दोनों को होली स्पिरिट अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
  • दोनों की हालत बेहद गंभीर है और ICU में इलाज जारी है।
  • दम घुटने और जहरीली गैस फेफड़ों में जाने से उनकी स्थिति नाज़ुक बनी हुई है।
  • प्रारंभिक जांच में सोडियम सल्फाइड जैसे रसायन के रिसाव की आशंका जताई गई है।
  • NDRF, पुलिस और फायर ब्रिगेड ने यूनिट को सील कर दिया है।
  • सुरक्षा मानकों की लापरवाही की जांच की जा रही है।

मुंबई के अंधेरी MIDC इलाके में हुए केमिकल रिसाव हादसे में घायल दो लोगों की पहचान हो गई है। घटना में एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है, जबकि दो अन्य—नौशाद अंसारी (28) और सबा शेख (17)—गंभीर रूप से घायल हैं। दोनों को तुरंत मुंबई के होली स्पिरिट अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उन्हें ICU में रखा गया है।

घायलों की पहचान और हालत

  • •नौशाद अंसारी (28 वर्ष)
  • •सबा शेख (17 वर्ष)

दोनों को जहरीली गैस के तेज़ संपर्क में आने के बाद तुरंत अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, दोनों की हालत बेहद गंभीर है। दम घुटने और जहरीले धुएं के फेफड़ों पर पड़े असर की वजह से उन्हें लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है।अस्पताल प्रशासन ने बताया कि मरीजों को लगातार मॉनिटर किया जा रहा है और उनकी स्थिति अभी स्थिर नहीं कही जा सकती। दोनों पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम चौबीसों घंटे इलाज कर रही है।

केमिकल

हादसा कैसे हुआ?

अंधेरी MIDC के ग्राउंड+1 इंडस्ट्रियल यूनिट में संदिग्ध केमिकल—प्रारंभिक अनुमान के अनुसार सोडियम सल्फाइड—के रिसाव से जहरीली गैस फैल गई। अंदर काम कर रहे लोग धुएं से बेहोश होकर गिर पड़े।NDRF की टीम को मौके पर भेजा गया ताकि आसपास के इलाके को सुरक्षित किया जा सके और रिसाव पर काबू पाया जा सके।

एक मौत, दो गंभीर घायल

हादसे में 20 वर्षीय युवक की मौत हो गई, जबकि दोनों भाई-बहन नौशाद और सबा की हालत अब भी खतरे से बाहर नहीं है। परिवार के सदस्यों और स्थानीय प्रशासन का कहना है कि यह घटना सुरक्षा मानकों की घोर लापरवाही का परिणाम हो सकती है।

केमिकल

इलाके में दहशत, जांच जारी-

घटना के बाद MIDC क्षेत्र में दहशत का माहौल है। पुलिस और फायर ब्रिगेड ने यूनिट को सील कर दिया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है। यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि सुरक्षा उपकरण उपलब्ध थे या नहीं, और रिसाव कैसे हुआ।

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उदयपुर की शाही शादी पर सवाल: सितारों की भीड़, करोड़ों का खर्च और शहर में बढ़ी अव्यवस्था”

उदयपुर

उदयपुर एक बार फिर दुनिया की नज़रों में छा गया है। झीलों की इस खूबसूरत नगरी में भारतीय मूल के अमेरिकी अरबपति रामा राजू मंटेना की बेटी नेत्रा मंटेना और टेक आंत्रप्रेन्योर वम्सी गादिराजू की शाही शादी धूमधाम से चल रही है। यह शादी 21 से 24 नवंबर तक कई शानदार जगहों पर आयोजित की जा रही है—जैसे द लीला पैलेस, जगमंदिर, जैनाना महल और झील पिछोला के बीच बना आइलैंड पैलेस।

हॉलीवुड–बॉलीवुड सितारों की चकाचौंध

इस शादी की गेस्ट लिस्ट किसी इंटरनेशनल अवॉर्ड शो से कम नहीं है।अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर अपनी गर्लफ्रेंड बेटिना एंडरसन के साथ शादी की संगीत सेरेमनी में शामिल हुए।सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल है जिसमें रणवीर सिंह, ट्रंप जूनियर कपल को अपने सुपरहिट गाने “व्हाट झुमका” पर डांस करवाते दिखे।

जेनिफर लोपेज (JLo) और जस्टिन बीबर उदयपुर में विशेष परफॉर्मेंस के लिए पहुंचे।

उदयपुर

बॉलीवुड से रणवीर सिंह, कृति सेनन, जाह्नवी कपूर, वरुण धवन, जैकलीन फर्नांडिस, करण जौहर और कई अन्य स्टार्स इस शाही जश्न का हिस्सा हैं।संगीत नाइट में इंटरनेशनल DJ टिएस्टो ने भी अपनी धुनों से महफिल को यादगार बना दिया।

कौन हैं नेत्रा और वम्सी?

नेत्रा मंटेना—अमेरिका के ऑरलैंडो में बसे अरबपति फार्मा इंडस्ट्रियलिस्ट रामा राजू मंटेना और पद्माजा मंटेना की बेटी हैं। वम्सी गादिराजू—टेक कंपनी Superorder के को-फाउंडर हैं। दोनों परिवारों ने मेहमानों के लिए चार्टर्ड फ्लाइट्स, हाई-एंड सुरक्षा और भव्य रॉयल सेटअप की व्यवस्था की है।

उदयपुर

आज मुख्य शादी समारोह

23 नवंबर को जगमंदिर में मुख्य शादी का आयोजन किया गया है, जिसमें देश–विदेश के VIPs, बिजनेस टाइकून और बड़े सेलिब्रिटी शामिल हो रहे हैं। शाम को ग्रैंड रिसेप्शन होने वाला है। उदयपुर की रातें इस शादी की वजह से एक सपने जैसा माहौल बना रही हैं—रोशनी, संगीत, विदेशी मेहमान, बॉलीवुड सितारे और रॉयल झीलों का संगम इसे साल की सबसे चर्चित शादी बना रहा है।

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नौकरी का झांसा देकर ‘साइबर गुलाम’ बनाए गए युवाओं को सरकार ने बचाया | पूरी खबर जानिए

साइबर गुलाम

Summary (Bullet Points में)

  • भारत ने म्यांमार से कई फंसे भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया।
  • युवाओं को थाईलैंड में आईटी नौकरी का झांसा देकर म्यांमार ले जाया गया था।
  • म्यांमार में उन्हें साइबर अपराध करने के लिए मजबूर किया जाता था।
  • पासपोर्ट जब्त कर उन्हें दिन में 16–18 घंटे काम करने पर मजबूर किया जाता।
  • कुछ पीड़ितों ने दूतावास से संपर्क किया, जिसके बाद बचाव अभियान शुरू हुआ।
  • भारत सरकार और स्थानीय अधिकारियों की मदद से सभी को छुड़ाया गया।
  • सरकार अब तक 1,500+ भारतीयों को साइबर गिरोहों से बचा चुकी है।
  • विदेश मंत्रालय ने फर्जी नौकरी के गिरोहों से सावधान रहने की सलाह दी है।

भारत सरकार ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाते हुए म्यांमार में फंसे कई भारतीयों को सुरक्षित वापस ला दिया। ये वे लोग थे जिन्हें थाईलैंड में आईटी नौकरी का लालच देकर धोखे से म्यांमार भेजा गया था, जहां उन्हें न सिर्फ बंधक बनाकर रखा गया बल्कि साइबर अपराध करने के लिए मजबूर भी किया गया। सरकार के लगातार प्रयासों और बचाव अभियान की मदद से इन भारतीयों की घर वापसी संभव हुई।

साइबर गुलाम

कैसे फंसे भारतीय गलत जाल में?

यह पूरा जाल सोशल मीडिया, नकली जॉब पोर्टलों और स्थानीय एजेंटों के जरिए चलाया जाता था।युवाओं को बताया जाता कि थाईलैंड में बड़ी कंपनियों में आईटी नौकरियां हैं और वेतन भी आकर्षक है। पीड़ितों को टूरिस्ट वीज़ा पर थाईलैंड ले जाया जाता, फिर उनके पासपोर्ट छीन लिए जाते और उन्हें जबरन म्यांमार के सीमावर्ती क्षेत्रों में भेज दिया जाता। यहां उन्हें साइबर फ्रॉड, फिशिंग और क्रिप्टो से जुड़े ऑनलाइन घोटाले करवाए जाते थे।

म्यांमार में ‘साइबर गुलामी’ की भयावह हालत

म्यांमार पहुंचने के बाद इन युवाओं को हथियारबंद गिरोहों की निगरानी में रखा जाता था।

उनसे दिन में 16–18 घंटे काम करवाया जाता और मना करने पर उन्हें भूखा रखने, पीटने और मारने की धमकी तक दी जाती थी। कई पीड़ितों ने बताया कि उनसे दूसरे देशों के नागरिकों को धोखा देने के लिए फर्जी कॉल और ऑनलाइन मैसेजिंग का काम करवाया जाता था।

सरकार कैसे पहुंची इन तक?

कुछ पीड़ितों ने किसी तरह भारतीय दूतावास से संपर्क किया, जिसके बाद बचाव का रास्ता खुला।

भारत सरकार, म्यांमार प्रशासन और थाईलैंड के स्थानीय अधिकारियों के संयुक्त प्रयास से इन लोगों को छुड़ाया गया। भारतीय वायुसेना के विशेष विमान के जरिए उन्हें थाईलैंड से भारत लाया गया। सरकार अब तक कुल 1,500 से अधिक भारतीयों को ऐसे साइबर गिरोहों से बचा चुकी है।

साइबर गुलाम

विदेश मंत्रालय की चेतावनी

विदेश मंत्रालय ने दोहराया है कि फर्जी आईटी नौकरी के नाम पर चल रहे ये गिरोह तेजी से भारतीय युवाओं को निशाना बना रहे हैं। सरकार ने चेतावनी दी है कि कोई भी विदेश में नौकरी स्वीकार करने से पहले अच्छी तरह जांच कर ले और संदिग्ध एजेंटों से दूर रहे।

यह घटना क्यों है महत्वपूर्ण?

यह न सिर्फ मानव तस्करी का मामला है, बल्कि तेजी से फैलते अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क की झलक भी है। इस बचाव अभियान ने दिखाया कि भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर स्तर पर सक्रिय है।

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बेगूसराय में STF और कुख्यात बदमाश की  मुठभेड़ | कार्रवाई में भारी मात्रा में हथियार बरामद

बेगूसराय

Summary (सारांश)

  • बेगूसराय में STF और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक कुख्यात बदमाश घायल होकर गिरफ्तार।
  • मुठभेड़ के दौरान अपराधियों ने पुलिस पर 6–7 राउंड फायरिंग की।
  • मुख्य आरोपी शिवदत्त राय 2022 के एक चर्चित हत्याकांड में फरार था।
  • 9 पिस्टल, कारबाइन, नकदी और अवैध सामान बरामद।
  • पुलिस बाकी फरार अपराधियों की तलाश में जुटी है।

बेगूसराय: बिहार के बेगूसराय जिले में STF और जिला पुलिस ने एक संयुक्त ऑपरेशन में बड़ी सफलता हासिल की है। देर रात हुई मुठभेड़ में एक कुख्यात बदमाश गोली लगने से घायल हो गया, जबकि उसके बाकी साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में हथियार, नकदी और अवैध सामान बरामद किया है।

बेगूसराय

कैसे हुई मुठभेड़?

पुलिस और STF को गुप्त सूचना मिली थी कि लंबे समय से फरार चल रहा कुख्यात अपराधी शिवदत्त राय साहेबपुर कमाल क्षेत्र में आने वाला है। सूचना के आधार पर टीम ने इलाके में घेराबंदी कर दी। जैसे ही पुलिस ने अपराधियों की दो मोटरसाइकिलों को रोकने की कोशिश की, बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं। मुठभेड़ के दौरान शिवदत्त राय की जांघ में गोली लगी और वह मौके पर ही घायल होकर गिर पड़ा। बाकी अपराधी गोलीबारी की आड़ में भागने में सफल रहे।

कौन है शिवदत्त राय?

  • शिवदत्त राय बेगूसराय और आसपास के इलाकों में कुख्यात अपराधी के रूप में जाना जाता है।
  • वह धनकौल पंचायत की सरपंच मीना देवी के बेटे अवनीश कुमार की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी है।
  • यह घटना 2022 में हुई थी और तब से वह फरार चल रहा था।
  • पुलिस इस मामले में लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थी।

भारी मात्रा में हथियार और नकदी बरामद

घायल अपराधी को पुलिस की निगरानी में बेगूसराय सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

बेगूसराय

उसकी निशानदेही पर STF और पुलिस ने एक ठिकाने पर छापेमारी की, जहां से निम्नलिखित सामान बरामद हुआ:

  • 9 पिस्टल
  • एक कारबाइन
  • भारी मात्रा में जिंदा कारतूस
  • नकदी
  • अवैध कफ सिरप की कई बोतलें
  • मिनी गन फैक्ट्री जैसी व्यवस्था

पुलिस का कहना है कि यह गिरोह हथियारों की तस्करी और आपराधिक वारदातों में सक्रिय था।

आगे की कार्रवाई

पुलिस अब फरार अपराधियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।जिले में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है ताकि अपराधी दूसरे जिलों में न भाग सकें।

माना जा रहा है कि इस गिरोह के कई सदस्य पड़ोसी जिलों में भी सक्रिय हैं।

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120 बहादुर’ ने जीता दर्शकों का दिल – फरहान अख्तर की करियर की सबसे दमदार फिल्म!”

120 बहादुर

फरहान अख्तर स्टारर ‘120 बहादुर’ आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज़ हो गई है, और रिलीज़ होते ही फिल्म ने दर्शकों के दिलों में देशभक्ति की लहर दौड़ा दी है। 1962 के भारत–चीन युद्ध के दौरान रेजांग ला में हुई ऐतिहासिक लड़ाई पर आधारित यह फिल्म 120 भारतीय सैनिकों की वीरता को एक बार फिर दुनिया के सामने लाती है—जहाँ सिर्फ 120 जवानों ने 3000 से ज्यादा चीनी सैनिकों का डटकर मुकाबला किया था।

120 बहादुर’

कहानी: 120 सैनिक, एक कमांडर और अदम्य साहस की कहानी-

फिल्म की कहानी मेजर शैतान सिंह भाटी (फरहान अख्तर) और उनकी चार्ली कंपनी के इर्द-गिर्द घूमती है। लद्दाख की चुशुल घाटी को बचाने के लिए यह 120 जवान अपनी आखिरी सांस तक लड़ाई लड़ते हैं।

पहला हिस्सा सैनिकों की पारिवारिक जिंदगी, संघर्ष और उनकी तैयारी को दिखाता है। दूसरा हाफ तीव्र युद्ध, लगातार गोलाबारूद, और हर सैनिक के बलिदान को दर्शाता है।

कहानी कुछ जगह धीमी पड़ती है, लेकिन पूरी फिल्म आपको भावनाओं और रोमांच के बीच एक मजबूत पकड़ बनाए रखती है।

अभिनय: फरहान अख्तर ने जड़ा ‘करियर का सबसे मजबूत’ परफॉर्मेंस-

फरहान अख्तर ने मेजर शैतान सिंह का किरदार उतनी ही शिद्दत से निभाया है जितना इस कहानी का हक था।

उनका प्रदर्शन:ना ओवरड्रामा,ना जबरन देशभक्ति के नारे,बस एक सच्चा, शांत लेकिन अडिग सैनिक।

सहायक कलाकार भी अपने किरदारों में फिट बैठे हैं और पूरी टीम की केमिस्ट्री फिल्म को और मजबूत बनाती है।

निर्देशन

रजनीश “रैज़ी” घई का निर्देशन फिल्म की जान है।युद्ध के दृश्य बेहद वास्तविक लगते हैं|सिनेमैटोग्राफी पहाड़ों की कठिन परिस्थितियों और युद्ध की दर्दनाक तीव्रता को शानदार ढंग से दिखाती है।हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट और गोलीबारी के दृश्य प्रभावी हैं, बिना किसी अतिरिक्त नाटकीयता के।

हालांकि, कुछ लोग फिल्म में नयापन की कमी महसूस कर सकते हैं—क्योंकि इसकी टोन ‘केसरी’ और ‘पलटन’ जैसी फिल्मों से मिलती-जुलती है।

फिल्म के मजबूत और कमजोर पहलू

120 बहादुर’

प्लस पॉइंट्स-

  • असली घटनाओं पर आधारित दमदार कहानी
  • फरहान अख्तर का शानदार अभिनय
  • भावनात्मक और यथार्थवादी युद्ध दृश्य
  • सैनिकों के साहस को सच्ची श्रद्धांजलि
  • माइनस पॉइंट्स-
  • कुछ हिस्सों में कहानी धीमी
  • चीनी सैनिकों का एकतरफा चित्रण
  • युद्ध-आधारित हिंदी फिल्मों से मिलती-जुलती फील

‘120 बहादुर’ एक ऐसी फिल्म है जिसे छोड़ना भारत के इतिहास के उस सुनहरे किस्से को नज़रअंदाज़ करने जैसा होगा। यह सिर्फ एक वॉर फिल्म नहीं, बल्कि 120 वीर सैनिकों को समर्पित एक भावनात्मक सम्मान है।

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द फैमिली मैन 3: बड़ा स्केल, बड़ी उम्मीदें… लेकिन बड़ा डिसअपॉइंटमेंट

द फैमिली मैन 3

अमेज़न प्राइम वीडियो पर रिलीज़ हुई मनोज बाजपेयी की बहुप्रतीक्षित वेब सीरीज ‘द फैमिली मैन 3’ ने चार साल लंबे इंतजार को खत्म कर दिया है। दर्शकों में उत्साह तो दिखा, लेकिन रिलीज़ के बाद सोशल मीडिया पर रिव्यू मिले-जुले रहे। कहीं जयदीप अहलावत की तारीफों की गूंज सुनाई दी, तो कहीं लोगों ने कहानी को पिछली बार की तुलना में कमजोर बताया।

कहानी: नॉर्थ-ईस्ट से लंदन तक फैला खौफ का जाल-

इस बार कहानी नॉर्थ-ईस्ट में शुरू होती है, जहां श्रीकांत तिवारी एक नए और बेहद खतरनाक आतंक नेटवर्क का पीछा कर रहे हैं। मिशन भारत की सीमाओं से निकलकर लंदन, म्यांमार और इस्लामाबाद तक फैल जाता है, जिससे कहानी का स्केल पहले से बड़ा और अंतरराष्ट्रीय हो जाता है। नए विलेन के तौर पर जयदीप अहलावत की एंट्री दर्शकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण बनी। भारी-भरकम स्क्रीन प्रेज़ेंस और तीखा अंदाज़—कई जगहों पर वे मनोज बाजपेयी पर भी भारी पड़ते दिखाई देते हैं।

द फैमिली मैन 3

परफॉर्मेंस: मनोज बाजपेयी फिर जीते दिल, जेके की एंट्री ने बढ़ाया मज़ा-

मनोज बाजपेयी ने श्रीकांत तिवारी के थके-हारे, जिम्मेदारियों से दबे, लेकिन खतरनाक एजेंट वाले अंदाज़ को फिर से जीवंत कर दिया है। शारिब हाशमी (जेके) के साथ उनकी टाइमिंग इस सीजन की सबसे बड़ी USP रही। निम्रत कौर और प्रियामणि के किरदारों को भी इस बार ज्यादा स्पेस मिला है, जबकि जयदीप अहलावत ने विलेन की भूमिका में नया स्तर सेट किया है।

निर्देशन: राज & डीके का स्टाइल बरकरार

जियो-पॉलिटिक्स, डार्क ह्यूमर और फैमिली लाइफ का कॉम्बिनेशन एक बार फिर देखने को मिलता है।एक्शन सीन्स और चेज़ सीक्वेंस इस बार ज्यादा रियलिस्टिक और बड़े पैमाने पर शूट किए गए हैं।

द फैमिली मैन 3

कमजोरियाँ: धीमी रफ्तार और कुछ अधूरे सब-प्लॉट्स-

दर्शकों की बड़ी शिकायत रही कि सीरीज बीच के एपिसोड्स में धीमी पड़ जाती है। कुछ जरूरी सब-प्लॉट्स को ठीक से विकसित नहीं किया गया, जिससे कहानी कई जगह बिखरी हुई लगती है।क्लाइमेक्स को भी जल्दबाज़ी में खत्म किया गया, जो सीधे संकेत दे देता है कि सीजन 4 आने के लिए जमीन तैयार कर दी गई है।

फैसला: देखने लायक, लेकिन उम्मीदों पर थोड़ी पीछे-

‘द फैमिली मैन 3’ में दमदार एक्टिंग, शानदार एटमॉस्फियर और गहरा थ्रिल मौजूद है। लेकिन कहानी की पकड़ और भावनात्मक तीव्रता पिछली बार की तुलना में थोड़ी कमजोर नजर आती है।फैंस के लिए—यह सीजन मिस नहीं किया जा सकता।नए दर्शकों के लिए—यह एक बढ़िया स्पाई थ्रिलर है।

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बिहार में नई सरकार का बड़ा फैसला जानिए किसे मिला कौन-सा विभाग

बिहार

बिहार में नई एनडीए सरकार के शपथ ग्रहण के बाद मंत्रालयों का बँटवारा आधिकारिक रूप से जारी कर दिया गया है। इस बार सबसे बड़ा और चौंकाने वाला फैसला रहा—उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को गृह मंत्रालय (Home Department) की कमान देना। लगभग 20 साल में यह पहली बार है जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गृह विभाग अपने पास नहीं रखा। गृह मंत्रालय राज्य की कानून-व्यवस्था, पुलिस प्रशासन, खुफिया विभाग और आंतरिक सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली विभाग माना जाता है, जिसे अब सम्राट चौधरी संभालेंगे। राजनीतिक तौर पर इसे भाजपा के लिए भी बड़ी जीत समझा जा रहा है।

बिहार

कैबिनेट में किसे मिला कौन-सा विभाग — पूरी सूची-

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी

गृह मंत्रालय (Home Department)

(कानून-व्यवस्था, पुलिस, सुरक्षा और आंतरिक प्रशासन की जिम्मेदारी)

1. विजय कुमार सिन्हा (उपमुख्यमंत्री)

बिहार

भूमि एवं राजस्व विभाग

खान एवं भू-तत्त्व विभाग

2. मंगल पांडे

स्वास्थ्य विभाग

विधि विभाग

3. दिलीप जयसवाल

उद्योग विभाग

4. नितिन नवीन

पथ निर्माण विभाग

नगर विकास एवं आवास विभाग

5. रामकूपाल यादव

कृषि विभाग

6. संजय टाइगर

बिहार

श्रम संसाधन विभाग

7. अरुण शंकर प्रसाद

पर्यटन विभाग

कला, संस्कृति एवं युवा विभाग

8. सुरेन्द्र मेहता

पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग

9. नारायण प्रसाद

आपदा प्रबंधन विभाग

10. रमा निषाद

पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग

11. लखेन्द्र पासवान

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग

12. श्रेयसी सिंह

सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (आईटी विभाग)

खेल विभाग

बिहार

13. प्रमोद चंद्रवंशी

सहकारिता विभाग

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग

सरकार के फैसले का संकेत: सुरक्षा और विकास पर बड़ा फोकस-

राज्य सरकार ने जिन विभागों का बँटवारा किया है, उससे ये साफ दिखाई देता है कि आने वाले समय में कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढाँचा, स्वास्थ्य सेवाएँ, पर्यटन, आईटी और कृषि सुधार सरकार की प्राथमिकता में रहेंगे।गृह मंत्रालय उपमुख्यमंत्री को सौंपे जाने से यह भी संकेत मिलता है कि सरकार अपराध नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाने के मूड में है।

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पूर्व Xiaomi CEO दिल्ली की हवा से इतने परेशान हुए कि तुरंत वापस भागना पड़ा”

दिल्ली

Summary (Bullet Points में):

  • पूर्व Xiaomi CEO और G42 India के प्रमुख मनु जैन दिल्ली की प्रदूषित हवा से कुछ ही घंटों में बीमार महसूस करने लगे।
  • आंखों में जलन, गले में सूजन, खांसी और सिरदर्द के कारण उन्हें अपनी बिज़नेस ट्रिप बीच में छोड़कर जल्दी फ्लाइट से वापस लौटना पड़ा।
  • दिल्ली में उनकी मौजूदगी के दौरान AQI 373 से 400+ के बीच रहा, कई इलाकों में हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज हुई।
  • प्रदूषण के मुख्य कारण—पराली जलाना, वाहनों का धुआं, निर्माण धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और सर्दियों में हवा का ठहराव।
  • WHO के अनुसार दिल्ली की हवा का स्तर फेफड़ों की बीमारी, हृदय रोग, स्ट्रोक और कैंसर तक का खतरा बढ़ा सकता है।
  • मनु जैन ने कहा कि यह समस्या सिर्फ सरकार की नहीं, हम सबकी जिम्मेदारी है और इसके लिए लॉन्ग-टर्म सॉल्यूशंस जरूरी हैं।
  • दिल्ली

दिल्ली पहुंचते ही बिगड़ी तबियत

पूर्व शाओमी इंडिया प्रमुख और वर्तमान G42 इंडिया के सीईओ मनु कुमार जैन ने दिल्ली की खतरनाक वायु गुणवत्ता के साथ अपना बेहद परेशान करने वाला अनुभव साझा किया है। वह एक छोटी बिज़नेस यात्रा के लिए दिल्ली पहुंचे थे, लेकिन यहां की जहरीली हवा ने उन्हें कुछ ही घंटों में इतना असहज कर दिया कि उन्हें अपनी ट्रिप बीच में ही रोककर जल्दी फ्लाइट लेकर वापस लौटना पड़ा। मनु जैन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि दिल्ली की हवा ने उनकी आंखों में पानी ला दिया, गले में सूजन पैदा कर दी और खांसी व सिरदर्द शुरू हो गया। दिल्ली में पले-बढ़े होने के कारण यह अनुभव उनके लिए और भी ज्यादा भावनात्मक था।

AQI 400 के पार, कई इलाकों में ‘गंभीर’ स्तर

मनु जैन के दिल्ली में होने के दौरान शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) ‘बहुत खराब’ कैटेगरी में 373 दर्ज किया गया था। कई इलाकों में यह स्तर 400 से ऊपर चला गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी है। वज़ीरपुर जैसे इलाकों में तो AQI 440 से भी ज्यादा पाया गया, जिससे साफ दिखता है कि राजधानी की हवा स्वास्थ्य के लिए कितनी हानिकारक हो चुकी है। आज भी कई क्षेत्रों में AQI ‘खतरनाक’ स्तर पर बना हुआ है।

प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण

हर साल सर्दियों के आते ही दिल्ली प्रदूषण की गिरफ्त में आ जाती है। इसके प्रमुख कारणों में पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना, वाहनों का बढ़ता धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण स्थल की धूल और सर्दियों की ठंडी हवा शामिल है, जो प्रदूषकों को नीचे रोक लेती है। सरकार समय-समय पर प्रतिबंध लगाती है, लेकिन असर सीमित रहता है।

दिल्ली

स्वास्थ्य पर गंभीर असर

WHO और अन्य स्वास्थ्य संस्थाओं के अनुसार, ऐसे प्रदूषण का असर बेहद खतरनाक हो सकता है। इससे दमा, फेफड़ों की बीमारियाँ, हृदय रोग, स्ट्रोक, COPD और फेफड़ों के कैंसर के मामले बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग इससे सबसे जल्दी प्रभावित होते हैं।

मनु जैन का संदेश: “यह सामूहिक जिम्मेदारी है”

मनु जैन ने किसी भी संस्था को दोष नहीं दिया बल्कि कहा कि यह समस्या भविष्य की पीढ़ियों से जुड़ी है, इसलिए इसका स्थायी समाधान सभी को मिलकर खोजना होगा। उनका अनुभव फिर साबित करता है कि दिल्ली का प्रदूषण मौसमी नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य संकट है।

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Operation CYBER HAWK EXPOSED: भारत के ₹1000 करोड़ के डिजिटल धोखाधड़ी साम्राज्य का भंडाफोड़!”

Operation CYBER

भारत के ₹1000 करोड़ के डिजिटल धोखाधड़ी साम्राज्य का भंडाफोड़!”

  • ~48 घंटे की सबसे बड़ी रेड—700 साइबर क्रिमिनल्स गिरफ्तार, फर्जी कॉल सेंटरों पर ताला
  • ~भारत के साइबर इतिहास का सबसे बड़ा काउंटर-ऑपरेशन
  • ~भारत हुआ साइबर भांडा फोड़ में आगे

18–19 नवंबर 2025 को दिल्ली पुलिस ने 48 घंटे का हाई-इंटेंसिटी अभियान “Operation Cyber Hawk” लॉन्च किया, जिसने पूरे देश के डिजिटल फ्रॉड नेटवर्क को हिला दिया। IFSO यूनिट, साइबर सेल और दिल्ली के 15 जिला पुलिस थानों की संयुक्त टीम ने दिल्ली–NCR में सैकड़ों लोकेशन पर एक साथ छापेमारी की।

इस ऑपरेशन में 700 से अधिक साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी हुई, जिनसे जुड़े नेटवर्क का अनुमानित मूल्य ₹1000 करोड़ से ज़्यादा बताया जा रहा है। पुलिस ने बड़ी मात्रा में लैपटॉप, स्पूफिंग सिस्टम, फर्जी SIM कार्ड, राउटर्स, नकली KYC दस्तावेज और करोड़ों का डिजिटल सबूत बरामद किया।

कैसे चलता था “India’s Biggest Fraud Ecosystem”?

जांच में सामने आया कि यह गैंग देशभर के नागरिकों को अलग-अलग तरीकों से निशाना बना रहा था:

  • फर्जी Customer Care Number और सेवा केंद्र
  • Loan scams, investment traps, crypto doubling
  • WhatsApp–Telegram आधारित VoIP कॉलिंग मॉड्यूल
  • Fake websites, OTP phishing, KYC re-verification
  • म्यूल अकाउंट → क्रिप्टो → शेल कंपनियों तक मनी-लॉन्डरिंग चेन

हर कॉल सेंटर में विदेशी डेटा बेस, स्पूफ्ड नंबर और टेलीकॉम बायपास तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस ने लगभग 20% फ्रॉड अमाउंट तुरंत फ्रीज़ कर दिया है।

CYBER HAWK

देशभर में कनेक्शन—साथ में इंटरनेशनल लिंक

दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह रैकेट एक multi-layered interstate + international syndicate है जिसका नेटवर्क: हरियाणा,राजस्थान,झारखंड,पश्चिम बंगाल,नेपाल–बांग्लादेश बॉर्डर ,और UAE–SEA देशों तक फैला हुआ पाया गया है। अब इन गिरफ्तारों से पूछताछ करके बड़े मास्टरमाइंड, डेटा-मार्केट सप्लायर्स और हवाला लिंक तक पहुंचने की तैयारी है।

जनता के लिए चेतावनी—‘हर कॉल भरोसे लायक नहीं’

दिल्ली पुलिस और MHA ने लोगों को सतर्क करते हुए कहा:

“फर्जी कस्टमर केयर नंबर, संदिग्ध लिंक, पेमेंट रिक्वेस्ट और किसी भी अनजान कॉल पर निजी जानकारी न दें। हर ऑनलाइन फ्रॉड तुरंत 1930 पर रिपोर्ट करें।”

India’s Cyber Battlefield Just Changed

Operation Cyber Hawk ने साबित कर दिया कि:

भारत अब साइबर अपराध के खिलाफ हाई-टेक युद्ध लड़ने को तैयार है। डिजिटल फ्रॉड गैंग्स का ‘इकोसिस्टम’ आसानी से ध्वस्त नहीं होगा।जनता की सतर्कता + पुलिस की तत्पर कार्रवाई = साइबर सुरक्षा की नई दीवार। यह सिर्फ एक ऑपरेशन नहीं—बल्कि भारत के डिजिटल भविष्य की सुरक्षा मिशन की शुरुआत है।

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Language War Turns Deadly: मुंबई लोकल में हिंदी बोलने पर हमला—कल्याण के अर्नव ने दी जान 

Language War

कौन था अर्नव खैरे? क्या हुआ उस सुबह?

कल्याण (ठाणे) का 19 वर्षीय अर्नव जितेन्द्र खैरे—मुलुंड के प्रसिद्ध केलकर कॉलेज का B.Sc प्रथम वर्ष छात्र। 18 नवंबर 2025 की सुबह वह रोज़ की तरह अम्बरनाथ–कल्याण फास्ट लोकल से कॉलेज जा रहा था। ट्रेन में कड़ी भीड़ के बीच उसने एक यात्री से बिल्कुल सामान्य तरीके से कहा— “थोड़ा आगे बढ़िए।” बस इतना ही। यह हिंदी वाक्य उस दिन उसकी ज़िंदगी बदल देगा—किसी ने सोचा भी नहीं था

हिंदी बोलने पर भीड़ का हमला—अर्नव का डर, गुस्सा और असहायता हिंदी सुनते ही पास के 4–5 युवकों ने भाषा को लेकर झगड़ा शुरू कर दिया।

उनके चिल्लाने वाले शब्द—

“मराठी क्यों नहीं बोलता?”, “अरे अपनी भाषा छोड़ हिंदी क्यों बोलता है?”इसके बाद गंदी गालियाँ, धक्के, थप्पड़, बाल पकड़कर गिराने की कोशिश— अर्नव बेचारा थाने स्टेशन पर डरकर उतर गया, मुलुंड पहुंचा, लेकिन सदमे में होने की वजह से प्रैक्टिकल एग्जाम भी नहीं दे सका।

Language War

घर पर पिता से आखिरी बातचीत—

“पापा, बहुत बुरा हुआ… मैं ठीक नहीं हूं।”

शाम को पिता घर लौटे—और अर्नव फंदे पर लटका मिला।

19 साल का एक लड़का… एक भाषा को लेकर खत्म हो गया।

जांच, CCTV, देश भर में गुस्सा—

मुंबई पुलिस ने मामले को अप्राकृतिक मृत्यु के रूप में दर्ज किया है लेकिन CCTV, यात्रियों और कॉलेज के बयानों की जांच तेज़ हो चुकी है। सोशल मीडिया पर #JusticeForArnav पूरे देश में ट्रेंड।

लोग सवाल पूछ रहे हैं—

क्या भाषा के नाम पर हिंसा स्वीकार्य है?क्या युवाओं की मानसिक स्वास्थ्य स्थितियाँ हमें अनदेखी नहीं करनी चाहिए?मुंबई लोकल जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों पर सुरक्षा का क्या? अर्नव का परिवार—फूट-फूटकर रोता हुआ—एक ही बात कह रहा है:

“हमारे बेटे को हिंदी बोलने की सज़ा क्यों मिली?

Language War पर सख़्त टिप्पणी: भारत में यह जहर कहाँ-कहाँ फैल रहा है?

भारत की विविधता हमारी ताकत है—लेकिन हाल के वर्षों में Language Intolerance कई राज्यों में तेज़ी से बढ़ा है, खासकर: महाराष्ट्र में हिंदी बनाम मराठी विवाद,कर्नाटक में कन्नड़ बनाम हिंदी बहस,तमिलनाडु में Anti-Hindi भावना पूर्वोत्तर में स्थानीय भाषाओं की रक्षा बनाम बाहरी भाषाएँ

यह बहस लोकतांत्रिक अधिकार की नहीं— बल्कि असहिष्णुता, असुरक्षा और राजनीति से उत्पन्न जहर का परिणाम है। भारत में कोई भी भाषा दूसरे से बड़ी नहीं— और न ही किसी भारतीय नागरिक को अपनी पसंद की भाषा बोलने से रोका जा सकता है। अर्नव की मौत इस खतरनाक ट्रेंड की चेतावनी है—भाषा नहीं, नफ़रत मार रही है।

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