Bihar Election Results 2025 LIVE : आज किसकी होगी ‘ताजपोशी’? – Final Verdict आने में कुछ ही पल

Bihar Election

Bihar Election 2025 का आज सबसे बड़ा दिन है—Result Day। पटना, गया, भागलपुर, पूर्णिया से लेकर सीमांचल तक सभी जिलों में मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम हैं। सुबह से ही राजनीतिक दलों के दफ्तरों में हलचल तेज हो गई है—कहीं जश्न की तैयारी, तो कहीं बेचैनी और अनुमानों की बारिश। टीवी स्टूडियोज, सोशल मीडिया और मोबाइल स्क्रीन पर हर सेकंड लोगों की नज़रें टिकी हुई हैं।

कौन बनाएगा सरकार?

243 सीटों के दो चरणों में हुए रिकॉर्ड मतदान के बाद अब असली परीक्षा आज है। NDA, महागठबंधन, जन स्वराज, और कई क्षेत्रीय दलों के बीच मुकाबला इस बार बेहद कड़ा रहा। बेरोज़गारी, शिक्षा, महिला सुरक्षा, किसान मुद्दे और जातीय समीकरण—इन सभी का जवाब आज जनता के फैसले में छिपा है। अब सवाल सिर्फ एक—क्या बिहार बदलाव की तरफ जाएगा या भरोसेमंद चेहरे को दोबारा मौका मिलेगा?

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Exit Poll बनाम Ground Reality — क्या उलटफेर तय है?

एक्ज़िट पोल ने कई संभावनाएँ जगाईं, लेकिन बिहार की राजनीति में उलटफेर आम बात है। राजनीतिक विशेषज्ञ भी मान रहे हैं कि इस बार मुकाबला किसी भी तरफ पलट सकता है। अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? क्या नई राजनीतिक ताकतें उभरेंगी? या फिर पारंपरिक समीकरण फिर से वापसी करेंगे?—यह सब कुछ आने वाले कुछ घंटों में साफ हो जाएगा।

लोकतंत्र का जश्न

आज का दिन सिर्फ नतीजों का नहीं, बल्कि लोकतंत्र के जश्न का है। बिहार के भविष्य की नई लकीर, नई नीतियाँ और नई दिशा—सब कुछ जनता की मुहर तय करेगी। अब बस काउंटिंग के हर राउंड का इंतज़ार है, क्योंकि The Final Verdict आने ही वाला है।

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बिहार एग्जिट पोल 2025 का रिजल्ट आया सामने : बन गई इस पार्टी की सरकार, जानिए पूरी खबर

एग्जिट पोल

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे और आखिरी चरण का मतदान 11 नवंबर को पूरा होने के बाद अब सबकी नज़र एग्जिट पोल के नतीजों पर है। चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, सभी एजेंसियां अपने एग्जिट पोल के आंकड़े 11 नवंबर की शाम 6:30 बजे के बाद ही जारी कर सकती थीं। इसके बाद सोमवार रात से लेकर 12 नवंबर की सुबह तक कई प्रमुख सर्वे एजेंसियों ने अपने अनुमान जारी किए हैं।

इस बार एग्जिट पोल्स में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करते हुए दिखाया गया है। वहीं, महागठबंधन (RJD, कांग्रेस आदि) पिछड़ता हुआ नजर आ रहा है। बिहार की कुल 243 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 122 है, और ज्यादातर सर्वेक्षणों में NDA को 130 से 209 सीटों तक मिलने का अनुमान लगाया गया है।

कौन-कौन सी एजेंसियां जारी कर रही हैं एग्जिट पोल?

बिहार चुनाव 2025 के एग्जिट पोल्स जारी करने वाली प्रमुख एजेंसियों में शामिल हैं:

  • Axis My India
  • Today’s Chanakya
  • CVoter
  • Jan Ki Baat
  • P-Marq
  • IPSOS
  • Matrize
  • People’s Pulse

इनमें से Axis My India और Today’s Chanakya जैसी प्रतिष्ठित एजेंसियों ने अपने विस्तृत विश्लेषण 12 नवंबर को सुबह जारी करने का ऐलान किया था। जबकि बाकी एजेंसियों ने 11 नवंबर की रात से ही अपने अनुमान पेश कर दिए थे।

एग्जिट पोल

अब तक क्या कहते हैं आंकड़े

अधिकांश एग्जिट पोल्स में NDA को भारी बढ़त दिखाई जा रही है:

  1. Matrize: NDA को 130–209 सीटें
  2. P-Marq: NDA को 167 सीटें, महागठबंधन को 70–102 सीटें
  3. DV Research: NDA को 137–152 सीटें
  4. Jan Ki Baat: NDA को 160 से अधिक सीटों की संभावना

वहीं, महागठबंधन को ज्यादातर सर्वेक्षणों में 70 से 100 सीटों के बीच दिखाया गया है। प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज का प्रदर्शन बेहद कमजोर बताया गया है।

मतदान और मतगणना की तारीखें

बिहार में दो चरणों में मतदान हुआ —

  • पहला चरण: 6 नवंबर 2025
  • दूसरा चरण: 11 नवंबर 2025

दूसरे चरण में लगभग 67% मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले चुनावों की तुलना में थोड़ा अधिक है। वोटों की गिनती 14 नवंबर को होगी, और उसी दिन अंतिम नतीजे घोषित किए जाएंगे।

एग्जिट पोल हैं अनुमान, नतीजे नहीं

विशेषज्ञों के अनुसार, एग्जिट पोल केवल मतदान के बाद मतदाताओं के रुझान पर आधारित अनुमान होते हैं। ये नतीजों की गारंटी नहीं देते। बिहार जैसे राज्यों में कई बार एग्जिट पोल गलत साबित हुए हैं, इसलिए अंतिम फैसला 14 नवंबर को मतगणना के बाद ही तय होगा।

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Bihar Election 2025 : Phase 2 Voting खत्म, कौन बनेगा अगला Game-Changer?

Bihar Election 2025

Bihar Election 2025 के दूसरे और अंतिम चरण में 11 नवंबर 2025 को कुल 20 जिलों में 122 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ। इस चरण में लगभग 1,302 उम्मीदवार मैदान में थे और पूरे राज्य भर में सुरक्षा-साहायता के बीच मतदान सम्पन्न कराए गए।

कहां हुआ मतदान और क्या रहा माहौल?

इस चरण में सीमांचल, मिथिलांचल, मगध और अंग क्षेत्रों के जिलों—जैसे Seemanchal, गया, भागलपुर, कटिहार, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज—आदि पर केंद्रित मतदान हुआ। सुरक्षा-उपायों के तहत पोलिंग बूथों पर पैरामिलिट्री फोर्स, सीसीटीवी कैमरे और बम निरोधक दस्ते मौजूद रहे। मतदान सुबह 7 बजे शुरू हुआ और शाम 5 बजे तक चलता रहा।

परिणाम की तारीख और आगे क्या?

मतगणना का दिन तय हो चुका है—14 नवंबर 2025 को मतों की गिनती और ऐलान होगा। अब पूरे बिहार की निगाहें इस फैसले पर टिकी हैं—क्या सत्ताधारी गठबंधन आगे बढ़ेगा या विपक्ष में बदलाव दिखेगा?

Bihar Election 2025

अगले 24-48 घंटों में राजनीतिक भविष्य तय हो सकता है—क्या आपने अपनी पसंद की रणनीति तैयार कर ली है?

चर्चा के केंद्र में सवाल

मतदान ने एक बार फिर उन सवालों को हवा दी हैं जो बिहार के चुनाव-चक्र पर लंबे समय से चल रहे हैं: क्या विकास और रोजगार जैसे मुद्दे जाति-सिमित राजनीति से ऊपर उठेंगे?क्या युवा, महिला और किसान-वर्ग की आवाज़ अब निर्णायक बनेगी?क्या शांतिपूर्ण लोकतंत्र और पारदर्शिता के लिए सिर्फ मतदान करना काफी होगा या उसके बाद ज़िम्मेदारी बनती है?

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RJD की रैली में उतरने लगा Deputy CM Samrat Chaudhary का हेलीकॉप्टर, मचा हड़कंप! जानिए फिर क्या हुआ

हेलीकॉप्टर

बिहार विधानसभा चुनाव के बीच एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का हेलीकॉप्टर सोमवार को भागलपुर के कहलगांव में गलती से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की चुनावी रैली में उतरने लगा। जैसे ही लोगों ने हेलीकॉप्टर को रैली स्थल के ऊपर मंडराते देखा, वहां अफरातफरी और जश्न दोनों का माहौल बन गया।

दरअसल, सम्राट चौधरी एनडीए प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार के लिए कहलगांव पहुंचे थे। लेकिन उनके पायलट ने गलती से RJD उम्मीदवार रजनीश यादव की रैली को ही एनडीए की सभा समझ लिया। उसी समय मंच पर भोजपुरी स्टार और राजद उम्मीदवार खेसारी लाल यादव भाषण देने की तैयारी में थे।

रैली में गूंजे RJD के नारे, फिर पलटा हेलीकॉप्टर

हेलीकॉप्टर

जैसे ही हेलीकॉप्टर नीचे उतरने लगा, राजद समर्थक खुशी से झूम उठे। कई लोग पार्टी के झंडे लहराने लगे और “लालू यादव ज़िंदाबाद” और “खेसारी लाल यादव जिंदाबाद” के नारे लगाने लगे। लेकिन तभी पायलट को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने तुरंत हेलीकॉप्टर को वापस हवा में उठा लिया और सही स्थान की ओर बढ़ गया। रैली स्थल पर मौजूद भीड़ हैरान रह गई — कुछ लोगों ने इसे “फिल्मी सीन” जैसा बताया।

वीडियो हुआ वायरल, सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि हेलीकॉप्टर मंच के पास उतरने ही वाला था, तभी अचानक वापस ऊपर चला जाता है। लोगों ने इस पर मज़ेदार कमेंट्स किए — किसी ने लिखा “RJD में भी BJP की एंट्री हो गई!”, तो किसी ने कहा “ऑपरेशन लोटस की शुरुआत हवाई रास्ते से”।

RJD ने लगाया आरोप, BJP ने बताया तकनीकी गलती

राजद नेताओं ने इसे “राजनीतिक साजिश” बताते हुए कहा कि यह उनके स्टार प्रचारक खेसारी लाल यादव की रैली को बाधित करने का प्रयास था। वहीं भाजपा की ओर से सफाई आई कि यह सिर्फ तकनीकी भूल थी — पायलट को रैली स्थल की सही पहचान नहीं हो पाई।

खेसारी लाल यादव की रैली में थोड़ी देर

हेलीकॉप्टर

इस घटना के कारण खेसारी लाल यादव के हेलीकॉप्टर को उतरने में थोड़ी देर हुई। हालांकि, कुछ मिनट बाद उनका हेलीकॉप्टर सुरक्षित उतरा और उन्होंने मंच से कहा — “सम्राट जी हमारे मंच पर नहीं आए, वरना स्वागत हम खुले दिल से करते!”

कहलगांव में गरम हुआ चुनावी माहौल

इस अजीबोगरीब वाकये ने कहलगांव के चुनावी माहौल में नई गर्मी भर दी है। दोनों दलों के समर्थकों के बीच सोशल मीडिया पर खूब मीम्स, ट्वीट और बहसें चल रही हैं।

घटना की मुख्य बातें

  • घटना स्थान: कहलगांव, भागलपुर (बिहार)
  • समय: सोमवार, 11 नवंबर 2025
  • हेलीकॉप्टर में थे: बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (भाजपा)
  • जहां उतरने लगे: RJD उम्मीदवार रजनीश यादव की रैली (खेसारी लाल यादव मौजूद)
  • वजह: पायलट की लोकेशन पहचान में गलती
  • नतीजा: अफरातफरी, हंसी-मज़ाक और वायरल वीडियो

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सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता, कहा – संसद में महिलाओं की मौजूदगी लगातार घट रही है

सुप्रीम कोर्ट

देश की सर्वोच्च अदालत ने संसद में महिलाओं की घटती भागीदारी पर गंभीर चिंता जताई है। सुप्रीम कोर्ट की दो-न्यायाधीशों वाली बेंच, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना कर रही थीं, ने सुनवाई के दौरान कहा कि महिलाओं को भारत का “सबसे बड़ा अल्पसंख्यक” कहा जा सकता है, क्योंकि उनकी उपस्थिति संसद में लगातार घट रही है।

जस्टिस नागरत्ना, जो वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट की एकमात्र महिला न्यायाधीश हैं, ने सख्त शब्दों में कहा, “जब महिलाएं देश की आधी आबादी हैं, तो उन्हें संसद में प्रतिनिधित्व देने के लिए सिर्फ आरक्षण का इंतज़ार क्यों किया जाए? बिना आरक्षण के भी राजनीतिक दल महिलाओं को टिकट क्यों नहीं देते?”

सुप्रीम कोर्ट

उन्होंने यह भी कहा कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी केवल “संख्यात्मक प्रतिनिधित्व” का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह भारत के लोकतंत्र की गुणवत्ता और संतुलन से जुड़ा हुआ प्रश्न है।

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी उस समय आई है जब देश में महिला आरक्षण विधेयक (जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम कहा जाता है) के लागू होने की प्रक्रिया अभी प्रारंभिक चरण में है। संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी फिलहाल 15% से भी कम है, जबकि स्थानीय निकायों में यह संख्या कहीं अधिक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी राजनीतिक दलों पर दबाव बनाएगी कि वे स्वेच्छा से महिला उम्मीदवारों की संख्या बढ़ाएं, ताकि संसद में महिलाओं की आवाज़ और मज़बूत हो सके। यह टिप्पणी न केवल न्यायिक चेतावनी है, बल्कि भारतीय राजनीति में लैंगिक समानता की दिशा में एक अहम संदेश भी मानी जा रही है।

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राजस्थान सरकार के फैसले का मुसलमानों ने किया विरोध, वजह जान आप भी चौक जाएंगे

राजस्थान सरकार

राजस्थान सरकार ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और मदरसों में ‘वंदे मातरम’ का रोजाना गायन अनिवार्य कर दिया है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि यह कदम छात्रों में देशभक्ति, अनुशासन और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करेगा।

देशभक्ति वर्ष की घोषणा

सरकार ने बताया कि ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ को खास बनाने के लिए पूरे साल को “देशभक्ति वर्ष” के रूप में मनाया जाएगा। इस दौरान सभी सरकारी संस्थानों में विशेष देशभक्ति कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

आदेश न मानने पर होगी कार्रवाई

शिक्षा मंत्री का स्पष्ट कहना है कि जो भी संस्थान इसे लागू नहीं करेगा, उसके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। सरकार का दावा है कि यह निर्णय किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि राष्ट्र के सम्मान से जुड़ा है।

मुस्लिम संगठनों का कड़ा विरोध

इस फैसले पर कई मुस्लिम संगठनों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि राष्ट्रगीत के कुछ हिस्से उनके धार्मिक सिद्धांतों के खिलाफ हैं और इसे अनिवार्य बनाना धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला है। वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन खानू खान बुधवाली ने कहा कि सरकार असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।

राजनीतिक विवाद भी बढ़ा

विपक्षी दल कांग्रेस ने इस फैसले को भाजपा की “राजनीतिक चाल” बताया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि ‘वंदे मातरम’ हमेशा से राष्ट्र के गौरव का प्रतीक रहा है, लेकिन इसे जबरन लागू करना सही नहीं है।

सरकार का बचाव: फैसला राष्ट्रहित में राजस्थान सरकार का कहना है कि यह कदम पूरी तरह राष्ट्रहित में है। सरकार के अनुसार, यह आदेश न किसी धर्म के खिलाफ है, न किसी समुदाय को निशाना बनाता है—बल्कि देशभक्ति को मजबूत करने का प्रयास है।

सोशल मीडिया पर गर्म हुई बहस

सरकारी फैसले के बाद सोशल मीडिया पर तेज़ बहस छिड़ गई है। एक पक्ष इसे देशभक्ति की पहल बता रहा है, जबकि दूसरे पक्ष ने इसे धार्मिक दखलअंदाजी कहा है।

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बिहार में बन गई इस पार्टी की सरकार, जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर

बिहार

बिहार में सत्ता की जंग शुरू हो चुकी है। पहले चरण के मतदान ने सूबे के राजनीतिक तापमान को और भी गरम कर दिया है। कुल 121 विधानसभा सीटों पर वोटिंग पूरी हो गई है, और इस बार जनता ने पहले से कहीं ज्यादा जोश दिखाया — करीब 64.66% मतदान हुआ है, जो बिहार के चुनावी इतिहास में एक नया रिकॉर्ड माना जा रहा है।

जनता का जोश, रिकॉर्ड वोटिंग

राज्य के 18 जिलों में सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान चला। चुनाव आयोग के मुताबिक, शाम तक 60.13% वोटिंग दर्ज हुई थी, जो बाद में बढ़कर 64% से अधिक हो गई। सबसे ज्यादा वोटिंग बेगूसराय जिले में (67.32%) और सबसे कम शेखपुरा में (52.36%) दर्ज हुई। ग्रामीण इलाकों में महिलाओं और युवाओं की लंबी कतारें साफ बता रही थीं कि जनता इस बार बदलाव के मूड में है।

बड़ा मुकाबला: NDA बनाम महागठबंधन

इस चुनाव में मुख्य लड़ाई दो गठबंधनों के बीच मानी जा रही है —

एक ओर हैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA), जिसमें BJP और JDU प्रमुख दल हैं।

दूसरी ओर हैं तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाला महागठबंधन (RJD + कांग्रेस + वाम दल), जो सत्ता वापसी के लिए पूरा जोर लगा रहा है।

इसके अलावा, चुनावी मैदान में एक नया चेहरा भी है — प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी, जिसने कई सीटों पर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। जन सुराज पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रही है, लेकिन उसका प्रभाव कई क्षेत्रों में देखा जा रहा है।

दिग्गजों की किस्मत EVM में बंद

पहले चरण की वोटिंग में कई बड़े नेताओं का भाग्य अब EVM में बंद हो चुका है।

इनमें शामिल हैं —

  • तेजस्वी यादव (राघोपुर)
  • तेज प्रताप यादव (महुआ)
  • सम्राट चौधरी (तारापुर)
  • मंगल पांडे (भोजपुर)

इन सभी सीटों पर वोटरों ने उत्साह से मतदान किया, और अब 14 नवंबर को ही पता चलेगा कि जनता ने किसे चुना है।

मुद्दे जो तय करेंगे बिहार की दिशा

इस बार के चुनाव में जनता के मन में कई सवाल हैं —

  • रोजगार और शिक्षा की स्थिति
  • महंगाई और कृषि संकट
  • बुनियादी सुविधाएँ, खासकर स्वास्थ्य और सड़कें

साथ ही युवाओं का एक बड़ा वर्ग नई राजनीति और नए विकल्पों की तलाश में है। यही वजह है कि इस बार मुकाबला सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि सोच और दिशा का भी है।

आगे क्या?

अब सभी की निगाहें 11 नवंबर पर टिकी हैं, जब दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग होगी। उसके बाद 14 नवंबर को वोटों की गिनती होगी और बिहार का नया राजनीतिक चेहरा सामने आएगा।

राजनीतिक गलियारों में चर्चाएँ तेज हैं — क्या नीतीश कुमार फिर से सत्ता में लौटेंगे, या तेजस्वी यादव का “बदलाव” नारा जनता को रास आएगा?

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बिहार में जल्द खत्म हो सकती है शराबबंदी, जानिए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को क्या कहा

शराबबंदी

बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने साफ कहा कि शराबबंदी लागू करना अलग बात है, लेकिन इसे लागू करने का तरीका और इसके परिणाम दोनों ही गंभीर चिंता का विषय हैं।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि बिहार में 2016 से लागू शराबबंदी कानून ने न्यायपालिका, पुलिस और जनता – सभी पर भारी बोझ डाल दिया है। कोर्ट ने टिप्पणी की, “यह कानून जितना नियंत्रण के लिए बनाया गया था, उतना ही अब परेशानी का कारण बन गया है।”

सुप्रीम कोर्ट ने उठाए बड़े सवाल

कोर्ट ने बिहार सरकार से कई अहम सवाल पूछे:

  • क्या आपके पास कोई ठोस डेटा है जो दिखाता हो कि शराबबंदी लागू होने के बाद शराब की खपत में कमी आई है?
  • क्या अधिकारी किसी के घर में आधी रात को घुसकर तलाशी ले सकते हैं या सांस विश्लेषक (Breath Analyser) टेस्ट के लिए मजबूर कर सकते हैं?
  • क्या नकदी जब्त करने का प्रावधान न्यायसंगत है?

अदालत ने इसे अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) के तहत गंभीर मामला बताया और कहा कि यह लोगों की निजी स्वतंत्रता से जुड़ा सवाल है।

शराबबंदी

अदालतों पर बढ़ रहा बोझ

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस कानून की वजह से पटना हाईकोर्ट में मुकदमों की बाढ़ आ गई है। 2022 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमणा ने भी इस पर चिंता जताई थी कि बिहार में जजों का ज़्यादातर समय शराबबंदी से जुड़े जमानत मामलों में ही चला जाता है।

अब सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को आदेश दिया है कि वह 2016 से अब तक दर्ज हुए केसों का पूरा डेटा अदालत में पेश करे, ताकि पता लगाया जा सके कि इस कानून का वास्तविक प्रभाव क्या रहा है।

पुलिसिया कार्रवाई और अधिकारों पर सवाल

हाल में पटना हाईकोर्ट ने केवल सांस विश्लेषक रिपोर्ट के आधार पर गिरफ्तारी को अवैध ठहराया था, जिसे बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। अब सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा है कि वह बताए कि ऐसे प्रावधान संविधान के अनुरूप कैसे हैं।

क्या वाकई शराबबंदी सफल हुई?

कोर्ट ने यह भी कहा कि शराबबंदी की मंशा अच्छी थी, लेकिन उसका परिणाम ज़मीनी हकीकत से मेल नहीं खा रहा। राज्य में अवैध शराब व्यापार, पुलिसिया भ्रष्टाचार और फर्जी गिरफ्तारी जैसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

शराबबंदी

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 9 साल बाद भी इस कानून का कोई ठोस फायदा नज़र नहीं आता। कुछ रिपोर्ट्स तो यह भी कहती हैं कि शराबबंदी के नाम पर समानांतर अवैध नेटवर्क पनप गया है।

सियासत भी गरमाई

यह मुद्दा अब पूरी तरह राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है। विपक्ष ने नीतीश कुमार सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि “शराबबंदी कानून ने न तो समाज को सुधारा और न ही अपराध कम किया।”

वहीं जेडीयू का कहना है कि “कानून की भावना सामाजिक सुधार की है, इसमें सुधार किया जा सकता है, हटाया नहीं जा सकता।”

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Modi vs Akhilesh in Bihar : रैलियों की जंग से गरमाया चुनावी मैदान, सियासी पारा चढ़ा विकास बनाम हुंकार की टक्कर

रैलियों

बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे सियासी पारा तेजी से चढ़ता जा रहा है। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने राज्य में अलग-अलग चुनावी रैलियों को संबोधित किया, जिससे एनडीए और ‘इंडिया’ गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सहरसा और कटिहार में बड़ी सभाएं कर एनडीए उम्मीदवारों के समर्थन में जनता से वोट की अपील की। उन्होंने बिहार में विकास योजनाओं का जिक्र करते हुए महागठबंधन पर ‘जंगलराज’ और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। पीएम मोदी का रोड शो पटना में जबरदस्त भीड़ खींच चुका है, जिससे 14 विधानसभा सीटों पर असर की उम्मीद जताई जा रही है। एनडीए की ओर से मोदी के अलावा अमित शाह और राजनाथ सिंह भी 25-25 रैलियां करेंगे।

Narendra Modi

वहीं, अखिलेश यादव ने छपरा में भोजपुरी अभिनेता खेसारी लाल यादव के साथ मंच साझा कर ‘इंडिया’ गठबंधन के समर्थन में हुंकार भरी। उन्होंने कहा कि अगर तेजस्वी यादव के नेतृत्व में सरकार बनी, तो बीजेपी को “बिहार से पलायन” करना पड़ेगा। सपा प्रमुख का फोकस राजद के MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण को अपने PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले से जोड़ने पर है, ताकि विपक्षी गठबंधन की सामाजिक पकड़ मजबूत हो सके।

Akhilesh Yadav

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि दोनों गठबंधनों की रैलियों से चुनावी मैदान पूरी तरह गरम हो चुका है। 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में मतदान होगा, और उससे पहले नेताओं की रैलियां और रोड शो वोटरों को लुभाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। बिहार में अब चुनावी जंग अपने शिखर पर है।

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बिहार की सियासत में भूचाल : ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह गिरफ्तार, मोकामा हत्याकांड से हिली JDU की जमीन

अनंत सिंह

बिहार की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब शनिवार देर रात पटना पुलिस ने मोकामा से JDU के बाहुबली प्रत्याशी अनंत सिंह को गिरफ्तार कर लिया। ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर अनंत सिंह की यह गिरफ्तारी दुलारचंद यादव हत्याकांड के सिलसिले में की गई है। चुनाव के बीच हुई इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी ने मोकामा समेत पूरे बिहार का सियासी पारा चढ़ा दिया है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला मोकामा के टाल इलाके में हुई एक हिंसक झड़प से जुड़ा है। उस दिन JDU प्रत्याशी अनंत सिंह और जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार के समर्थकों के बीच टकराव हो गया था। इसी झड़प के दौरान जनसुराज पार्टी के समर्थक, 75 वर्षीय दुलारचंद यादव की मौत हो गई। मृतक के पोते ने अनंत सिंह, उनके दो भतीजों समेत पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि दुलारचंद यादव को पहले गोली मारी गई और फिर गाड़ी से कुचलकर उनकी हत्या कर दी गई।

आधी रात को पुलिस का एक्शन

FIR दर्ज होने के बाद भी अनंत सिंह खुलेआम चुनाव प्रचार कर रहे थे, जिसे लेकर सवाल उठ रहे थे। शनिवार देर रात पटना के SSP कार्तिकेय शर्मा के नेतृत्व में एक पुलिस टीम ने कार्रवाई की।

अनंत सिंह

रात करीब 11 बजे : SSP कार्तिकेय शर्मा बाढ़ के कारगिल मार्केट पहुंचे, जहां अनंत सिंह अपने समर्थकों के साथ मौजूद थे।

थोड़ी देर बाद : शुरुआती पूछताछ के बाद पुलिस ने अनंत सिंह को हिरासत में ले लिया।

रात देर तक : पटना के DM और SSP ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अनंत सिंह की गिरफ्तारी की पुष्टि की।

पुलिस ने अनंत सिंह के साथ उनके दो सहयोगियों — मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम — को भी गिरफ्तार किया है।

पुलिस और सियासत का पक्ष

पटना के SSP कार्तिकेय शर्मा ने बताया कि घटनास्थल पर मिले सबूतों, गवाहों के बयानों और शुरुआती जांच के आधार पर अनंत सिंह को मुख्य आरोपी बनाया गया है। उन्होंने कहा कि यह घटना अनंत सिंह की मौजूदगी में हुई और चुनाव आचार संहिता का गंभीर उल्लंघन है। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोली लगने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन शरीर पर अंदरूनी और बाहरी चोटें पाई गई हैं।

दूसरी ओर, अनंत सिंह ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह राजनीतिक साजिश है, जो उनके प्रतिद्वंद्वी सूरजभान सिंह ने रची है। वहीं, जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी ने गिरफ्तारी पर कहा — “देर आए, दुरुस्त आए”, यह कार्रवाई पहले ही हो जानी चाहिए थी।

इस गिरफ्तारी ने मोकामा के चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। अब देखना यह होगा कि इस घटना का चुनाव परिणामों पर क्या असर पड़ता है। पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है और तीनों आरोपियों को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा।

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