बिहार में बन गई इस पार्टी की सरकार, जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर

बिहार

बिहार में सत्ता की जंग शुरू हो चुकी है। पहले चरण के मतदान ने सूबे के राजनीतिक तापमान को और भी गरम कर दिया है। कुल 121 विधानसभा सीटों पर वोटिंग पूरी हो गई है, और इस बार जनता ने पहले से कहीं ज्यादा जोश दिखाया — करीब 64.66% मतदान हुआ है, जो बिहार के चुनावी इतिहास में एक नया रिकॉर्ड माना जा रहा है।

जनता का जोश, रिकॉर्ड वोटिंग

राज्य के 18 जिलों में सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान चला। चुनाव आयोग के मुताबिक, शाम तक 60.13% वोटिंग दर्ज हुई थी, जो बाद में बढ़कर 64% से अधिक हो गई। सबसे ज्यादा वोटिंग बेगूसराय जिले में (67.32%) और सबसे कम शेखपुरा में (52.36%) दर्ज हुई। ग्रामीण इलाकों में महिलाओं और युवाओं की लंबी कतारें साफ बता रही थीं कि जनता इस बार बदलाव के मूड में है।

बड़ा मुकाबला: NDA बनाम महागठबंधन

इस चुनाव में मुख्य लड़ाई दो गठबंधनों के बीच मानी जा रही है —

एक ओर हैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA), जिसमें BJP और JDU प्रमुख दल हैं।

दूसरी ओर हैं तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाला महागठबंधन (RJD + कांग्रेस + वाम दल), जो सत्ता वापसी के लिए पूरा जोर लगा रहा है।

इसके अलावा, चुनावी मैदान में एक नया चेहरा भी है — प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी, जिसने कई सीटों पर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। जन सुराज पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रही है, लेकिन उसका प्रभाव कई क्षेत्रों में देखा जा रहा है।

दिग्गजों की किस्मत EVM में बंद

पहले चरण की वोटिंग में कई बड़े नेताओं का भाग्य अब EVM में बंद हो चुका है।

इनमें शामिल हैं —

  • तेजस्वी यादव (राघोपुर)
  • तेज प्रताप यादव (महुआ)
  • सम्राट चौधरी (तारापुर)
  • मंगल पांडे (भोजपुर)

इन सभी सीटों पर वोटरों ने उत्साह से मतदान किया, और अब 14 नवंबर को ही पता चलेगा कि जनता ने किसे चुना है।

मुद्दे जो तय करेंगे बिहार की दिशा

इस बार के चुनाव में जनता के मन में कई सवाल हैं —

  • रोजगार और शिक्षा की स्थिति
  • महंगाई और कृषि संकट
  • बुनियादी सुविधाएँ, खासकर स्वास्थ्य और सड़कें

साथ ही युवाओं का एक बड़ा वर्ग नई राजनीति और नए विकल्पों की तलाश में है। यही वजह है कि इस बार मुकाबला सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि सोच और दिशा का भी है।

आगे क्या?

अब सभी की निगाहें 11 नवंबर पर टिकी हैं, जब दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग होगी। उसके बाद 14 नवंबर को वोटों की गिनती होगी और बिहार का नया राजनीतिक चेहरा सामने आएगा।

राजनीतिक गलियारों में चर्चाएँ तेज हैं — क्या नीतीश कुमार फिर से सत्ता में लौटेंगे, या तेजस्वी यादव का “बदलाव” नारा जनता को रास आएगा?

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बिहार में जल्द खत्म हो सकती है शराबबंदी, जानिए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को क्या कहा

शराबबंदी

बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने साफ कहा कि शराबबंदी लागू करना अलग बात है, लेकिन इसे लागू करने का तरीका और इसके परिणाम दोनों ही गंभीर चिंता का विषय हैं।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि बिहार में 2016 से लागू शराबबंदी कानून ने न्यायपालिका, पुलिस और जनता – सभी पर भारी बोझ डाल दिया है। कोर्ट ने टिप्पणी की, “यह कानून जितना नियंत्रण के लिए बनाया गया था, उतना ही अब परेशानी का कारण बन गया है।”

सुप्रीम कोर्ट ने उठाए बड़े सवाल

कोर्ट ने बिहार सरकार से कई अहम सवाल पूछे:

  • क्या आपके पास कोई ठोस डेटा है जो दिखाता हो कि शराबबंदी लागू होने के बाद शराब की खपत में कमी आई है?
  • क्या अधिकारी किसी के घर में आधी रात को घुसकर तलाशी ले सकते हैं या सांस विश्लेषक (Breath Analyser) टेस्ट के लिए मजबूर कर सकते हैं?
  • क्या नकदी जब्त करने का प्रावधान न्यायसंगत है?

अदालत ने इसे अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) के तहत गंभीर मामला बताया और कहा कि यह लोगों की निजी स्वतंत्रता से जुड़ा सवाल है।

शराबबंदी

अदालतों पर बढ़ रहा बोझ

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस कानून की वजह से पटना हाईकोर्ट में मुकदमों की बाढ़ आ गई है। 2022 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमणा ने भी इस पर चिंता जताई थी कि बिहार में जजों का ज़्यादातर समय शराबबंदी से जुड़े जमानत मामलों में ही चला जाता है।

अब सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को आदेश दिया है कि वह 2016 से अब तक दर्ज हुए केसों का पूरा डेटा अदालत में पेश करे, ताकि पता लगाया जा सके कि इस कानून का वास्तविक प्रभाव क्या रहा है।

पुलिसिया कार्रवाई और अधिकारों पर सवाल

हाल में पटना हाईकोर्ट ने केवल सांस विश्लेषक रिपोर्ट के आधार पर गिरफ्तारी को अवैध ठहराया था, जिसे बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। अब सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा है कि वह बताए कि ऐसे प्रावधान संविधान के अनुरूप कैसे हैं।

क्या वाकई शराबबंदी सफल हुई?

कोर्ट ने यह भी कहा कि शराबबंदी की मंशा अच्छी थी, लेकिन उसका परिणाम ज़मीनी हकीकत से मेल नहीं खा रहा। राज्य में अवैध शराब व्यापार, पुलिसिया भ्रष्टाचार और फर्जी गिरफ्तारी जैसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

शराबबंदी

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 9 साल बाद भी इस कानून का कोई ठोस फायदा नज़र नहीं आता। कुछ रिपोर्ट्स तो यह भी कहती हैं कि शराबबंदी के नाम पर समानांतर अवैध नेटवर्क पनप गया है।

सियासत भी गरमाई

यह मुद्दा अब पूरी तरह राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है। विपक्ष ने नीतीश कुमार सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि “शराबबंदी कानून ने न तो समाज को सुधारा और न ही अपराध कम किया।”

वहीं जेडीयू का कहना है कि “कानून की भावना सामाजिक सुधार की है, इसमें सुधार किया जा सकता है, हटाया नहीं जा सकता।”

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Modi vs Akhilesh in Bihar : रैलियों की जंग से गरमाया चुनावी मैदान, सियासी पारा चढ़ा विकास बनाम हुंकार की टक्कर

रैलियों

बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे सियासी पारा तेजी से चढ़ता जा रहा है। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने राज्य में अलग-अलग चुनावी रैलियों को संबोधित किया, जिससे एनडीए और ‘इंडिया’ गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सहरसा और कटिहार में बड़ी सभाएं कर एनडीए उम्मीदवारों के समर्थन में जनता से वोट की अपील की। उन्होंने बिहार में विकास योजनाओं का जिक्र करते हुए महागठबंधन पर ‘जंगलराज’ और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। पीएम मोदी का रोड शो पटना में जबरदस्त भीड़ खींच चुका है, जिससे 14 विधानसभा सीटों पर असर की उम्मीद जताई जा रही है। एनडीए की ओर से मोदी के अलावा अमित शाह और राजनाथ सिंह भी 25-25 रैलियां करेंगे।

Narendra Modi

वहीं, अखिलेश यादव ने छपरा में भोजपुरी अभिनेता खेसारी लाल यादव के साथ मंच साझा कर ‘इंडिया’ गठबंधन के समर्थन में हुंकार भरी। उन्होंने कहा कि अगर तेजस्वी यादव के नेतृत्व में सरकार बनी, तो बीजेपी को “बिहार से पलायन” करना पड़ेगा। सपा प्रमुख का फोकस राजद के MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण को अपने PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले से जोड़ने पर है, ताकि विपक्षी गठबंधन की सामाजिक पकड़ मजबूत हो सके।

Akhilesh Yadav

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि दोनों गठबंधनों की रैलियों से चुनावी मैदान पूरी तरह गरम हो चुका है। 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में मतदान होगा, और उससे पहले नेताओं की रैलियां और रोड शो वोटरों को लुभाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। बिहार में अब चुनावी जंग अपने शिखर पर है।

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बिहार की सियासत में भूचाल : ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह गिरफ्तार, मोकामा हत्याकांड से हिली JDU की जमीन

अनंत सिंह

बिहार की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब शनिवार देर रात पटना पुलिस ने मोकामा से JDU के बाहुबली प्रत्याशी अनंत सिंह को गिरफ्तार कर लिया। ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर अनंत सिंह की यह गिरफ्तारी दुलारचंद यादव हत्याकांड के सिलसिले में की गई है। चुनाव के बीच हुई इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी ने मोकामा समेत पूरे बिहार का सियासी पारा चढ़ा दिया है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला मोकामा के टाल इलाके में हुई एक हिंसक झड़प से जुड़ा है। उस दिन JDU प्रत्याशी अनंत सिंह और जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार के समर्थकों के बीच टकराव हो गया था। इसी झड़प के दौरान जनसुराज पार्टी के समर्थक, 75 वर्षीय दुलारचंद यादव की मौत हो गई। मृतक के पोते ने अनंत सिंह, उनके दो भतीजों समेत पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि दुलारचंद यादव को पहले गोली मारी गई और फिर गाड़ी से कुचलकर उनकी हत्या कर दी गई।

आधी रात को पुलिस का एक्शन

FIR दर्ज होने के बाद भी अनंत सिंह खुलेआम चुनाव प्रचार कर रहे थे, जिसे लेकर सवाल उठ रहे थे। शनिवार देर रात पटना के SSP कार्तिकेय शर्मा के नेतृत्व में एक पुलिस टीम ने कार्रवाई की।

अनंत सिंह

रात करीब 11 बजे : SSP कार्तिकेय शर्मा बाढ़ के कारगिल मार्केट पहुंचे, जहां अनंत सिंह अपने समर्थकों के साथ मौजूद थे।

थोड़ी देर बाद : शुरुआती पूछताछ के बाद पुलिस ने अनंत सिंह को हिरासत में ले लिया।

रात देर तक : पटना के DM और SSP ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अनंत सिंह की गिरफ्तारी की पुष्टि की।

पुलिस ने अनंत सिंह के साथ उनके दो सहयोगियों — मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम — को भी गिरफ्तार किया है।

पुलिस और सियासत का पक्ष

पटना के SSP कार्तिकेय शर्मा ने बताया कि घटनास्थल पर मिले सबूतों, गवाहों के बयानों और शुरुआती जांच के आधार पर अनंत सिंह को मुख्य आरोपी बनाया गया है। उन्होंने कहा कि यह घटना अनंत सिंह की मौजूदगी में हुई और चुनाव आचार संहिता का गंभीर उल्लंघन है। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोली लगने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन शरीर पर अंदरूनी और बाहरी चोटें पाई गई हैं।

दूसरी ओर, अनंत सिंह ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह राजनीतिक साजिश है, जो उनके प्रतिद्वंद्वी सूरजभान सिंह ने रची है। वहीं, जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी ने गिरफ्तारी पर कहा — “देर आए, दुरुस्त आए”, यह कार्रवाई पहले ही हो जानी चाहिए थी।

इस गिरफ्तारी ने मोकामा के चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। अब देखना यह होगा कि इस घटना का चुनाव परिणामों पर क्या असर पड़ता है। पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है और तीनों आरोपियों को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा।

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मोहम्मद अज़हरुद्दीन ने तेलंगाना में मंत्री पद की शपथ ली, क्रिकेट के बाद राजनीति की नई पारी की शुरुआत

अज़हरुद्दीन

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और कांग्रेस नेता मोहम्मद अज़हरुद्दीन ने शुक्रवार को तेलंगाना कैबिनेट में मंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने हैदराबाद स्थित राजभवन में आयोजित समारोह में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

कैबिनेट में अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व

अज़हरुद्दीन, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की कैबिनेट में शामिल होने वाले पहले मुस्लिम मंत्री बने हैं। माना जा रहा है कि यह कदम कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व बढ़ाने के वादे की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उनके शामिल होने से मंत्रिमंडल की कुल संख्या अब 16 हो गई है।

राजनीतिक विवाद भी शुरू

हालांकि, बीजेपी ने इस नियुक्ति पर आपत्ति जताते हुए इसे जुबली हिल्स विधानसभा उपचुनाव से पहले आचार संहिता का उल्लंघन बताया है। पार्टी का कहना है कि यह कदम चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकता है।

अज़हरुद्दीन

अज़हरुद्दीन का बयान

शपथ के बाद मोहम्मद अज़हरुद्दीन ने कहा, “यह मेरी नई पारी की शुरुआत है। मेरा लक्ष्य गरीबों और जरूरतमंदों के उत्थान के लिए काम करना है।”

क्रिकेट से राजनीति तक का सफर

अज़हरुद्दीन का यह कदम उनके क्रिकेट से राजनीति तक के लंबे और प्रेरणादायक सफर में एक नया अध्याय जोड़ता है। भारतीय क्रिकेट के सफल कप्तानों में शुमार अज़हरुद्दीन ने अब अपनी दूसरी पारी जनसेवा के मैदान में शुरू की है।

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Kerala Becomes ‘Extreme Poverty Free State : विपक्ष ने कहा – ये Data Fraud है!

Poverty Free

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने शुक्रवार को ऐलान किया कि राज्य अब “अत्यंत गरीबी मुक्त (Extreme Poverty Free)” बन चुका है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि चार साल के सुनियोजित प्रयास का नतीजा है। हालांकि, सरकार की इस घोषणा ने जहां पूरे राज्य में जश्न का माहौल बना दिया, वहीं विधानसभा में विपक्ष ने इसे “धोखा और डेटा फ्रॉड” करार देते हुए सदन का पूर्ण बहिष्कार किया।

Opposition Walkout : “ये सरकार झूठे आंकड़े पेश कर रही है”

विपक्ष के नेता वी.डी. सतीसन ने मुख्यमंत्री के बयान को “सदन की अवमानना” बताते हुए कहा “सरकार झूठे आंकड़ों पर महल बना रही है। जब एलडीएफ ने अपने घोषणापत्र में 4.5 लाख गरीब परिवारों की बात की थी, तो अब अचानक यह संख्या 64,006 कैसे रह गई?”

विपक्षी दलों ने इसे “fraudulent announcement” कहा और सदन से नारेबाजी करते हुए बाहर निकल गए।

मुख्यमंत्री विजयन ने जवाब दिया — “हम वही वादे करते हैं जिन्हें निभा सकें — और हमने निभाए हैं। यही हमारा जवाब है विपक्ष को।”

तिरुवनंतपुरम में सितारों से सजी जश्न की धूम

सरकारी घोषणा के साथ ही चंद्रशेखरन नायर स्टेडियम में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें ममूटी, मोहनलाल और कमल हासन जैसे दिग्गज सितारे मौजूद थे। मंच पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ हुईं और राज्य के मंत्री भी शामिल रहे। मंत्री एम.बी. राजेश ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। हालांकि, इस आयोजन के बीच 23 अर्थशास्त्रियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक ओपन लेटर जारी कर सरकार की गरीबी उन्मूलन पद्धति पर सवाल उठाए।

वहीं आदिवासी गोत्र महासभा ने इस ऐलान को “एक छलावा (deception)” बताया और फिल्म सितारों से कार्यक्रम से दूरी बनाए रखने की अपील की।

Poverty Free

Four-Year Journey: “Extreme Poverty Eradication Project”

यह उपलब्धि 2021 में शुरू की गई EPEP (Extreme Poverty Eradication Project) का नतीजा है, जो विजयन सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला कैबिनेट निर्णय था। स्थानीय निकायों और कुडुंबश्री नेटवर्क की मदद से राज्यभर में सर्वे किया गया, जिसमें 1,032 पंचायतों में 64,006 परिवार (1,03,099 व्यक्ति) अत्यंत गरीबी में पाए गए।

सरकार ने हर परिवार के लिए चार मानकों पर आधारित व्यक्तिगत योजना बनाई —

  1. खाद्य सुरक्षा
  2. सुरक्षित आवास
  3. न्यूनतम आय
  4. स्वास्थ्य सुविधा

इस मिशन पर ₹1,000 करोड़ से अधिक का निवेश किया गया।

  • 5,422 नए घर बनाए गए
  • 5,522 घरों का नवीनीकरण किया गया
  • 439 परिवारों को 28.32 एकड़ भूमि मिली
  • 34,672 परिवारों को रोजगार योजनाओं से ₹77 करोड़ की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई

India’s Lowest Poverty Rate: Only 0.48%

नीति आयोग की 2023 की बहुआयामी गरीबी रिपोर्ट (MPI) के मुताबिक, केरल पहले ही देश का सबसे कम गरीबी वाला राज्य था, जहाँ गरीबी दर मात्र 0.55% थी। अब यह और घटकर 0.48% रह गई है, जबकि राष्ट्रीय औसत 11.28% है।

CM Vijayan : “यह है केरल मॉडल — Inclusive Growth का Symbol”

मुख्यमंत्री विजयन ने कहा — “यह सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि जनता की जीत है। हमने साबित कर दिया है कि अगर समाज और शासन साथ आएं, तो गरीबी को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।”

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CBI ने पंजाब के IPS अधिकारी हरचरण सिंह भुल्लर पर कसा शिकंजा, करोड़ों की बेहिसाब संपत्ति का खुलासा

CBI

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पंजाब पुलिस के निलंबित DIG हरचरण सिंह भुल्लर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) का नया मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई कुछ हफ्ते पहले हुए रिश्वतखोरी मामले के बाद की गई है, जिसमें भुल्लर को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था।

रिश्वतखोरी से शुरू हुई जांच

16 अक्टूबर को CBI ने हरचरण सिंह भुल्लर को एक स्क्रैप डीलर से 5 लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद एजेंसी ने चंडीगढ़, मोहाली और होशियारपुर में उनके ठिकानों पर छापे मारे, जहां से भारी मात्रा में नकदी, सोना, लग्जरी सामान और संपत्ति के दस्तावेज बरामद किए गए।

CBI

छापेमारी में मिला खजाना

CBI की जांच में सामने आया कि भुल्लर के पास उनकी घोषित आय से कहीं अधिक संपत्ति है। एजेंसी के अनुसार जब्त की गई संपत्ति में शामिल हैं –

  • 7.5 करोड़ रुपये नकद
  • 2.32 करोड़ रुपये मूल्य का सोना और चांदी
  • 26 महंगी ब्रांडेड घड़ियां
  • मर्सिडीज और ऑडी जैसी लग्जरी गाड़ियां
  • लगभग 150 एकड़ जमीन और 50 संपत्तियों के दस्तावेज

CBI की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में भुल्लर की घोषित आय मात्र 32 लाख रुपये थी, जबकि बरामद संपत्ति कई गुना अधिक है। अब एजेंसी यह जांच कर रही है कि इस संपत्ति को अर्जित करने में परिवार या अन्य सहयोगियों की कोई भूमिका थी या नहीं।

CBI ने यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत दर्ज किया है। अधिकारियों के अनुसार, यह अब तक की सबसे बड़ी संपत्ति बरामदगी में से एक मानी जा रही है, जिसने पंजाब पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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पंजाब में ‘मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना’ का दूसरा चरण शुरू – बुजुर्गों को मिलेगी मुफ्त तीर्थ यात्रा की सौगात

मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना

पंजाब सरकार ने राज्य के वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ मिलकर ‘मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना’ के दूसरे चरण की शुरुआत संगरूर के धूरी से की। यह चरण नौवें सिख गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत की वर्षगांठ को समर्पित है।

योजना का उद्देश्य

इस योजना का मकसद है — पंजाब के 50 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिकों को देशभर के प्रमुख धार्मिक स्थलों की मुफ्त यात्रा की सुविधा देना। योजना का लाभ सभी धर्मों के लोगों को मिलेगा, जिससे सामाजिक और धार्मिक एकता को बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना

योजना की मुख्य विशेषताएं

पूर्णतः निःशुल्क यात्रा : सरकार श्रद्धालुओं की यात्रा, भोजन, ठहरने और अन्य सभी खर्च उठाएगी।

शामिल प्रमुख तीर्थ स्थल : श्री हरमंदिर साहिब (अमृतसर), दुर्गियाना मंदिर, श्री आनंदपुर साहिब, भगवान वाल्मीकि तीर्थ और माता नैना देवी मंदिर जैसे पवित्र स्थलों को शामिल किया गया है।

पारदर्शी चयन प्रक्रिया : हर विधानसभा क्षेत्र से 16,000 श्रद्धालुओं का चयन ड्रॉ प्रणाली से होगा।

स्वास्थ्य सुविधा : प्रत्येक यात्रा दल के साथ मेडिकल टीम भी तैनात रहेगी।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि सरकार “लोगों के आध्यात्मिक और सामाजिक कल्याण” के लिए पूरी तरह समर्पित है। वहीं अरविंद केजरीवाल ने इसे “जनता के पैसे को जनता की सेवा में लगाने वाली ईमानदार पहल” बताया और श्रद्धालुओं से पंजाब की शांति और खुशहाली के लिए प्रार्थना करने की अपील की।

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6 साल बाद ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात : क्या पिघलेगा अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वॉर का बर्फ़?

अमेरिका-चीन

अमेरिका-चीन के बीच छह साल से जमे बर्फ़ जैसे रिश्तों में हल्की गर्माहट लौटती दिख रही है। लगभग 6 साल के लंबे अंतराल के बाद, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक अहम बैठक हुई। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे व्यापारिक तनाव (Trade War) को कम करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, बैठक का मुख्य एजेंडा व्यापार सौदों को संतुलित करना और टैरिफ विवादों को सुलझाना था। ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल (2017-2021) में दोनों देशों के बीच व्यापारिक मतभेद चरम पर पहुंच गए थे, जब अरबों डॉलर के सामान पर भारी टैरिफ (Import Duties) लगा दिए गए थे। इसका असर न सिर्फ़ अमेरिका और चीन पर, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा था।

यह मुलाकात खास इसलिए भी है क्योंकि ट्रंप अब अमेरिका के राष्ट्रपति नहीं हैं। बताया जा रहा है कि वे अपनी एशिया यात्रा के दौरान बीजिंग पहुंचे और वहीं शी जिनपिंग से आमने-सामने चर्चा की। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बैठक ट्रंप की वैश्विक मंच पर वापसी और संभावित 2028 अमेरिकी चुनाव में उनकी दावेदारी के संकेत के रूप में देखी जा रही है।

अमेरिका-चीन

बैठक में प्रौद्योगिकी, बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights) और अमेरिकी कंपनियों को चीनी बाजार तक बेहतर पहुंच जैसे अहम मुद्दों पर भी चर्चा हुई। हालांकि दोनों पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि इस मुलाकात से दोनों देशों के बीच संवाद का एक नया रास्ता खुला है।

विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल किसी बड़े समझौते की उम्मीद नहीं है, लेकिन यह मुलाकात अमेरिका-चीन संबंधों में कूटनीतिक बातचीत की बहाली का संकेत देती है।

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8वां वेतन आयोग मंजूर : केंद्र सरकार के 1 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलेगा फायदा

8वां वेतन

केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) के गठन के दिशानिर्देशों (Terms of Reference) को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले से 50 लाख से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारी और करीब 69 लाख पेंशनभोगी, यानी 1 करोड़ से अधिक लोग, सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे।

आयोग की संरचना

8वां वेतन आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। इसके साथ IIM बैंगलोर के प्रोफेसर पुलक घोष अंशकालिक सदस्य और पेट्रोलियम सचिव पंकज जैन सदस्य-सचिव होंगे। आयोग को अपनी रिपोर्ट 18 महीनों के भीतर सरकार को सौंपनी होगी।

कब से लागू होगी नई सिफारिश

आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू की जाने की उम्मीद है, हालांकि कर्मचारियों को वास्तविक लाभ 2027 या 2028 से मिल सकता है। रिपोर्ट आने के बाद कैबिनेट की अंतिम मंजूरी जरूरी होगी।

8वां वेतन

कितना बढ़ेगा वेतन

शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, वेतन में 20 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी संभव है। 7वें वेतन आयोग में जहां फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, वहीं 8वें आयोग में इसे आर्थिक स्थिति और महंगाई दर को देखते हुए तय किया जाएगा। यह फैक्टर तय करता है कि मौजूदा मूल वेतन में कितनी वृद्धि होगी।

किन लाभों की समीक्षा होगी

8वां वेतन आयोग सिर्फ बेसिक पे नहीं, बल्कि महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) और अन्य भत्तों की भी समीक्षा करेगा। आयोग की सिफारिशें लागू होने पर लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। यह फैसला सरकार के लिए सामाजिक और राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है, जो देशभर में करोड़ों परिवारों की आय में सीधा इजाफा लाएगा।

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