Baramulla earthquake 2026: जम्मू-कश्मीर में 4.6 तीव्रता के झटकों ने बढ़ाई दहशत

Baramulla

जम्मू-कश्मीर के Baramulla जिले में 2 फरवरी 2026 को सुबह तड़के आए 4.6 तीव्रता के भूकंप ने कश्मीर घाटी को हिला दिया। रिक्टर स्केल पर मापी गई इस तीव्रता ने लोगों को कड़ाके की सर्दी में घरों से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया, हालांकि कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, यह भूकंप Baramulla के पट्टन क्षेत्र में केंद्रित था, जिसकी गहराई लगभग 10 किलोमीटर रही। बारामूला भूकंप की यह घटना क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता को फिर से उजागर करती है।

Baramulla earthquake
जम्मू-कश्मीर में 4.6 तीव्रता के झटकों

भूकंप का समय और तीव्रता: विस्तृत जानकारी

बारामूला भूकंप सुबह ठीक 5:35 बजे IST पर आया, जब अधिकांश लोग गहरी नींद में थे। NCS की प्रारंभिक रिपोर्ट में तीव्रता 4.6 बताई गई, जबकि कुछ स्रोतों ने इसे 4.7 तक मापा। 4.6 तीव्रता वाले भूकंप में आमतौर पर हल्के से मध्यम झटके महसूस होते हैं, जो इमारतों को हिला सकते हैं लेकिन सामान्यतः नुकसान नहीं पहुंचाते। इस बारामूला भूकंप 2026 में झटके 10-15 सेकंड तक रहे, जिससे श्रीनगर तक कंपन महसूस हुआ। जम्मू कश्मीर भूकंप की यह घटना पिछले कुछ महीनों में क्षेत्र में आए कई हल्के झटकों की कड़ी का हिस्सा लगती है।

झटके महसूस हुए इन इलाकों में

बारामूला भूकंप के झटके मुख्य रूप से कश्मीर घाटी के उत्तरी और मध्य हिस्सों में महसूस किए गए। बारामूला जिले के पट्टन, सोपोर और उरी जैसे क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहे, जहां लोग चीखते-चिल्लाते घरों से बाहर भागे। श्रीनगर, पुलवामा, गांदरबल, कुपवाड़ा और हंदवाड़ा में भी हल्के झटके दर्ज हुए। कुछ रिपोर्ट्स में पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों तक कंपन पहुंचने का जिक्र है। जम्मू कश्मीर भूकंप 4.6 ने सर्द मौसम में पहले से तनावग्रस्त क्षेत्र को और सतर्क कर दिया। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) ने सभी जिलों से रिपोर्ट मांगी, लेकिन नुकसान न होने की पुष्टि हुई।

कोई हताहत या नुकसान नहीं: राहत की खबर

सौभाग्य से, बारामूला में 4.6 तीव्रता के भूकंप से कोई हताहत या संपत्ति को नुकसान नहीं हुआ। SDMA और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत अलर्ट जारी कर स्थिति का जायजा लिया। लोग घबराकर मस्जिदों और खुली जगहों पर इकट्ठा हो गए, लेकिन क्षतिग्रस्त इमारत या सड़क का कोई समाचार नहीं। यह जम्मू कश्मीर भूकंप 2026 की तीव्रता को देखते हुए सकारात्मक है। भूकंपरोधी इमारतों और जनजागरूकता ने बड़ी तबाही टलवाई।

जम्मू-कश्मीर की भूकंपीय स्थिति: क्यों संवेदनशील?

जम्मू-कश्मीर हिमालयन बेल्ट पर स्थित है, जो दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में शुमार है। बारामूला भूकंप 2026 इसकी पुष्टि करता है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर से लगातार झटके आते रहते हैं। पिछले साल क्षेत्र में कई 4+ तीव्रता वाले भूकंप दर्ज हो चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कश्मीर घाटी जोन-IV और V में आती है, जहां भूकंपरोधी निर्माण अनिवार्य है। बारामूला भूकंप ने फिर याद दिलाया कि तैयारी ही सुरक्षा है।

Baramulla earthquake
जम्मू-कश्मीर में 4.6 तीव्रता के झटकों

भविष्य के लिए सलाह: सुरक्षित रहें

बारामूला भूकंप के बाद प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। नागरिकों को ड्रॉप, कवर एंड होल्ड ऑन का पालन करना चाहिए। भूकंप ऐप्स डाउनलोड करें और इमरजेंसी किट तैयार रखें। जम्मू कश्मीर भूकंप 4.6 जैसी घटनाएं सामान्य हैं, लेकिन सतर्कता से नुकसान रोका जा सकता है। NCS लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है।

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2026 Grammy Awards : केनड्रिक लमार और लेडी गागा का ऐतिहासिक दबदबा, देखें विजेताओं की पूरी सूची

Grammy

संगीत जगत का सबसे प्रतिष्ठित मंच, ’68वें ग्रैमी अवॉर्ड्स’, इस बार लॉस एंजिल्स के क्रिप्टो.कॉम एरिना में एक ऐसी शाम लेकर आया जिसे दशकों तक याद रखा जाएगा। साल 2026 Grammy Awards के इन पुरस्कारों ने न केवल संगीत की विविधता को सराहा, बल्कि नए युग के कलाकारों के बढ़ते प्रभाव को भी दुनिया के सामने रखा। इस साल केनड्रिक लमार, लेडी गागा और बैड बनी जैसे दिग्गज कलाकारों ने प्रमुख श्रेणियों में अपनी जीत का परचम लहराया।

2026 Grammy Awards
केनड्रिक लमार और लेडी गागा

केनड्रिक लमार और लेडी गागा की बड़ी जीत

इस साल की सबसे बड़ी घोषणाओं में ‘रिकॉर्ड ऑफ द ईयर’ का खिताब केनड्रिक लमार और SZA के गाने ‘Luther’ के नाम रहा। इस श्रेणी में सबरीना कार्पेंटर और बिली इलिश जैसे कड़े प्रतिद्वंद्वी शामिल थे, लेकिन लमार की कलात्मकता ने बाजी मार ली। वहीं, ‘सॉन्ग ऑफ द ईयर’ में लेडी गागा के ‘Abracadabra’ ने अपनी जादुई पकड़ बनाई। गागा ने न केवल यह पुरस्कार जीता, बल्कि उनके एल्बम ‘MAYHEM’ ने ‘बेस्ट पॉप वोकल एल्बम’ का खिताब जीतकर उनकी वर्सेटैलिटी को एक बार फिर साबित कर दिया।

बैड बनी का ऐतिहासिक ‘एल्बम ऑफ द ईयर’

लैटिन संगीत के सुपरस्टार बैड बनी के लिए यह साल मील का पत्थर साबित हुआ। उनके एल्बम ‘DtMF’ ने दुनिया भर के चार्ट्स पर राज करने के बाद ‘एल्बम ऑफ द ईयर’ की प्रतिष्ठित ट्रॉफी अपने नाम की। उन्होंने केनड्रिक लमार के ‘GNX’ और सबरीना कार्पेंटर के ‘Manchild’ जैसे बेहद लोकप्रिय एल्बम्स को पीछे छोड़कर यह उपलब्धि हासिल की। यह जीत वैश्विक संगीत में लैटिन ध्वनियों के बढ़ते प्रभुत्व का एक सशक्त प्रमाण है।

ओलिविया डीन बनीं ‘बेस्ट न्यू आर्टिस्ट’

नए कलाकारों की श्रेणी में इस बार ओलिविया डीन ने सबको चौंकाते हुए ‘बेस्ट न्यू आर्टिस्ट’ का पुरस्कार जीता। इस श्रेणी में KATSEYE और एडिसन रे जैसे सोशल मीडिया सेंसेशन के नाम भी शामिल थे, लेकिन ओलिविया की सुरीली आवाज और अद्वितीय संगीत शैली ने जूरी का दिल जीत लिया। इसके अलावा, लियोन थॉमस ने अपने एल्बम ‘Mutt’ के लिए ‘बेस्ट R&B एल्बम’ का पुरस्कार जीतकर अपनी संगीत यात्रा में एक बड़ा अध्याय जोड़ा।

स्टेज पर यादगार परफॉर्मेंस और ‘APT’ का जादू

पुरस्कारों के अलावा, इस रात की परफॉर्मेंस ने दर्शकों की धड़कनें तेज कर दीं। शो की शुरुआत रोसे (ब्लैकपिंक) और ब्रूनो मार्स के सुपरहिट गाने ‘APT’ से हुई। यह पहली बार था जब किसी K-पॉप सोलो आर्टिस्ट ने ग्रैमी के मुख्य मंच पर इस तरह की धमाकेदार शुरुआत की। ब्रूनो मार्स के गिटार और रोसे की एनर्जी ने पूरे एरिना को झूमने पर मजबूर कर दिया। शो का समापन टायलर, द क्रिएटर के एक थिएट्रिकल एक्ट के साथ हुआ, जिसमें धमाकों और शानदार कोरियोग्राफी ने रात को विदाई दी।

2026 Grammy Awards
केनड्रिक लमार और लेडी गागा

भारतीय और एशियाई संगीत का वैश्विक प्रभाव

भले ही इस साल भारतीय कलाकारों की सीधी भागीदारी कम रही, लेकिन एशियाई संगीत का प्रभाव साफ नजर आया। ‘APT’ की सफलता और विभिन्न श्रेणियों में एशियाई मूल के कलाकारों के नामांकन ने यह स्पष्ट कर दिया कि ग्रैमी अब भौगोलिक सीमाओं से परे जाकर वैश्विक प्रतिभा को पहचान दे रहा है।

2026 के ग्रैमी अवॉर्ड्स केवल पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं थे, बल्कि यह संगीत के बदलते स्वरूप का उत्सव था। रैप, पॉप, आरएंडबी और लैटिन संगीत के बीच का संतुलन इस साल की सबसे बड़ी विशेषता रही।

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ड्राइवरों को मिली बड़ी राहत: टोल प्लाजा पर अब कोई झंझट नहीं ,1 फरवरी 2026 से FASTag KYV प्रक्रिया समाप्त

टोल प्लाजा

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने देश के करोड़ों वाहन चालकों के लिए नए साल का सबसे बड़ा तोहफा पेश किया है। 1 फरवरी 2026 से नए FASTag जारी करने की पूरी प्रक्रिया में एक क्रांतिकारी बदलाव किया गया है, जिसके तहत ‘Know Your Vehicle’ (KYV) वेरिफिकेशन को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। पहले यह अनिवार्य प्रक्रिया टोल प्लाजा पर लंबी कतारों, भारी कागजी कार्रवाई और यात्रियों के लिए अनावश्यक मानसिक परेशानी का प्रमुख कारण बनती थी।

अब नई कार, जीप या वैन खरीदने वालों को FASTag एक्टिवेट करने के बाद किसी भी अतिरिक्त भौतिक या डिजिटल सत्यापन के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यह फैसला NHAI को मिली उन हजारों शिकायतों के बाद लिया गया है, जिनमें ड्राइवरों ने वैध दस्तावेज होने के बावजूद पोस्ट-एक्टिवेशन जांच के नाम पर होने वाली देरी पर नाराजगी जताई थी।

टोल प्लाजा
FASTag KYV प्रक्रिया समाप्त

KYV प्रक्रिया क्या थी और इसे क्यों हटाया गया?

KYV या ‘अपने वाहन को जानें’ प्रक्रिया वास्तव में FASTag जारी होने के बाद वाहन के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC), बीमा और पेंडिंग चालान के विवरण को मैन्युअल या डिजिटल तरीके से दोबारा जांचने का एक सिस्टम था। इसका मुख्य उद्देश्य टैग के दुरुपयोग को रोकना था, लेकिन धरातल पर यह सिस्टम टोल गेट्स पर अक्सर 10 से 15 मिनट की अतिरिक्त देरी का कारण बन रहा था। NHAI ने अब सरकार के ‘VAHAN’ पोर्टल की बढ़ती क्षमता और डेटा की सटीकता पर भरोसा जताते हुए इसे हटाने का निर्णय लिया है।

डिजिटल इंडिया के इस दौर में अब फिजिकल KYV की कोई प्रासंगिकता नहीं रह गई है। 1 फरवरी के बाद जारी होने वाले सभी नए टैग्स पर यह राहत लागू होगी, जिससे नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक का प्रवाह और भी अधिक सुगम हो जाएगा।

किन वाहनों को मिलेगी विशेष छूट: प्राइवेट बनाम कमर्शियल

NHAI के इस नए सर्कुलर के अनुसार, यह बड़ी राहत मुख्य रूप से ‘प्राइवेट’ श्रेणी के वाहनों जैसे निजी कार, जीप और वैन मालिकों के लिए ही है। इन वाहन स्वामियों को अब टोल प्लाजा पर स्थापित KYV काउंटरों पर रुकने या अपने दस्तावेजों को स्कैन करवाने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि बस, ट्रक और मल्टी-एक्सल जैसे ‘कमर्शियल’ वाहनों के लिए पुराने नियम ही लागू रहेंगे।

वाणिज्यिक वाहनों में टैग की हेराफेरी की संभावना अधिक होने के कारण उनमें सख्त सत्यापन जारी रहेगा। NHAI के अनुसार, यदि कोई प्राइवेट वाहन चालक टैग का गलत इस्तेमाल करता पाया गया, तो उस पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

पुराने FASTag धारकों के लिए क्या बदलेगा?

अगर आपके पास पहले से ही सक्रिय FASTag है, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। 1 फरवरी के बदलावों के बाद पुराने टैग धारकों के लिए भी वेरिफिकेशन का झंझट लगभग खत्म हो गया है। अब आपको बार-बार KYV अपडेट करने के लिए किसी बैंक या टोल केंद्र के चक्कर नहीं काटने होंगे। NHAI ने स्पष्ट किया है कि जब तक आपका वाहन डेटा VAHAN पोर्टल पर सही है और आपका बीमा सक्रिय है,

तब तक आपका टैग सुचारू रूप से काम करता रहेगा। हालांकि, विशेषज्ञों की सलाह है कि पुराने टैग यूजर्स एक बार NHAI ऐप या अपने संबंधित बैंक पोर्टल पर जाकर यह सुनिश्चित कर लें कि उनका मोबाइल नंबर और वाहन विवरण सही ढंग से लिंक है।

टोल प्लाजा
FASTag KYV प्रक्रिया समाप्त

ड्राइवरों को होने वाले लाभ और भविष्य की राह

इस ऐतिहासिक कदम से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि करोड़ों लीटर ईंधन की भी बचत होगी। आंकड़ों के अनुसार, टोल प्लाजा पर रुकने और दोबारा शुरू होने में खर्च होने वाला समय कम होने से ट्रैफिक जाम में 20% तक की कमी आने की उम्मीद है। अब ई-कॉमर्स वेबसाइट्स या बैंक ऐप से FASTag खरीदना और उसे तुरंत उपयोग करना बेहद आसान हो जाएगा।

NHAI आने वाले समय में SAT (सैटेलाइट आधारित टोलिंग) जैसे और भी उन्नत सिस्टम लाने की योजना बना रहा है, जिससे भविष्य में फिजिकल टोल गेट्स की जरूरत ही खत्म हो जाएगी। कुल मिलाकर, 1 फरवरी से शुरू हो रहा यह नया नियम भारतीय सड़कों को और अधिक ‘स्मार्ट’ और यात्रियों के लिए ‘फ्रेंडली’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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Patna Police का ‘ऑपरेशन क्लीन’: 80 लाख की नशीली सिरप के साथ अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़, 6 गिरफ्तार

Patna

बिहार की राजधानी Patna में नशीली दवाओं के सौदागरों के खिलाफ पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी चोट की है। Patna Police की विशेष टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए ‘खांटी सिरप’ (कोडीन युक्त कफ सिरप) की एक विशाल खेप पकड़ी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की कीमत लगभग 80 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस ने इस मामले में गिरोह के मुख्य सरगना सहित 6 शातिर तस्करों को दबोचने में कामयाबी हासिल की है। यह पूरी कार्रवाई पटना सिटी के मालसलामी और दीदारगंज थाना क्षेत्रों में अंजाम दी गई।

Patna Police
Patna Police

डाक पार्सल और मसालों की आड़ में ‘सफेद जहर’ की सप्लाई

तस्करों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए तस्करी का बेहद शातिर तरीका अपनाया था। जब्त की गई सिरप की बोतलों को डाक विभाग के फर्जी पार्सल और तेज पत्तों की बोरियों के नीचे छिपाकर लाया जा रहा था। पुलिस ने छापेमारी के दौरान कुल 4485 लीटर प्रतिबंधित सिरप बरामद की, जो 289 अलग-अलग कार्टन में पैक थी। जांच में पता चला है कि यह खेप हिमाचल प्रदेश की एक फार्मा कंपनी से फर्जी कागजातों के जरिए मंगवाई गई थी और इसे पटना के स्थानीय बाजारों के साथ-साथ सीमावर्ती जिलों में सप्लाई किया जाना था।

सरगना ‘गन्नी’ सहित 6 तस्कर पुलिस की गिरफ्त में

इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता गिरोह के मास्टरमाइंड सूर्यप्रकाश उर्फ ‘गन्नी’ की गिरफ्तारी है। गन्नी पटना के कदमकुआं इलाके का रहने वाला है और लंबे समय से शहर में नशीली दवाओं के वितरण नेटवर्क को नियंत्रित कर रहा था। उसके साथ गिरफ्तार किए गए अन्य पांच आरोपियों में ट्रक ड्राइवर और लोकल एजेंट शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इन आरोपियों का जाल बिहार के कटिहार, सहरसा और वैशाली तक फैला हुआ था। ये लोग हिमाचल से माल मंगवाकर उसे ऊंचे दामों पर युवाओं और नशेड़ियों को बेचते थे।

हिमाचल प्रदेश से बिहार तक जुड़ा तस्करी का नेटवर्क

वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि बिहार में नशीली दवाओं की जड़ें अन्य राज्यों से जुड़ी हैं। डीएसपी डॉ. गौरव कुमार ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि गिरोह के सदस्य हिमाचल प्रदेश के इंडस्ट्रियल एरिया से सीधे संपर्क में थे। ट्रक (टाटा 407) और अन्य वाणिज्यिक वाहनों का उपयोग कर वे चेकपोस्टों को पार कर जाते थे क्योंकि ऊपर से डाक पार्सल या किराने का सामान लदा होता था। पुलिस अब उन कंपनियों की भी जांच कर रही है जहां से यह सिरप बिना वैध लाइसेंस के रिलीज किया गया था।

युवाओं के भविष्य पर प्रहार: बिहार में ‘खांटी’ का बढ़ता चलन

बिहार में शराबबंदी के बाद से कोडीन युक्त कफ सिरप (जिसे स्थानीय भाषा में ‘खांटी’ कहा जाता है) की मांग नशे के विकल्प के रूप में बढ़ी है। यह न केवल स्वास्थ्य के लिए घातक है, बल्कि युवाओं को अपराध की ओर भी धकेल रहा है। पटना पुलिस की इस कार्रवाई से ड्रग माफियाओं की कमर टूटी है। एसएसपी ने स्पष्ट किया है कि ‘मिशन सुरक्षा’ के तहत शहर के स्कूल-कॉलेजों और झुग्गी बस्तियों में सक्रिय छोटे डीलरों पर भी नकेल कसी जाएगी।

Patna Police
Patna Police का ‘ऑपरेशन क्लीन’

पुलिस की अपील

पटना पुलिस की यह उपलब्धि नशा मुक्त बिहार के संकल्प की ओर एक बड़ा कदम है। पुलिस ने एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में छापेमारी जारी है। पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उनके आस-पास ऐसी कोई संदिग्ध गतिविधि या नशीली दवाओं की बिक्री दिखे, तो तुरंत पुलिस हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें।

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Epstein Files में मोदी जी का नाम? भारत ने ‘कचरा’ बताकर खारिज किया विदेशी प्रोपगैंडा, जानें क्या है पूरा सच

Epstein Files

सोशल मीडिया के इस दौर में ‘फेक न्यूज़’ की आग कितनी तेजी से फैलती है, इसका ताज़ा उदाहरण जेफरी एपस्टीन फाइल्स (Jeffrey Epstein Files) से जुड़ा नया विवाद है। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) द्वारा 30 जनवरी 2026 को जारी किए गए 35 लाख से अधिक पन्नों के नए दस्तावेजों के बाद भारत में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। दरअसल, इन फाइल्स में कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम का ज़िक्र होने का दावा किया गया, जिसे भारत सरकार ने पूरी तरह से ‘आधारहीन’ और ‘कचरा’ (Trashy) करार दिया है।

Epstein Files
Epstein Files में मोदी जी का नाम

विदेश मंत्रालय का कड़ा प्रहार: “एक अपराधी की मनगढ़ंत बातें”

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने शनिवार, 31 जनवरी 2026 को एक आधिकारिक बयान जारी कर उन मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें पीएम मोदी का नाम एपस्टीन से जोड़ने की कोशिश की गई थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हमने तथाकथित एपस्टीन फाइल्स से संबंधित एक ईमेल संदेश की खबरें देखी हैं, जिसमें प्रधानमंत्री और उनकी 2017 की इज़राइल यात्रा का संदर्भ दिया गया है।”

जायसवाल ने आगे स्पष्ट किया कि जुलाई 2017 में प्रधानमंत्री की इज़राइल की आधिकारिक यात्रा एक ऐतिहासिक तथ्य है, लेकिन उसके अलावा ईमेल में किए गए अन्य सभी दावे एक सजायाफ्ता अपराधी की दिमागी उपज और ‘ट्रैश’ हैं। भारत ने इसे ‘घोर तिरस्कार’ (Utmost Contempt) के साथ खारिज कर दिया है।

क्या है ईमेल विवाद की असली सच्चाई?

अमेरिकी जांच एजेंसी द्वारा जारी दस्तावेजों में एक ईमेल सामने आया है जो 2017 का बताया जा रहा है। इस ईमेल में जेफरी एपस्टीन कथित तौर पर अपने प्रभाव का दिखावा करने के लिए ‘नेम-ड्रॉपिंग’ (बड़े नामों का इस्तेमाल) कर रहा था। विशेषज्ञों का कहना है कि एपस्टीन जैसे लोग अपनी साख बढ़ाने के लिए अक्सर वैश्विक नेताओं के नाम का दुरुपयोग करते थे।

दस्तावेजों के विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक अपराधी द्वारा की गई चर्चा थी, जिसका पीएम मोदी या भारत सरकार से कोई लेना-देना नहीं है। अमेरिकी अधिकारियों ने भी स्पष्ट किया है कि किसी फाइल में नाम होने का मतलब यह कतई नहीं है कि वह व्यक्ति किसी गलत गतिविधि में शामिल था।

Epstein Files
Epstein Files में मोदी जी का नाम

विपक्ष के सवालों पर सरकार का पलटवार

भारत में इस मुद्दे ने तब तूल पकड़ा जब विपक्षी दल कांग्रेस के नेताओं ने इसे ‘राष्ट्रीय शर्म’ बताते हुए सरकार से स्पष्टीकरण मांगा। हालांकि, भाजपा और सरकार समर्थकों ने इसे भारत की छवि खराब करने की एक अंतरराष्ट्रीय साजिश बताया है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, AI-जनरेटेड तस्वीरों और एडिटेड स्क्रीनशॉट्स के जरिए इस खबर को सनसनीखेज बनाने की कोशिश की गई है।

सावधान रहें फेक न्यूज़ से यह पहली बार नहीं है जब पीएम मोदी की वैश्विक छवि को निशाना बनाया गया हो। G20 और अन्य वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती धाक से परेशान कुछ तत्व ऐसी अफवाहों को हवा दे रहे हैं। गूगल न्यूज़ और अन्य विश्वसनीय स्रोतों ने भी पुष्टि की है कि एपस्टीन की किसी भी ‘क्लाइंट लिस्ट’ या ‘क्राइम लिस्ट’ में किसी भी भारतीय नेता का कोई प्रमाणिक नाम नहीं है।

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होली-छठ 2026: घर जाने की राह हुई पथरीली! ट्रेनों में लंबी वेटिंग और हवाई किराए में 40% का उछाल, जानें कैसे पहुचें घर

होली

त्योहारों का सीजन आते ही प्रवासी भारतीयों और उत्तर भारतीयों के लिए अपने घर पहुंचना एक बड़ी चुनौती बन गया है। होली 2026 (3-4 मार्च) और आगामी छठ पर्व के लिए दिल्ली, मुंबई और गुजरात जैसे बड़े शहरों से बिहार और उत्तर प्रदेश जाने वाली ट्रेनों में टिकटों की भारी मारामारी शुरू हो गई है। आलम यह है कि फरवरी के आखिरी हफ्ते से लेकर मार्च के पहले हफ्ते तक प्रमुख ट्रेनों में कन्फर्म सीटें मिलना लगभग नामुमकिन हो गया है।

होली
ट्रेनों में लंबी वेटिंग

प्रमुख ट्रेनों में ‘नो रूम’: वेटिंग लिस्ट भी हुई बंद

दिल्ली से पटना, दरभंगा, मुजफ्फरपुर और वाराणसी जाने वाली ट्रेनों जैसे संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस, बिहार संपर्क क्रांति, श्रमजीवी और मगध एक्सप्रेस में 25 फरवरी से 10 मार्च तक स्लीपर और एसी कोच पूरी तरह फुल हो चुके हैं। कई ट्रेनों में तो वेटिंग लिस्ट इतनी लंबी हो गई है कि रेलवे ने ‘नो रूम’ (No Room) का बोर्ड लगा दिया है, यानी अब उनमें वेटिंग टिकट भी नहीं मिल रहे हैं।

जेब पर भारी ‘त्योहार’: किराए में 30-40% की बढ़ोतरी

यात्रियों को न केवल सीटों की कमी, बल्कि महंगे किराए का भी सामना करना पड़ रहा है।

• डायनामिक प्राइसिंग: प्रीमियम ट्रेनों में डायनामिक प्राइसिंग और तत्काल के चलते स्लीपर क्लास का टिकट 500-800 रुपये और एसी कोच का किराया 2,000 रुपये तक महंगा हो गया है।

• हवाई किराया: फ्लाइट के टिकटों में भी 40% तक की बढ़ोतरी देखी गई है। दिल्ली से पटना का जो किराया सामान्य दिनों में 4,000 रुपये के आसपास रहता था, वह पीक डेट्स पर 10,000 रुपये के पार पहुंच गया है।

होली स्पेशल ट्रेनों का इंतजार: कब आएगी लिस्ट?

यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए रेलवे बोर्ड जल्द ही ‘होली स्पेशल ट्रेनों’ की घोषणा करने वाला है।

• अपेक्षित रूट्स: आनंद विहार-सहरसा, नई दिल्ली-राजेंद्र नगर (पटना), दिल्ली-दरभंगा और मुंबई-वाराणसी जैसे रूट्स पर स्पेशल ट्रेनें चलाने की योजना है।

• लिस्ट कब आएगी: संभावना है कि 10 से 15 फरवरी के बीच रेलवे 100 से ज्यादा स्पेशल ट्रेनों का शेड्यूल जारी करेगा। पिछले पैटर्न के अनुसार, आनंद विहार और नई दिल्ली से बिहार के लिए कई जोड़ी स्पेशल गाड़ियाँ (जैसे 04093/04094) चलाई जा सकती हैं।

होली-छठ 2026
ट्रेनों में लंबी वेटिंग

यात्रियों के लिए सलाह: घर पहुंचने के स्मार्ट तरीके

• वैकल्पिक रूट्स: यदि मुख्य ट्रेनों में जगह नहीं है, तो कनेक्टिंग ट्रेनों या बस सेवाओं का उपयोग करें।

• फ्लाइट टाइमिंग: यदि आप फ्लाइट से जाना चाहते हैं, तो देर रात की फ्लाइट चुनकर आप 4-5 हजार रुपये तक बचा सकते हैं।

• वंदे भारत एक्सप्रेस: थोड़ी महंगी होने के बावजूद वंदे भारत में अन्य ट्रेनों की तुलना में सीट मिलने की संभावना थोड़ी अधिक रहती है।

• तत्काल बुकिंग: यात्रा से एक दिन पहले सुबह 10 बजे (AC) और 11 बजे (Sleeper) के लिए IRCTC ऐप पर एक्टिव रहें।

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SS Rajamouli की अगली सुनामी: ‘Varanasi’ की रिलीज डेट आउट, महेश बाबू और प्रियंका चोपड़ा का दिखेगा महा-अवतार!

Varanasi

‘बाहुबली’ और ‘RRR’ जैसी फिल्मों से भारतीय सिनेमा का डंका पूरी दुनिया में बजाने वाले मास्टरमाइंड डायरेक्टर एसएस राजामौली एक बार फिर इतिहास रचने के लिए तैयार हैं। काफी समय से सस्पेंस में रखी गई उनकी मेगा-बजट फिल्म ‘वाराणसी’ (Varanasi) की आधिकारिक रिलीज डेट का ऐलान हो चुका है। राजामौली ने एक बेहद डरावने और शानदार पोस्टर के साथ दुनिया को बता दिया है कि यह फिल्म सिनेमा के सारे रिकॉर्ड तोड़ने आ रही है।

SS Rajamouli
महेश बाबू और प्रियंका चोपड़ा का दिखेगा महा-अवतार

रिलीज डेट: उगादी के खास मौके पर मचेगा गदर

निर्माताओं ने पुष्टि की है कि फिल्म ‘वाराणसी’ 7 अप्रैल 2027 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में दस्तक देगी। यह तारीख तेलुगु नववर्ष ‘उगादी’ के साथ मेल खाती है, जो फिल्म के लिए बॉक्स ऑफिस पर एक बहुत बड़ी ओपनिंग सुनिश्चित कर सकती है। पहले इसे जनवरी 2027 में रिलीज करने की चर्चा थी, लेकिन संदीप रेड्डी वंगा की फिल्म ‘स्पिरिट’ से टकराव टालने के लिए मेकर्स ने इसे अप्रैल में शिफ्ट कर दिया है।

पोस्टर ने उड़ाए होश: ‘7’ के अंक में छिपा है राज

सोशल मीडिया पर शेयर किए गए नए पोस्टर में एक दहला देने वाला दृश्य दिखाया गया है, जहाँ धरती से एक विशाल क्षुद्रग्रह (Asteroid) टकराता नजर आ रहा है। पोस्टर में आग की लपटों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे सूक्ष्म रूप से ‘7’ का अंक बना रही हैं, जो सीधे तौर पर रिलीज की तारीख (7 अप्रैल) की ओर इशारा करता है। राजामौली ने इसे कैप्शन दिया— “April 7th, 2027… #VARANASI.”

महेश बाबू बनेंगे ‘रुद्र’ और प्रियंका की वापसी

इस फिल्म की स्टार कास्ट ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।

• महेश बाबू: फिल्म में ‘रुद्र’ की भूमिका में नजर आएंगे, जो एक शिव भक्त हैं।

• प्रियंका चोपड़ा जोनास: वह ‘मंदाकिनी’ के किरदार के साथ लंबे समय बाद भारतीय सिनेमा में वापसी कर रही हैं।

• पृथ्वीराज सुकुमारन: फिल्म में वे मुख्य विलेन ‘कुम्भा’ का दमदार रोल निभाते दिखेंगे।

क्या है कहानी? टाइम ट्रैवल और पौराणिक कथाओं का मेल

‘वाराणसी’ महज एक एक्शन फिल्म नहीं है, बल्कि यह पौराणिक कथाओं (Mythology), टाइम ट्रैवल (Time Travel) और हाई-स्टेक्स एडवेंचर का एक अद्भुत मिश्रण है।

Varanasi
महेश बाबू और प्रियंका चोपड़ा का दिखेगा महा-अवतार

कहानी रुद्र (महेश बाबू) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक खोई हुई ब्रह्मांडीय कलाकृति की तलाश में निकलता है। फिल्म में वाराणसी पर गिरते क्षुद्रग्रह से पैदा हुए रहस्यमय क्षेत्रों, प्राचीन मंदिरों और अलग-अलग युगों की यात्रा दिखाई जाएगी। प्रियंका चोपड़ा का किरदार मंदाकिनी इस आध्यात्मिक और भौतिक यात्रा में रुद्र की मदद करेगा ताकि दुनिया को विनाश से बचाया जा सके।

अफ्रीका से अंटार्कटिका तक शूटिंग

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस महाकाव्यात्मक ड्रामा को विशाल बजट पर बनाया जा रहा है। फिल्म की शूटिंग अफ्रीका के घने जंगलों से लेकर अंटार्कटिका की बर्फीली वादियों तक की गई है। राजामौली की यह फिल्म केवल भारतीय सिनेमा ही नहीं, बल्कि ग्लोबल सिनेमा के स्तर को भी चुनौती देने वाली है।

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धमाकों से दहला जुहू: रोहित शेट्टी के ‘शेट्टी टावर्स’ पर ताबड़तोड़ फायरिंग, क्या अंडरवर्ल्ड की है ये नई साजिश?

रोहित शेट्टी

मायानगरी मुंबई एक बार फिर गोलियों की गूंज से दहल उठी है। इस बार निशाना बना है बॉलीवुड के सबसे सफल निर्देशकों में से एक, ‘सिंघम’ और ‘गोलमाल’ फेम रोहित शेट्टी का आशियाना। शुक्रवार, 31 जनवरी 2026 की देर रात जुहू स्थित उनके 10 मंजिला घर ‘शेट्टी टावर्स’ के बाहर अज्ञात हमलावरों ने चार राउंड फायरिंग की। इस सनसनीखेज वारदात के बाद पूरी फिल्म इंडस्ट्री में डर का माहौल है।

रोहित शेट्टी के 'शेट्टी टावर्स' पर ताबड़तोड़ फायरिंग

आधी रात को गूंजी गोलियां: क्या है पूरा मामला?

चश्मदीदों के मुताबिक, घटना रात के उस वक्त हुई जब पूरा इलाका शांत था। अचानक चार गोलियों की आवाज ने सन्नाटा चीर दिया। पपराज़ी वायरल भयानी ने सबसे पहले इस घटना की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की, जिसके बाद हड़कंप मच गया। राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि इस हमले में रोहित शेट्टी और उनका परिवार पूरी तरह सुरक्षित है। गोलियां घर के बाहरी हिस्से में लगीं, जिससे जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ।

मौके पर पहुंची फोरेंसिक और क्राइम ब्रांच की टीम

वारदात की खबर मिलते ही मुंबई पुलिस के आला अधिकारी और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने तुरंत पूरे ‘शेट्टी टावर्स’ को अपनी सुरक्षा घेराबंदी में ले लिया है। फोरेंसिक टीम ने वहां से खाली खोखे और अन्य साक्ष्य जमा किए हैं। मुंबई पुलिस कमिश्नर ने खुद इस मामले पर पैनी नजर बना रखी है। फिलहाल, क्राइम ब्रांच आसपास के सभी रास्तों के

सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि हमलावरों की पहचान की जा सके।

आखिर क्यों बनाया गया रोहित शेट्टी को निशाना?

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग का मकसद क्या था? पुलिस कई एंगल्स पर जांच कर रही है:

पेशेवर रंजिश: क्या रोहित शेट्टी की पुलिस-आधारित फिल्मों (जैसे राकेश मारिया की बायोपिक) से कोई नाराज है?

फिरौती या धमकी: क्या यह हमला सिर्फ डराने के लिए किया गया था?

व्यक्तिगत दुश्मनी: पुलिस यह भी देख रही है कि क्या पिछले कुछ समय में रोहित को कोई गुमनाम धमकी मिली थी।

रोहित शेट्टी
रोहित शेट्टी के ‘शेट्टी टावर्स’ पर ताबड़तोड़ फायरिंग

फिलहाल, रोहित शेट्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि इस घटना के बाद परिवार काफी सदमे में है।

बॉलीवुड की सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल

रोहित शेट्टी जैसे बड़े निर्देशक, जो खुद अपनी फिल्मों में जांबाज पुलिस ऑफिसर की कहानियां दिखाते हैं, उनके घर के बाहर ऐसी घटना होना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जुहू जैसे पॉश इलाके में, जहाँ कई नामी सितारे रहते हैं, वहां इस तरह की फायरिंग ने सभी को चिंता में डाल दिया है। क्या यह फिर से बॉलीवुड पर किसी बड़े गैंग का साया है, इसकी जांच जारी है।

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बिहार बनेगा ग्लोबल टेक हब: नीतीश कैबिनेट ने GCC और सेमीकंडक्टर नीति को दी मंजूरी, 50 करोड़ की सब्सिडी और 2 लाख नौकरियों की सौगात!

बिहार

बिहार अब केवल खेती और श्रम शक्ति के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया की बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) और हाई-टेक उद्योगों के केंद्र के रूप में पहचाना जाएगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में दो ऐतिहासिक नीतियों— बिहार वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC) नीति-2026 और सेमीकंडक्टर नीति-2026 को मंजूरी दे दी गई है। इस बड़े फैसले का उद्देश्य बिहार को नवाचार और तकनीक का वैश्विक केंद्र बनाना है।

नीतीश कैबिनेट ने GCC और सेमीकंडक्टर

GCC नीति-2026: बड़ी कंपनियों को बुलावा और भारी सब्सिडी

नई जीसीसी नीति के तहत कॉल सेंटर, वित्तीय सेवाएं, डेटा एनालिटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई (AI) जैसे क्षेत्रों में निवेश करने वाली कंपनियों को बिहार सरकार बंपर प्रोत्साहन देगी।

50 करोड़ तक का अनुदान: जो भी कंपनियां बिहार में अपना केंद्र स्थापित करेंगी, उन्हें उनके कुल पूंजीगत व्यय (Plant & Machinery) का 30% तक अनुदान मिलेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 50 करोड़ रुपये तय की गई है।

स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता: यदि कंपनियां बिहार के स्थानीय युवाओं को रोजगार देती हैं, तो उन्हें भर्ती और पेरोल खर्च में अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जाएगा।

सेमीकंडक्टर नीति: 2 लाख रोजगार और 25,000 करोड़ का निवेश

बिहार सरकार ने भविष्य की तकनीक ‘सेमीकंडक्टर’ पर भी बड़ा दांव खेला है। इस नीति के जरिए राज्य में चिप डिजाइनिंग, फैब्रिकेशन और डिस्प्ले फैब जैसे उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा।

रोजगार का सृजन: इस नीति से राज्य में 2 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

निवेश का लक्ष्य: सरकार का लक्ष्य इसके माध्यम से लगभग 25,000

नीतीश कैबिनेट ने GCC और सेमीकंडक्टर

करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करना है। यह नीति बिहार को देश के उन चुनिंदा राज्यों की श्रेणी में खड़ा कर देगी जिनके पास अपनी समर्पित सेमीकंडक्टर पॉलिसी है।

आवेदन प्रक्रिया: कैसे उठाएं लाभ?

उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार के अनुसार, इच्छुक कंपनियां बिहार उद्योग विभाग के आधिकारिक पोर्टल (industry.bihar.gov.in) या ‘बिहार बिजनेस कनेक्ट’ के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगी।

सिंगल विंडो क्लीयरेंस: निवेशकों को भटकना न पड़े, इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए वेरिफिकेशन किया जाएगा।

दस्तावेज: कंपनियों को अपना प्रोजेक्ट रिपोर्ट, निवेश योजना और रोजगार का खाका जमा करना होगा।

सत्यापन और भुगतान: प्रोजेक्ट पूरा होने और विभाग द्वारा भौतिक सत्यापन के बाद सब्सिडी की राशि सीधे बैंक खाते में जारी की जाएगी।

बिहार की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?

इन नीतियों के लागू होने से बिहार की छवि एक ‘इंडस्ट्रियल स्टेट’ के रूप में उभरेगी। हाई-स्किल जॉब्स के कारण बिहार के युवाओं का पलायन रुकेगा और उन्हें अपने ही राज्य में उच्च वेतन वाली नौकरियां मिलेंगी। साथ ही, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) बढ़ने से राज्य के राजस्व और निर्यात में भी भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है।

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कर्ज मांगने वाले का सिर हमेशा झुका रहता है” – पाकिस्तान पीएम शहबाज शरीफ का छलका दर्द

पाकिस्तान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में देश की खराब आर्थिक हालत पर एक बड़ा और भावुक बयान दिया है। इस्लामाबाद में देश के बड़े बिजनेसमैन और एक्सपोर्टर्स को सम्मानित करने के लिए रखे गए एक कार्यक्रम में उन्होंने माना कि पाकिस्तान आज जिस दौर से गुजर रहा है, वहां उसे अपनी ‘इज्जत’ तक दांव पर लगानी पड़ रही है।

पाकिस्तान पीएम शहबाज शरीफ

मजबूरी में झुकना पड़ता है सिर

शहबाज शरीफ ने बड़े ही साफ शब्दों में कहा कि जब कोई देश दूसरों से कर्ज मांगने जाता है, तो उसे अपना सिर झुकाकर ही रहना पड़ता है। उन्होंने स्वीकार किया कि बार-बार विदेशी कर्ज (खासकर IMF से) लेने की वजह से पाकिस्तान को अपने आत्मसम्मान (Self-respect) से समझौता करना पड़ा है। पीएम ने बड़े दुख के साथ कहा कि कर्ज की शर्तों को मानने के चक्कर में देश को कई ऐसे फैसले लेने पड़े जो शायद एक आजाद देश के तौर पर उसे पसंद न आते।

आखिर क्यों आई ऐसी नौबत?

पाकिस्तान की माली हालत पिछले कई सालों से नाजुक बनी हुई है। आज के समय में पाकिस्तान पर करीब 130 अरब डॉलर से ज्यादा का विदेशी कर्ज है, जो उसकी जीडीपी (GDP) का लगभग 80% हिस्सा है।

महंगाई की मार: पाकिस्तान में महंगाई 25% से भी ऊपर पहुंच गई है।

कड़ी शर्तें: IMF (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) से लोन लेने के बदले पाकिस्तान को बिजली महंगी करनी पड़ी, टैक्स बढ़ाने पड़े और सब्सिडी खत्म करनी पड़ी।

विदेशी मुद्रा की कमी: देश के पास अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार बेहद कम बचा है।

व्यापारियों से बड़ी अपील

इस समारोह के दौरान पीएम शरीफ ने देश के उद्योगपतियों और निर्यातकों (Exporters) से एक गुजारिश की। उन्होंने कहा कि कर्ज के इस जाल से निकलने का सिर्फ एक ही रास्ता है— ‘निर्यात (Exports) बढ़ाना’। उन्होंने बिजनेस लीडर्स से अपील की कि वे दुनिया भर में पाकिस्तानी सामान बेचें ताकि देश में डॉलर आए और उन्हें बार-बार IMF के सामने हाथ न फैलाना पड़े।

पाकिस्तान पीएम शहबाज शरीफ

राजनीतिक घमासान और चुनौतियां

शरीफ का यह बयान आते ही पाकिस्तान की राजनीति में हलचल मच गई है। विपक्ष इसे सरकार की नाकामी बता रहा है, वहीं आम जनता इस बात से परेशान है कि कर्ज की किश्तें चुकाने के लिए उनकी जेबों पर बोझ डाला जा रहा है। चीन, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों ने मदद तो की है, लेकिन पाकिस्तान को खुद के पैरों पर खड़ा होने के लिए अभी एक लंबी लड़ाई लड़नी होगी।

प्रधानमंत्री का यह बयान इस बात की तरफ इशारा करता है कि पाकिस्तान अब समझ चुका है कि सिर्फ कर्ज लेकर देश नहीं चलाया जा सकता। आत्मनिर्भरता ही एकमात्र रास्ता है, वरना दुनिया के मंच पर अपनी बात मजबूती से रखना मुश्किल हो जाएगा।

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