Fake Job Scams in India: व्हाट्सएप पर मिल रहे हैं लाखों की नौकरी के ऑफर? जानिए ठगी के 3 नए तरीके और कैसे पहचानें असली कंपनी

Fake Job Scams in India

आजकल हर दूसरे दिन मोबाइल पर एक मैसेज टपक पड़ता है— “वर्क फ्रॉम होम करें और रोज़ाना ₹3000 से ₹5000 कमाएं।” नौकरी की तलाश में परेशान युवा अक्सर ऐसे मैसेजेस को अपनी किस्मत का दरवाज़ा समझ लेते हैं, लेकिन हकीकत में यह बर्बादी का सबसे बड़ा जाल है।

भारत में ‘फेक जॉब स्कैम’ (Fake Job Scams) अब एक बहुत बड़ी इंडस्ट्री बन चुका है। जालसाज़ अब सिर्फ कॉल करके पैसे नहीं मांगते, बल्कि उन्होंने ठगी के बेहद हाई-टेक और मनोवैज्ञानिक तरीके निकाल लिए हैं। ‘ApniVani’ के इस विशेष ‘सायबर अलर्ट’ में आज हम आपको बताएंगे कि जालसाज़ किन 3 नए तरीकों से युवाओं को फंसा रहे हैं और किसी भी जॉब ऑफर की असलियत (Authenticity) कैसे चेक करें।

जालसाज़ों के 3 सबसे खतरनाक और नए तरीके (Types of Scams)

1. पहला तरीका: ‘पार्ट-टाइम’ टास्क स्कैम (YouTube/Hotel Rating)

यह आज के समय का सबसे बड़ा स्कैम है। ठग आपको व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर मैसेज करते हैं और कहते हैं कि आपको सिर्फ यूट्यूब वीडियो लाइक करने हैं या गूगल मैप्स पर होटलों को 5-स्टार रेटिंग देनी है।

शुरुआत में वो आपका भरोसा जीतने के लिए आपके बैंक खाते में ₹150 या ₹500 भेज भी देते हैं। जब आपको लालच आ जाता है, तब वो आपको ‘प्रीमियम टास्क’ के नाम पर पैसे इन्वेस्ट करने को कहते हैं। एक बार आपने बड़ा अमाउंट (जैसे ₹50,000 या 1 लाख) डाला, तो वो आपको ब्लॉक कर देते हैं।

2. दूसरा तरीका: रजिस्ट्रेशन या ‘लैपटॉप फीस’ की वसूली

इसमें आपको किसी बड़ी नामी कंपनी (जैसे Amazon, Flipkart या Tata) के नाम से फर्जी ऑफर लेटर भेजा जाता है। ऑफर लेटर देखने में 100% असली लगता है। इसके बाद फर्जी HR आपको कॉल करके कहता है कि नौकरी पक्की हो गई है, लेकिन ‘कंपनी का लैपटॉप’ मंगाने, ट्रेनिंग या ‘रजिस्ट्रेशन फीस’ के नाम पर आपको ₹2000 से ₹5000 जमा करने होंगे। पैसे मिलते ही HR का नंबर स्विच ऑफ हो जाता है।

3. तीसरा तरीका: विदेश में नौकरी (Overseas Job Scam)

कनाडा, दुबई या यूरोप जाने का सपना देखने वाले इसके सबसे बड़े शिकार बनते हैं। स्कैमर्स फर्जी कंसल्टेंसी खोलकर ‘वीजा प्रोसेसिंग फीस’, ‘मेडिकल चेकअप’ या ‘फ्लाइट टिकट’ के नाम पर लाखों रुपये ऐंठ लेते हैं और फिर रातों-रात अपना ऑफिस बंद करके गायब हो जाते हैं।

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कैसे चेक करें जॉब ऑफर की असली सच्चाई? (Authenticity Check)

अगर आपको कोई भी जॉब ऑफर आता है, तो एक्साइटेड होने से पहले एक जासूस की तरह इन बातों को चेक करें:

ईमेल आईडी (Email ID) पर गौर करें: असली और बड़ी कंपनियां हमेशा अपने ऑफिशियल डोमेन (Official Domain) से ईमेल करती हैं (जैसे: hr@tcs.com या careers@amazon.in)। अगर जॉब ऑफर किसी साधारण gmail.com, yahoo.com या अजीब से डोमेन वाले ईमेल से आया है, तो वह 100% फर्जी है।

पैसे मांगे, तो तुरंत भाग जाएं: इस ‘गोल्डन रूल’ को हमेशा याद रखें— कोई भी असली कंपनी आपको नौकरी देने के लिए आपसे एक रुपया भी नहीं मांगती। अगर कोई सिक्योरिटी डिपॉज़िट, लैपटॉप फीस या रजिस्ट्रेशन के नाम पर पैसा मांगे, तो समझ लें कि वो स्कैमर है।

डिजिटल फुटप्रिंट और MCA वेरिफिकेशन: कंपनी का नाम ‘LinkedIn’ पर सर्च करें और देखें कि वहां उनके असली कर्मचारी हैं या नहीं। अगर कंपनी भारत की है, तो भारत सरकार के ‘MCA (Ministry of Corporate Affairs)’ पोर्टल पर जाकर चेक करें कि क्या वह कंपनी सच में रजिस्टर्ड है।

ऑफर लेटर की भाषा: फर्जी ऑफर लेटर्स में अक्सर स्पेलिंग (Spelling) की गलतियां होती हैं, सैलरी बहुत बढ़ा-चढ़ाकर लिखी होती है और इंटरव्यू के बिना ही सीधे जॉइनिंग की बात लिखी होती है।

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ApniVani की बात

नौकरी पाना मेहनत का काम है, यह कोई लॉटरी नहीं है जो व्हाट्सएप पर किसी अनजान मैसेज से लग जाएगी। डिजिटल युग में सतर्कता ही आपका सबसे बड़ा हथियार है। लालच में आकर अपनी मेहनत की कमाई या अपने माता-पिता के पैसे किसी अनजान ‘HR’ के खाते में कभी ट्रांसफर न करें। अगर आपके साथ कभी ऐसा फ्रॉड हो भी जाए, तो तुरंत 1930 (National Cyber Crime Helpline) पर कॉल करें।

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Bihar Anganwadi Timing Change 2026: भीषण गर्मी का अलर्ट! बिहार में आंगनबाड़ी केंद्रों का समय बदला, जानिए 4 नए कड़े नियम

Bihar Anganwadi Timing Change 2026

बिहार में लू (Loo) का खतरा और सरकार का बड़ा कदम अप्रैल (2026) का महीना शुरू होते ही बिहार में भीषण गर्मी और लू ने अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया है। हालात ये हैं कि सुबह 9 बजे के बाद ही घरों से निकलना मुश्किल होने लगा है। इस चिलचिलाती धूप और उमस का सबसे ज्यादा और सीधा असर छोटे मासूम बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है।

इसी गंभीर खतरे को देखते हुए, बिहार सरकार और ‘समाज कल्याण विभाग‘ (ICDS) ने तुरंत एक्शन लेते हुए राज्य के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों की ‘टाइमिंग’ में भारी बदलाव कर दिया है। आज ‘ApniVani‘ की इस ‘काम की खबर’ में आइए विस्तार से जानते हैं कि अब आंगनबाड़ी खुलने का नया समय क्या होगा और सरकार ने सेविकाओं व सहायिकाओं के लिए कौन से सख्त निर्देश जारी किए हैं।

क्या है आंगनबाड़ी केंद्रों का नया समय? (New Timings)

ताजा आधिकारिक आदेश के अनुसार, अब गर्मी के मौसम भर बिहार के सभी आंगनबाड़ी केंद्र ‘मॉर्निंग शिफ्ट’ (सुबह की पाली) में चलेंगे।

नया निर्धारित समय: सुबह 7:30 बजे से लेकर दिन के 11:30 बजे तक।

सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि दोपहर की तेज धूप और लू शुरू होने से पहले ही बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य जांच और उनका दैनिक कार्य पूरा हो जाए और वे सुरक्षित अपने घर लौट सकें। इससे छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को भयंकर गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी।

Bihar Anganwadi Timing Change 2026
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‘पोषाहार’ में गड़बड़ी की तो होगी सख्त कार्रवाई!

समय कम होने या बदलने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आंगनबाड़ी में मिलने वाली सुविधाओं या भोजन में कोई कटौती की जाएगी।

विभाग ने साफ शब्दों में सभी आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं को कड़ी चेतावनी दी है कि नए 4 घंटे के समय के अंदर ही बच्चों और महिलाओं को मिलने वाला ‘पोषाहार’ (Nutrition) एकदम समय पर और पूरी मात्रा में बंट जाना चाहिए। अगर पोषाहार वितरण में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार कर्मियों पर सीधे और सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

डीएम (DM) को मिले स्थिति के अनुसार विशेष अधिकार

बदलते मौसम और हर जिले के अलग-अलग तापमान को देखते हुए सरकार ने एक बहुत ही समझदारी भरा प्रशासनिक कदम उठाया है।

समाज कल्याण विभाग ने सभी जिलों के ‘जिलाधिकारियों’ (DM) को यह विशेष अधिकार सौंपा है कि अगर उनके संबंधित जिले में गर्मी या लू का प्रकोप खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है, तो वे अपनी सुविधा और स्थानीय स्थिति के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्रों के समय को और भी कम कर सकते हैं या भीषण हीटवेव के दौरान उन्हें पूरी तरह से बंद (Suspend) भी कर सकते हैं।

अभिभावकों (Parents) के लिए जरूरी एडवाइजरी सरकार ने उन सभी माता-पिता और अभिभावकों से भी खास अपील की है जो अपने बच्चों को आंगनबाड़ी भेजते हैं:

  • अब से बच्चों को नए निर्धारित समय यानी ठीक सुबह 7:30 बजे तक हर हाल में केंद्र भेज दें।
  • बच्चों को गर्मी से बचाने के लिए हमेशा हल्के रंग के और सूती (Cotton) कपड़े ही पहनाएं।
  • उन्हें घर से पर्याप्त पानी पिलाकर भेजें और दोपहर 12 बजे के बाद बच्चों को बाहर धूप में खेलने से बिल्कुल रोकें।
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ApniVani की बात

बिहार सरकार का यह फैसला बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एकदम सटीक समय पर लिया गया है। अब असली जिम्मेदारी जमीनी स्तर पर काम कर रही आंगनबाड़ी कर्मियों और अभिभावकों की है कि वे इस नए टाइम-टेबल का कड़ाई से पालन करें ताकि हमारे नौनिहाल इस भीषण गर्मी की मार से सुरक्षित रह सकें।

आपकी राय: क्या आपको लगता है कि सुबह 7:30 बजे का समय बच्चों के लिए एकदम सही है या इसे और जल्दी (7:00 बजे) कर देना चाहिए था? इस सरकारी फैसले पर अपनी बेबाक राय हमें नीचे कमेंट बॉक्स में या हमारे इंस्टाग्राम पेज @9vaniapni पर जरूर बताएं!

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Outsourcing Scam Reality: UP CM हेल्पलाइन से बिहार के अस्पतालों तक! जानिए ‘ठेकेदारी’ के नाम पर युवाओं के शोषण के 3 सबसे काले सच

Outsourcing Scam Reality

देश में रोज़गार के नाम पर आजकल एक बहुत बड़ा शब्द उछाला जाता है— ‘आउटसोर्सिंग’ (Outsourcing) या ‘थर्ड पार्टी कंपनी’। सुनने में यह बहुत कॉर्पोरेट और मॉडर्न लगता है, लेकिन असल में यह पुरानी ‘ठेकेदारी प्रथा’ का एक नया और खतरनाक रूप है।

हाल ही में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने इस पूरे सिस्टम की पोल खोल कर रख दी है। UP CM हेल्पलाइन (1076) में काम करने वाली सैकड़ों लड़कियों ने जब अपनी रुकी हुई और काटी गई सैलरी के लिए आवाज़ उठाई, तो उन्हें पुलिस की गाड़ियों में भर दिया गया। लेकिन यह कहानी सिर्फ यूपी की नहीं है। ‘ApniVani’ के इस विशेष ‘तर्क’ और विश्लेषण में आइए समझते हैं कि कैसे सरकारी तंत्र की नाक के नीचे प्राइवेट ठेकेदार युवाओं का खून चूस रहे हैं।

लखनऊ का मामला: ‘Vivin Limited’ और ₹15,000 का झूठा वादा

उत्तर प्रदेश में आम जनता की शिकायतें सुनने के लिए ‘CM हेल्पलाइन 1076’ बनाई गई है। लेकिन सरकार ने इसे चलाने का ठेका ‘Vivin Limited’ नाम की एक प्राइवेट आउटसोर्सिंग कंपनी को दे रखा है।

यहाँ काम करने वाली महिला कर्मचारियों का दर्द 100% जायज़ और रुला देने वाला है। इन लड़कियों का आरोप है कि भर्ती के समय उनसे ₹15,000 महीने की सैलरी का वादा किया गया था। लेकिन महीनों तक पगार रोककर रखने के बाद, उनके हाथ में सिर्फ ₹7,000 से ₹8,000 थमाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, ड्यूटी के दौरान इमरजेंसी में भी उनका फोन ज़ब्त कर लिया जाता है। जब इन परेशान लड़कियों ने अपनी शिकायत लेकर ‘CM आवास’ की तरफ शांतिपूर्ण पैदल मार्च निकाला, तो पुलिस ने लॉ एंड आर्डर (Law & Order) का हवाला देकर उनकी आवाज़ को जबरन दबा दिया।

बिहार के अस्पतालों का भी यही है हाल: ₹15K vs ₹5K का खेल

अगर आपको लगता है कि यह खेल सिर्फ यूपी तक सीमित है, तो बिहार के सरकारी विभागों का हाल इससे भी बुरा है।

बिहार के कई सरकारी अस्पतालों और विभागों में सुरक्षा गार्ड्स (Security Guards) और डाटा एंट्री ऑपरेटर्स की भर्ती प्राइवेट ठेकेदारों के ज़रिए होती है। कागज़ों पर और सरकारी टेंडर में एक गार्ड की पगार करीब ₹15,000 तय होती है। लेकिन ये ‘थर्ड पार्टी’ वाले ठेकेदार बीच में ही मोटा कमीशन खा जाते हैं और उस गरीब गार्ड के हाथ में मुश्किल से ₹5,000 से ₹6,000 ही आते हैं। अगर कोई आवाज़ उठाता है, तो उसे नौकरी से निकाल कर दूसरे को रख लिया जाता है।

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सबसे बड़ा सवाल: ‘निगरानी’ (Monitoring) कौन करेगा?

यहाँ सबसे बड़ा ‘तर्क’ यह है कि सरकार के पास अपना खुद का इतना विशाल प्रशासनिक ढांचा मौजूद है। वार्ड मेंबर से लेकर मुखिया, विधायक, सांसद और बड़े-बड़े IAS अधिकारी तक मौजूद हैं। फिर भी सरकार अपने ही महत्वपूर्ण विभागों (जैसे CM हेल्पलाइन या अस्पताल) को इन प्राइवेट ठेकेदारों के भरोसे क्यों छोड़ रही है?

अगर सरकार ‘प्राइवेटाइजेशन’ (Privatization) कर भी रही है, तो इन कंपनियों की लगातार निगरानी (Continuous Monitoring) क्यों नहीं की जाती? जब एक प्राइवेट कंपनी सरकारी पैसे में से कमीशन खाकर युवाओं का शोषण करती है, तो क्या सिस्टम में बैठे अधिकारियों को इसकी भनक नहीं लगती? या फिर सिस्टम भी इस ‘कमीशन’ के खेल में अपना हिस्सा लेकर चुप रहना ही पसंद करता है?

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युवाओं के पसीने की कमाई को बीच में ही हड़प लेना किसी बड़े ‘स्कैम’ से कम नहीं है। सरकार को तुरंत ऐसी आउटसोर्सिंग कंपनियों का ऑडिट (Audit) करवाना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जो पैसा सरकार युवाओं के लिए जारी कर रही है, उसका 100% हिस्सा सीधे उनके बैंक खातों (Direct Benefit) में पहुंचे, न कि किसी ठेकेदार की जेब में।

आपकी राय: क्या आपने या आपके किसी जानने वाले ने भी ‘आउटसोर्सिंग’ या प्राइवेट ठेकेदारी के नाम पर ऐसा शोषण झेला है? क्या सरकार को ऐसी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करना चाहिए? कमेंट्स में अपनी बेबाक राय और अपनी कहानी ज़रूर साझा करें!

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बिहार के गन्ना किसानों की चमकेगी किस्मत: 50-60% सब्सिडी पर मिलेंगी मशीनें, 324 किसानों को परमिट जारी

बिहार

बिहार में कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने और किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में नीतीश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के गन्ना उद्योग विभाग ने ‘मुख्यमंत्री गन्ना यंत्रीकरण योजना‘ के तहत तीसरे और चौथे रैंडमाइजेशन की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इस चरण में कुल 324 प्रगतिशील किसानों का चयन किया गया है, जिन्हें आधुनिक कृषि यंत्रों की खरीद के लिए आधिकारिक परमिट जारी कर दिए गए हैं।

इस योजना के माध्यम से अब गन्ने की खेती केवल पसीने का काम नहीं, बल्कि मशीनों के दम पर मुनाफे का सौदा साबित होगी। सरकार का लक्ष्य खेती की लागत को कम करना और गन्ना उत्पादन में बिहार को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में खड़ा करना है।

मशीनीकरण से खेती होगी आसान: जानें सब्सिडी का गणित

बिहार सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत किसानों को कृषि यंत्रों की खरीद पर भारी वित्तीय सहायता दी जा रही है। योजना के प्रावधानों के अनुसार, सामान्य श्रेणी के किसानों को 50 प्रतिशत तक का अनुदान मिलेगा। वहीं, सामाजिक न्याय को ध्यान में रखते हुए अति पिछड़ा वर्ग (EBC), अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के किसानों के लिए इस सब्सिडी की सीमा 60 प्रतिशत तय की गई है।

सबसे खास बात यह है कि यह सब्सिडी डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। इससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म होगी और बिचौलियों की भूमिका भी समाप्त हो जाएगी।

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इन 11 आधुनिक यंत्रों पर मिलेगी छूट

गन्ने की बुवाई से लेकर कटाई तक की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए विभाग ने यंत्रों की एक विस्तृत सूची तैयार की है। चयनित 324 किसान अपनी जरूरत के अनुसार निम्नलिखित मशीनों की खरीद कर सकते हैं:

मिनी ट्रैक्टर: छोटे और मध्यम खेतों के लिए उपयुक्त।

लेजर लैंड लेवलर: खेत को समतल कर पानी की खपत कम करने के लिए।

ट्रेंचर: गन्ने की गहरी बुवाई के लिए उपयोगी।

रोटावेटर और कटर: फसल के अवशेषों के प्रबंधन और मिट्टी की तैयारी के लिए।

पावर टिलर और रिजर: गन्ने की पंक्तियों के बीच मिट्टी चढ़ाने के काम को आसान बनाने हेतु।

समय सीमा और चयन प्रक्रिया: क्या है ताजा अपडेट?

गन्ना उद्योग विभाग ने स्पष्ट किया है कि चयनित किसानों को तय समय सीमा के भीतर यंत्रों की खरीद सुनिश्चित करनी होगी। हालांकि, पूर्व में खरीद की समयसीमा 3 मार्च थी, जिसे किसानों की सुविधा के लिए बढ़ाकर 19 मार्च तक किया गया था, ताकि किसी भी तकनीकी या वित्तीय कारण से किसान इस लाभ से वंचित न रह जाएं।

चयन की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है। ऑनलाइन पोर्टल पर प्राप्त आवेदनों में से कंप्यूटर आधारित रैंडमाइजेशन के जरिए लाभार्थियों को चुना गया है। वर्तमान में पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण और सीतामढ़ी जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों में इस योजना का व्यापक असर देखने को मिल रहा है।

बिहार के चीनी उद्योग को मिलेगी नई मजबूती

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि गन्ने की खेती में सबसे बड़ी चुनौती ‘मजदूरों की कमी’ और ‘उच्च लागत’ है। मशीनीकरण होने से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि प्रति एकड़ पैदावार में भी 20-30 प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना है। जब किसानों को सस्ती दरों पर मशीनें मिलेंगी, तो वे गन्ने की खेती के प्रति अधिक प्रोत्साहित होंगे, जिससे राज्य की चीनी मिलों को पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

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कैसे चेक करें अपना स्टेटस?

यदि आपने भी इस योजना के लिए आवेदन किया है, तो आप बिहार गन्ना उद्योग विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना आवेदन स्टेटस और परमिट की स्थिति देख सकते हैं। जिन किसानों का चयन इस बार नहीं हुआ है, उन्हें अगले चरण के रैंडमाइजेशन का इंतजार करने की सलाह दी गई है।

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बिहार प्रशासन में बड़ी हलचल: 25 नए IAS अधिकारी संभालेंगे कमान, जानें किन जिलों और विभागों की बदलेगी तस्वीर

25 नए IAS

बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और गतिशील बनाने के लिए नीतीश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के विभिन्न जिलों और महत्वपूर्ण विभागों में खाली पड़े पदों और बढ़ते कार्यभार को देखते हुए 25 नए आईएएस (IAS) अधिकारियों की तैनाती की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इन अधिकारियों को 17 अप्रैल 2026 तक योगदान देने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके बाद राज्य में कार्यरत आईएएस अधिकारियों की कुल संख्या 280 से बढ़कर 305 हो जाएगी।

प्रशासनिक ढांचे में नई ऊर्जा का संचार

बिहार में लंबे समय से अधिकारियों की कमी के कारण एक ही अधिकारी को कई विभागों का अतिरिक्त प्रभार संभालना पड़ रहा था। इस नई खेप के आने से शासन की कार्यक्षमता में सुधार होने की उम्मीद है। इन 25 अधिकारियों में 2025 बैच के वे युवा अधिकारी भी शामिल हैं जो वर्तमान में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में अपना प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं। इनमें से सबसे दिलचस्प बात यह है कि इन अधिकारियों में 4 मूल रूप से बिहार के ही निवासी हैं, जबकि अन्य राजस्थान, उत्तर प्रदेश, झारखंड और दिल्ली जैसे राज्यों से आए हैं।

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इन जिलों और विभागों पर रहेगा विशेष फोकस

प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि इन अधिकारियों की तैनाती उन जिलों में की जाएगी जहाँ वर्तमान में जिलाधिकारी (DM) या उप-विकास आयुक्त (DDC) के पदों पर अतिरिक्त दबाव है।

ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य: राज्य की प्राथमिकताओं को देखते हुए ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग में इन नए चेहरों को जिम्मेदारी दी जा सकती है।

बाढ़ प्रबंधन: चूंकि बिहार के कई जिले बाढ़ से प्रभावित रहते हैं, इसलिए उत्तर बिहार के संवेदनशील जिलों में युवा आईएएस अधिकारियों की तैनाती की योजना है ताकि मॉनिटरिंग और राहत कार्यों को तकनीकी रूप से बेहतर बनाया जा सके।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स: पटना, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे शहरों में चल रही स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को गति देने के लिए भी विशेष सचिव स्तर पर नई नियुक्तियां संभव हैं।

आईएएस की संख्या में वृद्धि: क्या होगा असर?

बिहार में आईएएस अधिकारियों के कुल स्वीकृत पदों की संख्या 359 है। वर्तमान में राज्य में केवल 280 अधिकारी ही सक्रिय भूमिका में थे, क्योंकि लगभग 30 अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति (Central Deputation) पर हैं। 25 नए अधिकारियों के जुड़ने से यह आंकड़ा 305 तक पहुँच जाएगा। इससे फाइलों के निपटारे में तेजी आएगी और आम जनता की समस्याओं को जिला स्तर पर बेहतर ढंग से सुना जा सकेगा। विशेष रूप से ई-गवर्नेंस और डिजिटल बिहार के लक्ष्यों को प्राप्त करने में इन युवा अधिकारियों की तकनीकी समझ काफी मददगार साबित होगी।

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17 अप्रैल से संभालेंगे कार्यभार

बताया जा रहा है कि मुख्य सचिव के स्तर से इन अधिकारियों के आवंटन की लिस्ट तैयार कर ली गई है। 17 अप्रैल तक पटना में ज्वाइन करने के बाद, इन्हें शुरुआती तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अटैच किया जाएगा ताकि वे राज्य की भौगोलिक और प्रशासनिक बारीकियों को समझ सकें। इसके तुरंत बाद इन्हें स्वतंत्र प्रभार सौंपा जाएगा। इस फेरबदल को आगामी समय में राज्य में होने वाले प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

बिहार के विकास की गति को और तेज करने के लिए प्रशासनिक सुधारों की यह प्रक्रिया बेहद जरूरी थी। नई ऊर्जा और नए दृष्टिकोण वाले ये 25 अधिकारी राज्य के सुदूर इलाकों में सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अब देखना यह है कि इस बड़े बदलाव के बाद बिहार की ब्यूरोक्रेसी में काम करने का अंदाज कितना बदलता है।

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मार्च 2026 में GST का महा-रिकॉर्ड: पहली बार ₹2 लाख करोड़ के पार पहुंचा टैक्स कलेक्शन, जानें क्या हैं इसके मायने

GST Collection Record March 2026

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए साल 2026 का मार्च महीना ऐतिहासिक साबित हुआ है। देश के वित्तीय इतिहास में पहली बार ग्रॉस जीएसटी (GST) कलेक्शन ने 2,00,064 करोड़ रुपये का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों ने न केवल विशेषज्ञों को चौंकाया है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि भारतीय बाजार में मांग और आपूर्ति का चक्र अब तक के सबसे मजबूत दौर में है। पिछले साल के इसी महीने (मार्च 2025) की तुलना में इसमें 8.8% की प्रभावशाली बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

ऐतिहासिक उछाल के पीछे के प्रमुख कारण

इस रिकॉर्ड तोड़ संग्रह के पीछे कई महत्वपूर्ण कारक काम कर रहे हैं। सबसे प्रमुख कारण घरेलू खपत में आई जबरदस्त तेजी है। आंकड़ों के अनुसार, घरेलू लेनदेन से होने वाला राजस्व 5.9% बढ़कर 1.46 लाख करोड़ रुपये के स्तर को पार कर गया है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मजबूती के चलते आयात पर लगने वाले जीएसटी में 17.8% का भारी उछाल देखा गया, जो कि 53,861 करोड़ रुपये रहा। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत की औद्योगिक और विलासिता वस्तुओं की मांग वैश्विक स्तर पर बनी हुई है।

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वित्त वर्ष 2025-26: उपलब्धियों भरा साल

सिर्फ मार्च ही नहीं, बल्कि पूरा वित्त वर्ष 2025-26 भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित हुआ है। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच कुल सकल जीएसटी राजस्व 22.27 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 8.3% अधिक है। अगर हम रिफंड को हटाकर ‘नेट जीएसटी’ (Net GST) की बात करें, तो सरकार की झोली में 19.34 लाख करोड़ रुपये आए हैं। यह वृद्धि सरकार को राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास में निवेश करने के लिए अतिरिक्त ताकत प्रदान करेगी।

राज्यों का प्रदर्शन और राजस्व का बंटवारा

मार्च 2026 के कुल संग्रह में केंद्रीय जीएसटी (CGST) का हिस्सा 40,549 करोड़ रुपये और राज्य जीएसटी (SGST) का हिस्सा 53,268 करोड़ रुपये रहा। सबसे बड़ी राशि आईजीएसटी (IGST) से प्राप्त हुई, जो 1,06,246 करोड़ रुपये रही।

राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र एक बार फिर से ‘जीएसटी पावरहाउस’ बनकर उभरा है, जहां कलेक्शन में 14% की शानदार वृद्धि देखी गई। इसके साथ ही कर्नाटक, तमिलनाडु और गुजरात जैसे औद्योगिक राज्यों ने भी राष्ट्रीय औसत के बराबर या उससे अधिक प्रदर्शन किया है। छोटे राज्यों में सिक्किम और मिजोरम जैसे राज्यों ने भी कर अनुपालन (Tax Compliance) में सुधार के चलते बेहतर प्रदर्शन किया है।

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आम आदमी और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

जब जीएसटी कलेक्शन बढ़ता है, तो इसका सीधा मतलब होता है कि लोग अधिक खरीदारी कर रहे हैं और व्यापारिक गतिविधियां सुचारू रूप से चल रही हैं। ₹2 लाख करोड़ का यह आंकड़ा सरकार को सामाजिक कल्याण योजनाओं, रक्षा बजट और डिजिटल इंडिया जैसे मिशनों को और अधिक गति देने का अवसर देगा। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि आयात पर जीएसटी की उच्च निर्भरता को देखते हुए भविष्य में निर्यात को और अधिक बढ़ावा देने की आवश्यकता होगी ताकि व्यापार संतुलन बना रहे।

मार्च 2026 के ये आंकड़े भारत की उभरती आर्थिक शक्ति का प्रतिबिंब हैं। यह न केवल टैक्स सिस्टम की पारदर्शिता और डिजिटल अनुपालन की जीत है, बल्कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की ओर एक मजबूत कदम भी है। अगर यही रफ्तार बनी रही, तो आने वाले समय में मासिक ₹2.25 लाख करोड़ का आंकड़ा भी दूर नहीं लगता।

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बड़ी खुशखबरी! 1 अप्रैल से लागू होगा नया आयकर कानून: अब ₹12.75 लाख तक की सैलरी पर देना होगा ‘Zero’ टैक्स

1 अप्रैल

देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए 1 अप्रैल 2026 की तारीख एक ऐतिहासिक बदलाव लेकर आ रही है। केंद्र सरकार ने दशकों पुराने ‘आयकर अधिनियम 1961’ को अलविदा कहते हुए नए ‘आयकर अधिनियम 2025‘ को जमीन पर उतारने की पूरी तैयारी कर ली है। इस नए कानून का सबसे बड़ा आकर्षण मध्यम वर्ग को मिलने वाली भारी राहत है। अब नई टैक्स व्यवस्था के तहत ₹12.75 लाख तक की सालाना आय वाले वेतनभोगियों को सरकार को एक भी रुपया टैक्स के रूप में नहीं देना होगा।

₹12.75 लाख का गणित: कैसे हुआ टैक्स फ्री?

आम तौर पर लोगों के मन में उलझन है कि जब टैक्स स्लैब ₹12 लाख तक जीरो टैक्स की बात करते हैं, तो ₹12.75 लाख का आंकड़ा कहां से आया? दरअसल, नए कानून में सैलरी क्लास के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) को ₹50,000 से बढ़ाकर ₹75,000 कर दिया गया है।

जब आपकी कुल सालाना आय ₹12,75,000 होती है, तो ₹75,000 की मानक कटौती के बाद आपकी टैक्सेबल इनकम ₹12,00,000 रह जाती है। नए प्रावधानों के तहत ₹12 लाख तक की शुद्ध आय पर सरकार शत-प्रतिशत ‘रिबेट’ (छूट) दे रही है, जिससे प्रभावी टैक्स शून्य हो जाता है। यह कदम सीधे तौर पर उन युवाओं और मध्यम आय वर्ग के परिवारों की बचत बढ़ाएगा जो महंगाई से जूझ रहे हैं।

नए टैक्स स्लैब 2026-27: एक नजर में

नए आयकर कानून ने टैक्स की दरों को और अधिक तर्कसंगत और सरल बना दिया है। अब टैक्स स्लैब कुछ इस प्रकार होंगे:

₹0 – ₹4 लाख: 0% (पूरी तरह मुक्त)

• ₹4 – ₹8 लाख: 5%

• ₹8 – ₹12 लाख: 10%

• ₹12 – ₹16 लाख: 15%

• ₹16 – ₹20 लाख: 20%

• ₹20 – ₹24 लाख: 25%

• ₹24 लाख से अधिक: 30%

विशेष बात यह है कि ₹12 लाख तक की आय पर लगने वाला 5% और 10% का टैक्स ‘टैक्स रिबेट’ के जरिए माफ कर दिया जाएगा, बशर्ते आपकी टैक्सेबल इनकम ₹12 लाख से ऊपर न जाए।

Form 16 की विदाई और ITR फाइलिंग में सरलता

नए कानून का उद्देश्य केवल टैक्स कम करना नहीं, बल्कि टैक्स भरने की प्रक्रिया को आसान बनाना भी है। अब दफ्तरों में मिलने वाले पारंपरिक Form 16 की जगह नए Form 130 और 131 लेंगे। सरकार का दावा है कि नया सिस्टम आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित होगा, जिससे ITR फाइल करने में लगने वाला समय घटकर महज कुछ मिनट रह जाएगा। जटिल कानूनी भाषा को हटाकर अब सरल हिंदी और अंग्रेजी में प्रावधान लिखे गए हैं ताकि आम नागरिक खुद अपना टैक्स असेसमेंट कर सके।

पुरानी बनाम नई व्यवस्था: किसे होगा फायदा?

हालांकि सरकार नई टैक्स व्यवस्था को प्रमोट कर रही है, लेकिन पुरानी व्यवस्था भी फिलहाल अस्तित्व में बनी रहेगी।

• नई व्यवस्था (New Regime): यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो निवेश के झंझट में नहीं पड़ना चाहते और कम टैक्स रेट का फायदा लेना चाहते हैं। ₹15 लाख तक की आय वालों के लिए यह सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित हो रही है।

• पुरानी व्यवस्था (Old Regime): यदि आपने होम लोन लिया है, एलआईसी (LIC), बच्चों की ट्यूशन फीस और 80C के तहत भारी निवेश किया है, तो पुरानी व्यवस्था अभी भी आपके लिए बेहतर हो सकती है। हालांकि, इसमें ₹12.75 लाख वाली छूट का लाभ नहीं मिलेगा।

शेयर बाजार और F&O ट्रेडर्स के लिए चेतावनी

जहां एक तरफ सैलरी क्लास को राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ शेयर बाजार से कमाई करने वालों और फ्यूचर एंड ऑप्शंस (F&O) में ट्रेडिंग करने वालों के लिए नियम सख्त किए गए हैं। शेयर बायबैक और सट्टा आय पर टैक्स की दरों में मामूली बढ़ोतरी की गई है, ताकि सट्टेबाजी को हतोत्साहित किया जा सके और लॉन्ग टर्म निवेश को बढ़ावा दिया जा सके।

1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाला यह नया कानून मध्यम वर्ग के हाथ में ज्यादा ‘डिस्पोजेबल इनकम’ छोड़ेगा। विशेषज्ञों की सलाह है कि इस वित्तीय वर्ष के अंत तक अपने निवेश और सैलरी स्ट्रक्चर का पुनर्मूल्यांकन जरूर करें। अगर आपकी आय ₹13 लाख के आसपास है, तो नई व्यवस्था आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। 31 जुलाई 2026 तक अपना पहला ITR नए नियमों के तहत फाइल करना न भूलें।

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बिहार में बिजली बिल का नया गणित: 10kW से ज्यादा लोड वालों के लिए ‘टाइम-ऑफ़-यूज़’ नियम लागू, जानें कब मिलेगी सस्ती बिजली

बिहार में बिजली

बिहार के बिजली उपभोक्ताओं के लिए 1 अप्रैल 2026 से एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। बिहार विद्युत विनियामक आयोग (BERC) ने राज्य के भारी बिजली उपभोक्ताओं के लिए ‘टाइम-ऑफ-यूज़’ (TOU/TOD) टैरिफ सिस्टम को मंजूरी दे दी है। इस नए नियम के तहत अब आपका बिजली बिल सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करेगा कि आपने कितनी यूनिट जलाई है, बल्कि इस पर भी निर्भर करेगा कि आपने किस समय बिजली का उपयोग किया है। यह कदम राज्य में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने के लिए उठाया गया है।

किन उपभोक्ताओं पर होगा असर?

बिहार सरकार और बिजली कंपनियों (NBPDCL और SBPDCL) ने स्पष्ट किया है कि यह नियम वर्तमान में उन उपभोक्ताओं के लिए अनिवार्य होगा जिनका स्वीकृत लोड 10 किलोवाट (kW) से अधिक है। इसमें मुख्य रूप से बड़े व्यावसायिक परिसर, निजी अस्पताल, छोटे कारखाने, होटल और वे बड़े घरेलू उपभोक्ता शामिल हैं जो भारी एयर कंडीशनिंग या मशीनों का उपयोग करते हैं। स्मार्ट प्रीपेड मीटर वाले ग्राहकों के लिए यह सिस्टम सॉफ्टवेयर के माध्यम से ऑटोमैटिक अपडेट हो जाएगा।

तीन स्लॉट में बंटा दिन: कब सस्ती और कब महंगी होगी बिजली?

नए TOU टैरिफ को समझने के लिए दिन को तीन प्रमुख हिस्सों में बांटा गया है। उपभोक्ताओं को अपना काम इसी हिसाब से शेड्यूल करना होगा ताकि बिल कम आए:

बिहार में बिजली
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1. ऑफ-पीक आवर (सबसे सस्ती बिजली)

समय: सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक

दिन के इस समय सौर ऊर्जा की उपलब्धता अधिक होती है और ग्रिड पर दबाव कम होता है। इसलिए, इस दौरान बिजली की दरें सामान्य से लगभग 10% से 20% तक सस्ती रहेंगी। यदि आप अपनी मोटर, वाशिंग मशीन या भारी मशीनें इस समय चलाते हैं, तो आपको सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।

2. पीक आवर (सबसे महंगी बिजली)

समय: शाम 5:00 बजे से रात 11:00 बजे तक

यह वह समय है जब पूरे राज्य में बिजली की मांग सबसे ज्यादा होती है। ग्रिड को संतुलित करने के लिए इस स्लॉट में बिजली 20% तक महंगी होगी। शाम के समय एयर कंडीशनर और अन्य भारी उपकरणों का अनावश्यक उपयोग आपके मासिक बजट को बिगाड़ सकता है।

3. सामान्य दर (Normal Rates)

समय: रात 11:00 बजे से सुबह 9:00 बजे तक

देर रात से सुबह होने तक बिजली की दरें सामान्य रहेंगी। इसमें न तो कोई अतिरिक्त पेनाल्टी होगी और न ही कोई विशेष छूट।

आम जनता और छोटे उपभोक्ताओं के लिए राहत

राहत की बात यह है कि बिहार सरकार की 125 यूनिट फ्री बिजली और सब्सिडी योजना छोटे उपभोक्ताओं के लिए पहले की तरह जारी रहेगी। 10 किलोवाट से कम लोड वाले सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं पर फिलहाल इस नए टैरिफ का सीधा दबाव नहीं डाला गया है, लेकिन भविष्य में स्मार्ट मीटरिंग के विस्तार के साथ इसे सभी के लिए वैकल्पिक बनाया जा सकता है।

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कैसे बचाएं अपना पैसा? एक्सपर्ट टिप्स

अगर आपका लोड 10kW से ज्यादा है, तो इन आसान तरीकों से आप अपना बिल कम कर सकते हैं:

भारी काम दिन में निपटाएं: पानी की मोटर, कपड़े धोना या इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग सुबह 9 से शाम 5 के बीच ही करें।

सोलर पैनल का उपयोग: अगर आपके पास सोलर सिस्टम है, तो पीक ऑवर्स (शाम 5-11) के दौरान ग्रिड की जगह अपनी बैटरी या सोलर पावर का इस्तेमाल करें।

शिफ्ट मैनेजमेंट: छोटे कारखाने अपनी भारी मशीनरी वाली शिफ्ट को सुबह के समय में ट्रांसफर करके हजारों रुपये बचा सकते हैं।

बिहार में बिजली क्षेत्र का यह ‘टाइम-ऑफ-यूज़’ रिफॉर्म एक आधुनिक कदम है। यह न केवल उपभोक्ताओं को जागरूक बनाएगा बल्कि राज्य में बिजली कटौती की समस्या को भी कम करेगा। सरकार का लक्ष्य है कि लोग उस समय बिजली का अधिक उपयोग करें जब वह प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हो, ताकि पीक ऑवर्स में ग्रिड फेलियर या ओवरलोडिंग की समस्या न हो।

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Hanuman Jayanti 2026 Kab Hai: 1 या 2 अप्रैल? आज और कल के कन्फ्यूजन को करें दूर, जानिए सही तारीख और शुभ मुहूर्त

Hanuman Jayanti 2026 Kab Hai

“जय श्री राम!” आज देश भर में इसी जयकारे की गूंज है। हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को राम भक्त, संकटमोचन हनुमान जी का जन्मोत्सव बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। लेकिन इस साल 2026 में, कैलेंडर और पंचांग के समय ने भक्तों को थोड़ा उलझा दिया है। हर किसी के मन में एक ही सवाल है कि आख़िर हनुमान जयंती आज (1 अप्रैल) है या कल (2 अप्रैल)?

सोशल मीडिया पर भी दोनों ही तारीखों के बधाई संदेश वायरल हो रहे हैं। ‘ApniVani’ के इस विशेष और भक्तिमय लेख में आज हम आपके इस सारे कन्फ्यूजन को हमेशा के लिए दूर कर देंगे। आइए एकदम आसान भाषा में पंचांग के गणित और ‘उदया तिथि’ के नियम से समझते हैं कि बजरंगबली की पूजा का सही दिन कौन सा है।

पूर्णिमा तिथि का गणित: 1 अप्रैल से 2 अप्रैल तक का सफर

हिंदू धर्म में कोई भी त्योहार अंग्रेजी कैलेंडर की ‘तारीख’ (Date) से नहीं, बल्कि चंद्रमा की चाल और ‘तिथि’ (Tithi) से तय होता है।

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र पूर्णिमा की तिथि आज यानी 1 अप्रैल 2026 की सुबह 07:06 बजे से शुरू हो चुकी है। यह पूर्णिमा तिथि पूरी रात रहेगी और अगले दिन यानी 2 अप्रैल 2026 की सुबह 07:41 बजे तक समाप्त होगी। चूंकि तिथि दोनों दिन पड़ रही है, इसीलिए सारा कन्फ्यूजन पैदा हुआ है।

‘उदया तिथि’ का सनातन नियम: 2 अप्रैल ही क्यों है मुख्य दिन?

सनातन धर्म का सबसे बड़ा नियम है— ‘उदया तिथि’ (Udaya Tithi)। इसका मतलब है कि सूर्योदय (Sunrise) के समय जो तिथि मौजूद होती है, पूरे दिन उसी तिथि का प्रभाव माना जाता है और उसी दिन वो त्योहार मनाया जाता है।

  • 1 अप्रैल: आज सूर्योदय सुबह करीब 6 बजे हुआ था, तब तक पूर्णिमा शुरू नहीं हुई थी (पूर्णिमा 7:06 बजे शुरू हुई)।
  • 2 अप्रैल: कल जब सुबह सूर्योदय होगा, तब पूर्णिमा तिथि मौजूद होगी (क्योंकि यह 7:41 बजे तक है)।

उदया तिथि के अनुसार हनुमान जी का मुख्य जन्मोत्सव और मंदिरों में महाआरती कल (2 अप्रैल 2026, गुरुवार) को ही मनाई जाएगी!

तो 1 अप्रैल (आज) क्या करें? (व्रत और चंद्र दर्शन)

अब सवाल यह है कि अगर जन्मोत्सव कल है, तो आज 1 अप्रैल को क्या है?

पंचांग के जानकारों के अनुसार, चूंकि पूर्णिमा की असली रात (जब पूरा चांद आसमान में होगा) 1 अप्रैल को ही है, इसलिए चैत्र पूर्णिमा का उपवास (Fast) और सत्यनारायण भगवान की कथा आज 1 अप्रैल को ही की जाएगी। जो लोग पूर्णिमा का व्रत रखते हैं, वे आज व्रत रखकर रात में चंद्रमा को अर्घ्य देंगे। लेकिन हनुमान जी को चोला चढ़ाने और मुख्य पूजा का काम 2 अप्रैल को ही सबसे शुभ रहेगा।

हनुमान जन्मोत्सव 2026 के सबसे अचूक शुभ मुहूर्त

अगर आप 2 अप्रैल (गुरुवार) को बजरंगबली की विशेष कृपा पाना चाहते हैं, तो पूजा के इन 4 सबसे शुभ मुहूर्तों (Muhurat) का ध्यान रखें:

Hanuman Jayanti 2026 Kab Hai
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  • ब्रह्म मुहूर्त (Early Morning): सुबह 04:30 बजे से 05:15 बजे तक। (यह समय ध्यान और हनुमान चालीसा के पाठ के लिए सर्वोत्तम है)।
  • प्रातः काल पूजा: सूर्योदय के बाद सुबह 06:15 बजे से लेकर 07:41 बजे तक (पूर्णिमा समाप्त होने से पहले)।
  • अभिजीत मुहूर्त (दोपहर की पूजा): दोपहर 11:50 बजे से 12:40 बजे तक। इस समय चोला चढ़ाना और बूंदी के लड्डू का भोग लगाना सबसे शुभ माना जाता है।
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:30 बजे से 03:20 बजे तक। (शत्रुओं और संकटों पर विजय पाने के लिए इस समय सुंदरकांड का पाठ करें)।
  • ध्यान दें: 2 अप्रैल को दोपहर 01:30 बजे से 03:00 बजे के बीच ‘राहुकाल’ रहेगा, इस दौरान कोई भी नई पूजा शुरू करने से बचें।

ApniVani की बात

हनुमान जी को कलयुग का साक्षात और सबसे जाग्रत देवता माना जाता है। वह अष्ट सिद्धि और नव निधि के दाता हैं। चाहे आप आज पूजा करें या कल, बजरंगबली सिर्फ आपकी सच्ची श्रद्धा और भक्ति के भूखे हैं। सच्चे मन से राम नाम का जाप करें, हनुमान जी आपकी हर पुकार ज़रूर सुनेंगे।

आपकी राय: आप हनुमान जन्मोत्सव की पूजा किस दिन कर रहे हैं? संकटमोचन हनुमान जी का कौन सा रूप (बाल हनुमान, पंचमुखी या राम भक्त) आपको सबसे ज्यादा प्रिय है? जय श्री राम के जयकारे के साथ अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में या हमारे इंस्टाग्राम पेज @9vaniapni पर ज़रूर लिखें! आप सभी को हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं!

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बच्चों को नशीली दवा पिलाकर प्रेमी संग फरार हुई पांच बच्चों की मां, पुलिस ने 24 घंटे में ऐसे बिछाया जाल

नशीली दवा

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचल से एक ऐसी दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और ममता के रिश्ते को शर्मसार कर दिया है। एक कलयुगी मां ने अपने प्रेम प्रसंग के चलते अपने ही पांच मासूम बच्चों को नशीली दवा खिलाकर मौत के मुंह में धकेलने की कोशिश की और घर में रखे जेवरात व नकदी लेकर अपने प्रेमी के साथ रफूचक्कर हो गई। हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी ने 24 घंटे के भीतर ही इस मामले का पर्दाफाश कर आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।

ममता हुई शर्मसार: गहरी साजिश और प्रेमी का साथ

मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरी घटना की पटकथा महिला ने काफी पहले ही लिख दी थी। महिला का पति अपनी और परिवार की आजीविका चलाने के लिए दिल्ली में रहकर दर्जी (टेलर) का काम करता है। पीछे गांव में महिला अपने पांच बच्चों के साथ रहती थी। इसी दौरान उसका संपर्क इलाके के ही एक 22 वर्षीय युवक से हुआ। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ गईं और प्यार इस कदर परवान चढ़ा कि महिला ने अपने मातृत्व को भुलाकर बच्चों की जान जोखिम में डालने का फैसला कर लिया।

आधी रात की खौफनाक वारदात: खाने में मिलाया जहर

घटना वाली रात महिला ने अपनी सोची-समझी साजिश को अंजाम दिया। उसने रात के खाने में बेहोशी की दवा मिला दी और अपने पांचों बच्चों को खिला दी। दवा का असर होते ही बच्चे गहरी और अचेत नींद में सो गए। बच्चों के बेसुध होते ही महिला ने घर की अलमारियों में रखे कीमती जेवरात और नकदी को समेटा। इसके बाद वह घर के बाहर से ताला लगाकर अपने प्रेमी के साथ फरार हो गई, यह जानते हुए भी कि अंदर बंद बच्चे किसी भी अनहोनी का शिकार हो सकते हैं।

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पड़ोसियों की सजगता से बची मासूमों की जान

अगली सुबह जब काफी देर तक घर में कोई हलचल नहीं हुई और बाहर ताला लटका मिला, तो पड़ोसियों को अनहोनी की आशंका हुई। जब लोगों ने खिड़की से अंदर झांक कर देखा, तो वहां का नजारा देख सबके होश उड़ गए। पांचों बच्चे बेसुध अवस्था में जमीन पर पड़े थे। स्थानीय लोगों ने तुरंत शोर मचाया और दरवाजा तोड़कर बच्चों को बाहर निकाला। समय रहते बच्चों को उपचार मिलने से एक बड़ी त्रासदी टल गई। इस घटना ने पूरे गांव में हड़कंप मचा दिया।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई: 24 घंटे में दबोचे गए आरोपी

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों व मुखबिरों की मदद से आरोपियों की तलाश शुरू कर दी। पुलिस टीम ने तत्परता दिखाते हुए घेराबंदी की और फरार महिला व उसके 22 वर्षीय प्रेमी को वारदात के मात्र 24 घंटे के भीतर ही गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि घटना की अन्य कड़ियों को भी जोड़ा जा सके।

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समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी

यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि समाज के गिरते नैतिक मूल्यों का एक उदाहरण भी है। एक मां का अपने बच्चों को इस तरह मरणासन्न स्थिति में छोड़कर भागना रिश्तों की पवित्रता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। फिलहाल, बच्चे सुरक्षित हैं और आरोपी सलाखों के पीछे हैं, लेकिन इस घटना के घाव उन मासूमों के मन पर शायद हमेशा के लिए रह जाएंगे।

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