Patna Police का ‘ऑपरेशन क्लीन’: 80 लाख की नशीली सिरप के साथ अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़, 6 गिरफ्तार

Patna

बिहार की राजधानी Patna में नशीली दवाओं के सौदागरों के खिलाफ पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी चोट की है। Patna Police की विशेष टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए ‘खांटी सिरप’ (कोडीन युक्त कफ सिरप) की एक विशाल खेप पकड़ी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की कीमत लगभग 80 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस ने इस मामले में गिरोह के मुख्य सरगना सहित 6 शातिर तस्करों को दबोचने में कामयाबी हासिल की है। यह पूरी कार्रवाई पटना सिटी के मालसलामी और दीदारगंज थाना क्षेत्रों में अंजाम दी गई।

Patna Police
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डाक पार्सल और मसालों की आड़ में ‘सफेद जहर’ की सप्लाई

तस्करों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए तस्करी का बेहद शातिर तरीका अपनाया था। जब्त की गई सिरप की बोतलों को डाक विभाग के फर्जी पार्सल और तेज पत्तों की बोरियों के नीचे छिपाकर लाया जा रहा था। पुलिस ने छापेमारी के दौरान कुल 4485 लीटर प्रतिबंधित सिरप बरामद की, जो 289 अलग-अलग कार्टन में पैक थी। जांच में पता चला है कि यह खेप हिमाचल प्रदेश की एक फार्मा कंपनी से फर्जी कागजातों के जरिए मंगवाई गई थी और इसे पटना के स्थानीय बाजारों के साथ-साथ सीमावर्ती जिलों में सप्लाई किया जाना था।

सरगना ‘गन्नी’ सहित 6 तस्कर पुलिस की गिरफ्त में

इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता गिरोह के मास्टरमाइंड सूर्यप्रकाश उर्फ ‘गन्नी’ की गिरफ्तारी है। गन्नी पटना के कदमकुआं इलाके का रहने वाला है और लंबे समय से शहर में नशीली दवाओं के वितरण नेटवर्क को नियंत्रित कर रहा था। उसके साथ गिरफ्तार किए गए अन्य पांच आरोपियों में ट्रक ड्राइवर और लोकल एजेंट शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इन आरोपियों का जाल बिहार के कटिहार, सहरसा और वैशाली तक फैला हुआ था। ये लोग हिमाचल से माल मंगवाकर उसे ऊंचे दामों पर युवाओं और नशेड़ियों को बेचते थे।

हिमाचल प्रदेश से बिहार तक जुड़ा तस्करी का नेटवर्क

वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि बिहार में नशीली दवाओं की जड़ें अन्य राज्यों से जुड़ी हैं। डीएसपी डॉ. गौरव कुमार ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि गिरोह के सदस्य हिमाचल प्रदेश के इंडस्ट्रियल एरिया से सीधे संपर्क में थे। ट्रक (टाटा 407) और अन्य वाणिज्यिक वाहनों का उपयोग कर वे चेकपोस्टों को पार कर जाते थे क्योंकि ऊपर से डाक पार्सल या किराने का सामान लदा होता था। पुलिस अब उन कंपनियों की भी जांच कर रही है जहां से यह सिरप बिना वैध लाइसेंस के रिलीज किया गया था।

युवाओं के भविष्य पर प्रहार: बिहार में ‘खांटी’ का बढ़ता चलन

बिहार में शराबबंदी के बाद से कोडीन युक्त कफ सिरप (जिसे स्थानीय भाषा में ‘खांटी’ कहा जाता है) की मांग नशे के विकल्प के रूप में बढ़ी है। यह न केवल स्वास्थ्य के लिए घातक है, बल्कि युवाओं को अपराध की ओर भी धकेल रहा है। पटना पुलिस की इस कार्रवाई से ड्रग माफियाओं की कमर टूटी है। एसएसपी ने स्पष्ट किया है कि ‘मिशन सुरक्षा’ के तहत शहर के स्कूल-कॉलेजों और झुग्गी बस्तियों में सक्रिय छोटे डीलरों पर भी नकेल कसी जाएगी।

Patna Police
Patna Police का ‘ऑपरेशन क्लीन’

पुलिस की अपील

पटना पुलिस की यह उपलब्धि नशा मुक्त बिहार के संकल्प की ओर एक बड़ा कदम है। पुलिस ने एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में छापेमारी जारी है। पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उनके आस-पास ऐसी कोई संदिग्ध गतिविधि या नशीली दवाओं की बिक्री दिखे, तो तुरंत पुलिस हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें।

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Darbhanga Bird Flu News : 10,000 कौओं की मौत के बाद H5N1 की पुष्टि, क्या इंसानों को है खतरा?

Bird Flu

बिहार के दरभंगा जिले से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। पिछले कुछ दिनों से आसमान से गिरते मृत कौओं के रहस्य से अब पर्दा उठ गया है। जांच रिपोर्ट में आधिकारिक तौर पर H5N1 वायरस (Bird Flu) की पुष्टि हो गई है। प्रशासन ने पूरे जिले में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

आखिर क्या है पूरा मामला?

Darbhanga Bird Flu

दरभंगा के नगर निगम क्षेत्र (वार्ड नंबर 31) स्थित भिगो श्मशान घाट (मुक्तिधाम) पिछले कुछ दिनों से पक्षियों के कब्रिस्तान में तब्दील हो गया था। स्थानीय लोगों ने देखा कि अचानक बड़ी संख्या में कौए पेड़ से गिरकर मर रहे हैं। देखते ही देखते यह संख्या सैकड़ों से हजारों में पहुंच गई। समाजसेवी संस्थाओं और स्थानीय पार्षदों के हस्तक्षेप के बाद जब सैंपल भोपाल की लैब भेजे गए, तो रिपोर्ट ने सबकी नींद उड़ा दी—यह खतरनाक एवियन इन्फ्लूएंजा (H5N1) था।

मौत का आंकड़ा और प्रशासनिक हलचल

शुरुआती सरकारी आंकड़ों में एक हजार कौओं की मौत की बात कही गई थी, लेकिन स्थानीय सूत्रों और रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक लगभग 10,000 पक्षी अपनी जान गंवा चुके हैं। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए:

• मुक्तिधाम परिसर के पास जेसीबी से गहरे गड्ढे खुदवाकर मृत पक्षियों को वैज्ञानिक तरीके से दफनाया है।

• संक्रमित क्षेत्र के 5 किलोमीटर के दायरे को ‘सेंसिटिव जोन’ घोषित कर दिया गया है।

• अगले आदेश तक इस क्षेत्र में पोल्ट्री (मुर्गा-बत्तख) की बिक्री और परिवहन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

क्या इंसानों के लिए भी है खतरा?

H5N1 वायरस मुख्य रूप से पक्षियों को प्रभावित करता है, लेकिन यह इंसानों में भी फैल सकता है। यदि कोई व्यक्ति संक्रमित पक्षी के सीधे संपर्क में आता है या उसके मल-मूत्र के संपर्क में आता है, तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। दरभंगा प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी मृत पक्षी को हाथ न लगाएं।

बर्ड फ्लू से बचाव के रामबाण उपाय

अगर आप दरभंगा या इसके आस-पास के क्षेत्रों में रह रहे हैं, तो ये सावधानियां जरूर बरतें:

पक्षियों से दूरी: छत, मुंडेर या सड़क पर कोई मृत पक्षी दिखे तो उसे छुएं नहीं। इसकी सूचना तुरंत हेल्पलाइन या पशुपालन विभाग को दें।

चिकन और अंडा: अगर आप मांसाहारी हैं, तो मांस और अंडे को 70°C से ऊपर अच्छी तरह पकाकर ही खाएं। अधपका मांस बिल्कुल न लें।

साफ-सफाई: बाहर से आने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं। सैनिटाइजर का प्रयोग करें और भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनें।

Darbhanga Bird Flu

पोल्ट्री फार्म से दूरी: फिलहाल कुछ दिनों के लिए पोल्ट्री फार्म या चिड़ियाघर जैसी जगहों पर जाने से बचें।

लक्षणों पर नजर: यदि आपको अचानक तेज बुखार, खांसी, गले में खराश या सांस लेने में तकलीफ महसूस हो, तो इसे सामान्य सर्दी न समझें और तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

दरभंगा में बर्ड फ्लू की दस्तक एक गंभीर चेतावनी है। प्रशासन अपना काम कर रहा है, लेकिन नागरिकों की सतर्कता ही इस वायरस की चेन को तोड़ने में मदद करेगी। अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं का पालन करें।

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Kaimur Shamed: सरस्वती विसर्जन में ‘अश्लीलता’ रोकने की सजा! बेटी को बीच सड़क पीटा, तमाशबीन बनाते रहे वीडियो (3 कड़वे सवाल)

Kaimur shamed in Saraswati puja

आज बिहार का कैमुर शर्मिंदा हुआ (Kaimur Shamed) है। रामगढ़ से जो खबर आई है, उसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। हम उस देश में रहते हैं जहाँ नारी को ‘देवी’ मानकर पूजा जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि उसी देवी (माँ सरस्वती) के विसर्जन जुलूस में एक ‘बेटी’ को जानवरों की तरह पीटा जाता है।
सिर्फ सोचकर ही गुस्सा आता है। उस बहादुर लड़की का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने डीजे (DJ) पर बज रहे गंदे और अश्लील गानों का विरोध किया था।

शनिवार की रात रामगढ़ के नरहन गांव में जो हुआ, वह कोई साधारण मारपीट नहीं थी। वह इस बात का सबूत है कि हम ‘भक्ति’ के नाम पर ‘गुंडागर्दी’ के दौर में जी रहे हैं।

Kaimur shamed police

क्या है पूरा मामला? (The Shameful Incident)

घटना शनिवार रात (Saturday Night) की है। रामगढ़ थाना क्षेत्र के नरहन गांव (Narhan Village) में सरस्वती पूजा के बाद मूर्ति विसर्जन का जुलूस निकाला जा रहा था।
कायदे से यह श्रद्धा का माहौल होना चाहिए था, लेकिन डीजे पर कान फोड़ने वाले वॉल्यूम में बेहद अश्लील और जातिसूचक भोजपुरी गाने बज रहे थे।
गांव की ही एक युवती से यह बर्दाश्त नहीं हुआ। उसने जुलूस रोककर कहा— “माता के विसर्जन में ऐसे गंदे गाने मत बजाओ, इसे बंद करो।”

डीजे बंद होना तो दूर, जुलूस में शामिल कुछ मनचलों और अराजक तत्वों का ‘अहं’ (Ego) हर्ट हो गया। उन्हें लगा कि एक लड़की उन्हें रोकने वाली कौन होती है?

विरोध की सजा: छेड़छाड़ और हैवानियत

सबसे बड़ी बात यह है कि समझाने के बजाय, उन दरिंदों ने युवती को बीच सड़क पर घेर लिया। पहले उसे भद्दी-भद्दी गालियां दी गईं। जब उसने विरोध किया, तो उसके साथ छेड़छाड़ (Molestation) शुरू कर दी गई। और जब वह खुद को बचाने के लिए चीखी, तो लाठी-डंडों, लात और घूंसों से उसकी बेरहमी से पिटाई की गई।
उसे तब तक मारा गया जब तक वह अधमरी होकर गिर नहीं गई। फिलहाल वह भभुआ सदर अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है।

‘नपुंसक’ भीड़: जो सिर्फ वीडियो बनाती रही

इस घटना का सबसे डरावना पहलू हमलावर नहीं, बल्कि वहां मौजूद भीड़ थी।
जिस वक्त उस बेटी को पीटा जा रहा था, वहां सैकड़ों लोग मौजूद थे। लेकिन किसी का हाथ उसे बचाने के लिए नहीं उठा। सबके हाथ में मोबाइल था। सब वीडियो (Video) बना रहे थे ताकि सोशल मीडिया पर ‘वायरल’ कर सकें।

सोचिए, उस बेटी पर क्या गुजरी होगी जब उसने देखा होगा कि उसके अपने गांव वाले, उसके पड़ोसी—सब तमाशबीन बनकर रील बना रहे हैं? यह साबित करता है कि स्मार्टफोन्स ने हमें स्मार्ट तो बना दिया, लेकिन हमारी ‘इंसानियत’ को मार दिया है।

Crowd of Saraswati puja kaimur shamed

भक्ति या गुंडागर्दी? (Devotion vs Hooliganism)

आज हमें यह सवाल पूछना ही होगा— सरस्वती पूजा में ‘चोली-घाघरा’ वाले गानों का क्या काम?
माँ सरस्वती ‘विद्या और संगीत’ की देवी हैं। उनके विसर्जन में शराब पीकर, डीजे पर अश्लील गानों पर नाचना कौन सी भक्ति है? बिहार और यूपी में यह एक बीमारी बन चुकी है।
प्रशासन की नाकामी: सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स हैं कि तेज आवाज़ और अश्लील गाने नहीं बजेंगे, लेकिन पुलिस अक्सर जुलूस के नाम पर आंखें मूंद लेती है। अगर पुलिस पहले ही सख्त होती, तो नरहन गांव में उन गुंडों की इतनी हिम्मत नहीं होती।

पुलिस एक्शन: अब तक क्या हुआ?

घटना के तूल पकड़ते ही प्रशासन की नींद टूटी है।
SP और DM की दौड़: मामले की गंभीरता को देखते हुए कैमूर के डीएम और एसपी खुद थाने पहुंचे।
FIR दर्ज: पुलिस ने पीड़िता के बयान पर एफआईआर दर्ज कर ली है।
गिरफ्तारी: वीडियो फुटेज के आधार पर एक मुख्य आरोपी को हिरासत में लिया गया है और बाकी की तलाश जारी है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या गिरफ्तारी से उस बेटी का दर्द कम हो जाएगा? क्या उसके मन से वह खौफ निकलेगा?

कब सुधरेगा समाज?

कैमूर की यह घटना (Kaimur Horror) सिर्फ एक न्यूज़ नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। अगर आज हम चुप रहे, तो कल यह हमारे घर की बेटी के साथ भी हो सकता है।
उस लड़की ने जो किया, वह ‘साहस’ था, और समाज ने जो किया, वह ‘कायरता’ थी। हमें प्रशासन से मांग करनी चाहिए कि आरोपियों को ऐसी सजा मिले कि अगली बार कोई डीजे पर अश्लीलता फैलाने से पहले सौ बार सोचे।
हमारा सवाल आपसे:
क्या विसर्जन जुलूसों में डीजे (DJ) पूरी तरह बैन हो जाना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर दें।

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Katihar Tea Stall News : जहाँ चाय की चुस्की के साथ परोसी जा रही थी ‘गंदी सर्विस’, जानें क्या है पूरा मामला!

Katihar Tea Stall News

Katihar Tea Stall News: बिहार के कटिहार जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। अक्सर लोग थकान मिटाने के लिए चाय की दुकान पर जाते हैं, लेकिन कटिहार की इस दुकान में चाय तो बस एक बहाना था, असली खेल तो दुकान के पीछे के कमरों में चल रहा था।

अदरक कूटने की आड़ में ‘राज’ दबाने का धंधा

कहते हैं कि यहाँ की चाय में अदरक कुछ ज्यादा ही कूटकर डाली जाती थी, लेकिन पुलिसिया जांच और ग्रामीणों के खुलासे ने बताया कि यहाँ अदरक नहीं, बल्कि ‘राज’ कूटकर दबाए जाते थे। कटिहार के एक गांव में स्थित इस चाय की दुकान की आड़ में पिछले 5 सालों से जिस्मफरोशी (Prostitution Racket) का काला कारोबार धड़ल्ले से चल रहा था।

Katihar Tea stall back room

कैसे हुआ इस ‘गंदी बात’ का खुलासा?

इस पूरे मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब स्थानीय ग्रामीणों को दुकान की गतिविधियों पर शक हुआ। गुरुवार को ग्रामीणों ने अचानक दुकान पर धावा बोल दिया।

  • हैरान करने वाला नजारा: ग्रामीणों ने दुकान के अंदर बने एक गुप्त कमरे से एक युवक को आपत्तिजनक (नग्न) अवस्था में पकड़ा।
  • महिला संचालक: दुकान की मालकिन, जिसे स्थानीय लोग ‘बसंती देवी’ के नाम से जानते हैं, वह इस पूरे धंधे को ऑपरेट कर रही थी। दुकान के पिछले हिस्से में बाकायदा चौकी लगाकर अनैतिक कार्यों के लिए केबिन बनाए गए थे।

सोशल मीडिया पर वीडियो हुआ वायरल

जैसे ही ग्रामीणों ने युवक को पकड़ा, उन्होंने उसका वीडियो बना लिया जो अब यूट्यूब और फेसबुक पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे चाय की दुकान की आड़ में समाज की मर्यादा को ताक पर रखकर यह धंधा चलाया जा रहा था। लोग सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं— “कटिहार की बसंती चाय के साथ कुछ ज्यादा ही सर्विस दे रही थी।”

Katihar Police Swat

पुलिस की छापेमारी और कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए कटिहार पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। पुलिस अधिकारी दशरथ राय ने पुष्टि की है कि दुकान के पिछले हिस्से में अवैध गतिविधियां चल रही थीं।

  • • पुलिस ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए।
  • • अवैध सप्लाई नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए जांच तेज कर दी गई है।
  • • स्थानीय लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं जिन्होंने बताया कि यहाँ लंबे समय से संदिग्ध लोगों का आना-जाना लगा रहता था।

सतर्क रहने की जरूरत

यह घटना हमें याद दिलाती है कि कभी-कभी जो दिखता है, वो सच नहीं होता। एक साधारण सी चाय की दुकान के पीछे इतना बड़ा सेक्स रैकेट चल सकता है, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अपने आसपास होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

  • मुख्य बातें (Highlights):
  • स्थान: कटिहार, बिहार।
  • आरोप: चाय की दुकान की आड़ में देह व्यापार।
  • कितने समय से: पिछले 5 वर्षों से सक्रिय।
  • कार्रवाई : पुलिस ने छापेमारी कर नेटवर्क का खुलासा किया।

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पूर्णिया में अतिक्रमण हटाने गए CO से भिड़ी पूर्व पार्षद की बेटी, जमकर हुई हाथापाई!

Purnea co photo

पूर्णिया: बिहार के पूर्णिया जिले में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने सबको हैरान कर दिया। सरकारी जमीन को खाली कराने पहुँचे अंचलाधिकारी (CO) और पूर्व पार्षद की बेटी के बीच तीखी बहस देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए मुकदमा दर्ज कर लिया है।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरी घटना पूर्णिया शहर के एक व्यस्त इलाके की है। नगर निगम की टीम पुलिस बल के साथ अवैध कब्जों को हटाने पहुँची थी। जैसे ही बुलडोजर ने अपना काम शुरू किया, स्थानीय लोग विरोध करने लगे। इसी बीच पूर्व पार्षद की बेटी रानी देवी वहां पहुँच गईं और कार्रवाई का विरोध करने लगीं।

रानी देवी का आरोप था कि प्रशासन बिना किसी पूर्व सूचना के उनके घर के सामने का हिस्सा तोड़ रहा है। बातचीत के दौरान मामला इतना बढ़ गया कि रानी देवी और अंचलाधिकारी (CO) के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। देखते ही देखते दोनों के बीच हाथापाई होने लगी, जिसे देख वहां मौजूद पुलिसकर्मी और लोग दंग रह गए।

CO aur purva parshad ki beti ke bich jhadap

सरकारी काम में बाधा और FIR

CO राकेश कुमार ने आरोप लगाया कि महिला ने न सिर्फ उनके साथ बदतमीजी की, बल्कि सरकारी काम में बाधा डालते हुए उन पर हमला भी किया। इस हंगामे के कारण अतिक्रमण हटाने का काम काफी देर तक रुका रहा। घटना के बाद CO ने स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा डालने और मारपीट की धाराओं के तहत पूर्व पार्षद की बेटी के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।

परिवार का पक्ष

दूसरी ओर, पूर्व पार्षद के परिवार का कहना है कि प्रशासन पक्षपात कर रहा है। उनका दावा है कि जिस जमीन को अतिक्रमण बताया जा रहा है, उसके कागजात उनके पास हैं। रानी देवी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अधिकारी उनकी बात सुनने को तैयार नहीं थे और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया, जिसके बचाव में उन्हें आगे आना पड़ा।

Purnea me atikarman htane ka kaam

शहर में चर्चा का विषय

पूर्णिया में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोग इसे प्रशासन की मनमानी बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि किसी को भी कानून हाथ में लेने का हक नहीं है, चाहे वह रसूखदार परिवार से ही क्यों न हो।

प्रशासन की चेतावनी

जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अतिक्रमण हटाओ अभियान रुकने वाला नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि शहर को जाम मुक्त बनाने के लिए सड़कों के किनारे से अवैध कब्जे हटाना जरूरी है। जो भी व्यक्ति इस प्रक्रिया में बाधा डालेगा, उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पुलिस इस मामले की बारीकी से जांच कर रही है और वायरल वीडियो के आधार पर गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। अब देखना यह है कि इस कानूनी लड़ाई में आगे क्या मोड़ आता है।

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बिहार: अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर से मुक्ति! नीतीश सरकार ने लॉन्च की ‘जनता द्वार योजना’, घर बैठे मिलेंगी 25 सेवाएं

नीतीश

बिहार में सुशासन के एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की जनता को सरकारी दफ्तरों की भागदौड़ से बचाने के लिए महत्वाकांक्षी ‘जनता द्वार योजना’ का शुभारंभ किया है। इस डिजिटल पहल के जरिए अब जाति प्रमाण पत्र से लेकर राशन कार्ड तक की सुविधाएं सीधे लोगों के मोबाइल और घर तक पहुंचेंगी।

सुशासन का नया मॉडल: क्या है ‘जनता द्वार योजना’?

मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस योजना का उद्घाटन करते हुए इसे बिहार के प्रशासनिक इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव बताया। इस योजना की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

• जनता द्वार ऐप: सरकार ने एक समर्पित मोबाइल ऐप लॉन्च किया है, जहाँ 25 से अधिक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सेवाएं एक क्लिक पर उपलब्ध होंगी।

नीतीश सरकार

• 48 घंटे में डिलीवरी: जाति, आय, निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और पेंशन संबंधी आवेदनों का निपटारा अब अधिकतम 48 घंटों के भीतर करने का लक्ष्य रखा गया है।

• IT-साक्षर केंद्र: राज्य के हर जिले में 50 ‘जनता द्वार केंद्र’ खोले जाएंगे। ये केंद्र उन लोगों की मदद करेंगे जो तकनीक के साथ सहज नहीं हैं।

• टोल-फ्री हेल्पलाइन: शिकायतों और जानकारी के लिए सरकार ने 1800-XXX-XXXX नंबर जारी किया है, जिससे अधिकारी सीधे जनता से जुड़ेंगे।

मुख्यमंत्री का संबोधन: “अब जनता नहीं, काम उनके पास जाएगा”

उद्घाटन के दौरान CM नीतीश कुमार ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि आम आदमी को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए ब्लॉक या अनुमंडल कार्यालय के चक्कर न काटने पड़ें। यह डिजिटल सशक्तीकरण की दिशा में बिहार का बड़ा कदम है।”

वहीं, डिप्टी CM सम्राट चौधरी ने इस योजना को ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया और कहा कि इससे बिचौलियों और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।

विपक्ष का रुख: स्वागत के साथ सतर्कता

विपक्ष (RJD) ने इस डिजिटल पहल का स्वागत तो किया है, लेकिन इसके क्रियान्वयन (Implementation) पर सवाल उठाए हैं। आरजेडी प्रवक्ताओं का कहना है कि कागजों पर योजनाएं अच्छी होती हैं, लेकिन असली चुनौती ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट और सर्वर की समस्याओं को दूर करना है।

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भ्रष्टाचार पर चोट और रोजगार के अवसर

विशेषज्ञों के अनुसार, 500 करोड़ रुपये के बजट वाली इस योजना से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि ‘जनता द्वार केंद्रों’ के माध्यम से हजारों आईटी-साक्षर युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। सरकार ने अगले 6 महीनों में 1 करोड़ आवेदनों को डिजिटल माध्यम से संसाधित करने का लक्ष्य रखा है।

पटना, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे बड़े शहरों से शुरू हुई यह योजना जल्द ही बिहार के हर गांव तक पहुंचेगी। इसमें भविष्य में AI-आधारित चैटबॉट जोड़ने की भी योजना है, जो लोगों के सवालों के तुरंत जवाब देगा।

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बिहार में  मौत कोहराम: किशनगंज में ट्रक-डंपर की टक्कर के बाद जिंदा जले 3 लोग, वैशाली में भतीजे ने की चाचा की हत्या

बिहार

बिहार में पिछले चंद घंटों के भीतर दिल दहला देने वाली दो बड़ी घटनाएं सामने आई हैं। एक तरफ जहां किशनगंज में भीषण सड़क हादसे ने तीन परिवारों को उम्र भर का गम दे दिया, वहीं दूसरी तरफ वैशाली में रिश्तों के कत्ल की एक खौफनाक वारदात ने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है। इन घटनाओं ने राज्य की कानून-व्यवस्था और सड़क सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

किशनगंज: NH 327E पर मौत का तांडव, जिंदा जले तीन लोग

किशनगंज जिले के ठाकुरगंज क्षेत्र में एक रूह कंपा देने वाला हादसा हुआ। NH 327E पर एक तेज रफ्तार ट्रक और डंपर के बीच आमने-सामने की जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों वाहनों में तुरंत आग लग गई और देखते ही देखते लपटें 10 फीट ऊपर तक उठने लगीं।

ट्रक-डंपर की टक्कर

इस भयावह अग्निकांड में दोनों वाहनों के ड्राइवरों समेत तीन लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई। देखने वाले के अनुसार, आग इतनी तेज थी कि लोग चाहकर भी उनकी मदद नहीं कर सके। सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन तब तक सब कुछ जलकर राख हो चुका था। पुलिस ने जले हुए शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच जारी है।

वैशाली: पारिवारिक विवाद में भतीजे ने चाचा का गला रेता

किशनगंज के हादसे के बीच वैशाली जिले से भी एक सनसनीखेज वारदात सामने आई। वैशाली के बराटी थाना क्षेत्र के बहुआरा गांव में एक भतीजे ने अपने सगे चाचा की बेरहमी से हत्या कर दी।

आरोपी भतीजे मंजय कुमार ने पारिवारिक विवाद के चलते अपने 70 वर्षीय चाचा महताब लाल सिंह पर हसुली से हमला किया और उनका गला रेत दिया। जब महताब लाल की पत्नी (चाची) उन्हें बचाने पहुंचीं, तो आरोपी ने उन पर भी हमला कर दिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी मंजय को गिरफ्तार कर लिया है और हत्या में इस्तेमाल हथियार भी जब्त कर लिया गया है। वैशाली एसपी ने कहा है कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले की स्पीडी ट्रायल के जरिए सजा दिलाई जाएगी।

बिहार में मौत कोहराम

सुशासन के दावों पर सवाल

इन दो अलग-अलग घटनाओं ने बिहार में सुरक्षा और सामाजिक समरसता पर बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर किशनगंज की सड़कों पर आए दिन हो रहे हादसों ने परिवहन विभाग की सक्रियता पर सवाल उठाए हैं, वहीं वैशाली की घटना ने समाज में बढ़ती हिंसा और घरेलू विवादों के खौफनाक अंत को उजागर किया है।

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71 IPS अधिकारियों का तबादला, कुंदन कृष्णन बने STF चीफ, कई जिलों के SP बदले

71 IPS

बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने नए साल की शुरुआत के साथ ही प्रशासनिक महकमे में अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल किया है। गृह विभाग द्वारा शुक्रवार, 9 जनवरी 2026 की देर शाम जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्य के 71 IPS अधिकारियों का एक साथ तबादला कर दिया गया है। इस बड़े बदलाव से न केवल पुलिस मुख्यालय के समीकरण बदले हैं, बल्कि कई जिलों की सुरक्षा कमान भी नए हाथों में सौंपी गई है।

71 IPS

जिलों की नई कमान: प्रमुख SP और SSP की तैनाती

बिहार के कई महत्वपूर्ण जिलों में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए नए पुलिस कप्तानों की नियुक्ति की गई है। इस कड़ी में सुशील कुमार को गया जिले का नया वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) बनाया गया है, जबकि कांतेश कुमार मिश्रा अब मुजफ्फरपुर के SSP की जिम्मेदारी संभालेंगे। भागलपुर की सुरक्षा का जिम्मा प्रमोद कुमार यादव को सौंपा गया है और विनीत कुमार को सारण (छपरा) का नया SSP नियुक्त किया गया है।

गोपालगंज जिले के पुलिस कप्तान के रूप में विनय तिवारी की वापसी हुई है, जो अपनी विशेष कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। सीमावर्ती जिले किशनगंज में संतोष कुमार और अररिया में जितेंद्र कुमार को SP बनाया गया है। वहीं, सीवान में पूरन कुमार झा, लखीसराय में अवधेश दीक्षित और अरवल में नवजोत सिमी को जिले की कमान सौंपी गई है। राजधानी पटना के यातायात प्रबंधन को सुधारने के लिए सागर कुमार को नया ट्रैफिक SP नियुक्त किया गया है।

पुलिस मुख्यालय और विशेष इकाइयों में बदलाव

जिलों के अलावा पुलिस मुख्यालय (PHQ) के ढांचे में भी बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन को अब एसटीएफ (STF) के महानिदेशक (DG) की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है, साथ ही वे ऑपरेशन और स्पेशल ब्रांच का जिम्मा भी देखेंगे। सुनील कुमार, जो पहले स्पेशल ब्रांच में थे, अब एडीजी (मुख्यालय) के पद पर तैनात किए गए हैं। प्रीता वर्मा को बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम का अध्यक्ष सह एमडी बनाया गया है, जबकि अमित कुमार जैन मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो के नए एडीजी होंगे।

साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए रंजीत कुमार मिश्रा को आईजी (साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई) की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही, हृदयकांत को एटीएस (ATS) का नया एसपी और अनंत कुमार को पटना का रेल एसपी नियुक्त किया गया है।

71 IPS

रेंज और प्रमंडल स्तर पर नई नियुक्तियां

प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूत करने के लिए रेंज स्तर पर भी अधिकारियों को बदला गया है। विवेकानंद को पूर्णिया प्रमंडल का नया आईजी (IG) बनाया गया है, जिससे सीमांचल के जिलों में निगरानी तेज होगी। आनंद कुमार को डीआईजी (विधि-व्यवस्था, पटना) के पद पर तैनात किया गया है, जिनका मुख्य कार्य कानून-व्यवस्था की मॉनिटरिंग करना होगा। कोसी प्रमंडल की जिम्मेदारी अब डीआईजी के रूप में कुमार आशीष संभालेंगे, जबकि मनोज कुमार को पुलिस मुख्यालय में आईजी के पद पर पदस्थापित किया गया है। आर. मलार विजी को एडीजी (बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस) का अतिरिक्त प्रभार देकर सशस्त्र बलों के प्रबंधन को और मजबूती दी गई है।

आपकी क्या राय है? क्या नए पुलिस कप्तानों की तैनाती से बिहार में अपराध की स्थिति में सुधार होगा? कमेंट में अपनी राय जरूर साझा करें।

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पटना में DM ने 11 जनवरी तक कक्षा 8 तक के स्कूल किए बंद, बढ़ती ठंड को देखते हुए जारी हुआ नया आदेश

पटना

बिहार की राजधानी पटना समेत पूरा उत्तर भारत इस समय भीषण शीतलहर और कनकनी की चपेट में है। गिरते तापमान और घने कोहरे के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए पटना जिलाधिकारी (DM) ने जिले के सभी स्कूलों को बंद करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जिससे अभिभावकों और छात्रों को बड़ी राहत मिली है।

पटना DM का आधिकारिक आदेश: कौन से स्कूल रहेंगे बंद?

पटना के जिलाधिकारी ने धारा 144 (अब नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत प्रासंगिक प्रावधान) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए शैक्षणिक गतिविधियों पर रोक लगाई है।

पटना

आदेश का मुख्य विवरण

• कक्षा सीमा: नर्सरी से लेकर कक्षा 8वीं तक के सभी बच्चों के लिए शैक्षणिक गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी।

• समय सीमा: स्कूलों को फिलहाल 11 जनवरी 2026 तक बंद रखने का निर्देश दिया गया है।

• स्कूलों के प्रकार: यह आदेश पटना जिले के अंतर्गत आने वाले सभी सरकारी, निजी (Private), सहायता प्राप्त और प्री-स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा।

बड़ी कक्षाओं के लिए नियम

कक्षा 9वीं से 12वीं तक की कक्षाएं पूरी तरह बंद नहीं की गई हैं, लेकिन उनके समय में बदलाव किया गया है। ऊपर की कक्षाओं का संचालन सुबह 10:30 बजे से पहले और शाम 3:30 बजे के बाद नहीं किया जा सकेगा, ताकि छात्र ठंडी हवाओं से बच सकें।

क्यों लिया गया स्कूल बंदी का फैसला?

बिहार में पिछले 48 घंटों से पछुआ हवाओं ने ठिठुरन बढ़ा दी है। पटना का न्यूनतम तापमान गिरकर 7 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया है।

• घना कोहरा: दृश्यता (Visibility) कम होने के कारण स्कूल बसों और अन्य वाहनों के साथ दुर्घटना का खतरा बढ़ गया था।

• बच्चों का स्वास्थ्य: छोटे बच्चों में कोल्ड डायरिया, निमोनिया और सर्दी-खांसी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों ने भी छोटे बच्चों को सुबह की ठंड से बचाने की सलाह दी थी।

• कोल्ड डे की स्थिति: मौसम विभाग (IMD) ने ‘येलो अलर्ट’ जारी करते हुए अगले कुछ दिनों तक धूप न निकलने की संभावना जताई है।

मौसम विभाग का अनुमान: आगे कैसा रहेगा हाल?

मौसम विज्ञान केंद्र, पटना के अनुसार, बिहार के अधिकांश जिलों में अगले 3 से 4 दिनों तक राहत मिलने के आसार नहीं हैं।

• पछुआ हवाओं का प्रभाव

हिमालयी क्षेत्रों से आ रही ठंडी हवाओं के कारण बिहार के मैदानी इलाकों में कनकनी बनी रहेगी। पटना के अलावा गया, मुजफ्फरपुर और पूर्णिया जैसे जिलों में भी तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

• कोहरे का असर

सड़कों पर दृश्यता 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई है, जिससे न केवल सडक यातायात बल्कि ट्रेनों और फ्लाइट्स के शेड्यूल पर भी बुरा असर पड़ा है।

अभिभावकों और स्कूलों के लिए निर्देश

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई स्कूल इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

• ऑनलाइन क्लासेज: कई निजी स्कूलों ने वैकल्पिक रूप से ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करने का निर्णय लिया है ताकि बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो।

• टीचर और स्टाफ: स्कूलों को बंद करने का आदेश केवल छात्रों के लिए है। शिक्षक और अन्य गैर-शिक्षण कर्मचारी (Non-teaching staff) स्कूल आ सकते हैं और प्रशासनिक कार्य निपटा सकते हैं।

• सुरक्षा प्रोटोकॉल: जिलाधिकारी ने माता-पिता से अपील की है कि वे बच्चों को गरम कपड़े पहनाएं और बेवजह घर से बाहर न निकलने दें।

पटना

बिहार के अन्य जिलों की स्थिति

पटना ही नहीं, बल्कि बिहार के कई अन्य जिलों जैसे भागलपुर, बक्सर और छपरा में भी स्थानीय प्रशासन ने इसी तरह के आदेश जारी किए हैं। राज्य भर के आंगनवाड़ी केंद्रों को भी फिलहाल बंद रखा गया है। बोर्ड परीक्षाओं (BSEB 2026) की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है क्योंकि उनके प्रैक्टिकल एग्जाम्स भी नजदीक हैं।

क्या आपके क्षेत्र में भी ठंड के कारण स्कूलों की छुट्टियां बढ़ा दी गई हैं? हमें कमेंट बॉक्स में बताएं और अपने जिले का नाम जरूर लिखें।

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तेजस्वी यादव का ‘ऑपरेशन क्लीन’: विदेश से लौटते ही एक्शन मोड में नेता प्रतिपक्ष, क्या भितरघातियों पर गिरेगी गाज?

तेजस्वी यादव

बिहार की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट बढ़ गई है। विदेश दौरे से वापस लौटते ही राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कद्दावर नेता तेजस्वी यादव पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि तेजस्वी अब पार्टी के भीतर उन ‘विभीषणों’ की छंटनी करने वाले हैं, जिन्होंने पिछले चुनावों में पीठ पीछे वार किया था। ‘भितरघात’ करने वाले नेताओं की एक लंबी सूची तैयार हो चुकी है, जिस पर आज अंतिम मुहर लग सकती है।

पार्टी संगठन में ‘सर्जरी’ की तैयारी: क्यों जरूरी हुआ यह फैसला?

तेजस्वी यादव का यह कदम केवल अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं है, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी को पूरी तरह दुरुस्त करने की एक सोची-समझी रणनीति है। आरजेडी के शीर्ष सूत्रों का कहना है कि तेजस्वी अब पार्टी में केवल ‘क्राउड पुलर’ नेताओं को ही नहीं, बल्कि वफादार कार्यकर्ताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देना चाहते हैं।

तेजस्वी यादव

भीतरघातियों की लिस्ट तैयार

हालिया चुनावों के परिणामों की समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई थी कि कई सीटों पर आरजेडी के स्थानीय नेताओं और पदाधिकारियों ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ काम किया। कहीं जातीय समीकरणों को बिगड़ा गया, तो कहीं विपक्षी दलों के साथ गुप्त साठगांठ की गई। तेजस्वी यादव ने खुद इन रिपोर्ट्स का बारीकी से अध्ययन किया है।

युवाओं को तरजीह, पुराने चेहरों पर संशय

खबर है कि इस ‘क्लीनअप’ अभियान के तहत पार्टी के पुराने और निष्क्रिय पड़ चुके जिलाध्यक्षों और प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों को बदला जा सकता है। तेजस्वी की कोशिश है कि पार्टी में ‘माई’ (MY – Muslim-Yadav) समीकरण के साथ-साथ ‘ए टू जेड’ (A to Z) वाली छवि को और मजबूती दी जाए, जिसके लिए युवा और ऊर्जावान चेहरों को आगे लाया जा रहा है।

तेजस्वी यादव का ‘विदेशी दौरा’ और बिहार की सियासत

तेजस्वी यादव पिछले कुछ दिनों से निजी यात्रा पर विदेश में थे। उनकी अनुपस्थिति में बिहार की राजनीति में कई बदलाव आए। सत्ता पक्ष ने उनकी गैर-मौजूदगी पर सवाल उठाए, लेकिन तेजस्वी ने सोशल मीडिया और अपने करीबियों के जरिए बिहार की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर नजर बनाए रखी।

क्या था मिशन और वापसी के मायने?

तेजस्वी की वापसी के साथ ही आरजेडी मुख्यालय में हलचल तेज हो गई है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के साथ उनकी लंबी बैठक होने वाली है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा उन बागियों पर कार्रवाई करना है, जिन्होंने पिछले चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन किया था।

अनुशासन समिति की रिपोर्ट और संभावित कार्रवाई

आरजेडी की अनुशासन समिति ने राज्य के विभिन्न जिलों से आई शिकायतों के आधार पर एक गोपनीय रिपोर्ट तैयार की है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:

• सीमांचल और कोसी क्षेत्र: यहां कई बड़े नेताओं पर चुनाव के दौरान निष्क्रिय रहने का आरोप है।

• मगध बेल्ट: यहां टिकट वितरण से नाराज कुछ नेताओं ने दूसरी पार्टियों की मदद की।

• सारण और तिरहुत: यहां समन्वय की कमी के कारण पार्टी को कुछ नजदीकी मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा।

इन रिपोर्टों के आधार पर माना जा रहा है कि आज कम से कम 20 से 25 बड़े पदाधिकारियों को उनके पदों से मुक्त किया जा सकता है। कुछ को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी निलंबित करने की तैयारी है।

2026 विधानसभा चुनाव का रोडमैप

बिहार में 2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से बिसात बिछनी शुरू हो गई है। तेजस्वी यादव जानते हैं कि अगर संगठन में फूट रही, तो नीतीश कुमार और बीजेपी के गठबंधन को चुनौती देना मुश्किल होगा।

बूथ स्तर पर मजबूती

तेजस्वी यादव का जोर अब ‘बूथ जीतो, चुनाव जीतो’ के मंत्र पर है। वे चाहते हैं कि पार्टी का हर कार्यकर्ता सीधे जनता से जुड़ा हो। भितरघात करने वाले नेताओं को हटाकर वे संदेश देना चाहते हैं कि अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

तेजस्वी यादव

जातीय गणना और ‘A to Z’ फॉर्मूला

नीतीश सरकार द्वारा कराई गई जातीय गणना के आंकड़ों के बाद, तेजस्वी अपनी रणनीति को और धार दे रहे हैं। वे अति पिछड़ों (EBC) और दलितों को पार्टी के मुख्य ढांचे में बड़ी हिस्सेदारी देने की योजना बना रहे हैं, ताकि आरजेडी की छवि केवल एक या दो जातियों तक सीमित न रहे।

क्या आपको लगता है कि पार्टी के भीतर ‘भितरघात’ करने वाले नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाकर तेजस्वी यादव 2026 में मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँच पाएंगे? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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