बिहार में अब 21 दिन का इंतज़ार खत्म: सिर्फ 24 घंटे में मिलेगा डेथ सर्टिफिकेट, नीतीश सरकार का बड़ा फैसला

डेथ सर्टिफिकेट

बिहार में प्रशासनिक सुधारों की दिशा में नीतीश सरकार ने एक और क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब राज्य के नागरिकों को अपने परिजनों की मृत्यु के बाद ‘डेथ सर्टिफिकेट’ (Death Certificate) के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे और न ही 21 दिनों का लंबा इंतज़ार करना होगा। पंचायती राज विभाग ने एक नया ढांचा तैयार किया है, जिसके तहत अब आवेदन के मात्र 24 घंटे के भीतर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा।

पुराने नियमों में बदलाव: 21 दिन की बाध्यता समाप्त

अब तक की व्यवस्था के अनुसार, मृत्यु की सूचना देने और प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया काफी जटिल थी। नियमानुसार 21 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य था, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और सुस्त सरकारी मशीनरी के कारण लोगों को हफ्तों तक इंतज़ार करना पड़ता था। इस देरी की वजह से मृतक के आश्रितों को बैंक क्लेम, जमीन का नामांतरण (Mutation), और बीमा राशि प्राप्त करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। बिहार सरकार की नई नियमावली “बिहार जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2025” ने अब इन सभी बाधाओं को दूर कर दिया है।

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पंचायत स्तर पर ही होगा समाधान: वार्ड सदस्य और सचिव की भूमिका

नई व्यवस्था के तहत, सरकार ने पंचायतों को सीधे तौर पर सशक्त बनाया है। अब मृत्यु की सूचना मिलते ही संबंधित पंचायत सचिव और वार्ड सदस्य की सक्रियता से डेटा को तुरंत डिजिटल पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। सरकार एक विशेष मोबाइल ऐप भी लॉन्च करने जा रही है, जिससे मौके पर ही सत्यापन (Verification) कर डिजिटल सर्टिफिकेट जेनरेट किया जा सकेगा। यह सर्टिफिकेट सीधे आवेदक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेज दिया जाएगा, जिसे कहीं भी कानूनी दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा।

जमीन विवाद और भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम

बिहार में भूमि विवादों का एक मुख्य कारण मृत्यु प्रमाण पत्र मिलने में होने वाली देरी भी रहा है। समय पर प्रमाण पत्र न मिलने से वंशावली और जमीन के बंटवारे जैसे मामले सालों तक लटके रहते थे। अब 24 घंटे के भीतर प्रमाण पत्र मिलने से ‘दाखिल-खारिज’ की प्रक्रिया तेज होगी। साथ ही, पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाने से बिचौलियों और भ्रष्टाचार का खात्मा होगा। पंचायती राज मंत्री के अनुसार, यह व्यवस्था पारदर्शिता लाने और आम आदमी के समय की बचत करने के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

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डिजिटल डेटाबेस और भविष्य की योजनाएं

यह नई व्यवस्था न केवल तात्कालिक राहत देगी, बल्कि बिहार के सेंट्रल डेटाबेस को भी मज़बूत करेगी। हर मृत्यु का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा, जिससे भविष्य में पुराने रिकॉर्ड खोजने में आसानी होगी। श्मशान घाट और कब्रिस्तानों के पास स्थित वार्ड सदस्यों को इस प्रक्रिया की पहली कड़ी बनाया गया है, ताकि सूचना तंत्र में कोई कमी न रहे।

बिहार सरकार का यह फैसला ‘ई-गवर्नेंस’ की दिशा में एक बड़ी जीत है। इससे न केवल आम जनता की परेशानी कम होगी, बल्कि सरकारी सेवाओं में तत्परता और जवाबदेही भी बढ़ेगी। अगर आप भी बिहार के निवासी हैं, तो अब आपको ब्लॉक या नगर निगम की दौड़ लगाने की ज़रूरत नहीं है—आपकी पंचायत अब आपकी सेवा के लिए 24 घंटे तैयार है।

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बिहार मौसम अपडेट: 8 जिलों में कुदरत का कहर! IMD का ऑरेंज अलर्ट, भागलपुर-किशनगंज में महा-तूफान की आहट

बिहार मौसम अपडेट

बिहार के आसमान पर काले बादलों का डेरा जम चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के पूर्वी और उत्तरी हिस्सों के 8 प्रमुख जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया है। 20 मार्च 2026 की दोपहर से ही मौसम की बदलती चाल ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से उठी नम हवाओं और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के मेल ने बिहार के भागलपुर और किशनगंज जैसे जिलों में ‘वेदर बम’ जैसी स्थिति पैदा कर दी है। अगले 24 से 48 घंटे इन इलाकों के लिए बेहद संवेदनशील होने वाले हैं।

भागलपुर और किशनगंज में ‘ऑरेंज अलर्ट’ का मतलब और प्रभाव

IMD ने स्पष्ट किया है कि भागलपुर, किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा, सुपौल और मधुबनी में स्थिति केवल सामान्य बारिश तक सीमित नहीं रहेगी। यहाँ ‘ऑरेंज अलर्ट’ का अर्थ है—तैयार रहें! इन जिलों में 50 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से विनाशकारी आंधी चलने की संभावना है। झमाझम बारिश के साथ बड़े पैमाने पर वज्रपात (Thunderstorm) का भी खतरा है। विशेषकर सीमांचल के इलाकों में नेपाल की पहाड़ियों से आने वाली ठंडी हवाएं इस सिस्टम को और अधिक आक्रामक बना रही हैं, जिससे अचानक बाढ़ जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।

खेती और आम जनजीवन पर पड़ने वाला असर

इस बेमौसम की झमाझम बारिश और आंधी का सबसे बुरा असर बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका है। भागलपुर के आम के बगीचों और किशनगंज के चाय के बागानों के लिए यह मौसम किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। तेज हवाएं मंजरियों और छोटे फलों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके अलावा, रबी की बची हुई फसलों और नई सब्जियों की खेती पर भी संकट के बादल हैं। शहरी इलाकों में जलजमाव और बिजली के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचने की संभावना है। कच्ची दीवारों और पुराने मकानों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।

बिहार मौसम अपडेट
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प्रशासन की मुस्तैदी और ‘ब्लैकआउट’ का डर

मौसम विभाग की चेतावनी के बाद बिहार आपदा प्रबंधन विभाग ने तुरंत एक्शन लिया है। भागलपुर और किशनगंज के जिलाधिकारियों ने आपातकालीन बैठक बुलाई है। बिजली विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि तेज आंधी के दौरान शॉर्ट सर्किट से बचने के लिए एहतियातन बिजली काटी जा सकती है, जिससे कई इलाकों में अंधेरा (Blackout) छा सकता है। NDRF और SDRF की टीमों को स्टैंडबाय पर रखा गया है। स्थानीय प्रशासन ने माइकिंग के जरिए लोगों को खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे और बिजली के खंभों से दूर रहने की हिदायत दी है।

एक्सपर्ट ओपिनियन: क्या यह ‘क्लाइमेट चेंज’ का असर है?

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च के महीने में इस तरह का तीव्र ऑरेंज अलर्ट असामान्य है। यह ग्लोबल वार्मिंग और स्थानीय वायुमंडलीय अस्थिरता का परिणाम हो सकता है। वातावरण में अचानक बढ़ी नमी ने ‘थंडर क्लाउड्स’ को बहुत तेजी से विकसित किया है। यह बदलाव न केवल जान-माल के लिए खतरा है, बल्कि आने वाले मॉनसून की अनिश्चितता का भी संकेत दे रहा है।

बिहार मौसम अपडेट
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बचाव के लिए जरूरी सावधानियां

घर के अंदर रहें: बिजली कड़कने के दौरान खिड़कियों और दरवाजों से दूर रहें।

यात्रा टालें: यदि आप भागलपुर-किशनगंज हाईवे पर हैं, तो वाहन को किसी सुरक्षित और मजबूत इमारत के पास रोकें।

इलेक्ट्रॉनिक उपकरण: वज्रपात के खतरे को देखते हुए घर के कीमती इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अनप्लग कर दें।

हेल्पलाइन नंबर: किसी भी आपात स्थिति में राज्य आपदा हेल्पलाइन नंबर 1077 पर तुरंत संपर्क करें।

बिहार में मौसम की यह लुकाछिपी अभी जारी रहने वाली है। नवीनतम अपडेट के लिए हमारे न्यूज़ पोर्टल से जुड़े रहें और सुरक्षित रहें।

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Nitish Kumar’s security lapse: बेगूसराय में हेलीपैड पर बैल का ‘तांडव’, जान बचाने के लिए फायर ब्रिगेड पर चढ़े पुलिसकर्मी

Nitish Kumar's security lapse

बेगूसराय, बिहार: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शनिवार, 14 मार्च 2026 को बेगूसराय में आयोजित ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान एक ऐसी घटना घटी जिसने न केवल प्रशासन की तैयारियों की पोल खोल दी, बल्कि सुरक्षाकर्मियों के पसीने छुड़ा दिए। सीएम के आगमन के लिए तैयार किए गए अति-संवेदनशील हेलीपैड क्षेत्र में एक बेकाबू बैल घुस गया, जिससे वहां तैनात पुलिस महकमे में भगदड़ मच गई।

हेलीपैड बना ‘अखाड़ा’, पुलिसकर्मियों को जान के लाले पड़े

घटना बेगूसराय के बीआईएडीए (BIADA) कैंपस की है, जहाँ मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर लैंड करने वाला था। सुरक्षा के कड़े इंतजामों का दावा किया जा रहा था, लेकिन लैंडिंग से कुछ समय पहले ही एक विशाल बैल सुरक्षा घेरा तोड़कर सीधे हेलीपैड के बीचों-बीच पहुँच गया। वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने जब उसे भगाने की कोशिश की, तो बैल हिंसक हो गया और उसने जवानों को ही दौड़ाना शुरू कर दिया।

हैरानी की बात यह रही कि बैल के डर से जवान अपनी ड्यूटी छोड़ इधर-उधर भागते नजर आए। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि एक पुलिसकर्मी ने अपनी जान बचाने के लिए वहां खड़ी फायर ब्रिगेड की गाड़ी की छत पर शरण ली। करीब 15-20 मिनट तक हेलीपैड पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

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सुरक्षा प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ीं

मुख्यमंत्री जैसे वीवीआईपी (VVIP) की सुरक्षा के लिए ‘नो फ्लाई ज़ोन’ और ‘क्लीन पेरिमीटर’ जैसे कड़े प्रोटोकॉल होते हैं। हेलीपैड के चारों ओर बैरिकेडिंग के बावजूद एक आवारा पशु का अंदर घुस जाना जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस की बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अगर यह घटना सीएम के हेलीकॉप्टर लैंड करने के दौरान होती, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था। अंततः, लाठियों और शोर-शराबे की मदद से बैल को परिसर से बाहर खदेड़ा गया, जिसके बाद अधिकारियों ने राहत की सांस ली।

समृद्धि यात्रा का समापन और राजनीतिक गलियारों में हलचल

नीतीश कुमार अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के तीसरे चरण के तहत बेगूसराय और शेखपुरा के दौरे पर थे। इस यात्रा का उद्देश्य विकास योजनाओं की समीक्षा करना है, लेकिन इस सुरक्षा चूक ने पूरी चर्चा का रुख मोड़ दिया है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लपकते हुए सरकार पर निशाना साधा है। नेताओं का कहना है कि जो सरकार अपने मुख्यमंत्री को सुरक्षित हेलीपैड मुहैया नहीं करा सकती, वह आम जनता की सुरक्षा क्या करेगी?

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नीतीश कुमार की सुरक्षा में बार-बार होती चूक

यह पहली बार नहीं है जब बिहार के मुख्यमंत्री की सुरक्षा में इस तरह की ढिलाई देखी गई हो।

पिछले कुछ वर्षों के इतिहास पर नजर डालें तो:

  • पटना (2025): एक युवक जेड प्लस सुरक्षा घेरा तोड़कर बंद लिफाफा देने सीएम के करीब पहुंच गया था।
  • बाढ़ (2024): सीएम के कार्यक्रम के ठीक बाद स्वागत गेट गिर गया था।
  • नालंदा (2022): जनसभा के दौरान सीएम के पास धमाका हुआ था और बख्तियारपुर में उन पर हमला भी किया गया था।

क्या सबक लेगा प्रशासन?

बेगूसराय की यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिससे बिहार पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग रहे हैं। वीवीआईपी सुरक्षा में पशु नियंत्रण (Animal Control) एक अनिवार्य हिस्सा है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। अब देखना यह है कि इस गंभीर चूक के लिए किन अधिकारियों पर गाज गिरती है और भविष्य में ऐसी शर्मिंदगी से बचने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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बिहार के नए राज्यपाल: लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन आज लेंगे शपथ, जानें क्या है उनका ‘बिहार विजन’

बिहार के नए राज्यपाल

पटना, 14 मार्च 2026: बिहार के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में आज एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। भारतीय सेना के जांबाज अधिकारी और रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन आज बिहार के 30वें राज्यपाल के रूप में शपथ लेंगे। राजभवन के राजेंद्र मंडप में आयोजित होने वाले इस गरिमामय समारोह में पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा की गई यह नियुक्ति बिहार के लिए न केवल प्रशासनिक बदलाव है, बल्कि एक अनुभवी नेतृत्व का आगमन भी है।

एक ‘स्कॉलर वॉरियर’ का बिहार आगमन

बिहार के नए राज्यपाल
बिहार के नए राज्यपाल

सैयद अता हसनैन का व्यक्तित्व केवल एक सैन्य अधिकारी तक सीमित नहीं है; उन्हें दुनिया भर में एक ‘स्कॉलर वॉरियर’ (विद्वान योद्धा) के रूप में जाना जाता है। 1952 में इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में जन्मे हसनैन एक सैन्य परिवार से आते हैं। उनके पिता मेजर जनरल सैयद महदी हसनैन ने न केवल द्वितीय विश्व युद्ध लड़ा, बल्कि भारतीय सेना की प्रतिष्ठित गढ़वाल राइफल्स की नींव रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हसनैन ने भी अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए 1974 में भारतीय सेना में प्रवेश किया और करीब 40 वर्षों तक देश की सीमाओं की रक्षा की।

कश्मीर में शांति के सूत्रधार से बिहार के राजभवन तक

हसनैन का सबसे यादगार कार्यकाल कश्मीर में रहा, जहाँ उन्होंने श्रीनगर स्थित XV कोर की कमान संभाली। उन्होंने वहां ‘हार्ट्स एंड माइंड्स’ (दिलों और दिमागों को जीतना) की जो रणनीति अपनाई, उसने घाटी में सेना और आम जनता के बीच की दूरी को कम किया। बिहार जैसे विविधतापूर्ण और चुनौतीपूर्ण राज्य के लिए उनका यह अनुभव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वे न केवल सुरक्षा बल्कि सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने में माहिर माने जाते हैं। सेवानिवृत्ति के बाद, उन्होंने नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) के सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दी हैं, जो बिहार जैसे बाढ़ प्रभावित राज्य के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट साबित होगा।

क्या होंगी नए राज्यपाल की प्राथमिकताएं?

बिहार के नए राज्यपाल के रूप में सैयद अता हसनैन की भूमिका केवल संवैधानिक प्रमुख तक सीमित नहीं रहने वाली है। जानकारों का मानना है कि उनकी निम्नलिखित प्राथमिकताएं राज्य की तस्वीर बदल सकती हैं:

आपदा प्रबंधन में क्रांतिकारी सुधार: NDMA में रहने के कारण उन्हें आपदाओं से निपटने का गहरा अनुभव है। बिहार हर साल बाढ़ की विभीषिका झेलता है; ऐसे में हसनैन की देखरेख में राज्य आपदा प्रबंधन विभाग को नई तकनीक और रणनीति मिल सकती है।

शिक्षा और कौशल विकास: सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर के चांसलर रह चुके हसनैन उच्च शिक्षा में सुधार और युवाओं के कौशल विकास पर विशेष जोर दे सकते हैं। वे शिक्षण संस्थानों में अनुशासन और शोध कार्य को बढ़ावा देने के पक्षधर रहे हैं।

कानून-व्यवस्था और सुरक्षा: एक पूर्व सैन्य जनरल होने के नाते, वे राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर रहेंगे। सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा और युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की उनकी कश्मीर वाली रणनीति यहाँ भी कारगर हो सकती है।

सामाजिक सद्भाव: बिहार की जटिल सामाजिक संरचना में हसनैन का संतुलित और समावेशी नजरिया विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास की बहाली में सहायक होगा।

शपथ ग्रहण समारोह की तैयारी और सियासी समीकरण

शपथ ग्रहण के लिए राजभवन को भव्य रूप से सजाया गया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल सहित राज्य के तमाम वीआईपी और गणमान्य अतिथि मौजूद रहेंगे। हसनैन 13 मार्च को ही पटना पहुंच चुके हैं, जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब बिहार में कई बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक बदलाव होने की संभावना है। पूर्व राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान की जगह लेने वाले हसनैन से उम्मीद की जा रही है कि वे राजभवन और सरकार के बीच एक सेतु का काम करेंगे।

बिहार के नए राज्यपाल
बिहार के नए राज्यपाल

बिहार के लिए एक नया सवेरा

लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन का राज्यपाल बनना बिहार के लिए गौरव की बात है। उनका अनुशासन, उनकी रणनीतिक सोच और उनका प्रशासनिक अनुभव निश्चित रूप से बिहार को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। बिहार की 13 करोड़ जनता को उम्मीद है कि ‘जनरल साहब’ के मार्गदर्शन में राज्य में सुशासन, शिक्षा और सुरक्षा के मानक और अधिक ऊंचे होंगे।

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जन्नायक करपूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि योजना से किसानों को मिलेंगे 9000 रुपये सालाना, पूरी खबर जानिए

जन्नायक करपूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि योजना

बिहार सरकार ने 2026 बजट में किसानों के लिए एक क्रांतिकारी योजना की घोषणा की है, जिसका नाम ‘जन्नायक करपूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि योजना‘ रखा गया है। यह योजना केंद्र की पीएम-किसान सम्मान निधि के साथ मिलकर काम करेगी और किसानों को सालाना कुल 9000 रुपये की सहायता प्रदान करेगी। बिहार के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने 3 फरवरी 2026 को विधानसभा में इसकी आधिकारिक घोषणा की, जो राज्य के 73 लाख से अधिक किसानों के लिए वरदान साबित होगी। इस योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और किसानों की आय दोगुनी करने के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संकल्प को बल मिलेगा।

योजना की मुख्य विशेषताएं और लाभ

जन्नायक करपूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि योजना
जन्नायक करपूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि योजना

जन्नायक करपूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि योजना के तहत केंद्र सरकार की पीएम-किसान योजना में मिलने वाले 6000 रुपये (तीन किश्तों में 2000-2000-2000 रुपये) के ऊपर बिहार सरकार अतिरिक्त 3000 रुपये जोड़ेगी। यानी कुल 9000 रुपये सालाना सीधे किसान के बैंक खाते में डीबीटी के जरिए ट्रांसफर होंगे। हर केंद्र किश्त के साथ राज्य से 1000 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे, जो किसानों को फसल बोने के मौसम में तत्काल राहत देगा।

यह योजना छोटे और सीमांत किसानों पर विशेष फोकस रखती है, जिनकी संख्या बिहार में 80 प्रतिशत से अधिक है। योजना का उद्देश्य फसल उत्पादन लागत को कम करना और किसानों को आर्थिक स्थिरता प्रदान करना है। पहले साल अप्रैल 2026 से किश्तें शुरू होने की संभावना है, जिससे रबी और खरीफ सीजन में किसानों को लाभ मिलेगा।

आवेदन प्रक्रिया

इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को मौजूदा पीएम-किसान योजना में पहले से रजिस्टर्ड होना जरूरी है। नए किसानों को dbtagriculture.bihar.gov.in या pmkisan.gov.in पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। अच्छी खबर यह है कि पहले से रजिस्टर्ड 73 लाख लाभार्थियों को नया फॉर्म भरने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि, e-KYC पूरा करना और भूमि रिकॉर्ड सीडिंग अपडेट कराना अनिवार्य होगा।

बिहार सरकार जनवरी 2026 में चली विशेष किसान रजिस्ट्रेशन कैंपेन के जरिए लाखों किसानों को डिजिटल आईडी प्रदान कर चुकी है। आवेदन के लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक और जमाबंदी नकल जरूरी दस्तावेज हैं। कोई आय सीमा नहीं होने से सभी छोटे किसान लाभान्वित होंगे, लेकिन बड़े जमींदारों को बाहर रखा गया है।

बजट 2026 में किसानों के लिए अन्य प्रावधान

बिहार बजट 2026 में कुल 50,000 करोड़ रुपये कृषि क्षेत्र के लिए आवंटित किए गए हैं। जन्नायक करपूरी ठाकुर योजना के अलावा फसल बीमा योजना को मजबूत किया गया है, जिसमें ऑनलाइन क्रॉप लॉस कंपेंसेशन के तहत 7500-10000 रुपये प्रति हेक्टेयर मिलेंगे। कृषि वानिकी योजना में पेड़ लगाने पर 70 रुपये प्रति पौधा का अनुदान तीन साल बाद मिलेगा। इसके साथ ड्रिप इरिगेशन और जैविक खेती पर सब्सिडी बढ़ाई गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बजट किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में मील का पत्थर है। इन योजनाओं से बिहार की जीडीपी में कृषि का योगदान 25 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।

जन्नायक करपूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि योजना
Nitish Kumar

किसानों पर प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं

यह योजना बिहार के किसानों के लिए game-changer साबित होगी, खासकर सूखा प्रभावित क्षेत्रों जैसे गया, औरंगाबाद और जहानाबाद में। इससे किसान उन्नत बीज, खाद और तकनीक खरीद सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि 9000 रुपये की सहायता से किसानों की मासिक आय में 750 रुपये की बढ़ोतरी होगी। सरकार का लक्ष्य 2027 तक सभी किसानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना है। हालांकि, समय पर किश्त वितरण और पारदर्शिता बनाए रखना चुनौती होगी। किसान भाइयों से अपील है कि अपनी e-KYC जल्द पूरी करें ताकि लाभ से वंचित न रहें।

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Girl Climbs Mobile Tower: पुलिस के फूले हाथ-पांव गोपालगंज में ‘शोले’ जैसा हाई वोल्टेज ड्रामा

Girl Climbs Mobile Tower

गोपालगंज (बिहार): प्यार में इंसान किसी भी हद तक जा सकता है, यह कहावत बिहार के गोपालगंज जिले में सच साबित हुई। यहां एक युवती ने अपने प्रेमी की पुलिस हिरासत से रिहाई सुनिश्चित करने के लिए फिल्मी अंदाज में 100 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़कर जबरदस्त हंगामा किया। घंटों चले इस ‘हाई-वोल्टेज ड्रामे’ ने न केवल ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ा दीं, बल्कि प्रशासन के भी पसीने छुड़ा दिए। इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहा है।

क्या है पूरा मामला?

यह दिलचस्प और हैरान कर देने वाला मामला गोपालगंज के भोरे थाना क्षेत्र के बनकटा जागीरदारी गांव का है। जानकारी के अनुसार, बनकटा मल गांव निवासी अर्पिता कुमारी और उसी गांव के पवन चौहान के बीच पिछले 7 सालों से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों एक-दूसरे से शादी करना चाहते थे, लेकिन उनके परिवार वाले इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे।

गुरुवार रात जब अर्पिता अचानक अपने घर से लापता हो गई, तो उसके परिजनों ने प्रेमी पवन चौहान पर अपहरण का आरोप लगाते हुए थाने में शिकायत दर्ज करा दी। पुलिस ने आनन-फानन में कार्रवाई करते हुए पवन को हिरासत में ले लिया और पूछताछ के लिए थाने ले गई।

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100 फीट ऊंचे टावर पर ‘मौत का खेल’

अपने प्रेमी की गिरफ्तारी की खबर सुनते ही अर्पिता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। शुक्रवार सुबह उसने गांव के पास स्थित एक ऊंचे मोबाइल टावर को चुना और उस पर चढ़ गई। टावर के ऊपर से चिल्लाते हुए अर्पिता ने धमकी दी, “अगर मेरे प्रेमी को तुरंत रिहा नहीं किया गया, तो मैं यहीं से कूदकर जान दे दूंगी।” युवती की इस जिद ने मौके पर मौजूद सैकड़ों लोगों और पुलिस बल को हक्का-बक्का कर दिया।

जब पुलिस को लानी पड़ी ‘हथकड़ी’ में रिहाई

पुलिस ने पहले तो युवती को समझा-बुझाकर नीचे उतारने की कोशिश की, लेकिन अर्पिता अपनी मांग पर अड़ी रही। स्थिति की गंभीरता और युवती की जान को खतरे में देख, पुलिस को झुकना पड़ा। नाटकीय घटनाक्रम के तहत, पुलिस ने हिरासत में लिए गए प्रेमी पवन चौहान को हथकड़ी लगी हालत में पुलिस जीप से टावर के नीचे लाया।

जैसे ही अर्पिता ने नीचे अपने प्रेमी को देखा, उसका गुस्सा शांत हुआ। पवन और पुलिस के आश्वासन के बाद अर्पिता धीरे-धीरे नीचे उतरी। नीचे आते ही पुलिस ने उसे सुरक्षित अपनी हिरासत में लिया और मेडिकल जांच के लिए भेजा।

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‘शोले’ की ‘बसंती’ से हो रही तुलना

सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियो को लोग धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की मशहूर फिल्म ‘शोले’ से जोड़कर देख रहे हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि फिल्म में ‘वीरू’ पानी की टंकी पर चढ़ा था, जबकि असल जिंदगी की इस कहानी में ‘बसंती’ ने मोबाइल टावर का सहारा लिया। इंस्टाग्राम, ट्विटर और यूट्यूब पर लोग तरह-तरह के कमेंट्स कर रहे हैं और इसे बिहार की सबसे अनोखी प्रेम कहानियों में से एक बता रहे हैं।

पुलिस का बयान और आगे की कार्रवाई

स्थानीय पुलिस के अनुसार, यह मामला पूरी तरह से प्रेम प्रसंग और पारिवारिक विवाद से जुड़ा है। प्रेमी पर अपहरण का जो आरोप लगाया गया था, युवती के सुरक्षित मिलने के बाद उसकी स्थिति बदल गई है। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर रही है और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए काउंसलिंग का सहारा ले रही है। प्रशासन का कहना है कि कानून के दायरे में रहकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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Bihar LPG Price Hike: पटना से लेकर गांव तक गैस के दाम में आग! बिहार में आम आदमी को रुलाने वाले 3 बड़े कारण

Bihar LPG Price Hike

महंगाई की मार से बिहार का आम आदमी पहले ही परेशान था, लेकिन अब गैस सिलेंडरों के बढ़ते दाम और सप्लाई की कमी ने जले पर नमक छिड़कने का काम किया है। दुनिया के एक कोने (मिडिल-ईस्ट) में चल रहे युद्ध का सीधा असर अब पटना की सड़कों और बिहार के छोटे-बड़े होटलों तक पहुंच गया है।

कमर्शियल एलपीजी (19kg) के दामों में आए हालिया उछाल ने रेस्टोरेंट मालिकों से लेकर सड़क किनारे ठेला लगाने वालों तक की कमर तोड़ दी है। आज ‘ApniVani’ के इस डीप एनालिसिस में हम समझेंगे कि आखिर बिहार में गैस की कीमतों में अचानक यह आग क्यों लगी है और इसके पीछे के 3 सबसे बड़े और कड़वे सच क्या हैं।

Bihar LPG Price Hike
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होटलों और छोटे व्यापारियों पर डबल मार

बिहार में चाहे पटना का कोई बड़ा रेस्टोरेंट हो या नुक्कड़ पर लिट्टी-चोखा और समोसे की दुकान, हर जगह कमर्शियल एलपीजी (19kg सिलेंडर) का इस्तेमाल होता है।

हाल ही में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने कमर्शियल सिलेंडर पर दी जाने वाली छूट खत्म कर दी है और बेस प्राइस में भी भारी इजाफा किया है। इसके चलते पटना में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत अब 2000 रुपये के आंकड़े को पार कर गई है (अलग-अलग जिलों में ट्रांसपोर्टेशन के हिसाब से रेट थोड़ा बदल सकता है)। इसका सीधा असर यह हो रहा है कि होटलों का मेन्यू महंगा हो रहा है और कुछ छोटे दुकानदारों को तो अपना काम कुछ दिनों के लिए बंद करने की नौबत आ गई है।

Iran and Israel War
Credit -TRENDS Research & Advisory

ईरान-इजरायल युद्ध: दुनिया का संकट, बिहार का नुकसान

अगर आप सोच रहे हैं कि सिर्फ तेल कंपनियां दाम बढ़ा रही हैं, तो कहानी का एक बड़ा हिस्सा आप मिस कर रहे हैं। इस महंगाई की असली जड़ें मिडिल-ईस्ट में चल रहे ‘ईरान-इजरायल’ युद्ध में हैं।

भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% एलपीजी बाहर से मंगाता है, जिसका एक बहुत बड़ा हिस्सा मिडिल-ईस्ट से होते हुए समुद्री रास्ते (Strait of Hormuz) से आता है। इस वक्त युद्ध के कारण वहां जहाजों पर हमले हो रहे हैं, जिससे सप्लाई चेन बुरी तरह टूट गई है। पीछे से माल (गैस) आ ही नहीं रहा है, और जब मार्केट में गैस की सप्लाई कम होगी और डिमांड ज्यादा होगी, तो जाहिर सी बात है कि बिहार तक आते-आते इसके दाम आसमान छूने लगेंगे।

Bihar LPG Price Hike
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घरेलू गैस (14.2kg) और आम आदमी का बजट

सिर्फ कमर्शियल सिलेंडर ही नहीं, आम आदमी के घर में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमतों में भी बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है।

हालांकि सरकार ने चुनाव और आम जनता की नाराजगी से बचने के लिए घरेलू गैस के दामों को काफी हद तक कंट्रोल करने की कोशिश की है, लेकिन इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल और गैस की कीमतें जिस तरह से बढ़ रही हैं, उससे यह तय माना जा रहा है कि घरेलू बजट भी जल्द ही बिगड़ने वाला है। इसके साथ ही ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ने से खाने के तेल और दालों जैसी रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बिहार के लोकल मार्केट्स में तेज होने लगे हैं।

ApniVani की बात

यह संकट साफ तौर पर यह दिखाता है कि आज की ग्लोबल दुनिया में जब बाहर कहीं सप्लाई चेन टूटती है, तो उसकी सीधी मार हमारे और आपके किचन पर पड़ती है। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात सामान्य नहीं होते, तब तक बिहार के लोगों और होटल मालिकों को इस महंगाई का डटकर सामना करना ही पड़ेगा।

आपकी राय: गैस सिलेंडर के बढ़ते दामों का आपके घर के बजट या आपके फेवरेट होटल के खाने पर कितना असर पड़ा है? अपनी राय और अपने शहर का हाल हमारे इंस्टाग्राम पेज @9vaniapni पर आकर जरूर साझा करें!

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बिहार Next CM: चिराग पासवान बन सकते है बिहार के मुख्यमंत्री, जानिए दिग्गज नेता की इच्छा ?

चिराग पासवान

बिहार की राजनीति में इन दिनों एक नई लहर देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं और राज्य के नेतृत्व में संभावित बदलाव ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इसी बीच, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के कद्दावर नेता और सांसद अरुण भारती के एक हालिया बयान ने आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से इच्छा जाहिर की है कि चिराग पासवान को बिहार का Next CM बनना चाहिए। यह बयान न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भर रहा है, बल्कि एनडीए गठबंधन के भीतर भी नए समीकरणों को जन्म दे रहा है।

बिहार की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन की आहट क्यों?

बिहार में मुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस तब गहराया जब नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरें पुख्ता होने लगीं। एनडीए गठबंधन में भाजपा, जदयू और एलजेएपी (आरवी) के बीच अब इस बात को लेकर मंथन जारी है कि यदि नीतीश कुमार केंद्र की राजनीति में जाते हैं, तो बिहार की कमान किसके हाथ में होगी। 2025 के विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद चिराग पासवान की लोकप्रियता में जबरदस्त उछाल आया है, जिससे उनके समर्थकों का मानना है कि अब ‘युवा नेतृत्व’ का समय आ गया है।

Nitish Kumar and chirag Paswan
Nitish Kumar and chirag Paswan

सांसद अरुण भारती का बयान और इसके मायने

एलजेएपी (आरवी) के सांसद अरुण भारती ने मीडिया से बातचीत के दौरान अपनी दिल की बात रखते हुए कहा कि वह चिराग पासवान को बिहार के मुखिया के रूप में देखना चाहते हैं। भारती का कहना है कि चिराग के पास बिहार को विकसित राज्य बनाने का विजन है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय एनडीए के शीर्ष नेतृत्व द्वारा ही लिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारती का यह बयान महज एक ‘निजी राय’ नहीं है, बल्कि यह पार्टी की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके जरिए वे चिराग को राज्य के सबसे बड़े चेहरे के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।

‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ और चिराग की बढ़ती लोकप्रियता

चिराग पासवान का ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ विजन युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है। हाल ही में पटना और शेखपुरा की सड़कों पर लगे पोस्टरों में नारे लिखे गए थे- “न दंगा हो न फसाद हो, बिहार का सीएम सिर्फ चिराग हो।” कार्यकर्ताओं का यह उत्साह यह दर्शाता है कि जमीन पर चिराग पासवान के प्रति एक सकारात्मक लहर है। पासवान वोट बैंक के साथ-साथ सवर्णों और युवाओं के बीच उनकी स्वीकार्यता उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाती है।

क्या भाजपा और जदयू चिराग के नाम पर सहमत होंगे?

भले ही मांग तेज हो, लेकिन एनडीए के भीतर समीकरण थोड़े जटिल हैं। भाजपा वर्तमान में बिहार में सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है और वह भी अपना मुख्यमंत्री बनाने की इच्छुक है। वहीं, जदयू का अपना आधार है। चिराग पासवान ने हमेशा खुद को प्रधानमंत्री मोदी का ‘हनुमान’ कहा है, लेकिन क्या हनुमान को राम (भाजपा) मुख्यमंत्री की गद्दी सौंपेंगे? यह एक बड़ा सवाल है। हालांकि, बिहार की वर्तमान स्थिति को देखते हुए, यदि भाजपा को एक सर्वमान्य और युवा चेहरे की तलाश होगी, तो चिराग पासवान की दावेदारी को नजरअंदाज करना मुश्किल होगा।

चिराग पासवान
चिराग पासवान

राजनीतिक विशेषज्ञों का विश्लेषण: 2026 का रोडमैप

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चिराग पासवान 2026 तक बिहार की राजनीति के केंद्र बिंदु बने रहेंगे। यदि गठबंधन की मजबूरियां आड़े नहीं आईं, तो चिराग पासवान बिहार के अगले मुख्यमंत्री के रूप में एक मजबूत विकल्प हैं। उनकी मां रीना पासवान पहले ही 2030 तक उनके सीएम बनने की भविष्यवाणी कर चुकी हैं, लेकिन बदलती परिस्थितियों ने इस समयसीमा को काफी करीब ला दिया है।

बिहार की जनता अब विकास और स्थिरता चाहती है। चिराग पासवान का आधुनिक दृष्टिकोण और जुझारू व्यक्तित्व उन्हें एक योग्य उम्मीदवार बनाता है। दिग्गज नेता अरुण भारती की इच्छा ने एक बहस तो छेड़ दी है, लेकिन क्या चिराग सच में बिहार के मुख्यमंत्री बनेंगे, यह भविष्य के गर्भ में है।

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बिहार में बर्ड फ्लू अलर्ट: 6 हजार मुर्गियां कुल्हाड़ी से मारकर दफनाईं, जानें पूरी डिटेल

बिहार में बर्ड फ्लू

बिहार में बर्ड फ्लू का खतरा बढ़ गया है। राज्य के कई जिलों में पक्षियों में हाईली पैथोजेनिक एवियन इन्फ्लुएंजा (HPAI) H5N1 वायरस की पुष्टि हुई है, जिसके चलते 6 हजार से अधिक मुर्गियों को कुल्हाड़ी से मारकर दफना दिया गया। यह घटना पोल्ट्री फार्मर्स के लिए बड़ा झटका है और आम लोगों में दहशत फैला रही है। बिहार सरकार ने अलर्ट जारी कर पोल्ट्री फार्म बंद करने और सैनिटाइजेशन के आदेश दिए हैं। बर्ड फ्लू बिहार अपडेट के तहत जानें कैसे फैल रहा है यह वायरस और क्या हैं बचाव के उपाय।

बर्ड फ्ल्लू का प्रकोप: कहां-कहां फैला संक्रमण?

बिहार में बर्ड फ्लू अलर्ट
बिहार में बर्ड फ्लू अलर्ट

बिहार बर्ड फ्लू अलर्ट के केंद्र में खगड़िया, समस्तीपुर और मुजफ्फरपुर जिले हैं। खगड़िया के एक बड़े पोल्ट्री फार्म में शुरुआत हुई, जहां सैकड़ों मुर्गियां अचानक मरने लगीं। जांच में बर्ड फ्लू वायरस पाया गया, जिसके बाद 6 हजार मुर्गियां मारकर दफनाई गईं। समस्तीपुर में भी दो फार्म प्रभावित हुए, जबकि मुजफ्फरपुर में जंगली पक्षियों से संक्रमण फैलने का शक है। बिहार पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने एलिसा टेस्ट से वायरस की पुष्टि की। पिछले साल के मुकाबले इस बार संक्रमण तेजी से फैला, जिससे पोल्ट्री इंडस्ट्री को करोड़ों का नुकसान हो रहा है। एवियन इन्फ्लुएंजा बिहार में अब तक 20 से ज्यादा फार्म प्रभावित हो चुके हैं।

बर्ड फ्लू लक्षण: मुर्गियों से इंसानों तक खतरा

बर्ड फ्लू के लक्षण मुर्गियों में साफ दिखते हैं – सांस लेने में तकलीफ, सिर झुकना, नाक से पानी बहना, अंडे कम उत्पादन और अचानक मौत। बिहार में बर्ड फ्लू 2026 के मामलों में 90% मुर्गियां 24 घंटे में मर गईं। इंसानों के लिए जोखिम कम है, लेकिन संक्रमित पक्षियों के संपर्क से बुखार, खांसी, सांस फूलना जैसे लक्षण हो सकते हैं। WHO के अनुसार, H5N1 वायरस इंसानों में दुर्लभ मामलों में घातक साबित हुआ है। बिहार में अब तक कोई मानव मामला रिपोर्ट नहीं हुआ, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने हेल्थ अलर्ट जारी किया है। ग्रामीण इलाकों में मुर्गी पालन करने वालों को मास्क पहनने और हाथ धोने की सलाह दी गई है।

सरकारी कदम: क्वारंटाइन और वैक्सीनेशन ड्राइव

बिहार सरकार ने तुरंत एक्शन लिया। पशुपालन विभाग ने प्रभावित जिलों में 10 किमी दायरे में पोल्ट्री फार्म बंद कर दिए। 6 हजार मुर्गियां मार डाली गईं ताकि वायरस न फैले। केंद्रीय टीम पटना पहुंची, जो सैंपल जांच कर रही है। वैक्सीनेशन अभियान शुरू हो गया, जिसमें लाखों पक्षियों को टीका लगाया जा रहा। बर्ड फ्लू बिहार अपडेट में डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने कहा कि मांस बिक्री पर सख्ती बरती जाएगी। बाजारों में चिकन बिक्री 50% घटी, जिससे दाम आसमान छू रहे हैं। एनिमल हसबैंडरी मंत्रालय ने 5 करोड़ का राहत पैकेज घोषित किया।

पोल्ट्री फार्मर्स का दर्द: आर्थिक नुकसान और डर

बिहार में बर्ड फ्लू अलर्ट
बिहार में बर्ड फ्लू अलर्ट

बिहार के पोल्ट्री फार्मर्स पर दोहरी मार पड़ी। एक फार्मर ने बताया कि 6 हजार मुर्गियों का नुकसान 20 लाख का हुआ। ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही, क्योंकि लाखों लोग मुर्गी पालन पर निर्भर हैं। बर्ड फ्लू अलर्ट से दूध, अंडे की कीमतें भी बढ़ीं। किसान संगठनों ने मुआवजा बढ़ाने की मांग की। विशेषज्ञों का कहना है कि साफ-सफाई और बायोसिक्योरिटी से भविष्य में बचाव संभव। बिहार में बर्ड फ्लू 2026 का यह प्रकोप 2018 के बाद सबसे बड़ा है।

बचाव के उपाय: क्या करें आम लोग?

बर्ड फ्लू से बचने के लिए पूरी तरह पका चिकन खाएं, कच्चा मांस न छुएं। मुर्गियों के परिंदे न रखें और सैनिटाइजेशन रखें। बिहार बर्ड फ्लू अलर्ट में सरकार ने हॉटलाइन नंबर जारी किए। अगर लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। मौसम बदलने से वायरस तेज फैलता है, इसलिए सतर्क रहें। यह संकट जल्द खत्म होगा, लेकिन सावधानी बरतना जरूरी।

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नीतीश कुमार बिहार में खत्म करेंगे शराबबंदी? कानून के खात्मे के लिए गढ़े जा रहे हैं नए तर्क, क्या बदल जाएगी बिहार की तस्वीर?

नीतीश कुमार

पटना: बिहार की राजनीति में इन दिनों एक ही सवाल सबसे ऊपर तैर रहा है— क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने सबसे ‘पसंदीदा’ लेकिन विवादित शराबबंदी कानून को वापस लेने वाले हैं? करीब एक दशक से बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी अब एक ऐसे चौराहे पर खड़ी है, जहां उनके अपने ही साथी और विपक्ष दोनों मिलकर इस कानून की चूलें हिलाने में लगे हैं। हालांकि, इन सबके बीच सीएम नीतीश कुमार की चुप्पी और उनकी ‘बेपरवाही’ कई बड़े राजनीतिक संकेत दे रही है।

एनडीए के अंदर से उठती बगावती आवाजें

नीतीश कुमार
Sharab band by Nitish Kumar

कभी जिस कानून का समर्थन बिहार की सभी पार्टियों ने एक सुर में किया था, आज उसी कानून पर एनडीए (NDA) के भीतर दरारें दिखने लगी हैं। बीजेपी के कई कद्दावर नेता और विधायक अब दबी जुबान में नहीं, बल्कि खुलेआम यह कहने लगे हैं कि शराबबंदी कानून बिहार में बुरी तरह विफल रहा है। तर्क यह दिया जा रहा है कि कानून कागजों पर तो सख्त है, लेकिन जमीन पर ‘होम डिलीवरी’ का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। बीजेपी विधायकों का कहना है कि इस कानून ने पुलिस को भ्रष्टाचार का नया अड्डा दे दिया है और राज्य को हजारों करोड़ के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

राजस्व का घाटा और समानांतर अर्थव्यवस्था

आंकड़ों की बात करें तो बिहार को हर साल करीब 4,000 से 5,000 करोड़ रुपये के राजस्व का सीधा नुकसान हो रहा है। जानकारों का मानना है कि पिछले 10 सालों में यह आंकड़ा 40,000 करोड़ को पार कर चुका है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि बिहार में शराब मिलनी बंद नहीं हुई है। एक ‘समानांतर अर्थव्यवस्था’ (Parallel Economy) खड़ी हो गई है, जहां माफिया और सिंडिकेट सक्रिय हैं। तर्क यह गढ़ा जा रहा है कि जो पैसा बिहार के विकास में लगना चाहिए था, वह अब शराब माफियाओं की जेब में जा रहा है। यही वजह है कि अब मांग उठ रही है कि गुजरात मॉडल की तर्ज पर बिहार में भी कुछ रियायतें दी जाएं।

क्या नीतीश कुमार वाकई बेपरवाह हैं?

इतने दबाव के बावजूद नीतीश कुमार का रुख अब भी अटल नजर आता है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश इस कानून को अपने ‘विरासत’ (Legacy) के तौर पर देखते हैं। उनके करीबियों का कहना है कि सीएम को लगता है कि शराबबंदी ने ग्रामीण इलाकों में महिलाओं का वोट बैंक उनके पक्ष में मजबूती से खड़ा किया है। जेडीयू का स्पष्ट स्टैंड है कि सामाजिक सुधार राजस्व से कहीं ज्यादा कीमती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश अपनी इस ‘हठ’ को बरकरार रख पाएंगे? या फिर गठबंधन को बचाने के लिए उन्हें बीच का रास्ता निकालना होगा?

कानून की समीक्षा या सिर्फ सियासी दांव?

नीतीश कुमार
नीतीश कुमार

हाल के दिनों में ‘समीक्षा’ शब्द बिहार की राजनीति में सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है। विपक्ष का आरोप है कि शराबबंदी के नाम पर गरीबों को जेल में ठूंसा जा रहा है, जबकि बड़े तस्कर खुलेआम घूम रहे हैं। अदालतों पर बढ़ते बोझ और जहरीली शराब से होती मौतों ने सरकार को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है। अब तर्क दिया जा रहा है कि कानून को पूरी तरह खत्म करने के बजाय, इसकी व्यावहारिक समीक्षा की जाए ताकि पर्यटन और उद्योग जगत को राहत मिल सके।

क्या होगा अगला कदम?

बिहार में शराबबंदी सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक हथियार बन चुका है। नीतीश कुमार जानते हैं कि अगर वे इसे वापस लेते हैं, तो विपक्ष उन्हें ‘यू-टर्न’ का उलाहना देगा, और अगर जारी रखते हैं, तो सहयोगियों की नाराजगी झेलनी पड़ेगी। फिलहाल, सीएम नीतीश की बेपरवाही यह दर्शाती है कि वे किसी भी दबाव में झुकने वाले नहीं हैं, लेकिन राजनीति में ‘कभी नहीं’ जैसा कुछ नहीं होता। आने वाले समय में विधानसभा के भीतर और बाहर होने वाली बहसें तय करेंगी कि बिहार का यह ड्राई स्टेट अपनी पहचान बरकरार रखेगा या फिर सुरा की वापसी होगी।

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