Patna Police का ‘ऑपरेशन क्लीन’: 80 लाख की नशीली सिरप के साथ अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़, 6 गिरफ्तार

Patna

बिहार की राजधानी Patna में नशीली दवाओं के सौदागरों के खिलाफ पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी चोट की है। Patna Police की विशेष टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए ‘खांटी सिरप’ (कोडीन युक्त कफ सिरप) की एक विशाल खेप पकड़ी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की कीमत लगभग 80 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस ने इस मामले में गिरोह के मुख्य सरगना सहित 6 शातिर तस्करों को दबोचने में कामयाबी हासिल की है। यह पूरी कार्रवाई पटना सिटी के मालसलामी और दीदारगंज थाना क्षेत्रों में अंजाम दी गई।

Patna Police
Patna Police

डाक पार्सल और मसालों की आड़ में ‘सफेद जहर’ की सप्लाई

तस्करों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए तस्करी का बेहद शातिर तरीका अपनाया था। जब्त की गई सिरप की बोतलों को डाक विभाग के फर्जी पार्सल और तेज पत्तों की बोरियों के नीचे छिपाकर लाया जा रहा था। पुलिस ने छापेमारी के दौरान कुल 4485 लीटर प्रतिबंधित सिरप बरामद की, जो 289 अलग-अलग कार्टन में पैक थी। जांच में पता चला है कि यह खेप हिमाचल प्रदेश की एक फार्मा कंपनी से फर्जी कागजातों के जरिए मंगवाई गई थी और इसे पटना के स्थानीय बाजारों के साथ-साथ सीमावर्ती जिलों में सप्लाई किया जाना था।

सरगना ‘गन्नी’ सहित 6 तस्कर पुलिस की गिरफ्त में

इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता गिरोह के मास्टरमाइंड सूर्यप्रकाश उर्फ ‘गन्नी’ की गिरफ्तारी है। गन्नी पटना के कदमकुआं इलाके का रहने वाला है और लंबे समय से शहर में नशीली दवाओं के वितरण नेटवर्क को नियंत्रित कर रहा था। उसके साथ गिरफ्तार किए गए अन्य पांच आरोपियों में ट्रक ड्राइवर और लोकल एजेंट शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इन आरोपियों का जाल बिहार के कटिहार, सहरसा और वैशाली तक फैला हुआ था। ये लोग हिमाचल से माल मंगवाकर उसे ऊंचे दामों पर युवाओं और नशेड़ियों को बेचते थे।

हिमाचल प्रदेश से बिहार तक जुड़ा तस्करी का नेटवर्क

वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि बिहार में नशीली दवाओं की जड़ें अन्य राज्यों से जुड़ी हैं। डीएसपी डॉ. गौरव कुमार ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि गिरोह के सदस्य हिमाचल प्रदेश के इंडस्ट्रियल एरिया से सीधे संपर्क में थे। ट्रक (टाटा 407) और अन्य वाणिज्यिक वाहनों का उपयोग कर वे चेकपोस्टों को पार कर जाते थे क्योंकि ऊपर से डाक पार्सल या किराने का सामान लदा होता था। पुलिस अब उन कंपनियों की भी जांच कर रही है जहां से यह सिरप बिना वैध लाइसेंस के रिलीज किया गया था।

युवाओं के भविष्य पर प्रहार: बिहार में ‘खांटी’ का बढ़ता चलन

बिहार में शराबबंदी के बाद से कोडीन युक्त कफ सिरप (जिसे स्थानीय भाषा में ‘खांटी’ कहा जाता है) की मांग नशे के विकल्प के रूप में बढ़ी है। यह न केवल स्वास्थ्य के लिए घातक है, बल्कि युवाओं को अपराध की ओर भी धकेल रहा है। पटना पुलिस की इस कार्रवाई से ड्रग माफियाओं की कमर टूटी है। एसएसपी ने स्पष्ट किया है कि ‘मिशन सुरक्षा’ के तहत शहर के स्कूल-कॉलेजों और झुग्गी बस्तियों में सक्रिय छोटे डीलरों पर भी नकेल कसी जाएगी।

Patna Police
Patna Police का ‘ऑपरेशन क्लीन’

पुलिस की अपील

पटना पुलिस की यह उपलब्धि नशा मुक्त बिहार के संकल्प की ओर एक बड़ा कदम है। पुलिस ने एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में छापेमारी जारी है। पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उनके आस-पास ऐसी कोई संदिग्ध गतिविधि या नशीली दवाओं की बिक्री दिखे, तो तुरंत पुलिस हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें।

Read more

Darbhanga Bird Flu News : 10,000 कौओं की मौत के बाद H5N1 की पुष्टि, क्या इंसानों को है खतरा?

Bird Flu

बिहार के दरभंगा जिले से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। पिछले कुछ दिनों से आसमान से गिरते मृत कौओं के रहस्य से अब पर्दा उठ गया है। जांच रिपोर्ट में आधिकारिक तौर पर H5N1 वायरस (Bird Flu) की पुष्टि हो गई है। प्रशासन ने पूरे जिले में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

आखिर क्या है पूरा मामला?

Darbhanga Bird Flu

दरभंगा के नगर निगम क्षेत्र (वार्ड नंबर 31) स्थित भिगो श्मशान घाट (मुक्तिधाम) पिछले कुछ दिनों से पक्षियों के कब्रिस्तान में तब्दील हो गया था। स्थानीय लोगों ने देखा कि अचानक बड़ी संख्या में कौए पेड़ से गिरकर मर रहे हैं। देखते ही देखते यह संख्या सैकड़ों से हजारों में पहुंच गई। समाजसेवी संस्थाओं और स्थानीय पार्षदों के हस्तक्षेप के बाद जब सैंपल भोपाल की लैब भेजे गए, तो रिपोर्ट ने सबकी नींद उड़ा दी—यह खतरनाक एवियन इन्फ्लूएंजा (H5N1) था।

मौत का आंकड़ा और प्रशासनिक हलचल

शुरुआती सरकारी आंकड़ों में एक हजार कौओं की मौत की बात कही गई थी, लेकिन स्थानीय सूत्रों और रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक लगभग 10,000 पक्षी अपनी जान गंवा चुके हैं। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए:

• मुक्तिधाम परिसर के पास जेसीबी से गहरे गड्ढे खुदवाकर मृत पक्षियों को वैज्ञानिक तरीके से दफनाया है।

• संक्रमित क्षेत्र के 5 किलोमीटर के दायरे को ‘सेंसिटिव जोन’ घोषित कर दिया गया है।

• अगले आदेश तक इस क्षेत्र में पोल्ट्री (मुर्गा-बत्तख) की बिक्री और परिवहन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

क्या इंसानों के लिए भी है खतरा?

H5N1 वायरस मुख्य रूप से पक्षियों को प्रभावित करता है, लेकिन यह इंसानों में भी फैल सकता है। यदि कोई व्यक्ति संक्रमित पक्षी के सीधे संपर्क में आता है या उसके मल-मूत्र के संपर्क में आता है, तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। दरभंगा प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी मृत पक्षी को हाथ न लगाएं।

बर्ड फ्लू से बचाव के रामबाण उपाय

अगर आप दरभंगा या इसके आस-पास के क्षेत्रों में रह रहे हैं, तो ये सावधानियां जरूर बरतें:

पक्षियों से दूरी: छत, मुंडेर या सड़क पर कोई मृत पक्षी दिखे तो उसे छुएं नहीं। इसकी सूचना तुरंत हेल्पलाइन या पशुपालन विभाग को दें।

चिकन और अंडा: अगर आप मांसाहारी हैं, तो मांस और अंडे को 70°C से ऊपर अच्छी तरह पकाकर ही खाएं। अधपका मांस बिल्कुल न लें।

साफ-सफाई: बाहर से आने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं। सैनिटाइजर का प्रयोग करें और भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनें।

Darbhanga Bird Flu

पोल्ट्री फार्म से दूरी: फिलहाल कुछ दिनों के लिए पोल्ट्री फार्म या चिड़ियाघर जैसी जगहों पर जाने से बचें।

लक्षणों पर नजर: यदि आपको अचानक तेज बुखार, खांसी, गले में खराश या सांस लेने में तकलीफ महसूस हो, तो इसे सामान्य सर्दी न समझें और तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

दरभंगा में बर्ड फ्लू की दस्तक एक गंभीर चेतावनी है। प्रशासन अपना काम कर रहा है, लेकिन नागरिकों की सतर्कता ही इस वायरस की चेन को तोड़ने में मदद करेगी। अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं का पालन करें।

Read more

Kaimur Shamed: सरस्वती विसर्जन में ‘अश्लीलता’ रोकने की सजा! बेटी को बीच सड़क पीटा, तमाशबीन बनाते रहे वीडियो (3 कड़वे सवाल)

Kaimur shamed in Saraswati puja

आज बिहार का कैमुर शर्मिंदा हुआ (Kaimur Shamed) है। रामगढ़ से जो खबर आई है, उसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। हम उस देश में रहते हैं जहाँ नारी को ‘देवी’ मानकर पूजा जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि उसी देवी (माँ सरस्वती) के विसर्जन जुलूस में एक ‘बेटी’ को जानवरों की तरह पीटा जाता है।
सिर्फ सोचकर ही गुस्सा आता है। उस बहादुर लड़की का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने डीजे (DJ) पर बज रहे गंदे और अश्लील गानों का विरोध किया था।

शनिवार की रात रामगढ़ के नरहन गांव में जो हुआ, वह कोई साधारण मारपीट नहीं थी। वह इस बात का सबूत है कि हम ‘भक्ति’ के नाम पर ‘गुंडागर्दी’ के दौर में जी रहे हैं।

Kaimur shamed police

क्या है पूरा मामला? (The Shameful Incident)

घटना शनिवार रात (Saturday Night) की है। रामगढ़ थाना क्षेत्र के नरहन गांव (Narhan Village) में सरस्वती पूजा के बाद मूर्ति विसर्जन का जुलूस निकाला जा रहा था।
कायदे से यह श्रद्धा का माहौल होना चाहिए था, लेकिन डीजे पर कान फोड़ने वाले वॉल्यूम में बेहद अश्लील और जातिसूचक भोजपुरी गाने बज रहे थे।
गांव की ही एक युवती से यह बर्दाश्त नहीं हुआ। उसने जुलूस रोककर कहा— “माता के विसर्जन में ऐसे गंदे गाने मत बजाओ, इसे बंद करो।”

डीजे बंद होना तो दूर, जुलूस में शामिल कुछ मनचलों और अराजक तत्वों का ‘अहं’ (Ego) हर्ट हो गया। उन्हें लगा कि एक लड़की उन्हें रोकने वाली कौन होती है?

विरोध की सजा: छेड़छाड़ और हैवानियत

सबसे बड़ी बात यह है कि समझाने के बजाय, उन दरिंदों ने युवती को बीच सड़क पर घेर लिया। पहले उसे भद्दी-भद्दी गालियां दी गईं। जब उसने विरोध किया, तो उसके साथ छेड़छाड़ (Molestation) शुरू कर दी गई। और जब वह खुद को बचाने के लिए चीखी, तो लाठी-डंडों, लात और घूंसों से उसकी बेरहमी से पिटाई की गई।
उसे तब तक मारा गया जब तक वह अधमरी होकर गिर नहीं गई। फिलहाल वह भभुआ सदर अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है।

‘नपुंसक’ भीड़: जो सिर्फ वीडियो बनाती रही

इस घटना का सबसे डरावना पहलू हमलावर नहीं, बल्कि वहां मौजूद भीड़ थी।
जिस वक्त उस बेटी को पीटा जा रहा था, वहां सैकड़ों लोग मौजूद थे। लेकिन किसी का हाथ उसे बचाने के लिए नहीं उठा। सबके हाथ में मोबाइल था। सब वीडियो (Video) बना रहे थे ताकि सोशल मीडिया पर ‘वायरल’ कर सकें।

सोचिए, उस बेटी पर क्या गुजरी होगी जब उसने देखा होगा कि उसके अपने गांव वाले, उसके पड़ोसी—सब तमाशबीन बनकर रील बना रहे हैं? यह साबित करता है कि स्मार्टफोन्स ने हमें स्मार्ट तो बना दिया, लेकिन हमारी ‘इंसानियत’ को मार दिया है।

Crowd of Saraswati puja kaimur shamed

भक्ति या गुंडागर्दी? (Devotion vs Hooliganism)

आज हमें यह सवाल पूछना ही होगा— सरस्वती पूजा में ‘चोली-घाघरा’ वाले गानों का क्या काम?
माँ सरस्वती ‘विद्या और संगीत’ की देवी हैं। उनके विसर्जन में शराब पीकर, डीजे पर अश्लील गानों पर नाचना कौन सी भक्ति है? बिहार और यूपी में यह एक बीमारी बन चुकी है।
प्रशासन की नाकामी: सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स हैं कि तेज आवाज़ और अश्लील गाने नहीं बजेंगे, लेकिन पुलिस अक्सर जुलूस के नाम पर आंखें मूंद लेती है। अगर पुलिस पहले ही सख्त होती, तो नरहन गांव में उन गुंडों की इतनी हिम्मत नहीं होती।

पुलिस एक्शन: अब तक क्या हुआ?

घटना के तूल पकड़ते ही प्रशासन की नींद टूटी है।
SP और DM की दौड़: मामले की गंभीरता को देखते हुए कैमूर के डीएम और एसपी खुद थाने पहुंचे।
FIR दर्ज: पुलिस ने पीड़िता के बयान पर एफआईआर दर्ज कर ली है।
गिरफ्तारी: वीडियो फुटेज के आधार पर एक मुख्य आरोपी को हिरासत में लिया गया है और बाकी की तलाश जारी है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या गिरफ्तारी से उस बेटी का दर्द कम हो जाएगा? क्या उसके मन से वह खौफ निकलेगा?

कब सुधरेगा समाज?

कैमूर की यह घटना (Kaimur Horror) सिर्फ एक न्यूज़ नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। अगर आज हम चुप रहे, तो कल यह हमारे घर की बेटी के साथ भी हो सकता है।
उस लड़की ने जो किया, वह ‘साहस’ था, और समाज ने जो किया, वह ‘कायरता’ थी। हमें प्रशासन से मांग करनी चाहिए कि आरोपियों को ऐसी सजा मिले कि अगली बार कोई डीजे पर अश्लीलता फैलाने से पहले सौ बार सोचे।
हमारा सवाल आपसे:
क्या विसर्जन जुलूसों में डीजे (DJ) पूरी तरह बैन हो जाना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर दें।

Read more

Katihar Tea Stall News : जहाँ चाय की चुस्की के साथ परोसी जा रही थी ‘गंदी सर्विस’, जानें क्या है पूरा मामला!

Katihar Tea Stall News

Katihar Tea Stall News: बिहार के कटिहार जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। अक्सर लोग थकान मिटाने के लिए चाय की दुकान पर जाते हैं, लेकिन कटिहार की इस दुकान में चाय तो बस एक बहाना था, असली खेल तो दुकान के पीछे के कमरों में चल रहा था।

अदरक कूटने की आड़ में ‘राज’ दबाने का धंधा

कहते हैं कि यहाँ की चाय में अदरक कुछ ज्यादा ही कूटकर डाली जाती थी, लेकिन पुलिसिया जांच और ग्रामीणों के खुलासे ने बताया कि यहाँ अदरक नहीं, बल्कि ‘राज’ कूटकर दबाए जाते थे। कटिहार के एक गांव में स्थित इस चाय की दुकान की आड़ में पिछले 5 सालों से जिस्मफरोशी (Prostitution Racket) का काला कारोबार धड़ल्ले से चल रहा था।

Katihar Tea stall back room

कैसे हुआ इस ‘गंदी बात’ का खुलासा?

इस पूरे मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब स्थानीय ग्रामीणों को दुकान की गतिविधियों पर शक हुआ। गुरुवार को ग्रामीणों ने अचानक दुकान पर धावा बोल दिया।

  • हैरान करने वाला नजारा: ग्रामीणों ने दुकान के अंदर बने एक गुप्त कमरे से एक युवक को आपत्तिजनक (नग्न) अवस्था में पकड़ा।
  • महिला संचालक: दुकान की मालकिन, जिसे स्थानीय लोग ‘बसंती देवी’ के नाम से जानते हैं, वह इस पूरे धंधे को ऑपरेट कर रही थी। दुकान के पिछले हिस्से में बाकायदा चौकी लगाकर अनैतिक कार्यों के लिए केबिन बनाए गए थे।

सोशल मीडिया पर वीडियो हुआ वायरल

जैसे ही ग्रामीणों ने युवक को पकड़ा, उन्होंने उसका वीडियो बना लिया जो अब यूट्यूब और फेसबुक पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे चाय की दुकान की आड़ में समाज की मर्यादा को ताक पर रखकर यह धंधा चलाया जा रहा था। लोग सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं— “कटिहार की बसंती चाय के साथ कुछ ज्यादा ही सर्विस दे रही थी।”

Katihar Police Swat

पुलिस की छापेमारी और कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए कटिहार पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। पुलिस अधिकारी दशरथ राय ने पुष्टि की है कि दुकान के पिछले हिस्से में अवैध गतिविधियां चल रही थीं।

  • • पुलिस ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए।
  • • अवैध सप्लाई नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए जांच तेज कर दी गई है।
  • • स्थानीय लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं जिन्होंने बताया कि यहाँ लंबे समय से संदिग्ध लोगों का आना-जाना लगा रहता था।

सतर्क रहने की जरूरत

यह घटना हमें याद दिलाती है कि कभी-कभी जो दिखता है, वो सच नहीं होता। एक साधारण सी चाय की दुकान के पीछे इतना बड़ा सेक्स रैकेट चल सकता है, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अपने आसपास होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

  • मुख्य बातें (Highlights):
  • स्थान: कटिहार, बिहार।
  • आरोप: चाय की दुकान की आड़ में देह व्यापार।
  • कितने समय से: पिछले 5 वर्षों से सक्रिय।
  • कार्रवाई : पुलिस ने छापेमारी कर नेटवर्क का खुलासा किया।

Read more

पूर्णिया में अतिक्रमण हटाने गए CO से भिड़ी पूर्व पार्षद की बेटी, जमकर हुई हाथापाई!

Purnea co photo

पूर्णिया: बिहार के पूर्णिया जिले में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने सबको हैरान कर दिया। सरकारी जमीन को खाली कराने पहुँचे अंचलाधिकारी (CO) और पूर्व पार्षद की बेटी के बीच तीखी बहस देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए मुकदमा दर्ज कर लिया है।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरी घटना पूर्णिया शहर के एक व्यस्त इलाके की है। नगर निगम की टीम पुलिस बल के साथ अवैध कब्जों को हटाने पहुँची थी। जैसे ही बुलडोजर ने अपना काम शुरू किया, स्थानीय लोग विरोध करने लगे। इसी बीच पूर्व पार्षद की बेटी रानी देवी वहां पहुँच गईं और कार्रवाई का विरोध करने लगीं।

रानी देवी का आरोप था कि प्रशासन बिना किसी पूर्व सूचना के उनके घर के सामने का हिस्सा तोड़ रहा है। बातचीत के दौरान मामला इतना बढ़ गया कि रानी देवी और अंचलाधिकारी (CO) के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। देखते ही देखते दोनों के बीच हाथापाई होने लगी, जिसे देख वहां मौजूद पुलिसकर्मी और लोग दंग रह गए।

CO aur purva parshad ki beti ke bich jhadap

सरकारी काम में बाधा और FIR

CO राकेश कुमार ने आरोप लगाया कि महिला ने न सिर्फ उनके साथ बदतमीजी की, बल्कि सरकारी काम में बाधा डालते हुए उन पर हमला भी किया। इस हंगामे के कारण अतिक्रमण हटाने का काम काफी देर तक रुका रहा। घटना के बाद CO ने स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा डालने और मारपीट की धाराओं के तहत पूर्व पार्षद की बेटी के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।

परिवार का पक्ष

दूसरी ओर, पूर्व पार्षद के परिवार का कहना है कि प्रशासन पक्षपात कर रहा है। उनका दावा है कि जिस जमीन को अतिक्रमण बताया जा रहा है, उसके कागजात उनके पास हैं। रानी देवी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अधिकारी उनकी बात सुनने को तैयार नहीं थे और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया, जिसके बचाव में उन्हें आगे आना पड़ा।

Purnea me atikarman htane ka kaam

शहर में चर्चा का विषय

पूर्णिया में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोग इसे प्रशासन की मनमानी बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि किसी को भी कानून हाथ में लेने का हक नहीं है, चाहे वह रसूखदार परिवार से ही क्यों न हो।

प्रशासन की चेतावनी

जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अतिक्रमण हटाओ अभियान रुकने वाला नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि शहर को जाम मुक्त बनाने के लिए सड़कों के किनारे से अवैध कब्जे हटाना जरूरी है। जो भी व्यक्ति इस प्रक्रिया में बाधा डालेगा, उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पुलिस इस मामले की बारीकी से जांच कर रही है और वायरल वीडियो के आधार पर गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। अब देखना यह है कि इस कानूनी लड़ाई में आगे क्या मोड़ आता है।

Read more

बिहार: अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर से मुक्ति! नीतीश सरकार ने लॉन्च की ‘जनता द्वार योजना’, घर बैठे मिलेंगी 25 सेवाएं

नीतीश

बिहार में सुशासन के एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की जनता को सरकारी दफ्तरों की भागदौड़ से बचाने के लिए महत्वाकांक्षी ‘जनता द्वार योजना’ का शुभारंभ किया है। इस डिजिटल पहल के जरिए अब जाति प्रमाण पत्र से लेकर राशन कार्ड तक की सुविधाएं सीधे लोगों के मोबाइल और घर तक पहुंचेंगी।

सुशासन का नया मॉडल: क्या है ‘जनता द्वार योजना’?

मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस योजना का उद्घाटन करते हुए इसे बिहार के प्रशासनिक इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव बताया। इस योजना की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

• जनता द्वार ऐप: सरकार ने एक समर्पित मोबाइल ऐप लॉन्च किया है, जहाँ 25 से अधिक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सेवाएं एक क्लिक पर उपलब्ध होंगी।

नीतीश सरकार

• 48 घंटे में डिलीवरी: जाति, आय, निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और पेंशन संबंधी आवेदनों का निपटारा अब अधिकतम 48 घंटों के भीतर करने का लक्ष्य रखा गया है।

• IT-साक्षर केंद्र: राज्य के हर जिले में 50 ‘जनता द्वार केंद्र’ खोले जाएंगे। ये केंद्र उन लोगों की मदद करेंगे जो तकनीक के साथ सहज नहीं हैं।

• टोल-फ्री हेल्पलाइन: शिकायतों और जानकारी के लिए सरकार ने 1800-XXX-XXXX नंबर जारी किया है, जिससे अधिकारी सीधे जनता से जुड़ेंगे।

मुख्यमंत्री का संबोधन: “अब जनता नहीं, काम उनके पास जाएगा”

उद्घाटन के दौरान CM नीतीश कुमार ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि आम आदमी को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए ब्लॉक या अनुमंडल कार्यालय के चक्कर न काटने पड़ें। यह डिजिटल सशक्तीकरण की दिशा में बिहार का बड़ा कदम है।”

वहीं, डिप्टी CM सम्राट चौधरी ने इस योजना को ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया और कहा कि इससे बिचौलियों और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।

विपक्ष का रुख: स्वागत के साथ सतर्कता

विपक्ष (RJD) ने इस डिजिटल पहल का स्वागत तो किया है, लेकिन इसके क्रियान्वयन (Implementation) पर सवाल उठाए हैं। आरजेडी प्रवक्ताओं का कहना है कि कागजों पर योजनाएं अच्छी होती हैं, लेकिन असली चुनौती ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट और सर्वर की समस्याओं को दूर करना है।

नीतीश सरकार

भ्रष्टाचार पर चोट और रोजगार के अवसर

विशेषज्ञों के अनुसार, 500 करोड़ रुपये के बजट वाली इस योजना से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि ‘जनता द्वार केंद्रों’ के माध्यम से हजारों आईटी-साक्षर युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। सरकार ने अगले 6 महीनों में 1 करोड़ आवेदनों को डिजिटल माध्यम से संसाधित करने का लक्ष्य रखा है।

पटना, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे बड़े शहरों से शुरू हुई यह योजना जल्द ही बिहार के हर गांव तक पहुंचेगी। इसमें भविष्य में AI-आधारित चैटबॉट जोड़ने की भी योजना है, जो लोगों के सवालों के तुरंत जवाब देगा।

Read more

बिहार में  मौत कोहराम: किशनगंज में ट्रक-डंपर की टक्कर के बाद जिंदा जले 3 लोग, वैशाली में भतीजे ने की चाचा की हत्या

बिहार

बिहार में पिछले चंद घंटों के भीतर दिल दहला देने वाली दो बड़ी घटनाएं सामने आई हैं। एक तरफ जहां किशनगंज में भीषण सड़क हादसे ने तीन परिवारों को उम्र भर का गम दे दिया, वहीं दूसरी तरफ वैशाली में रिश्तों के कत्ल की एक खौफनाक वारदात ने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है। इन घटनाओं ने राज्य की कानून-व्यवस्था और सड़क सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

किशनगंज: NH 327E पर मौत का तांडव, जिंदा जले तीन लोग

किशनगंज जिले के ठाकुरगंज क्षेत्र में एक रूह कंपा देने वाला हादसा हुआ। NH 327E पर एक तेज रफ्तार ट्रक और डंपर के बीच आमने-सामने की जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों वाहनों में तुरंत आग लग गई और देखते ही देखते लपटें 10 फीट ऊपर तक उठने लगीं।

ट्रक-डंपर की टक्कर

इस भयावह अग्निकांड में दोनों वाहनों के ड्राइवरों समेत तीन लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई। देखने वाले के अनुसार, आग इतनी तेज थी कि लोग चाहकर भी उनकी मदद नहीं कर सके। सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन तब तक सब कुछ जलकर राख हो चुका था। पुलिस ने जले हुए शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच जारी है।

वैशाली: पारिवारिक विवाद में भतीजे ने चाचा का गला रेता

किशनगंज के हादसे के बीच वैशाली जिले से भी एक सनसनीखेज वारदात सामने आई। वैशाली के बराटी थाना क्षेत्र के बहुआरा गांव में एक भतीजे ने अपने सगे चाचा की बेरहमी से हत्या कर दी।

आरोपी भतीजे मंजय कुमार ने पारिवारिक विवाद के चलते अपने 70 वर्षीय चाचा महताब लाल सिंह पर हसुली से हमला किया और उनका गला रेत दिया। जब महताब लाल की पत्नी (चाची) उन्हें बचाने पहुंचीं, तो आरोपी ने उन पर भी हमला कर दिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी मंजय को गिरफ्तार कर लिया है और हत्या में इस्तेमाल हथियार भी जब्त कर लिया गया है। वैशाली एसपी ने कहा है कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले की स्पीडी ट्रायल के जरिए सजा दिलाई जाएगी।

बिहार में मौत कोहराम

सुशासन के दावों पर सवाल

इन दो अलग-अलग घटनाओं ने बिहार में सुरक्षा और सामाजिक समरसता पर बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर किशनगंज की सड़कों पर आए दिन हो रहे हादसों ने परिवहन विभाग की सक्रियता पर सवाल उठाए हैं, वहीं वैशाली की घटना ने समाज में बढ़ती हिंसा और घरेलू विवादों के खौफनाक अंत को उजागर किया है।

Read more

71 IPS अधिकारियों का तबादला, कुंदन कृष्णन बने STF चीफ, कई जिलों के SP बदले

71 IPS

बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने नए साल की शुरुआत के साथ ही प्रशासनिक महकमे में अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल किया है। गृह विभाग द्वारा शुक्रवार, 9 जनवरी 2026 की देर शाम जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्य के 71 IPS अधिकारियों का एक साथ तबादला कर दिया गया है। इस बड़े बदलाव से न केवल पुलिस मुख्यालय के समीकरण बदले हैं, बल्कि कई जिलों की सुरक्षा कमान भी नए हाथों में सौंपी गई है।

71 IPS

जिलों की नई कमान: प्रमुख SP और SSP की तैनाती

बिहार के कई महत्वपूर्ण जिलों में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए नए पुलिस कप्तानों की नियुक्ति की गई है। इस कड़ी में सुशील कुमार को गया जिले का नया वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) बनाया गया है, जबकि कांतेश कुमार मिश्रा अब मुजफ्फरपुर के SSP की जिम्मेदारी संभालेंगे। भागलपुर की सुरक्षा का जिम्मा प्रमोद कुमार यादव को सौंपा गया है और विनीत कुमार को सारण (छपरा) का नया SSP नियुक्त किया गया है।

गोपालगंज जिले के पुलिस कप्तान के रूप में विनय तिवारी की वापसी हुई है, जो अपनी विशेष कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। सीमावर्ती जिले किशनगंज में संतोष कुमार और अररिया में जितेंद्र कुमार को SP बनाया गया है। वहीं, सीवान में पूरन कुमार झा, लखीसराय में अवधेश दीक्षित और अरवल में नवजोत सिमी को जिले की कमान सौंपी गई है। राजधानी पटना के यातायात प्रबंधन को सुधारने के लिए सागर कुमार को नया ट्रैफिक SP नियुक्त किया गया है।

पुलिस मुख्यालय और विशेष इकाइयों में बदलाव

जिलों के अलावा पुलिस मुख्यालय (PHQ) के ढांचे में भी बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन को अब एसटीएफ (STF) के महानिदेशक (DG) की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है, साथ ही वे ऑपरेशन और स्पेशल ब्रांच का जिम्मा भी देखेंगे। सुनील कुमार, जो पहले स्पेशल ब्रांच में थे, अब एडीजी (मुख्यालय) के पद पर तैनात किए गए हैं। प्रीता वर्मा को बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम का अध्यक्ष सह एमडी बनाया गया है, जबकि अमित कुमार जैन मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो के नए एडीजी होंगे।

साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए रंजीत कुमार मिश्रा को आईजी (साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई) की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही, हृदयकांत को एटीएस (ATS) का नया एसपी और अनंत कुमार को पटना का रेल एसपी नियुक्त किया गया है।

71 IPS

रेंज और प्रमंडल स्तर पर नई नियुक्तियां

प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूत करने के लिए रेंज स्तर पर भी अधिकारियों को बदला गया है। विवेकानंद को पूर्णिया प्रमंडल का नया आईजी (IG) बनाया गया है, जिससे सीमांचल के जिलों में निगरानी तेज होगी। आनंद कुमार को डीआईजी (विधि-व्यवस्था, पटना) के पद पर तैनात किया गया है, जिनका मुख्य कार्य कानून-व्यवस्था की मॉनिटरिंग करना होगा। कोसी प्रमंडल की जिम्मेदारी अब डीआईजी के रूप में कुमार आशीष संभालेंगे, जबकि मनोज कुमार को पुलिस मुख्यालय में आईजी के पद पर पदस्थापित किया गया है। आर. मलार विजी को एडीजी (बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस) का अतिरिक्त प्रभार देकर सशस्त्र बलों के प्रबंधन को और मजबूती दी गई है।

आपकी क्या राय है? क्या नए पुलिस कप्तानों की तैनाती से बिहार में अपराध की स्थिति में सुधार होगा? कमेंट में अपनी राय जरूर साझा करें।

Read more

पटना में DM ने 11 जनवरी तक कक्षा 8 तक के स्कूल किए बंद, बढ़ती ठंड को देखते हुए जारी हुआ नया आदेश

पटना

बिहार की राजधानी पटना समेत पूरा उत्तर भारत इस समय भीषण शीतलहर और कनकनी की चपेट में है। गिरते तापमान और घने कोहरे के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए पटना जिलाधिकारी (DM) ने जिले के सभी स्कूलों को बंद करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जिससे अभिभावकों और छात्रों को बड़ी राहत मिली है।

पटना DM का आधिकारिक आदेश: कौन से स्कूल रहेंगे बंद?

पटना के जिलाधिकारी ने धारा 144 (अब नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत प्रासंगिक प्रावधान) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए शैक्षणिक गतिविधियों पर रोक लगाई है।

पटना

आदेश का मुख्य विवरण

• कक्षा सीमा: नर्सरी से लेकर कक्षा 8वीं तक के सभी बच्चों के लिए शैक्षणिक गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी।

• समय सीमा: स्कूलों को फिलहाल 11 जनवरी 2026 तक बंद रखने का निर्देश दिया गया है।

• स्कूलों के प्रकार: यह आदेश पटना जिले के अंतर्गत आने वाले सभी सरकारी, निजी (Private), सहायता प्राप्त और प्री-स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा।

बड़ी कक्षाओं के लिए नियम

कक्षा 9वीं से 12वीं तक की कक्षाएं पूरी तरह बंद नहीं की गई हैं, लेकिन उनके समय में बदलाव किया गया है। ऊपर की कक्षाओं का संचालन सुबह 10:30 बजे से पहले और शाम 3:30 बजे के बाद नहीं किया जा सकेगा, ताकि छात्र ठंडी हवाओं से बच सकें।

क्यों लिया गया स्कूल बंदी का फैसला?

बिहार में पिछले 48 घंटों से पछुआ हवाओं ने ठिठुरन बढ़ा दी है। पटना का न्यूनतम तापमान गिरकर 7 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया है।

• घना कोहरा: दृश्यता (Visibility) कम होने के कारण स्कूल बसों और अन्य वाहनों के साथ दुर्घटना का खतरा बढ़ गया था।

• बच्चों का स्वास्थ्य: छोटे बच्चों में कोल्ड डायरिया, निमोनिया और सर्दी-खांसी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों ने भी छोटे बच्चों को सुबह की ठंड से बचाने की सलाह दी थी।

• कोल्ड डे की स्थिति: मौसम विभाग (IMD) ने ‘येलो अलर्ट’ जारी करते हुए अगले कुछ दिनों तक धूप न निकलने की संभावना जताई है।

मौसम विभाग का अनुमान: आगे कैसा रहेगा हाल?

मौसम विज्ञान केंद्र, पटना के अनुसार, बिहार के अधिकांश जिलों में अगले 3 से 4 दिनों तक राहत मिलने के आसार नहीं हैं।

• पछुआ हवाओं का प्रभाव

हिमालयी क्षेत्रों से आ रही ठंडी हवाओं के कारण बिहार के मैदानी इलाकों में कनकनी बनी रहेगी। पटना के अलावा गया, मुजफ्फरपुर और पूर्णिया जैसे जिलों में भी तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

• कोहरे का असर

सड़कों पर दृश्यता 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई है, जिससे न केवल सडक यातायात बल्कि ट्रेनों और फ्लाइट्स के शेड्यूल पर भी बुरा असर पड़ा है।

अभिभावकों और स्कूलों के लिए निर्देश

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई स्कूल इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

• ऑनलाइन क्लासेज: कई निजी स्कूलों ने वैकल्पिक रूप से ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करने का निर्णय लिया है ताकि बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो।

• टीचर और स्टाफ: स्कूलों को बंद करने का आदेश केवल छात्रों के लिए है। शिक्षक और अन्य गैर-शिक्षण कर्मचारी (Non-teaching staff) स्कूल आ सकते हैं और प्रशासनिक कार्य निपटा सकते हैं।

• सुरक्षा प्रोटोकॉल: जिलाधिकारी ने माता-पिता से अपील की है कि वे बच्चों को गरम कपड़े पहनाएं और बेवजह घर से बाहर न निकलने दें।

पटना

बिहार के अन्य जिलों की स्थिति

पटना ही नहीं, बल्कि बिहार के कई अन्य जिलों जैसे भागलपुर, बक्सर और छपरा में भी स्थानीय प्रशासन ने इसी तरह के आदेश जारी किए हैं। राज्य भर के आंगनवाड़ी केंद्रों को भी फिलहाल बंद रखा गया है। बोर्ड परीक्षाओं (BSEB 2026) की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है क्योंकि उनके प्रैक्टिकल एग्जाम्स भी नजदीक हैं।

क्या आपके क्षेत्र में भी ठंड के कारण स्कूलों की छुट्टियां बढ़ा दी गई हैं? हमें कमेंट बॉक्स में बताएं और अपने जिले का नाम जरूर लिखें।

Read more

तेजस्वी यादव का ‘ऑपरेशन क्लीन’: विदेश से लौटते ही एक्शन मोड में नेता प्रतिपक्ष, क्या भितरघातियों पर गिरेगी गाज?

तेजस्वी यादव

बिहार की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट बढ़ गई है। विदेश दौरे से वापस लौटते ही राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कद्दावर नेता तेजस्वी यादव पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि तेजस्वी अब पार्टी के भीतर उन ‘विभीषणों’ की छंटनी करने वाले हैं, जिन्होंने पिछले चुनावों में पीठ पीछे वार किया था। ‘भितरघात’ करने वाले नेताओं की एक लंबी सूची तैयार हो चुकी है, जिस पर आज अंतिम मुहर लग सकती है।

पार्टी संगठन में ‘सर्जरी’ की तैयारी: क्यों जरूरी हुआ यह फैसला?

तेजस्वी यादव का यह कदम केवल अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं है, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी को पूरी तरह दुरुस्त करने की एक सोची-समझी रणनीति है। आरजेडी के शीर्ष सूत्रों का कहना है कि तेजस्वी अब पार्टी में केवल ‘क्राउड पुलर’ नेताओं को ही नहीं, बल्कि वफादार कार्यकर्ताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देना चाहते हैं।

तेजस्वी यादव

भीतरघातियों की लिस्ट तैयार

हालिया चुनावों के परिणामों की समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई थी कि कई सीटों पर आरजेडी के स्थानीय नेताओं और पदाधिकारियों ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ काम किया। कहीं जातीय समीकरणों को बिगड़ा गया, तो कहीं विपक्षी दलों के साथ गुप्त साठगांठ की गई। तेजस्वी यादव ने खुद इन रिपोर्ट्स का बारीकी से अध्ययन किया है।

युवाओं को तरजीह, पुराने चेहरों पर संशय

खबर है कि इस ‘क्लीनअप’ अभियान के तहत पार्टी के पुराने और निष्क्रिय पड़ चुके जिलाध्यक्षों और प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों को बदला जा सकता है। तेजस्वी की कोशिश है कि पार्टी में ‘माई’ (MY – Muslim-Yadav) समीकरण के साथ-साथ ‘ए टू जेड’ (A to Z) वाली छवि को और मजबूती दी जाए, जिसके लिए युवा और ऊर्जावान चेहरों को आगे लाया जा रहा है।

तेजस्वी यादव का ‘विदेशी दौरा’ और बिहार की सियासत

तेजस्वी यादव पिछले कुछ दिनों से निजी यात्रा पर विदेश में थे। उनकी अनुपस्थिति में बिहार की राजनीति में कई बदलाव आए। सत्ता पक्ष ने उनकी गैर-मौजूदगी पर सवाल उठाए, लेकिन तेजस्वी ने सोशल मीडिया और अपने करीबियों के जरिए बिहार की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर नजर बनाए रखी।

क्या था मिशन और वापसी के मायने?

तेजस्वी की वापसी के साथ ही आरजेडी मुख्यालय में हलचल तेज हो गई है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के साथ उनकी लंबी बैठक होने वाली है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा उन बागियों पर कार्रवाई करना है, जिन्होंने पिछले चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन किया था।

अनुशासन समिति की रिपोर्ट और संभावित कार्रवाई

आरजेडी की अनुशासन समिति ने राज्य के विभिन्न जिलों से आई शिकायतों के आधार पर एक गोपनीय रिपोर्ट तैयार की है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:

• सीमांचल और कोसी क्षेत्र: यहां कई बड़े नेताओं पर चुनाव के दौरान निष्क्रिय रहने का आरोप है।

• मगध बेल्ट: यहां टिकट वितरण से नाराज कुछ नेताओं ने दूसरी पार्टियों की मदद की।

• सारण और तिरहुत: यहां समन्वय की कमी के कारण पार्टी को कुछ नजदीकी मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा।

इन रिपोर्टों के आधार पर माना जा रहा है कि आज कम से कम 20 से 25 बड़े पदाधिकारियों को उनके पदों से मुक्त किया जा सकता है। कुछ को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी निलंबित करने की तैयारी है।

2026 विधानसभा चुनाव का रोडमैप

बिहार में 2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से बिसात बिछनी शुरू हो गई है। तेजस्वी यादव जानते हैं कि अगर संगठन में फूट रही, तो नीतीश कुमार और बीजेपी के गठबंधन को चुनौती देना मुश्किल होगा।

बूथ स्तर पर मजबूती

तेजस्वी यादव का जोर अब ‘बूथ जीतो, चुनाव जीतो’ के मंत्र पर है। वे चाहते हैं कि पार्टी का हर कार्यकर्ता सीधे जनता से जुड़ा हो। भितरघात करने वाले नेताओं को हटाकर वे संदेश देना चाहते हैं कि अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

तेजस्वी यादव

जातीय गणना और ‘A to Z’ फॉर्मूला

नीतीश सरकार द्वारा कराई गई जातीय गणना के आंकड़ों के बाद, तेजस्वी अपनी रणनीति को और धार दे रहे हैं। वे अति पिछड़ों (EBC) और दलितों को पार्टी के मुख्य ढांचे में बड़ी हिस्सेदारी देने की योजना बना रहे हैं, ताकि आरजेडी की छवि केवल एक या दो जातियों तक सीमित न रहे।

क्या आपको लगता है कि पार्टी के भीतर ‘भितरघात’ करने वाले नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाकर तेजस्वी यादव 2026 में मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँच पाएंगे? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

Read more

BPSC TRE-3 Paper Leak: पेपर लीक कांड का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, उड़ीसा से दबोचा गया मुख्य आरोपी; जानें अब तक के बड़े खुलासे

BPSC

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-3) के पेपर लीक मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को एक बड़ी सफलता मिली है। महीनों से फरार चल रहे इस धांधली के मुख्य सूत्रधार और मास्टरमाइंड को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी के बाद अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि बिहार में चल रहे बड़े शिक्षा सिंडिकेट का पूरी तरह से भंडाफोड़ होगा।

पेपर लीक कांड के मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी: एक बड़ी कामयाबी

बिहार की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक, BPSC TRE-3, जो हजारों युवाओं के भविष्य से जुड़ी थी, पेपर लीक की वजह से विवादों के घेरे में आ गई थी। इस मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने लगातार छापेमारी के बाद मुख्य आरोपी को उड़ीसा से गिरफ्तार किया है।

आरोपी की पहचान विशाल कुमार चौरसिया और उसके सहयोगियों के नेटवर्क से जुड़े व्यक्तियों के रूप में की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्य आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था, लेकिन तकनीकी निगरानी और गुप्त सूचनाओं के आधार पर पुलिस उसे दबोचने में कामयाब रही।

BPSC

क्या था BPSC TRE-3 पेपर लीक मामला?

15 मार्च 2024 को आयोजित हुई तीसरे चरण की शिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान पेपर लीक की खबरें सामने आई थीं। जांच में पाया गया कि परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रश्नपत्र हजारीबाग के एक बैंक से लीक होकर सॉल्वर गैंग के पास पहुँच गए थे। इसके बाद हजारीबाग में छापेमारी कर सैकड़ों अभ्यर्थियों को रंगे हाथ पकड़ा गया था, जिन्हें परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र रटवाए जा रहे थे।

जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे: कैसे फैला था जाल?

EOU की जांच में यह बात सामने आई है कि यह कोई साधारण पेपर लीक नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी जिसमें कई राज्यों के अपराधी शामिल थे।

1. प्रिंटिंग प्रेस से लेकर सॉल्वर गैंग तक का कनेक्शन

जांच एजेंसियों के अनुसार, पेपर लीक की जड़ें उस प्रिंटिंग प्रेस से जुड़ी थीं जहाँ प्रश्नपत्र छापे गए थे। गिरोह ने प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों के साथ साठगांठ कर परीक्षा से कई दिन पहले ही सेट हासिल कर लिए थे।

2. अभ्यर्थियों से वसूले गए थे लाखों रुपये

गिरफ्तार आरोपी और उसके गिरोह ने प्रत्येक अभ्यर्थी से 10 लाख से 15 लाख रुपये तक का सौदा किया था। अभ्यर्थियों को बसों में भरकर सुरक्षित ठिकानों पर ले जाया गया था, जहाँ उन्हें मोबाइल फोन जमा करवाकर प्रश्नपत्र और उनके उत्तर याद करवाए गए थे।

3. तकनीक का सहारा और फर्जी पहचान

आरोपी पुलिस से बचने के लिए लगातार फर्जी सिम कार्ड और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर रहा था। उसकी गिरफ्तारी से अब उन सफेदपोश चेहरों का भी पर्दाफाश हो सकता है जो इस पूरे सिंडिकेट को संरक्षण दे रहे थे।

बिहार में परीक्षाओं की शुचिता पर उठते सवाल

पिछले कुछ वर्षों में बिहार में पेपर लीक की घटनाएं एक गंभीर समस्या बनकर उभरी हैं। BPSC TRE-3 से पहले भी कई बड़ी परीक्षाओं (जैसे सिपाही भर्ती) के पेपर लीक होने के कारण रद्द करना पड़ा है।

सरकार और प्रशासन की सख्त कार्रवाई

बिहार सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, आर्थिक अपराध इकाई को खुली छूट दी गई है कि वह इस नेटवर्क की तह तक जाए।

परीक्षा रद्द करना: पेपर लीक की पुष्टि होने के तुरंत बाद BPSC ने TRE-3 परीक्षा को रद्द कर दिया था।

नए कानून का प्रभाव: बिहार में लागू हुए नए एंटी-पेपर लीक कानून के तहत अब इन आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें भारी जुर्माना और लंबी जेल की सजा का प्रावधान है।

अभ्यर्थियों के भविष्य पर मंडराते बादल

इस पेपर लीक और मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बीच सबसे ज्यादा परेशान वे लाखों अभ्यर्थी हैं जिन्होंने दिन-रात मेहनत की थी। परीक्षा रद्द होने से न केवल उनका समय बर्बाद हुआ है, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति पर भी बुरा असर पड़ा है।

BPSC

दोबारा परीक्षा और नई चुनौतियाँ

BPSC अब इस परीक्षा को दोबारा आयोजित करने की तैयारी में है। हालांकि, आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसी फुलप्रूफ व्यवस्था बनाने की है जिसे कोई भी सॉल्वर गैंग भेद न सके। अभ्यर्थियों की मांग है कि:

• परीक्षा केंद्रों का चयन सावधानी से किया जाए।

• प्रश्नपत्रों के परिवहन के लिए जीपीएस और डिजिटल लॉक का उपयोग हो।

• सॉल्वर गैंग के सदस्यों को ताउम्र किसी भी परीक्षा से प्रतिबंधित किया जाए।

अब देखना यह होगा कि इस मुख्य आरोपी से पूछताछ के दौरान और कौन से बड़े नाम सामने आते हैं और क्या आयोग आगामी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित कर पाता है।

Read more

लालू यादव के नाती आदित्य अब बनेंगे फौजी! सिंगापुर में लेंगे कठिन मिलिट्री ट्रेनिंग, भावुक हुईं रोहिणी आचार्य

लालू यादव

बिहार की राजनीति के सबसे कद्दावर चेहरों में से एक, लालू प्रसाद यादव के परिवार से एक बड़ी और प्रेरणादायक खबर सामने आ रही है। लालू यादव के नाती और रोहिणी आचार्य के बड़े बेटे आदित्य अब सेना की वर्दी पहनकर देश सेवा का जज्बा दिखाएंगे। आदित्य सिंगापुर में दो साल की अनिवार्य बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग (BMT) के लिए रवाना हो गए हैं, जिसे लेकर उनकी माँ रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर एक दिल छू लेने वाला संदेश साझा किया है।

लालू परिवार के लिए गर्व का क्षण: रोहिणी आचार्य ने साझा की खुशी

राजद (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के परिवार के सदस्य अक्सर अपनी राजनीतिक सक्रियता के लिए चर्चा में रहते हैं, लेकिन इस बार मौका राजनीति का नहीं, बल्कि अनुशासन और सैन्य प्रशिक्षण का है। रोहिणी आचार्य, जो अपनी मुखरता और अपने पिता के प्रति समर्पण के लिए जानी जाती हैं, उन्होंने अपने बेटे आदित्य के जीवन के इस नए पड़ाव की जानकारी सार्वजनिक की है।

लालू यादव

रोहिणी आचार्य का भावुक सोशल मीडिया पोस्ट

रोहिणी ने अपने बेटे आदित्य की तस्वीर साझा करते हुए ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि आज उनका सीना गर्व से चौड़ा हो गया है। उन्होंने बताया कि उनके बेटे ने अपनी प्री-यूनिवर्सिटी की पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी कर ली है और अब वह 18 साल की उम्र में सिंगापुर की नेशनल सर्विस (National Service) के तहत मिलिट्री ट्रेनिंग का हिस्सा बनने जा रहे हैं।

रोहिणी ने अपने पोस्ट में लिखा:

“आदित्य, तुम हमेशा से बहुत बहादुर और अनुशासित रहे हो। जीवन की कठिन चुनौतियों में ही असली व्यक्तित्व का निर्माण होता है। जाओ और अपनी मेहनत से हमें गौरवान्वित करो।”

सिंगापुर में अनिवार्य नेशनल सर्विस: क्या है इसके नियम?

कई लोगों के मन में यह सवाल है कि आदित्य सिंगापुर में मिलिट्री ट्रेनिंग क्यों ले रहे हैं। दरअसल, सिंगापुर के कानून बहुत सख्त हैं और वहां रक्षा को लेकर एक विशेष व्यवस्था है जिसे ‘नेशनल सर्विस’ कहा जाता है।

1. 18 साल की उम्र और अनिवार्य सेवा

सिंगापुर के कानून के मुताबिक, प्रत्येक स्वस्थ पुरुष नागरिक और दूसरी पीढ़ी के स्थायी निवासी (Permanent Residents) के लिए 18 साल की उम्र पूरी होने पर नेशनल सर्विस करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। आदित्य इसी श्रेणी में आते हैं क्योंकि उनका परिवार लंबे समय से सिंगापुर में रह रहा है।

2. दो साल का कठिन प्रशिक्षण

यह ट्रेनिंग मात्र कुछ हफ्तों की नहीं, बल्कि पूरे दो साल की होती है। इस दौरान युवाओं को सेना के कठोर अनुशासन में रहना पड़ता है। ट्रेनिंग की शुरुआत बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग (BMT) से होती है, जिसमें शारीरिक मजबूती और मानसिक दृढ़ता पर जोर दिया जाता है。

लालू यादव

मिलिट्री ट्रेनिंग के दौरान क्या सीखेंगे आदित्य?

सिंगापुर की मिलिट्री ट्रेनिंग को दुनिया की सबसे व्यवस्थित और कठिन ट्रेनिंग्स में से एक माना जाता है। आदित्य को अगले दो वर्षों में निम्नलिखित चरणों से गुजरना होगा:

• शारीरिक फिटनेस: सुबह की कठिन कसरत और लंबी पैदल यात्रा (Route Marches)।

• हथियारों का प्रशिक्षण: अत्याधुनिक हथियारों को चलाने और उनके रखरखाव की जानकारी।

• सर्वाइवल स्किल्स: विपरीत परिस्थितियों में जंगलों या कठिन इलाकों में जीवित रहने के गुर。

• टीम वर्क और लीडरशिप: समूह में काम करना और नेतृत्व की क्षमता विकसित करना।

• फील्ड क्राफ्ट: युद्ध के मैदान में रणनीति बनाना और दुश्मन का सामना करना。

BMT (बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग) पूरी करने के बाद, सैनिकों को उनकी योग्यता के आधार पर विभिन्न यूनिट्स जैसे कि इन्फैंट्री, नेवी, एयरफोर्स या पुलिस फोर्स में तैनात किया जाता है।

राजनीति और पारिवारिक पृष्ठभूमि का प्रभाव

लालू प्रसाद यादव के नाती होने के नाते आदित्य हमेशा से ही सुर्खियों में रहे हैं, लेकिन उन्होंने खुद को अब तक बिहार की सक्रिय राजनीति से दूर रखा है। जहां उनके मामा तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव बिहार की राजनीति की कमान संभाल रहे हैं, वहीं आदित्य ने एक सैनिक के रूप में प्रशिक्षण लेने का फैसला किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रशिक्षण आदित्य के व्यक्तित्व में एक नया निखार लाएगा। सैन्य अनुशासन किसी भी युवा के लिए भविष्य के करियर चाहे वह राजनीति हो या बिजनेस, एक मजबूत आधार तैयार करता है। रोहिणी आचार्य ने भी हाल ही में संकेत दिए थे कि वह अपनी राजनीतिक व्यस्तताओं से इतर अपने बच्चों के भविष्य और शिक्षा पर अधिक ध्यान देना चाहती हैं।

सोशल मीडिया पर मिल रही हैं शुभकामनाएं

जैसे ही रोहिणी आचार्य का यह पोस्ट वायरल हुआ, लालू परिवार के समर्थकों और चाहने वालों ने आदित्य को बधाई देना शुरू कर दिया। लोग आदित्य के साहस की प्रशंसा कर रहे हैं कि इतनी कम उम्र में उन्होंने देश सेवा के कठिन मार्ग को चुना है। लालू प्रसाद यादव ने भी अपने नाती के इस फैसले पर खुशी जताई है और उन्हें आशीर्वाद दिया है।

लालू यादव

क्या भारत में भी होनी चाहिए ऐसी अनिवार्य सेवा?

आदित्य का सिंगापुर में मिलिट्री ट्रेनिंग लेना न केवल लालू परिवार के लिए गर्व की बात है, बल्कि यह अनुशासन और कर्तव्य के प्रति समर्पण का एक बड़ा संदेश भी देता है। एक राजनैतिक परिवार का बच्चा होने के बावजूद, सिंगापुर के सख्त नियमों का पालन करते हुए सेना में शामिल होना सादगी और नियम-निष्ठा का उदाहरण है।

आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि भारत में भी युवाओं के लिए 2 साल की अनिवार्य सैन्य सेवा (National Service) लागू की जानी चाहिए? इससे युवाओं के व्यक्तित्व पर क्या प्रभाव पड़ेगा? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर साझा करें।

Read more

Nitish Kumar Launch Bihar Diary & Calendar 2026: ‘सात निश्चय-3’ के साथ विकसित बिहार का नया रोडमैप जारी!

Bihar

Patna, 2 January 2026: नए साल के अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने Bihar के विकास को एक नई ऊंचाई देने के लिए ‘Bihar Diary 2026’ और ‘राजकीय कैलेंडर 2026’ का विमोचन किया है। पटना स्थित ‘संकल्प’ कक्ष में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राज्य की जनता को नए साल की शुभकामनाएं देते हुए बिहार की नई विकास नीति ‘सात निश्चय-3.0’ की झलक पेश की।

यह कैलेंडर सिर्फ तारीखें बताने वाला पन्ना नहीं है, बल्कि यह 2025 से 2030 तक के ‘विकसित बिहार’ के संकल्प का एक विजुअल दस्तावेज है।

Bihar

क्या है इस साल के कैलेंडर में खास?

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (IPRD) द्वारा प्रकाशित इस कैलेंडर के हर पन्ने पर बिहार की बदलती तस्वीर और भविष्य के लक्ष्यों को दर्शाया गया है।

थीम: इस बार के कैलेंडर की मुख्य थीम ‘सात निश्चय-3’ है।

विजुअल्स: कैलेंडर के 12 पन्नों पर राज्य की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की शानदार तस्वीरें लगाई गई हैं।

अंतिम पृष्ठ: कैलेंडर के आखिरी पन्ने पर बिहार के ‘सुपर फूड मखाना’ को जगह दी गई है, जो अब बिहार की वैश्विक पहचान बन चुका है।

सात निश्चय-3.0: विकसित बिहार के 7 स्तंभ

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सात निश्चय-1 और 2 की सफलता के बाद अब ‘सात निश्चय-3’ के जरिए बिहार को देश के सबसे विकसित राज्यों की श्रेणी में लाया जाएगा। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

दोगुना रोजगार – दोगुनी आय: युवाओं के लिए 1 करोड़ नौकरियों और स्वरोजगार के अवसरों का लक्ष्य।

समृद्ध उद्योग – सशक्त बिहार: MSME और निजी निवेश को बढ़ावा देना।

खेती से खुशहाली: चौथे कृषि रोडमैप के जरिए किसानों की आय बढ़ाना।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना।

सुलभ स्वास्थ्य सेवा: गांवों तक बेहतर मेडिकल सुविधाएं और ‘नो प्राइवेट प्रैक्टिस’ नीति का कड़ाई से पालन।

आधुनिक बुनियादी ढांचा: नए एक्सप्रेस-वे, मेट्रो विस्तार और स्मार्ट शहरों का निर्माण।

सबका सम्मान – आसान जीवन: तकनीक और नवाचार के जरिए सुशासन (Good Governance)।

युवाओं और महिलाओं के लिए खास क्या है?

इस नए रोडमैप में जाति आधारित गणना 2023 में पहचाने गए 94 लाख गरीब परिवारों को प्राथमिकता दी जाएगी। महिलाओं के लिए ‘मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना’ के तहत आर्थिक मदद को और सरल बनाया गया है। साथ ही, फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए बिहार में नए फिल्म सिटी के निर्माण का विज़न भी इस डायरी में साझा किया गया है।

नीतीश सरकार का यह कैलेंडर 2026 यह संदेश देता है कि सरकार अब ‘सर्वांगीण विकास’ (All-round Development) की ओर कदम बढ़ा चुकी है। चाहे वो मखाना का निर्यात हो या आईटी पॉलिसी 2024, बिहार अब रुकने वाला नहीं है।

Bihar

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न):

• बिहार डायरी 2026 कहाँ से मिलेगी? यह सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के काउंटरों और प्रमुख सरकारी कार्यालयों में वितरण के लिए उपलब्ध होगी।

• सात निश्चय-3 कब तक चलेगा? यह योजना 2025 से 2030 तक के लिए तैयार की गई है।

क्या आप सात निश्चय-3 के तहत आने वाली नई नौकरियों की लिस्ट देखना चाहते हैं? मुझे बताएं, मैं पूरी जानकारी दे दूँगा।

Read more

Bihar PACS Membership Campaign 2026: अब पंचायत स्तर पर मिलेंगी 25+ सरकारी सेवाएं, जानें कैसे बनें सदस्य!

PACS

बिहार के ग्रामीण विकास और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में नीतीश सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। 2 जनवरी 2026 से राज्य के हर पंचायत में पैक्स (PACS) सदस्यता सह जागरूकता अभियान की शुरुआत होने जा रही है। अब पैक्स केवल खाद और बीज तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि ये गांव के “मिनी सचिवालय” और “सर्विस सेंटर” के रूप में काम करेंगे।

पैक्स अब सिर्फ एक समिति नहीं, बल्कि ‘मल्टी-सर्विस सेंटर’ है

सहकारिता मंत्री प्रमोद कुमार के अनुसार, बिहार में पैक्स को कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के रूप में विकसित किया गया है। अब राज्य के किसान और ग्रामीण निवासी एक ही छत के नीचे 25 से अधिक डिजिटल और बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।

PACS

पैक्स में मिलने वाली प्रमुख 25 सेवाएं:

पैक्स अब हाई-टेक हो चुके हैं। यहाँ मिलने वाली प्रमुख सेवाओं की सूची इस प्रकार है:

• बैंकिंग सेवाएं: आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (AePS) के जरिए पैसे निकालना और जमा करना।

• डिजिटल इंडिया सेवाएं: पैन कार्ड, आधार अपडेट, और बिजली बिल का भुगतान।

• कृषि इनपुट: खाद, उन्नत बीज और कीटनाशकों की उपलब्धता।

• जन औषधि केंद्र: सस्ती और जेनेरिक दवाओं की बिक्री (302 पैक्स को मंजूरी)।

• अन्न भंडारण: ‘विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना’ के तहत गोदाम की सुविधा।

• प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र: मिट्टी जांच और आधुनिक खेती का प्रशिक्षण।

• पेट्रोल और डीजल डीलरशिप: चुनिंदा पैक्स पर अब पेट्रोल पंप भी खुल रहे हैं।

• एलपीजी वितरण: ग्रामीण इलाकों में गैस सिलेंडर की आसान पहुंच।

• सब्जी आउटलेट: ‘तरकारी’ ब्रांड के तहत ताजी सब्जियों का विपणन।

• बीमा और पेंशन: फसल बीमा (PMFBY) और ई-श्रम पंजीकरण जैसी सुविधाएं।

2 जनवरी से सदस्यता अभियान: आप कैसे जुड़ सकते हैं?

बिहार में वर्तमान में लगभग 1.38 करोड़ पैक्स सदस्य हैं। सरकार का लक्ष्य इस संख्या को और बढ़ाना है ताकि सहकारी लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

• योग्यता: आवेदन करने वाला व्यक्ति उसी पंचायत का स्थाई निवासी होना चाहिए।

• आयु सीमा: आवेदक की उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।

• प्रक्रिया: आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से सदस्य बन सकते हैं। 2 जनवरी से आपके पंचायत मुख्यालय पर विशेष कैंप लगाए जाएंगे।

किसानों को क्या होगा सीधा फायदा?

• MSP पर धान खरीद: इस सीजन में अब तक 9.53 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है, जिसका भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में 48 घंटे के भीतर किया जा रहा है।

• गोल्ड लोन की सुविधा: बिहार स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के माध्यम से अब पैक्स के जरिए गोल्ड लोन भी दिया जा रहा है।

• बिचौलियों से मुक्ति: डिजिटल होने के कारण अब खाद-बीज की कालाबाजारी पर रोक लगेगी।

PACS

बदल रहा है ग्रामीण बिहार

पैक्स का डिजिटलीकरण और 25 सेवाओं का एकीकरण बिहार के गांवों के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है। यदि आप भी एक किसान हैं या ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं, तो 2 जनवरी के अभियान का हिस्सा जरूर बनें और पैक्स के सदस्य बनकर इन सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं।

Read more

सावधान! पटना-आरा रोड आज से 7 महीने के लिए बंद: शिवाला से कन्हौली तक ‘नो एंट्री’, जानें अब किस रास्ते से जाना होगा?

पटना

अगर आप आज पटना से आरा, बिहटा या कोइलवर जाने का प्लान बना रहे हैं, या फिर उधर से पटना आ रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। घर से निकलने से पहले यह खबर नहीं पढ़ी, तो आप घंटों जाम में फंस सकते हैं या आपको आधे रास्ते से लौटना पड़ सकता है।

बिहार की राजधानी पटना में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए चल रहे निर्माण कार्यों के चलते पटना-आरा मुख्य मार्ग पर आज से बड़ा बदलाव किया गया है।

पटना

क्या है पूरा मामला?

आज यानी 18 दिसंबर 2025 से पटना जिला प्रशासन ने शिवाला चौक से कन्हौली तक के रास्ते को पूरी तरह से बंद कर दिया है। यह कोई एक-दो दिन की बात नहीं है, बल्कि यह रूट अगले 7 महीनों तक बंद रहेगा।

प्रशासन द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, इस रूट पर सभी प्रकार के वाहनों (दोपहिया, चार पहिया और भारी वाहन) का परिचालन पूरी तरह से रोक दिया गया है।

रास्ता क्यों बंद किया गया है?

शायद आप सोच रहे होंगे कि इतना व्यस्त रास्ता इतने लंबे समय के लिए क्यों बंद किया गया? दरअसल, यह परेशानी आपके भविष्य के सफर को आसान बनाने के लिए है।

इस रूट पर दानापुर-बिहटा एलिवेटेड रोड (Elevated Road) का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। शिवाला से कन्हौली के बीच पिलर और स्पैन चढ़ाने का काम होना है। चूंकि यह रास्ता संकरा है और ट्रैफिक का दबाव बहुत ज्यादा रहता है, इसलिए सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ट्रैफिक को रोकना पड़ा है ताकि निर्माण कार्य तेजी से पूरा हो सके।

अब पटना-आरा आने-जाने के लिए कौन सा रास्ता लें?

घबराने की जरूरत नहीं है! प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा के लिए रूट डायवर्जन (Traffic Diversion) का प्लान तैयार किया है। अगर आपको पटना से बिहटा/आरा जाना है या उधर से आना है, तो आप इन दो वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल कर सकते हैं:

1. पहला रास्ता: मनेर-दानापुर रूट

अगर आप सगुना मोड़ या दानापुर स्टेशन की तरफ जाना चाहते हैं, तो यह रास्ता आपके लिए बेहतर है।

रूट: बिहटा चौक ➡️ मनेर ➡️ दानापुर कैंट ➡️ सगुना मोड़/पटना।

किसे फायदा: यह रूट उन लोगों के लिए सही है जो उत्तरी पटना या गंगा किनारे वाले इलाकों से आ-जा रहे हैं।

2. दूसरा रास्ता: नौबतपुर-एम्स रूट

अगर आप अनीसाबाद, फुलवारी शरीफ या पटना बाईपास की तरफ जाना चाहते हैं, तो इस रास्ते को चुनें।

रूट: बिहटा-सरमेरा मोड़ ➡️ नौबतपुर ➡️ एम्स (AIIMS) पटना ➡️ फुलवारी शरीफ।

किसे फायदा: दक्षिण पटना या बाईपास होकर जाने वालों के लिए यह सबसे बेस्ट रूट है।

पटना

यात्रियों के लिए कुछ जरूरी टिप्स

अगले 7 महीनों तक इस रूट पर थोड़ी परेशानी हो सकती है, इसलिए स्मार्ट ट्रैवलिंग के लिए इन बातों का ध्यान रखें:

Google Maps का इस्तेमाल करें: घर से निकलने से पहले मैप पर लाइव ट्रैफिक जरूर चेक करें। डायवर्जन की वजह से वैकल्पिक रास्तों पर भी भीड़ बढ़ सकती है।

समय लेकर निकलें: आम दिनों के मुकाबले अब आपको सफर में 30 से 45 मिनट का एक्स्ट्रा समय लग सकता है।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट: अगर संभव हो तो इस दौरान अपनी कार के बजाय ट्रेन (पटना-आरा मेमू) का इस्तेमाल करें, जो ट्रैफिक जाम से बचने का सबसे अच्छा तरीका है।

दोस्तों, विकास के लिए थोड़ी परेशानी तो उठानी पड़ती है। यह एलिवेटेड रोड बनने के बाद पटना से बिहटा का सफर मिनटों में तय होगा। तब तक के लिए, कृपया ट्रैफिक नियमों का पालन करें और पुलिस द्वारा बताए गए डायवर्जन रूट का ही इस्तेमाल करें।

इस जानकारी को अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ WhatsApp और Facebook पर जरूर शेयर करें ताकि कोई भी जाम में न फंसे!

Read more

तेज प्रताप यादव की पार्टी में बड़ा एक्शन! राष्ट्रीय प्रवक्ता संतोष रेणु निष्कासित, लगा यह गंभीर आरोप

तेज प्रताप यादव

बिहार की राजनीति में हमेशा चर्चा में रहने वाले तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। अपनी नई पार्टी ‘जनशक्ति जनता दल’ (Janshakti Janta Dal) के जरिए राजनीतिक जमीन तलाश रहे तेज प्रताप ने आज एक कड़ा फैसला लेते हुए अपनी ही पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संतोष रेणु (Santosh Renu) को बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

यह खबर इसलिए भी अहम है क्योंकि संतोष रेणु, तेज प्रताप के बेहद करीबी माने जाते थे। आखिर ऐसा क्या हुआ कि रातों-रात इतना बड़ा फैसला लेना पड़ा? आइए जानते हैं पूरा मामला विस्तार से।

तेज प्रताप यादव

क्यों हुई संतोष रेणु पर कार्रवाई?

पार्टी सूत्रों और आधिकारिक बयान के मुताबिक, संतोष रेणु पर भ्रष्टाचार के बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने पुलिस बहाली (Police Recruitment) के नाम पर कई अभ्यर्थियों से लाखों रुपये की वसूली की है।

तेज प्रताप यादव, जो अपनी नई पार्टी को ‘साफ-सुथरी छवि’ वाली पार्टी के रूप में प्रोजेक्ट कर रहे हैं, ने इस मामले को ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत लिया। जैसे ही यह मामला उनके संज्ञान में आया, उन्होंने तुरंत प्रभाव से संतोष रेणु को पद से हटाने और पार्टी से निष्कासित करने का आदेश जारी कर दिया।

आरोपों की मुख्य बातें:

• पुलिस बहाली में धांधली: संतोष रेणु पर आरोप है कि उन्होंने युवाओं को पुलिस में नौकरी दिलाने का झांसा दिया।

• पैसों का लेनदेन: पीड़ितों का दावा है कि नौकरी के बदले उनसे मोटी रकम की मांग की गई थी।

• पार्टी की छवि को नुकसान: पार्टी हाईकमान का मानना है कि ऐसे कृत्यों से संगठन की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।

तेज प्रताप यादव का कड़ा संदेश

इस कार्रवाई के जरिए तेज प्रताप यादव ने बिहार की जनता और अपने विरोधियों को एक स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है। उन्होंने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी ‘जनशक्ति जनता दल’ में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है, चाहे वह व्यक्ति कितने भी ऊंचे पद पर क्यों न हो।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आरजेडी (RJD) से अलग होने के बाद तेज प्रताप अपनी एक अलग और सख्त प्रशासक वाली छवि बनाना चाहते हैं। यह कदम उसी रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।

तेज प्रताप यादव

संतोष रेणु का राजनीतिक भविष्य?

संतोष रेणु, जो अब तक टीवी डिबेट्स और सोशल मीडिया पर तेज प्रताप यादव का पुरजोर बचाव करते नजर आते थे, अब खुद सवालों के घेरे में हैं। पुलिस बहाली के नाम पर ठगी का आरोप न केवल उनका राजनीतिक करियर खत्म कर सकता है, बल्कि उन पर कानूनी कार्रवाई की तलवार भी लटक सकती है।

क्या संतोष रेणु इन आरोपों पर कोई सफाई देंगे? या फिर यह मामला पुलिस जांच की ओर जाएगा? यह देखना दिलचस्प होगा।

क्या इससे बिहार की राजनीति में बदलाव आएगा? कमेंट करके जरूर बताएं!

Read more

पटना में ठेकेदार रिशु श्री के 9 ठिकानों पर छापेमारी, करोड़ों के लेन-देन की जांच तेज

पटना

बिहार की राजधानी पटना में गुरुवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चर्चित ठेकेदार रिशु श्री उर्फ़ रिशु रंजन सिन्हा से जुड़े कुल 9 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग, कमीशनखोरी और कथित बेनामी संपत्ति के मामले में की गई है।

सूत्रों के मुताबिक ED इस छापेमारी के जरिए कई राज्यों में फैले नेटवर्क की जांच कर रही है, जो सरकारी ठेकों, ट्रांसफर–पोस्टिंग और कमीशन के नाम पर भारी रकम के लेन-देन से जुड़ा बताया जा रहा है।

पटना

कहां-कहां हुई छापेमारी

ईडी की रेड बिहार के अलावा कई राज्यों में फैली:

  • •पटना (बिहार) – मुख्य ठिकाने
  • •दिल्ली–एनसीआर
  • •सूरत और अहमदाबाद (गुजरात)
  • •पानीपत (हरियाणा)

छापेमारी एक साथ कई टीमों द्वारा की गई ताकि दस्तावेज़ों और डिजिटल डेटा को बिना देरी जब्त किया जा सके।

किस मामले में कार्रवाई

  • •रिशु श्री पर आरोप है कि वह सरकारी विभागों में ठेके दिलाने और पोस्टिंग–तबादला कराने के नाम पर भारी कमीशन वसूलता था।
  • •ईडी का मानना है कि इस पैसे को बेनामी संपत्तियों और व्यापारों में निवेश कर सफेद किया जाता था।
  • •कार्रवाई PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम) के तहत की जा रही है।

किन अधिकारियों और नेटवर्क पर भी रेड

  • •सामान्य प्रशासन विभाग के अंडर सेक्रेटरी विनोद कुमार सिंह
  • •रिशु श्री का चार्टर्ड अकाउंटेंट
  • कुछ ट्रैवल एजेंट और कारोबारी, जिनके जरिए पैसा घूमाने की आशंका है
  • जांच टीम मानती है कि इन्हीं कड़ियों के जरिये अवैध धन का लेन-देन चल रहा था।
  • पटना

छापे में क्या मिला

अभी तक रेड में:

  • •नकदी
  • •महत्वपूर्ण फाइलें और दस्तावेज़
  • •डायरी और मोबाइल-लैपटॉप जैसे डिजिटल उपकरण
  • •अवैध लेन-देन और संपर्कों से जुड़े कई अहम सुराग मिले हैं।
  • पिछली कार्रवाई में भी करीब 10–12 करोड़ रुपये नकद, प्रॉपर्टी पेपर और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिल चुके हैं।

क्यों बढ़ी कार्रवाई? —

रिशु श्री का नाम पहले भी IAS संजीव हंस से जुड़े कथित टेंडर और मनी लॉन्ड्रिंग घोटाले में सामने आया था। उसी जांच के बाद ईडी ने उसकी गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई और अब यह बड़ा एक्शन किया गया है।

Read more

बिहार में नई सरकार का बड़ा फैसला जानिए किसे मिला कौन-सा विभाग

बिहार

बिहार में नई एनडीए सरकार के शपथ ग्रहण के बाद मंत्रालयों का बँटवारा आधिकारिक रूप से जारी कर दिया गया है। इस बार सबसे बड़ा और चौंकाने वाला फैसला रहा—उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को गृह मंत्रालय (Home Department) की कमान देना। लगभग 20 साल में यह पहली बार है जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गृह विभाग अपने पास नहीं रखा। गृह मंत्रालय राज्य की कानून-व्यवस्था, पुलिस प्रशासन, खुफिया विभाग और आंतरिक सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली विभाग माना जाता है, जिसे अब सम्राट चौधरी संभालेंगे। राजनीतिक तौर पर इसे भाजपा के लिए भी बड़ी जीत समझा जा रहा है।

बिहार

कैबिनेट में किसे मिला कौन-सा विभाग — पूरी सूची-

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी

गृह मंत्रालय (Home Department)

(कानून-व्यवस्था, पुलिस, सुरक्षा और आंतरिक प्रशासन की जिम्मेदारी)

1. विजय कुमार सिन्हा (उपमुख्यमंत्री)

बिहार

भूमि एवं राजस्व विभाग

खान एवं भू-तत्त्व विभाग

2. मंगल पांडे

स्वास्थ्य विभाग

विधि विभाग

3. दिलीप जयसवाल

उद्योग विभाग

4. नितिन नवीन

पथ निर्माण विभाग

नगर विकास एवं आवास विभाग

5. रामकूपाल यादव

कृषि विभाग

6. संजय टाइगर

बिहार

श्रम संसाधन विभाग

7. अरुण शंकर प्रसाद

पर्यटन विभाग

कला, संस्कृति एवं युवा विभाग

8. सुरेन्द्र मेहता

पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग

9. नारायण प्रसाद

आपदा प्रबंधन विभाग

10. रमा निषाद

पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग

11. लखेन्द्र पासवान

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग

12. श्रेयसी सिंह

सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (आईटी विभाग)

खेल विभाग

बिहार

13. प्रमोद चंद्रवंशी

सहकारिता विभाग

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग

सरकार के फैसले का संकेत: सुरक्षा और विकास पर बड़ा फोकस-

राज्य सरकार ने जिन विभागों का बँटवारा किया है, उससे ये साफ दिखाई देता है कि आने वाले समय में कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढाँचा, स्वास्थ्य सेवाएँ, पर्यटन, आईटी और कृषि सुधार सरकार की प्राथमिकता में रहेंगे।गृह मंत्रालय उपमुख्यमंत्री को सौंपे जाने से यह भी संकेत मिलता है कि सरकार अपराध नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाने के मूड में है।

Read more

नीतीश कुमार का इस्तीफा😱—लेकिन 20 नवंबर को सीएम……:-Bihar Political Earthquake:

नीतीश कुमार

बिहार की राजनीति एक बार फिर बड़े भूचाल का सामना कर रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को अपने पूरे मंत्रिपरिषद के साथ राज्यपाल को अचानक इस्तीफा सौंप दिया, साथ ही विधानसभा भंग करने की भी सिफारिश कर दी। इस कदम ने न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया—आखिर इस “पॉलिटिकल रीसेट” की जरूरत क्यों पड़ी?

नया पावर इक्वेशन:

NDA के साथ वापसी, साझा सत्ता का फॉर्मूला तैयार सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार एक बार फिर NDA के सपोर्ट से मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। BJP–JDU के बीच 50-50 सत्ता साझेदारी पर सहमति बन चुकी है और लोजपा, HAM समेत अन्य घटक दलों को भी नई सरकार में जगह मिलने की संभावना है।
20 नवंबर को पटना के गांधी मैदान में होने वाला भव्य शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियाँ बनाएगा—जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई बड़े नेता शामिल होंगे।

नीतीश कुमार

10वीं बार CM—नीतीश का नया रिकॉर्ड और सत्ता का संकेत

नीतीश कुमार अपने राजनीतिक करियर में 10वीं बार मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने जा रहे हैं—जो उन्हें बिहार की राजनीति का सबसे स्थिर और प्रभावशाली चेहरा साबित करता है। नई कैबिनेट में इस बार युवा चेहरों और अनुभवी नेताओं का मिश्रण देखने को मिल सकता है, ताकि प्रशासनिक गति और विकास एजेंडा दोनों मजबूत किया जा सके।

विपक्ष का वार बनाम NDA का जवाब

जहाँ विपक्ष इसे “कुर्सी बचाने की राजनीति” बता रहा है, वहीं समर्थकों का दावा है—
“स्थिरता, सुशासन और गठबंधन धर्म के लिए यह रीसेट जरूरी था।”
बिहार के लोग अब यह देखना चाहते हैं कि नई सरकार अगले पाँच साल का रोडमैप कितनी मजबूती से तय करती है।

जनता की नज़रें विकास पर

नई सरकार की चुनौती साफ है—
रोजगार, शिक्षा, अपराध नियंत्रण, बाढ़ प्रबंधन और बुनियादी ढांचे जैसे बड़े मुद्दों पर ठोस काम।
20 नवंबर के बाद बिहार की दबंग राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है—क्या यह अध्याय उम्मीदों को सच करेगा, या फिर सिर्फ समीकरणों का खेल बनेगा?

Read more

बिहार में RJD की नवनिर्वाचित विधायक-बैठक: तेजस्वी यादव को विधायक दल का नेता चुना गया

बिहार

17 नवंबर 2025 — बिहार की सियासत में आज RJD (राष्ट्रीय जनता दल) ने एक अहम मोड़ लिया है। सोमवार को पटना स्थित तेजस्वी यादव के सरकारी आवास (पोलो रोड) पर हुई सांसदों और नवनिर्वाचित विधायकों की समीक्षा बैठक में, तेजस्वी यादव को सर्वसम्मति से RJD विधायक दल का नेता चुना गया। इस फैसले के साथ ही वह बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाने की दिशा में अग्रसर हो गए हैं।

बैठक का माहौल और उपस्थित लोग

बैठक में RJD के शीर्ष नेता मौजूद थे — जिनमें पार्टी के संरक्षक लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, सांसद मीसा भारती, जगदानंद सिंह और मंगनीराम मंडल जैसे वरिष्ठ नेता शामिल थे। इस प्रकार की व्यापक भागीदारी इस बात का संकेत देती है कि RJD अपने भविष्य की रणनीति को बेहद गंभीरता से ले रही है और तेजस्वी यादव पर भरोसा बरकरार रखना चाहती है।

चुनावी हार की समीक्षा

बैठक में RJD ने हाल ही में संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव में अपने निराशाजनक प्रदर्शन का गहराई से मंथन किया। पार्टी ने 143 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन सिर्फ 25 सीटें ही जीतीं। इस हार के कारणों पर चर्चा करते हुए, नेताओं ने यह माना कि RJD चुनावी संदेश को लोगों तक ठीक तरह से नहीं पहुंचा पाई।

विशेष रूप से, पार्टी के अंदर मतदान रणनीति, प्रचार की गहराई और मिशन-मैसेजिंग पर सवाल उठे। कुछ स्रोतों के मुताबिक, EVM की गड़बड़ी, चुनाव आयोग की भूमिका और सीमांचल क्षेत्र में अन्य पार्टियों की बढ़ती ताकत को भी जिम्मेदार माना गया है।

बिहार

नेता प्रतिपक्ष की स्थिति पुख्ता

तेजस्वी यादव के विधायक दल के नेता चुने जाने के साथ ही, वह बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह योग्य बन गए हैं। चूंकि बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं, और किसी दल को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा पाने के लिए कम-से-कम 10% यानी लगभग 25 सीटें चाहिए होती हैं, तो RJD का 25 विधायकों के बतौर पहुंच बनाना खास महत्व रखता है। नेता प्रतिपक्ष बनने पर तेजस्वी को विधान सभा में अहम भूमिका मिलेगी — वह सरकार को घेरने, उसकी नीतियों पर आपत्तियाँ उठाने और जनता-विरोधी कदमों की आलोचना करने का संवैधानिक दायित्व निभाएंगे।

आगे की राह और रणनीति

बैठक में सिर्फ हार का आकलन ही नहीं किया गया, बल्कि आगामी राजनीतिक रणनीति को भी आकार देने की पहल की गई है। Outlook की रिपोर्ट के अनुसार, तेजस्वी यादव ने MLAs (जीते हुए विधायकों) से एकजुटता बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को यह संदेश दिया है कि अब RJD को एक जिम्मेदार, रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने की आवश्यकता है — न कि सिर्फ हार का रोना रोने की।साथ ही, कुछ रिपोर्ट्स यह भी कह रही हैं कि RJD चुनावी नतीजों पर अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रही है, खासकर उन आरोपों के संबंध में कि चुनाव में अनियमितताएँ हुई थीं।

इस कदम का मतलब साफ है: RJD सिर्फ भीतर-मंथन में ही नहीं फँसी है, बल्कि अगली लड़ाई की तैयारी भी शुरू कर चुकी है।

राजनीतिक मायने और असर

तेजस्वी यादव को फिर से विधायक दल का नेता बनाने का निर्णय यह दर्शाता है कि RJD ने उनपर अपना पुल-फिर से लगाया है, भले ही चुनाव में बड़ी निराशा रही हो।लालू प्रसाद यादव और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी इस बात की पुष्टि करती है कि परिवार और शीर्ष नेतृत्व ने तेजस्वी की पकड़ को मजबूत किया है।

इसका अर्थ यह भी है कि RJD भविष्य में कांग्रेस और अन्य गठबंधन सहयोगियों के साथ अपनी भूमिका को फिर से खड़ा करने की योजना बना रही है।विपक्ष में मजबूत उपस्थिति के साथ, RJD अब सरकार की नीतियों को चुनौती देने, जनहित के मुद्दों को उठाने और संभावित अगली चुनावी रणनीति बनाने में मध्यवर्ती भूमिका निभा सकती है।

Read more

बिहार बोर्ड 2026 डेटशीट जल्द जारी होगी: कक्षा 10वीं–12वीं के छात्र रहें तैयार, जानें क्या है पूरी अपडेट

बिहार

बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (BSEB) जल्द ही कक्षा 10वीं (मैट्रिक) और 12वीं (इंटरमीडिएट) की 2026 बोर्ड परीक्षा डेटशीट जारी करने वाला है। लाखों छात्र इस घोषणा का इंतज़ार कर रहे हैं, और बोर्ड ने संकेत दिया है कि समय सारणी जल्द ही ऑनलाइन उपलब्ध होगी।

कब जारी होगी डेटशीट?

पिछले कई सालों के ट्रेंड को देखते हुए, उम्मीद है कि BSEB दिसंबर 2025 की शुरुआत में ही 2026 की परीक्षा डेटशीट जारी कर देगा। पिछले साल (2025 परीक्षा के लिए) डेटशीट 7 दिसंबर 2024 को जारी हुई थी। इस बार भी लगभग इसी समय डेटशीट आने की संभावना है।

बिहार

परीक्षाएं कब होंगी?

रिपोर्ट्स और पिछले पैटर्न के अनुसार: कक्षा 12 की परीक्षाएं: फरवरी 2026 की शुरुआत में. कक्षा 10 की परीक्षाएं: फरवरी 2026 के मध्य में कुछ शैक्षणिक पोर्टलों का अनुमान है कि 10वीं की परीक्षा 17 फरवरी 2026 से 25 फरवरी 2026 के बीच हो सकती है।

परीक्षा का समय क्या रहेगा?

बीएसईबी हर साल की तरह इस बार भी परीक्षाएं दो शिफ्टों में कर सकता है:

  • पहली पाली: सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक.
  • दूसरी पाली: दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:15 बजे तक.

थ्योरी परीक्षाओं के साथ बोर्ड जल्द ही प्रैक्टिकल परीक्षा की तारीखें भी जारी करेगा। प्रैक्टिकल परीक्षा स्कूलों में ही आयोजित की जाएंगी।

बिहार

डेटशीट कहां से डाउनलोड करें?

जैसे ही डेटशीट जारी होगी, छात्र इसे यहां से PDF फॉर्म में डाउनलोड कर सकेंगे:

biharboardonline.com

biharboardonline.bihar.gov.in

छात्रों को सलाह है कि वे नियमित रूप से वेबसाइट चेक करते रहें और पढ़ाई का टाइमटेबल पहले से तैयार कर लें।

Read more