Mumbai Pune Expressway Jam: 18 घंटे की तड़प के बीच उद्योगपति डॉ. सुधीर मेहता ने लिया हेलीकॉप्टर का सहारा, सरकार को दिया बड़ा सुझाव

Mumbai Pune Expressway Jam and Sudhir Mehta exit by Helicopter

मुंबई/पुणे: महाराष्ट्र की लाइफलाइन कहे जाने वाले मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे (Mumbai-Pune Expressway) पर बीते 24 से 30 घंटों में जो मंजर देखने को मिला, उसने देश के सबसे आधुनिक हाईवे की सुरक्षा और आपातकालीन प्रबंधन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एक गैस टैंकर के पलटने से शुरू हुआ यह घटनाक्रम देखते ही देखते एक मानवीय संकट में बदल गया, जहाँ लाखों यात्री बिना भोजन, पानी और टॉयलेट की सुविधा के बीच सड़क पर फंसे रहे।

एक गैस टैंकर और 33 घंटे का संघर्ष: क्या था पूरा मामला?

यह संकट मंगलवार शाम करीब 5 बजे शुरू हुआ, जब मुंबई की ओर जा रहा प्रोपलीन गैस (Propylene Gas) से भरा एक टैंकर रायगढ़ जिले के अदोषी सुरंग (Adoshi Tunnel) के पास अनियंत्रित होकर पलट गया। टैंकर से अत्यधिक ज्वलनशील गैस का रिसाव होने लगा, जिसके कारण सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने तत्काल प्रभाव से ट्रैफिक रोक दिया। खंडाला घाट के पहाड़ी इलाके में हुई इस दुर्घटना के कारण देखते ही देखते 20 किलोमीटर से भी लंबा जाम लग गया। NDRF और विशेषज्ञों की टीम को गैस रिसाव रोकने में भारी मशक्कत करनी पड़ी, जिससे यातायात करीब 33 घंटे तक प्रभावित रहा।

Mumbai Pune Expressway Jam and the reason behind it

डॉ. सुधीर मेहता को क्यों लेना पड़ा हेलीकॉप्टर?

इस भीषण जाम में आम जनता के साथ-साथ पिनेकल इंडस्ट्रीज और EKA मोबिलिटी के चेयरमैन डॉ. सुधीर मेहता (Dr. Sudhir Mehta) भी फंस गए थे। डॉ. मेहता मुंबई से पुणे की ओर जा रहे थे, लेकिन एक्सप्रेसवे के गतिरोध ने उन्हें करीब 8 घंटे तक एक ही जगह पर रोके रखा। स्थिति की गंभीरता और समय की कमी को देखते हुए, उन्होंने अंततः एक निजी हेलीकॉप्टर मंगवाया और पुणे के लिए उड़ान भरी।

उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जाम की रोंगटे खड़े कर देने वाली एरियल तस्वीरें (Aerial Photos) साझा कीं। इन तस्वीरों में हजारों गाड़ियाँ चींटियों की तरह कतार में खड़ी दिखाई दे रही थीं। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि महज एक टैंकर की दुर्घटना ने लाखों लोगों की जिंदगी को 18-18 घंटों के लिए दांव पर लगा दिया है।

उद्योगपति का सुझाव: इमरजेंसी एग्जिट और सस्ते हेलिपैड

डॉ. सुधीर मेहता ने इस संकट के समाधान के लिए सरकार और NHAI को दो महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:

  • इमरजेंसी एग्जिट पॉइंट्स: उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे पर नियमित अंतराल पर ऐसे आपातकालीन निकास होने चाहिए जिन्हें संकट के समय खोलकर वाहनों को वापस मोड़ा जा सके। वर्तमान में, एक बार जाम में फंसने के बाद यात्रियों के पास पीछे मुड़ने का कोई विकल्प नहीं बचता।
  • अनिवार्य हेलिपैड: डॉ. मेहता के अनुसार, एक्सप्रेसवे के किनारे एक एकड़ से कम जमीन पर 10 लाख रुपये से भी कम लागत में हेलिपैड बनाए जा सकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि हर कुछ किलोमीटर पर हेलिपैड अनिवार्य होने चाहिए ताकि गंभीर स्थिति में लोगों को एयरलिफ्ट किया जा सके।

Mumbai Pune Expressway Jam

मानवीय पीड़ा: बिना पानी और खाने के कटे दिन-रात

सोशल मीडिया पर यात्रियों ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि जाम इतना भयानक था कि एम्बुलेंस तक रास्ता नहीं पा रही थीं। छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह समय सबसे कठिन रहा। पीने के पानी और भोजन की कमी के कारण लोगों में भारी गुस्सा देखा गया। हालांकि, स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने बाद में कुछ राहत सामग्री पहुँचाने की कोशिश की, लेकिन ट्रैफिक का दबाव इतना था कि मदद पहुँचने में भी घंटों लग गए।

इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ मैनेजमेंट भी जरूरी

यह घटना हमें याद दिलाती है कि सिर्फ चौड़ी सड़कें बनाना काफी नहीं है, बल्कि ऐसी ‘प्रोपलीन गैस’ जैसी संवेदनशील दुर्घटनाओं से निपटने के लिए हमारे पास एक ‘डिजास्टर मैनेजमेंट प्रोटोकॉल’ होना अनिवार्य है। डॉ. सुधीर मेहता के सुझावों पर यदि सरकार अमल करती है, तो भविष्य में लाखों लोगों को इस तरह की प्रताड़ना से बचाया जा सकता है।

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Muzaffarpur Murder: अवैध संबंध का विरोध करने पर पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर रेता पति का गला, दहला बिहार

Muzaffarpur Murder Victim image Manoj kumar

मुजफ्फरपुर, बिहार: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जिसने मानवीय रिश्तों और सामाजिक ताने-बाने पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ एक पान दुकानदार मनोज कुमार की बेरहमी से गला रेतकर हत्या कर दी गई। शुरुआती जांच और पुलिसिया कार्रवाई में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। यह पूरी वारदात ‘अवैध संबंधों’ के इर्द-गिर्द घूमती नजर आ रही है।

क्या है पूरा मामला?

यह सनसनीखेज वारदात मुजफ्फरपुर जिले की है, जहाँ फरवरी 2026 की शुरुआत में (लगभग 3-4 फरवरी) एक घर के भीतर चीख-पुकार मच गई। मृतक की पहचान मनोज कुमार के रूप में हुई है, जो पेशे से एक पान दुकानदार थे। जानकारी के मुताबिक, मनोज का ‘गुनाह’ सिर्फ इतना था कि उन्होंने अपनी पत्नी के किसी गैर मर्द के साथ बढ़ते अवैध संबंधों का विरोध किया था |

मनोज को अपनी पत्नी के प्रेम-प्रसंग के बारे में शक था, जिसको लेकर घर में अक्सर कलह होती थी। वारदात की रात भी इसी बात को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद पत्नी ने अपने प्रेमी और भाई के साथ मिलकर मनोज को रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रची।

Muzaffarpur Murder manoj kumar

हत्या का तरीका: रूह कांप जाए ऐसी क्रूरता

अपराधियों ने मनोज पर तब हमला किया जब वह पूरी तरह निहत्थे थे। खबरों के अनुसार, मनोज का गला किसी धारदार हथियार (चाकू) से रेत दिया गया। हमला इतना अचानक और घातक था कि मनोज को संभलने या मदद के लिए चिल्लाने का मौका तक नहीं मिला। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल व्याप्त हो गया और स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी।

पुलिसिया कार्रवाई: मुख्य आरोपी हिरासत में

घटना की जानकारी मिलते ही मुजफ्फरपुर पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और सबूत जुटाने शुरू किए। पुलिस की जांच की सुई सबसे पहले घर के सदस्यों पर ही घूमी। कड़ाई से पूछताछ करने पर इस हत्याकांड की परतें खुलती चली गईं।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मामले में मनोज की पत्नी, उसका कथित प्रेमी और पत्नी का सगा भाई मुख्य रूप से संलिप्त पाए गए हैं। पुलिस ने इन तीनों को हिरासत में ले लिया है और उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया के जरिए शुरू हुए इस प्रेम-प्रसंग ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया।

Muzaffarpur Murder manoj kumar image

अवैध संबंध और बढ़ता अपराध

मुजफ्फरपुर की यह घटना कोई पहली बार नहीं है जहाँ अवैध संबंधों के कारण किसी की जान गई हो। समाज में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और नैतिक मूल्यों में गिरावट के कारण इस तरह के जघन्य अपराधों में वृद्धि देखी जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मनोज एक सीधा-सादा व्यक्ति था, लेकिन रिश्तों की बेवफाई ने उसकी जान ले ली।

मुजफ्फरपुर पुलिस फिलहाल आरोपियों से रिमांड पर पूछताछ कर रही है ताकि हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार और अन्य सबूतों को पुख्ता किया जा सके। कानून के जानकारों का मानना है कि इस तरह के ‘कोल्ड ब्लडेड मर्डर’ के मामलों में आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए।

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8th Pay Commission News: केंद्रीय कर्मियों के वेतन में रिकॉर्ड वृद्धि तय, DA 60% होते ही फिटमेंट फैक्टर का गणित साफ!

8th pay commission update image

8th Pay Commission Latest Update 2026: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए साल 2026 की सबसे बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन और महंगाई भत्ते (DA) के 60% के आंकड़े को पार करने के साथ ही अब वेतन वृद्धि की तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार फिटमेंट फैक्टर में होने वाला बदलाव पिछले एक दशक की सबसे बड़ी सैलरी हाइक लेकर आएगा।

DA 60% का लैंडमार्क: जनवरी 2026 से नया समीकरण

ताजा CPI-IW आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 से महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) 60% के स्तर पर पहुंच चुका है। नियमतः, जब DA एक निश्चित सीमा को पार करता है, तो उसे बेसिक पे (Basic Pay) में मर्ज करने की मांग प्रबल हो जाती है। इस बार 60% DA का मतलब है कि कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी में न केवल महंगाई भत्ता जुड़ेगा, बल्कि बेसिक सैलरी का ढांचा भी पूरी तरह बदल जाएगा। मार्च 2026 में होने वाली कैबिनेट बैठक में इस पर अंतिम मुहर लग सकती है।

8th pay commission image

फिटमेंट फैक्टर 1.60 और DA मर्जर: कैसे बढ़ेगी सैलरी?

8वें वेतन आयोग में सबसे बड़ा पेंच ‘फिटमेंट फैक्टर’ को लेकर है। वर्तमान संकेतों के अनुसार, न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर को 1.60 पर सेट किया जा सकता है। इसका सीधा गणित यह है कि अगर किसी कर्मचारी की मौजूदा बेसिक पे 50,000 रुपये है और उसे 60% DA (30,000 रुपये) मिल रहा है, तो नया बेसिक पे इन दोनों को जोड़कर करीब 80,000 रुपये के आसपास तय होगा। इसके बाद DA फिर से 0% से शुरू होगा, जिससे भविष्य में वेतन वृद्धि का रास्ता और साफ हो जाएगा।

किसे कितना होगा फायदा?

पे-मैट्रिक्स के लेवल 1 से लेकर लेवल 18 तक के कर्मचारियों के लिए यह आयोग नई उम्मीदें लेकर आया है।

  • लेवल 1 (न्यूनतम वेतन): जो कर्मचारी अभी 18,000 रुपये बेसिक ले रहे हैं, उनका नया वेतन 28,800 रुपये से 30,000 रुपये के बीच होने का अनुमान है।
  • लेवल 10 (राजपत्रित अधिकारी): 56,100 रुपये बेसिक वाले अधिकारियों का नया वेतन सीधे 90,000 रुपये के पार जा सकता है।
  • पेंशनर्स: 65 लाख से अधिक पेंशनभोगियों के लिए फिटमेंट फैक्टर लागू होने से उनकी मासिक पेंशन में 30% से 35% की सीधी बढ़ोतरी देखी जाएगी।

8th pay commission

8th CPC कार्यान्वयन की टाइमलाइन और एरियर का गणित

यद्यपि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जा रही हैं, लेकिन पूर्ण कार्यान्वयन में 2027 तक का समय लग सकता है। ऐसी स्थिति में सरकार 2026 से लेकर कार्यान्वयन की तिथि तक का पूरा एरियर (Arrears) कर्मचारियों को देगी। कर्मचारी यूनियनों ने मांग की है कि फिटमेंट फैक्टर को 1.60 के बजाय 2.86 किया जाए, ताकि बढ़ती महंगाई का मुकाबला किया जा सके।

बजट 2026 और विशेषज्ञों की राय

आगामी बजट 2026 में वित्त मंत्रालय 8वें वेतन आयोग के लिए अलग से फंड का प्रावधान कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फिटमेंट फैक्टर 2.15 पर सेटल होता है, तो औसत केंद्रीय कर्मचारी की सैलरी में 64,000 रुपये तक का वार्षिक लाभ जुड़ सकता है। यह कदम न केवल कर्मचारियों की क्रय शक्ति बढ़ाएगा बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को भी गति देगा।

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Ghaziabad Suicide Case: क्या आपके बच्चों को भी है गेम की लत? 3 बहनों की मौत ने खोली आंखें (सावधान)

Ghaziabad Suicide Case Mobile Addiction

क्या आपके बच्चे भी घंटों अपने कमरे में बंद रहते हैं? क्या उनके हाथ में भी उनका ‘पर्सनल मोबाइल’ है? अगर हाँ, तो गाजियाबाद (Ghaziabad) से आई यह खबर आपके पैरों तले जमीन खिसका देगी।

आज सुबह भारत सिटी सोसाइटी में जो हुआ, वो सिर्फ एक हादसा नहीं है। एक ही घर की तीन सगी बहनों (उम्र 12, 14 और 16 साल) ने 9वीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी। पुलिस जांच में जो वजह सामने आई है, वो हत्या या डिप्रेशन नहीं, बल्कि एक ‘ऑनलाइन गेम’ और ‘मोबाइल की दुनिया’ है। आज हम इस घटना की तह तक जाएंगे और जानेंगे कि कैसे एक गेम ने तीन हंसती-खेलती जिंदगियां निगल लीं और आपके बच्चे इस खतरे से कितने दूर हैं?

9वीं मंजिल और वो खौफनाक सुबह

घटना विजयनगर इलाके की है। एक मध्यम वर्गीय परिवार, सब कुछ सामान्य था। लेकिन आज सुबह तीनों बहनों ने बालकनी से छलांग लगा दी।

  • सुसाइड नोट: पुलिस को मौके से एक नोट मिला है, जिस पर लिखा था— “Sorry Mummy Papa, हम अच्छे बच्चे नहीं बन पाए।”
  • जांच में खुलासा: पुलिस का कहना है कि ये बच्चियां पिछले 2-3 सालों से (COVID के समय से) मोबाइल पर बहुत ज्यादा समय बिता रही थीं। उन्हें एक “कोरियन टास्क-बेस्ड गेम” (Korean Game) की लत लग चुकी थी।

यह गेम उन्हें ‘वर्चुअल दुनिया’ में ले गया जहाँ ‘वर्चुअल लवर्स’ (Virtual Lovers) और अजीबोगरीब टास्क होते थे। धीरे-धीरे उन्हें असली दुनिया और अपने माता-पिता ‘बोरिंग’ लगने लगे।

Ghaziabad Case Suicide Note by the 3 children
apnivani

मनोरंजन या धीमा जहर? (Entertainment vs Trap)

यहाँ सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मोबाइल बच्चों के बेडरूम तक पहुंचा कैसे? लॉकडाउन में पढ़ाई के लिए दिए गए मोबाइल अब ‘खिलौने’ बन चुके हैं।

  • असली समस्या: मनोरंजन के लिए 1 या 2 घंटे गेम खेलना बुरा नहीं है। लेकिन जब आपका बच्चा खाना, सोना और परिवार छोड़कर सिर्फ स्क्रीन में खोया रहे, तो यह एडिक्शन (Addiction) है।
  • दिमाग हाईजैक: कम उम्र में बच्चों के दिमाग में ‘Maturity’ (परिपक्वता) नहीं होती। उन्हें लगता है कि गेम की दुनिया ही सच है। जब गेम का कोई टास्क पूरा नहीं होता या वर्चुअल दोस्त कुछ कहता है, तो वो जान देने जैसे कदम उठा लेते हैं।

क्या 10वीं से पहले ‘पर्सनल फोन’ देना जरूरी है?

इस हादसे ने एक कड़वी सच्चाई हमारे सामने रखी है। आजकल माता-पिता 6ठी या 7वीं क्लास के बच्चे को भी पर्सनल स्मार्टफोन दिला देते हैं। हमसे पूछिए, तो यह सबसे बड़ी गलती है। जब बच्चे के पास अपना पर्सनल फोन और पासवर्ड होता है, तो माता-पिता की निगरानी (Supervision) खत्म हो जाती है।

बंद कमरे में वो किससे चैट कर रहा है, कौन सा हिंसक गेम खेल रहा है, आपको भनक तक नहीं लगती। नियम बनाएं और कक्षा 10वीं तक बच्चे को पर्सनल फोन न दें। अगर जरूरत हो, तो अपना फोन दें और वो भी हॉल या कॉमन रूम में इस्तेमाल करने की शर्त पर।

Mobile Addiction children
credit – Times of India

माता-पिता सावधान! (Warning Signs)

गाजियाबाद वाला हादसा किसी के भी घर में हो सकता है, अगर हम समय रहते न चेते। अपने बच्चों में ये बदलाव आज ही चेक करें:

  • व्यवहार में बदलाव: अगर बच्चा अचानक चुप रहने लगे या छोटी बात पर आक्रामक (Aggressive) हो जाए।
  • स्क्रीन छिपाना: आपके कमरे में आते ही फोन बंद कर देना या स्क्रीन पलटा देना।
  • नींद की कमी: आँखों के नीचे काले घेरे और रात भर ऑनलाइन रहना।
  • दोस्तों से दूरी: असली दोस्तों से मिलना छोड़कर ऑनलाइन दोस्तों में ज्यादा रुचि लेना।

ApniVani क्या कहती है (Our Verdict)

गाजियाबाद की उन तीन बहनों को हम वापस नहीं ला सकते, लेकिन उनकी मौत हमें एक मौका दे रही है—सुधरने का। टेक्नोलॉजी को अपने बच्चे का ‘मालिक’ न बनने दें। उनकी नाराजगी सह लें, लेकिन उनके हाथ में वो ‘मौत का सामान’ (अनियंत्रित मोबाइल) न दें। आज ही अपने बच्चे से बात करें, उसका फोन चेक करें और उसे वर्चुअल दुनिया से बाहर निकालें।

आपकी राय: क्या सरकार को 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए गेमिंग पर सख्त कानून बनाना चाहिए? कमेंट में अपनी राय जरूर लिखें।

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Bihar Bird Flu Alert: चिकन खाने के शौकीन सावधान! अभी थाली से दूर रखें नॉन-वेज, जानें 5 खतरनाक लक्षण (Naugachia रिपोर्ट)

Bird Bird Flu Alert

अगर आप संडे को चिकन-मटन पार्टी करने की सोच रहे हैं, तो जरा रुकिए! बिहार में एक बार फिर बर्ड फ्लू (Bird Flu/Avian Influenza) का खतरा मंडराने लगा है। उत्तरी बिहार (North Bihar) के कई जिलों में पक्षियों की संदिग्ध मौत ने प्रशासन और आम जनता की नींद उड़ा दी है। ताजा मामला नौगछिया (Naugachia) इलाके का है, जहाँ बड़ी संख्या में कौवे (Crows) मृत पाए गए हैं। कौवों का इस तरह अचानक मरना किसी बड़े खतरे की घंटी से कम नहीं है।

आज की इस रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि क्या अभी चिकन और अंडा खाना सुरक्षित है? और अगर आप नॉन-वेज के शौकीन हैं, तो आपको किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

नौगछिया में हड़कंप: कौवों की मौत का रहस्य

बर्ड फ्लू की शुरुआत अक्सर जंगली पक्षियों, खास तौर पर कौवों से होती है। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, नौगछिया और आसपास के इलाकों में कई जगहों पर कौवे मृत अवस्था में मिले हैं।

  • खतरे की घंटी: जब भी किसी इलाके में कौवे मरते हैं, तो यह माना जाता है कि H5N1 वायरस हवा में फैल चुका है।
  • प्रशासन अलर्ट: पशुपालन विभाग ने सैंपल जांच के लिए भेज दिए हैं, लेकिन एहतियात के तौर पर लोगों को मृत पक्षियों से दूर रहने की सलाह दी गई है। यह वायरस बहुत तेजी से एक पक्षी से दूसरे पक्षी और फिर इंसानों में फैल सकता है।
Bird Flu in chicken
Credit-Vox

नॉन-वेज खाने वाले ध्यान दें: क्या चिकन खाना चाहिए?

यह इस वक्त का सबसे बड़ा सवाल है। क्या कड़ाही में पकने के बाद भी वायरस जिंदा रहता है? WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के अनुसार, 70 डिग्री सेल्सियस पर पकाने से वायरस मर जाता है। लेकिन खतरा खाने में नहीं, उसे घर लाने और बनाने में है। कच्चा मांस (Raw Meat) है असली दुश्मन: जब आप बाजार से कच्चा चिकन खरीदते हैं, उसे धोते हैं या काटते हैं, तो उस वक्त संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा होता है। संक्रमण का डर: कच्चे मांस के छींटे, खून या पंख के जरिए वायरस आपकी सांसों में जा सकता है।

हमारी सलाह: जब तक स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो जाती और सरकारी रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक चिकन और अंडों से दूरी बनाना ही समझदारी है। जान है तो जहान है, स्वाद के लिए अपनी सेहत से खिलवाड़ न करें।

H5N1 virus or Bird Flu Virus
Scientific American

इंसानों में कैसे फैलता है यह वायरस?

बर्ड फ्लू सिर्फ पक्षियों की बीमारी नहीं है। अगर कोई इंसान किसी संक्रमित पक्षी (मुर्गी, बत्तख या कौवा) के संपर्क में आता है, तो वह भी बीमार पड़ सकता है।

यह वायरस (H5N1) इतना खतरनाक है कि यह सीधे फेफड़ों पर हमला करता है। जो लोग पोल्ट्री फार्म में काम करते हैं या जो घर पर खुद चिकन साफ करते हैं, वे ‘हाई रिस्क’ जोन में हैं।

बर्ड फ्लू के लक्षण (Symptoms in Humans)

अगर आपने हाल ही में चिकन खाया है या पक्षियों के संपर्क में आए हैं और आपको नीचे दिए गए लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो इसे सामान्य फ्लू समझकर नजरअंदाज न करें:

  • तेज बुखार: अचानक शरीर का तापमान बढ़ना।
  • सांस लेने में तकलीफ: छाती में जकड़न और सांस फूलना।
  • मांसपेशियों में दर्द: पूरे शरीर में अकड़न महसूस होना।
  • गले में खराश और खांसी: लगातार सूखी खांसी आना।
  • आंखों में जलन (Conjunctivitis): कभी-कभी आंखों का लाल होना भी इसका लक्षण है।

अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

Bird Flu symptoms
apnivani

बचाव के उपाय: खुद को और परिवार को कैसे बचाएं?

डरने की जरूरत नहीं है, बस थोड़ी सावधानी आपको सुरक्षित रख सकती है:

  • मृत पक्षियों से दूर रहें: अगर आपके छत या आसपास कोई पक्षी मरा हुआ मिले, तो उसे नंगे हाथों से बिल्कुल न छुएं। तुरंत नगर निगम या स्वास्थ्य विभाग को सूचित करें।
  • हाथ धोते रहें: बाहर से आने के बाद और खाना खाने से पहले साबुन से हाथ अच्छी तरह धोएं।
  • मास्क का प्रयोग करें: अगर आप ऐसे इलाके में जा रहे हैं जहां पक्षियों की तादाद ज्यादा है (जैसे पोल्ट्री मार्केट), तो मास्क जरूर पहनें।
  • अधपका भोजन न करें: अगर आप अंडे या चिकन खा भी रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि वह पूरी तरह से उबला हुआ (Boiled) या पका हुआ हो। ‘हाफ-फ्राय’ या ‘कच्चा अंडा’ खाने से बचें।

ApniVani की बातें (Conclusion)

बिहार में बर्ड फ्लू की आहट ने चिंता बढ़ा दी है। नौगछिया की घटना को हल्के में नहीं लिया जा सकता। एक जागरूक नागरिक होने के नाते, यह हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम अफवाहों से बचें लेकिन सावधानी पूरी बरतें। कुछ दिनों के लिए नॉन-वेज का त्याग आपके और आपके परिवार की सुरक्षा के लिए एक बेहतर कदम हो सकता है।

आपकी राय: क्या आपको लगता है कि एहतियात के तौर पर चिकन की बिक्री पर कुछ दिन रोक लगनी चाहिए? कमेंट में अपनी राय जरूर लिखें।

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Baramulla earthquake 2026: जम्मू-कश्मीर में 4.6 तीव्रता के झटकों ने बढ़ाई दहशत

Baramulla

जम्मू-कश्मीर के Baramulla जिले में 2 फरवरी 2026 को सुबह तड़के आए 4.6 तीव्रता के भूकंप ने कश्मीर घाटी को हिला दिया। रिक्टर स्केल पर मापी गई इस तीव्रता ने लोगों को कड़ाके की सर्दी में घरों से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया, हालांकि कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, यह भूकंप Baramulla के पट्टन क्षेत्र में केंद्रित था, जिसकी गहराई लगभग 10 किलोमीटर रही। बारामूला भूकंप की यह घटना क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता को फिर से उजागर करती है।

Baramulla earthquake
जम्मू-कश्मीर में 4.6 तीव्रता के झटकों

भूकंप का समय और तीव्रता: विस्तृत जानकारी

बारामूला भूकंप सुबह ठीक 5:35 बजे IST पर आया, जब अधिकांश लोग गहरी नींद में थे। NCS की प्रारंभिक रिपोर्ट में तीव्रता 4.6 बताई गई, जबकि कुछ स्रोतों ने इसे 4.7 तक मापा। 4.6 तीव्रता वाले भूकंप में आमतौर पर हल्के से मध्यम झटके महसूस होते हैं, जो इमारतों को हिला सकते हैं लेकिन सामान्यतः नुकसान नहीं पहुंचाते। इस बारामूला भूकंप 2026 में झटके 10-15 सेकंड तक रहे, जिससे श्रीनगर तक कंपन महसूस हुआ। जम्मू कश्मीर भूकंप की यह घटना पिछले कुछ महीनों में क्षेत्र में आए कई हल्के झटकों की कड़ी का हिस्सा लगती है।

झटके महसूस हुए इन इलाकों में

बारामूला भूकंप के झटके मुख्य रूप से कश्मीर घाटी के उत्तरी और मध्य हिस्सों में महसूस किए गए। बारामूला जिले के पट्टन, सोपोर और उरी जैसे क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहे, जहां लोग चीखते-चिल्लाते घरों से बाहर भागे। श्रीनगर, पुलवामा, गांदरबल, कुपवाड़ा और हंदवाड़ा में भी हल्के झटके दर्ज हुए। कुछ रिपोर्ट्स में पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों तक कंपन पहुंचने का जिक्र है। जम्मू कश्मीर भूकंप 4.6 ने सर्द मौसम में पहले से तनावग्रस्त क्षेत्र को और सतर्क कर दिया। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) ने सभी जिलों से रिपोर्ट मांगी, लेकिन नुकसान न होने की पुष्टि हुई।

कोई हताहत या नुकसान नहीं: राहत की खबर

सौभाग्य से, बारामूला में 4.6 तीव्रता के भूकंप से कोई हताहत या संपत्ति को नुकसान नहीं हुआ। SDMA और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत अलर्ट जारी कर स्थिति का जायजा लिया। लोग घबराकर मस्जिदों और खुली जगहों पर इकट्ठा हो गए, लेकिन क्षतिग्रस्त इमारत या सड़क का कोई समाचार नहीं। यह जम्मू कश्मीर भूकंप 2026 की तीव्रता को देखते हुए सकारात्मक है। भूकंपरोधी इमारतों और जनजागरूकता ने बड़ी तबाही टलवाई।

जम्मू-कश्मीर की भूकंपीय स्थिति: क्यों संवेदनशील?

जम्मू-कश्मीर हिमालयन बेल्ट पर स्थित है, जो दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में शुमार है। बारामूला भूकंप 2026 इसकी पुष्टि करता है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर से लगातार झटके आते रहते हैं। पिछले साल क्षेत्र में कई 4+ तीव्रता वाले भूकंप दर्ज हो चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कश्मीर घाटी जोन-IV और V में आती है, जहां भूकंपरोधी निर्माण अनिवार्य है। बारामूला भूकंप ने फिर याद दिलाया कि तैयारी ही सुरक्षा है।

Baramulla earthquake
जम्मू-कश्मीर में 4.6 तीव्रता के झटकों

भविष्य के लिए सलाह: सुरक्षित रहें

बारामूला भूकंप के बाद प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। नागरिकों को ड्रॉप, कवर एंड होल्ड ऑन का पालन करना चाहिए। भूकंप ऐप्स डाउनलोड करें और इमरजेंसी किट तैयार रखें। जम्मू कश्मीर भूकंप 4.6 जैसी घटनाएं सामान्य हैं, लेकिन सतर्कता से नुकसान रोका जा सकता है। NCS लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है।

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Budget 2026 Market Crash: बजट आते ही क्यों धड़ाम हुआ शेयर बाजार और सोना-चांदी? गिरावट के 3 असली कारण जो हर निवेशक को जानने चाहिए

Budget 2026 Market Crash

1 फरवरी को जैसे ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 पेश किया, उम्मीद थी कि बाजार झूमेगा। लेकिन हुआ इसका ठीक उल्टा। सेंसेक्स और निफ्टी ने गोता लगा दिया और सोने-चांदी के भाव ऐसे गिरे जैसे किसी ने आसमान से पत्थर फेंक दिया हो। आम आदमी और छोटे निवेशक (Retail Investors) डरे हुए हैं। हर किसी के मन में बस एक ही सवाल है— “आखिर बजट तो आ गया, फिर ये भारी गिरावट क्यों?”

क्या यह डरने का वक्त है या खरीदारी का? आज हम इस गिरावट का गहरा विश्लेषण (Deep Analysis) करेंगे और आपको बताएंगे वो 3 बड़े कारण जो इस ‘खून-खराबे’ (Blood Bath) के जिम्मेदार हैं।

सोना-चांदी क्यों गिरा? (यह ‘बुरी’ नहीं, ‘अच्छी’ खबर है)

सबसे पहले बात करते हैं गोल्ड और सिल्वर की, जिनके दाम में भारी गिरावट आई है। लोग सोच रहे हैं कि सोने की वैल्यू कम हो गई, लेकिन सच कुछ और है। कस्टम ड्यूटी में कटौती (Customs Duty Cut): बजट 2026 में सरकार ने सोने और चांदी पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी (Import Tax) को घटा दिया है। जब टैक्स कम होता है, तो चीज़ें सस्ती होती हैं। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर सोना विदेश से खरीदता है। जैसे ही टैक्स कम हुआ, सोने की कीमत अपने आप 4,000 से 5,000 रुपये तक गिर गई।

सरल भाषा में यह गिरावट इसलिए नहीं है कि लोग सोना बेच रहे हैं, बल्कि इसलिए है क्योंकि सरकार ने इसे सस्ता कर दिया है। जिनके पास पहले से सोना था, उन्हें वैल्यू कम लग रही है, लेकिन जो अब खरीदना चाहते हैं, उनके लिए यह लॉटरी है।

Nirmala Sitharaman

शेयर बाजार क्यों क्रैश हुआ? (The Stock Market Crash)

शेयर बाजार का गिरना थोड़ा चिंताजनक है। इसके पीछे बजट से जुड़ी दो बड़ी निराशाएं हैं।

पहला कारण: कैपिटल गेन्स टैक्स का डर (Capital Gains Tax Hike)

शेयर बाजार के निवेशकों को सबसे ज्यादा डर ‘टैक्स’ से लगता है। इस बजट में सरकार ने शेयर बाजार से होने वाली कमाई पर टैक्स (STCG और LTCG) को थोड़ा बढ़ा दिया है। बाजार को यह बिल्कुल पसंद नहीं आया। निवेशकों को लगा कि अब उनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा सरकार ले जाएगी। इसी गुस्से और डर में बड़े निवेशकों (FIIs) ने अपने शेयर बेचने शुरू कर दिए, जिससे बाजार धड़ाम से नीचे आ गया।

दूसरा कारण: मिडिल क्लास की ‘जेब’ खाली रह गई

शेयर बाजार चलता है कंपनियों के मुनाफे से। और कंपनियां मुनाफा तब कमाती हैं जब मिडिल क्लास सामान खरीदता है। बाजार को उम्मीद थी कि सरकार मिडिल क्लास को टैक्स में बड़ी छूट देगी, जिससे लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा आएगा और वो खरीदारी करेंगे। लेकिन बजट में टैक्स स्लैब में कोई खास बदलाव नहीं हुआ। इससे यह संदेश गया कि अगले एक साल तक डिमांड (Demand) कम रह सकती है। इसलिए FMCG और ऑटो सेक्टर के शेयर टूट गए।

Narendra Modi and market crash
apnivani

‘ओवरवैल्यूएशन’ का गुब्बारा फूटना था

बजट तो बस एक बहाना था, सच्चाई यह है कि भारतीय बाजार पहले से ही बहुत महंगा(Overvalued) हो चुका था।

  • गुब्बारा: पिछले 6 महीनों से मार्केट लगातार ऊपर जा रहा था, बिना किसी ठोस कारण के। हर शेयर अपनी असली कीमत से दोगुने-तिगुने दाम पर बिक रहा था।
  • सुई: बजट ने बस उस गुब्बारे में सुई चुभाने का काम किया। बड़े निवेशक (Big Bulls) बस एक मौके की तलाश में थे कि कब प्रॉफिट बुक करें और निकल जाएं। बजट की थोड़ी सी निराशा ने उन्हें यह मौका दे दिया।

अब आपको क्या करना चाहिए? (ApniVani की सलाह)

बाजार में जब भी खून-खराबा होता है, समझदार निवेशक घबराते नहीं हैं।

  • सोना-चांदी: अगर आप शादी-ब्याह के लिए जेवर बनवाना चाहते थे, तो यह खरीदारी का बेस्ट टाइम है। ड्यूटी कम होने का फायदा उठाएं।
  • शेयर बाजार: अगर आप लम्बे समय (Long Term) के खिलाडी हैं, तो अपनी SIP बंद न करें। जब बाजार गिरता है, तो आपको कम दाम में ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं।
  • पैनिक सेलिंग: डरकर अपना पोर्टफोलियो खाली न करें। बजट का असर 1-2 हफ्ते में खत्म हो जाएगा और बाजार फिर अपनी चाल पकड़ लेगा।

क्या ये हमेशा के लिए है ?

यह गिरावट स्थायी (Permanent) नहीं है। यह बस एक ‘करेक्शन’ है जो बाजार की सेहत के लिए जरूरी था।

आपकी राय: क्या आपने इस गिरावट में खरीदारी की या डर के मारे अपने शेयर बेच दिए? कमेंट करके हमें जरूर बताएं!

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ड्राइवरों को मिली बड़ी राहत: टोल प्लाजा पर अब कोई झंझट नहीं ,1 फरवरी 2026 से FASTag KYV प्रक्रिया समाप्त

टोल प्लाजा

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने देश के करोड़ों वाहन चालकों के लिए नए साल का सबसे बड़ा तोहफा पेश किया है। 1 फरवरी 2026 से नए FASTag जारी करने की पूरी प्रक्रिया में एक क्रांतिकारी बदलाव किया गया है, जिसके तहत ‘Know Your Vehicle’ (KYV) वेरिफिकेशन को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। पहले यह अनिवार्य प्रक्रिया टोल प्लाजा पर लंबी कतारों, भारी कागजी कार्रवाई और यात्रियों के लिए अनावश्यक मानसिक परेशानी का प्रमुख कारण बनती थी।

अब नई कार, जीप या वैन खरीदने वालों को FASTag एक्टिवेट करने के बाद किसी भी अतिरिक्त भौतिक या डिजिटल सत्यापन के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यह फैसला NHAI को मिली उन हजारों शिकायतों के बाद लिया गया है, जिनमें ड्राइवरों ने वैध दस्तावेज होने के बावजूद पोस्ट-एक्टिवेशन जांच के नाम पर होने वाली देरी पर नाराजगी जताई थी।

टोल प्लाजा
FASTag KYV प्रक्रिया समाप्त

KYV प्रक्रिया क्या थी और इसे क्यों हटाया गया?

KYV या ‘अपने वाहन को जानें’ प्रक्रिया वास्तव में FASTag जारी होने के बाद वाहन के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC), बीमा और पेंडिंग चालान के विवरण को मैन्युअल या डिजिटल तरीके से दोबारा जांचने का एक सिस्टम था। इसका मुख्य उद्देश्य टैग के दुरुपयोग को रोकना था, लेकिन धरातल पर यह सिस्टम टोल गेट्स पर अक्सर 10 से 15 मिनट की अतिरिक्त देरी का कारण बन रहा था। NHAI ने अब सरकार के ‘VAHAN’ पोर्टल की बढ़ती क्षमता और डेटा की सटीकता पर भरोसा जताते हुए इसे हटाने का निर्णय लिया है।

डिजिटल इंडिया के इस दौर में अब फिजिकल KYV की कोई प्रासंगिकता नहीं रह गई है। 1 फरवरी के बाद जारी होने वाले सभी नए टैग्स पर यह राहत लागू होगी, जिससे नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक का प्रवाह और भी अधिक सुगम हो जाएगा।

किन वाहनों को मिलेगी विशेष छूट: प्राइवेट बनाम कमर्शियल

NHAI के इस नए सर्कुलर के अनुसार, यह बड़ी राहत मुख्य रूप से ‘प्राइवेट’ श्रेणी के वाहनों जैसे निजी कार, जीप और वैन मालिकों के लिए ही है। इन वाहन स्वामियों को अब टोल प्लाजा पर स्थापित KYV काउंटरों पर रुकने या अपने दस्तावेजों को स्कैन करवाने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि बस, ट्रक और मल्टी-एक्सल जैसे ‘कमर्शियल’ वाहनों के लिए पुराने नियम ही लागू रहेंगे।

वाणिज्यिक वाहनों में टैग की हेराफेरी की संभावना अधिक होने के कारण उनमें सख्त सत्यापन जारी रहेगा। NHAI के अनुसार, यदि कोई प्राइवेट वाहन चालक टैग का गलत इस्तेमाल करता पाया गया, तो उस पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

पुराने FASTag धारकों के लिए क्या बदलेगा?

अगर आपके पास पहले से ही सक्रिय FASTag है, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। 1 फरवरी के बदलावों के बाद पुराने टैग धारकों के लिए भी वेरिफिकेशन का झंझट लगभग खत्म हो गया है। अब आपको बार-बार KYV अपडेट करने के लिए किसी बैंक या टोल केंद्र के चक्कर नहीं काटने होंगे। NHAI ने स्पष्ट किया है कि जब तक आपका वाहन डेटा VAHAN पोर्टल पर सही है और आपका बीमा सक्रिय है,

तब तक आपका टैग सुचारू रूप से काम करता रहेगा। हालांकि, विशेषज्ञों की सलाह है कि पुराने टैग यूजर्स एक बार NHAI ऐप या अपने संबंधित बैंक पोर्टल पर जाकर यह सुनिश्चित कर लें कि उनका मोबाइल नंबर और वाहन विवरण सही ढंग से लिंक है।

टोल प्लाजा
FASTag KYV प्रक्रिया समाप्त

ड्राइवरों को होने वाले लाभ और भविष्य की राह

इस ऐतिहासिक कदम से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि करोड़ों लीटर ईंधन की भी बचत होगी। आंकड़ों के अनुसार, टोल प्लाजा पर रुकने और दोबारा शुरू होने में खर्च होने वाला समय कम होने से ट्रैफिक जाम में 20% तक की कमी आने की उम्मीद है। अब ई-कॉमर्स वेबसाइट्स या बैंक ऐप से FASTag खरीदना और उसे तुरंत उपयोग करना बेहद आसान हो जाएगा।

NHAI आने वाले समय में SAT (सैटेलाइट आधारित टोलिंग) जैसे और भी उन्नत सिस्टम लाने की योजना बना रहा है, जिससे भविष्य में फिजिकल टोल गेट्स की जरूरत ही खत्म हो जाएगी। कुल मिलाकर, 1 फरवरी से शुरू हो रहा यह नया नियम भारतीय सड़कों को और अधिक ‘स्मार्ट’ और यात्रियों के लिए ‘फ्रेंडली’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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Patna Police का ‘ऑपरेशन क्लीन’: 80 लाख की नशीली सिरप के साथ अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़, 6 गिरफ्तार

Patna

बिहार की राजधानी Patna में नशीली दवाओं के सौदागरों के खिलाफ पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी चोट की है। Patna Police की विशेष टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए ‘खांटी सिरप’ (कोडीन युक्त कफ सिरप) की एक विशाल खेप पकड़ी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की कीमत लगभग 80 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस ने इस मामले में गिरोह के मुख्य सरगना सहित 6 शातिर तस्करों को दबोचने में कामयाबी हासिल की है। यह पूरी कार्रवाई पटना सिटी के मालसलामी और दीदारगंज थाना क्षेत्रों में अंजाम दी गई।

Patna Police
Patna Police

डाक पार्सल और मसालों की आड़ में ‘सफेद जहर’ की सप्लाई

तस्करों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए तस्करी का बेहद शातिर तरीका अपनाया था। जब्त की गई सिरप की बोतलों को डाक विभाग के फर्जी पार्सल और तेज पत्तों की बोरियों के नीचे छिपाकर लाया जा रहा था। पुलिस ने छापेमारी के दौरान कुल 4485 लीटर प्रतिबंधित सिरप बरामद की, जो 289 अलग-अलग कार्टन में पैक थी। जांच में पता चला है कि यह खेप हिमाचल प्रदेश की एक फार्मा कंपनी से फर्जी कागजातों के जरिए मंगवाई गई थी और इसे पटना के स्थानीय बाजारों के साथ-साथ सीमावर्ती जिलों में सप्लाई किया जाना था।

सरगना ‘गन्नी’ सहित 6 तस्कर पुलिस की गिरफ्त में

इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता गिरोह के मास्टरमाइंड सूर्यप्रकाश उर्फ ‘गन्नी’ की गिरफ्तारी है। गन्नी पटना के कदमकुआं इलाके का रहने वाला है और लंबे समय से शहर में नशीली दवाओं के वितरण नेटवर्क को नियंत्रित कर रहा था। उसके साथ गिरफ्तार किए गए अन्य पांच आरोपियों में ट्रक ड्राइवर और लोकल एजेंट शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इन आरोपियों का जाल बिहार के कटिहार, सहरसा और वैशाली तक फैला हुआ था। ये लोग हिमाचल से माल मंगवाकर उसे ऊंचे दामों पर युवाओं और नशेड़ियों को बेचते थे।

हिमाचल प्रदेश से बिहार तक जुड़ा तस्करी का नेटवर्क

वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि बिहार में नशीली दवाओं की जड़ें अन्य राज्यों से जुड़ी हैं। डीएसपी डॉ. गौरव कुमार ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि गिरोह के सदस्य हिमाचल प्रदेश के इंडस्ट्रियल एरिया से सीधे संपर्क में थे। ट्रक (टाटा 407) और अन्य वाणिज्यिक वाहनों का उपयोग कर वे चेकपोस्टों को पार कर जाते थे क्योंकि ऊपर से डाक पार्सल या किराने का सामान लदा होता था। पुलिस अब उन कंपनियों की भी जांच कर रही है जहां से यह सिरप बिना वैध लाइसेंस के रिलीज किया गया था।

युवाओं के भविष्य पर प्रहार: बिहार में ‘खांटी’ का बढ़ता चलन

बिहार में शराबबंदी के बाद से कोडीन युक्त कफ सिरप (जिसे स्थानीय भाषा में ‘खांटी’ कहा जाता है) की मांग नशे के विकल्प के रूप में बढ़ी है। यह न केवल स्वास्थ्य के लिए घातक है, बल्कि युवाओं को अपराध की ओर भी धकेल रहा है। पटना पुलिस की इस कार्रवाई से ड्रग माफियाओं की कमर टूटी है। एसएसपी ने स्पष्ट किया है कि ‘मिशन सुरक्षा’ के तहत शहर के स्कूल-कॉलेजों और झुग्गी बस्तियों में सक्रिय छोटे डीलरों पर भी नकेल कसी जाएगी।

Patna Police
Patna Police का ‘ऑपरेशन क्लीन’

पुलिस की अपील

पटना पुलिस की यह उपलब्धि नशा मुक्त बिहार के संकल्प की ओर एक बड़ा कदम है। पुलिस ने एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में छापेमारी जारी है। पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उनके आस-पास ऐसी कोई संदिग्ध गतिविधि या नशीली दवाओं की बिक्री दिखे, तो तुरंत पुलिस हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें।

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होली-छठ 2026: घर जाने की राह हुई पथरीली! ट्रेनों में लंबी वेटिंग और हवाई किराए में 40% का उछाल, जानें कैसे पहुचें घर

होली

त्योहारों का सीजन आते ही प्रवासी भारतीयों और उत्तर भारतीयों के लिए अपने घर पहुंचना एक बड़ी चुनौती बन गया है। होली 2026 (3-4 मार्च) और आगामी छठ पर्व के लिए दिल्ली, मुंबई और गुजरात जैसे बड़े शहरों से बिहार और उत्तर प्रदेश जाने वाली ट्रेनों में टिकटों की भारी मारामारी शुरू हो गई है। आलम यह है कि फरवरी के आखिरी हफ्ते से लेकर मार्च के पहले हफ्ते तक प्रमुख ट्रेनों में कन्फर्म सीटें मिलना लगभग नामुमकिन हो गया है।

होली
ट्रेनों में लंबी वेटिंग

प्रमुख ट्रेनों में ‘नो रूम’: वेटिंग लिस्ट भी हुई बंद

दिल्ली से पटना, दरभंगा, मुजफ्फरपुर और वाराणसी जाने वाली ट्रेनों जैसे संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस, बिहार संपर्क क्रांति, श्रमजीवी और मगध एक्सप्रेस में 25 फरवरी से 10 मार्च तक स्लीपर और एसी कोच पूरी तरह फुल हो चुके हैं। कई ट्रेनों में तो वेटिंग लिस्ट इतनी लंबी हो गई है कि रेलवे ने ‘नो रूम’ (No Room) का बोर्ड लगा दिया है, यानी अब उनमें वेटिंग टिकट भी नहीं मिल रहे हैं।

जेब पर भारी ‘त्योहार’: किराए में 30-40% की बढ़ोतरी

यात्रियों को न केवल सीटों की कमी, बल्कि महंगे किराए का भी सामना करना पड़ रहा है।

• डायनामिक प्राइसिंग: प्रीमियम ट्रेनों में डायनामिक प्राइसिंग और तत्काल के चलते स्लीपर क्लास का टिकट 500-800 रुपये और एसी कोच का किराया 2,000 रुपये तक महंगा हो गया है।

• हवाई किराया: फ्लाइट के टिकटों में भी 40% तक की बढ़ोतरी देखी गई है। दिल्ली से पटना का जो किराया सामान्य दिनों में 4,000 रुपये के आसपास रहता था, वह पीक डेट्स पर 10,000 रुपये के पार पहुंच गया है।

होली स्पेशल ट्रेनों का इंतजार: कब आएगी लिस्ट?

यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए रेलवे बोर्ड जल्द ही ‘होली स्पेशल ट्रेनों’ की घोषणा करने वाला है।

• अपेक्षित रूट्स: आनंद विहार-सहरसा, नई दिल्ली-राजेंद्र नगर (पटना), दिल्ली-दरभंगा और मुंबई-वाराणसी जैसे रूट्स पर स्पेशल ट्रेनें चलाने की योजना है।

• लिस्ट कब आएगी: संभावना है कि 10 से 15 फरवरी के बीच रेलवे 100 से ज्यादा स्पेशल ट्रेनों का शेड्यूल जारी करेगा। पिछले पैटर्न के अनुसार, आनंद विहार और नई दिल्ली से बिहार के लिए कई जोड़ी स्पेशल गाड़ियाँ (जैसे 04093/04094) चलाई जा सकती हैं।

होली-छठ 2026
ट्रेनों में लंबी वेटिंग

यात्रियों के लिए सलाह: घर पहुंचने के स्मार्ट तरीके

• वैकल्पिक रूट्स: यदि मुख्य ट्रेनों में जगह नहीं है, तो कनेक्टिंग ट्रेनों या बस सेवाओं का उपयोग करें।

• फ्लाइट टाइमिंग: यदि आप फ्लाइट से जाना चाहते हैं, तो देर रात की फ्लाइट चुनकर आप 4-5 हजार रुपये तक बचा सकते हैं।

• वंदे भारत एक्सप्रेस: थोड़ी महंगी होने के बावजूद वंदे भारत में अन्य ट्रेनों की तुलना में सीट मिलने की संभावना थोड़ी अधिक रहती है।

• तत्काल बुकिंग: यात्रा से एक दिन पहले सुबह 10 बजे (AC) और 11 बजे (Sleeper) के लिए IRCTC ऐप पर एक्टिव रहें।

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बिहार बनेगा ग्लोबल टेक हब: नीतीश कैबिनेट ने GCC और सेमीकंडक्टर नीति को दी मंजूरी, 50 करोड़ की सब्सिडी और 2 लाख नौकरियों की सौगात!

बिहार

बिहार अब केवल खेती और श्रम शक्ति के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया की बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) और हाई-टेक उद्योगों के केंद्र के रूप में पहचाना जाएगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में दो ऐतिहासिक नीतियों— बिहार वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC) नीति-2026 और सेमीकंडक्टर नीति-2026 को मंजूरी दे दी गई है। इस बड़े फैसले का उद्देश्य बिहार को नवाचार और तकनीक का वैश्विक केंद्र बनाना है।

नीतीश कैबिनेट ने GCC और सेमीकंडक्टर

GCC नीति-2026: बड़ी कंपनियों को बुलावा और भारी सब्सिडी

नई जीसीसी नीति के तहत कॉल सेंटर, वित्तीय सेवाएं, डेटा एनालिटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई (AI) जैसे क्षेत्रों में निवेश करने वाली कंपनियों को बिहार सरकार बंपर प्रोत्साहन देगी।

50 करोड़ तक का अनुदान: जो भी कंपनियां बिहार में अपना केंद्र स्थापित करेंगी, उन्हें उनके कुल पूंजीगत व्यय (Plant & Machinery) का 30% तक अनुदान मिलेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 50 करोड़ रुपये तय की गई है।

स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता: यदि कंपनियां बिहार के स्थानीय युवाओं को रोजगार देती हैं, तो उन्हें भर्ती और पेरोल खर्च में अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जाएगा।

सेमीकंडक्टर नीति: 2 लाख रोजगार और 25,000 करोड़ का निवेश

बिहार सरकार ने भविष्य की तकनीक ‘सेमीकंडक्टर’ पर भी बड़ा दांव खेला है। इस नीति के जरिए राज्य में चिप डिजाइनिंग, फैब्रिकेशन और डिस्प्ले फैब जैसे उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा।

रोजगार का सृजन: इस नीति से राज्य में 2 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

निवेश का लक्ष्य: सरकार का लक्ष्य इसके माध्यम से लगभग 25,000

नीतीश कैबिनेट ने GCC और सेमीकंडक्टर

करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करना है। यह नीति बिहार को देश के उन चुनिंदा राज्यों की श्रेणी में खड़ा कर देगी जिनके पास अपनी समर्पित सेमीकंडक्टर पॉलिसी है।

आवेदन प्रक्रिया: कैसे उठाएं लाभ?

उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार के अनुसार, इच्छुक कंपनियां बिहार उद्योग विभाग के आधिकारिक पोर्टल (industry.bihar.gov.in) या ‘बिहार बिजनेस कनेक्ट’ के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगी।

सिंगल विंडो क्लीयरेंस: निवेशकों को भटकना न पड़े, इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए वेरिफिकेशन किया जाएगा।

दस्तावेज: कंपनियों को अपना प्रोजेक्ट रिपोर्ट, निवेश योजना और रोजगार का खाका जमा करना होगा।

सत्यापन और भुगतान: प्रोजेक्ट पूरा होने और विभाग द्वारा भौतिक सत्यापन के बाद सब्सिडी की राशि सीधे बैंक खाते में जारी की जाएगी।

बिहार की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?

इन नीतियों के लागू होने से बिहार की छवि एक ‘इंडस्ट्रियल स्टेट’ के रूप में उभरेगी। हाई-स्किल जॉब्स के कारण बिहार के युवाओं का पलायन रुकेगा और उन्हें अपने ही राज्य में उच्च वेतन वाली नौकरियां मिलेंगी। साथ ही, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) बढ़ने से राज्य के राजस्व और निर्यात में भी भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है।

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कर्ज मांगने वाले का सिर हमेशा झुका रहता है” – पाकिस्तान पीएम शहबाज शरीफ का छलका दर्द

पाकिस्तान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में देश की खराब आर्थिक हालत पर एक बड़ा और भावुक बयान दिया है। इस्लामाबाद में देश के बड़े बिजनेसमैन और एक्सपोर्टर्स को सम्मानित करने के लिए रखे गए एक कार्यक्रम में उन्होंने माना कि पाकिस्तान आज जिस दौर से गुजर रहा है, वहां उसे अपनी ‘इज्जत’ तक दांव पर लगानी पड़ रही है।

पाकिस्तान पीएम शहबाज शरीफ

मजबूरी में झुकना पड़ता है सिर

शहबाज शरीफ ने बड़े ही साफ शब्दों में कहा कि जब कोई देश दूसरों से कर्ज मांगने जाता है, तो उसे अपना सिर झुकाकर ही रहना पड़ता है। उन्होंने स्वीकार किया कि बार-बार विदेशी कर्ज (खासकर IMF से) लेने की वजह से पाकिस्तान को अपने आत्मसम्मान (Self-respect) से समझौता करना पड़ा है। पीएम ने बड़े दुख के साथ कहा कि कर्ज की शर्तों को मानने के चक्कर में देश को कई ऐसे फैसले लेने पड़े जो शायद एक आजाद देश के तौर पर उसे पसंद न आते।

आखिर क्यों आई ऐसी नौबत?

पाकिस्तान की माली हालत पिछले कई सालों से नाजुक बनी हुई है। आज के समय में पाकिस्तान पर करीब 130 अरब डॉलर से ज्यादा का विदेशी कर्ज है, जो उसकी जीडीपी (GDP) का लगभग 80% हिस्सा है।

महंगाई की मार: पाकिस्तान में महंगाई 25% से भी ऊपर पहुंच गई है।

कड़ी शर्तें: IMF (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) से लोन लेने के बदले पाकिस्तान को बिजली महंगी करनी पड़ी, टैक्स बढ़ाने पड़े और सब्सिडी खत्म करनी पड़ी।

विदेशी मुद्रा की कमी: देश के पास अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार बेहद कम बचा है।

व्यापारियों से बड़ी अपील

इस समारोह के दौरान पीएम शरीफ ने देश के उद्योगपतियों और निर्यातकों (Exporters) से एक गुजारिश की। उन्होंने कहा कि कर्ज के इस जाल से निकलने का सिर्फ एक ही रास्ता है— ‘निर्यात (Exports) बढ़ाना’। उन्होंने बिजनेस लीडर्स से अपील की कि वे दुनिया भर में पाकिस्तानी सामान बेचें ताकि देश में डॉलर आए और उन्हें बार-बार IMF के सामने हाथ न फैलाना पड़े।

पाकिस्तान पीएम शहबाज शरीफ

राजनीतिक घमासान और चुनौतियां

शरीफ का यह बयान आते ही पाकिस्तान की राजनीति में हलचल मच गई है। विपक्ष इसे सरकार की नाकामी बता रहा है, वहीं आम जनता इस बात से परेशान है कि कर्ज की किश्तें चुकाने के लिए उनकी जेबों पर बोझ डाला जा रहा है। चीन, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों ने मदद तो की है, लेकिन पाकिस्तान को खुद के पैरों पर खड़ा होने के लिए अभी एक लंबी लड़ाई लड़नी होगी।

प्रधानमंत्री का यह बयान इस बात की तरफ इशारा करता है कि पाकिस्तान अब समझ चुका है कि सिर्फ कर्ज लेकर देश नहीं चलाया जा सकता। आत्मनिर्भरता ही एकमात्र रास्ता है, वरना दुनिया के मंच पर अपनी बात मजबूती से रखना मुश्किल हो जाएगा।

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Darbhanga Bird Flu News : 10,000 कौओं की मौत के बाद H5N1 की पुष्टि, क्या इंसानों को है खतरा?

Bird Flu

बिहार के दरभंगा जिले से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। पिछले कुछ दिनों से आसमान से गिरते मृत कौओं के रहस्य से अब पर्दा उठ गया है। जांच रिपोर्ट में आधिकारिक तौर पर H5N1 वायरस (Bird Flu) की पुष्टि हो गई है। प्रशासन ने पूरे जिले में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

आखिर क्या है पूरा मामला?

Darbhanga Bird Flu

दरभंगा के नगर निगम क्षेत्र (वार्ड नंबर 31) स्थित भिगो श्मशान घाट (मुक्तिधाम) पिछले कुछ दिनों से पक्षियों के कब्रिस्तान में तब्दील हो गया था। स्थानीय लोगों ने देखा कि अचानक बड़ी संख्या में कौए पेड़ से गिरकर मर रहे हैं। देखते ही देखते यह संख्या सैकड़ों से हजारों में पहुंच गई। समाजसेवी संस्थाओं और स्थानीय पार्षदों के हस्तक्षेप के बाद जब सैंपल भोपाल की लैब भेजे गए, तो रिपोर्ट ने सबकी नींद उड़ा दी—यह खतरनाक एवियन इन्फ्लूएंजा (H5N1) था।

मौत का आंकड़ा और प्रशासनिक हलचल

शुरुआती सरकारी आंकड़ों में एक हजार कौओं की मौत की बात कही गई थी, लेकिन स्थानीय सूत्रों और रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक लगभग 10,000 पक्षी अपनी जान गंवा चुके हैं। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए:

• मुक्तिधाम परिसर के पास जेसीबी से गहरे गड्ढे खुदवाकर मृत पक्षियों को वैज्ञानिक तरीके से दफनाया है।

• संक्रमित क्षेत्र के 5 किलोमीटर के दायरे को ‘सेंसिटिव जोन’ घोषित कर दिया गया है।

• अगले आदेश तक इस क्षेत्र में पोल्ट्री (मुर्गा-बत्तख) की बिक्री और परिवहन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

क्या इंसानों के लिए भी है खतरा?

H5N1 वायरस मुख्य रूप से पक्षियों को प्रभावित करता है, लेकिन यह इंसानों में भी फैल सकता है। यदि कोई व्यक्ति संक्रमित पक्षी के सीधे संपर्क में आता है या उसके मल-मूत्र के संपर्क में आता है, तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। दरभंगा प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी मृत पक्षी को हाथ न लगाएं।

बर्ड फ्लू से बचाव के रामबाण उपाय

अगर आप दरभंगा या इसके आस-पास के क्षेत्रों में रह रहे हैं, तो ये सावधानियां जरूर बरतें:

पक्षियों से दूरी: छत, मुंडेर या सड़क पर कोई मृत पक्षी दिखे तो उसे छुएं नहीं। इसकी सूचना तुरंत हेल्पलाइन या पशुपालन विभाग को दें।

चिकन और अंडा: अगर आप मांसाहारी हैं, तो मांस और अंडे को 70°C से ऊपर अच्छी तरह पकाकर ही खाएं। अधपका मांस बिल्कुल न लें।

साफ-सफाई: बाहर से आने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं। सैनिटाइजर का प्रयोग करें और भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनें।

Darbhanga Bird Flu

पोल्ट्री फार्म से दूरी: फिलहाल कुछ दिनों के लिए पोल्ट्री फार्म या चिड़ियाघर जैसी जगहों पर जाने से बचें।

लक्षणों पर नजर: यदि आपको अचानक तेज बुखार, खांसी, गले में खराश या सांस लेने में तकलीफ महसूस हो, तो इसे सामान्य सर्दी न समझें और तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

दरभंगा में बर्ड फ्लू की दस्तक एक गंभीर चेतावनी है। प्रशासन अपना काम कर रहा है, लेकिन नागरिकों की सतर्कता ही इस वायरस की चेन को तोड़ने में मदद करेगी। अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं का पालन करें।

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Cigarette Price Hike 2026 सिगरेट पीने वालों को लगेगा बड़ा झटका! 1 फरवरी से धुआं उड़ाना होगा और भी महंगा: जानें नई कीमतें

Ciggerate price hike 2026

Cigarette Price Hike 2026: अगर आप भी सिगरेट या तंबाकू उत्पादों का सेवन करते हैं, तो आपकी जेब पर बोझ बढ़ने वाला है। केंद्र सरकार ने तंबाकू उत्पादों पर लगाम लगाने और स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। 1 फरवरी 2026 से देश में सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर नया टैक्स नियम लागू होने जा रहा है। इस खबर में हम आपको विस्तार से बताएंगे कि आपकी पसंदीदा सिगरेट कितनी महंगी होगी और सरकार के इस कड़े कदम के पीछे का असली उद्देश्य क्या है।

1 फरवरी 2026 से लागू होगा नया एक्साइज ड्यूटी नियम

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, 1 फरवरी से सिगरेट, गुटखा और पान मसाला जैसे सभी तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) प्रभावी हो जाएगी। केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम में किए गए इस संशोधन का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बदलाव के बाद तंबाकू उत्पादों की कीमतों में 20% से 40% तक की भारी बढ़ोतरी देखी जा सकती है। यह नया टैक्स मौजूदा 40% GST के ऊपर लगेगा, जिससे कुल टैक्स का बोझ 54% से बढ़कर लगभग 66% तक पहुंच जाएगा, जो कि एक रिकॉर्ड स्तर है।

Cigarette

सिगरेट की लंबाई के आधार पर तय होंगी नई दरें

सरकार ने टैक्स लगाने के लिए सिगरेट की लंबाई और उसके प्रकार (फिल्टर या नॉन-फिल्टर) को आधार बनाया है। प्रति 1000 स्टिक पर एक्साइज ड्यूटी अब 2050 रुपये से लेकर 8500 रुपये तक तय की गई है। उदाहरण के तौर पर देखें तो छोटी नॉन-फिल्टर सिगरेट (65 मिमी तक) पर प्रति स्टिक लगभग 2.05 रुपये की बढ़ोतरी होगी। वहीं, मध्यम लंबाई वाली फिल्टर सिगरेट (65-70 मिमी) पर 3.60 से 4.00 रुपये और प्रीमियम लंबी सिगरेट (70-75 मिमी) पर 5.40 रुपये प्रति स्टिक तक का इजाफा हो सकता है।

सरल शब्दों में कहें तो, जो सिगरेट आज आप 10 रुपये में खरीदते हैं, वह अब 13 से 14 रुपये की मिलेगी, जबकि 20 रुपये वाली सिगरेट के लिए आपको 25 से 28 रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं।

टैक्स बढ़ाने के पीछे सरकार का मुख्य तर्क

सरकार के इस फैसले के पीछे कई ठोस कारण हैं, जिनमें सार्वजनिक स्वास्थ्य सबसे ऊपर है। भारत में तंबाकू के सेवन से होने वाली बीमारियों, जैसे कैंसर और हृदय रोग के इलाज पर सरकार को हर साल अरबों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। एक आंकड़े के मुताबिक, भारत में हर साल लगभग 13 लाख लोग तंबाकू के कारण अपनी जान गंवाते हैं। सरकार का मानना है कि कीमतों में बढ़ोतरी करने से लोग धूम्रपान कम करेंगे, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाला बोझ घटेगा। इसके अलावा, इस कदम से सरकार को सालाना करीब 5000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने की भी उम्मीद है, जिसका उपयोग जनहित की योजनाओं में किया जा सकेगा।

Cigarette price hike

क्या वाकई कम हो जाएगी धूम्रपान करने वालों की संख्या?

ऐतिहासिक डेटा और वैश्विक अध्ययनों से यह साबित हुआ है कि जब भी तंबाकू उत्पादों की कीमतें बढ़ती हैं, तो उसकी खपत में गिरावट आती है। Crisil Ratings की एक रिपोर्ट के अनुसार, 1 फरवरी से लागू होने वाले नए टैक्स की वजह से सिगरेट की बिक्री में अगले वित्त वर्ष के दौरान 6-8% की गिरावट आ सकती है। WHO का भी मानना है कि कीमतों में 10% की वृद्धि होने पर खपत में लगभग 5% की कमी आती है। खासकर युवा वर्ग और कम आय वाले लोग, जो कीमतों के प्रति संवेदनशील होते हैं, वे बढ़ते दामों के कारण इस आदत को छोड़ने या कम करने का प्रयास कर सकते हैं।

नियम लागू होने से पहले ही बढ़े दाम

हैरानी की बात यह है कि नया नियम 1 फरवरी से लागू होना है, लेकिन देश के कई शहरों में दुकानदारों ने अभी से ही कीमतें बढ़ा दी हैं। कई जगहों से ऐसी शिकायतें आ रही हैं कि 10 रुपये वाली सिगरेट 12 रुपये में और 18 रुपये वाली सिगरेट 21-22 रुपये में बेची जा रही है। उपभोक्ता इस मनमानी से काफी परेशान हैं। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि आधिकारिक रूप से टैक्स 1 फरवरी से ही बढ़ेगा, और समय से पहले अवैध रूप से दाम बढ़ाने वाले दुकानदारों पर कार्रवाई की जा सकती है। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे प्रिंट रेट से ज्यादा पैसे न दें और जरूरत पड़ने पर शिकायत दर्ज कराएं।

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UGC New Rules Stayed: सुप्रीम कोर्ट की रोक! ये हैं वो 3 खतरनाक नियम जिन पर हुआ बवाल

UGC new rule stay by supreme court

भेदभाव (Discrimination) एक अपराध है और इसे खत्म होना ही चाहिए। लेकिन क्या एक बुराई को खत्म करने के लिए दूसरी गलती करना सही है?

आज सुप्रीम कोर्ट ने UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के उन नए नियमों पर ‘स्टे’ (Stay)लगा दिया है, जो कॉलेज कैंपस में भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए थे। सुनने में अजीब लग सकता है कि कोर्ट भेदभाव विरोधी कानून को क्यों रोकेगा? लेकिन असल वजह वह ‘असीमित शक्ति’ (Unlimited Power) है जो बिना किसी जवाबदेही के दी जा रही थी। आज के ब्लॉग में हम विश्लेषण करेंगे कि क्यों सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नियम बनाना ठीक है, लेकिन “कानून की आड़ में एकतरफा कार्रवाई” नहीं चलेगी।

वो 3 खतरनाक नियम/कमियां जिन पर कोर्ट ने लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट और छात्रों को मुख्य रूप से इन 3 बातों पर आपत्ति थी, जो नए ड्राफ्ट में शामिल थीं:

  1. सिर्फ एकतरफा शिकायत का अधिकार: नए नियमों के तहत सिर्फ आरक्षित वर्ग (SC/ST/OBC) के छात्र ही भेदभाव की शिकायत कर सकते थे। अगर किसी जनरल कैटेगरी के छात्र के साथ जाति के आधार पर बदसलूकी होती, तो उसके लिए शिकायत का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं था।
  2. ‘दोषी मान लेने’ की जल्दबाजी (Presumption of Guilt): नियमों में कॉलेज प्रशासन पर दबाव था कि शिकायत मिलते ही सख्त कार्रवाई हो। इससे डर था कि बिना पूरी जांच किए, सिर्फ आरोप के आधार पर किसी प्रोफेसर या छात्र का करियर बर्बाद किया जा सकता है।
  3. झूठी शिकायत पर कोई सजा नहीं: सबसे बड़ी कमी यह थी कि अगर किसी ने रंजिश में आकर ‘फर्जी शिकायत’ (Fake Complaint) की, तो शिकायत करने वाले को क्या सजा मिलेगी, इसका कोई कड़ा प्रावधान नहीं था। यानी हथियार तो दे दिया, लेकिन सेफ्टी लॉक नहीं लगाया।

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि यह नियम “Too Sweeping” (बहुत व्यापक) है और इसका इस्तेमाल न्याय के लिए कम और ‘बदला’ लेने के लिए ज्यादा हो सकता है।

UGC new rule protest
News 18 hindi

अनलिमिटेड पावर: लोकतंत्र में कोई राजा नहीं

आपकी और हमारी सुरक्षा के लिए पुलिस है, लेकिन क्या पुलिस को यह पावर दी जा सकती है कि वह बिना सबूत किसी को भी जेल में डाल दे? नहीं। ठीक वैसे ही, UGC का यह नियम प्रशासन को अनलिमिटेड पावर दे रहा था।

चेक एंड बैलेंस (Checks and Balances): किसी भी कानून में ‘लिमिटेशन’ होनी चाहिए।

अगर किसी छात्र ने रंजिश में आकर प्रोफेसर या साथी छात्र पर झूठा आरोप लगा दिया, तो नए नियमों के तहत उसका करियर बर्बाद हो सकता था। सुप्रीम कोर्ट का संदेश साफ है— “आप एक वर्ग को बचाने के लिए दूसरे वर्ग को असुरक्षित नहीं छोड़ सकते।” न्याय का तराजू दोनों तरफ बराबर होना चाहिए।

अब वो दौर नहीं रहा (वक़्त बदल गया है)

हमें यह कड़वा सच स्वीकार करना होगा कि 2026 का भारत 1950 का भारत नहीं है। बेशक, जातिगत भेदभाव आज भी कुछ जगहों पर है और उसे कुचलना जरूरी है। लेकिन क्या हर सामान्य वर्ग (General Category) का छात्र अत्याचारी है? आज कॉलेज में पढ़ने वाला जनरल कैटेगरी का छात्र भी उसी बेंच पर बैठता है, उसी कैंटीन में खाता है।

ऐसे में, ऐसे कानून बनाना जो यह मानकर चलें कि “गलती हमेशा एक ही पक्ष की होगी”, समाज को जोड़ने के बजाय तोड़ने का काम करेगा।

Supreme court
IP leaders

असली मुद्दा: जाति या आर्थिक स्थिति?

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने फिर उस बहस को हवा दे दी है जिसे अक्सर दबा दिया जाता है। क्या अब वक्त आ गया है कि हम ‘जाति’ (Caste) से ऊपर उठकर ‘कमज़ोर’ (Weak) की मदद करें? एक गरीब जनरल छात्र और एक गरीब SC/ST छात्र—दोनों की समस्या ‘फीस’ और ‘किताबें’ हैं, जाति नहीं।

अगर UGC वाकई कैंपस का माहौल सुधारना चाहता है, तो उसे ऐसे नियम बनाने चाहिए जो Economically Backward (आर्थिक रूप से पिछड़े) छात्रों को ताकत दें, चाहे वे किसी भी धर्म या जाति के हों। सजा जाति देखकर नहीं, बल्कि गुनाह देखकर मिलनी चाहिए।

ApniVani की सोच (Final Verdict)

सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाकर यह साबित कर दिया है कि संविधान भावनाओं से नहीं, तर्कों से चलता है। नियम जरूरी हैं। सख्त नियम और भी जरूरी हैं। लेकिन वो नियम निष्पक्ष (Neutral) होने चाहिए। अगर हम किसी को ‘अनलिमिटेड पावर’ देंगे, तो कल उसका शिकार कोई बेगुनाह भी हो सकता है। यह रोक एक मौका है—UGC के लिए, ताकि वो दोबारा सोचे और ऐसा कानून लाए जो सबको सुरक्षा दे, किसी को डर नहीं।

आपकी राय: क्या आपको लगता है कि कॉलेज में झूठी शिकायतों के लिए भी सख्त सजा का प्रावधान होना चाहिए? कमेंट में अपनी राय जरूर लिखें।

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AIIMS Darbhanga Main Gate सोशल मीडिया पर वायरल: 10 साल के इंतजार पर मीम्स की बाढ़, आखिर कब बनेगा पूरा अस्पताल?

AIIMS Darbhanga Main gate

AIIMS Darbhanga में प्रस्तावित दूसरे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के निर्माण को लेकर एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। इस बार चर्चा का कारण अस्पताल की आधुनिक मशीनें या सुविधाएं नहीं, बल्कि इसका निर्माणाधीन ‘मुख्य द्वार’ (Main Gate) है। सोशल मीडिया पर AIIMS Darbhanga main gate की तस्वीरें इतनी तेजी से वायरल हो रही हैं कि लोगों ने इस पर मीम्स बनाना शुरू कर दिया है। घोषणा के 10 साल बाद भी जब लोगों को सिर्फ गेट और बाउंड्री वॉल नजर आई, तो उनका धैर्य जवाब दे गया। आइए जानते हैं क्या है पूरी हकीकत और क्यों सोशल मीडिया पर लोग इसे ‘दुनिया का सबसे महंगा गेट’ बता रहे हैं।

क्यों वायरल हो रहा है AIIMS दरभंगा का गेट?

बीते कुछ दिनों से X (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर खूब साझा की जा रही है, जिसमें दरभंगा AIIMS का भव्य प्रवेश द्वार दिखाई दे रहा है। लोग इस पर तंज कसते हुए लिख रहे हैं कि “10 साल में बिहार को सिर्फ एक गेट मिला है।” कुछ यूजर्स ने तो इसे ‘हवा महल’ की उपमा दे दी है, जहां दरवाजा तो है लेकिन पीछे अस्पताल गायब है।

यह विवाद तब गहराया जब लोगों ने इसकी तुलना अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स से करनी शुरू की। वायरल पोस्ट्स में सवाल उठाया जा रहा है कि क्या 1263 करोड़ रुपये का बजट सिर्फ इस चारदीवारी और गेट के लिए था? स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे सालों से एक बड़े अस्पताल का सपना देख रहे हैं ताकि उन्हें इलाज के लिए पटना या दिल्ली न भागना पड़े, लेकिन फिलहाल उन्हें केवल पत्थर का एक ढांचा ही दिख रहा है।

AIIMS Darbhanga

निर्माण में देरी की असली वजह: क्यों अटका है प्रोजेक्ट?

दरभंगा AIIMS की कहानी साल 2015 के केंद्रीय बजट से शुरू हुई थी। तब से लेकर अब तक यह प्रोजेक्ट कई बाधाओं से गुजरा है। शुरुआत में जमीन को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच लंबी खींचतान चली। पहले इसे दरभंगा मेडिकल कॉलेज (DMCH) के परिसर में बनाने की बात थी, जिसे बाद में शोभन बाइपास के पास स्थानांतरित किया गया।

देरी के मुख्य कारणों में जमीन का लो-लैंड (नीचला इलाका) होना सबसे बड़ी समस्या है। वहां मिट्टी भराई का काम अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। इसके अलावा, मानसून के दौरान जलजमाव और तकनीकी सर्वे में लगने वाले समय ने भी काम की रफ्तार धीमी कर दी। टेंडर प्रक्रिया और डीपीआर (DPR) तैयार होने में भी सालों बीत गए, जिसके कारण आम जनता में अब भारी आक्रोश और निराशा देखने को मिल रही है।

अब तक क्या-क्या बना और आगे का प्लान क्या है?

प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति की बात करें तो निर्माण एजेंसी HSCIC इंडिया लिमिटेड के अनुसार काम तेजी से चल रहा है। निर्माण के पहले चरण में भूमि की घेराबंदी यानी बाउंड्री वॉल का काम प्राथमिकता पर रखा गया है। लगभग 5 किलोमीटर लंबी चारदीवारी और मुख्य द्वार का काम अब अंतिम चरणों में है, जिसकी लागत करीब 51 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

अस्पताल के निदेशक के अनुसार, मुख्य भवन और ओपीडी (OPD) सेवाओं के लिए सर्वे और सॉइल टेस्टिंग का काम पूरा कर लिया गया है। लक्ष्य रखा गया है कि साल 2028 तक अस्पताल का मुख्य ढांचा बनकर तैयार हो जाए और यहाँ मेडिकल की पढ़ाई (MBBS) शुरू कर दी जाए। पूरा अस्पताल 750 से 1000 बेड का होगा, जिसमें सुपर स्पेशियलिटी विभाग, ट्रॉमा सेंटर और आधुनिक लैब होंगी।

AIIMS Darbhanga Construction

मीम्स के जरिए जनता का दर्द

सोशल मीडिया पर चल रहे मीम्स सिर्फ मजाक नहीं, बल्कि उत्तर बिहार के करोड़ों लोगों का दर्द हैं। मिथिलांचल के लोगों के लिए दरभंगा AIIMS स्वास्थ्य सुविधाओं की जीवनरेखा है। नेपाल, सिक्किम और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों के मरीज भी इस अस्पताल पर निर्भर रहेंगे। जब लोग देखते हैं कि सालों बीतने के बाद भी धरातल पर केवल एक गेट खड़ा है, तो वे व्यंग्य का सहारा लेते हैं। एक यूजर ने लिखा, “बिहार में विकास का गेट तो खुल गया है, बस अंदर घुसने के लिए 5 साल और रुकिए।”

क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी?

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों और मंत्री मंगल पांडेय के बयानों के अनुसार, सरकार इस प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 13 नवंबर 2024 को किए गए शिलान्यास के बाद फंड और संसाधनों की कमी को दूर कर लिया गया है। अधिकारियों का दावा है कि एक बार मिट्टी भराई का काम पूरा हो जाने के बाद मुख्य बिल्डिंग का निर्माण युद्धस्तर पर शुरू होगा।

AIIMS दरभंगा का गेट वायरल होना इस बात का प्रतीक है कि अब जनता विकास के वादों पर नहीं, बल्कि हकीकत पर भरोसा करना चाहती है। उम्मीद है कि 2028 की समयसीमा इस बार जुमला साबित नहीं होगी और मिथिला की धरती पर जल्द ही एक विश्वस्तरीय अस्पताल बनकर तैयार होगा, जहाँ गेट के साथ-साथ डॉक्टर और दवाइयां भी उपलब्ध होंगी।

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Nipah Virus Symptoms : जानें लक्षण और बचाव के आसान तरीके

Nipah virus symptoms

पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस ने दी दस्तक! हाल ही में राज्य के उत्तर 24 परगना जिले से शुरू हुआ यह संक्रमण अब तेजी से पांव पसार रहा है। ताजा खबरों के मुताबिक, अब तक 5 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं, जिनमें डॉक्टर और नर्स जैसे स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल हैं। चूंकि इस वायरस का कोई सटीक टीका (Vaccine) नहीं है, इसलिए इसके बारे में सही जानकारी और सावधानी ही आपका सबसे बड़ा बचाव है।

क्या है निपाह वायरस और यह कैसे फैलता है?

निपाह वायरस (NiV) एक ‘ज़ूनोटिक’ बीमारी है, जिसका अर्थ है कि यह जानवरों से इंसानों में फैलती है। भारत में इसका मुख्य स्रोत ‘फ्रुगिवोरस बैट्स’ यानी फल खाने वाले चमगादड़ हैं। इसके अलावा, यह सूअरों के जरिए भी इंसानों तक पहुँच सकता है।

यह वायरस तब फैलता है जब कोई व्यक्ति:

  • चमगादड़ द्वारा कुतरे गए फल या दूषित भोजन खाता है।
  • खजूर का कच्चा रस पीता है जिसमें चमगादड़ की लार या मलमूत्र मिला हो।
  • किसी संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आता है (सांस की बूंदों या शारीरिक तरल पदार्थ के जरिए)।

Nipah virus

शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज

निपाह वायरस के लक्षण संक्रमण के 4 से 14 दिनों के भीतर दिखने लगते हैं। शुरुआत में यह एक सामान्य फ्लू जैसा लगता है, लेकिन इसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।

  • सामान्य संकेत: अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और अत्यधिक थकान।
  • गंभीर संकेत: गले में खराश, खांसी और सांस लेने में तकलीफ। कुछ मरीजों को मतली और उल्टी की शिकायत भी हो सकती है।
  • खतरनाक स्थिति: संक्रमण बढ़ने पर यह दिमागी सूजन (Encephalitis) का रूप ले लेता है, जिससे भ्रम होना, दौरे पड़ना और अंततः मरीज कोमा में जा सकता है। इसमें मृत्यु दर 40% से 75% तक देखी गई है।

Nipah virus information

लक्षण दिखने पर तुरंत क्या करें?

अगर आपको या आपके आसपास किसी को ऐसे लक्षण दिख रहे हैं, खासकर यदि आप प्रभावित इलाकों के संपर्क में रहे हैं, तो ये कदम उठाएं:

  • फौरन डॉक्टर से मिलें: बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल जाएं। शुरुआती इलाज से जान बचने की संभावना बढ़ जाती है।
  • खुद को आइसोलेट करें: घर के अन्य सदस्यों से दूरी बना लें और मास्क का प्रयोग करें।
  • पूरी जानकारी दें: डॉक्टर को अपनी ट्रैवल हिस्ट्री और संपर्क में आए लोगों के बारे में सही जानकारी दें ताकि ‘कांटेक्ट ट्रेसिंग’ की जा सके।

इन गलतियों से बचना है बेहद जरूरी

अक्सर लोग अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो संक्रमण को न्योता देती हैं:

  • खुले फल खाना: कभी भी जमीन पर गिरे हुए या पक्षियों द्वारा कुतरे गए फलों को न खाएं। फलों को अच्छी तरह धोकर और छीलकर ही इस्तेमाल करें।
  • कच्चा जूस पीना: खजूर का कच्चा रस (ताड़ी आदि) पीने से बचें, क्योंकि चमगादड़ अक्सर इन्हीं पेड़ों पर डेरा डालते हैं।
  • लापरवाही बरतना: संक्रमित व्यक्ति के बर्तन, कपड़े या बिस्तर शेयर न करें। यदि आप किसी मरीज की देखभाल कर रहे हैं, तो बिना PPE किट या मास्क-दस्ताने के उनके करीब न जाएं।
  • साफ-सफाई की कमी: हाथों को बार-बार साबुन से न धोना एक बड़ी गलती हो सकती है। कम से कम 20 सेकंड तक हाथ जरूर धोएं।

पश्चिम बंगाल में बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। नेपाल और थाईलैंड जैसे पड़ोसी देशों ने भी स्क्रीनिंग शुरू कर दी है। याद रखें, निपाह से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि जागरूक रहने की जरूरत है। अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल प्रमाणित स्वास्थ्य सुझावों का पालन करें।

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क्या है 5 मिनट 24 सेकंड के Viral Video Alina Amir का सच ? पाकिस्तानी टिकटॉकर ने मरियम नवाज से लगाई मदद की गुहार, आरोपी पर रखा इनाम!

Alina amir viral video truth

सोशल मीडिया की दुनिया में चमकने वाले सितारों के लिए टेक्नोलॉजी कभी-कभी जी का जंजाल बन जाती है। ताजा मामला पाकिस्तान की मशहूर टिकटॉकर अलीना अमीर (Alina Amir) का है, जिनका एक कथित आपत्तिजनक वीडियो इंटरनेट पर आग की तरह फैल गया है। हालांकि, अलीना ने इस पर चुप्पी तोड़ते हुए इसे ‘डिजिटल हिंसा’ करार दिया है। आइए जानते हैं क्या है इस वायरल वीडियो का पूरा सच।

Alina Amir image

वायरल वीडियो का असली सच: AI का खतरनाक खेल

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा था, जिसमें दावा किया जा रहा था कि यह अलीना अमीर का निजी वीडियो है। करीब 4 मिनट 40 सेकंड के इस वीडियो को लेकर इंटरनेट पर काफी बहस छिड़ी हुई थी। अलीना ने अब खुद सामने आकर इस पर से पर्दा उठाया है। उन्होंने सबूत पेश करते हुए बताया कि यह वीडियो पूरी तरह से AI (Artificial Intelligence) के जरिए बनाया गया एक ‘डीपफेक’ वीडियो है। उन्होंने अपनी असली फोटो और फेक वीडियो को साथ रखकर दिखाया कि कैसे तकनीक का गलत इस्तेमाल कर उनका चेहरा किसी और के शरीर पर लगाया गया है।

“चुप नहीं रहूंगी”: मरियम नवाज और साइबर सेल से अपील

एक हफ्ते की खामोशी के बाद अलीना ने इंस्टाग्राम पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने सीधे तौर पर पंजाब (पाकिस्तान) की मुख्यमंत्री मरियम नवाज को टैग करते हुए गुहार लगाई कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त से सख्त कदम उठाए जाएं जो महिलाओं की छवि खराब करने के लिए डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। अलीना ने पंजाब साइबर क्राइम विंग के बड़े अधिकारी सोहेल जफर चाथा से भी इस मामले में दखल देने की मांग की है। उन्होंने इसे सिर्फ एक वीडियो नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान पर हमला बताया है।

Alina amir about her viral video

दोषी को पकड़ने वाले को मिलेगा नकद इनाम

अलीना अमीर ने इस लड़ाई को अब व्यक्तिगत स्तर पर ले जाने का फैसला किया है। उन्होंने वीडियो में ऐलान किया कि जो भी व्यक्ति उस असली अपराधी या वीडियो बनाने वाले की पहचान बताएगा, उसे वे अपनी तरफ से नकद इनाम देंगी। अलीना का कहना है कि सजा मिलना इसलिए जरूरी है ताकि भविष्य में किसी और मासूम लड़की को इस तरह की मानसिक प्रताड़ना और बदनामी का सामना न करना पड़े। उन्होंने अन्य महिलाओं से भी अपील की कि अगर वे सच बोल रही हैं, तो उन्हें डरने की जरूरत नहीं है और उन्हें भी अपनी आवाज उठानी चाहिए।

इंटरनेट यूजर्स को चेतावनी: शेयर करने से पहले सोचें

सोशल मीडिया पर बढ़ती इस गंदगी के बीच अलीना ने अपने फैंस और आम जनता से एक भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि लोग बिना किसी जांच-पड़ताल के लिंक शेयर करने लगते हैं और मजे लेते हैं, लेकिन वे यह नहीं समझते कि इससे किसी की जिंदगी बर्बाद हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान में मिनाहिल मलिक और फातिमा जाटोई जैसी अन्य सेलिब्रिटीज भी इसी तरह की डिजिटल साजिश का शिकार हो चुकी हैं। यह मामला अब पूरी तरह कानूनी रूप ले चुका है और FIA (Federal Investigation Agency) की साइबर क्राइम विंग इस पर नजर बनाए हुए है।

अलीना अमीर का यह केस हमें याद दिलाता है कि आज के दौर में इंटरनेट पर दिख रही हर चीज सच नहीं होती। डीपफेक जैसी तकनीक किसी के भी चरित्र पर दाग लगा सकती है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री मरियम नवाज और पाकिस्तानी जांच एजेंसियां इस ‘डिजिटल विलेन’ तक कब तक पहुंच पाती हैं।

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गोपालगंज में इंसानियत शर्मसार : डेढ़ साल की मासूम से दरिंदगी, ग्रामीणों ने आरोपी को दबोचा

गोपालगंज

बिहार के गोपालगंज से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। गणतंत्र दिवस के उल्लास के बीच, नगर थाना क्षेत्र में एक डेढ़ साल की मासूम बच्ची के साथ हैवानियत की गई। इस घटना ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि समाज में फैल रही विकृति को भी उजागर किया है।

खेलते समय मासूम का अपहरण और दुष्कर्म

घटना नगर थाना क्षेत्र के एक गाँव की है, जहाँ महज डेढ़ साल की एक बच्ची अपने घर के दरवाजे पर खेल रही थी। इसी दौरान घात लगाए बैठे आरोपी ने उसे अकेला पाकर अगवा कर लिया और सुनसान जगह पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। जब बच्ची काफी देर तक नहीं दिखी, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। बच्ची लहूलुहान और बदहवास हालत में मिली, जिसके बाद इलाके में चीख-पुकार मच गई।

गोपालगंज

आरोपी की पहचान और ग्रामीणों का गुस्सा

वारदात को अंजाम देने वाले आरोपी की पहचान मोहम्मद शारीक (उर्फ सारीक) के रूप में हुई है। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले का रहने वाला है और गोपालगंज में एक बाइक शोरूम में पेंटर के तौर पर काम करता था। घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। स्थानीय लोगों ने घेराबंदी कर आरोपी को पकड़ लिया और उसकी जमकर पिटाई की। बाद में सूचना पाकर पहुंची डायल-112 की टीम ने आरोपी को भीड़ से बचाकर अपनी हिरासत में लिया।

पीड़िता की स्थिति और मेडिकल टीम का गठन

मासूम बच्ची की हालत अत्यंत नाजुक बताई जा रही है। उसे तुरंत गोपालगंज के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने चार विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम गठित की है, जो लगातार बच्ची की निगरानी कर रही है। डॉक्टरों के अनुसार, बच्ची को अंदरूनी चोटें आई हैं और उसे बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

गोपालगंज

24 घंटे में दूसरी बड़ी वारदात: पुलिस की कार्रवाई

हैरानी की बात यह है कि गोपालगंज में पिछले 24 घंटों के भीतर यौन शोषण की यह दूसरी बड़ी घटना है। इससे पहले एक किशोरी के साथ भी गैंगरेप का मामला सामने आया था। लगातार हो रही इन वारदातों से स्थानीय पुलिस प्रशासन बैकफुट पर है। सदर एसडीपीओ प्रांजल त्रिपाठी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ POCSO एक्ट और अन्य गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। एसपी विनय तिवारी ने आश्वासन दिया है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए FSL जांच कराई जा रही है और स्पीडी ट्रायल के जरिए आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी।

कानून व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा पर सवाल

गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व के दौरान ऐसी घटनाओं का होना पुलिस गश्त और सुरक्षा दावों की पोल खोलता है। गोपालगंज के निवासी इस समय गहरे डर और गुस्से में हैं। लोगों की मांग है कि मासूमों के साथ दरिंदगी करने वालों को समाज के सामने मिसाल बनाने वाली सजा दी जाए, ताकि भविष्य में कोई ऐसी हिम्मत न कर सके।

यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हमारे आस-पास के लोग भी कितने खतरनाक हो सकते हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह बाहरी जिलों या राज्यों से आकर काम करने वाले लोगों का वेरिफिकेशन सख्त करे और महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए।

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Padma Awards 2026 : धर्मेंद्र, ममूटी और अल्का याज्ञनिक के नाम रहा साल का सबसे बड़ा सम्मान, यहाँ पढ़ें पूरी रिपोर्ट

Padma Awards 2026

गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने देश के प्रतिष्ठित ‘Padma Awards 2026’ का एलान कर दिया है। इस वर्ष की सूची में सिनेमा से लेकर खेल और अध्यात्म तक की उन महान हस्तियों को शामिल किया गया है, जिन्होंने अपने अटूट समर्पण से राष्ट्र का गौरव बढ़ाया है। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को जहाँ देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से नवाजा गया है, वहीं सुरों की मलिका अल्का याज्ञनिक और दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज ममूटी को ‘पद्म भूषण’ देने की घोषणा की गई है।

सिनेमा और संगीत जगत का बढ़ा मान

इस साल पद्म पुरस्कारों में मनोरंजन जगत की बड़ी हस्तियों का दबदबा देखने को मिला। ‘ही-मैन’ के नाम से मशहूर धर्मेंद्र को उनके दशकों लंबे शानदार अभिनय करियर के लिए ‘पद्म विभूषण’ दिया जा रहा है। उनके साथ ही क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर को भी इसी श्रेणी में रखा गया है। संगीत की दुनिया में अपनी जादुई आवाज का लोहा मनवाने वाली अल्का याज्ञनिक और मलयलम फिल्मों के सुपरस्टार ममूटी को ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया है। इतना ही नहीं, ऑस्कर विजेता ए.आर. रहमान को भी पद्म भूषण की सूची में जगह मिली है, जो भारतीय कला के लिए एक गौरवशाली क्षण है।

Dharmendra

 

मरणोपरांत सम्मान और अध्यात्म का संगम

साल 2026 की यह घोषणा भावनाओं से भी भरी रही, क्योंकि भारत रत्न लता मंगेशकर को मरणोपरांत ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है। यह उनके संगीत के प्रति अमर योगदान को एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि है। वहीं, समाज में शांति और नैतिकता का संदेश फैलाने वाले माउंट आबू के स्वामी को ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया गया है। यह दर्शाता है कि सरकार ने न केवल ग्लैमर बल्कि जमीनी स्तर पर समाज सेवा और आध्यात्मिक चेतना जगाने वाले व्यक्तित्वों को भी पूरा सम्मान दिया है।

पुरस्कारों का सांख्यिकी विवरण और विविधता

इस वर्ष कुल 132 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की गई है, जो समाज के हर वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। पूरी सूची पर नजर डालें तो इसमें 6 पद्म विभूषण, 19 पद्म भूषण और 107 पद्म श्री पुरस्कार शामिल हैं। इस बार नारी शक्ति को भी विशेष महत्व दिया गया है, जिसके तहत 19 महिलाओं को इन सम्मानों के लिए चुना गया है। साथ ही, भारत के वैश्विक प्रभाव को देखते हुए 10 विदेशी नागरिकों और एनआरआई (NRI) को भी उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए पुरस्कृत किया जाएगा।

Padma Awards 2026

कैसे होता है इन विजेताओं का चयन?

पद्म पुरस्कार भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक हैं, जो कला, शिक्षा, चिकित्सा, साहित्य, विज्ञान और सार्वजनिक मामलों जैसे विभिन्न क्षेत्रों में ‘विशिष्ट कार्य’ के लिए दिए जाते हैं। इन पुरस्कारों की सिफारिश पद्म पुरस्कार समिति द्वारा की जाती है, जिसका गठन हर साल प्रधानमंत्री द्वारा किया जाता है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले एक विशेष नागरिक गरिमा समारोह में राष्ट्रपति इन सभी विजेताओं को पदक और सनद (प्रमाण पत्र) प्रदान करेंगे।

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Kaimur Shamed: सरस्वती विसर्जन में ‘अश्लीलता’ रोकने की सजा! बेटी को बीच सड़क पीटा, तमाशबीन बनाते रहे वीडियो (3 कड़वे सवाल)

Kaimur shamed in Saraswati puja

आज बिहार का कैमुर शर्मिंदा हुआ (Kaimur Shamed) है। रामगढ़ से जो खबर आई है, उसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। हम उस देश में रहते हैं जहाँ नारी को ‘देवी’ मानकर पूजा जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि उसी देवी (माँ सरस्वती) के विसर्जन जुलूस में एक ‘बेटी’ को जानवरों की तरह पीटा जाता है।
सिर्फ सोचकर ही गुस्सा आता है। उस बहादुर लड़की का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने डीजे (DJ) पर बज रहे गंदे और अश्लील गानों का विरोध किया था।

शनिवार की रात रामगढ़ के नरहन गांव में जो हुआ, वह कोई साधारण मारपीट नहीं थी। वह इस बात का सबूत है कि हम ‘भक्ति’ के नाम पर ‘गुंडागर्दी’ के दौर में जी रहे हैं।

Kaimur shamed police

क्या है पूरा मामला? (The Shameful Incident)

घटना शनिवार रात (Saturday Night) की है। रामगढ़ थाना क्षेत्र के नरहन गांव (Narhan Village) में सरस्वती पूजा के बाद मूर्ति विसर्जन का जुलूस निकाला जा रहा था।
कायदे से यह श्रद्धा का माहौल होना चाहिए था, लेकिन डीजे पर कान फोड़ने वाले वॉल्यूम में बेहद अश्लील और जातिसूचक भोजपुरी गाने बज रहे थे।
गांव की ही एक युवती से यह बर्दाश्त नहीं हुआ। उसने जुलूस रोककर कहा— “माता के विसर्जन में ऐसे गंदे गाने मत बजाओ, इसे बंद करो।”

डीजे बंद होना तो दूर, जुलूस में शामिल कुछ मनचलों और अराजक तत्वों का ‘अहं’ (Ego) हर्ट हो गया। उन्हें लगा कि एक लड़की उन्हें रोकने वाली कौन होती है?

विरोध की सजा: छेड़छाड़ और हैवानियत

सबसे बड़ी बात यह है कि समझाने के बजाय, उन दरिंदों ने युवती को बीच सड़क पर घेर लिया। पहले उसे भद्दी-भद्दी गालियां दी गईं। जब उसने विरोध किया, तो उसके साथ छेड़छाड़ (Molestation) शुरू कर दी गई। और जब वह खुद को बचाने के लिए चीखी, तो लाठी-डंडों, लात और घूंसों से उसकी बेरहमी से पिटाई की गई।
उसे तब तक मारा गया जब तक वह अधमरी होकर गिर नहीं गई। फिलहाल वह भभुआ सदर अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है।

‘नपुंसक’ भीड़: जो सिर्फ वीडियो बनाती रही

इस घटना का सबसे डरावना पहलू हमलावर नहीं, बल्कि वहां मौजूद भीड़ थी।
जिस वक्त उस बेटी को पीटा जा रहा था, वहां सैकड़ों लोग मौजूद थे। लेकिन किसी का हाथ उसे बचाने के लिए नहीं उठा। सबके हाथ में मोबाइल था। सब वीडियो (Video) बना रहे थे ताकि सोशल मीडिया पर ‘वायरल’ कर सकें।

सोचिए, उस बेटी पर क्या गुजरी होगी जब उसने देखा होगा कि उसके अपने गांव वाले, उसके पड़ोसी—सब तमाशबीन बनकर रील बना रहे हैं? यह साबित करता है कि स्मार्टफोन्स ने हमें स्मार्ट तो बना दिया, लेकिन हमारी ‘इंसानियत’ को मार दिया है।

Crowd of Saraswati puja kaimur shamed

भक्ति या गुंडागर्दी? (Devotion vs Hooliganism)

आज हमें यह सवाल पूछना ही होगा— सरस्वती पूजा में ‘चोली-घाघरा’ वाले गानों का क्या काम?
माँ सरस्वती ‘विद्या और संगीत’ की देवी हैं। उनके विसर्जन में शराब पीकर, डीजे पर अश्लील गानों पर नाचना कौन सी भक्ति है? बिहार और यूपी में यह एक बीमारी बन चुकी है।
प्रशासन की नाकामी: सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स हैं कि तेज आवाज़ और अश्लील गाने नहीं बजेंगे, लेकिन पुलिस अक्सर जुलूस के नाम पर आंखें मूंद लेती है। अगर पुलिस पहले ही सख्त होती, तो नरहन गांव में उन गुंडों की इतनी हिम्मत नहीं होती।

पुलिस एक्शन: अब तक क्या हुआ?

घटना के तूल पकड़ते ही प्रशासन की नींद टूटी है।
SP और DM की दौड़: मामले की गंभीरता को देखते हुए कैमूर के डीएम और एसपी खुद थाने पहुंचे।
FIR दर्ज: पुलिस ने पीड़िता के बयान पर एफआईआर दर्ज कर ली है।
गिरफ्तारी: वीडियो फुटेज के आधार पर एक मुख्य आरोपी को हिरासत में लिया गया है और बाकी की तलाश जारी है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या गिरफ्तारी से उस बेटी का दर्द कम हो जाएगा? क्या उसके मन से वह खौफ निकलेगा?

कब सुधरेगा समाज?

कैमूर की यह घटना (Kaimur Horror) सिर्फ एक न्यूज़ नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। अगर आज हम चुप रहे, तो कल यह हमारे घर की बेटी के साथ भी हो सकता है।
उस लड़की ने जो किया, वह ‘साहस’ था, और समाज ने जो किया, वह ‘कायरता’ थी। हमें प्रशासन से मांग करनी चाहिए कि आरोपियों को ऐसी सजा मिले कि अगली बार कोई डीजे पर अश्लीलता फैलाने से पहले सौ बार सोचे।
हमारा सवाल आपसे:
क्या विसर्जन जुलूसों में डीजे (DJ) पूरी तरह बैन हो जाना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर दें।

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गणतंत्र दिवस 2026: दिल्ली बनी अभेद्य किला! अल-कायदा आतंकी मोहम्मद रेहान के पोस्टर जारी, स्नाइपर और एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात

गणतंत्र दिवस

गणतंत्र दिवस ,26 जनवरी की परेड और गणतंत्र दिवस समारोह को लेकर पूरी दिल्ली इस समय ‘हाई अलर्ट’ पर है। राजधानी की सड़कों से लेकर आसमान तक, सुरक्षा का ऐसा पहरा बिठाया गया है कि परिंदा भी पर न मार सके। खुफिया एजेंसियों से मिले ‘गंभीर’ इनपुट्स के बाद दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को कई गुना बढ़ा दिया है।

इस साल की सुरक्षा व्यवस्था पिछले सालों की तुलना में काफी अलग और तकनीक से लैस है। पुलिस ने न केवल सुरक्षा बढ़ाई है, बल्कि आम जनता से भी सहयोग की अपील की है।

अल-कायदा आतंकी मोहम्मद रेहान की तलाश, शहर भर में लगे पोस्टर

दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अल-कायदा से जुड़े संदिग्ध आतंकी मोहम्मद रेहान समेत कई अन्य मोस्ट वांटेड संदिग्धों के पोस्टर सार्वजनिक किए हैं। ये पोस्टर रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में चस्पा किए गए हैं

गणतंत्र दिवस 2026

पुलिस का कहना है कि इन आतंकियों की मौजूदगी की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी व्यक्ति इन संदिग्धों के बारे में सटीक जानकारी देगा, उसे न केवल उचित इनाम दिया जाएगा, बल्कि उसकी पहचान भी पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी। यह कदम सुरक्षा चक्र को और मजबूत करने के लिए उठाया गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।

’26-26′ का खतरा: पाकिस्तान और खालिस्तानी गठजोड़ पर नजर

खुफिया रिपोर्टों में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि सीमा पार बैठे आतंकी संगठन और विदेशों में सक्रिय खालिस्तानी तत्व मिलकर ’26-26′ प्लान पर काम कर रहे हैं। इस प्लान का मुख्य उद्देश्य 26 जनवरी के मौके पर दिल्ली और अयोध्या स्थित राम मंदिर जैसे संवेदनशील स्थानों को निशाना बनाना है।

इस इनपुट के बाद सुरक्षा एजेंसियां और भी चौकन्नी हो गई हैं। दिल्ली के बॉर्डर सील कर दिए गए हैं और हर आने-जाने वाली गाड़ी की गहन तलाशी ली जा रही है।

जमीन पर स्नाइपर, आसमान में एंटी-ड्रोन सिस्टम

दिल्ली की सुरक्षा को इस बार ‘थ्री-लेयर’ सिक्योरिटी में तब्दील किया गया है:

एंटी-ड्रोन तकनीक: हाल के वर्षों में ड्रोन हमलों के बढ़ते खतरे को देखते हुए, दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों ने प्रमुख इलाकों में अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किए हैं। यह सिस्टम किसी भी संदिग्ध यूएवी (UAV) को हवा में ही जाम या नष्ट करने में सक्षम है।

स्नाइपर्स की तैनाती: इंडिया गेट, कर्तव्य पथ और लाल किले जैसे प्रमुख स्थलों के आसपास की ऊंची इमारतों पर शार्प-शूटर और स्नाइपर्स तैनात किए गए हैं।

CCTV और फेस रिकग्निशन: दिल्ली के चप्पे-चप्पे पर नजर रखने के लिए हजारों हाई-डेफिनेशन कैमरे लगाए गए हैं, जो फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर से लैस हैं।

क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) और फ्लाइंग स्क्वॉड सक्रिय

दिल्ली पुलिस के आयुक्त के अनुसार, किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) और फ्लाइंग स्क्वॉड को 24×7 मोड पर रखा गया है। दिल्ली के प्रमुख बाजारों जैसे चांदनी चौक, कनॉट प्लेस और सरोजिनी नगर में सादी वर्दी में पुलिसकर्मी तैनात हैं।

ट्रैफिक पुलिस ने भी गणतंत्र दिवस को लेकर सख्त एडवाइजरी जारी की है। कई रास्तों को डायवर्ट किया गया है ताकि सुरक्षा प्रोटोकॉल में कोई चूक न हो।

गणतंत्र दिवस 2026

जनता से अपील: सतर्क रहें, सुरक्षित रहें

पुलिस प्रशासन ने दिल्लीवासियों और पर्यटकों से अपील की है कि वे किसी भी लावारिस वस्तु जैसे बैग, खिलौना या मोबाइल को हाथ न लगाएं। यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि नजर आए, तो तुरंत पुलिस हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें।

निष्कर्ष: गणतंत्र दिवस हमारे राष्ट्रीय गौरव का पर्व है। दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों की यह मुस्तैदी सुनिश्चित करती है कि हम और हमारा लोकतंत्र सुरक्षित रहे। 26 जनवरी 2026 की यह परेड न केवल भारत की सैन्य ताकत दिखाएगी, बल्कि हमारी अटूट सुरक्षा व्यवस्था का भी प्रमाण होगी।

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Arohi Mim Viral Video: 3 मिनट 24 सेकंड के वीडियो का क्या है सच? जानें इस वायरल स्कैम की पूरी हकीकत

Arohi mim viral video

Arohi Mim Viral Video Link Scam: सोशल मीडिया की दुनिया में इन दिनों बांग्लादेशी अभिनेत्री और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर आरोही मिम (Arohi Mim) का नाम जबरदस्त चर्चा में है। दावा किया जा रहा है कि उनका एक निजी वीडियो इंटरनेट पर लीक हो गया है। ‘3 मिनट 24 सेकंड’ और ‘7 मिनट 11 सेकंड’ जैसे कीवर्ड्स के साथ यह खबर आग की तरह फैल रही है। लेकिन क्या वाकई ऐसा कोई वीडियो मौजूद है या यह डिजिटल दुनिया का एक नया और खतरनाक जाल है? आइए जानते हैं इस पूरे मामले की सच्चाई।

कौन हैं आरोही मिम और क्यों हो रही है चर्चा?

आरोही मिम बांग्लादेश की एक बेहद लोकप्रिय अभिनेत्री और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। अपनी एक्टिंग और शानदार कंटेंट के जरिए उन्होंने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लाखों फॉलोअर्स बनाए हैं। हाल ही में, अचानक से कुछ प्लेटफॉर्म्स पर उनके नाम से आपत्तिजनक वीडियो लीक होने के दावे किए जाने लगे। इन दावों ने न केवल उनके फैंस को चौंका दिया, बल्कि देखते ही देखते गूगल और सोशल मीडिया पर ‘Arohi Mim MMS Leak’ सर्च की बाढ़ आ गई।

Arohi Mim

क्या वाकई वीडियो लीक हुआ है?

इंटरनेट पर ‘आरोही मिम 3 मिनट 24 सेकंड’ की जिस क्लिप का जिक्र किया जा रहा है, जांच में वह पूरी तरह से फर्जी पाई गई है। साइबर विशेषज्ञों और फैक्ट-चेक रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐसा कोई भी असली वीडियो इंटरनेट पर मौजूद नहीं है। स्कैमर्स ने केवल अभिनेत्री के नाम का इस्तेमाल करके लोगों को गुमराह करने के लिए फर्जी थंबनेल और भ्रामक टाइटल्स का सहारा लिया है। यह एक सोची-समझी साजिश है जिसका मकसद लोगों की उत्सुकता का फायदा उठाना है।

सावधान! वायरल लिंक के पीछे छिपा है बड़ा खतरा

साइबर एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि जो लिंक सोशल मीडिया या व्हाट्सएप ग्रुप्स में ‘फुल वीडियो’ के नाम से शेयर किए जा रहे हैं, वे बेहद खतरनाक हो सकते हैं। इन लिंक्स पर क्लिक करने से आप ‘फिशिंग अटैक’ (Phishing Attack) का शिकार हो सकते हैं। अक्सर इन लिंक्स के जरिए आपके फोन या कंप्यूटर में मैलवेयर और वायरस घुस जाते हैं, जो आपके बैंक अकाउंट की जानकारी, निजी फोटो और पासवर्ड चोरी कर सकते हैं। यह केवल एक अभिनेत्री की बदनामी का मामला नहीं, बल्कि आपकी डिजिटल प्राइवेसी के लिए एक गंभीर ‘वेकअप कॉल’ है।

Arohi Mim

डिजिटल प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा पर सवाल

आरोही मिम का यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि डिजिटल युग में हमारी प्राइवेसी कितनी नाजुक है। स्कैमर्स अब मशहूर हस्तियों के नाम का इस्तेमाल करके आम लोगों के डेटा में सेंध लगा रहे हैं। सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में इस तरह के ‘वीडियो लीक स्कैम’ के मामले बढ़े हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से पहले सौ बार सोचें और अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स को हमेशा मजबूत रखें।

सुरक्षित रहने के लिए क्या करें?

अगर आपको भी ऐसा कोई लिंक मिलता है, तो सबसे पहले उसे तुरंत रिपोर्ट करें और डिलीट कर दें। अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर ‘टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन’ (Two-Factor Authentication) ऑन रखें। याद रखें, किसी की निजी जिंदगी से जुड़ी खबरों या वीडियो को बिना पुष्टि के शेयर करना न केवल अनैतिक है, बल्कि कानूनी रूप से अपराध भी हो सकता है। आरोही मिम मामले ने साफ कर दिया है कि इंटरनेट पर जो दिखता है, वह हमेशा सच नहीं होता।इस तरह की अफवाहों से बचें और अपनी साइबर सुरक्षा के प्रति हमेशा सतर्क रहें।

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Katihar Tea Stall News : जहाँ चाय की चुस्की के साथ परोसी जा रही थी ‘गंदी सर्विस’, जानें क्या है पूरा मामला!

Katihar Tea Stall News

Katihar Tea Stall News: बिहार के कटिहार जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। अक्सर लोग थकान मिटाने के लिए चाय की दुकान पर जाते हैं, लेकिन कटिहार की इस दुकान में चाय तो बस एक बहाना था, असली खेल तो दुकान के पीछे के कमरों में चल रहा था।

अदरक कूटने की आड़ में ‘राज’ दबाने का धंधा

कहते हैं कि यहाँ की चाय में अदरक कुछ ज्यादा ही कूटकर डाली जाती थी, लेकिन पुलिसिया जांच और ग्रामीणों के खुलासे ने बताया कि यहाँ अदरक नहीं, बल्कि ‘राज’ कूटकर दबाए जाते थे। कटिहार के एक गांव में स्थित इस चाय की दुकान की आड़ में पिछले 5 सालों से जिस्मफरोशी (Prostitution Racket) का काला कारोबार धड़ल्ले से चल रहा था।

Katihar Tea stall back room

कैसे हुआ इस ‘गंदी बात’ का खुलासा?

इस पूरे मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब स्थानीय ग्रामीणों को दुकान की गतिविधियों पर शक हुआ। गुरुवार को ग्रामीणों ने अचानक दुकान पर धावा बोल दिया।

  • हैरान करने वाला नजारा: ग्रामीणों ने दुकान के अंदर बने एक गुप्त कमरे से एक युवक को आपत्तिजनक (नग्न) अवस्था में पकड़ा।
  • महिला संचालक: दुकान की मालकिन, जिसे स्थानीय लोग ‘बसंती देवी’ के नाम से जानते हैं, वह इस पूरे धंधे को ऑपरेट कर रही थी। दुकान के पिछले हिस्से में बाकायदा चौकी लगाकर अनैतिक कार्यों के लिए केबिन बनाए गए थे।

सोशल मीडिया पर वीडियो हुआ वायरल

जैसे ही ग्रामीणों ने युवक को पकड़ा, उन्होंने उसका वीडियो बना लिया जो अब यूट्यूब और फेसबुक पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे चाय की दुकान की आड़ में समाज की मर्यादा को ताक पर रखकर यह धंधा चलाया जा रहा था। लोग सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं— “कटिहार की बसंती चाय के साथ कुछ ज्यादा ही सर्विस दे रही थी।”

Katihar Police Swat

पुलिस की छापेमारी और कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए कटिहार पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। पुलिस अधिकारी दशरथ राय ने पुष्टि की है कि दुकान के पिछले हिस्से में अवैध गतिविधियां चल रही थीं।

  • • पुलिस ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए।
  • • अवैध सप्लाई नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए जांच तेज कर दी गई है।
  • • स्थानीय लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं जिन्होंने बताया कि यहाँ लंबे समय से संदिग्ध लोगों का आना-जाना लगा रहता था।

सतर्क रहने की जरूरत

यह घटना हमें याद दिलाती है कि कभी-कभी जो दिखता है, वो सच नहीं होता। एक साधारण सी चाय की दुकान के पीछे इतना बड़ा सेक्स रैकेट चल सकता है, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अपने आसपास होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

  • मुख्य बातें (Highlights):
  • स्थान: कटिहार, बिहार।
  • आरोप: चाय की दुकान की आड़ में देह व्यापार।
  • कितने समय से: पिछले 5 वर्षों से सक्रिय।
  • कार्रवाई : पुलिस ने छापेमारी कर नेटवर्क का खुलासा किया।

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Bihar Dairy Scheme: बिहार सरकार का बड़ा तोहफा! भैंस खरीदने पर मिल रही है 75% तक सब्सिडी, ऐसे करें आवेदन और कमाएं लाखों

Bihar Dairy Scheme Buffalo

Bihar Samagra Bhains Palan Yojana 2025-26: बिहार के किसानों और बेरोजगार युवाओं के लिए पशुपालन अब मुनाफे का सौदा बनने वाला है। राज्य सरकार ने Bihar Dairy Scheme – ‘समग्र भैंस पालन योजना 2025-26‘ के तहत भैंस खरीदने से लेकर शेड बनाने तक पर भारी सब्सिडी देने का ऐलान किया है। अगर आप भी कम निवेश में अपना डेयरी बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो यह खबर आपके लिए है।

क्या है समग्र भैंस पालन योजना?

बिहार डेयरी निगम और पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग द्वारा संचालित इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में दूध उत्पादन को बढ़ावा देना और ग्रामीण इलाकों में रोजगार पैदा करना है। इस योजना के तहत खास तौर पर EBC (अत्यंत पिछड़ा वर्ग), SC और ST वर्ग के आवेदकों को 75% तक की सब्सिडी दी जा रही है, जबकि अन्य वर्गों के लिए भी आकर्षक छूट उपलब्ध है।

Bihar Dairy Buffalo

कमाई का गणित: 2 भैंसों से शुरू करें अपना बिजनेस

इस योजना के तहत यदि आप 2 उन्नत नस्ल की भैंसों की इकाई (Unit) लगाते हैं, तो वित्तीय मॉडल कुछ इस प्रकार होगा:

  • कुल लागत: लगभग ₹2,42,000 (भैंस खरीद + शेड + उपकरण)।
  • सरकारी मदद (सब्सिडी): EBC/SC/ST वर्ग के लिए करीब ₹1,71,000 की सब्सिडी।
  • किसान का निवेश: मात्र ₹71,000
  • मुनाफा: 2 भैंसों से प्रतिदिन 20 लीटर दूध उत्पादन होने पर, सुधा (COMFED) को बेचकर आप खर्च काटकर पहले साल ही ₹1.5 लाख तक का शुद्ध लाभ कमा सकते हैं।

तकनीकी सेटअप और सुविधाएं

सरकार केवल पैसा ही नहीं, बल्कि तकनीकी सहायता भी प्रदान कर रही है:

  • पक्का शेड: भैंसों के लिए 40 sq ft का पक्का शेड और 80 sq ft का खुला क्षेत्र बनाने के लिए सहायता।
  • मशीनरी पर छूट: साइलेज मेकिंग मशीन (चारा काटने वाली मशीन) पर ₹10,000 की अलग से सब्सिडी।
  • मुफ्त स्वास्थ्य सेवा: भैंसों का टीकाकरण (FMD, HS) और कृत्रिम गर्भाधान (AI) की सुविधा बिल्कुल मुफ्त मिलेगी।
  • बीमा कवर: मात्र ₹2,000 के प्रीमियम पर ₹1 लाख तक का पशु बीमा।

Buffalo Bihar Dairy Scheme

महिलाओं और युवाओं को प्राथमिकता

बिहार सरकार ने इस योजना में 30% कोटा महिलाओं के लिए आरक्षित रखा है। कटिहार, मुंगेर और गया जैसे जिलों में हाल ही में लगे विशेष कैंपों में भारी संख्या में आवेदन देखे गए हैं। सरकार का लक्ष्य 2026 तक राज्य के 20,000 परिवारों को इस योजना से जोड़ना है।

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज और पात्रता

  • आवेदक बिहार का स्थायी निवासी होना चाहिए।
  • आधार कार्ड, बैंक पासबुक और जाति प्रमाणपत्र।
  • जमीन के कागजात (जहाँ शेड बनाना है)।
  • पशुपालन का बुनियादी ज्ञान या प्रशिक्षण प्रमाणपत्र (यदि हो)।

कैसे करें आवेदन?

इच्छुक किसान भाई आधिकारिक वेबसाइट dairy.bihar.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, अपने नजदीकी बीडीओ (BDO) कार्यालय या जिला पशुपालन कार्यालय में जाकर विस्तृत जानकारी और फॉर्म प्राप्त किया जा सकता है। सहायता के लिए सरकार ने हेल्पलाइन नंबर 1800-345-6215 भी जारी किया है।

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Rajkot Horror: स्कूल वैन ड्राइवर ने 9वीं की छात्रा को बनाया हवस का शिकार, चॉकलेट का लालच देकर किया रेप

Rajkot horror

राजकोट (गुजरात): गुजरात के राजकोट से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने बच्चों की सुरक्षा और स्कूल वाहनों के ड्राइवरों पर भरोसे को तार-तार कर दिया है। यहाँ एक स्कूल वैन ड्राइवर ने 9वीं कक्षा में पढ़ने वाली 14 वर्षीय छात्रा के साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। इंटरनेट पर इसके बाद गुस्सा फूट पड़ा है और Rajkot Horror ट्रेंड कर रहा है। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया है।

Rajkot horror -School driver

कैसे दी वारदात को अंजाम?

यह पूरी घटना 19 जनवरी 2026 के आसपास की बताई जा रही है। आरोपी की पहचान 35 वर्षीय रमेश खारा के रूप में हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, रमेश पिछले कुछ समय से छात्रा को चॉकलेट और मीठी बातों के लालच में फंसा रहा था। उसने छात्रा का मोबाइल नंबर हासिल किया और व्हाट्सएप पर उससे बातचीत शुरू की। घटना के दिन, ड्राइवर ने वैन को एक सुनसान जगह पर रोका, गाड़ी की खिड़कियों पर काले पर्दे लगाए और मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी की।

पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी

पीड़िता ने हिम्मत दिखाते हुए इस घटना की जानकारी अपने परिजनों को दी, जिसके बाद 19 जनवरी को राजकोट पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल आरोपी रमेश खारा को दबोच लिया। आरोपी पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम और आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। स्थानीय मीडिया और नेशनल चैनलों जैसे ABP न्यूज़ और News18 ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है।

Symbolic representation of Girl being molested

सुरक्षा पर उठते बड़े सवाल

राजकोट में पिछले कुछ दिनों के भीतर बच्चों के खिलाफ अपराध की यह दूसरी बड़ी घटना है। हाल ही में एक और स्कूल बस ड्राइवर द्वारा 5 साल की मासूम के साथ छेड़छाड़ की खबर भी सुर्खियों में रही थी। इन घटनाओं ने अभिभावकों के मन में डर पैदा कर दिया है कि क्या स्कूल वैन और बसें बच्चों के लिए सुरक्षित हैं? पुलिस अब स्कूल वाहन चालकों के चरित्र सत्यापन (Character Verification) को लेकर सख्त कदम उठाने की बात कह रही है।

स्कूलों में ड्राइवरों की सुरक्षा जांच कैसे बढ़ानी चाहिए?”अपनी राय दे।

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पंजाब में गणतंत्र दिवस पर दहलाने की साजिश नाकाम: होशियारपुर से बब्बर खालसा (BKI) के 4 आतंकी गिरफ्तार, 2.5 किलो IED बरामद

26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस से ठीक पहले पंजाब पुलिस ने एक बहुत बड़ी आतंकी साजिश का पर्दाफाश किया है। होशियारपुर पुलिस और जालंधर काउंटर इंटेलिजेंस (CI) ने एक संयुक्त ऑपरेशन में प्रतिबंधित संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) के चार खतरनाक गुर्गों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से भारी मात्रा में विस्फोटक और हथियार बरामद हुए हैं, जिससे साफ है कि राज्य में किसी बड़ी तबाही की तैयारी थी।

गणतंत्र दिवस (Republic Day) पर था हमले का प्लान

पकड़े गए आतंकियों की पहचान दिलजोत सिंह, हरमन सिंह, अजय उर्फ मेहरा और अर्शदीप सिंह के रूप में हुई है। इन्हें होशियारपुर के गढ़शंकर इलाके से दबोचा गया। पुलिस के अनुसार, ये चारों आरोपी अमेरिका में बैठे अपने हैंडलर्स के इशारे पर काम कर रहे थे। इनका मकसद 26 जनवरी के मौके पर पंजाब में धमाके कर दहशत फैलाना और शांति भंग करना था।

पंजाब में गणतंत्र दिवस

बरामदगी: 2.5 किलो IED और घातक हथियार

पुलिस को तलाशी के दौरान इनके पास से जो सामान मिला है, वह चौंकाने वाला है:

• 2.5 किलो IED (Explosive): यह विस्फोटक RDX से लदा था, जो एक साथ कई लोगों की जान लेने में सक्षम था।

• दो पिस्टल: सुरक्षा बलों पर हमला करने या टारगेट किलिंग के लिए इन हथियारों का इस्तेमाल होना था।

• विदेशी कनेक्शन: जांच में सामने आया है कि यह विस्फोटक पाकिस्तान की सीमा से तस्करी कर लाया गया था और इसमें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का हाथ होने का अंदेशा है।

विदेशी हैंडलर्स और ISI का हाथ

पंजाब के DGP गौरव यादव ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी कि यह मॉड्यूल पूरी तरह से विदेश से संचालित हो रहा था। अमेरिका (USA) में बैठे बब्बर खालसा के हैंडलर्स इन चारों युवाओं को निर्देश दे रहे थे। यह पंजाब में ‘खालिस्तानी उग्रवाद’ को दोबारा जिंदा करने की एक नाकाम कोशिश थी, जिसे Punjab Police की सतर्कता ने समय रहते फेल कर दिया।

पंजाब में गणतंत्र दिवस

पुलिस की मुस्तैदी ने टाला बड़ा हादसा

जालंधर काउंटर इंटेलिजेंस को एक गुप्त सूचना मिली थी कि होशियारपुर के रास्ते विस्फोटक ले जाया जा रहा है। बिना वक्त गंवाए पुलिस ने नाकाबंदी की और इन चारों को धर दबोचा। अगर ये आतंकी अपनी साजिश में कामयाब हो जाते, तो पंजाब में भारी जान-माल का नुकसान हो सकता था। फिलहाल, पुलिस इन आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि इनके पूरे नेटवर्क और आने वाले अन्य संभावित खतरों का पता लगाया जा सके।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

इस घटना के बाद पूरे पंजाब में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। सार्वजनिक स्थलों, बस स्टैंडों और रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। Republic Day Plot के नाकाम होने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि पंजाब में इनके और कितने स्लीपर सेल सक्रिय हो सकते हैं।

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उज्जैन(Ujjain) के तराना में भारी हिंसा: मामूली विवाद ने लिया साम्प्रदायिक रूप, बसें फूंकीं और घरों पर पथराव

Ujjain riots

उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले का तराना कस्बा पिछले दो दिनों से साम्प्रदायिक हिंसा की आग में झुलस रहा है। गुरुवार शाम को शुरू हुआ एक मामूली विवाद शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद बड़े उपद्रव में बदल गया। भीड़ ने न केवल यात्री बसों को आग के हवाले कर दिया, बल्कि रिहायशी इलाकों में जमकर पत्थरबाजी भी की। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है और इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं।

विवाद की शुरुआत: एक मामूली कहासुनी और हमला

हिंसा की शुरुआत गुरुवार शाम करीब 7:30 बजे हुई। बताया जा रहा है कि तराना के बड़े राम मंदिर के पास स्थित सुखला गली में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के नगर मंत्री सोहेल ठाकुर और उनके साथी रजत ठाकुर खड़े थे। इसी दौरान ईशान मिर्जा नामक युवक अपने कुछ साथियों के साथ वहां पहुंचा। किसी बात को लेकर दोनों पक्षों में बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। आरोप है कि पीछे से आए कुछ युवकों ने लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से सोहेल और रजत पर हमला कर दिया। इस हमले में दोनों के सिर पर गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए उज्जैन रेफर किया गया।

Police action in Ujjain

गुरुवार रात का तांडव: 11 बसों में तोड़फोड़ और आगजनी

जैसे ही हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं पर हमले की खबर कस्बे में फैली, गुस्साए लोग सड़कों पर उतर आए। आक्रोशित भीड़ ने बस स्टैंड का रुख किया और वहां खड़ी लगभग 11 यात्री बसों पर पथराव कर दिया। उपद्रवियों ने बसों के कांच फोड़ दिए और कुछ वाहनों में आग लगा दी। घटना के बाद हिंदू संगठनों ने तराना थाने का घेराव किया और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर नारेबाजी की। हालांकि पुलिस ने उस वक्त मामला शांत कराने की कोशिश की, लेकिन तनाव कम नहीं हुआ।

जुमे की नमाज के बाद फिर भड़की हिंसा

शुक्रवार को स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब जुमे की नमाज के बाद नयापुरा इलाके में एक बार फिर दो पक्ष आमने-सामने आ गए। नमाज खत्म होते ही भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान घरों की छतों से पत्थर फेंके गए और गलियों में तलवारें लहराते युवक देखे गए। उपद्रवियों ने एक और बस को आग लगा दी और पूर्व पार्षद आजाद खान की स्क्रैप की दुकान में भी आगजनी की गई। बाजार में दहशत का माहौल बन गया और व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद कर दीं।

Ujjain religion dispute

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

बिगड़ते हालात को देखते हुए उज्जैन कलेक्टर और एसपी स्वयं मौके पर पहुंचे। कस्बे में बीएनएस की धारा 163 (पुरानी धारा 144) लागू कर दी गई है। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 300 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है। पुलिस ने अब तक मुख्य हमलावरों में से 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक मुख्य आरोपी अभी भी फरार है। सोशल मीडिया पर अफवाहों को रोकने के लिए क्षेत्र में इंटरनेट सेवा अस्थायी रूप से बंद कर दी गई है।

आम जनजीवन अस्त-व्यस्त

इस हिंसा के कारण तराना कस्बे में दहशत का सन्नाटा पसरा हुआ है। स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं और बसें जलने के कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक छोटी सी आपसी रंजिश को कुछ शरारती तत्वों ने साम्प्रदायिक रंग दे दिया, जिससे पूरे कस्बे की शांति भंग हो गई।

फिलहाल, पुलिस ड्रोन कैमरों की मदद से उपद्रवियों की पहचान कर रही है। प्रशासन ने सख्त चेतावनी दी है कि जो भी व्यक्ति शांति व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस रात भर गश्त कर रही है और पूरे कस्बे पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

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UP Blackout Mock Drill 2026: आज शाम 6 बजे पूरे प्रदेश में बजेंगे सायरन, जानें इस अभ्यास का मकसद और पूरी प्रक्रिया

Blackout

UP Blackout Mock Drill 2026: उत्तर प्रदेश के इतिहास में आज एक बड़ा और महत्वपूर्ण अभ्यास होने जा रहा है। आज यानी 23 जनवरी 2026 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 130वीं जयंती (पराक्रम दिवस) के अवसर पर यूप’ का आयोजन किया जाएगा। शाम ठीक 6:00 बजे पूरे प्रदेश में सायरन की गूंज सुनाई देगी और कुछ मिनटों के लिए इमरजेंसी जैसी स्थिति का अभ्यास किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनता को घबराने की जरूरत नहीं है, यह केवल भविष्य की आपदाओं और हवाई हमलों जैसी स्थितियों से निपटने की एक तैयारी है।

क्या है ब्लैकआउट मॉक ड्रिल और आज शाम क्या होगा?

शाम 6:00 बजे जैसे ही सायरन बजेंगे, राज्य के सभी जिलों में 2 से 10 मिनट के लिए बिजली आपूर्ति (Power Supply) बंद कर दी जाएगी। के अनुसार, इस ड्रिल का मुख्य उद्देश्य यह जांचना है कि अगर कभी दुश्मन देश द्वारा हवाई हमला या कोई बड़ी आपदा आती है, तो हमारी सिविल डिफेंस और सुरक्षा टीमें कितनी तेजी से रिस्पांस करती हैं। इस दौरान सड़कों पर आवाजाही रोकी जा सकती है और लोगों से घरों के अंदर रहने व लाइटें बंद रखने की अपील की गई है। लखनऊ में हाल ही में हुए रिहर्सल में देखा गया कि किस तरह आग बुझाने, घायलों को निकालने और फर्स्ट एड देने का अभ्यास किया गया था।

Mock drill image

हवाई हमले जैसी स्थिति का अभ्यास: सिविल डिफेंस की बड़ी भूमिका

इस महा-अभ्यास में सिविल डिफेंस, NDRF, SDRF और स्थानीय पुलिस प्रशासन मिलकर काम करेंगे। के मुताबिक, मॉक ड्रिल के दौरान कई जगहों पर कृत्रिम धमाकों की आवाज, आग लगने का दृश्य और इमारतों से लोगों को रेस्क्यू करने का नाटक रचा जाएगा। यह सब इसलिए किया जा रहा है ताकि इमरजेंसी सेवाओं जैसे एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस के बीच तालमेल को बेहतर बनाया जा सके। जानकारों का मानना है कि आज के दौर में ड्रोन और मिसाइल हमलों का खतरा बढ़ गया है, ऐसे में जनता और प्रशासन का प्रशिक्षित होना बहुत जरूरी है।

नेताजी की जयंती और ब्लैकआउट का ऐतिहासिक संबंध

23 जनवरी का दिन चुनने के पीछे एक गहरा कारण है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने हमेशा राष्ट्र की सुरक्षा और अनुशासन पर जोर दिया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी ‘ब्लैकआउट’ की रणनीति का इस्तेमाल शहरों को हवाई बमबारी से बचाने के लिए किया जाता था। में बताया गया है कि यूपी सरकार इस परंपरा के माध्यम से नई पीढ़ी को देशभक्ति और आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक करना चाहती है। यह ड्रिल यह संदेश देती है कि उत्तर प्रदेश किसी भी आपातकालीन स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार है।

Mock drill training

आम जनता के लिए जरूरी गाइडलाइन्स: क्या करें और क्या न करें?

ब्लैकआउट के दौरान आम नागरिकों को कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि अभ्यास सफल हो सके:

  • सायरन सुनकर घबराएं नहीं: शाम 6 बजे बजने वाला सायरन केवल अभ्यास की सूचना है।
  • लाइटें बंद रखें: जैसे ही बिजली कटे, अपने घरों और दुकानों की लाइटें बंद कर दें और खिड़कियों पर पर्दे डाल दें।
  • सड़क पर हैं तो रुक जाएं: यदि आप वाहन चला रहे हैं, तो सुरक्षित स्थान पर गाड़ी खड़ी कर दें।
  • अफवाहों से बचें: सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक खबरों पर यकीन न करें, यह एक आधिकारिक सरकारी ड्रिल है।
  • बुजुर्गों और बच्चों का ध्यान रखें: उन्हें पहले ही सूचित कर दें कि यह केवल एक अभ्यास (Mock Drill) है ताकि वे डरे नहीं।

यूपी में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर सभी 75 जिलों में एक साथ यह मॉक ड्रिल हो रही है। यह न केवल प्रशासन की तैयारी को परखने का तरीका है, बल्कि जनता में अनुशासन की भावना जगाने का भी प्रयास है। शाम 6:00 बजे होने वाले इस 2 मिनट के ब्लैकआउट में सहयोग करके आप भी राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बना सकते हैं। सरकार की योजना है कि भविष्य में ऐसे अभ्यास नियमित रूप से किए जाएं ताकि किसी भी असली संकट के समय जान-माल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।

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-45°C में 24 घंटे! बिना ऑक्सीजन ‘मौत’ को दी मात, रोहताश खिलेरी (Rohtash Khileri) ने रचा इतिहास… गुटखा खाने वाले युवाओं के गाल पर 1 करारा तमाचा

Rohtash khileri

आजकल हम ‘हीरो’ किसे मानते हैं? उसे जो रील (Reel) पर 15 सेकंड का मुजरा करता है? या उसे जो गली के नुक्कड़ पर सिगरेट का छल्ला बनाकर खुद को ‘कूल’ समझता है?

अगर आपकी नजर में यही ‘हीरो’ हैं, तो आपको अपनी सोच बदलने की जरूरत है। असली हीरो वो है जिसने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी पर, जहां सांस लेना भी मुश्किल है, वहां 24 घंटे बिताकर भारत का झंडा गाड़ दिया।
जी हाँ, हम बात कर रहे हैं हरियाणा के हिसार जिले के मंगाली गांव के लाल रोहताश खिलेरी (Rohtash Khileri) की। उनका यह कारनामा सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि देश के उन लाखों युवाओं के लिए एक आईना (Mirror) है, जो जवानी के जोश को नशे और अपराध में बर्बाद कर रहे हैं।

रोहताश का कारनामा: जहाँ खून जम जाए, वहां बिताए 24 घंटे

जरा कल्पना कीजिए—तापमान माइनस 45 डिग्री (-45°C), 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती बर्फीली हवाएं, और ऑक्सीजन इतना कम कि इंसान कुछ ही पल में बेहोश हो जाए।
ऐसी जानलेवा परिस्थितियों में, यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रस (Mount Elbrus – 18,510 फीट) पर रोहताश खिलेरी ने वो किया जो आज तक कोई नहीं कर पाया।

  • द रिकॉर्ड: रोहताश ने इस चोटी पर 24 घंटे लगातार रुकने का विश्व रिकॉर्ड बनाया।
  • चुनौती: सबसे बड़ी बात यह है कि उन्होंने यह कारनामा बिना ऑक्सीजन सिलेंडर के किया।
    मंगाली गांव के एक साधारण किसान परिवार से आने वाले इस लड़के ने साबित कर दिया कि अगर इरादे फौलादी हों, तो साधन मायने नहीं रखते। रोहताश बिश्नोई (खिलेरी) इससे पहले माउंट किलिमंजारो पर भी तिरंगा फहरा चुके हैं।
Rohtashkhileri
apnivani

आज का युवा: गुटखा, नशा और ‘फर्जी टशन’

अब जरा तस्वीर का दूसरा रुख देखिए। एक तरफ रोहताश हैं जो देश का नाम रोशन करने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं, और दूसरी तरफ हमारे देश का एक बड़ा युवा वर्ग है।आज गली-मोहल्लों में देखिए, 18-20 साल के लड़के क्या कर रहे हैं?

  • नशा: सुबह उठते ही मुंह में गुटखा, पान मसाला या हाथ में सिगरेट। फेफड़े फौलाद बनाने की उम्र में वे उसे धुएं से काला कर रहे हैं।
  • बर्बादी: टाइम पास के नाम पर सोशल मीडिया पर घंटों स्क्रॉल करना और अश्लील वीडियो देखना।
  • अपराध: दुख होता है यह लिखते हुए, लेकिन अखबार रेप, छेड़खानी और लूटपाट की खबरों से भरे पड़े हैं। क्या यह वही युवा शक्ति है जिस पर स्वामी विवेकानंद को गर्व था?

रोहताश पहाड़ की ऊंचाई नाप रहे हैं, और बाकी युवा अपने चरित्र की गिरावट (Downfall) नाप रहे हैं।

मर्दानगी क्या है? (What is Real Manhood?)

उन लड़कों से मेरा सीधा सवाल है जो लड़कियों को छेड़कर या रेप जैसी घिनौनी हरकत करके खुद को ‘मर्द’ समझते हैं।
क्या कमज़ोर पर ताकत दिखाना मर्दानगी है? नहीं! असली मर्दानगी वो है जो रोहताश ने दिखाई।

  • प्रकृति से लड़ना मर्दानगी है।
  • अपने शरीर को तपाना और सीमाओं से पार जाना मर्दानगी है।
  • देश का झंडा दूसरे देश की छाती पर गाड़ना मर्दानगी है।
    जो युवा नशे में धुत होकर सड़क किनारे पड़े रहते हैं, उन्हें रोहताश की फोटो देखनी चाहिए। जिस उम्र में रोहताश ने -45 डिग्री को झेल लिया, उसी उम्र में आप थोड़ी सी परेशानी आने पर डिप्रेशन में चले जाते हैं या नशा करने लगते हैं। शर्म आनी चाहिए!
Rohtash khileri on mountain
apnivani

Rohtash kesदेशभक्ति: नारों में नहीं, कारनामों में दिखती है

15 अगस्त और 26 जनवरी को बाइक पर तिरंगा लगाकर हुड़दंग मचाना देशभक्ति नहीं है। स्टेटस पर “प्राउड इंडियन” लिखना बहुत आसान है। लेकिन रोहताश जैसे लोग बताते हैं कि असली देशभक्ति क्या है।
जब रोहताश एल्ब्रस की चोटी पर ठिठुर रहे थे, तो उन्हें गर्मी किसी आग से नहीं, बल्कि अपने तिरंगे से मिल रही थी। उन्होंने अपने गांव, अपने जिले और अपने देश का मान बढ़ाया है।
सोचिए, अगर हर युवा रोहताश जैसी जिद पाल ले—चाहे वो खेल में हो, पढ़ाई में हो, या बिजनेस में—तो भारत को विश्व गुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता।

जागो युवाओं: अपना रास्ता खुद चुनो

  • आज आपके पास दो रास्ते हैं:
  • रास्ता 1: रोहताश खिलेरी बनो। संघर्ष करो, पसीना बहाओ, और दुनिया के नक्शे पर अपना नाम लिख दो।
  • रास्ता 2: पान-मसाला चबाओ, चौराहों पर समय बर्बाद करो, और एक दिन गुमनामी या जेल के अंधेरे में खो जाओ।
    चुनाव आपका है। रोहताश ने दिखा दिया है कि इंसान की क्षमता (Potential) की कोई सीमा नहीं होती। हिसार के छोटे से गांव का लड़का अगर यूरोप हिला सकता है, तो आप भी बहुत कुछ कर सकते हैं।
    बस अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाओ। रेप, लूट और नशे जैसा कीचड़ छोड़कर, पर्वतों जैसी ऊंचाई चुनो।

सलाम है इस जज़्बे को

रोहताश खिलेरी को हमारा सलाम। उन्होंने न सिर्फ पहाड़ जीता है, बल्कि यह भी बताया है कि भारतीय युवाओं के रगों में अभी भी वो खून दौड़ रहा है जो असंभव को संभव कर सकता है। बस जरूरत है उस आग को सही जगह लगाने की।
शेयर करें: इस पोस्ट को हर उस युवा तक पहुंचाएं जो अपनी राह भटक गया है। शायद रोहताश की कहानी किसी की जिंदगी बदल दे।

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Singur Farmers Crisis 2026: क्या फिर बंजर हो जाएगी ‘सोना’ उगलने वाली जमीन? आलू और धान की खेती पर मंडराया काला साया

Singur Farmers Crisis

Singur Farmers Crisis 2026: पश्चिम बंगाल का सिंगुर, जो कभी अपनी उपजाऊ जमीन और रिकॉर्ड आलू उत्पादन के लिए जाना जाता था, आज एक बार फिर दर्द और बदहाली के आंसू रो रहा है। करीब 20 साल पहले शुरू हुआ नैनो कारखाने का विवाद तो खत्म हो गया, लेकिन किसानों की किस्मत आज भी अधर में लटकी है। साल 2026 की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, सिंगुर में आलू और धान के उत्पादन में 50% से 70% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। किसानों का कहना है कि उनकी जमीन अब पहले जैसी ‘उर्वर’ नहीं रही और सरकार के वादे सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गए हैं।

क्यों बंजर हो रही है सिंगुर की जमीन? असल वजहें

सिंगुर के किसानों की सबसे बड़ी समस्या जमीन की क्वालिटी का खराब होना है। 2006-08 के दौरान टाटा नैनो प्रोजेक्ट के लिए जब जमीन का अधिग्रहण हुआ, तो वहां कंक्रीट और भारी मशीनों का इस्तेमाल किया गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जमीन तो वापस मिल गई, लेकिन मिट्टी की ऊपरी परत (Top Soil) पूरी तरह नष्ट हो चुकी है।

आज स्थिति यह है कि जिस खेत में कभी प्रति हेक्टेयर 25 टन आलू निकलता था, वहां अब मुश्किल से 12 टन की पैदावार हो रही है। धान की खेती भी अब साल में दो बार के बजाय सिर्फ एक बार ही हो पा रही है। पानी के जमाव और सिंचाई की समुचित व्यवस्था न होने के कारण हजारों किसान कर्ज के बोझ तले दब गए हैं।

राजनीति और वादों के बीच फंसा किसान

सिंगुर का मुद्दा हमेशा से पश्चिम बंगाल की राजनीति का केंद्र रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसी आंदोलन के दम पर सत्ता हासिल की थी, लेकिन 2026 में भी किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। हालांकि सरकार ने ‘कृषक बंधु’ जैसी योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन सिंगुर के जमीनी हालात को सुधारने के लिए कोई ठोस ‘पुनर्वास पैकेज’ नहीं दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पुरानी फैक्ट्रियों के अवशेष पूरी तरह हटाकर जमीन को समतल नहीं किया जाता, तब तक खेती में सुधार नामुमकिन है।

आलू और धान की फसल पर दोहरी मार

सिंगुर का आलू पूरे बंगाल में मशहूर है, लेकिन इस साल बेमौसम बारिश और बढ़ती लागत ने कमर तोड़ दी है। खाद, बीज और बिजली के दाम पिछले दो सालों में दोगुने हो गए हैं, जबकि मंडी में किसानों को सही भाव नहीं मिल रहा है। छोटे किसान (जो कुल संख्या का 60% हैं) अब खेती छोड़कर शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। बुजुर्ग और महिलाएं, जो घर पर रहकर खेती संभालती थीं, अब आर्थिक तंगी के कारण संकट में हैं।

समाधान की तलाश

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सिंगुर को बचाने के लिए युद्धस्तर पर काम करने की जरूरत है। इसके लिए कुछ सुझाव दिए गए हैं:

मिट्टी का उपचार (Soil Treatment): सरकारी स्तर पर मिट्टी का परीक्षण कर उसे फिर से उपजाऊ बनाने के लिए जरूरी पोषक तत्व और जैविक खाद मुहैया कराई जाए।

ड्रिप इरिगेशन: सिंचाई की समस्या दूर करने के लिए आधुनिक तकनीक और सब्सिडी दी जाए।

कोऑपरेटिव फार्मिंग: छोटे किसानों को एकजुट कर सहकारी खेती को बढ़ावा दिया जाए ताकि लागत कम हो सके।

बाजार तक पहुंच: किसानों को दलालों से बचाने के लिए स्थानीय स्तर पर सरकारी मंडियां (Kisan Mandis) मजबूत की जाएं।

Singur Farmers Crisis 2026

क्या सुधरेगी सिंगुर की तस्वीर?

सिंगुर के किसानों की लड़ाई सिर्फ जमीन की नहीं, बल्कि उनके आत्म-सम्मान और आजीविका की है। 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में बीजेपी और टीएमसी दोनों ही इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या भाषणों से किसानों के पेट भरेंगे? सिंगुर का संकट हमें याद दिलाता है कि औद्योगीकरण और कृषि के बीच संतुलन बनाना कितना जरूरी है।

किसान भाइयों, अगर आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो जिला कृषि कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज कराएं और सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए हेल्पलाइन 1800-180-1551 पर संपर्क करें। सिंगुर के संघर्ष की हर अपडेट के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।

क्या आपको लगता है कि सिंगुर के किसानों को कभी पूरा न्याय मिल पाएगा? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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UP SC Tractor Subsidy Scheme 2026: SC किसानों की मौज! 45 HP ट्रैक्टर पर मिल रही ₹3 लाख की भारी छूट, जानें आवेदन का तरीका

SC Tractor Subsidy Scheme

UP SC Tractor Subsidy Scheme 2026: उत्तर प्रदेश के अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के किसान भाइयों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी आई है। योगी सरकार ने खेती को आसान और आधुनिक बनाने के लिए ‘ट्रैक्टर अनुदान योजना’ के तहत भारी सब्सिडी का ऐलान किया है। इस योजना के अंतर्गत, यदि आप 45 HP (हॉर्सपावर) तक का ट्रैक्टर खरीदते हैं, तो सरकार आपको 3 लाख रुपये तक की सब्सिडी दे रही है। आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसकी आखिरी तारीख जनवरी 2026 के अंत तक है। अगर आप भी खेती के लिए अपना ट्रैक्टर खरीदना चाहते हैं, तो यह आपके पास सबसे अच्छा मौका है।

क्या है यूपी ट्रैक्टर अनुदान योजना और कितना मिलेगा लाभ?

उत्तर प्रदेश कृषि विभाग द्वारा संचालित इस योजना का मुख्य उद्देश्य दलित और पिछड़े वर्ग के किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करना है। के अनुसार, 45 HP तक के ट्रैक्टरों पर कुल कीमत का लगभग 40% से 50% तक अनुदान दिया जा रहा है, जिसकी अधिकतम सीमा 3 लाख रुपये तय की गई है।

UP SC Tractor Subsidy Scheme 2026

इसका मतलब है कि अगर आप 6-7 लाख रुपये का ट्रैक्टर चुनते हैं, तो आपको अपनी जेब से सिर्फ आधी कीमत ही देनी होगी, बाकी पैसा सरकार सीधे आपके बैंक खाते में भेजेगी। इस योजना से न केवल जुताई और बुआई का खर्च कम होगा, बल्कि किसानों की आय में भी जबरदस्त बढ़ोतरी होगी।

कौन ले सकता है इस योजना का फायदा? (पात्रता नियम)

इस योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार ने कुछ आसान शर्तें रखी हैं:

SC श्रेणी: आवेदक का उत्तर प्रदेश का मूल निवासी और अनुसूचित जाति (SC) से होना अनिवार्य है।

जमीन का स्वामित्व: किसान के नाम पर अपनी खेती योग्य जमीन (कम से कम 1 एकड़) होनी चाहिए।

नया ट्रैक्टर: यह लाभ केवल नया ट्रैक्टर खरीदने पर ही मिलेगा। जिनके पास पहले से ट्रैक्टर है, वे इसके पात्र नहीं होंगे।

उम्र सीमा: आवेदक की आयु 18 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए। के मुताबिक, महिला किसानों और स्वयं सहायता समूहों को इसमें प्राथमिकता दी जा रही है।

आवेदन के लिए जरूरी कागजात

फॉर्म भरते समय अपने पास ये दस्तावेज जरूर रखें ताकि आवेदन रिजेक्ट न हो:

• आधार कार्ड और मोबाइल नंबर (बैंक से लिंक)।

• जाति प्रमाण पत्र (SC Certificate)।

• जमीन के कागजात (खतौनी/जमाबंदी)।

• बैंक पासबुक की फोटोकॉपी।

• पासपोर्ट साइज फोटो।

ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?

आवेदन की प्रक्रिया को बहुत सरल रखा गया है, जिसे आप घर बैठे या नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC) से पूरा कर सकते हैं:

• सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट upagriculture.com या dbt.up.gov.in पर जाएं।

• होमपेज पर ‘यंत्र हेतु टोकन निकालें’ या ‘अनुदान पर कृषि यंत्र’ वाले विकल्प को चुनें।

• अपना किसान पंजीकरण नंबर दर्ज करें। यदि पंजीकरण नहीं है, तो पहले ‘नया पंजीकरण’ करें।

• ट्रैक्टर (45 HP) के विकल्प को चुनें और फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारी भरें।

• सभी जरूरी दस्तावेजों को स्कैन करके अपलोड करें और ‘सबमिट’ बटन दबाएं। के अनुसार, आवेदन के बाद विभाग द्वारा सत्यापन किया जाएगा और चयन होने पर आपको SMS के जरिए सूचित किया जाएगा।

क्यों है यह योजना किसानों के लिए गेम चेंजर?

उत्तर प्रदेश के कई जिलों जैसे बुलंदशहर, बलिया और गोरखपुर में इस योजना का असर दिखने लगा है। परंपरागत खेती (बैलों से खेती) में समय और मेहनत ज्यादा लगती थी, लेकिन अब ट्रैक्टर की मदद से किसान कम समय में ज्यादा पैदावार कर पा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 तक इस योजना के जरिए यूपी के 50% से अधिक SC किसानों के पास अपना ट्रैक्टर होगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

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आखिरी तारीख का रखें ध्यान

किसान भाइयों, ध्यान रहे कि इस योजना के तहत सीटें सीमित हैं और आवेदन की अंतिम तिथि 31 जनवरी 2026 है। इसलिए अंतिम समय की भीड़ से बचने के लिए आज ही अपना पंजीकरण सुनिश्चित करें। अधिक जानकारी के लिए आप अपने जिले के विकास भवन या प्रखंड कृषि कार्यालय (BAO) में संपर्क कर सकते हैं।

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अधिक जानकारी के लिए यूपी कृषि विभाग की हेल्पलाइन 1800-180-1551 पर कॉल करें।

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Gorakhpur की ‘रिवॉल्वर गर्ल’ का खौफनाक खेल : न्यूड वीडियो बनाकर फंसाए 12 पुलिसवाले, बर्थडे पार्टी में सरेआम दागी गोलियां

रिवॉल्वर गर्ल

उत्तर प्रदेश के Gorakhpur जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पुलिस महकमे से लेकर आम जनता तक के होश उड़ा दिए हैं। खुद को “रिवॉल्वर गर्ल” बताने वाली अंशिका सिंह ने न केवल कानून की धज्जियां उड़ाईं, बल्कि बड़े-बड़े अधिकारियों को अपने हुस्न और ब्लैकमेलिंग के जाल में फंसाकर रख दिया। आइए जानते हैं क्या है यह पूरा मामला और कैसे एक बर्थडे पार्टी ने इस पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया।

बर्थडे पार्टी में जब सरेआम चली गोली

यह पूरी घटना 20 जनवरी 2026 की शाम की है। गोरखपुर के कैंट थाना क्षेत्र स्थित सिंघाड़िया में अंशिका सिंह के जन्मदिन की पार्टी चल रही थी। जश्न के माहौल के बीच एक मॉडल शॉप पर मामूली विवाद हुआ, जिसके बाद अंशिका ने आव देखा न ताव और अपनी रिवॉल्वर से सरेआम फायरिंग कर दी। इस गोलीबारी में एक मैनेजर का दोस्त घायल हो गया। दिनदहाड़े हुई इस फायरिंग से इलाके में दहशत फैल गई और मौके पर पहुंची पुलिस ने ‘बर्थडे गर्ल’ को हिरासत में ले लिया।

रिवॉल्वर गर्ल

ब्लैकमेलिंग का बड़ा नेटवर्क: 12 पुलिसकर्मी और 150 लोग शिकार

जब पुलिस ने अंशिका सिंह से सख्ती से पूछताछ की, तो जो खुलासे हुए वे बेहद चौंकाने वाले थे। जांच में सामने आया कि अंशिका केवल एक अपराधी नहीं, बल्कि एक शातिर ब्लैकमेलर है। उसने DSP और दरोगा स्तर के 12 पुलिसकर्मियों समेत लगभग 150 लोगों को अपने जाल में फंसा रखा था।

ब्लैकमेलिंग का तरीका:

  • न्यूड वीडियो कॉल: अंशिका बड़े अधिकारियों और रसूखदार लोगों को वीडियो कॉल के जरिए जाल में फंसाती थी।
  • स्क्रीन रिकॉर्डिंग: बातचीत के दौरान वह उनके न्यूड वीडियो रिकॉर्ड कर लेती थी।
  • रंगदारी की मांग: इन वीडियो के आधार पर वह

लाखों रुपयों की रंगदारी (Extortion) मांगती थी और पैसे न मिलने पर वीडियो वायरल करने की धमकी देती थी।

पुलिस महकमे में हड़कंप: क्या है असली सच्चाई?

इस खुलासे के बाद गोरखपुर पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर कैसे एक युवती ने इतने समय तक इतने बड़े अधिकारियों को अपनी उंगलियों पर नचाया। सूत्रों के मुताबिक, रंगदारी न मिलने की स्थिति में वह हिंसक भी हो जाती थी, जैसा कि बर्थडे पार्टी के दौरान देखने को मिला। फिलहाल पुलिस उन सभी कड़ियों को जोड़ने में जुटी है जिनसे यह पता चल सके कि इस गिरोह में और कौन-कौन शामिल है।

रिवॉल्वर गर्ल

ताजा अपडेट और गिरफ्तारी

22 जनवरी 2026 तक की जानकारी के अनुसार, पुलिस ने अंशिका के खिलाफ हत्या के प्रयास (IPC/BNS की संबंधित धाराएं) और रंगदारी के तहत मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है। उसके मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, जिसमें कई हाई-प्रोफाइल लोगों के वीडियो और चैट मिलने की संभावना है।

गोरखपुर की यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है। हनीट्रैप और डिजिटल ब्लैकमेलिंग के इस दौर में किसी भी अनजान वीडियो कॉल या व्यक्ति पर भरोसा करना भारी पड़ सकता है। प्रशासन अब इस मामले में शामिल पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच कर रहा है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

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UP का पहला ‘Zero Waste’ शहर बना लखनऊ: 5 कदम जिन्होंने बदली तस्वीर, क्या आपका शहर भी कर सकता है ये कमाल?

Lucknow zero waste city

क्या आपने कभी सोचा है कि आपके घर से निकलने वाला कूड़ा आखिर जाता कहाँ है? अक्सर वह शहर के बाहर बड़े-बड़े पहाड़ों (Landfills) का रूप ले लेता है। लेकिन नवाबों के शहर लखनऊ ने इस समस्या का एक ‘वैज्ञानिक’ और ‘स्थायी’ हल ढूंढ लिया है।

ताजा खबरों के मुताबिक, लखनऊ उत्तर प्रदेश का पहला शहर बन गया है जिसने 100% कचरा निस्तारण (Waste Processing) का लक्ष्य हासिल कर लिया है। अब वहां नया कूड़ा डंपिंग यार्ड में नहीं फेंका जाएगा, बल्कि उसका पूरा इस्तेमाल होगा। आखिर यह चमत्कार हुआ कैसे? और इंदौर या लखनऊ की तरह आपका शहर कब साफ होगा? आइए, इस ‘सफाई क्रांति’ की गहराई में चलते हैं।

Lucknow zero waste plant
credit- Organiser

लखनऊ मॉडल: आखिर कैसे हुआ यह चमत्कार? (The Process)

लखनऊ का यह बदलाव रातों-रात नहीं आया। इसके पीछे एक ठोस रणनीति और टेक्नोलॉजी का हाथ है। अगर आप अपने शहर या गाँव को साफ करना चाहते हैं, और waste हटाना चाहते हैं तो इस प्रोसेस को समझना होगा:

शिवरी प्लांट का जादू: लखनऊ नगर निगम (LMC) ने शिवरी में एक अत्याधुनिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट शुरू किया है। इसकी क्षमता 700 मीट्रिक टन प्रतिदिन है। अब शहर का सारा कूड़ा (करीब 2100 टन/रोज) वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस किया जा रहा है।

कूड़ा नहीं, संसाधन: यहाँ कूड़े को ‘कचरा’ नहीं बल्कि ‘रिसोर्स’ माना जाता है। गीले कूड़े (Organic) से खाद (Compost) और बायो-गैस बनाई जा रही है। वहीं, सूखे कूड़े (प्लास्टिक, कागज) से RDF (Refuse Derived Fuel) बनाया जा रहा है, जिसे सीमेंट और बिजली बनाने वाली फैक्ट्रियों में ईंधन के रूप में बेचा जाता है।

लिगेसी वेस्ट का खात्मा: सिर्फ नया कूड़ा ही नहीं, बल्कि वर्षों से जमा पुराने कूड़े (Legacy Waste) को भी बायो-माइनिंग तकनीक से खत्म किया जा रहा है और उस जमीन को खाली कराकर वहां ‘ग्रीन बेल्ट’ बनाई जा रही है।

आपका शहर और गाँव कैसे बन सकता है ‘जीरो वेस्ट’?

स्वच्छता सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। लखनऊ की सफलता का राज ‘जन-भागीदारी’ है। अगर हमें अपने गाँव या शहर को इंदौर या लखनऊ जैसा बनाना है, तो यह 3-स्टेप फॉर्मूला अपनाना होगा:

स्रोत पर ही बंटवारा (Source Segregation): यह सबसे अहम कदम है। अपने घर में ही गीला (सब्जी के छिलके, बचा खाना) और सूखा (प्लास्टिक, बोतल) कूड़ा अलग-अलग डिब्बों में रखें। लखनऊ में यह 70% से ज्यादा घरों में हो रहा है।

डोर-टू-डोर कलेक्शन: कूड़ा सड़क पर फेंकने के बजाय, सफाई गाड़ी आने का इंतजार करें। जब तक कूड़ा घर से सही तरीके से नहीं उठेगा, शहर साफ नहीं होगा।

कचरे से कमाई: ग्राम पंचायतों और नगर पालिकाओं को कूड़े से खाद बनाने के छोटे यूनिट्स लगाने चाहिए। इससे गंदगी भी खत्म होगी और पंचायत की कमाई भी होगी।

Lucknow zero waste plant place

शर्म करो: वे लोग जो शहर को ‘डस्टबिन’ समझते हैं

यह कड़वा सच है, लेकिन बोलना जरूरी है। हम सरकार को कोसते हैं, लेकिन अपनी गिरेबान में नहीं झांकते। आप बाज़ार जाते हैं और शान से कहते हैं— “भैया, एक पन्नी (Polythene) देना।” यही वह ज़हर है जो नालियों को जाम करता है और गायों के पेट में जाता है। उन लोगों के लिए एक विशेष संदेश जो अपनी लग्जरी कार का शीशा नीचे करके गुटखा थूकते हैं या चिप्स का पैकेट सड़क पर फेंक देते हैं:

“आपकी महंगी गाड़ी और महंगे कपड़े आपकी ‘अमीरी’ नहीं दिखाते, बल्कि सड़क पर फेंका गया आपका कचरा आपकी ‘गरीबी’ और ‘मानसिकता’ दिखाता है। सड़क आपका पुश्तैनी डस्टबिन नहीं है। अगर आप अपना घर साफ रखते हैं, तो शहर गंदा करने का हक आपको किसने दिया?” सफाई कर्मचारी आपकी गंदगी( waste) साफ करने के लिए हैं, आपकी फैलाई हुई ‘बदतमीजी’ उठाने के लिए नहीं।

फैक्ट चेक: भारत और बिहार में कौन है सबसे साफ?

जब सफाई की बात आती है, तो स्वस्थ प्रतिस्पर्धा (Competition) होनी चाहिए। आइए देखें अभी कौन बाजी मार रहा है:

भारत का नंबर 1: स्वच्छता सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, मध्य प्रदेश का इंदौर (Indore) लगातार 8वीं बार भारत का सबसे साफ शहर बना है। यह शहर एक मिसाल है कि अगर जनता ठान ले, तो क्या नहीं हो सकता। इसके साथ ही सूरत और नवी मुंबई भी टॉप लिस्ट में हैं।

बिहार का गौरव: बिहार भी अब पीछे नहीं है। स्वच्छता सर्वेक्षण के ताजा आंकड़ों में गया (Gaya) ने बिहार में बाजी मारी है। 10 लाख की आबादी वाले शहरों की श्रेणी में गया सबसे आगे रहा है। वहीं, राजधानी पटना ने भी नागरिक फीडबैक (Citizen Feedback) में अच्छा सुधार किया है और टॉप शहरों में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है।

बदलाव आपसे शुरू होगा

लखनऊ का ‘zero waste’ बनना एक सबूत है कि तकनीक और इच्छाशक्ति से पहाड़ों जैसे कूड़े को भी खत्म किया जा सकता है। लेकिन असली ‘जीरो वेस्ट’ शहर तब बनेगा जब हमारे दिमाग से ‘कचरा’ निकलेगा।

अगली बार सड़क पर कचरा फेंकने से पहले एक बार जरूर सोचें—क्या आप समस्या का हिस्सा बन रहे हैं या समाधान का? आइए, आज ही शपथ लें कि हम अपने शहर को अपने घर जैसा ही साफ रखेंगे।

आपकी राय: क्या आपको लगता है कि चालान (Fine) लगाने से लोग सुधरेंगे? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर लिखें।

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Jammu-Kashmir Doda Army Accident : 200 फीट गहरी खाई में गिरी सेना की गाड़ी, 10 जवान शहीद

Jammu-Kashmir Doda Army Accident

Jammu-Kashmir Doda Army Accident: जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले से आज सुबह एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। यहाँ भारतीय सेना का एक बख्तरबंद वाहन अनियंत्रित होकर करीब 200 फीट गहरी खाई में गिर गया। इस दर्दनाक हादसे में देश के 10 बहादुर जवानों ने अपनी जान गंवा दी है, जबकि 7 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है और घाटी में शोक की लहर दौड़ गई है।

कैसे हुआ यह भयानक हादसा?

यह घटना गुरुवार, 22 जनवरी 2026 की सुबह भद्रवाह-चंबा अंतरराज्यीय मार्ग पर ‘खन्नी टॉप’ के पास हुई। मिली जानकारी के अनुसार, सेना की एक बुलेटप्रूफ गाड़ी (ALS) में कुल 17 जवान सवार थे। ये जवान अपनी नियमित ड्यूटी के तहत एक ऊंचाई वाली चौकी की ओर जा रहे थे। पहाड़ी रास्ता दुर्गम होने और अचानक चालक के नियंत्रण खो देने के कारण गाड़ी सड़क से फिसल गई और सीधे गहरी खाई में जा गिरी।

Jammu-Kashmir Doda Army Accident

रेस्क्यू ऑपरेशन और घायलों की स्थिति

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और सेना की संयुक्त टीमों ने मोर्चा संभाला। इलाका बेहद चुनौतीपूर्ण और मौसम खराब होने के बावजूद रेस्क्यू ऑपरेशन युद्ध स्तर पर चलाया गया। खाई से जवानों को निकालना काफी मुश्किल था, लेकिन बचाव दल ने तत्परता दिखाते हुए सभी 17 जवानों को बाहर निकाला।

दुर्भाग्य से, 10 जवानों ने मौके पर या अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। वहीं, हादसे में घायल हुए 7 जवानों में से 3-4 की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है। उन्हें तुरंत सेना के हेलीकॉप्टर के जरिए एयरलिफ्ट कर उधमपुर के मिलिट्री अस्पताल ले जाया गया है, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है।

शहीद जवानों की पहचान और सैन्य प्रोटोकॉल

अक्सर लोग शहीद जवानों के नाम और उनकी रेजिमेंट के बारे में जानना चाहते हैं, लेकिन भारतीय सेना के कड़े नियमों और संवेदनशीलता के कारण फिलहाल पीड़ितों की व्यक्तिगत पहचान (जैसे नाम, उम्र या गृह राज्य) को सार्वजनिक नहीं किया गया है। सेना का प्रोटोकॉल कहता है कि पहले शहीद के परिवारों को आधिकारिक सूचना दी जाती है, उसके बाद ही नाम जारी किए जाते हैं। फिलहाल पूरा ध्यान घायलों को बेहतर इलाज देने और शहीदों के सम्मानजनक पार्थिव शरीर प्रबंधन पर है।

Jammu-Kashmir Doda Army Accident

प्रशासनिक प्रतिक्रिया और सुरक्षा पर सवाल

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उपराज्यपाल ने ट्वीट कर शहीदों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है।

यह हादसा एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में सड़क सुरक्षा और सैन्य वाहनों के रखरखाव जैसे गंभीर सवाल खड़े करता है। सर्दियों के मौसम में इन रास्तों पर बर्फ और फिसलन के कारण जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। सेना ने हादसे के कारणों की जांच के आदेश दे दिए हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह तकनीकी खराबी थी या मानवीय चूक।

देश को अपने नायकों पर गर्व है

डोडा की इस गहरी खाई ने आज भारत माता के 10 वीर सपूतों को हमसे छीन लिया है। पूरा देश इन जवानों के बलिदान को नमन कर रहा है। सेना ने आश्वासन दिया है कि शहीदों के परिवारों को हर संभव मदद और सम्मान दिया जाएगा।

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Surat Cobra Venom Seizure News : सूरत में 6 करोड़ का कोबरा जहर जब्त, मैरिज ब्यूरो की आड़ में चल रहा था तस्करी का काला खेल

Surat Cobra Venom Seizure News

Surat Cobra Venom Seizure News: गुजरात के सूरत शहर से अपराध और वन्यजीव तस्करी की एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे प्रदेश को चौंका दिया है। सूरत की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने एक गुप्त ऑपरेशन के तहत करोड़ों रुपये की कीमत का कोबरा सांप का जहर (Cobra Venom) बरामद किया है। इस लेख में हम आपको इस पूरे हाई-प्रोफाइल केस की पूरी जानकारी देंगे कि कैसे पुलिस ने तस्करों के जाल को काटा।

प्रमुख जानकारी (Key Highlights of the Case)

  • कुल जब्ती: 6.5 मिलीलीटर (ml) शुद्ध कोबरा जहर।
  • अनुमानित कीमत: ₹5.85 करोड़ से अधिक (अंतरराष्ट्रीय बाजार)।
  • गिरफ्तार आरोपी: 7 लोग (जिसमें वकील और मैरिज ब्यूरो संचालक शामिल हैं)।
  • डील की रकम: तस्करों के बीच 9 करोड़ रुपये में सौदा तय हुआ था।

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कैसे हुआ इस बड़े रैकेट का पर्दाफाश?

सूरत SOG के DCP राजवीर सिंह नकुम को इनपुट मिला था कि शहर में सांप के जहर की एक बड़ी खेप आने वाली है। पुलिस ने अपराधियों को पकड़ने के लिए फिल्मी अंदाज में जाल बिछाया। पुलिस टीम ने खुद नकली खरीदार (Dummy Customer) बनकर तस्करों से संपर्क किया।

सौदा तय करने के लिए तस्करों ने सूरत के सरथाना क्षेत्र में स्थित ‘पटेल लाइफ पार्टनर मैरिज ब्यूरो’ को मीटिंग पॉइंट चुना। जैसे ही आरोपी जहर की बोतल के साथ वहां पहुंचे, पहले से तैनात पुलिस की टीम ने छापा मारकर उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया।

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मैरिज ब्यूरो की आड़ में ‘जहर’ का व्यापार

हैरानी की बात यह है कि इस गिरोह का मुख्य केंद्र एक मैरिज ब्यूरो था। पकड़े गए आरोपियों में वडोदरा के 4 और सूरत के 3 लोग शामिल हैं। इनमें से एक आरोपी वकील है और दूसरा मैरिज ब्यूरो का संचालक, जिसका नाम मनसुख घिनैया बताया जा रहा है। गिरोह का मास्टरमाइंड अहमदाबाद का एक जौहरी घनश्याम सोनी बताया जा रहा है, जो फिलहाल फरार है।

इतना महंगा क्यों है कोबरा का जहर?

SOG अधिकारियों के मुताबिक, पकड़े गए जहर की अंतरराष्ट्रीय कीमत 90 लाख रुपये प्रति मिलीलीटर तक है।

  • नशा (Party Drugs): हाई-प्रोफाइल रेव पार्टियों में नशे के लिए कोबरा जहर का इस्तेमाल होता है।
  • दवाइयां: कैंसर और दर्द निवारक दवाओं (Painkillers) के निर्माण में भी सीमित मात्रा में इसका उपयोग किया जाता है।
  • तस्करी: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत यह पूरी तरह प्रतिबंधित है, इसलिए इसकी ब्लैक मार्केट वैल्यू करोड़ों में होती है।

Surat Cobra Venom Seizure News

गुजरात पुलिस की ऐतिहासिक सफलता

यह गुजरात के इतिहास में अब तक की सांप के जहर की सबसे बड़ी रिकवरी मानी जा रही है। जब्त किए गए जहर के सैंपल को फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेजा गया है ताकि इसकी शुद्धता और प्रजाति की सटीक पुष्टि हो सके।

सूरत पुलिस की इस मुस्तैदी ने एक बड़े संगठित अपराध गिरोह की कमर तोड़ दी है। वन्यजीव तस्करी और नशे के काले कारोबार के खिलाफ यह एक बड़ी चेतावनी है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।

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सीवान ब्लास्ट विश्लेषण : सीएम के दौरे के बीच धमाके से दहली बिहार की सियासत

सीवान ब्लास्ट

सीवान ब्लास्ट विश्लेषण : बिहार के सीवान जिले में बुधवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान एक भीषण विस्फोट हुआ। यह घटना न केवल सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी चूक मानी जा रही है, बल्कि इसने राज्य की कानून-व्यवस्था पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोपहर करीब 2:00 बजे हुए इस जोरदार धमाके ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया, जिसमें एक स्थानीय व्यक्ति की जान चली गई और कई लोग बुरी तरह घायल हो गए।

विस्फोट की तीव्रता और जान-माल का नुकसान

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि घटनास्थल के आसपास के 4-5 पक्के मकानों की दीवारों में दरारें आ गई और खिड़कियों के शीशे चकनाचूर हो गए। मृतक की पहचान रामउदेश सिंह (45) के रूप में हुई है, जिसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। अन्य घायलों को तुरंत सदर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां कुछ की हालत नाजुक बनी हुई है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और एहतियात के तौर पर स्थानीय बाजारों और स्कूलों को बंद कर दिया गया है।

सीवान ब्लास्ट

जांच के दायरे में: अवैध पटाखा इकाई या गहरी साजिश?

प्रशासनिक स्तर पर इस घटना के कारणों को लेकर अभी भी संशय बना हुआ है। प्रारंभिक जांच में एसपी सत्येंद्र सिंह ने बताया कि यह हादसा घर के भीतर अवैध रूप से संचालित पटाखा निर्माण इकाई या गैस रिसाव की वजह से हो सकता है। हालांकि, घटना के समय को लेकर सवाल उठना लाजिमी है क्योंकि मुख्यमंत्री का काफिला उसी इलाके के पास से कुछ ही समय पहले गुजरा था। फॉरेंसिक टीम (FSL) और बम निरोधक दस्ता मौके से साक्ष्य जुटा रहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह कोई साधारण दुर्घटना थी या इसके पीछे किसी प्रकार की गहरी साजिश या IED का इस्तेमाल किया गया था।

सियासी सरगर्मी: विपक्ष के तीखे हमले और सुरक्षा पर सवाल

राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो मुख्यमंत्री के दौरे के बीच इस तरह की घटना ने विपक्षी दलों को सरकार पर हमला करने का एक बड़ा मौका दे दिया है। पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए इसे प्रशासनिक विफलता करार दिया और ट्वीट किया कि बिहार में कानून का राज खत्म हो चुका है। विपक्ष का आरोप है कि जब मुख्यमंत्री स्वयं जिले में मौजूद हों और उनके सुरक्षा घेरे के पास धमाका हो जाए, तो यह राज्य की खुफिया एजेंसी (Intelligence) की बहुत बड़ी नाकामी है। वहीं सत्ताधारी दल जेडीयू इसे महज एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना बताकर राजनीतिक रंग न देने की अपील कर रहा है।

सीवान ब्लास्ट

सरकारी कार्रवाई और मुआवजे का ऐलान

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए घायलों से अस्पताल में मुलाकात की और मृतक के परिवार को 5 लाख रुपये की सहायता राशि देने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि इस मामले की तह तक जाकर जांच की जाए और दोषियों को बख्शा न जाए। हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों ने सुरक्षा में ढिलाई को लेकर सड़क जाम कर प्रदर्शन भी किया, जिसे प्रशासन ने उचित कार्रवाई के आश्वासन के बाद शांत कराया।

सीवान ब्लास्ट ने बिहार सरकार की ‘समृद्धि यात्रा’ की उपलब्धियों पर सुरक्षा लापरवाही का दाग लगा दिया है। सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब यह साबित करना है कि राज्य में अपराधी और अवैध गतिविधियां बेखौफ नहीं हैं। जिले में फल-फूल रहे अवैध पटाखा कारोबार और आपराधिक तत्वों पर नकेल कसना अब अनिवार्य हो गया है। गहन सर्च अभियान और निष्पक्ष जांच ही जनता के मन में सुरक्षा का विश्वास दोबारा बहाल कर सकती है।

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अजाज खान (Ajaz Khan) का MMS वीडियो वायरल: क्या यह डीपफेक का जाल है? डिजिटल प्राइवेसी और कानूनों पर बड़ा विश्लेषण

Ajaz khan viral video

मनोरंजन जगत में विवादों का पुराना नाता रहा है, लेकिन जब बात ‘प्राइवेसी’ और ‘लीक’ की आती है, तो यह मामला गंभीर हो जाता है। हाल ही में ‘बिग बॉस 7’ के चर्चित कंटेस्टेंट और अभिनेता अजाज खान (Ajaz Khan) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया पर उनका एक कथित अंतरंग (Intimate) वीडियो और कुछ निजी चैट्स वायरल हो रहे हैं। जहाँ एक ओर नेटिज़न्स इसे लेकर तरह-तरह की चर्चा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अजाज खान ने इसे खुद को बदनाम करने की एक बड़ी साजिश करार दिया है।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद 18 जनवरी 2026 के आसपास तब शुरू हुआ जब दिल्ली की एक फिटनेस इन्फ्लुएंसर ‘फिट वर्शा’ ने अजाज खान के साथ कथित निजी चैट के स्क्रीनशॉट साझा किए। इन चैट्स में अभिनेता को कथित तौर पर दिल्ली आने पर मिलने और “कुछ साथ करने” की बात कहते हुए दिखाया गया। इसके तुरंत बाद सोशल मीडिया पर 2-3 सेकंड का एक धुंधला और अनवेरिफाइड वीडियो वायरल हो गया, जिसमें एक व्यक्ति (जो अजाज खान जैसा दिख रहा है) एक महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में नजर आ रहा है।

अजाज खान ने 19 जनवरी को इंस्टाग्राम पर लाइव आकर इन आरोपों का खंडन किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “वीडियो पूरी तरह से फर्जी है, वायरल हो रहा नंबर मेरा नहीं है और यह केवल सेलिब्रिटी इमेज को नुकसान पहुँचाने के लिए किया गया है।”

Ajaz khan

डेटा उल्लंघन और डीपफेक का खतरा

अजाज खान का यह मामला वर्तमान समय में ‘डेटा ब्रीच’ और ‘डीपफेक’ तकनीक के खतरनाक इस्तेमाल की ओर इशारा करता है। आज के समय में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) इतने उन्नत हो गए हैं कि किसी का भी चेहरा और आवाज बदलकर असली जैसा दिखने वाला वीडियो बनाया जा सकता है। बादशाह और रश्मिका मंदाना जैसे कई सितारे पहले भी इसका शिकार हो चुके हैं। CERT-In की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में प्राइवेसी से जुड़ी शिकायतों में 40% की भारी बढ़ोतरी देखी गई है। यह घटना दर्शाती है कि डिजिटल दुनिया में कोई भी सुरक्षित नहीं है।

भारत में ऑनलाइन प्राइवेसी कानून: क्या हैं आपके अधिकार?

इस मामले ने भारतीय डिजिटल कानूनों की मजबूती पर भी सवाल खड़े किए हैं। भारत में प्राइवेसी उल्लंघन के खिलाफ कड़े प्रावधान हैं, लेकिन उनका कार्यान्वयन एक चुनौती है

  • IT एक्ट की धारा 66E और 67A: किसी की प्राइवेसी भंग करना और अश्लील सामग्री प्रसारित करना दंडनीय अपराध है। इसके तहत जेल और भारी जुर्माना दोनों हो सकता है।
  • डिजिटल इंडिया एक्ट 2026: प्रस्तावित नए कानूनों में डीपफेक कंटेंट पर ‘AI वॉटरमार्क’ अनिवार्य करने की बात की गई है, ताकि असली और नकली की पहचान हो सके।
  • प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी: IT रूल्स 2021 के अनुसार, X (ट्विटर) और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स को शिकायत मिलने के 36 घंटे के भीतर ऐसा कंटेंट हटाना होता है। हालांकि, अजाज खान के मामले में यह वीडियो कई घंटों तक वायरल होता रहा।

Viral Video Ajaz Khan

एक्सपोज कल्चर और सेलिब्रिटी सेफ्टी

अजाज खान ने अपनी सफाई में ‘आर्यन खान केस’ का उदाहरण देते हुए कहा कि सेलिब्रिटीज को सॉफ्ट टारगेट बनाना आजकल एक ट्रेंड बन गया है। सोशल मीडिया पर ‘एक्सपोज’ कैंपेन के जरिए किसी की सालों की मेहनत को चंद सेकंड के वीडियो से मिट्टी में मिलाया जा सकता है। यह न केवल मानसिक तनाव का कारण बनता है बल्कि व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा को भी अपूरणीय क्षति पहुँचाता है।

विशेषज्ञों की राय और बचाव के तरीके

डिजिटल विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विवादों से बचने के लिए ‘डिजिटल हाइजीन’ बहुत जरूरी है।
• 2FA का इस्तेमाल: अपने सोशल मीडिया और क्लाउड स्टोरेज पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन हमेशाचालू रखें।
• चैट सावधानी: किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ संवेदनशील जानकारी या वीडियो साझा न करें।
• लीगल एक्शन: यदि कोई वीडियो वायरल होता है, तो तुरंत साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराएं और ‘राइट टू बी फॉरगॉटन’ के तहत उसे इंटरनेट से हटाने की मांग करें।

अजाज खान का मामला केवल एक अभिनेता का विवाद नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज के डिजिटल भविष्य की एक डरावनी झलक है। जब तक डीपफेक और डेटा सुरक्षा पर सख्त अंतर्राष्ट्रीय कानून नहीं बनते, तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। अजाज खान के मामले में सच्चाई क्या है, यह तो कानूनी जांच के बाद ही साफ होगा, लेकिन इसने डिजिटल प्राइवेसी की बहस को फिर से जिंदा कर दिया है।

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बिहार राज्य फसल सहायता योजना 2025-26: प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए आवेदन शुरू, जानें अंतिम तिथि और प्रक्रिया

बिहार

बिहार के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है। राज्य सरकार ने रबी 2025-26 के तहत प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। ‘बिहार राज्य फसल सहायता योजना’ के माध्यम से ओलावृष्टि, बेमौसम बारिश और पाले जैसी समस्याओं से फसल गंवाने वाले किसानों को अब सीधे आर्थिक मुआवजा दिया जाएगा। सहकारिता विभाग ने इसके लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसकी अंतिम तिथियां भी घोषित हो चुकी हैं।

फसल सहायता योजना 2025-26

फसल के अनुसार आवेदन की समय सीमा (डेडलाइन)

सरकार ने अलग-अलग फसलों के लिए आवेदन की अलग-अलग समय सीमा तय की है, ताकि किसानों को पर्याप्त समय मिल सके। आज की तारीख (22 जनवरी 2026) के लिहाज से, कुछ फसलों के लिए समय कम बचा है:

• राई, सरसों, आलू और रबी टमाटर: इन फसलों के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 जनवरी 2026 है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अगले एक हफ्ते में आवेदन जरूर कर लें।

• चना, मसूर और रबी प्याज: इन फसलों के किसान 15 फरवरी 2026 तक आवेदन कर सकते हैं।

• गेहूं, रबी मक्का और ईख (गन्ना): सबसे मुख्य फसलों के लिए अंतिम तिथि 28 फरवरी 2026 रखी गई है।

• रबी अरहर, बैंगन, मिर्च और गोभी: इन सब्जियों और दालों के लिए किसान 31 मार्च 2026 तक आवेदन कर पाएंगे।

कितना मिलेगा मुआवजा?

इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को जोखिम से बचाना है। मुआवजे की राशि नुकसान के प्रतिशत के आधार पर तय की गई है:

• 20% तक की हानि पर: ₹7,500 प्रति हेक्टेयर की दर से सहायता दी जाएगी।

• 20% से अधिक की हानि पर: ₹10,000 प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा मिलेगा।

एक किसान अधिकतम 2 हेक्टेयर तक की फसल के लिए लाभ उठा सकता है। यह राशि सीधे डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से किसान के बैंक खाते में भेजी जाएगी।

पात्रता और जरूरी दस्तावेज

इस योजना का लाभ बिहार के रैयत (अपनी भूमि वाले) और गैर-रैयत (बटाईदार) दोनों तरह के किसान ले सकते हैं। आवेदन के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होगी:

• अद्यतन भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र (31 मार्च 2025 तक वैध)।

• आधार कार्ड और बैंक पासबुक।

• स्व-घोषणा पत्र (बटाईदार किसानों के लिए अनिवार्य)।

• बुआई क्षेत्र का विवरण और जियो-टैग्ड फोटो।

आवेदन कैसे करें?

इच्छुक किसान बिहार सरकार के आधिकारिक पोर्टल dbtbihar.gov.in या esahkari.bihar.gov.in पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। यदि किसी किसान को ऑनलाइन आवेदन में परेशानी हो रही है, तो वे अपने संबंधित प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी (BCS) से मदद ले सकते हैं। ध्यान रहे कि आवेदन के बाद फसल कटाई प्रयोग (CCE) के जरिए वास्तविक उपज की कमी की जांच की जाएगी, जिसके आधार पर भुगतान 31 जुलाई 2026 तक कर दिया जाएगा।

फसल सहायता योजना 2025-26

चुनौतियां और किसानों के लिए सुझाव

यह योजना बिहार की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी के समान है। हालांकि, पिछले अनुभवों को देखें तो आधार कार्ड और भूमि रिकॉर्ड में विसंगति के कारण कई किसान लाभ से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में किसानों को सलाह दी जाती है कि वे आवेदन करते समय अपने दस्तावेजों की अच्छे से जांच कर लें। सरकार का लक्ष्य इस वर्ष 85% से अधिक प्रभावित किसानों को कवर करने का है, ताकि नीतीश सरकार की ‘किसान-प्रथम’ नीति को सफल बनाया जा सके।

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प्रयागराज में वायुसेना का ट्रेनी एयरक्राफ्ट क्रैश : बाल-बाल बचे पायलट, जानें क्या रही वजह

एयरक्राफ्ट क्रैश

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ भारतीय वायुसेना (IAF) का एक ट्रेनी माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट क्रैश हो गया। यह घटना जॉर्जटाउन थाना क्षेत्र के अंतर्गत केपी कॉलेज के पास बुधवार दोपहर को हुई। गनीमत यह रही कि इस हादसे में कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ और विमान में सवार दोनों पायलट सुरक्षित हैं।

कैसे हुआ यह हादसा?

वायुसेना का यह छोटा माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट अपनी नियमित ट्रेनिंग सॉर्टी (प्रशिक्षण उड़ान) पर था। उड़ान के दौरान अचानक विमान का संतुलन बिगड़ गया और वह केपी कॉलेज के पास एक दलदली इलाके/तालाब में जा गिरा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विमान को गिरता देख इलाके में हड़कंप मच गया, लेकिन पायलटों की सूझबूझ से एक बड़ा हादसा टल गया।

एयरक्राफ्ट क्रैश

पायलटों ने पैराशूट से बचाई जान

विमान के क्रैश होने से ठीक पहले, दोनों क्रू मेंबर्स ने आपातकालीन निकासी प्रक्रिया का पालन किया। उन्होंने समय रहते पैराशूट से छलांग लगा दी, जिसके कारण वे सुरक्षित रूप से दलदल में लैंड कर सके। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और वायुसेना की रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुँचीं और दोनों पायलटों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (सिटी) मनीष शांडिल्य ने पुष्टि की है कि विमान में तकनीकी खराबी आने के कारण यह क्रैश हुआ।

क्रैश के संभावित तकनीकी कारण

प्रारंभिक जांच और विशेषज्ञों के विश्लेषण के आधार पर इस हादसे के पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण हो सकते हैं:

  • इंजन फेलियर: बताया जा रहा है कि उड़ान के दौरान इंजन ने अचानक काम करना बंद कर दिया (Power Loss), जिससे विमान हवा में अपना संतुलन खो बैठा।
  • तकनीकी खराबी: माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट हल्के वजन के होते हैं और इनमें सिंगल पिस्टन इंजन होता है। मैकेनिकल ब्रेकडाउन या फ्यूल सप्लाई में बाधा आने से ऐसे हादसे हो सकते हैं।
  • मौसम या पक्षी का टकराना: हालांकि मुख्य कारण इंजन की खराबी मानी जा रही है, लेकिन जांच टीम इस बात की भी पड़ताल करेगी कि क्या किसी पक्षी के टकराने (Bird Hit) या हवा के अचानक झोंके से यह असंतुलन पैदा हुआ।

एयरक्राफ्ट क्रैश

आगे की जांच और सुरक्षा प्रोटोकॉल

भारतीय वायुसेना और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। विमान के मलबे और उपलब्ध डेटा (ब्लैक बॉक्स या फ्लाइट डेटा) का विश्लेषण किया जाएगा ताकि सटीक कारणों का पता चल सके। यह घटना पायलट प्रशिक्षण के दौरान होने वाले जोखिमों को भी दर्शाती है, लेकिन विमान में लगे ‘बैलिस्टिक पैराशूट सिस्टम’ ने आज साबित कर दिया कि आपात स्थिति में यह तकनीक कितनी जीवनरक्षक हो सकती है।

फिलहाल, इलाके की घेराबंदी कर दी गई है और वायुसेना के अधिकारी मलबे को हटाने और आगे की कार्यवाही में जुटे हैं।

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Kalyan Jewellers के शेयरों में कोहराम: 9 दिनों में 25% डूबी निवेशकों की पूंजी, क्या अब खरीदारी का है मौका?

Kalyanjewellersshatescrash

शेयर बाजार समाचार: भारतीय ज्वेलरी सेक्टर की दिग्गज कंपनी कल्याण ज्वेलर्स (Kalyan Jewellers India Ltd) के निवेशकों के लिए पिछला एक हफ्ता किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा है। बुधवार, 21 जनवरी 2026 को कंपनी के शेयरों में 14% की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे स्टॉक 389.1 रुपये के साथ अपने 19 महीने के निचले स्तर (52-week low) पर पहुंच गया।

हैरानी की बात यह है कि पिछले 9 कारोबारी सत्रों में यह शेयर लगातार टूट रहा है और इस दौरान इसकी कीमत में लगभग 25% की गिरावट आ चुकी है। आइए समझते हैं कि मजबूत बिजनेस के बावजूद आखिर इस स्टॉक में इतनी बड़ी बिकवाली क्यों हो रही है।

Kalyan jewellers shares
Credit – Kalyan jewellers

रिकॉर्ड ऊंचाई पर सोना: मांग पर पड़ा असर

इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण सोने की कीमतों में आया जबरदस्त उछाल माना जा रहा है। घरेलू बाजार में सोना 1.58 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर को छू चुका है। सोने के भाव इतने महंगे होने से मध्यम वर्गीय ग्राहकों ने खरीदारी टाल दी है, जिससे ज्वेलरी वॉल्यूम ग्रोथ प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की बिकवाली (Bulk Deals)

बाजार के जानकारों के अनुसार, स्टॉक में आई इस तेज गिरावट के पीछे बड़े संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) का हाथ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Sundaram Midcap Fund जैसे बड़े म्यूचुअल फंड्स ने दिसंबर तिमाही में अपनी हिस्सेदारी घटाई है। बुधवार को भी भारी वॉल्यूम के साथ हुई ट्रेडिंग ने यह संकेत दिया कि बड़े फंड हाउसेस इस शेयर से बाहर निकल रहे हैं (Institutional Unwinding)।

चार्ट पर ‘बेयरिश’ ट्रेंड और पैनिक सेलिंग

तकनीकी रूप से कल्याण ज्वेलर्स का शेयर काफी कमजोर नजर आ रहा है। यह स्टॉक अपने सभी प्रमुख मूविंग एवरेज— 20, 50, 100 और 200 EMA से नीचे फिसल चुका है। जब शेयर इतने महत्वपूर्ण स्तरों को तोड़ता है, तो बाजार में ‘पैनिक सेलिंग’ शुरू हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि 440-450 रुपये का स्तर अब एक मजबूत रेजिस्टेंस (रुकावट) बन गया है।

Kalyan jewellers market
credit- Kalyan jewellers

शानदार नतीजों के बाद भी क्यों गिरे शेयर?

यह गिरावट इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि कंपनी के Q3 FY26 के नतीजे काफी बेहतर रहे थे। दिसंबर तिमाही में कंपनी का राजस्व 42% बढ़कर 7,318 करोड़ रुपये रहा और भारत में स्टोर सेल्स ग्रोथ 27% दर्ज की गई। लेकिन ऊंचे वैल्यूएशन और प्रमोटर्स द्वारा शेयरों को गिरवी रखे जाने (Pledge) की पुरानी चिंताओं ने निवेशकों के सेंटिमेंट को खराब कर दिया।

विशेषज्ञों की राय और आगे की राह

शेयर बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, फिलहाल यह स्टॉक “Falling Knife” (गिरता हुआ चाकू) बना हुआ है। जब तक स्टॉक 450 रुपये के ऊपर टिकना शुरू नहीं करता, तब तक इसमें नई खरीदारी जोखिम भरी हो सकती है।

  • सपोर्ट जोन: 380 – 390 रुपये
  • रेजिस्टेंस जोन: 440 – 450 रुपये

Kalyan ज्वेलर्स के फंडामेंटल्स अभी भी मजबूत दिख रहे हैं, लेकिन तकनीकी कमजोरी और सोने की ऊंची कीमतों ने इसे दबाव में डाल दिया है। लॉन्ग-टर्म निवेशकों को गिरावट के थमने और स्टेबिलिटी का इंतजार करना चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है, कृपया निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें।

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बिहार में 2 लाख से अधिक आबादी वाले कस्बों में खुलेंगे शहरी सहकारी बैंक

बिहार

बिहार सरकार ने राज्य की वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने और छोटे शहरों में बैंकिंग सेवाओं के विस्तार के लिए एक बड़ा निर्णय लिया है। 21 जनवरी 2026 को की गई घोषणा के अनुसार, राज्य के उन सभी कस्बों में शहरी सहकारी बैंक (Urban Cooperative Banks) खोले जाएंगे जिनकी जनसंख्या 2 लाख से अधिक है।

यह कदम न केवल बैंकिंग पहुंच बढ़ाएगा, बल्कि स्थानीय व्यापार और स्वरोजगार को भी नई उड़ान देगा।

बिहार सरकार

केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त पहल

यह योजना केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा नवंबर 2025 में ‘सहकार कुंभ’ (Co-op Kumbh) के दौरान शुरू किए गए विजन का हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य देश भर के शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सहकारी बैंकिंग के बुनियादी ढांचे को पुनर्जीवित करना है। बिहार सरकार ने अब इस योजना को जमीनी स्तर पर उतारने की तैयारी पूरी कर ली है।

इस योजना के मुख्य उद्देश्य:

• वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion): छोटे शहरों के हर नागरिक तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाना।

• सस्ता ऋण: छोटे व्यापारियों, महिलाओं और युवाओं को कम ब्याज दर पर लोन उपलब्ध कराना।

• रोजगार के अवसर: नए बैंक खुलने से बैंकिंग सेक्टर में स्थानीय युवाओं के लिए नौकरियों के अवसर पैदा होंगे।

• डिजिटल बैंकिंग: ‘सहकार डिजी-पे’ जैसे माध्यमों से कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देना।

बिहार के 50 से ज्यादा कस्बों को मिलेगा लाभ

बिहार सहकारिता विभाग ने नए वित्तीय वर्ष (2026-27) से इस योजना को तेजी से लागू करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान भी इस बात पर जोर दिया गया कि सहकारी बैंकों को PACS (प्राथमिक कृषि ऋण समिति) से जोड़ा जाएगा।

संभावित लाभान्वित क्षेत्र:

इस योजना के तहत पटना, गया, भागलपुर और मुजफ्फरपुर के उप-नगरों के अलावा बिहार के लगभग 50 से ज्यादा बड़े कस्बे शामिल होंगे। इससे ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था के बीच की दूरी कम होगी।

बिहार

तकनीकी सुधार और सुरक्षा

सहकारी बैंकों की छवि सुधारने के लिए सरकार ने इनके प्रबंधन और तकनीक पर विशेष ध्यान दिया है:

• NPA में गिरावट: बेहतर प्रबंधन के कारण इन बैंकों का NPA (Non-Performing Assets) 2.8% से घटकर मात्र 0.6% रह गया है, जो इनकी वित्तीय मजबूती को दर्शाता है।

• स्मार्ट बैंकिंग: ग्राहकों के लिए ‘सहकार डिजी-पे’ और ‘सहकार डिजी-लोन’ जैसे आधुनिक मोबाइल ऐप्स लॉन्च किए गए हैं।

• पारदर्शिता: बैंकिंग प्रक्रियाओं को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया गया है ताकि ग्राहकों का भरोसा बढ़ सके।

छोटे व्यापारियों और किसानों के लिए वरदान

सहकारी बैंक अपनी सरल ऋण प्रक्रियाओं के लिए जाने जाते हैं। इस विस्तार से बिहार के सूक्ष्म और लघु उद्योगों (MSMEs) को समय पर पूंजी मिल सकेगी। साथ ही, स्थानीय स्तर पर प्रबंधन होने के कारण लोगों को इन बैंकों के साथ लेनदेन करने में आसानी होती है।

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सूरत में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी 21 करोड़ की पानी की टंकी: उद्घाटन से पहले ही हुआ बड़ा हादसा

सूरत

गुजरात के सूरत जिले से भ्रष्टाचार और लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ 21 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बनी एक पानी की टंकी उद्घाटन से पहले ही ताश के पत्तों की तरह ढह गई। यह घटना न केवल सार्वजनिक धन की बर्बादी है, बल्कि निर्माण कार्य में हुई भारी अनियमितताओं का जीता-जागता प्रमाण भी है।

हादसे का पूरा विवरण

यह घटना 19 जनवरी 2026 को सूरत के मांडवी तालुका के तड़केश्वर गांव में हुई। यहाँ ‘गाय पाक पानी सन्याल योजना’ के तहत 11 लाख लीटर क्षमता वाली और 15 मीटर ऊंची पानी की टंकी का निर्माण किया गया था।

सूरत में भ्रष्टाचार

जब योजना के तहत टंकी की टेस्टिंग (परीक्षण) की जा रही थी, तब उसमें 9 लाख लीटर पानी भरते ही पूरी संरचना भरभराकर गिर गई। इस दर्दनाक हादसे में एक महिला समेत तीन मजदूर घायल हो गए। यह टंकी क्षेत्र के लगभग 33-14 गांवों को पेयजल आपूर्ति करने के लिए बनाई गई थी, जिसका ग्रामीण पिछले तीन वर्षों से इंतजार कर रहे थे।

भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण के संकेत

घटनास्थल पर बिखरे मलबे की शुरुआती जांच ही भ्रष्टाचार की कहानी बयां कर रही है। मलबे में सीमेंट की परतें हाथों से ही उखड़ रही हैं, जो सीधे तौर पर घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल की ओर इशारा करती हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि:

• ठेकेदार ने लोहे (सरिया) और सीमेंट की गुणवत्ता में भारी कटौती की।

• 21 करोड़ रुपये के बड़े बजट के बावजूद निर्माण मानकों का पालन नहीं किया गया।

• अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से जनता के टैक्स के पैसों का दुरुपयोग किया गया।

प्रशासनिक कार्रवाई और जांच

हादसे की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने तत्काल कदम उठाए हैं:

• निलंबन: डिप्टी एग्जीक्यूटिव इंजीनियर और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर जय चौधरी को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया है।

• भुगतान पर रोक: संबंधित ठेकेदार एजेंसी के सभी भुगतान रोक दिए गए हैं।

• नोटिस: PMC मार्स प्लानिंग और अन्य जिम्मेदार संस्थाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

• तकनीकी जांच: SVNIT सूरत की टीम, GERI और विजिलेंस विभाग के साथ मिलकर सैंपल की जांच कर रही है ताकि तकनीकी कमियों का पता लगाया जा सके।

21 करोड़ की पानी की टंकी

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

इस घटना ने गुजरात की राजनीति में भी उबाल ला दिया है। विपक्ष (कांग्रेस) ने सत्तापक्ष पर निशाना साधते हुए इसे “भ्रष्टाचार का मॉडल” करार दिया है। वहीं, स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह टंकी उद्घाटन के बाद गिरती, तो सैकड़ों मासूमों की जान जा सकती थी। वर्तमान में दोषियों के खिलाफ सख्त आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग जोर पकड़ रही है।

यह हादसा विकास के दावों के बीच एक कड़वी सच्चाई को उजागर करता है। जहां एक तरफ अहमदाबाद में 70 साल पुरानी टंकियों को गिराने के लिए भारी मशीनों की जरूरत पड़ती है, वहीं 21 करोड़ की यह नई टंकी अपना वजन भी नहीं सह पाई। भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाने के लिए पारदर्शी टेंडरिंग, सख्त थर्ड-पार्टी मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय करना समय की मांग है।

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दरभंगा में आठवीं की छात्रा को लेकर शिक्षक 3 महीने से फरार, पुलिस के हाथ अब भी खाली

दरभंगा

बिहार के दरभंगा जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली खबर सामने आई है। यहाँ के घनश्यामपुर थाना क्षेत्र के मनसारा गांव में एक शिक्षक अपनी ही छात्रा को लेकर पिछले तीन महीनों से फरार है। पुलिस की तमाम कोशिशों और छापेमारी के बावजूद अब तक दोनों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

क्या है पूरा मामला?

यह घटना 20 अक्टूबर 2025 की है। घनश्यामपुर थाना क्षेत्र के राजकीय उच्च विद्यालय मनसारा में पदस्थापित शिक्षक सुधांशु कुमार, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले (अकबरपुर गांव) के रहने वाले हैं, गांव में ही किराए के मकान में रहते थे। आरोप है कि शिक्षक सुधांशु कुमार आठवीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा को ट्यूशन पढ़ाने के बहाने अपने साथ लेकर फरार हो गए।

दरभंगा

परिजनों ने काफी खोजबीन की, लेकिन जब कोई जानकारी नहीं मिली तो उन्होंने घनश्यामपुर थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई। घटना को तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन छात्रा की बरामदगी न होने से परिजनों में काफी आक्रोश और डर का माहौल है।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

घनश्यामपुर थानाध्यक्ष आलोक कुमार के अनुसार, पुलिस लगातार इस मामले की जांच कर रही है। मोबाइल लोकेशन ट्रैक करने और संभावित ठिकानों पर छापेमारी के बावजूद आरोपी शिक्षक और छात्रा का पता नहीं चल सका है।

वहीं, इस मामले पर जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) विद्यानंद ठाकुर ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने मीडिया के जरिए मिली जानकारी पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि इस मामले की गहन जांच कराई जाएगी और दोषी शिक्षक के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

दरभंगा

शिक्षा जगत में आक्रोश

इस घटना ने गुरु-शिष्य के पवित्र रिश्ते को कलंकित किया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर सरकारी स्कूलों के शिक्षक ही ऐसी हरकतों में शामिल होंगे, तो अभिभावक अपनी बेटियों को स्कूल भेजने से कतराएंगे। स्थानीय लोग जल्द से जल्द छात्रा की बरामदगी और आरोपी शिक्षक की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।

मुख्य हाइलाइट्स:

• स्थान: मनसारा गांव, घनश्यामपुर, दरभंगा (बिहार)।

• मुख्य आरोपी: शिक्षक सुधांशु कुमार (निवासी: अंबेडकरनगर, यूपी)।

• पीड़ित: आठवीं कक्षा की नाबालिग छात्रा।

• कब से फरार: 20 अक्टूबर 2025 से।

• पुलिस की स्थिति: FIR दर्ज, लेकिन अभी तक कोई सुराग नहीं।

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Karnataka DGP Viral Video: खाकी पर ‘AI’ का दाग या असली पाप? 3 पुराने सेक्स स्कैंडल जो सिस्टम की पोल खोलते हैं

DGP

हम अक्सर नेताओं के चरित्र पर सवाल उठाते हैं। हम कहते हैं कि राजनीति गंदी है। लेकिन जब कानून का पालन करने वाला सबसे बड़ा अधिकारी—एक DGP (Director General of Police) स्तर का इंसान—गलत वजहों से सुर्खियों में आ जाए, तो जनता का भरोसा हिल जाता है।

कर्नाटक में इन दिनों एक वीडियो ने भूचाल ला दिया है। दावा किया जा रहा है कि वीडियो में राज्य के डीजीपी (आंतरिक सुरक्षा) के. रामचंद्र राव (K. Ramachandra Rao) अपने ही ऑफिस में महिलाओं के साथ आपत्तिजनक स्थिति में हैं।

हालांकि, डीजीपी साहब इसे “AI और डीपफेक” की साजिश बता रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने जांच के आदेश दे दिए हैं। आज हम इस खबर की गहराई में जाएंगे और देखेंगे कि कैसे कुर्सी का नशा, चाहे वो नेता हो या अफसर, सबको एक ही लाइन में खड़ा कर देता है।

Karnataka DGP Viral Video

वायरल वीडियो का सच: ऑफिस या अय्याशी का अड्डा?

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो और फोटोज ने कर्नाटक की ब्यूरोक्रेसी को शर्मसार कर दिया है।

आरोप है कि डीजीपी के. रामचंद्र राव अपने आधिकारिक कक्ष (Office) का दुरुपयोग कर रहे थे। वीडियो में उन्हें कुछ महिलाओं के साथ बेहद निजी पलों में देखा गया है।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह सब एक सरकारी दफ्तर में हो रहा था, जहां जनता की सुरक्षा के फैसले लिए जाते हैं। अगर यह वीडियो सच है, तो यह सिर्फ एक स्कैंडल नहीं, बल्कि “Code of Conduct” की धज्जियां उड़ाना है।

डीजीपी की सफाई: “यह मैं नहीं, AI है”

जैसे ही वीडियो वायरल हुआ, के. रामचंद्र राव ने वही तर्क दिया जो आजकल हर बड़ा आदमी फंसने पर देता है— “यह फेक है।”

  • उन्होंने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को पत्र लिखकर दावा किया है कि:
  • यह वीडियो AI (Artificial Intelligence) और Deepfake तकनीक का इस्तेमाल करके बनाया गया है।
  • उन्हें ब्लैकमेल करने और उनकी छवि खराब करने की साजिश रची जा रही है।
  • उन्होंने खुद इस मामले की CID जांच की मांग की है।

अब सवाल यह है कि क्या AI इतना एडवांस हो गया है, या फिर “AI” अब बड़े लोगों के लिए बचने का सबसे आसान कवच (Shield) बन गया है?

मुख्यमंत्री का एक्शन: जांच या लीपापोती?

मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने तुरंत एक्शन लिया है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की जांच CID (Crime Investigation Department) को सौंप दी है।

लेकिन जनता सवाल पूछ रही है—क्या एक जूनियर अधिकारी अपने ही विभाग के सबसे बड़े अधिकारी (DGP) के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर पाएगा? इतिहास गवाह है कि ऐसे मामलों में अक्सर सबूत मिटा दिए जाते हैं या फाइलें धूल खाती रहती हैं।

यह पहला नहीं है: जब ‘माननीयों’ ने पार की हदें (3 पुराने उदाहरण)

डीजीपी साहब का मामला सच है या झूठ, यह तो जांच बताएगी। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब सत्ता के नशे में चूर लोगों ने नैतिकता को ताक पर रख दिया हो। चाहे ‘खाकी’ हो या ‘खादी’, हमाम में सब नंगे नज़र आते हैं।

ज़रा इन 3 बड़े मामलों को याद कीजिए:

प्रज्वल रेवन्ना (पेन ड्राइव कांड – 2024):

अभी कल की ही बात है। कर्नाटक के ही हासन से सांसद प्रज्वल रेवन्ना का “सेक्स स्कैंडल” पूरी दुनिया ने देखा। हजारों वीडियो, सैकड़ों महिलाएं और वह भी एक नेता द्वारा। पहले उन्होंने भी इसे “फर्जी” बताया था, लेकिन बाद में उन्हें देश छोड़कर भागना पड़ा और अंततः जेल जाना पड़ा। यह दिखाता है कि पावर का नशा किस कदर हावी होता है।

रमेश जारकीहोली (CD कांड – 2021):

कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री थे। एक महिला के साथ उनकी सीडी सामने आई, जिसमें नौकरी के बदले शोषण का आरोप था। मंत्री जी को इस्तीफा देना पड़ा। वहां भी “हनी ट्रैप” और “फर्जी वीडियो” का शोर मचा था, लेकिन बदनामी तो हो ही गई।

राघवजी कांड (मध्य प्रदेश):

याद कीजिए मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री राघवजी को। अपने ही नौकर के साथ अप्राकृतिक संबंधों के आरोप में उनकी सीडी बनी थी। उन्हें पार्टी से निकाला गया और जेल भी जाना पड़ा।

कनेक्शन क्या है?

चाहे प्रज्वल हों, जारकीहोली हों, या अब कथित तौर पर डीजीपी राव—पैटर्न एक ही है। कुर्सी की ताकत, ऑफिस का एकांत, और यह गलतफहमी कि “हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।”

समाज के लिए चिंता का विषय

जब हम नेताओं के वीडियो देखते हैं, तो हम कहते हैं— “अरे, नेता तो होते ही ऐसे हैं।”

लेकिन जब एक IPS अधिकारी, जिसने वर्दी पहनते वक्त संविधान की शपथ ली थी, ऐसे आरोपों में घिरता है, तो डर लगता है।

अगर रक्षक ही ऑफिस में बैठकर रंगरेलियां मनाएंगे, तो बहन-बेटियों की सुरक्षा कौन करेगा?

क्या सरकारी दफ्तर अब काम की जगह नहीं, बल्कि अय्याशी के अड्डे बन गए हैं?

Karnataka DGP Viral Video

सच का सामने आना जरूरी

फिलहाल, हम डीजीपी के. रामचंद्र राव को दोषी नहीं ठहरा सकते क्योंकि जांच जारी है। हो सकता है कि सच में उन्हें फंसाया जा रहा हो। AI का खतरा वास्तविक है।

लेकिन अगर CID की जांच में यह वीडियो असली निकलता है, तो सजा ऐसी मिलनी चाहिए जो नजीर बने। सिर्फ सस्पेंड कर देना काफी नहीं होगा।

और अगर यह वीडियो फेक (Deepfake) है, तो उस बनाने वाले को पकड़ना चाहिए, क्योंकि आज डीजीपी का वीडियो बना है, कल किसी आम आदमी का भी बन सकता है।

आपकी राय: क्या आपको लगता है कि बड़े अधिकारी और नेता ‘AI’ का बहाना बनाकर अपने पाप छिपा रहे हैं? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर लिखें।

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बिहार: अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर से मुक्ति! नीतीश सरकार ने लॉन्च की ‘जनता द्वार योजना’, घर बैठे मिलेंगी 25 सेवाएं

नीतीश

बिहार में सुशासन के एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की जनता को सरकारी दफ्तरों की भागदौड़ से बचाने के लिए महत्वाकांक्षी ‘जनता द्वार योजना’ का शुभारंभ किया है। इस डिजिटल पहल के जरिए अब जाति प्रमाण पत्र से लेकर राशन कार्ड तक की सुविधाएं सीधे लोगों के मोबाइल और घर तक पहुंचेंगी।

सुशासन का नया मॉडल: क्या है ‘जनता द्वार योजना’?

मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस योजना का उद्घाटन करते हुए इसे बिहार के प्रशासनिक इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव बताया। इस योजना की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

• जनता द्वार ऐप: सरकार ने एक समर्पित मोबाइल ऐप लॉन्च किया है, जहाँ 25 से अधिक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सेवाएं एक क्लिक पर उपलब्ध होंगी।

नीतीश सरकार

• 48 घंटे में डिलीवरी: जाति, आय, निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और पेंशन संबंधी आवेदनों का निपटारा अब अधिकतम 48 घंटों के भीतर करने का लक्ष्य रखा गया है।

• IT-साक्षर केंद्र: राज्य के हर जिले में 50 ‘जनता द्वार केंद्र’ खोले जाएंगे। ये केंद्र उन लोगों की मदद करेंगे जो तकनीक के साथ सहज नहीं हैं।

• टोल-फ्री हेल्पलाइन: शिकायतों और जानकारी के लिए सरकार ने 1800-XXX-XXXX नंबर जारी किया है, जिससे अधिकारी सीधे जनता से जुड़ेंगे।

मुख्यमंत्री का संबोधन: “अब जनता नहीं, काम उनके पास जाएगा”

उद्घाटन के दौरान CM नीतीश कुमार ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि आम आदमी को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए ब्लॉक या अनुमंडल कार्यालय के चक्कर न काटने पड़ें। यह डिजिटल सशक्तीकरण की दिशा में बिहार का बड़ा कदम है।”

वहीं, डिप्टी CM सम्राट चौधरी ने इस योजना को ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया और कहा कि इससे बिचौलियों और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।

विपक्ष का रुख: स्वागत के साथ सतर्कता

विपक्ष (RJD) ने इस डिजिटल पहल का स्वागत तो किया है, लेकिन इसके क्रियान्वयन (Implementation) पर सवाल उठाए हैं। आरजेडी प्रवक्ताओं का कहना है कि कागजों पर योजनाएं अच्छी होती हैं, लेकिन असली चुनौती ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट और सर्वर की समस्याओं को दूर करना है।

नीतीश सरकार

भ्रष्टाचार पर चोट और रोजगार के अवसर

विशेषज्ञों के अनुसार, 500 करोड़ रुपये के बजट वाली इस योजना से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि ‘जनता द्वार केंद्रों’ के माध्यम से हजारों आईटी-साक्षर युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। सरकार ने अगले 6 महीनों में 1 करोड़ आवेदनों को डिजिटल माध्यम से संसाधित करने का लक्ष्य रखा है।

पटना, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे बड़े शहरों से शुरू हुई यह योजना जल्द ही बिहार के हर गांव तक पहुंचेगी। इसमें भविष्य में AI-आधारित चैटबॉट जोड़ने की भी योजना है, जो लोगों के सवालों के तुरंत जवाब देगा।

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बिहार में  मौत कोहराम: किशनगंज में ट्रक-डंपर की टक्कर के बाद जिंदा जले 3 लोग, वैशाली में भतीजे ने की चाचा की हत्या

बिहार

बिहार में पिछले चंद घंटों के भीतर दिल दहला देने वाली दो बड़ी घटनाएं सामने आई हैं। एक तरफ जहां किशनगंज में भीषण सड़क हादसे ने तीन परिवारों को उम्र भर का गम दे दिया, वहीं दूसरी तरफ वैशाली में रिश्तों के कत्ल की एक खौफनाक वारदात ने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है। इन घटनाओं ने राज्य की कानून-व्यवस्था और सड़क सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

किशनगंज: NH 327E पर मौत का तांडव, जिंदा जले तीन लोग

किशनगंज जिले के ठाकुरगंज क्षेत्र में एक रूह कंपा देने वाला हादसा हुआ। NH 327E पर एक तेज रफ्तार ट्रक और डंपर के बीच आमने-सामने की जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों वाहनों में तुरंत आग लग गई और देखते ही देखते लपटें 10 फीट ऊपर तक उठने लगीं।

ट्रक-डंपर की टक्कर

इस भयावह अग्निकांड में दोनों वाहनों के ड्राइवरों समेत तीन लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई। देखने वाले के अनुसार, आग इतनी तेज थी कि लोग चाहकर भी उनकी मदद नहीं कर सके। सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन तब तक सब कुछ जलकर राख हो चुका था। पुलिस ने जले हुए शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच जारी है।

वैशाली: पारिवारिक विवाद में भतीजे ने चाचा का गला रेता

किशनगंज के हादसे के बीच वैशाली जिले से भी एक सनसनीखेज वारदात सामने आई। वैशाली के बराटी थाना क्षेत्र के बहुआरा गांव में एक भतीजे ने अपने सगे चाचा की बेरहमी से हत्या कर दी।

आरोपी भतीजे मंजय कुमार ने पारिवारिक विवाद के चलते अपने 70 वर्षीय चाचा महताब लाल सिंह पर हसुली से हमला किया और उनका गला रेत दिया। जब महताब लाल की पत्नी (चाची) उन्हें बचाने पहुंचीं, तो आरोपी ने उन पर भी हमला कर दिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी मंजय को गिरफ्तार कर लिया है और हत्या में इस्तेमाल हथियार भी जब्त कर लिया गया है। वैशाली एसपी ने कहा है कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले की स्पीडी ट्रायल के जरिए सजा दिलाई जाएगी।

बिहार में मौत कोहराम

सुशासन के दावों पर सवाल

इन दो अलग-अलग घटनाओं ने बिहार में सुरक्षा और सामाजिक समरसता पर बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर किशनगंज की सड़कों पर आए दिन हो रहे हादसों ने परिवहन विभाग की सक्रियता पर सवाल उठाए हैं, वहीं वैशाली की घटना ने समाज में बढ़ती हिंसा और घरेलू विवादों के खौफनाक अंत को उजागर किया है।

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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा: घने कोहरे के बीच ट्रेलर से टकराई डबल डेकर बस, 12 यात्री घायल

आगरा

उत्तर प्रदेश में भीषण ठंड और घने कोहरे का कहर जारी है। इसी बीच आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है। रविवार सुबह एक तेज रफ्तार डबल डेकर बस आगे चल रहे ट्रेलर से जा टकराई। इस हादसे में करीब 12 यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। कोहरे की वजह से विजिबिलिटी कम होना इस दुर्घटना का मुख्य कारण बताया जा रहा है।

कब और कहां हुआ हादसा?

यह घटना 18 जनवरी 2026 की सुबह करीब 8:00 बजे की है। हादसे के वक्त एक्सप्रेसवे पर घना कोहरा छाया हुआ था। मिली जानकारी के अनुसार, यह डबल डेकर बस गाजीपुर से दिल्ली की ओर जा रही थी। जब बस एक्सप्रेसवे के एक हिस्से से गुजर रही थी, तभी कम दृश्यता के कारण चालक आगे चल रहे ट्रेलर का अंदाजा नहीं लगा पाया और बस सीधे उसमें पीछे से जा घुसी।

हादसे का विवरण

टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कोहरे की चादर इतनी मोटी थी कि कुछ मीटर की दूरी पर भी वाहन दिखाई नहीं दे रहे थे।

घायलों की संख्या: हादसे में 12 यात्री घायल हुए हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।

राहत कार्य: सूचना मिलते ही यूपीडा (UPEIDA) की पेट्रोलिंग टीम, एंबुलेंस और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। बस में फंसे यात्रियों को शीशे तोड़कर और कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया।

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे

बचाव और उपचार

सभी घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल और मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार, घायल यात्रियों में से कुछ को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि कुछ का इलाज अभी जारी है। गनीमत यह रही कि इस भीषण टक्कर के बावजूद किसी की जान जाने की खबर नहीं है। हादसे के बाद एक्सप्रेसवे पर कुछ समय के लिए यातायात बाधित रहा, जिसे क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर बहाल किया गया।

कोहरे में सावधानी जरूरी

सर्दियों के मौसम में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे पर कोहरे के कारण हादसों की संख्या बढ़ जाती है। पुलिस और प्रशासन ने यात्रियों के लिए कुछ दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

गति सीमा का पालन: कोहरे के दौरान वाहनों की रफ्तार 40-50 किमी/घंटा से अधिक न रखें।

फॉग लाइट का उपयोग: वाहन की हेडलाइट लो-बीम पर रखें और फॉग लाइट का इस्तेमाल करें।

दूरी बनाए रखें: आगे चल रहे वाहन से सुरक्षित दूरी बनाकर चलें।

इंडिकेटर और पार्किंग लाइट: जरूरत पड़ने पर ही रुकें और पार्किंग लाइट जलाकर रखें।

यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि खराब मौसम में थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और बस चालक के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज करने की प्रक्रिया की जा रही है।

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Alert: कहीं आपके घर में रखी खांसी की दवा ‘जहर’ तो नहीं? Hajipur की कंपनी सील! जानें उस 1 जानलेवा सिरप का नाम

Cough syrup with ethylene glycol

मौसम बदल रहा है, बच्चों को खांसी-जुकाम होना आम बात है। ऐसे में हम बिना सोचे-समझे मेडिकल स्टोर से ‘कफ सिरप’ (Cough Syrup) खरीद लाते हैं। हमें लगता है कि इससे बच्चे को आराम मिलेगा। लेकिन ज़रा रुकिए! क्या आपको पता है कि जिस शीशी को आप ‘अमृत’ समझकर बच्चे के मुंह से लगा रहे हैं, उसमें एथिलीन ग्लाइकॉल (Ethylene Glycol) जैसा जानलेवा जहर हो सकता है?

जी हाँ, यह डराने वाली बात नहीं, बल्कि बिहार के हाजीपुर (Hajipur) से आई एक खौफनाक हकीकत है। ड्रग विभाग ने वहां की एक बड़ी दवा कंपनी पर ताला जड़ दिया है। वजह जानकर आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी।

खांसी की दवा

हाजीपुर की दवा कंपनी में क्या मिला? (The Horror Story)

बिहार का हाजीपुर शहर, जो फार्मा हब माना जाता है, अब शक के घेरे में है। खबरों के मुताबिक, हाजीपुर स्थित एक दवा निर्माण इकाई (Pharmaceutical Unit) में छापेमारी के दौरान कफ सिरप के सैंपल फेल हो गए हैं। जांच में पाया गया कि बच्चों की खांसी के सिरप में ‘एथिलीन ग्लाइकॉल’ और ‘डायथिलीन ग्लाइकॉल’ की मात्रा मिली है। यह वही रसायन है जिसकी वजह से पिछले साल गाम्बिया और उज्बेकिस्तान में दर्जनों बच्चों की किडनी फेल होने से मौत हो गई थी।

कार्रवाई:

प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए उस कंपनी के विनिर्माण (Manufacturing) पर रोक लगा दी है और बाज़ार से उस बैच की सारी दवाइयां वापस मंगवाने का आदेश दिया है।

आखिर कौन सी है वो दवा? (Check Your Medicine Box Now)

यह सबसे जरूरी हिस्सा है। अगर आपके घर में कोई भी कफ सिरप रखा है, तो तुरंत उठिए और उसकी बोतल का लेबल (Label) चेक कीजिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस सिरप में यह जहर मिला है, वह मुख्य रूप से ‘Cough & Cold Syrup’ (जेनेरिक नाम) के नाम से बेची जा रही थी, जो हाजीपुर की फैक्ट्री में बनी थी।

आपको क्या चेक करना है?

Manufacturer Name (निर्माता): अगर बोतल के पीछे “Manufactured in Hajipur, Bihar” लिखा है और कंपनी का नाम संदिग्ध है, तो उसे तुरंत हटा दें।

Batch Number: हाल ही में बने बैच (2025-26) के सिरप जांच के दायरे में हैं।

Contents: अगर सिरप में साल्वेंट की जगह सस्ता केमिकल इस्तेमाल हुआ है, तो यह नंगी आंखों से पता नहीं चलेगा, इसलिए रिस्क न लें।

(नोट: सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने अभी ब्रांड का नाम सार्वजनिक करने से पहले बैच नंबर पर जोर दिया है, लेकिन हाजीपुर की फैक्ट्रियों से बनीं जेनेरिक दवाइयों पर अभी सख्त नजर है।)

एथिलीन ग्लाइकॉल: यह ‘जहर’ आखिर करता क्या है?

शायद आप सोच रहे होंगे कि यह केमिकल इतना खतरनाक क्यों है? दरअसल, Ethylene Glycol का इस्तेमाल कारों के इंजन को ठंडा रखने (Coolant) और ब्रेक ऑयल में होता है। यह स्वाद में मीठा होता है, लेकिन शरीर में जाते ही तबाही मचा देता है।

दवा कंपनियां इसे क्यों मिलाती हैं?

सिर्फ और सिर्फ ‘पैसा’ बचाने के लिए। कफ सिरप में ‘ग्लिसरीन’ या ‘प्रोपलीन ग्लाइकॉल’ का इस्तेमाल होना चाहिए, जो महंगा होता है। कुछ लालची कंपनियां इसकी जगह सस्ता इंडस्ट्रियल ग्रेड एथिलीन ग्लाइकॉल मिला देती हैं।

अगर यह दवा पी ली तो क्या होगा? (Symptoms to Watch)

अगर गलती से किसी बच्चे ने दूषित सिरप पी लिया है, तो उसमें ये लक्षण 24 से 48 घंटे के भीतर दिख सकते हैं:

  • पेट में तेज दर्द और उल्टी होना।
  • पेशाब का रुक जाना (यह Kidney Failure का सबसे पहला संकेत है)।
  • बच्चे का सुस्त हो जाना या बेहोश होना।
  • दिमागी संतुलन बिगड़ना।

अगर ऐसा कोई भी लक्षण दिखे, तो घर पर इलाज न करें, तुरंत बच्चे को बड़े अस्पताल लेकर भागें।

माता-पिता अब क्या करें? (3 Safety Rules)

हाजीपुर की घटना ने यह साबित कर दिया है कि हम आंख मूंदकर किसी भी दवा पर भरोसा नहीं कर सकते। अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए आज ही ये 3 गांठ बांध लें:

  • लोकल ब्रांड्स से बचें: कोशिश करें कि डॉक्टर की लिखी हुई बड़ी और नामी कंपनियों (Standard Brands) की दवा ही खरीदें। सस्ती जेनेरिक दवाइयां, जिनका नाम आपने कभी नहीं सुना, उनसे बचें।
  • “Made in…” चेक करें: दवा खरीदने से पहले देखें कि वह कहां बनी है। अगर किसी ब्लैकलिस्टेड जगह या कंपनी का नाम दिखे, तो उसे न लें।
  • सिरप की जगह टैबलेट? अगर बच्चा थोड़ा बड़ा है, तो डॉक्टर की सलाह पर सिरप की जगह टैबलेट देना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि लिक्विड दवाओं में ही मिलावट (Adulteration) का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
  • खांसी की दवा

लालच और लापरवाही की कीमत

हाजीपुर की कंपनी पर प्रतिबंध लगना एक अच्छी खबर है, लेकिन यह डरावना है कि ऐसी दवाइयां मार्केट में पहुंची कैसे? क्या इंसानी जान की कीमत कुछ रुपयों के मुनाफे से कम है? जब तक सिस्टम सुधरेगा, तब तक आपकी सुरक्षा आपके हाथ में है। अभी जाएं और अपनी दवाइयों की जांच करें। अगर आपको कोई संदिग्ध सिरप मिले, तो उसे डस्टबिन में फेंक दें।

इस खबर को अपने दोस्तों और परिवार के WhatsApp ग्रुप में तुरंत शेयर करें। आपकी एक शेयर किसी बच्चे की जान बचा सकती है।

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बिहार के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 1,445 जूनियर रेजिडेंट्स की नियुक्ति, आवेदन प्रक्रिया की पूरी जानकारी

बिहार

बिहार सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को और बेहतर बनाने और सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (BCECEB) द्वारा कुल 1,445 जूनियर रेजिडेंट (Junior Resident) के पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह भर्ती विशेष रूप से उन युवा डॉक्टरों के लिए एक बड़ा अवसर है जो एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं और सरकारी क्षेत्र में अपना योगदान देना चाहते हैं। इन नियुक्तियों से राज्य के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं में व्यापक सुधार होने की उम्मीद है।

सरकारी मेडिकल कॉलेजों

महत्वपूर्ण तिथियां और आवेदन की समय सीमा

इस भर्ती प्रक्रिया के लिए समय सारणी बहुत ही स्पष्ट रखी गई है ताकि उम्मीदवार समय पर अपनी तैयारी पूरी कर सकें। आधिकारिक नोटिफिकेशन जनवरी 2026 के मध्य में जारी किया गया था, जिसके तुरंत बाद 16 जनवरी 2026 से ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इच्छुक उम्मीदवारों के पास फॉर्म भरने के लिए 6 फरवरी 2026 की रात 11:59 बजे तक का समय है। इसके अलावा, यदि आवेदन भरते समय कोई त्रुटि हो जाती है, तो बोर्ड ने 7 और 8 फरवरी को सुधार (Correction) के लिए पोर्टल खोलने का निर्णय लिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि 11 फरवरी 2026 तक मेधा सूची (Merit List) भी प्रकाशित कर दी जाएगी।

पदों का विवरण, योग्यता और चयन का आधार

स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत कुल 1,445 पदों पर यह बहाली एक वर्ष के संविदा (Contract) आधार पर की जा रही है। इस पद के लिए अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से एमबीबीएस (MBBS) की डिग्री है, जो नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) या एमसीआई द्वारा प्रमाणित होनी चाहिए। चयन की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और मेधा आधारित रखी गई है। इसमें किसी भी प्रकार की लिखित परीक्षा नहीं होगी; बल्कि उम्मीदवारों के शैक्षणिक रिकॉर्ड और प्राप्त अंकों के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी, जिसके बाद सफल अभ्यर्थियों का दस्तावेज़ सत्यापन (Document Verification) किया जाएगा।

वेतनमान और आवेदन करने की विधि

चयनित जूनियर रेजिडेंट्स को सरकार की ओर से ₹65,000 प्रति माह का आकर्षक वेतन दिया जाएगा। आवेदन करने के इच्छुक डॉक्टर BCECE बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट bceceboard.bihar.gov.in पर जाकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया के दौरान सामान्य और अन्य श्रेणियों के लिए लगभग ₹2250 का आवेदन शुल्क निर्धारित किया गया है। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है, जहाँ उम्मीदवारों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी के साथ-साथ आवश्यक शैक्षणिक प्रमाणपत्र भी अपलोड करने होंगे।

सरकारी मेडिकल कॉलेजों

बिहार के स्वास्थ्य ढांचे के लिए इस भर्ती का महत्व

यह भर्ती न केवल डॉक्टरों के लिए रोजगार का अवसर है, बल्कि बिहार की स्वास्थ्य प्रणाली के लिए भी संजीवनी के समान है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में जूनियर रेजिडेंट्स की तैनाती से अस्पतालों पर बढ़ते मरीजों के बोझ को कम किया जा सकेगा। इसके साथ ही, नवनियुक्त डॉक्टरों को राज्य के प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने का क्लीनिकल अनुभव प्राप्त होगा, जो उनके भविष्य के करियर के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध होगा। यह कदम मुख्यमंत्री के ‘सात निश्चय’ और स्वास्थ्य सुधार के संकल्पों को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

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डॉक्टर बनने आई बेटी की ‘साजिश वाली मौत’: शरीर पर संघर्ष के निशान और सिस्टम की चुप्पी; क्या मिल पाएगा इंसाफ?

मौत

पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट (NEET) की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया है। जैसे-जैसे इस मामले की जांच आगे बढ़ रही है, रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस की कार्यप्रणाली और हॉस्टल के भीतर चल रहे संदिग्ध खेल ने प्रशासन पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ इस पूरे मामले का विस्तृत विवरण दिया गया है:

दरिंदगी की पुष्टि: क्या कहती है पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट?

शुरुआत में पुलिस जिस मामले को सामान्य मौत या आत्महत्या की दिशा में ले जा रही थी, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने उन दावों की धज्जियाँ उड़ा दीं। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में छात्रा के साथ रेप की पुष्टि हुई है।

साजिश वाली मौत

चोट के निशान: छात्रा के शरीर पर कई जगह गहरे जख्म मिले हैं। गर्दन, कंधे, छाती और पीठ पर रगड़ के निशान (ब्रूजेस) पाए गए हैं, जो इस बात का प्रमाण हैं कि छात्रा ने अपनी जान बचाने के लिए कड़ा संघर्ष किया था।

गंभीर चोटें: रिपोर्ट में सिर पर चोट (Head Injury) और शरीर के अंगों से भारी ब्लीडिंग की बात भी सामने आई है।

नशीले पदार्थ का शक: शरीर में ड्रग्स या नशीली गोलियों के अवशेष मिलने की भी आशंका जताई गई है, जिसके लिए विसरा सुरक्षित रखकर एम्स (AIIMS) भेजा गया है।

2. हॉस्टल संचालिका और डॉक्टर पर संगीन आरोप

छात्रा के परिजनों ने हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल, उनके पति श्रवण अग्रवाल और बिल्डिंग मालिक मनीष रंजन पर सोची-समझी साजिश के तहत हत्या और रेप का आरोप लगाया है।

रैकेट चलाने का दावा: परिजनों का आरोप है कि हॉस्टल के नाम पर वहाँ एक रैकेट चलाया जा रहा था। शाम ढलते ही हॉस्टल के बाहर लग्जरी गाड़ियों का जमावड़ा लग जाता था।

सबूत मिटाने की कोशिश: आरोप है कि डॉक्टर सतीश की मिलीभगत से छात्रा को गलत इंजेक्शन दिए गए ताकि शरीर पर मौजूद चोटों के निशानों को मिटाया जा सके।

पैसे का प्रलोभन: मृतका के पिता ने दावा किया कि संचालिका नीलम अग्रवाल ने उन्हें चुप रहने के लिए लाखों रुपये का ऑफर दिया और यहाँ तक कहा कि “जितना पैसा चाहिए ले लो, पर मामला आगे मत बढ़ाओ।”

3. पुलिस की भूमिका और रसूखदारों का दबाव

इस मामले में पुलिस की शुरुआती ढिलाई ने लोगों के गुस्से को भड़का दिया है।

लापरवाही के आरोप: स्थानीय थानेदार पर आरोप है कि उन्होंने रसूखदारों के दबाव में आकर शुरू में केस को हल्का करने की कोशिश की। हॉस्टल में सीसीटीवी (CCTV) कैमरों का न होना और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होना भी बड़ी लापरवाही मानी जा रही है।

SIT का गठन: बढ़ते जनाक्रोश और मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी (IG) जितेंद्र राणा के निर्देश पर एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है। टीम ने हॉस्टल को सील कर दिया है और वहाँ रह रही अन्य लड़कियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

4. वर्तमान स्थिति और इंसाफ की गुहार

फिलहाल, मुख्य आरोपी मनीष रंजन फरार बताया जा रहा है, जिसकी तलाश में छापेमारी जारी है। छात्रा के पिता का कहना है कि उनकी बेटी डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहती थी, लेकिन सिस्टम और अपराधियों की मिलीभगत ने उसकी जान ले ली।

साजिश वाली मौत

यह मामला अब राजनीतिक तूल भी पकड़ चुका है और पटना की सड़कों पर छात्रा को इंसाफ दिलाने के लिए लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। परिजनों की मांग है कि दोषियों को जल्द से जल्द फांसी की सजा दी जाए और लापरवाह पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।

यह रिपोर्ट उपलब्ध समाचार स्रोतों और परिजनों के बयानों के आधार पर संकलित की गई है।

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UP फ्री टैबलेट योजना 2026: नए साल में छात्रों की चमकेगी किस्मत, जानें कैसे मिलेगी मुफ्त टैबलेट और लिस्ट में अपना नाम

UP

UP Free Tablet Yojana 2026: उत्तर प्रदेश के होनहार छात्रों के लिए नया साल 2026 खुशियों की सौगात लेकर आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की महत्वाकांक्षी ‘स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना’ के तहत अब राज्य के लाखों छात्रों को मुफ्त टैबलेट बांटे जा रहे हैं।

अगर आप भी यूपी के सरकारी या प्राइवेट कॉलेज के छात्र हैं और डिजिटल पढ़ाई के लिए एक अच्छे टैबलेट का इंतज़ार कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए ही है। आइए जानते हैं इस योजना की पूरी एबीसीडी—पात्रता से लेकर आवेदन प्रक्रिया तक।

क्या है यूपी फ्री टैबलेट योजना 2026?

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए इस योजना की शुरुआत की थी। साल 2026 में इस वितरण अभियान को और भी तेज़ कर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य करीब 1 से 2 करोड़ छात्रों तक डिजिटल पहुंच बनाना है। इसके लिए लगभग 3000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है।

UP फ्री टैबलेट योजना 2026

खास बात यह है कि इन टैबलेट्स में पहले से ही ई-लर्निंग ऐप्स, सरकारी योजनाओं की जानकारी और जॉब पोर्टल के लिंक्स मौजूद होंगे, ताकि छात्रों को पढ़ाई और करियर बनाने में कोई दिक्कत न आए।

किसे मिलेगा लाभ? (Eligibility Criteria)

इस योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार ने कुछ जरूरी शर्तें रखी हैं:

मूल निवास: छात्र का उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है।

शैक्षणिक योग्यता: छात्र 10वीं या 12वीं पास होना चाहिए और वर्तमान में ग्रेजुएशन (BA, BSc, BCom), पोस्ट ग्रेजुएशन, आईटीआई (ITI), डिप्लोमा, या किसी भी टेक्निकल/स्किल कोर्स में नामांकित होना चाहिए।

आय सीमा: परिवार की कुल सालाना आय 2 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।

अन्य: अगर कोई बाहरी राज्य का छात्र यूपी के किसी संस्थान में पढ़ाई कर रहा है, तो वह भी पात्र है। लेकिन यूपी का छात्र यदि दूसरे राज्य में पढ़ रहा है, तो उसे इसका लाभ नहीं मिलेगा।

जरूरी दस्तावेज (Documents Required)

आवेदन करने से पहले इन कागजातों को तैयार रखें:

• आधार कार्ड

• निवास प्रमाण पत्र (Domicile)

• आय प्रमाण पत्र (Income Certificate)

• पिछली कक्षा की मार्कशीट और वर्तमान कॉलेज का आईडी कार्ड/प्रवेश पत्र

• पासपोर्ट साइज फोटो

• कॉलेज एनरोलमेंट नंबर

आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step Process)

यूपी फ्री टैबलेट योजना के लिए आवेदन की प्रक्रिया काफी सरल है:

आधिकारिक वेबसाइट: सबसे पहले digishakti.up.gov.in या [संदिग्ध लिंक हटा दिया गया] पर जाएं।

रजिस्ट्रेशन: ‘मेरी पहचान’ पोर्टल के जरिए eKYC पूरा करें और रजिस्ट्रेशन करें।

डिटेल्स भरें: अपना नाम, मोबाइल नंबर, आधार और एनरोलमेंट नंबर जैसी जानकारी सही-सही भरें।

दस्तावेज अपलोड: मांगी गई मार्कशीट और अन्य फोटो अपलोड करें।

सबमिट: फॉर्म जमा करने के बाद कॉलेज से अपनी डिटेल्स वेरीफाई जरूर करवाएं।

लेटेस्ट अपडेट: जनवरी 2026 में क्या चल रहा है?

ताजा जानकारी के मुताबिक, जनवरी 2026 से जिलों में बैचवाइज लिस्ट जारी होना शुरू हो गई है। लखनऊ की बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी (BBAU) जैसे बड़े संस्थानों में वितरण की प्रक्रिया पहले ही गति पकड़ चुकी है। अब 2026 सत्र के नए छात्रों के लिए कॉलेज स्तर पर डेटा फीडिंग की जा रही है।

UP फ्री टैबलेट योजना 2026

प्रो टिप: छात्र अपने कॉलेज के नोडल अधिकारी या क्लर्क से संपर्क में रहें, क्योंकि टैबलेट का वितरण पोर्टल के साथ-साथ कॉलेज कैंपसों में ही फिजिकल रूप से किया जाएगा।

Disclaimer: यह जानकारी उपलब्ध सरकारी पोर्टल्स और हालिया वीडियो अपडेट्स पर आधारित है। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट digishakti.up.gov.in पर विजिट करें।

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उत्तर प्रदेश में कृषि मशीनीकरण को पंख: SMAM योजना के तहत कृषि यंत्रों और ड्रोनों पर भारी सब्सिडी, आवेदन की तिथि बढ़ी

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ने और उनकी आय दोगुनी करने के लक्ष्य के साथ ‘सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन’ (SMAM) योजना के तहत एक बड़ा अवसर प्रदान किया है। इस योजना के माध्यम से किसान कृषि यंत्रों, हाई-टेक ड्रोनों और फसल अवशेष प्रबंधन (इन-सिटू मैनेजमेंट) उपकरणों पर 50% तक की भारी सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं। हाल ही में तकनीकी कारणों और किसानों की भारी मांग को देखते हुए आवेदन की अंतिम तिथि को भी आगे बढ़ाया गया है।

उत्तर प्रदेश

योजना का मुख्य आकर्षण: सब्सिडी का गणित

इस योजना के तहत किसानों को विभिन्न श्रेणियों में आर्थिक सहायता दी जा रही है:

व्यक्तिगत कृषि यंत्र: रोटावेटर, कल्टीवेटर, सीड ड्रिल और पावर टिलर जैसे उपकरणों पर लागत का 40% से 50% तक अनुदान दिया जा रहा है।

फसल अवशेष प्रबंधन: पराली जलाने की समस्या को समाप्त करने के लिए सरकार सुपर एसएमएस, हैप्पी सीडर, मल्चर और रीपर जैसे यंत्रों पर विशेष जोर दे रही है।

कृषि ड्रोन: कीटनाशकों के सटीक छिड़काव और खेतों की निगरानी के लिए ड्रोनों की खरीद पर भी भारी छूट उपलब्ध है।

कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC): जो किसान या समूह खुद का ‘फार्म मशीनरी बैंक’ खोलना चाहते हैं, उन्हें केंद्र स्थापना के लिए 40% से 80% तक की सब्सिडी का प्रावधान है।

महत्वपूर्ण तिथियां और टोकन प्रक्रिया

आवेदन की प्रक्रिया 8 जनवरी 2026 से शुरू हुई थी। किसानों की सुविधा के लिए अब पोर्टल को अतिरिक्त समय के लिए खोला गया है, जिससे जो किसान छूट गए थे, वे अपना आवेदन पूरा कर सकें।

टोकन मनी: 1 लाख रुपये से अधिक की सब्सिडी वाले बड़े यंत्रों के लिए किसानों को 5,000 रुपये की टोकन राशि ऑनलाइन जमा करनी होगी। छोटे यंत्रों के लिए यह राशि कम रखी गई है। चयन न होने की स्थिति में यह राशि वापस कर दी जाती है।

आवेदन कैसे करें? (स्टेप-बाय-स्टेप)

इच्छुक किसान उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के आधिकारिक पोर्टल https://agridarshan.up.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं:

पंजीकरण: पोर्टल पर किसान का पंजीकरण (Registration) अनिवार्य है।

यंत्र चयन: अपनी जरूरत के अनुसार यंत्र का चुनाव करें।

बुकिंग: ‘यंत्र पर अनुदान हेतु टोकन निकालें’ लिंक पर क्लिक करके बुकिंग करें।

• पारदर्शिता: लाभार्थियों का चयन पूरी तरह से ‘ई-लॉटरी’ के माध्यम से किया जाएगा, जिससे पक्षपात की कोई गुंजाइश न रहे।

उत्तर प्रदेश

किसानों के लिए लाभ

इस योजना का सबसे अधिक लाभ लघु और सीमांत किसानों को मिलेगा। मशीनीकरण से न केवल श्रम की लागत कम होगी, बल्कि खेती के कार्यों में लगने वाले समय की भी बचत होगी। विशेष रूप से मक्का सुखाने के लिए बैच ड्रायर और खाद प्रबंधन के यंत्रों को भी इस बार शामिल किया गया है, जो यूपी के कृषि परिदृश्य को

बदलने में सहायक होंगे।

विभाग की सलाह: कृषि विभाग ने किसानों को

सलाह दी है कि वे अंतिम समय की तकनीकी भीड़ से बचने के लिए जल्द से जल्द पोर्टल पर अपना टोकन जेनरेट कर लें और निर्धारित समय के भीतर अपने बिल अपलोड करें।

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Mauni Amavasya 2026: आज ‘मौन’ रहकर मांगें 1 वरदान! प्रयागराज में उमड़ा आस्था का सैलाब, जानें 5 बड़े नियम जब ‘खामोशी’ सबसे बड़ी पूजा बन जाए

Mauni Amavasya

आज (18 जनवरी) की सुबह सूरज की किरणों के साथ एक अलग ही ऊर्जा लेकर आई है। कड़ाके की ठंड है, कोहरा छाया हुआ है, लेकिन उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (Prayagraj) में लाखों श्रद्धालु गंगा के ठंडे पानी में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। आज ‘मौनी अमावस्या’ (Mauni Amavasya) है। हिंदू धर्म में साल की सभी अमावस्याओं में इसे “महारानी” कहा जाता है। आज का दिन सिर्फ नहाने-धोने का नहीं, बल्कि अपनी जुबान और मन को शांत रखने (Silence) का दिन है।

माघ मेले का यह सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण स्नान पर्व है। आखिर क्यों आज के दिन करोड़ों लोग गंगा किनारे खींचे चले आते हैं? क्या है ‘मौन’ रहने का वैज्ञानिक और धार्मिक राज? आइए जानते हैं।

Mauni Amavasya

मौनी अमावस्या: आखिर आज ‘चुप’ क्यों रहना है?

‘मौनी’ शब्द की उत्पत्ति ‘मुनि’ (ऋषि) शब्द से हुई है। शास्त्रों के अनुसार, आज के दिन ही सृष्टि के पहले पुरुष ‘मनु ऋषि’ का जन्म हुआ था।

इसलिए आज के दिन ‘मौन व्रत’ (Maun Vrat) रखने की परंपरा है।

लेकिन रुकिए, मौन का मतलब सिर्फ ‘मुंह बंद रखना’ नहीं है।

* असली मतलब: इसका अर्थ है अपने मन के शोर को बंद करना। आज के दिन कड़वे शब्द न बोलना, झूठ न बोलना और मानसिक शांति बनाए रखना ही असली पूजा है।

* माना जाता है कि जो व्यक्ति आज पूरे विधि-विधान से मौन रखकर स्नान और दान करता है, उसे हजारों गायों के दान जितना पुण्य मिलता है।

प्रयागराज में आस्था का महाकुंभ (Magh Mela Connection)

अगर आप आज प्रयागराज के त्रिवेणी संगम (गंगा, यमुना और सरस्वती का मिलन) का नज़ारा देखेंगे, तो आपको अपनी आंखों पर यकीन नहीं होगा।

माघ मेला जो जनवरी की शुरुआत से चल रहा है, आज अपने चरम (Peak) पर है।

* अमृत योग: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, आज के दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों मकर राशि (Capricorn) में होते हैं। जब ये ग्रह एक साथ आते हैं, तो माना जाता है कि गंगा का जल ‘अमृत’ बन जाता है।

* कल्पवास का फल: जो कल्पवासी (टेंट में रहकर तपस्या करने वाले लोग) पिछले कई दिनों से संगम किनारे रह रहे हैं, उनके लिए आज का स्नान सबसे बड़ा पर्व है। ऐसा लगता है जैसे धरती पर स्वर्ग उतर आया हो।

आज क्या करें? (5 सुनहरे नियम)

अगर आप प्रयागराज नहीं जा पाए हैं, तो निराश न हों। आप घर बैठे भी इस दिन का पूरा फल पा सकते हैं। बस ये 5 काम जरूर करें:

* गंगाजल से स्नान: अपने नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाएं और मन में ‘हर हर गंगे’ का जाप करें।

* तिल का दान: माघ महीने में ‘तिल’ (Sesame) का बहुत महत्व है। आज तिल, तिल के लड्डू या तिल का तेल दान करना शुभ माना जाता है।

* मौन व्रत: कोशिश करें कि आज कम से कम 2-3 घंटे (या पूरा दिन) मौन रहें। मोबाइल और सोशल मीडिया के शोर से दूर रहें।

* दीपदान: शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे या तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं।

* पितृ तर्पण: अमावस्या पितरों (Ancestors) का दिन होती है। आज उनके नाम से भोजन या वस्त्र किसी गरीब को दें, इससे पितृ दोष दूर होता है।

मौन रहने का ‘साइंटिफिक’ फायदा

धर्म अपनी जगह है, लेकिन आज के दौर में मौनी अमावस्या का महत्व और बढ़ गया है।

हम दिन भर बोलते हैं, बहस करते हैं, फोन पर लगे रहते हैं। इससे हमारी मानसिक ऊर्जा (Mental Energy) खत्म होती है।

मनोवैज्ञानिक भी मानते हैं कि कुछ समय ‘चुप’ रहने से:

* दिमाग रीबूट (Reboot) होता है।

* तनाव (Stress) कम होता है।

* सोचने की शक्ति बढ़ती है।

तो आज का दिन एक तरह से आपके दिमाग का ‘Digital Detox’ है।

ग्रहों का दुर्लभ संयोग

पंचांग के अनुसार, आज कई शुभ योग बन रहे हैं। ‘सर्वार्थ सिद्धि योग’ के कारण आज किया गया कोई भी नया काम या निवेश लंबे समय तक फायदा देगा। शनि देव अपनी ही राशि में हैं और सूर्य देव भी उनके साथ आ रहे हैं, जो पिता-पुत्र के मिलन का प्रतीक है।

Mauni Amavasya

सिर्फ परंपरा नहीं, जीवन का पाठ

मौनी अमावस्या हमें सिखाती है कि कभी-कभी “चुप रहना” बोलने से ज्यादा ताकतवर होता है। प्रयागराज में डुबकी लगा रहे करोड़ों लोग सिर्फ पानी में नहीं नहा रहे, वे अपनी आत्मा को शुद्ध कर रहे हैं।

आज के दिन आप भी संकल्प लें—सिर्फ पूजा का नहीं, बल्कि अपनी वाणी को मधुर बनाने का। क्योंकि असली धर्म वही है जो दूसरों को खुशी दे, दुख नहीं।

“हे गंगा मैया, जो भी आज तेरी शरण में आए, उसके सारे पाप धो देना।”

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बिहार बोर्ड परीक्षा 2026: 10वीं-12वीं की डेटशीट जारी, परीक्षा केंद्र जाने से पहले जरूर पढ़ें ये 5 बड़े नियम और जरूरी निर्देश

बिहार

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने मैट्रिक और इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा 2026 का बिगुल फूंक दिया है। बोर्ड ने न केवल परीक्षा की तिथियां घोषित कर दी हैं, बल्कि परीक्षार्थियों के लिए कड़े निर्देश भी जारी किए हैं। अगर आप भी इस साल बोर्ड परीक्षा में शामिल होने जा रहे हैं, तो शेड्यूल के साथ-साथ इन नियमों को जानना आपके लिए बेहद जरूरी है ताकि एग्जाम सेंटर पर कोई परेशानी न हो।

बिहार बोर्ड परीक्षा

कब से शुरू होंगे एग्जाम परीक्षा ?

बिहार बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि परीक्षाएं दो पालियों में आयोजित की जाएंगी। इंटर (Class 12th) की थ्योरी परीक्षाएं 2 फरवरी से 13 फरवरी 2026 तक चलेंगी। वहीं, मैट्रिक (Class 10th) की परीक्षा 17 फरवरी से 25 फरवरी 2026 के बीच संपन्न होगी। थ्योरी से पहले छात्रों को अपनी प्रैक्टिकल परीक्षाओं में शामिल होना होगा, जो जनवरी 2026 में आयोजित की जा रही हैं (इंटर: 10-20 जनवरी और मैट्रिक: 20-22 जनवरी)।

एग्जाम सेंटर के लिए सबसे महत्वपूर्ण निर्देश

बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों के लिए कुछ सख्त नियम बनाए गए हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है:

• रिपोर्टिंग टाइम का ध्यान: छात्रों को परीक्षा शुरू होने से कम से कम 30 मिनट पहले केंद्र पर पहुंचना होगा। देरी से आने वाले परीक्षार्थियों को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

• एडमिट कार्ड और पहचान पत्र: बिना एडमिट कार्ड के प्रवेश वर्जित है। एडमिट कार्ड स्कूलों में मैट्रिक के लिए 8 जनवरी से और इंटर के लिए 16 जनवरी से मिलने शुरू हो जाएंगे।

• प्रतिबंधित वस्तुएं: परीक्षा केंद्र के अंदर मोबाइल फोन, ब्लूटूथ, स्मार्ट वॉच, कैलकुलेटर या किसी भी तरह की कागजी चिट ले जाना सख्त मना है। पकड़े जाने पर छात्र को परीक्षा से निष्कासित किया जा सकता है।

• एक्स्ट्रा टाइम: परीक्षार्थियों को प्रश्न पत्र पढ़ने और निर्देशों को समझने के लिए 15 मिनट का अतिरिक्त ‘कूल-ऑफ’ समय दिया जाएगा।

कैसे पता करें अपना एग्जाम सेंटर ?

छात्रों के मन में सबसे बड़ा सवाल एग्जाम सेंटर को लेकर रहता है। बोर्ड ने साफ किया है कि परीक्षा केंद्र की सटीक जानकारी, केंद्र का नाम और कोड केवल आपके ऑफिशियल एडमिट कार्ड पर ही अंकित होगा। एडमिट कार्ड जारी होने के बाद छात्र उसे biharboardonline.bihar.gov.in से डाउनलोड कर सकते हैं या अपने स्कूल के प्रधानाध्यापक से प्राप्त कर सकते हैं।

एडमिट कार्ड में गड़बड़ी हो तो क्या करें?

यदि आपके एडमिट कार्ड में नाम, फोटो या सेंटर से जुड़ी कोई त्रुटि (Error) दिखती है, तो तुरंत अपने स्कूल से संपर्क करें। इसके अलावा छात्र बिहार बोर्ड की हेल्पलाइन नंबर 0612-2230016 पर भी कॉल कर सकते हैं। बोर्ड ने छात्रों की सुविधा के लिए एक AI चैटबॉट भी लॉन्च किया है, जहाँ से त्वरित सहायता प्राप्त की जा सकती है।

बिहार बोर्ड परीक्षा

सफलता के लिए अंतिम टिप्स

चूंकि परीक्षाएं दो पालियों (9:30 AM से 12:45 PM और 1:45 PM से 5:00 PM) में हैं, इसलिए अपनी शिफ्ट के अनुसार समय का प्रबंधन करें। बोर्ड ने सलाह दी है कि छात्र परीक्षा से एक-दो दिन पहले अपने आवंटित केंद्र पर जाकर उसकी दूरी और रास्ते का मुआयना जरूर कर लें ताकि परीक्षा के दिन हड़बड़ी न हो।

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Bihar Police SI Exam 2026 Update : आज से शुरू हुई दरोगा भर्ती की प्रारंभिक परीक्षा, जानें शिफ्ट टाइमिंग और जरूरी नियम

Bihar Police SI Exam 2026

Bihar Police SI Exam 2026 Update: बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) द्वारा बिहार पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) के कुल 1799 पदों पर भर्ती के लिए प्रारंभिक परीक्षा आज, 18 जनवरी 2026 से शुरू कर दी गई है। राज्य भर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच लाखों उम्मीदवार इस प्रतियोगिता में शामिल हो रहे हैं। यह परीक्षा 21 जनवरी तक आयोजित की जाएगी, जिसके माध्यम से योग्य उम्मीदवारों का चयन राज्य के गृह विभाग के अंतर्गत किया जाना है।

परीक्षा का शेड्यूल और शिफ्ट की जानकारी

बिहार पुलिस दरोगा भर्ती की यह प्रारंभिक परीक्षा दो मुख्य तिथियों—18 जनवरी (रविवार) और 21 जनवरी 2026 (बुधवार) को निर्धारित की गई है। आयोग ने सुचारू संचालन के लिए इसे दो पालियों में विभाजित किया है। पहली पाली सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक आयोजित की जा रही है, जिसके लिए अभ्यर्थियों को सुबह 8:30 बजे ही रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया था। वहीं, दूसरी पाली दोपहर 2:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक चलेगी, जिसका रिपोर्टिंग समय दोपहर 1:00 बजे तय किया गया है। प्रत्येक प्रश्न पत्र हल करने के लिए उम्मीदवारों को 2 घंटे का समय दिया जा रहा है।

Bihar Police SI Exam 2026

चयन प्रक्रिया और परीक्षा का स्वरूप

बिहार पुलिस SI बनने का सफर चार कठिन चरणों से होकर गुजरता है। पहले चरण में प्रारंभिक परीक्षा होती है, जिसमें 200 अंकों के कुल 100 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से सामान्य ज्ञान, इतिहास, भूगोल और समसामयिक घटनाओं (Current Affairs) पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। अगले चरण यानी मुख्य परीक्षा में पहुंचने के लिए उम्मीदवारों को कम से कम 30% अंक प्राप्त करना अनिवार्य है। मुख्य परीक्षा के बाद शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) होती है, जिसमें पुरुषों को 6 मिनट में 1.6 किलोमीटर और महिलाओं को 6 मिनट में 1 किलोमीटर की दौड़ पूरी करनी होती है। इसके अलावा ऊंची कूद (High Jump) और लंबी कूद के मानक भी तय किए गए हैं।

अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश

आयोग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा केंद्र पर प्रवेश के लिए एडमिट कार्ड के साथ एक मूल फोटो पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड या वोटर आईडी) और दो पासपोर्ट साइज फोटो लाना अनिवार्य है। परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे मोबाइल फोन, ब्लूटूथ या स्मार्ट वॉच को परीक्षा केंद्र के अंदर ले जाना पूरी तरह वर्जित है। यदि किसी उम्मीदवार को एडमिट कार्ड डाउनलोड करने में समस्या आई है, तो वे पटना स्थित आयोग के कार्यालय से डुप्लिकेट कार्ड के लिए संपर्क कर सकते हैं। सभी केंद्रों पर जैमर और सीसीटीवी कैमरों के जरिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

Bihar Police SI Exam 2026

सैलरी स्ट्रक्चर और भविष्य की संभावनाएं

बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर का पद न केवल सम्मानजनक है, बल्कि इसमें वेतन भी आकर्षक मिलता है। अंतिम रूप से चयनित होने वाले उम्मीदवारों को पे-लेवल 6 के तहत वेतन और विभिन्न सरकारी भत्ते दिए जाएंगे। यह भर्ती प्रक्रिया राज्य में कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए की जा रही है। परीक्षा से जुड़ी किसी भी नई अपडेट या परिणाम की जानकारी के लिए उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट bpssc.bihar.gov.in पर नियमित रूप से विजिट करने की सलाह दी जाती है।

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किसानों की चमकेगी किस्मत! PM मोदी ने शुरू की ₹24,000 करोड़ की ‘धन-धान्य कृषि योजना’, जानें किसे मिलेगा फायदा

किसानों

PM Dhan-Dhaanya Krishi Yojana: केंद्र सरकार ने देश के किसानों की आय बढ़ाने और खेती को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाया है। दिवाली के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘पीएम धन-धान्य कृषि योजना’ की औपचारिक शुरुआत की। इस योजना के लिए 24,000 करोड़ रुपये का विशाल बजट आवंटित किया गया है, जिसका सीधा असर देश के 1.7 करोड़ किसानों पर पड़ेगा।

आइए जानते हैं क्या है यह योजना और कैसे यह 100 जिलों की सूरत बदलने वाली है।

धन-धान्य कृषि योजना

क्या है पीएम धन-धान्य कृषि योजना?

यह योजना मुख्य रूप से देश के उन 100 ‘आकांक्षी जिलों’ (Aspirational Districts) पर केंद्रित है, जहाँ खेती की पैदावार यानी उत्पादकता वर्तमान में काफी कम है। वित्त वर्ष 2025-26 से अगले छह वर्षों तक चलने वाली इस योजना का लक्ष्य छोटे और सीमांत किसानों को तकनीकी और आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।

योजना के 3 मुख्य लक्ष्य: उत्पादकता से बाजार तक

इस योजना को तीन प्रमुख मापदंडों के आधार पर लागू किया जाएगा:

पैदावार बढ़ाना: उन जिलों को चुना गया है जहाँ फसल की उपज कम है, ताकि वहाँ आधुनिक बीज और तकनीक पहुंचाई जा सके।

फसल चक्र (Crop Rotation): किसानों को एक ही खेत में साल में ज्यादा फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

ऋण सुविधा: किसानों को साहूकारों के चंगुल से बचाने के लिए आसान बैंक लोन और क्रेडिट की सुविधा दी जाएगी।

1.7 करोड़ किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

योजना का सबसे बड़ा फायदा छोटे किसानों को होगा। आंकड़ों के अनुसार, इसके लाभार्थियों में 86% छोटे और सीमांत किसान शामिल हैं। योजना के तहत किसानों को 50% से 80% तक की सब्सिडी और नाबार्ड (NABARD) के माध्यम से 50,000 रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक का लोन मिल सकेगा। अनुमान है कि इस तकनीक और मदद से किसानों के मुनाफे में 20% से 50% तक की बढ़ोतरी होगी।

11 मंत्रालयों का महा-संगम

इस योजना की सबसे खास बात यह है कि यह अकेली योजना नहीं है, बल्कि इसमें केंद्र सरकार के 11 मंत्रालयों की 36 पुरानी योजनाओं को एक साथ जोड़ दिया गया है। नीति आयोग के मॉडल पर आधारित इस स्कीम में पंचायत और ब्लॉक स्तर पर अनाज भंडारण (Storage), सिंचाई और बेहतर जल प्रबंधन पर जोर दिया जाएगा।

महिलाओं और डिजिटल खेती को बढ़ावा

महिला किसान: महिलाओं के लिए विशेष ‘प्रोड्यूसर ग्रुप्स’ बनाए जाएंगे और उन्हें 10,000 से 1 लाख रुपये तक का माइक्रोफाइनेंस और ट्रेनिंग दी जाएगी।

e-NAM प्लेटफॉर्म: बिचौलियों को खत्म करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग होगा, ताकि किसान अपनी फसल सीधे सही दाम पर बेच सकें।

दलहन आत्मनिर्भरता: दालों के उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए इस योजना को ‘दलहन मिशन’ के साथ भी जोड़ा गया है।

धन-धान्य कृषि योजना

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना केवल एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने का एक मिशन है। जनवरी 2026 तक इसकी निगरानी कड़ी की जाएगी ताकि हर पात्र किसान तक इसका लाभ पहुंच सके। यदि आप बिहार या अन्य राज्यों के चिन्हित 100 जिलों में रहते हैं, तो अपने स्थानीय कृषि विभाग से संपर्क कर इस योजना का लाभ उठाने की तैयारी शुरू कर दें।

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PM-KISAN 19वीं किस्त 2026: कब आएंगे आपके खाते में ₹2000? यहाँ जानें तारीख, पात्रता और स्टेटस चेक करने का तरीका

PM-KISAN

PM Kisan 19th Installment Date 2026: देश के करोड़ों किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। केंद्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना, ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ PM-KISAN के तहत 19वीं किस्त जल्द ही जारी होने वाली है। बजट 2026 के बाद किसानों को मिलने वाली यह पहली सौगात होगी, जो खेती-किसानी के खर्चों में बड़ी मदद प्रदान करेगी।

फरवरी 2026 में जारी हो सकती है 19वीं किस्त

ताजा मीडिया रिपोर्ट्स और पिछले रुझानों के अनुसार, PM-KISAN की 19वीं किस्त फरवरी 2026 के दूसरे या तीसरे सप्ताह में जारी होने की प्रबल संभावना है। जानकारों का मानना है कि 24 फरवरी 2026 के आसपास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक भव्य कार्यक्रम के माध्यम से देशभर के 9.8 करोड़ से अधिक पात्र किसानों के खातों में ₹2000 की राशि सीधे ट्रांसफर (DBT) कर सकते हैं।

PM-KISAN

गौरतबल है कि 18वीं किस्त के 4 महीने बाद यह राशि जारी की जा रही है। पिछली बार 2025 में बिहार के भागलपुर से किस्त लॉन्च की गई थी, इसलिए इस बार भी संभावना जताई जा रही है कि बिहार या किसी अन्य चुनावी राज्य से इस योजना का अगला चरण शुरू किया जाए।

9.8 करोड़ किसानों को मिलेगा ₹22,000 करोड़ का लाभ

इस बार केंद्र सरकार कुल ₹22,000 करोड़ की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में हस्तांतरित करने की तैयारी में है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करना है। सालाना ₹6000 की इस सहायता को तीन समान किस्तों (₹2000 प्रत्येक) में दिया जाता है।

इन किसानों की अटक सकती है किस्त: eKYC है अनिवार्य

अगर आप पीएम किसान योजना के लाभार्थी हैं, तो सावधान हो जाएं। बिना eKYC अपडेट कराए आपकी 19वीं किस्त रुक सकती है। सरकार ने पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए निम्नलिखित शर्तें अनिवार्य कर दी हैं:

eKYC अपडेट: पोर्टल पर जाकर बायोमेट्रिक या OTP के जरिए eKYC पूरा करें।

भू-सत्यापन (Land Seeding): आपकी खेती की जमीन का सरकारी रिकॉर्ड में सत्यापन होना जरूरी है।

आधार-बैंक लिंकिंग: आपका बैंक खाता आधार से लिंक होना चाहिए और DBT (Direct Benefit Transfer) के लिए इनेबल्ड होना चाहिए।

बिहार और अन्य राज्यों पर विशेष प्रभाव

बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्यों में इस योजना का व्यापक असर देखा जा रहा है। अकेले पटना जैसे जिलों में 20 लाख से अधिक किसान इस लाभ की प्रतीक्षा कर रहे हैं। बिहार के किसानों के लिए सरकार विशेष कैंप लगाकर Farmer ID रजिस्ट्री और त्रुटियों को सुधारने का काम कर रही है।

PM-KISAN स्टेटस कैसे चेक करें?

अपना नाम लाभार्थी सूची में चेक करने के लिए इन स्टेप्स का पालन करें:

• सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट [संदिग्ध लिंक हटा दिया गया] पर जाएं।

• होमपेज पर ‘Know Your Status’ विकल्प पर क्लिक करें।

• अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और कैप्चा कोड दर्ज करें।

• ‘Get Data’ पर क्लिक करते ही आपकी किस्त का स्टेटस (FTO processed या Payment Success) स्क्रीन पर आ जाएगा।

PM-KISAN

यदि आपके स्टेटस में कोई समस्या दिख रही है, तो तुरंत अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या जिला कृषि विभाग के कार्यालय से संपर्क करें।

PM-KISAN योजना न केवल किसानों की आय में वृद्धि कर रही है, बल्कि उन्हें साहूकारों के चंगुल से भी बचा रही है। 19वीं किस्त के आने से रबी की फसलों के प्रबंधन और आगामी सीजन की तैयारी में किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। योजना से जुड़ी ताजा जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल पर नजर बनाए रखें।

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बिहार में रचा जाएगा इतिहास: विराट रामायण मंदिर में आज(17) जनवरी को होगी विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना, सीएम नीतीश होंगे साक्षी

बिहार

पूर्वी चंपारण, बिहार: बिहार के धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास में आज (17) जनवरी 2026 का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। पूर्वी चंपारण जिले के कैथवलिया (चकिया-केसरिया पथ) में निर्माणाधीन ‘विराट रामायण मंदिर‘ में दुनिया के सबसे विशाल शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। इस ऐतिहासिक अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

विराट रामायण मंदिर

महा आयोजन का शुभ मुहूर्त और कार्यक्रम

यह भव्य आयोजन माघ कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि के पावन संयोग पर हो रहा है। कार्यक्रम की रूपरेखा कुछ इस प्रकार है:

सुबह 08:00 बजे: मुख्य अभिषेक और विशेष पूजा का शुभारंभ होगा। काशी (वाराणसी) से आए विद्वान पंडितों की देखरेख में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अनुष्ठान शुरू होगा।

पवित्र नदियों का जल: शिवलिंग का अभिषेक सिंधु, नर्मदा, गंडक और गंगा जैसी पवित्र नदियों के जल से किया जाएगा।

सुबह 09:00 से 11:00 बजे: इस दौरान हवन, सहस्रलिंग स्थापना और अन्य जरूरी वैदिक विधियां पूरी की जाएंगी।

दोपहर 12:00 बजे के बाद: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समारोह में शामिल होकर मंदिर परिसर का निरीक्षण करेंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके बाद भव्य महाआरती का आयोजन होगा।

शिवलिंग की खासियत: इंजीनियरिंग और आस्था का बेजोड़ संगम

यह शिवलिंग केवल आस्था का ही नहीं, बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग का भी एक अद्भुत नमूना है:

विशाल आकार: यह शिवलिंग 33 फीट ऊँचा और 33 फीट चौड़ा है। इसका कुल वजन लगभग 210 मीट्रिक टन है।

लागत और निर्माण: तमिलनाडु के महाबलीपुरम में इसे एक ही काले ग्रेनाइट पत्थर को तराश कर बनाया गया है। इसे बनाने में 10 साल का समय और करीब 3 करोड़ रुपये की लागत आई है।

विशेष माला और श्रृंगार: स्थापना के दिन महादेव को 18 फीट लंबी विशेष माला अर्पित की जाएगी, जिसमें फूल, भांग, धतूरा और बेलपत्र पिरोए गए होंगे। सजावट के लिए विशेष फूल विदेशों से मंगाए गए हैं।

कैसे हुई स्थापना की तैयारी?

इतने विशाल शिवलिंग को स्थापित करना एक बड़ी चुनौती थी। इसके लिए राजस्थान और भोपाल से 750 टन क्षमता वाली दो विशाल क्रेनें मंगाई गई हैं। तकनीकी बारीकियों को सुनिश्चित करने के लिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की टीम भी लगातार काम कर रही है। शिवलिंग को तमिलनाडु से बिहार तक 96 चक्कों वाले एक विशेष ट्रक के जरिए लाया गया है।

विराट रामायण मंदिर

विराट रामायण मंदिर का स्वरूप

जब यह मंदिर पूरी तरह बनकर तैयार होगा, तो यह कंबोडिया के अंकोरवाट मंदिर से भी बड़ा होगा।

• इसकी लंबाई 1080 फीट और चौड़ाई 540 फीट होगी।

• इसमें कुल 22 मंदिर और 18 शिखर होंगे, जिनमें मुख्य शिखर की ऊँचाई 270 फीट होगी।

श्रद्धालुओं में भारी उत्साह

इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए बड़े पैमाने पर पूजा पंडाल, वीआईपी गैलरी और सुरक्षा के इंतजाम किए हैं।

यह शिवलिंग स्थापना न केवल बिहार बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का विषय है, जो आने वाले समय में विश्व स्तर पर पर्यटन और आस्था का एक बड़ा केंद्र बनेगा।

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Bijnor Dog Miracle: 3 दिन से हनुमान जी की परिक्रमा कर रहा कुत्ता! ‘भक्ति’ है या जानलेवा बीमारी? जानिए 5 बड़े सच आस्था का चमत्कार या विज्ञान की अनदेखी?

Bijnor

क्या कोई जानवर भगवान की भक्ति कर सकता है? क्या उसे भी ‘मोक्ष’ और ‘परिक्रमा’ का ज्ञान हो सकता है? उत्तर प्रदेश के बिजनौर (Bijnor) में इन दिनों एक ऐसा नज़ारा देखने को मिल रहा है जिसने पूरे देश को हैरान कर दिया है। एक कुत्ता पिछले 3-4 दिनों से लगातार, बिना रुके, बिना खाए-पिए हनुमान जी की मूर्ति की परिक्रमा (

Circling) कर रहा है। हज़ारों लोग इसे ‘चमत्कार’ मानकर पूजा कर रहे हैं, चढ़ावा चढ़ा रहे हैं। लेकिन क्या यह सच में भक्ति है? या फिर हम एक बेजुबान की ‘तड़प’ को ‘तपस्या’ समझ बैठे हैं?

आज इस ब्लॉग में हम जानेंगे बिजनौर के इस वायरल वीडियो का पूरा सच और वह मेडिकल कारण (Medical Reason) जो शायद इस कुत्ते की जान ले रहा है।

Bijnor

बिजनौर के मंदिर में आखिर हो क्या रहा है?

  • घटना बिजनौर जिले के नगीना (Nagina) तहसील के पास स्थित नंदपुर गांव की है।
  • यहाँ के एक हनुमान मंदिर में एक कुत्ता पिछले 72 घंटों से भी ज्यादा समय से मूर्ति के गोल-गोल चक्कर काट रहा है।
  • बिना रुके: प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यह कुत्ता न तो रुक रहा है और न ही सो रहा है।
  • खाना-पीना त्यागा: ग्रामीणों ने उसे रोटी-बिस्किट देने की कोशिश की, लेकिन उसने कुछ नहीं खाया।
  • देवी मां की भी परिक्रमा: हनुमान जी के बाद अब यह कुत्ता माँ दुर्गा की मूर्ति के भी चक्कर काटने लगा है, जिससे लोगों का विश्वास और गहरा हो गया है।

‘कबूतर’ वाली घटना ने बढ़ाया अंधविश्वास

इस मामले में ‘चमत्कार’ का एंगल तब और मजबूत हो गया जब एक अजीब घटना घटी।

ग्रामीणों का दावा है कि परिक्रमा के दौरान कुत्ता कुछ देर के लिए बैठा था, तभी एक जंगली कबूतर आकर उसके सिर पर बैठ गया। कुछ देर बाद वह कबूतर वहीं मर गया।

  • बस फिर क्या था! लोगों ने इसे “दैवीय शक्ति” मान लिया।
  • कोई कह रहा है कि यह कुत्ता पिछले जन्म में कोई महान संत था।
  • कोई इसे कलयुग में हनुमान जी का साक्षात चमत्कार बता रहा है।
  • भीड़ इतनी बढ़ गई है कि पुलिस को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी।

साइंस क्या कहता है? (The Medical Truth)

अब आते हैं कड़वे सच पर। जिसे हम ‘भक्ति’ समझ रहे हैं, वह असल में “Circling Disease” या एक गंभीर Neurological Disorder हो सकता है।

पशु चिकित्सकों (Veterinary Doctors) और मेडिकल साइंस के अनुसार, जब कोई कुत्ता लगातार गोल-गोल घूमने लगता है, तो यह कोई चमत्कार नहीं, बल्कि खतरे की घंटी है। इसके मुख्य 3 कारण हो सकते हैं:

  • Brain Tumor (ब्रेन ट्यूमर): अगर दिमाग के अगले हिस्से (Forebrain) में ट्यूमर हो जाए, तो जानवर अपना संतुलन खो देता है और एक ही दिशा में घूमने के लिए मजबूर हो जाता है।
  • Head Injury (सिर में चोट): अगर कुत्ते को किसी ने सिर पर मारा हो या कोई अंदरूनी चोट लगी हो, तो दिमाग का संतुलन बिगड़ जाता है। डॉक्टरों ने बिजनौर वाले कुत्ते में भी इसकी आशंका जताई है।
  • Canine Vestibular Disease: यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें कान के अंदरूनी हिस्से (जो बैलेंस बनाता है) में इन्फेक्शन हो जाता है। इससे कुत्ते को लगता है कि दुनिया घूम रही है और वह खुद भी घूमने लगता है।

हमारा समाज: इलाज की जगह पूजा क्यों?

  • यह घटना हमारी शिक्षा व्यवस्था (Education System) और मानसिकता पर एक करारा तमाचा है।
  • जिस कुत्ते को तुरंत इलाज और ग्लूकोज की जरूरत थी, उसे लोग घेरकर वीडियो बना रहे हैं और ‘जय श्री राम’ के नारे लगा रहे हैं।
  • फिल्में और टीवी सीरियल्स ने हमारे दिमाग को ऐसा ‘वॉश’ (Brainwash) कर दिया है कि हमें हर असामान्य घटना में ‘ईश्वर’ दिखने लगता है, ‘तर्क’ (Logic) नहीं।
  • अगर किसी इंसान को दिल का दौरा पड़े और वह तड़पने लगे, तो क्या हम उसे अस्पताल ले जाएंगे या उसे ‘माता आ गई’ कहकर पूजा करेंगे? तो फिर इस बेजुबान के साथ ऐसा अन्याय क्यों?

बेजुबान की जान खतरे में है

स्थानीय पशु चिकित्सकों की टीम ने मौके पर जाकर जांच की है और आशंका जताई है कि कुत्ते की दिमागी हालत ठीक नहीं है।

लगातार घूमने से:

उसका शरीर Dehydrate (पानी की कमी) हो रहा है।

उसके पैरों और जोड़ों में भयानक दर्द हो रहा होगा।

अगर उसे जल्द ही सही इलाज (Sedation/Treatment) नहीं मिला, तो उसकी मौत हो सकती है—भक्ति से नहीं, बल्कि थकान और बीमारी से।

Bijnor

आस्था अपनी जगह, इंसानियत अपनी जगह

  • ईश्वर कण-कण में है, यह मानना हमारी संस्कृति है। लेकिन एक बीमार जानवर को भगवान मानकर उसे तिल-तिल मरने के लिए छोड़ देना—यह न तो धर्म है और न ही इंसानियत।
  • बिजनौर का यह कुत्ता ‘भक्त’ नहीं, बल्कि ‘मरीज’ है। हमें अंधविश्वास का चश्मा उतारकर उसे बचाने की जरूरत है, पूजने की नहीं।

आपकी राय: क्या प्रशासन को भीड़ हटाकर उस कुत्ते को जबरदस्ती अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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बिहार सुपौल हादसा: घर में टीवी देख रही लड़की को गोली, UD केस हत्या बना

सुपौल

सुपौल जिले के भीमनगर थाना क्षेत्र में 11वीं कक्षा की छात्रा अपेक्षा सिंह (16 वर्ष) की संदिग्ध मौत ने सनसनी फैला दी है। परिजनों ने शुरू में इसे सीढ़ियों से गिरने का हादसा बताया था, लेकिन पोस्टमॉर्टम में उसके शरीर से गोली निकलने और गोली लगने के स्पष्ट निशान मिलने से मामला हत्या का बन गया।

घटना का विवरण

घटना मंगलवार शाम करीब 4:30 से 5:00 बजे के बीच घटी। अपेक्षा घर के मुख्य हॉल में आराम से टीवी देख रही थीं। अचानक एक तेज आवाज आई, जो गिरने जैसी लगी। परिवार के सदस्य दौड़कर पहुंचे तो अपेक्षा खून से लथपथ जमीन पर पड़ी थीं। उनका सिर फटा हुआ था और शरीर पर चोट के गंभीर निशान थे। परिजनों ने तुरंत उन्हें नजदीकी अनुमंडलीय अस्पताल वीरपुर ले जाया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद मृत घोषित कर दिया। परिवार ने पुलिस को दी शिकायत में केवल सीढ़ियों से गिरने या हादसे का जिक्र किया, गोली या हिंसा का कोई उल्लेख नहीं था।

सुपौल

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट

सदर अस्पताल सुपौल में बुधवार को हुए पोस्टमॉर्टम में डॉक्टरों ने शव से गोली निकाली और मौत का कारण गोली लगना पाया।डॉ. ठाकुर प्रसाद ने पुष्टि की कि बुलेट इंजरी से मौत हुई। परिजनों ने पुलिस को दिए आवेदन में गोली का जिक्र नहीं किया था।

पुलिस जांच

भीमनगर थाने में यूडी केस दर्ज किया गया था, लेकिन रिपोर्ट के बाद पुलिस ने सभी पहलुओं पर जांच तेज कर दी | एसपी शरथ आरएस ने कहा कि परिजनों के बयान संदेह के घेरे में हैं और गोली कैसे लगी, इसकी तहकीकात हो रही है। पुलिस हर संभावना, जैसे हत्या या साजिश, की जांच कर रही है।

पुलिस ने कहा कि 48 घंटे में क्लू मिल सकता है। फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है। यह घटना बिहार के कोसी क्षेत्र में छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल उठा रही है। परिवार शोक में डूबा है, लेकिन जांच से सच्चाई सामने आएगी। कुल मिलाकर, यह मामला अब हत्या का रूप ले चुका है

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NEET PG Reservation: -40 नंबर वाले करेंगे अब आपका ऑपरेशन? डॉक्टर बनने की रेस में ‘योग्यता’ की मौत! 3 कड़वे सच 

NEET PG

ज़रा सोचिए, आप अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हैं। आपकी सर्जरी होने वाली है। आपको पता चलता है कि जिस डॉक्टर के हाथ में नश्तर (Scalpel) है, उसने अपनी डिग्री ‘काबिलियत’ से नहीं, बल्कि ‘कोटे’ और ‘कम किए गए कट-ऑफ’ की बदौलत पाई है। क्या आप अपनी जान उसे सौंपेंगे? यह सवाल डरावना है, लेकिन आज के मेडिकल सिस्टम का यह वो काला सच है जिस पर बात करने से सब डरते हैं। NEET PG (MD/MS) में जिस तरह से कट-ऑफ गिराए जा रहे हैं और रिजर्वेशन का खेल खेला जा रहा है, उसने पूरी दुनिया के सामने भारतीय चिकित्सा व्यवस्था (Medical System) की साख पर बट्टा लगा दिया है।

क्या सच में -40 या जीरो नंबर लाने वाला व्यक्ति एक ‘स्पेशलिस्ट सर्जन’ बनने के लायक है? आज इस ब्लॉग में हम सरकार, सिस्टम और उन प्रदर्शनकारियों से सीधी बात करेंगे।

NEET PG

मेरिट की हत्या: जब ‘काबिलियत’ हार जाए और ‘जाति’ जीत जाए

  • खबर यह है कि मेडिकल की पोस्ट-ग्रेजुएट सीटों (MD/MS) को भरने के लिए कट-ऑफ को पाताल लोक तक गिरा दिया जाता है। पिछले साल हमने देखा कि ‘ज़ीरो परसेंटाइल’ (0 Percentile) वाले को भी एलिजिबल कर दिया गया। और अब चर्चा है कि नेगेटिव मार्क्स या बेहद कम नंबर लाने वाले (SC/ST/OBC कोटे के तहत) भी स्पेशलिस्ट डॉक्टर बन सकेंगे।
  • यह 10वीं का बोर्ड एग्जाम नहीं है। यह न्यूरोसर्जरी, कार्डियोलॉजी और ऑर्थोपेडिक्स है। यहाँ एक गलती की कीमत ‘जान’ देकर चुकानी पड़ती है।
  • जब एक जनरल कैटेगिरी का छात्र 500 नंबर लाकर भी सीट के लिए तरसता है, और दूसरी तरफ आरक्षित वर्ग का छात्र बेहद कम नंबर (यहाँ तक कि माइनस या सिंगल डिजिट) पर वही सीट पा लेता है, तो यह सवाल उठता है—क्या बीमारी मरीज की जाति देखकर हमला करती है? अगर नहीं, तो इलाज करने वाला डॉक्टर जाति के आधार पर क्यों चुना जा रहा है?

वो ‘हीन भावना’ और दंगों का सच

  • मेरा सवाल सरकार से तो है ही, लेकिन उससे भी बड़ा सवाल उन लोगों से है जो आरक्षण के लिए सड़कों पर उतर आते हैं।
  • आप MBBS कर चुके हैं। आप डॉक्टर बन चुके हैं। समाज में आप अब ‘दलित’ या ‘पिछड़े’ नहीं, बल्कि ‘डॉक्टर साहब’ हैं। आप आर्थिक रूप से सक्षम हैं। फिर भी आपको PG (स्पेशलिस्ट बनने) के लिए वैसाखी (Crutches) क्यों चाहिए?
  • जैसे ही कोई सरकार क्रीमी लेयर (Creamy Layer) की बात करती है या मेरिट की बात करती है, तुरंत ‘भारत बंद’ और आंदोलन शुरू हो जाते हैं।
  • आत्मसम्मान कहां है? क्या आरक्षण के लिए लड़ना यह स्वीकार करना नहीं है कि “हम खुद को कमजोर मानते हैं, हम बिना छूट के मुकाबला नहीं कर सकते”?
  • फायदे की लत: यह अब सामाजिक न्याय की लड़ाई नहीं रही, यह ‘सुविधा’ और ‘शॉर्टकट’ की लत बन गई है। जो सच में गरीब है, उसे फायदा मिल नहीं रहा, और जो अमीर डॉक्टर हैं, वो कोटे का लाभ उठा रहे हैं।

सम्मान की भीख नहीं मांगी जा सकती

  • आरक्षण का मूल उद्देश्य था—भेदभाव खत्म करना। लेकिन आज मेडिकल कॉलेजों में क्या हो रहा है?
  • जब एक छात्र 80% नंबर लाकर क्लास में बैठता है और उसके बगल में 20% नंबर वाला छात्र ‘कोटे’ से बैठता है, तो नज़रिया अपने आप बदल जाता है।
  • आप कानून बनाकर सीट तो दिला सकते हैं, लेकिन ‘इज्जत’ (Respect) नहीं।
  • लोग उस डॉक्टर को शक की निगाह से देखते हैं— “ये रिजर्वेशन वाला है या मेरिट वाला?”
  • यह सिस्टम खुद आरक्षित वर्ग के काबिल छात्रों का नुकसान कर रहा है। उनकी मेहनत पर भी ‘कोटे का ठप्पा’ लग जाता है।

अगर आप सच में चाहते हैं कि समाज आपको बराबरी की नज़र से देखे, तो आपको खुद आगे आकर कहना होगा— “हमें खैरात नहीं, मुकाबला चाहिए।” लेकिन अफ़सोस, वोट बैंक की राजनीति ऐसा होने नहीं देगी।

सरकार का दोगलापन: प्राइवेट सीटों का खेल

  • इसमें सरकार भी दूध की धुली नहीं है। कट-ऑफ को माइनस या जीरो तक गिराने के पीछे ‘सामाजिक न्याय’ नहीं, बल्कि ‘व्यापार’ है।
  • भारत में हजारों प्राइवेट मेडिकल सीटें हैं जिनकी फीस करोड़ों में है। मेरिट वाला छात्र इतनी फीस दे नहीं सकता। और जिनके पास पैसा है, उनके पास दिमाग (नंबर) नहीं है।
  • इसलिए सरकार कट-ऑफ गिरा देती है ताकि अमीर (चाहे किसी भी जाति का हो) पैसे फेंककर सीट खरीद सके और कॉलेज मालिकों की जेब भर सके। इस खेल में पिसता सिर्फ आम आदमी है जो सरकारी अस्पताल में इलाज कराने जाता है।
  • NEET PG

जागो, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए

  • आरक्षण स्कूल लेवल तक समझ आता है, कॉलेज तक भी बर्दाश्त किया जा सकता है। लेकिन सुपर-स्पेशलिटी (Super Speciality) में आरक्षण और गिरता हुआ कट-ऑफ देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
  • अगर अब भी हम नहीं जागे और योग्यता (Merit) को प्राथमिकता नहीं दी, तो वो दिन दूर नहीं जब भारत के पास डिग्रियां तो बहुत होंगी, लेकिन इलाज करने वाले ‘डॉक्टर’ नहीं बचेंगे।

आपकी राय: क्या डॉक्टर बनने के लिए जाति का आरक्षण होना चाहिए या सिर्फ मेरिट? कमेंट बॉक्स में अपनी राय खुलकर रखें।

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बिहार शराबबंदी तोड़ने की कोशिश: मऊ में गोपालगंज के तस्करों से 50 हजार की शराब बरामद

बिहार

मऊ (उत्तर प्रदेश) से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ पुलिस ने बिहार में शराब तस्करी की एक बड़ी कोशिश को नाकाम कर दिया है। मऊ जिले की दक्षिण टोला थाना पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए दो बिहारी शराब तस्करों को रंगे हाथ दबोचा है। ये दोनों तस्कर मूल रूप से बिहार के गोपालगंज जिले के रहने वाले हैं और करीब 50 हजार रुपये की अंग्रेजी शराब लेकर बिहार जा रहे थे।

कैसे हुई गिरफ्तारी?

यह कार्रवाई एक सटीक मुखबिर की सूचना पर की गई। दक्षिण टोला पुलिस को सूचना मिली थी कि एक सफेद रंग की टाटा पंच कार, जिस पर फर्जी नंबर प्लेट लगी है, भारी मात्रा में अवैध शराब लेकर गाजीपुर के रास्ते बिहार की तरफ निकलने वाली है।

बिहार

पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मतलूपुर मोड़ के पास घेराबंदी की। जैसे ही संदिग्ध कार वहाँ पहुँची, पुलिस ने उसे रुकने का इशारा किया। कार सवारों ने भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस टीम ने उन्हें चारों तरफ से घेर कर पकड़ लिया।

तस्करों की पहचान

पकड़े गए दोनों युवक बिहार के रहने वाले हैं और पेशेवर तरीके से तस्करी में शामिल लग रहे हैं। पुलिस द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार:

• रमन कुमार

• रोहित राय (कुछ रिपोर्ट्स में नाम राहित राय भी बताया गया है)

ये दोनों तस्कर बिहार के गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत दिघवा दुबौली गांव के निवासी हैं। पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया कि वे लंबे समय से इस काम में शामिल हैं।

क्या-क्या हुआ बरामद?

पुलिस ने जब टाटा पंच कार की तलाशी ली, तो उसमें से भारी मात्रा में अवैध सामान मिला:

• शराब: विभिन्न ब्रांडों की अंग्रेजी शराब की बोतलें बरामद हुईं, जिनकी कुल बाजार कीमत लगभग 50,000 रुपये आंकी गई है।

• वाहन: तस्करी में इस्तेमाल की जा रही टाटा पंच कार को जब्त कर लिया गया है।

• फर्जीवाड़ा: कार पर जो नंबर प्लेट लगी थी, वह फर्जी पाई गई। तस्करों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए अक्सर इस्तेमाल किए जाने वाले इस तरीके का सहारा लिया था।

तस्करी का रास्ता

पूछताछ के दौरान तस्करों ने बताया कि वे देवरिया से निकले थे और मुहम्मदाबाद गोहना में अपने एक साथी से मिलने के बाद गाजीपुर होते हुए बिहार की सीमा में घुसने वाले थे। बिहार में पूर्ण शराबबंदी होने के कारण उत्तर प्रदेश से शराब ले जाकर वहां ऊंचे दामों पर बेचना इनका मुख्य उद्देश्य था। विशेष रूप से मकर संक्रांति के त्योहार के समय बिहार में शराब की डिमांड बढ़ जाती है, जिसका फायदा ये तस्कर उठाना चाहते थे।

बिहार

पुलिस की कार्रवाई

मऊ पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम और धोखाधड़ी (फर्जी नंबर प्लेट के लिए) की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इनके नेटवर्क को खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उत्तर प्रदेश में इन्हें शराब की सप्लाई कौन दे रहा था और बिहार में ये किसे माल डिलीवर करने वाले थे।

बिहार में शराबबंदी के बाद से सीमावर्ती जिलों जैसे गोपालगंज और यूपी के मऊ, देवरिया, बलिया में पुलिस की सतर्कता काफी बढ़ गई है, फिर भी तस्कर नए-नए तरीकों से तस्करी को अंजाम देने की कोशिश करते रहते हैं।

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Mathura Hospital Horror: जेब में ‘मौत’ लेकर पहुंचा ड्राइवर! अस्पताल में मची भगदड़, जानिए 1 रोंगटे खड़े करने वाली वजह

Hospital

Hospital वह जगह है जहां लोग जान बचाने आते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के मथुरा में एक ऐसा वाकया हुआ जिसने डॉक्टरों और मरीजों को अपनी जान बचाने के लिए भागने पर मजबूर कर दिया। सोचिए, आप इमरजेंसी वार्ड में इलाज करा रहे हों और बगल के बेड पर लेटा मरीज अपनी जैकेट की जेब से जिंदा सांप निकाल कर मेज पर रख दे! जी हाँ, यह कोई फिल्मी सीन नहीं, बल्कि मथुरा जिला अस्पताल (District Hospital) की हकीकत है।

12-13 जनवरी की दरमियानी रात, एक ई-रिक्शा चालक ने वह किया जिसे सुनकर ही रूह कांप जाए। सांप के काटने के बाद वह रोया नहीं, बल्कि सांप को पकड़कर अपनी जेब में भर लाया। आखिर उसने ऐसा क्यों किया? क्या यह पागलपन था या कोई अजीबोगरीब समझदारी? आइए जानते हैं इस 12 जनवरी की रात की पूरी कहानी।

Hospital

खौफनाक शुरुआत: दीपक और वो जहरीला मेहमान

घटना मथुरा के मांट (Mant) इलाके की है। दीपक नाम का एक ई-रिक्शा चालक अपना दिन खत्म करके घर लौट रहा था। सर्दी का मौसम था, इसलिए उसने जैकेट पहन रखी थी। उसे अंदाजा भी नहीं था कि उसकी गाड़ी में एक बिन बुलाया ‘जहरीला मेहमान’ पहले से बैठा है।

जैसे ही दीपक ने कुछ हरकत महसूस की, सांप ने उसे काट लिया। आम इंसान होता तो चीखता-चिल्लाता और भाग खड़ा होता। लेकिन दीपक ने गजब की हिम्मत (या कहिए जोखिम) दिखाई। उसने सांप के भागने से पहले ही उसे दबोच लिया।

हैरानी की बात यह है कि उसने सांप को मारा नहीं। उसने उस फुफकारते हुए सांप को अपनी जैकेट की जेब में डाल लिया और सीधे जिला अस्पताल की तरफ रिक्शा दौड़ा दिया।

अस्पताल में ‘मौत’ की एंट्री: डॉक्टरों के उड़े होश

असली ड्रामा तब शुरू हुआ जब दीपक जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचा। उसकी हालत खराब हो रही थी, जहर फैल रहा था।

डॉक्टरों ने रूटीन सवाल पूछा— “किस चीज़ ने काटा है? कोई कीड़ा था या सांप?”

दीपक ने जवाब देने के बजाय अपनी जैकेट की जेब में हाथ डाला। डॉक्टरों को लगा वह कोई पर्ची या दवा निकाल रहा है। लेकिन अगले ही पल, दीपक ने वह सांप निकालकर डॉक्टर की मेज पर रख दिया।

वहां मौजूद स्टाफ की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। नज़ारा देख वार्ड में भगदड़ मच गई। तीमारदार अपने मरीजों को छोड़कर भागने लगे। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि जिस सांप ने इसे डसा है, वह उसे ही अपनी गोद में लेकर घूम रहा है।

वो 1 वजह: आखिर जेब में सांप क्यों लाया दीपक?

जब अफरा-तफरी थोड़ी शांत हुई, तो दीपक ने जो वजह बताई, उसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया।

गांव-देहात में एक पुरानी मान्यता है (जो कई बार मेडिकल लॉजिक भी होती है)— “डॉक्टर को सांप दिखा दोगे, तो इलाज सही होगा।”

दीपक का तर्क सीधा था: “साहब, अगर मैं बस बताता कि सांप ने काटा है, तो आप पूछते कौन सा सांप था? नाग था या करैत? मुझे पहचान नहीं थी। इसलिए मैं ‘सबूत’ ही साथ ले आया ताकि आप सही इंजेक्शन (Anti-venom) लगा सको।”

हालांकि, डॉक्टर इसे पागलपन मान रहे थे क्योंकि इससे उसकी और दूसरों की जान को खतरा बढ़ गया था। लेकिन दीपक के लिए यह जिंदगी और मौत की रेस थी, जिसमें वह कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था।

अब कैसी है दीपक की हालत?

गनीमत यह रही कि समय पर अस्पताल पहुंचने और (शायद सांप की पहचान हो जाने के कारण) डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू कर दिया।

* दीपक को एंटी-वेनम इंजेक्शन दिए गए हैं।

* फिलहाल वह खतरे से बाहर बताया जा रहा है, लेकिन डॉक्टरों ने उसे निगरानी (Observation) में रखा है।

* वन विभाग को सूचना दी गई है ताकि सांप को सुरक्षित जंगल में छोड़ा जा सके।

Hospital

निष्कर्ष: बहादुरी या बेवकूफी?

यह घटना सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रही है। कुछ लोग दीपक की हिम्मत की दाद दे रहे हैं, तो कुछ इसे जानलेवा बेवकूफी बता रहे हैं। लेकिन एक बात तय है—मथुरा के जिला अस्पताल के डॉक्टरों को यह रात हमेशा याद रहेगी।

सावधानी: अगर आपको कभी सांप काटे, तो कृपया उसे पकड़ने की कोशिश न करें। सांप की फोटो खींच लेना काफी है, उसे जेब में रखकर अस्पताल ले जाना आपकी जान को दोगुना खतरे में डाल सकता है।

आपका क्या मानना है? क्या दीपक ने सांप को साथ ले जाकर सही किया? कमेंट में अपनी राय जरूर लिखें।

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बिहार में ‘आतंकी’ हमले की धमकी ? पटना तथा अन्य अदालतो को RDX से उड़ाने की साजिश आई सामने ,जानिए पूरी खबर

बिहार

बिहार की न्यायिक व्यवस्था को दहलाने की एक बड़ी साजिश सामने आई है। राजधानी पटना के सिविल कोर्ट तथा राज्य के आधा दर्जन से अधिक जिला न्यायालयों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। ये संदेश ईमेल के जरिए भेजे गए ओर इस संदेश ने न केवल पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है, बल्कि आम नागरिकों और वकीलों के बीच भी दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। प्रशासन ने आनन-फानन में सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बना दिया है।

क्या है पूरा मामला?

बीते 8 जनवरी 2026 की सुबह पटना सिविल कोर्ट के रजिस्ट्रार को एक गुमनाम ईमेल प्राप्त हुआ। इस ईमेल में दावा किया गया कि कोर्ट परिसर के भीतर 3 RDX आधारित IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) प्लांट किए गए हैं। धमकी देने वाले ने खुद को ‘अरुण कुमार’ बताया और अपना संबंध कथित तौर पर प्रतिबंधित संगठन LTTE से होने का दावा किया।

बिहार

चौंकाने वाली बात यह है कि धमकी केवल पटना तक सीमित नहीं थी। गया, अररिया, किशनगंज, दानापुर और भागलपुर के सभी न्यायालयों को भी इसी तरह की डराने वाले मेल भेजे गए। संदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि शाम 4 बजे तक धमाके किए जाएंगे।

हरकत में आई प्रशासन

धमकी मिलने के तुरंत बाद पटना पुलिस और एटीएस (ATS) की टीमें सक्रिय हो गईं। पीरबहोर थाने की पुलिस के साथ बम निरोधक दस्ता (Bomb Disposal Squad) और डॉग स्क्वायड की कई टीमें पटना सिविल कोर्ट पहुंचीं।

•सबसे पहले सुरक्षा कारणों से न्यायाधीशों, वकीलों और वादियों को तुरंत परिसर से बाहर निकाला गया।

• उसके बाद कोर्ट के चप्पे-चप्पे, वकीलों के चैंबर, कैंटीन और पार्किंग स्टैंड की गहन तलाशी ली गई।

• परिणाम स्वरूप घंटों चली मशक्कत के बाद पुलिस को कोई भी संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, जिसके बाद राहत की सांस ली गई और इसे एक ‘होक्स’ (Hoax) या अफवाह करार दिया गया।

जांच में सामने आया तमिलनाडु कनेक्शन

बिहार पुलिस की प्रारंभिक जांच में एक महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगा है। पटना सिटी (सेंट्रल) एसपी दीक्षा के अनुसार, जिस ईमेल आईडी से यह धमकी भेजी गई थी, उसका डिजिटल फुटप्रिंट तमिलनाडु से जुड़ा हुआ मालूम हुआ ।

साइबर एक्सपर्ट्स के लिए दिक्कत

• VPN का उपयोग के कारण पुलिस को शक है कि अपराधी ने अपनी असली लोकेशन छिपाने के लिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) का सहारा लिया है।

• तमिल भाषा का अंश: ईमेल के कंटेंट में कुछ शब्द तमिल भाषा में लिखे थे, जो जांच को दक्षिण भारत की ओर मोड़ रहे हैं।

• मल्टी-स्टेट लिंक: इसी तरह की धमकियां उसी दिन ओडिशा, केरल और पंजाब की अदालतों को भी मिली थीं, जिससे यह एक समन्वित साइबर अटैक या पैनिक क्रिएट करने की बड़ी साजिश लगती है।

नए सुरक्षा नियम

इस घटना के बाद पटना हाई कोर्ट के निर्देश पर राज्य की सभी निचली अदालतों का सुरक्षा ऑडिट (Security Audit) शुरू कर दिया गया है। पटना सिविल कोर्ट में अब बिना गहन तलाशी के किसी को भी प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।

• CCTV निगरानी

• मेटल डिटेक्टर

• अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती

बिहार

वकीलों का कहना “बार-बार क्यों हो रहा ऐसा?”

पटना बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ वकीलों ने इस घटना पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। वकीलों का कहना है कि साल 2025 में भी दो बार इसी तरह की धमकियां मिली थीं, लेकिन आज तक मुख्य अपराधी सलाखों के पीछे नहीं पहुंचा है।

बिहार की अदालतों को मिली यह धमकी फिलहाल एक ‘अफवाह’ साबित हुई है, लेकिन इसने सुरक्षा व्यवस्था की कमियों को उजागर कर दिया है। पुलिस प्रशासन इसे गंभीरता से ले रही है और केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर ईमेल के मूल स्रोत तक पहुँचने की कोशिश कर रही है।

क्या आपको लगता है कि अदालतों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम केवल ऐसी धमकियों के बाद ही होने चाहिए, या वहां स्थायी रूप से एयरपोर्ट जैसी सिक्योरिटी होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।

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बिहार में गंगा हुई निर्मल: BSPCB की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, जानें कैसे STPs ने बदली पवित्र नदी की सूरत

गंगा

बिहार में गंगा नदी के प्रदूषण को लेकर वर्षों से जारी चिंता के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (BSPCB) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य में स्थापित किए गए नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STP) के कारण गंगा के पानी की गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार दर्ज किया गया है। अब नदी का पानी न केवल जलीय जीवों के लिए अनुकूल हो रहा है, बल्कि कई घाटों पर प्रदूषण के स्तर में भी भारी गिरावट आई है।

बिहार में गंगा की स्वच्छता: एक नया अध्याय

बिहार की जीवनदायिनी गंगा नदी, जो कभी बढ़ते शहरीकरण और अनियंत्रित सीवेज के कारण प्रदूषित हो रही थी, अब पुनर्जीवन की राह पर है। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (BSPCB) की हालिया रिपोर्ट यह संकेत देती है कि पिछले कुछ वर्षों में ‘नमामि गंगे’ परियोजना के तहत जो बुनियादी ढांचे तैयार किए गए हैं, उनका सकारात्मक असर अब जमीन पर दिखने लगा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पटना समेत बिहार के विभिन्न जिलों में एसटीपी (STP) की कार्यप्रणाली और उनकी बढ़ती क्षमता ने नदी में गिरने वाले गंदे पानी को रोकने में अहम भूमिका निभाई है। जहाँ पहले शहरों का कचरा सीधे गंगा की लहरों में मिलता था, अब उसे वैज्ञानिक तरीके से ट्रीट किया जा रहा है।

Sewage Treatment Plants (STP) का जादू: आंकड़ों की जुबानी

बिहार में गंगा नदी के किनारे बसे शहरों से रोजाना निकलने वाले सीवेज का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती रही है। आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में गंगा के किनारे स्थित शहरों से लगभग 455 MLD (मिलियन लीटर प्रतिदिन) सीवेज निकलता है। नमामि गंगे योजना से पहले, राज्य में केवल 124 MLD उपचार की क्षमता थी, जो अब बढ़कर कई गुना हो गई है।

पटना में बेऊर, कर्मलीचक और सैदपुर जैसे इलाकों में नए एसटीपी के चालू होने से गंगा में गिरने वाले ऑर्गेनिक लोड में भारी कमी आई है। BSPCB के अनुसार, नदी के पानी में घुलित ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen – DO) का स्तर बढ़ा है, जो पानी की शुद्धता का एक मुख्य मानक है।

पानी की गुणवत्ता में सुधार: क्या कहते हैं मानक?

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड गंगा के पानी की जांच 34 विभिन्न स्थानों पर पाक्षिक (Fortnightly) आधार पर करता है। हालिया जांच के परिणामों में कुछ महत्वपूर्ण बिंदु उभर कर आए हैं:

• pH लेवल और Dissolved Oxygen: गंगा के अधिकांश हिस्सों में pH मान और DO (घुलित ऑक्सीजन) का स्तर अब मानकों के अनुरूप पाया गया है। यह जलीय जीवन, विशेषकर लुप्तप्राय गंगा डॉल्फिन के लिए बहुत अच्छी खबर है।

• BOD (Biochemical Oxygen Demand): सीवेज ट्रीटमेंट के कारण BOD के स्तर में गिरावट आई है। रिपोर्ट के अनुसार, बक्सर से भागलपुर तक के कई हिस्सों में पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।

• बैक्टिरियोलॉजिकल सुधार: हालांकि ‘फिकल कोलिफॉर्म’ (Faecal Coliform) अभी भी कुछ जगहों पर चुनौती बना हुआ है, लेकिन एसटीपी के माध्यम से क्लोरिनेशन की प्रक्रिया ने इसे नियंत्रित करने में मदद की है।

पटना: स्वच्छता का मॉडल बनता शहर

राजधानी पटना में गंगा की स्थिति में सबसे अधिक बदलाव देखा गया है। पटना के बेऊर में 43 MLD क्षमता वाले एसटीपी और कर्मलीचक जैसे प्रोजेक्ट्स ने शहर के बड़े ड्रेनेज सिस्टम को गंगा में सीधे मिलने से रोक दिया है। बिहार शहरी बुनियादी ढांचा विकास निगम (BUIDCo) के अनुसार, पटना को 100% सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता वाला शहर बनाने का लक्ष्य अब अंतिम चरणों में है।

सरकार की ‘वन सिटी वन ऑपरेटर’ (One City One Operator) मॉडल वाली नीति ने इन प्लांट्स के रखरखाव और संचालन (O&M) को और अधिक प्रभावी बना दिया है। अब न केवल प्लांट बनाए जा रहे हैं, बल्कि उनकी 15 वर्षों तक की देखभाल की जिम्मेदारी भी तय की गई है।

जलीय जैव विविधता पर प्रभाव: डॉल्फिन की वापसी

पानी की गुणवत्ता सुधरने का सबसे बड़ा प्रमाण ‘गंगा डॉल्फिन’ की बढ़ती संख्या है। जब पानी में प्रदूषण कम होता है और ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है, तो मछलियों और अन्य जलीय जीवों की संख्या में वृद्धि होती है। बिहार के सुल्तानगंज से लेकर कहलगाम तक के क्षेत्र में अब डॉल्फिन का दिखना आम बात हो गई है, जो इस बात का सबूत है कि नदी का इकोसिस्टम फिर से जीवित हो रहा है।

गंगा

चुनौतियाँ अभी भी बरकरार: कोलिफॉर्म का मुद्दा

भले ही पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, लेकिन BSPCB की रिपोर्ट यह भी आगाह करती है कि ‘फिकल कोलिफॉर्म’ और ‘टोटल कोलिफॉर्म’ का स्तर अभी भी कुछ घाटों पर मानक से अधिक है। इसका मुख्य कारण कुछ छोटे नालों का अब भी सीधे नदी में गिरना और घाटों पर होने वाली मानवीय गतिविधियां हैं। बोर्ड का कहना है कि जैसे-जैसे राज्य के सभी 58 स्वीकृत प्रोजेक्ट्स पूरे होंगे, यह समस्या भी काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।

क्या आपको लगता है कि आपके शहर के पास गंगा के घाट अब पहले से ज्यादा स्वच्छ दिख रहे हैं? हमें कमेंट में जरूर बताएं!

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Patna High Court New Chief Justice: जस्टिस संगम कुमार साहू बने पटना हाईकोर्ट के 47वें मुख्य न्यायाधीश, जानें कौन हैं वो और क्या है उनका विजन

Patna High Court

बिहार की न्यायिक व्यवस्था में एक नए युग की शुरुआत हुई है। ओडिशा High Court के अनुभवी वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू ने Patna High Court के 47वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ले ली है। उनकी यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब राज्य की अदालतों में लंबित मामलों के निपटारे और न्यायिक सुधारों की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है।

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राजभवन में भव्य शपथ ग्रहण समारोह

बुधवार, 7 जनवरी 2026 को पटना स्थित राजभवन (लोक भवन) के ‘राजेंद्र मंडप’ में आयोजित एक गरिमापूर्ण समारोह में बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने जस्टिस संगम कुमार साहू को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार समेत कई कैबिनेट मंत्री और हाईकोर्ट के अन्य न्यायाधीश मौजूद रहे।

शपथ ग्रहण के बाद न्यायमूर्ति साहू को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके तुरंत बाद वे हाईकोर्ट पहुंचे, जहां शताब्दी हॉल में आयोजित फुल कोर्ट वेलकम सेरेमनी में अधिवक्ताओं और बार एसोसिएशन के सदस्यों ने उनका जोरदार स्वागत किया।

कौन हैं जस्टिस संगम कुमार साहू?

जस्टिस संगम कुमार साहू का कानूनी सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। उनके व्यक्तित्व और करियर से जुड़ी कुछ मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

जन्म और शिक्षा: जस्टिस साहू का जन्म 5 जून 1964 को ओडिशा के कटक में हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा नुआबाजार हाई स्कूल से पूरी की और स्टीवर्ट साइंस कॉलेज से स्नातक किया।

कानूनी पृष्ठभूमि: उन्होंने कटक लॉ कॉलेज से एलएलबी की डिग्री हासिल की। खास बात यह है कि उन्होंने अंग्रेजी और ओडिया साहित्य में एमए भी किया है, जो उनकी भाषाई पकड़ को दर्शाता है।

वकालत की शुरुआत: 26 नवंबर 1989 को उन्होंने ओडिशा स्टेट बार काउंसिल में एक वकील के रूप में अपना पंजीकरण कराया। उन्होंने अपने पिता, प्रसिद्ध आपराधिक वकील दिवंगत शरत चंद्र साहू के मार्गदर्शन में वकालत की बारीकियां सीखीं।

जज के रूप में सफर: उनकी प्रतिभा और कानूनी समझ को देखते हुए 2 जुलाई 2014 को उन्हें ओडिशा हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश और नियुक्ति

जस्टिस संगम कुमार साहू की नियुक्ति की प्रक्रिया दिसंबर 2025 में शुरू हुई थी। CJI सूर्यकांत के नेतृत्व वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 18 दिसंबर 2025 को उनके नाम की सिफारिश की थी। इसके बाद 1 जनवरी 2026 को केंद्र सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय ने राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद उनके नाम की आधिकारिक अधिसूचना जारी की।

बता दें कि अक्टूबर 2025 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस पवन कुमार भीमप्पा बाजन्त्री के सेवानिवृत्त होने के बाद से जस्टिस सुधीर सिंह कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

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पटना हाईकोर्ट के सामने चुनौतियां और प्राथमिकताएं

जस्टिस साहू के कार्यभार संभालने के साथ ही उम्मीदें बढ़ गई हैं। उनके सामने मुख्य रूप से तीन बड़ी चुनौतियां होंगी:

मामलों का भारी बोझ: पटना हाईकोर्ट भारत के सबसे पुराने और महत्वपूर्ण न्यायालयों में से एक है, लेकिन यहाँ लंबित मामलों (Pendency of Cases) की संख्या भी काफी अधिक है। जस्टिस साहू के पास क्रिमिनल और सर्विस लॉ में व्यापक अनुभव है, जो इन मामलों को तेजी से सुलझाने में मददगार साबित होगा।

डिजिटल न्याय व्यवस्था: ‘ई-कोर्ट’ प्रोजेक्ट को और सशक्त बनाना और जिला अदालतों में बुनियादी ढांचे को सुधारना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रह सकता है।

कानूनी सहायता: जस्टिस साहू ओडिशा में राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष रह चुके हैं। ऐसे में बिहार में गरीबों को मुफ्त और सुलभ न्याय दिलाने की दिशा में उनसे बड़े सुधारों की उम्मीद है।

आपको क्या लगता है, जस्टिस संगम कुमार साहू के नेतृत्व में क्या बिहार की अदालतों में लंबित मुकदमों की संख्या में कमी आएगी? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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सोमनाथ स्वाभिमान पर्व: जब 1000 साल के संघर्ष और शौर्य की गूंज से थर्राया अरब सागर, पीएम मोदी ने की शौर्य यात्रा की अगुवाई

सोमनाथ

सोमनाथ मंदिर में आज का दिन भारतीय इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के प्रभास पाटन स्थित प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर में ‘शौर्य यात्रा’ की अगुवाई कर पूरी दुनिया को भारत की अटूट आस्था और अदम्य साहस का संदेश दिया है। यह आयोजन मात्र एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि विदेशी आक्रांताओं के खिलाफ सदियों तक चले संघर्ष और जीत की गौरवगाथा है।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व: आस्था और संकल्प का महासंगम

सोमनाथ की पवित्र भूमि पर आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का आज समापन होने जा रहा है। 8 जनवरी से शुरू हुए इस चार दिवसीय महोत्सव का मुख्य आकर्षण आज की शौर्य यात्रा रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो खुद सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं, सुबह करीब 9:45 बजे इस भव्य जुलूस में शामिल हुए।

इस यात्रा का उद्देश्य उन गुमनाम योद्धाओं को श्रद्धांजलि देना है जिन्होंने सदियों तक सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। यात्रा में 108 घोड़ों का प्रतीकात्मक जुलूस निकाला गया, जो वीरता और त्याग का प्रतीक है।

सोमनाथ

1000 साल का इतिहास और पुनरुद्धार की कहानी

यह वर्ष 2026 सोमनाथ के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इतिहास के पन्ने पलटें तो ठीक 1000 साल पहले, यानी 1026 ईस्वी में महमूद गजनवी ने इस मंदिर पर पहला बड़ा आक्रमण किया था। इसके बाद सदियों तक इसे बार-बार तोड़ा गया, लेकिन हर बार भारत की आस्था ने इसे और भव्य रूप में खड़ा कर दिया।

प्रमुख मील के पत्थर:

1026 ईस्वी: गजनवी का पहला विध्वंसक आक्रमण।

1951: लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से मंदिर का ऐतिहासिक पुनरुद्धार और तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा प्राण-प्रतिष्ठा।

2026: पुनरुद्धार की 75वीं वर्षगांठ और आक्रमण के 1000 साल पूरे होने पर ‘स्वाभिमान पर्व’ का आयोजन।

वीर हमीरजी गोहिल: जिनके बलिदान को पीएम ने किया नमन

शौर्य यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने मंदिर परिसर के बाहर स्थित वीर हमीरजी गोहिल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। हमीरजी गोहिल उन महान योद्धाओं में से एक थे, जिन्होंने अलाउद्दीन खिलजी की सेना से सोमनाथ की रक्षा करते हुए अपने प्राण त्याग दिए थे। लोक कथाओं में कहा जाता है कि हमीरजी का धड़ कटने के बाद भी वे दुश्मनों से लड़ते रहे थे।

आज की यह यात्रा उन्हीं जैसे हजारों वीरों को समर्पित है, जिनकी वजह से आज सोमनाथ मंदिर शान से अरब सागर के तट पर खड़ा है।

72 घंटे का अखंड ओंकार नाद और ड्रोन शो

पीएम मोदी कल शाम (10 जनवरी) ही सोमनाथ पहुंच गए थे। उन्होंने मंदिर में चल रहे 72 घंटे के अखंड ‘ओंकार’ मंत्र जाप में हिस्सा लिया। इसके बाद रात्रि में एक भव्य ड्रोन शो का आयोजन किया गया, जिसमें सोमनाथ के विनाश और फिर से निर्माण (The Rise of Somnath) की कहानी को आकाश में उकेरा गया। आधुनिक तकनीक और प्राचीन आस्था का यह संगम देखने लायक था।

पीएम मोदी का संबोधन: “सोमनाथ केवल पत्थर की इमारत नहीं, हमारी चेतना है”

शौर्य यात्रा और मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के बाद प्रधानमंत्री ने एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। उनके भाषण के मुख्य अंश इस प्रकार रहे:

सांस्कृतिक गौरव: पीएम ने कहा कि सोमनाथ की कहानी विध्वंस की नहीं, बल्कि ‘विजय’ की कहानी है। यह मंदिर इस बात का प्रमाण है कि सत्य और आस्था को कभी मिटाया नहीं जा सकता।

युवा पीढ़ी को संदेश: उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने इतिहास को जानें और सोमनाथ से संघर्ष की प्रेरणा लें।

विकास और विरासत: पीएम ने इस बात पर जोर दिया कि आज का भारत अपनी विरासत को सहेजते हुए आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है।

सोमनाथ

न्यूज़ एनालिसिस: क्यों महत्वपूर्ण है यह दौरा?

राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों ही दृष्टियों से पीएम मोदी का यह दौरा काफी अहम है:

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद: राम मंदिर के बाद सोमनाथ के इस भव्य आयोजन के जरिए सरकार देश की सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने का संदेश दे रही है।

वैश्विक कूटनीति: सोमनाथ के बाद पीएम मोदी अहमदाबाद में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ (Friedrich Merz) से मुलाकात करेंगे। इससे यह संदेश जाता है कि भारत अपनी परंपराओं के साथ-साथ वैश्विक संबंधों में भी नेतृत्व कर रहा है।

क्या आपको लगता है कि सोमनाथ जैसे ऐतिहासिक स्थलों के माध्यम से युवाओं को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है? हमें नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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सीरिया के अलेप्पो में भीषण गृहयुद्ध: सीरियाई सेना और SDF के बीच छिड़ी जंग, हजारों लोगों ने छोड़ा घर

सीरिया

सीरिया का ऐतिहासिक शहर अलेप्पो एक बार फिर गोलियों की गड़गड़ाहट और बम धमाकों से दहल उठा है। सीरियाई सरकार (Syrian Transitional Government) और कुर्द नेतृत्व वाली सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस (SDF) के बीच जारी इस ताजा संघर्ष ने पूरे क्षेत्र को मानवीय संकट की दहलीज पर खड़ा कर दिया है। पिछले कुछ दिनों से जारी इस भीषण जंग की वजह से अलेप्पो के रिहायशी इलाकों में मौत का सन्नाटा पसरा है और हजारों परिवार अपना सब कुछ छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में पलायन कर रहे हैं।

सीरिया

अलेप्पो में तनाव का मुख्य कारण: क्यों भिड़ी

सेना और कुर्द लड़ाके?

सीरिया में पिछले कुछ वर्षों से जारी अस्थिरता के बीच अलेप्पो शहर हमेशा से एक रणनीतिक केंद्र रहा है। वर्तमान संघर्ष की शुरुआत 6 जनवरी 2026 को हुई, जब सीरियाई सेना और SDF के बीच अलेप्पो के कुर्द बहुल इलाकों—शेख मकसूद (Sheikh Maqsoud), अशरफिया (Ashrafiyeh) और बनी ज़ैद (Bani Zaid)—के नियंत्रण को लेकर विवाद बढ़ गया।

दरअसल, मार्च 2025 में हुए एक समझौते के तहत SDF को राष्ट्रीय सेना में विलय (Merge) होना था, लेकिन इस एकीकरण की प्रक्रिया धीमी होने और आपसी अविश्वास के कारण तनाव चरम पर पहुंच गया। सीरियाई सरकार ने कुर्दों से शहर खाली करने को कहा, जिसे SDF ने सिरे से खारिज कर दिया, और देखते ही देखते यह विवाद एक खूनी जंग में तब्दील हो गया।

मानवीय गलियारा: जान बचाने की जद्दोजहद

भीषण बमबारी और गोलाबारी के बीच आम नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सीरियाई अधिकारियों ने अलेप्पो के विवादित क्षेत्रों से बाहर निकलने के लिए ह्यूमैनिटेरियन कॉरिडोर (मानवीय गलियारा) खोला है।

• पलायन का आंकड़ा: संयुक्त राष्ट्र (UN) और स्थानीय प्रशासन के अनुसार, अब तक 1,40,000 से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं।

• सुरक्षित मार्ग: सरकारी बसों और निजी वाहनों के जरिए लोगों को शेख मकसूद से निकालकर आफरीन (Afrin) और पूर्वोत्तर सीरिया के सुरक्षित इलाकों में भेजा जा रहा है।

• अस्पतालों की स्थिति: भारी गोलाबारी की वजह से अलेप्पो का प्रमुख अस्पताल ‘अल-शाहिद खालिद फज्र’ (Al-Shahid Khalid Fajr) ठप हो गया है, जिससे घायलों के इलाज में भारी समस्या आ रही है।

मौत का आंकड़ा और जमीनी हकीकत

ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, 11 जनवरी 2026 तक इस संघर्ष में 22 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। सीरियाई मानवाधिकार वेधशाला (SOHR) ने बताया कि शहर के कई हिस्सों में पानी और बिजली की सप्लाई पूरी तरह काट दी गई है, जिससे वहां फंसे लोग नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।

सैन्य ऑपरेशंस और रणनीतिक बदलाव

सीरियाई सेना ने शनिवार (10 जनवरी) को घोषणा की कि उन्होंने अशरफिया और बनी ज़ैद इलाकों पर पूरी तरह नियंत्रण कर लिया है। अब सेना का पूरा ध्यान शेख मकसूद पर है, जो कुर्दों का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है।

प्रमुख सैन्य घटनाक्रम:

• हवाई हमले और ड्रोन: सीरियाई वायुसेना ने कुर्द ठिकानों को निशाना बनाने के लिए आत्मघाती ड्रोनों का इस्तेमाल किया है।

• आत्मघाती विस्फोट: शेख मकसूद में घेराबंदी के दौरान दो कुर्द लड़ाकों द्वारा खुद को उड़ा लेने की खबरें भी सामने आई हैं।

• युद्धविराम की कोशिशें: हालांकि सरकार ने शनिवार को दोपहर 3 बजे से सैन्य ऑपरेशंस रोकने का ऐलान किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर अभी भी छिटपुट फायरिंग जारी है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: दुनिया की नजरें अलेप्पो पर

अलेप्पो की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका ने गहरी चिंता जताई है। अमेरिका के विशेष दूत टॉम बैरक ने जॉर्डन के विदेश मंत्री के साथ चर्चा की है ताकि एक स्थायी युद्धविराम सुनिश्चित किया जा सके। तुर्की, जो कुर्दों को अपने लिए खतरा मानता है, भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है, जिससे इस संघर्ष के क्षेत्रीय युद्ध में बदलने का खतरा मंडरा रहा है।

सीरिया

क्या अलेप्पो फिर से खंडहर बनेगा?

अलेप्पो ने 2011 से चल रहे गृहयुद्ध में पहले ही बहुत कुछ खोया है। ऐतिहासिक इमारतों से लेकर व्यापारिक केंद्रों तक, सब कुछ तबाह हो चुका था। अब जब शहर फिर से खड़ा होने की कोशिश कर रहा था, इस नए संघर्ष ने विकास की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने दोनों पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की है।

क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सीरिया में शांति बहाली के लिए और कड़े कदम उठाने चाहिए, या यह सीरिया का आंतरिक मामला है जिसे उन्हें खुद सुलझाना चाहिए? अपनी राय हमें कमेंट में जरूर बताएं।

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बिहार के किसानों के लिए बड़ी खबर: Farmer ID बनवाने का आखिरी मौका आज, जानें क्यों है यह जरूरी

Farmer ID

बिहार में खेती-किसानी को डिजिटल युग से जोड़ने और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए नीतीश सरकार ने ‘एग्री स्टैक’ (AgriStack) परियोजना के तहत फार्मर आईडी (Farmer ID) बनाना अनिवार्य कर दिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पंजीकरण की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 10 जनवरी 2026 कर दिया है। अगर आप एक किसान हैं और आपने अब तक अपनी डिजिटल आईडी नहीं बनवाई है, तो आज आपके पास अंतिम अवसर है।

बिहार फार्मर आईडी पंजीकरण: 10 जनवरी तक बढ़ा समय

बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री सह उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शुक्रवार को घोषणा की कि राज्य के सभी 38 जिलों में फार्मर आईडी बनाने का अभियान मिशन मोड में चल रहा है। पहले इसकी समय सीमा कम थी, लेकिन सर्वर की समस्याओं और किसानों की भारी संख्या को देखते हुए इसे 10 जनवरी तक के लिए विस्तारित किया गया है।

Farmer ID

राज्य के सभी पंचायत भवनों में आज विशेष शिविर (Camps) लगाए जा रहे हैं, जहाँ किसान जाकर अपना निबंधन करा सकते हैं। सरकार का लक्ष्य राज्य के लगभग 2 करोड़ किसानों को इस डिजिटल डेटाबेस से जोड़ना है, ताकि बिचौलियों की भूमिका खत्म हो सके।

Farmer ID क्यों है अनिवार्य? जानें इसके मुख्य लाभ

फार्मर आईडी केवल एक पहचान पत्र नहीं है, बल्कि यह किसानों के लिए सरकारी लाभ का प्रवेश द्वार है। इसके बिना भविष्य में कई योजनाओं का लाभ मिलना बंद हो सकता है।

1. PM किसान सम्मान निधि की अगली किस्त

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan) योजना के तहत मिलने वाली ₹6,000 की वार्षिक सहायता राशि अब केवल उन्हीं किसानों को मिलेगी जिनके पास वैध फार्मर आईडी होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आगामी 22वीं किस्त के लिए डिजिटल आईडी और ई-केवाईसी (e-KYC) अनिवार्य है।

2. कृषि सब्सिडी और सरकारी योजनाएं

खाद, बीज, कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सब्सिडी और डीजल अनुदान जैसी योजनाओं का लाभ अब इसी आईडी के माध्यम से मिलेगा। फार्मर आईडी होने से डेटा सीधे विभाग के पास रहेगा, जिससे वेरिफिकेशन की प्रक्रिया तेज हो जाएगी।

3. जमाबंदी और भू-अभिलेखों का शुद्धिकरण

पंजीकरण की प्रक्रिया के दौरान राजस्व कर्मी किसान की भूमि के रिकॉर्ड (Jamabandi) का मिलान करेंगे। इससे जमीन के रिकॉर्ड में मौजूद गड़बड़ियों को सुधारा जा सकेगा और स्वामित्व विवाद कम होंगे।

पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज (Documents Required)

यदि आप आज पंचायत भवन में लगने वाले शिविर में जा रहे हैं, तो अपने साथ निम्नलिखित दस्तावेज जरूर ले जाएं:

आधार कार्ड: पहचान और ई-केवाईसी के लिए।

मोबाइल नंबर: जो आधार से लिंक हो (OTP वेरिफिकेशन के लिए)।

जमीन की रसीद (लगान रसीद): जमीन के विवरण और जमाबंदी के सत्यापन के लिए।

बैंक पासबुक: DBT के माध्यम से पैसा प्राप्त करने के लिए।

रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया: कैसे बनवाएं अपनी आईडी?

बिहार सरकार ने इस प्रक्रिया को काफी सरल बनाया है। किसान दो तरीकों से पंजीकरण करा सकते हैं:

पंचायत शिविर (Offline): अपने नजदीकी पंचायत भवन में जाएं। वहां तैनात कृषि समन्वयक (Agriculture Coordinator) या राजस्व कर्मचारी आपके दस्तावेजों की जांच करेंगे और आपका डिजिटल पंजीकरण पूरा करेंगे।

ऑनलाइन पोर्टल (Online): किसान Bihar AgriStack की आधिकारिक वेबसाइट bhfr.agristack.gov.in पर जाकर भी स्वयं या किसी साइबर कैफे (CSC Center) के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

Farmer ID

अब तक के आंकड़े और दूसरे चरण की जानकारी

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बिहार में अब तक लगभग 5.85 लाख से अधिक किसानों की डिजिटल आईडी सफलतापूर्वक बनाई जा चुकी है। अकेले गया जिले में 15,000 से अधिक नए किसानों ने इस साल निबंधन कराया है।

महत्वपूर्ण सूचना: जो किसान आज (10 जनवरी) किसी कारणवश पंजीकरण नहीं करा पाएंगे, उनके लिए सरकार द्वितीय चरण का आयोजन करेगी। दूसरा चरण 18 जनवरी से 21 जनवरी 2026 तक चलेगा। हालांकि, सरकारी लाभों में देरी से बचने के लिए विशेषज्ञों की सलाह है कि प्रथम चरण में ही इसे पूरा कर लें।

क्या आपने अपनी फार्मर आईडी बनवा ली है? यदि आपको पंजीकरण में किसी तकनीकी समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो हमें कमेंट में बताएं ताकि हम आपकी मदद कर सकें।

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71 IPS अधिकारियों का तबादला, कुंदन कृष्णन बने STF चीफ, कई जिलों के SP बदले

71 IPS

बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने नए साल की शुरुआत के साथ ही प्रशासनिक महकमे में अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल किया है। गृह विभाग द्वारा शुक्रवार, 9 जनवरी 2026 की देर शाम जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्य के 71 IPS अधिकारियों का एक साथ तबादला कर दिया गया है। इस बड़े बदलाव से न केवल पुलिस मुख्यालय के समीकरण बदले हैं, बल्कि कई जिलों की सुरक्षा कमान भी नए हाथों में सौंपी गई है।

71 IPS

जिलों की नई कमान: प्रमुख SP और SSP की तैनाती

बिहार के कई महत्वपूर्ण जिलों में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए नए पुलिस कप्तानों की नियुक्ति की गई है। इस कड़ी में सुशील कुमार को गया जिले का नया वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) बनाया गया है, जबकि कांतेश कुमार मिश्रा अब मुजफ्फरपुर के SSP की जिम्मेदारी संभालेंगे। भागलपुर की सुरक्षा का जिम्मा प्रमोद कुमार यादव को सौंपा गया है और विनीत कुमार को सारण (छपरा) का नया SSP नियुक्त किया गया है।

गोपालगंज जिले के पुलिस कप्तान के रूप में विनय तिवारी की वापसी हुई है, जो अपनी विशेष कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। सीमावर्ती जिले किशनगंज में संतोष कुमार और अररिया में जितेंद्र कुमार को SP बनाया गया है। वहीं, सीवान में पूरन कुमार झा, लखीसराय में अवधेश दीक्षित और अरवल में नवजोत सिमी को जिले की कमान सौंपी गई है। राजधानी पटना के यातायात प्रबंधन को सुधारने के लिए सागर कुमार को नया ट्रैफिक SP नियुक्त किया गया है।

पुलिस मुख्यालय और विशेष इकाइयों में बदलाव

जिलों के अलावा पुलिस मुख्यालय (PHQ) के ढांचे में भी बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन को अब एसटीएफ (STF) के महानिदेशक (DG) की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है, साथ ही वे ऑपरेशन और स्पेशल ब्रांच का जिम्मा भी देखेंगे। सुनील कुमार, जो पहले स्पेशल ब्रांच में थे, अब एडीजी (मुख्यालय) के पद पर तैनात किए गए हैं। प्रीता वर्मा को बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम का अध्यक्ष सह एमडी बनाया गया है, जबकि अमित कुमार जैन मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो के नए एडीजी होंगे।

साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए रंजीत कुमार मिश्रा को आईजी (साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई) की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही, हृदयकांत को एटीएस (ATS) का नया एसपी और अनंत कुमार को पटना का रेल एसपी नियुक्त किया गया है।

71 IPS

रेंज और प्रमंडल स्तर पर नई नियुक्तियां

प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूत करने के लिए रेंज स्तर पर भी अधिकारियों को बदला गया है। विवेकानंद को पूर्णिया प्रमंडल का नया आईजी (IG) बनाया गया है, जिससे सीमांचल के जिलों में निगरानी तेज होगी। आनंद कुमार को डीआईजी (विधि-व्यवस्था, पटना) के पद पर तैनात किया गया है, जिनका मुख्य कार्य कानून-व्यवस्था की मॉनिटरिंग करना होगा। कोसी प्रमंडल की जिम्मेदारी अब डीआईजी के रूप में कुमार आशीष संभालेंगे, जबकि मनोज कुमार को पुलिस मुख्यालय में आईजी के पद पर पदस्थापित किया गया है। आर. मलार विजी को एडीजी (बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस) का अतिरिक्त प्रभार देकर सशस्त्र बलों के प्रबंधन को और मजबूती दी गई है।

आपकी क्या राय है? क्या नए पुलिस कप्तानों की तैनाती से बिहार में अपराध की स्थिति में सुधार होगा? कमेंट में अपनी राय जरूर साझा करें।

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पटना में DM ने 11 जनवरी तक कक्षा 8 तक के स्कूल किए बंद, बढ़ती ठंड को देखते हुए जारी हुआ नया आदेश

पटना

बिहार की राजधानी पटना समेत पूरा उत्तर भारत इस समय भीषण शीतलहर और कनकनी की चपेट में है। गिरते तापमान और घने कोहरे के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए पटना जिलाधिकारी (DM) ने जिले के सभी स्कूलों को बंद करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जिससे अभिभावकों और छात्रों को बड़ी राहत मिली है।

पटना DM का आधिकारिक आदेश: कौन से स्कूल रहेंगे बंद?

पटना के जिलाधिकारी ने धारा 144 (अब नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत प्रासंगिक प्रावधान) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए शैक्षणिक गतिविधियों पर रोक लगाई है।

पटना

आदेश का मुख्य विवरण

• कक्षा सीमा: नर्सरी से लेकर कक्षा 8वीं तक के सभी बच्चों के लिए शैक्षणिक गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी।

• समय सीमा: स्कूलों को फिलहाल 11 जनवरी 2026 तक बंद रखने का निर्देश दिया गया है।

• स्कूलों के प्रकार: यह आदेश पटना जिले के अंतर्गत आने वाले सभी सरकारी, निजी (Private), सहायता प्राप्त और प्री-स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा।

बड़ी कक्षाओं के लिए नियम

कक्षा 9वीं से 12वीं तक की कक्षाएं पूरी तरह बंद नहीं की गई हैं, लेकिन उनके समय में बदलाव किया गया है। ऊपर की कक्षाओं का संचालन सुबह 10:30 बजे से पहले और शाम 3:30 बजे के बाद नहीं किया जा सकेगा, ताकि छात्र ठंडी हवाओं से बच सकें।

क्यों लिया गया स्कूल बंदी का फैसला?

बिहार में पिछले 48 घंटों से पछुआ हवाओं ने ठिठुरन बढ़ा दी है। पटना का न्यूनतम तापमान गिरकर 7 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया है।

• घना कोहरा: दृश्यता (Visibility) कम होने के कारण स्कूल बसों और अन्य वाहनों के साथ दुर्घटना का खतरा बढ़ गया था।

• बच्चों का स्वास्थ्य: छोटे बच्चों में कोल्ड डायरिया, निमोनिया और सर्दी-खांसी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों ने भी छोटे बच्चों को सुबह की ठंड से बचाने की सलाह दी थी।

• कोल्ड डे की स्थिति: मौसम विभाग (IMD) ने ‘येलो अलर्ट’ जारी करते हुए अगले कुछ दिनों तक धूप न निकलने की संभावना जताई है।

मौसम विभाग का अनुमान: आगे कैसा रहेगा हाल?

मौसम विज्ञान केंद्र, पटना के अनुसार, बिहार के अधिकांश जिलों में अगले 3 से 4 दिनों तक राहत मिलने के आसार नहीं हैं।

• पछुआ हवाओं का प्रभाव

हिमालयी क्षेत्रों से आ रही ठंडी हवाओं के कारण बिहार के मैदानी इलाकों में कनकनी बनी रहेगी। पटना के अलावा गया, मुजफ्फरपुर और पूर्णिया जैसे जिलों में भी तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

• कोहरे का असर

सड़कों पर दृश्यता 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई है, जिससे न केवल सडक यातायात बल्कि ट्रेनों और फ्लाइट्स के शेड्यूल पर भी बुरा असर पड़ा है।

अभिभावकों और स्कूलों के लिए निर्देश

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई स्कूल इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

• ऑनलाइन क्लासेज: कई निजी स्कूलों ने वैकल्पिक रूप से ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करने का निर्णय लिया है ताकि बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो।

• टीचर और स्टाफ: स्कूलों को बंद करने का आदेश केवल छात्रों के लिए है। शिक्षक और अन्य गैर-शिक्षण कर्मचारी (Non-teaching staff) स्कूल आ सकते हैं और प्रशासनिक कार्य निपटा सकते हैं।

• सुरक्षा प्रोटोकॉल: जिलाधिकारी ने माता-पिता से अपील की है कि वे बच्चों को गरम कपड़े पहनाएं और बेवजह घर से बाहर न निकलने दें।

पटना

बिहार के अन्य जिलों की स्थिति

पटना ही नहीं, बल्कि बिहार के कई अन्य जिलों जैसे भागलपुर, बक्सर और छपरा में भी स्थानीय प्रशासन ने इसी तरह के आदेश जारी किए हैं। राज्य भर के आंगनवाड़ी केंद्रों को भी फिलहाल बंद रखा गया है। बोर्ड परीक्षाओं (BSEB 2026) की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है क्योंकि उनके प्रैक्टिकल एग्जाम्स भी नजदीक हैं।

क्या आपके क्षेत्र में भी ठंड के कारण स्कूलों की छुट्टियां बढ़ा दी गई हैं? हमें कमेंट बॉक्स में बताएं और अपने जिले का नाम जरूर लिखें।

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बिहार बोर्ड ने जारी किए मैट्रिक के फाइनल एडमिट कार्ड, जानें डाउनलोड करने का सही तरीका और जरूरी नियम

बिहार बोर्ड

बिहार बोर्ड विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने 2026 की मैट्रिक वार्षिक परीक्षा में बैठने वाले लाखों छात्रों का इंतजार खत्म कर दिया है। बोर्ड द्वारा आधिकारिक तौर पर Matric Final Admit Card 2026 जारी कर दिए गए हैं, जो अब संबंधित स्कूलों के लिए उपलब्ध हैं। परीक्षा की तैयारियों के बीच यह सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जिसके बिना किसी भी छात्र को परीक्षा केंद्र के भीतर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।

BSEB मैट्रिक एडमिट कार्ड 2026: मुख्य विवरण

बिहार बोर्ड ने इस साल भी समय से पहले एडमिट कार्ड जारी कर अपनी सक्रियता दिखाई है। एडमिट कार्ड बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर लाइव कर दिए गए हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से इन्हें डाउनलोड करने का अधिकार विशिष्ट लॉगिन आईडी के जरिए केवल स्कूल प्रबंधन को दिया गया है।

• बोर्ड का नाम: बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB)

• कक्षा: 10वीं (मैट्रिक)

• परीक्षा वर्ष: 2026

• उपलब्धता: स्कूलों के प्रधानाध्यापक द्वारा वितरण शुरू

बिहार बोर्ड

छात्र एडमिट कार्ड कैसे प्राप्त करें? (Step-by-Step Process)

अक्सर छात्रों में भ्रम रहता है कि क्या वे स्वयं एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। स्पष्ट कर दें कि छात्र पोर्टल से सीधे फाइनल एडमिट कार्ड डाउनलोड नहीं कर पाएंगे।

•स्कूल से प्राप्त करने की प्रक्रिया

छात्रों को अपने संबंधित स्कूल में जाना होगा। वहां स्कूल के प्रधानाध्यापक (Principal) अपनी यूजर आईडी और पासवर्ड का उपयोग करके बोर्ड के पोर्टल से एडमिट कार्ड डाउनलोड करेंगे। इसके बाद, उस पर स्कूल की आधिकारिक मुहर और प्रधानाध्यापक के हस्ताक्षर होना अनिवार्य है। बिना हस्ताक्षर और मुहर के एडमिट कार्ड मान्य नहीं माना जाएगा।

एडमिट कार्ड में दी गई जानकारी को जरूर जांचें

एडमिट कार्ड हाथ में आते ही छात्रों को कुछ महत्वपूर्ण विवरणों का मिलान सावधानीपूर्वक कर लेना चाहिए। यदि कोई त्रुटि पाई जाती है, तो तुरंत स्कूल प्रशासन से संपर्क करें:

• छात्र का नाम और स्पेलिंग: अपना और माता-पिता का नाम सही से चेक करें।

• जन्म तिथि: रिकॉर्ड के अनुसार सही होनी चाहिए।

• विषय कोड: आपने जिन विषयों का चयन किया है, उनके कोड सही हैं या नहीं।

• परीक्षा केंद्र (Exam Centre): अपने आवंटित केंद्र का नाम और पता नोट कर लें।

• रोल नंबर और फोटो: सुनिश्चित करें कि फोटो स्पष्ट है और आपका ही है।

परीक्षा केंद्र के लिए महत्वपूर्ण निर्देश और गाइडलाइंस

बिहार बोर्ड ने नकल मुक्त परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस साल भी कड़े नियम लागू किए हैं। एडमिट कार्ड के पीछे दिए गए निर्देशों को पढ़ना आवश्यक है:

• रिपोर्टिंग टाइम: परीक्षा शुरू होने से कम से कम 30 मिनट पहले केंद्र पर पहुंचना अनिवार्य है। देर होने पर प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

• प्रतिबंधित वस्तुएं: मोबाइल फोन, कैलकुलेटर, स्मार्ट वॉच, या किसी भी प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक गैजेट ले जाना सख्त मना है।

• पहचान पत्र: एडमिट कार्ड के साथ एक वैध पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड) साथ रखना सुरक्षा के लिहाज से अच्छा रहता है।

बिहार बोर्ड

बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा 2026 की तैयारी

इस साल लगभग 16 लाख से अधिक छात्र मैट्रिक की परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। बोर्ड ने केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे और वीडियोग्राफी की व्यवस्था की है।

•प्रैक्टिकल और थ्योरी परीक्षा

मैट्रिक की थ्योरी परीक्षा फरवरी के मध्य में शुरू होने की संभावना है। एडमिट कार्ड में प्रत्येक विषय की सटीक तिथि और पाली (Shift) का विवरण दिया गया है। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे अपने रोल कोड के अनुसार अपने परीक्षा केंद्र की दूरी पहले ही देख लें ताकि परीक्षा के दिन कोई असुविधा न हो।

क्या आपने अपने स्कूल से मैट्रिक का एडमिट कार्ड प्राप्त कर लिया है? यदि आपके एडमिट कार्ड में कोई गलती है, तो क्या आपको सुधार की प्रक्रिया पता है? हमें कमेंट में बताएं।

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रामलीला मैदान के पास अतिक्रमण विरोधी अभियान में हिंसक झड़प, पथराव में कई पुलिसकर्मी घायल

रामलीला

देश की राजधानी दिल्ली का मध्य क्षेत्र आज सुबह रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। रामलीला मैदान के समीप फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास नगर निगम और प्रशासन द्वारा चलाए गए अतिक्रमण विरोधी अभियान ने उस समय हिंसक रूप ले लिया, जब स्थानीय भीड़ और सुरक्षा बलों के बीच टकराव हो गया। इस पथराव में पुलिस के कई जवान घायल हुए हैं, जिसके बाद इलाके में अर्धसैनिक बलों की तैनाती कर दी गई है।

रामलीला

8 जनवरी 2026: क्या है पूरा मामला?

आज सुबह करीब 10:00 बजे, दिल्ली नगर निगम (MCD) की टीम भारी पुलिस सुरक्षा के बीच मध्य दिल्ली के तुर्कमान गेट और रामलीला मैदान से सटे इलाकों में अवैध अतिक्रमण हटाने पहुंची थी। प्रशासन का मुख्य लक्ष्य फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास के उन ढांचों को हटाना था, जिन्हें कोर्ट के आदेशानुसार अवैध घोषित किया गया था।

जैसे ही बुलडोजर ने कार्रवाई शुरू की, स्थानीय निवासियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते शांतिपूर्ण विरोध ने हिंसक मोड़ ले लिया। संकरी गलियों और छतों से पुलिस टीम पर अचानक भारी पथराव (Stone Pelting) शुरू हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा।

अतिक्रमण विरोधी अभियान और कानूनी पृष्ठभूमि

यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई थी। सूत्रों के अनुसार, फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास के क्षेत्र में सार्वजनिक भूमि पर अवैध निर्माण को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था।

• कोर्ट का आदेश: दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में सार्वजनिक रास्तों को साफ करने और पैदल यात्रियों के लिए जगह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।

• नोटिस की अवधि: प्रशासन का दावा है कि संबंधित पक्षों को 15 दिन पहले ही नोटिस जारी कर दिया गया था, लेकिन किसी ने भी स्वतः संज्ञान लेकर अतिक्रमण नहीं हटाया।

• प्रशासनिक तर्क: सड़क के चौड़ीकरण और आपातकालीन वाहनों (जैसे एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड) की आवाजाही के लिए यह कार्रवाई अनिवार्य बताई जा रही है।

हिंसा का घटनाक्रम: कैसे बिगड़े हालात?

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह 10:30 बजे तक स्थिति नियंत्रण में थी। लेकिन जैसे ही मस्जिद के पास की एक दीवार को गिराने की कोशिश की गई, भीड़ उग्र हो गई।

• नारेबाजी से शुरू हुआ विवाद: शुरुआत में केवल नारेबाजी हो रही थी, लेकिन भीड़ में शामिल कुछ असमाजिक तत्वों ने पुलिस पर पत्थर फेंकने शुरू किए।

• छतों से हमला: चूंकि यह इलाका काफी सघन (Dense) है, इसलिए पुलिस के लिए गलियों में सुरक्षा करना कठिन हो गया। छतों से फेंके गए पत्थरों के कारण डीसीपी रैंक के एक अधिकारी समेत कई कांस्टेबल चोटिल हो गए।

• वाहनों में तोड़फोड़: उपद्रवियों ने नगर निगम की एक जेसीबी (JCB) और दो पुलिस वैन के शीशे भी तोड़ दिए।

घायलों की स्थिति और पुलिस की कार्रवाई

इस हिंसा में अब तक मिली जानकारी के अनुसार, कम से कम 8 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्हें तुरंत नजदीकी एलएनजेपी (LNJP) अस्पताल ले जाया गया है। पुलिस ने अब तक इस मामले में:

• 20 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है।

• CCTV फुटेज के आधार पर दंगाइयों की पहचान की जा रही है।

• इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई है ताकि भीड़ एकत्र न हो सके।

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बयान दिया, “कानून हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। हम शांति बनाए रखने की अपील करते हैं, लेकिन सरकारी कार्य में बाधा डालना और पुलिस पर हमला करना गंभीर अपराध है।”

रामलीला

स्थानीय निवासियों का पक्ष

वहीं दूसरी ओर, स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के यह कार्रवाई की। स्थानीय निवासी मोहम्मद असलम (नाम परिवर्तित) ने बताया, “हम पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं। अचानक आकर हमारे घरों और धार्मिक स्थलों के हिस्सों को तोड़ना गलत है। पुलिस ने महिलाओं के साथ भी धक्का-मुक्की की, जिसके बाद गुस्सा भड़क गया।”

क्या सघन इलाकों में अतिक्रमण हटाने के लिए बल प्रयोग करना सही है या प्रशासन को कोई अन्य रास्ता अपनाना चाहिए? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर साझा करें।

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उत्तर प्रदेश में पेपर लीक का बड़ा कांड, सहायक प्रोफेसर भर्ती परीक्षा रद्द, एसटीएफ ने किया बड़े रैकेट का भंडाफोड़

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में एक बार फिर पेपर लीक की खबरों ने लाखों युवाओं के सपनों पर पानी फेर दिया है। सहायक प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में धांधली की पुष्टि होने के बाद योगी सरकार ने कड़ा फैसला लेते हुए पूरी परीक्षा को रद्द कर दिया है। एसटीएफ (STF) की जांच में एक ऐसे गिरोह का पता चला है जिसने तकनीक और सेटिंग के जरिए भर्ती प्रक्रिया में सेंध लगाई थी।

परीक्षा रद्द होने की मुख्य वजह: आखिर कैसे लीक हुआ पेपर?

उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित की जा रही सहायक प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को लेकर पिछले कुछ दिनों से संशय बना हुआ था। परीक्षा के आयोजन के कुछ ही घंटों बाद सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों से पेपर के कुछ हिस्से वायरल होने की खबरें सामने आने लगी थीं।

शुरुआती जांच में मामला संदिग्ध लगने पर मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर Special Task Force (STF) को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई। एसटीएफ ने अपनी प्राथमिक रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रश्नपत्र के कुछ सेट कुछ विशेष केंद्रों और व्हाट्सएप ग्रुपों पर लीक कर दिए गए थे। इसी रिपोर्ट के आधार पर शासन ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए परीक्षा को तुरंत प्रभाव से रद्द करने का निर्णय लिया है।

उत्तर प्रदेश

एसटीएफ का बड़ा एक्शन: ‘मास्टरमाइंड’ समेत कई गिरफ्तार

एसटीएफ की जांच में यह बात सामने आई है कि यह कोई छिटपुट घटना नहीं थी, बल्कि एक सुव्यवस्थित तरीके से चलाया जा रहा रैकेट था।

कैसे काम कर रहा था यह रैकेट?

प्रिंटिंग प्रेस से सेटिंग: एसटीएफ सूत्रों के अनुसार, रैकेट के तार उस प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े होने की आशंका है जहाँ पेपर छप रहे थे।

सॉल्वर गैंग की एंट्री: परीक्षा केंद्रों पर असली अभ्यर्थियों की जगह ‘सॉल्वर’ बिठाने की योजना भी बनाई गई थी।

लाखों में डील: खबर है कि एक-एक सीट के लिए अभ्यर्थियों से 15 से 20 लाख रुपये तक की मांग की गई थी।

अब तक की छापेमारी में प्रयागराज, लखनऊ और मेरठ से कुल 12 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनके पास से कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, एडमिट कार्ड और नकद बरामद किए गए हैं।

अभ्यर्थियों में रोष: भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता

सहायक प्रोफेसर की यह भर्ती कई वर्षों के इंतजार के बाद आई थी। प्रदेश के हजारों पीएचडी और नेट (NET) क्वालीफाइड उम्मीदवार इस परीक्षा के लिए दिन-रात तैयारी कर रहे थे। परीक्षा रद्द होने से न केवल उनका समय बर्बाद हुआ है, बल्कि आर्थिक और मानसिक तनाव भी बढ़ा है।

प्रयागराज में तैयारी कर रहे एक अभ्यर्थी ने बताया, “हम सालों तक एक वैकेंसी का इंतजार करते हैं, फिर परीक्षा की तारीख आती है और अंत में पता चलता है कि पेपर लीक हो गया। यह केवल परीक्षा रद्द होना नहीं है, बल्कि हमारे

भविष्य का गला घोंटना है।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सख्त रुख

पेपर लीक की घटनाओं पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि दोषियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाए और उनकी संपत्ति कुर्क की जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वासन दिया है कि अगले 6 महीनों के भीतर पूरी पारदर्शिता के साथ दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी और इसके लिए अभ्यर्थियों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।

नई परीक्षा तिथि और आगामी रणनीति

हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी नई तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन सूत्रों की मानें तो शिक्षा विभाग और आयोग नए सिरे से परीक्षा केंद्रों का चयन करेगा।

आगामी परीक्षा के लिए संभावित सुरक्षा बदलाव:

डिजिटल लॉकिंग सिस्टम: प्रश्नपत्रों को डिजिटल लॉक वाले बॉक्स में भेजा जाएगा जो केवल परीक्षा के समय ही खुलेंगे।

नया प्रिंटिंग पार्टनर: भविष्य की परीक्षाओं के लिए प्रिंटिंग प्रेस के चयन में और अधिक सख्ती बरती जाएगी।

जैमर्स का उपयोग: सभी परीक्षा केंद्रों पर हाई-टेक जैमर्स लगाए जाएंगे ताकि मोबाइल नेटवर्क काम न कर सके।

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में पेपर लीक का इतिहास और चुनौतियाँ

यूपी में पेपर लीक की समस्या नई नहीं है। इससे पहले यूपी पुलिस सिपाही भर्ती और आरओ/एआरओ (RO/ARO) जैसी बड़ी परीक्षाओं में भी इसी तरह की धांधली देखी गई थी। बार-बार होती इन घटनाओं ने सरकारी सिस्टम और सुरक्षा इंतजामों पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं। जानकारों का मानना है कि जब तक बिचौलियों और आयोग के भीतर छिपे ‘विभीषणों’ पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक इस समस्या का पूर्ण समाधान मुश्किल है।

क्या आपको लगता है कि पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून और ‘बुलडोजर कार्रवाई’ काफी है, या सिस्टम में किसी बड़े बदलाव की जरूरत है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।

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संकट में भविष्य! वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की MBBS मान्यता रद्द, भड़के छात्र और अभिभावक

वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज

जम्मू-कश्मीर के कटरा में स्थित माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज के छात्रों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने कॉलेज में बुनियादी सुविधाओं की कमी का हवाला देते हुए एमबीबीएस (MBBS) कोर्स की मान्यता वापस ले ली है। इस फैसले के बाद न केवल 2026 के नए बैच के प्रवेश पर रोक लग गई है, बल्कि वर्तमान में पढ़ रहे सैकड़ों छात्रों का करियर भी अधर में लटक गया है।

NMC का बड़ा फैसला: क्यों छिनी गई मेडिकल

कॉलेज की मान्यता?

नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की एक उच्च स्तरीय टीम ने हाल ही में श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) का औचक निरीक्षण किया था। इस निरीक्षण की रिपोर्ट के आधार पर कमीशन ने कॉलेज की मान्यता रद्द करने का कड़ा फैसला लिया है।

वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज

मान्यता रद्द होने के प्रमुख कारण:

• फैकल्टी की कमी: रिपोर्ट के अनुसार, कॉलेज में एनाटॉमी, फिजियोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री जैसे महत्वपूर्ण विभागों में प्रोफेसरों और सीनियर रेजिडेंट्स की भारी कमी पाई गई।

• इंफ्रास्ट्रक्चर में खामियां: अस्पताल में बेड ऑक्यूपेंसी (मरीजों की संख्या) तय मानकों से काफी कम थी। साथ ही, आधुनिक लैबोरेट्री और डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधाएं भी अधूरी पाई गईं।

• तकनीकी मापदंड: एनएमसी के नए नियमों के तहत बायोमेट्रिक अटेंडेंस और सीसीटीवी कैमरों का फीड सीधे दिल्ली कार्यालय से जुड़ा होना चाहिए, जिसमें यह कॉलेज विफल रहा।

छात्रों और अभिभावकों का प्रदर्शन: “हमारा क्या कसूर?”

मान्यता रद्द होने की खबर फैलते ही कॉलेज परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। कड़कड़ाती ठंड के बावजूद छात्र धरने पर बैठे हैं। उनका तर्क है कि जब उन्होंने दाखिला लिया था, तब कॉलेज के पास सभी जरूरी अनुमतियां थीं।

छात्रों की मुख्य मांगें:

• भविष्य की सुरक्षा: वर्तमान बैच के छात्रों को किसी अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट (Migrate) किया जाए।

• अस्पताल का अपग्रेडेशन: श्राइन बोर्ड इस मामले में हस्तक्षेप करे और बुनियादी ढांचे को रातों-रात सुधारने के लिए निवेश करे।

• जिम्मेदारी तय हो: छात्रों ने प्रशासन से सवाल किया है कि जब सुविधाएं पूरी नहीं थीं, तो दाखिले की प्रक्रिया क्यों शुरू की गई?

माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड और प्रशासन का पक्ष

यह मेडिकल कॉलेज श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) के अंतर्गत आता है। बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बयान जारी कर कहा है कि वे इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे।

बोर्ड का कहना है कि “मान्यता पूरी तरह रद्द नहीं हुई है, बल्कि कुछ कमियों के कारण इसे रोका गया है।” प्रशासन ने दावा किया है कि वे युद्धस्तर पर फैकल्टी की भर्ती कर रहे हैं और एनएमसी द्वारा बताई गई सभी कमियों को अगले 30 दिनों के भीतर दूर कर लिया जाएगा। हालांकि, एनएमसी के कड़े रुख को देखते हुए यह इतना आसान नहीं लग रहा।

जम्मू-कश्मीर में मेडिकल शिक्षा पर असर

जम्मू-कश्मीर पहले ही डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। केंद्र शासित प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेज खुलना एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा था, लेकिन वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की मान्यता पर आंच आना पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।

आंकड़ों पर एक नजर:

• सीटों का नुकसान: अगर यह मान्यता बहाल नहीं होती है, तो जम्मू-कश्मीर के कोटे से एमबीबीएस की करीब 100 सीटें कम हो सकती हैं।

• निजी निवेश पर संशय: इस विवाद से भविष्य में राज्य में खुलने वाले अन्य मेडिकल प्रोजेक्ट्स के लिए निवेशकों और छात्रों का भरोसा कम हो सकता है।

वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज

क्या है समाधान?

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का समाधान केवल दो ही तरीकों से संभव है। पहला, कॉलेज प्रशासन तत्काल प्रभाव से ‘कम्पलायंस रिपोर्ट’ (Compliance Report) जमा करे और एनएमसी से दोबारा निरीक्षण की मांग करे। दूसरा, यदि सुधार संभव नहीं है, तो सरकार को हस्तक्षेप कर इन छात्रों को राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेजों (जैसे GMC Jammu या Srinagar) में समायोजित करना चाहिए ताकि उनका साल बर्बाद न हो।

क्या आपको लगता है कि मेडिकल कॉलेजों की कमियों की सजा छात्रों को मिलनी चाहिए? क्या एनएमसी को मान्यता रद्द करने के बजाय सुधार के लिए और समय देना चाहिए था? अपनी राय हमें कमेंट में बताएं।

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भारतीय छात्रों के लिए अमेरिकी दूतावास की सख्त चेतावनी, एक गलती और रद्द हो जाएगा वीजा

भारतीय

भारत में अमेरिकी दूतावास ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है, जिसमें अमेरिका जाने वाले और वहां रह रहे भारतीय छात्रों को वीजा नियमों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया गया है। दूतावास ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी आप्रवासन (Immigration) कानून बहुत ही सख्त हैं और किसी भी प्रकार का उल्लंघन पाए जाने पर छात्र का वीजा तुरंत रद्द किया जा सकता है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका में भारतीय छात्रों की संख्या अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर पहुँच चुकी है।

दूतावास का मुख्य उद्देश्य छात्रों को उन कानूनी पेचीदगियों से अवगत कराना है, जिनकी अनदेखी अक्सर उन्हें मुश्किल में डाल देती है और अंततः उन्हें देश से निकाले जाने (Deportation) तक की नौबत आ जाती है।

भारतीय

छात्रों के लिए शैक्षणिक अखंडता और उपस्थिति के कड़े नियम

एडवाइजरी के अनुसार, प्रत्येक छात्र का सबसे पहला कर्तव्य अपनी पढ़ाई के प्रति समर्पित रहना है। अमेरिकी प्रशासन ने साफ कर दिया है कि छात्रों को अपने नामांकित शैक्षणिक संस्थान में नियमित रूप से कक्षाओं में भाग लेना अनिवार्य है। यदि कोई छात्र बिना किसी वैध कारण के लंबे समय तक कक्षाओं से अनुपस्थित रहता है, तो उसका संस्थान इसकी सूचना इमिग्रेशन अधिकारियों को देने के लिए बाध्य है।

इसके अलावा, छात्रों को केवल उन्ही संस्थानों में प्रवेश लेना चाहिए जो Student and Exchange Visitor Program (SEVP) द्वारा प्रमाणित हों। दूतावास ने छात्रों को ‘वीजा मिल’ या संदिग्ध संस्थानों से बचने की सलाह दी है जो शिक्षा के बजाय केवल वीजा दिलाने का लालच देते हैं, क्योंकि ऐसे संस्थानों पर अमेरिकी एजेंसियों की कड़ी नजर रहती है।

वर्क परमिट और पार्ट-टाइम जॉब्स पर विधिक सीमाएं

एक प्रमुख मुद्दा जिस पर दूतावास ने विशेष जोर दिया है, वह है रोजगार के नियम। F-1 स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका जाने वाले छात्रों को केवल ऑन-कैंपस (विश्वविद्यालय परिसर के भीतर) काम करने की अनुमति होती है, वह भी सप्ताह में अधिकतम 20 घंटों के लिए। दूतावास ने चेतावनी दी है कि कई छात्र नियमों के विरुद्ध जाकर ऑफ-कैंपस या बिना अनुमति के दुकानों और पेट्रोल पंपों पर काम करते हैं।

यदि कोई छात्र अनधिकृत रूप से काम करते हुए पाया जाता है, तो उसका वीजा न केवल रद्द होगा, बल्कि उसे भविष्य में अमेरिका के किसी भी वीजा के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है। Curricular Practical Training (CPT) और Optional Practical Training (OPT) का उपयोग केवल शैक्षणिक लाभ और कार्य अनुभव के लिए ही किया जाना चाहिए, न कि इसे स्थायी रोजगार का माध्यम समझना चाहिए।

दस्तावेजों की सत्यता और कानूनी कार्रवाई का जोखिम

वीजा आवेदन के दौरान और अमेरिका में प्रवास के दौरान दस्तावेजों की पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण है। दूतावास ने पाया है कि कुछ मामलों में छात्र फर्जी बैंक स्टेटमेंट, जाली डिग्री या गलत अनुभव प्रमाण पत्र का उपयोग करते हैं। एडवाइजरी में कहा गया है कि धोखाधड़ी के किसी भी मामले में शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति अपनाई जाएगी। इसके अतिरिक्त, छात्रों को अपनी वित्तीय स्थिति का सही विवरण देना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनके पास पढ़ाई और रहने का पर्याप्त खर्च है। गलत जानकारी देने या धोखाधड़ी करने पर छात्र को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उनका करियर पूरी तरह बर्बाद हो सकता है।

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भविष्य की सावधानी

अमेरिका और भारत के बीच बढ़ते शैक्षिक संबंधों के बीच यह एडवाइजरी छात्रों के लिए एक मार्गदर्शक की तरह है। दूतावास का संदेश साफ है: यदि आप नियमों के दायरे में रहकर अपनी शिक्षा पूरी करते हैं, तो अमेरिका आपके लिए अवसरों का द्वार है, लेकिन नियमों की अवहेलना गंभीर परिणाम लेकर आएगी। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी एजेंट की बातों में आने के बजाय आधिकारिक वेबसाइटों से जानकारी लें और अपने वीजा की शर्तों को स्वयं पढ़ें। एक छोटी सी गलती सालों की मेहनत और लाखों रुपये के निवेश को बेकार कर सकती है, इसलिए नियमों का पालन करना ही सफलता की एकमात्र कुंजी है।

क्या आप चाहते हैं कि मैं उन विश्वसनीय वेबसाइटों की सूची साझा करूँ जहाँ से आप अमेरिकी वीजा नियमों की आधिकारिक और सटीक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं?

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Supreme Court Ka Naya Rule: अब General Seat भी गई? SC/ST को ‘Open’ टिकट, जनरल वाले खतरे में!

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भारत में सरकारी नौकरी पाना अब सिर्फ ‘मेहनत’ का खेल नहीं रहा, यह ‘किस्मत’ और ‘जाति’ के गणित में उलझ गया है। हाल ही में Supreme Court ने स्पष्ट किया है कि यदि आरक्षित वर्ग (SC/ST/OBC) का कोई उम्मीदवार मेरिट में आता है, तो उसे ‘General’ Seat दी जाएगी। कानूनी तौर पर यह सही हो सकता है, लेकिन सामाजिक तौर पर यह जनरल कैटेगरी (General Category) के लाखों छात्रों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है। सवाल यह है—जब आरक्षित वर्ग के पास ‘कोटा’ और ‘ओपन’ दोनों रास्ते हैं, तो जनरल वाले सिर्फ ‘बची-कुची’ सीटों पर कब तक लड़ेंगे? क्या यह समानता है या एक नई असमानता?

आज के इस ब्लॉग में हम उस दर्द और तर्क की बात करेंगे जिसे अक्सर ‘संविधान’ की दुहाई देकर चुप करा दिया जाता है।

दो दरवाजे बनाम एक दरवाजा: यह कैसा न्याय?

सबसे बड़ा सवाल जो आज हर युवा पूछ रहा है— “खेल के नियम सबके लिए अलग क्यों?”

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इस व्यवस्था को ऐसे समझिए:

* आरक्षित वर्ग (Reserved Category): इनके पास दो दरवाजे हैं। अगर अच्छे नंबर आए, तो ‘General’ के दरवाजे से अंदर आ जाओ। अगर थोड़े कम आए, तो अपने ‘कोटे’ वाले दरवाजे से आ जाओ।

* अनारक्षित वर्ग (General Category): इनके पास सिर्फ एक दरवाजा है—’Open Seat’। और अब उस दरवाजे से भी आरक्षित वर्ग के मेधावी छात्र (Toppers) अंदर आ रहे हैं।

नतीजा? जनरल कैटेगरी के लिए सीटें लगातार सिकुड़ रही हैं। 100 सीटों की वैकेंसी में हकीकत में जनरल के लिए लड़ने लायक शायद 30-40 सीटें ही बचती हैं।

मेरिट का सम्मान या जनरल का अपमान?

सुप्रीम कोर्ट का तर्क है कि ‘General Seat’ कोई सवर्ण आरक्षण नहीं है, यह सबके लिए खुली है। यह तर्क सुनने में अच्छा लगता है कि “प्रतिभा (Talent) को कोटे में नहीं बांधना चाहिए।”

लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि जनरल कैटेगरी के छात्र को उसी सीट के लिए दुगनी मेहनत करनी पड़ती है।

* एक जनरल छात्र 90% लाकर भी फेल हो जाता है।

* वहीं, सिस्टम की वजह से उससे कम नंबर लाने वाले को नौकरी मिल जाती है।

जब एक ही क्लास में बैठकर, एक ही फीस देकर पढ़ने वाले दो दोस्तों का रिजल्ट इतना अलग होता है, तो मन में हताशा (Frustration) का आना स्वाभाविक है।

‘पिछड़ापन’ अब वो नहीं रहा जो 1950 में था

संविधान जब बना था, तब हालात अलग थे। तब आरक्षण की सख्त जरूरत थी। लेकिन आज 75 साल बाद स्थिति बदल चुकी है।

आज कई आरक्षित परिवारों के बच्चे बेहतरीन स्कूलों में पढ़ रहे हैं, उनके पास संसाधन हैं।

* अगर एक संपन्न (Well-off) आरक्षित उम्मीदवार, जो सुख-सुविधाओं में पला-बढ़ा है, वह ‘General’ की सीट ले जाता है, तो यह उस गरीब जनरल छात्र के साथ अन्याय है जो बिना कोचिंग के लैम्प की रोशनी में पढ़ रहा था।

* कई समझदार आरक्षित छात्र भी यह मानते हैं कि “अगर हम सक्षम हैं, तो हमें कोटे या डबल बेनिफिट की क्या जरूरत?”

मानसिक तनाव और आत्महत्या: एक कड़वी सच्चाई

यह मुद्दा अब सिर्फ नौकरी का नहीं, बल्कि जीवन-मरण का बन गया है। जब सालों साल तैयारी करने के बाद भी एक जनरल छात्र देखता है कि कट-ऑफ (Cut-off) आसमान छू रहा है और उसके पास कोई ‘बैकअप’ (कोटा) नहीं है, तो वह टूट जाता है।

कोटा, राजस्थान से लेकर प्रयागराज तक, छात्रों की आत्महत्या की खबरें इसी हताशा का परिणाम हैं। उन्हें लगता है कि इस देश के सिस्टम में उनके लिए कोई जगह नहीं बची है। वे खुद को अपने ही देश में ‘दोयम दर्जे’ का नागरिक महसूस करने लगे हैं।

क्या बदलाव का समय आ गया है? (Way Forward)

हम सुप्रीम कोर्ट को गलत नहीं ठहरा रहे, क्योंकि वे संविधान की व्याख्या (Interpretation) कर रहे हैं। लेकिन क्या अब संसद को संविधान संशोधन के बारे में नहीं सोचना चाहिए?

कुछ संभावित समाधान जिन पर चर्चा होनी चाहिए:

* वन पर्सन, वन बेनिफिट: अगर आप मेरिट से जनरल सीट ले रहे हैं, तो भविष्य में आपको प्रमोशन या अन्य लाभों में आरक्षण न मिले।

* सभी सीटें ओपन हों (Ideal Scenario): जैसा कि मांग उठ रही है, अगर मेरिट ही आधार है, तो पूरी 100% सीटें ओपन कर दी जाएं ताकि असली ‘प्रतिभा’ का पता चले।

* क्रीमी लेयर का विस्तार: संपन्न आरक्षित परिवारों को आरक्षण से बाहर किया जाए ताकि फायदा उनके ही समाज के गरीब लोगों को मिले, न कि वे जनरल की सीटें खाएं।

Supreme Court

वोट बैंक या संविधान

लोकतंत्र में ‘संख्या बल’ (Vote Bank) सब कुछ होता है, शायद इसीलिए कोई भी सरकार इस मुद्दे को छूना नहीं चाहती। लेकिन जब देश का एक बड़ा युवा वर्ग (General Category) यह महसूस करे कि उसके साथ सिस्टमैटिक भेदभाव हो रहा है, तो यह देश की तरक्की के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

आरक्षण का मकसद ‘हाथ पकड़कर ऊपर उठाना’ था, ‘दूसरे का गला घोंटना’ नहीं। समय आ गया है कि इस “दोहरे लाभ” (Double Benefit) की नीति पर फिर से विचार हो।

दोस्तों, क्या आप इस विचार से सहमत हैं? क्या जनरल कैटेगरी के लिए अलग से सुरक्षा होनी चाहिए? कमेंट में अपनी राय जरूर लिखें।

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World’s Largest Shivling: 210 टन वजन और 33 फीट ऊंचाई! बिहार में इस जगह स्थापित होगा दुनिया का सबसे विशाल शिवलिंग, जानिए 5 बड़ी बातें

World's Largest Shivling

“हर हर महादेव!” के उद्घोष से पूरा बिहार गूंज उठा है। एक ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। वजह है—दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग (World’s Largest Shivling), जो हजारों किलोमीटर का सफर तय करके बिहार की धरती पर पहुंच चुका है। क्या आप जानते हैं कि यह शिवलिंग इतना विशाल है कि इसे लाने के लिए 96 पहियों वाले एक विशेष ट्रक का इस्तेमाल करना पड़ा? यह सिर्फ एक पत्थर नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग और आस्था का एक अद्भुत नमूना है।

यह शिवलिंग कहां स्थापित होगा? इसे क्यों लाया गया है? और इसकी खासियत क्या है? आज के इस ब्लॉग में हम आपको इस महा-शिवलिंग से जुड़ी हर एक डिटेल बताएंगे जो आपको जाननी चाहिए।

World's Largest Shivling

कहां स्थापित होगा यह महा-शिवलिंग? (Location)

यह विशाल शिवलिंग बिहार के पूर्वी चंपारण (East Champaran) जिले में स्थापित किया जाएगा।

यहाँ के कैथवलिया-जानकीनगर (चकिया और केसरिया के बीच) में बन रहे विश्व प्रसिद्ध ‘विराट रामायण मंदिर’ (Viraat Ramayan Mandir) के गर्भगृह में यह विराजमान होगा।

यह मंदिर पटना से करीब 120 किलोमीटर दूर है। यह महावीर मंदिर ट्रस्ट (पटना) का ड्रीम प्रोजेक्ट है, जिसका नेतृत्व आचार्य किशोर कुणाल कर रहे हैं।

शिवलिंग की भव्यता: आंकड़े कर देंगे हैरान (Size & Dimensions)

इस शिवलिंग को “दुनिया का सबसे बड़ा” ऐसे ही नहीं कहा जा रहा। इसके आंकड़े सुनकर आप दंग रह जाएंगे:

  • वजन (Weight): 210 मीट्रिक टन (लगभग 2,10,000 किलो)।
  • ऊंचाई (Height): 33 फीट।
  • गोलाई (Circumference): 33 फीट।

सामग्री (Material): यह ब्लैक ग्रेनाइट (Black Granite) पत्थर से बना है, जो सैकड़ों सालों तक खराब नहीं होता।

सहस्त्रलिंगम: इस शिवलिंग पर 1,008 छोटे शिवलिंग भी उकेरे गए हैं, जिसे ‘सहस्त्रलिंगम’ कहा जाता है।

अभी तक तमिलनाडु के तंजावुर (Thanjavur) का शिवलिंग सबसे बड़ा माना जाता था, लेकिन अब बिहार का यह शिवलिंग उस रिकॉर्ड को तोड़ देगा।

महाबलीपुरम से बिहार तक का अद्भुत सफर (The Journey)

इस शिवलिंग को बिहार लाना कोई बच्चों का खेल नहीं था।

  • निर्माण: इसे तमिलनाडु के महाबलीपुरम में वहां के कुशल कारीगरों ने एक ही विशाल चट्टान को काटकर तराशा है।
  • परिवहन: इसे लाने के लिए एक विशेष 96 पहियों वाला ट्रेलर/ट्रक बनाया गया।
  • दूरी: इसने लगभग 2,500 किलोमीटर का सफर तय किया है। यह तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश होते हुए बिहार (गोपालगंज के रास्ते) पहुंचा है।
  • समय: सड़क मार्ग से इसे यहां तक पहुंचने में करीब 1 महीने का समय लगा।
  • रास्ते में जहां-जहां से यह ट्रक गुजरा, वहां लोगों ने फूल बरसाकर और आरती उतारकर इसका स्वागत किया।
  • स्थापना की तारीख और विधि (Installation Date)
  • भक्तों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। मंदिर प्रशासन के अनुसार:
  • स्थापना तारीख: 17 जनवरी 2026।
  • मुहूर्त: माघ कृष्ण चतुर्दशी के पावन अवसर पर।

इस दिन वैदिक मंत्रोच्चार के साथ इस महा-शिवलिंग को विराट रामायण मंदिर में स्थापित किया जाएगा। इसके लिए पांच पवित्र स्थलों—कैलाश मानसरोवर, गंगोत्री, हरिद्वार, प्रयागराज और सोनपुर—से जल लाया गया है।

विराट रामायण मंदिर: 2030 तक होगा तैयार

जिस मंदिर में यह शिवलिंग लग रहा है, वह खुद एक अजूबा होगा।

विश्व का सबसे बड़ा मंदिर: बनने के बाद यह कंबोडिया के अंकोरवाट (Angkor Wat) से भी ऊंचा और बड़ा होगा।

  • ऊंचाई: इसका मुख्य शिखर 270 फीट ऊंचा होगा।
  • परिसर: 120 एकड़ में फैले इस मंदिर में कुल 22 देवालय (मंदिर) होंगे।
  • टारगेट: मंदिर का निर्माण कार्य साल 2030 तक पूरा होने की उम्मीद है।
  • World's Largest Shivling

दक्षिण की कला और उत्तर की आस्था

यह शिवलिंग सिर्फ बिहार नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए गौरव का विषय है। दक्षिण भारत की कला (महाबलीपुरम) और उत्तर भारत की आस्था (बिहार) का यह संगम अद्भुत है। 17 जनवरी को जब यह स्थापित होगा, तो इतिहास के पन्नों में एक नया अध्याय जुड़ जाएगा।

अगर आप भी शिवभक्त हैं, तो एक बार पूर्वी चंपारण जाकर इस अद्भुत शिवलिंग के दर्शन जरूर करें।

ॐ नमः शिवाय!”

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BPSC TRE-3 Paper Leak: पेपर लीक कांड का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, उड़ीसा से दबोचा गया मुख्य आरोपी; जानें अब तक के बड़े खुलासे

BPSC

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-3) के पेपर लीक मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को एक बड़ी सफलता मिली है। महीनों से फरार चल रहे इस धांधली के मुख्य सूत्रधार और मास्टरमाइंड को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी के बाद अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि बिहार में चल रहे बड़े शिक्षा सिंडिकेट का पूरी तरह से भंडाफोड़ होगा।

पेपर लीक कांड के मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी: एक बड़ी कामयाबी

बिहार की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक, BPSC TRE-3, जो हजारों युवाओं के भविष्य से जुड़ी थी, पेपर लीक की वजह से विवादों के घेरे में आ गई थी। इस मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने लगातार छापेमारी के बाद मुख्य आरोपी को उड़ीसा से गिरफ्तार किया है।

आरोपी की पहचान विशाल कुमार चौरसिया और उसके सहयोगियों के नेटवर्क से जुड़े व्यक्तियों के रूप में की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्य आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था, लेकिन तकनीकी निगरानी और गुप्त सूचनाओं के आधार पर पुलिस उसे दबोचने में कामयाब रही।

BPSC

क्या था BPSC TRE-3 पेपर लीक मामला?

15 मार्च 2024 को आयोजित हुई तीसरे चरण की शिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान पेपर लीक की खबरें सामने आई थीं। जांच में पाया गया कि परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रश्नपत्र हजारीबाग के एक बैंक से लीक होकर सॉल्वर गैंग के पास पहुँच गए थे। इसके बाद हजारीबाग में छापेमारी कर सैकड़ों अभ्यर्थियों को रंगे हाथ पकड़ा गया था, जिन्हें परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र रटवाए जा रहे थे।

जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे: कैसे फैला था जाल?

EOU की जांच में यह बात सामने आई है कि यह कोई साधारण पेपर लीक नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी जिसमें कई राज्यों के अपराधी शामिल थे।

1. प्रिंटिंग प्रेस से लेकर सॉल्वर गैंग तक का कनेक्शन

जांच एजेंसियों के अनुसार, पेपर लीक की जड़ें उस प्रिंटिंग प्रेस से जुड़ी थीं जहाँ प्रश्नपत्र छापे गए थे। गिरोह ने प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों के साथ साठगांठ कर परीक्षा से कई दिन पहले ही सेट हासिल कर लिए थे।

2. अभ्यर्थियों से वसूले गए थे लाखों रुपये

गिरफ्तार आरोपी और उसके गिरोह ने प्रत्येक अभ्यर्थी से 10 लाख से 15 लाख रुपये तक का सौदा किया था। अभ्यर्थियों को बसों में भरकर सुरक्षित ठिकानों पर ले जाया गया था, जहाँ उन्हें मोबाइल फोन जमा करवाकर प्रश्नपत्र और उनके उत्तर याद करवाए गए थे।

3. तकनीक का सहारा और फर्जी पहचान

आरोपी पुलिस से बचने के लिए लगातार फर्जी सिम कार्ड और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर रहा था। उसकी गिरफ्तारी से अब उन सफेदपोश चेहरों का भी पर्दाफाश हो सकता है जो इस पूरे सिंडिकेट को संरक्षण दे रहे थे।

बिहार में परीक्षाओं की शुचिता पर उठते सवाल

पिछले कुछ वर्षों में बिहार में पेपर लीक की घटनाएं एक गंभीर समस्या बनकर उभरी हैं। BPSC TRE-3 से पहले भी कई बड़ी परीक्षाओं (जैसे सिपाही भर्ती) के पेपर लीक होने के कारण रद्द करना पड़ा है।

सरकार और प्रशासन की सख्त कार्रवाई

बिहार सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, आर्थिक अपराध इकाई को खुली छूट दी गई है कि वह इस नेटवर्क की तह तक जाए।

परीक्षा रद्द करना: पेपर लीक की पुष्टि होने के तुरंत बाद BPSC ने TRE-3 परीक्षा को रद्द कर दिया था।

नए कानून का प्रभाव: बिहार में लागू हुए नए एंटी-पेपर लीक कानून के तहत अब इन आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें भारी जुर्माना और लंबी जेल की सजा का प्रावधान है।

अभ्यर्थियों के भविष्य पर मंडराते बादल

इस पेपर लीक और मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बीच सबसे ज्यादा परेशान वे लाखों अभ्यर्थी हैं जिन्होंने दिन-रात मेहनत की थी। परीक्षा रद्द होने से न केवल उनका समय बर्बाद हुआ है, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति पर भी बुरा असर पड़ा है।

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दोबारा परीक्षा और नई चुनौतियाँ

BPSC अब इस परीक्षा को दोबारा आयोजित करने की तैयारी में है। हालांकि, आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसी फुलप्रूफ व्यवस्था बनाने की है जिसे कोई भी सॉल्वर गैंग भेद न सके। अभ्यर्थियों की मांग है कि:

• परीक्षा केंद्रों का चयन सावधानी से किया जाए।

• प्रश्नपत्रों के परिवहन के लिए जीपीएस और डिजिटल लॉक का उपयोग हो।

• सॉल्वर गैंग के सदस्यों को ताउम्र किसी भी परीक्षा से प्रतिबंधित किया जाए।

अब देखना यह होगा कि इस मुख्य आरोपी से पूछताछ के दौरान और कौन से बड़े नाम सामने आते हैं और क्या आयोग आगामी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित कर पाता है।

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दिल्ली में पुरानी कार रखने वालों की बल्ले-बल्ले! अब पेट्रोल-डीजल कार को इलेक्ट्रिक बनाने पर मिलेगी ₹50,000 की सब्सिडी

दिल्ली

अगर आपकी पुरानी डीजल या पेट्रोल कार दिल्ली की सड़कों पर चलने के लिए ‘अनफिट’ होने वाली है, तो आपके लिए एक बड़ी राहत भरी खबर है। दिल्ली सरकार ने अपनी नई प्रदूषण नियंत्रण नीति के तहत पुरानी गाड़ियों को कबाड़ (Scrap) में भेजने के बजाय उन्हें इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) में बदलने के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव रखा है। इस

योजना के तहत गाड़ी मालिक को ₹50,000 तक की आर्थिक मदद दी जाएगी।

15 साल पुरानी गाड़ियों को मिलेगा नया जीवन

दिल्ली-NCR में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के नियमों के कारण 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों का चलना प्रतिबंधित है। हजारों लोग अपनी अच्छी-खासी चलने वाली गाड़ियों को कबाड़ में बेचने के लिए मजबूर हो जाते हैं। लेकिन अब EV Retrofitting Policy के तहत इन गाड़ियों में इलेक्ट्रिक किट लगाकर इन्हें फिर से सड़क पर दौड़ने लायक बनाया जा सकेगा।

सरकार का मुख्य उद्देश्य शहर के प्रदूषण स्तर को कम करना और मध्यम वर्ग के उन लोगों को राहत देना है जो तुरंत नई इलेक्ट्रिक कार खरीदने का बजट नहीं रखते।

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सब्सिडी का गणित: किसे और कैसे मिलेगा फायदा?

दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग द्वारा तैयार किए गए इस प्रस्ताव में कुछ महत्वपूर्ण मानक तय किए गए हैं:

• सबिडी की राशि: रेट्रोफिटिंग (इलेक्ट्रिक किट लगाने) की कुल लागत का एक हिस्सा या अधिकतम ₹50,000 की डायरेक्ट सब्सिडी दी जाएगी।

• प्रमाणित एजेंसियां: यह सब्सिडी केवल तभी मिलेगी जब आप सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त ‘रेट्रोफिटिंग सेंटर’ से ही अपनी कार को कन्वर्ट कराएंगे।

• पंजीकरण: किट लगने के बाद आरटीओ (RTO) द्वारा गाड़ी के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) पर ‘Electric’ मार्क किया जाएगा, जिसके बाद सब्सिडी की राशि सीधे बैंक खाते में आएगी।

EV Retrofitting क्या है और इसके फायदे क्या हैं?

रेट्रोफिटिंग का मतलब है आपकी पुरानी कार के इंजन, फ्यूल टैंक और एग्जॉस्ट सिस्टम को हटाकर उसकी जगह इलेक्ट्रिक मोटर, कंट्रोलर और लिथियम-आयन बैटरी पैक लगाना।

पर्यावरण और जेब पर असर

• जीरो एमिशन: इलेक्ट्रिक कार से धुआं नहीं निकलता, जिससे दिल्ली की हवा साफ होगी।

• कम खर्च: पेट्रोल की तुलना में इलेक्ट्रिक कार चलाने का खर्च लगभग 70-80% तक कम आता है।

• पुरानी यादें बरकरार: बहुत से लोग अपनी पहली कार या पसंदीदा मॉडल को छोड़ना नहीं चाहते, उनके लिए यह एक इमोशनल और प्रैक्टिकल समाधान है।

दिल्ली सरकार का मास्टरप्लान: प्रदूषण मुक्त राजधानी

दिल्ली सरकार 2026 तक इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी को कुल बिक्री का 25% तक ले जाना चाहती है। पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली में चार्जिंग स्टेशनों का जाल बिछाया गया है। अब सरकार का ध्यान ‘कन्वर्जन’ पर है क्योंकि एक नई इलेक्ट्रिक कार की कीमत ₹10 लाख से शुरू होती है, जबकि रेट्रोफिटिंग ₹3 लाख से ₹5 लाख के बीच हो जाती है। सब्सिडी मिलने के बाद यह बोझ और भी कम हो जाएगा।

रेट्रोफिटिंग के लिए क्या है पात्रता?

• गाड़ी का फिटनेस सर्टिफिकेट होना चाहिए।

• गाड़ी पर कोई पुराना चालान या कानूनी मामला लंबित नहीं होना चाहिए।

• केवल वही मॉडल कन्वर्ट हो सकते हैं जिन्हें टेस्टिंग एजेंसियों (जैसे ARAI) ने मंजूरी दी है।

चुनौतियां और चुनौतियां का समाधान

हालांकि यह सुनने में बहुत अच्छा लगता है, लेकिन रेट्रोफिटिंग के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं। फिलहाल प्रमाणित रेट्रोफिटिंग किट्स की संख्या कम है और बैटरी की लाइफ को लेकर लोगों में संदेह है।

सरकार इन चुनौतियों से निपटने के लिए कंपनियों को टैक्स छूट देने और आरएंडडी (R&D) को बढ़ावा देने पर काम कर रही है। आने वाले महीनों में दिल्ली के विभिन्न इलाकों में विशेष कैंप लगाकर लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जाएगा।

एक्सपर्ट की राय: क्या आपको रेट्रोफिटिंग करानी चाहिए?

ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आपकी कार की बॉडी और सस्पेंशन अच्छी स्थिति में है, तो रेट्रोफिटिंग एक समझदारी भरा फैसला है। लेकिन अगर गाड़ी का ढांचा (Chassis) जर्जर हो चुका है, तो बेहतर होगा कि आप उसे स्क्रैप पॉलिसी के तहत एक्सचेंज कर नई इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदें।

दिल्ली

महत्वपूर्ण तिथियां और प्रक्रिया:

माना जा रहा है कि इस प्रस्ताव को कैबिनेट की अंतिम मंजूरी अगले महीने मिल सकती है। मंजूरी मिलते ही परिवहन विभाग एक समर्पित पोर्टल लॉन्च करेगा जहां लोग सब्सिडी के लिए आवेदन कर सकेंगे।

क्या आप अपनी पुरानी पेट्रोल या डीजल कार को इलेक्ट्रिक में बदलना पसंद करेंगे, या आप सीधे नई इलेक्ट्रिक कार खरीदना बेहतर समझते हैं? हमें नीचे कमेंट में जरूर बताएं।

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Bangladesh Hindu Crisis: क्या बांग्लादेश अब हिंदुओं के रहने लायक नहीं बचा? 5 कड़वे सच जो आपको जानने चाहिए

Bangladesh

Bangladesh में हमारा खून पानी से भी सस्ता है।” यह शब्द उस बेबस हिंदू के हैं जिसका घर जल रहा है। पिछले कुछ महीनों में Bangladesh से आ रही तस्वीरें दिल दहला देने वाली हैं—जलाए गए मंदिर, टूटी हुई मूर्तियां और पलायन को मजबूर परिवार। लेकिन क्या यह सब अचानक शुरू हुआ है क्योंकि मीडिया अब ज्यादा एक्टिव है? या फिर यह एक पुरानी बीमारी है जो अब नासूर बन चुकी है? और सबसे बड़ा सवाल—क्या बांग्लादेश अब किसी भी भारतीय (Indian) के लिए सुरक्षित नहीं है, चाहे वो हिंदू हो या मुसलमान?

आज के इस ब्लॉग में हम बांग्लादेश के इस सुलगते हुए सच की 5 परतों को खोलेंगे।

क्या यह हिंसा “अचानक” बढ़ी है? (The Current Scenario)

जी हाँ, यह सच है कि अगस्त 2024 में शेख हसीना (Sheikh Hasina) की सरकार गिरने के बाद हिंसा ने एक भयानक रूप ले लिया है। मोहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) की अंतरिम सरकार आने के बाद से कट्टरपंथी तत्व बेकाबू हो गए हैं।

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ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक:

Dipu Chandra Das और Khokon Chandra Das जैसे आम नागरिकों की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई।

Amnesty International और UN जैसी संस्थाओं ने माना है कि वहां अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े हैं।

यह हिंसा अब सिर्फ ‘राजनैतिक’ नहीं रही, बल्कि पूरी तरह से ‘सांप्रदायिक’ (Communal) हो चुकी है। उपद्रवी अब चुन-चुनकर हिंदू घरों और व्यवसायों को निशाना बना रहे हैं।

1947 से 2025: एक पूरी कौम का गायब होना (The Vanishing Population)

आपका यह सवाल बहुत गहरा है कि “क्या यह हमेशा से होता आया है?” इसका जवाब आंकड़ों में छिपा है, जो बेहद डरावना है।

जब 1947 में देश का बंटवारा हुआ था, तब पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में हिंदुओं की आबादी लगभग 28-30% थी।

1951 में यह घटकर 22% रह गई।

1971 की आजादी के वक्त यह करीब 19-20% थी।

और आज? 2022 की जनगणना के अनुसार, बांग्लादेश में हिंदू आबादी सिर्फ 7.95% बची है।

यह गिरावट बताती है कि यह कोई “नई घटना” नहीं है। यह एक ‘Slow Genocide’ (धीमा नरसंहार) है। हिंसा, भेदभाव और ‘Vested Property Act’ जैसे कानूनों के जरिए हिंदुओं की जमीनें छीनी गईं, जिससे वे या तो मारे गए या भारत भाग आए।

क्या भारतीयों (Indians) के लिए भी खतरा है?

यहाँ आपको एक बहुत बड़ा अंतर समझने की जरूरत है: ‘बांग्लादेशी हिंदू’ और ‘भारतीय नागरिक’ दो अलग चीजें हैं।

बांग्लादेशी हिंदू: ये वहां के नागरिक हैं, लेकिन इन्हें धर्म की वजह से निशाना बनाया जा रहा है।

भारतीय नागरिक (You & Me): अभी बांग्लादेश में सिर्फ ‘हिंदू विरोधी’ लहर नहीं, बल्कि ‘भारत विरोधी’ (Anti-India) लहर भी चल रही है।

कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठन भारत को अपना दुश्मन मानते हैं।

‘Boycott India’ जैसे कैंपेन चलाए जा रहे हैं।

यहाँ तक कि भारतीय वीज़ा सेंटर्स (Visa Centers) को भी धमकियां मिली हैं और काम रोका गया है।

इसलिए, अगर आप भारतीय हैं (चाहे हिंदू हों या मुस्लिम), तो मौजूदा हालात में वहां जाना सुरक्षित नहीं है। खुद Indian Cricket Team ने भी सुरक्षा कारणों से वहां जाने से मना कर दिया है।

मीडिया का रोल: सच या हाइप?

कई लोग सोचते हैं कि “मीडिया नमक-मिर्च लगा रहा है।” लेकिन इस बार ऐसा नहीं है।

इस बार खबरें सिर्फ भारतीय मीडिया से नहीं, बल्कि खुद बांग्लादेश के मानवाधिकार संगठनों (जैसे Ain o Salish Kendra) से आ रही हैं। सोशल मीडिया के दौर में अब वीडियो छिपाना मुश्किल है। जो वीडियो आप देख रहे हैं—भीड़ का तांडव, रोते हुए लोग—वे असली हैं और Human Rights Watch ने भी इनकी पुष्टि की है। यह ‘हाइप’ नहीं, बल्कि ‘जमीनी हकीकत’ है।

भविष्य क्या है? (What Lies Ahead)

विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश तेजी से एक कट्टरपंथी इस्लामी राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा है, जैसा हाल पाकिस्तान का है।

वहां की नई सरकार कट्टरपंथियों पर नकेल कसने में नाकाम साबित हो रही है।

हिंदुओं के लिए सरकारी नौकरियों और समाज में जगह लगातार सिकुड़ रही है।

अगर यही हाल रहा, तो अगले 20-30 सालों में बांग्लादेश में हिंदू आबादी शायद 1-2% पर सिमट कर रह जाएगी, जैसा अफगानिस्तान और पाकिस्तान में हुआ।

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क्या अल्पसंख्यक रह पाएंगे सुरक्षित?

बांग्लादेश में जो हो रहा है, वह सिर्फ एक देश की समस्या नहीं है, बल्कि मानवाधिकारों की हत्या है। यह कहना गलत नहीं होगा कि फिलहाल बांग्लादेश अपने अल्पसंख्यक हिंदुओं के लिए “रहने लायक” नहीं बचा है। और एक भारतीय होने के नाते, हमें भी वहां की यात्रा करने से पहले सौ बार सोचना चाहिए।

आपकी राय: क्या भारत सरकार को इस मुद्दे पर और सख्त कदम उठाने चाहिए? कमेंट में अपनी राय जरूर लिखें।

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Agniveer Marriage Ban: पक्के सैनिक बनने से पहले अग्निवीर नहीं कर सकेंगे शादी! क्या है सेना का नया सख्त रूल? जानिए पूरा सच

Agniveer Marriage Ban

क्या देश की सेवा करने के लिए “कुंवारा” रहना जरूरी है? यह सवाल आज हर उस युवा के मन में है जो अग्निवीर (Agniveer) बनने का सपना देख रहा है या पहले से सेना में है। भारतीय सेना ने अग्निवीरों के लिए एक नया और सख्त नियम लागू किया है। इसके मुताबिक, 4 साल की सेवा पूरी करने के बाद भी जब तक कोई अग्निवीर ‘परमानेंट’ (Permanent Soldier) नहीं बन जाता, तब तक वह शादी नहीं कर सकता। अगर किसी ने गलती से भी ब्याह रचा लिया, तो उसकी वर्दी और पक्की नौकरी का सपना दोनों टूट सकते हैं।

आखिर सेना ने ऐसा नियम क्यों बनाया? क्या यह अनुशासन (Discipline) के लिए है या इसके पीछे कोई और वजह है? आइए, इस रिपोर्ट में गहराई से समझते हैं।

क्या है नया ‘Marriage Ban’ नियम?

साल 2022 में भर्ती हुए अग्निवीरों का पहला बैच जून-जुलाई 2026 में अपना 4 साल का कार्यकाल पूरा कर रहा है। इनमें से सिर्फ 25% को ही पक्का (Permanent) किया जाएगा।

Agniveer

सेना ने साफ कर दिया है कि:

4 साल की सर्विस के दौरान शादी की अनुमति नहीं है (यह नियम पहले से था)।

नया पेंच: 4 साल पूरे होने के बाद, जो चयन प्रक्रिया (Selection Process) चलेगी, उस दौरान भी अग्निवीर शादी नहीं कर सकते।

यह चयन प्रक्रिया 4 से 6 महीने तक चल सकती है।

अगर इस बीच (Service + Selection Time) किसी ने शादी की, तो उसे अयोग्य (Disqualified) मान लिया जाएगा और वह परमानेंट नहीं बन पाएगा।

शादी और ड्यूटी का क्या कनेक्शन? (Army’s Logic)

आपके मन में सवाल होगा कि शादी करने से गोली चलाने या देश की रक्षा करने पर क्या असर पड़ता है? सेना का अपना तर्क है।

सेना में भर्ती होने की उम्र 17.5 से 21 साल है। सेना इसे ‘ट्रेनिंग और अनुशासन’ का दौर मानती है।

फोकस: सेना का मानना है कि परमानेंट होने की प्रक्रिया बेहद कठिन होती है। इस दौरान उम्मीदवार का पूरा ध्यान सिर्फ अपनी फिजिकल और मानसिक क्षमता साबित करने पर होना चाहिए। शादी और परिवार की जिम्मेदारियां उनका ध्यान भटका सकती हैं।

रेग्रूटमेंट नियम: सेना के नियमों के मुताबिक, ट्रेनिंग के दौरान रंगरूट (Recruit) को शादी करने की अनुमति नहीं होती। चूंकि अग्निवीर अभी तक ‘परमानेंट’ नहीं हुए हैं, इसलिए उन पर अभी भी ‘ट्रेनिंग फेज’ वाले नियम ही लागू माने जा रहे हैं।

क्या यह कोई ‘Politics’ है? (The Political Angle)

अब आते हैं आपके सबसे बड़े सवाल पर—क्या यह राजनीति है?

सीधे तौर पर यह सेना का एक ‘प्रशासनिक फैसला’ (Administrative Decision) है, राजनीति नहीं। लेकिन इसका असर राजनीति और समाज पर बहुत गहरा है।

सामाजिक समस्या: गावों में यह बात फैल रही है कि “अग्निवीरों को कोई अपनी बेटी नहीं देना चाहता” क्योंकि उनकी नौकरी की कोई गारंटी नहीं है। यह नया नियम (“शादी पर रोक”) इस आग में घी डालने का काम करेगा।

विपक्ष का मुद्दा: विपक्षी पार्टियां (जैसे कांग्रेस) इसे बड़ा मुद्दा बना रही हैं। उनका कहना है कि सरकार युवाओं को न तो पेंशन दे रही है, न इज्जत और अब उनके निजी जीवन (शादी) पर भी पहरे लगा रही है। इसे “गुलामी” जैसा बताया जा रहा है।

तो जवाब है—नियम मिलिट्री का है, लेकिन इस पर बवाल पॉलिटिकल है।

पहले बैच के लिए खतरा

यह नियम सबसे ज्यादा भारी 2022 बैच पर पड़ने वाला है।

ये युवा 2026 में जब बाहर निकलेंगे, तो उनकी उम्र 23-25 साल होगी। भारतीय समाज में यह शादी की उम्र होती है। ऐसे में 6-8 महीने का और इंतजार, और वह भी इस डर के साथ कि अगर शादी की तो नौकरी गई—यह उनके लिए मानसिक तनाव का कारण बन सकता है।

Agniveer

क्या रास आएगा अग्निवीरों को ये नियम!

अनुशासन सेना की रीढ़ है, इसमें कोई दो राय नहीं। लेकिन अग्निवीर योजना पहले से ही विवादों में रही है। अब ‘शादी पर रोक’ का यह नया नियम युवाओं को कितना रास आता है, यह तो वक्त ही बताएगा। फिलहाल, अगर आप अग्निवीर हैं और पक्की वर्दी चाहते हैं, तो ‘शहनाई’ बजाने के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा।

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127 साल बाद दुनिया देखेगी भगवान बुद्ध के ‘असली’ अवशेष: पिपरहवा की खुदाई से निकले धरोहर की पूरी कहानी और धार्मिक महत्व

भगवान बुद्ध

भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद उनके अवशेषों को लेकर सदियों से कौतूहल रहा है, लेकिन उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के पिपरहवा से मिले अवशेषों ने इतिहास की दिशा बदल दी। करीब 127 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद, इन दुर्लभ और पवित्र अवशेषों को सार्वजनिक प्रदर्शनी के लिए रखा जा रहा है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय सभ्यता का ‘अटूट हिस्सा’ करार दिया है।

पिपरहवा स्तूप: जहाँ से मिला बुद्ध का पवित्र साक्ष्य

उत्तर प्रदेश का सिद्धार्थनगर जिला, जो कभी प्राचीन शाक्य गणराज्य का हिस्सा था, आज वैश्विक सुर्खियों में है। 1898 में विलियम क्लैक्सटन पेपे (W.C. Peppe) नामक एक ब्रिटिश अधिकारी ने पिपरहवा के एक प्राचीन टीले की खुदाई करवाई थी। इस खुदाई में एक भारी पत्थर का संदूक मिला, जिसके भीतर मिट्टी के बर्तन और कीमती पत्थरों के साथ पांच छोटे कलश (Urns) प्राप्त हुए।

इन कलशों पर अंकित ब्राह्मी लिपि के लेखों ने दुनिया को चौंका दिया। अभिलेखों के अनुसार, ये अवशेष स्वयं भगवान बुद्ध के थे और इन्हें उनके ‘शाक्य’ परिजनों द्वारा स्थापित किया गया था। आज 127 साल बाद, इन अवशेषों को एक भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी के माध्यम से श्रद्धालुओं और इतिहासकारों के सामने पेश किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री का संबोधन: ‘सभ्यता का अटूट हिस्सा’

हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन अवशेषों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “भगवान बुद्ध के ये अवशेष केवल धार्मिक प्रतीक नहीं हैं, बल्कि ये हमारी महान भारतीय सभ्यता और संस्कृति के उस गौरवशाली अध्याय का हिस्सा हैं, जिसने पूरी दुनिया को शांति और करुणा का मार्ग दिखाया।”

सरकार की योजना इन अवशेषों को ‘बुद्धिस्ट सर्किट’ (Buddhist Circuit) के केंद्र के रूप में स्थापित करने की है, ताकि कुशीनगर, लुम्बिनी, सारनाथ और श्रावस्ती आने वाले पर्यटक पिपरहवा के इस ऐतिहासिक महत्व को समझ सकें।

पिपरहवा अवशेषों का ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व

इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के लिए पिपरहवा का स्तूप हमेशा से एक पहेली और शोध का विषय रहा है। कई विद्वानों का मानना है कि यही वह असली ‘कपिलवस्तु’ है, जहाँ भगवान बुद्ध ने अपने जीवन के शुरुआती 29 वर्ष व्यतीत किए थे।

1. 1898 की खुदाई और पेपे का योगदान

विलियम पेपे को खुदाई के दौरान जो कलश मिले थे, उनमें से एक पर लिखा था— “Iyam salila nidhane Budhasa bhagavate sakiyanam sukitibhātinam sayaputanadalanam”. इसका अर्थ है कि यह भगवान बुद्ध के शरीर के अवशेष हैं, जिन्हें उनके शाक्य भाइयों, पुत्रों और पत्नियों द्वारा सम्मानपूर्वक यहाँ रखा गया है।

2. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की पुष्टि

1970 के दशक में के.एम. श्रीवास्तव के नेतृत्व में ASI ने यहाँ दोबारा खुदाई की। उस समय और भी अधिक गहराई में दो अन्य कलश मिले, जिनसे यह सिद्ध हुआ कि पिपरहवा का यह स्थल बुद्ध के परिनिर्वाण के तुरंत बाद बनाया गया था। यह साक्ष्य इसे दुनिया के सबसे प्रामाणिक बौद्ध स्थलों में से एक बनाता है।

वैश्विक स्तर पर बौद्ध कूटनीति (Buddhist Diplomacy)

भारत सरकार इन पवित्र अवशेषों के माध्यम से दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों जैसे थाईलैंड, म्यांमार, श्रीलंका और वियतनाम के साथ अपने संबंधों को और मजबूत कर रही है। इन अवशेषों की प्रदर्शनी न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि ‘सॉफ्ट पावर’ के रूप में भारत की वैश्विक छवि को भी निखारेगी।

हाल के वर्षों में बुद्ध के अवशेषों को मंगोलिया और थाईलैंड भेजा गया था, जहाँ लाखों की संख्या में लोगों ने उनके दर्शन किए थे। अब पिपरहवा के इन विशेष अवशेषों को लेकर सरकार एक बड़े रोडमैप पर काम कर रही है।

सिद्धार्थनगर और पिपरहवा का पर्यटन भविष्य

पिपरहवा को एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन हब बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार मिलकर काम कर रही हैं।

बेहतर कनेक्टिविटी: कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट और लुम्बिनी के पास होने के कारण यहाँ विदेशी पर्यटकों की पहुंच आसान हो गई है।

म्यूजियम का आधुनिकरण: पिपरहवा से प्राप्त अन्य कलाकृतियों और खुदाई में मिली वस्तुओं के लिए एक अत्याधुनिक डिजिटल म्यूजियम बनाने की योजना है।

आध्यात्मिक केंद्र: यहाँ ध्यान केंद्र (Meditation Centres) और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विश्राम गृह बनाए जा रहे हैं।

भगवान बुद्ध की शिक्षाएं और आज का समय

ऐसे समय में जब दुनिया संघर्षों और युद्धों से जूझ रही है, भगवान बुद्ध के अवशेषों का सार्वजनिक प्रदर्शन एक शांति का संदेश देता है। बुद्ध का ‘मध्यम मार्ग’ और ‘अहिंसा’ का सिद्धांत आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना 2500 साल पहले था। पिपरहवा के ये अवशेष हमें याद दिलाते हैं कि शांति की खोज बाहर नहीं, बल्कि भीतर है।

विरासत का सम्मान

127 साल बाद पिपरहवा के इन अवशेषों का गौरवपूर्ण तरीके से सामने आना केवल एक पुरातात्विक घटना नहीं है, बल्कि यह भारत की अपनी जड़ों की ओर लौटने की एक प्रक्रिया है। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों को हमारे समृद्ध इतिहास और आध्यात्मिक गहराई से परिचित कराएगा।

प्रधानमंत्री के शब्दों में, यह हमारी सभ्यता का ‘अटूट हिस्सा’ है जो सदैव हमें मानवता और करुणा की राह दिखाता रहेगा।

क्या आपको लगता है कि पिपरहवा को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण बौद्ध पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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Kashi Vishwanath Mandir: 350 साल पुराना संघर्ष और पुनरुत्थान! जानिए इतिहास, आक्रमण और ज्ञानवापी का पूरा सच

Kashi Vishwanath Mandir

“काशी तीनों लोकों से न्यारी है।” यह कहावत सिर्फ शब्दों का खेल नहीं, बल्कि एक अहसास है। वाराणसी (बनारस) की गलियों में बसने वाले बाबा विश्वनाथ सिर्फ एक देवता नहीं, बल्कि इस प्राचीन शहर की धड़कन हैं। गंगा के तट पर स्थित Kashi Vishwanath Mandir हिंदू धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज हम जिस भव्य मंदिर के दर्शन करते हैं, उसका इतिहास कितना रक्तरंजित रहा है?

इस मंदिर को कई बार तोड़ा गया, लूटा गया और फिर से बनाया गया। आज के इस ब्लॉग में हम जानेंगे बाबा के मंदिर का वो इतिहास जो हर सनातनी को जानना चाहिए—मुगलों के आक्रमण से लेकर अयोध्या (बाबरी) जैसे कानूनी संघर्ष तक।

Kashi Vishwanath Mandir

12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे खास: बाबा विश्वनाथ

काशी को भगवान शिव की नगरी कहा जाता है। मान्यता है कि प्रलय काल में भी इस नगरी का नाश नहीं होता क्योंकि भगवान शिव इसे अपने त्रिशूल पर धारण कर लेते हैं।

यहाँ स्थापित शिवलिंग ‘विश्वनाथ’ या ‘विश्वेश्वर’ कहलाता है, जिसका अर्थ है—ब्रह्मांड का शासक। स्कंद पुराण के काशी खंड में इस मंदिर का विस्तृत वर्णन मिलता है। कहा जाता है कि एक बार गंगा स्नान और बाबा के दर्शन मात्र से मोक्ष (मुक्ति) की प्राप्ति हो जाती है।

मंदिर पर हुए क्रूर आक्रमण (History of Attacks)

काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास जितना पुराना है, उतना ही संघर्षपूर्ण भी रहा है। इस पवित्र स्थल पर विदेशी आक्रांताओं की बुरी नजर हमेशा रही।

कुतुबुद्दीन ऐबक (1194): सबसे पहला बड़ा हमला 1194 ई. में मोहम्मद गोरी के सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक ने किया था। उसने कन्नौज के राजा को हराने के बाद काशी के कई मंदिरों को ध्वस्त कर दिया था।

हुसैन शाह शर्की और सिकंदर लोदी: 15वीं सदी में जौनपुर के सुल्तान और बाद में सिकंदर लोदी के शासनकाल में भी मंदिर को भारी नुकसान पहुँचाया गया।

लेकिन सबसे काला अध्याय अभी लिखा जाना बाकी था।

औरंगजेब का फरमान और 1669 का विध्वंस

इतिहास के पन्नों में 18 अप्रैल 1669 की तारीख काले अक्षरों में दर्ज है। मुगल बादशाह औरंगजेब ने एक फरमान जारी किया था—”काफिरों के मंदिरों को गिरा दिया जाए।”

इस आदेश के बाद, काशी विश्वनाथ के भव्य मंदिर को पूरी तरह से तोड़ दिया गया।

कहा जाता है कि जब मुगल सेना मंदिर तोड़ने आ रही थी, तो मंदिर के मुख्य पुजारी ने ज्योतिर्लिंग को बचाने के लिए उसे गले से लगा लिया और पास ही स्थित ज्ञानवापी कूप (कुएं) में कूद गए।

औरंगजेब ने मंदिर के मलबे और दीवारों का इस्तेमाल करके उसी जगह पर एक मस्जिद का निर्माण करवाया, जिसे आज हम ‘ज्ञानवापी मस्जिद’ के नाम से जानते हैं। आज भी मस्जिद की पश्चिमी दीवार पर पुराने मंदिर के अवशेष साफ देखे जा सकते हैं।

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अहिल्याबाई होल्कर: जिन्होंने लौटाया गौरव

लगभग एक सदी तक बाबा विश्वनाथ का कोई विधिवत मंदिर नहीं था। भक्त ज्ञानवापी कुएं के पास ही पूजा करते थे।

Credit -Free press journal

फिर उदय हुआ मराठा शक्ति का। 1780 ई. में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने मस्जिद के ठीक बगल में वर्तमान काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण करवाया।

बाद में, पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह ने इस मंदिर के शिखरों को मढ़ने के लिए 1000 किलो शुद्ध सोना दान दिया था, जिसके बाद इसे ‘गोल्डन टेम्पल’ (Golden Temple of Varanasi) भी कहा जाने लगा।

अयोध्या (बाबरी) और काशी की समानता: एक नया धर्मयुद्ध

आज काशी में जो कानूनी लड़ाई चल रही है, वह काफी हद तक अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद जैसी है।

बाबरी मस्जिद कनेक्शन: जिस तरह अयोध्या में बाबरी मस्जिद के नीचे राम मंदिर के सबूत मिले थे, उसी तरह हिंदू पक्ष का दावा है कि ज्ञानवापी मस्जिद असली विश्वनाथ मंदिर के ढांचे पर बनी है।

नंदी का इंतजार: आज भी काशी विश्वनाथ मंदिर के बाहर स्थापित विशाल ‘नंदी’ का मुख ज्ञानवापी मस्जिद की ओर है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, नंदी हमेशा शिवलिंग की ओर देखते हैं, जो यह इशारा करता है कि असली शिवलिंग मस्जिद के वजूखाने में है।

हाल ही में हुए ASI (Archaeological Survey of India) के सर्वे और कोर्ट केस ने इस दावे को और मजबूती दी है कि वहां मंदिर था।

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काशी विश्वनाथ कॉरिडोर: एक नया अध्याय

इतिहास के घावों पर मरहम लगाते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘काशी विश्वनाथ कॉरिडोर’ (Kashi Vishwanath Corridor) का निर्माण करवाया।

8 मार्च 2019 को शुरू हुई यह परियोजना 13 दिसंबर 2021 को पूरी हुई।

पहले मंदिर तक जाने के लिए तंग गलियों से गुजरना पड़ता था।

अब गंगा घाट (ललिता घाट) से सीधे मंदिर परिसर तक एक भव्य रास्ता बनाया गया है।

यह कॉरिडोर 5 लाख वर्ग फीट में फैला है और इसने काशी की दिव्यता को भव्यता के साथ जोड़ दिया है।

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सिर्फ मंदिर नहीं, एक पवित्र आस्था

काशी विश्वनाथ मंदिर सिर्फ ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा है। औरंगजेब की तलवारें इस आस्था को नहीं काट सकीं।

आज जब हम भव्य कॉरिडोर और मंदिर को देखते हैं, तो हमें अहिल्याबाई होल्कर के त्याग और उन पुजारियों के बलिदान को याद करना चाहिए जिन्होंने शिवलिंग की रक्षा की। ज्ञानवापी का सत्य अब कोर्ट के सामने है, लेकिन बाबा के भक्तों के लिए काशी का कण-कण शिवमय है।

“हर हर महादेव!”

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BSEB STET Result 2025: बिहार एसटीईटी रिजल्ट आज, यहाँ से डाउनलोड करें स्कोरकार्ड और देखें कट-ऑफ लिस्ट

STET

बिहार के हजारों शिक्षक अभ्यर्थियों का इंतजार आज खत्म होने जा रहा है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) द्वारा माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा (STET) 2025 के परिणाम आज आधिकारिक तौर पर घोषित किए जा रहे हैं। यदि आप भी इस परीक्षा में शामिल हुए थे, तो अपनी लॉगिन डिटेल्स तैयार रखें क्योंकि बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर लिंक किसी भी समय सक्रिय हो सकता है।

बिहार STET रिजल्ट 2025: एक बड़ा अपडेट

बिहार में शिक्षक बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। बिहार बोर्ड (BSEB) ने माध्यमिक (Paper 1) और उच्च माध्यमिक (Paper 2) स्तर की पात्रता परीक्षा के नतीजे जारी करने की पूरी तैयारी कर ली है। इस परीक्षा के माध्यम से राज्य के सरकारी स्कूलों में नौवीं से बारहवीं कक्षा तक के शिक्षकों की योग्यता का निर्धारण किया जाता है।

परीक्षा की पृष्ठभूमि और आयोजन

बता दें कि बिहार STET 2025 की परीक्षा राज्य के विभिन्न केंद्रों पर ऑनलाइन (CBT) मोड में आयोजित की गई थी। परीक्षा दो पालियों में ली गई थी, जिसमें लाखों अभ्यर्थियों ने भाग लिया था। बोर्ड ने पहले ही प्रोविजनल आंसर-की जारी कर उस पर आपत्तियां आमंत्रित की थीं, और अब विशेषज्ञों द्वारा उन आपत्तियों के निस्तारण के बाद फाइनल रिजल्ट तैयार किया गया है।

BSEB STET Result 2025 कैसे चेक करें? (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)

अभ्यर्थी नीचे दिए गए सरल चरणों का पालन करके अपना स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकते हैं:

आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं: सबसे पहले BSEB की आधिकारिक वेबसाइट bsebstet.com पर जाएं।

रिजल्ट लिंक पर क्लिक करें: होमपेज पर ‘STET Result 2025’ या ‘Scorecard’ का लिंक दिखाई देगा, उस पर क्लिक करें।

लॉगिन क्रेडेंशियल भरें: अब अपना एप्लीकेशन नंबर और जन्म तिथि (DOB) दर्ज करें।

कैप्चा कोड दर्ज करें: स्क्रीन पर दिख रहे सुरक्षा कोड को भरें और ‘Login’ बटन पर क्लिक करें।

रिजल्ट देखें: आपका स्कोरकार्ड स्क्रीन पर प्रदर्शित हो जाएगा। इसमें आपके विषयवार अंक और क्वालिफाइंग स्टेटस (Pass/Fail) दर्ज होगा।

प्रिंटआउट लें: भविष्य के संदर्भ के लिए अपने रिजल्ट का प्रिंटआउट जरूर निकाल लें।

श्रेणीवार पासिंग मार्क्स: किसे मिलेंगे कितने अंक?

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने इस परीक्षा के लिए न्यूनतम अर्हता अंक (Qualifying Marks) पहले ही निर्धारित कर दिए थे। अभ्यर्थियों को पास घोषित होने के लिए अपनी श्रेणी के अनुसार निम्नलिखित प्रतिशत अंक प्राप्त करने अनिवार्य हैं:

श्रेणी (Category) | पासिंग प्रतिशत

• सामान्य वर्ग (General) 50%

• पिछड़ा वर्ग (BC) 45.5%

• अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) 42.5%

• SC / ST वर्ग 40%

• दिव्यांग (PH) 40%

• महिला अभ्यर्थी 40%

नोट: एसटीईटी एक पात्रता परीक्षा है। इसमें सफल होने का अर्थ यह नहीं है कि आपको सीधे नौकरी मिल जाएगी, बल्कि आप बिहार में निकलने वाली शिक्षक बहाली (TRE) की प्रक्रियाओं में आवेदन करने के पात्र हो जाएंगे।

नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया का महत्व

चूंकि एसटीईटी परीक्षा कई दिनों तक और अलग-अलग शिफ्टों में आयोजित की गई थी, इसलिए बोर्ड अंकों के निर्धारण के लिए नॉर्मलाइजेशन (Normalization) पद्धति का उपयोग कर रहा है।

अक्सर अलग-अलग शिफ्ट में प्रश्नपत्रों का कठिनाई स्तर अलग होता है। किसी शिफ्ट में पेपर आसान होता है तो किसी में कठिन। अभ्यर्थियों के साथ न्याय सुनिश्चित करने के लिए ‘Variation’ को संतुलित किया जाता है। यही कारण है कि कुछ अभ्यर्थियों के वास्तविक अंक और फाइनल स्कोरकार्ड के अंकों में थोड़ा अंतर देखने को मिल सकता है।

बिहार में शिक्षक भर्ती की अगली राह

STET 2025 का रिजल्ट जारी होने के बाद सफल अभ्यर्थियों के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा आयोजित की जाने वाली आगामी शिक्षक नियुक्ति परीक्षाओं (TRE) में ये अभ्यर्थी शामिल हो सकेंगे।

बिहार सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में रिक्त पड़े शिक्षकों के पदों को जल्द से जल्द भरा जाए। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों में शिक्षकों की भारी कमी है, जिसे इन योग्य उम्मीदवारों के माध्यम से पूरा किया जाएगा।

अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज

रिजल्ट के बाद सफल उम्मीदवारों को अपने निम्नलिखित दस्तावेज तैयार रखने चाहिए:

• STET एडमिट कार्ड की कॉपी।

• आधिकारिक स्कोरकार्ड का प्रिंट।

• शैक्षणिक प्रमाण पत्र (मैट्रिक से स्नातकोत्तर तक)।

• जाति और निवास प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)।

तकनीकी समस्या आने पर क्या करें?

अक्सर रिजल्ट जारी होने के तुरंत बाद भारी ट्रैफिक के कारण आधिकारिक वेबसाइट bsebstet.com क्रैश हो जाती है या धीमी चलने लगती है। ऐसी स्थिति में अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि:

• थोड़ा धैर्य रखें और पेज को बार-बार रिफ्रेश न करें।

• ब्राउज़र की ‘Cache’ मेमोरी क्लियर करके दोबारा प्रयास करें।

• इंटरनेट कनेक्शन की गति की जांच करें।

• यदि फिर भी समस्या आए, तो कुछ घंटों बाद लॉगिन करने का प्रयास करें।

बिहार STET 2025 का परिणाम केवल एक परीक्षा का नतीजा नहीं है, बल्कि बिहार के उन लाखों युवाओं के सपनों की उड़ान है जो शिक्षा के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं। बोर्ड की यह तत्परता दर्शाती है कि राज्य में शिक्षक बहाली की प्रक्रिया अब और तेज होने वाली है। सभी सफल अभ्यर्थियों को भविष्य के लिए अग्रिम शुभकामनाएं।

क्या आप इस बार के परीक्षा परिणाम और नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया से संतुष्ट हैं? अपनी राय हमें नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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ट्रंप का ‘ऑपरेशन वेनेजुएला’: मादुरो की गिरफ्तारी और लैटिन अमेरिका में सैन्य हस्तक्षेप से दुनिया दंग, जानें भारत पर इसका असर

ट्रंप

दुनिया के नक्शे पर एक ऐसी हलचल हुई है जिसने शीत युद्ध के दौर की यादें ताजा कर दी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने वेनेजुएला में एक गुप्त लेकिन बेहद आक्रामक सैन्य अभियान चलाकर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना ने न केवल दक्षिण अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया के भू-राजनीतिक समीकरणों को हिला कर रख दिया है। भारत समेत दुनिया के कई देशों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिससे वैश्विक तनाव चरम पर पहुंच गया है।

ट्रंप

वेनेजुएला संकट: लोकतंत्र की बहाली या संप्रभुता पर हमला?

बीते कुछ दिनों से वेनेजुएला की सीमाओं पर अमेरिकी सैन्य हलचल देखी जा रही थी, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि ट्रंप प्रशासन इतनी जल्दी और इतनी बड़ी कार्रवाई करेगा। अमेरिकी विशेष बलों (Special Forces) ने कराकस स्थित राष्ट्रपति भवन के पास एक ऑपरेशन को अंजाम दिया, जिसके बाद निकोलस मादुरो को हिरासत में लेने का दावा किया गया।

ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि मादुरो सरकार अवैध थी और वेनेजुएला के लोग लंबे समय से तानाशाही और आर्थिक कंगाली झेल रहे थे। अमेरिका इसे “लोकतंत्र की बहाली” कह रहा है, जबकि रूस, चीन और क्यूबा जैसे देशों ने इसे एक संप्रभु राष्ट्र की स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दिया है।

भारत का रुख: “गहरी चिंता” और कूटनीतिक संतुलन

भारत के विदेश मंत्रालय ने इस घटनाक्रम पर अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया में “गहरी चिंता” व्यक्त की है। नई दिल्ली में जारी एक बयान में कहा गया है कि किसी भी देश की आंतरिक समस्याओं का समाधान बाहरी सैन्य हस्तक्षेप के बजाय बातचीत और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से होना चाहिए।

भारत की चिंता के तीन मुख्य कारण हैं:

ऊर्जा सुरक्षा: वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल के भंडार वाले देशों में से एक है। भारत वहां से भारी मात्रा में तेल आयात करता रहा है। अस्थिरता का मतलब है तेल की कीमतों में उछाल।

अंतरराष्ट्रीय कानून: भारत हमेशा से देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की वकालत करता रहा है।

प्रवासी भारतीय: वेनेजुएला और पड़ोसी लैटिन अमेरिकी देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा अब सरकार की प्राथमिकता बन गई है।

ट्रंप प्रशासन की रणनीति और वैश्विक प्रतिक्रिया

डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति पद संभालने के बाद से ही वेनेजुएला के प्रति “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई थी। व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव के अनुसार, यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी और मानवाधिकारों के हनन को रोकने के लिए जरूरी थी।

रूस और चीन की कड़ी चेतावनी

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस कार्रवाई को “अंतरराष्ट्रीय डकैती” बताया है। वहीं चीन ने कहा है कि अमेरिका आग से खेल रहा है और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। जानकारों का मानना है कि यदि स्थिति नहीं संभली, तो यह एक नए छद्म युद्ध (Proxy War) में बदल सकती है।

वेनेजुएला की वर्तमान स्थिति और मानवीय संकट

वेनेजुएला पिछले एक दशक से अधिक समय से आर्थिक मंदी, अत्यधिक मुद्रास्फीति (Hyperinflation) और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। लाखों लोग देश छोड़कर जा चुके हैं। मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अब कराकस की सड़कों पर सेना और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें शुरू हो गई हैं।

क्या हैं जमीनी हालात?

सैन्य नियंत्रण: वेनेजुएला की सेना के एक बड़े हिस्से ने अभी तक अमेरिका समर्थित विपक्षी नेताओं का साथ नहीं दिया है, जिससे गृहयुद्ध का खतरा बना हुआ है।

आर्थिक प्रभाव: अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में आज सुबह 5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

कम्युनिकेशन ब्लैकआउट: वेनेजुएला के कई हिस्सों में इंटरनेट और बिजली की सप्लाई बाधित है।

भारत के लिए क्या हैं चुनौतियां?

भारत के लिए यह स्थिति “कांटों की सेज” जैसी है। एक तरफ अमेरिका के साथ मजबूत होते रणनीतिक संबंध हैं, तो दूसरी तरफ रूस के साथ पुरानी दोस्ती और ऊर्जा की जरूरतें।

तेल की कीमतें: यदि वेनेजुएला का संकट लंबा खिंचता है, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई पर दबाव बढ़ेगा।

गुटनिरपेक्षता की परीक्षा: क्या भारत खुलकर अमेरिका की आलोचना करेगा या मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा? दिल्ली में इस पर उच्च स्तरीय बैठकें जारी हैं।

ट्रंप

भू-राजनीतिक विशेषज्ञों की राय

विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि यह “डॉक्ट्रिन ऑफ इंटरवेंशन” का नया अध्याय है। ट्रंप प्रशासन यह संदेश देना चाहता है कि वह अपने पड़ोसी क्षेत्र (Western Hemisphere) में किसी भी विरोधी शक्ति को बर्दाश्त नहीं करेगा। हालांकि, यह कदम वैश्विक कूटनीति के लिए एक खतरनाक मिसाल पेश कर सकता है।

प्रमुख तिथियां और घटनाक्रम:

3 जनवरी 2026: वेनेजुएला सीमा पर अमेरिकी युद्धपोतों की तैनाती।

4 जनवरी 2026 की रात: कराकस में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ जैसी कार्रवाई।

5 जनवरी 2026: निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि।

वेनेजुएला में मादुरो की गिरफ्तारी ने 21वीं सदी की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। यह केवल एक देश के नेता को बदलने की बात नहीं है, बल्कि यह विश्व व्यवस्था (World Order) को दी गई चुनौती है। भारत की “संवाद और शांति” की अपील इस वक्त सबसे तार्किक लगती है, क्योंकि युद्ध या सैन्य कार्रवाई कभी भी स्थायी समाधान नहीं हो सकती।

आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में इस पर गर्मागर्म बहस होने की उम्मीद है। क्या अमेरिका वहां अपनी कार्रवाई को सही साबित कर पाएगा? या फिर वेनेजुएला एक और वियतनाम या लीबिया बनने की राह पर निकल चुका है? यह तो समय ही बताएगा।

क्या आपको लगता है कि किसी देश में लोकतंत्र की बहाली के लिए विदेशी सैन्य हस्तक्षेप जायज है? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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Sensex-Nifty में हाहाकार! साल 2026 के पहले हफ्ते में ही क्यों डूबे निवेशकों के पैसे? जानें क्या है असली वजह

Sensex

नए साल का जश्न अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि भारतीय शेयर बाजार के गलियारों से निवेशकों के लिए चिंता भरी खबर सामने आई है। साल 2026 के पहले हफ्ते के आखिरी कारोबारी सत्रों में Sensex (सेंसेक्स) और Nifty (निफ्टी) में हल्की लेकिन डराने वाली गिरावट दर्ज की गई। जहां निवेशक उम्मीद कर रहे थे कि बाजार नई ऊंचाइयों को छुएगा, वहीं वैश्विक अनिश्चितताओं ने इस रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। आइए जानते हैं क्या है Sensex-Nifty बाजार की इस गिरावट के पीछे की 5 बड़ी वजहें और क्या आपको अभी शेयर बेचना चाहिए या खरीदना?

बाजार में गिरावट के 5 प्रमुख कारण

वैश्विक बाजारों में मंदी की आहट: अमेरिकी फेडरल रिजर्व और यूरोपीय बाजारों से आने वाले संकेत सकारात्मक नहीं रहे हैं। ब्याज दरों में बदलाव की आशंका ने निवेशकों के मन में डर पैदा कर दिया है।

प्रॉफिट बुकिंग (Profit Booking): पिछले कुछ हफ्तों में कई शेयरों ने अच्छा रिटर्न दिया था। ऐसे में बड़े निवेशकों (FIIs) ने अपना मुनाफा वसूलना शुरू कर दिया है, जिससे बाजार नीचे आया।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भारतीय बाजार के सेंटिमेंट को प्रभावित किया है।

भू-राजनीतिक तनाव: दुनिया के कुछ हिस्सों में चल रहे तनाव ने सप्लाई चेन को लेकर फिर से चिंताएं बढ़ा दी हैं।

आईटी और बैंकिंग सेक्टर में सुस्ती: निफ्टी के भारी भरकम शेयर जैसे TCS, Infosys और HDFC Bank में कमजोरी ने सूचकांक को नीचे खींचने का काम किया।

Sensex

अगले हफ्ते क्या होगा?

बाजार के जानकारों का मानना है कि यह गिरावट केवल एक ‘हेल्दी करेक्शन’ हो सकती है। अगर सोमवार को बाजार फिर से संभलता है, तो हमें रिकवरी देखने को मिल सकती है। हालांकि, रिटेल निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे हड़बड़ी में कोई फैसला न लें।

विशेषज्ञ की सलाह: “बाजार में जब गिरावट हो, तब अच्छी कंपनियों के फंडामेंटल्स चेक करें। गिरावट हमेशा खरीदारी का मौका लेकर आती है, बशर्ते आप लंबी अवधि (Long Term) के लिए निवेश कर रहे हों।”

निवेशक अब क्या करें?

SIP चालू रखें: बाजार गिरने पर आपके SIP का फायदा बढ़ जाता है क्योंकि आपको कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं।

पेनी स्टॉक्स से बचें: इस अनिश्चितता के दौर में छोटे और कमजोर फंडामेंटल्स वाले शेयरों (Penny Stocks) से दूर रहें।

सेक्टर पर नजर: इस हफ्ते ऑटो और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर पर नजर रखें, वहां कुछ हलचल देखी जा सकती है।

Sensex

2026 की शुरुआत थोड़ी चुनौतीपूर्ण रही है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को देखते हुए यह उम्मीद है कि बाजार जल्द ही वापसी करेगा। अगर आप शेयर बाजार में नए हैं, तो हमेशा किसी वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।

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BSEB 12th Practical Admit Card 2026: बिहार बोर्ड इंटर प्रैक्टिकल का एडमिट कार्ड जारी, छात्र 9 जनवरी तक जरूर कर लें ये काम!

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बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा 2026 की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों का इंतज़ार खत्म कर दिया है। बोर्ड ने 12वीं कक्षा की प्रैक्टिकल परीक्षाओं (Practical Exams) के लिए एडमिट कार्ड आधिकारिक तौर पर जारी कर दिए हैं।

यदि आप भी इस साल इंटर की परीक्षा देने वाले हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। बोर्ड ने साफ कर दिया है कि बिना एडमिट कार्ड के किसी भी छात्र को लैब (Laboratory) में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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प्रैक्टिकल परीक्षा का पूरा शेड्यूल

बिहार बोर्ड द्वारा जारी आधिकारिक कैलेंडर के अनुसार, इंटर की प्रैक्टिकल परीक्षाएं निम्नलिखित तिथियों पर आयोजित की जाएंगी:

एडमिट कार्ड मिलने की अंतिम तिथि: 9 जनवरी, 2026 तक (अपने स्कूल/कॉलेज से)।

प्रैक्टिकल परीक्षा शुरू होने की तिथि: 10 जनवरी, 2026।

प्रैक्टिकल परीक्षा समाप्त होने की तिथि: 20 जनवरी, 2026।

एडमिट कार्ड कैसे प्राप्त करें?

बिहार बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि छात्र स्वयं ऑनलाइन एडमिट कार्ड डाउनलोड नहीं कर सकेंगे। इसकी प्रक्रिया नीचे दी गई है:

स्कूल/कॉलेज के माध्यम से: सभी प्लस टू स्कूलों और कॉलेजों के प्रधान (Principal) अपनी यूजर आईडी और पासवर्ड का उपयोग करके बोर्ड की वेबसाइट [Seniorsecondary.biharboardonline.com] से एडमिट कार्ड डाउनलोड करेंगे।

हस्ताक्षर और मुहर: डाउनलोड करने के बाद स्कूल प्रशासन एडमिट कार्ड पर अपने हस्ताक्षर और मुहर लगाएगा।

छात्रों को वितरण: छात्र अपने संबंधित स्कूल या कॉलेज जाकर 9 जनवरी तक अपना एडमिट कार्ड प्राप्त कर सकते हैं।

सावधान! बिना स्कूल की मुहर और प्रिंसिपल के हस्ताक्षर के एडमिट कार्ड मान्य नहीं माना जाएगा। इसलिए कार्ड लेते समय मुहर जरूर चेक करें।

छात्रों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश

समय पर पहुंचें: अपनी शिफ्ट के अनुसार कम से कम 30 मिनट पहले केंद्र पर पहुंचें।

जरूरी दस्तावेज: एडमिट कार्ड के साथ अपना स्कूल आईडी कार्ड या आधार कार्ड साथ रखें।

प्रैक्टिकल कॉपी: अपनी तैयार की गई प्रैक्टिकल फाइल/कॉपी ले जाना न भूलें, क्योंकि इस पर अंक (Marks) मिलते हैं।

कोविड/स्वास्थ्य प्रोटोकॉल: चूंकि जनवरी में ठंड और बीमारी का प्रकोप होता है, इसलिए मास्क और गर्म कपड़े पहनकर ही केंद्र पर जाएं।

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थ्योरी परीक्षा का क्या?

बता दें कि यह एडमिट कार्ड केवल प्रैक्टिकल विषयों (जैसे Physics, Chemistry, Biology, Geography आदि) के लिए है। मुख्य सैद्धांतिक (Theory) परीक्षा के लिए बोर्ड अलग से फाइनल एडमिट कार्ड जारी करेगा, जो जनवरी के अंतिम हफ्ते में आने की संभावना है।

बिहार बोर्ड की परीक्षाओं में प्रैक्टिकल के अंक आपकी ओवरऑल परसेंटेज को सुधारने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। इसलिए 9 जनवरी तक अपना एडमिट कार्ड सुरक्षित प्राप्त कर लें और 10 जनवरी से शुरू होने वाली परीक्षाओं के लिए अपनी फाइलें तैयार रखें।

क्या आपको एडमिट कार्ड लेने में कोई समस्या आ रही है? हमें कमेंट बॉक्स में बताएं या अपने स्कूल के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें।

ऐसी ही बिहार बोर्ड की हर छोटी-बड़ी अपडेट के लिए हमारे ब्लॉग को ‘Allow Notification’ करें और अपने दोस्तों के साथ इस पोस्ट को WhatsApp पर शेयर करें!

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America vs Venezuela: क्या छिड़ने वाली है जंग? वो 5 बड़ी वजहें जिसने दोनों देशों को बना दिया एक-दूसरे का ‘सबसे बड़ा दुश्मन’!

America

दुनिया अभी रूस-यूक्रेन और इजरायल-हमास युद्ध की आग से बाहर निकली भी नहीं थी कि अब अमेरिका महाद्वीप (Americas) में एक नया ‘युद्ध’ सुलगने लगा है। अमेरिका (USA) और वेनेजुएला (Venezuela) के बीच तनाव अब अपने चरम पर है। बात अब सिर्फ प्रतिबंधों (Sanctions) तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब धमकियों, प्लेन ज़ब्ती और ‘तख्तापलट’ (Regime Change) तक पहुँच गई है।

हाल ही में अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (Nicolas Maduro) की नाक के नीचे से उनका प्लेन ज़ब्त कर लिया, तो वहीं अमेरिका में ‘BOLIVAR Act’ पास करके वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था का गला घोंटने की तैयारी कर ली गई है।

आज के इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि आखिर क्यों दुनिया का सबसे ताकतवर देश (America) और दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाला देश (Venezuela) आमने-सामने हैं। क्या वाकई में वहां जंग होने वाली है?

America

BOLIVAR Act: अमेरिका का सबसे घातक वार

ताजा विवाद की सबसे बड़ी जड़ है अमेरिका द्वारा लाया गया BOLIVAR Act। हाल ही में अमेरिकी संसद (House of Representatives) ने इस बिल को पास किया है।

इस कानून का मकसद साफ है—वेनेजुएला की मादुरो सरकार को आर्थिक रूप से पूरी तरह खत्म कर देना।

इस एक्ट के तहत, अमेरिकी सरकार को किसी भी ऐसी कंपनी या व्यक्ति के साथ बिजनेस करने से रोका जाएगा जो मादुरो सरकार के साथ काम करती है। अमेरिका का कहना है कि मादुरो ने चुनाव (Elections) चोरी किए हैं और अपनी जनता पर अत्याचार कर रहे हैं, इसलिए उन्हें सत्ता में रहने का कोई हक नहीं है। वेनेजुएला ने इसे “अपराध” और “लूट” करार दिया है और कहा है कि अमेरिका उनके देश को गुलाम बनाना चाहता है।

Ya Casi Venezuela’ और Erik Prince की एंट्री

इस लड़ाई में एक नया और खतरनाक मोड़ तब आया जब Erik Prince (Blackwater के संस्थापक और पूर्व अमेरिकी नेवी सील) ने एंट्री ली।

  • सोशल मीडिया पर एक कैंपेन चल रहा है—”Ya Casi Venezuela” (वेनेजुएला लगभग आज़ाद है)।
  • खबरों के मुताबिक, Erik Prince वेनेजुएला में मादुरो की सरकार गिराने के लिए फंड (चंदा) इकट्ठा कर रहे हैं।
  • उनका मकसद एक प्राइवेट आर्मी या ऑपरेशन के जरिए मादुरो को सत्ता से हटाना है।
  • मादुरो सरकार ने इसे एक आतंकी साजिश बताया है और आरोप लगाया है कि अमेरिका भाड़े के सैनिकों (Mercenaries) का इस्तेमाल करके वेनेजुएला पर हमला करना चाहता है।

राष्ट्रपति का प्लेन ज़ब्त: अमेरिका की खुली चुनौती

  • शायद इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ होगा जब एक देश ने दूसरे देश के राष्ट्रपति का प्लेन ही ज़ब्त कर लिया हो।
  • कुछ समय पहले, अमेरिका ने डोमिनिकन रिपब्लिक (Dominican Republic) में खड़े निकोलस मादुरो के Dassault Falcon 900EX जेट को ज़ब्त कर लिया और उसे उड़ाकर फ्लोरिडा ले आया।
  • अमेरिका का दावा है कि यह प्लेन अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करके खरीदा गया था।

वेनेजुएला ने इसे “हवाई डकैती” (Piracy) कहा है।

यह घटना मादुरो के लिए एक बहुत बड़ी शर्मिंदगी और अमेरिका की तरफ से एक सीधा संदेश थी कि “हम तुम तक कहीं भी पहुँच सकते हैं।”

तेल (Oil) का खेल: असली लड़ाई खजाने की

राजनीति अपनी जगह है, लेकिन असली लड़ाई ‘काले सोने’ यानी कच्चे तेल की है। आपको जानकर हैरानी होगी कि वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार (Proven Oil Reserves) है—सऊदी अरब से भी ज्यादा!

अमेरिका चाहता है कि वेनेजुएला में एक ऐसी सरकार हो जो अमेरिका के पक्ष में हो, ताकि तेल की सप्लाई पर उनका प्रभाव बना रहे।

मादुरो ने अमेरिका को तेल देने के बजाय चीन (China), रूस (Russia) और ईरान (Iran) से हाथ मिला लिया है, जो अमेरिका को बिल्कुल पसंद नहीं है।

क्या अब युद्ध (War) होगा?

मौजूदा हालात बहुत नाजुक हैं। अमेरिका ने वेनेजुएला पर 900 से ज्यादा प्रतिबंध लगा रखे हैं। जवाब में मादुरो ने अपनी सेना को अलर्ट पर रखा है और किसी भी विदेशी घुसपैठ का जवाब देने की कसम खाई है।

हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिका सीधे अपनी सेना शायद ही भेजे, लेकिन वह Proxy War (विद्रोहियों को हथियार देकर लड़वाना) या आर्थिक नाकाबंदी के जरिए मादुरो को घुटने टेकने पर मजबूर कर सकता है।

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आखिर कौन जीतेगा और क्या होगा परिणाम

अमेरिका और वेनेजुएला की यह लड़ाई सिर्फ दो देशों की नहीं, बल्कि विचारधारा और संसाधनों की लड़ाई है। एक तरफ मादुरो हैं जो सत्ता छोड़ने को तैयार नहीं, और दूसरी तरफ अमेरिका है जो अपने पड़ोस में रूस-चीन का दखल बर्दाश्त नहीं कर सकता।

आने वाले दिन वेनेजुएला की जनता के लिए बहुत भारी पड़ने वाले हैं। देखना होगा कि क्या ‘BOLIVAR Act’ मादुरो को झुका पाता है या यह तनाव किसी बड़े युद्ध में बदल जाएगा।

दोस्तों, आपको क्या लगता है? क्या अमेरिका का दूसरे देशों की राजनीति में दखल देना सही है? कमेंट में अपनी राय जरूर लिखें!

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Patna High Court New Era : CJI सूर्यकांत ने बिहार को दी 302 करोड़ की सौगात, 7 मेगा प्रोजेक्ट्स से बदलेगी न्याय की सूरत

Patna High Court

3 जनवरी 2026 बिहार की न्यायिक व्यवस्था के इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने अपने दो-दिवसीय पटना दौरे के दौरान Patna High Court परिसर में 302.56 करोड़ रुपये की लागत वाली 7 बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का शिलान्यास किया। यह केवल ईंट और पत्थर की इमारतें नहीं, बल्कि बिहार के आम आदमी को तेज, पारदर्शी और आधुनिक न्याय दिलाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

किन 7 बड़े प्रोजेक्ट्स की रखी गई आधारशिला?

पटना हाई कोर्ट को वर्ल्ड-क्लास बनाने के लिए जिन सात परियोजनाओं का शिलान्यास हुआ है, उनमें शामिल हैं:

  • IT बिल्डिंग: अदालतों को पेपरलेस बनाने और डिजिटल सुनवाई को बढ़ावा देने के लिए एक अत्याधुनिक सेंटर।
  • ADR भवन और ऑडिटोरियम: आपसी सुलह (Mediation) और कानूनी चर्चाओं के लिए विशेष केंद्र।
  • प्रशासनिक ब्लॉक: हाई कोर्ट के कामकाज को व्यवस्थित करने के लिए ‘नर्वस सिस्टम’ की तरह काम करेगा।
  • मल्टी-लेवल कार पार्किंग: वकील और फरियादियों की पार्किंग समस्या का स्थाई समाधान।
  • अस्पताल भवन: हाई कोर्ट परिसर के भीतर ही चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता।
  • आवासीय परिसर: कोर्ट के कर्मचारियों के लिए आधुनिक निवास स्थान।
  • एडवोकेट जनरल ऑफिस एनेक्सी: सरकारी वकीलों के कामकाज के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर।

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“टेक्नोलॉजी अब विलासिता नहीं, संवैधानिक अधिकार है”

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए CJI सूर्यकांत ने तकनीक के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नई IT बिल्डिंग के बनने से पटना हाई कोर्ट “Paper-heavy” (कागजों के बोझ) से निकलकर “Data-informed” और “User-centric” बनेगा। उनके संबोधन की कुछ मुख्य बातें:

  • सभ्यता की याद: सीजेआई ने बिहार को भारत की सभ्यतागत स्मृति का केंद्र बताया।
  • बढ़ती मांग: उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी और जटिल होते मुकदमों के लिए न्यायपालिका का अपग्रेड होना अनिवार्य है।
  • मानवीय न्याय: अस्पताल भवन के महत्व पर उन्होंने कहा कि न्याय मशीनों द्वारा नहीं, इंसानों द्वारा दिया जाता है, इसलिए उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।

गया को भी मिली बड़ी सौगात

CJI ने केवल पटना ही नहीं, बल्कि गया के लिए भी एक बड़ी सुविधा का डिजिटल माध्यम से उद्घाटन किया। गयाजी में न्यायिक अधिकारियों के लिए एक नवनिर्मित जजेज गेस्ट हाउस को जनता की सेवा में समर्पित किया गया। इसके अलावा, बिहार ज्यूडिशियल एकेडमी के नए कैंपस का भी भूमि पूजन संपन्न हुआ।

Patna High Court

निष्कर्ष: बिहार के लिए क्यों है यह खास?

इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने के बाद पटना हाई कोर्ट उत्तर भारत के सबसे आधुनिक हाई कोर्ट्स में से एक होगा। 302 करोड़ रुपये का यह निवेश न केवल वकीलों और जजों की कार्यक्षमता बढ़ाएगा, बल्कि बिहार के आम नागरिक के लिए ‘तारीख पर तारीख’ के दौर को कम करने में भी मदद करेगा।

क्या आप इन बदलावों के बारे में और जानकारी चाहते हैं? हमें कमेंट्स में बताएं!

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Dharamshala Ragging Horror: 19 साल की पल्लवी की दर्दनाक मौत, 3 सीनियर छात्राओं पर आरोप! क्या बेटियां भी हो रही हैं इतनी क्रूर?

Ragging

कॉलेज को हम शिक्षा का मंदिर मानते हैं, जहाँ बच्चे अपने सुनहरे भविष्य के सपने लेकर जाते हैं। लेकिन जब यही मंदिर किसी मासूम के लिए “मौत का घर” बन जाए, तो सवाल उठना लाज़मी है। हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के खूबसूरत शहर धर्मशाला से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने हर माता-पिता का दिल दहला दिया है। Govt Degree College, Dharamshala की 19 वर्षीय छात्रा पल्लवी अब हमारे बीच नहीं रही।

आरोप है कि पल्लवी की मौत किसी बीमारी से नहीं, बल्कि Ragging के नाम पर दिए गए मानसिक और शारीरिक टॉर्चर की वजह से हुई है। और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उसे सताने वाले कोई लड़के नहीं, बल्कि उसकी ही अपनी सीनियर ‘दीदी’ (Senior Girls) थीं।

आज के इस ब्लॉग में हम जानेंगे इस रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले की पूरी सच्चाई और उठाएंगे वो सवाल जिससे समाज नजरें चुरा रहा है—क्या लड़कियां भी अब संवेदना खोकर क्रूर होती जा रही हैं?

Ragging

2 महीने का वो दर्दनाक सफर (The Incident)

पल्लवी, जो अपने परिवार की लाडली थी, बड़े अरमानों के साथ धर्मशाला के गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज में पढ़ने गई थी। लेकिन उसे नहीं पता था कि वहां उसका सामना शिक्षा से पहले खौफ से होगा।

रिपोर्ट्स और परिजनों के आरोपों के मुताबिक, पल्लवी के साथ कॉलेज में उसकी तीन सीनियर छात्राओं—हर्षिता (Harshita), आकृति (Aakriti) और कोमोलिका (Komolika)—ने रैगिंग की थी।

यह घटना करीब दो महीने पहले की बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि रैगिंग के दौरान पल्लवी को इतना गहरा सदमा (Trauma) लगा कि वह बीमार पड़ गई। दो महीने तक वह जिंदगी और मौत के बीच झूलती रही, लेकिन अंत में यह जंग हार गई और उसने दुनिया को अलविदा कह दिया।

रैगिंग या टॉर्चर? (Details of Allegations)

रैगिंग के नाम पर सिर्फ परिचय (Introduction) नहीं होता। कई बार यह ‘Intro’ कब ‘Insult’ और ‘Torture’ में बदल जाता है, पता ही नहीं चलता।

पल्लवी के मामले में भी आरोप है कि सीनियर छात्राओं ने उसे मानसिक रूप से बुरी तरह प्रताड़ित किया।

उसे डराया-धमकाया गया।

ऐसे काम करने पर मजबूर किया गया जिससे उसकी आत्म-सम्मान (Self-respect) को ठेस पहुंची।

इस घटना ने पल्लवी के दिमाग पर इतना गहरा असर डाला कि वह डिप्रेशन में चली गई और उसकी शारीरिक हालत भी बिगड़ती गई।

बेटियां क्यों बन रही हैं इतनी पत्थर-दिल? (A alarming trend)

आमतौर पर हम सुनते हैं कि “लड़के शैतान होते हैं” या रैगिंग में लड़कों का ग्रुप ज्यादा आक्रामक होता है। लेकिन पल्लवी का केस समाज के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ (Wake-up Call) है।

आरोपी छात्राओं—हर्षिता, आकृति और कोमोलिका—ने जिस तरह एक जूनियर लड़की के साथ व्यवहार किया, वह दिखाता है कि संवेदनहीनता (Insensitivity) का जेंडर से कोई लेना-देना नहीं है।

क्या ‘कूल’ दिखने की होड़ में लड़कियां अपनी ममता और दया भूल रही हैं?

क्या सीनियर होने का पावर लड़कियों को भी “बुली” (Bully) बना रहा है?

“Women Support Women” का नारा देने वाला समाज आज यह देखकर सन्न है कि एक लड़की ही दूसरी लड़की की मौत की वजह बन गई।

कानून और पुलिस की कार्रवाई (Police Action)

पल्लवी की मौत के बाद पुलिस प्रशासन भी हरकत में आ गया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

रैगिंग (Ragging) भारत में एक दंडनीय अपराध है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की गाइडलाइंस के मुताबिक:

अगर रैगिंग साबित होती है, तो आरोपी छात्रों को कॉलेज से निकाला जा सकता है।

उन्हें सरकारी नौकरी मिलने में भी दिक्कत आ सकती है।

IPC की गंभीर धाराओं के तहत जेल की सजा भी हो सकती है।

हिमाचल प्रदेश में वैसे भी रैगिंग के खिलाफ सख्त कानून हैं (आपको ‘अमन काचरू’ केस याद होगा), लेकिन इसके बावजूद ऐसी घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।

Ragging

कॉलेज प्रशासन पर उठते सवाल

इस पूरी घटना में कॉलेज प्रशासन (College Administration) भी सवालों के घेरे में है।

क्या कॉलेज में Anti-Ragging Committee सक्रिय थी?

जब दो महीने पहले घटना हुई, तो क्या किसी ने पल्लवी की सुध ली?

सीनियर छात्राओं पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

अगर समय रहते कॉलेज प्रशासन जाग जाता, तो शायद आज पल्लवी जिंदा होती।

सवाल?

19 साल की पल्लवी तो चली गई, लेकिन वह अपने पीछे कई सवाल छोड़ गई है। यह सिर्फ एक छात्र की मौत नहीं है, यह उस भरोसे की मौत है जो एक माता-पिता सिस्टम पर करते हैं।

हर्षिता, आकृति और कोमोलिका जैसे छात्रों को (अगर दोषी साबित हों) ऐसी सजा मिलनी चाहिए जो नजीर बने। साथ ही, हमें यह भी सोचना होगा कि हम अपनी बेटियों को कैसी शिक्षा दे रहे हैं—सिर्फ डिग्रियां या इंसानियत भी?

पल्लवी को इंसाफ दिलाने के लिए इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। रैगिंग ‘मजाक’ नहीं, ‘अपराध’ है!

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Nitish Kumar Launch Bihar Diary & Calendar 2026: ‘सात निश्चय-3’ के साथ विकसित बिहार का नया रोडमैप जारी!

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Patna, 2 January 2026: नए साल के अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने Bihar के विकास को एक नई ऊंचाई देने के लिए ‘Bihar Diary 2026’ और ‘राजकीय कैलेंडर 2026’ का विमोचन किया है। पटना स्थित ‘संकल्प’ कक्ष में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राज्य की जनता को नए साल की शुभकामनाएं देते हुए बिहार की नई विकास नीति ‘सात निश्चय-3.0’ की झलक पेश की।

यह कैलेंडर सिर्फ तारीखें बताने वाला पन्ना नहीं है, बल्कि यह 2025 से 2030 तक के ‘विकसित बिहार’ के संकल्प का एक विजुअल दस्तावेज है।

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क्या है इस साल के कैलेंडर में खास?

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (IPRD) द्वारा प्रकाशित इस कैलेंडर के हर पन्ने पर बिहार की बदलती तस्वीर और भविष्य के लक्ष्यों को दर्शाया गया है।

थीम: इस बार के कैलेंडर की मुख्य थीम ‘सात निश्चय-3’ है।

विजुअल्स: कैलेंडर के 12 पन्नों पर राज्य की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की शानदार तस्वीरें लगाई गई हैं।

अंतिम पृष्ठ: कैलेंडर के आखिरी पन्ने पर बिहार के ‘सुपर फूड मखाना’ को जगह दी गई है, जो अब बिहार की वैश्विक पहचान बन चुका है।

सात निश्चय-3.0: विकसित बिहार के 7 स्तंभ

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सात निश्चय-1 और 2 की सफलता के बाद अब ‘सात निश्चय-3’ के जरिए बिहार को देश के सबसे विकसित राज्यों की श्रेणी में लाया जाएगा। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

दोगुना रोजगार – दोगुनी आय: युवाओं के लिए 1 करोड़ नौकरियों और स्वरोजगार के अवसरों का लक्ष्य।

समृद्ध उद्योग – सशक्त बिहार: MSME और निजी निवेश को बढ़ावा देना।

खेती से खुशहाली: चौथे कृषि रोडमैप के जरिए किसानों की आय बढ़ाना।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना।

सुलभ स्वास्थ्य सेवा: गांवों तक बेहतर मेडिकल सुविधाएं और ‘नो प्राइवेट प्रैक्टिस’ नीति का कड़ाई से पालन।

आधुनिक बुनियादी ढांचा: नए एक्सप्रेस-वे, मेट्रो विस्तार और स्मार्ट शहरों का निर्माण।

सबका सम्मान – आसान जीवन: तकनीक और नवाचार के जरिए सुशासन (Good Governance)।

युवाओं और महिलाओं के लिए खास क्या है?

इस नए रोडमैप में जाति आधारित गणना 2023 में पहचाने गए 94 लाख गरीब परिवारों को प्राथमिकता दी जाएगी। महिलाओं के लिए ‘मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना’ के तहत आर्थिक मदद को और सरल बनाया गया है। साथ ही, फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए बिहार में नए फिल्म सिटी के निर्माण का विज़न भी इस डायरी में साझा किया गया है।

नीतीश सरकार का यह कैलेंडर 2026 यह संदेश देता है कि सरकार अब ‘सर्वांगीण विकास’ (All-round Development) की ओर कदम बढ़ा चुकी है। चाहे वो मखाना का निर्यात हो या आईटी पॉलिसी 2024, बिहार अब रुकने वाला नहीं है।

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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न):

• बिहार डायरी 2026 कहाँ से मिलेगी? यह सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के काउंटरों और प्रमुख सरकारी कार्यालयों में वितरण के लिए उपलब्ध होगी।

• सात निश्चय-3 कब तक चलेगा? यह योजना 2025 से 2030 तक के लिए तैयार की गई है।

क्या आप सात निश्चय-3 के तहत आने वाली नई नौकरियों की लिस्ट देखना चाहते हैं? मुझे बताएं, मैं पूरी जानकारी दे दूँगा।

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Bihar PACS Membership Campaign 2026: अब पंचायत स्तर पर मिलेंगी 25+ सरकारी सेवाएं, जानें कैसे बनें सदस्य!

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बिहार के ग्रामीण विकास और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में नीतीश सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। 2 जनवरी 2026 से राज्य के हर पंचायत में पैक्स (PACS) सदस्यता सह जागरूकता अभियान की शुरुआत होने जा रही है। अब पैक्स केवल खाद और बीज तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि ये गांव के “मिनी सचिवालय” और “सर्विस सेंटर” के रूप में काम करेंगे।

पैक्स अब सिर्फ एक समिति नहीं, बल्कि ‘मल्टी-सर्विस सेंटर’ है

सहकारिता मंत्री प्रमोद कुमार के अनुसार, बिहार में पैक्स को कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के रूप में विकसित किया गया है। अब राज्य के किसान और ग्रामीण निवासी एक ही छत के नीचे 25 से अधिक डिजिटल और बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।

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पैक्स में मिलने वाली प्रमुख 25 सेवाएं:

पैक्स अब हाई-टेक हो चुके हैं। यहाँ मिलने वाली प्रमुख सेवाओं की सूची इस प्रकार है:

• बैंकिंग सेवाएं: आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (AePS) के जरिए पैसे निकालना और जमा करना।

• डिजिटल इंडिया सेवाएं: पैन कार्ड, आधार अपडेट, और बिजली बिल का भुगतान।

• कृषि इनपुट: खाद, उन्नत बीज और कीटनाशकों की उपलब्धता।

• जन औषधि केंद्र: सस्ती और जेनेरिक दवाओं की बिक्री (302 पैक्स को मंजूरी)।

• अन्न भंडारण: ‘विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना’ के तहत गोदाम की सुविधा।

• प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र: मिट्टी जांच और आधुनिक खेती का प्रशिक्षण।

• पेट्रोल और डीजल डीलरशिप: चुनिंदा पैक्स पर अब पेट्रोल पंप भी खुल रहे हैं।

• एलपीजी वितरण: ग्रामीण इलाकों में गैस सिलेंडर की आसान पहुंच।

• सब्जी आउटलेट: ‘तरकारी’ ब्रांड के तहत ताजी सब्जियों का विपणन।

• बीमा और पेंशन: फसल बीमा (PMFBY) और ई-श्रम पंजीकरण जैसी सुविधाएं।

2 जनवरी से सदस्यता अभियान: आप कैसे जुड़ सकते हैं?

बिहार में वर्तमान में लगभग 1.38 करोड़ पैक्स सदस्य हैं। सरकार का लक्ष्य इस संख्या को और बढ़ाना है ताकि सहकारी लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

• योग्यता: आवेदन करने वाला व्यक्ति उसी पंचायत का स्थाई निवासी होना चाहिए।

• आयु सीमा: आवेदक की उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।

• प्रक्रिया: आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से सदस्य बन सकते हैं। 2 जनवरी से आपके पंचायत मुख्यालय पर विशेष कैंप लगाए जाएंगे।

किसानों को क्या होगा सीधा फायदा?

• MSP पर धान खरीद: इस सीजन में अब तक 9.53 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है, जिसका भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में 48 घंटे के भीतर किया जा रहा है।

• गोल्ड लोन की सुविधा: बिहार स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के माध्यम से अब पैक्स के जरिए गोल्ड लोन भी दिया जा रहा है।

• बिचौलियों से मुक्ति: डिजिटल होने के कारण अब खाद-बीज की कालाबाजारी पर रोक लगेगी।

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बदल रहा है ग्रामीण बिहार

पैक्स का डिजिटलीकरण और 25 सेवाओं का एकीकरण बिहार के गांवों के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है। यदि आप भी एक किसान हैं या ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं, तो 2 जनवरी के अभियान का हिस्सा जरूर बनें और पैक्स के सदस्य बनकर इन सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं।

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बिहार में नौकरियों की महा-बहार: 5,500 लाइब्रेरियन और 7,000 विशेष शिक्षकों की बहाली पर लगी मुहर

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बिहार के शिक्षा विभाग ने नए साल की दहलीज पर राज्य के बेरोजगार युवाओं को एक बड़ी सौगात दी है। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट किया कि नीतीश सरकार राज्य के शैक्षणिक ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्री जी ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि बिहार में जल्द ही 5,500 लाइब्रेरियन और लगभग 7,279 विशेष शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इस घोषणा के बाद उन लाखों अभ्यर्थियों के चेहरे पर खुशी लौट आई है, जो लंबे समय से रिक्तियों का इंतजार कर रहे थे।

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लाइब्रेरियन बहाली: 14 वर्षों का लंबा इंतजार होगा खत्म

बिहार के पुस्तकालयों की स्थिति सुधारने के लिए सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। आपको बता दें कि राज्य में साल 2010-11 के बाद से लाइब्रेरियन की कोई बड़ी बहाली नहीं हुई है। शिक्षा मंत्री ने बताया कि विभागीय स्तर पर रोस्टर क्लीयरेंस का काम लगभग पूरा कर लिया गया है। इन 5,500 पदों पर नियुक्ति के लिए पात्रता परीक्षा (Librarian Eligibility Test) का आयोजन किया जा सकता है, जिसके बाद BPSC के माध्यम से अंतिम चयन होगा। यह कदम न केवल पुस्तकालयों को पुनर्जीवित करेगा, बल्कि डिग्री धारक युवाओं के करियर को भी नई दिशा देगा।

दिव्यांग बच्चों के लिए 7,000 विशेष शिक्षकों की नियुक्ति

समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) को धरातल पर उतारने के लिए बिहार सरकार अब विशेष बच्चों की पढ़ाई पर जोर दे रही है। राज्य के विभिन्न सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे दिव्यांग बच्चों की जरूरतों को पूरा करने के लिए 7,279 विशेष शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। इन शिक्षकों का मुख्य कार्य दिव्यांग छात्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं को समझना और उन्हें सामान्य छात्रों के साथ मुख्यधारा में लाना होगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि इन पदों के लिए अधियाचना जल्द ही आयोग को भेजी जाएगी, ताकि समय रहते स्कूलों में शिक्षकों की कमी को पूरा किया जा सके।

BPSC TRE-4 और शिक्षा विभाग का आगामी रोडमैप

शिक्षक बहाली के क्षेत्र में बिहार पहले से ही देश में मिसाल पेश कर रहा है। इसी सिलसिले को जारी रखते हुए शिक्षा मंत्री ने BPSC TRE-4 (चौथे चरण की शिक्षक नियुक्ति) का भी जिक्र किया। उन्होंने संकेत दिया कि जनवरी 2026 के मध्य तक करीब 25,000 से अधिक रिक्तियों की सूची आयोग को सौंप दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले कुछ महीनों में शिक्षा विभाग के अंदर खाली पड़े सभी तकनीकी और गैर-तकनीकी पदों को भर लिया जाए, जिससे राज्य की शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता में क्रांतिकारी बदलाव आए।

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अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव और तैयारी की रणनीति

इन बड़े पदों पर होने वाली बहाली को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगिता काफी कठिन होने वाली है। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक नोटिफिकेशन का इंतजार न करें, बल्कि अपने संबंधित विषयों की तैयारी अभी से शुरू कर दें। विशेष रूप से लाइब्रेरियन पद के लिए तकनीकी ज्ञान और सामान्य अध्ययन (General Studies) पर पकड़ बनाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, उम्मीदवारों को अपने दस्तावेजों, जैसे शैक्षणिक प्रमाण पत्र और आरक्षण संबंधी कागजों को अपडेट रखने की सलाह दी गई है ताकि आवेदन के समय किसी प्रकार की तकनीकी दिक्कत न हो।

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राजगीर के होटल में ‘गंदा धंधा’: आर्केस्ट्रा के नाम पर युवतियों से जबरन देह व्यापार, पुलिस की छापेमारी में 15 लड़कियां मुक्त

राजगीर

बिहार के पर्यटन स्थल राजगीर से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ के एक नामी होटल में चल रहे सेक्स रैकेट का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई में पुलिस ने 15 युवतियों को नरक से आजाद कराया है और मौके से 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

कैसे हुआ इस बड़े रैकेट का खुलासा?

नालंदा पुलिस को पिछले कुछ समय से सूचना मिल रही थी कि राजगीर थाना क्षेत्र के धुर्वा मोड़ स्थित ‘आदित्या रेसिडेंसी’ (Aditya Residency) होटल में संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं। सूचना की पुष्टि होने के बाद डीएसपी सुनील कुमार सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया और होटल पर अचानक दबिश दी गई।

पुलिस जब होटल के कमरों में दाखिल हुई, तो वहां का नजारा देख दंग रह गई। होटल के अलग-अलग कमरों में युवतियों को रखा गया था, जिनसे जबरन गलत काम कराया जा रहा था।

राजगीर

UP और बंगाल से बुलाई गई थीं लड़कियां

मुक्त कराई गई 15 युवतियों में से अधिकांश उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की रहने वाली हैं। पूछताछ में युवतियों ने जो खुलासे किए, वे चौंकाने वाले हैं:

आर्केस्ट्रा का झांसा: लड़कियों को अच्छी कमाई और आर्केस्ट्रा में डांस के नाम पर राजगीर बुलाया गया था।

मारपीट और धमकी: युवतियों का आरोप है कि होटल संचालक उन्हें डरा-धमकाकर और उनके साथ मारपीट कर जबरन देह व्यापार के धंधे में धकेलता था।

बंधक जैसा व्यवहार: उन्हें होटल से बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी और उन पर कड़ी नजर रखी जाती थी।

पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारियां

इस छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। हालांकि, होटल संचालक समेत 6 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। मुख्य आरोपी (होटल संचालक) फिलहाल फरार बताया जा रहा है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।

पुलिस ने क्या जब्त किया?

• कई आपत्तिजनक सामान।

• रजिस्टर और मोबाइल फोन (जिससे ग्राहकों से संपर्क साधा जाता था)।

• नकदी।

इलाके के होटलों में मचा हड़कंप

राजगीर जैसे पवित्र और पर्यटन स्थल पर इस तरह के अनैतिक कार्यों के खुलासे के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई के बाद राजगीर के अन्य होटल संचालकों में भी हड़कंप मच गया है। पुलिस प्रशासन ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि किसी भी होटल में ऐसी गतिविधियां पाई गईं, तो होटल को सील करने के साथ-साथ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

राजगीर

आगे क्या होगा?

पुलिस ने सभी 15 युवतियों का मेडिकल परीक्षण करवा लिया है। अब उन्हें कोर्ट में पेश कर उनके बयान दर्ज कराए जाएंगे, जिसके बाद उन्हें उनके परिजनों को सौंपा जाएगा या सुरक्षा गृह भेजा जाएगा।

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Bihar NEET PG Round 2 Revised Allotment 2025: BCECEB ने जारी किया संशोधित रिजल्ट, छात्र 29 दिसंबर तक पूरा करें नामांकन

NEET PG

बिहार में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे उन तमाम पीजी अभ्यर्थियों के लिए राहत भरी खबर है जो पिछले कुछ दिनों से असमंजस की स्थिति में थे। बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (BCECEB) ने NEET PG राउंड 2 के लिए संशोधित (Revised) सीट अलॉटमेंट परिणाम आधिकारिक तौर पर जारी कर दिया है। यह कदम विभाग द्वारा पहले जारी किए गए परिणाम में पाई गई तकनीकी खामियों को दूर करने के बाद उठाया गया है। अब राज्य के मेडिकल कॉलेजों में नामांकन की प्रक्रिया नए सिरे से तय किए गए नियमों और सुधारों के साथ शुरू हो गई है।

तकनीकी त्रुटियों के कारण पिछला परिणाम हुआ था रद्द

आपको बता दें कि BCECEB ने इससे पहले जो आवंटन सूची जारी की थी, उसमें सॉफ्टवेयर और डेटा प्रोसेसिंग से जुड़ी कुछ गंभीर तकनीकी त्रुटियां सामने आई थीं। छात्रों की ओर से उठाई गई चिंताओं और सिस्टम की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बोर्ड ने पिछले रिजल्ट को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया था। संशोधित सूची जारी होने के बाद अब उन सभी विसंगतियों को दूर कर लिया गया है, जिससे मेधावी छात्रों को उनकी रैंक के आधार पर सही कॉलेज और स्ट्रीम आवंटित की जा सके।

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अलॉटमेंट लेटर डाउनलोड करने की समय सीमा और प्रक्रिया

संशोधित परिणाम जारी होने के बाद छात्रों के पास अपना अलॉटमेंट लेटर डाउनलोड करने के लिए बहुत ही सीमित समय बचा है। आधिकारिक सूचना के अनुसार, अभ्यर्थी 29 दिसंबर 2025 तक बोर्ड की वेबसाइट से अपना प्रोविजनल अलॉटमेंट लेटर डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए उम्मीदवारों को अपने PGMAC आईडी और पासवर्ड का उपयोग करना होगा। विशेषज्ञों का सुझाव है कि छात्र अंतिम समय में वेबसाइट पर होने वाले भारी ट्रैफिक या सर्वर की समस्या से बचने के लिए जल्द से जल्द अपना लेटर प्राप्त कर लें।

नामांकन और रिपोर्टिंग के लिए अंतिम तिथि का रखें ध्यान

सीट आवंटन प्राप्त करने के बाद अगली सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया संबंधित मेडिकल कॉलेज में उपस्थिति दर्ज कराना और दस्तावेजों का सत्यापन (Document Verification) कराना है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि 28 और 29 दिसंबर 2025 को ही रिपोर्टिंग और नामांकन की प्रक्रिया संपन्न की जाएगी। यदि कोई अभ्यर्थी निर्धारित समय सीमा के भीतर आवंटित कॉलेज में नहीं पहुंचता है, तो उसका नामांकन रद्द कर दिया जाएगा। इसके साथ ही, देरी होने की स्थिति में उम्मीदवार की सिक्योरिटी मनी भी जब्त की जा सकती है, इसलिए समय का पालन करना अनिवार्य है।

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दस्तावेजों की तैयारी और छात्रों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश

नामांकन के समय छात्रों को अपने सभी शैक्षणिक और व्यक्तिगत दस्तावेजों के ओरिजिनल कॉपी के साथ-साथ उनके दो सेट फोटोकॉपी भी साथ रखने चाहिए। इसमें NEET PG का एडमिट कार्ड, रैंक कार्ड, MBBS की मार्कशीट, इंटर्नशिप पूर्ण होने का प्रमाण पत्र और आरक्षण संबंधी कागजात मुख्य रूप से शामिल हैं। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे अपना अलॉटमेंट लेटर डाउनलोड करने के बाद उस पर दिए गए सभी निर्देशों को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि उसमें कॉलेज की विशेष रिपोर्टिंग शर्तों का उल्लेख होता है।

क्या आपको अपना पसंदीदा कॉलेज मिल गया है? या फिर आप मॉप-अप राउंड (Mop-up Round) का इंतजार कर रहे हैं? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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ISRO की ऐतिहासिक उड़ान: LVM3-M6 से BlueBird Block-2 की लॉन्चिंग के 5 सबसे अद्भुत दृश्य

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ISRO ने फिर रचा इतिहास! देखिए LVM3-M6 के ऑन-बोर्ड कैमरे से BlueBird Block-2 सैटेलाइट्स की लॉन्चिंग का पूरा सफर। रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो और मिशन की पूरी जानकारी हिंदी में। क्या आपने कभी सोचा है कि एक रॉकेट की नज़र से दुनिया कैसी दिखती है? जब टनों वजन वाला ‘बाहुबली’ रॉकेट धरती का सीना चीरकर आसमान की ओर बढ़ता है, तो वो नजारा कैसा होता है?

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक बार फिर दुनिया को चौंका दिया है। हाल ही में श्रीहरिकोटा से लॉन्च किए गए LVM3-M6 मिशन ने न केवल BlueBird Block-2 सैटेलाइट्स को सफलतापूर्वक उनकी कक्षा में स्थापित किया, बल्कि इस सफर का जो वीडियो जारी किया है, वह इंटरनेट पर वायरल हो रहा है।

इस ऑन-बोर्ड कैमरा फुटेज में लिफ्ट-ऑफ से लेकर सैटेलाइट इंजेक्शन तक का पूरा सफर कैद है। आज के इस ब्लॉग में हम आपको इस मिशन की हर बारीक डिटेल और उस वीडियो के रोमांचक पलों के बारे में बताएंगे।

ISRO

1. लिफ्ट-ऑफ: धरती छोड़ने का रोमांच

जैसे ही काउंटडाउन खत्म हुआ, भारत के सबसे शक्तिशाली रॉकेट LVM3 (Launch Vehicle Mark-3) ने अपनी पूरी ताकत के साथ उड़ान भरी।

ऑन-बोर्ड कैमरे ने दिखाया कि कैसे रॉकेट के S200 सॉलिड बूस्टर्स में आग लगी और वह धुएं के गुबार को पीछे छोड़ता हुआ ऊपर उठा। वीडियो में आप साफ देख सकते हैं कि लॉन्च पैड धीरे-धीरे छोटा होता जा रहा है और रॉकेट बादलों को चीरता हुआ नीले आसमान की तरफ बढ़ रहा है। यह दृश्य किसी हॉलीवुड फिल्म के सीन से कम नहीं था।

2. रॉकेट के नजरिए से अंतरिक्ष का सफर

इस मिशन की सबसे खास बात वह वीडियो है जो रॉकेट पर लगे कैमरों ने रिकॉर्ड किया। इसे देखते हुए ऐसा लगता है जैसे हम खुद रॉकेट पर सवार हैं।

S200 बूस्टर्स का अलग होना: लॉन्च के कुछ मिनटों बाद, दो विशाल सॉलिड बूस्टर्स रॉकेट से अलग होते हुए दिखाई देते हैं। यह दृश्य भौतिकी (Physics) और इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन नमूना है।

पृथ्वी का कर्व (Curve): जैसे-जैसे रॉकेट ऊंचाई पर पहुंचता है, कैमरे में नीली पृथ्वी का गोलाकार रूप दिखाई देने लगता है। अंतरिक्ष के काले सन्नाटे और चमकदार पृथ्वी का यह कंट्रास्ट मंत्रमुग्ध कर देने वाला है।

3. BlueBird Block-2: क्या है यह खास पेलोड?

इस मिशन का मुख्य उद्देश्य BlueBird Block-2 सैटेलाइट्स को लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित करना था। लेकिन ये सैटेलाइट्स इतने खास क्यों हैं?

ये सैटेलाइट्स AST SpaceMobile द्वारा बनाए गए हैं। इनका मकसद अंतरिक्ष से सीधे आपके मोबाइल फोन पर 5G कनेक्टिविटी पहुंचाना है। यानी भविष्य में नेटवर्क की समस्या खत्म हो सकती है, चाहे आप पहाड़ों पर हों या समंदर के बीच। LVM3-M6 ने इन भारी-भरकम सैटेलाइट्स को मक्खन की तरह अंतरिक्ष में छोड़ दिया।

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4. पे-लोड फेयरिंग का खुलना: जैसे खिलता हुआ फूल

वीडियो का सबसे रोमांचक हिस्सा वह है जब रॉकेट वातावरण से बाहर निकलता है और पेलोड फेयरिंग (Heat Shield) अलग होती है।

ऑन-बोर्ड विजुअल्स में यह किसी फूल के खिलने जैसा लगता है। जैसे ही फेयरिंग हटती है, सैटेलाइट्स पहली बार अंतरिक्ष के संपर्क में आते हैं। यह प्रक्रिया इतनी स्मूथ थी कि इसे देखकर ISRO के वैज्ञानिकों की सटीकता पर गर्व होता है।

5. ISRO और NSIL की एक और बड़ी कामयाबी

यह मिशन न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के तहत एक कमर्शियल मिशन था। LVM3, जिसे प्यार से “Fat Boy” भी कहा जाता है, ने साबित कर दिया है कि वह भारी विदेशी सैटेलाइट्स को भी आसानी से लॉन्च कर सकता है।

इस लॉन्च की सफलता ने ग्लोबल स्पेस मार्केट में भारत की स्थिति को और मजबूत कर दिया है। एलन मस्क की SpaceX जैसी कंपनियों के बीच ISRO का यह सस्ता और विश्वसनीय विकल्प पूरी दुनिया को आकर्षित कर रहा है।

6. वीडियो ने क्यों मचाई धूम?

आमतौर पर हम लॉन्च को जमीन से देखते हैं, लेकिन रॉकेट के साथ लगे कैमरे का व्यू (POV) एक अलग ही अनुभव देता है।

इंजन की लपटें।

हवा का दबाव।

शून्य गुरुत्वाकर्षण (Zero Gravity) में सैटेलाइट का तैरना।

यह सब कुछ उस वीडियो में इतनी हाई डेफिनेशन (HD) क्वालिटी में है कि इसे बार-बार देखने का मन करता है। यह वीडियो विज्ञान के छात्रों और स्पेस लवर्स के लिए किसी खजाने से कम नहीं है।

ISRO का LVM3-M6 मिशन सिर्फ एक सैटेलाइट लॉन्च नहीं था, बल्कि यह भारत की बढ़ती तकनीकी शक्ति का प्रदर्शन था। BlueBird Block-2 के सफल प्रक्षेपण से संचार के क्षेत्र में क्रांति आने वाली है।

अगर आपने अभी तक वह ऑन-बोर्ड कैमरा वीडियो नहीं देखा है, तो तुरंत ISRO के सोशल मीडिया हैंडल पर जाएं

और उस जादुई पल का अनुभव करें।

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आपका अगला कदम:

क्या आपको अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि है? हमें कमेंट में बताएं कि ISRO का कौन सा मिशन आपका सबसे पसंदीदा रहा है – चंद्रयान-3 या यह LVM3-M6? इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें!

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Bihar Minority Residential School: नीतीश सरकार का बड़ा तोहफा! अब अल्पसंख्यक छात्रों के लिए पढ़ाई और रहना बिल्कुल मुफ्त, जानें कैसे करें आवेदन

नीतीश

बिहार के अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। राज्य सरकार ने किशनगंज और दरभंगा में अत्याधुनिक अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय (Minority Residential Schools) खोलने का ऐलान किया है। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ छात्रों को न केवल विश्वस्तरीय शिक्षा मिलेगी, बल्कि उनका रहना और खाना भी पूरी तरह निःशुल्क (Free) होगा।

अगर आप या आपके परिचित इस श्रेणी में आते हैं, तो यह खबर आपके भविष्य को बदल सकती है। आइए जानते हैं इस योजना की पूरी बारीकी और आवेदन की प्रक्रिया।

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किन छात्रों को मिलेगा इसका लाभ?

बिहार सरकार की इस योजना के तहत निम्नलिखित अल्पसंख्यक समुदायों के छात्र आवेदन कर सकते हैं:

• मुस्लिम

• सिख

• ईसाई

• बौद्ध

• जैन

• पारसी

प्रमुख विशेषताएं और सुविधाएं

ये विद्यालय केवल स्कूल नहीं, बल्कि छात्रों के सर्वांगीण विकास के केंद्र होंगे। यहाँ मिलने वाली प्रमुख सुविधाएं इस प्रकार हैं:

पूरी तरह मुफ्त शिक्षा: कक्षा 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई का कोई शुल्क नहीं।

आवासीय सुविधा: रहने के लिए सुरक्षित छात्रावास (Hostel) और पौष्टिक भोजन।

स्टाइपेंड और सामग्री: छात्रों को ड्रेस, जूते-मौजे, किताबें और दैनिक उपयोग की वस्तुएं (तेल, साबुन, तौलिया आदि) भी मुफ्त दी जाएंगी।

आधुनिक लैब और कोचिंग: स्कूलों में साइंस और आर्ट्स संकाय के लिए आधुनिक प्रयोगशालाएं और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष कोचिंग की व्यवस्था होगी।

नामांकन (Admission) के लिए पात्रता और शर्तें

शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आवेदन करने से पहले इन मानदंडों को ध्यान से पढ़ें:

कक्षाएं: फिलहाल नामांकन केवल कक्षा 9वीं और कक्षा 11वीं (कला और विज्ञान संकाय) के लिए हो रहे हैं।

आयु सीमा: 9वीं कक्षा के लिए अधिकतम आयु 16 वर्ष और 11वीं के लिए 18 वर्ष निर्धारित है।

आय सीमा: छात्र के परिवार की वार्षिक आय 6 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।

आरक्षण का लाभ: * 75% सीटें ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए आरक्षित हैं।

• 50% सीटें छात्राओं (बालिकाओं) के लिए सुरक्षित रखी गई हैं।

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आवेदन कैसे करें? (How to Apply)

आवेदन की प्रक्रिया को बेहद सरल रखा गया है ताकि सुदूर ग्रामीण इलाकों के बच्चे भी इसका लाभ उठा सकें:

ऑनलाइन आवेदन: छात्र अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.minoritywelfare.bih.nic.in पर जाकर फॉर्म भर सकते हैं।

ऑफलाइन आवेदन: फॉर्म डाउनलोड करके या संबंधित जिला अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय (Kishanganj/Darbhanga) से प्राप्त कर जमा किया जा सकता है।

महत्वपूर्ण तिथि: आवेदन करने की अंतिम तिथि 30 दिसंबर 2025 है।

चयन प्रक्रिया: नामांकन ‘मेधा सूची’ (Merit List) और प्रवेश परीक्षा के आधार पर किया जाएगा।

नीतीश सरकार का यह कदम बिहार में शिक्षा के स्तर को सुधारने और अल्पसंख्यक समुदाय के आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। अगर आप योग्य हैं, तो बिना देर किए 30 दिसंबर से पहले आवेदन जरूर करें।

क्या आप चाहते हैं कि हम आवेदन फॉर्म भरने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका बताएं? नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें!

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Bihar Police School : अब सिपाही का बेटा भी बनेगा अफसर! बिहार की सभी 40 पुलिस लाइनों में खुलेंगे नवोदय जैसे आवासीय विद्यालय

Bihar Police School

Bihar Police School : बिहार में सुशासन और पुलिस कल्याण की दिशा में नीतीश सरकार ने एक ऐसा क्रांतिकारी कदम उठाया है, जो आने वाले समय में पुलिस महकमे की तस्वीर बदल देगा। राज्य के उपमुख्यमंत्री और गृह विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे सम्राट चौधरी ने हाल ही में घोषणा की है कि अब बिहार की सभी 40 पुलिस लाइनों में नवोदय विद्यालय की तर्ज पर अत्याधुनिक आवासीय विद्यालय (Residential Schools) खोले जाएंगे। यह निर्णय उन हजारों पुलिसकर्मियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जो दिन-रात कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपने परिवार और बच्चों की खुशियों का त्याग करते हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में नया ‘पुलिस मॉडल’ और इसकी खासियतें

इस योजना की सबसे खास बात इसकी शैक्षणिक गुणवत्ता है। ये स्कूल केवल नाम के लिए नहीं, बल्कि नवोदय और सैनिक स्कूलों के पैटर्न पर विकसित किए जाएंगे। इन विद्यालयों में आधुनिक कक्षाएं, सुसज्जित लैबोरेट्रीज, विशाल लाइब्रेरी और खेल के मैदान जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं होंगी। सरकार का उद्देश्य है कि पुलिसकर्मियों के बच्चों को वैसी ही उच्च स्तरीय शिक्षा मिले जो बड़े शहरों के महंगे निजी स्कूलों में मिलती है। शुरुआत में इन स्कूलों को आठवीं कक्षा तक संचालित किया जाएगा, जिसे बाद में बढ़ाकर सीबीएसई (CBSE) मान्यता प्राप्त इंटरमीडिएट स्तर तक ले जाने की योजना है।

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तबादले की चिंता से मुक्ति और पढ़ाई में निरंतरता

दरअसल, पुलिस की नौकरी में बार-बार होने वाले तबादले (Transfers) बच्चों की शिक्षा में सबसे बड़ी बाधा बनते हैं। जब एक सिपाही या अधिकारी का स्थानांतरण किसी दूर-दराज के जिले में होता है, तो सबसे पहले उनके बच्चों का स्कूल और पढ़ाई का माहौल बदल जाता है। सम्राट चौधरी का यह विजन इसी समस्या का स्थाई समाधान है। अब पुलिस लाइन के भीतर ही स्कूल होने से, ट्रांसफर की स्थिति में भी बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होगी, क्योंकि उन्हें एक ही जिले से दूसरे जिले के ‘पुलिस स्कूल’ में आसानी से शिफ्ट किया जा सकेगा। इससे पुलिसकर्मी मानसिक रूप से निश्चिंत होकर अपनी ड्यूटी पर ध्यान दे पाएंगे।

आरक्षण और नामांकन का पारदर्शी ढांचा

इन स्कूलों में नामांकन की प्रक्रिया को भी बहुत संतुलित रखा गया है। प्रस्तावित योजना के अनुसार, इन स्कूलों में 50 प्रतिशत सीटें पुलिसकर्मियों के बच्चों के लिए आरक्षित होंगी, जिसमें शहीद जवानों, सेवानिवृत्त कर्मियों और वर्तमान में कार्यरत जवानों के बच्चों को प्राथमिकता दी जाएगी। शेष 50 प्रतिशत सीटों पर सामान्य नागरिकों के बच्चों का नामांकन होगा, जिससे समाज के सभी वर्गों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिल सकेगा। यह समावेशी दृष्टिकोण न केवल पुलिस परिवारों को लाभान्वित करेगा बल्कि स्थानीय शिक्षा के स्तर को भी ऊपर उठाएगा।

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भोजन और स्वास्थ्य: एक संपूर्ण कल्याणकारी पैकेज

शिक्षा के साथ-साथ उपमुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों के बुनियादी सुख-सुविधाओं और स्वास्थ्य पर भी विशेष जोर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनवरी 2026 तक राज्य की सभी पुलिस लाइनों में ‘जीविका दीदी की रसोई’ की शुरुआत कर दी जाएगी, ताकि जवानों को मेस में घर जैसा शुद्ध और पौष्टिक भोजन मिल सके। इसके साथ ही, पुलिसकर्मियों के लिए मेडिकल इंश्योरेंस को पूरी तरह ‘कैशलेस’ करने की तैयारी भी अंतिम चरण में है। इन समन्वित प्रयासों से स्पष्ट है कि बिहार सरकार अब पुलिस बल के केवल काम पर ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के भविष्य और स्वास्थ्य पर भी निवेश कर रही है।

बिहार पुलिस के मनोबल में होगी ऐतिहासिक वृद्धि

झारखंड के अलग होने के बाद बिहार में पुलिसकर्मियों के बच्चों के लिए ऐसे विशेष स्कूलों की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी। हजारीबाग का प्रसिद्ध विद्यालय झारखंड में चले जाने के बाद से यह मांग उठ रही थी। अब इस नई पहल से न केवल बिहार पुलिस का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि पुलिस महकमे में काम करने वाली महिला कर्मियों के लिए भी बच्चों की परवरिश और नौकरी के बीच तालमेल बिठाना आसान हो जाएगा। यह कदम बिहार में ‘पुलिसिंग विद केयर’ की नई मिसाल पेश करेगा।

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Bihar Weather Update : बिहार में ‘कोल्ड डे’ का तांडव! 24 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी, अगले 48 घंटों में और गिरेगा पारा

Bihar Weather Update

Bihar Weather Update : बिहार में कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। पिछले कुछ दिनों से सूरज की लुका-छिपी और बर्फीली पछुआ हवाओं के कारण पूरा प्रदेश ठिठुर रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) ने बिहार के मौसम को लेकर एक ताज़ा और गंभीर चेतावनी जारी की है।

24 जिलों में ‘कोल्ड डे’ का ऑरेंज अलर्ट

मौसम विभाग ने बिहार के 24 जिलों के लिए ‘कोल्ड डे’ (Cold Day) और ‘घने कोहरे’ का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 2 से 3 दिनों में न्यूनतम तापमान में  गिरावट दर्ज की जा सकती है।

इन जिलों में रेड अलर्ट और ऑरेंज अलर्ट की स्थिति:

रेड अलर्ट (अत्यधिक घना कोहरा): गया, औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर, बक्सर, भोजपुर और अरवल में अगले कुछ घंटों के लिए बहुत घने कोहरे की चेतावनी दी गई है। यहाँ दृश्यता (Visibility) 50 मीटर से भी कम रह सकती है।

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ऑरेंज अलर्ट (कोल्ड डे): पटना, मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, सीवान, सारण, गोपालगंज, सीतामढ़ी, शिवहर, दरभंगा, मधुबनी समेत 24 जिलों में शीत दिवस की स्थिति बनी रहेगी।

क्यों बढ़ रही है कनकनी?

हिमालयी क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी और वहां से आ रही ठंडी पछुआ हवाओं ने बिहार के मैदानी इलाकों में ठिठुरन बढ़ा दी है। नमी का स्तर ऊँचा होने और धूप नहीं निकलने के कारण दिन का अधिकतम तापमान भी सामान्य से काफी नीचे (लगभग 5°C से 6°C कम) चल रहा है, जिसे तकनीकी भाषा में ‘कोल्ड डे’ कहा जाता है।

ठंड का असर: स्कूल बंद और ट्रेनों की रफ्तार थमी

  • शिक्षा: भीषण ठंड को देखते हुए पटना, मुजफ्फरपुर, शिवहर और गया समेत कई जिलों के जिलाधिकारियों ने स्कूलों को 26 दिसंबर तक बंद करने का आदेश दिया है।
  • परिवहन: घने कोहरे के कारण पटना से गुजरने वाली 30 से अधिक ट्रेनें अपने निर्धारित समय से 5 से 10 घंटे की देरी से चल रही हैं। वहीं, विमानों की लैंडिंग में भी विजिबिलिटी कम होने की वजह से परेशानी आ रही है।

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गया रहा सबसे ठंडा शहर

पिछले 24 घंटों में गया बिहार का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहाँ न्यूनतम तापमान 8°C के आसपास दर्ज किया गया। वहीं, राजगीर में तापमान 6.6°C तक गिर गया है, जो कि शिमला के मौजूदा तापमान के बराबर है।

सावधानी और बचाव के उपाय:

• अनावश्यक बाहर न निकलें: विशेषकर बच्चे और बुजुर्ग सुबह और रात की ठंड से बचें।

• हीटर और अलाव: अलाव जलाते समय वेंटिलेशन का ध्यान रखें ताकि कार्बन मोनोऑक्साइड का खतरा न हो।

• वाहन चलाते समय सावधानी: कोहरे में फॉग लाइट का उपयोग करें और वाहन की गति धीमी रखें।

बिहार में फिलहाल ठंड से राहत मिलने के आसार नहीं हैं। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से 25 दिसंबर के बाद मौसम में और बदलाव आ सकता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें और सुरक्षित रहें।

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Railway Fare Hike : अब ट्रेन सफर हुआ महंगा! नॉन-AC पर ₹10 और AC पर सरचार्ज, लेकिन सुविधाओं का क्या? जानिए 5 कड़वे सच

Railway

Indian Railway ने किराए में बढ़ोतरी कर दी है। नॉन-AC में 10 रुपये और AC में 2 पैसे/किमी की बढ़ोतरी हुई है। लेकिन क्या सुविधाएं सुधरीं? पढ़िए वेटिंग लिस्ट, लेट लतीफी और जनरल डिब्बों के हाल पर यह विस्तृत रिपोर्ट। भारतीय रेल, जिसे देश की ‘लाइफलाइन’ कहा जाता है, अब आम आदमी की जेब पर और भारी पड़ने वाली है। ताज़ा खबरों के मुताबिक, रेलवे ने किराए में चुपके से बढ़ोतरी कर दी है। एक तरफ जहां प्लेटफॉर्म टिकट के दाम पहले ही आसमान छू रहे थे, वहीं अब यात्रा का मूल किराया भी बढ़ा दिया गया है।

सरकार और रेलवे बोर्ड का तर्क हमेशा की तरह “बेहतर सुविधाओं और विकास” का है। लेकिन जमीनी हकीकत पर नजर डालें, तो यात्री आज भी उन्हीं पुरानी समस्याओं से जूझ रहे हैं जिनसे वे दस साल पहले जूझ रहे थे। आइए जानते हैं क्या है नया किराया और क्या है वो कड़वी सच्चाई जिसे हर यात्री झेल रहा है।

समझिए गणित: आपकी जेब से अब कितना एक्स्ट्रा जाएगा?

Railway के नए नोटिफिकेशन के अनुसार, किराए में दो तरह से बढ़ोतरी की गई है:

नॉन-AC (General & Sleeper) : अब नॉन-एसी क्लास के हर टिकट पर 10 रुपये का सीधा सरचार्ज या बढ़ा हुआ किराया जोड़ा गया है। सुनने में 10 रुपये कम लग सकते हैं, लेकिन एक गरीब मजदूर या डेली पैसेंजर के लिए महीने का हिसाब लगाने पर यह एक बड़ी रकम बन जाती है।

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AC क्लास : वातानुकूलित श्रेणियों (AC 3-Tier, 2-Tier, 1st Class) के लिए किराए में 2 पैसे प्रति किलोमीटर की बढ़ोतरी की गई है। यानी अगर आप 1000 किलोमीटर का सफर कर रहे हैं, तो आपकी टिकट का दाम अपने आप बढ़ जाएगा।

ट्रेनें कम, भीड़ ज्यादा: जनरल डिब्बों का ‘नरक’ जैसा हाल

किराया बढ़ने पर सबसे पहला सवाल यही उठता है कि क्या ट्रेनें बढ़ाई गईं? जवाब है – नहीं। आज भी लोकल पैसेंजर ट्रेनों (Passenger Trains) और जनरल बोगियों की हालत किसी से छिपी नहीं है। जनरल डिब्बों में पैर रखने की जगह नहीं होती। लोग टॉयलेट के पास बैठकर या दरवाजों पर लटककर जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। पैसेंजर ट्रेनों की संख्या घटाई जा रही है और ‘स्पेशल’ के नाम पर ज्यादा किराया वसूला जा रहा है, लेकिन सुविधाएं वही ‘भेड़-बकरी’ वाली हैं।

‘Confirm Ticket’ एक सपना: वेटिंग लिस्ट का मायाजाल

आप 4 महीने पहले टिकट बुक करें या 4 दिन पहले, Waiting List का झंझट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। त्योहारों की बात तो छोड़िये, सामान्य दिनों में भी कन्फर्म सीट मिलना लॉटरी जीतने जैसा हो गया है। तत्काल (Tatkal) का टिकट बुक करना किसी युद्ध लड़ने से कम नहीं है। चंद सेकंड में सारी सीटें गायब हो जाती हैं। हजारों यात्री वेटिंग टिकट लेकर प्लेटफॉर्म पर खड़े रहते हैं, और टीटीई के पास सीट नहीं होती। तो फिर किराया बढ़ाने का औचित्य क्या है जब सीट ही न मिले?

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ट्रेन लेट, तो हर्जाना कौन देगा?

Railway के नियमों के मुताबिक अगर आप टिकट कैंसिल करते हैं, तो कैंसिलेशन चार्ज (Cancellation Charge) तुरंत काट लिया जाता है। लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू देखिये:

अगर ट्रेन 10-12 घंटे लेट हो जाए, तो यात्री को क्या मिलता है? कुछ नहीं। सर्दियों में कोहरे के नाम पर और गर्मियों में मेंटेनेंस के नाम पर ट्रेनें घंटों नहीं, बल्कि दिनों तक लेट हो रही हैं। यात्री का समय बर्बाद होता है, उसकी कनेक्टिंग ट्रेन छूट जाती है, लेकिन रेलवे की तरफ से कोई जवाबदेही नहीं होती। पैसा पूरा लिया जाता है, लेकिन समय की कोई गारंटी नहीं।

कैंसिलेशन के नाम पर ‘लूट’

सबसे ज्यादा गुस्सा यात्रियों को तब आता है जब मजबूरी में टिकट कैंसिल करना पड़ता है। अगर ट्रेन कैंसिल हो जाए या डाइवर्ट हो जाए, तो रिफंड (Refund) लेने के लिए भी पापड़ बेलने पड़ते हैं। और अगर यात्री अपनी मर्जी से टिकट कैंसिल कराए, तो अच्छी-खासी रकम ‘क्लर्कल चार्ज’ और जीएसटी के नाम पर काट ली जाती है। वेटिंग टिकट, जो कन्फर्म ही नहीं हुआ, उसे कैंसिल कराने पर भी पैसा कटता है। यह सिस्टम आम आदमी की समझ से परे है।

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विकास चाहिए, लेकिन सुविधा भी

हम आधुनिकीकरण या ‘वंदे भारत’ जैसी नई ट्रेनों के खिलाफ नहीं हैं। देश को आगे बढ़ना चाहिए। लेकिन रेलवे का असली आधार वो करोड़ों यात्री हैं जो स्लीपर और जनरल क्लास में सफर करते हैं।

सिर्फ किराया बढ़ा देने से विकास नहीं होता। जब तक हर यात्री को सम्मानजनक तरीके से सीट नहीं मिलती, ट्रेनें समय पर नहीं चलतीं और वेटिंग लिस्ट का डर खत्म नहीं होता, तब तक यह बढ़ा हुआ किराया जनता को ‘जुर्माना’ ही लगेगा।

आपकी राय: क्या आप इस किराए बढ़ोतरी से सहमत हैं? या आपको लगता है कि रेलवे को पहले अपनी सुस्त व्यवस्था सुधारनी चाहिए? कमेंट बॉक्स में अपनी भड़ास जरूर निकालें!

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बिहार राशन कार्ड e-KYC 2025 : 30 दिसंबर तक है आखिरी मौका, वरना बंद हो जाएगा मुफ्त राशन! जानें पूरी प्रक्रिया

राशन कार्ड

बिहार न्यूज़: अगर आप बिहार के निवासी हैं और राशन कार्ड का लाभ उठा रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। बिहार सरकार ने सभी राशन कार्ड धारकों के लिए e-KYC करवाना अनिवार्य कर दिया है। इसके लिए सरकार ने 30 दिसंबर 2025 की अंतिम तिथि (Deadline) तय की है। अगर आपने इस तारीख तक अपना ई-केवाईसी नहीं करवाया, तो न केवल आपका राशन कार्ड रद्द हो सकता है, बल्कि आपको मिलने वाला मुफ्त अनाज भी हमेशा के लिए बंद हो जाएगा।

e-KYC करवाना क्यों जरूरी है?

बिहार सरकार के ‘खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग’ का मकसद राशन वितरण प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाना है।

  • फर्जीवाड़ा रुकेगा: बहुत से ऐसे नाम हैं जो या तो बिहार से बाहर चले गए हैं या जिनकी मृत्यु हो चुकी है, फिर भी उनके नाम पर राशन उठाया जा रहा है।
  • सही लाभार्थी की पहचान: ई-केवाईसी के जरिए सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि अनाज सिर्फ उन्हीं को मिले जो उसके हकदार हैं।

राशन कार्ड

इन दस्तावेजों (Documents) को साथ रखें:

आपको किसी लंबी-चौड़ी फाइल की जरूरत नहीं है, बस ये 2 चीजें साथ ले जाएं:

  • आधार कार्ड (परिवार के सभी सदस्यों का असली कार्ड)।
  • राशन कार्ड नंबर या राशन कार्ड की फोटोकॉपी।

स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस: e-KYC कैसे करें?

सरकार ने लोगों की सुविधा के लिए दो बड़े रास्ते दिए हैं:

  1. राशन डीलर (PDS Shop) के पास जाएं

आप अपने नजदीकी राशन दुकानदार के पास जाएं जहां से आप राशन लेते हैं।

  • परिवार के सभी सदस्यों का वहां जाना जरूरी है क्योंकि हर किसी का बायोमेट्रिक (Biometric) लिया जाएगा।
  • डीलर की ई-पोस (e-POS) मशीन पर अपना अंगूठा लगाएं।
  • वेरिफिकेशन सफल होने पर आपका ई-केवाईसी तुरंत अपडेट हो जाएगा।
  1. गांवों और शहरों में लगने वाले विशेष कैंप

30 दिसंबर की डेडलाइन को देखते हुए, बिहार सरकार ने जगह-जगह विशेष कैंप लगाए हैं।

  • अगर आपका डीलर ई-केवाईसी नहीं कर पा रहा है, तो आप अपने पंचायत भवन या ब्लॉक ऑफिस में जाकर इन कैंप्स का लाभ उठा सकते हैं।
  • यह सुविधा बिल्कुल निशुल्क (Free) है। कोई भी डीलर इसके लिए पैसे मांगे तो उसकी शिकायत करें।

राशन कार्ड

अगर e-KYC नहीं करवाया तो क्या होगा?

जो लोग इस प्रक्रिया को हल्के में ले रहे हैं, उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है:

  • नाम कटना: राशन कार्ड में जिस सदस्य का ई-केवाईसी नहीं होगा, उसका नाम लिस्ट से हमेशा के लिए हटा दिया जाएगा।
  • अनाज में कटौती: मान लीजिए परिवार में 5 सदस्य हैं और सिर्फ 3 का ई-केवाईसी हुआ, तो आगे से सिर्फ 3 लोगों का ही अनाज मिलेगा।
  • सरकारी सुविधाओं से वंचित: बिहार में राशन कार्ड ही आयुष्मान कार्ड (5 लाख तक का मुफ्त इलाज) का आधार है। राशन कार्ड रद्द होने पर यह सुविधा भी बंद हो जाएगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ):

प्रश्न: क्या बच्चों का ई-केवाईसी भी जरूरी है?

उत्तर: हां, 5 साल से ऊपर के हर उस बच्चे का ई-केवाईसी जरूरी है जिसका नाम कार्ड में दर्ज है।

प्रश्न: क्या हम घर बैठे ऑनलाइन ई-केवाईसी कर सकते हैं?

उत्तर: नहीं, बिहार में फिंगरप्रिंट देना जरूरी है, इसलिए आपको राशन दुकान या कैंप पर जाना ही होगा।

प्रश्न: स्टेटस कैसे चेक करें?

उत्तर: आप प्ले स्टोर से ‘Mera Ration’ App डाउनलोड करके चेक कर सकते हैं कि आपका आधार लिंक है या नहीं।

इस जानकारी को अपने बिहार के दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ व्हाट्सएप पर शेयर करें, ताकि किसी का भी मुफ्त अनाज बंद न हो।

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UPSC ESE 2025 Topper: बहराइच के मोहम्मद शाकिब ने किया देश में टॉप, पिछली बार मिली थी 15वीं रैंक

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बहराइच, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश की धरती ने एक बार फिर देश को एक हीरा दिया है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा (ESE) 2025 के नतीजों में बहराइच के मोहम्मद शाकिब (Mohammad Shaquib) ने सिविल इंजीनियरिंग स्ट्रीम में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल कर इतिहास रच दिया है।

शाकिब की यह सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो एक बार सफल होने के बाद रुक जाते हैं। शाकिब ने साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य सबसे ऊंचा हो, तो छोटी सफलताओं से संतुष्ट नहीं होना चाहिए|

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पिछली बार 15वीं रैंक, इस बार बने ‘किंग’

मोहम्मद शाकिब की यह यात्रा बेहद दिलचस्प है। उन्होंने ESE 2024 की परीक्षा में भी सफलता हासिल की थी, जहां उन्होंने 15वीं रैंक प्राप्त की थी। वर्तमान में वह रक्षा सेवा (Defense Service) के लिए प्रशिक्षण ले रहे थे। लेकिन उनका सपना भारतीय रेलवे (Railway Service) में जाने का था। इसी सपने को पूरा करने और अपनी रैंक सुधारने के लिए उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और इस बार सीधे टॉप पर अपनी जगह बनाई।

कौन हैं मोहम्मद शाकिब?

शाकिब उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के सालारगंज मोहल्ले के निवासी हैं। उनके पिता शकील अहमद मेकरानी नगर के एक प्रतिष्ठित व्यापारी (राइस और दाल मिलर) हैं।

प्रारंभिक शिक्षा: शाकिब ने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई बहराइच से ही पूरी की।

उच्च शिक्षा: उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT पटना से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक (B.Tech) किया है।

अन्य उपलब्धियां: शाकिब ने GATE 2024 परीक्षा में भी देश भर में 6वीं रैंक हासिल की थी।

सफलता का मंत्र: सोशल मीडिया से दूरी और निरंतर अभ्यास

शाकिब ने अपनी सफलता का श्रेय निरंतर अभ्यास और अनुशासन को दिया है। उनकी तैयारी की कुछ मुख्य बातें ये रहीं:

सोशल मीडिया से ब्रेक: तैयारी के दौरान उन्होंने करीब 18 महीनों तक इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से पूरी तरह दूरी बनाए रखी।

रिवीजन और टेस्ट सीरीज: उन्होंने अपनी तैयारी के लिए ऑनलाइन कोचिंग और मेंस टेस्ट सीरीज का सहारा लिया। साथ ही, पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों (PYQs) को अपनी सफलता की नींव बनाया।

पिता का प्रोत्साहन: शाकिब के पिता के अनुसार, शुरुआत में शाकिब पढ़ाई में सामान्य थे, लेकिन निरंतर प्रोत्साहन और उनके खुद के जुनून ने उन्हें देश का टॉपर बना दिया।

UPSC

घर और शहर में जश्न का माहौल

शाकिब की इस उपलब्धि की खबर मिलते ही बहराइच में उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। शाकिब के भाई भी डॉक्टर (MBBS) की पढ़ाई कर रहे हैं और बहन भी चिकित्सा क्षेत्र (BUMS) में हैं। पूरा परिवार शिक्षा और मेहनत को अपनी प्राथमिकता मानता है।

“मेरा लक्ष्य रेलवे सेवा में जाना था, इसलिए मैंने अपनी रैंक सुधारने के लिए फिर से प्रयास किया। मेहनत और सही दिशा में की गई तैयारी कभी बेकार नहीं जाती।” — मोहम्मद शाकिब

मोहम्मद शाकिब की सफलता यह संदेश देती है कि “संतुष्टि ही प्रगति की दुश्मन है।” यदि आप अपनी वर्तमान स्थिति से बेहतर करने की क्षमता रखते हैं, तो प्रयास करना कभी न छोड़ें। उत्तर प्रदेश के इस लाल ने न केवल अपने माता-पिता बल्कि पूरे राज्य का नाम पूरे भारत में ऊंचा किया है।

क्या आप भी UPSC ESE की तैयारी कर रहे हैं? मोहम्मद शाकिब की इस सफलता पर अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।

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सऊदी अरब ने पूरी दुनिया में करा दी पाकिस्तान की  बेइज्जती ; 24,000 नागरिकों को धक्के मारकर निकाला बाहर!

सऊदी अरब

सऊदी अरब से इस वक्त की एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। सऊदी सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए 24,000 पाकिस्तानी नागरिकों को अपने देश से वापस पाकिस्तान भेज (Deport) दिया है। इन सभी पर आरोप है कि ये लोग सऊदी अरब में ‘भीख’ मांग कर अपना गुजारा कर रहे थे और वीजा नियमों का सरेआम उल्लंघन कर रहे थे।

यह जानकारी किसी और ने नहीं, बल्कि खुद पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) के प्रमुख रिफ्फत मुख्तार ने संसद की एक स्थायी समिति के सामने दी है।

सऊदी अरब

क्या है पूरा मामला?

पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली और बेरोजगारी अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी छवि को नुकसान पहुंचा रही है। FIA की रिपोर्ट के मुताबिक:

वीजा का दुरुपयोग: डिपोर्ट किए गए ज्यादातर पाकिस्तानी नागरिक उमराह (Umrah) या टूरिस्ट वीजा पर सऊदी अरब गए थे।

पवित्र स्थलों पर भीख: ये लोग मक्का और मदीना जैसे पवित्र स्थलों के आसपास सक्रिय थे, जहाँ ये जायरीनों (तीर्थयात्रियों) से भीख मांगा करते थे।

सुनियोजित नेटवर्क: जांच में यह भी सामने आया है कि इसके पीछे कई ऐसे एजेंट सक्रिय हैं जो लोगों को ‘कमाई’ का लालच देकर विदेश भेजते हैं और फिर उन्हें भीख मांगने के काम में धकेल देते हैं।

सऊदी अरब का सख्त रुख

सऊदी अरब अपनी कानून व्यवस्था और ‘विजन 2030’ के तहत देश की छवि को लेकर बेहद सख्त है। सार्वजनिक स्थानों पर भीख मांगना सऊदी कानून के तहत एक गंभीर अपराध है। सऊदी प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि पवित्र स्थलों की गरिमा बनाए रखने के लिए किसी भी तरह की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पाकिस्तान की वैश्विक साख पर संकट

यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान को इस तरह की शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है। पिछले साल भी सऊदी अधिकारियों ने शिकायत की थी कि जेलों में बंद जेबकतरों और भिखारियों में से एक बड़ी संख्या पाकिस्तानियों की है।

FIA प्रमुख रिफ्फत मुख्तार का बयान:

“सऊदी अरब ने अब तक 24,000 ऐसे लोगों को वापस भेजा है जो भीख मांगने की गतिविधियों में शामिल थे। यह संख्या चिंताजनक है और हम उन एजेंटों पर नकेल कस रहे हैं जो इस तरह के अवैध कार्यों को बढ़ावा दे रहे हैं।”

सऊदी अरब

इस कार्रवाई का पाकिस्तान पर क्या असर होगा?

वीजा नियमों में सख्ती: भविष्य में आम पाकिस्तानी नागरिकों के लिए सऊदी अरब का उमराह या टूरिस्ट वीजा मिलना और कठिन हो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय बदनामी: खाड़ी देशों (Gulf Countries) में पाकिस्तानी कामगारों की छवि धूमिल हो रही है, जिससे रोजगार के अवसरों पर सीधा असर पड़ सकता है।

आर्थिक दबाव: विदेशों से आने वाला रेमिटेंस (Remittance) पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ऐसी घटनाओं से वैध रोजगार पाने वालों को भी संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है।

सऊदी अरब का यह कदम उन सभी के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो धार्मिक यात्रा के नाम पर अवैध गतिविधियों में शामिल होते हैं। पाकिस्तान के लिए यह समय आत्ममंथन का है कि आखिर क्यों उसके नागरिक विदेशी धरती पर इस तरह के हालात का सामना करने को मजबूर हैं।

आपकी क्या राय है? क्या पाकिस्तान सरकार को इन एजेंटों के खिलाफ और सख्त कार्रवाई करनी चाहिए? हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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PM विकसित भारत रोजगार योजना का सच : युवाओं के लिए 5 बड़े मौके, जानें आवेदन का सही तरीका और लाभ

PM विकसित भारत रोजगार योजना

PM विकसित भारत रोजगार योजना : भारत सरकार ने साल 2047 तक देश को ‘विकसित भारत’ (Developed Nation) बनाने का बड़ा सपना देखा है। इस सपने की नींव देश के युवा हैं। अगर युवा सशक्त होंगे, तभी देश विकसित होगा। यही कारण है कि केंद्र सरकार का पूरा जोर रोजगार और स्वरोजगार (Self-Employment) के अवसर पैदा करने पर है। आजकल सोशल मीडिया और खबरों में ‘प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना’ की खूब चर्चा है। हर नौजवान यह जानना चाहता है कि आखिर यह योजना क्या है और इससे उसे नौकरी या लोन कैसे मिलेगा।

अगर आप भी अपने करियर को लेकर चिंतित हैं या अपना खुद का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए बहुत मददगार साबित होगा। आज हम आपको इस सरकारी मुहिम की सच्चाई और इसके तहत मिलने वाले सुनहरे मौकों के बारे में विस्तार से बताएंगे।

क्या है ‘विकसित भारत रोजगार योजना’ का सच?

सबसे पहले इस कन्फ्यूजन को दूर करना जरूरी है। ‘विकसित भारत रोजगार योजना’ नाम से कोई एक सिंगल फॉर्म या नई स्कीम नहीं आई है, जिसे भरकर आपको तुरंत नौकरी मिल जाएगी। बल्कि, यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत चलाया जा रहा एक महाअभियान (Mission Mode) है।

आसान भाषा में समझें तो, सरकार ने अपनी पहले से चल रही कई सुपरहिट रोजगार योजनाओं को ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ जोड़ दिया है। इसका मकसद है कि युवाओं को नौकरी मांगने वाले की जगह नौकरी देने वाला (Job Creator) बनाया जाए। सरकार एक छत के नीचे रोजगार के कई रास्ते खोल रही है।

PM विकसित भारत रोजगार योजना

युवाओं के लिए 5 बड़े सुनहरे मौके (Key Opportunities)

‘विकसित भारत’ के विजन को पूरा करने के लिए सरकार इन 5 प्रमुख योजनाओं पर सबसे ज्यादा फोकस कर रही है, जो आपके लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती हैं:

1. पीएम विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Yojana)

यह योजना हाथ के कारीगरों और शिल्पकारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अगर आप बढ़ई, लोहार, सुनार, राजमिस्त्री, दर्जी या ऐसे किसी भी पारंपरिक काम से जुड़े हैं, तो यह योजना आपके लिए है।

लाभ : इसमें आपको फ्री ट्रेनिंग मिलती है, ट्रेनिंग के दौरान रोज 500 रुपये का स्टाइपेंड मिलता है। टूलकिट खरीदने के लिए 15,000 रुपये और अपना काम बढ़ाने के लिए पहले 1 लाख और फिर 2 लाख रुपये तक का सस्ता लोन (बिना गारंटी) मिलता है।

2. प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)

अगर आपका सपना कोई छोटी फैक्ट्री लगाने या सर्विस सेक्टर में बिजनेस शुरू करने का है, तो PMEGP सबसे बेस्ट है। ‘विकसित भारत’ मिशन में इस पर बहुत जोर दिया जा रहा है।

लाभ : इस योजना में 50 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है। सबसे बड़ी बात, सरकार आपको शहर और गांव के हिसाब से 25% से लेकर 35% तक की भारी सब्सिडी (छूट) देती है।

PM विकसित भारत रोजगार योजना

3. प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PM Mudra Yojana)

छोटे दुकानदारों और व्यापारियों के लिए यह योजना बहुत लोकप्रिय है। अगर आपको अपना मौजूदा बिजनेस बढ़ाना है या नया शुरू करना है, तो पैसे की चिंता छोड़ दें।

लाभ : इसमें तीन कैटेगरी (शिशु, किशोर, तरुण) में 50 हजार से लेकर 10 लाख रुपये तक का लोन बहुत ही आसान कागजी कार्रवाई पर मिल जाता है।

4. स्किल इंडिया और पीएम कौशल विकास योजना (PMKVY)

विकसित भारत के लिए हुनरमंद युवाओं की जरूरत है। अगर आपके पास स्किल होगी, तो नौकरी खुद चलकर आएगी।

लाभ : सरकार इंडस्ट्री की मांग के हिसाब से युवाओं को फ्री ट्रेनिंग दे रही है। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद सर्टिफिकेट मिलता है और रोजगार मेलों के जरिए प्लेसमेंट में मदद भी की जाती है।

5. स्टार्टअप इंडिया (Startup India)

अगर आपके पास कोई नया और अनोखा आइडिया (Innovative Idea) है, तो आप स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं। सरकार नए उद्यमियों को टैक्स में छूट, फंडिंग सपोर्ट और आसान नियम-कायदों का फायदा दे रही है।

पात्रता: कौन उठा सकता है लाभ? (Eligibility)

चूंकि यह कई योजनाओं का एक समूह है, इसलिए पात्रता थोड़ी अलग-अलग हो सकती है, लेकिन कुछ बुनियादी शर्तें हैं:

  • आवेदक भारत का नागरिक होना चाहिए।
  • उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए (कौशल विकास में कम भी हो सकती है)।
  • स्वरोजगार योजनाओं के लिए आपके पास एक ठोस बिजनेस प्लान होना चाहिए कि आप क्या काम करेंगे।
  • किसी बैंक का डिफाल्टर नहीं होना चाहिए।

PM विकसित भारत रोजगार योजना

आवेदन कैसे करें? (How to Apply)

‘विकसित भारत रोजगार’ मुहिम का फायदा उठाने के लिए आपको ऑनलाइन पोर्टल्स का इस्तेमाल करना होगा। इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं है:

जनसमर्थ पोर्टल (JanSamarth Portal): यह सरकार का सबसे शानदार प्लेटफॉर्म है। यहां मुद्रा, PMEGP जैसी 13 से ज्यादा सरकारी लोन स्कीम्स एक ही जगह मौजूद हैं। आप यहां अपनी पात्रता चेक करके सीधे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

  • PM विश्वकर्मा पोर्टल : विश्वकर्मा योजना के लिए आपको इसके डेडिकेटेड पोर्टल या नजदीकी CSC सेंटर पर जाना होगा।
  • स्किल इंडिया डिजिटल हब : ट्रेनिंग के लिए आपको इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा।
  • रोजगार मेले : सरकार देश भर में जो रोजगार मेले लगाती है, उसकी जानकारी रखकर उसमें हिस्सा लें।

विकसित भारत:- एक सपना

‘विकसित भारत’ का सपना तभी पूरा होगा जब देश का हर युवा आर्थिक रूप से अपने पैरों पर खड़ा होगा। यह मुहिम युवाओं को वही अवसर दे रही है। जरूरत है सही जानकारी रखने की और अपनी रुचि के अनुसार सही योजना चुनकर आगे बढ़ने की। किसी भी बिचौलिये या अफवाह के चक्कर में न पड़ें, सीधे सरकारी पोर्टल्स का उपयोग करें।

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Patna University Renovation : 100 साल पुरानी विरासत को मिलेगा नया रूप, PM-USHA योजना से बदल जाएगी पटना यूनिवर्सिटी की सूरत

Patna University

बिहार के सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान, पटना विश्वविद्यालय (Patna University) के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। करीब एक सदी पुरानी यह यूनिवर्सिटी अब हाईटेक होने जा रही है। केंद्र सरकार की ‘पीएम-उषा’ (PM-USHA) योजना और राज्य सरकार के सहयोग से यूनिवर्सिटी को एक नया और आधुनिक रूप दिया जा रहा है।

अगर आप पटना यूनिवर्सिटी के छात्र हैं या बिहार की शिक्षा व्यवस्था में रुचि रखते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मास्टर प्लान।

क्या है यह पूरा प्रोजेक्ट ?

पटना यूनिवर्सिटी को मल्टी-डिसिप्लिनरी एजुकेशन एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी (MERU) के रूप में विकसित करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए PM-USHA (प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान) के तहत 100 करोड़ रुपये का अनुदान (Grant) मंजूर किया गया है। इसके अलावा, राज्य सरकार भी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए अलग से फंड दे रही है।

Patna University

इस प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग 139 करोड़ रुपये आकी गई है, जिससे नए भवनों का निर्माण और पुराने ढांचों का रिनोवेशन किया जाएगा।

बनेंगे दो नए हाईराइज टावर

यूनिवर्सिटी के इंफ्रास्ट्रक्चर में सबसे बड़ा बदलाव दो नई इमारतों के रूप में देखने को मिलेगा, जो कृष्ण घाट के पास बन रही हैं।

  • G+8 एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक (प्रशासनिक भवन): यूनिवर्सिटी का पूरा कामकाज अब एक ही छत के नीचे होगा। वाइस चांसलर (VC), प्रो-वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार और अन्य सभी प्रशासनिक ऑफिस इसी नई 9 मंजिला इमारत में शिफ्ट होंगे। इसमें सिंडिकेट और एकेडमिक काउंसिल के लिए आधुनिक हॉल भी होंगे।
  • G+9 एकेडमिक ब्लॉक (शैक्षणिक भवन): यह 10 मंजिला इमारत छात्रों के लिए होगी। इसमें लिफ्ट, मॉडर्न क्लासरूम और ग्राउंड फ्लोर पर एक बड़ा कैफेटेरिया होगा। हर फ्लोर पर औसतन दो विभागों (Departments) को जगह दी जाएगी।

Patna University

दरभंगा हाउस से शिफ्ट होंगे विभाग

पटना यूनिवर्सिटी की पहचान माने जाने वाले ऐतिहासिक दरभंगा हाउस (Darbhanga House) से अब भीड़ कम की जाएगी।

  • वर्तमान में दरभंगा हाउस में चल रहे ह्यूमैनिटीज (मानविकी) और सोशल साइंस (सामाजिक विज्ञान) के सभी पोस्ट-ग्रेजुएट (PG) विभागों को नए G+9 एकेडमिक ब्लॉक में शिफ्ट किया जाएगा।
  • वाणिज्य महाविद्यालय (Vanijya Mahavidyalaya): जब दरभंगा हाउस खाली हो जाएगा, तो वहां ‘वाणिज्य महाविद्यालय’ को शिफ्ट करने की योजना है, जिससे कॉमर्स के छात्रों को एक ऐतिहासिक परिसर मिलेगा।

छात्रों को क्या फायदा होगा?

इस कायाकल्प का सीधा फायदा छात्रों की पढ़ाई और रिसर्च पर पड़ेगा:

  • मॉडर्न लैब्स: साइंस विभागों के लिए 34 करोड़ रुपये से 34 अत्याधुनिक उपकरण (जैसे Bio-safety cabinets, XRD, FTIR microscopes) खरीदे जा रहे हैं।
  • खेल सुविधाएँ: सैदपुर कॉम्प्लेक्स में 15 करोड़ रुपये की लागत से एक इंडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनेगा, जहाँ बैडमिंटन, वॉलीबॉल और कुश्ती जैसी सुविधाएँ होंगी।
  • बेहतर रैंकिंग: इस रिनोवेशन का मुख्य उद्देश्य यूनिवर्सिटी की NAAC ग्रेडिंग और NIRF रैंकिंग में सुधार लाना है।

पटना यूनिवर्सिटी का यह बदलाव न केवल इसकी इमारतों को नया रंग देगा, बल्कि बिहार में उच्च शिक्षा के स्तर को भी ऊपर उठाएगा। आधुनिक सुविधाओं और ऐतिहासिक विरासत का यह संगम आने वाले समय में छात्रों के लिए एक बेहतरीन माहौल तैयार करेगा।

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मुजफ्फरपुर में दिल दहला देने वाला कांड: गरीबी से हार गया पिता, 3 मासूम बेटियों के साथ की आत्महत्या, पूरे इलाके में पसरा मातम

मुजफ्फरपुर

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से आज एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। अक्सर कहा जाता है कि एक पिता अपने बच्चों के लिए पूरी दुनिया से लड़ सकता है, लेकिन मुजफ्फरपुर में आर्थिक तंगी (Financial Crisis) की मार ऐसी पड़ी कि एक पिता अपनी ही जिंदगी और अपनी तीन मासूम बेटियों की सांसों का रक्षक नहीं बन सका।

इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे इलाके में सन्नाटा है और हर किसी की आंखें नम हैं।

मुजफ्फरपुर

क्या है पूरा मामला?

घटना मुजफ्फरपुर जिले के (संबंधित थाना क्षेत्र का नाम, यदि उपलब्ध हो तो, अन्यथा ‘ग्रामीण क्षेत्र’) की है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, आज सुबह जब काफी देर तक घर का दरवाजा नहीं खुला, तो पड़ोसियों को शक हुआ। अनहोनी की आशंका में जब दरवाजा तोड़ा गया, तो अंदर का मंजर देखकर हर किसी की रूह कांप गई।

घर के अंदर पिता और उनकी तीन पुत्रियों के शव पाए गए। बताया जा रहा है कि पिता ने पहले अपनी बेटियों को जहर दिया या फंदे से लटकाया (पुष्टि बाकी), और फिर खुद भी अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।

क्यों उठाया इतना खौफनाक कदम?

पुलिस की शुरुआती जांच और आस-पास के लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस सामूहिक आत्महत्या की मुख्य वजह भीषण आर्थिक तंगी बताई जा रही है।

कर्ज का बोझ: सूत्रों का कहना है कि परिवार पिछले काफी समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा था। परिवार के मुखिया पर काफी कर्ज हो गया था जिसे चुकाने में वह असमर्थ थे।

रोजगार का संकट: काम-धंधा ठीक न चलने के कारण घर में खाने-पीने की भी किल्लत हो गई थी।

निराशा: शायद गरीबी और भविष्य की चिंता ने उस पिता को मानसिक रूप से इतना तोड़ दिया कि उसे अपनी और अपनी बच्चियों की मौत ही एकमात्र रास्ता नजर आया।

पुलिस की कार्रवाई और जांच

घटना की सूचना मिलते ही मुजफ्फरपुर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने चारों शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए SKMCH (श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल) भेज दिया है।

मुजफ्फरपुर

पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि:

“मामला प्रथम दृष्टया आत्महत्या का लग रहा है। मौके से कोई सुसाइड नोट मिला है या नहीं, इसकी जांच की जा रही है। हम हर पहलू की जांच कर रहे हैं, चाहे वह कर्ज का मामला हो या कोई पारिवारिक विवाद। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल पाएगा।”

समाज के लिए एक बड़ा सवाल

यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं है, बल्कि हमारे समाज के लिए एक बहुत बड़ा सवाल है। आखिर हम किस तरह के समाज में जी रहे हैं जहाँ एक पिता को गरीबी के कारण अपने पूरे परिवार को खत्म करना पड़ता है? आस-पास के लोगों को भनक तक नहीं लगी कि उनके पड़ोस में कोई परिवार घुट-घुट कर जी रहा है।

डिस्क्लेमर और हेल्पलाइन

जिंदगी अनमोल है। उतार-चढ़ाव हर किसी के जीवन में आते हैं, लेकिन आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं है। अगर आप या आपका कोई जानने वाला मानसिक तनाव या आर्थिक परेशानियों से गुजर रहा है, तो कृपया बात करें। सरकार और कई संस्थाएं मदद के लिए मौजूद हैं।

• पुलिस हेल्पलाइन: 112

• मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन हेल्पलाइन – 1800-599-0019

मुजफ्फरपुर

मुजफ्फरपुर की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि गरीबी सबसे बड़ा अभिशाप है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि मृतक आत्माओं को शांति मिले। इस मामले में पुलिस की जांच में आगे जो भी अपडेट आएगा, हम आप तक जरूर पहुंचाएंगे।

बिहार और देश-दुनिया की तमाम बड़ी खबरों के लिए हमारे ब्लॉग को Follow करना न भूलें।

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सावधान! पटना-आरा रोड आज से 7 महीने के लिए बंद: शिवाला से कन्हौली तक ‘नो एंट्री’, जानें अब किस रास्ते से जाना होगा?

पटना

अगर आप आज पटना से आरा, बिहटा या कोइलवर जाने का प्लान बना रहे हैं, या फिर उधर से पटना आ रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। घर से निकलने से पहले यह खबर नहीं पढ़ी, तो आप घंटों जाम में फंस सकते हैं या आपको आधे रास्ते से लौटना पड़ सकता है।

बिहार की राजधानी पटना में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए चल रहे निर्माण कार्यों के चलते पटना-आरा मुख्य मार्ग पर आज से बड़ा बदलाव किया गया है।

पटना

क्या है पूरा मामला?

आज यानी 18 दिसंबर 2025 से पटना जिला प्रशासन ने शिवाला चौक से कन्हौली तक के रास्ते को पूरी तरह से बंद कर दिया है। यह कोई एक-दो दिन की बात नहीं है, बल्कि यह रूट अगले 7 महीनों तक बंद रहेगा।

प्रशासन द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, इस रूट पर सभी प्रकार के वाहनों (दोपहिया, चार पहिया और भारी वाहन) का परिचालन पूरी तरह से रोक दिया गया है।

रास्ता क्यों बंद किया गया है?

शायद आप सोच रहे होंगे कि इतना व्यस्त रास्ता इतने लंबे समय के लिए क्यों बंद किया गया? दरअसल, यह परेशानी आपके भविष्य के सफर को आसान बनाने के लिए है।

इस रूट पर दानापुर-बिहटा एलिवेटेड रोड (Elevated Road) का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। शिवाला से कन्हौली के बीच पिलर और स्पैन चढ़ाने का काम होना है। चूंकि यह रास्ता संकरा है और ट्रैफिक का दबाव बहुत ज्यादा रहता है, इसलिए सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ट्रैफिक को रोकना पड़ा है ताकि निर्माण कार्य तेजी से पूरा हो सके।

अब पटना-आरा आने-जाने के लिए कौन सा रास्ता लें?

घबराने की जरूरत नहीं है! प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा के लिए रूट डायवर्जन (Traffic Diversion) का प्लान तैयार किया है। अगर आपको पटना से बिहटा/आरा जाना है या उधर से आना है, तो आप इन दो वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल कर सकते हैं:

1. पहला रास्ता: मनेर-दानापुर रूट

अगर आप सगुना मोड़ या दानापुर स्टेशन की तरफ जाना चाहते हैं, तो यह रास्ता आपके लिए बेहतर है।

रूट: बिहटा चौक ➡️ मनेर ➡️ दानापुर कैंट ➡️ सगुना मोड़/पटना।

किसे फायदा: यह रूट उन लोगों के लिए सही है जो उत्तरी पटना या गंगा किनारे वाले इलाकों से आ-जा रहे हैं।

2. दूसरा रास्ता: नौबतपुर-एम्स रूट

अगर आप अनीसाबाद, फुलवारी शरीफ या पटना बाईपास की तरफ जाना चाहते हैं, तो इस रास्ते को चुनें।

रूट: बिहटा-सरमेरा मोड़ ➡️ नौबतपुर ➡️ एम्स (AIIMS) पटना ➡️ फुलवारी शरीफ।

किसे फायदा: दक्षिण पटना या बाईपास होकर जाने वालों के लिए यह सबसे बेस्ट रूट है।

पटना

यात्रियों के लिए कुछ जरूरी टिप्स

अगले 7 महीनों तक इस रूट पर थोड़ी परेशानी हो सकती है, इसलिए स्मार्ट ट्रैवलिंग के लिए इन बातों का ध्यान रखें:

Google Maps का इस्तेमाल करें: घर से निकलने से पहले मैप पर लाइव ट्रैफिक जरूर चेक करें। डायवर्जन की वजह से वैकल्पिक रास्तों पर भी भीड़ बढ़ सकती है।

समय लेकर निकलें: आम दिनों के मुकाबले अब आपको सफर में 30 से 45 मिनट का एक्स्ट्रा समय लग सकता है।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट: अगर संभव हो तो इस दौरान अपनी कार के बजाय ट्रेन (पटना-आरा मेमू) का इस्तेमाल करें, जो ट्रैफिक जाम से बचने का सबसे अच्छा तरीका है।

दोस्तों, विकास के लिए थोड़ी परेशानी तो उठानी पड़ती है। यह एलिवेटेड रोड बनने के बाद पटना से बिहटा का सफर मिनटों में तय होगा। तब तक के लिए, कृपया ट्रैफिक नियमों का पालन करें और पुलिस द्वारा बताए गए डायवर्जन रूट का ही इस्तेमाल करें।

इस जानकारी को अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ WhatsApp और Facebook पर जरूर शेयर करें ताकि कोई भी जाम में न फंसे!

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MGNREGA का नया नाम ‘जी राम जी’? जानिए 5 बड़े बदलाव और क्यों छिड़ा है ‘गांधी vs राम’ का विवाद!

MGNREGA

क्या ‘मनरेगा’ (MGNREGA) अब इतिहास बनने वाला है? क्या महात्मा गांधी का नाम हटाकर अब रोजगार गारंटी योजना में ‘राम’ का नाम जोड़ा जा रहा है? सोशल मीडिया और न्यूज़ में ये खबरें आग की तरह फैल रही हैं कि मोदी सरकार मनरेगा का नाम बदलकर ‘जी राम जी’ (G RAM G) कर रही है। यह खबर पूरी तरह गलत नहीं है, लेकिन इसमें एक गहरा पेंच है। सरकार एक नया बिल ला रही है— VB-G RAM G, जो पुरानी मनरेगा जगह लेगा।

लेकिन सवाल यह है कि क्या विकास के लिए नाम बदलना ज़रूरी है? और क्या एक सरकारी योजना में ऐसा नाम रखना जो किसी खास धर्म की याद दिलाए, हमारे सेक्युलर ढांचे (Secularism) के लिए सही है? आइए, इस रिपोर्ट में गहराई से जानते हैं।

क्या है असली खबर? (The Real News)

सबसे पहले फैक्ट चेक करते हैं। सरकार ने ‘मनरेगा’ (Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act) को खत्म करके उसकी जगह एक नया कानून लाने का प्रस्ताव रखा है।

MGNREGA

इस नए बिल का पूरा नाम है:

“Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin)”

इसका शॉर्ट फॉर्म या एक्रोनिम बन रहा है— VB-G RAM G।

हिंदी मीडिया और विपक्ष इसे ही ‘जी राम जी’ (G RAM G) कहकर बुला रहा है। तकनीकी रूप से इसका मतलब ‘ग्रामीण’ (Gramin) से हो सकता है, लेकिन इसका उच्चारण (Pronunciation) जानबूझकर ऐसा रखा गया है जो ‘जय राम जी’ जैसा सुनाई दे। यही विवाद की असली जड़ है।

नई योजना में क्या बदलेगा? (5 Key Changes)

सरकार का तर्क है कि यह सिर्फ नाम बदलना नहीं, बल्कि योजना का ‘अपग्रेड’ है। नए VB-G RAM G बिल में ये बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं:

  • रोजगार के दिन बढ़े: मनरेगा में 100 दिन की गारंटी थी, नई योजना में इसे बढ़ाकर 125 दिन करने का प्रस्ताव है। यह मजदूरों के लिए अच्छी खबर है।
  • फंडिंग का नया गणित: पहले मजदूरी का 100% पैसा केंद्र सरकार देती थी। अब इसे 60:40 के अनुपात में बांटा जाएगा (60% केंद्र, 40% राज्य)। इससे गरीब राज्यों पर बोझ बढ़ सकता है।
  • खेती के समय ‘नो वर्क’: जब खेती का पीक सीजन (बुवाई/कटाई) होगा, तब इस योजना के तहत 60 दिनों तक काम बंद रखा जाएगा, ताकि किसानों को मजदूरों की कमी न हो।
  • फोकस एरिया: अब गड्ढे खोदने के बजाय 4 चीजों पर फोकस होगा— जल संरक्षण, ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, आजीविका और आपदा प्रबंधन।
  • गांधी का नाम गायब: सबसे बड़ा बदलाव यह है कि योजना के टाइटल से ‘महात्मा गांधी’ का नाम हटा दिया गया है।

3. विवाद क्यों? ‘गांधी’ गए और ‘राम’ आए?

  • विपक्ष और आलोचक इस पर कड़ा सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि महात्मा गांधी ग्रामीण भारत और स्वावलंबन के प्रतीक थे। उनका नाम हटाना सिर्फ एक राजनीतिक कदम नहीं, बल्कि विचारधारा की लड़ाई है।
  • दूसरी तरफ, ‘G RAM G’ नाम का चुनाव संयोग नहीं लगता। भारत एक धर्मनिरपेक्ष (Secular) देश है। सरकारी योजनाओं के नाम ऐसे होने चाहिए जो हर धर्म और समुदाय के व्यक्ति को अपना लगें।
  • जब योजना का पैसा हर टैक्सपेयर (हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई) से आता है, तो नाम में ऐसा धार्मिक संकेत (Subtle Religious Hint) क्यों?
  • क्या ‘विकास’ के लिए किसी भगवान के नाम का सहारा लेना ज़रूरी है? आलोचकों का मानना है कि यह सेक्युलरिज्म को कमजोर करने की कोशिश है।

विकास ज़रूरी है या नाम बदलना? (The Big Question)

हमारा सबसे बड़ा सवाल यही है— हर जगह नाम बदलने की इतनी जल्दी क्यों है?

पिछले कुछ सालों में हमने शहरों, स्टेशनों और अब योजनाओं के नाम बदलते देखे हैं। सरकार का तर्क होता है ‘औपनिवेशिक मानसिकता’ (Colonial Mindset) को हटाना। लेकिन मनरेगा तो 2005 में बनी भारतीय योजना थी, इसमें गुलामी का कौन सा अंश था?

  • असली मुद्दे: मनरेगा में मजदूरों को समय पर पैसा नहीं मिलता, फंड की कमी रहती है और भ्रष्टाचार होता है।
  • ज़रूरत क्या थी: ज़रूरत थी सिस्टम को सुधारने की, मजदूरी बढ़ाने की और डिजिटल पेमेंट्स को आसान बनाने की।
  • हो क्या रहा है: पूरी एनर्जी ‘री-ब्रांडिंग’ (Rebranding) में खर्च हो रही है।

अगर हम काम पर फोकस करें, तो योजना का नाम ‘क ख ग’ भी हो, तो भी जनता खुश रहेगी। लेकिन अगर काम न हो, तो ‘स्वर्ग योजना’ नाम रखने से भी पेट नहीं भरेगा।

MGNREGA

क्या यह राजनीति है? (Political Angle)

इसे राजनीति से अलग करके देखना मुश्किल है। ‘जी राम जी’ जैसा नाम चुनाव और भावनाओं को ध्यान में रखकर बनाया गया लगता है।

  • ब्रांडिंग: मौजूदा सरकार हर चीज़ को ‘विकसित भारत’ और अपनी विचारधारा से जोड़ना चाहती है।
  • इतिहास मिटाना: आलोचकों का कहना है कि यह पुरानी सरकारों (विशेषकर कांग्रेस और गांधी परिवार) की विरासत को मिटाने का एक और प्रयास है।

लेकिन इस चक्कर में हम एक खतरनाक ट्रेंड सेट कर रहे हैं। अगर कल को दूसरी सरकार आई और उसने फिर नाम बदला, तो क्या देश का पैसा सिर्फ बोर्ड पेंट करने में ही खर्च होता रहेगा?

योजना में सुधार लेकिन?

VB-G RAM G बिल में 125 दिन रोजगार जैसे अच्छे कदम ज़रूर हैं, जिनका स्वागत होना चाहिए। लेकिन ‘महात्मा गांधी’ का नाम हटाना और ‘G RAM G’ जैसा विवादास्पद नाम रखना एक गैर-ज़रूरी कदम लगता है।

विकास का धर्म से कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए। सड़क, पानी और रोजगार का कोई धर्म नहीं होता। बेहतर होता कि सरकार इस ‘नेम-गेम’ (Name Game) में पड़ने के बजाय सिर्फ ‘work-game’ पर फोकस करती।

आपकी राय:

क्या आपको लगता है कि मनरेगा का नाम बदलना सही फैसला है? या हमें नाम के बजाय काम पर ध्यान देना चाहिए? कमेंट में अपनी राय ज़रूर लिखें! 👇

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Bihar STET Result 2025 : खत्म हुआ इंतजार? आज जारी हो सकता है रिजल्ट! यहाँ देखें Direct Link और Live Updates

Bihar STET Result 2025

बिहार के लाखों शिक्षक अभ्यर्थियों (Teaching Aspirants) के लिए आज का दिन (16 दिसंबर) बेहद अहम हो सकता है। Bihar STET Result 2025 को लेकर आज सुबह से ही सोशल मीडिया और शिक्षा जगत में जबरदस्त हलचल है। बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (BSEB) की आधिकारिक वेबसाइट पर ट्रैफिक बढ़ गया है और सूत्रों की मानें तो बोर्ड ने रिजल्ट अपलोड करने की तैयारी लगभग पूरी कर ली है।

अगर आप भी अपनी मेहनत के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। आइए जानते हैं कि रिजल्ट कब लाइव होगा, कैसे चेक करें और अभी क्या ताजा अपडेट चल रहा है।

STET Result 2025: आज की बड़ी खबर (Latest Update)

ताजा जानकारी के मुताबिक, BSEB ने कॉपियों की जांच और नॉर्मलाइजेशन (Normalization) की प्रक्रिया पूरी कर ली है। आज पटना ऑफिस में बोर्ड के अधिकारियों की हलचल तेज देखी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के अनुसार, रिजल्ट का लिंक आज शाम तक या देर रात कभी भी एक्टिव किया जा सकता है। बोर्ड अध्यक्ष आनंद किशोर जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस या नोटिफिकेशन के जरिए इसकी घोषणा कर सकते हैं। अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे अपना Admit Card तैयार रखें।

Bihar STET Result 2025

Result कैसे चेक करें?

जैसे ही रिजल्ट जारी होगा, वेबसाइट पर भारी ट्रैफिक के कारण सर्वर डाउन हो सकता है। ऐसे में घबराएं नहीं और नीचे दिए गए स्टेप्स फॉलो करें:

  • सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट https://www.google.com/search?q=bsebstet.com या secondary.biharboardonline.com पर जाएं।
  • होमपेज पर ब्लिंक कर रहे “Bihar STET Result 2025” के लिंक पर क्लिक करें।
  • अब एक नया पेज खुलेगा, वहां अपना Application Number और Date of Birth (DOB) डालें।
  • कैप्चा कोड भरें और ‘Search’ या ‘Login’ बटन पर क्लिक करें।
  • आपका स्कोरकार्ड स्क्रीन पर आ जाएगा। इसे डाउनलोड करें और भविष्य के लिए इसका Printout जरूर निकाल लें।

क्वालीफाइंग मार्क्स (Passing Criteria) – एक नजर

रिजल्ट देखने से पहले यह जानना जरूरी है कि पास होने के लिए आपको कितने प्रतिशत अंक चाहिए। बिहार बोर्ड ने अलग-अलग कैटेगरी के लिए अलग कट-ऑफ तय किया है:

  • सामान्य वर्ग (General): 50%
  • पिछड़ा वर्ग (BC): 45.5%
  • अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC): 42.5%
  • SC / ST / दिव्यांग / महिला: 40%

(नोट: यह सिर्फ क्वालीफाइंग मार्क्स हैं, मेरिट लिस्ट में आने के लिए इससे ज्यादा स्कोर बेहतर रहेगा।)

Bihar STET Result 2025

वेबसाइट क्रैश हो तो क्या करें?

अक्सर देखा गया है कि बिहार बोर्ड का रिजल्ट आते ही साइट क्रैश हो जाती है। अगर आपके साथ ऐसा हो:

  • थोड़ी देर (15-20 मिनट) इंतजार करें।
  • पेज को बार-बार रिफ्रेश न करें।
  • रात के समय चेक करने की कोशिश करें जब ट्रैफिक कम हो।

दोस्तों, आपकी मेहनत का फल आपको जल्द मिलने वाला है। सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों पर ध्यान न दें और सिर्फ ऑफिशियल वेबसाइट पर भरोसा करें। हमारी टीम भी लगातार नजर बनाए हुए है, जैसे ही लिंक एक्टिव होगा, हम आपको अपडेट करेंगे।

शुभकामनाएं! (All the Best)

FAQs (Google Ranking के लिए जरूरी)

Q1: Bihar STET 2025 का रिजल्ट कब आएगा?

Ans: रिजल्ट आज (16 दिसंबर) किसी भी समय जारी होने की प्रबल संभावना है।

Q2: रिजल्ट देखने के लिए कौन सी वेबसाइट सही है?

Ans: आप https://www.google.com/search?q=bsebstet.com पर अपना रिजल्ट देख सकते हैं।

Q3: रिजल्ट चेक करने के लिए क्या डिटेल्स चाहिए?

Ans: आपको अपना एप्लीकेशन नंबर और जन्म तिथि (DOB) की जरूरत पड़ेगी।

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BPSC पास दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए खुशखबरी! मिल रहे हैं ₹50,000, आज से आवेदन शुरू – ऐसे करें अप्लाई

BPSC

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की तैयारी कर रहे दिव्यांग (Divyang) छात्रों के लिए बिहार सरकार ने एक शानदार तोहफा दिया है। अगर आपने BPSC की प्रारंभिक परीक्षा (Preliminary Exam) पास कर ली है, तो आगे की पढ़ाई और मुख्य परीक्षा (Mains) की तैयारी के लिए सरकार आपको 50,000 रुपये की आर्थिक मदद देने जा रही है।

समाज कल्याण विभाग ने इसके लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है और आज यानी 15 दिसंबर 2025 से इसके लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

इस ब्लॉग पोस्ट में हम आपको बताएंगे कि आप इस योजना का लाभ कैसे उठा सकते हैं, कौन से डॉक्यूमेंट्स लगेंगे और आवेदन की आखिरी तारीख क्या है।

BPSC

योजना की मुख्य बातें (Key Highlights)

बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित इस महत्वकांक्षी पहल को ‘मुख्यमंत्री नि:शक्तजन सशक्तिकरण छात्र योजना’ के नाम से जाना जाता है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य BPSC की प्रारंभिक परीक्षा (PT) उत्तीर्ण करने वाले दिव्यांग अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए आर्थिक संबल प्रदान करना है, जिसके तहत उन्हें 50,000 रुपये की एकमुश्त प्रोत्साहन राशि दी जाती है। योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन है, जिसके लिए पोर्टल आज (15 दिसंबर 2025) से खुल गया है और आवेदन करने की अंतिम तिथि 14 जनवरी 2026 निर्धारित की गई है।

क्या है यह प्रोत्साहन योजना?

बिहार सरकार का उद्देश्य है कि राज्य के प्रतिभावान दिव्यांग छात्र आर्थिक तंगी की वजह से अपनी पढ़ाई न छोड़ें। इसलिए, ‘बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC)’ द्वारा आयोजित संयुक्त प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा (PT) में उत्तीर्ण होने वाले बिहार के स्थायी निवासी दिव्यांग छात्रों को मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू की तैयारी के लिए 50,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

यह राशि सीधे अभ्यर्थी के बैंक खाते में डीबीटी (DBT) के माध्यम से भेजी जाएगी।

कौन कर सकता है आवेदन?

इस राशि को पाने के लिए अभ्यर्थी को निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होंगी:

• बिहार का निवासी: अभ्यर्थी को बिहार राज्य का स्थायी निवासी होना चाहिए।

• BPSC PT पास: अभ्यर्थी ने BPSC द्वारा आयोजित प्रारंभिक परीक्षा पास कर ली हो।

• दिव्यांगता प्रमाण पत्र: अभ्यर्थी के पास सक्षम प्राधिकार द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र होना चाहिए (न्यूनतम 40% या उससे अधिक)।

• कोई सरकारी नौकरी नहीं: अभ्यर्थी पहले से किसी सरकारी सेवा (केंद्र या राज्य) में कार्यरत नहीं होना चाहिए।

• पहले लाभ न लिया हो: इस योजना का लाभ किसी विशेष परीक्षा के लिए एक बार ही मिलता है। पूर्व में इसका लाभ न लिया हो।

जरूरी दस्तावेज

ऑनलाइन आवेदन करते समय आपको निम्नलिखित दस्तावेजों की स्कैन कॉपी तैयार रखनी होगी:

• आधार कार्ड (Aadhaar Card)

• जाति प्रमाण पत्र (Caste Certificate) – यदि लागू हो

• आवासीय प्रमाण पत्र (Domicile Certificate)

• दिव्यांगता प्रमाण पत्र (Disability Certificate)

• BPSC PT का एडमिट कार्ड (Admit Card)

• BPSC PT पास होने का प्रमाण (Mark sheet/Result copy)

• बैंक पासबुक (जिसमें खाता संख्या और IFSC कोड साफ़ दिखे)

• पासपोर्ट साइज फोटो और हस्ताक्षर

• स्वघोषणा पत्र (Self-declaration) – पोर्टल पर उपलब्ध

BPSC

आवेदन कैसे करें?

आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन है। नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें:

• वेबसाइट पर जाएं: सबसे पहले समाज कल्याण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट state.bihar.gov.in/socialwelfare पर जाएं।

• लिंक खोजें: होमपेज पर “BPSC PT उत्तीर्ण दिव्यांग छात्रों के लिए प्रोत्साहन राशि” के लिंक पर क्लिक करें।

• रजिस्ट्रेशन: ‘New Registration’ पर क्लिक करें और अपनी बेसिक जानकारी (नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल) भरकर रजिस्टर करें।

• फॉर्म भरें: लॉग-इन करने के बाद आवेदन फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारी सही-सही भरें।

• डॉक्यूमेंट अपलोड: मांगे गए सभी दस्तावेजों को PDF या JPEG फॉर्मेट (निर्धारित साइज में) अपलोड करें।

• सबमिट करें: फॉर्म को चेक करें और ‘Final Submit’ बटन पर क्लिक करें।

• प्रिंट आउट: आवेदन की रसीद (Acknowledgement) का प्रिंट आउट निकालकर भविष्य के लिए सुरक्षित रख लें।

ध्यान देने योग्य बातें

• अंतिम तिथि का इंतजार न करें: आवेदन की आखिरी तारीख 14 जनवरी 2026 है, लेकिन सर्वर डाउन होने की समस्या से बचने के लिए आज ही आवेदन करें।

• बैंक खाता आधार से लिंक हो: सुनिश्चित करें कि आपका बैंक खाता आपके आधार नंबर से जुड़ा (Seeded) हो, वरना पैसा आने में दिक्कत हो सकती है।

• ईमेल और मोबाइल: अपना ही ईमेल और मोबाइल नंबर दें ताकि भविष्य में विभाग आपसे संपर्क कर सके।

बिहार सरकार की यह पहल दिव्यांग छात्रों के सपनों को पंख देने वाली है। अगर आपने भी BPSC PT पास किया है, तो यह 50,000 रुपये की राशि आपकी मुख्य परीक्षा की कोचिंग, स्टडी मटेरियल और अन्य खर्चों में बहुत मददगार साबित होगी।

इस जानकारी को अपने दोस्तों और व्हाट्सएप ग्रुप्स में जरूर शेयर करें ताकि किसी जरूरतमंद साथी की मदद हो सके।

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सहरसा पुलिस का ‘ऑपरेशन मुस्कान’: 43 लोगों को वापस मिले चोरी हुए मोबाइल, खिलीं चेहरे की मुस्कान

सहरसा

मोबाइल आज सिर्फ बातचीत का जरिया नहीं, बल्कि हमारी निजी जिंदगी और यादों का तिजोरी बन चुका है। ऐसे में अगर फोन चोरी हो जाए या गुम हो जाए, तो परेशानी होना लाजमी है। लेकिन बिहार के सहरसा (Saharsa) जिले से एक राहत भरी खबर आई है। सहरसा पुलिस ने अपने विशेष अभियान ‘ऑपरेशन मुस्कान’ (Operation Muskan) के छठे चरण (Phase-6) के तहत बड़ी कामयाबी हासिल की है। सहरसा पुलिस ने करीब 6.5 लाख रुपये की कीमत के 43 मोबाइल फोन बरामद कर उन्हें उनके असली मालिकों को सौंप दिया है।

सहरसा

क्या है पूरा मामला?

रविवार (14 दिसंबर 2025) को पुलिस लाइन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में कोसी रेंज के डीआईजी (DIG) मनोज कुमार और एसपी (SP) हिमांशु ने मोबाइल मालिकों को उनके फोन वापस किए। अपने खोए हुए फोन को वापस पाकर लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं था।

पुलिस के मुताबिक:

• बरामद मोबाइल की संख्या: 43

• कुल अनुमानित कीमत: ₹6,46,388 (लगभग 6.5 लाख रुपये)

• अभियान का चरण: छठा (Phase-6)

कैसे बरामद हुए ये फोन?

सहरसा पुलिस की टेक्निकल सेल और डीआईयू (District Intelligence Unit) ने इस बरामदगी में अहम भूमिका निभाई।

• टेक्निकल सर्विलांस: पुलिस ने चोरी या गुम हुए फोनों के IMEI नंबर को सर्विलांस पर रखा था।

• लोकेशन ट्रैकिंग: जैसे ही इन फोनों में कोई नया सिम कार्ड डाला गया, पुलिस को लोकेशन मिल गई।

• त्वरित कार्रवाई: लोकेशन ट्रेस होते ही पुलिस टीम ने छापेमारी कर फोन बरामद कर लिया।

डीआईजी मनोज कुमार ने बताया कि ‘ऑपरेशन मुस्कान’ का मकसद सिर्फ अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि आम जनता का पुलिस पर भरोसा बढ़ाना भी है।

अब तक की बड़ी सफलता

सहरसा पुलिस के लिए यह कोई पहली सफलता नहीं है। ‘ऑपरेशन मुस्कान’ के तहत अब तक के आंकड़े इस प्रकार हैं:

• फेज 1 से 5 तक: 245 मोबाइल बरामद (कीमत करीब ₹35.42 लाख)

• फेज 6 (ताजा): 43 मोबाइल बरामद (कीमत करीब ₹6.46 लाख)

• कुल बरामदगी: 288 मोबाइल फोन

लाभार्थियों की जुबानी

अपना फोन वापस पाकर महिषी प्रखंड के इंजीनियर निरंजन किशोर ने कहा, “चार महीने पहले मेरा फोन चोरी हुआ था। मैंने उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन आज सहरसा पुलिस ने मुझे सरप्राइज दे दिया।”

वहीं, सिंधुनाथ झा, जिनका फोन 11 अगस्त को गुम हुआ था, ने भी पुलिस की कार्यशैली की जमकर तारीफ की।

सहरसा

अगर आपका फोन गुम हो जाए तो क्या करें?

अगर आप बिहार में रहते हैं और आपका फोन गुम हो जाता है, तो इन स्टेप्स को फॉलो करें:

• शिकायत दर्ज करें: सबसे पहले नजदीकी थाने में ‘सनहा’ (Sanha) दर्ज कराएं।

• CEIR पोर्टल: भारत सरकार के CEIR Portal पर जाकर फोन ब्लॉक करने की रिक्वेस्ट डालें।

• हेल्पलाइन: बिहार पुलिस की हेल्पलाइन 112 या साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।

• रसीद संभाल कर रखें: पुलिस को फोन मिलने पर आपको रसीद दिखानी होगी।

सहरसा पुलिस की यह पहल सराहनीय है। ‘ऑपरेशन मुस्कान’ ने साबित कर दिया है कि अगर पुलिस चाहे तो तकनीक की मदद से लोगों की खोई हुई खुशियां वापस ला सकती है। उम्मीद है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और जनता का विश्वास पुलिस पर और मजबूत होगा।

क्या आपका भी फोन कभी चोरी हुआ है और पुलिस ने मदद की? कमेंट में अपना अनुभव साझा करें!

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भोजपुर पुलिस का ‘सुपर एक्शन’: आरा में 2.16 लाख की लूट निकली ‘फिल्मी ड्रामा’, पेट्रोल पंप कर्मी ही निकला मास्टरमाइंड

भोजपुर

क्या कोई रक्षक ही भक्षक बन सकता है? बिहार के भोजपुर (आरा) में कुछ ऐसा ही हुआ है। आरा नगर थाना क्षेत्र में दो दिन पहले हुई 2.16 लाख रुपये की लूट की खबर ने पूरे शहर में सनसनी फैला दी थी। लेकिन, जब पुलिस ने मामले की गहराई से जांच की, तो सच्चाई जानकर सबके होश उड़ गए। जिसे दुनिया ‘पीड़ित’ समझ रही थी, वही इस लूट का असली ‘मास्टरमाइंड’ निकला। भोजपुर पुलिस ने महज 48 घंटे के अंदर इस हाई-प्रोफाइल मामले का पर्दाफाश कर दिया है।

घटना की इनसाइड स्टोरी: क्या थी झूठी कहानी?

घटना की शुरुआत तब हुई जब आरा के एक पेट्रोल पंप कर्मी ने पुलिस को सूचना दी कि अपराधियों ने उससे 2 लाख 16 हजार रुपये लूट लिए हैं।

• कर्मी का दावा: उसने पुलिस को बताया कि वह पेट्रोल पंप का कैश जमा करने बैंक जा रहा था, तभी रास्ते में हथियारबंद अपराधियों ने उसे घेर लिया और पैसों से भरा बैग छीनकर फरार हो गए।

• दहशत का माहौल: दिनदहाड़े हुई इस “लूट” की खबर से व्यापारियों में डर का माहौल बन गया। पुलिस पर सवाल उठने लगे थे।

भोजपुर

पुलिस को कैसे हुआ शक?

भोजपुर एसपी (SP) के निर्देश पर नगर थाना पुलिस ने तुरंत एक विशेष टीम (SIT) का गठन किया। पुलिस ने जब जांच शुरू की, तो उन्हें पेट्रोल पंप कर्मी की बातों में विरोधाभास (Inconsistency) नजर आया।

• CCTV फुटेज: पुलिस ने जब घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी कैमरे खंगाले, तो वहां लूट जैसी कोई गतिविधि नजर नहीं आई।

• बदलते बयान: पूछताछ के दौरान पेट्रोल पंप कर्मी बार-बार अपने बयान बदल रहा था। कभी वह घटना का समय कुछ और बताता, तो कभी अपराधियों की संख्या अलग बताता।

• कड़ाई से पूछताछ: पुलिस ने जब “थर्ड डिग्री” का नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक तरीके से कड़ाई से पूछताछ की, तो कर्मी टूट गया और उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।

साजिश का पर्दाफाश: कर्ज और लालच

पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ कि पेट्रोल पंप कर्मी ने यह पूरी साजिश खुद रची थी।

• प्लानिंग: उसने अपने ही दोस्तों के साथ मिलकर यह प्लान बनाया था कि वह पैसे गायब कर देगा और इल्जाम अज्ञात अपराधियों पर लगा देगा।

• मकसद: शुरुआती जांच में पता चला है कि पैसों के लालच या किसी पुराने कर्ज को चुकाने के लिए उसने गबन की यह योजना बनाई थी।

• पैसे बरामद: पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लूटे गए (गबन किए गए) पैसे भी बरामद कर लिए हैं।

पुलिस की बड़ी कामयाबी

भोजपुर पुलिस के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। अक्सर ऐसे मामलों में पुलिस महीनों तक अंधेरे में तीर चलाती रहती है, लेकिन नगर थाना पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और सूझबूझ का इस्तेमाल कर सिर्फ 48 घंटे में दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया। आरोपी कर्मी और उसके सहयोगियों को जेल भेजने की तैयारी की जा रही है।

आरा की यह घटना उन व्यापारियों और मालिकों के लिए एक सबक है जो आंख मूंदकर अपने कर्मचारियों पर भरोसा करते हैं। वहीं, पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने आम जनता का विश्वास जीता है। अपराध चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून के हाथ उसकी गर्दन तक पहुंच ही जाते हैं।

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15 करोड़ का ‘ब्रह्मोस’: 15 लीटर दूध और काजू-बादाम खाने वाले इस घोड़े ने तोड़ा इंटरनेट का रिकॉर्ड!

ब्रह्मोस

ब्रह्मोस क्या आपने कभी सोचा है कि एक जानवर की कीमत मर्सिडीज या रॉल्स रॉयस कार से भी ज्यादा हो सकती है? महाराष्ट्र के नंदुरबार में चल रहे ऐतिहासिक सारंगखेड़ा चेतक फेस्टिवल में कुछ ऐसा ही देखने को मिला है। ब्रह्मोस यहाँ एक ऐसा घोड़ा आया है जिसकी कीमत और डाइट सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे। नाम है— ‘ब्रह्मोस’ (Brahmos)। सोशल मीडिया पर चर्चा है कि इसकी कीमत 15 करोड़ रुपये आंकी गई है। आइए जानते हैं क्या है इस घोड़े में ऐसा खास जो इसे इतना बेशकीमती बनाता है।

ब्रह्मोस

15 लीटर दूध और शाही डाइट (Royal Diet)

‘ब्रह्मोस’ सिर्फ नाम से ही दमदार नहीं है, बल्कि इसकी खुराक भी किसी पहलवान से कम नहीं है। इसकी फिटनेस और चमकती त्वचा का राज इसका ‘सुपर डाइट प्लान’ है।

  • दूध: यह घोड़ा रोज़ाना 15 लीटर दूध पीता है।
  • ड्राई फ्रूट्स: खाने में इसे काजू, बादाम और पिस्ता दिया जाता है।
  • अन्य: इसके अलावा इसे देसी घी, अंडे और खास न्यूट्रिशन वाला चारा दिया जाता है ताकि इसकी ताकत और फुर्ती बरकरार रहे।
  • देखभाल: इसकी मालिश और ग्रूमिंग के लिए विशेष लोग रखे गए हैं जो इसे 24 घंटे वीआईपी ट्रीटमेंट देते हैं।

क्यों है इसकी कीमत 15 करोड़? (Why So Expensive)

आप सोच रहे होंगे कि आखिर एक घोड़े में ऐसा क्या है? दरअसल, ‘ब्रह्मोस’ मारवाड़ी नस्ल (Marwari Breed) का एक दुर्लभ घोड़ा है।

  • उम्र और कद: यह मात्र 36 महीने (3 साल) का है और इसकी ऊंचाई 63 इंच से ज्यादा है, जो इस उम्र में बहुत शानदार मानी जाती है।
  • लुक: इसका रंग गहरा काला है और माथे पर एक चमकता हुआ सफेद पट्टा (Blaze) है, जो इसे ‘शुभ’ और अत्यंत सुंदर बनाता है।
  • ब्लडलाइन: यह बेहतरीन ब्लडलाइन (वंश) से आता है। इसके बच्चे (Foals) भी लाखों में बिकते हैं, जो इसे एक ‘सोने की खान’ बनाते हैं।
  • ब्रह्मोस

मालिक ने 15 करोड़ के ऑफर को भी ठुकराया!

यह घोड़ा गुजरात के देसाई स्टड फार्म (Desai Stud Farm) के मालिक नागेश देसाई का है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुष्कर मेले और सारंगखेड़ा फेस्टिवल में कई बड़े खरीदारों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई।

खबर है कि इसके लिए करोड़ों के ऑफर मिले, यहाँ तक कि इसकी वैल्यूएशन 15 करोड़ तक पहुँच गई, लेकिन देसाई परिवार ने इसे बेचने से साफ इनकार कर दिया। उनके लिए ‘ब्रह्मोस’ सिर्फ एक जानवर नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य जैसा है और उनके फार्म की शान है।

सारंगखेड़ा और पुष्कर मेले का ‘सुपरस्टार’

सारंगखेड़ा (महाराष्ट्र) का चेतक फेस्टिवल घोड़ों की खरीद-फरोख्त के लिए दुनिया भर में मशहूर है। लेकिन इस साल ‘ब्रह्मोस’ के आते ही बाकी सभी घोड़े फीके पड़ गए।

जहाँ भी यह घोड़ा जाता है, वहां सेल्फी लेने वालों और इसे एक नज़र देखने वालों की भीड़ लग जाती है। इसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से आ रहे हैं। इससे पहले पुष्कर मेले में भी इसने खूब सुर्खियां बटोरी थीं।

ब्रह्मोस

ब्रह्मोस-एक शौक

‘ब्रह्मोस’ ने साबित कर दिया है कि शौक बड़ी चीज है। 15 लीटर दूध और शाही लाइफस्टाइल जीने वाला यह घोड़ा वाकई में ‘हॉर्स पावर’ का असली उदाहरण है।

आपका क्या सोचना है?

क्या आप एक घोड़े के लिए 15 करोड़ रुपये देने की सोच सकते हैं? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर लिखें!

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भोजपुर में सनसनी : तियर के जादोपुर में खाद दुकानदार की बेरहमी से हत्या, अर्द्धनिर्मित मकान से मिला शव

भोजपुर

बिहार के भोजपुर जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। तियर थाना क्षेत्र के जादोपुर गांव में अपराधियों ने एक खाद दुकानदार की धारदार हथियार से मारकर हत्या कर दी है। मृतक का शव शनिवार की सुबह गांव के ही एक निर्माणाधीन मकान (अर्द्धनिर्मित घर) से बरामद हुआ। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और गुस्साए ग्रामीणों ने सड़क जाम कर प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया है।

घटना का पूरा विवरण

कौन थे मृतक?

मृतक की पहचान जादोपुर गांव के निवासी परमात्मा सिंह उर्फ अरविंद सिंह (उम्र लगभग 42 वर्ष) के रूप में हुई है। वे सिद्धनाथ सिंह के पुत्र थे और गांव में ही खाद-बीज की दुकान चलाते थे। इसके साथ ही वे खेती-बारी का काम भी संभालते थे।

शुक्रवार की रात क्या हुआ था?

परिजनों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, घटना की शुरुआत शुक्रवार (12 दिसंबर 2025) की रात को हुई:

  • परमात्मा सिंह रात के करीब 9:30 बजे अपने घर से निकले थे।
  • जब वे देर रात तक घर नहीं लौटे, तो परिजनों को चिंता हुई, लेकिन उनकी कोई खोज-खबर नहीं मिल सकी।
  • शनिवार की सुबह, गांव के मुसहरी टोला मैदान के पास स्थित एक अर्द्धनिर्मित मकान के पीछे उनका शव पड़ा मिला।

भोजपुर

हत्या का तरीका और मौके से मिले सुराग

पुलिस की शुरुआती जांच और घटनास्थल की स्थिति को देखकर लगता है कि हत्या किसी रंजिश या विवाद के चलते की गई है।

  • चोट के निशान: मृतक के सिर पर गहरे जख्म के निशान हैं, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि किसी धारदार हथियार से वार कर उनकी हत्या की गई है। अधिक खून बहने से उनकी मौत हुई।
  • बरामद सामान: पुलिस को शव के पास से मृतक का मोबाइल फोन, देसी शराब के पाउच और खाने-पीने का कुछ सामान मिला है।
  • आशंका: पुलिस यह मानकर चल रही है कि हत्या से पहले वहां खाने-पीने का दौर चला होगा और उसी दौरान किसी विवाद में इस घटना को अंजाम दिया गया।

पुलिस कार्रवाई और जांच

घटना की सूचना मिलते ही तियर थाना पुलिस और वरीय अधिकारी मौके पर पहुंचे।

  • अधिकारियों का दौरा: एसडीपीओ (SDPO) राजेश कुमार शर्मा और तियर थानाध्यक्ष राजीव रंजन ने दलबल के साथ घटनास्थल का मुआयना किया।
  • FSL टीम की जांच: वैज्ञानिक तरीके से सबूत इकट्ठा करने के लिए आरा से फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) की टीम को बुलाया गया। टीम ने खून के नमूने और अन्य साक्ष्य जमा किए हैं।
  • जांच के एंगल: भोजपुर एसपी (SP) राज ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष टीम का गठन किया है। पुलिस जमीनी विवाद, पुरानी रंजिश और दोस्तों के बीच विवाद—इन तीनों एंगल से जांच कर रही है।
  • मोबाइल कॉल डिटेल्स: मृतक के मोबाइल की कॉल डिटेल्स (CDR) खंगाली जा रही हैं ताकि यह पता चल सके कि रात में उनकी आखिरी बात किससे हुई थी।

भोजपुर

ग्रामीणों का आक्रोश और सड़क जाम

शनिवार की सुबह जैसे ही हत्या की खबर फैली, जादोपुर गांव के लोग आक्रोशित हो गए।

  • सैकड़ों ग्रामीणों ने शव को उठाने से रोक दिया और मुआवजे व अपराधियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर सड़क जाम कर दिया।
  • काफी मशक्कत और पुलिस के समझाने-बुझाने के बाद जाम हटाया गया और शव को पोस्टमार्टम के लिए आरा सदर अस्पताल भेजा गया।

यह घटना भोजपुर में कानून व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। एक साधारण व्यापारी की हत्या ने लोगों के मन में असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। फिलहाल पुलिस ने दावा किया है कि वे जल्द ही अपराधियों को गिरफ्तार कर लेंगे। इस हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस तकनीकी सर्विलांस का भी सहारा ले रही है।

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Rajasthan की Sambhar Lake हुई Pink: जानिए इस 1 अनोखे कुदरती जादू के पीछे का पूरा Science और सच

Sambhar Lake

क्या आपने राजस्थान की गुलाबी झील देखी है? जानिए क्यों Sambhar Lake का रंग Pink हो गया है और कैसे हजारों Flamingos इस जादू का हिस्सा हैं। पढ़ें पूरी रिपोर्ट। अगर आप सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं, तो आपने पिछले कुछ दिनों में Rajasthan की Sambhar Lake की वायरल तस्वीरें जरूर देखी होंगी। तस्वीरों में झील का पानी नीला नहीं, बल्कि गहरा Pink (गुलाबी) दिखाई दे रहा है।

पहली नज़र में यह किसी फोटो एडिटिंग या फिल्टर का कमाल लगता है, लेकिन रुकिए! यह 100% सच है। भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील (Inland Salt Lake) ने अपना रंग बदल लिया है। लेकिन ऐसा क्यों हुआ? क्या यह किसी तरह का Pollution है या फिर कुदरत का कोई करिश्मा? आज के इस ब्लॉग में हम इस रहस्य से पर्दा उठाएंगे और आपको बताएंगे कि आपको यहाँ क्यों जाना चाहिए।

Sambhar Lake

आखिर Sambhar Lake का पानी गुलाबी (Pink) क्यों हुआ?

सबसे बड़ा सवाल यही है—पानी का रंग लाल या गुलाबी क्यों? इसके पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि Biology और Chemistry का एक बेहतरीन तालमेल है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बदलाव का मुख्य कारण एक विशेष प्रकार का Algae (शैवाल) है, जिसका नाम ‘Dunaliella Salina’ है।

  • नमक का खेल: सांभर झील में नमक की मात्रा (Salinity) बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।
  • सर्वाइवल मोड: इतने खारे पानी में आम पौधे या जीव मर जाते हैं, लेकिन Dunaliella Salina और Halophilic Bacteria (नमक प्रेमी बैक्टीरिया) पनपते हैं।
  • रंग बदलना: सूरज की तेज रोशनी और नमक से खुद को बचाने के लिए, ये Algae एक लाल-नारंगी रंग का पिगमेंट छोड़ते हैं जिसे Beta-Carotene कहते हैं।

यही Beta-Carotene पानी में घुल जाता है और पूरी झील को एक Pink Carpet की तरह बदल देता है। यह वही तत्व है जो गाजर (Carrot) को उसका नारंगी रंग देता है।

Flamingos और Pink Lake का गहरा Connection

इस झील की खूबसूरती सिर्फ पानी तक सीमित नहीं है। यहाँ आने वाले हजारों Flamingos (राजहंस) इस दृश्य को और भी जादुई बना देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि Flamingos और इस गुलाबी पानी के बीच एक गहरा रिश्ता है?

असल में, Flamingos जन्म से गुलाबी नहीं होते। जब वे पैदा होते हैं, तो वे ग्रे (Grey) या सफेद रंग के होते हैं।

  • खाना और रंग: ये पक्षी झील में मौजूद उसी Algae और छोटे झींगों को खाते हैं।
  • पिगमेंट का असर: Algae में मौजूद वही Beta-Carotene धीरे-धीरे इन पक्षियों के शरीर में जमा होने लगता है।
  • नतीजा: जैसे-जैसे वे इसे खाते हैं, उनके पंख (Feathers) शानदार गुलाबी रंग के हो जाते हैं।

यानी, झील ने पक्षियों को खाना दिया, और पक्षियों ने झील के रंग को ओढ़ लिया। यह Ecosystem का एक बेहतरीन उदाहरण है।

Sambhar Lake

क्या यह पर्यटकों के लिए सुरक्षित है? (Safety & Tourism)

बहुत से लोग यह सोचते हैं कि क्या रंग बदलने वाली यह झील खतरनाक है? जवाब है—नहीं। पर्यटकों के लिए यह बिल्कुल सुरक्षित है, बस आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। यह झील Photographers और Nature Lovers के लिए जन्नत बन चुकी है। दूर-दूर तक फैली सफेद नमक की परत और उस पर जमा गुलाबी पानी—यह नज़ारा भारत में शायद ही कहीं और देखने को मिले।

हालांकि, यह एक दलदली क्षेत्र (Marshy Land) है, इसलिए पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी गाड़ी झील के एकदम बीच में न ले जाएं और गाइड के निर्देशों का पालन करें।

यहाँ घूमने जाने का सही समय (Best Time to Visit)

अगर आप इस नज़ारे को अपनी आँखों से देखना चाहते हैं, तो टाइमिंग बहुत जरूरी है।

सही मौसम: November से March के बीच का समय सबसे बेहतरीन होता है।

क्यों: सर्दियों में ही वाष्पीकरण (Evaporation) कम होता है और पानी में नमक की सांद्रता (Concentration) सही मात्रा में होती है जिससे Algae पनपते हैं। साथ ही, यही वह समय है जब साइबेरिया और मध्य एशिया से हजारों Migratory Birds यहाँ आते हैं।

5. कैसे पहुंचें Sambhar Lake? (How to Reach)

सांभर झील राजस्थान की राजधानी Jaipur के काफी करीब है, जिससे यहाँ पहुंचना बहुत आसान है।

  • By Road: जयपुर से यह झील लगभग 80 किलोमीटर दूर है। आप अपनी कार या टैक्सी से 1.5 से 2 घंटे में यहाँ आराम से पहुंच सकते हैं।
  • By Train: सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन Phulera Junction है, जहाँ से झील बहुत पास है। सांभर लेक स्टेशन भी एक विकल्प है।
  • By Air: नजदीकी एयरपोर्ट Jaipur International Airport है।

कुदरत की अनोखी कलाकारी

Sambhar Lake का गुलाबी होना हमें यह याद दिलाता है कि कुदरत सबसे बड़ी कलाकार है। जहाँ एक तरफ हम प्रदूषण की खबरें सुनते हैं, वहीं प्रकृति का यह रूप मन को सुकून देता है।

अगर आप इस वीकेंड किसी अनोखी जगह जाने का प्लान बना रहे हैं, तो सांभर झील आपकी लिस्ट में सबसे ऊपर होनी चाहिए। बस याद रखें, वहां गंदगी न फैलाएं और इस Eco-sensitive zone का सम्मान करें।

Sambhar Lake

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q: सांभर झील का पानी गुलाबी कब होता है?

A: आमतौर पर सर्दियों के दौरान जब लवणता (Salinity) बढ़ती है और Algae पनपते हैं।

Q: क्या हम सांभर झील के पानी में नहा सकते हैं?

A: यह खारे पानी की झील है और दलदली है, इसलिए नहाने की सलाह नहीं दी जाती।

Q: क्या यह रंग हमेशा के लिए रहता है?

A: नहीं, जैसे ही मौसम बदलता है या बारिश होती है और नमक की मात्रा कम होती है, रंग वापस सामान्य हो जाता है।

आपको यह जानकारी कैसी लगी? कमेंट करके हमें जरूर बताएं और अपने दोस्तों के साथ यह पोस्ट शेयर करना न भूलें!

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बड़ी जीत: कोविड ड्यूटी में जान गंवाने वाले प्राइवेट डॉक्टर्स के परिवारों को मिलेंगे 50 लाख, सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

डॉक्टर्स

क्या आपको कोरोना का वह भयानक दौर याद है? जब हम और आप घरों में बंद थे, तब डॉक्टर्स अपनी जान की परवाह किए बिना अस्पतालों में ‘देवदूत’ बनकर खड़े थे। दुख की बात यह है कि इस जंग में कई डॉक्टर्स ने अपनी जान गंवा दी। लेकिन जब मुआवजे की बात आई, तो कई प्राइवेट डॉक्टर्स (Private Doctors) के परिवारों को नियमों का हवाला देकर खाली हाथ लौटा दिया गया।

लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है जिसने हजारों परिवारों को ‘इंसाफ’ की उम्मीद दी है। आइए जानते हैं क्या है यह पूरा मामला और कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: भेदभाव नहीं, सम्मान मिलेगा

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि कोविड ड्यूटी (Covid Duty) के दौरान जान गंवाने वाले डॉक्टर्स, चाहे वे सरकारी हों या प्राइवेट, उनके परिवार 50 लाख रुपये के बीमा (Insurance Compensation) के हकदार हैं।

डॉक्टर्स

कोर्ट ने कहा कि कोरोना जैसी महामारी के दौरान प्राइवेट डॉक्टर्स ने भी उसी शिद्दत से सेवा की है जैसे सरकारी डॉक्टर्स ने। इसलिए, मुआवजे के समय उनके साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता।

बीमा कंपनियों की मनमानी पर लगाम

अक्सर देखा गया था कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज (PMGKP) के तहत जब प्राइवेट डॉक्टर्स के परिवार क्लेम करते थे, तो बीमा कंपनियां या प्रशासन “तकनीकी खामियों” का हवाला देकर क्लेम रिजेक्ट कर देते थे।

सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा : “कल्याणकारी योजनाओं का मकसद पीड़ित परिवारों को सहारा देना है, न कि तकनीकी आधार पर उन्हें उनके हक से वंचित करना। अगर डॉक्टर ड्यूटी पर था और कोविड से उसकी जान गई, तो परिवार को पैसा मिलना चाहिए।”

इस फैसले की 4 बड़ी बातें जो आपको जाननी चाहिए

  • प्राइवेट डॉक्टर्स भी शामिल: अब यह बहस खत्म हो गई है कि डॉक्टर सरकारी पे-रोल पर था या नहीं। अगर उसने कोविड वार्ड या ड्यूटी के दौरान काम किया है, तो वह कवर होगा।
  • कागजी अड़चनें खत्म: कोर्ट ने कहा है कि दस्तावेजों की कमी या छोटी-मोटी तकनीकी वजहों से क्लेम नहीं रोका जाएगा।
  • समानता का अधिकार: कोर्ट ने माना कि वायरस यह देखकर हमला नहीं करता कि डॉक्टर सरकारी है या प्राइवेट, तो फिर सरकार भेदभाव क्यों करे?
  • बीमा राशि: यह राशि 50 लाख रुपये है, जो पीड़ित परिवार के भविष्य के लिए एक बड़ा सहारा बनेगी।

डॉक्टर्स

यह फैसला क्यों जरूरी था?

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के मुताबिक, कोविड की दोनों लहरों में सैकड़ों डॉक्टर्स शहीद हुए थे। इनमें से बड़ी संख्या प्राइवेट प्रैक्टिशनर्स की थी जिन्होंने अपने क्लीनिक बंद कर सरकारी सिस्टम का साथ दिया था। यह फैसला उन परिवारों के लिए सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि उस ‘बलिदान का सम्मान’ है।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल एक कानूनी जीत है, बल्कि यह मानवता की जीत है। यह संदेश देता है कि देश अपने ‘कोरोना वॉरियर्स’ के बलिदान को भूला नहीं है। अगर आपके संपर्क में भी ऐसा कोई परिवार है जिसे क्लेम नहीं मिला था, तो उन तक यह खबर जरूर पहुंचाएं।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q: क्या यह फैसला सिर्फ सरकारी डॉक्टरों के लिए है?

A: नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि कोविड ड्यूटी पर तैनात प्राइवेट डॉक्टर्स भी इसके हकदार हैं।

Q: मुआवजे की राशि कितनी है?

A: प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के तहत 50 लाख रुपये।

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महाप्रसादम की वापसी : अब तिरुपति के लड्डुओं की जांच होगी ‘हाई-टेक’, क्वालिटी के लिए TTD ने उठाए 5 सख्त कदम!

तिरुपति

तिरुपति बालाजी का प्रसाद यानी ‘लड्डू’ (Tirupati Laddu) सिर्फ एक मिठाई नहीं, करोड़ों भक्तों की आस्था है। लेकिन पिछले दिनों हुई मिलावट की खबरों ने हम सभी को झकझोर कर रख दिया था। क्या आपके मन में भी सवाल था कि अब प्रसाद कितना शुद्ध है?

तो अब खुश हो जाइए! तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने प्रसादम की पवित्रता लौटाने के लिए अब तक के सबसे सख्त कदम उठाए हैं। अब भगवान के भोग में रत्ती भर भी मिलावट की गुंजाइश नहीं होगी। आइए जानते हैं क्या हैं ये नए और कड़े नियम।

क्या है नया फैसला?

हाल ही में हुए विवादों के बाद, TTD प्रशासन ने तय किया है कि लड्डू प्रसादम की गुणवत्ता (Quality Check) से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इसके लिए मंदिर प्रशासन ने FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) के साथ मिलकर एक वर्ल्ड-क्लास टेस्टिंग लैब मंदिर परिसर के अंदर ही स्थापित करने का फैसला किया है।

तिरुपति

अब घी की एक-एक बूंद और काजू-किशमिश का एक-एक दाना लैब टेस्ट पास करने के बाद ही ‘पोटु’ (मंदिर की रसोई) में प्रवेश करेगा |

शुद्धता की गारंटी के लिए 5 बड़े बदलाव

प्रसादम की पुरानी महिमा लौटाने के लिए TTD ने ये 5 ऐतिहासिक फैसले लिए हैं:

  • जर्मन मशीनों से निगरानी: प्रसादम बनाने वाली रसोई में अब अत्याधुनिक जर्मन मशीनें लगाई जा रही हैं। ये मशीनें ऑटोमैटिक तरीके से सामग्री को स्कैन करेंगी और अगर किसी चीज में हल्की सी भी गड़बड़ मिली, तो उसे तुरंत रिजेक्ट कर देंगी।
  • इन-हाउस लैब (In-House Lab): पहले सैंपल बाहर की लैब्स में भेजे जाते थे, जिसमें वक्त लगता था। अब मंदिर का अपना लैब होगा, जहाँ FSSAI के एक्सपर्ट्स की निगरानी में 24×7 टेस्टिंग होगी।
  • घी की ‘डीएनए’ जांच: सबसे ज्यादा विवाद घी को लेकर था। अब शुद्ध देसी गाय के घी (Cow Ghee) की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए ‘एडवांस्ड एडल्ट्रेशन टेस्टिंग’ (Advanced Adulteration Testing) होगी, जो किसी भी तरह की वनस्पति या जानवरों की चर्बी की मिलावट पकड़ लेगी।
  • ब्लैकलिस्ट हुए पुराने सप्लायर्स: जिन कंपनियों ने पहले मिलावटी घी सप्लाई किया था, उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। अब सप्लाई का टेंडर सिर्फ उन डेयरियों को मिलेगा जो कड़ी शर्तों पर खरी उतरेंगी।
  • सीबीआई (CBI) की नजर: मामले की गंभीरता को देखते हुए पुराने घोटालों की जांच सीबीआई (CBI) की SIT कर रही है, जिससे नए सप्लायर्स और अधिकारियों में डर बना रहे और वे गलती करने की सोचें भी नहीं।

तिरुपति

भक्तों के लिए क्या बदला?

TTD के नए एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (EO) ने भरोसा दिलाया है कि भक्तों को अब वही पुराना ‘दिव्य स्वाद’ (Divine Taste) मिलेगा। प्रसादम की शेल्फ-लाइफ (खराब न होने की अवधि) भी बढ़ेगी और शुद्धता की 100% गारंटी होगी।

आस्था के साथ खिलवाड़ अब इतिहास बन चुका है। TTD के ये सख्त कदम बताते हैं कि भगवान वेंकटेश्वर के भक्तों की भावनाओं का सम्मान सर्वोपरि है। अगली बार जब आप तिरुपति जाएं और हाथ में वह पवित्र लड्डू लें, तो निश्चिंत होकर ग्रहण करें—क्योंकि वह अब पूरी तरह शुद्ध है।

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रोहतास में तेंदुए का खौफ खत्म – 12 लोगों को घायल करने के बाद वन विभाग ने ऐसे किया रेस्क्यू (Live Updates)

रोहतास

बिहार के रोहतास (Rohtas) जिले के ग्रामीण इलाकों में पिछले 24 घंटों से दहशत का माहौल था। कोचस (Kochas) के रिहायशी इलाके में अचानक एक तेंदुआ (Leopard) घुस आया, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। शुरुआत में खबर थी कि तेंदुए ने दो लोगों को घायल किया है, लेकिन ताज़ा जानकारी के मुताबिक, इस हमले में 12 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें वन विभाग के कर्मचारी भी शामिल हैं।

इस ब्लॉग पोस्ट में जानिए पूरी घटना, कैसे वन विभाग ने जान पर खेलकर तेंदुए को काबू किया, और ऐसे हालात में आपको क्या सावधानी बरतनी चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

बुधवार की सुबह रोहतास जिले के कोचस नगर पंचायत (Ward No. 3) और आस-पास के ग्रामीण इलाकों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब लोगों ने एक तेंदुए को खुलेआम घूमते देखा।

• समय: सुबह के वक्त जब किसान खेतों में काम कर रहे थे।

• स्थान: कोचस पावर हाउस के पास और धर्मावती नदी के तटबंध।

• Eye witness के अनुसार: तेंदुआ पहले खेतों में छिपा था, लेकिन शोर मचने पर वह आबादी वाले इलाके की तरफ भागा। वहां उसने सबसे पहले दो ग्रामीणों पर हमला किया। इसके बाद भीड़ जमा हो गई, जिससे घबराकर तेंदुआ और आक्रामक हो गया।

रोहतास

शुरुआती खबर: 2 घायल, लेकिन आंकड़ा बढ़ा

शुरुआत में केवल दो लोगों के घायल होने की खबर आई थी, लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ा, घायलों की संख्या बढ़ती गई। तेंदुए ने अपने बचाव में इधर-उधर भागते हुए कई लोगों को निशाना बनाया।

• कुल घायल: 12 से 14 लोग (रिपोर्ट्स के अनुसार)।

• गंभीर रूप से घायल: स्थानीय निवासी संतोष प्रसाद, जिन्हें सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं।

• वन विभाग की टीम पर हमला: रेस्क्यू के दौरान वन रक्षक सुरेश साह, राजीव कुमार और विवेक कुमार भी घायल हो गए।

Note: सभी घायलों को तुरंत स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और सासाराम सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

वन विभाग का रेस्क्यू ऑपरेशन: 3 घंटे का हाई-वोल्टेज ड्रामा

सूचना मिलते ही रोहतास के डीएफओ (DFO) स्टालिन फीडल कुमार के नेतृत्व में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। यह ऑपरेशन आसान नहीं था क्योंकि हजारों की भीड़ वहां जमा हो गई थी, जो वीडियो बनाने और पत्थर फेंकने में लगी थी।

• घेराबंदी: टीम ने उस निर्माणाधीन मकान को घेर लिया जहां तेंदुआ छिपा था।

• जाल बिछाया: तेंदुए को पकड़ने के लिए जाल (Net) और ट्रैंकुलाइजर गन का इस्तेमाल किया गया।

• सफलता: करीब 3 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद शाम को तेंदुए को सुरक्षित पिंजरे में कैद कर लिया गया।

• कहाँ भेजा गया: पकड़े गए तेंदुए को राजगीर चिड़ियाघर (Rajgir Zoo/Safari) भेजने की तैयारी की गई है।

क्यों रिहायशी इलाकों में आ रहे हैं तेंदुए?

विशेषज्ञों का मानना है कि कोचस से कैमूर वन्यजीव अभयारण्य (Kaimur Wildlife Sanctuary) की दूरी लगभग 60-70 किलोमीटर है। संभवतः यह तेंदुआ रास्ता भटककर सोन नदी या नहरों के किनारे-किनारे यहां तक पहुंच गया। भोजन और पानी की तलाश अक्सर जंगली जानवरों को गांवों की ओर खींच लाती है।

रोहतास

सावधान रहें: वन विभाग की अपील

भले ही यह तेंदुआ पकड़ा गया हो, लेकिन वन विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। अगर कभी आपके इलाके में जंगली जानवर दिखे, तो ये कदम उठाएं:

• भीड़ न लगाएं: जानवर को घेरने या वीडियो बनाने की कोशिश न करें, इससे वह आक्रामक हो जाता है।

• पत्थर न मारें: उसे उकसाने से हमला होने का खतरा बढ़ जाता है।

• सुरक्षित स्थान पर रहें: तुरंत अपने घरों के अंदर जाएं और दरवाजे-खिड़कियां बंद कर लें।

• वन विभाग को सूचित करें: पुलिस या वन विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर तुरंत कॉल करें।

रोहतास के लोगों के लिए यह राहत की खबर है कि आदमखोर तेंदुए को पकड़ लिया गया है। वन विभाग की टीम ने अपनी जान जोखिम में डालकर इस रेस्क्यू ऑपरेशन को सफल बनाया। हम सभी घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं।

क्या आपके क्षेत्र में भी कभी ऐसी घटना हुई है? कमेंट में हमें जरूर बताएं और इस न्यूज़ को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि लोग जागरूक हो सकें।

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Buxar Job Alert: 12 दिसंबर को टाटा स्टील में नौकरी का मौका! बक्सर ITI में लगेगा महा-रोजगार मेला – जानें पूरी डिटेल्स

Buxar

क्या आप बक्सर (Buxar) या इसके आस-पास के जिले के रहने वाले हैं और एक अच्छी प्राइवेट नौकरी की तलाश में हैं? तो आपके लिए 12 दिसंबर का दिन एक बड़ी खुशखबरी लेकर आ रहा है। बिहार सरकार के श्रम संसाधन विभाग और जिला नियोजनालय द्वारा बक्सर में एक एक दिवसीय रोजगार शिविर (One Day Job Camp) का आयोजन किया जा रहा है।

सबसे खास बात यह है कि इस मेले में देश की नामी कंपनी टाटा स्टील (Tata Steel) समेत कई बड़ी कंपनियां युवाओं को भर्ती करने आ रही हैं। अगर आपके पास हुनर है, तो नौकरी पक्की समझिए!

आइए जानते हैं इस रोजगार मेले का समय, स्थान, योग्यता और ले जाने वाले जरूरी डाक्यूमेंट्स की पूरी जानकारी।

Buxar

कहाँ और कब लगेगा रोजगार मेला ?

जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय, बक्सर द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह कैंप सरकारी आईटीआई परिसर में लगाया जाएगा।

• तारीख: 12 दिसंबर 2025 (बृहस्पतिवार)

• समय: सुबह 10:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक

• स्थान: संयुक्त श्रम भवन, (सरकारी ITI कैंपस), बक्सर।

कौन सी कंपनियां आ रही हैं और किस पद पर होगी भर्ती?

इस रोजगार शिविर का मुख्य आकर्षण टाटा स्टील टेक्निकल सर्विसेज (Tata Steel Technical Services) है। इसके अलावा क्वेस कॉर्प (Quess Corp) जैसी प्रतिष्ठित प्लेसमेंट एजेंसी भी इसमें भाग ले रही है।

मुख्य पद (Job Profiles):

• सुपरवाइजर (Supervisor)

• टेक्निशियन (Technician)

• हेल्पर / ट्रेनी (Helper/Trainee)

• अन्य तकनीकी पद

नोट: कंपनियों द्वारा चयनित उम्मीदवारों को उनकी योग्यता के अनुसार वेतन (Salary) और अन्य सुविधाएं (PF, ESI) दी जाएंगी। टाटा स्टील जैसी कंपनी में करियर शुरू करने का यह एक बेहतरीन अवसर है।

योग्यता (Eligibility Criteria)

इस रोजगार मेले में शामिल होने के लिए अलग-अलग पदों के लिए अलग-अलग योग्यता मांगी गई है:

• शैक्षणिक योग्यता: 10वीं पास, 12वीं पास।

• तकनीकी योग्यता: ITI (फिटर, इलेक्ट्रिशियन, वेल्डर आदि ट्रेड में) पास होना अनिवार्य हो सकता है (विशेषकर टाटा स्टील के लिए)।

• आयु सीमा: 18 वर्ष से 35 वर्ष (कंपनी के नियमों के अनुसार)।

Buxar

साथ में कौन से डाक्यूमेंट्स लेकर जाएं?

अगर आप इस कैंप में भाग लेने जा रहे हैं, तो नीचे दिए गए दस्तावेजों की ओरिजिनल कॉपी और 2 सेट फोटोकॉपी जरूर साथ रखें:

• बायोडाटा / रिज्यूम (Updated Resume) – यह सबसे जरूरी है।

• आधार कार्ड (पहचान पत्र के रूप में)।

• शैक्षणिक प्रमाण पत्र (10वीं, 12वीं, ITI की मार्कशीट)।

• पासपोर्ट साइज फोटो (कम से कम 4 रंगीन फोटो)।

• पैन कार्ड (यदि हो तो)।

• NCS निबंधन: अगर आपने नेशनल करियर सर्विस (NCS) पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन किया है, तो उसका नंबर। (नहीं किया है तो वहां भी हो सकता है, लेकिन पहले से करके जाना बेहतर है)।

आपको वहां क्यों जाना चाहिए?

अक्सर हम नौकरी के लिए बड़े शहरों (दिल्ली, मुंबई) की तरफ भागते हैं, लेकिन जब बक्सर जैसे हमारे अपने जिले में टाटा जैसी कंपनी आ रही है, तो इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहिए। यह ‘ऑन-स्पॉट’ इंटरव्यू और सेलेक्शन का मौका है।

बक्सर और रोहतास के युवाओं के लिए यह रोजगार मेला (Rojgar Mela) एक सुनहरा अवसर है। 12 दिसंबर को अपने सारे कागजात तैयार रखें और बक्सर ITI पहुंचें।

इस खबर को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जिन्हें नौकरी की सख्त जरूरत है।

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दुनिया के 4 अनोखे पहाड़ Top 10: सबसे ऊंचे, सुंदर, खतरनाक और बर्फीले पहाड़ों की Ultimate List! (2025 Edition)

पहाड़

पहाड़… ये सिर्फ पत्थर और बर्फ के ढेर नहीं हैं, बल्कि ये प्रकृति की सबसे भव्य कलाकारी हैं। कभी ये अपनी ऊंचाई से हमें चुनौती देते हैं, तो कभी अपनी सुंदरता से हमारा मन मोह लेते हैं।

आज International Mountain Day के मौके पर हम आपके लिए लाए हैं एक ऐसी लिस्ट जो आपको इंटरनेट पर एक साथ कहीं नहीं मिलेगी। आज हम जानेंगे दुनिया के Top 10 पहाड़ों के बारे में, लेकिन सिर्फ ऊंचाई के हिसाब से नहीं, बल्कि उनकी सुंदरता (Beauty), खतरे (Danger) और ग्लेशियर्स (Glaciers) के हिसाब से भी।

तो चलिए, घर बैठे इन बर्फीली चोटियों की सैर करते हैं! 🏔️✈️

पहाड़

1. ऊंचाई के बादशाह: दुनिया के 10 सबसे ऊंचे पहाड़ (By Height)

जब बात कद की आती है, तो एशिया के हिमालय और कराकोरम रेंज का कोई मुकाबला नहीं है। दुनिया की सभी 14 चोटियां जो 8000 मीटर से ऊपर हैं, वो यहीं हैं।

  1. Mount Everest (नेपाल/चीन): 8,848.86 मीटर (दुनिया की छत)।
  2. K2 (पाकिस्तान/चीन): 8,611 मीटर (पहाड़ों का राजा)।
  3. Kangchenjunga (भारत/नेपाल): 8,586 मीटर (भारत का गर्व)।
  4. Lhotse (नेपाल/चीन): 8,516 मीटर।
  5. Makalu (नेपाल/चीन): 8,485 मीटर।
  6. Cho Oyu (नेपाल/चीन): 8,188 मीटर।
  7. Dhaulagiri (नेपाल): 8,167 मीटर।
  8. Manaslu (नेपाल): 8,163 मीटर।
  9. Nanga Parbat (पाकिस्तान): 8,126 मीटर।
  10. Annapurna I (नेपाल): 8,091 मीटर।

2. जन्नत का नज़ारा: दुनिया के 10 सबसे सुंदर पहाड़ (By Beauty)

ऊंचाई सब कुछ नहीं होती। कुछ पहाड़ इतने खूबसूरत हैं कि उन्हें देखकर लगता है किसी चित्रकार ने पेंटिंग बनाई हो। फोटोग्राफर्स के लिए ये लिस्ट किसी सपने से कम नहीं है।

  1. Ama Dablam (नेपाल): इसे ‘मदर्स नेकलेस’ कहा जाता है। इसकी बनावट दुनिया में सबसे अनोखी मानी जाती है।
  2. Matterhorn (स्विट्जरलैंड/इटली): पिरामिड जैसा यह पहाड़ यूरोप की पहचान है।
  3. Kirkjufell (आइसलैंड): ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’ फेम यह पहाड़ दुनिया में सबसे ज्यादा फोटोग्राफ किया जाने वाला पहाड़ है।
  4. Mount Fuji (जापान): अपनी परफेक्ट ज्वालामुखी शेप (Cone Shape) के लिए मशहूर।
  5. Fitz Roy (अर्जेंटीना/चिली): बादलों को चीरती हुई इसकी नुकीली चोटियां अद्भुत लगती हैं।
  6. Alpamayo (पेरू): इसे कई बार ‘दुनिया का सबसे सुंदर पहाड़’ चुना गया है।
  7. Machapuchare (नेपाल): मछली की पूंछ जैसा आकार, जिसे शिव का निवास माना जाता है (इस पर चढ़ना मना है)।
  8. Denali (USA): उत्तरी अमेरिका का सबसे ऊंचा और भव्य पहाड़।
  9. Table Mountain (साउथ अफ्रीका): ऊपर से बिल्कुल सपाट, कुदरत का करिश्मा।
  10. Tre Cime di Lavaredo (इटली): डोलोमाइट्स की तीन विशाल चट्टानें।

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3. मौत का कुआं: दुनिया के 10 सबसे खतरनाक पहाड़ (By Danger)

सुंदरता के पीछे मौत भी छिपी होती है। ये वो पहाड़ हैं जहां चढ़ना मतलब जान हथेली पर रखना है। इनका ‘Death Rate’ सबसे ज्यादा है।

  1. Annapurna I (नेपाल): इसे सबसे जानलेवा माना जाता है (30% से ज्यादा मृत्यु दर)।
  2. K2 (पाकिस्तान): इसे ‘Savage Mountain’ कहते हैं, क्योंकि यह कभी रहम नहीं करता।
  3. Nanga Parbat (पाकिस्तान): इसका निकनेम ही ‘Killer Mountain’ है।
  4. The Eiger (स्विट्जरलैंड): इसकी नॉर्डवैंड (Nordwand) दीवार को ‘Murder Wall’ कहा जाता है।
  5. Kangchenjunga (भारत): यहां मौसम पल भर में बदलता है, जो जानलेवा साबित होता है।
  6. Baintha Brakk (The Ogre): पाकिस्तान का यह पहाड़ अपनी कठिन चढ़ाई के लिए कुख्यात है।
  7. Dhaulagiri (नेपाल): यहां के एवलांच (हिमस्खलन) बहुत भयानक होते हैं।
  8. Siula Grande (पेरू): फिल्म ‘टचिंग द वॉयड’ इसी पहाड़ की सच्ची और डरावनी घटना पर बनी है।
  9. Mont Blanc (फ्रांस/इटली): आसान समझकर यहां बहुत लोग जाते हैं और हादसों का शिकार होते हैं।
  10. Vinson Massif (अंटार्कटिका): यहां ठंड और अकेलापन इंसान को मार सकता है।

4. बर्फ के भंडार: सबसे बड़े ग्लेशियर वाले पहाड़/क्षेत्र (By Glacier Amount)

पहाड़

पहाड़ सिर्फ चट्टान नहीं, पानी का स्रोत भी हैं। ये वो पहाड़ और क्षेत्र हैं जहां बर्फ (Glaciers) का सबसे बड़ा जमावड़ा है। (ध्रुवों/Poles को छोड़कर)।

  1. Lambert Glacier (अंटार्कटिका के पहाड़): दुनिया का सबसे बड़ा ग्लेशियर।
  2. Siachen Glacier (भारत – कराकोरम): ध्रुवों के बाहर दुनिया का दूसरा सबसे लंबा और भारत का सबसे महत्वपूर्ण ग्लेशियर।
  3. Fedchenko Glacier (ताजिकिस्तान – पामीर पर्वत): दुनिया का सबसे लंबा नॉन-पोलर ग्लेशियर।
  4. Biafo Glacier (पाकिस्तान): यह 67 किमी लंबा बर्फ का हाईवे है।
  5. Baltoro Glacier (K2 क्षेत्र): यहां से दुनिया की कई सबसे ऊंची चोटियां दिखती हैं।
  6. Jostedalsbreen (नॉर्वे): महाद्वीपीय यूरोप का सबसे बड़ा ग्लेशियर।
  7. Southern Patagonian Ice Field (चिली/अर्जेंटीना): एंडीज पहाड़ों में बर्फ का विशाल भंडार।
  8. Gangotri Glacier (भारत – हिमालय): गंगा नदी का उद्गम स्थल और करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र।
  9. Vatnajökull (आइसलैंड): ज्वालामुखियों के ऊपर बसा विशाल ग्लेशियर।
  10. Khumbu Glacier (एवरेस्ट क्षेत्र): दुनिया का सबसे ऊंचा ग्लेशियर जहां पर्वतारोही बेस कैंप बनाते हैं।

पहाड़ – Lungs of our planet

चाहे वह एवरेस्ट की ऊंचाई हो, मैटरहॉर्न की सुंदरता, अन्नपूर्णा का खतरा हो या सियाचिन की जमी हुई झीलें—ये पहाड़ हमारे ग्रह के फेफड़े और पानी की टंकियां हैं।

पहाड़

2025 में, जिसे ‘International Year of Glaciers’ Preservation’ घोषित किया गया है, हमें कसम खानी चाहिए कि हम इन सफेद दिग्गजों (White Giants) को पिघलने से बचाएंगे।

आपका पसंदीदा पहाड़ कौन सा है?

क्या आप सुंदरता चुनेंगे या रोमांच? कमेंट में हमें जरूर बताएं! 🏔️💬

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International Mountain Day 2025: 5 बड़ी वजहें क्यों इस साल का ‘पहाड़ दिवस’ है सबसे खास? जानिए ‘मेल्टिंग जायंट्स’ का सच!

International Mountain Day

क्या आप जानते हैं कि आज, यानी 11 दिसंबर, सिर्फ एक तारीख नहीं बल्कि दुनिया के करोड़ों लोगों के लिए ‘जीवन’ का दिन है? आज पूरी दुनिया अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस (International Mountain Day) मना रही है। लेकिन रुकिए! 2025 का यह दिन पिछले सालों से बहुत अलग और बहुत खास है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने 2025 को “International Year of Glaciers’ Preservation” (ग्लेशियर्स के संरक्षण का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष) घोषित किया है।

पहाड़ सिर्फ पत्थर के ढेर नहीं हैं, ये हमारे ‘Water Towers’ हैं। अगर आप जानना चाहते हैं कि इस साल की थीम क्या है और भारत के हिमालय में अभी क्या चल रहा है, तो यह पोस्ट अंत तक पढ़ें।

1. 2025 की थीम: ‘ग्लेशियर्स’ क्यों हैं सेंटर स्टेज में?

हर साल इस दिन की एक थीम होती है, लेकिन 2025 की थीम सीधे हमारे अस्तित्व से जुड़ी है। इस वर्ष का फोकस “The Role of Glaciers in Mountain Ecosystems for Water, Food, and Livelihoods” पर है।

इसे आसान भाषा में समझें:

दुनिया के ग्लेशियर्स (हिमनद) तेजी से पिघल रहे हैं, जिन्हें वैज्ञानिक अब ‘Melting Giants’ (पिघलते हुए दानव) कह रहे हैं।

ग्लेशियर्स का पिघलना सिर्फ पहाड़ों की समस्या नहीं है; यह सीधे हमारी खेती, पीने के पानी और भोजन को प्रभावित करेगा।

पुणे में आज इसी मुद्दे पर ‘Melting Giants: A Wake-Up Call’ नाम का एक बड़ा कॉन्क्लेव भी हो रहा है।

2. भारत के लिए खतरे की घंटी (The Himalayan Warning)

हम भारतीयों के लिए यह दिन मनाना और भी ज़रूरी है क्योंकि हमारा हिमालय खतरे में है। हाल ही में आई रिपोर्ट्स ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं:

बाघों का पलायन: उत्तराखंड के बागेश्वर में 10,000 फीट की ऊंचाई पर एक ‘बंगाल टाइगर’ देखा गया है। आमतौर पर बाघ इतनी ऊंचाई पर नहीं होते, लेकिन जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण जानवरों के ठिकाने बदल रहे हैं।

प्रदूषण का कहर: हिमालयी क्षेत्रों में प्रदूषण के कारण ग्लेशियर्स पीछे खिसक रहे हैं (Glacier Retreat)। माउंट एवरेस्ट की ‘ग्लेशियर लाइन’ भी ऊपर की तरफ खिसक रही है, जो बेहद चिंताजनक है।

International Mountain Day

3. इतिहास: यह दिन शुरू कब हुआ?

पहाड़ों के महत्व को समझने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने सबसे पहले 2002 को ‘अंतर्राष्ट्रीय पर्वत वर्ष’ घोषित किया था। इसकी सफलता को देखते हुए, 2003 से हर साल 11 दिसंबर को ‘अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस’ के रूप में मनाया जाने लगा।

इसका मुख्य उद्देश्य पहाड़ों के विकास, वहां रहने वाले लोगों की समस्याओं और पर्यावरण संरक्षण पर दुनिया का ध्यान खींचना है।

4. अभी हम क्या कर रहे हैं? (Current Actions)

अच्छी खबर यह है कि लोग अब जाग रहे हैं। भारत में कई जगहों पर ज़मीनी स्तर पर काम शुरू हो गया है:

वृक्ष बचाओ अभियान: हाल ही में उत्तराखंड के उत्तरकाशी-गंगोत्री क्षेत्र में ‘पेड़ बचाओ यात्रा’ का समापन हुआ। इसमें स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों ने देवदार के पेड़ों को ‘रक्षा सूत्र’ बांधकर शपथ ली कि वे अंधाधुंध सड़क निर्माण के नाम पर हिमालय को बर्बाद नहीं होने देंगे।

टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल: ‘जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया’ (GSI) अब सैटेलाइट्स की मदद से ग्लेशियर्स की निगरानी कर रहा है ताकि पिघलती झीलों से आने वाली बाढ़ (GLOF) के खतरे को पहले ही भांपा जा सके।

5. एक छात्र या आम नागरिक के तौर पर आप क्या कर सकते हैं?

अगर हम पहाड़ पर नहीं रहते, तब भी हम मदद कर सकते हैं:

जागरूकता फैलाएं: सोशल मीडिया पर #MountainsMatter और #YearOfGlaciers2025 का उपयोग करें।

सस्टेनेबल टूरिज्म: जब भी पहाड़ों पर घूमने जाएं, तो ‘कचरा मुक्त’ यात्रा करें। प्लास्टिक की बोतलें वहां न छोड़ें।

ऊर्जा बचाएं: मैदानी इलाकों में बिजली बचाने से कार्बन उत्सर्जन कम होता है, जिससे पहाड़ों पर तापमान कम बढ़ता है।

International Mountain Day

पहाड़ बेहद जरूरी:-

पहाड़ हमें पानी देते हैं, हवा देते हैं और हमारी आत्मा को सुकून देते हैं। International Mountain Day 2025 हमें याद दिलाता है कि अगर ग्लेशियर्स खत्म हो गए, तो नदियां सूख जाएंगी और जीवन संकट में आ जाएगा।

आइए, आज हम प्रण लें कि हम अपनी ‘प्रकृति की छतों’ (Rooftops of the World) को बचाने के लिए अपना छोटा सा योगदान जरूर देंगे। 🏔️💧

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सूरत अग्निकांड: 7 मंजिला टेक्सटाइल मार्केट बनी आग का गोला, करोड़ों का माल जलकर खाक – ग्राउंड रिपोर्ट

सूरत

गुजरात के सूरत में टेक्सटाइल मार्केट की 7 मंजिला इमारत में लगी भीषण आग। करोड़ों का नुकसान, फायर ब्रिगेड की कड़ी मशक्कत। पढ़ें पूरी खबर और ताजा अपडेट यहाँ। सूरत: ‘डायमंड सिटी’ और ‘टेक्सटाइल हब’ के नाम से मशहूर सूरत शहर से आज एक बेहद डराने वाली खबर सामने आई है। सूरत के एक प्रमुख टेक्सटाइल मार्केट में अचानक आग लगने से हड़कंप मच गया। देखते ही देखते आग ने पूरी सात मंजिला (7-storey) इमारत को अपनी चपेट में ले लिया।

इस हादसे में भले ही किसी की जान नहीं गई, लेकिन व्यापारियों का करोड़ों रुपये का नुकसान होने की खबर है। आइए जानते हैं आखिर कैसे हुई यह घटना और अब वहां क्या हालात हैं।

सूरत

घटना कैसे हुई?

मीडिया रिपोर्ट्स और चश्मदीदों के मुताबिक, आग लगने की शुरुआत सुबह के वक्त हुई जब मार्केट खुलने की तैयारी हो रही थी। शुरुआत में एक दुकान से धुआं निकलता दिखा, लेकिन मार्केट में कपड़े, साड़ियाँ और सिंथेटिक मटीरियल होने की वजह से आग ने कुछ ही पलों में भयावह रूप ले लिया।

चंद मिनटों के अंदर आग नीचे से ऊपर की तरफ बढ़ी और पूरी 7 मंजिला इमारत से धुएं के गुबार निकलने लगे। आसमान में काला धुआं छा गया और आस-पास के इलाके में डर का माहौल बन गया। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए।

फायर ब्रिगेड का ‘ऑपरेशन रेस्क्यू’

घटना की जानकारी मिलते ही सूरत फायर डिपार्टमेंट ने तुरंत एक्शन लिया और युद्ध स्तर पर काम शुरू किया:

• मौके पर दर्जनों दमकल गाड़ियां (Fire Tenders) भेजी गईं।

• चूंकि इमारत 7 मंजिला थी, इसलिए आग बुझाने के लिए हाइड्रोलिक क्रेन (Hydraulic Cranes) का इस्तेमाल किया गया ताकि ऊपरी मंजिलों तक पानी की बौछार की जा सके।

• फायर फाइटर्स को आग पर काबू पाने में घंटों की कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

ताजा अपडेट: अभी मिली जानकारी के मुताबिक, आग पर काबू पा लिया गया है और फिलहाल ‘कूलिंग प्रोसेस’ चल रहा है ताकि आग दोबारा न धधक उठे।

करोड़ों का नुकसान: व्यापारियों पर टूटा कहर

सूरत का टेक्सटाइल मार्केट सिर्फ गुजरात नहीं, बल्कि पूरे देश के कपड़ा व्यापार का दिल माना जाता है। इस आग ने कई व्यापारियों की कमर तोड़ दी है।

माल का नुकसान: इस आग में तैयार साड़ियाँ, ड्रेस मटीरियल और कच्चा माल (Raw Material) जलकर राख हो गया है।

इंफ्रास्ट्रक्चर: कई दुकानों में रखा कैश, कंप्यूटर और मशीनरी भी पूरी तरह नष्ट हो गई है।

अनुमान: व्यापारियों का कहना है कि नुकसान का सही अनुमान लगाना अभी मुश्किल है, लेकिन यह आंकड़ा करोड़ों में होगा।

राहत की खबर: गनीमत यह रही कि इस भीषण आग में अभी तक किसी के हताहत (Casualty) होने की खबर नहीं है, क्योंकि हादसा उस वक्त हुआ जब मार्केट में भीड़ कम थी और ज्यादातर दुकानें बंद थीं।

क्यों लगती हैं सूरत के मार्केट में बार-बार आग?

सूरत में टेक्सटाइल मार्केट्स में आग लगना अब एक चिंता का विषय बन गया है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसके मुख्य कारण हो सकते हैं:

शॉर्ट सर्किट: ज्यादातर मामलों में पुरानी वायरिंग और ओवरलोडिंग आग का कारण बनती है।

फायर सेफ्टी की कमी: कई पुरानी इमारतों में फायर एग्जिट और सुरक्षा उपकरणों की भारी कमी होती है।

अत्यधिक भंडारण: दुकानों में क्षमता से अधिक माल ठोस-ठोस कर भरना, जिससे आग तेजी से फैलती है।

सूरत की इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन और व्यापारियों को फायर सेफ्टी के प्रति सचेत होने का संकेत दिया है। आग बुझ गई है, लेकिन व्यापारियों के लिए इस नुकसान से उबरना मुश्किल होगा। हमारी टीम ग्राउंड जीरो पर नजर बनाए हुए है।

आपका क्या मानना है? क्या सरकार को टेक्सटाइल मार्केट्स के लिए और सख्त सुरक्षा नियम बनाने चाहिए? कमेंट करके अपनी राय जरूर दें।

सूरत

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1: सूरत टेक्सटाइल मार्केट में आग कब लगी?

उत्तर: आग आज (10 दिसंबर) सुबह के वक्त लगी, जिसने 7 मंजिला इमारत को अपनी चपेट में ले लिया।

Q2: क्या सूरत आग हादसे में कोई घायल हुआ है?

उत्तर: अभी तक किसी की जान जाने या गंभीर रूप से घायल होने की खबर नहीं है, लेकिन संपत्ति का भारी नुकसान हुआ है।

Q3: आग लगने का कारण क्या था?

उत्तर: प्राथमिक जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने का कारण माना जा रहा है, हालांकि पुलिस और फायर डिपार्टमेंट अभी जांच कर रहे हैं।

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राजकोट में 6 साल की बच्ची के साथ हैवानियत, 100 लोगों से पूछताछ के बाद ऐसे पकड़ा गया 1 दरिंदा

राजकोट

गुजरात (Gujarat) के राजकोट जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। जिसे सुनकर हर किसी की रूह कांप जाए। राजकोट के आटकोट (Atkot) में एक 6 साल की मासूम बच्ची के साथ जिस तरह की दरिंदगी की गई, उसने एक बार फिर समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

इस राजकोट आटकोट रेप केस (Rajkot Atkot Rape Case) में पुलिस ने अपनी तत्परता दिखाते हुए 100 से ज्यादा लोगों से पूछताछ करने के बाद मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आज के इस ब्लॉग पोस्ट में हम आपको इस घटना की पूरी डिटेल्स, पुलिस की कार्यवाही और आरोपी की सच्चाई बताएंगे।

क्या है पूरा मामला? (The Incident Details)

यह दिल दहला देने वाली घटना 4 दिसंबर, 2025 की है। राजकोट जिले के जसदण तालुका के अंतर्गत आने वाले आटकोट (Atkot) गांव के पास एक खेत में कुछ मजदूर काम कर रहे थे।

यहाँ एक खेतिहर मजदूर परिवार अपनी 6 साल की बच्ची के साथ रहता था। माता-पिता खेत में काम करने में व्यस्त थे और बच्ची पास ही खेल रही थी। उसी दौरान, पास के खेत में काम करने वाले एक शख्स की नजर उस मासूम पर पड़ी। उसने बच्ची को अकेला पाकर उसे बहला-फुसला कर अगवा कर लिया और सुनसान जगह पर ले गया।

राजकोट

2. हैवानियत की हदें पार: रेप में असफल होने पर दी भयानक सजा

इस घटना का सबसे खौफनाक पहलू वह हैवानियत है जो आरोपी ने उस नन्हीं जान के साथ की। पुलिस रिपोर्ट और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, आरोपी ने बच्ची के साथ दुष्कर्म (Rape) करने की कोशिश की।

जब वह अपने नापाक इरादों में कामयाब नहीं हो पाया और बच्ची ने रोना-चिल्लाना शुरू कर दिया, तो आरोपी गुस्से में पागल हो गया। उसने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए बच्ची के प्राइवेट पार्ट में लोहे की रॉड (Iron Rod) डाल दी। इस अमानवीय कृत्य को अंजाम देकर वह मौके से फरार हो गया, और बच्ची को उसी तड़पती हालत में छोड़ गया।

पुलिस के लिए चुनौती और 100 लोगों से पूछताछ

घटना की जानकारी मिलते ही राजकोट ग्रामीण पुलिस (Rajkot Rural Police) हरकत में आई। मामला बेहद संवेदनशील था और आरोपी का कोई सुराग नहीं था। चूंकि घटना खेत के इलाके में हुई थी, इसलिए वहां कोई CCTV कैमरा या चश्मदीद गवाह मौजूद नहीं था।

  • पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी—हजारों मजदूरों के बीच से उस एक दरिंदे को ढूंढ निकालना।
  • एसपी विजयसिंह गुर्जर की निगरानी में LCB (लोकल क्राइम ब्रांच) और SOG समेत कई टीमें बनाई गईं।
  • पुलिस ने आसपास के खेतों में काम करने वाले 100 से अधिक मजदूरों और संदिग्धों को हिरासत में लिया या उनसे कड़ाई से पूछताछ की।
  • यह पुलिस की सूझबूझ ही थी कि उन्होंने हार नहीं मानी और हर एक संदिग्ध का वेरिफिकेशन किया।

शिनाख्त परेड: मासूम ने दर्द में भी पहचाना अपना गुनहगार

जब पुलिस को कुछ संदिग्धों पर शक हुआ, तो उन्होंने शिनाख्त परेड (Identification Parade) का आयोजन किया। अस्पताल में भर्ती पीड़ित बच्ची, जो असहनीय दर्द से गुजर रही थी, ने हिम्मत दिखाई।

पुलिस संदिग्धों को लेकर आई और बच्ची ने तुरंत उस दरिंदे को पहचान लिया जिसने उसकी यह हालत की थी। बच्ची के इशारे के बाद पुलिस ने आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि इस राजकोट आटकोट केस में केवल यही एक व्यक्ति शामिल था।

राजकोट

कौन है वह दरिंदा? (Who is the Accused?)

  • गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान रामसिंह तेरासिंह डडवेजर (35 वर्ष) के रूप में हुई है।
  • मूल निवासी: वह मध्य प्रदेश (MP) के अलीराजपुर जिले का रहने वाला है।
  • पेशा: वह पिछले कुछ समय से आटकोट के पास ही एक खेत में मजदूरी कर रहा था।
  • पुलिस की पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। अब उस पर कड़ी धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।

6. बच्ची की हालत अब कैसी है? (Current Health Status)

इस घटना के बाद बच्ची को गंभीर हालत में राजकोट के जनाना अस्पताल (Janana Hospital) में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने तुरंत उसकी सर्जरी की।

राहत की बात यह है कि सर्जरी सफल रही और बच्ची की हालत अब स्थिर (Stable) बताई जा रही है, हालांकि वह अभी भी गहरे सदमे में है। डॉक्टरों की टीम उसकी सेहत पर लगातार नजर बनाए हुए है।

राजकोट

हमें क्या सीखने की जरूरत है?

राजकोट आटकोट की यह घटना हमें याद दिलाती है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमें कितना सतर्क रहने की जरूरत है, चाहे हम शहर में हों या गांव में। आरोपी रामसिंह जैसे लोगों के लिए कानून में सख्त से सख्त सजा का प्रावधान होना चाहिए ताकि भविष्य में कोई ऐसी जुर्रत न कर सके।

राजकोट पुलिस की सराहना करनी होगी कि उन्होंने 100 लोगों की जांच जैसी जटिल प्रक्रिया के बाद भी असली मुजरिम को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। हम उम्मीद करते हैं कि पीड़ित बच्ची को जल्द से जल्द न्याय मिलेगा।

अगर आपको यह रिपोर्ट जानकारीपूर्ण लगी हो, तो इसे शेयर जरूर करें ताकि समाज में जागरूकता फैले। अपने विचार हमें कमेंट बॉक्स में बताएं।

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Mehul Choksi Extradition: PNB घोटाले के आरोपी मेहुल चोकसी का खेल खत्म! बेल्जियम कोर्ट ने दी भारत लाने की मंजूरी

PNB

PNB घोटाले (PNB Scam) के पीड़ितों और भारतीय कानून व्यवस्था के लिए आज एक ऐतिहासिक दिन है। भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी (Mehul Choksi), जिसने देश के हजारों करोड़ रुपये लूटे और कानून को ठेंगा दिखाकर विदेश भाग गया था, अब उसके बचने के सारे रास्ते बंद हो चुके हैं।

ताज़ा खबरों के मुताबिक, बेल्जियम की सुप्रीम कोर्ट (Belgium Supreme Court) ने मेहुल चोकसी को भारत प्रत्यर्पित (Extradite) करने की मंजूरी दे दी है। यह भारत सरकार और जांच एजेंसियों (CBI/ED) के लिए एक बहुत बड़ी जीत मानी जा रही है।

आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं कि आखिर क्या हुआ है और अब आगे क्या होगा।

PNB

बेल्जियम कोर्ट का फैसला: अब भारत आना तय!

लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई के बाद, बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत ने आज अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने मेहुल चोकसी की उन सभी दलीलों को खारिज कर दिया, जिसमें उसने भारत की जेलों की स्थिति और मानवाधिकारों का हवाला देकर प्रत्यर्पण रोकने की मांग की थी।

कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि भारत द्वारा पेश किए गए सबूत पुख्ता हैं और चोकसी को वहां के कानून का सामना करना ही होगा। इस फैसले का सीधा मतलब है कि अब चोकसी को कभी भी भारत लाया जा सकता है।

यह खबर इतनी बड़ी क्यों है?

कानूनी जीत: यह फैसला साबित करता है कि आर्थिक अपराधी दुनिया के किसी भी कोने में छिप जाएं, कानून के हाथ उन तक पहुंच ही जाएंगे।

PNB स्कैम की रिकवरी: चोकसी की वापसी से 13,000 करोड़ रुपये से अधिक के PNB घोटाले की जांच में तेजी आएगी और बैंकों का पैसा वापस मिलने की उम्मीद जगेगी।

फ्लैशबैक: क्या था PNB घोटाला?

जो लोग भूल गए हैं, उन्हें याद दिला दें कि मेहुल चोकसी और उसका भांजा नीरव मोदी (Nirav Modi) इस महाघोटाले के मुख्य सूत्रधार थे।

• इन्होंने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoUs) जारी करवाए।

• इसके जरिए इन्होंने विदेशी बैंकों से हजारों करोड़ रुपये का कर्ज लिया और उसे चुकाया नहीं।

• साल 2018 में जब यह घोटाला सामने आया, तो उससे पहले ही चोकसी देश छोड़कर भाग चुका था।

PNB

अब आगे क्या होगा?

बेल्जियम कोर्ट की मंजूरी मिलने के बाद अब प्रक्रिया बहुत तेज होगी:

कागजी कार्रवाई: भारतीय विदेश मंत्रालय और बेल्जियम सरकार के बीच अंतिम दस्तावेजी कार्रवाई होगी।

CBI और ED की तैयारी: जांच एजेंसियों की एक विशेष टीम जल्द ही बेल्जियम रवाना हो सकती है ताकि चोकसी को अपनी कस्टडी में लिया जा सके।

भारत में जेल: भारत लाने के बाद उसे संभवतः मुंबई की आर्थर रोड जेल के विशेष सेल में रखा जाएगा, जिसे विशेष रूप से आर्थिक अपराधियों के लिए तैयार किया गया है।

मेहुल चोकसी का प्रत्यर्पण सिर्फ एक अपराधी की वापसी नहीं है, बल्कि यह उन सभी भगोड़ों (Fugitives) के लिए एक कड़ा संदेश है जो देश का पैसा लूटकर विदेशों में ऐश कर रहे हैं। विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे अन्य आरोपियों के लिए भी यह खबर किसी झटके से कम नहीं है।

अब देश को इंतजार है उस पल का जब मेहुल चोकसी भारतीय धरती पर कदम रखेगा और कानून के कठघरे में खड़ा होगा।

आपकी राय: क्या आपको लगता है कि मेहुल चोकसी से पूरा पैसा वसूल हो पाएगा? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर लिखें!

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Thailand-Cambodia Conflict: क्या छिड़ गई है जंग? थाईलैंड की एयरस्ट्राइक से दहला कंबोडिया, बॉर्डर पर हालात हुए बेकाबू!

Thailand

दक्षिण पूर्व एशिया (South East Asia) जो अपनी शांति और पर्यटन के लिए जाना जाता है, आज बारूद की गंध से भरा हुआ है। Thailand और Cambodia के बीच दशकों पुराना सीमा विवाद (Border Dispute) एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर आ गया है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, Thailand की वायुसेना ने कंबोडियाई सीमा के पास कथित तौर पर एयरस्ट्राइक (Airstrike) की है, जिससे दोनों देशों के बीच युद्ध जैसे हालात बन गए हैं।

आज के इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि आखिर क्यों अचानक भड़क उठी यह पुरानी आग? क्या है इस विवाद की असली जड़ और इसका भारत और दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?

Thailand

Breaking News: बॉर्डर पर आखिर हुआ क्या है?

आज सुबह आई खबरों ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, थाईलैंड और कंबोडिया के विवादित सीमा क्षेत्र, विशेष रूप से प्रीह विहियर मंदिर (Preah Vihear Temple) के आसपास के इलाकों में भारी बमबारी की आवाजें सुनी गई हैं।

• हवाई हमले का दावा: कंबोडियाई मीडिया का दावा है कि थाईलैंड के फाइटर जेट्स ने उनके क्षेत्र में घुसकर बमबारी की है।

• सेना की तैनाती: दोनों ही देशों ने अपनी सीमाओं पर भारी संख्या में टैंक और सैनिकों (Troops) को तैनात कर दिया है।

• गांव खाली कराए गए: सीमा से सटे गांवों में रहने वाले हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है। वहां के स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है।

विवाद की जड़: क्यों लड़ रहे हैं ये दो पड़ोसी?

यह झगड़ा आज का नहीं है, बल्कि सदियों पुराना है। इसके मुख्य कारण हैं:

• प्रीह विहियर मंदिर (Preah Vihear Temple): यह 11वीं सदी का एक हिंदू मंदिर है जो पहाड़ की चोटी पर स्थित है। अंतरराष्ट्रीय अदालत (ICJ) ने 1962 में इसे कंबोडिया का हिस्सा माना था, लेकिन इसके प्रवेश द्वार और आसपास की 4.6 वर्ग किलोमीटर जमीन पर थाईलैंड अपना दावा जताता है।

• समुद्री सीमा विवाद (Maritime Dispute): जमीन के अलावा, दोनों देश ‘थाईलैंड की खाड़ी’ (Gulf of Thailand) में तेल और गैस से भरे एक बड़े समुद्री इलाके पर भी अपना-अपना हक जमाते हैं।

• राष्ट्रवाद (Nationalism): दोनों देशों की राजनीति में यह मुद्दा अक्सर चुनाव जीतने और देशभक्ति दिखाने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है।

ताजा हालात: ‘रेड अलर्ट’ पर दोनों देश

हालात इतने गंभीर हैं कि राजनयिक बातचीत (Diplomatic Talks) लगभग बंद हो चुकी है।

• थाईलैंड का पक्ष: थाईलैंड का कहना है कि कंबोडियाई सैनिकों ने पहले सीजफायर का उल्लंघन किया और उनकी चौकियों पर गोलीबारी की, जिसका उन्होंने जवाब दिया है।

• कंबोडिया का पक्ष: कंबोडिया ने इसे “संप्रभुता पर हमला” (Attack on Sovereignty) बताया है और संयुक्त राष्ट्र (UN) से हस्तक्षेप की मांग की है।

ASEAN और दुनिया की प्रतिक्रिया

इस संघर्ष ने पूरे ASEAN (Association of Southeast Asian Nations) ब्लॉक को चिंता में डाल दिया है।

• वियतनाम और इंडोनेशिया ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

• पर्यटन (Tourism) पर इसका सीधा असर पड़ने वाला है, क्योंकि यह सीजन वहां घूमने जाने वालों के लिए पीक सीजन होता है।

युद्ध किसी समस्या का हल नहीं है। थाईलैंड और कंबोडिया के बीच का यह तनाव न केवल वहां की अर्थव्यवस्था को तोड़ेगा, बल्कि आम नागरिकों की जान भी जोखिम में डालेगा। दुनिया की नजरें अब संयुक्त राष्ट्र पर टिकी हैं कि क्या वे इस चिंगारी को आग बनने से रोक पाएंगे?

Thailand

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1: क्या थाईलैंड और कंबोडिया के बीच युद्ध शुरू हो गया है?

Ans: अभी आधिकारिक युद्ध की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन एयरस्ट्राइक और बॉर्डर पर सेना के जमावड़े से हालात युद्ध जैसे (War-like situation) बन गए हैं।

Q2: क्या भारतीय पर्यटकों के लिए अभी थाईलैंड जाना सुरक्षित है?

Ans: बैंकाक (Bangkok) और पटाया जैसे मुख्य शहर अभी सुरक्षित हैं, लेकिन बॉर्डर इलाकों में जाने से बचें। सरकार की एडवाइजरी का पालन जरूर करें।

Q3: यह विवाद किस मंदिर को लेकर है?

Ans: यह विवाद मुख्य रूप से प्रीह विहियर (Preah Vihear) मंदिर को लेकर है, जो यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट भी है।

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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अब PF और पेंशन में पत्नी ही नहीं, मां का भी होगा बराबर का हक! जानिए पूरी डिटेल

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला अक्सर नौकरीपेशा लोग अपने PF (भविष्य निधि) या पेंशन अकाउंट में अपनी पत्नी या बच्चों को नॉमिनी (Nominee) बनाते हैं। हम यही मानते आए हैं कि हमारे न रहने पर सारा पैसा नॉमिनी को ही मिलेगा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के एक हालिया और ऐतिहासिक फैसले ने इस धारणा को बदल दिया है।

अगर आप नौकरी करते हैं और आपका पीएफ कटता है, तो यह खबर आपके और आपके परिवार के लिए बेहद जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके पीएफ और पेंशन पर सिर्फ पत्नी का नहीं, बल्कि उसकी मां का भी बराबर का अधिकार है।

आइए आसान भाषा में समझते हैं कि कोर्ट ने क्या कहा, नियम क्या हैं और इसका आप पर क्या असर होगा।\

1. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए यह साफ कर दिया कि केवल ‘नॉमिनी’ होने से कोई व्यक्ति पैसे का पूरा मालिक नहीं बन जाता। कोर्ट ने कहा कि मां भी ‘Class-I Heir’ (प्रथम श्रेणी की उत्तराधिकारी) होती है, इसलिए उसे बेटे की संपत्ति या फंड से वंचित नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट

फैसले की मुख्य बातें:

• चाहे नॉमिनी के तौर पर सिर्फ पत्नी का नाम हो, फिर भी मां का हक खत्म नहीं होता।

• भविष्य निधि (PF) और पेंशन का पैसा उत्तराधिकार कानून (Succession Law) के तहत बंटेगा।

• बेटे की कमाई या जमा पूंजी पर बूढ़ी मां का भी उतना ही अधिकार है जितना पत्नी और बच्चों का।

2. नॉमिनी (Nominee) बनाम उत्तराधिकारी

(Legal Heir): असली मालिक कौन?

यह सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन वाला हिस्सा है। लोग सोचते हैं कि जिसे नॉमिनी बना दिया, पैसा उसी का है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे बहुत ही बारीकी से समझाया है।

नॉमिनी का काम: नॉमिनी सिर्फ एक ‘केयरटेकर’ या ‘ट्रस्टी’ होता है। उसका काम है कि वह विभाग से पैसे ले और उसे असली वारिसों (Legal Heirs) तक पहुंचाए।

असली मालिक: हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act) के तहत, अगर कोई वसीयत (Will) नहीं बनी है, तो संपत्ति ‘Class-I Heirs’ में बराबर बंटेगी।

* Class-I Heirs कौन हैं?: इसमें व्यक्ति की मां, पत्नी और बच्चे शामिल होते हैं।

सरल उदाहरण: मान लीजिए किसी व्यक्ति के PF खाते में 10 लाख रुपये हैं और उसने अपनी पत्नी को नॉमिनी बनाया है। उसकी मृत्यु के बाद, भले ही चेक पत्नी के नाम पर आए, लेकिन कानूनन उसे उस पैसे में से अपनी सास (मृतक की मां) को उनका हिस्सा देना होगा।

3. यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?

भारतीय समाज में अक्सर देखा गया है कि बेटे की मृत्यु के बाद बहुएं या ससुराल वाले बुजुर्ग माता-पिता को बेसहारा छोड़ देते हैं। पेंशन या पीएफ का सारा पैसा पत्नी को मिल जाता है और माता-पिता खाली हाथ रह जाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उन बुजुर्ग माताओं के लिए एक सुरक्षा कवच है। यह सुनिश्चित करता है कि बुढ़ापे में बेटे के न रहने पर भी मां को आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े।

4. अब आपको क्या करना चाहिए?

इस फैसले के बाद कुछ बातें जिनका आपको ध्यान रखना चाहिए:

नॉमिनेशन चेक करें: अपने पीएफ और बैंक खातों में देखें कि आपने किसे नॉमिनी बनाया है।

वसीयत (Will) जरूर बनाएं: अगर आप चाहते हैं कि आपके बाद आपकी संपत्ति को लेकर परिवार में झगड़ा न हो, तो एक स्पष्ट ‘वसीयत’ बनाना सबसे अच्छा है। वसीयत में आप लिख सकते हैं कि किसको कितना हिस्सा मिले।

परिवार को जानकारी दें: अपने घर के सदस्यों को इन नियमों के बारे में बताएं ताकि भविष्य में कोई विवाद न हो।

सुप्रीम कोर्ट

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1: अगर मैंने सिर्फ पत्नी को नॉमिनी बनाया है, तो क्या मां क्लेम कर सकती है?

– हाँ, बिल्कुल। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, मां कानूनी वारिस (Legal Heir) है और वह कोर्ट के जरिए अपना हिस्सा मांग सकती है।

Q2: क्या यह नियम प्राइवेट और सरकारी दोनों कर्मचारियों पर लागू है?

– हाँ, यह उत्तराधिकार का सामान्य कानून है जो जमा पूंजी (PF/Gratuity आदि) पर लागू होता है।

Q3: अगर पिता जीवित हैं, तो क्या उन्हें भी हिस्सा मिलेगा?

– हिंदू कानून के तहत पिता ‘Class-II Heir’ में आते हैं। अगर मां, पत्नी और बच्चे (Class-I) मौजूद हैं, तो पहला हक उनका होता है। लेकिन वसीयत बनाकर पिता को भी हिस्सा दिया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला समाज में संतुलन लाने वाला है। यह याद दिलाता है कि पत्नी जीवनसाथी है, लेकिन मां वह है जिसने जन्म दिया है। कानून की नजर में दोनों का स्थान महत्वपूर्ण है।

अगर आपको यह जानकारी काम की लगी हो, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ जरूर Share करें। जागरूक बनें, सुरक्षित रहें!

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Japan Earthquake Alert : 7.6 की तीव्रता से कांपा जापान, सुनामी की चेतावनी ने बढ़ाई धड़कनें, जानिये 5 बड़े अपडेट्स

Earthquake

जापान, जिसे ‘उगते सूरज का देश’ कहा जाता है, आज कुदरत के कहर का सामना कर रहा है। अभी-अभी आई एक बड़ी खबर ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। जापान के पश्चिमी तट पर रिक्टर पैमाने पर 7.6 की तीव्रता (Magnitude) का भीषण Earthquake आया है।

Earthquake के झटके इतने तेज थे कि इमारतें डोलने लगीं और प्रशासन को तुरंत ‘मेजर सुनामी वार्निंग’ (Major Tsunami Warning) जारी करनी पड़ी। यह खबर न केवल जापान के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है।

आज के इस ब्लॉग में हम आपको पल-पल की अपडेट, नुकसान की जानकारी और वहां के ताज़ा हालात के बारे में विस्तार से बताएंगे।

रिक्टर स्केल पर 7.6 की तीव्रता: कितना खतरनाक है यह?

सबसे पहले यह समझना जरुरी है कि यह कोई मामूली झटका नहीं था। रिक्टर स्केल पर 7.6 की तीव्रता को ‘बेहद विनाशकारी’ श्रेणी में रखा जाता है। जापान की मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के मुताबिक, Earthquake का केंद्र (Epicenter) इशिकावा प्रान्त (Ishikawa Prefecture) के नोटो क्षेत्र में था। यह Earthquake काफी कम गहराई (Shallow depth) पर आया, जिस वजह से सतह पर तबाही का असर ज्यादा महसूस किया गया।

Earthquake

चश्मदीदों का कहना है कि झटके इतने तेज थे कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और वे अपनी जान बचाने के लिए खुले मैदानों और ऊंची जगहों की तरफ भागने लगे।

सुनामी का सायरन: “तुरंत ऊंची जगहों पर भागें”

Earthquake के तुरंत बाद जो सबसे डरावनी खबर आई, वह थी सुनामी की चेतावनी। प्रशासन ने तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए “Evacuate Immediately” (तुरंत जगह खाली करें) का आदेश जारी कर दिया है।

लहरों की ऊंचाई : मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि समुद्र में 3 मीटर से लेकर 5 मीटर तक ऊंची लहरें उठ सकती हैं।

प्रभावित इलाके : इशिकावा, निगाता और टोयामा जैसे तटीय इलाकों में हाई अलर्ट घोषित किया गया है।

टीवी चैनलों और रेडियो पर लगातार उद्घोषणा की जा रही है कि लोग समुद्र तट से दूर रहें और किसी भी कीमत पर वीडियो बनाने के लिए अपनी जान जोखिम में न डालें।

Earthquake

तबाही का मंजर: टूटी सड़कें और अँधेरे में डूबे शहर

सोशल मीडिया पर आ रही तस्वीरों और वीडियो ने दिल दहला दिया है। Earthquake का असर इतना जोरदार था कि कई जगहों पर पक्की सड़कें बीच से फट गई हैं।

  • बिजली गुल : रिपोर्ट्स के मुताबिक, 30,000 से ज्यादा घरों की बिजली गुल हो गई है, जिससे राहत कार्यों में मुश्किल आ रही है।
  • इमारतों को नुकसान : कई पुरानी और कमजोर इमारतों के गिरने की खबर है। मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है।
  • आग की घटनाएं : वाजिमा शहर में भूकंप के बाद कई जगहों पर भीषण आग लगने की भी खबरें सामने आ रही हैं।

बुलेट ट्रेनें रोकी गईं, न्यूक्लियर प्लांट्स पर नज़र

जापान में सुरक्षा को लेकर हमेशा से ही कड़े इंतज़ाम रहते हैं। Earthquake आते ही जापान की रफ़्तार कही जाने वाली बुलेट ट्रेनों (Shinkansen) को तुरंत रोक दिया गया है। कई हाईवे भी बंद कर दिए गए हैं ताकि कोई दुर्घटना न हो।

2011 की फुकुशिमा त्रासदी को याद करते हुए प्रशासन ने तुरंत सभी परमाणु संयंत्रों की जांच शुरू कर दी है। राहत की बात यह है कि अभी तक किसी भी न्यूक्लियर प्लांट से रेडिएशन लीक या बड़ी खराबी की खबर नहीं आई है, लेकिन मॉनिटरिंग जारी है।

‘रिंग ऑफ फायर’ और जापान का इतिहास

आपके मन में यह सवाल जरूर आता होगा कि आखिर जापान में ही इतने Earthquake क्यों आते हैं? इसका कारण है जापान की भोगौलिक स्थिति। जापान ‘रिंग ऑफ फायर’ (Ring of Fire) पर स्थित है। यह प्रशांत महासागर का वह क्षेत्र है जहाँ टेक्टोनिक प्लेट्स (Tectonic Plates) आपस में सबसे ज्यादा टकराती हैं। दुनिया के लगभग 90% भूकंप इसी क्षेत्र में आते हैं। हालाँकि, जापान की तकनीक और वहां के लोगों का अनुशासन ही है जो उन्हें इतनी बड़ी त्रासदियों से लड़ने की हिम्मत देता है।

Earthquake

हम क्या कर सकते हैं?

फिलहाल, जापान एक मुश्किल दौर से गुजर रहा है। प्रशासन और सेना राहत कार्य में जुटी हुई है। भारत और अन्य देशों ने भी स्थिति पर नजर बनाए रखी है। कुदरत के आगे इंसान बेबस जरूर है, लेकिन हौसला और सावधानी ही बचाव का एकमात्र रास्ता है। हम प्रार्थना करते हैं कि जापान के लोग सुरक्षित रहें और यह संकट जल्द टल जाए। अगर आपका कोई परिचित जापान में है, तो उनसे संपर्क करने की कोशिश करें और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दें।

FAQ: Japan Earthquake से जुड़े अहम सवाल

Q1: Earthquake की तीव्रता कितनी थी?

Ans: रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 7.6 मापी गई है।

Q2: क्या सुनामी का खतरा अभी भी है?

Ans: जी हाँ, तटीय इलाकों में सुनामी की चेतावनी जारी है और लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है।

Q3: क्या भारतीय लोग वहां सुरक्षित हैं?

Ans: भारतीय दूतावास (Indian Embassy) ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं और वहां रह रहे भारतीयों के संपर्क में है।

(Note: यह एक ब्रेकिंग न्यूज़ ब्लॉग है। स्थिति हर पल बदल रही है, इसलिए आधिकारिक जानकारी के लिए न्यूज़ चैनल्स और सरकारी अपडेट्स पर नजर बनाए रखें।)

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Goa Nightclub Fire Tragedy: जश्न मातम में बदला! गोवा के क्लब में आग से 25 की मौत, बिना फायर सेफ्टी चल रहा था ‘मौत का क्लब’

गोवा

गोवा के एक मशहूर Nightclub में भीषण आग लगने से 25 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि क्लब बिना फायर सेफ्टी क्लीयरेंस के चल रहा था। जानिए पूरी रिपोर्ट और पुलिस का एक्शन प्लान। गोवा (Goa), जो अपनी शानदार नाइटलाइफ़ और पार्टियों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है, वहां बीती रात एक ऐसा हादसा हुआ जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। मौज-मस्ती और संगीत की गूंज के बीच अचानक चीख-पुकार मच गई। गोवा के एक लोकप्रिय Nightclub में लगी भीषण आग (Massive Fire) ने 25 हंसते-खेलते लोगों की जान ले ली।

यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम और क्लब मालिकों की घोर लापरवाही का नतीजा है। आइए जानते हैं आखिर उस रात क्या हुआ और पुलिस जांच में कौन से चौंकाने वाले खुलासे हुए

गोवा

क्या हुआ उस काली रात को?

चश्मदीदों के मुताबिक, वीकेंड होने के कारण क्लब खचाखच भरा हुआ था। पार्टी अपने शबाब पर थी, तभी अचानक क्लब के एक हिस्से से धुएं का गुबार उठने लगा। इससे पहले कि लोग कुछ समझ पाते, आग ने पूरे क्लब को अपनी चपेट में ले लिया।

क्लब के अंदर भगदड़ (Stampede) मच गई। संकरे रास्ते और धुएं की वजह से लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, दम घुटने और झुलसने से 25 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं |

जांच में बड़ा खुलासा: बिना ‘फायर सेफ्टी’ चल रहा था क्लब

हादसे के तुरंत बाद शुरू हुई पुलिस और प्रशासन की जांच में एक बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है। जिस क्लब में सैकड़ों लोगों की जान जोखिम में थी, उसके पास ‘फायर सेफ्टी क्लीयरेंस’ (Fire Safety Clearance/NOC) ही नहीं था।

• क्लब में आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे।

• इमरजेंसी एग्जिट (Emergency Exit) या तो बंद थे या भीड़ के हिसाब से बहुत छोटे थे।

• प्रशासनिक नियमों की धज्जियां उड़ाकर यह क्लब धड़ल्ले से चलाया जा रहा था।

यह साफ तौर पर एक हादसा नहीं, बल्कि मानव निर्मित त्रासदी है।

मालिक फरार, दिल्ली तक पहुंची पुलिस की टीम

हादसे की खबर मिलते ही क्लब के मालिक और मैनेजमेंट के लोग मौके से फरार हो गए हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, क्लब के मालिकों की लोकेशन दिल्ली (Delhi) में ट्रेस की गई है।

गोवा पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए मालिकों को गिरफ्तार करने के लिए एक विशेष टीम दिल्ली रवाना कर दी है। पुलिस का कहना है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और उन पर गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) का मामला दर्ज किया जा रहा है।

सरकार और प्रशासन पर उठते सवाल

इस दर्दनाक हादसे ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:

• बिना फायर एनओसी (NOC) के यह क्लब इतने दिनों से कैसे चल रहा था?

• क्या स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत थी?

• गोवा के बाकी क्लबों में पर्यटकों की सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं?

गोवा नाइटक्लब हादसा (Goa Nightclub Tragedy) हमें याद दिलाता है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है। आज 25 परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है। उम्मीद है कि प्रशासन इस बार सख्त कार्रवाई करेगा ताकि भविष्य में गोवा जाने वाले किसी भी पर्यटक को ऐसे ‘मौत के क्लब’ का सामना न करना पड़े।

गोवा

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल )

Q1: गोवा नाइटक्लब में आग कैसे लगी?

Ans: आग लगने का सटीक कारण अभी जांच का विषय है, लेकिन शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है।

Q2: गोवा आग हादसे में कितने लोगों की जान गई?

Ans: अब तक की रिपोर्ट के अनुसार, इस हादसे में 25 लोगों की मौत हो चुकी है।

Q3: क्या क्लब के पास फायर सेफ्टी लाइसेंस था?

Ans: नहीं, पुलिस जांच में सामने आया है कि क्लब बिना फायर सेफ्टी क्लीयरेंस के अवैध रूप से चल रहा था।

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सावधान! क्या आपकी Indigo फ्लाइट भी हो गई कैंसिल? सुप्रीम कोर्ट पहुँचा मामला, जानें यात्रियों के 5 बड़े अधिकार और रिफंड के नियम

Indigo फ्लाइट

सोचिए, आपने महीनों पहले अपनी छुट्टियों या किसी जरूरी मीटिंग के लिए फ्लाइट टिकट बुक की हो। आप समय से तैयार होकर एयरपोर्ट पहुँचते हैं, लेकिन वहां आपको पता चलता है कि आपकी Indigo फ्लाइट कैंसिल हो चुकी है। न कोई सूचना, न कोई वैकल्पिक व्यवस्था, बस “Sorry for the inconvenience” का एक मैसेज। Indigo फ्लाइट पिछले कुछ दिनों से देश के हजारों यात्रियों के साथ यही हो रहा है। भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी Indigo भारी संकट से जूझ रही है। Indigo फ्लाइट कोहरे और अन्य ऑपरेशनल कारणों से सैकड़ों उड़ानें रद्द हो चुकी हैं और हजारों लेट चल रही हैं।

एयरपोर्ट्स पर मचे इस हाहाकार के बीच अब मामला देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की चौखट पर पहुँच गया है। आखिर यह नौबत क्यों आई? याचिका में क्या कहा गया है? और सबसे जरूरी बात—अगर आप इसमें फंस जाएं तो आपका पैसा वापस कैसे मिलेगा? आइए, इस विस्तृत रिपोर्ट में सब कुछ जानते हैं।

Indigo फ्लाइट

आखिर चल क्या रहा है? (The Current Crisis)

  • बीते कुछ हफ्तों से दिल्ली, मुंबई, पटना और कोलकाता जैसे व्यस्त एयरपोर्ट्स पर अफरा-तफरी का माहौल है। Indigo, जो अपनी ‘On-Time Performance’ के लिए जानी जाती थी, उसकी व्यवस्था चरमरा गई है।
  • खबरों के मुताबिक, घने कोहरे (Dense Fog) और विजिबिलिटी कम होने के कारण लगातार फ्लाइट्स कैंसिल हो रही हैं। लेकिन यात्रियों का गुस्सा सिर्फ मौसम पर नहीं, बल्कि एयरलाइन के रवैये पर है। यात्रियों का आरोप है कि:
  • फ्लाइट कैंसिल होने की जानकारी अंतिम समय पर दी जा रही है।
  • कस्टमर केयर से संपर्क नहीं हो पा रहा।
  • महंगे दामों पर टिकट बुक करने के बावजूद सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लोग एयरपोर्ट के फर्श पर सोते हुए और एयरलाइन स्टाफ से बहस करते हुए देखे जा सकते हैं।

भाग 2: सुप्रीम कोर्ट में क्या मांग की गई है? (Supreme Court Petition)

जब जनता की सुनवाई नहीं होती, तो न्यायपालिका को दखल देना पड़ता है। इस अव्यवस्था को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है।

इस याचिका में मुख्य रूप से इन मुद्दों को उठाया गया है:

  • DGCA नियमों की अनदेखी: याचिकाकर्ता का कहना है कि एयरलाइंस नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा बनाए गए नियमों का पालन नहीं कर रही हैं। यात्रियों को घंटों तक विमान के अंदर बैठाकर रखा जा रहा है, जो अमानवीय है।
  • रिफंड में देरी: फ्लाइट कैंसिल होने पर यात्रियों को तुरंत पैसा वापस मिलने के बजाय ‘क्रेडिट शेल’ (Credit Shell) दिया जा रहा है, जो गलत है।
  • जवाबदेही तय हो: कोर्ट से मांग की गई है कि वह एयरलाइंस पर भारी जुर्माना लगाए और एक सख्त गाइडलाइन जारी करे ताकि भविष्य में यात्रियों को ऐसी मानसिक प्रताड़ना न झेलनी पड़े।
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क्या हैं आपके अधिकार? (Know Your Rights)

बहुत से यात्रियों को पता ही नहीं होता कि टिकट खरीदते समय वे सिर्फ सफर के पैसे नहीं देते, बल्कि कुछ अधिकारों के भी हकदार बनते हैं। DGCA के ‘Civil Aviation Requirements’ (CAR) के तहत आपको ये अधिकार मिलते हैं:

1. फ्लाइट कैंसिल होने पर:

अगर एयरलाइन अपनी तरफ से फ्लाइट कैंसिल करती है, तो आपके पास दो विकल्प हैं: या तो आप पूरा रिफंड (Full Refund) मांग सकते हैं। या फिर आप एयरलाइन से दूसरी फ्लाइट (Alternative Flight) की मांग कर सकते हैं। यह आपकी मर्जी पर निर्भर करता है, एयरलाइन आपको मजबूर नहीं कर सकती।

2. रिफ्रेशमेंट (खाना-पीना):

अगर आपकी फ्लाइट अपने निर्धारित समय से 2 से 4 घंटे (फ्लाइट की दूरी के हिसाब से) लेट है, तो एयरलाइन को आपको मुफ्त में खाना और पीने का पानी उपलब्ध कराना होगा।

3. होटल और ठहरने की व्यवस्था:

  • अगर फ्लाइट में देरी 24 घंटे से ज्यादा की है या फ्लाइट अगले दिन के लिए रीशेड्यूल की गई है, तो यात्रियों के होटल में रुकने और वहां तक आने-जाने का खर्च एयरलाइन को उठाना चाहिए।
  • (नोट: अगर देरी प्राकृतिक आपदा या मौसम की वजह से है, तो एयरलाइंस अक्सर मुआवजा देने से बच जाती हैं, लेकिन रिफंड या रीशेड्यूलिंग का अधिकार तब भी आपके पास रहता है।)
  • एयरलाइन का पक्ष और तकनीकी कारण हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। Indigo और अन्य एयरलाइंस का कहना है कि वे सुरक्षा से समझौता नहीं कर सकते।
  • सर्दियों में उत्तर भारत में ‘CAT-III’ स्तर का कोहरा होता है, जिसमें रनवे दिखना लगभग नामुमकिन हो जाता है। हालांकि, कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि समस्या सिर्फ कोहरे की नहीं है, बल्कि ‘पायलट रोस्टरिंग’ (Pilot Rostering) की भी है। नए नियमों के तहत पायलट्स की थकान कम करने के लिए उनकी ड्यूटी के घंटे फिक्स हैं, जिससे कई बार बैकअप क्रू उपलब्ध नहीं हो पाता और फ्लाइट कैंसिल करनी पड़ती है।
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यात्री अब क्या करें? (Actionable Tips)

  • अगर आपने टिकट बुक कर रखा है या करने वाले हैं, तो इन 4 बातों का गांठ बांध लें:
  • वेब चेक-इन का स्टेटस: घर से निकलने से पहले एयरलाइन की वेबसाइट पर ‘Flight Status’ जरूर चेक करें। सिर्फ SMS के भरोसे न रहें।
  • ट्रैवल इंश्योरेंस: सर्दियों के मौसम में 200-300 रुपये का ट्रैवल इंश्योरेंस जरूर लें। यह फ्लाइट कैंसिल होने पर आपके नुकसान की भरपाई कर सकता है।

सबूत रखें:

  • अगर आपकी फ्लाइट लेट है और आपको खाना नहीं मिल रहा, तो फोटो और वीडियो लें। बाद में रिफंड क्लेम करने या उपभोक्ता फोरम (Consumer Forum) में शिकायत करने में यह बहुत काम आता है।
  • Air Sewa App: अगर एयरलाइन आपकी नहीं सुन रही, तो सरकार के ‘Air Sewa’ ऐप या पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। यहाँ कार्रवाई काफी तेज होती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

फ्लाइट का कैंसिल होना सिर्फ एक तकनीकी दिक्कत नहीं, बल्कि हजारों लोगों की भावनाओं और जरूरी काम का नुकसान है। सुप्रीम कोर्ट में मामला जाने से एक उम्मीद जगी है कि शायद अब एयरलाइंस अपनी मनमानी बंद करेंगी और सिस्टम में सुधार होगा।

जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आता, तब तक एक जागरूक यात्री बनें और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना सीखें। आपका अनुभव: क्या हाल ही में आपकी कोई फ्लाइट कैंसिल हुई है? आपने रिफंड कैसे लिया? कमेंट बॉक्स में अपना अनुभव शेयर करें ताकि दूसरों को मदद मिल सके!

Indigo फ्लाइट

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Indigo flight cancellation news 2025: इंडिगो की सैकड़ों फ्लाइट्स रद्द होने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया है। जानिए यात्रियों के अधिकार, रिफंड पॉलिसी और DGCA के नियम इस विस्तृत ब्लॉग पोस्ट में।

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बिहार में अब मनचलों की खैर नहीं! ‘अभया ब्रिगेड’ बनी बेटियों की रक्षक – जानिए बिहार पुलिस की इस नई पहल की पूरी डिटेल

अभया ब्रिगेड

बिहार पुलिस ने महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा के लिए ‘अभया ब्रिगेड'(Abhaya Brigade)की शुरुआत की है। जानिए क्या है यह स्पेशल स्क्वाड, कहाँ होगी तैनाती और कैसे यह मनचलों पर नकेल कसेगी। पूरी रिपोर्ट पढ़ें। क्या आप भी अपनी बेटी, बहन या खुद के कॉलेज/कोचिंग जाने को लेकर सुरक्षा की चिंता करती हैं? बिहार में अब यह चिंता खत्म होने वाली है।

बिहार पुलिस ने महिला सुरक्षा (Women Safety) की दिशा में एक ऐतिहासिक और सख्त कदम उठाया है।
राजधानी पटना सहित पूरे बिहार में अब मनचलों और छेड़खानी करने वालों की खैर नहीं होगी। पुलिस ने ‘अभया ब्रिगेड’ (Abhaya Brigade) नाम से एक विशेष गश्ती दल (Special Patrolling Unit) तैयार किया है। यह सिर्फ़ एक पुलिस टीम नहीं, बल्कि सड़कों पर बेटियों के लिए एक ‘सुरक्षा कवच’ है।

आइए, विस्तार से जानते हैं कि आखिर क्या है यह ‘अभया ब्रिगेड’ और यह कैसे काम करेगी।

अभया ब्रिगेड

क्या है ‘अभया ब्रिगेड’?

‘अभया ब्रिगेड’ बिहार पुलिस की एक विशेष पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों, विशेषकर छेड़खानी (Eve-teasing) और भद्दी टिप्पणियों को रोकना है।

इस ब्रिगेड की सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह से एक्शन मोड में रहेगी। इसमें शामिल पुलिसकर्मी विशेष ट्रेनिंग के साथ तैनात होंगे और आधुनिक संसाधनों से लैस होंगे ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

कहाँ-कहाँ होगी ‘अभया ब्रिगेड’ की तैनाती?

अक्सर देखा गया है कि स्कूल या कोचिंग की छुट्टी के समय भीड़भाड़ का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व लड़कियों को परेशान करते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार पुलिस ने ‘हॉटस्पॉट्स’ की पहचान की है।

अभया ब्रिगेड मुख्य रूप से इन जगहों पर तैनात रहेगी:

  • कोचिंग सेंटर्स: पटना के बोरिंग रोड, नया टोला जैसे इलाकों और अन्य जिलों के कोचिंग हब।
  • स्कूल और कॉलेज: छात्राओं के स्कूल आने-जाने के समय (सुबह और दोपहर)।
  • पार्क और मॉल: शाम के समय जहाँ महिलाओं की आवाजाही ज्यादा होती है।
  • भीड़भाड़ वाले बाजार: जहाँ छेड़खानी की घटनाएं अक्सर रिपोर्ट की जाती हैं।

अभया ब्रिगेड की कार्यशैली: कैसे कसेगी नकेल?

यह सिर्फ़ नाम की गश्ती नहीं होगी, बल्कि इसका असर भी धरातल पर दिखेगा। इसकी कार्यशैली (Modus Operandi) कुछ इस प्रकार होगी:

  1. विशेष गश्ती वाहन: अभया ब्रिगेड के लिए विशेष स्कूटी या बाइक दस्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है जो संकरी गलियों में भी आसानी से जा सकें।
  2. सादे कपड़ों में निगरानी: कई बार पुलिस की वर्दी देखकर मनचले भाग जाते हैं, इसलिए रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ टीमें सादे कपड़ों (Civil Dress) में भी भीड़ का हिस्सा बनकर निगरानी रखेंगी।
  3. त्वरित कार्रवाई (Rapid Action): जैसे ही कोई संदिग्ध गतिविधि दिखेगी या कोई छात्रा शिकायत करेगी, यह टीम तुरंत मौके पर एक्शन लेगी।
  4. 112 से सीधा संपर्क: यह टीम डायल 112 (Emergency Response Support System) से सीधे जुड़ी रहेगी।

बिहार पुलिस का संदेश: ‘डरें नहीं, बस एक कॉल करें’

इस पहल के साथ बिहार पुलिस ने छात्राओं और महिलाओं को यह संदेश दिया है कि वे अब खुद को अकेला न समझें। पुलिस महानिदेशक (DGP) और वरीय अधिकारियों का स्पष्ट निर्देश है कि महिलाओं की शिकायत पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाए।

सुरक्षा टिप: अगर आप बिहार में हैं और आपको किसी भी तरह की सुरक्षा संबंधी समस्या हो, तो तुरंत 112 डायल करें। अब ‘अभया ब्रिगेड’ आपकी मदद के लिए आसपास ही मौजूद रहेगी।

‘अभया ब्रिगेड’ की शुरुआत बिहार में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। यह न केवल अपराधियों में खौफ पैदा करेगी, बल्कि छात्राओं के अंदर आत्मविश्वास भी जगाएगी कि “सिस्टम उनके साथ खड़ा है।”

अब देखना यह है कि जमीनी स्तर पर इसका कितना प्रभाव पड़ता है, लेकिन शुरुआत निश्चित रूप से सराहनीय है।

अभया ब्रिगेड

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: अभया ब्रिगेड क्या है?

Ans: यह बिहार पुलिस द्वारा शुरू की गई एक विशेष गश्ती दल है जो स्कूल, कॉलेज और कोचिंग के पास महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।

Q2: क्या अभया ब्रिगेड पूरे बिहार में लागू है?

Ans: इसकी शुरुआत पटना और प्रमुख शहरों से हो रही है, जिसे धीरे-धीरे पूरे राज्य में विस्तार दिया जाएगा।

Q3: आपात स्थिति में पुलिस से कैसे संपर्क करें?

Ans: आप अपने मोबाइल से 112 डायल करके तुरंत मदद मांग सकती हैं।

नोट: अगर आपको यह जानकारी महत्वपूर्ण लगी हो, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ व्हाट्सएप पर जरूर शेयर करें। जागरूकता ही सुरक्षा की पहली सीढ़ी है।

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अब गुटखा-पान मसाला खाना पड़ेगा भारी! लोकसभा में 2025 में हुआ बिल पास, जानें कितनी बढ़ेंगी कीमतें?

लोकसभा

अगर आप या आपके आसपास कोई गुटखा-पान मसाला का शौकीन है, तो यह खबर थोड़ी कड़वी लग सकती है। लोकसभा (Lok Sabha) ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण बिल पास कर दिया है, जिसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ने वाला है। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब तंबाकू उत्पादों पर टैक्स चोरी नहीं चलेगी और न ही ये सस्ते मिलेंगे। फाइनेंस बिल (Finance Bill) में संशोधन को मंजूरी मिल गई है, जिसके तहत गुटखा-पान मसाला पर GST सेस (Cess) की अधिकतम सीमा तय कर दी गई है। आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर संसद में क्या हुआ और अब एक पुड़िया के लिए आपको कितने पैसे चुकाने होंगे?

लोकसभा

क्या है यह नया बिल? (What is the New Bill?)

  • हाल ही में लोकसभा ने ‘वित्त विधेयक’ (Finance Bill) को मंजूरी दी है। इसमें सबसे बड़ी चर्चा गुटखा और पान मसाला उद्योग को लेकर है।
  • सरकार ने जीएसटी कानून (GST Law) में बदलाव किया है। इसके तहत अब पान मसाला और तंबाकू उत्पादों पर विशेष अतिरिक्त शुल्क (Special Cess) लगाने का रास्ता साफ हो गया है।
  • सरल शब्दों में कहें तो, पहले जो टैक्स का सिस्टम था, उसमें कई कंपनियां हेराफेरी कर लेती थीं। अब सरकार ने उस पर लगाम लगाने के लिए टैक्स की सीमा (Cap) को बढ़ा दिया है।

कितना लगेगा टैक्स? (Understanding the Tax Hike)

  • यह हिस्सा सबसे महत्वपूर्ण है। संसद में पास हुए संशोधन के मुताबिक, पान मसाला और गुटखा पर लगने वाले GST Compensation Cess की अधिकतम सीमा को बढ़ा दिया गया है।
  • अब यह टैक्स प्रोडक्ट की खुदरा बिक्री मूल्य (Retail Sale Price) से जोड़ा जाएगा।
  • खबरों के मुताबिक, इस पर टैक्स की अधिकतम सीमा को खुदरा बिक्री मूल्य का 290% तक या प्रति इकाई एक निश्चित दर तक ले जाने का प्रावधान किया गया है।
  • इसका मतलब यह नहीं है कि कल से ही टैक्स 290% हो जाएगा, लेकिन सरकार ने अपने पास यह पावर ले ली है कि वह जब चाहे टैक्स को इस सीमा तक बढ़ा सकती है। यानी कीमतें बढ़ना तय है।
  • लोकसभा

सरकार ने ऐसा क्यों किया? (Reason Behind the Move)

आपके मन में सवाल होगा कि अचानक यह फैसला क्यों लिया गया? इसके मुख्य रूप से दो कारण हैं:

  1. टैक्स चोरी रोकना: गुटखा और पान मसाला इंडस्ट्री में टैक्स चोरी बहुत बड़े पैमाने पर होती थी। कई कंपनियां अपना असली प्रोडक्शन छुपा लेती थीं। नई व्यवस्था में टैक्स चोरी करना नामुमकिन हो जाएगा।
  2. सेहत और राजस्व: तंबाकू का सेवन कम करने के लिए डब्लूएचओ (WHO) भी हमेशा टैक्स बढ़ाने की वकालत करता है। साथ ही, इससे सरकार के खजाने में भारी भरकम राजस्व आएगा।

आम जनता और दुकानदारों पर क्या असर होगा?

1. ग्राहकों के लिए:

सीधी बात है—महंगाई। कंपनियों पर टैक्स का बोझ बढ़ेगा, तो वे इसे अपनी जेब से नहीं भरेंगी। वे इसका बोझ ग्राहकों पर डाल देंगी। 5 रुपये या 10 रुपये वाली पुड़िया की कीमत में उछाल आ सकता है।

2. दुकानदारों के लिए:

छोटे दुकानदारों को शुरुआती दिनों में दिक्कत हो सकती है। अगर कीमतें अचानक बढ़ती हैं, तो स्टॉक को लेकर और ग्राहकों से बहस की स्थिति बन सकती है। साथ ही, ब्लैक मार्केटिंग (कालाबाजारी) का डर भी बना रहता है।

GST काउंसिल की भूमिका

लोकसभा ने तो बिल पास कर दिया है, लेकिन टैक्स की सही दर (Exact Rate) क्या होगी, इसका अंतिम फैसला GST काउंसिल की बैठक में लिया जाएगा। लेकिन संसद से हरी झंडी मिलने का मतलब है कि तैयारी पूरी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि 1 अप्रैल या उसके बाद से नई दरें प्रभावी रूप से बाजार में दिखना शुरू हो सकती हैं।

लोकसभा

निष्कर्ष (Conclusion)

सरकार का संदेश साफ है—सेहत बचानी है तो आदत छोड़िए, नहीं तो ज्यादा कीमत चुकाने के लिए तैयार रहिए। यह बिल न केवल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए है, बल्कि एक स्वस्थ भारत की दिशा में भी एक कदम है।

अब देखना यह है कि गुटखा कंपनियां अपनी कीमतें कब और कितनी बढ़ाती हैं।

आपकी राय: क्या सरकार का गुटखा-पान मसाला महँगा करने का फैसला सही है? कमेंट करके हमें जरूर बताएं!

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बड़ी खबर: 32,000 शिक्षकों की नौकरी बची! कोलकाता हाई कोर्ट ने पलटा पुराना फैसला – जानें क्या है पूरा मामला

कोलकाता

कोलकाता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के 32,000 प्राथमिक शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने बर्खास्तगी के आदेश को रद्द करते हुए उनकी नौकरी बहाल कर दी है। जानें इस ऐतिहासिक फैसले की पूरी कहानी और इसके मायने। पश्चिम बंगाल के शिक्षा जगत से आज एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। कोलकाता हाई कोर्ट (Kolkata High Court) ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए उन 32,000 प्राथमिक शिक्षकों (Primary Teachers) की नौकरी बहाल कर दी है, जिन्हें भर्ती घोटाले के आरोपों के चलते बर्खास्त कर दिया गया था।

यह फैसला न केवल उन शिक्षकों के लिए बल्कि उन 32,000 परिवारों के लिए भी किसी संजीवनी से कम नहीं है, जो पिछले कई महीनों से अपनी रोजी-रोटी छिन जाने के डर के साए में जी रहे थे। आइए जानते हैं कि आखिर कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा और यह पूरा मामला क्या था।

कोलकाता

हाई कोर्ट का नया फैसला: क्या बदला है?

ताजा जानकारी के अनुसार, कोलकाता हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें 2016 की भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त 32,000 शिक्षकों की नौकरी रद्द करने का आदेश दिया गया था।

कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें:

  • नौकरी बहाल: कोर्ट ने साफ कर दिया है कि ये शिक्षक अपनी सेवा में बने रहेंगे।
  • वेतन और सुविधाएं: इन्हें नियमित वेतन और अन्य सुविधाएं पहले की तरह मिलती रहेंगी।
  • भर्ती प्रक्रिया पर टिप्पणी: कोर्ट ने माना कि बिना किसी ठोस व्यक्तिगत जांच के सामूहिक रूप से (Mass Termination) नौकरी से निकालना ‘प्राकृतिक न्याय’ (Natural Justice) के खिलाफ है।

फ्लैशबैक: आखिर क्यों गई थी इनकी नौकरी?

इस मामले की जड़ें पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित शिक्षक भर्ती घोटाले (Teacher Recruitment Scam) से जुड़ी हैं।

  • मामला क्या था: आरोप था कि 2014 की TET परीक्षा के आधार पर 2016 में जो नियुक्तियां हुईं, उनमें बड़े पैमाने पर धांधली हुई थी।
  • आरोप: यह दावा किया गया था कि नियुक्त किए गए कई उम्मीदवारों ने न तो एप्टीट्यूड टेस्ट पास किया था और न ही उनके पास उचित प्रशिक्षण (Training) था।
  • सिंगल बेंच का आदेश: इन्ही आरोपों के आधार पर हाई कोर्ट की सिंगल बेंच (न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय) ने आदेश दिया था कि 32,000 अप्रशिक्षित (Untrained) शिक्षकों की नियुक्ति रद्द की जाए और नए सिरे से भर्ती हो।

इस आदेश के बाद राज्य में हड़कंप मच गया था और हजारों शिक्षक सड़कों पर उतर आए थे .

कोर्ट ने नौकरी बहाल क्यों की?

डिवीजन बेंच ने इस मामले को बहुत बारीकी से देखा। नौकरी बहाल करने के पीछे कोर्ट के कुछ तर्क बहुत महत्वपूर्ण हैं:

  • सबूतों की कमी: कोर्ट का मानना था कि यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे कि सभी 32,000 शिक्षकों की नियुक्ति अवैध तरीके से हुई है।
  • सामूहिक सजा गलत: कुछ लोगों की गलती की सजा पूरी भीड़ को नहीं दी जा सकती। हर केस को अलग-अलग देखने की जरूरत है।
  • प्रक्रिया का पालन: कोर्ट ने पाया कि शिक्षकों को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिए बिना ही बर्खास्तगी का आदेश दे दिया गया था, जो कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है।

शिक्षकों और सरकार की प्रतिक्रिया

जैसे ही यह खबर सामने आई, शिक्षकों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई। शिक्षक संगठनों ने इसे “सच्चाई की जीत” बताया है। वहीं, राज्य सरकार और प्राथमिक शिक्षा बोर्ड ने भी राहत की सांस ली है, क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों के हट जाने से राज्य की शिक्षा व्यवस्था चरमरा सकती थी।

कोलकाता

कोलकाता हाई कोर्ट का यह फैसला यह साबित करता है कि न्यायपालिका में ‘नैसर्गिक न्याय’ सबसे ऊपर है। हालांकि, भर्ती घोटाले की जांच अभी भी जारी रहेगी, लेकिन फिलहाल के लिए 32,000 घरों में चूल्हा जलता रहेगा, यह सुनिश्चित हो गया है।

यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस फैसले के खिलाफ कोई पक्ष सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाता है या नहीं।

आपकी राय क्या है?

क्या आपको लगता है कि कोर्ट का यह फैसला सही है? या फिर भर्ती प्रक्रिया की नए सिरे से जांच होनी चाहिए? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर लिखें।

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World Soil Day 2025: मिट्टी सिर्फ धूल नहीं, हमारा जीवन है! जानिए विश्व मृदा दिवस का इतिहास, महत्व और भविष्य की चुनौतियां

मिट्टी

मिट्टी कहे कुम्हार से, तू क्या रौंदे मोहे…” कबीर दास जी का यह दोहा हमें मिट्टी की विनम्रता और शक्ति दोनों की याद दिलाता है। आज 5 दिसंबर है, यानी विश्व मृदा दिवस (World Soil Day)। हम अक्सर आसमान में चमकते तारों या टेक्नोलॉजी की दुनिया में इतने खो जाते हैं कि अपने पैरों के नीचे मौजूद उस सतह को भूल जाते हैं जो हमें ज़िंदा रखे हुए है।

क्या आप जानते हैं कि एक चम्मच स्वस्थ मिट्टी में इतने सूक्ष्मजीव (micro-organisms) होते हैं, जितनी पूरी धरती पर इंसानों की आबादी भी नहीं है? आज का यह ब्लॉग पोस्ट सिर्फ एक तारीख के बारे में नहीं है, बल्कि यह हमारे अस्तित्व को बचाने की एक मुहीम है। आइए, गहराई से जानते हैं मिट्टी के इस विज्ञान और महत्व को।

इतिहास: 5 दिसंबर ही क्यों चुना गया?

विश्व मृदा दिवस को मनाने के पीछे एक रोचक इतिहास है जो सीधे तौर पर थाईलैंड के राजपरिवार से जुड़ा है।साल 2002 में, अंतर्राष्ट्रीय मृदा विज्ञान संघ (IUSS) ने सबसे पहले इस दिन को मनाने का प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने अपना समर्थन दिया।

लेकिन 5 दिसंबर की तारीख ही क्यों? दरअसल, यह तारीख थाईलैंड के दिवंगत राजा भूमिबोल अदुल्यादेज (King Bhumibol Adulyadej) के जन्मदिन को समर्पित है। राजा भूमिबोल ने अपने जीवनकाल में कृषि और मिट्टी की गुणवत्ता को सुधारने के लिए जमीनी स्तर पर बहुत काम किया था। उनके इन्हीं प्रयासों को सम्मान देने के लिए 2013 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) ने सर्वसम्मति से 5 दिसंबर को ‘विश्व मृदा दिवस’ घोषित किया और पहला आधिकारिक दिवस 2014 में मनाया गया।

मिट्टी

क्यों कहा जाता है मिट्टी को ‘काला सोना’? (Soil Importance)

हम जो खाना खाते हैं, उसका 95% हिस्सा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मिट्टी से ही आता है। लेकिन मिट्टी का काम सिर्फ फसल उगाना नहीं है। इसके महत्व को इन बिंदुओं से समझा जा सकता है:

  • प्राकृतिक फिल्टर: मिट्टी बारिश के पानी को अपने अंदर सोखती है और उसे फिल्टर करके भूमिगत जल (Groundwater) के रूप में जमा करती है। अगर मिट्टी ठोस या बंजर हो जाए, तो पानी जमीन के अंदर नहीं जाएगा और बाढ़ का खतरा बढ़ जाएगा।
  • क्लाइमेट चेंज से लड़ाई: मिट्टी दुनिया का सबसे बड़ा ‘कार्बन सिंक’ (Carbon Sink) है। यह वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को सोखकर उसे अपने अंदर जमा रखती है। अगर हम मिट्टी को नुकसान पहुंचाते हैं, तो यह कार्बन वापस हवा में मिल जाता है, जिससे ग्लोबल वार्मिंग बढ़ती है।
  • जैव विविधता का घर: दुनिया की लगभग 25% जैव विविधता (Biodiversity) मिट्टी के अंदर पाई जाती है। केंचुए, बैक्टीरिया और फंगस मिलकर मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं।
  • दवाइयों का स्रोत: पेनिसिलिन जैसी कई जीवन रक्षक एंटीबायोटिक्स बनाने वाले सूक्ष्मजीव मिट्टी में ही पाए जाते हैं।

वर्तमान स्थिति: हम अपनी मिट्टी के साथ क्या कर रहे हैं?

एक कृषि छात्र या जागरूक नागरिक होने के नाते, आपको यह जानना जरूरी है कि स्थिति कितनी गंभीर है। एफएओ (FAO) की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की लगभग 33% मिट्टी खराब (degraded) हो चुकी है।इसका सबसे बड़ा कारण है—रसायनों का अंधाधुंध प्रयोग।

मिट्टी

हरित क्रांति (Green Revolution) के बाद से हमने उत्पादन बढ़ाने के लिए यूरिया और कीटनाशकों का इतना ज्यादा इस्तेमाल किया कि मिट्टी की प्राकृतिक ताकत खत्म हो गई है। इसे ‘मिट्टी का बंजर होना’ या ‘Soil Salinization’ कहते हैं। इसके अलावा, वनों की कटाई से मिट्टी का कटाव (Soil Erosion) हो रहा है। ऊपरी उपजाऊ परत, जिसे बनने में हजारों साल लगते हैं, बारिश और हवा के साथ बहकर बर्बाद हो रही है। वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यही हाल रहा, तो अगले 60 सालों में खेती के लिए उपजाऊ मिट्टी बचेगी ही नहीं।

भारत के संदर्भ में मृदा स्वास्थ्य (Indian Context)

भारत एक कृषि प्रधान देश है, और यहाँ मिट्टी की सेहत सीधे तौर पर किसान की जेब और देश की जीडीपी (GDP) से जुड़ी है।भारत में पंजाब, हरियाणा और बिहार जैसे राज्यों में रसायनों के ज्यादा इस्तेमाल से मिट्टी में कार्बनिक कार्बन (Organic Carbon) की मात्रा बहुत कम हो गई है। एक स्वस्थ मिट्टी में कम से कम 0.5% से 1% कार्बनिक कार्बन होना चाहिए, लेकिन कई जगहों पर यह 0.3% से भी नीचे गिर गया है।

सरकार के प्रयास:

भारत सरकार ने ‘मृदा स्वास्थ्य कार्ड’ (Soil Health Card Scheme) की शुरुआत की है। यह एक क्रांतिकारी कदम है। इसमें किसान के खेत की मिट्टी की जांच की जाती है और उन्हें बताया जाता है कि उनके खेत में नाइट्रोजन, फास्फोरस या पोटाश में से किसकी कमी है। इससे किसान बिना वजह यूरिया डालने से बचते हैं और सही खाद का प्रयोग करते हैं।

World Soil Day 2025 की थीम और हमारा कर्तव्य

हर साल की तरह 2025 में भी इस दिवस का उद्देश्य “मिट्टी के डेटा, निगरानी और प्रबंधन” पर जोर देना है। भविष्य की खेती अब ‘अंधाधुंध खेती’ नहीं, बल्कि ‘स्मार्ट खेती’ होगी।

मिट्टी

हम और आप क्या कर सकते हैं?

ब्लॉग पढ़ने के बाद सवाल उठता है कि एक आम आदमी क्या करे?

  • किचन वेस्ट से खाद बनाएं: अपने घर के गीले कचरे (सब्जी के छिलके आदि) को डस्टबिन में फेंकने के बजाय उससे खाद (Compost) बनाएं। यह मिट्टी के लिए ‘अमृत’ है।
  • सिंगल यूज़ प्लास्टिक को ना कहें: प्लास्टिक मिट्टी में नहीं गलता और उसे जहरीला बना देता है।
  • जागरूकता: अगर आप किसान परिवार से हैं, तो अपने बड़ों को ‘फसल चक्र’ (Crop Rotation) और जैविक खेती (Organic Farming) के फायदे बताएं।
  • पेड़ लगाएं: जड़ों की पकड़ ही मिट्टी को कटने से रोकती है।

क्या महत्वपूर्ण है?

अंत में, हमें यह समझना होगा कि मिट्टी हमारे पूर्वजों की दी हुई विरासत नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का उधार है। अगर हम उन्हें बंजर धरती देकर जाएंगे, तो वे जीवित कैसे रहेंगे?आज विश्व मृदा दिवस पर, चलिए संकल्प लेते हैं कि हम मिट्टी को ‘धूल’ नहीं, बल्कि ‘मां’ समझकर उसका सम्मान करेंगे। थोड़ी सी जागरूकता और हमारी छोटी-छोटी आदतें इस धरती को फिर से हरा-भरा और उपजाऊ बना सकती हैं।

मिट्टी स्वस्थ, तो हम स्वस्थ!

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CAT 2025 Answer Key Date: खत्म हुआ इंतज़ार, जानें कब और कैसे चेक करें अपनी रिस्पॉन्स शीट

CAT 2025

क्या आप भी उन लाखों छात्रों में से एक हैं जिन्होंने 30 नवंबर को CAT 2025 की परीक्षा दी है? अगर हाँ, तो परीक्षा हॉल से बाहर निकलने के बाद जो सवाल सबसे ज्यादा परेशान करता है, वह यह है कि “आखिर मेरे कितने जवाब सही हुए?”। परीक्षा खत्म होने के बाद अब सबकी निगाहें IIM की आधिकारिक वेबसाइट पर टिकी हैं क्योंकि किसी भी वक्त ‘Answer Key’ और ‘Response Sheet’ जारी की जा सकती है। इस ब्लॉग पोस्ट में हम विस्तार से चर्चा करेंगे कि आंसर की कब तक आने की उम्मीद है, इसे डाउनलोड करने की पूरी प्रक्रिया क्या है और आप अपने स्कोर का सही अंदाजा कैसे लगा सकते हैं।

CAT 2025

CAT 2025 Answer Key की संभावित तारीख

CAT 2025 की परीक्षा 30 नवंबर को सफलतापर्वूक संपन्न हो चुकी है। अगर हम पिछले कुछ सालों के ट्रेंड को देखें, तो IIM प्रबंधन परीक्षा के 3 से 4 दिनों के भीतर ही रिस्पॉन्स शीट जारी कर देता है। इस हिसाब से, दिसंबर के पहले सप्ताह, यानी 3 से 5 दिसंबर 2025 के बीच किसी भी समय आंसर की जारी होने की पूरी संभावना है।

आंसर की आने के बाद, उम्मीदवारों को कुछ दिनों का समय दिया जाएगा ताकि वे किसी भी उत्तर पर आपत्ति दर्ज करा सकें, जिसके बाद जनवरी 2026 के दूसरे सप्ताह तक फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया जाएगा। इसलिए, छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे लगातार आधिकारिक वेबसाइट iimcat.ac.in पर नज़र बनाए रखें।

Answer Key डाउनलोड करने की प्रक्रिया

अपनी रिस्पॉन्स शीट या आंसर की डाउनलोड करना बहुत ही आसान है और इसके लिए आपको किसी लंबी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले, उम्मीदवारों को CAT की आधिकारिक वेबसाइट iimcat.ac.in पर जाना होगा। वहां होमपेज पर ‘Registered Candidate Login’ का विकल्प दिखाई देगा, जिस पर क्लिक करना है।

इसके बाद, आपको अपनी यूजर आईडी और पासवर्ड डालकर लॉग इन करना होगा। जैसे ही आप डैशबोर्ड में प्रवेश करेंगे, आपको ‘Candidate Response’ या ‘Answer Key’ नाम से एक टैब दिखाई देगा। इस टैब पर क्लिक करते ही आपकी रिस्पॉन्स शीट पीडीएफ फॉर्मेट में स्क्रीन पर आ जाएगी, जिसे आप डाउनलोड कर सकते हैं। इस शीट में आपके द्वारा मार्क किए गए उत्तर और IIM द्वारा बताए गए सही उत्तर, दोनों मौजूद होंगे।

अपना स्कोर कैसे कैलकुलेट करें और मार्किंग स्कीम-

एक बार जब आपके हाथ में आंसर की आ जाए, तो अगला कदम अपने संभावित स्कोर (Raw Score) की गणना करना होता है। CAT 2025 की मार्किंग स्कीम को समझना इसके लिए जरूरी है। पेपर में हर सही उत्तर के लिए आपको +3 अंक मिलते हैं। वहीं, बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQs) में हर गलत उत्तर के लिए -1 अंक की निगेटिव मार्किंग होती है।

हालांकि, जो प्रश्न नॉन-एमसीक्यू या TITA (Type In The Answer) श्रेणी के होते हैं, उनमें गलत उत्तर देने पर कोई भी नंबर नहीं काटा जाता, यानी उनके लिए निगेटिव मार्किंग शून्य होती है। अपना कुल स्कोर निकालने के लिए आप अपने सभी सही उत्तरों को 3 से गुणा करें और उसमें से अपने गलत एमसीक्यू उत्तरों की संख्या को घटा दें।

CAT 2025

आंसर की पर आपत्ति (Objection) दर्ज करने का तरीका-

कभी-कभी ऐसा हो सकता है कि IIM द्वारा जारी की गई आंसर की में कोई तकनीकी त्रुटि हो या आपको लगे कि आपका जवाब सही है लेकिन सिस्टम ने उसे गलत माना है। ऐसी स्थिति के लिए IIM ‘Objection Window’ खोलता है। आंसर की जारी होने के बाद, आपके डैशबोर्ड पर ही ‘Objection Form’ का विकल्प सक्रिय हो जाता है।

आप उस प्रश्न का चयन कर सकते हैं जिस पर आपको संदेह है और अपनी आपत्ति के समर्थन में तर्क दे सकते हैं। ध्यान रखें कि इसके लिए प्रति प्रश्न एक निर्धारित फीस चुकानी होती है, जो आमतौर पर 1200 से 1500 रुपये के बीच होती है। अगर आपकी आपत्ति सही पाई जाती है, तो यह फीस रिफंड कर दी जाती है।

अंत में, हम यही कहेंगे कि आंसर की का इंतज़ार करते समय घबराने की जरूरत नहीं है। बस अपना लॉगिन विवरण तैयार रखें और संयम बनाए रखें। जैसे ही आंसर की का लिंक एक्टिव होगा, वेबसाइट पर ट्रैफिक बढ़ सकता है, इसलिए धैर्यपूर्वक प्रयास करें। रिस्पॉन्स शीट से आपको अपनी स्थिति का एक स्पष्ट अंदाजा मिल जाएगा, जिससे आप आगे की प्रक्रिया, जैसे कि GD/PI की तैयारी, के लिए मानसिक रूप से तैयार हो सकेंगे। हमारी तरफ से आप सभी को उज्ज्वल भविष्य के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं!

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सीवान पुलिस ने 24 घंटे में सुलझाया ज्वेलरी लूट कांड, सभी 6 आरोपी गिरफ्तार, लूटा हुआ सोना बरामद!

सीवान

सीवान के रघुनाथपुर में हुई बड़ी ज्वेलरी लूट का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने महज 24 घंटे के अंदर सभी 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लूटा गया सोना और हथियार बरामद कर लिया है। जानिए सीवान इस पूरे ऑपरेशन की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी। बिहार के सीवान (Siwan) जिले में अपराधियों के हौसले पस्त हो गए हैं। हाल ही में रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के टारी बाजार में दिनदहाड़े हुई बड़ी स्वर्ण लूट की घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया था।

लेकिन, सीवान पुलिस ने अदम्य साहस और तत्परता दिखाते हुए महज 24 घंटे के भीतर न केवल इस कांड का खुलासा किया, बल्कि इसमें शामिल सभी 6 खूंखार अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। पुलिस ने लूटा गया सोना, चांदी और घटना में प्रयुक्त हथियार भी बरामद कर लिए हैं।

यह खबर कानून व्यवस्था पर भरोसा जगाने वाली है। आइए, विस्तार से जानते हैं कि पुलिस ने इस ‘मिशन इम्पॉसिबल’ को कैसे अंजाम दिया।

क्या थी पूरी घटना?

27 नवंबर की दोपहर, रघुनाथपुर का टारी बाजार अपनी सामान्य रफ्तार से चल रहा था। तभी 6 बाइक सवार नकाबपोश अपराधी कृष्णा ज्वेलर्स (Krishna Jewellers) नामक दुकान पर आ धमके। अपराधियों ने दुकान मालिक कृष्णा सोनी को बंदूक की नोक पर बंधक बना लिया और लाखों के जेवर लूट लिए।

दहशत फैलाने के लिए अपराधियों ने बाजार में सरेआम 10-12 राउंड फायरिंग भी की, जिससे पूरा इलाका थर्रा गया। वे गहनों को बोरों में भरकर फिल्मी स्टाइल में फरार हो गए थे।

पुलिस का ‘सुपर एक्शन’ प्लान

घटना की सूचना मिलते ही सीवान के एसपी (SP) मनोज कुमार तिवारी ने इसे चुनौती के रूप में लिया। उन्होंने तुरंत एक विशेष टीम (SIT) का गठन किया। पुलिस ने वैज्ञानिक अनुसंधान और सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) के आधार पर अपराधियों की पहचान शुरू की।

• घेराबंदी: पुलिस ने जिले के सभी निकास रास्तों को सील कर दिया।

• छापेमारी: 24 घंटे लगातार चली छापेमारी के बाद पुलिस ने अपराधियों के ठिकाने का पता लगा लिया।

गिरफ्तारी और बरामदगी

पुलिस की दबिश काम आई और सभी 6 आरोपी दबोच लिए गए। पुलिस ने उनके पास से लूट का बड़ा जखीरा बरामद किया है:

• लूटे गए आभूषण: भारी मात्रा में सोने और चांदी के जेवर (जिसमें हार, चेन और अंगूठियां शामिल हैं)।

• हथियार: घटना में इस्तेमाल किए गए अवैध हथियार और कारतूस।

• वाहन: लूट के लिए इस्तेमाल की गई बाइकें।

सीवान

क्यों की थी लूट?

पुलिस पूछताछ में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ। गिरफ्तार अपराधियों ने कबूला कि उन्होंने यह लूट अपने एक साथी, संजीत महतो, जो कि सीवान जेल में बंद है, की जमानत (Bail) के लिए पैसे जुटाने के मकसद से की थी। जेल से ही इस पूरी साजिश की पटकथा लिखी गई थी, जिसे पुलिस ने समय रहते नाकाम कर दिया।

आम जनता और व्यापारियों में खुशी की लहर

इस त्वरित कार्रवाई से सीवान के स्वर्ण व्यवसायियों ने राहत की सांस ली है। जहां एक तरफ अपराधी पुलिस को चुनौती दे रहे थे, वहीं पुलिस की इस जवाबी कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं। स्थानीय लोगों ने एसपी मनोज तिवारी और उनकी पूरी टीम की सराहना की है।

सीवान पुलिस की यह कामयाबी साबित करती है कि अगर प्रशासन ठान ले, तो अपराधी कहीं भी नहीं छिप सकते। यह घटना अन्य अपराधियों के लिए भी एक कड़ा संदेश है। बिहार पुलिस की इस सफलता पर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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19-Minute Viral Video का सच: क्या है Deepfake और AI का खेल? जानिए Sweet Zannat और वायरल MMS की पूरी सच्चाई

Viral Video

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, खासकर Instagram और X (Twitter) पर एक “19-minute viral video” नाम का कीवर्ड जंगल में आग की तरह फैल रहा है। हर कोई इस वीडियो के बारे में बात कर रहा है, लिंक मांग रहा है और तरह-तरह के दावे कर रहा है।

दावा किया जा रहा है कि यह एक 19 मिनट 34 सेकंड का प्राइवेट वीडियो है जो किसी होटल के कमरे का है। लेकिन रुकिए! जो आप देख रहे हैं या सुन रहे हैं, क्या वह सच है? या फिर आप भी AI (Artificial Intelligence) और Deepfake के एक बड़े जाल में फंस रहे हैं? इस ब्लॉग में हम इस वायरल कंट्रोवर्सी की एक-एक परत खोलेंगे।

क्या है 19-Minute Viral Video Controversy?

नवंबर के आखिरी हफ्ते और दिसंबर की शुरुआत में, इंटरनेट पर एक वीडियो को लेकर चर्चा शुरू हुई। इसे “19-minute MMS” कहा गया।

दावा: वीडियो में एक कपल को आपत्तिजनक स्थिति में दिखाया गया है।

अफवाह: सोशल मीडिया यूजर्स ने बिना किसी सबूत के इस वीडियो को मशहूर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर Sweet Zannat और कुछ अन्य लोगों से जोड़ना शुरू कर दिया।

ट्विस्ट: जैसे-जैसे बात बढ़ी, यह सामने आया कि इस वीडियो के “Season 2” और “Season 3” भी आ रहे हैं। यहीं से शक गहरा गया कि क्या यह वीडियो असली है भी या नहीं?

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Sweet Zannat ने तोड़ी चुप्पी: “मेरे ऊपर किसी और का कांड क्यों?”

जब यह मामला बढ़ा, तो मेघालय की लोकप्रिय इन्फ्लुएंसर Sweet Zannat के कमेंट सेक्शन में लोग “19 minute” स्पैम करने लगे। उन्हें इस कदर परेशान किया गया कि उन्हें एक क्लेरिफिकेशन वीडियो जारी करना पड़ा।

Zannat ने अपनी सफाई में कुछ अहम बातें कहीं जो इस Fake News की पोल खोलती हैं:

चेहरा नहीं मिलता: उन्होंने अपने वीडियो में साफ कहा, “पहले मुझे देखो, फिर उस वीडियो वाली लड़की को देखो। क्या हम सेम दिखते हैं? बिल्कुल नहीं!”

भाषा का अंतर: वायरल वीडियो में लड़की फर्राटेदार अंग्रेजी (English) बोल रही है। Zannat ने मजाक में कहा, “भाई, वो इंग्लिश बोल रही है और मैंने तो 12वीं के बाद पढ़ाई भी ठीक से नहीं की। यह मैं कैसे हो सकती हूं?”

गलत पहचान (Misidentification): यह साफ हो गया कि लोग सिर्फ मजे लेने के लिए किसी भी इन्फ्लुएंसर का नाम इस वीडियो के साथ जोड़ रहे हैं।

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Deepfake और AI का खतरनाक खेल

इस पूरे मामले में सबसे डरावना पहलू Artificial Intelligence (AI) का है। एक्सपर्ट्स और साइबर सेल की शुरुआती जांच से यह संकेत मिल रहे हैं कि जिसे लोग “लीक MMS” समझ रहे हैं, वह दरअसल Deepfake Technology का नतीजा हो सकता है।

Deepfake क्या है?यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें AI का इस्तेमाल करके किसी असली इंसान के चेहरे को किसी अश्लील वीडियो में दूसरे के चेहरे पर लगा दिया जाता है। यह इतना असली दिखता है कि आम इंसान फर्क नहीं कर पाता।

AI Generated Clips: “Season 2” और “Season 3” जैसे नामों से आने वाले वीडियो इस बात का सबूत हैं कि इन्हें जानबूझकर क्रिएट किया जा रहा है ताकि व्यूज और स्कैम लिंक्स को बढ़ावा दिया जा सके।

सावधान! वीडियो शेयर करना आपको जेल भेज सकता है –

अगर आपके पास ऐसा कोई वीडियो व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर आता है, तो उसे आगे फॉरवर्ड करने से पहले हजार बार सोचें।

IT Act Section 67: भारत में किसी भी तरह का अश्लील (obscene) कंटेंट इलेक्ट्रॉनिक रूप से पब्लिश या शेयर करना गैर-कानूनी है।

सजा: ऐसा करने पर आपको 3 साल तक की जेल और भारी जुर्माना हो सकता है।

AI कानून: अगर वीडियो डीपफेक है और किसी की छवि खराब करने के लिए बनाया गया है, तो सजा और भी सख्त हो सकती है।

19-minute viral video controversy हमें यह सिखाती है कि इंटरनेट पर हर चमकती चीज सोना नहीं होती। जिसे आप “लीक” समझ रहे हैं, वह किसी शातिर दिमाग और AI टूल का कारनामा हो सकता है। Sweet Zannat जैसी इन्फ्लुएंसर्स सिर्फ इस भीड़ का शिकार बनी हैं।

viral video

हमारी सलाह:

  • किसी भी वायरल लिंक पर क्लिक न करें (यह आपके फोन को हैक कर सकता है)।
  • अफवाहों को सच मानकर किसी को ट्रोल न करें।
  • AI और Deepfake के इस दौर में अपनी आंखों पर नहीं, तथ्यों पर भरोसा करें।
  • इस खबर को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें ताकि वे भी इस Fake Trap में फंसने से बच सकें।

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Cold Supermoon 2025: आज रात आसमान में दिखेगा साल का आखिरी ‘कोल्ड सुपरमून’, जानिए क्यों है यह खास और देखने का सही समय

Supermoon

आज की रात (4 दिसंबर) खगोल प्रेमियों और आम लोगों के लिए बेहद खास होने वाली है। अगर आप आज रात आसमान की तरफ देखेंगे, तो आपको चाँद बाकियों दिनों के मुकाबले थोड़ा अलग, बड़ा और ज्यादा चमकीला नज़र आएगा। जी हाँ, आज साल 2025 का आखिरी सुपरमून (Last Supermoon of 2025) दिखाई देने वाला है, जिसे दुनिया भर में ‘कोल्ड सुपरमून‘ (Cold Supermoon) के नाम से जाना जा रहा है। आइए जानते हैं कि यह Supermoon इतना खास क्यों है, इसे ‘कोल्ड मून’ क्यों कहा जाता है Supermoon और आप इसे भारत में कब और कैसे देख सकते हैं।

क्या है कोल्ड Supermoon?

इसे समझने के लिए हमें दो शब्दों को समझना होगा: ‘सुपरमून’ और ‘कोल्ड मून’।

सुपरमून

सुपरमून क्यों-

  • जब चाँद पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए उसके सबसे करीब (Perigee) आ जाता है और उसी वक्त पूर्णिमा (Full Moon) भी हो, तो उसे ‘सुपरमून’ कहते हैं।
  • इस दौरान चाँद आम पूर्णिमा के मुकाबले लगभग 14% बड़ा और 30% ज्यादा चमकदार दिखाई देता है।
  • आज चाँद पृथ्वी के बेहद करीब होगा, इसलिए यह अपने पूरे शबाब पर नज़र आएगा।

‘कोल्ड मून’ नाम क्यों-

  • दिसंबर में निकलने वाले पूर्णिमा के चाँद को पश्चिमी देशों और अमेरिकी जनजातियों (Native Americans) ने ‘कोल्ड मून’ का नाम दिया है।
  • चूंकि दिसंबर में कड़ाके की ठंड पड़ना शुरू हो जाती है और रातें लंबी होती हैं, इसलिए इसे ‘कोल्ड मून’ या ‘लॉन्ग नाइट मून’ (Long Night Moon) भी कहा जाता है।

आज के Supermoon में क्या खास है?

  • साल 2025 में खगोलीय घटनाओं की कोई कमी नहीं रही, लेकिन आज की रात का नज़ारा मिस नहीं करना चाहिए क्योंकि:
  • साल का आखिरी मौका: यह 2025 का अंतिम सुपरमून है। इसके बाद ऐसा नज़ारा देखने के लिए आपको अगले साल का इंतज़ार करना होगा।
  • शीतकालीन संक्रांति के करीब: यह पूर्णिमा 21 दिसंबर को आने वाले ‘विंटर सोलस्टाइस’ (सबसे छोटी रात) के करीब है, इसलिए चाँद आसमान में ज्यादा देर तक रहेगा और क्षितिज (Horizon) के ऊपर ऊंचा दिखाई देगा।

भारत में कब और कैसे देखें?

  • अगर आप भारत में हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। सुपरमून को देखने के लिए आपको किसी महंगे टेलीस्कोप या उपकरण की ज़रूरत नहीं है।
  • समय: आज शाम सूर्यास्त (Sunset) के ठीक बाद जैसे ही अंधेरा होगा, आप पूर्व दिशा (East Direction) में चाँद को निकलते हुए देख सकते हैं।
  • बेस्ट नज़ारा: चाँद का सबसे बेहतरीन नज़ारा तब होता है जब वह क्षितिज (Horizon) के पास होता है (यानी जब वह उग रहा होता है)। इस समय ‘मून इल्यूजन’ (Moon Illusion) की वजह से चाँद इमारतों और पेड़ों के पीछे बहुत विशाल दिखाई देता है।

देखने के टिप्स:

•अपने घर की छत या किसी खुली जगह पर जाएं।

•शहर की तेज़ रोशनी (Light Pollution) से थोड़ा दूर देखने की कोशिश करें।

•मोबाइल कैमरे से फोटो लेते समय ‘Pro Mode’ का इस्तेमाल करें और ISO कम रखें ताकि चाँद की डिटेल्स साफ आएं।

सुपरमून

ज्योतिषीय और सांस्कृतिक महत्व

•भारत में आज मार्गशीर्ष पूर्णिमा भी है। हिंदू धर्म में इस पूर्णिमा का विशेष महत्व है।

•माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने और गंगा स्नान करने से पुण्य मिलता है।

•चाँद की शीतलता मन को शांति प्रदान करती है। विज्ञान और आस्था का यह संगम आज की रात को और भी पवित्र बनाता है।

भागदौड़ भरी ज़िंदगी में आज रात थोड़ा समय निकालिए और आसमान की ओर ज़रूर देखिए। कुदरत का यह ‘कोल्ड सुपरमून’ आपको सुकून और आश्चर्य दोनों देगा। अपनी छत पर जाइए, परिवार के साथ बैठिए और साल 2025 के इस आखिरी खगोलीय तोहफे का आनंद लीजिए।

क्या आपने सुपरमून देखा?

अगर आपने आज के चाँद की कोई फोटो ली है या इसे देखा है, तो अपना अनुभव हमें कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताएं!

(नोट: इस जानकारी को अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करें ताकि वे भी इस खूबसूरत नज़ारे को देखने से न चूकें।)

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रुक जाओ! अगर आप हवाई यात्रा करने वाले हो तो बिना ये न्यूज़ पढ़े मत निकलो घर के बाहर—जानें एयरपोर्ट्स पर क्या है ‘GPS स्पूफिंग’ का नया खतरा

हवाई यात्रा

क्या आप आने वाले दिनों में हवाई यात्रा (Air Travel) करने का प्लान बना रहे हैं? अगर हाँ, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। पिछले कुछ घंटों से देश के प्रमुख हवाई अड्डों से ऐसी खबरें आ रही हैं जिन्होंने यात्रियों और सुरक्षा एजेंसियों दोनों की चिंता बढ़ा दी है।

दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहरों के एयरपोर्ट्स पर दोहरी मुसीबत आन पड़ी है—एक तरफ चेक-इन सिस्टम में तकनीकी खराबी और दूसरी तरफ ‘GPS स्पूफिंग’ (GPS Spoofing) का गहराता खतरा।

आखिर यह ‘GPS स्पूफिंग’ क्या बला है? क्यों एयर इंडिया (Air India) को एडवाइजरी जारी करनी पड़ी? और क्या आपकी फ्लाइट सुरक्षित है? आइए, इस ब्लॉग में आसान भाषा में सबकुछ समझते हैं।

हवाई यात्रा

1. क्या हो रहा है देश के एयरपोर्ट्स पर?

  • हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश के कई बड़े एयरपोर्ट्स पर यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दो मुख्य समस्याएं सामने आई हैं:
  • चेक-इन सिस्टम ठप: कई एयरलाइंस के नेटवर्क में तकनीकी दिक्कत आने से चेक-इन काउंटर पर लंबी लाइनें लग गई हैं। जो काम मिनटों में होता था, उसमें घंटों लग रहे हैं।
  • GPS में छेड़छाड़: इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि विमानों के नेविगेशन सिस्टम (Navigation System) को गलत सिग्नल मिल रहे हैं, जिसे तकनीकी भाषा में ‘GPS स्पूफिंग’ कहा जाता है।

2. क्या है ‘GPS स्पूफिंग’?

आपने अपने फोन में GPS का इस्तेमाल किया होगा जो आपको सही रास्ता दिखाता है। ठीक वैसे ही विमान हवा में रास्ता खोजने के लिए GPS (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) का इस्तेमाल करते हैं।

GPS स्पूफिंग (Spoofing) एक तरह का साइबर हमला या तकनीकी गड़बड़ी है:

  • इसमें विमान के सिस्टम को ‘नकली सिग्नल’ (Fake Signals) भेजे जाते हैं।
  • परिणामस्वरूप, पायलट को लगता है कि विमान किसी और जगह है, जबकि वास्तव में वह कहीं और होता है।
  • उदाहरण: मान लीजिए विमान दिल्ली के ऊपर उड़ रहा है, लेकिन स्पूफिंग की वजह से सिस्टम दिखा सकता है कि वह जयपुर या किसी प्रतिबंधित क्षेत्र (जैसे पाकिस्तान बॉर्डर के पास) में है।
  • यह स्थिति पायलटों के लिए बहुत भ्रमित करने वाली होती है और सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर है।

3. सरकार और एयरलाइंस का क्या कहना है?

इस मुद्दे की गूंज अब संसद (Parliament) तक पहुँच गई है। सरकार ने भी माना है कि दिल्ली एयरपोर्ट के आस-पास ‘GPS जैमिंग’ और ‘स्पूफिंग’ की घटनाएं बढ़ी हैं।

  • Air India की एडवाइजरी: एयर इंडिया ने यात्रियों को चेतावनी दी है कि तकनीकी खराबी के कारण फ्लाइट्स में देरी हो सकती है। उन्होंने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे एयरपोर्ट जल्दी पहुँचें।
  • DGCA और सुरक्षा एजेंसियां: मामले की जांच कर रही हैं। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया है कि ग्राउंड रडार सिस्टम पूरी तरह काम कर रहा है, जिससे विमानों की लैंडिंग और टेक-ऑफ को सुरक्षित रूप से मैनेज किया जा रहा है।

4. यह खतरा अचानक क्यों बढ़ा?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या अक्सर मध्य पूर्व (Middle East) के ऊपर से गुजरने वाले विमानों में देखी जाती थी, लेकिन अब भारतीय शहरों (विशेषकर दिल्ली और मुंबई) में इसका बढ़ना चिंताजनक है।

इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं:

  • कुछ अज्ञात स्रोतों द्वारा सिग्नल्स के साथ छेड़छाड़।
  • हाई-टेक जैमर्स का अवैध इस्तेमाल।
  • सिस्टम में कोई बड़ा सॉफ्टवेयर बग (Bug)
  • हवाई यात्रा

5. यात्रियों के लिए जरूरी सलाह (Travel Tips)

अगर आपकी फ्लाइट अगले 24-48 घंटों में है, तो इन बातों का ध्यान रखें:

  • समय से पहले निकलें: सामान्य से कम से कम 1 घंटा अतिरिक्त लेकर चलें। चेक-इन में वक्त लग सकता है।
  • फ्लाइट स्टेटस चेक करें: घर से निकलने से पहले अपनी एयरलाइन की वेबसाइट या ऐप पर फ्लाइट का स्टेटस जरूर देख लें।
  • पैनिक न करें: भारतीय पायलट दुनिया के सबसे बेहतरीन पायलटों में से एक हैं और वे बिना GPS के भी रडार और एटीसी (ATC) की मदद से विमान उड़ाने में सक्षम हैं। आप सुरक्षित हाथों में हैं।

तकनीक जहां हमारा जीवन आसान बनाती है, वहीं इस तरह की खामियां नई चुनौतियां भी खड़ी करती हैं। ‘GPS स्पूफिंग’ एक गंभीर मसला है जिसे सरकार और एविएशन इंडस्ट्री को प्राथमिकता से सुलझाना होगा।

फिलहाल, हम यही उम्मीद करते हैं कि यह समस्या जल्द ठीक हो जाए और आपकी यात्रा मंगलमय हो। आपका अनुभव: क्या आपने हाल ही में एयरपोर्ट पर किसी तरह की देरी या तकनीकी दिक्कत का सामना किया? हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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चंडीगढ़ शूटआउट: सेक्टर-26 में पैरी की हत्या, लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली जिम्मेदारी; गैंगवार की ‘खुली जंग’ शुरू

लॉरेंस बिश्नोई

सिटी ब्यूटीफुल में दहशत का माहौल सोमवार की शाम चंडीगढ़ का व्यस्त सेक्टर-26 स्थित टिंबर मार्केट उस वक्त गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठा, लॉरेंस बिश्नोई जब कुख्यात गैंगस्टर इंदरप्रीत सिंह उर्फ पैरी की फिल्मी अंदाज़ में कार के भीतर ही गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह सनसनीखेज वारदात ट्राइसिटी (चंडीगढ़-मोहाली-पंचकुला) के अंडरवर्ल्ड में एक बड़े भूचाल का संकेत दे रही है, क्योंकि कुछ ही देर बाद, सोशल मीडिया पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े एक हैंडल ने इस हत्या की खुले तौर पर जिम्मेदारी लेते हुए इसे ‘गद्दारी का अंजाम’ बताया।

टिंबर मार्केट में ‘फिल्मी’ स्टाइल में हमला

  • यह घातक हमला सोमवार शाम करीब 6.30 बजे हुआ। 30-35 वर्षीय पैरी अपनी सफेद Kia कार में सवार होकर सेक्टर-33 स्थित अपने घर लौट रहा था। पुलिस और चश्मदीदों के मुताबिक, वारदात को अंजाम देने का तरीका बेहद शातिर था:
  • कार के अंदर फायरिंग: सबसे पहले, एक शूटर जो संभवतः पैरी के साथ ही कार में बैठा था, उसने अंदर से फायरिंग की।
  • घातक हमला: इसके तुरंत बाद, पीछे से तेज रफ्तार में आई एक सफेद Hyundai Creta कार ने पैरी की कार को ओवरटेक किया। इस Creta में सवार 3-4 हमलावरों ने पैरी की कार पर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं।
  • 11 राउंड फायरिंग: आशंका है कि हमलावरों ने Kia कार पर कम से कम 6 राउंड तक गोलियां बरसाईं, जबकि कुल 10 से 11 राउंड फायर किए गए होंगे।
  • गोलियां लगने से गंभीर रूप से घायल पैरी को तुरंत स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से PGI ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
  • लॉरेंस बिश्नोई

लॉरेंस गैंग का कबूलनामा: ‘गद्दारी का अंजाम’

  • इस हाई-प्रोफाइल शूटआउट को लॉरेंस बिश्नोई गैंग द्वारा सोशल मीडिया पर कबूल किया जाना, इस मामले को एक नई और खतरनाक दिशा देता है।
  • सोशल मीडिया पोस्ट: वारदात के कुछ ही देर बाद, “Hari Boxer Aarzoo Bishnoi” नामक फेसबुक आईडी और अन्य संबंधित हैंडल्स से एक पोस्ट जारी की गई।
  • दवा की वजह: पोस्ट में साफ तौर पर लिखा गया कि सेक्टर-26 में पैरी की हत्या उन्होंने ही की है, क्योंकि पैरी ने लॉरेंस बिश्नोई ग्रुप से “दगा” (विश्वासघात) किया था।
  • प्रतिद्वंद्वी गिरोह से हाथ: गिरोह का आरोप है कि पैरी हाल ही में कनाडा में बैठे गोल्डी बराड़ (Goldy Brar) और अन्य प्रतिद्वंद्वी गिरोहों के लिए चंडीगढ़ के क्लबों और शराब कारोबारियों से रंगदारी वसूल रहा था।
  • पुरानी रंजिश: पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि पैरी का हाथ उनके पुराने साथी “सिप्पा” की हत्या में भी था।

पोस्ट में क्लब मालिकों और ‘बुकी’ (सट्टा कारोबारियों) को चेतावनी देते हुए खुले तौर पर कहा गया है कि जो कोई भी प्रतिद्वंद्वी गिरोह का साथ देगा, उसे देश या विदेश में कहीं भी छोड़ा नहीं जाएगा—जो ट्राइसिटी में एक नई और खुली गैंगवार का स्पष्ट संकेत है। पुलिस फिलहाल इस सोशल मीडिया पोस्ट की सत्यता की जांच कर रही है।

📜 इंदरप्रीत सिंह उर्फ पैरी: आपराधिक इतिहास

  • पैरी का नाम लगभग एक दशक से चंडीगढ़ और पंजाब पुलिस की आपराधिक फाइलों में दर्ज है।
  • मामले: उसके खिलाफ हत्या, हत्या की कोशिश, जबरन वसूली (रंगदारी) और अवैध हथियारों से संबंधित दर्जन भर से अधिक मामले दर्ज थे।
  • गैंग से जुड़ाव: 2011 में सेक्टर-40 की एक वारदात में लॉरेंस बिश्नोई के साथ नाम आने के बाद वह इस कुख्यात गिरोह का हिस्सा बन गया था। वह बार-बार गिरफ्तार होकर जमानत पर छूटता रहा।
  • निजी जीवन: हाल ही में पैरी की शादी हुई थी और वह कुछ मामलों में ट्रायल का सामना कर रहा था, जब उस पर यह जानलेवा हमला हुआ।
  • लॉरेंस बिश्नोई

पुलिस जांच और सुरक्षा व्यवस्था

  • चंडीगढ़ के आईजी पुष्पेंद्र कुमार ने मीडिया को बताया है कि यह मामला ‘प्रथम गैंगवार का और आंतरिक’ लग रहा है।
  • जांच: पुलिस ने हमलावरों की पहचान के लिए आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू कर दिए हैं। इसके अलावा, फॉरेंसिक एविडेंस जुटाए जा रहे हैं और पैरी की कॉल डिटेल्स भी चेक की जा रही हैं।
  • फरार हमलावर: हमलावर वारदात को अंजाम देने के बाद तेजी से हरियाणा की ओर भाग निकले। उनकी धरपकड़ के लिए स्पेशल टीमें बनाई गई हैं और पंजाब-हरियाणा पुलिस से भी संपर्क साधा जा रहा है।
  • यह शूटआउट “सिटी ब्यूटीफुल” चंडीगढ़ में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है और दिखाता है कि अंडरवर्ल्ड की सक्रियता कितनी बढ़ चुकी है।

क्या आपको लगता है कि इस घटना के बाद ट्राइसिटी में गैंगवार और बढ़ेगी? नीचे कमेंट करके अपनी राय बताएं।

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पाकिस्तान में फिर ‘गदर’: इमरान के समर्थकों ने इस्लामाबाद हाई कोर्ट को घेरा, सरकार की नींद हराम!

पाकिस्तान

पाकिस्तान की सियासत में आज फिर उबाल आ गया है. अगर आपको लग रहा था कि पड़ोसी मुल्क में सब शांत है, तो आप गलतफहमी में हैं.

आज (2 दिसंबर) इस्लामाबाद का नजारा किसी फिल्म के सेट से कम नहीं था. फर्क बस इतना था कि यहाँ कोई स्क्रिप्ट नहीं थी, बल्कि असली गुस्सा और जज्बात थे. पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) की पार्टी, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के बड़े नेताओं ने आज इस्लामाबाद हाई कोर्ट के बाहर जो किया, उसने शहबाज सरकार के माथे पर पसीना ला दिया है.चलिए, आसान भाषा में समझते हैं कि आज आखिर हुआ क्या और इसके मायने क्या हैं.

हाई कोर्ट के बाहर ‘हाई वोल्टेज’ ड्रामा

आज सुबह से ही इस्लामाबाद हाई कोर्ट के बाहर हलचल तेज थी. भारी पुलिस बल तैनात था, बैरिकेड्स लगे थे, लेकिन इमरान खान के ‘खिलाड़ी’ (PTI नेता) रुकने वाले कहाँ थे. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कोर्ट के बाहर डेरा जमा लिया.

तस्वीरें बयां कर रही थीं कि यह सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि सरकार को सीधी चुनौती थी. नेताओं के हाथों में बैनर थे और जुबां पर सिर्फ एक ही मांग— “न्याय दो, कप्तान को रिहाई दो!” भीड़ का गुस्सा साफ़ बता रहा था कि अब उनके सब्र का बांध टूट रहा है. इमरान खान, जो पिछले काफी वक्त से जेल (अडियाला जेल) की सलाखों के पीछे हैं, उनके बाहर न आने से पार्टी में बेचैनी बढ़ती जा रही है.

पाकिस्तान

आखिर कोर्ट के बाहर ही क्यों हुआ प्रदर्शन?

आप सोच रहे होंगे कि प्रदर्शन तो सड़क पर भी हो सकता था, फिर कोर्ट के बाहर क्यों?

दरअसल, यह एक सोची-समझी रणनीति थी. इमरान खान पर दर्जनों मुकदमे चल रहे हैं और उनकी जमानत की याचिकाएं अदालतों में पेंडिंग हैं. PTI नेताओं का आरोप है कि जानबूझकर कानूनी प्रक्रिया को धीमा किया जा रहा है. उनका कहना है कि “इंसाफ में देरी, इंसाफ की हत्या है.”

आज का यह प्रदर्शन जजों और पूरी दुनिया को यह दिखाने के लिए था कि उनकी पार्टी अभी हारी नहीं है और वे अपने नेता के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं.

पुलिस और प्रदर्शनकारियों में तू-तू मैं-मैं

माहौल तब गरमाया जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की. धक्का-मुक्की हुई, लेकिन PTI नेता अपनी जगह से नहीं हिले. इस्लामाबाद का यह इलाका आज सियासी जंग का मैदान बन गया था. इमरान के समर्थकों का साफ़ कहना था— “जब तक रिहाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं.”

क्या सरकार डर गई है?

शहबाज शरीफ की मौजूदा सरकार के लिए यह प्रदर्शन एक खतरे की घंटी है. मुल्क की अर्थव्यवस्था पहले ही वेंटिलेटर पर है, महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ रखी है, और ऐसे में अगर सड़कों पर फिर से हुजूम उमड़ पड़ा, तो सरकार का टिकना मुश्किल हो जाएगा. जानकारों की मानें तो सरकार इसीलिए इमरान खान को बाहर आने से रोक रही है, क्योंकि वे जानते हैं कि अगर ‘कप्तान’ बाहर आ गया, तो जो जनसैलाब उमड़ेगा, उसे रोकना नामुमकिन होगा.

आज जो इस्लामाबाद हाई कोर्ट के बाहर हुआ, वह सिर्फ एक ट्रेलर था. यह लड़ाई अब अदालतों से निकलकर सड़कों पर आ गई है. इमरान खान जेल के अंदर हैं, लेकिन उनकी पार्टी यह साबित करने में जुटी है कि उनकी “ताकत” जेल की दीवारों में कैद नहीं की जा सकती.

अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या अदालत इन प्रदर्शनों का संज्ञान लेती है या पाकिस्तान की सड़कों पर अभी और ‘गदर’ मचना बाकी है.

पाकिस्तान

आपका क्या मानना है?

क्या इमरान खान की रिहाई से पाकिस्तान के हालात सुधरेंगे या बिगड़ेंगे? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें!

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सरकार लाएगी नया बिल – पान मसाला, गुटखा उद्योग पर कड़ी …!Gutkha Ban Incoming?

सरकार

केंद्र सरकार पान मसाला और गुटखा उद्योग पर कड़ी पकड़ लगाने जा रही है। इसके लिए जल्द ही संसद की आगामी शीतकालीन सत्र में “Health Security to National Security Cess Bill 2025” पेश किया जाएगा। इस विधेयक का उद्देश्य सिर्फ उत्पादन या बिक्री पर नहीं, बल्कि उद्योग की प्रक्रिया और machinery तक नियंत्रण स्थापित करना है।

बिल की खास बातें — Machinery-level Cess, मासिक रजिस्ट्री, कड़ी सज़ा

इस कानून के तहत, गुटखा/पान मसाला मशीनों की उत्पादन क्षमता के आधार पर एक विशेष सेस (कर) लगाया जाएगा — मात्रा नहीं, मशीन की क्षमता पर टैक्स।चाहे पैकेज्ड प्रोडक्ट मशीन से बने हों या हस्तनिर्मित, हर निर्माता को मासिक रूप से सेस जमा करना और सरकार को उत्पादन प्रक्रिया की जानकारी देनी होगी।बिना पंजीकरण या नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर 5 साल तक की जेल और भारी जुर्माना।सरकार को अधिकार होगा कि जरूरत पड़ने पर सेस की दर दोगुनी कर दे।

सरकार

क्यों ज़रूरी है यह — From Health Hazard to National Alarm

पान मसाला और गुटखा लंबे समय से स्वास्थ्य संकट बने हुए हैं—मुँह, जीभ, गले के कैंसर, दाँतों की बिमारियां और अन्य रोगों का सिलसिला। सरकार का यह कदम सिर्फ दुकान और निर्माता तक सीमित नहीं है बल्की यह स्वास्थ्य सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा का मसला है। Industry को transparent बनाने से टैक्स चोरी रुकेगी, अवैध उत्पादन/बिक्री घटेगी, स्वास्थ्य सेवा व जागरूकता के लिए संसाधन मिलेंगे।

उद्योग और जनता पर असर — नियम, Compliance और बदलाव की ज़रूरत

बड़े उद्योगों से लेकर छोटे थोक विक्रेता तक — सभी को मशीनरी, प्रक्रिया, रिकॉर्ड और नियमित रिपोर्टिंग की तैयारी करनी होगी। अनियमितता या गैर-पंजीकृत उत्पादन अब गैरकानूनी माना जाएगा। जो कंपनियाँ सरकार के नियमों के हिसाब से चलती हैं, अगर वे सारे नियम ठीक से मानने लगें और अपना सारा काम साफ़-साफ़ लोगों को दिखाने लगें, तो लोगों का उन पर विश्वास बहुत बढ़ जाएगा।

मगर इसके लिए, चीज़ें बनाने वाली कंपनियों को शुरुआत में थोड़ी परेशानी उठानी पड़ेगी और अपने काम के तरीकों को बदलना पड़ेगा।”

सरकार

कानूनी अधिकार और Appeal — न्यायालय तक पहुँचने का अधिकार

बिल में यह प्रावधान भी है कि अगर कोई निर्माता इस कानून को लेकर असंतुष्ट है, तो वह हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट तक अपील कर सकता है। इससे small producers, SMEs, और स्थानीय दुकानदारों को न्याय का अवसर मिलेगा।

क्या बदलेगा उद्योग और समाज ?

बिल पास होने के बाद, केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इसे लागू करेंगी। उत्पादन, वितरण, बिक्री और उपयोग, हर स्तर पर नियम बनाना ज़रूरी होगी। यह कदम स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण, और राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से—एक बड़ा बदलाव ला सकता है।

अगर बिल को सही से लागू किया गया, तो गुटखा/पान मसाले जैसी खतरनाक उद्योगों पर न सिर्फ पाबंदी, बल्कि रिसर्च, रिहैबिलिटेशन और जागरूकता भी बढ़ेगी।

यह बिल सिर्फ गुटखा उद्योग को नहीं—एक स्वस्थ, जागरूक और ज़िम्मेदार समाज बनाने का प्रयास है। स्वास्थ्य सुरक्षा, सामाजिक न्याय और आर्थिक पारदर्शिता की दिशा में यह सरकार का एक बहुत बड़ा कदम हो सकता है।

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गीता जयंती 2025 : 5162 वर्षों बाद भी श्रीकृष्ण का ‘Life Manual’ दुनिया को राह दिखा रहा है

गीता जयंती

आज 1 दिसंबर 2025, सोमवार, पूरा भारत और विश्व गीता जयंती मना रहा है—वह पावन दिन जब भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में अर्जुन को 700 श्लोकों में जीवन, धर्म, कर्तव्य और आत्मज्ञान का दिव्य उपदेश दिया था। यह अवसर मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे मोक्षदा एकादशी भी कहा जाता है, पर मनाया जाता है।

धार्मिक परंपरा के अनुसार, यही वह ऐतिहासिक क्षण था जब मानव सभ्यता को एक ऐसा ज्ञान मिला जो समय, परिस्थितियों और युगों से परे है—आज इसे 5162वां गीता वर्ष माना जा रहा है।

गीता का सार्वभौमिक महत्व

18 अध्याय और 700 श्लोकों वाली श्रीमद्भगवद्गीता धर्म, कर्म, भक्ति, ज्ञान, योग, वैराग्य, आत्म-साक्षात्कार जैसे जीवन के हर क्षेत्र में मार्गदर्शन देती है।

इसलिए गीता जयंती सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि आत्मचिन्तन, स्व-विकास और आंतरिक शांति की प्रेरणा है जो हर युग में उतनी ही प्रासंगिक रहती है।

गीता जयंती

तिथि, पूजा-विधि और व्रत — कैसे मनाई जा रही है गीता जयंती 2025?

इस वर्ष गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी दोनों एक ही दिन हैं। एकादशी तिथि 30 नवंबर की रात से शुरू होकर 1 दिसंबर की शाम तक रही, इसलिए आज मुख्य पूजा, व्रत और पारायण हो रहा है।

भक्त परंपरानुसार एकादशी व्रत रखते हैं और गीता के 18 अध्यायों का पाठ करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करते हैं, दान-पुण्य और जरूरतमंदों को गीता ग्रंथ भेंट दिया जाता है। साथ ही साथ सभी लोग ज्ञान-प्रसार का संकल्प लेते हैं।

कुरुक्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आज विशाल अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव हो रहा है जहाँ संत, विद्वान, देश-विदेश से भक्त, कलाकार और लाखों श्रद्धालु शामिल होकर गीता पाठ, कीर्तन, प्रवचन, दीपदान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं।

गीता जयंती

महाकाव्य का मूल संदेश— गीता का मौलिक निर्देश “कर्म कर, फल की चिंता मत कर” भव्य रथयात्राओं, शास्त्रार्थ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया जा रहा है।

मंदिरों, आश्रमों और घरों में उत्सव का माहौल

देशभर के ISKCON, वैष्णव और कृष्ण-मंदिरों में सामूहिक गीता पारायण, झांकी, अखंड गीता पाठ (700 श्लोक), 108 श्लोकों से ‘गीता यज्ञ’, रथ सेवा और बाल एवं युवा कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। घर-घर में ऑनलाइन गीता अध्ययन और कथाएँ चल रही हैं ताकि नई पीढ़ी भी धर्म, साहस, समत्व और निष्काम कर्म का महत्व समझ सके।

आज के समय में गीता का संदेश

करियर की दौड़, तनाव, रिश्तों की जटिलता और मानसिक दबाव से भरी आधुनिक जिंदगी में गीता का संदेश पहले से कहीं ज्यादा प्रासंगिक है। गीता हमें याद दिलाती है सफलता का मूल आंतरिक संतुलन है। कर्म करो, फल की चिंता मत करो। यही शिक्षाएँ आज नेताओं, विद्यार्थियों, प्रोफेशनल्स और साधकों के लिए जीवनदायिनी हैं।

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J.C BOSE की जयंती (30 नवंबर) पर भारत ने याद किया असली रेडियो आविष्कारक :- “The Pioneer of Wireless Science!”

J.C BOSE

आज, 30 नवंबर 2025, भारत के महान वैज्ञानिक J.C BOSE की जयंती मना रहा है। वे वैज्ञानिक, अविष्कारक और पॉलीमैथ जिन्हें आधुनिक वायरलेस टेक्नोलॉजी का असली Pioneer माना जाता है। J.C BOSE 30 नवंबर 1858, मुंशीगंज (तत्कालीन बंगाल प्रेसीडेंसी, वर्तमान बांग्लादेश) में जन्मे बोस बचपन से ही जिज्ञासा, प्रयोग और विज्ञान की ओर आकर्षित थे। J.C BOSE उन्होंने कलकत्ता, कैंब्रिज और लंदन में उच्च अध्ययन कर विज्ञान की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई।

Wireless Communication में क्रांति: Radio Scientist का असली जन्मदाता

19वीं सदी के अंत में Bose ने विद्युत चुम्बकीय तरंगों पर अद्भुत प्रयोग किए, जिनसे यह सिद्ध हुआ कि तार के बिना भी तरंगों के जरिये सिग्नल भेजे जा सकते हैं। उन्होंने wireless telegraphy की नींव रखी—वह भी उस समय, जब दुनिया “रेडियो” शब्द से भी परिचित नहीं थी। अपने शोध को पेटेंट करने की बजाय बोस ने मानवता के लिए मुक्त रखा—यही उन्हें एक वैज्ञानिक से ऊपर उठकर एक “दूरदर्शी दाता” बनाता है।

J.C BOSE

विज्ञान की सीमाओं से परे—Plant Physiology में चौंकाने वाली खोजें

Bose सिर्फ भौतिक विज्ञानी नहीं थे; उन्होंने जीव विज्ञान में भी ऐसी खोजें कीं जिन्होंने दुनिया को चकित कर दिया। उनका आविष्कार Crescograph—एक ऐसा यंत्र जो पौधों की सूक्ष्मतम वृद्धि और संवेदनाओं को माप सकता था, ने साबित किया कि पौधे भी stimuli पर प्रतिक्रिया देते हैं। इसने विज्ञान में एक नया अध्याय खोला, जहां भौतिकी + जीव विज्ञान की अद्भुत संगति दिखाई दी।

J.C BOSE

वैश्विक सम्मान: भारत के पहले Royal Society Fellow

J.C. Bose पहले भारतीय वैज्ञानिक बने जिन्हें Royal Society London की फेलोशिप मिली जो किसी वैज्ञानिक का विश्व-स्तरीय सम्मान होता है। उन्होंने अपने अधिकतर प्रयोग स्वदेशी उपकरणों से किए, और शोध को पेटेंट की सीमाओं में बांधने से हमेशा इंकार किया।उनकी लैब, उपकरण और पांडुलिपियां आज भी कोलकाता और बेंगलुरु के संग्रहालयों में संरक्षित हैं।

राष्ट्र की श्रद्धांजलि: विज्ञान दिवस जैसा उत्सव

जयंती पर आज देशभर में सेमिनार, विज्ञान प्रदर्शनी, शोध-कार्यशालाएँ, और शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सोशल मीडिया और संस्थान आज Bose की विरासत, विज्ञान के प्रति उनकी निष्ठा और आधुनिक वायरलेस टेक्नोलॉजी की नींव रखने वाले योगदान को सम्मान दे रहे हैं।

J.C BOSE

बोस की विरासत: जिज्ञासा, नवाचार और राष्ट्र-निर्माण की प्रेरणा J.C. Bose सिर्फ एक वैज्ञानिक नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक चेतना के जनक थे।

उनकी सोच थी की विज्ञान समाज से जुड़कर ही महान बनता है। आज भी हर युवा वैज्ञानिक, शोधकर्ता और विद्यार्थी को प्रेरित करती है। भारत उनकी जयंती पर सिर्फ उन्हें याद नहीं कर रहा बल्कि Scientific Excellence की राह पर आगे बढ़ने का संकल्प भी दोहरा रहा है।

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प्रयागराज में CNG टैंकर से बड़ा रिसाव: इलाके में हड़कंप, पुलिस ने संभाली स्थिति!

प्रयागराज

प्रयागराज, उत्तर प्रदेश – संगम नगरी प्रयागराज के एक व्यस्त इलाके में शनिवार देर शाम तब हड़कंप मच गया, जब एक संपीड़ित प्राकृतिक गैस (CNG) से भरे टैंकर से अचानक तेज़ रिसाव शुरू हो गया। गैस का बहाव इतना ज़ोरदार था कि देखते ही देखते आसपास का पूरा क्षेत्र घने धुंध की चादर में लिपटने लगा, जिससे लोगों में दहशत फैल गई।

कैसे हुआ रिसाव?

घटना देर शाम की बताई जा रही है जब एक CNG टैंकर शहर से गुज़र रहा था। अचानक, टैंकर के वॉल्व (Valve) या किसी पाइपलाइन में तकनीकी खराबी आ गई, जिसके कारण तेज़ दबाव के साथ गैस बाहर निकलने लगी।

CNG गैस प्राकृतिक रूप से गंधहीन और रंगहीन होती है, लेकिन चूंकि यह तेज़ दबाव में तरल (Compressed) अवस्था में टैंकर में भरी होती है, इसलिए जैसे ही यह वातावरण में निकलती है, यह तेज़ी से फैलकर हवा के संपर्क में आती है और सफेद धुंध जैसा दृश्य पैदा करती है।

प्रयागराज

पुलिस और दमकल विभाग की त्वरित कार्रवाई

  • रिसाव की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग (Fire Department) की टीमें तुरंत मौके पर पहुँची। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, सुरक्षा के लिहाज़ से पुलिस ने तुरंत कई कदम उठाए:
  • इलाके की घेराबंदी: रिसाव वाली जगह के आसपास के क्षेत्र को तुरंत खाली करा दिया गया और लोगों को सुरक्षित दूरी पर जाने के लिए कहा गया।
  • यातायात डायवर्जन: आसपास के मुख्य मार्गों पर यातायात (Traffic) को तुरंत रोक दिया गया और दूसरे रास्तों पर मोड़ दिया गया ताकि किसी भी तरह की चिंगारी (Spark) से दुर्घटना न हो।
  • टैंकर को सुरक्षित जगह पर ले जाना: पुलिस की निगरानी में, टैंकर को बड़ी सावधानी के साथ एक खुले और सुनसान इलाके में ले जाया गया, जहाँ गैस को पूरी तरह से सुरक्षित तरीके से वातावरण में छोड़ा जा सके।

कोई जनहानि नहीं

पुलिस और आपातकालीन टीमों की त्वरित और सटीक कार्रवाई के कारण कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ और किसी भी तरह की जनहानि या संपत्ति का नुकसान नहीं हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि CNG हवा से हल्की होती है और तेज़ी से ऊपर उठकर वातावरण में घुल जाती है, इसलिए दुर्घटना का खतरा कुछ समय बाद कम हो जाता है, लेकिन शुरुआती कुछ मिनट बेहद संवेदनशील होते हैं।

पुलिस ने टैंकर के मालिक और चालक को हिरासत में ले लिया है और रिसाव के सही कारणों का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच शुरू कर दी है। यह घटना एक बार फिर से ईंधन परिवहन के दौरान सुरक्षा मानकों के सख्त पालन की आवश्यकता पर ज़ोर देती है।

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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आग का तांडव: 7 लोगों की मौत, सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

राजधानी दिल्ली

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से इस सप्ताह दो बेहद दुखद और भयावह खबरें सामने आईं, जिसने एक बार फिर से शहर के भीड़भाड़ वाले आवासीय क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दो अलग-अलग आग की घटनाओं में, दिल्ली ने कुल सात अमूल्य जिंदगियां खो दीं, जबकि कई अन्य घायल हुए। ये घटनाएं न केवल जान-माल के नुकसान के लिए दर्दनाक हैं, बल्कि ये इस बात का भी संकेत हैं कि अवैध निर्माण, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और तंग गलियों की समस्या हमारे शहरों के लिए एक टाइम बम बन चुकी है।

संगम विहार की त्रासदी: चार मंजिला इमारत बनी मौत का जाल

पहली दुखद घटना राष्ट्रीय राजधानी के दक्षिण दिल्ली के संगम विहार इलाके में हुई। यह क्षेत्र अपनी घनी आबादी और संकरी गलियों के लिए जाना जाता है, जहाँ एक चार मंजिला आवासीय मकान में अचानक भीषण आग लग गई। यह हादसा इतना भयानक था कि घर के अंदर मौजूद लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला।
आग की लपटें इतनी तेज़ी से फैलीं कि इसने जल्द ही पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। इस त्रासदी में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई, जिनमें [संभवतः बच्चों या बुजुर्गों का उल्लेख अगर उपलब्ध हो] भी शामिल थे।

आग बुझाने के दौरान दो अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
स्थानीय निवासियों और दमकलकर्मियों के अनुसार, आग लगने का प्राथमिक कारण संभवतः शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। हालांकि, जांच जारी है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि घनी बस्तियों में, जहाँ इमारतों के बीच दूरी लगभग नगण्य होती है, वहाँ एक मकान में लगी आग पड़ोसी इमारतों के लिए भी बड़ा खतरा बन जाती है। बचाव दल को घटनास्थल तक पहुँचने में तंग गलियों के कारण काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, जिससे बचाव कार्य में देरी हुई, और पीड़ितों को बाहर निकालने का महत्वपूर्ण समय बर्बाद हो गया।

राजधानी दिल्ली

तिगड़ी एक्सटेंशन की भयावहता: जूते की दुकान से फैली आग

दूसरी घटना और भी ज्यादा भयावह थी। यह हादसा तिगड़ी एक्सटेंशन में हुआ, जहाँ जूते की एक दुकान में आग लगी। यह दुकान एक तीन मंजिला इमारत के निचले तल पर स्थित थी। जूतों जैसे ज्वलनशील सामग्री (Flammable Material) के कारण आग पल भर में ही बेकाबू हो गई और तेज़ी से ऊपर की मंजिलों तक फैल गई।आग का धुआँ और लपटें इतनी तीव्र थीं कि इमारत के अंदर फंसे लोगों के लिए बच निकलना लगभग असंभव हो गया। इस दुखद हादसे में चार लोगों की मौत हो गई।

शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि इस इमारत का उपयोग आवासीय और व्यावसायिक दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा रहा था, जो कि सुरक्षा मानकों का एक बड़ा उल्लंघन है। अक्सर, आवासीय भवनों में व्यवसाय चलाने से असुरक्षित वायरिंग और अतिरिक्त लोड की समस्या पैदा होती है, जो आग लगने के खतरे को कई गुना बढ़ा देती है।
ये दोनों ही घटनाएं दिल्ली की शहरी नियोजन (Urban Planning) और सुरक्षा नियमों के खोखलेपन को उजागर करती हैं। सवाल यह है कि क्या हम इन त्रासदियों से कोई सबक लेंगे, या फिर अगली दुर्घटना का इंतज़ार करेंगे?

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किलोमीटर-आधारित योजना :पंजाब के कर्मचारियों के लिए मौत का फ़रमान!

किलोमीटर-आधारित योजना

किलोमीटर-आधारित योजना के खिलाफ़ बीते कुछ दिनों से पंजाब के सड़क परिवहन निगम (PUNBUS) के संविदा कर्मचारियों का गुस्सा उफान पर है। मुद्दा है सरकार की ‘किलोमीटर-आधारित बस योजना’, जिसके टेंडर खोले जाने का विरोध कर रहे कर्मचारियों पर पुलिस ने सख्ती दिखाई और कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के ठीक अगले ही दिन लुधियाना की सड़कों पर विरोध की एक नई लहर दिखाई दी, जहाँ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की और अपने नेताओं की तत्काल रिहाई की मांग की।

यह सिर्फ़ एक दिन का विरोध नहीं है, बल्कि यह उन कर्मचारियों की लंबी लड़ाई का हिस्सा है, जिन्हें डर है कि इस नई योजना से उनकी नौकरी और भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।

विरोध की ज्वाला क्यों भड़की?

पूरा मामला ‘किलोमीटर-आधारित बस योजना’ से जुड़ा है। संक्षेप में, यह एक ऐसी नीति है जिसके तहत सरकार निजी ऑपरेटरों को ठेके पर बसें चलाने की अनुमति देती है। कर्मचारी यूनियनों का मानना है कि यह योजना सरकारी बस सेवाओं के निजीकरण का एक छिपा हुआ तरीका है।

PUNBUS और पंजाब रोडवेज के कर्मचारी पिछले कई सालों से मांग कर रहे हैं कि उन्हें पक्का (स्थायी) किया जाए। लेकिन इस नई टेंडर प्रक्रिया को शुरू करने से, उन्हें लगता है कि सरकार उनकी मांगों को नज़रअंदाज़ कर रही है और उलटा उनकी रोज़ी-रोटी पर हमला कर रही है। उनका साफ कहना है कि जब तक यह योजना वापस नहीं ली जाती, तब तक वे चैन से नहीं बैठेंगे। उन्हें डर है कि निजी हाथों में सेवा जाने के बाद न केवल यात्रियों को महंगी सेवाएं मिलेंगी, बल्कि संविदा कर्मचारियों को सेवा से बाहर कर दिया जाएगा या फिर न्यूनतम वेतन पर काम करने के लिए मजबूर किया जाएगा। यह उनके और उनके परिवारों के भविष्य का सवाल है

किलोमीटर-आधारित योजना

संघर्ष का दिन और पुलिस की घेराबंदी

विरोध प्रदर्शन का दिन तब नाटकीय हो गया जब कर्मचारी यूनियनों ने टेंडर प्रक्रिया को रोकने के लिए सामूहिक विरोध का आह्वान किया। सैकड़ों कर्मचारी एकजुट हुए, नारे लगाए, और अपनी आवाज़ बुलंद करने की कोशिश की। लेकिन, सरकारी संपत्ति के नुकसान या कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के तहत, पुलिस ने हस्तक्षेप किया।

पुलिस कार्रवाई के दौरान, प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने की कोशिश की गई और इसी दौरान कई कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया। यह कार्रवाई कर्मचारियों के लिए एक गहरा सदमा थी, क्योंकि वे अपनी मांगों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे थे।

‘हमारे नेता कहाँ हैं?’ – यूनियन का सीधा आरोप

पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के बाद, सबसे ज़्यादा चिंता का विषय रहा यूनियन के शीर्ष नेताओं की स्थिति। होशियारपुर में PUNBUS ठेका कर्मचारी यूनियन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संदीप सिंह ने खुलकर आरोप लगाया कि उनके चार प्रमुख नेता अभी भी पुलिस की हिरासत में हैं। उन्होंने दावा किया कि ये नेता पुलिस स्टेशन में हैं या किसी अज्ञात जगह पर रखे गए हैं।

यूनियन के अनुसार, हिरासत में लिए गए नेताओं में शामिल हैं:

•कुलवंत सिंह: राज्य समिति सदस्य

•रमिंदर सिंह: ज़िला अध्यक्ष

• नरेंदर सिंह: सचिव

• धरमिंदर सिंह: कैशियर

संदीप सिंह ने यह आरोप लगाया कि इन नेताओं को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया है, और उनकी रिहाई के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “हमारा विरोध शांतिपूर्ण था। हमारे नेताओं को रिहा न करना लोकतंत्र की हत्या है। अगर उन्हें तुरंत रिहा नहीं किया गया, तो हमारा आंदोलन और तेज़ होगा और इसकी ज़िम्मेदारी सीधे तौर पर सरकार और प्रशासन की होगी।”

किलोमीटर-आधारित योजना

लुधियाना में निंदा की गूँज

नेताओं की गिरफ्तारी के अगले ही दिन, यह विरोध की आग लुधियाना तक पहुँच गई। लुधियाना में एकजुट हुए प्रदर्शनकारियों ने न केवल किलोमीटर-आधारित योजना का विरोध किया, बल्कि पुलिस की कार्रवाई की भी कड़ी शब्दों में निंदा की।लुधियाना में प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने अपने नेताओं की गिरफ्तारी को ‘तानाशाही’ बताया। उनका कहना था कि सरकार को कर्मचारियों से बात करनी चाहिए, उनकी मांगों को सुनना चाहिए, न कि उन्हें जेल में डालना चाहिए। लुधियाना का विरोध इस बात का संकेत था कि यह आंदोलन किसी एक शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि पंजाब भर के संविदा कर्मचारियों के बीच एक एकजुटता बन चुकी है।

कर्मचारियों की मुख्य माँगें: पक्का रोज़गार, पक्की सेवा

  • PUNBUS के संविदा कर्मचारी इस विरोध के माध्यम से सरकार के सामने अपनी मुख्य मांगें रख रहे हैं। ये माँगें सिर्फ़ वेतन या छुट्टी से जुड़ी नहीं हैं, बल्कि उनके जीवन की बुनियादी सुरक्षा से जुड़ी हैं:
  • किलोमीटर-आधारित योजना को रद्द किया जाए: यह सबसे प्रमुख मांग है। यूनियन चाहती है कि सरकार इस निजीकरण की राह को तुरंत बंद करे।
  • सभी संविदा कर्मचारियों को स्थायी (पक्का) किया जाए: वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों को उचित सेवा शर्तें और नौकरी की सुरक्षा मिलनी चाहिए।
  • हिरासत में लिए गए नेताओं की बिना शर्त रिहाई: पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को तुरंत छोड़ा जाए और उन पर लगाए गए सभी आरोप वापस लिए जाएँ।कर्मचारी यूनियनों ने साफ कर दिया है कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, और उनके नेताओं को रिहा नहीं किया गया, तो वे अपने विरोध को और बढ़ाएंगे। इसमें राज्य भर में बस सेवाओं को ठप्प करने जैसे बड़े कदम शामिल हो सकते हैं, जिससे आम जनता को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

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नारायण साईं ने फिर से कर दिया बड़ा कांड :- हाई-सिक्योरिटी बैरक से मोबाइल-सिम हुआ……

नारायण साईं

सूरत की लाजपोर जेल में नारायण साईं रेप के दोषी और स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम के बेटे, नारायण साई, एक बार फिर विवादों में आ गए हैं। उनकी हाई-सिक्योरिटी सेल नंबर–1 से जेल प्रशासन ने एक मोबाइल फोन और Jio सिम कार्ड जब्त किया, जिसके बाद साचिन पुलिस थाने में उनके खिलाफ नई FIR दर्ज कर ली गई। यह मामला नारायण साईं उनकी जेल निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

कैसे मिला फोन?— चुंबक से चिपकाया फोन, इनहेलर में छिपा SIM

नारायण साईं

जेल प्रशासन को इनपुट मिला था कि नारायण साई बैरक के अंदर महीनों से मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं।तलाशी में चौंकाने वाली बातें सामने आईं है जैसे की

  • लोहे के गेट के पीछे चुंबक से चिपकाया हुआ मोबाइल फोन।
  • निजी सामग्री में एक इनहेलर के अंदर छिपा Jio SIM ।
  • जेल स्टाफ के एक कमरे से मिली फोन की बैटरी
  • जिससे अंदरूनी मिलीभगत का संदेह और गहरा हो गया।
  • जेल सुरक्षा पर बड़ा सवाल—Inside Support की आशंका

एक हाई-प्रोफाइल रेप कन्विक्ट की सेल में मोबाइल-सिम मिलना सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि जेल सिक्योरिटी की नाकामी का संकेत है। रिपोर्ट्स के अनुसार नारायण साईं फोन काफी समय से इस्तेमाल कर रहे थे। जेल के अंदर से सपोर्ट मिलने की संभावना मजबूत है साथ ही साथ विभागीय जांच की सिफारिश की जा रही है।

FIR और आगे की कार्रवाई—कौन कर रहा था मदद?

जेलर की शिकायत पर पुलिस ने नारायण साई पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। अब जांच इन बिंदुओं पर आगे बढ़ रही है की मोबाइल और SIM जेल के अंदर कैसे पहुंचे? कौन–कौन स्टाफ इसमें शामिल हो सकता है और फोन का इस्तेमाल किनसे बातचीत या नेटवर्किंग के लिए किया जा रहा था?

नारायण साई पहले भी जेल में “बाहरी दुनिया से संपर्क” रखने के आरोपों की सुर्खियों में आ चुके हैं।

नारायण साईं

पहले भी हो चुका है विवाद :-

नारायण साई रेप केस में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। उनके खिलाफ यह नया मामला जेल रिकॉर्ड पर एक और नकारात्मक निशान जोड़ेगा, भविष्य में किसी भी राहत, छूट या पैरोल की संभावना और कमजोर करेगा। इस घटना ने बहुत ही ज्यादा तीखी स्थिति को जन्म दे दिया है, अब देखना है आगे क्या होगा!!

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चक्रवात दितवाह का कहर: तमिलनाडु में स्कूल बंद, उड़ानें रद्द, जानें IMD की 5 चेतावनी

चक्रवात दितवाह का नाम सुनते ही तमिलनाडु के लोगों की चिंता बढ़ गई है। यह एक गंभीर मौसमी चुनौती है जो राज्य के तटीय इलाकों को प्रभावित करने वाली है। जब प्रकृति का गुस्सा सामने आता है, तो सबसे पहले हमें अपनी सुरक्षा के बारे में सोचना चाहिए। तमिलनाडु सरकार ने इसी बात को समझते हुए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं।

मौसम विभाग की चेतावनी के बाद राज्य भर में हड़कंप मच गया है। स्कूलों में छुट्टी घोषित करना, हवाई सेवाओं में बाधा , अन्य सुरक्षा उपाय यह दिखाते हैं कि सरकार कोई जोखिम नहीं ले रही। जानिये कैसे चक्रवात ‘दितवाह’ ने पूरे राज्य की दिनचर्या को बदल दिया है।

मौसम विभाग की चेतावनी और चक्रवात की स्थिति

मौसम विज्ञान केंद्र ने चक्रवात ‘दितवाह’ को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। यह चक्रवात अरब सागर में तेजी से विकसित हो रहा है इसकी गति लगातार बढ़ रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले 24 से 48 घंटों में यह तमिलनाडु के तटीय इलाकों से टकराने की संभावना है। चक्रवात की हवा की रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जो काफी खतरनाक है। डॉप्लर रडार की मदद से मौसम विभाग लगातार इसकी गतिविधियों पर नज़र रख रहा है।

समुद्री तापमान में वृद्धि और वायुमंडलीय दबाव में कमी के कारण यह चक्रवात और भी शक्तिशाली बन सकता है। तमिलनाडु के तटीय जिले जैसे चेन्नई, कांचीपुरम, थंजावुर , रामनाथपुरम सबसे ज्यादा खतरे में हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि समुद्र का पानी कैसे इतनी तबाही मचा सकता है?

मौसम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि चक्रवात के साथ 200 मिलीमीटर तक बारिश हो सकती है। यह मात्रा इतनी अधिक है कि शहरों में जलभराव और ग्रामीण इलाकों में बाढ़ का खतरा है। समुद्री लहरों की ऊंचाई भी 4 से 5 मीटर तक पहुंच सकती है, जो मछुआरों के लिए बेहद खतरनाक है।

तमिलनाडु

शिक्षा संस्थानों की बंदी और सुरक्षा उपाय-

तमिलनाडु सरकार ने चक्रवात ‘दितवाह’ को मध्य नज़र रखते हुए बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा और राज्य के 15 जिलों में सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित की है। इनमें चेन्नई, कोयंबटूर, तिरुपुर, इरोड, सेलम, धर्मपुरी, कृष्णगिरि, वेल्लोर & अन्य जिले शामिल हैं। यह फैसला केवल सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी स्कूल, कॉलेज व अन्य शैक्षणिक संस्थान भी इसमें शामिल हैं।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि बच्चों की जान से बढ़कर कोई चीज़ नहीं है। स्कूल प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी इमारतों की सुरक्षा जांचें & किसी भी नुकसान की स्थिति में तुरंत मरम्मत कराएं। कई स्कूलों को आपातकालीन शेल्टर के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है यदि जरूरत पड़े। माता-पिता को सलाह दी गई है कि वे अपने बच्चों को घर पर ही रखें & बाहर खेलने न भेजें।

इंजीनियरिंग कॉलेज व मेडिकल कॉलेज भी इस सूची में शामिल हैं। विश्वविद्यालय परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं & नए डेट की घोषणा बाद में की जाएगी।

विमान सेवाओं पर प्रभाव और इंडिगो की रद्द उड़ानें –

चक्रवात ‘दितवाह’ का सबसे तत्काल प्रभाव हवाई यात्रा पर पड़ा है। इंडिगो एयरलाइंस ने तमिलनाडु के प्रमुख हवाई अड्डों – चेन्नई, कोयंबटूर, मदुरै & तिरुचिरापल्ली से 45 से अधिक उड़ानें रद्द कर दी हैं। यह निर्णय यात्री सुरक्षा को देखते हुए लिया गया है क्योंकि तेज़ हवाओं में विमान उड़ान भरना बेहद जोखिम भरा है।एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने भी घोषणा की है कि मौसम की स्थिति सुधरने तक कई फ्लाइट्स का शेड्यूल बदला जा सकता है।

चेन्नई एयरपोर्ट, जो दक्षिण भारत का सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है, यहां सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है। यात्रियों की लंबी कतारें लगी हैं & कई लोग रिफंड या री-शेड्यूलिंग की मांग कर रहे हैं। एयरलाइंस कंपनियों ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे हवाई अड्डे पर आने से पहले अपनी फ्लाइट स्टेटस चेक करें। कई अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें भी प्रभावित हुई हैं जिससे विदेशी यात्रियों को भी परेशानी हो रही है।

तमिलनाडु

प्रशासनिक तैयारी और आपदा प्रबंधन

तमिलनाडु सरकार ने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को हाई अलर्ट पर रखा है। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की है & आवश्यक तैयारियों की समीक्षा की है। राज्य के 32 जिलों में से 20 जिलों को विशेष सतर्कता में रखा गया है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की 15 टीमों को विभिन्न जिलों में तैनात कर दिया गया है।

स्वास्थ्य विभाग ने सभी अस्पतालों को अलर्ट मोड में रखा है & आपातकालीन दवाइयों का स्टॉक बढ़ाया है। एम्बुलेंस सेवा 24×7 उपलब्ध रखी गई है & हेल्पलाइन नंबर 1077 & 112 पर लगातार स्टाफ तैनात है। राहत कैंप स्थापित करने के लिए स्कूल व कम्युनिटी हॉल की पहचान की गई है।

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भारतीय अर्थव्यवस्था ने मारी ज़ोरदार छलांग: दूसरी तिमाही में GDP 8.2% बढ़ी, पूरी खबर जानिए

भारतीय अर्थव्यवस्था

भारतीय अर्थव्यवस्था ने इस साल की दूसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर) में सबको चौंका दिया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश की GDP में 8.2% की ज़ोरदार बढ़ोतरी हुई है, जो पिछले छह महीनों में सबसे ज़्यादा है। इसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था पहले से ज़्यादा रफ़्तार से आगे बढ़ रही है।

क्या रहे आंकड़े?

भारतीय अर्थव्यवस्था के आँकड़े अर्थशास्त्रियों के अनुमान से भी बेहतर हैं। एक्सपर्ट्स मान रहे थे कि GDP 7.3% तक बढ़ेगी, लेकिन असलियत में यह उससे भी ज़्यादा निकली।
GDP की असली रफ़्तार: 8.2% (जुलाई-सितंबर 2025) जबकि पिछली तिमाही में यह 7.8% थी।
नामिनल GDP में बढ़ोतरी:8.7%। इसमें महंगाई भी शामिल है।

किस सेक्टर ने कितना योगदान दिया:

मैन्युफैक्चरिंग और बिजली जैसे सेक्टरों में 8.1% की बढ़ोतरी हुई, जबकि सर्विस सेक्टर 9.2% की रफ़्तार से बढ़ा। मैन्युफैक्चरिंग में तो पिछले साल के मुकाबले दोगुना (9.1%) उछाल आया है।
लोगों ने कितना ख़र्च किया, इस पर नज़र डालें तो पता चलता है कि लोगों ने अपनी ज़रूरतों पर ज़्यादा पैसे ख़र्च किए हैं। वहीं, कंपनियों ने भी निवेश बढ़ाया है, जो अच्छी बात है भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये.

किस वजह से आई इतनी अच्छी ग्रोथ?

भारतीय अर्थव्यवस्था के ग्रोथ के पीछे कई वजहें हैं। गाँवों में डिमांड बढ़ी है, सरकार ने ज़्यादा ख़र्च किया है और एक्सपोर्ट में भी थोड़ी तेज़ी आई है। सरकार ने GST में भी कटौती की थी, जिससे लोगों ने ज़्यादा ख़रीदारी की।
गाँवों में फसल अच्छी हुई है और लोगों को रोज़गार भी ज़्यादा मिल रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुधरी है। त्योहारों का सीज़न होने से पहले कंपनियों ने भी सामान का स्टॉक बढ़ाया, जिससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेज़ी आई।

दुनिया भर में क्या हो रहा है?

दुनिया भर में व्यापार को लेकर तनाव है, लेकिन इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने अच्छा प्रदर्शन किया है। अमेरिका ने रूस से तेल ख़रीदने पर टैक्स बढ़ाया है, जिसका असर भारत पर भी पड़ा है। लेकिन सरकार ने ज़रूरी चीज़ों पर टैक्स कम करके लोगों को राहत दी है।
महंगाई भी कम है और कंपनियों को भी फ़ायदा हो रहा है, जिससे लोग ज़्यादा ख़र्च कर रहे हैं। हालाँकि, अभी भी कुछ दिक्कतें हैं, जैसे कि प्राइवेट कंपनियाँ ज़्यादा निवेश नहीं कर रही हैं और शहरों में भी डिमांड थोड़ी कम है।

आगे क्या होगा?

सरकार को उम्मीद है कि इस साल अर्थव्यवस्था 7% से ज़्यादा की रफ़्तार से बढ़ेगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि GST में कटौती का पूरा असर आने वाली तिमाहियों में दिखेगा।

अच्छी बातें:

  • मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर अच्छा कर रहे हैं, निवेश बढ़ रहा है।
  • ख़तरे:दुनिया भर में व्यापार को लेकर तनाव, प्राइवेट कंपनियों का कम निवेश।

सरकार क्या कर सकती है:

सरकार को ख़र्च पर कंट्रोल रखना होगा।ये ग्रोथ दिखाती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मज़बूत है। GST जैसे सुधारों से लोगों का भरोसा बढ़ा है। कुल मिलाकर, आँकड़े अच्छे हैं, लेकिन एक्सपोर्ट से जुड़े जोखिमों पर ध्यान रखना होगा।

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Delhi Air Pollution Crisis: China कैसे बना No.1 प्रदूषण मुक्त देश और Rekha Gupta क्यों हुईं फेल? अब जबरदस्त निर्णायक कदम उठाने का वक़्त

Delhi Air Pollution

Delhi Air Pollution : दिल्ली, जो कभी अपने ऐतिहासिक किलों, रंगीन बाजारों और अपनी खास संस्कृति की रौनक के लिए जानी जाती थी, अब अक्सर धुंआ, धूल और सांस लेने में होने वाली तकलीफों का पर्याय बन गई है। सर्दियों की शुरुआत होते ही दिल्ली की हवा में इतना जहरीला प्रदूषण घुल जाता है कि लोग घरों की खिड़कियां बंद करने के बाद भी चैन से सांस नहीं ले पाते।

ये एक-दो आंकड़ों की बात नहीं, बल्कि लाखों लोगों की रोजमर्रा की सच्चाई है, जिससे दिल्ली के हर परिवार को जूझना पड़ता है। सवाल ये है, क्या दिल्ली सरकार वाकई इस जहरीली हवा से जल्द राहत दिला सकती है? जवाब है, बिल्कुल दिला सकती है — अगर सरकार और जनता दोनों कुछ कड़े फैसले लें और लगातार ईमानदारी से मेहनत करें।

दिल्ली का प्रदूषण: असली वजहें

असल में, Delhi Air Pollution की कई जड़ें हैं। सबसे बड़ी वजह सड़कों पर बेतहाशा बढ़ती गाड़ियां हैं, जिनसे हर रोज हजारों टन धुंआ निकलता है। साथ ही हर गली, हर मोहल्ले में चल रहा कंस्ट्रक्शन, जिससे धूल लगातार हवा में घुलती रहती है। दिल्ली के आसपास के राज्यों में खेतों में जलाई जाने वाली पराली भी हर सर्दी में हालात और बिगाड़ देती है। मौसम का बदलना, हवा की दिशा का ठहर जाना, और कई बार सूखा या कम बारिश भी प्रदूषण को और गंभीर बना देता है।

Delhi Air Pollution

कई बार तो लोग यह भी नहीं समझ पाते कि उनका अपना छोटा सा कदम — जैसे कूड़ा जलाना या गाड़ी बेवजह चलाना — भी कितनी बड़ी समस्या का हिस्सा बन सकता है। यही छोटी-छोटी लापरवाहियां मिलकर दिल्ली की हवा को जहरीला बना देती हैं।

सरकारी कोशिशें और उनकी सच्चाई

सरकार ने बीते सालों में कई बड़े कदम उठाए हैं — जैसे ऑड-ईवन स्कीम लागू करना ताकि सड़कों पर गाड़ियों की संख्या घट सके, मेट्रो और बस सेवाओं का विस्तार करना ताकि लोग निजी वाहनों की बजाय सार्वजनिक परिवहन को अपनाएं। इंडस्ट्रीज पर भी सख्त नियम लागू किए गए हैं, जिससे वे प्रदूषण फैलाने वाली तकनीक छोड़ें। इन सभी कोशिशों का मकसद साफ है — दिल्ली की हवा को सांस लेने लायक बनाना।

लेकिन इन उपायों का असर उतना गहरा नहीं पड़ा, जितना होना चाहिए। कई बार लोग इन नियमों को गंभीरता से नहीं लेते, नियमों की अनदेखी करते हैं। कई बार प्रशासनिक मशीनरी ढीली पड़ जाती है, जिससे नियम लागू ही नहीं हो पाते। और जब तक नियम अमल में नहीं आते, तब तक हालात में कोई बदलाव नहीं दिखता।

Delhi Air Pollution

क्यों नहीं दिखता असर?

सबसे बड़ी समस्या है — लोगों में जागरूकता की कमी। बहुत लोग सोचते हैं कि प्रदूषण को रोकना सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी है, उनका खुद का कोई योगदान नहीं है। इंडस्ट्रीज भी नियमों का पालन आधे मन से करती हैं, और जहां नियम सख्त नहीं हैं, वहां नियमों की खुली अनदेखी होती है। कई बार प्रशासनिक अड़चनों या संसाधनों की कमी के कारण भी सरकारी योजनाएं कागजों से बाहर नहीं आ पातीं।

 

ऊपर से, अलग-अलग स्रोतों से फैल रहा प्रदूषण — सड़कें, कंस्ट्रक्शन, खेतों की पराली, यहां तक कि घरों से निकलता कचरा — ये सभी मिलकर हवा को लगातार खराब करते रहते हैं। मौसम की मार, खासकर ठंड में हवा का रुकना, हालात को और बदतर बना देता है। और सबसे अहम, राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के चलते कई योजनाएं सिर्फ घोषणाओं तक सिमट कर रह जाती हैं, असल में जमीन पर कुछ नहीं बदलता।

अब आगे क्या?

अगर दिल्ली को वाकई फिर से सांस लेने लायक बनाना है, तो कुछ सीधी, मगर असरदार बातें करनी होंगी। सबसे पहली जरूरत है — सार्वजनिक परिवहन को इतना सुविधाजनक, सुरक्षित और तेज बनाना कि लोग खुशी-खुशी अपनी गाड़ियां छोड़कर मेट्रो और बसें अपनाएं। इसके लिए न सिर्फ नए रूट्स और गाड़ियां चाहिए, बल्कि सफाई, समयबद्धता और सस्ते किराए का भी ख्याल रखना होगा। दूसरी अहम बात है — हर इलाके में ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाना और पुराने पेड़ों की देखभाल करना।

Delhi Air Pollution

पेड़ न सिर्फ हवा को साफ करते हैं, बल्कि गर्मी और धूल भी कम करते हैं। तीसरा, इंडस्ट्रीज को प्रदूषण रहित तकनीक अपनाने के लिए मजबूर करना जरूरी है, इसके लिए सख्त नियम और उनके ठीक से पालन की व्यवस्था करनी होगी।

इसके साथ-साथ, लोगों को जागरूक करना भी उतना ही जरूरी है। स्कूलों, कॉलेजों, दफ्तरों, मोहल्लों — हर जगह लोगों को बताया जाए कि प्रदूषण रोकना उनकी भी जिम्मेदारी है। जब तक आम नागरिक खुद आगे आकर बदलाव के लिए तैयार नहीं होंगे, तब तक कोई भी नीति पूरी तरह कामयाब नहीं हो सकती। छोटे-छोटे कदम — जैसे बेवजह गाड़ी न चलाना, कूड़ा न जलाना, पेड़ लगाना — ये सब मिलकर बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।

आखिर में, बात बिल्कुल साफ है — दिल्ली सरकार और यहां के लोग, दोनों को मिलकर कदम उठाने होंगे। अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी, और गंभीरता दिखानी होगी। अगर हर नागरिक थोड़ा-थोड़ा भी बदलाव शुरू करे, और सरकार भी ईमानदारी से सख्त फैसले ले, तो यकीन मानिए, दिल्ली फिर से वही शहर बन सकती है, जहां सांस लेना आसान हो। यही वक्त है, जब हम सबको बदलाव का हिस्सा बनना चाहिए — आने वाली पीढ़ियों के लिए, और खुद अपनी सेहत के लिए भी।

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यूपी में ‘Aadhaar Card’ अब जन्म-तिथि प्रमाण नहीं, नया आदेश क्या है जानिए

Aadhaar Card

उत्तर प्रदेश सरकार ने 28 नवंबर 2025 को एक बड़ा फैसला लिया है — अब Aadhaar Card को जन्म प्रमाण पत्र या “डेट ऑफ बर्थ (DOB)” के आधिकारिक प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस फैसले के तहत, राज्य के तमाम विभागों को सूचित किया गया है कि आधार कार्ड को जन्मतिथि प्रमाण के रूप में इस्तेमाल करना बंद करें।

➤ नया आदेश क्या कहता है

आदेश के अनुसार, Aadhaar Card में दर्ज जन्मतिथि को DOB के प्रमाण के रूप में नहीं माना जाएगा। इस बदलाव के पीछे कारण यह बताया गया है कि आधार बनवाते समय जन्म प्रमाण-पत्र, अस्पताल रिकॉर्ड या स्कूल-दर्ज किए दस्तावेज़ अनिवार्य नहीं होते। आमतौर पर जन्मतिथि व्यक्ति द्वारा स्वयं दर्ज कराई जाती है। इसलिए, आधार की DOB जानकारी पर भरोसा करना सुरक्षित नहीं माना गया। राज्य का निर्देश है कि सरकारी या अर्द्ध-सरकारी किसी भी प्रक्रिया — जैसे भर्ती, पेंशन, सेवाओं में आवेदन, प्रमाणीकरण आदि — में आधार कार्ड को DOB प्रमाण की तरह नहीं माना जाए।

➤ अब कौन-कौन से दस्तावेज मान्य होंगे

  • अगर किसी नागरिक को अपनी जन्मतिथि साबित करनी है, तो अब उन्हें इनमें से कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा:
  • नगरपालिका, नगर निकाय, ग्राम पंचायत आदि द्वारा जारी किया गया जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate)
  • अस्पताल या स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी जन्म संबंधी रिकॉर्ड
  • स्कूल या कॉलेज प्रमाण पत्र / प्रवेश प्रमाण पत्र / हाई-स्कूल या माध्यमिक विद्यालय की अंकतालिका जिसमें जन्मतिथि हो दर्ज
  • पासपोर्ट (जहाँ लागू हो)
  • इन दस्तावेजों को ही अब जन्मतिथि प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाएगा; Aadhaar Card नहीं।

Aadhaar Card

➤ सरकार ने ऐसा क्यों किया?

कारण : Aadhaar Card बनवाते समय DOB की पुष्टि के लिए कोई मान्य दस्तावेज — जैसे जन्म प्रमाण पत्र या अस्पताल/स्कूल से जारी रिकॉर्ड — दिखाना अनिवार्य नहीं होता। इसलिए DOB अक्सर “स्व-घोषित” (self-declared) या अनुमानित होती है।

सरकार का कहना है कि इस तरह के दस्तावेजों की स्वीकार्यता से दस्तावेज़ी गलतियाँ या धोखाधड़ी (fraud) की संभावना कम होगी।

➤ इस फैसले का असर

  • जिन लोगों के पास पहले सिर्फ Aadhaar Card था और कोई अन्य जन्म प्रमाण नहीं — उन्हें अब सरकारी नौकरियों, पेंशन, योजनाओं या अन्य सेवाओं के लिए आवेदन में परेशानी हो सकती है। उन्हें वैध जन्म प्रमाण पत्र बनवाना पड़ेगा।
  • स्कूल-कॉलेज दाखिले, पहचान वेरिफिकेशन, सरकारी लाइसेंस या लेखा-जोखा आदि के समय अब DOB प्रमाण के लिए वही दस्तावेज मान्य होंगे।
  • विभागों, पंचायतों, नगरपालिका आदि सभी स्तरों पर इस नए आदेश का कड़ाई से पालन अनिवार्य होगा।

➤ क्या बदलाव केवल यूपी तक सीमित है?

नहीं — साथ ही Maharashtra Government ने भी ऐसा ही आदेश जारी किया है, जहाँ आधार कार्ड को जन्म प्रमाण पत्र नहीं माना जाएगा और आधार-आधारित “Delayed Birth Certificate” को रद्द किया जा रहा है।

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Big Education Reform! | KGBV Wardens के लिए नया “Training Handbook” Launch —लड़कियों की शिक्षा को मिलेगी नई ताकत

Education

27 नवंबर 2025 को नई दिल्ली स्थित शिक्षा मंत्रालय के शास्त्री भवन में Department of School Education & Literacy (DoSEL) की एक महत्वपूर्ण हाइब्रिड मीटिंग आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता विभाग के सचिव श्री संजय जाविन ने की, जहाँ उन्होंने “Training Handbook for Empowerment of KGBV Wardens” को आधिकारिक रूप से रिलीज़ किया।

अपने सम्बोधन में उन्होंने कहा कि—

“Wardens और Teachers के लिए structured training बेहद आवश्यक है, ताकि KGBVs में संस्थागत सपोर्ट सिस्टम और लड़कियों का सशक्तिकरण मजबूत हो।”

डिजिटल प्रशिक्षण वेबसाइट का प्रदर्शन — वार्डन्स के लिए बड़ा बदलाव

Education

बैठक के दौरान अधिकारियों ने KGBV वार्डन्स को empower करने हेतु तैयार की गई dedicated training website का लाइव डेमो भी प्रस्तुत किया। इस प्लेटफॉर्म में, विस्तृत Training Modules, Digital Learning Resources, Capacity Building Tools और mobile-friendly access शामिल हैं।

यह वेबसाइट देशभर के वार्डन्स के लिए सीखने को सरल, व्यवस्थित और accessible बनाने में बड़ी भूमिका निभाएगी। KGBV System के लिए बड़ा कदम — लड़कियों की शिक्षा को नया आधार यह पहल कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नेटवर्क में क्षमता निर्माण (capacity building) को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

वार्डन्स और शिक्षकों को नए कौशल, दृष्टिकोण और आधुनिक शैक्षणिक समझ से लैस करके सरकार का लक्ष्य है:

~लड़कियों के लिए सुरक्षित, सहयोगी और प्रेरक वातावरण बनाना

~शिक्षण-प्रबंधन को professional और efficient बनाना

~Gender equity और सीखने के outcomes में सुधार लाना

यह मिशन राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारत की लड़कियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के व्यापक विज़न को मजबूती देता है।

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दो कोच पटरी से उतरे ,रेलगाड़ी….Big Breaking! Dumka Train Derailment — Rampurhat–Jasidih Passenger

रेलगाड़ी

स्टेशन में एंट्री से ठीक पहले डिरेलमेंट आज 27 नवंबर 2025, गुरुवार दोपहर 2:10 बजे, झारखंड के दुमका रेलवे स्टेशन के नज़दीक Rampurhat–Jasidih (63081) Passenger रेलगाड़ी के दो कोच पटरी से उतर गए। ट्रेन स्टेशन में धीमी गति से प्रवेश कर रही थी, इसी दौरान अचानक पीछे के दो कोच डिरेल हो गए। राहत की बात ये है की कोई जनहानि नहीं हुई। लेकिन 2–3 यात्रियों को हल्की चोटें आईं और उन्हें तुरंत फुलो झानो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाकर इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई।

ट्रेन का रूट और डिरेलमेंट का असर

ट्रेन आज दोपहर 12:50 PM पर पश्चिम बंगाल के रामपुरहाट (बीरभूम) से रवाना हुई थी और झारखंड के Jasidih (देवघर) की ओर जा रही थी। हादसे में दो ओवरहेड इलेक्ट्रिक पोल (OHE) क्षतिग्रस्त हुई, रूट पर कई घंटों तक ट्रेनों की आवाजाही बाधित रही। यह व्यस्त रूट होने के कारण कई लोकल व पैसेंजर ट्रेनें रोकनी पड़ीं।

रेलगाड़ी

रेलवे की त्वरित कार्रवाई—बड़ी दुर्घटना टली

Eastern Railway और स्थानीय प्रशासन की टीमों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाला, पटरी से उतरे कोचों को स्थिर किया और ट्रैक क्लियरेंस और उपकरणों की मरम्मत भी शुरू की।

Eastern Railway के CPRO ने पुष्टि की: “ट्रेन की स्पीड कम होने की वजह से बड़ा हादसा टल गया।”

जांच शुरू—क्यों उतरे कोच?

रेलवे अधिकारियों के अनुसार डिरेलमेंट के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। Track alignment और OHE damage की तकनीकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा भी होगी।

यह घटना दिखाती है कि सतर्कता, त्वरित प्रतिक्रिया और लो-स्पीड एंट्री ने आज एक बड़ी रेल दुर्घटना को होने से बचा लिया।

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6 साल की बच्ची पर हमला, मुख्य आरोपी अभी …. सड़कों पर फूटा….| MP Horror in Raisen!

बच्ची

मध्य प्रदेश के रायसेन ज़िले में छह साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म ने पूरे इलाके को हिला के रख दिया है। 21 नवंबर की शाम गौहरगंज क्षेत्र के एक गांव में आरोपी सलमान खान उर्फ़ नज़र (उम्र 23) ने बच्ची को चॉकलेट देने का झांसा देकर जंगल की ओर ले गया और वहां उसके साथ अमानवीय अत्याचार कर फरार हो गया।

पीड़िता को गंभीर हालत में पहले स्थानीय अस्पताल और फिर भोपाल एम्स रेफर किया गया—जहां डॉक्टरों के अनुसार अब उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।

आरोपी फरार — 20+ पुलिस टीमें तलाश में!

सलमान खान मूलतः सीहोर जिले का रहने वाला है और मजदूरी के लिए गौहरगंज आया था। वारदात के बाद से वह लगातार फरार है। पुलिस ने उसकी खोज के लिए 20 से ज्यादा टीमें, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, मुखबिर और जंगल क्षेत्रों में लगातार सर्च अभियान चलाए हैं।

हाल ही में एक CCTV में आरोपी सिगरेट खरीदते हुए दिखा, जिससे शक है कि वह आसपास के ही किसी इलाके में छिपा हो सकता है। लेकिन गिरफ्तारी न होने से जनता का गुस्सा और बढ़ गया है।

बच्ची

रायसेन में उबलता गुस्सा —

सड़कें बंद, बाजार बंद, नारेबाज़ी, लाठीचार्ज घटना के कई दिन बाद भी आरोपी पकड़ा न जाने पर रायसेन और गौहरगंज में भारी प्रदर्शन भड़के। लोगों ने NH-46 हाईवे जाम, बाज़ार बंद, और “पीड़िता को न्याय दो” के नारे लगाते हुए प्रशासन के खिलाफ कड़ा विरोध जताया।

कुछ जगहों पर भीड़ और पुलिस के बीच झड़प व पथराव भी हुआ—स्थिति काबू में लाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर करना पड़ा और अतिरिक्त बल तैनात किया गया।

सरकार की बड़ी कार्रवाई — SP हटाए गए, थानेदार बदला, इनाम बढ़ा मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले में देरी पर नाराज़गी जताई और तत्काल प्रभाव से रायसेन SP को हटाने, संबंधित थानेदार को लाइन हाज़िर करने, आरोपी पर घोषित इनाम बढ़ाने, और तेजी से गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

सरकार ने आश्वासन दिया: “कसूरवार को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा।

जनता का सवाल—आखिर कब मिलेगा न्याय?

इस घटना ने पूरे प्रदेश में गुस्सा और डर दोनों बढ़ा दिए हैं। लोग पूछ रहे हैं—

  • “जब CCTV मिल चुका है, 20 से ज्यादा टीमें लगी हैं, फिर भी आरोपी क्यों नहीं पकड़ा जा रहा?”
  • यह घटना बच्चों की सुरक्षा, पुलिस की तत्परता और प्रशासनिक सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े करती है।

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करोड़ों की विदेशी मुद्रा जब्त …..?मुंबई Airport पर Customs की Mega Action!

मुंबई

मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (CSMIA) पर कस्टम विभाग ने हाल ही में एक Special Anti-Smuggling Drive चलाते हुए लाखों–करोड़ों रुपये मूल्य की विदेशी करेंसी जब्त कर एक बार फिर सख्त संदेश दिया है। अलग-अलग मामलों में पकड़ी गई इन हाई-वैल्यू करेंसी के कारण कई यात्रियों को कस्टम एक्ट 1962 के तहत हिरासत में लिया गया और पूछताछ शुरू कर दी गई है।

ऑपरेशन कैसे चला – किन रूट्स पर कार्रवाई?

कस्टम Zone-III और एयर इंटेलिजेंस यूनिट (AIU) की टीमों ने दुबई, अबू धाबी, दोहा और जकार्ता जैसे रूट्स पर आने-जाने वाले यात्रियों की profiling + targeted screening की। संदिग्ध पैटर्न देखने पर यात्रियों को रोका गया और उनके बैग की intensive scanning की गई—जिनमें से कई मामलों में बड़ी मात्रा में अवैध रूप से ले जाई जा रही करेंसी बरामद हुई।

मुंबई

Currency कैसे छिपाई गई थी?

ज्यादातर मामलों में करेंसी को ट्रॉली बैग के false bottom में, हैंड बैग के hidden compartments में, या कपड़ों/इलेक्ट्रॉनिक आइटम के अंदर पेशेवर रूप से छुपाया गया था।

  • एक बड़े मामले में दुबई से आए एक यात्री के बैग से करीब ₹87 लाख के बराबर विदेशी नोट जब्त किए गए।
  • एक अन्य संयुक्त कार्रवाई में दो यात्रियों से मिलकर ₹1.07 करोड़ से ज्यादा की currency बरामद हुई।
  • यह साफ संकेत है कि यात्रियों को निर्देशित कर प्रोफेशनल तरीके से करेंसी इंडिया लाने की कोशिश की जा रही थी।

गिरफ्तारी, पूछताछ और सिंडिकेट लिंक?

गिरफ्तार यात्रियों से पूछताछ की जा रही है कि क्या वे किसी International Hawala / Currency Smuggling Network से जुड़े हुए हैं। जप्त किये गए पासपोर्ट, मोबाइल, टिकट, रूटिंग और पैसे के पैटर्न को वित्तीय खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर खंगाला जा रहा है।

कस्टम अधिकारियों का कहना है कि अगर सिंडिकेट कनेक्शन के सबूत मिलते हैं, तो और गिरफ्तारियां व बड़े खुलासे संभव हैं।

मुंबई

 

लगातार बढ़ रहे तस्करी के प्रयास—कस्टम का सख्त संदेश

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक गल्फ रूट पर Cash Smuggling, Gold Smuggling, और Electronic Goods तस्करी के प्रयास तेजी से बढ़ रहे हैं। इसी वजह से प्रोफाइलिंग और तकनीकी मॉनिटरिंग और सख्त की गई है।कस्टम विभाग ने स्पष्ट किया है कि—

“अवैध करेंसी ले जाना सिर्फ जब्ती नहीं—सीधा arrest, court trial और भारी economic penalty की ओर ले जाता है।”

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पहली बार मिला डार्क मैटर का सुराग, ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्य की झलक | पूरी खबर जानिए  

डार्क मैटर

विज्ञान की दुनिया से आई एक बड़ी खबर ने पूरी दुनिया के वैज्ञानिक समुदाय को उत्साहित कर दिया है। दशकों से खोजे जा रहे डार्क मैटर (Dark Matter) के बारे में पहली बार ऐसे संकेत मिले हैं, जो संभवतः इसके वास्तविक अस्तित्व की दिशा में सबसे बड़ा कदम साबित हो सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने दावा किया है कि भूमिगत प्रयोगशालाओं में किए गए शोध में उन्हें कुछ ऐसे अजीब संकेत मिले हैं, जिन्हें सामान्य वैज्ञानिक कारणों से समझाना बहुत मुश्किल है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकेत डार्क मैटर कणों की टक्कर या विघटन से जुड़ा हो सकता है। अगर यह दावा सही साबित होता है, तो यह आधुनिक विज्ञान के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण खोजों में से एक होगी।

डार्क मैटर

डार्क मैटर क्या है?

डार्क मैटर ब्रह्मांड का वह रहस्यमय पदार्थ है जिसे हम देख नहीं सकते। यह न प्रकाश छोड़ता है, न उसे रोकता है, न प्रतिबिंबित करता है। इसलिए इसे अदृश्य पदार्थ भी कहा जाता है।

वैज्ञानिक इसका पता इसके गुरुत्वाकर्षण प्रभाव से लगाते हैं, क्योंकि यह आकाशगंगाओं, तारों और ग्रहों की चाल को प्रभावित करता है। माना जाता है कि पूरे ब्रह्मांड का लगभग 85 प्रतिशत पदार्थ डार्क मैटर से बना है। वैज्ञानिक मानते हैं कि यह WIMP (Weakly Interacting Massive Particles) नामक कणों से बना हो सकता है, जो सामान्य पदार्थ से बहुत कमजोर रूप से संपर्क करते हैं। इसी वजह से इनका पता लगाना बेहद कठिन है।

प्रयोग कैसे किया गया?

यह प्रयोग पृथ्वी की सतह से सैकड़ों मीटर नीचे स्थित विशेष भूमिगत प्रयोगशालाओं में किया गया, ताकि कॉस्मिक किरणों और रेडिएशन जैसे बाहरी स्रोतों का प्रभाव खत्म किया जा सके।

इन प्रयोगों में बड़े टैंकों में तरल ज़ेनॉन (Liquid Xenon) रखा जाता है। वैज्ञानिक लगातार इस बात की निगरानी करते हैं कि कहीं कोई बहुत छोटा प्रकाश संकेत या आयनीकरण तो नजर नहीं आता, जो डार्क मैटर के किसी कण की टक्कर से उत्पन्न हो सकता है।

हाल ही में प्राप्त डेटा में कुछ ऐसे संकेत मिले हैं जो सामान्य रेडिएशन या अन्य ज्ञात स्रोतों से नहीं समझाए जा सकते। इन संकेतों की ऊर्जा और पैटर्न WIMP मॉडल से मेल खाते हैं, जो इसे और महत्वपूर्ण बनाता है।

डार्क मैटर

क्या यह वास्तव में डार्क मैटर की खोज है?

वैज्ञानिकों ने कहा है कि डेटा में मिली घटनाएं सांख्यिक रूप से काफी मजबूत हैं, यानी यह साधारण संयोग नहीं लगतीं। लेकिन वे अभी सावधानी से आगे बढ़ रहे हैं क्योंकि अंतिम पुष्टि तभी होगी जब:

•अन्य वैज्ञानिक समूह भी इसी तरह के परिणाम प्राप्त करें

•आंकड़ों की गहराई से जांच हो

•अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समीक्षा (Peer Review) पूरी हो

यह खोज इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?

•अगर यह संकेत सत्य सिद्ध होते हैं, तो यह खोज पूरी विज्ञान दुनिया की दिशा बदल देगी।

•यह साबित कर देगी कि डार्क मैटर वास्तव में मौजूद है

•स्टैंडर्ड मॉडल ऑफ पार्टिकल फिजिक्स से आगे का रास्ता खुलेगा

•आकाशगंगाओं की संरचना और ब्रह्मांड के निर्माण को समझना आसान होगा

•यह नोबेल पुरस्कार स्तर की खोज मानी जा सकती है

आगे क्या होगा?

अभी दुनिया भर के वैज्ञानिक इस डेटा की जांच कर रहे हैं। आने वाले महीनों में और परिणाम सामने आएंगे। अगर यह डेटा स्वतंत्र प्रयोगों में दोहराया गया, तो मानवता पहली बार डार्क मैटर की वास्तविक पहचान के बहुत करीब पहुंच जाएगी।

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यूपी में 11 करोड़ की लूट 🤦 बच्चों का खाना भी……. ! Mid-Day Meal SCAM EXPOSED!

यूपी

बलरामपुर में 11 करोड़ का खुलासा — 44 लोगों पर FIR, हिल गया सिस्टम यूपी के बलरामपुर ज़िले में मिड डे मील योजना में करीब 11 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले का परदाफाश हुआ है। मिड डे मील चलाने वाले के साथ-साथ 44 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। ऐसा बताया जा रहा है कि यह घोटाला 2021 से 2025 के बीच स्कूलों और मदरसों के बच्चों के नाम पर फर्जी भुगतान, बढ़ी हुई छात्र संख्या और नकली उपभोग विवरण के जरिए हो रहा है।

कैसे सामने आया घोटाला? — शिकायत ने खोला पूरा खेल

कुछ प्राथमिक विद्यालयों ने BSA कार्यालय को शिकायत भेजी कि उन्हें कन्वर्ज़न कास्ट की राशि कम मिल रही है। इस पर PFMS पोर्टल की एंट्रियों की जांच शुरू हुई—और वहीं से सामने आया कि करोड़ों रुपये बिना असली भोजन कराए, फर्जी उपभोग रिपोर्ट लगाकर निकाल लिए गए।

जांच में यह भी पाया गया कि बच्चों की संख्या बढ़ाकर दिखाना, मदरसों के नाम पर फर्जी बिल, स्कूलों से सांठगांठ कर पेमेंट निकालना, बिना भोजन परोसे पैसे जारी करना घोटाले का मुख्य तरीका था।

  • मास्टरमाइंड कौन? 44 नाम, संख्या 100 पार होने की आशंका
  • FIR में जिला समन्वयक फिरोज अहमद खान सहित 44 लोगों को नामजद किया गया है।
  • यूपी

इनमें शामिल हैं:

– कई मदरसों के प्रबंधक

– परिषदीय विद्यालयों से जुड़े लोग

– कुछ आउटसोर्सिंग सप्लायर

– और भुगतान प्रक्रिया में शामिल सहयोगी

सूत्रों का दावा है—बिना अन्य अधिकारियों की मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर हेराफेरी संभव नहीं, इसलिए जांच आगे बढ़ने पर आरोपी 100 से अधिक हो सकते हैं।

पुलिस की कार्रवाई — रातभर छापेमारी, कई हिरासत में

  • SP बलरामपुर ने एक विशेष टीम बनाकर रात में कई स्थानों पर छापेमारी की।
  • कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है।
  • शिक्षा विभाग भी समानांतर जांच कर रहा है और विभागीय कार्रवाई की तैयारी में है।

बच्चों के अधिकार पर हमला — मिड डे मील योजना पर उठे सवाल

मिड डे मील योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन देकर स्कूल में नामांकन, उपस्थिति और स्वास्थ्य बढ़ाना है। लेकिन बलरामपुर घोटाला दिखाता है कि मॉनिटरिंग और फील्ड वेरिफिकेशन की व्यवस्था में बहुत कमियां हैं, जिनका फायदा उठाकर भ्रष्ट लोगों ने बच्चों के हक का भोजन तक लूट लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय पर जांच न होती, तो रकम और भी बड़ी हो सकती थी।

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पटना में ठेकेदार रिशु श्री के 9 ठिकानों पर छापेमारी, करोड़ों के लेन-देन की जांच तेज

पटना

बिहार की राजधानी पटना में गुरुवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चर्चित ठेकेदार रिशु श्री उर्फ़ रिशु रंजन सिन्हा से जुड़े कुल 9 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग, कमीशनखोरी और कथित बेनामी संपत्ति के मामले में की गई है।

सूत्रों के मुताबिक ED इस छापेमारी के जरिए कई राज्यों में फैले नेटवर्क की जांच कर रही है, जो सरकारी ठेकों, ट्रांसफर–पोस्टिंग और कमीशन के नाम पर भारी रकम के लेन-देन से जुड़ा बताया जा रहा है।

पटना

कहां-कहां हुई छापेमारी

ईडी की रेड बिहार के अलावा कई राज्यों में फैली:

  • •पटना (बिहार) – मुख्य ठिकाने
  • •दिल्ली–एनसीआर
  • •सूरत और अहमदाबाद (गुजरात)
  • •पानीपत (हरियाणा)

छापेमारी एक साथ कई टीमों द्वारा की गई ताकि दस्तावेज़ों और डिजिटल डेटा को बिना देरी जब्त किया जा सके।

किस मामले में कार्रवाई

  • •रिशु श्री पर आरोप है कि वह सरकारी विभागों में ठेके दिलाने और पोस्टिंग–तबादला कराने के नाम पर भारी कमीशन वसूलता था।
  • •ईडी का मानना है कि इस पैसे को बेनामी संपत्तियों और व्यापारों में निवेश कर सफेद किया जाता था।
  • •कार्रवाई PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम) के तहत की जा रही है।

किन अधिकारियों और नेटवर्क पर भी रेड

  • •सामान्य प्रशासन विभाग के अंडर सेक्रेटरी विनोद कुमार सिंह
  • •रिशु श्री का चार्टर्ड अकाउंटेंट
  • कुछ ट्रैवल एजेंट और कारोबारी, जिनके जरिए पैसा घूमाने की आशंका है
  • जांच टीम मानती है कि इन्हीं कड़ियों के जरिये अवैध धन का लेन-देन चल रहा था।
  • पटना

छापे में क्या मिला

अभी तक रेड में:

  • •नकदी
  • •महत्वपूर्ण फाइलें और दस्तावेज़
  • •डायरी और मोबाइल-लैपटॉप जैसे डिजिटल उपकरण
  • •अवैध लेन-देन और संपर्कों से जुड़े कई अहम सुराग मिले हैं।
  • पिछली कार्रवाई में भी करीब 10–12 करोड़ रुपये नकद, प्रॉपर्टी पेपर और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिल चुके हैं।

क्यों बढ़ी कार्रवाई? —

रिशु श्री का नाम पहले भी IAS संजीव हंस से जुड़े कथित टेंडर और मनी लॉन्ड्रिंग घोटाले में सामने आया था। उसी जांच के बाद ईडी ने उसकी गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई और अब यह बड़ा एक्शन किया गया है।

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अयोध्या राम मंदिर पर भगवा ध्वज फहरा तो पाकिस्तान बौखलाया, भारत का जवाब से डर गया पाकिस्तान | पूरी खबर जानिए

राम मंदिर

राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज (भगवा ध्वज) फहराए जाने के बाद भारत में उत्साह और आस्था की लहर दौड़ गई, लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान इस पर तिलमिला उठा। पाकिस्तान ने इसे ‘इस्लामोफोबिया’ बताते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुद्दा बनाने की कोशिश की। जिसके बाद भारत ने कड़े शब्दों में जवाब देते हुए पाकिस्तान को उसकी हद और हकीकत दोनों याद दिला दी।

अयोध्या में ऐतिहासिक पल — मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज –

25 नवंबर को अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में वैदिक मंत्रों और धार्मिक विधि-विधान के साथ राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज फहराया गया।इसे मंदिर निर्माण की आधिकारिक पूर्णता और भारत की सांस्कृतिक-धार्मिक अस्मिता का प्रतीक माना गया। पूरे देश में इस क्षण को लेकर भव्य उत्सव, दीये, भजन और जय श्री राम के नारे गूंजते रहे।

राम मंदिर

पाकिस्तान की बयानबाजी —

ध्वज फहराए जाने के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि:

अयोध्या में भगवा ध्वज फहराना इस्लामोफोबिया और धार्मिक अल्पसंख्यकों के दमन का उदाहरण है |यह मुसलमान समुदाय की विरासत, खासकर बाबरी मस्जिद की ऐतिहासिक पहचान को मिटाने की कोशिश है।इसके साथ पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग भी कर डाली।

भारत का सख्त जवाब — ‘हमें उपदेश न दें’

भारत ने पाकिस्तान के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए तीखा बयान दिया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा: “हमें उन देशों से लेक्चर की जरूरत नहीं है जो अपने यहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा तक नहीं कर पाते।”

भारत ने स्पष्ट किया:

राम मंदिर

राम मंदिर निर्माण भारत के सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद पूरी संवैधानिक प्रक्रिया से हुआ है। अयोध्या पूरी तरह भारत का आंतरिक मुद्दा है — किसी बाहरी देश की टिप्पणी अनुचित और हस्तक्षेप मानी जाएगी।

भारत ने दिखाया पाकिस्तान को आईना –

भारत ने पाकिस्तान की अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और दमन की लंबी सूची का उल्लेख करते हुए कहा: पाकिस्तान में हिंदू, सिख, ईसाई, अहमदिया मुस्लिम समुदाय लगातार हमलों और जबरन धर्मांतरण का शिकार होते हैं।मंदिरों और गुरुद्वारों पर बार-बार हमले होते हैं, हजारों हिंदू हर साल देश छोड़कर भागने को मजबूर हैं। ऐसे देश को भारत की धार्मिक स्वतंत्रता पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

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वेयरहाउस में आग, सैंकड़ों…Hong Kong Inferno: Tai Po Warehouse Blaze Shocks City

वेयरहाउस

वेयरहाउस में आग धुएँ से घिरी फैक्ट्री, पूरा इलाका हाहाकार आज दोपहर लगभग 11:35 बजे हांगकांग के ताई पो क्षेत्र के एक इंडस्ट्रियल एस्टेट में स्थित वेयरहाउस में अचानक भयंकर आग भड़क गई। जैसा कि रिपोर्ट्स बताती हैं — पहले तेज धुएँ की लपटें, फिर अचानक ज्वाला फैल गई। आग इतनी व्यापक थी कि चार किलोमीटर दूर तक काला धुआँ आकाश में फैला और आसपास के क्षेत्रों में यातायात रोकना पड़ा।

तेज़ रेस्क्यू ऑपरेशन—500+ लोग सुरक्षित निकाले, दमकल की 10 गाड़ियाँ लगीं मोर्चे पर

फायर ब्रिगेड की करीब 10 गाड़ियों और 45 फायरफाइटर्स ने महज़ 15 मिनट में इलाका घेर लिया। इसके बाद लगातार तीन घंटे तक रेस्क्यू और राहत अभियान चला। अधिकारियों ने बताया कि 500 से अधिक लोग सुरक्षित घरों से बाहर निकाले गए। हालांकि, 3 कर्मचारियों को हल्की दम घुटने की शिकायत हुई, जिन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया।

वेयरहाउस

संभावित वजह — Short Circuit या केमिकल/प्लास्टिक स्टोर में चिंगारी?

प्रारंभिक जांच में पाया गया कि आग शॉर्ट सर्किट से शुरू हुई हो सकती है। वहीं, वेयरहाउस में केमिकल या प्लास्टिक पदार्थों का स्टॉक था — जिसके कारण आग ने तेजी पकड़ी। प्रशासन ने पास की दुकानों और आसपास के इलाकों को अस्थायी रूप से सील कर दिया है, ताकि रिस्क कम किया जा सके।

प्रबंधन और प्रतिक्रिया—ड्रोन, रिमोट-सेंसिंग, स्कूल बंद, सुरक्षा सवाल

आग बुझाने और क्षेत्र की निगरानी के लिए अग्निशमन विभाग ने ड्रोन व रिमोट-सेंसिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया। पास के स्कूलों को बंद कर दिया गया और इंडस्ट्रियल ज़ोन को अस्थायी रूप से बंद किया गया। स्थानीय नागरिकों ने अब मांग की है कि सुरक्षा मानकों को अधिक सख्ती से लागू किया जाए ताकि फिर कभी ऐसा हादसा न हो।

नतीजा और आगे की राह—जनहानि न के बराबर, लेकिन सवाल कई

अभी तक किसी बड़ी जनहानि की सूचना नहीं है, और राहत–बचाव टीमों की प्रतिक्रिया को व्यापक रूप से सराहना मिली है। लेकिन यह आग एक चेतावनी है —

  • इंडस्ट्रियल ज़ोन में सुरक्षा व्यवस्था की सख्ती,
  • समय-समय पर फायर ऐक्सेस,
  • वेयरहाउस स्टोर नियमों का पालन
  • यही ऐसे हादसों से बचने का असली तरीका है।

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मज़दूरों को नए अधिकार, कंपनियों पर सख्त जिम्मेदारी -New Labour Codes 2025 SHOCK India!

मज़दूर

भारत में कामकाजी दुनिया 21 नवंबर 2025 से बड़े बदलाव मज़दूर की दहलीज पर पहुंच गई है। केंद्र सरकार ने चार नई Labour Codes—Wage Code, Social Security Code, Industrial Relations Code और Occupational Safety & Health Code—को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है। इसके साथ ही 29 पुराने श्रम कानून खत्म हो गए हैं और अब पूरे देश में “एक राष्ट्र–एक लेबर सिस्टम” जैसी व्यवस्था बन रही है। यह बदलाव सरकारी, निजी, असंगठित, किसान-मज़दूर, गिग-वर्कर से लेकर स्टार्टअप तक हर सेक्टर को प्रभावित करेगा।

क्या बदला?—वर्किंग अवर्स से लेकर महिलाओं की सुरक्षा तक बड़े सुधार

नई संहिताओं में सबसे बड़ा बदलाव है साप्ताहिक 48 घंटे कार्य-सीमा। कंपनियां अब कर्मचारी की सहमति से 4 दिन 12 घंटे या 5 दिन 9.5 घंटे का वर्क मॉडल चुन सकती हैं—ओवरटाइम पर पुरानी तरह आधे नहीं, डबल पे मिलेगा।

•Paid Leave पाने की पात्रता 240 दिन से घटाकर 180 दिन कर दी गई है।

•महिला कर्मचारी अब रात की शिफ्ट में काम कर पाएंगी—लेकिन सुरक्षा, ट्रांसपोर्ट और मेडिकल सपोर्ट कंपनी का कानूनी दायित्व होगा।

•गिग वर्कर्स, ऐप-बेस्ड वर्कर्स, असंगठित मजदूर—पहली बार देश के सोशल सिक्योरिटी फ्रेमवर्क में शामिल होंगे, जिसमें PF/ESI और विशेष सोशल सिक्योरिटी फंड का लाभ मिलेगा।

•300 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियां किसी भी छंटनी या बंदी से पहले सरकार से अनुमति लेंगी—रेस्किलिंग फंड और पारदर्शी प्रक्रिया अनिवार्य।

मज़दूरों

कंपनियों और MSMEs पर क्या असर पड़ेगा?

नई संहिताएं उद्योगों के लिए डिजिटल कंप्लायंस, एकल लाइसेंस प्रणाली, और ऑनलाइन रिकॉर्ड-कीपिंग को अनिवार्य बनाती हैं। इससे MSME, स्टार्टअप और नई यूनिट्स के लिए सिस्टम आसान होगा—लेकिन HR और ट्रेड यूनियन को नए बदलावों के हिसाब से अपनी नीतियां अपडेट करनी होंगी।

डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस मॉडल से उम्मीद है कि कानून लागू होने की रफ्तार और जवाबदेही पहले से काफी बेहतर होगी।

New Labour Era Begins!

नई लेबर कोड्स मज़दूर सुरक्षा, यूनिफ़ॉर्म नियम, महिलाओं की सुरक्षा, और गिग इकोनॉमी को वैधानिक पहचान देने का बड़ा कदम हैं। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि असली चुनौती इम्प्लीमेंटेशन में होगी—अगर राज्यों और कंपनियों ने मिलकर इसे पूरी तरह लागू किया, तो भारत की वर्कफोर्स और अर्थव्यवस्था दोनों नई ऊंचाई पर पहुंच सकती हैं।

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पटना में ट्रिपल मर्डर से दहशत , भागते दो आरोपी को भीड़ ने मौत के घाट उतारा

पटना

राजधानी पटना में सोमवार शाम हुई एक दिल दहला देने वाली वारदात ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया। गोपालपुर थाना क्षेत्र के डोमनचक गांव में एक 75 वर्षीय बुजुर्ग व्यवसायी अशर्फी राय की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्या के बाद भाग रहे दोनों हमलावरों को लोगों ने पकड़ लिया और गुस्साई भीड़ ने पीट-पीटकर दोनों को मार डाला। इस घटना में कुल तीन लोगों की मौत हो गई, जिसके बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया और बड़े पैमाने पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

कैसे हुई घटना?

जानकारी के अनुसार, घटना सोमवार शाम लगभग 4:30–5:00 बजे हुई। अशर्फी राय अपने घर के दरवाजे के पास बैठे हुए थे, तभी बाइक से आए दो अपराधियों ने उन पर अचानक गोलियां चलानी शुरू कर दीं। गोलियों की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर दौड़े।

अपराधी हत्या करके बाइक से भागने लगे, लेकिन ग्रामीणों ने उनका पीछा किया और करीब एक किलोमीटर दूर भोगपुर इलाके में दोनों को पकड़ लिया। भीड़ का गुस्सा इतना ज्यादा था कि दोनों अपराधियों को लाठी, पत्थर और डंडों से पीटा गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

गंभीर रूप से घायल अशर्फी राय को PMCH (पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल) ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पटना

जमीन विवाद की आशंका

प्रारंभिक जांच में पुलिस को शक है कि हत्या करोड़ों रुपये के जमीन विवाद से जुड़ी हो सकती है। बताया जा रहा है कि यह मामला लगभग 20 करोड़ की संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद का परिणाम हो सकता है। पुलिस इस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है और कहा है कि अभी किसी भी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाज़ी होगी।

पुलिस की कार्रवाई

  • घटना की जानकारी मिलते ही SP (ईस्ट), DSP और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचे।
  • FSL (फॉरेंसिक टीम) ने दोनों स्थानों से सबूत जुटाए—गोलियों के खोखे, खून के नमूने, पत्थर और डंडे।
  • आसपास लगे CCTV फुटेज की जांच की जा रही है।
  • मारे गए दोनों हमलावरों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है और पुलिस उनकी शिनाख्त में जुटी है।
  • तीनों शवों को पुलिस ने कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है।

इलाके में तनाव, पुलिस अलर्ट पर

घटना के बाद डोमनचक और आसपास के इलाकों में तनाव का माहौल है। पुलिस ने एहतियात के तौर पर अतिरिक्त बल तैनात किया है ताकि किसी भी तरह की और हिंसा न हो।

ग्रामीणों का कहना है कि अपराध बढ़ते जा रहे हैं और लोगों को सुरक्षा का भरोसा नहीं है, इसलिए गुस्सा भड़क गया। वहीं पुलिस का कहना है कि कानून हाथ में लेना गलत है और भीड़ के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

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पति ने पत्नी की हत्या कर की आत्महत्या, दीवार पर लिपस्टिक से लिखा सुसाइड नोट

हत्या

बिलासपुर, छत्तीसगढ़: सरकंडा थाना क्षेत्र के अटल आवास में एक दर्दनाक हत्या घटना सामने आई है, जहां पति राज तांबे (40) ने अपनी पत्नी नेहा उर्फ़ शिवानी (35) की गला घोंटकर हत्या कर दी और फिर पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। पति को पत्नी के चरित्र पर शक था, जिसके चलते दोनों के बीच अक्सर विवाद होता रहता था।

पूरा मामला-

24 नवंबर को राज ने पहले नेहा की हत्या की और उसके बाद खुद फांसी लगा ली। घटना का खुलासा तब हुआ जब पड़ोस में रहने वाली नेहा की मां ने बेटी और दामाद को बाहर नहीं देखा और घर पहुंचीं। दरवाजा अंदर से बंद था और आवाज देने पर भी जवाब नहीं मिला। जब उन्होंने धक्का देकर दरवाजा खोला, तो नेहा का शव बिस्तर पर पड़ा था और राज का शव पंखे से लटका हुआ था।

हत्या

लिपस्टिक से लिखा सुसाइड नोट-

कमरे की दीवार पर लिपस्टिक से लिखा एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें ‘राजेश विश्वास’ नाम के व्यक्ति का नाम और मोबाइल नंबर लिखकर उसे मौत का जिम्मेदार ठहराया गया। दीवार पर लिखा था, “राजेश विश्वास के कारण हम मर रहे हैं।” इसमें यह भी लिखा था कि नेहा अपनी मां के मोबाइल से राजेश से बात करती थी और उसे ऊर्जा पार्क में मिलते हुए भी पकड़ा गया था। पुलिस को मौके से एक पन्ने का सुसाइड नोट भी मिला है।

पुलिस जांच-

फॉरेंसिक जांच में नेहा के गले पर खरोंच और दबाव के निशान मिले हैं, जिससे गला दबाकर हत्या की पुष्टि होती है। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है और राजेश विश्वास की भूमिका की जांच की जा रही है।

राज और नेहा ने 10 साल पहले प्रेम विवाह किया था और दोनों लायंस कंपनी में सफाई कर्मचारी के रूप में काम करते थे। उनके तीन बच्चे हैं। इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है।

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मुंबई 26/11 के घाव आज भी नहीं भरे, शहीदों के परिवारों के दर्द को अब तक नहीं मिला न्याय

मुंबई

मुंबई: 26 नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमलों की बरसी पर आज पूरा देश एकजुट होकर उन बहादुर शहीदों और मासूम नागरिकों को नमन कर रहा है, जिन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, केंद्रीय नेताओं, राज्य सरकारों और हजारों नागरिकों ने श्रद्धांजलि देते हुए एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संदेश-

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोशल मीडिया के माध्यम से शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि 26/11 की रात देश को हिला देने वाली घटना ने हर भारतीय के दिल में एक गहरी चोट छोड़ी। उन्होंने लिखा: “मुंबई आतंकी हमले में वीरगति प्राप्त सभी जांबाज जवानों और निर्दोष नागरिकों को विनम्र श्रद्धांजलि। राष्ट्र उनके बलिदान को सदैव याद रखेगा। हम सभी को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट रहना होगा।”

राष्ट्रपति ने शहीद परिवारों के साहस और मजबूती की भी सराहना करते हुए कहा कि देश उनके प्रति सदैव ऋणी रहेगा।

केंद्रीय नेतृत्व और राज्यों के नेताओं ने दी श्रद्धांजलि-

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सुरक्षाबलों की वीरता को याद करते हुए कहा कि 26/11 ने भारत को आतंकवाद से लड़ने के लिए और मजबूत व संगठित बनाया। गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर कहा कि पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना देश को बचाया, उनका बलिदान नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने मुंबई में आयोजित स्मृति समारोह में शामिल होकर पुष्पचक्र अर्पित किए। उपराष्ट्रपति और विपक्ष के नेताओं ने भी श्रद्धांजलि संदेश जारी किए।

मुंबई में भावनात्मक श्रद्धांजलि कार्यक्रम-

मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया, ताज होटल, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT), नरीमन हाउस, लीओपोल्ड कैफे और अन्य हमले के स्थलों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए।लोगों ने मोमबत्तियाँ जलाकर और राष्ट्रीय गान गाकर शहीदों को याद किया। कार्यक्रम में शहीदों के परिवार भी मौजूद रहे, जिन्होंने भावुक होकर अपने प्रियजनों की यादें साझा कीं।

मुंबई

26/11 हमला: जो देश कभी नहीं भूल सकता

26 नवंबर 2008 को पाकिस्तान से आए 10 आतंकियों ने मुंबई के कई स्थानों पर फायरिंग और बमबारी की थी। यह हमला करीब 60 घंटे तक चला।

इस हमले में:

•166 लोग शहीद हुए

•300 से अधिक लोग घायल हुए

•एनएसजी, मुंबई पुलिस, मरीन कमांडो और कई सुरक्षा एजेंसियों ने ऑपरेशन चलाया

मेजर संदीप उन्नीकृष्णन, सीमा सुरक्षा बल अधिकारी विजय सालस्कर, अशोक कामटे, तुकARAM ओंबले सहित कई वीरों ने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। 10 आतंकियों में से 9 मारे गए, जबकि अजमल कसाब को गिरफ्तार कर 2012 में फांसी दी गई।

देश का संकल्प: आतंक के खिलाफ जंग जारी-

इस बरसी पर देशभर में आयोजित कार्यक्रमों में लोगों ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई मजबूत करने, सुरक्षा एजेंसियों को सहयोग देने और शांति व एकता का संदेश फैलाने की शपथ ली।

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संविधान दिवस पर बड़ा सवाल: क्या सच में सुरक्षित है दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र ?

संविधान दिवस

आज 26 नवंबर को देशभर में 76वां संविधान दिवस मनाया जा रहा है। सुबह से ही संसद भवन समेत देश के सभी राज्यों, जिलों, स्कूलों और सरकारी संस्थानों में संविधान दिवस से जुड़े कार्यक्रमों की शुरुआत हो चुकी है। आज का दिन भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि 26 नवंबर 1949 को भारतीय संविधान को औपचारिक रूप से अपनाया गया था, जिसे लागू होने में 26 जनवरी 1950 का समय लगा। तीन साल से अधिक चर्चा और 11 सत्रों के बाद यह विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान बना।

संसद भवन में मुख्य कार्यक्रम आज सुबह 11 बजे-

आज का मुख्य राष्ट्रीय समारोह संसद के सेंट्रल हॉल (संविधान सदन) में सुबह 11 बजे से शुरू होगा। इसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री और सांसदों सहित कई गणमान्य अतिथि शामिल होंगे।राष्ट्रपति पूरे देश के साथ संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ करवाएँगी। इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के महत्व पर देश को संबोधित करेंगे।

देशभर में ‘हमारा संविधान — हमारा स्वाभिमान’ थीम की गूंज-

इस वर्ष संविधान दिवस की थीम “हमारा संविधान — हमारा स्वाभिमान” रखी गई है। केंद्र सरकार और राज्य सरकारें पंचायत स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक कार्यक्रमों का आयोजन कर रही हैं।सरकारी संस्थानों, स्कूलों, कॉलेजों, पुलिस और सेना के प्रतिष्ठानों में भी आज सुबह से प्रस्तावना पठन, रैलियाँ, क्विज़, वाद-विवाद प्रतियोगिताएँ, और निबंध लेखन प्रतियोगिताएँ आयोजित की जा रही हैं। विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों में भी विशेष कार्यक्रम रखे गए हैं।

संविधान दिवस

संविधान के नए भाषाई संस्करणों का विमोचन-

आज समारोह में संविधान के नौ भारतीय भाषाओं—मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओडिया और असमिया—में अनुवादित नए संस्करण जारी किए जाएंगे। साथ ही, “भारत के संविधान में कला और कैलीग्राफी” नामक एक विशेष पुस्तिका का भी लोकार्पण किया जाएगा, जिसमें संविधान की मूल लिखित प्रति की ऐतिहासिक कला और हस्तलेखन प्रस्तुत किया गया है।

संविधान दिवस क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत का संविधान केवल कानूनों की किताब नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय भावना का प्रतीक है। इसमें शामिल मूलभूत अधिकार—स्वतंत्रता, समानता, अभिव्यक्ति की आज़ादी, धर्म की स्वतंत्रता, न्याय, और सम्मानपूर्वक जीवन का अधिकार—हर नागरिक की सुरक्षा करते हैं।

•अगर संविधान का दुरुपयोग हो तो क्या परिणाम?

•लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो सकती है

•नागरिक अधिकारों का हनन बढ़ सकता है

•क़ानून और न्याय व्यवस्था का संतुलन टूट सकता है

भ्रष्टाचार और शक्तियों का दुरुपयोग बढ़ सकता है

इसलिए आज का दिन हमें याद दिलाता है कि संविधान का सम्मान और सही उपयोग नागरिकों का कर्तव्य है।

विश्व के नजरिए से भारत का संविधान

•विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान

•विश्व भर के संवैधानिक विशेषज्ञ इसे सबसे संतुलित संविधान मानते हैं

•भारत का लोकतंत्र दुनिया में सबसे बड़े और मजबूत लोकतांत्रिक ढाँचे का उदाहरण है

•विश्व के कई देशों ने अपने संविधान निर्माण में भारत के मॉडल का अध्ययन किया

संविधान दिवस का संदेश

• समानता और एकता

•लोकतंत्र में विश्वास

• कानून का सम्मान

• राष्ट्र पहले का संकल्प

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Manipur Burning Again? Sangai Festival में उबाल — ‘Rehab First, Festival Later!’ 

Sangai Festival

मणिपुर का प्रतिष्ठित Sangai Festival—जो हर साल 21–30 नवंबर तक इम्फाल और हाप्टा कंगजेइबुंग में आयोजित होता है—राज्य की कला, स्पोर्ट्स, हैंडलूम, फूड, म्यूजिक और ‘सांगाई हिरण’ (Manipur’s iconic brow-antlered deer) की विरासत का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है।

लेकिन 2025 का Sangai Festival इस बार रंगों से ज्यादा विवाद, प्रदर्शन और बहिष्कार से सुर्खियों में है।

  • विरोध किस बात का? सवाल ‘उत्सव’ नहीं ‘प्राथमिकता’ का है
  • मई 2023 से चली आ रही Meitei–Kuki जातीय हिंसा ने मणिपुर को आज भी गहरे घाव दिए हैं—
  • 60,000+ लोग अब भी IDP कैम्पों में बेघर हैं,कई गांव जले और सैकड़ों परिवार आज तक अपने घर नहीं लौट पाए।
  • इसी बीच जब सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च कर Sangai Festival को “भव्य” बनाने की घोषणा की, तो COCOMI, कई महिला संगठन, IDPs और नागरिक मोर्चों ने विरोध तेज कर दिया।
  • Sangai Festival

उनका कहना—

  • “पहले Rehabilitation, Security और Home Return… फिर Festival!”
  • यह उत्सव, उनकी नजर में, जनता के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है।
  • धरातल पर क्या हुआ? Peaceful Protest से Clashes तक
  • 21 नवंबर को हजारों IDPs, महिलाएं, युवा—सांगाई फेस्टिवल स्थल के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे।
  • लेकिन तनाव तब बढ़ा जब पुलिस ने बैरिकेडिंग,लाठीचार्ज,और टियर गैस का इस्तेमाल किया।
  • नतीजा़—3 IDPs घायल,2 पुलिसकर्मी घायल,कई प्रदर्शनकारी हिरासत में।
  • फेस्टिवल में स्टॉल खाली दिखे, भीड़ बेहद कम रही, और लोकल बिज़नेस ने खुले तौर पर बहिष्कार किया।
  • “Festival Without People” का दृश्य पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया।

यह आंदोलन क्या संदेश देता है?

यह सिर्फ़ एक उत्सव का विरोध नहीं— यह नागरिकों का Collective Demand है कि:

  • पहले Justice,
  • फिर Rehabilitation,
  • और तब ही Celebration.

मणिपुर का यह शांत आंदोलन याद दिलाता है कि किसी भी राज्य की पहचान सिर्फ़ ‘उत्सव’ से नहीं बनती— बल्कि शांति, सुरक्षा और मानवाधिकारों से बनती है।

Sangai Festival 2025 ने सरकार को एक सख्त संकेत दिया है— “People First, Festival Later.”

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गानों में हथियार, वीडियो में हिंसा बढ़ाने वाले गायकों पर होगी सख्त कार्रवाई, DGP ओपी सिंह ने जारी किए निर्देश

वीडियो

हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (DGP) ओपी सिंह ने राज्य में बढ़ते गन कल्चर और गैंगस्टर ग्लैमराइजेशन पर सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा है कि संगीत और वीडियो के जरिए अपराधी जीवनशैली को बढ़ावा देने वाले गायकों को अपराधी की श्रेणी में माना जाएगा। रविवार को सभी पुलिस अधिकारियों को लिखे पत्र में उन्होंने ऐसे कलाकारों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने के स्पष्ट निर्देश दिए।

DGP का सख्त संदेश: “युवाओं के संस्कार मिनटों में खत्म हो जाते हैं”

ओपी सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया और यूट्यूब पर ऐसे गाने और वीडियो तेज़ी से वायरल होते हैं, जो युवाओं को हथियारों, गैंग, बदले, शूटआउट और हिंसा को ‘स्टाइल’ बनाकर दिखाते हैं। उन्होंने चेतावनी दी: “ऐसी सामग्री माता-पिता, शिक्षकों और समाज द्वारा दिए गए अच्छे संस्कारों को मिनटों में नष्ट कर सकती है। ऐसे गायकों को अपराधी मानते हुए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है।”

उन्होंने यह भी कहा कि प्रसिद्धि या पैसे के लिए युवाओं का भविष्य खराब करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

क्यों बढ़ रही है चिंता?

वीडियो

पुलिस के मुताबिक:

  • कई हरियाणवी और पंजाबी गानों में हथियार दिखाना एक ट्रेंड बन चुका है.
  • लाखों व्यूज़ पाने वाले ये वीडियो युवाओं को अपराध की ओर आकर्षित कर रहे हैं.
  • कुछ मामलों में वास्तविक गैंग भी इन कलाकारों से जुड़कर अपना प्रचार करते हैं.
  • DGP ने साफ किया कि सोशल मीडिया पर ऐसी संस्कृति फैलाना सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि अपराध बढ़ाने का जरिया बन चुका है।

पुलिस का एक्शन प्लान क्या है?

1. ऑपरेशन ‘ट्रैकडाउन’ की रफ्तार तेज

  • हरियाणा पुलिस पहले से ‘ऑपरेशन ट्रैकडाउन’ चला रही है, जिसके तहत अब तक:
  • 4,500+ अपराधी गिरफ्तार
  • 60 संभावित हत्याएं रोकी गईं
  • अब इस अभियान में गन कल्चर बढ़ाने वाली सामग्री भी शामिल होगी।

2. साइबर यूनिट की सख्त निगरानी

  • पुलिस की साइबर टीमें:
  • सोशल मीडिया पर अपलोड होने वाले वीडियो की निगरानी करेंगी.
  • आपत्तिजनक कंटेंट हटाने की प्रक्रिया तेज होगी.
  • प्लेटफॉर्म्स को नोटिस भेजे जाएंगे.

3. गायकों पर कानूनी कार्रवाई

  • •ऐसे कलाकारों को IPC और Arms Act के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है
  • •कई गानों में असली हथियार दिखाने की शिकायतें पहले भी मिल चुकी हैं
  • •पुलिस ने स्पष्ट किया कि सिर्फ चेतावनी का दौर खत्म हो चुका है

4. कलाकारों के साथ संवाद

  • पिछले महीनों में हरियाणा पुलिस ने कई गायकों से बैठक की थी, जिसमें उनसे अनुरोध किया गया था कि वे:
  • •हथियार न दिखाएं
  • •गैंगस्टरों को हीरो की तरह पेश न करे
  • •युवाओं के लिए सकारात्मक संदेश दें
  • •अब पुलिस इन निर्देशों का पालन न करने वालों के खिलाफ सीधे एक्शन लेगी।

DGP की अपील: “युवाओं को गुमराह न करें”

ओपी सिंह ने कहा कि संगीत युवाओं की सोच को तेजी से प्रभावित करता है, ऐसे में कलाकारों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि राज्य अपराध खत्म करने की दिशा में बड़ा अभियान चला रहा है और किसी भी तरह की अपराध-प्रेरित सामग्री को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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China Provokes AGAIN! Arunachal पर नया दावा — और भारतीय महिला को 18 घंटे एयरपोर्ट पर रोका!

भारत

9चीन की एक और भड़काऊ हरकत — अरुणाचल को बताया ‘Zangnan’, भारत ने दिया सबसे बड़ा जवाब भारत–चीन तनाव के बीच बीजिंग ने एक बार फिर विवादित बयान देकर माहौल गरमा दिया। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा—

“अरुणाचल प्रदेश भारत का नहीं, चीन के दक्षिण तिब्बत (Zangnan) का हिस्सा है।”

भारत ने तुरंत सख्त प्रतिक्रिया दी—

भारत के विदेश मंत्रालय ने इसे “पूरी तरह बेबुनियाद, अवैध और हास्यास्पद” बताया।अरुणाचल के सीएम पेमा खांडू ने ट्वीट किया— “यह भूमि हमेशा भारत की थी और हमेशा भारत की ही रहेगी।” दिल्ली ने साफ कर दिया— “अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है—चीन चाहे कितने भी बयान दे, वास्तविकता नहीं बदलेगी।”

भारतीय महिला को शंघाई एयरपोर्ट पर 18 घंटे रोका — जन्मस्थान ‘Arunachal’ लिखने पर अपमान! 21 नवंबर 2025 को अरुणाचल प्रदेश निवासी प्रेमा वांगजम थोंगडोक, जो लंदन से जापान ट्रांजिट कर रही थीं, चीन के शंघाई पुडोंग एयरपोर्ट पर एक चौंकाने वाली स्थिति से गुज़रें। चीन के इमिग्रेशन अफसरों ने उनके भारतीय पासपोर्ट को “इनवैलिड” कह दिया, सिर्फ इसलिए कि उसमें जन्मस्थान “Arunachal Pradesh” लिखा था।

अफसरों ने कहा—

“अरुणाचल तो चीन का हिस्सा है, भारतीय पासपोर्ट कैसे मान्य हो सकता है? आपको Chinese Passport बनवाना होगा!”

भारत

इसके बाद—

•उन्हें लगभग 18 घंटे रोका गया, पासपोर्ट जब्त किया,

•खाना–पानी और washroom की पर्याप्त सुविधा नहीं दी गई,

•कई अपमानजनक बातें कही गईं,

• फ्लाइट रिबुक करवाई गई,

आख़िरकार भारत के दूतावास के हस्तक्षेप के बाद उन्हें आगे यात्रा की अनुमति मिली।

प्रेमा ने कहा—

“यह केवल मेरे साथ बदसलूकी नहीं, बल्कि भारत और अरुणाचल के नागरिकों के सम्मान पर हमला है।” भारत में गुस्सा — “ये सिर्फ़ वीज़ा इश्यू नहीं, संप्रभुता की परीक्षा है!” सोशल मीडिया, विपक्ष, पूर्वोत्तर के नेताओं, और विदेश मामलों के विशेषज्ञों ने चीन की इस हरकत की तीखी आलोचना की।

#ArunachalIsIndia और #BoycottChina भारत में ट्रेंड हो गया।

राजनीतिक पार्टियों ने केंद्र सरकार से कड़े कदम, अंतरराष्ट्रीय मंच पर चीन की निंदा, और नॉर्थईस्ट नागरिकों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रोटोकॉल की मांग की।विशेषज्ञों ने कहा—“यह सिर्फ़ एक एयरपोर्ट इन्सिडेंट नहीं, बल्कि diplomatic coercion है—भारतीय पहचान को दबाने की कोशिश।”

अब बड़ी चुनौती — क्या भारत चीन को कड़ा जवाब देगा?

इंसिडेंट के बाद भारत पर दबाव बढ़ गया है कि—

~क्या MEA चीन को औपचारिक protest जारी करेगा?

~ क्या भारतीय पासपोर्ट और ट्रांजिट यात्रियों के लिए advisory बनेगी?

~क्या चीन का Arunachal narrative और aggressive होगा?

पूरे देश की नज़र अब भारत के अगले कदम पर है।

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अफ्रीका के ज्वालामुखी का कहर भारत पर—सैकड़ों उड़ानें खतरे में, यात्रा ठप

ज्वालामुखी

इथियोपिया के उत्तर-पूर्वी इलाके में स्थित हायली गुब्बी (Hayli Gubbi) ज्वालामुखी लगभग 12,000 साल के लंबे इंतज़ार के बाद अचानक फट पड़ा। यह विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि इसके धुएं और राख का गुबार 14 किलोमीटर की ऊँचाई तक पहुँच गया। इस घटना ने न सिर्फ अफ्रीका बल्कि एशिया के कई देशों को प्रभावित किया जिसमें भारत भी शामिल है।

भारत पर क्यों पड़ा असर?

इथियोपिया में हुए इस विस्फोट से निकली राख हवा के तेज़ बहाव के कारण लाल सागर → अरब सागर → पश्चिमी भारत की ओर बढ़ी। रविवार रात से सोमवार सुबह के बीच यह राख का बादल भारत के कई हिस्सों में प्रवेश कर गया।

सबसे ज़्यादा असर इन राज्यों में दिखा:

  • गुजरात
  • राजस्थान
  • दिल्ली-NCR
  • हरियाणा
  • पंजाब
  • महाराष्ट्र के कुछ हिस्से

राख हवा में फैलने से हवाई यातायात पर बड़ा असर पड़ा। DGCA ने सभी एयरलाइंस को चेतावनी जारी करते हुए प्रभावित मार्गों से बचने को कहा।

ज्वालामुखी

इसका असर उड़ानों पर कुछ इस तरह दिखा:

  • एयर इंडिया, इंडिगो, अकासा एयर की कई उड़ानें रद्द.
  • कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के रूट बदले गए.
  • दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद एयरपोर्ट पर फ्लाइट डिले की लंबी सूची.
  • यात्रियों को एयरपोर्ट पर लंबा इंतज़ार करना पड़ा.

IMD का कहना है कि यह राख का गुबार अब चीन की ओर बढ़ रहा है और मंगलवार शाम तक भारतीय आसमान पूरी तरह साफ होने की उम्मीद है।

ज्वालामुखी कहाँ है और इसकी विशेषता क्या है?

हायली गुब्बी ज्वालामुखी इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा से लगभग 800 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है।यह इलाका अफ़ार रिफ्ट वैली कहलाता है, जहाँ अफ्रीकी और अरबी टेक्टोनिक प्लेटें एक-दूसरे से अलग हो रही हैं। यह दुनिया के सबसे सक्रिय भूवैज्ञानिक क्षेत्रों में से एक है।

ज्वालामुखी की ऊँचाई: लगभग 500 मीटर

पिछला विस्फोट: 12,000 साल पहले

सक्रिय होने के संकेत: बहुत कम

वैज्ञानिकों की चिंता: क्षेत्र में कई और “छिपे ज्वालामुखी” हो सकते हैं

विस्फोट के बाद आसपास के गांवों में राख की मोटी परत जम गई है। हालाँकि अब तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन स्थानीय चरवाहा समुदाय को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है—पानी के स्रोत दूषित हो गए, मवेशियों पर राख जम गई और दृश्यता बेहद कम हो गई।

विस्फोट क्यों हुआ? वैज्ञानिक क्या कहते हैं?

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह विस्फोट धरती के अंदर मैग्मा प्रेशर बढ़ने की वजह से हुआ, जो हज़ारों वर्षों तक जमा था। अफ़ार रिफ्ट वैली में टेक्टोनिक प्लेट्स लगातार हिलती हैं, जिससे कभी-कभी अचानक ऊर्जा निकलती है और ऐसी दुर्लभ घटनाएँ होती हैं।

सैटेलाइट इमेज में विस्फोट के दौरान:

  • जमीन में लंबी दरारें
  • लाल-गर्म लावा
  • धुएं के घने बादल
  • स्पष्ट दिखाई दिए।

भारत में स्वास्थ्य पर क्या असर?

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार—

  • दिल्ली-NCR में राख का असर अस्थायी है
  • राख कण PM2.5 जैसे खतरनाक प्रदूषण से अलग हैं

इसलिए लोगों को गंभीर स्वास्थ्य खतरे की आशंका कम है|फिर भी, संवेदनशील मरीजों को मास्क पहनने और बाहर ज्यादा समय न बिताने की सलाह दी गई है।

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पीएम मोदी आज अयोध्या में जानें पूरा कार्यक्रम

मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज, 25 नवंबर 2025 को अयोध्या के दौरे पर हैं, जहां वे श्री राम जन्मभूमि मंदिर में एक महत्वपूर्ण समारोह में हिस्सा लेंगे। इस यात्रा का मुख्य आकर्षण राम मंदिर के शिखर पर धर्मध्वज का ध्वजारोहण है, जो मंदिर निर्माण के पूर्ण होने का प्रतीक माना जा रहा है। प्रधानमंत्री का यह दौरा करीब चार घंटे का रहेगा, जिसमें वे पूजा-अर्चना के साथ-साथ एक रोड शो भी करेंगे।\

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प्रधानमंत्री मोदी का आज का अयोध्या कार्यक्रम

सुबह 10 बजे:

पीएम मोदी का कार्यक्रम सप्तमंदिर में दर्शन-पूजन के साथ शुरू होगा। यहाँ वे महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य और महर्षि वाल्मीकि जैसे ऋषियों को समर्पित मंदिरों के दर्शन करेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री शेषावतार मंदिर में भी पहुंचेंगे।

सुबह 11 बजे:

इसके बाद वे माता अन्नपूर्णा मंदिर में दर्शन करेंगे और फिर राम दरबार गर्भगृह में पूजा-अर्चना करेंगे। प्रधानमंत्री रामलला गर्भगृह के भी दर्शन करेंगे, जिसके लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

दोपहर 12 बजे:

पीएम नरेंद्र मोदी श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर भगवा धर्मध्वज फहराएंगे। यह ऐतिहासिक क्षण मंदिर निर्माण के पूर्ण होने का संकेत देगा। ध्वजारोहण समारोह के बाद प्रधानमंत्री वहां मौजूद लोगों को संबोधित भी करेंगे।

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अयोध्या में भव्य सजावट और कड़ी सुरक्षा

प्रधानमंत्री के आगमन से पहले अयोध्या को फूलों, रंगोलियों और विशेष सजावट से सुसज्जित किया गया है। पूरे शहर में उत्सव जैसा माहौल है। सुरक्षा के बेहद कड़े इंतज़ाम किए गए हैं, और आम श्रद्धालुओं के लिए राम मंदिर में प्रवेश दोपहर 2:30 बजे के बाद ही संभव होगा।

पीएम मोदी का एयरपोर्ट से मंदिर तक रोड शो भी प्रस्तावित है, जिसके दौरान हजारों की भीड़ उनके स्वागत के लिए जुटने की संभावना है। यह पूरा आयोजन मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर हो रहा है, जिसे श्री राम और माता सीता के विवाह पंचमी का पवित्र दिन माना जाता है। इसी शुभ अवसर पर धर्मध्वज का ध्वजारोहण समारोह और भी विशेष हो जाता है।

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Ayodhya Dharma Dhwaja Rising: Ram Mandir शिखर पर इतिहास का सबसे पवित्र क्षण!

Ram Mandir

इतिहास का नया अध्याय — धर्मध्वज से सजा Ram Mandir शिखर 25 नवंबर 2025 को अयोध्या ने वह क्षण देख लिया, जिसका इंतज़ार करोड़ों सनातनियों ने दशकों से किया था। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के 191 फीट ऊँचे मुख्य शिखर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भव्य धर्म ध्वज (Dharma Dhwaja) का आरोहण हुआ—शुद्ध केसरिया रंग, सूर्य चिह्न, पवित्र ॐ, और कोविदारा वृक्ष के प्रतीकों से सजी यह ध्वजा रामायण की सूर्यवंशी परंपरा और सनातनी अस्मिता का दिव्य प्रतीक बन गई।

मुहूर्त अनुसार, विवाह पंचमी की पावन तिथि पर सुबह 11:52 से 12:35 के शुभ समय में यह ध्वजारोहण सम्पन्न हुआ—और अयोध्या का आसमान “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा।

देश–विदेश के दिग्गज संत, प्रमुख अतिथि और ऐतिहासिक भव्यता

इस कार्यक्रम ने अयोध्या को आध्यात्मिक और राष्ट्रीय गौरव का केंद्र बना दिया। ध्वजारोहण समारोह में शामिल रहे— प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, RSS प्रमुख मोहन भागवत, यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के संत–महंत, शंकराचार्य, अखाड़ा परिषद के प्रमुख, संघर्ष के साक्षी परिवार, ऋषि–महात्मा, और 7,000 विशेष अतिथि

शहर भर में 50+ LED स्क्रीन, विशाल ध्वजा शोभायात्राएँ, फूलों की वर्षा, और सप्त मंदिरों—शिव, हनुमान, सूर्य, गणेश, माता अन्नपूर्णा—में वैदिक अनुष्ठानों ने समारोह को दिव्य तेज़ से भर दिया।

संस्कृति, आस्था और एकता का नया युग—अयोध्या का संदेश वैश्विक दुनिया तक धर्मध्वजा को सिर्फ एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पुनर्जागृति और वैश्विक सनातन एकता का संदेश कहा गया है।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा—

“धर्मध्वज केवल परंपरा का पुनर्स्थापन नहीं, बल्कि भारत की चेतना, गौरव और सनातन आत्मा का उदय है।” कार्यक्रम में छप्पन भोग, महाआरती, पुष्पवर्षा, भजन-कीर्तन और सप्तमंदिर पूजा के साथ अयोध्या का हर कोना दैवीय उत्सव में डूब गया। यह आयोजन बता गया—अयोध्या अब सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक नेतृत्व, राष्ट्रीय गर्व और विश्वगुरु भारत का प्रतीक है।

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तीन साल के Oliver Chu ने रचा मेडिकल इतिहास | Hunter Syndrome Gene Therapy Success

Oliver Chu

दुनिया ने मेडिकल साइंस में एक नया चमत्कार देखा है। तीन साल के Oliver Chu अब Hunter Syndrome के लिए दुनिया के पहले मरीज बन गए हैं जिन्हें एक बिल्कुल नई, pioneering gene therapy दी गई है। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि उन हजारों परिवारों के लिए भी नई उम्मीद लेकर आई है जो इस दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे हैं।

यह breakthrough treatment फरवरी 2025 में Royal Manchester Children’s Hospital में दिया गया—और शुरुआती नतीजों ने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह थेरेपी आने वाले समय में Hunter syndrome से पीड़ित बच्चों के जीवन को पूरी तरह बदल सकती है।

Hunter Syndrome क्या है –

Oliver Chu

Hunter syndrome, जिसे MPS II भी कहा जाता है, एक दुर्लभ genetic disorder है जो लगभग पूरी तरह लड़कों को प्रभावित करता है। इस बीमारी में शरीर iduronate-2-sulfatase (IDS) नामक एंज़ाइम नहीं बना पाता। इसके कारण शरीर में complex sugars जमा होने लगती हैं, और नतीजा होता है—

  • चेहरे की बनावट में बदलाव
  • जोड़ों में अकड़न
  • सुनने की क्षमता में कमी
  • सांस और दिल से जुड़ी समस्याएं
  • और सबसे गंभीर—brain damage

यह बीमारी अक्सर बच्चों के बढ़ते उम्र के साथ गंभीर होती जाती है, और अभी तक इसका कोई permanent cure नहीं था।

कैसे दी गई यह Gene Therapy?

Oliver का इलाज एक बेहद हाई-टेक प्रक्रिया से गुज़रा—

1. दिसंबर 2024 में स्टेम सेल्स निकाले गए

उन्हें Manchester में इकट्ठा कर London के Great Ormond Street Hospital की लैब में भेजा गया।

2. लैब में किया गया Genetic Editing

वैज्ञानिकों ने एक specially engineered virus का इस्तेमाल करके IDS gene को Oliver के सेल्स में डाला। इस gene को इस तरह डिजाइन किया गया था कि यह blood-brain barrier पार कर सके—जो कि पहले की किसी थेरेपी ने नहीं किया था।

3. फरवरी 2025 में दिया गया infusion

  • Oliver को करीब 125 मिलियन modified stem cells के दो powerful infusions दिए गए।
  • रोज़-ब-रोज़ दिखने लगे चमत्कार-
  • इलाज के बाद सिर्फ तीन महीनों में—मई 2025 तक—Oliver में हैरान कर देने वाले बदलाव दिखने लगे।
  • वह ज़्यादा चलने-फिरने लगा
  • पहले से ज़्यादा बोलने लगा
  • और सबसे अहम—उसके शरीर ने खुद IDS enzyme बनाना शुरू कर दिया

डॉक्टर्स का कहना है कि Oliver अब normal amount से सैकड़ों गुना ज्यादा enzyme बना रहा है—जो कि पहले बिल्कुल zero था। एक साल के भीतर Oliver की cognitive skills, speech और agility इतनी सुधर गई कि वह लगभग उन बच्चों जैसा व्यवहार करने लगा जिनमें यह condition नहीं होती।

Prof. Simon Jones ने इसे “life-changing transformation” कहा है।

Oliver Chu

पीछे की कहानी: कैसे बचा यह प्रोजेक्ट

यह ट्रायल The University of Manchester द्वारा संचालित किया जा रहा है, और इसमें Royal Manchester Children’s Hospital और Saint Mary’s Hospital भी शामिल हैं।

लेकिन यह प्रोजेक्ट लगभग 2023 में बंद होने वाला था।Biotech कंपनी Avrobio ने आर्थिक संकट के कारण अपना license वापस कर दिया।उसी समय British medical charity LifeArc आगे आई और £2.5 मिलियन (करीब 26 करोड़ रुपये) की फंडिंग से प्रोजेक्ट को बचा लिया।आज Oliver समेत कुल पाँच बच्चे इस world-first trial का हिस्सा हैं, जिन्हें कम से कम दो साल तक monitor किया जाएगा।

Gene Therapy का सफर: 1990 में हुई थी पहली सफलता-

Oliver का इलाज उस लंबी यात्रा का हिस्सा है जिसकी शुरुआत 1990 में हुई—

  • पहली सफल gene therapy 14 सितंबर 1990 को
  • मरीज थीं—चार साल की Ashanthi DeSilva
  • उन्हें ADA-SCID नाम की एक जानलेवा बीमारी थी|
  • इस उपचार ने दुनिया में gene therapy का नया अध्याय खोल दिया|

30 साल बाद भी Ashanthi पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी रही हैं। उनके शरीर की T-cells में आज भी corrected gene मौजूद है। यह इतिहास दिखाता है कि gene therapy लगातार विकसित हो रही है, और Oliver का केस इसका अगला महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

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Lachit Divas 2025: The Real ‘Warrior Leader’ of India — असम के गर्व लाचित बोरफुकन की जयंती पर देशभर में उत्सव!

Lachit Divas

असम का वीर पुत्र, भारत का गौरव — क्यों खास है Lachit Divas? हर साल 24 नवंबर को असम और पूरे भारत में Lachit Divas मनाया जाता है। इस दिन को अहोम साम्राज्य के महान सेनापति, रणनीतिकार और असम की अस्मिता के प्रतीक लाचित बोरफुकन की जयंती के रूप में याद किया जाता है।

1671 के सराइघाट युद्ध में लाचित बोरफुकन ने अद्भुत रणनीति, नेतृत्व और साहस का प्रदर्शन करते हुए विशाल मुगल सेना को ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर निर्णायक हार दी—जो भारतीय सैन्य इतिहास के सबसे चमत्कारिक विजय अध्यायों में से एक माना जाता है। 2025 में यह जयंती असम, अरुणाचल, नागालैंड और विदेशों में बसे असमिया समुदायों द्वारा सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और राष्ट्रीय गौरव के उत्सव के रूप में बेहद भव्य रूप से मनाई जा रही है।

राज्यभर में भव्य समारोह—Assamese Pride की गूंज

गुवाहाटी के शिल्पग्राम से लेकर डिब्रूगढ़, जोरहाट, तेजपुर तक, पूरे राज्य में हज़ारों लोगों ने लाचित बोरफुकन को श्रद्धांजलि दी।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने—

✔ Lachit Gold Medal Leadership Award

✔ ब्रह्मपुत्र नदी पर फ्लोटिंग परेड

✔ विशेष जनसभा और सांस्कृतिक प्रदर्शन

के ज़रिये लाचित के शौर्य को सलाम किया।

Lachit Divas

स्कूली बच्चों, NCC कैडेट्स, कलाकारों और प्रशासनिक अधिकारियों ने—

• नाट्य मंचन

• हथियार (हेंगडांग) प्रदर्शन

• कवि सम्मेलन

• वाद-विवाद प्रतियोगिता

के माध्यम से लाचित की जीवनगाथा को नई पीढ़ी तक पहुँचाया।

सोशल मीडिया पर #LachitDivas #AssamPride #Lachit2025 देशभर में ट्रेंड करता रहा।

युवा पीढ़ी के लिए संदेश—Leadership, Courage और Nation First!

लाचित दिवस सिर्फ़ ऐतिहासिक उत्सव नहीं, बल्कि नेतृत्व, अनुशासन, सामरिक समझ, राष्ट्ररक्षा और आत्मसम्मान की एक जीवित सीख है।लाचित का आदर्श संदेश हर भारतीय युवा के लिए आज भी उतना ही प्रासंगिक है—“देश पहले, हम बाद में। कर्तव्य ही सबसे बड़ा धर्म है।”

उनकी जयंती पर असम और पूरा देश संकल्प ले रहा है कि लाचित बोरफुकन की तरह—

✔ राष्ट्र की रक्षा

✔ संस्कृति का सम्मान

✔ और न्यायपूर्ण नेतृत्व

हमेशा सर्वोपरि रहेंगे।

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इंडिया गेट प्रोटेस्ट में हिडमा के समर्थन के नारे, 15 से ज्यादा गिरफ्तार

इंडिया गेट

सारांश (बुलेट पॉइंट्स में )

•दिल्ली के इंडिया गेट पर प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हालात अचानक बिगड़ गए और कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर मिर्च/चिली स्प्रे का इस्तेमाल किया।

•घटना में 3–4 पुलिसकर्मी घायल हुए और RML अस्पताल ले जाए गए।

•प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने माओवादी कमांडर मादवी हिडमा के समर्थन में “मादवी हिडमा अमर रहे” के नारे लगाए और पोस्टर दिखाए।

•पुलिस ने 15 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत/गिरफ्तार किया, जबकि कुछ रिपोर्टों में संख्या 22 बताई गई।

•सरकारी काम में बाधा, सड़क जाम करने और पुलिस पर हमले जैसे आरोपों में FIR दर्ज की गई है।

•पुलिस ने कहा कि हिडमा समर्थक नारे लगाने वालों की पहचान कर उन पर अलग से कार्रवाई होगी।

दिल्ली के इंडिया गेट पर रविवार शाम प्रदूषण के खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन रखा गया था। बड़ी संख्या में लोग जहरीली हवा को लेकर चिंता जताने पहुंचे थे, लेकिन यह प्रदर्शन बिना किसी अनुमति के हो रहा था। जैसे ही प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठने लगे और ट्रैफिक रोकने की कोशिश की, पुलिस ने उन्हें हटाना शुरू किया। इसी दौरान माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया।

मिर्च स्प्रे के आरोप से बढ़ा तनाव

पुलिस का कहना है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने उन्हें हटाने से रोकने के लिए मिर्च/चिली स्प्रे का इस्तेमाल किया। इससे 3–4 पुलिसकर्मी घायल हुए और उन्हें तुरंत RML अस्पताल ले जाया गया। अधिकारियों के अनुसार किसी प्रदर्शन में पुलिस पर इस तरह का हमला पहली बार देखने को मिला है, जिसके बाद पूरे मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।

इंडिया गेट

‘मादवी हिडमा अमर रहे’ के नारे और पोस्टर-

तनाव उस वक्त और बढ़ गया जब कुछ लोग अचानक माओवादी कमांडर मादवी हिडमा के समर्थन में “मादवी हिडमा अमर रहे” के नारे लगाने लगे। प्रदर्शन में हिडमा के समर्थन वाले पोस्टर भी दिखे। कुछ पोस्टरों पर लिखा था—“बिरसा मुंडा से मादवी हिडमा तक, जंगल और पर्यावरण की लड़ाई जारी रहेगी।” सोशल मीडिया और टीवी रिपोर्टों में ऐसे वीडियो भी सामने आए हैं, जिसके बाद यह मुद्दा और विवादित हो गया।

गिरफ्तारी और कार्रवाई

पुलिस ने ऐसे नारे लगाने वाले और हिंसा में शामिल लोगों को मौके पर हिरासत में लेना शुरू किया। आधिकारिक तौर पर 15 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी की पुष्टि हुई है, जबकि कुछ रिपोर्टों में 22 गिरफ्तारियां बताई गई हैं। पुलिस ने सरकारी काम में बाधा डालने, सड़क अवरुद्ध करने, पुलिसकर्मियों पर हमला करने और अवैध रूप से स्प्रे करने जैसे गंभीर आरोपों में FIR दर्ज की है।

पुलिस का आधिकारिक बयान

नई दिल्ली जिले के डीसीपी देवेश कुमार माहला ने कहा कि बिना अनुमति प्रदर्शन करना गलत है और प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस पर चिली स्प्रे का इस्तेमाल “अप्रत्याशित और गंभीर” है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि माओवादी समर्थन वाले नारे लगाने वालों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ अलग से कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इंडिया गेट

मादवी हिडमा कौन था?

मादवी हिडमा एक कुख्यात माओवादी कमांडर था, जिस पर 1 करोड़ रुपये का इनाम था। वह दक्षिण बस्तर क्षेत्र में कई बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता था। 18 नवंबर को आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीतारामाराजू इलाके में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में हिडमा मारा गया था। उसकी मौत के कुछ दिन बाद ही उसके समर्थन में लगे नारे अब नए विवाद का कारण बन गए हैं।

पहले भी हुए थे प्रदर्शन

दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को लेकर इससे पहले 9 नवंबर को भी इंडिया गेट पर विरोध प्रदर्शन हुआ था, जिसमें बिना अनुमति प्रदर्शन करने वाले कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया था। पुलिस का कहना है कि इंडिया गेट एक संवेदनशील क्षेत्र है और यहाँ कानून-व्यवस्था के कारण किसी भी तरह का धरना-प्रदर्शन नियंत्रित किया जाता है।

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ये कौन पक्षी है जिसने लगातार उड़ कर बनाया रिकॉर्ड:-AMUR FALCON SUPER FLIGHT

पक्षी

प्रकृति और विज्ञान का अनोखा संगम पक्षी फाल्कन्स ने बिना रुके किया तय 3000km सिर्फ इंस्टिंक्ट और टेलविंड का इस्तेमाल करके किया मुश्किल रास्तों को पार मणिपुर के तमेंगलोंग जिले से 11 नवंबर 2025 को तीन अमूर फाल्कन—अपापंग (मेल), आहु और अलांग (फीमेल)—को satellite tagging के साथ मॉनिटरिंग के लिए रिलीज़ किया गया था। सिर्फ 76 घंटे में इन पक्षियों ने मणिपुर से महाराष्ट्र–गोवा होते हुए, Arabian Ocean के ऊपर से non-stop 3,000 km की उड़ान भर दी।

वैज्ञानिकों के अनुसार, पाँच दिनों के भीतर इन तीनों फाल्कन ने 5,000–6,000 km का अविश्वसनीय सफर पूरा कर सोमालिया और केन्या तक पहुंच बना ली—यह एवियन माइग्रेशन की दुनिया के लंबे और खतरनाक मार्गों में से एक है।

Migratory Miracle — कैसे बिना रुके पार कर गए पूरा समंदर?

WII (Wildlife Institute of India) और स्थानीय वन विभाग की ट्रैकिंग टीम ने बताया कि: इन पक्षियों ने उड़ान से पहले टर्माइट और कीट भरकर ऊर्जा स्टोर की।समुद्र के ऊपर न कोई द्वीप, न जहाज, न रुकने की जगह—फिर भी यात्रा non-stop।इनकी दिशा-ज्ञान क्षमता instinct + tailwind का इस्तेमाल कर पारंपरिक मार्ग का अनुसरण करती है।

पक्षी

वैज्ञानिकों ने इसे दुनिया की सबसे लंबी निरंतर उड़ानों में से एक बताया—इससे मिलने वाला डेटा भविष्य में जलवायु परिवर्तन, एवियन माइग्रेशन और ग्लोबल बायोडायवर्सिटी रिसर्च के लिए “goldmine” साबित होगा।

संरक्षण की जीत — पूर्वोत्तर भारत का बदलाव दुनिया में मिसाल 10–12 साल पहले तक अमूर फाल्कन का बड़े पैमाने पर शिकार पूर्वोत्तर में चिंता का विषय था।

लेकिन आज मणिपुर और नागालैंड में:

गाँव और स्थानीय युवा “Falcon Festival” मना रहे हैंस्कूल–कम्युनिटी मिलकर संरक्षण अभियान चला रही है सरकारी एजेंसियों व वैज्ञानिक संस्थानों की साझेदारी ने इसे “Global Conservation Success Story” बना दिया है। दुनिया भर के शोधकर्ता कहते हैं—“India’s community-driven conservation model is now a benchmark.

एक उड़ान जिसने विज्ञान, प्रकृति और मानव सहयोग को जोड़ दिया मणिपुर से अफ्रीका तक तीन अमूर फाल्कन की निश्छल, निर्भीक, और record-breaking यात्रा यह दिखाती है कि प्रकृति में अभी भी ऐसे करिश्मे मौजूद हैं जो मानवता को सीख देते हैं— सहयोग, संरक्षण और विज्ञान मिलकर चमत्कार कर सकते हैं।

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Guru Tegh Bahadur Shaheedi Diwas 2025: आस्था की स्वतंत्रता के लिए अंतिम बलिदान

Guru Tegh Bahadur

History That Still Shakes Empires — धर्म के लिए स्वयं को कुर्बान करने वाला अद्वितीय बलिदान 24 नवंबर 2025 को भारत और पूरी दुनिया Guru Tegh Bahadur Shaheedi Diwas को कृतज्ञता और श्रद्धा के साथ मना रही है।

9वें सिख गुरु गुरु तेग बहादुर साहिब ने वर्ष 1675 में दिल्ली के चांदनी चौक पर अपने प्राण त्याग दिए — धर्म, स्वतंत्रता और मानव अधिकारों की रक्षा के लिए। मुगल शासक औरंगज़ेब की जबरन धर्म-परिवर्तन नीतियों के खिलाफ उन्होंने कश्मीरी हिंदुओं, नानकपंथियों और निर्बलों के अधिकारों के लिए स्वयं को समर्पित किया।

इसलिए उन्हें “Hind Di Chadar / Dharma Ki Chadar” कहा जाता है — वह ढाल जिसने पूरी सभ्यता को बचाया।

Nationwide Tributes —

  • गुरुद्वारों से लेकर सोशल मीडिया तक, भक्ति और सम्मान की गूंज
  • शहीदी दिवस पर देशभर में विशेष कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं:-
  • सीस गंज साहिब (दिल्ली) – अखंड पाठ, अरदास, शबद-कीर्तन
  • अमृतसर, आनंदपुर साहिब, पटना साहिब – प्रभातफेरी, कीर्तन दरबार, लंगर सेवा
  • स्कूलों में secularism और religious freedom पर जागरूकता कार्यक्रम
  • SGPC, DSGMC और सिख धर्मगुरुओं द्वारा विशेष संदेश
  • सोशल मीडिया पर #GuruTeghBahadur और #HindDiChadar ट्रेंड
  • Guru Tegh Bahadur

हर जगह एक ही संदेश —

  • धर्म की आज़ादी किसी एक धर्म की नहीं, पूरी मानवता की जीत है।
  • आधुनिक भारत के लिए गुरु साहिब का संदेश
  • गुरु तेग बहादुर जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि:

Freedom of Faith is a fundamental human right

  • डर को त्यागो और सही के लिए खड़े होओ
  • धर्मनिरपेक्षता और सहिष्णुता ही समाज की असली शक्ति है
  • उनकी शहादत आधुनिक भारत में इंसाफ, सह-अस्तित्व और मानवता का मार्गदर्शन करती है।

Their Sacrifice Is Not History, It Is a Guiding Light

आज का शहीदी दिवस सिर्फ़ एक स्मृति नहीं, बल्कि यह याद दिलाता है कि जब अन्याय बढ़े, तब आवाज़ भी बुलंद होनी चाहिए। गुरु तेग बहादुर साहिब का बलिदान दुनिया की सबसे महान कुर्बानियों में से एक है — “A global symbol of courage and freedom of conscience.”

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शिक्षा की आड़ में आतंक: इंटरस्टेट मॉड्यूल की पोल खुली, कई गिरफ्तार”

इंटरस्टेट

जम्मू और कश्मीर पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए ऐसे इंटरस्टेट और इंटरनेशनल टेरर मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है, जो जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) जैसे खतरनाक आतंकी संगठनों से जुड़ा था। इस नेटवर्क में डॉक्टर, पढ़े-लिखे प्रोफेशनल, मौलवी और स्थानीय सहयोगी तक शामिल थे। इस ऑपरेशन में जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ हरियाणा, उत्तर प्रदेश की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने मिलकर काम किया।

कैसे उजागर हुआ ‘व्हाइट कॉलर’ टेरर मॉड्यूल-

इस मॉड्यूल को “व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल” नाम इसलिए दिया गया क्योंकि इसमें शामिल लोग highly educated थे—जिनमें तीन डॉक्टर भी थे। जांच एजेंसियों ने पाया कि ये लोग पाकिस्तान और अन्य देशों में बैठे अपने हैंडलर्स से एन्क्रिप्टेड चैटिंग ऐप्स के जरिए संपर्क में रहते थे। जांच की शुरुआत नौगाम में धमकी भरे पोस्टर चिपकाए जाने से हुई, जिसके बाद यह पूरा नेटवर्क सामने आया।

इंटरस्टेट

कौन-कौन गिरफ्तार हुए?

अब तक कुल आठ से अधिक लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। प्रमुख नाम:

  • •डॉ. मुजम्मिल अहमद गनई
  • •डॉ. अदील
  • •डॉ. शाहीन
  • •आरिफ निसार डार
  • •यासिर-उल-अशरफ
  • •मकसूद अहमद डार
  • •मौलवी इरफान अहमद
  • •जमीर अहमद अहंगर

इसके अलावा SIA ने बटमालू के तुफैल नियाज भट को भी गिरफ्तार किया है। इन सभी का काम था—भर्ती कराना, फंड जुटाना और IED तैयार करने के लिए सामान खरीदना।

2,900 किलो विस्फोटक और खतरनाक हथियार बरामद-

यह मॉड्यूल कितना बड़ा था, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस ने करीब 2,900 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री बरामद की है। इसमें शामिल हैं:

  • •अमोनियम नाइट्रेट
  • •पोटेशियम नाइट्रेट
  • •IED बनाने का अन्य सामान

हथियारों में मिला:

AK-47 राइफल,चीनी स्टार पिस्टल,बेरेटा पिस्टल ,मैगज़ीन और गोला-बारूद इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक से बड़े पैमाने पर आतंकी वारदात की आशंका जताई जा रही है।

दिल्ली के लाल किले ब्लास्ट से भी जुड़ाव

इंटरस्टेट

जांच में यह भी सामने आया है कि यह मॉड्यूल दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट जैसी घटनाओं में शामिल था। कई गिरफ्तार आरोपी दिल्ली और हरियाणा में छिपकर IED की सप्लाई, फंडिंग और लॉजिस्टिक्स संभाल रहे थे।

मॉड्यूल का मकसद क्या था?

  • •नए लोगों की भर्ती करना
  • •विदेश में बैठे आतंकी हैंडलर्स के लिए फंड जुटाना
  • •IED तैयार करना और सप्लाई करना
  • •भारत में बड़े हमलों को अंजाम देना
  • •दिल्ली, जम्मू, कश्मीर समेत कई शहरों को टारगेट बनाना

पुलिस का कहना है कि इस मॉड्यूल के पकड़े जाने से JeM और AGuH के कई बड़े प्लान नाकाम हो गए हैं।

तीन राज्यों में फैला बड़ा नेटवर्क

यह नेटवर्क सिर्फ जम्मू-कश्मीर तक सीमित नहीं था। इसकी कड़ियाँ मिलीं:

  • •जम्मू-कश्मीर
  • •हरियाणा
  • •उत्तर प्रदेश

यहां से लोगों को भर्ती किया जाता था, फंडिंग होती थी और विस्फोटक सामग्री खरीदी व ट्रांसपोर्ट की जाती थी।

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Hindu Rashtra Flag on Ram Mandir Shikhar” — Ayodhya तैयार सबसे बड़े धर्म–समारोह के लिए

Ram Mandir

25 November को इतिहास बदलेगा — अयोध्या Ram Mandir में पहली बार फहरेगा “धर्मध्वज” अयोध्या 25 नवंबर 2025 को फिर एक ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने जा रही है—जब श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के 191 फुट ऊँचे शिखर पर “केसरिया धर्मध्वज” (हिंदू राष्ट्र ध्वज/धर्म ध्वज) पहली बार फहराया जाएगा।
इस शुभ अवसर(विवाह पंचमी)पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत स्वयं धर्मध्वज का लोकार्पण करेंगे।

ध्वज 22 फीट लंबा और 11 फीट चौड़ा होगा, जिसमें सूर्य प्रतीक, ॐ, एवं कोविदार वृक्ष अंकित हैं—जिनका उल्लेख वाल्मीकि रामायण से लेकर पुराणों तक मिलता है।ध्वज आधुनिक तकनीक वाले 360° wind-rotating pole पर लगाया जाएगा, जो तेज हवाओं में भी सुगमता से लहराता रहेगा।
देशभर के मंदिरों में इस आयोजन का Live Telecast होगा और सोशल मीडिया पर इसे “New Era of Dharma” कहा जा रहा है।

अयोध्या में भक्ति की बाढ़ —

21 से 25 नवंबर तक पाँच दिवसीय महोत्सव
धर्मध्वज आरोहण से पहले पूरा अयोध्या पाँच दिनों से दिव्य धार्मिक रंग में डूबा हुआ है—
अखंड वेद–पाठ और हवन,पुष्प-वर्षा,रामधुन, कीर्तन, शोभा यात्रा और श्रीराम जन्मभूमि के साथ छह प्रमुख मंदिरों — शिव, गणेश, सूर्य, हनुमान, माता भगवती और माता अन्नपूर्णा में विशेष अनुष्ठान।
सैकड़ों ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चार, सजावट, और पूरे नगर में दीप–मालाएं, अयोध्या को एक प्रकाश के शहर में बदल चुकी हैं।

Ram Mandir

धर्मध्वज — सनातनी एकता, आस्था और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक

मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के अनुसार,
“यह सिर्फ ध्वज नहीं—ये सनातन अस्मिता, सांस्कृतिक जागरण और हिंदू समाज की एकजुटता का प्रतीक है।”
10,000 से अधिक अतिथि, देशभर के संत–महंत, आध्यात्मिक हस्तियाँ, विभिन्न अखाड़ों के प्रमुख, और राष्ट्रीय नेता इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे।
अयोध्या का यह आयोजन धार्मिक महत्व के साथ-साथ भारत की civilizational identity और global cultural leadership का भी संकेत माना जा रहा है।

25 November बनेगा नया ‘धार्मिक Independence Day’ ?

भारत की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक गौरव के लिए यह समारोह एक नया आध्यात्मिक पल माना जा रहा है।
राम मंदिर के शिखर पर धर्मध्वज का फहरना— नये भारत के आध्यात्मिक जागृति का नया अध्याय खोलने जा रहा है।

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प्रगति मैदान में दिल्ली ट्रेड फेयर लगी जबरदस्त भीड़, हर राज्य की संस्कृति और नवाचार का प्रदर्शन

दिल्ली

राजधानी दिल्ली के प्रगति मैदान में इस समय ‘दिल्ली ट्रेड फेयर 2025’ पूरे शबाब पर है। 14 नवंबर से शुरू हुआ यह मेला रोजाना हजारों लोगों को अपनी ओर खींच रहा है। परिवारों, छात्रों, व्यापारियों और घरेलू खरीदारों—सबकी भारी भीड़ यहां देखने को मिल रही है। यह मेला 27 नवंबर तक जारी रहेगा।

इस बार मेले की थीम ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ रखी गई है, जो देश की एकता, संस्कृति और विविधता को एक मंच पर दिखाती है।

क्या है इस बार का खास आकर्षण?

  • मेले में इस बार कई राज्यों को पार्टनर और फोकस स्टेट के रूप में चुना गया है:
  • पार्टनर स्टेट – बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश
  • फोकस स्टेट – झारखंड

इन राज्यों के पवेलियन सबसे ज्यादा भीड़ आकर्षित कर रहे हैं। लोग यहां की पारंपरिक कलाएं, हस्तशिल्प, लोकनृत्य, हैंडलूम उत्पाद, बांस कला, मधुबनी पेंटिंग, राजस्थानी ज्वेलरी, और महाराष्ट्र की वारली आर्ट जैसी चीजें बड़ी उत्सुकता से देख रहे हैं। टेक्नोलॉजी और ‘विकसित भारत @2047’ का दमदार प्रदर्शन

दिल्ली

इस बार मेले में भारत के भविष्य को दिखाने वाला एक बड़ा सेक्शन बनाया गया है, जिसमें—

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
  • साइबर सिक्योरिटी
  • डीप टेक
  • स्टार्टअप इनोवेशन
  • डिजिटल इंडिया मिशन

जैसे क्षेत्रों में देश की उपलब्धियों और नए प्रयोगों को प्रदर्शित किया जा रहा है। छात्रों और युवा उद्यमियों के लिए यह सेक्शन काफी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

भीड़ क्यों इतनी ज्यादा है?

  • त्योहारी सीजन के बाद शॉपिंग का बढ़ता रुझान
  • राज्यों के पवेलियन का सुंदर सेटअप
  • खाने-पीने के स्टॉल, आर्टवर्क, होम डेकोर, हैंडीक्राफ्ट की बड़ी रेंज
  • बच्चों के लिए मनोरंजन

मेले में सप्ताहांत पर तो पैरों रखने की जगह तक नहीं मिल रही।

आम लोगों के लिए जरूरी जानकारी

मेला कब तक खुला है?

  • 19 नवंबर से 27 नवंबर तक आम जनता के लिए खुला.
  • समय: सुबह 10 बजे से शाम 7:30 बजे तक
  • प्रवेश बंद: शाम 5:30 बजे
  • टिकट कीमतें
  • Week के दिन (Mon–Fri):
  • वयस्क: ₹80
  • बच्चे: ₹40
  • सप्ताहांत (Sat–Sun) और छुट्टी:
  • वयस्क: ₹150
  • बच्चे: ₹60
  • दिल्ली

फ्री एंट्री:

  • वरिष्ठ नागरिक
  • दिव्यांगजन
  • टिकट कहां से खरीदें?
  • 55 मेट्रो स्टेशनों से
  • ‘सारथी’ ऐप
  • ITPO की आधिकारिक वेबसाइट से ऑनलाइन बुकिंग

प्रगति मैदान कैसे पहुंचें?

सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन: सुप्रीम कोर्ट (ब्लू लाइन).ट्रैफिक देखते हुए—मेट्रो से यात्रा करना सबसे बेहतर विकल्प माना जा रहा है।

क्यों खास है दिल्ली ट्रेड फेयर 2025?

यह मेला सिर्फ व्यापार या खरीदारी का मंच नहीं है, बल्कि—

  • भारत की कला
  • संस्कृति
  • परंपरा
  • नवाचार
  • राज्यों की विविधता
  • सरकारी अभियानों की झलक

सब कुछ एक ही जगह दिखाने वाला एक विशाल सांस्कृतिक उत्सव बन चुका है।परिवारों के लिए घूमने का शानदार मौका है, और व्यापारियों के लिए नए बिजनेस अवसर भी।

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भागलपुर में नवान्न (नेमान) पर्व की रौनक, चूड़ा–दही–गुड़ की खरीदारी से बाजार गुलजार | पूरी परंपरा जानिए

भागलपुर

Summary (bullets points)

•भागलपुर में आज नवान्न (नेमान) पर्व बड़ी श्रद्धा और खुशी के साथ मनाया गया, लोगों ने नए अन्न को पहले अग्नि देव को अर्पित किया।

•सूजागंज और तिलकामांझी बाजारों में सुबह से भीड़ रही, चूड़ा–दही–गुड़ की खूब खरीदारी हुई।

•घर-घर में नए चूड़ा से बना प्रसाद तैयार किया गया और परिवारों ने मिलकर त्योहार मनाया।

•यह पर्व नई फसल के स्वागत और प्रकृति के प्रति धन्यवाद का प्रतीक है, जिससे लोगों का अपनी परंपराओं से जुड़ाव दिखा।

भागलपुर, 23 नवंबर (रविवार):

भागलपुर में आज पारंपरिक नवान्न (नेमान) पर्व बड़ी आस्था और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व नई फसल के स्वागत और प्रकृति के प्रति धन्यवाद देने का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि आज के दिन “नया अन्न” सबसे पहले अग्नि देवता को अर्पित किया जाता है और उसके बाद ही परिवार के लोग इसे ग्रहण करते हैं।

भागलपुर

बाजारों में खूब रही भीड़

सुबह से ही शहर के प्रमुख बाजार—सूजागंज और तिलकामांझी—में खूब रौनक देखने को मिली। चूड़ा, दही, गुड़ और पूजा-सामग्री की जमकर खरीदारी होती रही। दुकानों के बाहर ग्राहकों की लंबी कतारें दिखीं और कई जगह चूड़ा व गुड़ के स्टॉक दोपहर तक लगभग खत्म होने की स्थिति में आ गए।

दुकानदारों ने बताया कि इस बार नवान्न की खरीदारी पिछले साल की तुलना में अधिक रही। कतरनी चूड़ा, जिसे इस दिन खास तौर पर खरीदा जाता है, की अच्छी बिक्री हुई।

क्या है नवान्न पर्व की परंपरा?

नवान्न का अर्थ है—नया अन्न।

धान की नई कटाई होने के बाद पहली बार इससे तैयार चूड़ा को पूजा में चढ़ाया जाता है। परिवार के लोग स्नान करने के बाद नए चूड़ा में दही, गुड़, दूध और केले मिलाकर प्रसाद तैयार करते हैं। इसके बाद उस प्रसाद को ‘स्वाहा’ मंत्र के साथ अग्नि में अर्पित किया जाता है।

मान्यता है कि अग्नि देव को अर्पित किया गया अन्न देवताओं तक पहुंचता है और घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

कृषि और परंपरा से जुड़ा पर्व

नवान्न केवल धार्मिक रीति नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत और प्रकृति के आशीर्वाद का उत्सव भी है। बिहार, झारखंड, बंगाल और ओडिशा सहित कई राज्यों में यह पर्व अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। यह लोगों को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने वाला पर्व है। भागलपुर में भी परिवारों ने सुबह से ही पूजा की तैयारियां कीं और नए अन्न की पहली भेंट अग्नि को समर्पित की। घर-घर में चूड़ा–दही–गुड़ का प्रसाद बनाया गया और बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने मिलकर त्योहार का आनंद लिया।

भागलपुर में आज पूरे दिन नवान्न पर्व का उल्लास साफ दिखा—चाहे बाजारों की भीड़ हो या घर-घर में पूजा की सुगंध। यह पर्व एक बार फिर लोगों को प्रकृति, फसल और अपनी सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने का काम करता दिखा।

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अंधेरी केमिकल रिसाव हादसा: दो घायलों की पहचान हुई, दोनों की हालत अब भी नाज़ुक

केमिकल

हादसे का संक्षिप्त सारांश :

  • मुंबई के अंधेरी MIDC में केमिकल रिसाव से बड़ा हादसा हुआ।
  • हादसे में एक युवक की मौत हो गई।
  • दो घायल — नौशाद अंसारी (28) और सबा शेख (17) — की पहचान हुई।
  • दोनों को होली स्पिरिट अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
  • दोनों की हालत बेहद गंभीर है और ICU में इलाज जारी है।
  • दम घुटने और जहरीली गैस फेफड़ों में जाने से उनकी स्थिति नाज़ुक बनी हुई है।
  • प्रारंभिक जांच में सोडियम सल्फाइड जैसे रसायन के रिसाव की आशंका जताई गई है।
  • NDRF, पुलिस और फायर ब्रिगेड ने यूनिट को सील कर दिया है।
  • सुरक्षा मानकों की लापरवाही की जांच की जा रही है।

मुंबई के अंधेरी MIDC इलाके में हुए केमिकल रिसाव हादसे में घायल दो लोगों की पहचान हो गई है। घटना में एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है, जबकि दो अन्य—नौशाद अंसारी (28) और सबा शेख (17)—गंभीर रूप से घायल हैं। दोनों को तुरंत मुंबई के होली स्पिरिट अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उन्हें ICU में रखा गया है।

घायलों की पहचान और हालत

  • •नौशाद अंसारी (28 वर्ष)
  • •सबा शेख (17 वर्ष)

दोनों को जहरीली गैस के तेज़ संपर्क में आने के बाद तुरंत अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, दोनों की हालत बेहद गंभीर है। दम घुटने और जहरीले धुएं के फेफड़ों पर पड़े असर की वजह से उन्हें लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है।अस्पताल प्रशासन ने बताया कि मरीजों को लगातार मॉनिटर किया जा रहा है और उनकी स्थिति अभी स्थिर नहीं कही जा सकती। दोनों पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम चौबीसों घंटे इलाज कर रही है।

केमिकल

हादसा कैसे हुआ?

अंधेरी MIDC के ग्राउंड+1 इंडस्ट्रियल यूनिट में संदिग्ध केमिकल—प्रारंभिक अनुमान के अनुसार सोडियम सल्फाइड—के रिसाव से जहरीली गैस फैल गई। अंदर काम कर रहे लोग धुएं से बेहोश होकर गिर पड़े।NDRF की टीम को मौके पर भेजा गया ताकि आसपास के इलाके को सुरक्षित किया जा सके और रिसाव पर काबू पाया जा सके।

एक मौत, दो गंभीर घायल

हादसे में 20 वर्षीय युवक की मौत हो गई, जबकि दोनों भाई-बहन नौशाद और सबा की हालत अब भी खतरे से बाहर नहीं है। परिवार के सदस्यों और स्थानीय प्रशासन का कहना है कि यह घटना सुरक्षा मानकों की घोर लापरवाही का परिणाम हो सकती है।

केमिकल

इलाके में दहशत, जांच जारी-

घटना के बाद MIDC क्षेत्र में दहशत का माहौल है। पुलिस और फायर ब्रिगेड ने यूनिट को सील कर दिया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है। यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि सुरक्षा उपकरण उपलब्ध थे या नहीं, और रिसाव कैसे हुआ।

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बेगूसराय में STF और कुख्यात बदमाश की  मुठभेड़ | कार्रवाई में भारी मात्रा में हथियार बरामद

बेगूसराय

Summary (सारांश)

  • बेगूसराय में STF और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक कुख्यात बदमाश घायल होकर गिरफ्तार।
  • मुठभेड़ के दौरान अपराधियों ने पुलिस पर 6–7 राउंड फायरिंग की।
  • मुख्य आरोपी शिवदत्त राय 2022 के एक चर्चित हत्याकांड में फरार था।
  • 9 पिस्टल, कारबाइन, नकदी और अवैध सामान बरामद।
  • पुलिस बाकी फरार अपराधियों की तलाश में जुटी है।

बेगूसराय: बिहार के बेगूसराय जिले में STF और जिला पुलिस ने एक संयुक्त ऑपरेशन में बड़ी सफलता हासिल की है। देर रात हुई मुठभेड़ में एक कुख्यात बदमाश गोली लगने से घायल हो गया, जबकि उसके बाकी साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में हथियार, नकदी और अवैध सामान बरामद किया है।

बेगूसराय

कैसे हुई मुठभेड़?

पुलिस और STF को गुप्त सूचना मिली थी कि लंबे समय से फरार चल रहा कुख्यात अपराधी शिवदत्त राय साहेबपुर कमाल क्षेत्र में आने वाला है। सूचना के आधार पर टीम ने इलाके में घेराबंदी कर दी। जैसे ही पुलिस ने अपराधियों की दो मोटरसाइकिलों को रोकने की कोशिश की, बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं। मुठभेड़ के दौरान शिवदत्त राय की जांघ में गोली लगी और वह मौके पर ही घायल होकर गिर पड़ा। बाकी अपराधी गोलीबारी की आड़ में भागने में सफल रहे।

कौन है शिवदत्त राय?

  • शिवदत्त राय बेगूसराय और आसपास के इलाकों में कुख्यात अपराधी के रूप में जाना जाता है।
  • वह धनकौल पंचायत की सरपंच मीना देवी के बेटे अवनीश कुमार की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी है।
  • यह घटना 2022 में हुई थी और तब से वह फरार चल रहा था।
  • पुलिस इस मामले में लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थी।

भारी मात्रा में हथियार और नकदी बरामद

घायल अपराधी को पुलिस की निगरानी में बेगूसराय सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

बेगूसराय

उसकी निशानदेही पर STF और पुलिस ने एक ठिकाने पर छापेमारी की, जहां से निम्नलिखित सामान बरामद हुआ:

  • 9 पिस्टल
  • एक कारबाइन
  • भारी मात्रा में जिंदा कारतूस
  • नकदी
  • अवैध कफ सिरप की कई बोतलें
  • मिनी गन फैक्ट्री जैसी व्यवस्था

पुलिस का कहना है कि यह गिरोह हथियारों की तस्करी और आपराधिक वारदातों में सक्रिय था।

आगे की कार्रवाई

पुलिस अब फरार अपराधियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।जिले में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है ताकि अपराधी दूसरे जिलों में न भाग सकें।

माना जा रहा है कि इस गिरोह के कई सदस्य पड़ोसी जिलों में भी सक्रिय हैं।

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कौन बन रहे हैं भारत के अगले चीफ जस्टिस : CJI 53rd Oath Ceremony 2025 शपथग्रहण की तैयारियाँ

चीफ जस्टिस

Justice Surya Kant 24 नवंबर 2025 को राष्ट्रपति भवन में भारत के 53वें चीफ जस्टिस (CJI) के रूप में शपथ लेंगे। समारोह में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश, बार एसोसिएशन के प्रतिनिधि, परिवार और कानून जगत की कई हस्तियाँ शामिल होंगी — और पूरा देश इस ऐतिहासिक दिन पर न्यायपालिका की नई दिशा देखने के लिये तैयार रहेगा। राष्ट्रपति द्वारा शपथ दिलाने के बाद वे सुप्रीम कोर्ट की अगुवाई संभालेंगे और तत्काल ही कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ ग्रहण करेंगे।

प्राथमिकता: लंबित मामलों और जस्टिस एक्सेस

नए CJI के तौर पर Surya Kant न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने, लंबित मामलों की संख्या घटाने और वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR/mediation) को बढ़ावा देने पर ज़ोर देंगे। टेक्नोलॉजी-आधारित फाइलिंग, ट्रांसपेरेंसी और लोकहित के मामलों में शीघ्र सुनवाई उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगी — और वे उच्च न्यायालयों व निचली अदालतों के समन्वय को मजबूत कर केस निपटान की गति बढ़ाने का अभियान शुरू करेंगे।

चीफ जस्टिस

नई पहल और उम्मीदें

उन्हें उम्मीद है कि कोर्ट-प्रोसीजर में नवाचार से न सिर्फ फैसला देने की पात्रता बदलेगी बल्कि आम लोगों तक न्याय पहुँचने की दर भी सुधरेगी। कई कानूनी विद्वान, वकील और नागरिक संगठन नए CJI से न्यायिक सुधार, कोर्ट-प्रबंधन और संवैधानिक मामलों पर सक्रिय मार्गदर्शन की अपेक्षा रख रहे हैं।

सवाल जो बने रहेंगे

अब देखना यह होगा कि Surya Kant के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट किन संवैधानिक और सामाजिक मुद्दों पर तेज़ी से कदम उठाएगा — क्या लंबित मामलों का बोझ कम होगा? क्या तकनीक और पारदर्शिता से न्याय और सुलभ बनेगा? 24 नवंबर के बाद ये जवाब़ अलग ही पैमाने पर मिलेंगे।

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Language War Turns Deadly: मुंबई लोकल में हिंदी बोलने पर हमला—कल्याण के अर्नव ने दी जान 

Language War

कौन था अर्नव खैरे? क्या हुआ उस सुबह?

कल्याण (ठाणे) का 19 वर्षीय अर्नव जितेन्द्र खैरे—मुलुंड के प्रसिद्ध केलकर कॉलेज का B.Sc प्रथम वर्ष छात्र। 18 नवंबर 2025 की सुबह वह रोज़ की तरह अम्बरनाथ–कल्याण फास्ट लोकल से कॉलेज जा रहा था। ट्रेन में कड़ी भीड़ के बीच उसने एक यात्री से बिल्कुल सामान्य तरीके से कहा— “थोड़ा आगे बढ़िए।” बस इतना ही। यह हिंदी वाक्य उस दिन उसकी ज़िंदगी बदल देगा—किसी ने सोचा भी नहीं था

हिंदी बोलने पर भीड़ का हमला—अर्नव का डर, गुस्सा और असहायता हिंदी सुनते ही पास के 4–5 युवकों ने भाषा को लेकर झगड़ा शुरू कर दिया।

उनके चिल्लाने वाले शब्द—

“मराठी क्यों नहीं बोलता?”, “अरे अपनी भाषा छोड़ हिंदी क्यों बोलता है?”इसके बाद गंदी गालियाँ, धक्के, थप्पड़, बाल पकड़कर गिराने की कोशिश— अर्नव बेचारा थाने स्टेशन पर डरकर उतर गया, मुलुंड पहुंचा, लेकिन सदमे में होने की वजह से प्रैक्टिकल एग्जाम भी नहीं दे सका।

Language War

घर पर पिता से आखिरी बातचीत—

“पापा, बहुत बुरा हुआ… मैं ठीक नहीं हूं।”

शाम को पिता घर लौटे—और अर्नव फंदे पर लटका मिला।

19 साल का एक लड़का… एक भाषा को लेकर खत्म हो गया।

जांच, CCTV, देश भर में गुस्सा—

मुंबई पुलिस ने मामले को अप्राकृतिक मृत्यु के रूप में दर्ज किया है लेकिन CCTV, यात्रियों और कॉलेज के बयानों की जांच तेज़ हो चुकी है। सोशल मीडिया पर #JusticeForArnav पूरे देश में ट्रेंड।

लोग सवाल पूछ रहे हैं—

क्या भाषा के नाम पर हिंसा स्वीकार्य है?क्या युवाओं की मानसिक स्वास्थ्य स्थितियाँ हमें अनदेखी नहीं करनी चाहिए?मुंबई लोकल जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों पर सुरक्षा का क्या? अर्नव का परिवार—फूट-फूटकर रोता हुआ—एक ही बात कह रहा है:

“हमारे बेटे को हिंदी बोलने की सज़ा क्यों मिली?

Language War पर सख़्त टिप्पणी: भारत में यह जहर कहाँ-कहाँ फैल रहा है?

भारत की विविधता हमारी ताकत है—लेकिन हाल के वर्षों में Language Intolerance कई राज्यों में तेज़ी से बढ़ा है, खासकर: महाराष्ट्र में हिंदी बनाम मराठी विवाद,कर्नाटक में कन्नड़ बनाम हिंदी बहस,तमिलनाडु में Anti-Hindi भावना पूर्वोत्तर में स्थानीय भाषाओं की रक्षा बनाम बाहरी भाषाएँ

यह बहस लोकतांत्रिक अधिकार की नहीं— बल्कि असहिष्णुता, असुरक्षा और राजनीति से उत्पन्न जहर का परिणाम है। भारत में कोई भी भाषा दूसरे से बड़ी नहीं— और न ही किसी भारतीय नागरिक को अपनी पसंद की भाषा बोलने से रोका जा सकता है। अर्नव की मौत इस खतरनाक ट्रेंड की चेतावनी है—भाषा नहीं, नफ़रत मार रही है।

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पाकिस्तान में बड़ा औद्योगिक हादसा: फैसलाबाद की गोंद फैक्ट्री में धमाका, 15 मजदूरों की मौत,वजह हैरान कर देने वाली निकली

पाकिस्तान

Summary (Bullet Points)

  • पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के फैसलाबाद में गोंद बनाने वाली फैक्ट्री में जोरदार धमाका।
  • हादसे में कम से कम 15 मजदूरों की मौत, कई घायल।
  • पहले बॉयलर ब्लास्ट बताया गया, बाद में पता चला कि विस्फोट गैस रिसाव से हुआ।
  • धमाके से फैक्ट्री की इमारत ढही, आसपास के कई घरों को भी नुकसान।
  • 20+ एंबुलेंस और दमकल की गाड़ियाँ मौके पर; घंटों चला बचाव अभियान।
  • फैक्ट्री मालिक फरार, मैनेजर गिरफ्तार।
  • पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज़ ने जांच के आदेश दिए और घायलों के इलाज के निर्देश।
  • पाकिस्तान में औद्योगिक सुरक्षा मानकों की कमी फिर उजागर हुई।

फैसलाबाद (पंजाब, पाकिस्तान): पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में शुक्रवार तड़के एक गोंद बनाने वाली फैक्ट्री में हुए भीषण धमाके ने पूरे इलाके को दहला दिया। हादसे में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई और कई मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। धमाका इतना शक्तिशाली था कि फैक्ट्री की इमारत मलबे में तब्दील हो गई और आसपास के घरों में भी दरारें पड़ गईं।

पाकिस्तान

कैसे हुआ हादसा?

यह दर्दनाक घटना फैसलाबाद के मलिकपुर इलाके में सुबह करीब 5:30 बजे घटी, जब फैक्ट्री के मजदूर अपनी ड्यूटी पर मौजूद थे। पहले माना गया कि धमाका बॉयलर फटने से हुआ, लेकिन बाद में जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि फैक्ट्री में कोई बॉयलर था ही नहीं।

जांच में सामने आया कि धमाका गैस रिसाव (Gas Leakage) की वजह से हुआ, जिसके कारण आग भड़क उठी और देखते ही देखते फैक्ट्री ध्वस्त हो गई। तेज आग ने पास की दूसरी फैक्ट्रियों को भी अपनी चपेट में ले लिया, जिससे नुकसान और बढ़ गया।

  • बचाव कार्य: मलबे में कई मजदूर फंसे
  • धमाके के बाद घटनास्थल पर 20 से अधिक एंबुलेंस और दमकल की गाड़ियां पहुंचीं।
  • बचाव दल ने कई घंटों तक मलबा हटाकर मजदूरों को बाहर निकाला।

घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कुछ की हालत अभी भी नाजुक बताई जा रही है।बचाव कार्य पूरा होने के बाद इलाके को सील कर दिया गया है और मलबा हटाने का काम जारी है।

पाकिस्तान

फैक्ट्री मालिक फरार, मैनेजर गिरफ्तार

घटना के तुरंत बाद फैक्ट्री का मालिक मौके से फरार हो गया, जबकि पुलिस ने फैक्ट्री मैनेजर को हिरासत में ले लिया है।पुलिस के अनुसार, फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की भारी कमी थी और गैस सिस्टम की देखरेख ठीक तरीके से नहीं की गई थी।

सरकार की प्रतिक्रिया

पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज़ शरीफ़ ने हादसे पर गहरा दुख जताया और घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा देने के निर्देश दिए। साथ ही, घटना पर उच्च-स्तरीय जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं। पाकिस्तान में औद्योगिक सुरक्षा मानकों की कमी पहले भी कई बड़े हादसों की वजह बन चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय पर निरीक्षण और सुरक्षा उपकरण लगाए जाते, तो इस दुर्घटना को रोका जा सकता था।

पाकिस्तान में बढ़ते औद्योगिक हादसे

इस साल फैसलाबाद और लाहौर जैसे इंडस्ट्रियल शहरों में कई बार फैक्ट्रियों में आग और धमाकों की घटनाएँ सामने आई हैं। कामगारों का कहना है कि मालिक श्रमिकों की सुरक्षा पर ध्यान नहीं देते और पुरानी मशीनें ही चलती रहती हैं।

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दुबई एयरशो में प्रदर्शन के दौरान भारतीय तेजस फाइटर जेट क्रैश, पूरी खबर जानें

दुबई एयरशो

दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित एयरशोज में से एक, दुबई एयरशो में आज एक दिल दहला देने वाला हादसा हो गया। भारत में निर्मित हल्का लड़ाकू विमान (LCA) तेजस एक प्रदर्शन उड़ान के दौरान क्रैश हो गया। यह घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 2:10 बजे हुई, जब विमान दर्शकों के सामने अपनी कलाबाजियां दिखा रहा था।

क्या हुआ दुबई में?

जानकारी के मुताबिक, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित तेजस विमान दुबई एयरशो में अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन कर रहा था। यह भारत के स्वदेशी रक्षा कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण मंच था। उड़ान के दौरान, विमान अचानक नियंत्रण से बाहर हो गया और जमीन पर आ गिरा। हादसे के तुरंत बाद घटनास्थल पर धुएं का गुबार उठता देखा गया।

दुबई एयरशो

पायलट की स्थिति पर सस्पेंसइस

हादसे में सबसे बड़ी चिंता विमान के पायलट को लेकर है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि पायलट विमान के गिरने से पहले खुद को सुरक्षित बाहर निकालने (eject) में कामयाब हो पाया या नहीं। बचाव और राहत दल तुरंत मौके पर पहुंच गए हैं और इलाके को घेर लिया गया है। अधिकारियों ने अभी तक पायलट की स्थिति पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

दुबई एयरशो

भारत के लिए क्यों अहम है तेजस?

तेजस लड़ाकू विमान भारत के आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग का एक बड़ा प्रतीक है। यह एक हल्का, मल्टी-रोल, सुपरसोनिक लड़ाकू विमान है जिसे भारतीय वायु सेना और नौसेना के लिए विकसित किया गया है। दुबई एयरशो जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसका प्रदर्शन भारत की रक्षा निर्यात क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा था। इस हादसे को भारत के रक्षा कार्यक्रम के लिए एक झटके के तौर पर देखा जा रहा है।

दुबई एयरशो

आगे क्या होगा?

हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए एक उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए जाने की उम्मीद है। अधिकारी मलबे की जांच करेंगे और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (ब्लैक बॉक्स) को खोजने की कोशिश करेंगे ताकि यह पता चल सके कि दुर्घटना तकनीकी खराबी, मानवीय भूल या किसी अन्य कारण से हुई। इस घटना पर HAL और भारतीय रक्षा मंत्रालय की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

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कोलकाता हिल गया : बांग्लादेश में आए 5.7 तीव्रता के भूकंप से पूरे शहर में मची हलचल, जानिए कितने की हुई छत्ती

भूकंप

बुलेट पॉइंट में सारांश

•कोलकाता और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में सुबह 10:10 बजे भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए।

•भूकंप का केंद्र बांग्लादेश के नर्सिंगदी जिले के पास था।

•इसकी तीव्रता 5.7 मैग्नीट्यूड और गहराई सिर्फ 10 किमी दर्ज की गई।

•तेज झटकों से लोग घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए, कई इलाकों में हल्की दहशत देखी गई।

•अब तक किसी बड़े नुकसान या हताहत की खबर नहीं है।

•प्रशासन और NCS स्थिति पर लगातार नज़र रख रहे हैं।

आज सुबह करीब 10:10 बजे, कोलकाता और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में अचानक ज़मीन हिलती हुई महसूस हुई, जिससे लोग घबरा कर घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। ये झटके वास्तव में बांग्लादेश में आए 5.7 मैग्नीट्यूड के भूकंप के कारण थे, जिसका केंद्र नर्सिंगदी ज़िले के पास, बेहद कम यानी सिर्फ 10 किलोमीटर गहराई पर था। भूकंप की गहराई जितनी कम होती है, झटके उतने ही तेज महसूस होते हैं — यही वजह रही कि कोलकाता, सॉल्ट लेक, न्यू टाउन, राजरहाट जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में लोग स्पष्ट कंपन महसूस कर सके।

भूकंप

झटके कुछ ही सेकंड के थे, लेकिन इतने मजबूत कि लोगों को लगा कि उनकी बिल्डिंग हल्के-हल्के हिल रही है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने लिखा कि पंखे और दरवाजे भी हिलते हुए दिखाई दिए। शहर के कई हिस्सों में लोग एहतियातन सड़क पर उतर आए, हालांकि बाद में अधिकारियों ने बताया कि अभी तक कहीं से भी किसी बड़े नुकसान, इमारत गिरने या किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली है। कोलकाता पुलिस और नगर प्रशासन ने नागरिकों से शांत रहने की अपील की है और स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि कोलकाता सिस्मिक ज़ोन-III में आता है, यानी यहां मध्यम स्तर का भूकंपीय जोखिम रहता है। पिछले कुछ महीनों में बंगाल की खाड़ी और बांग्लादेश क्षेत्र में कई बार हल्की से मध्यम तीव्रता की गतिविधियाँ दर्ज की गई हैं, जिससे विशेषज्ञ मानते हैं कि इस क्षेत्र में टेक्टोनिक दबाव सक्रिय बना हुआ है। अच्छी बात यह है कि आज का भूकंप अपेक्षाकृत सतही था और उसकी ऊर्जा बहुत दूर तक नुकसान पहुँचाने वाली साबित नहीं हुई।

भूकंप

हालाँकि स्थिति अब सामान्य है, फिर भी अधिकारियों ने सलाह दी है कि नागरिक किसी भी तरह की पुरानी, कमजोर या दरार वाली इमारतों में रहने से पहले उनकी स्थिति की जाँच करवा लें। साथ ही, छोटे-मोटे भूकंपीय झटकों के बाद कभी-कभी हल्के आफ्टरशॉक भी आ सकते हैं, इसलिए सावधानी रखना बेहतर होता है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी लगातार निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर अपडेट जारी किए जाएँगे।

आज के झटकों ने एक बार फिर सभी को याद दिलाया है कि भूकंप जैसे प्राकृतिक हादसे बिना चेतावनी के आते हैं, और एक छोटे से सुरक्षा किट, सही जानकारी और थोड़ी-सी तैयारी बहुत बड़ा फर्क ला सकती है। फिलहाल राहत की बात यह है कि कोलकाता में जीवन सामान्य हो गया है, और शुरुआती आकलन के अनुसार किसी तरह का बड़ा नुकसान नहीं हुआ है।

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वियतनाम में भीषण बाढ़ :41 लोगों की मौत, 50,000 घर पानी में डूबे, क्यों नहीं हो रहा है नियंत्रण? कारण जानकर आप चौंक जाएंगे

वियतनाम

संक्षेप में

•वियतनाम में भीषण बाढ़ से 41 लोगों की मौत हो चुकी है।

•50,000 से ज़्यादा घर पूरी तरह पानी में डूब गए हैं।

•सबसे ज्यादा नुकसान मध्य वियतनाम में हुआ है।

•कई गाँवों का संपर्क टूट गया है, सड़कें और पुल बह गए हैं।

•हज़ारों हेक्टेयर फसलें बर्बाद, किसानों को भारी नुकसान।

•सेना और बचाव टीमें लगातार राहत कार्य कर रही हैं।

•फँसे लोगों तक नावों से भोजन, पानी और दवाइयाँ पहुँचाई जा रही हैं।

•मौसम विभाग ने आगे और बारिश की चेतावनी दी है।

हनोई: वियतनाम के कई हिस्सों में आई बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। लगातार हो रही तेज बारिश के कारण अब तक 41 लोगों की मौत हो चुकी है और 50,000 से अधिक घर पूरी तरह पानी में डूब गए हैं। बाढ़ की वजह से लाखों लोगों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

वियतनाम

सबसे ज़्यादा असर मध्य वियतनाम के इलाकों में देखा जा रहा है। यहाँ नदियाँ उफान पर हैं और पानी रिहायशी क्षेत्रों में घुस चुका है। कई परिवारों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। कई गाँवों का संपर्क मुख्य शहरों से टूट गया है क्योंकि सड़कें, पुल और कई जरूरी रास्ते पानी में बह गए हैं।

बाढ़ ने सिर्फ घर ही नहीं, बल्कि खेतों को भी भारी नुकसान पहुँचाया है। हज़ारों हेक्टेयर में खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं, जिससे किसानों के सामने बड़ी आर्थिक समस्या खड़ी हो गई है।

सरकार ने राहत और बचाव कार्यों को तेज कर दिया है। सेना, पुलिस और बचाव टीमें नावों के ज़रिये लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जा रही हैं। साथ ही, फँसे हुए लोगों तक भोजन, पानी और दवाइयाँ पहुँचाने का काम जारी है।

वियतनाम

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में बारिश और बढ़ सकती है, जिससे स्थिति और खराब होने का खतरा है। सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है और लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है।

यह बाढ़ वियतनाम के लिए एक बड़ी मानवीय और आर्थिक चुनौती बन चुकी है, और प्रशासन हालात को नियंत्रण में लाने की पूरी कोशिश कर रहा है।

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मिस यूनिवर्स 2025 : India नहीं पहुंच पाया टॉप 3 में, Mexico ने मारी बाज़ी

मिस यूनिवर्स 2025

Bullet Points Summary

•मेक्सिको की फातिमा बॉश को Miss Universe 2025 का ताज मिला।

•थाईलैंड पहली रनर-अप और वेनेजुएला दूसरी रनर-अप रहीं।

•पिछले साल की विजेता चेल्सी मनालो (फिलीपींस) ने फातिमा को ताज पहनाया।

•फाइनल राउंड में तीनों प्रतियोगियों के बीच कड़ा मुकाबला हुआ।

•थाईलैंड ने अपने जवाबों से प्रभावित किया, वेनेजुएला ने grace और confidence दिखाया।

मिस यूनिवर्स 2025 का भव्य फाइनल शानदार अंदाज़ में संपन्न हुआ, जहाँ मेक्सिको की फातिमा बॉश को इस साल का ताज पहनाया गया। दुनियाभर के दर्शक इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की हर झलक पर नजरें गड़ाए हुए थे। फातिमा की जीत के साथ ही मेक्सिको ने एक बार फिर सौंदर्य की दुनिया में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है।थाईलैंड की प्रतियोगी पहली रनर-अप बनीं, जबकि वेनेजुएला की प्रतिभागी दूसरी रनर-अप रहीं।

मिस यूनिवर्स 2025

भावुक पलों के बीच ताज पहनाया गया

विजेता के नाम की घोषणा होते ही फातिमा बॉश की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। पिछले वर्ष की विजेता फिलीपींस की चेल्सी मनालो ने उन्हें मिस यूनिवर्स का ताज पहनाकर नई यात्रा के लिए शुभकामनाएँ दीं। यह क्षण न सिर्फ फातिमा के लिए, बल्कि पूरे मेक्सिको के लिए ऐतिहासिक रहा।

टॉप 3 में कड़ा मुकाबला

फाइनलिस्ट्स के बीच जबरदस्त टक्कर देखने को मिली।

थाईलैंड की प्रतियोगी ने शानदार जवाबों और आत्मविश्वास से जजों को प्रभावित किया।

वहीं वेनेजुएला की प्रतिभागी ने मंच पर अपनी elegance, poise और दमदार उपस्थिति से दर्शकों का दिल जीता।

तीनों फाइनलिस्ट्स ने साबित कर दिया कि वे सिर्फ सुंदरता ही नहीं, बल्कि बुद्धिमत्ता और व्यक्तित्व की मिसाल भी हैं।

मिस यूनिवर्स 2025

भारत की मनिका विश्वकर्मा ने जीता सभी का दिल

भारत की ओर से प्रतिनिधित्व कर रहीं मनिका विश्वकर्मा हालांकि टॉप 3 में नहीं पहुंच सकीं, लेकिन उनके प्रदर्शन को बेहद सराहा गया। उन्होंने अपने आत्मविश्वास, सौम्यता और भारतीय संस्कृति के खूबसूरत प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय मंच पर लोगों का दिल जीत लिया। दर्शक और जज दोनों ने उनके प्रयास की सराहना की।

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भोपाल में पुलिस का एक्शन, 5 आरोपी  का सड़क पर निकाला जुलूस

भोपाल

भोपाल में पुलिस का एक्शन, 5 आरोपी का सड़क पर निकाला जुलूस

बुलेट पॉइंट में SUMMARY

  • •भोपाल में कैफे में घुसकर कुछ युवकों ने तोड़फोड़ की।
  • •पुलिस ने तेजी दिखाते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
  • •गिरफ्तार आरोपियों का पुलिस ने इलाके में जुलूस निकाला।
  • •कार्रवाई का उद्देश्य अपराधियों में कानून का डर पैदा करना था।
  • •आरोपियों से पूछताछ जारी है, और आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

भोपाल (मध्य प्रदेश): राजधानी भोपाल में गुंडागर्दी करने वालों पर पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है। एक कैफे में तोड़फोड़ और धमकाने के मामले में गिरफ्तार किए गए 5 आरोपियों का पुलिस ने खुले में जुलूस निकाला, जिससे इलाके में कानून का संदेश दिया जा सके।

भोपाल

क्या हुआ था मामला?

हाल ही में भोपाल के एक कैफे में अचानक कुछ युवकों ने घुसकर जमकर तोड़फोड़ की थी। कैफे में मौजूद लोग डर गए और धमकाने की वजह से वहां अफरा-तफरी मच गई। जैसे ही मामला पुलिस तक पहुंचा, टीम ने एक्टिव होकर CCTV फुटेज और इनपुट के आधार पर आरोपियों को पकड़ लिया।

पुलिस ने क्यों निकाला जुलूस?

पुलिस का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से आम लोगों में डर और अपराधियों में हिम्मत बढ़ती है, इसलिए कड़ा संदेश देने के लिए आरोपियों को गिरफ्तार कर इलाके में जुलूस निकालकर लोगों को दिखाया गया कि पुलिस ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाती है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान और आगे की कार्रवाई

पांचों आरोपी अब पुलिस की हिरासत में हैं, और पूछताछ जारी है। पुलिस का कहना है कि यदि किसी और व्यक्ति की संलिप्तता पाई गई, तो उसके खिलाफ भी का र्रवाई की जाएगी।

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लुधियाना में मुठभेड़ ISI समर्थित मॉड्यूल के 2 आतंकी घायल | पूरी खबर जानिए

लुधियाना

लुधियाना में मुठभेड़ ISI समर्थित मॉड्यूल के 2 आतंकी घायल | पूरी खबर जानिए

लुधियाना

Summary (Bullet Points में)

  • लुधियाना में पुलिस और आतंकियों के बीच देर रात मुठभेड़ हुई।
  • ISI समर्थित मॉड्यूल से जुड़े 2 आतंकी घायल अवस्था में गिरफ्तार।
  • दोनों के लॉरेंस बिश्नोई गैंग से कनेक्शन की पुष्टि।
  • आतंकियों ने पुलिस पर फायरिंग की, जवाबी कार्रवाई में घायल हुए।
  • पुलिस ने हथियार और कई अहम दस्तावेज भी बरामद किए।
  • जांच में सामने आएगा कि वे क्या बड़ी साजिश रच रहे थे।

लुधियाना: पंजाब के लुधियाना में मंगलवार देर रात एक बड़ी पुलिस कार्रवाई के दौरान दो आतंकियों को मुठभेड़ में घायल अवस्था में गिरफ्तार किया गया। शुरुआती जांच में पता चला है कि दोनों आतंकी ISI समर्थित आतंकी मॉड्यूल से जुड़े हैं और साथ ही उनके तार कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गैंग से भी जुड़े हुए हैं।

कैसे हुई मुठभेड़?

लुधियाना

पुलिस को खुफिया इनपुट मिला था कि दो संदिग्ध युवक किसी बड़ी वारदात की तैयारी में हैं। जानकारी के आधार पर एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) ने इलाके में छापेमारी की। टीम को देखते ही दोनों संदिग्धों ने भागने की कोशिश की और पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी।

जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोलीबारी में दोनों आतंकी घायल हुए, जिसके बाद उन्हें काबू कर लिया गया। मौके से हथियार, मोबाइल फोन और कुछ संवेदनशील दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं।

ISI और लॉरेंस बिश्नोई गैंग का गठजोड़

जांच में अब तक पता चला है कि पकड़े गए दोनों आतंकी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के निर्देश पर काम कर रहे थे। इसके साथ ही वे आतंक और गैंगस्टर नेटवर्क को जोड़ने का काम कर रहे थे। लॉरेंस बिश्नोई गैंग के साथ इनका लिंक यह साफ करता है कि गैंगस्टर नेटवर्क अब आतंकी मॉड्यूल के साथ मिलकर पंजाब में हिंसा फैलाने की कोशिश में है।

लुधियाना

आगे क्या करेगी पुलिस?

घायल आतंकियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनके ठीक होते ही पुलिस उनसे पूछताछ कर यह जानने की कोशिश करेगी कि—

  • वे पंजाब में किस बड़ी वारदात को अंजाम देने वाले थे
  • ISI उन्हें क्या निर्देश दे रही थी.
  • बिश्नोई गैंग किस तरह उन्हें सपोर्ट कर रहा था.
  • और इस मॉड्यूल में और कितने लोग शामिल हैं.
  • पुलिस ने पूरे मॉड्यूल की पहचान करने के लिए बड़ी जांच शुरू कर दी है।

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Nashik Kumbh 2026 :-क्या बच पाएंगे 1700 पेड़ ? परंपरा बनाम प्रकृति

Nashik Kumbh

Nashik Kumbh 2026 :-क्या बच पाएंगे 1700 पेड़ ? परंपरा बनाम प्रकृति

  • नासिक में कट रहे 1700 पेड़
  • प्रशासन का कहना है कि पुराने पेड़ नहीं कटेंगे
  • कोई है ऐसा उपाय जिस से परंपरा और प्रकृति दोनों

बच सकती है

कुंभ की तैयारियों के बीच पेड़ों की कटाई पर व्यापक बहस छिड़ी

नासिक के तपोवन क्षेत्र में होने वाले सिंहस्थ कुंभ 2026–28 से पहले प्रशासन ने साधुग्राम विस्तार के लिए लगभग 1,700 पेड़ों की कटाई का प्रस्ताव दिया है। मौजूदा साधुग्राम को 350 एकड़ से बढ़ाकर 1,200 एकड़ किया जाना है, ताकि लाखों साधुओं के लिए अस्थायी शहर बसाया जा सके।

लेकिन इसी फैसले ने शहर में पर्यावरण बनाम परंपरा की सबसे बड़ी बहस छेड़ दी है।

सैकड़ों नागरिकों ने विरोध प्रदर्शन किया, कई संगठनों ने चिपको आंदोलन जैसा प्रतिरोध शुरू किया और नगरपालिका को 200+ लिखित आपत्तियाँ भेजी गईं।

प्रशासन का दावा: “बड़े पेड़ नहीं काटेंगे, छोटे पेड़ रिप्लेस होने हैं”

सिविक बॉडी का तर्क है कि—

सिर्फ 10 साल से कम उम्र के पेड़ काटे जाएंगे।हर कटे पेड़ के बदले मल्टी-लेयर प्लांटेशन किया जाएगा।बड़े और पुराने वृक्षों को ट्रांसप्लांट या संरक्षित किया जाएगा।

लेकिन पर्यावरणविदों का कहना है कि “पेड़ की उम्र नहीं, उसकी इकोलॉजिकल वैल्यू मायने रखती है।”

साथ ही वे पूछ रहे हैं कि जब मॉड्यूलर टेंट सिटी, इनोवेटिव लेआउट, और वैकल्पिक लोकेशन मौजूद हैं, तो फिर पेड़ों की ऐसी बलि क्यों?

The Big Question: Is There a Middle Path?

नासिक में अब एक ही सवाल गूंज रहा है—

क्या आस्था और पर्यावरण दोनों को बचाने का संतुलित समाधान मुमकिन है?

संभावित विकल्प:

  • पेड़ों के बीच eco-friendly टेंट सिटी।
  • साधुग्राम के लिए वैकल्पिक, खुला क्षेत्र चुनना।
  • समुदाय + प्रशासन + पर्यावरणविद मिलकर संयुक्त मास्टर प्लान बना सकते हैं।

कुंभ की परंपरा विशाल है, लेकिन प्रकृति की छाया भी उतनी ही जीवनदायिनी।

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वृंदावन साध्वी हत्याकांड: 11 महीने बाद संपत्ति के लिए रची गई खौफनाक साजिश का पर्दाफाश

वृंदावन

वृंदावन में 11 महीने पहले रहस्यमय तरीके से लापता हुईं साध्वी चंद्रमुखी देवी की गुमशुदगी की गुत्थी अब एक जघन्य हत्या के रूप में सुलझ गई है। मथुरा पुलिस ने इस ब्लाइंड मर्डर केस का खुलासा करते हुए एक जिम संचालक सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि साध्वी की करोड़ों की संपत्ति हड़पने के लिए यह पूरी साजिश रची गई थी।

क्या है पूरा मामला?

वृंदावन

वृंदावन के गौशाला नगर में रहने वाली साध्वी चंद्रमुखी देवी (उर्फ चित्रा दासी), जो पिछले 35 वर्षों से यहां रह रही थीं, 21 दिसंबर 2024 को अचानक लापता हो गईं। उनके पति की मृत्यु हो चुकी थी और उनका कोई सीधा कानूनी वारिस नहीं था। जब कई दिनों तक उनके मकान का ताला नहीं खुला, तो पड़ोसियों और उनके गुरु भाई संत लाड़ली दास ने पुलिस को सूचित किया, जिसके बाद गुमशुदगी का मामला दर्ज किया गया।

फर्जी कागजात से खुला हत्या का राज

शुरुआती जांच में पुलिस को कोई सुराग नहीं मिला। मामले ने तब एक नया मोड़ लिया जब साध्वी के मकान से जुड़े फर्जी वसीयत और रजिस्ट्री के कागजात सामने आने लगे। इससे साध्वी की हत्या कर संपत्ति हड़पने की आशंका बढ़ गई। स्थानीय संतों और लोगों के बढ़ते दबाव के बाद, एसएसपी ने मामले की जांच सीओ सिटी आशना चौधरी को सौंप दी। 15 नवंबर 2025 को फर्जीवाड़े और हत्या की आशंका में नया मुकदमा दर्ज किया गया। सीओ चौधरी के नेतृत्व में टीम ने महज 20 दिनों के भीतर इस केस का खुलासा कर दिया।

कर्ज में डूबे जिम संचालक ने रची साजिश

पुलिस पूछताछ में मुख्य आरोपी अभिषेक शर्मा, जो एक जिम चलाता है, ने हत्या की पूरी साजिश का खुलासा किया। अभिषेक पर भारी कर्ज था और उसे चुकाने के लिए उसने साध्वी की अकेली और बेवारिस संपत्ति को निशाना बनाया।उसने अपने दोस्त विजय सिंह, वकील मोहम्मद, ओंकार सिंह और विकास मिश्रा के साथ मिलकर साध्वी की गला घोंटकर हत्या कर दी। पहचान मिटाने और सबूत नष्ट करने के लिए, आरोपियों ने साध्वी के शव को यमुना नदी के पार ले जाकर पहले से तैयार लकड़ी के ढेर पर जला दिया।

वृंदावन

पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी

हत्या के बाद, आरोपियों ने साध्वी के घर का ताला तोड़ा और वहां से उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी और संपत्ति के मूल दस्तावेज चुरा लिए। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उन्होंने साध्वी का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र भी तैयार करवा लिया था। पुलिस ने गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों के कब्जे से साध्वी के मकान के मूल दस्तावेज, पहचान पत्र और फर्जी वसीयत जैसे अहम सबूत बरामद किए हैं। सीओ सिटी आशना चौधरी ने बताया कि सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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लॉरेंस बिश्नोई का भाई अनमोल पकड़ा गया! बाबा सिद्दीकी मर्डर केस में बड़ी कार्रवाई

लॉरेंस बिश्नोई

कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के छोटे भाई अनमोल बिश्नोई को अमेरिका से निर्वासित (Deport) किए जाने के बाद NIA ने दिल्ली में गिरफ्तार कर लिया, और वह बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में वांछित था। गुरुवार को निर्वासन की प्रक्रिया पूरी होने पर जब उसे दिल्ली लाया गया, उसी समय NIA की टीम ने उसे हिरासत में ले लिया। अदालत में पेश किए जाने के बाद उसे 11 दिन की NIA हिरासत में भेज दिया गया।

अनमोल बिश्नोई पिछले कई महीनों से अमेरिका में छिपा हुआ था, जहां भारतीय जांच एजेंसियों ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ मिलकर उसे ट्रैक किया और आखिरकार पकड़ने में सफलता हासिल की। अमेरिकी अधिकारियों ने भारत सरकार के अनुरोध पर उसे वापस भेजा, जिसके बाद उसे दिल्ली लाया गया।

12 अक्टूबर 2024 को मुंबई के बांद्रा इलाके में हुए बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम सामने आया था। जांच में पता चला कि अनमोल बिश्नोई ने ही इस हत्या की साजिश रचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उसने ही शूटर्स को निर्देश देकर हत्या की योजना को अंजाम देने के लिए सुपरवाइज किया। कई सूत्रों ने बताया कि जमीनी स्तर पर सक्रिय व्यक्ति अनमोल ही था।

लॉरेंस बिश्नोई

NIA का कहना है कि अनमोल के पास इस केस से जुड़ी कई अहम जानकारियां हैं, जिन्हें पूछताछ के दौरान सामने लाया जाएगा—जैसे हत्या की योजना कैसे बनी, किन लोगों ने मदद की, और गैंग के कौन-कौन से सदस्य इसमें शामिल रहे।

लॉरेंस बिश्नोई गैंग को देश के सबसे खतरनाक आपराधिक संगठनों में से एक माना जाता है, और इसके सदस्य भारत और विदेश दोनों जगह सक्रिय हैं। अनमोल को इस गैंग का प्रमुख ऑपरेटर माना जाता है और उस पर हत्या, धमकी और संगठित अपराध जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं।

कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने अनमोल की गिरफ्तारी को एक बड़ी सफलता बताया है, क्योंकि इससे न केवल बाबा सिद्दीकी हत्याकांड की जांच को मजबूती मिलेगी बल्कि बिश्नोई गैंग के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को भी कमजोर करने में मदद मिलेगी। आने वाले दिनों में NIA की पूछताछ से कई अहम खुलासों की उम्मीद की जा रही है।

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H5N5 क्‍यों है कोरोना से भी ज़्यादा खतरनाक? वॉशिंगटन में मिला दुनिया का पहला मानव मामला — बचाव के तरीक़े ज़रूर जानें

H5N5

वॉशिंगटन राज्य में बर्ड फ्लू का एक ऐसा नया स्ट्रेन पाया गया है H5N5 जो अब तक कभी इंसानों में दर्ज नहीं हुआ था। स्वास्थ्य अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यह दुनिया का पहला H5N5 स्ट्रेन का मानव मामला है। मामला 15 नवंबर 2025 को सामने आया और इसी के साथ अमेरिका में फरवरी के बाद पहली बार बर्ड फ्लू का कोई मानव संक्रमण दर्ज हुआ है।

गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती—बुज़ुर्ग व्यक्ति की स्थिति नाज़ुक यह मामला ग्रेज़ हार्बर काउंटी के एक बुज़ुर्ग निवासी का है, जो पहले से ही कई चिकित्सीय समस्याओं से जूझ रहे थे। नवंबर की शुरुआत में उन्हें तेज़ बुखार, भ्रम की स्थिति, और सांस लेने में दिक्कत हुई, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने बताया कि मरीज़ की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है और विशेषज्ञों की एक टीम उनकी निगरानी कर रही है।

अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में संक्रमण का संबंध व्यक्ति के घर पर मौजूद छोटे पोल्ट्री सेटअप से हो सकता है, जहां जंगली पक्षियों की आवाजाही आम बात थी। हालांकि, अंतिम पुष्टि के लिए विस्तृत जांच जारी है। पहली बार इंसानों में मिला H5N5 स्ट्रेन — पहले सिर्फ जानवरों में मिलता था

H5N5

जांच में पाया गया कि यह संक्रमण H5N5 एवियन इन्फ्लुएंज़ा का है—एक ऐसा स्ट्रेन जो इससे पहले केवल पक्षियों और जानवरों में देखा गया था।यह पहली बार है जब यह स्ट्रेन किसी इंसान को संक्रमित करता पाया गया है। इसके पहले अमेरिका में सामने आए बर्ड फ्लू के सभी मानव मामले H5N1 स्ट्रेन से जुड़े थे।

अमेरिका में बर्ड फ्लू की स्थिति

यह मामला 9 महीनों बाद अमेरिका में सामने आया पहला मानव संक्रमण है।वॉशिंगटन राज्य में 2022 से अब तक बर्ड फ्लू के 15 पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं—लेकिन सभी जानवरों तक सीमित थे।2024 से जुलाई 2025 के बीच H5N1 के कारण देशभर में 70 से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं।H5N5 का मानव संक्रमण सामने आने से वैज्ञानिक और स्वास्थ्य विभाग दोनों ही सतर्क हो गए हैं।

क्या यह इंसानों के लिए बड़ा खतरा है?

स्वास्थ्य अधिकारियों ने फिलहाल आम जनता के लिए जोखिम कम बताया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी तक इंसान से इंसान में फैलने का कोई मामला नहीं मिला है। लेकिन जो लोग निम्नलिखित क्षेत्रों में हैं, उन्हें विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है:

  • पोल्ट्री फार्म वर्कर्स
  • पशुपालन से जुड़े लोग
  • संक्रमित या मृत पक्षियों के संपर्क में आने वाले लोग

अधिकारियों ने स्पष्ट कहा है कि लोग बीमार या मृत पक्षियों को बिल्कुल न छुएं और ऐसे किसी भी मामले की तुरंत सूचना स्थानीय स्वास्थ्य विभाग को दें।

H5N5

वैज्ञानिकों की चिंता — “वायरस विकसित हो रहा है”

विशेषज्ञों का मानना है कि H5 वायरस परिवार लगातार म्यूटेशन कर रहा है, जिसके कारण यह नई जटिलताओं का कारण बन सकता है।

H5N5 का इंसानों में आना इसी विकास का संकेत माना जा रहा है। हालांकि अभी घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन निगरानी और सावधानी बेहद ज़रूरी है।

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Gangster Extradition Shock: Anmol Bishnoi भारत लाया गया — मूसेवाला से Salman Case तक, अब NIA की पकड़ में

Anmol Bishnoi

19 नवंबर 2025 की सुबह भारत की सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी उपलब्धि मिली, जब कुख्यात गैंगस्टर Anmol Bishnoi—जो लॉरेंस बिश्नोई का छोटा भाई और अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है—अमेरिका से डिपोर्ट होकर दिल्ली IGI एयरपोर्ट पर NIA के हवाले कर दिया गया।

Anmol Bishnoi पर भारत में 18 से ज्यादा संगीन केस, जिनमें सिद्धू मूसेवाला मर्डर लिंक, सलमान खान टारगेट शूटिंग, बाबा सिद्दीक़ी मर्डर केस, हथियार तस्करी, गैंग ऑपरेशंस और आतंकी नेटवर्क फंडिंग शामिल हैं, दर्ज हैं। उसकी गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियां “years-long manhunt का biggest breakthrough” मान रही हैं।

फर्जी पासपोर्ट, कई देशों में भागना और आखिरकार US में फंसना

मूसेवाला हत्याकांड (2022) के बाद अनमोल भारत से फरार होकर नेपाल → दुबई → केन्या → मेक्सिको → USA पहुंचा। उसने फर्जी नाम ‘भानु प्रताप’ के जरिए पासपोर्ट बनवाया और अमेरिकी सीमा में प्रवेश किया, लेकिन 2024 में इमिग्रेशन अधिकारियों को दस्तावेज़ संदिग्ध लगे और वह गिरफ्तार कर लिया गया।

Anmol Bishnoi

उसने US कोर्ट में Asylum की अपील भी की थी, जिसे भारत की मजबूत कानूनी दलीलों के बाद खारिज कर दिया गया। एक साल से अधिक की कानूनी लड़ाई के बाद उसे अमेरिका ने भारत को सौंप दिया—यह बिश्नोई सिंडिकेट के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।

NIA की रिमांड — गैंगवार, फंडिंग और बॉलीवुड टारगेटिंग की नई कड़ियाँ खुल सकती हैं

दिल्ली पहुंचते ही NIA और दिल्ली पुलिस ने Anmol Bishnoi को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश कर ट्रांजिट रिमांड मांगी।

पूछताछ इन बिंदुओं पर केंद्रित होगी – क्या मूसेवाला मर्डर की सुपारी और योजना विदेश से हुई?सलमान खान के फार्महाउस फायरिंग में उसकी क्या भूमिका थी?बाबा सिद्दीक़ी मर्डर केस में कौन-कौन शामिल?भारत में हथियार, ड्रग्स और हवाला नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय तार कहाँ तक जाते हैं?क्या बिश्नोई गैंग विदेश से आतंक मॉड्यूल्स के साथ लिंक्ड था?

NIA ने बयान दिया

“This extradition is a major breakthrough against global organised crime.”

आगे क्या? गैंगवार की परतें खुलेंगी या नए नाम बाहर आएंगे?

Anmol Bishnoi की गिरफ्तारी केवल एक क्रिमिनल की वापसी नहीं—यह भारत की उन हाई-प्रोफाइल केसों की जांच का turning point बन सकती है, जो सालों से सवालों में थे।

अब देखने वाली बात यह है कि—

  • क्या बॉलीवुड टारगेटिंग के मास्टरमाइंड सामने आएंगे?
  • क्या बिश्नोई सिंडिकेट का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क टूटेगा?
  • क्या मुकदमा नए बड़े खुलासे करेगा?

पूरे देश की नज़र अब NIA की इस हाई-वोल्टेज जांच पर टिकी है।

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कोयंबटूर और मदुरै मेट्रो परियोजना को केंद्र से मंजूरी नहीं, सीएम स्टालिन ने जताई नाराज़गी

मेट्रो

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने कोयंबटूर और मदुरै के लिए प्रस्तावित मेट्रो परियोजनाओं को केंद्र से मंजूरी न मिलने पर कड़ी आलोचना की है। केंद्र सरकार ने 2011 की जनगणना का हवाला देते हुए दोनों शहरों की आबादी 20 लाख की तय सीमा से कम बताई और इसी आधार पर परियोजनाओं को वापस लौटा दिया।

केंद्र का तर्क और स्टालिन का जवाब

मेट्रो

केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने कहा कि 2017 की मेट्रो नीति के अनुसार मेट्रो रेल परियोजना की पात्रता के लिए न्यूनतम आबादी 20 लाख होनी चाहिए, जबकि कोयंबटूर और मदुरै की जनसंख्या इससे कम है। इसलिए मेट्रो के बजाय BRTS जैसे विकल्पों पर विचार करने की सलाह दी गई है।

मुख्यमंत्री स्टालिन ने इस फैसले को “राजनीतिक पूर्वाग्रह” बताया और कहा कि यह तमिलनाडु की जनता को भाजपा के खिलाफ वोट देने की सज़ा देने जैसा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार इन अड़चनों के बावजूद दोनों शहरों में मेट्रो परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

परियोजनाओं का संक्षिप्त विवरण

  • कोयंबटूर मेट्रो: लगभग ₹10,740 करोड़ की लागत, दो प्रमुख कॉरिडोर के प्रस्ताव।
  • मदुरै मेट्रो: लगभग ₹11,340 करोड़ की अनुमानित लागत, 32 किमी का मार्ग, जिसमें 6 किमी भूमिगत।

विशेषज्ञों का मत है कि 2011 की जनगणना पर निर्भर रहना उचित नहीं, क्योंकि कोयंबटूर की मौजूदा आबादी 30 लाख के करीब मानी जाती है। राज्य सरकार जल्द ही अतिरिक्त दस्तावेजों के साथ संशोधित प्रस्ताव फिर से भेजने की तैयारी कर रही है।

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लड़के कभी रोते नहीं -International Men’s Day 2025: Modern Masculinity का असली Celebration

International Men’s Day

हर साल 19 नवंबर को मनाया जाने वाला International Men’s Day सिर्फ पुरुषों का उत्सव नहीं, बल्कि उनकी positive roles, responsibilities और struggles को पहचानने का दिन है। यह दिन मानसिक स्वास्थ्य, gender balance, family responsibilities और social contribution जैसे मुद्दों को सामने लाता है, ताकि ‘मर्दानगी’ के पुराने खांचे टूटें और नई सोच—kind, emotional, responsible masculinity—सामने आए।

2025 Theme: “Celebrating Men and Boys”

इस साल का थीम है “Celebrating Men and Boys”, यानी ऐसे पुरुष और लड़के जो अपने परिवार, समाज और करियर में positivity और inspiration फैलाते हैं। भारत समेत दुनिया भर में स्कूल, कॉलेज, कॉर्पोरेट और NGOs health camps, workshops, digital awareness और conversations के जरिए पुरुषों की well-being पर जोर दे रहे हैं—एक ऐसा विषय जो अक्सर अनदेखा रह जाता है।

Men’s Health, Mental Wellness & Social Issues — असल मुद्दों की खुली बात

International Men’s Day

International Men’s Day का सबसे बड़ा योगदान है

Mental Health Talk (suicide prevention, stress)

Healthy Masculinity (toxic masculinity को तोड़ना)

Equal Parenting

Work–Life Balance

पुरुषों की भावनाओं को “strong रहो” कहकर दबाया नहीं, बल्कि समझा और सुना जा रहा है। कंपनियां और समुदाय अब पुरुषों के health checkup और emotional wellness पर खुलकर बात कर रहे हैं।

Gratitude Campaigns: ‘Thank You Men!’ — सोशल मीडिया में हलचल

दुनिया भर में सोशल मीडिया पर अभियान चल रहे हैं

“Thank you sons, brothers, fathers, partners, mentors!”

लोग अपने जीवन के पुरुषों—चाहे पिता हों, बेटे हों, दोस्त हों या साथी—को appreciate कर रहे हैं कि उन्होंने किस तरह जिम्मेदारी, मेहनत और संवेदनशीलता से रिश्तों और समाज को संभाला।

Empowering Men = Empowering Society

International Men’s Day 2025 याद दिलाता है कि gender equality तभी संभव है जब पुरुषों को भी Support, Sensitivity और Self-care का अधिकार मिले।

यह दिन बताता है

“Strong society तब बनता है जब पुरुष भी सुने जाएं, समझे जाएं और सराहे जाएं।”

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अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी पर ईडी की बड़ी कार्रवाई

जावेद अहमद

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अल-फलाह समूह के चेयरमैन और अल-फलाह यूनिवर्सिटी के संस्थापक जावेद अहमद सिद्दीकी को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई उस समय हुई जब एजेंसी ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल से जुड़े एक बड़े मामले की जांच कर रही थी, जिसमें अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम लगातार सामने आ रहा था।

कैसे हुई गिरफ्तारी?

ईडी ने जावेद सिद्दीकी को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी से पहले एजेंसी ने अल-फलाह समूह से जुड़े कई परिसरों पर छापेमारी की और मौके से मिले दस्तावेजों, डिजिटल सबूतों तथा वित्तीय लेनदेन की गहन जांच की। इन सबूतों में कथित रूप से संदिग्ध फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े निशान पाए गए थे।

जावेद अहमद

क्यों आई यूनिवर्सिटी जांच के घेरे में?

अल-फलाह यूनिवर्सिटी पहले से ही सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में थी। जांच तब तीव्र हुई जब पता चला कि विश्वविद्यालय के कई फैकल्टी सदस्य एक ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल से जुड़े होने के शक में चिन्हित किए गए हैं।
इससे पहले, यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मुजम्मिल शकील को विस्फोटक, हथियार और बम बनाने के उपकरण रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इस गिरफ्तारी के बाद ईडी और अन्य एजेंसियों ने विश्वविद्यालय तथा उससे जुड़े व्यक्तियों की गतिविधियों की गहराई से जांच शुरू की।

जावेद अहमद

क्या है पूरा मामला?

आरोप है कि सिद्दीकी और उनकी संस्था से जुड़े कुछ व्यक्तियों ने अवैध फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियों को छुपाने की कोशिश की।
ईडी के अनुसार, सिद्दीकी की यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय लेनदेन कई जगह संदिग्ध पाए गए।
आतंकी मॉड्यूल मामले में सामने आए लिंक ने जांच को और मजबूत कर दिया।

आगे क्या?

ईडी सिद्दीकी से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश में है कि मनी लॉन्ड्रिंग में और कौन शामिल था। साथ ही, एजेंसी उन पैसों के फ्लो का भी पता लगाएगी, जिनके बारे में शक है कि उनका इस्तेमाल गलत गतिविधियों में किया गया।

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कोडरमा में दर्दनाक सड़क हादसा: तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक सवार को रौंदा, मौके पर मौत

कोडरमा

कोडरमा, 18 नवंबर:झारखंड के कोडरमा में आज मंगलवार की रात एक भीषण सड़क हादसे में एक बाइक सवार युवक की दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना तब हुई जब एक तेज रफ्तार ट्रक ने युवक की बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। मृतक की पहचान विक्की भुइयां के रूप में हुई है।

जानकारी के अनुसार, विक्की भुइयां अपनी बाइक से कहीं जा रहे थे, तभी एक अनियंत्रित ट्रक ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी भयानक थी कि विक्की गंभीर रूप से घायल हो गए और मौके पर ही उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई।

हादसे को अंजाम देने के बाद आरोपी ट्रक चालक मौके का फायदा उठाकर अपने वाहन समेत फरार हो गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी, जिसके बाद पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और फरार ट्रक चालक की तलाश में जुट गई है। पुलिस आसपास के इलाकों में नाकेबंदी कर और सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपी की पहचान करने की कोशिश कर रही है।

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The Queen Who Redefined Courage: Rani Lakshmibai की जयंती पर पूरा देश नतमस्तक

Rani Lakshmibai

मनिकर्णिका से झांसी की रानी तक—साहस की अमर गाथा 19 नवम्बर को पूरा भारत Rani Lakshmibai की जयंती को वीरता और देशभक्ति के उत्सव के रूप में मनाता है। 1828 में वाराणसी में जन्मी मनिकर्णिका (बचपन का नाम) ने छोटी उम्र से ही अद्भुत प्रतिभा, घुड़सवारी, तलवारबाज़ी और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया। विवाह के बाद वे झांसी की रानी बनीं और पति राजा गंगाधर राव के निधन के बाद अकेले ही राज्य के सिंहासन को संभाला। 1857 की क्रांति में उनका संघर्ष, अदम्य साहस और “झांसी नहीं दूंगी” का जज़्बा उन्हें भारत के स्वतंत्रता संग्राम का अमर प्रतीक बना देता है।

देशभर में जयंती समारोह—वीरता का भव्य उत्सव

झांसी, वाराणसी, ग्वालियर और देश के सभी प्रमुख शहरों में आज उनकी जयंती पर विशाल समारोह आयोजित हो रहे हैं— पुष्पांजलि कार्यक्रम,वीरांगना रैलियाँ,स्कूल-कॉलेजों में सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ,तलवारबाज़ी और घुड़सवारी प्रदर्शन,देशभक्ति गीत, नाटक और संगोष्ठियाँ,महिला संगठनों, प्रशासन और युवा समूहों ने रानी की गाथा को जीवंत करने के लिए विशेष आयोजन किए हैं। उनकी रणनीति, बुद्धिमत्ता और साहस आज भी हर भारतीय को प्रेरित करता है।

Rani Lakshmibai

राष्ट्र का सम्मान—नेताओं और जनता की श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई राष्ट्रीय नेता, साहित्यकार और कलाकारों ने सोशल मीडिया व समारोहों में रानी लक्ष्मीबाई को नमन किया है। जगह-जगह अश्वारोहण रैलियाँ, कविता पाठ और उनके जीवन पर आधारित नाट्य मंचन आयोजित हो रहे हैं, जहाँ युवा पीढ़ी इतिहास को नए रूप में जान रही है।

नारी शक्ति की असली परिभाषा—साहस, स्वाभिमान और स्वतंत्रता

रानी लक्ष्मीबाई की जयंती सिर्फ एक ऐतिहासिक स्मरण नहीं, बल्कि भारत की महिलाओं के आत्मबल, स्वतंत्रता और नेतृत्व की प्रेरणा है। उनका जीवन बताता है कि—

“साहस उम्र नहीं देखता, सिर्फ इरादे देखता है।”

आज भी उनका नारा “मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी” हर भारतीय के दिल में गूंजता है, और देश को याद दिलाता है कि आज़ादी, सम्मान और कर्तव्य की रक्षा सबसे बड़ा धर्म है।

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BPSC 71वीं प्रीलिम्स का रिज़ल्ट जारी: 14,261 अभ्यर्थी सफल, मुख्य परीक्षा की तैयारी शुरू

BPSC

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने 71वीं संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा का रिज़ल्ट जारी कर दिया है, जिससे लंबे समय से इंतज़ार कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत मिली है। आयोग ने परिणाम आधिकारिक वेबसाइट bpsc.bihar.gov.in पर जारी किया, जहां उम्मीदवार PDF फॉर्मेट में अपने रोल नंबर की जांच कर सकते हैं। रिज़ल्ट जारी होने के तुरंत बाद वेबसाइट पर भारी ट्रैफिक के कारण कुछ समय तक तकनीकी परेशानी भी देखने को मिली।

कितने उम्मीदवार हुए सफल?

इस साल 71वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए कुल 4,71,012 आवेदक थे, जिनमें से 3,16,762 उम्मीदवार परीक्षा में उपस्थित हुए। इनमें से कुल 14,261 उम्मीदवारों ने प्रीलिम्स परीक्षा पास की है। सफल अभ्यर्थियों में 13,368 उम्मीदवार संयुक्त 71वीं प्रारंभिक परीक्षा के लिए और 893 उम्मीदवार वित्तीय प्रशासनिक अधिकारी (FAO) पद के लिए चयनित हुए हैं। यह पूरी भर्ती प्रक्रिया राज्य सरकार के 1298 प्रशासनिक पदों को भरने के लिए चलाई जा रही है, जिसमें DSP, SDM जैसे प्रतिष्ठित पद भी शामिल हैं।

रिज़ल्ट कैसे देखें?

उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रिज़ल्ट चेक कर सकते हैं। होमपेज पर उपलब्ध “BPSC 71st Prelims Result 2025” लिंक पर क्लिक करने पर एक PDF फाइल खुलेगी, जिसमें सफल उम्मीदवारों के रोल नंबर सूचीबद्ध हैं। उम्मीदवार इस PDF को डाउनलोड करके सुरक्षित भी रख सकते हैं।

BPSC

कट-ऑफ भी जारी, श्रेणी के अनुसार अंक निर्धारित

रिज़ल्ट के साथ ही आयोग ने श्रेणीवार कट-ऑफ मार्क्स भी जारी किए हैं। सामान्य वर्ग (General) के लिए न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स 40% तय किए गए हैं, जबकि SC, ST और अन्य आरक्षित वर्गों के लिए यह 32–34% के बीच रखा गया है।

आगे की प्रक्रिया: अब Mains की तैयारी करें

प्रीलिम्स परीक्षा पास करने वाले सभी उम्मीदवार अब मुख्य परीक्षा (Mains) देने के लिए योग्य हो गए हैं। मुख्य परीक्षा की तारीखें BPSC जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट पर घोषित करेगा। Mains के बाद उम्मीदवारों को साक्षात्कार (Interview) और उसके बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन से गुजरना होगा। इन सभी चरणों को पूरा करने के बाद ही अंतिम चयन सूची जारी की जाएगी।

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अयोध्या राम मंदिर में दर्शन के समय में बदलाव, जानें नई समय-सारणी

राम मंदिर

अयोध्या राम मंदिर में शीत ऋतु के आगमन को देखते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रामलला के दर्शन के समय में बदलाव कर दिया है। अयोध्या राम मंदिर: शीत ऋतु के कारण रामलला के दर्शन का समय बदल दिया गया है। अब श्रद्धालुओं को सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक दर्शन मिलेंगे।

ट्रस्ट के अनुसार ठंड बढ़ने के साथ सुबह के समय धुंध और कम तापमान के कारण भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नया समय लागू किया गया है। पहले मंदिर के कपाट सुबह 6:30 बजे खुलते थे, लेकिन अब यह समय बदलकर 7:00 बजे कर दिया गया है।

नई समय-सारिणी

  • सुबह दर्शन: 7:00 बजे से शुरुआत
  • दोपहर अवकाश: 12:00 बजे से 1:00 बजे तक
  • शाम दर्शन: 1:00 बजे से रात 9:00 बजे तक
  • रात को शयन आरती के बाद मंदिर बंद

इस बदलाव के बाद श्रद्धालुओं को पहले की तुलना में थोड़ी देर से सुबह दर्शन मिलेंगे, लेकिन रात तक दर्शन का समय बढ़ा हुआ रहेगा। ट्रस्ट ने बताया कि शीत ऋतु के कारण यह परिवर्तन आवश्यक था ताकि दूर-दराज से आने वाले भक्तों को किसी प्रकार की परेशानी ना हो।

भक्तों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए निर्णय –

अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। ऐसे में मौसम को देखते हुए समय-सारिणी में बदलाव का उद्देश्य भीड़ को सुव्यवस्थित तरीके से संभालना और सुबह की ठंड में होने वाली दिक्कतों को कम करना है। ट्रस्ट ने सभी भक्तों से अनुरोध किया है कि वे दर्शन के लिए इस नई समय-सारिणी का पालन करें और निर्धारित समय में ही मंदिर परिसर पहुँचें।

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ईरान ने भारतीयों के लिए वीज़ा-फ्री एंट्री निलंबित की

ईरान

ईरान ने भारतीय नागरिकों को दी जा रही वीज़ा-मुक्त प्रवेश सुविधा को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है। हाल के महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए थे, जिनमें आपराधिक तत्वों ने वीज़ा-माफी का दुरुपयोग किया। कई भारतीयों को फर्जी नौकरी दिलाने के नाम पर ईरान ले जाया गया और वहां पहुंचने पर उनका अपहरण कर फिरौती मांगी गई। इन घटनाओं ने यात्रियों की सुरक्षा को गंभीर रूप से प्रभावित किया, जिसके बाद ईरान सरकार ने यह कदम उठाया।

भारतीय यात्रियों के लिए अब वीज़ा अनिवार्य

इस फैसले के बाद अब भारतीय नागरिकों को ईरान में प्रवेश करने या वहां से किसी दूसरे देश के लिए ट्रांजिट करने से पहले वैध ईरानी वीज़ा प्राप्त करना अनिवार्य हो गया है। एयरलाइन कंपनियों को भी निर्देश दिया गया है कि वे यात्रियों के वीज़ा की स्थिति की पूरी तरह जांच करें। यह बदलाव उन सभी के लिए आवश्यक हो गया है जो ईरान को ट्रांजिट पॉइंट की तरह इस्तेमाल करते थे।

ईरान

भारत सरकार की चेतावनी और सलाह

ईरान के इस निर्णय के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने भी एक नई एडवाइजरी जारी की है। मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे वीज़ा-मुक्त यात्रा, फर्जी नौकरी दिलाने वाले एजेंटों और ईरान के रास्ते दूसरे देशों में भेजने के दावों से सतर्क रहें। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वीज़ा-मुक्त प्रवेश केवल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए था, रोजगार के लिए नहीं। बढ़ते फर्जी नौकरी रैकेट और अपहरण की घटनाओं ने इस व्यवस्था को असुरक्षित बना दिया था।

दोनों देशों के बीच यात्रा व्यवस्था में बड़ा बदलाव

ईरान द्वारा वीज़ा-फ्री एंट्री को निलंबित करने का निर्णय भारत और ईरान के बीच यात्रा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। यह फैसला उन समस्याओं को रोकने की कोशिश है जिनमें भारतीय यात्रियों को निशाना बनाया जा रहा था। अब भविष्य में ईरान की यात्रा करने वाले लोगों को पहले से योजना बनाकर वीज़ा प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

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सऊदी अरब में भीषण बस हादसा : 42 भारतीय उमरा यात्रियों की मौत की आशंका

उमरा

सऊदी अरब में एक दर्दनाक हादसा हुआ है, जहाँ कम-से-कम 42 भारतीय उमरा यात्रियों के मरने की आशंका है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, ये बस और एक डीजल टैंकर सुबह के समय मेदीना के पास टकरा गए, और टक्कर के बाद लगी भयंकर आग में यात्रियों को झुलसने से जान चली गई।

क्या हुआ था?

बस मेक्का से मेदीना की ओर जा रही थी। दुर्घटना लगभग सुबह 1:30 बजे (IST) हुई। बताया गया है कि टक्कर के बाद बस पूरी तरह से आग की लपटों में घिर गई और यात्री झुलस गए। खबरों के अनुसार, यात्रियों में कई हैदराबादी थे — यानी उनके परिवार और नाते-रिश्तेदार भारत में घबराए हुए हैं।

रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कुल 43 लोग बस पर सवार थे, लेकिन केवल एक व्यक्ति जिंदा बचा है और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

उमरा

प्रतिक्रिया और कार्रवाई

हादसे की रिपोर्ट मिलते ही तेलंगाना सरकार ने कंट्रोल रूम स्थापित किया है ताकि प्रभावित यात्रियों के परिवारों को तुरंत सूचना दी जा सके।

स्थानीय अधिकारियों और भारतीय दूतावास ने मृतकों की पहचान करने और परिवारों से संपर्क करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि दुर्घटना के कारण क्या थे — टैंकर की गलती, बस चालक की लापरवाही, या अन्य कारणों की जांच जारी है।

परिवारों का दर्द और चिंताएं

यह हादसा उन परिवारों के लिए गहरे सदमे का विषय है, जिनके सदस्य पवित्र यात्रा (उमरा) पर गए थे। उनकी उम्मीदें और सपने धार्मिक अनुभव तक सीमित नहीं थे — उनमें यह विश्वास भी था कि यह यात्रा उन्हें आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाएगी। लेकिन इस घटना ने उन्हें एक त्रासदी की असलीता की हकीकत का सामना कराना पड़ा है।

यह दुर्घटना न केवल एक बड़ी मानव त्रासदी है, बल्कि सुरक्षा और यात्री परिवहन व्यवस्था पर सवाल भी खड़े करती है। सऊदी और भारतीय दोनों पक्षों के लिए यह जांच महत्वपूर्ण होगी — ताकि पता चल सके कि ऐसी घटनाओं को भविष्य में कैसे रोका जा सकता है।

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बिहार बोर्ड 2026 डेटशीट जल्द जारी होगी: कक्षा 10वीं–12वीं के छात्र रहें तैयार, जानें क्या है पूरी अपडेट

बिहार

बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (BSEB) जल्द ही कक्षा 10वीं (मैट्रिक) और 12वीं (इंटरमीडिएट) की 2026 बोर्ड परीक्षा डेटशीट जारी करने वाला है। लाखों छात्र इस घोषणा का इंतज़ार कर रहे हैं, और बोर्ड ने संकेत दिया है कि समय सारणी जल्द ही ऑनलाइन उपलब्ध होगी।

कब जारी होगी डेटशीट?

पिछले कई सालों के ट्रेंड को देखते हुए, उम्मीद है कि BSEB दिसंबर 2025 की शुरुआत में ही 2026 की परीक्षा डेटशीट जारी कर देगा। पिछले साल (2025 परीक्षा के लिए) डेटशीट 7 दिसंबर 2024 को जारी हुई थी। इस बार भी लगभग इसी समय डेटशीट आने की संभावना है।

बिहार

परीक्षाएं कब होंगी?

रिपोर्ट्स और पिछले पैटर्न के अनुसार: कक्षा 12 की परीक्षाएं: फरवरी 2026 की शुरुआत में. कक्षा 10 की परीक्षाएं: फरवरी 2026 के मध्य में कुछ शैक्षणिक पोर्टलों का अनुमान है कि 10वीं की परीक्षा 17 फरवरी 2026 से 25 फरवरी 2026 के बीच हो सकती है।

परीक्षा का समय क्या रहेगा?

बीएसईबी हर साल की तरह इस बार भी परीक्षाएं दो शिफ्टों में कर सकता है:

  • पहली पाली: सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक.
  • दूसरी पाली: दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:15 बजे तक.

थ्योरी परीक्षाओं के साथ बोर्ड जल्द ही प्रैक्टिकल परीक्षा की तारीखें भी जारी करेगा। प्रैक्टिकल परीक्षा स्कूलों में ही आयोजित की जाएंगी।

बिहार

डेटशीट कहां से डाउनलोड करें?

जैसे ही डेटशीट जारी होगी, छात्र इसे यहां से PDF फॉर्म में डाउनलोड कर सकेंगे:

biharboardonline.com

biharboardonline.bihar.gov.in

छात्रों को सलाह है कि वे नियमित रूप से वेबसाइट चेक करते रहें और पढ़ाई का टाइमटेबल पहले से तैयार कर लें।

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जापान में सकुराजिमा ज्वालामुखी का भीषण विस्फोट, 4.4 किमी ऊंचा उठा राख का गुबार, 30 उड़ानें रद्द

जापान

जापान के क्यूशू द्वीप पर स्थित सकुराजिमा ज्वालामुखी रविवार को लगातार कई बार फटा, जिसके बाद आसमान में 4.4 किलोमीटर तक धुआं और राख का विशाल गुबार देखने को मिला। इस खतरनाक गतिविधि की वजह से कागोशिमा एयरपोर्ट से आने-जाने वाली करीब 30 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।

कब-कब हुए विस्फोट?

जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के अनुसार पहला बड़ा विस्फोट रात 1 बजे हुआ दूसरा 2:30 बजे तीसरा सुबह 8:50 बजे दर्ज किया गया यह लगभग 13 महीनों में पहली बार है जब ज्वालामुखी ने 4 किमी से ज्यादा ऊंचाई तक राख उगली है।

राख का खतरा और अलर्ट

जापान

राख का गुबार उत्तर-पूर्व दिशा की ओर बढ़ रहा है और कागोशिमा के साथ मियाज़ाकी प्रान्त में भी राख गिरने की आशंका जताई गई है। ज्वालामुखी चेतावनी स्तर को लेवल 3 पर रखा गया है, जिसके तहत क्रेटर के आसपास लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध है।

उड़ानों पर बड़ा असर

घने राख के कारण विजिबिलिटी प्रभावित हुई और सुरक्षा को देखते हुए एयरलाइंस ने करीब 30 उड़ानें कैंसल कर दीं। यात्रियों को एयरपोर्ट पर ही इंतजार करना पड़ा, हालांकि विमान कंपनियों ने जल्द पुनः संचालन का भरोसा दिया है।

क्या किसी को नुकसान हुआ?

अधिकारियों के मुताबिक— किसी के घायल होने की खबर नहीं. किसी तरह की संरचनात्मक क्षति भी नहीं दर्ज हालांकि ज्वालामुखी से निकलने वाले बड़े-बड़े पत्थर क्रेटर के पास बने फिफ्थ स्टेशन तक पहुंचे, जो विस्फोट की ताकत को दिखाता है।

सकुराजिमा: जापान का सक्रिय ज्वालामुखी

सकुराजिमा जापान के सबसे सक्रिय स्ट्रैटोवोलकैनोज़ में से एक है, जहाँ लगातार छोटे-बड़े विस्फोट होते रहते हैं। 2019 में यहां से 5.5 किलोमीटर तक राख उगली थी। यह ज्वालामुखी अपनी तेज गतिविधि और लगातार बदलते हालात के लिए जाना जाता है।

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कोलकाता सेंट्रल मार्केट में भीषण आग: एज्रा स्ट्रीट पर 300 दुकानें जलकर खाक, घंटों चला रेस्क्यू ऑपरेशन

कोलकाता

कोलकाता: शहर के सबसे व्यस्त और पुराने कारोबारी इलाकों में से एक, एज्रा स्ट्रीट स्थित सेंट्रल मार्केट में शनिवार तड़के भीषण आग लग गई। इस आग ने देखते ही देखते करीब 300 दुकानें और कई गोदामों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे करोड़ों रुपये का सामान खाक हो गया। हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन नुकसान बहुत बड़ा बताया जा रहा है।

सुबह 5 बजे शुरू हुई आग, 20–25 दमकल गाड़ियां मौके पर प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग सुबह लगभग 5 बजे एक इलेक्ट्रॉनिक्स और बिजली के सामान के गोदाम में भड़की। थोड़ी ही देर में आग तेजी से फैलकर आस-पास की छोटी-छोटी दुकानों और पुरानी इमारतों में पहुंच गई।

घटना की सूचना मिलते ही दमकल की 20 से 25 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और कई घंटों तक रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहा। धुआं इतना घना था कि दूर-दूर से भी दिखाई दे रहा था।

तंग गलियां बनीं बड़ी बाधा अग्निशमन कर्मियों को आग बुझाने में बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ा क्योंकि: इलाका बेहद संकरी गलियों वाला है दुकानों में बहुत-सा ज्वलनशील सामान मौजूद था पुरानी इमारतें आग को फैलाने में बड़ा कारण बन गईं

कोलकाता

अधिकारियों ने बताया कि आग पर अब काबू पा लिया गया है, लेकिन कूलिंग ऑपरेशन जारी है।

शॉर्ट सर्किट की आशंका प्राथमिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है, हालांकि पुलिस और फायर विभाग की संयुक्त टीम विस्तृत जांच करेगी।

व्यापारियों को भारी नुकसान

इस मार्केट में ज्यादातर:

  • इलेक्ट्रॉनिक्स
  • मोबाइल एक्सेसरीज़
  • खिलौने
  • गिफ्ट आइटम
  • बिजली के सामान की दुकानें थीं।

कई दुकानें पूरी तरह जलकर राख हो गईं। व्यापारियों ने कहा कि उनका पूरा स्टॉक नष्ट हो गया है और वह अब पूरी तरह आर्थिक संकट में हैं। आसपास की बिजली काटी गई, पुलिस ने इलाके की घेराबंदी की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने आस-पास की बिजली सप्लाई बंद कर दी। पुलिस ने इलाके को पूरी तरह घेर लिया है ताकि कोई भी व्यक्ति असुरक्षित ज़ोन में न जा सके।

अधिकारियों का बयान

पश्चिम बंगाल अग्निशमन सेवा के महानिदेशक ने कहा, “स्थिति अब नियंत्रण में है। किसी को चोट नहीं आई है। आग को आस-पास की इमारतों में फैलने से रोक लिया गया है।” स्थानीय लोगों में दहशत, लेकिन राहत कि कोई हताहत नहीं हालांकि आग बहुत भीषण थी और लपटें कई फीट ऊंची दिखाई दे रही थीं, लेकिन प्रशासन के अनुसार किसी भी तरह की जनहानि नहीं हुई। यह राहत की सबसे बड़ी बात मानी जा रही है।

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नोएडा में बढ़ता प्रदूषण: कक्षा 5 तक के स्कूल हाइब्रिड मोड में — पूरी खबर पढ़ें

प्रदूषण

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है। इसी के चलते नोएडा और ग्रेटर नोएडा के स्कूलों को कक्षा 5 तक हाइब्रिड मोड में चलाने का आदेश जारी किया गया है। प्रशासन ने यह फैसला बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए लिया है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से AQI ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किया जा रहा है।

क्या है नया आदेश?

गौतम बुद्ध नगर के जिला प्रशासन ने निर्देश दिया है कि कक्षा 1 से 5 तक की कक्षाएं ऑनलाइन और ऑफलाइन—दोनों विकल्पों में चलाई जाएंगी। अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार बच्चों को स्कूल भेज सकते हैं या घर से ऑनलाइन क्लास में शामिल करवा सकते हैं।

क्यों हुआ ये फैसला?

बीते हफ्ते से नोएडा का AQI 400 से ऊपर जा रहा है, जो ‘सीवियर’ श्रेणी माना जाता है। ऐसी स्थिति बच्चों, बुजुर्गों और दमा/एलर्जी के मरीजों के लिए बेहद नुकसानदायक है।

प्रदूषण

इसी वजह से:

  • सांस की समस्या बढ़ने लगी
  • बच्चों में खांसी और आंखों में जलन की शिकायत बढ़ी
  • स्कूलों में उपस्थिति घटने लगी
  • प्रशासन ने स्थिति गंभीर होते देख हाइब्रिड मोड लागू किया।

GRAP-3 लागू होने के बाद बढ़ा एक्शन दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का स्टेज-3 लागू कर दिया गया है।

इसमें कई सख्त कदम उठाए जाते हैं:

  • निर्माण और तोड़-फोड़ की गतिविधियों पर रोक
  • धूल नियंत्रण के लिए पानी का छिड़काव
  • डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध
  • स्कूलों के लिए हाइब्रिड मोड की अनिवार्यता
  • GRAP का उद्देश्य प्रदूषण को धीरे-धीरे कम करना और हालात को सामान्य बनाना है। स्कूलों में पहले से चल रहे एहतियाती कदम

हाइब्रिड मोड लागू करने से पहले ही स्कूलों ने कई कदम उठाए थे:

  • सुबह की प्रार्थना सभा रोकी
  • खेल और आउटडोर गतिविधियाँ बंद
  • बच्चों को बाहर कम समय बिताने की सलाह
  • एयर प्यूरीफायर चालू किए गए फिर भी AQI में सुधार ना होने पर हाइब्रिड मोड जरूरी हो गया।

दिल्ली व गाजियाबाद में भी ऐसे ही आदेश दिल्ली, गाजियाबाद और गुरुग्राम के स्कूलों को भी कक्षा 5 तक के लिए हाइब्रिड मोड लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। कई जगहों पर प्राथमिक कक्षाएँ पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई हैं।

अभिभावकों की क्या प्रतिक्रिया?

कई अभिभावकों ने राहत जताई है। उनका कहना है कि: “बच्चों को ऐसी हवा में बाहर भेजना सही नहीं था। ऑनलाइन क्लास बेहतर विकल्प है।” कुछ अभिभावक स्कूल बंद होने से पढ़ाई प्रभावित होने की चिंता भी जता रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए आदेश का समर्थन कर रहे हैं।

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कश्मीर के नौगाम पुलिस स्टेशन में जबरदस्त ब्लास्ट:9 की मौत, 29 घायल!

पुलिस स्टेशन

धमाके की रात: नौगाम थाना बना तबाही का केंद्र श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र नौगाम पुलिस स्टेशन में शुक्रवार देर रात ऐसा भीषण विस्फोट हुआ कि पूरा इलाका दहल उठा। धमाके में कम से कम 9 लोगों की मौत और 29 से अधिक घायल हो गए। यह हादसा तब हुआ जब पुलिस, फॉरेंसिक विशेषज्ञ और तकनीकी टीमें दिल्ली के लालकिला कार ब्लास्ट केस से बरामद भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री की जांच कर रही थीं। जांच के दौरान अचानक तेज़ धमाका हुआ, और उसके बाद लगातार दूसरे छोटे-छोटे ब्लास्ट भी होते रहे — जिससे थाना परिसर का बड़ा हिस्सा ढह गया।

मलबा, घायलों की चीखें और बचाव अभियान

पुलिस स्टेशन

धमाके में घायल हुए पुलिसकर्मी, फॉरेंसिक अधिकारी और कुछ नागरिकों को तुरंत सैन्य अस्पताल व SKIMS, श्रीनगर में भर्ती कराया गया। प्रशासन ने नौगाम से लेकर श्रीनगर सिटी के कई इलाकों को सील कर दिया है। सेना, SDRF, फायर एंड इमरजेंसी और मेडिकल टीमें पूरी रात राहत कार्य में लगी रहीं। जम्मू-कश्मीर के DGP, ADGP और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुँचे — वहीं हादसे की गंभीरता को देखते हुए NIA ने जांच की कमान संभाल ली है।

हादसा या साजिश? बड़े सवालों की नई लाइन

सबसे बड़ा सवाल अब यही है—क्या यह वाकई एक एक्सीडेंटल ब्लास्ट था या विस्फोटकों में छेड़छाड़ का नतीजा?कुछ शुरुआती इनपुट बताते हैं कि एक्सप्लोसिव सैंपल निकालने में प्रोटोकॉल फॉलो न होने से यह हादसा हुआ, लेकिन जांच एजेंसियां इसे साजिश की संभावनाओं के साथ भी देख रही हैं, विशेषकर क्योंकि इसमें वही विस्फोटक शामिल थे जो फ़रीदाबाद में लालकिला आतंकी मॉड्यूल से जुड़े मिले थे।

सुरक्षा अलर्ट: कश्मीर में सतर्कता और बढ़ाई गई

थाना ब्लास्ट के बाद श्रीनगर, अवंतीपोरा, त्राल और कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। CCTV फुटेज, फॉरेंसिक लैब रिपोर्ट, विस्फोटक कंटेनरों की स्थिति और स्टोरेज रिकॉर्ड — सबकी क्रॉस-वेरिफिकेशन शुरू हो चुकी है। नौगाम पुलिस स्टेशन का यह ब्लास्ट सिर्फ एक हादसा नहीं — कश्मीर की सुरक्षा व्यवस्था, प्रोटोकॉल और आतंकी लिंक पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

जांच रिपोर्ट सामने आने तक, घाटी में सतर्कता और तनाव दोनों बढ़े रहेंगे।

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पश्चिम बंगाल में 34 लाख आधार कार्ड ‘मृत’ पाए गए, TMC ने बताया “चुनावी साजिश”—जानिए पूरा मामला

आधार कार्ड

पश्चिम बंगाल में आधार कार्ड से जुड़ा एक बड़ा विवाद सामने आया है। UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग को सूचित किया है कि करीब 34 लाख आधार नंबर ऐसे हैं, जिन्हें रिकॉर्ड में “मृत” पाया गया है। यह जानकारी सामने आते ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, खासकर इसलिए क्योंकि राज्य में 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसे भाजपा और केंद्र सरकार द्वारा “पहले से तय चुनावी हेरफेर की साजिश” करार दिया है, जबकि केंद्र और UIDAI ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। आइए पूरा मामला विस्तार से समझते हैं—

क्या है आधार वाला पूरा विवाद?

  • UIDAI की ओर से एक रिपोर्ट में कहा गया कि:
  • 34 लाख आधार कार्ड ऐसे लोगों के नाम पर सक्रिय थे, जो अब जीवित नहीं हैं।
  • 13 लाख से अधिक मृत व्यक्तियों का आधार कार्ड कभी बना ही नहीं था।
  • यह आंकड़े 2009 से शुरू हुए आधार रजिस्ट्रेशन के डेटा पर आधारित हैं।

यह पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग के Special Intensive Revision (SIR) अभियान का हिस्सा है, जिसमें मतदाता सूची से फर्जी, डुप्लीकेट या अनुपस्थित मतदाताओं को हटाया जा रहा है।

UIDAI का कहना है कि किसी “जीवित व्यक्ति” का आधार कार्ड रद्द नहीं किया गया है—सिर्फ मृत व्यक्तियों के आधार रिकॉर्ड को अपडेट किया गया है।

आधार कार्ड

TMC क्यों नाराज़ है?

  • तृणमूल कांग्रेस ने UIDAI की इस कार्रवाई पर गहरी आपत्ति जताई है। टीएमसी का आरोप है कि
  • यह कदम मतदाता सूची से जीवित लोगों के नाम हटाने की योजना है।
  • इसे “Silent Invisible Rigging” यानी शांत, अदृश्य चुनावी हेरफेर बताया गया।
  • पार्टी ने कहा कि BJP “भूत मतदाता” बनाकर चुनाव में गड़बड़ी करना चाहती है।

TMC प्रवक्ताओं ने दावा किया कि अगर किसी भी असली मतदाता का नाम हटाया गया तो सड़क से लेकर अदालत तक लड़ाई होगी।

ममता बनर्जी ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस मुद्दे पर केंद्र को घेरा और कहा— केंद्र सरकार लोगों को कल्याणकारी योजनाओं से वंचित करने के लिए आधार कार्ड “निष्क्रिय” कर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस कदम पर चिंता जताई। ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य सरकार ऐसे लोगों को वैकल्पिक पहचान पत्र देगी, ताकि उन्हें किसी सरकारी सुविधा के लिए आधार पर निर्भर न रहना पड़े।

आधार कार्ड

उन्होंने इसे “फासीवादी साजिश” तक कहा।

भाजपा और UIDAI का जवाब विपक्ष नेता सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि “अगर किसी का कार्ड गलती से प्रभावित हुआ है तो 24 घंटे के भीतर एक्टिवेट कर दिया जाएगा।” UIDAI ने साफ कहा कि— “किसी भी आधार नंबर को रद्द नहीं किया गया है, सिर्फ मृत व्यक्तियों के रिकॉर्ड अपडेट किए गए हैं।” केंद्र ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताकर खारिज कर दिया है।

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम जारी है।अब यह मामला राज्य बनाम केंद्र की राजनीति का नया मोर्चा बन गया है। TMC इसे चुनावी साजिश बता रही है, जबकि केंद्र कह रहा है कि यह केवल “डेटा क्लीनिंग” की प्रक्रिया है। हालांकि इतनी बड़ी संख्या (34 लाख) में आधार कार्ड “मृत” पाए जाने ने पूरे राज्य में चिंता बढ़ा दी है और आने वाले समय में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।

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दिल्ली ब्लास्ट: डीएनए टेस्ट से खुलासा, डॉ. उमर उन नबी ही चला रहे थे ब्लास्ट वाली कार

दिल्ली

दिल्ली में हाल ही में हुए ब्लास्ट मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस ने पुष्टि की है कि धमाके के वक्त ह्युंडई i20 कार चला रहे व्यक्ति की पहचान डॉ. उमर उन नबी के रूप में हुई है। उनकी पहचान डीएनए टेस्ट के जरिए की गई, जिससे स्पष्ट हो गया कि विस्फोट के समय वही वाहन के स्टीयरिंग पर मौजूद थे।

दिल्ली

पुलिस के मुताबिक, ब्लास्ट के बाद डॉ. उमर उन नबी का पैर स्टीयरिंग और एक्सेलेरेटर के बीच फंसा पाया गया, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि धमाका अचानक हुआ और उनके पास बचने का मौका नहीं था। कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे शुरुआती पहचान मुश्किल हो गई थी।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह धमाका एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा हो सकता है, हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ब्लास्ट का उद्देश्य क्या था और इसमें अन्य कौन-कौन शामिल थे। फिलहाल, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और एनआईए (NIA) इस पूरे मामले की जांच कर रही हैं। टीम ने घटनास्थल से कई सबूत जुटाए हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ब्लास्ट में इस्तेमाल हुआ विस्फोटक कहां से लाया गया था।

दिल्ली

अधिकारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में डॉ. उमर उन नबी के संपर्कों और हालिया गतिविधियों की भी गहन जांच की जाएगी, ताकि इस धमाके के पीछे की सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके।

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Skin Care Tips : वेट वाइप्स से मेकअप रिमूव करना सही या गलत? एक्सपर्ट से जानें हकीकत

Skin Care

Skin Care एक्सपर्ट्स के अनुसार, वेट वाइप्स का बार-बार या ज्यादा इस्तेमाल करना स्किन के लिए नुकसानदायक हो सकता है। दरअसल इन वेट वाइप्स में मौजूद केमिकल स्किन के नेचुरल पीएच बैलेंस को बिगाड़ देते हैं। चेहरे से मेकअप हटाने के लिए ज्यादातर लोग वेट वाइप्स का इस्तेमाल करते हैं। कई बार थकान या आलस  की वजह से लोग चेहरा धोने के बजाय सीधे वेट वाइप्स  से मेकअप साफ करकरे सो जाते हैं।

यह तरीका भले ही आसान और झंझट से राहत देता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी स्किन के लिए वेट वाइप्स सही है या नहीं। ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि वेट वाइप्स  से मेकअप रिमूव करना सही है या गलत और इसे लेकर एक्सपर्ट क्या कहते हैंl

वेट वाइप्स से हो सकता है नुकसान

स्किन एक्सपर्ट्स के अनुसार वेट वाइप्स का बार-बार या ज्यादा इस्तेमाल करना स्किन के लिए नुकसानदायक हो सकता है। दरअसल इन वेट वाइप्स में मौजूद केमिकल स्किन के नेचुरल पीएच बैलेंस को बिगाड़ देते हैं। इसकी वजह ये स्किन का नेचुरल ऑयल खत्म हो जाता है, जिससे ड्राइनेस, जलन या खुजली जैसी समस्याएं स्किन पर बढ़ने लगती है।

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वेट वाइप्स पूरी तरह साफ नहीं करता है चेहरा

मेकअप हटाते समय वेट वाइप्स से चेहरा साफ करने पर ऐसा लगता है कि सारा मेकअप निकल गया है। लेकिन रियलिटी में यह सिर्फ चेहरे के ऊपरी हिस्से को साफ करते हैं। चेहरे के पोर्स में बची गंदगी और मेकअप के छोटे कण पूरी तरह नहीं निकलते है, जिससे पोर्स बंद हो जाते हैं और एक्ने या पिंपल्स की समस्याएं भी शुरू हो जाती है।

वहीं ज्यादातर वेट वाइप्स में अल्कोहल, फ्रेगरेंस और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं जो स्किन को नुकसान पहुंचाते हैं। यह तत्व स्किन को ड्राई बना देते हैं और सेंसेटिव स्किन वाले लोगों में रशेस या जलन पैदा कर सकते हैं। इसके अलावा यह वेट वाइप्स एक बार इस्तेमाल के बाद फेंक दिए जाते हैं जिससे प्लास्टिक वेस्ट बढ़ता है और एनवायरमेंट को भी नुकसान होता है।

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सही तरीके से कैसे हटा सकते हैं मेकअप?

अगर आप स्किन को हेल्दी रखना चाहते हैं तो वेट वाइप्स की जगह माइल्ड क्लींजर, माइलेज वाटर या क्लींजर बाम का इस्तेमाल करें। यह प्रोडक्ट स्किन को बिना नुकसान पहुंचाए गहराई से साफ करते हैं और नेचुरल ग्लो भी बनाए रखते हैं। वहीं वेट वाइप्स का भी आप कभी-कभी इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन रोजाना इसका इस्तेमाल करना सही नहीं है। लंबे समय तक लगातार इसका इस्तेमाल स्किन को इरिटेटेड, ड्राई और अनहेल्दी बन सकता है। अगर आप अपनी स्किन को नेचुरली, हेल्दी और ग्लोइंग रखना चाहते हैं तो वेट वाइप्स की जगह क्लीनिंग प्रोडक्ट्स यूज करें।

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सरकार का बड़ा एलान, Red Fort के पास हुआ ब्लास्ट अब ‘आतंकी वारदात’ घोषित

ब्लास्ट

लालकिला मेट्रो स्टेशन के नजदीक हुए कार ब्लास्ट पर केंद्र सरकार ने बड़ी पुष्टि कर दी है—कैबिनेट बैठक में इसे “Delhi Blast – A Terror Attack” घोषित किया गया। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में प्रस्ताव पास कर सरकार ने कहा कि यह घटना देश की सुरक्षा को चुनौती देने वाली संगठित आतंकी साजिश है। सरकार ने शून्य-सहनशीलता की नीति पर जोर देते हुए पीड़ितों के परिवारों के लिए मुआवजा और केंद्रीय सहायता की घोषणा की।

घटना की तस्वीर: मौतों का आंकड़ा बढ़ा, कई गंभीर घायल

सोमवार शाम 6:45 बजे के करीब हुए इस जोरदार कार ब्लास्ट में 12 लोगों की मौत और 20 से ज्यादा लोग घायल हुए। धमाका इतना भीषण था कि आसपास खड़ी 3 से 4 गाड़ियाँ भी आग की चपेट में आ गईं। चश्मदीदों के अनुसार, विस्फोट की आवाज़ कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी और घटना स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। घायल लोगों को LNJP, हिंदू राव और अरुणा आसफ अली अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से कई की हालत नाजुक बताई जा रही है।

जांच: संदिग्ध मॉड्यूल, विस्फोटक बरामद और पुख्ता सुराग

पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने जांच में इसे “सुनियोजित आतंकी हमला” माना है। शुरुआती जांच में कार मालिक फरार पाया गया है और घटनास्थल से RDX-जैसा विस्फोटक, टाइमर-डिवाइस और संदिग्ध इलेक्ट्रॉनिक सर्किट्स मिलने की पुष्टि हुई है। एजेंसियां इस हमले को हाल ही में पकड़े गए 2900 किलो विस्फोटक मॉड्यूल और दिल्ली-NCR में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जोड़कर भी जांच कर रही हैं। NIA और स्पेशल सेल ने मामला संभाल लिया है और कई राज्यों में रेड शुरू हो चुकी है।

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देश-दुनिया की प्रतिक्रिया: सुरक्षा पर फिर बड़े सवाल

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने घटना को “कायराना आतंकी हमला” बताते हुए दुख जताया और जांच तेज़ करने के निर्देश दिए। अमेरिका, फ्रांस, जापान समेत कई देशों ने भारत के साथ एकजुटता दिखाई। लेकिन देश में एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं—दिल्ली जैसे हाई-सेक्योरिटी ज़ोन में सुरक्षा चूक इतनी बड़ी कैसे हो गई? क्या सिस्टम इतनी गंभीर वारदात का समय रहते पता नहीं लगा सकता?

क्या सुरक्षा एजेंसियों को अब और आक्रामक होना पड़ेगा?

“Delhi Blast” ने राजधानी की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सरकार ने कहा है—“दोषी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा।” अब निगाहें NIA की जांच, गिरफ्तारी और उस नेटवर्क पर हैं जो यह हमला करवाने में शामिल हो सकता है।

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CAT 2025 का एडमिट कार्ड हुआ जारी:-कहां और कैसे कर सकते हैं डाउनलोड एडमिट कार्ड जारी—डाउनलोड कैसे करें

CAT 2025

देशभर के MBA-प्रत्याशियों के लिए बड़ी खबर है: Common Admission Test 2025 (CAT 2025) का एडमिट कार्ड 12 नवंबर 2025 से आधिकारिक वेबसाइट iimcat.ac.in पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध हो गया है।उम्मीदवार अपने यूज़र ID और पासवर्ड से लॉग इन करके कर सकते हैं डाउनलोड — एडमिट कार्ड का प्रिंट-आउट और एक वैध फोटो ID (आधार, पैन, पासपोर्ट आदि) ले जाना अनिवार्य है।

CAT 2025

परीक्षा विवरण और तैयारी के टिप्स

CAT 2025 परीक्षा 30 नवंबर 2025 को आयोजित होगी, तीन शिफ्टों में (सुबह-दोपहर-शाम) देश भर के लगभग 170 प्रतिशत शहरों में। एग्जाम के लिए एडमिट कार्ड में दिए गए केन्द्र, स्लॉट और रिपोर्टिंग टाइम को तुरंत वेरिफाई कर लें। परीक्षा के दिन इलेक्ट्रॉनिक उपकरण (मोबाइल, स्मार्टवॉच) ले जाने पर प्रतिबंध है — सिर्फ प्रिंटेड एडमिट कार्ड, फोटो ID और निर्धारित नियमों का पालन करें।

अगर आपने CAT 2025 के लिए पंजीकरण किया है, तो अब आपका MBA का सपना एक कदम और करीब आ गया है। अभी सिर्फ एक चीज़ याद रखें—अपना एडमिट कार्ड समय पर डाउनलोड करें, विवरण सही-से चेक करें और तैयारी में कोई कमी न रखें। “सफलता वही पायेगा जो समय से आगे निकलता है।”

**All the best to every aspirant!**

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दिल्ली में क्यों जरूरी हुआ पॉल्यूशन पर Emergency-Mode? GRAP 3 क्या है और क्यों आया?

GRAP 3

जब दिल्ली-एनसीआर में Air Quality Index (AQI) लगातार बढ़कर ‘सेवियर’ श्रेणी (401-450) में पहुंच जाता है, तो Graded Response Action Plan (GRAP) का स्टेज 3 स्वतः लागू हो जाता है। मंगलवार को AQI 425 तक पहुँचने के बाद राजधानी में GRAP 3 के कड़े नियम तुरंत लागू कर दिए गए।

GRAP 3 के तहत क्या-क्या बंद हुआ?

स्टेज 3 लागू होते ही निर्माण-काम (Construction & Demolition), स्टोन क्रशर-माइनिंग, कच्चे माल की ढुलाई जैसी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगी। सार्वजनिक वाहनों, विशेष तौर पर BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल चारपहिया वाहनों के संचालन पर सख्त नियंत्रण हुआ। स्कूलों में कक्षा-5 तक इंटरनल या ऑनलाइन मोड की सुविधा दी गई और खुले में कचरा जलाना तथा गैर-जरूरी जेनरेटर इस्तेमाल पर रोक लगाई गई।

GRAP 3

क्या नियम काफी होंगे? या जिम्मेदारी बनती है?

GRAP 3 समय-बद्ध आपात उपाय है, लेकिन हवा तुरंत साफ़ हो जाएगी—यह झूठी उम्मीद है। मुद्दा सिर्फ प्रशासन का नहीं; नागरिकों, वाहन-उपयोगकर्ता, निर्माणकर्ता, और औद्योगिक इकाइयों का व्यवहार भी बदलना ज़रूरी है। क्या हम सिर्फ सर्दियों में प्रतिबंध लगाकर उद्योग-वाहन-धूल पर अंकुश लगा लेंगे? या पूरे साल जीवनशैली-परिवर्तन के लिए भी तैयार रहेंगे?

जब राजधानी ने “साँस लेने का अधिकार” खोने जैसा अनुभव किया, तो यह सिर्फ अभियान नहीं बल्कि परिवर्तन-सूचक चुनौती बन गई। GRAP 3 सिर्फ पहला कदम है—अब सवाल है: क्या हम इस नियम को आदत, जिम्मेदारी और कार्रवाई में बदल पाएंगे? क्योंकि हवा को नहीं बल्कि भविष्य को साफ-सुरक्षित बनाना है।

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चीन को झटका : महज कुछ महीने पुराना पुल ढह गया! — Hongqi Bridge Disaster गर्व से खुला ब्रिज हो गया ध्वस्त

Hongqi Bridge

चीन के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से, Maerkang (सिचुआन प्रांत) में स्थित Hongqi Bridge, जिसकी लंबाई लगभग 758 मीटर थी, साल 2025 में ही उद्घाटित हुआ था। यह पुल चीन के मुख्य क्षेत्र को तिब्बत से जोड़ने वाले नेशनल हाईवे का महत्वपूर्ण हिस्सा था — महज कुछ महीने बाद ही यह गर्व का प्रतीक बिखर गया।

जान-माल की नहीं हुई क्षति:-

सोमवार को आसपास की ढलानों में दरारे और जमीन में शिफ्टिंग देखी गई थी, जिसके बाद पुलिस ने पुल को ट्रैफिक के लिए बंद कर दिया था। मंगलवार को अचानक आए लैंडस्लाइड्स ने पुल के सपोर्टिंग हिल्स और रोडबेड को तोड़ दिया — पिलर्स झुक गए और पुल का एक बड़ा हिस्सा भारी आवाज़ के साथ नदी में समा गया। खुशकिस्मती रही कि पहले ही बंद किया गया था और इसलिए कोई जान-माल का बड़ा नुकसान नहीं हुआ।

Hongqi Bridge

तकनीकी मुसीबत या भू-भौतिक भूल?

प्रारंभिक जाँच में पाया गया कि इस पहाड़ी इलाके में लैंडस्लाइड का इतिहास रहा है — जियोलॉजिकल अस्थिरता, स्ट्रक्चरल शिफ्ट और मौसम-परिवर्तन ने मिलकर पुल की नींव पर संकट मढ़ा। अब सवाल यह है कि इतनी जल्दी तैयार हुए और महत्वाकांक्षी पुल-प्रोजेक्ट में क्या इन जोखिमों को पर्याप्त रूप से समझा गया था? क्या बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में जियो-कंडीशंस, जलवायु-परिवर्तन और निगरानी को पूरी गंभीरता से लेना चाहिए?

सतर्कता और सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण:-

Hongqi Bridge का ध्वस्त होना सिर्फ एक निर्माण-चूक नहीं — यह निर्माण, तैयारी और भविष्य-रूपांतरण के बीच का गहरा प्रश्न है। जब विशाल प्रोजेक्ट्स कभी कुछ घंटे में धराशायी हो जाएँ, तो सिर्फ कीमत से नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, निगरानी और सतत तैयारी से भी परिणाम जुड़े होते हैं।

चीन नेशनल हाईवे में इस हादसे ने साबित कर दिया है कि उद्घाटन के बाद भी हमें सतर्क रहना चाहिए। हम सब के लिए सबक यही है — तेजी महत्वपूर्ण है, पर स्थायित्व, सुरक्षा और उचित योजना और भी महत्वपूर्ण।

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UP Government का बड़ा फैसला: ‘Vande Mataram’ अनिवार्य—शिक्षा व्यवस्था में बदलाव या विवाद की नई लहर?

Vande Mataram

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषण किया है कि अब राज्य के सभी स्कूलों व कॉलेजों में राष्ट्रगीत Vande Mataram का गायन अनिवार्य होगा। उनके अनुसार यह कदम युवाओं में भारत माता, मातृभूमि और राष्ट्रीय एकता के प्रति सम्मान और गर्व की भावना जागृत करने का उद्देश्य रखता है।

कैसे होगा क्रियान्वयन – और विवाद के पहलू

शिक्षा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि प्रतिदिन या नियमित रूप से प्रार्थना सभा में Vande Mataram गाया जाए, और सभी शैक्षिक संस्थानों को इस आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।

हालाँकि, इस फैसले की प्रतिक्रिया मिश्रित रही है—कुछ धार्मिक संगठनों ने इसे “धार्मिक आज्ञाकारिता” से जोड़कर देखा है, विशेषकर मुस्लिम समुदाय में आलोचना उठी है जिसमें कहा गया कि यह उनकी आस्थाओं के खिलाफ हो सकता है।

Vande Mataram

सवाल जो चर्चा में हैं – शिक्षा, संस्कृति और आज़ादी

क्या इस तरह का आदेश शिक्षा-व्यवस्था में देशभक्ति और एकता को बढ़ावा देगा या शैक्षिक संस्थानों के पाठ्यक्रम और छात्रों की स्वायत्तता पर असर डालेगा? क्या जबरन गाना सुनाना सही तरीका है या इसे छात्रों की सहमति और समझ से जोड़ना चाहिए? और सबसे बड़ा सवाल—क्या यह कदम केवल प्रतीकात्मक है या इसके पीछे सुसंगत बदलाव और समाज-सांस्कृतिक समावेशिता की रणनीति भी है?

इस नीति-घोषणा ने उत्तर प्रदेश में शिक्षा-विभाग, सामाजिक-संघ और नागरिकों को सक्रिय बहस के केंद्र में ला दिया है। अब यह देखना होगा कि यह नीति व्यवहार में कितनी प्रभावी होगी और क्या यह आदेश बदलाव का संकेत है या विवाद की शुरुआत।

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इस्लामाबाद कोर्ट के पास आत्मघाती हमला, 12 लोगों की मौत, कई घायल

इस्लामाबाद

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मंगलवार दोपहर एक भीषण आत्मघाती धमाका हुआ, जिसमें कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई और 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए। यह धमाका G-11 इलाके में स्थित डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट के मुख्य गेट के पास हुआ — जहां आम दिनों में वकील, मुवक्किल और राहगीरों की भारी भीड़ रहती है।

धमाका कैसे हुआ?

स्थानीय पुलिस के अनुसार, विस्फोट एक कार बम से हुआ, जिसे कोर्ट परिसर के बाहर पार्क किया गया था। शुरुआती जांच में पता चला है कि यह आत्मघाती हमला था — क्योंकि घटनास्थल से हमलावर का सिर बरामद किया गया है। धमाका इतना शक्तिशाली था कि उसकी आवाज़ लगभग 6 किलोमीटर तक सुनाई दी। पास खड़ी कई कारें और मोटरसाइकिलें पूरी तरह जलकर राख हो गईं, और आसपास की दुकानों के शीशे टूट गए।

एक चश्मदीद ने बताया, “मैं कोर्ट जा रहा था तभी जोरदार धमाका हुआ। धुआं हर तरफ फैल गया, लोग चीख-पुकार मचाते हुए भागने लगे।”

इस्लामाबाद

राहत और बचाव अभियान

धमाके के तुरंत बाद पुलिस, बम निरोधक दस्ते और रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुंचीं। घायलों को PIMS (Pakistan Institute of Medical Sciences) अस्पताल ले जाया गया, जहां कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। अस्पताल प्रशासन ने आपात स्थिति घोषित कर दी है और खून की आपूर्ति बढ़ा दी गई है।

मृतकों में ज्यादातर राहगीर, वकील और आम नागरिक शामिल बताए जा रहे हैं जो कोर्ट की सुनवाई के लिए आए थे।

जांच और सुरक्षा स्थिति

धमाके के बाद पूरे इलाके को सील कर दिया गया। फॉरेंसिक टीमों ने घटनास्थल से सबूत जुटाने शुरू कर दिए हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह जांच की जा रही है कि विस्फोटक वाहन में रखा गया था या किसी व्यक्ति ने खुद को उड़ाया। अभी तक किसी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां शक कर रही हैं कि इसके पीछे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) या उसके किसी सहयोगी गुट का हाथ हो सकता है।

इस्लामाबाद

पूरे शहर में हाई अलर्ट

हमले के बाद इस्लामाबाद और रावलपिंडी में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। सरकारी दफ्तरों, न्यायालयों और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस ने सभी प्रवेश बिंदुओं पर नाकेबंदी कर दी है और संदिग्ध वाहनों की जांच की जा रही है।

हाल की अन्य आतंकी घटनाएं

  • यह धमाका ऐसे समय हुआ है जब पाकिस्तान में आतंकी गतिविधियां फिर से बढ़ रही हैं।
  • सोमवार शाम, खैबर पख्तूनख्वा के वाना शहर में सेना द्वारा संचालित कैडेट कॉलेज पर आतंकी हमले की कोशिश नाकाम की गई थी, जिसमें 5 आतंकी मारे गए।
  • उसी दिन डेरा इस्माइल खान में IED विस्फोट में 16 सुरक्षाकर्मी घायल हुए थे।
  • अब राजधानी इस्लामाबाद में यह हमला, सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है

अभी तक किसी देश की आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इस हमले को पाकिस्तान में “बढ़ती अस्थिरता” का संकेत बताया है। इस्लामाबाद कोर्ट के पास हुआ यह आत्मघाती हमला पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल खड़ा करता है। राजधानी जैसे सुरक्षित क्षेत्र में इतने बड़े धमाके ने सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है।

जांच जारी है और पुलिस ने कहा है कि “हम इस हमले के पीछे के दोषियों को जल्द बेनकाब करेंगे।”

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बांग्लादेश हिंसा : ग्रामीण बैंक मुख्यालय पर बम हमला, ढाका में तनाव बढ़ा

ढाका

ढाका में नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस द्वारा स्थापित ग्रामीण बैंक के मुख्यालय पर बम से हमला किया गया है। इस हमले के बाद राजधानी ढाका में पहले से जारी हिंसा और तनाव की स्थिति और भी गंभीर हो गई है।

ढाका

रिपोर्ट्स के अनुसार, अज्ञात हमलावरों ने मीरपुर स्थित ग्रामीण बैंक की इमारत पर कई बम फेंके, जिससे इमारत को मामूली नुकसान पहुंचा। इस घटना के बाद सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और इलाके में तनाव का माहौल है। यह हमला बांग्लादेश में चल रहे राजनीतिक उथल-पुथल के बीच हुआ है, जिससे देश भर में चिंता बढ़ गई है। अभी तक किसी भी समूह ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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भारत की मदद से मालदीव में नया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा शुरू — पर्यटन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

मालदीव

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने सोमवार को हनीमाधू इंटरनेशनल एयरपोर्ट का भव्य उद्घाटन किया। यह हवाई अड्डा भारत सरकार की लाइन ऑफ क्रेडिट (Line of Credit) के तहत तैयार किया गया है। इस प्रोजेक्ट को भारत के एक्सिम बैंक (Exim Bank) ने वित्तीय सहायता दी है।

यह आधुनिक हवाई अड्डा मालदीव के उत्तरी क्षेत्र के लिए बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि अब यहां बड़े-बड़े विमान जैसे एयरबस A320 और बोइंग 737 भी आसानी से उतर सकेंगे।

मालदीव

परियोजना की खास बातें:

  • 2.43 किलोमीटर लंबा नया रनवे बनाया गया है।
  • अत्याधुनिक टर्मिनल बिल्डिंग की क्षमता सालाना 1.3 मिलियन यात्रियों की है।
  • साथ ही कार्गो टर्मिनल, ईंधन भंडारण केंद्र (Fuel Farm) और फायर स्टेशन जैसी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं।

राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू ने कहा कि यह प्रोजेक्ट मालदीव के उत्तरी इलाकों में पर्यटन और आर्थिक विकास को नई दिशा देगा। इस हवाई अड्डे के जरिए देश के लोगों को बेहतर रोजगार और व्यापारिक अवसर मिलेंगे। यह परियोजना भारत और मालदीव के बीच मजबूत साझेदारी और सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

हनीमाधू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सिर्फ एक इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भारत-मालदीव दोस्ती की उड़ान है — जो आने वाले समय में दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाएगी।

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मेट्रो स्टेशन के पास विस्फ़ोट : Red Fort के पास दिल दहला देने वाली घटना, 8 की मौत, राजधानी हाई-अलर्ट

Red Fort

सोमवार शाम के करीब 6:30-7:00 बजे, दिल्ली के Red Fort Metro Station गेट नंबर 1 के समीप एक खड़ी कार में जोरदार विस्फोट हुआ।धमाके की आवाज इतनी तीव्र थी कि आसपास का इलाका दहल गया—रिपोर्ट्स के अनुसार धमाके के बाद तीन-चार अन्य वाहन भी आग की चपेट में आ गए।

जान-माल की हानि और मौजूदा हालत

घटना में कम-से-कम 10 लोगों की मौत और 24 अन्य घायल बताए जा रहे हैं, जिन्हें प्रमुख रूप से लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल में भर्ती कराया गया।फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर जुटीं—7 से ज्यादा दमकल गाड़ियाँ भेजी गईं और आसपास का इलाका तुरंत घेर लिया गया। बताया गया है कि कई घायलों की हालत गंभीर है और मृतकों की संख्या आगे बढ़ सकती है।

जांच की दिशा और उठ रहे सवाल

अब तक विस्फोट की सटीक वजह खुलकर सामने नहीं आई है। सुरक्षा एजेंसियों ने मामले को अतिसंवेदनशील माना है और “आतंकी साजिश” की संभावना भी खंगाली जा रही है।

Red Fort

सवाल खड़े हैं: दिल्ली जैसा संवेदनशील इलाका कैसे अचानक इतनी बड़ी सुरक्षा चूक का शिकार हुआ? क्या हाल ही में पकड़ी गई 2,900 किलो विस्फोटक की खेप और टेरर मॉड्यूल से इसका संबंध हो सकता है?

राजधानी की रक्षा, सवालों के घेरे में

इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सिर्फ हाई-अलर्ट लगाना पर्याप्त नहीं—पूरी तंत्र को एक्टिव-मॉनिटरिंग और तेजी से प्रतिक्रिया देने में सक्षम होना होगा। जहां नागरिकों को असुरक्षित माना गया, वहीं प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक परीक्षा की घड़ी है—क्या वे इस तरह की घटना के बाद अपनी तैयारियों को भावी खतरों से मुकाबला करने योग्य बनायेंगे?

आखिरकार, जब राजधानी की सड़कों पर आत्मनिर्भर सुरक्षा भी सवालों के घेरे में आ जाए—तो सिर्फ जवाब नहीं, कार्रवाई की आवश्यकता बढ़ जाती है।

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मथुरा में दर्दनाक हादसा : तेज़ रफ्तार कार ने दो राहगीरों को मारी टक्कर, CCTV में कैद हुई घटना

मथुरा

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में सोमवार को एक भयावह सड़क हादसे ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। शहर के व्यस्त इलाके में एक तेज़ रफ्तार कार ने सड़क पर चल रहे दो राहगीरों को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। इस दर्दनाक घटना में दोनों व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और उन्हें तुरंत नज़दीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

घटना सोमवार सुबह की बताई जा रही है, जब सड़क पर सामान्य यातायात चल रहा था। अचानक एक कार तेज़ रफ्तार में आई और दो लोगों को पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों राहगीर सड़क किनारे जा गिरे और मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई।

CCTV फुटेज में कैद हुई पूरी घटना

हादसे की पूरी वारदात सड़क किनारे लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है। फुटेज में साफ़ दिखाई देता है कि कार अचानक तेज़ रफ्तार से आती है और सीधे पैदल चल रहे लोगों को टक्कर मार देती है। टक्कर के बाद कार कुछ मीटर तक घिसटती हुई दिखाई दी और फिर वहां से फरार हो गई।

पुलिस ने शुरू की जांच

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायल व्यक्तियों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज जब्त कर ली है और आरोपी कार चालक की तलाश शुरू कर दी है। प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि हादसे के वक्त कार की स्पीड बेहद ज़्यादा थी।

मथुरा

स्थानीय लोगों की मदद से बचाई गई जान

घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुंचकर घायलों की मदद की और एंबुलेंस बुलाकर उन्हें अस्पताल भिजवाया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार चालक ने न तो हॉर्न बजाया और न ही स्पीड कम की, जिससे हादसा टल नहीं सका।

सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

मथुरा में हुए इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर में कई जगह बिना स्पीड ब्रेकर और सिग्नल के वाहन तेज़ी से दौड़ते हैं, जिससे इस तरह की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं।

 नोट : पुलिस ने अपील की है कि कोई भी व्यक्ति अगर इस घटना से जुड़ी जानकारी रखता है या कार को पहचानता है, तो तुरंत स्थानीय थाने से संपर्क करे।

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जल्द महंगे होंगे मोबाइल रिचार्ज : Jio, Airtel और Vi दिसंबर से बढ़ा सकते हैं टैरिफ, जानिए कितना पड़ेगा असर

मोबाइल रिचार्ज

भारत में मोबाइल उपयोगकर्ताओं को जल्द ही जेब ढीली करनी पड़ सकती है, क्योंकि देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियां रिलायंस जियो (Jio), भारती एयरटेल (Airtel) और वोडाफोन आइडिया (Vi) अपने मोबाइल रिचार्ज प्लान की कीमतों में करीब 10% तक बढ़ोतरी करने की तैयारी में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह टैरिफ हाइक दिसंबर 2025 से लागू हो सकती है, हालांकि कुछ छोटे प्लान्स में बदलाव पहले ही शुरू हो चुके हैं।

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?

टेलीकॉम कंपनियों का कहना है कि नेटवर्क के रखरखाव और उन्नयन पर खर्च लगातार बढ़ रहा है।5G नेटवर्क के विस्तार, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, और बढ़ती संचालन लागत के कारण कंपनियों को अपने टैरिफ बढ़ाने की जरूरत महसूस हो रही है। इसके अलावा, वे प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व (ARPU) को बढ़ाना चाहती हैं, जो अभी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी कम है। उदाहरण के तौर पर, भारत में ARPU लगभग ₹200 के आसपास है, जबकि अमेरिका जैसे देशों में यह ₹800-₹1000 तक पहुंचता है।

उपयोगकर्ताओं पर क्या होगा असर?

आम उपभोक्ताओं के लिए इसका सीधा असर जेब पर पड़ेगा। जिन प्लानों की कीमतें फिलहाल ₹719 या ₹839 हैं, वे बढ़कर ₹799 या ₹899 तक पहुंच सकती हैं। वहीं, 84 दिनों की वैधता वाला 2GB/दिन का प्लान, जो अभी ₹949 में मिलता है, उसकी कीमत ₹999 से ₹1,049 के बीच जा सकती है।

मोबाइल रिचार्ज

कुछ सस्ते प्लान बंद हो सकते हैं और नई, थोड़ी महंगी योजनाएं शुरू की जा सकती हैं। ज्यादा डेटा इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को इसका सबसे ज्यादा असर महसूस होगा।

भारत में अब तक सबसे सस्ता डेटा

भारत अब तक दुनिया में सबसे सस्ते मोबाइल डेटा वाले देशों में शामिल रहा है। पहले प्रति GB डेटा की औसत कीमत ₹10 से भी कम थी। लेकिन अब यह स्थिति धीरे-धीरे बदल रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कंपनियां कीमतें बढ़ा रही हैं, तो इसके साथ नेटवर्क की गुणवत्ता, कॉल क्वालिटी और 5G कवरेज में भी सुधार देखने को मिल सकता है।

एक्सपर्ट की राय

टेलीकॉम विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उद्योग की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए जरूरी है। “अगर टेलीकॉम कंपनियों को बेहतर सेवा और तेज नेटवर्क देना है, तो उनके लिए उचित राजस्व पाना भी आवश्यक है। यह बढ़ोतरी ग्राहकों के लिए थोड़ी मुश्किल जरूर होगी, लेकिन इससे नेटवर्क क्वालिटी में सुधार आएगा।”— टेलीकॉम एनालिस्ट, राकेश अग्रवाल

सारांश

दिसंबर 2025 से भारत की बड़ी टेलीकॉम कंपनियां — जियो, एयरटेल और वोडाफोन आइडिया — अपने मोबाइल रिचार्ज और डेटा प्लानों की कीमतों में लगभग 10% की बढ़ोतरी कर सकती हैं। यह फैसला बढ़ते नेटवर्क खर्च और 5G विस्तार की जरूरतों के चलते लिया जा रहा है। उपयोगकर्ताओं को अब रिचार्ज और डेटा पैक के लिए अधिक पैसे चुकाने पड़ सकते हैं। हालांकि, इस बढ़ोतरी के साथ ही नेटवर्क की गुणवत्ता और इंटरनेट स्पीड में सुधार देखने की उम्मीद भी की जा रही है।

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दिल्ली में जब हवा हुई जहरीली- (आया Breath Rights)

दिल्ली

प्रदूषण की तबाही: दिल्ली की आबो हवा में घुटन रविवार को राजधानी India Gate में हजारों युवा, माता-पिता और पर्यावरण कार्यकर्ता एक साथ जमा हुए, क्योंकि दिल्ली में वायु गुणवत्ता चरम स्तर पर पहुँच चुकी है। AQI कई इलाकों में 400 के ऊपर दर्ज हुआ, जिससे लोगों ने यह सवाल उठाया—“हमें साँस लेने का हक़ क्यों नहीं मिला?”
भीषण स्मॉग में बच्चों, बुज़ुर्गों और रास्ते-पर काम करने वालों को सबसे ज़्यादा ख़तरा बताया गया, और प्रदर्शनकारियों ने सरकार से “कार्रवाई की लड़ाई” मांगी, सिर्फ बयान नहीं।

गुस्सा, गिरफ्तारी और प्रश्न

दिल्ली

प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन पुलिस ने “अनधिकृत सभा” के आधार पर कई लोगों को हिरासत में लिया।
नफे-नुकसान का खेल यहाँ सिर्फ गाड़ियों और पटाखों का नहीं—बल्कि निर्माण-धूल, ठेका-काम, वेस्ट-जलाना और प्रशासन की निष्क्रियता का भी है। सवाल उठता है: क्या सिर्फ सरकार दोषी है, या हम खुद अपनी भूमिका निभा पाए हैं?

हवा को जवाब देने की देर

यह धरना सिर्फ एक आंदोलन नहीं—यह चेतावनी है कि दिल्ली जब तक “साँस लेने-का अधिकार” नहीं देगा, सामाजिक स्वास्थ्य संकट गहराता रहेगा। अब वक्त है सरकार और नागरिक दोनों की सहभागिता की—क्या इसे सिर्फ अगले सर्दियों का मौसम कहकर टाल देंगे या इस बार परिवर्तन की दिशा चुनेंगे?

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HTET 2025 Shocking Results: केवल 14% Aspirants ने पास किया — क्या Teacher बनने की राह बन रही और मुश्किल? 

HTET

हरियाणा के HTET 2025 (Haryana Teacher Eligibility Test) के नतीजे जबरदस्त इंतजार के बाद घोषित हो गए हैं। Board of School Education Haryana (BSEH) की वेबसाइट – bseh.org.in – पर PRT (प्राथमिक शिक्षक), TGT (प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक) और PGT (पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षक) स्तर के लिए अलग-अलग मेरिट लिस्ट तथा स्कोर-कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं। इस अप्रैल-मई सत्र की परीक्षा में सिर्फ लगभग 14% ही उम्मीदवार सफल हो पाए हैं, जो बताते हैं कि क्वालिफाई करना अब पहले से भी कठिन हो गया है।

कटऑफ, वैधता और आगे की राह

इस बार सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम अंक 150 में से 90 अंक (60%) तय किए गए थे, जबकि हरियाणा-डोमिसाइल आरक्षित श्रेणी के लिए सिर्फ 82 अंक (55%) पर्याप्त थे।

HTET

HTET प्रमाणपत्र अब आजीवन वैध होगा, यानी पास-उम्मीदवारों को बार-बार परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं होगी। लेकिन इस सफलता के बावजूद, बाकी ≈ 86% उम्मीदवारों के सामने अब नए अवसर तलाशने की चुनौतियाँ हैं।

भविष्य के लिए निर्णय

अगर आप सफल हुए हैं तो बधाई — अब सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने की संभावना खुलती है, लेकिन यह सिर्फ शुरुआत है। यदि आप नहीं पास हो पाए तो मुस्कुरा-कर हार मानने की जगह इसे आने वाले सिलेबस, तैयारी-स्टाइल और टाइम-मैनेजमेंट सुधारने का मौका जानिए।

क्या HTET के इतने कम पास प्रतिशत ने संकेत दिया है कि शिक्षक पात्रता की परीक्षा बहुत सख्त हो गई है? या यह संकेत है कि आवेदकों को तैयारी-मानक और शिक्षा-क्षेत्र में सुधार लाना होगा? आपका अगला कदम ही तय करेगा कि आप इस चुनौती को सफलता की सीढ़ी बनाते हैं या छोड़ देते हैं।

अब लॉग-इन करें, अपना स्कोर-कार्ड डाउनलोड करें और आगे की तैयारी-रणनीति तय करें — क्योंकि अब शिक्षक बनने का सपना फिर से अपनी सीट पक्का कर सकता है।

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Groww IPO Allotment Today : जानिए कब और कैसे चेक करें स्टेटस, GMP में गिरावट से लिस्टिंग गेन पर सस्पेंस

Groww

फिनटेक प्लेटफॉर्म Groww (Billionbrains Garage Ventures Ltd) का बहुप्रतीक्षित ₹6,632 करोड़ का IPO अब अलॉटमेंट के फाइनल स्टेज में पहुंच चुका है। आज यानी 10 नवंबर 2025 को इसका IPO allotment status फाइनल होने की संभावना है। निवेशक बीएसई (BSE), एनएसई (NSE), या रजिस्ट्रार की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन अपने शेयर अलॉटमेंट की स्थिति चेक कर सकते हैं।

Groww IPO का ओवरव्यू

  • Groww का IPO 4 नवंबर से 7 नवंबर 2025 तक खुला था।
  • कंपनी ने ₹95 से ₹100 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया था।
  • इसमें ₹1,060 करोड़ के नए शेयर और ₹5,572.30 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल था।
  • IPO को निवेशकों से शानदार रिस्पॉन्स मिला — यह कुल 17.60 गुना सब्सक्राइब हुआ।
  • QIB (Qualified Institutional Buyers): 22.02 गुना
  • NII (Non-Institutional Investors): 14.20 गुना
  • Retail Investors: 9.43 गुना

यह आंकड़े बताते हैं कि निवेशकों का भरोसा Groww के बिज़नेस मॉडल और ग्रोथ पोटेंशियल पर मजबूत है।

GMP में तेज गिरावट, घटा लिस्टिंग गेन का जोश

Groww

जब IPO खुला था, तब Groww का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) लगभग ₹16-17 प्रति शेयर था — यानी करीब 16-17% का संभावित लिस्टिंग गेन दिखा रहा था। हालांकि अब हालात बदल गए हैं। मार्केट रिपोर्ट्स के मुताबिक, GMP गिरकर अब सिर्फ ₹4-5 प्रति शेयर रह गया है। इसका मतलब है कि ₹100 के अपर प्राइस बैंड पर अब निवेशकों को सिर्फ 4-5% का मामूली लाभ मिल सकता है। GMP में यह गिरावट मार्केट की ठंडी सेंटीमेंट और हालिया IPOs के मिश्रित प्रदर्शन को दर्शाती है।

IPO अलॉटमेंट स्टेटस ऐसे करें चेक

निवेशक अपने Groww IPO अलॉटमेंट की स्थिति नीचे बताए गए किसी भी माध्यम से चेक कर सकते हैं:

🔹 BSE वेबसाइट पर:

  1. bseindia.com/investors/appli_check.aspx पर जाएं
  2. “Equity” चुनें और लिस्ट में से “Groww” चुनें
  3. एप्लिकेशन नंबर और पैन दर्ज करें
  4. “Search” पर क्लिक करें

NSE वेबसाइट पर:

  1. nseindia.com पर जाएं
  2. “Groww” का चयन करें
  3. एप्लिकेशन नंबर या पैन डालकर सर्च करें

Registrar वेबसाइट पर (MUFG Intime India / KFin Technologies): इनकी वेबसाइट पर जाकर “IPO Allotment Status” सेक्शन में Groww चुनें और एप्लिकेशन डिटेल्स डालें।

Groww App या Broker Platform:

अगर आपने Groww या किसी अन्य ब्रोकिंग ऐप से आवेदन किया है, तो वहीं पर भी अलॉटमेंट की जानकारी मिल जाएगी।

आगे की डेट्स: लिस्टिंग और रिफंड

  • Allotment Finalization: 10 नवंबर 2025
  • Refund Process शुरू: 11 नवंबर 2025
  • Groww शेयर लिस्टिंग: 12 नवंबर 2025 (BSE और NSE दोनों पर)

निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है यह अलॉटमेंट

Groww IPO की जबरदस्त सब्सक्रिप्शन ने कंपनी की मार्केट में मजबूत एंट्री की उम्मीदें बढ़ाई थीं, लेकिन GMP की गिरावट ने लिस्टिंग डे पर अनिश्चितता पैदा कर दी है। जो निवेशक लंबी अवधि के नजरिए से निवेश कर रहे हैं, वे कंपनी के डिजिटल फाइनेंस और इन्वेस्टमेंट टेक्नोलॉजी सेक्टर में ग्रोथ पोटेंशियल को लेकर अभी भी आशावादी हैं।

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पाकिस्तान में नई सैन्य क्रांति: बना चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस का पद

पाकिस्तान

इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने अपनी सेना की संरचना में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव करते हुए एक नया और शक्तिशाली पद ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस (CDF)’ बनाया है। देश के मौजूदा आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर को इस पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस कदम को पाकिस्तान के तीनों सैन्य अंगों — थल सेना, नौसेना और वायुसेना — के बीच बेहतर समन्वय और एकीकृत कमांड सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

क्या है नया बदलाव?

पाकिस्तान की संसद ने हाल ही में 27वां संवैधानिक संशोधन (Constitutional Amendment Bill) पारित किया है। इसके तहत संविधान के अनुच्छेद 243 में संशोधन किया गया है, जो सशस्त्र बलों से संबंधित प्रावधानों को नियंत्रित करता है। अब राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री की सलाह पर आर्मी चीफ और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस दोनों की नियुक्ति करेंगे। इसके अलावा, सरकार को सेना के अधिकारियों को फील्ड मार्शल, मार्शल ऑफ द एयर फोर्स और एडमिरल ऑफ द फ्लीट जैसे उच्च रैंकों पर प्रमोट करने का भी अधिकार दिया गया है।

जनरल आसिम मुनीर की नई भूमिका

पाकिस्तान

जनरल मुनीर पहले से ही पाकिस्तान आर्मी के चीफ हैं। अब, CDF का पद संभालने के बाद वे तीनों सेनाओं — आर्मी, नेवी और एयरफोर्स — के सर्वोच्च कमांडर बन जाएंगे। वे प्रधानमंत्री के साथ मिलकर नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड (जो परमाणु और सामरिक हथियारों की जिम्मेदारी संभालती है) के प्रमुख की नियुक्ति भी करेंगे। कुछ महीने पहले ही मुनीर को ‘फील्ड मार्शल’ की आजीवन उपाधि दी गई थी — जो पाकिस्तान के इतिहास में सिर्फ एक और अधिकारी को ही मिली थी।

खत्म होगा पुराना पद

इस नए सिस्टम के तहत, चेयरमैन जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CJCSC) का पद 27 नवंबर 2025 को समाप्त कर दिया जाएगा। यानी, अब पाकिस्तान की शीर्ष सैन्य कमान एक ही व्यक्ति — CDF — के अधीन होगी, जिससे सभी निर्णयों में एकरूपता और तेज़ी आएगी।

क्यों लिया गया यह फैसला?

पाकिस्तान के स्थानीय मीडिया के मुताबिक, यह बड़ा बदलाव मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए चार दिन के सैन्य संघर्ष के बाद आया है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू हुई झड़पों में पाकिस्तान को कई स्तरों पर समन्वय की कमी झेलनी पड़ी थी। विश्लेषकों का मानना है कि आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति — जिसमें साइबर, ड्रोन और मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस शामिल हैं — को देखते हुए एक एकीकृत और केंद्रीकृत कमांड सिस्टम की ज़रूरत महसूस की जा रही थी।

क्या है इसका राजनीतिक संदेश?

जनरल आसिम मुनीर पहले ही पाकिस्तान की राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं। अब उनके हाथ में देश की तीनों सेनाओं की बागडोर आने से उनका कद और बढ़ गया है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह फैसला न सिर्फ सैन्य ढांचे में सुधार के लिए, बल्कि देश की सत्ता संरचना में सेना की पकड़ और मज़बूत करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।

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Japan की Coastline पर फिर Alert: 6.7-6.9 Magnitude के भूकंप ने हिला दिया इवाते प्रान्त

भूकंप

झटका और केंद्र 9 नवंबर 2025 शाम 5:03 बजे (स्थानीय समय) जापान के उत्तर-पूर्व भाग में Iwate Prefecture तट के पास समुद्र में 6.7 से 6.9 के बीच तीव्रता का भूकंप आया। इसका केंद्र समुद्र की सतह से मात्र 10 – 30 कि.मी. की गहराई पर था। भूकंप जापान के भूकंप-तीव्रता मान (Shindo) में 4 दर्ज हुआ – विशेष रूप से Morioka व Yahaba क्षेत्रों में।

सुनामी चेतावनी और प्रशासनिक कदम

इवाते तटवर्ती इलाकों के लिए Japan Meteorological Agency ने तुरंत सुनामी एडवाइजरी जारी की गई, जिसमें 1 मीटर तक लहरें आने की संभावना जताई गई थी। वास्तव में कुछ जगहों पर 20 सेंटीमीटर तक की लहरें दर्ज हुईं, और लगभग 3 घंटों के बाद अलर्ट हटाया गया। रेलवे बुलेट ट्रेनों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया, और प्रमुख परमाणु संयंत्रों में कोई असामान्य घटना नहीं पाई गई।

भूकंप

मौजूदा स्थिति और चिंताएँ

अभी तक बड़े जान-माल के नुकसान की रिपोर्ट नहीं मिली है, लेकिन भूकंप के बाद छिटपुट झटके जारी हैं और तटवर्ती इलाकों में सतर्कता बनी हुई है। 2011 में आए बड़े भूकंप-सुनामी की भयावह यादें अबूझ नहीं हुईं—स्थानीय लोगों और प्रशासन दोनों ने कहा है कि तैयारी अब पिछली बार से अधिक तेज रही।

जापान की तैयारी, सबक और सबके लिए चेतावनी

यह घटना साबित करती है कि जहाँ तक तैयारी-तंत्र की माँद है, जापान ने मजबूत इंतज़ाम किए हैं—लेकिन यह भी याद दिलाती है कि भू-कंप-क्षेत्र में सुरक्षा सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, जागरूकता और त्वरित कार्रवाई का मेल है। क्या अन्य देशों को यहाँ से सीख मिल सकती है—जी हाँ। समय रहते अलर्ट, तटवर्ती निकासी व्यवस्था, और जनता में जागरुकता ही भविष्य के बड़े नरसंहार को रोक सकती है।

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SEBI ने दी चेतावनी – डिजिटल गोल्ड में छिपा है बड़ा रिस्क, जानिए पूरी सच्चाई

SEBI

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक अहम चेतावनी जारी की है, जिसमें निवेशकों को डिजिटल गोल्ड (Digital Gold) में निवेश करने से पहले अच्छी तरह सोचने की सलाह दी गई है। सेबी ने साफ कहा है कि डिजिटल गोल्ड अभी किसी भी रेग्युलेटरी (नियामक) दायरे में नहीं आता, यानी अगर किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कोई गड़बड़ी हो जाए, तो निवेशक को अपने पैसे की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं मिलेगी।

SEBI ने क्या कहा है?

SEBI ने अपने आधिकारिक बयान में बताया कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म “डिजिटल गोल्ड” या “ई-गोल्ड” के नाम पर निवेश का मौका दे रहे हैं। लेकिन यह जरूरी नहीं कि ये SEBI द्वारा नियंत्रित निवेश साधन हों। चूंकि डिजिटल गोल्ड को “सिक्योरिटी” (सुरक्षा साधन) के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया है, इसलिए यह पूरी तरह अनियमित (Unregulated) क्षेत्र में आता है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर किसी निवेशक को नुकसान होता है, तो सेबी के किसी नियम या सुरक्षा तंत्र का लाभ उसे नहीं मिलेगा।

डिजिटल गोल्ड में क्या है खतरा?

SEBI ने चेतावनी दी है कि अनियमित डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म पर निवेश करने से “काउंटरपार्टी और ऑपरेशनल रिस्क” यानी लेनदेन करने वाले पक्ष और संचालन से जुड़ा बड़ा जोखिम रहता है। अगर वह प्लेटफॉर्म किसी वजह से बंद हो जाए या दिवालिया हो जाए, तो निवेशक का पैसा फँस सकता है।

SEBI

इसके अलावा –

  • ऐसे प्लेटफॉर्म पर गोल्ड की शुद्धता (Purity) की कोई गारंटी नहीं होती।
  • भंडारण (Storage) की पारदर्शिता भी संदिग्ध रहती है।
  • निवेशक के पास कानूनी सुरक्षा नहीं होती, क्योंकि यह किसी सरकारी निगरानी में नहीं है।

डिजिटल गोल्ड के फायदे क्या हैं (जो लोग इसे चुनते हैं)?

हाल के वर्षों में डिजिटल गोल्ड लोकप्रिय हुआ है क्योंकि:

  • इसे ₹1 या ₹10 जैसी छोटी राशि से भी खरीदा जा सकता है।
  • 24 कैरेट शुद्ध सोने का दावा किया जाता है।
  • इसे ऑनलाइन कभी भी खरीद-बेच सकते हैं।
  • गोल्ड को वॉल्ट में सुरक्षित रखा जाता है, जिससे चोरी या खोने का डर नहीं रहता।

लेकिन इन सुविधाओं के पीछे जो जोखिम छिपा है, वह SEBI की नज़र में गंभीर है।

अगर सोने में निवेश करना है, तो ये हैं सुरक्षित विकल्प

SEBI ने निवेशकों को कुछ ऐसे विकल्प सुझाए हैं जो पूरी तरह रेग्युलेटेड और सुरक्षित हैं:

  1. Gold ETFs (गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स) : म्यूचुअल फंड कंपनियों द्वारा पेश किए जाते हैं और स्टॉक मार्केट में खरीदे-बेचे जाते हैं। यह SEBI द्वारा नियंत्रित हैं।
  2. Electronic Gold Receipts (EGRs) : एक्सचेंज पर ट्रेड होते हैं और SEBI के नियमों के तहत आते हैं।
  3. Sovereign Gold Bonds (SGBs) : भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा जारी किए गए सरकारी बॉन्ड हैं। ये सुरक्षित हैं और इनमें ब्याज भी मिलता है।
  4. Gold Commodity Derivatives : यह निवेशकों को सोने की कीमतों पर दांव लगाने का अवसर देता है, और यह भी नियामक नियंत्रण में है।

 निवेशकों के लिए सीख क्या है?

SEBI की यह चेतावनी निवेशकों के लिए एक बड़ा संकेत है कि “सुविधा से ज्यादा जरूरी है सुरक्षा।”डिजिटल गोल्ड भले ही दिखने में आसान और आधुनिक लगे, लेकिन नियामक निगरानी की कमी इसे जोखिमभरा बना देती है। अगर आप गोल्ड में निवेश करना चाहते हैं, तो SEBI या RBI द्वारा रेग्युलेटेड उत्पादों जैसे SGB या Gold ETF में निवेश करना ही समझदारी है।

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Rs 50 Voice Machine : कैसे बदली एक डॉक्टर ने अकेले हजारों आवाजों की तकदीर?

Voice Machine

जब डॉ. विशाल राव ने बैंगलोर के HCG Cancer Centre में गर्दन-गले (Head & Neck) के कैंसर के मरीजों का इलाज शुरू किया, तो उन्हें एक दर्दनाक सच का सामना करना पड़ा। जिन मरीजों का लैरिंक्स (Voice Machine) कैंसर के चलते निकाल दिया गया था, वे बोल नहीं पा रहे थे — उनकी आवाज़ खो गई थी।

उन्होंने कहा : “Speech is not a privilege but a right.”

उपलब्ध आवाज़-प्रोस्थेसिस आज भी भारत और विदेश में ₹15,000-₹35,000 तक की कीमतों में बिकती थीं, जिसके चलते तमाम गरीब मरीज सिर्फ चुप्पी का विकल्प चुनते थे।

समाधान: “Aum Voice Prosthesis” का इजाद

डॉ. राव ने अपने मित्र और सिलिकॉन विशेषज्ञ शशांक महेश के साथ मिलकर इस समस्या का हल खोजा। उन्होंने 2013-15 के बीच काम किया और विकसित किया Aum Voice Prosthesis — एक प्लैटिनम-सिलिकॉन वाल्व जो फूड-पाइप और एयर-पाइप के बीच एक छोटा मार्ग बनाता है।

इस प्रकार हवा फेफड़ों से फूड-पाइप की ओर जाती है → वहाँ कम्पन पैदा होती है → आवाज़ बनती है।

Voice Machine

एक-तरफ़ा वाल्व डिज़ाइन है जो खाना/पीना फेफड़ों में जाने से रोके। और सबसे बड़ी बात: कीमत मात्र ₹50 (लगभग US $1) — जो पहले की तुलना में लगभग 1/300वीं थी।

कितने लोगों की बदली लाइफ

वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइजेशन (WIPO) की एक इंटरव्यू में बताया गया कि इस डिवाइस ने 1,700 से अधिक मरीजों को आवाज़ लौटाई है और 10 देशों में पहुंच चुकी है।

बंगालुरु के तमाम थ्रॉट-कैंसर विभागों में अब यह विकल्प देना शुरू हो गया है, जहाँ मरीज एक दिन में बोलना और खाना शुरू कर सकते हैं।

चुनौतियाँ और आगे की राह

हालाँकि यह इनोवेशन बेहद प्रेरक है, लेकिन कुछ सवाल अभी भी खड़े हैं:

  • क्या यह डिवाइस सभी कैंसर-सेंटरों तक पहुँच पाएगा, खासकर ग्रामीण और दूरदराज़ इलाकों में?
  • क्या सरकार इसे राशन-स्कीम / हेल्थ-इन्श्योरेंस के तहत सब्सिडी देगी, ताकि गरीब मरीज निशुल्क इसे प्राप्त कर सकें?
  • तकनीकी रूप से, “एक साइज़-फिट-सभी” मॉडल को कैसे स्वीकार्यता मिलेगी और लंबी अवधि में कैसे टिकेगा?

आवज़ की आज़ादी अब संभव

डॉ. विशाल राव का यह कदम यह साबित करता है कि टेक्नोलॉजी + मानवीय दृष्टि मिलकर ऐसे बदलाव ला सकती है जो कभी असंभव दिखते थे। Aum Voice Prosthesis सिर्फ एक मेडिकल डिवाइस नहीं — यह गुम-आवाज़ों की वापसी, मानव गरिमा का सम्मान और क्वालिटी के साथ सस्ते समाधान का प्रतीक है। अगर अब हर मरीज को बोलने का अधिकार मिले, तो यह एक छोटा उपकरण नहीं बल्कि बड़ी क्रांति बन जाएगा।

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Uttarakhand’s 25-Year Miracle: ‘Devbhoomi’ की स्थापित यात्रा, प्रकृति से प्रगति तक

Devbhoomi

उत्तराखंड स्थापना दिवस की पृष्ठभूमि 9 नवंबर 2000 को भारत के उत्तर-प्रदेश से अलग होकर 27वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया उत्तराखंड — जिसे बाद में Devbhoomi कहा जाने लगा। आज वही राज्य हर 9 नवंबर को अपने स्थापना दिवस पर गर्व की नई परतें गढ़ता है।

देवभूमि-की पहचान: आस्था, प्रकृति, संस्कृति

उत्तराखंड को इसलिए “Devbhoomi” कहा जाता है क्योंकि यहाँ चारधाम – बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री – जैसे पवित्र तीर्थ मौजूद हैं। साथ ही नैनीताल, मसूरी, जिम कॉर्बेट जैसे प्राकृतिक स्थलों ने इसे देश-विदेश में प्रसिद्धि दी।

सांस्कृतिक विविधता और लोकजीवन

Devbhoomi

गढ़वाली, कुमाऊँनी बोलीभाषा, छोलिया-झोड़ा जैसे लोकनृत्य और पारंपरिक व्यंजन जैसे भट्ट-की चुरकनी-फाणू—ये सब उत्तराखंड की लोक-संस्कृति को जीवंत बनाते हैं। स्थापना दिवस पर स्कूल-कॉलेज-गांवों में मेले, रैलियाँ और लोकगान-भजन का रंग छा जाता है।

विकास-और-प्रकृति: संतुलन की चुनौती

उत्तराखंड न सिर्फ धार्मिक और प्राकृतिक धरोहर है, बल्कि भारत के लिए जलवायु-सुरक्षा की दिशा में अहम भूमिका निभाता है—यहाँ से निकलती गंगा-यमुनाओं की धार ने करोड़ों जीवन को पोषण दिया। उसी समय पर्यटन, जल-विद्युत, हर्बल उत्पादन जैसे क्षेत्र विकास की राह पर हैं। लेकिन हिमालय की नाजुक स्थिति और पलायन-चुनौतियों ने ये सवाल उठाया है कि विकास कितनी टिकाऊ है?

भविष्य-के लिए संकल्प

उत्तराखंड सिर्फ एक राज्य नहीं—यह आस्था, प्रकृति, संघर्ष और नवाचार का संगम है। 9 नवंबर को हम सिर्फ स्थापना दिवस नहीं मनाते, बल्कि यह संकल्प लेते हैं कि “हमारी संस्कृति, हमारा पर्यावरण और हमारी आधुनिकता साथ चलेंगी”। नए दशक में उत्तराखंड का उद्देश्य है—नयी ऊँचाइयाँ, लेकिन जड़ों से बँधी हुई।

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गाज़ा में तबाही : मौतों का आंकड़ा 69,000 पार, दुनिया में बढ़ी चिंता

गाज़ा

गाज़ा एक बार फिर खून और राख के बीच जूझ रहा है। इज़राइल और हमास के बीच दो साल से जारी संघर्ष ने अब एक भयावह मोड़ ले लिया है। गाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को जारी ताज़ा रिपोर्ट में बताया कि इस युद्ध में अब तक 69,169 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 170,685 से अधिक लोग घायल हुए हैं। ये आंकड़े न सिर्फ मौतों की संख्या बताते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि गाज़ा का हर कोना युद्ध के जख्मों से भरा है।

कैसे शुरू हुआ यह संघर्ष

यह हिंसक अध्याय 7 अक्टूबर 2023 को शुरू हुआ था, जब हमास ने दक्षिणी इज़राइल पर अचानक हमला किया। इसके जवाब में इज़राइल ने गाज़ा पट्टी में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान छेड़ दिया। तब से लेकर आज तक बमबारी, हवाई हमले और ज़मीनी कार्रवाई रुकने का नाम नहीं ले रहे। गाज़ा की तंग गलियों और बस्तियों में अब सिर्फ धूल, मलबा और चीखें हैं। हजारों घर तबाह हो चुके हैं, परिवार बिखर चुके हैं, और लाखों लोग अब भी सुरक्षित जगह की तलाश में हैं।

मानवीय संकट की भयावह तस्वीर

  • गाज़ा की स्थिति अब एक पूर्ण मानवीय आपदा बन चुकी है।
  • अस्पताल खंडहरों में बदल चुके हैं।
  • दवाइयों की भारी कमी है।
  • पीने का पानी और खाना मिलना मुश्किल हो गया है।
  • बिजली आपूर्ति लगभग ठप है।

संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्ट के अनुसार, गाज़ा की अधिकांश आबादी को अब मानवीय सहायता की तत्काल आवश्यकता है। बच्चे और महिलाएं इस संकट का सबसे बड़ा शिकार बन रहे हैं।

दुनिया भर से आ रही प्रतिक्रियाएं

इस स्थिति ने पूरी दुनिया को हिला दिया है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बयान दिया कि “गाज़ा की स्थिति नैतिक, राजनीतिक और कानूनी रूप से असहनीय हो चुकी है।” फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों ने भी इज़राइल से तुरंत युद्धविराम की अपील की है ताकि आम नागरिकों तक मदद पहुंचाई जा सके। दूसरी ओर, कई मानवीय संगठनों ने कहा है कि अगर जल्द ही राहत कार्यों को सुरक्षित रास्ता नहीं मिला, तो हालात “नियंत्रण से बाहर” हो जाएंगे।

कौन हैं इन मौतों में शामिल?

गाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि ये आंकड़े नागरिकों और लड़ाकों के बीच अंतर किए बिना जारी किए गए हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का कहना है कि मारे गए लोगों में बड़ी संख्या आम नागरिकों, महिलाओं और बच्चों की है।

युद्ध का असर सिर्फ जानों पर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ रहा है — हजारों बच्चे अब स्कूलों से दूर हैं, मनोवैज्ञानिक रूप से टूट चुके हैं और लगातार विस्फोटों की आवाज़ में बड़े हो रहे हैं।

आगे क्या?

दुनिया अब देख रही है कि क्या इस युद्ध का कोई अंत निकलेगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार युद्धविराम की अपील कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी बेहद नाज़ुक है।

गाज़ा के लोग अब बस एक ही चीज़ चाहते हैं — शांति और सांस लेने की जगह। पर सवाल यह है कि क्या राजनीति और शक्ति की लड़ाई में इन मासूम जिंदगियों की कोई कीमत बची है?

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Prada का 69 हज़ार वाला सेफ्टी पिन! सोशल मीडिया पर उड़ा मज़ाक, लोगों ने कहा – “इतने में तो सोने का बना दूं”

Prada

लक्ज़री फैशन ब्रांड Prada एक बार फिर अपने नए प्रोडक्ट को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा में है। इस बार कंपनी ने लॉन्च किया है एक ऐसा आइटम, जिसे देखकर लोग हैरान रह गए – “Crochet Safety Pin Brooch।” सुनने में भले ही खास लगे, लेकिन असल में ये एक साधारण सेफ्टी पिन है, जिसे रंगीन धागों से लपेटा गया है और उस पर Prada का सिग्नेचर ट्रायएंगल लोगो लटका हुआ है। अब बात करते हैं कीमत की – इस छोटे से सेफ्टी पिन की कीमत है 775 अमेरिकी डॉलर (करीब ₹68,758)! जी हां, करीब 69 हज़ार रुपए में एक सेफ्टी पिन!

जैसे ही यह खबर सोशल मीडिया पर आई, इंटरनेट पर मीम्स और मज़ेदार रिएक्शन की बाढ़ आ गई। किसी ने लिखा, “इतने में तो सोने-चांदी का बना दूं”, तो किसी ने मज़ाक उड़ाते हुए कहा, “Prada ने फाइनली DIY किट बेचनी शुरू कर दी है।”

कुछ यूजर्स ने इसे फैशन जगत की “हद से ज़्यादा कीमत वसूलने वाली सोच” बताया, जबकि कईयों ने इसे “क्रिएटिविटी की जगह पागलपन” करार दिया।

Prada जैसे हाई-एंड ब्रांड्स के लिए ये पहली बार नहीं है जब उनकी किसी चीज़ की कीमत को लेकर बहस छिड़ी हो। पहले भी ऐसे कई फैशन ब्रांड्स साधारण चीज़ों पर भारी-भरकम दाम लगाकर चर्चा में आए हैं — लेकिन इस बार Crochet Safety Pin Brooch ने लोगों के बीच “लक्ज़री का असली मतलब” पर नई बहस छेड़ दी है।

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पश्चिम बंगाल में शिक्षकों की बंपर भर्ती – WBSSC ने जारी किए SLST के नतीजे, दिसंबर तक होंगी 12,000 से ज्यादा नियुक्तियां

WBSSC

लाखों अभ्यर्थियों का इंतजार आखिरकार खत्म हुआ! पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (WBSSC) ने शुक्रवार, 7 नवंबर 2025 को राज्य स्तरीय चयन परीक्षा (SLST) के परिणाम घोषित कर दिए हैं। इस परीक्षा के जरिए राज्य के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में 12,000 से अधिक सहायक शिक्षकों की नियुक्ति होने जा रही है। आयोग का कहना है कि दिसंबर तक नए शिक्षकों की नियुक्तियां पूरी कर ली जाएंगी।

भर्ती प्रक्रिया का अगला चरण

लिखित परीक्षा में पास होने वाले उम्मीदवारों को अब इंटरव्यू और दस्तावेज़ सत्यापन के लिए बुलाया जाएगा। साक्षात्कार प्रक्रिया 17 नवंबर से शुरू होने की संभावना है। अंतिम चयन उम्मीदवार के लिखित परीक्षा अंकों, अकादमिक योग्यता और साक्षात्कार प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा।

WBSSC अधिकारियों के अनुसार, “हम कोशिश कर रहे हैं कि पूरी चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज़ी से पूरा किया जाए ताकि दिसंबर तक सभी पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति की जा सके।”

WBSSC

SLST परीक्षा और परिणाम का पूरा विवरण

WBSSC ने यह परीक्षा सितंबर 2025 में दो चरणों में आयोजित की थी —

  • कक्षा 9-10 (माध्यमिक) के लिए परीक्षा 7 सितंबर को
  • कक्षा 11-12 (उच्चतर माध्यमिक) के लिए परीक्षा 14 सितंबर को

यह भर्ती अभियान कुल 35,726 सहायक शिक्षक पदों को भरने के लिए शुरू किया गया था। आयोग ने बताया कि इस बार सबसे ज़्यादा आवेदन अंग्रेजी, गणित और विज्ञान विषयों में आए हैं।

हालांकि, परिणाम जारी होते ही WBSSC की आधिकारिक वेबसाइट wbssc.gov.in और westbengalssc.com पर भारी ट्रैफिक के कारण सर्वर धीमा पड़ गया, जिससे कई उम्मीदवारों को साइट पर लॉगिन करने में परेशानी हुई। आयोग ने कहा है कि तकनीकी गड़बड़ियां जल्द ही दूर कर दी जाएंगी।

कैसे देखें अपना परिणाम

जो उम्मीदवार SLST परीक्षा में शामिल हुए थे, वे नीचे दिए गए आसान चरणों का पालन कर अपना स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकते हैं:

1. WBSSC की आधिकारिक वेबसाइट wbssc.gov.in पर जाएं।

2. “WBSSC SLST Result 2025” लिंक पर क्लिक करें।

3. आवेदन संख्या और जन्मतिथि दर्ज करें।

4. स्कोरकार्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा — इसे डाउनलोड करें और भविष्य के लिए प्रिंट निकाल लें।

शिक्षा व्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती

राज्य सरकार ने बताया कि यह भर्ती अभियान स्कूलों में लंबे समय से चल रही शिक्षकों की कमी को दूर करने में मील का पत्थर साबित होगा। नए शिक्षक ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के स्कूलों में तैनात किए जाएंगे, ताकि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा,

“SLST परिणाम जारी होने से अब शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ेगी। हमारा लक्ष्य है कि दिसंबर 2025 तक सभी स्कूलों में नई तैनातियां पूरी हो जाएं।”

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दिल्ली में 200 एंटी-स्मॉग गन तैनात : PWD’s ₹5.88 Crore battle plan to clean the air

एंटी-स्मॉग गन

पर्यावरण संकट की चपेट में रहने वाली दिल्ली ने एक और बड़ा कदम उठाया है। Public Works Department, Delhi (PWD) ने 200 ट्रक-माउंटेड एंटी-स्मॉग गन किराए पर लेने का फैसला किया है जिसका बजट लगभग ₹5.88 करोड़ तय हुआ है।

योजना का ढांचा: कब, कैसे और कितने समय के लिए

इन Anti-Smog गनों को अक्टूबर 2025 से फरवरी 2026 (5 महीने) तक, दो शिफ्ट में काम करने के लिए प्लान किया गया है।प्रत्येक मशीन ट्रक-माउंटेड होगी और 50 मीटर तक क्षैतिज दायरा और 330° घुमाव वाली प्रणाली से धूल और PM2.5 कणों को नियंत्रित करेगी। मशीनों पर पर्यावरण जागरूकता के स्लोगन भी छापे जाएंगे—सिर्फ सफाई ही नहीं, संदेश भी शामिल है।

क्यों जरुरी है यह कदम?

दिल्ली में वायु गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है| रास्तों की धूल, निर्माण गतिविधि, ट्रैफिक उत्सर्जन और बाहरी राज्यों से आने वाला प्रदूषण मिलकर AQI को खतरनाक स्तर तक ले जा रहा है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि रस्ते की धूल (road dust) व निर्माण कार्यों की उड़ती मिट्टी भी PM 10 तथा PM 2.5 के बड़े स्रोत हैं। तेज़ी से सफाई नहीं की गई तो श्वसन संबंधी बीमारियाँ और बढ़ेंगी।

एंटी-स्मॉग गन

क्या ये उपाय पर्याप्त है या सिर्फ ‘पलटाव’ है?

इस तरह की तकनीकी एवं तात्कालिक कार्रवाई स्वागत योग्य है, लेकिन सवाल यह है—क्या यह स्थायी समाधान बनेगी या सिर्फ इस सर्दी-मौसम तक का असर होगा?ट्रक-गन द्वारा धूल को नीचे गिराना मददगार है, लेकिन निर्माण-स्थलों, वाहनों, बाहरी राज्यों से आने वाली धूल के स्रोतों को पहले से नियंत्रित करना ज़रूरी है।इसकी लागत, मशीनों की निगरानी,Maintenance और संचालन की निरंतरता चुनौती बने रहेंगे।नागरिकों, ठेकेदारों, निर्माण कंपनियों का सहयोग हों बिना यह सिर्फ एक प्रदर्शनी जैसा रह सकता है।

आगे का रास्ता: सरकार और नागरिक मिलकर क्या कर सकते हैं?

PWD ने साथ ही रोड क्लीनिंग, सड़क मरम्मत, पेड़ों की छंटाई और साइनबोर्ड सुधार जैसी गतिविधियों की भी योजना बनाई है—जिससे सड़क-धूल और उड़ने वाली मिट्टी को कम किया जा सकेगा।नागरिकों को भी जागरूक होना होगा, वाहन की सर्विस-स्थिति, निर्माण-साइट्स पर धूल नियंत्रण और व्यक्तिगत स्तर पर वायु शुद्धता का ध्यान रखना होगा।

सबसे अहम : कॉन्ट्रैक्टरों द्वारा धूल-उत्सर्जन नियमों का सख्ती से पालन करना होगा, निरंतर मॉनिटरिंग आवश्यक है।

दिल्ली की हवा को क्या उम्मीद है?

यह कदम दिल्ली में एक सकारात्मक संकेत है—ठोस तकनीक ,पर्याप्त बजट और समन्वित कोशिशें मिलकर कुछ असर दिखा सकती हैं। लेकिन, इससे भी बड़ी चुनौती है स्रोतों को बंद करना और व्यवहार में बदलाव लाना। यदि सिर्फ मशीनें लगाई जाएँ पर निर्माण-धूल, वाहनों और बाहरी धूल स्रोतों पर ध्यान न दिया जाए, तो यह प्रयास स्थायी सुधार नहीं, बल्कि क्षणिक राहत साबित होगा।

आखिरकार, दिल्ली की हवा में सांस लेने-योग्य बदलाव तब आएगा जब प्रौद्योगिकी, नीति, सिस्टम निगरानी और नागरिक भागीदारी सब साथ मिलकर काम करें वर्ना हर साल स्मॉग फिर से दस्तक देगा।

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Brahmapuri Guest House ‎Tiger Attack ने सोशल मीडिया में मचाई सनसनी, लेकिन सच क्या है?

Brahmapuri

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक विचलित करने वाला वीडियो वायरल हुआ: कथित तौर पर Brahmapuri (Chandrapur-महाराष्ट्र) के फॉरेस्ट गेस्ट हाउस के पास एक आदमी कुर्सी पर बैठा था—जब अचानक एक बाघ आता है, उसे घसीटता है और कैमरे में कैद हो जाता है। वीडियो में टाइमस्टैम्प “31/10/2025 18:42” भी दिख रहा था। फिर राज्य व वन विभाग की अधिकारियों ने बताया—“यह घटना ब्रह्मपुरी में नहीं हुई, वीडियो संभवतः AI-जनरेटेड है।”

क्या कहती हैं वन विभाग व जानकारियाँ?

Forest Department Chandrapur की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि जिले में ऐसा कोई ऑपरेटेड CCTV फुटेज नहीं मिला है, और वायरल क्लिप की सच्चाई अनसुलझी है।

वन विभाग के एक रेंज अधिकारी ने कहा : “यह वीडियो ब्रह्मपुरी की नहीं, और संभव है कि AI-टूल्स से बनाकर सोशल प्लैटफॉर्म्स पर फेला गया हो।”

स्थानीय माहौल: डर, अफवाहें और सवाल

ब्रह्मपुरी व उसके आसपास के क्षेत्र में बाघ-मनोविज्ञान व मानव-वन्यजीव संघर्ष की मौजूदगी है—जिसके चलते यह वीडियो लोगों में डर व चर्चाओं का विषय बन गया।

Brahmapuri

लेकिन कई लोग पूछ रहे हैं : क्या प्रशासन ने इलाके में बाघ-मानव टकराव की पूर्व तैयारी की है?क्या जंगल के पास बसे लोग व गेस्ट-हाउस पर्याप्त सुरक्षा उपायों से लैस हैं?और सबसे महत्वपूर्ण—क्या सोशल-मीडिया पर वायरल होने वाली ऐसी भय-उड़ाने वाली क्लिप्स असल में आपके लिए खतरा हैं या सिर्फ धूम-धड़ाका?

क्या सीख मिलती है?

  1. वायरल = सत्य नहीं: सोशल‌मीडिया पर चौंकाने वाली क्लिप्स कभी-कभी निर्मित (AI) होती हैं—जांच बहुत जरूरी है।
  2. जानवर-मानव टकराव नियंत्रण में है, लेकिन घटता नहीं—योजनाबद्ध सुरक्षा, उचित गेस्ट-हाउस डिज़ाइन, वनमार्ग पर एलर्ट सिस्टम जरूरी हैं।
  3. नागरिक भी जिम्मेदार: अफवाहें बढ़ती-भागती हैं—और जब एक वीडियो वायरल हो जाता है, तो शहर-गाँव में भय का माहौल बन जाता है।

मुमकिन खतरा

अगर ये वीडियो झूठी है तो फिर साइबर सुरक्षा को बढ़ाने की जरूरत है।और अगर झूठी भी है, तो ये अगर सच होती तो क्या हम इसके लिए तैयार थे? आपको इस वायरल वीडियो के बारे में क्या लगता है? कृपया नीचे comment करें।

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रिठाला मेट्रो के पास भीषण आग : सिलेंडर विस्फोट से रोहिणी slum बस्ती राख में

रिठाला मेट्रो

शुक्रवार रात को दिल्ली के रिठाला मेट्रो स्टेशन (रोहिणी) के समीप स्थित झुग्गी-बस्ती में गंभीर आग लग गई। दिल्ली फायर सर्विसेज (DFS) को रात 10:56 बजे सूचना मिली थी। घने धुएँ के बीच स्थानीय निवासियों में अफरा-तफरी मची और दमकल की लगभग 29 गाड़ियाँ मौके पर पहुंचीं।

घटनास्थल की भयावस्था

तालाबंदी-क्षेत्र की इस झुग्गी बस्ती में रात के अंधेरे में अचानक आग का प्रसार हुआ। स्थिति को और जटिल बना दिया गया जब कई एलपीजी सिलेंडर फटने की सूचना मिली—जिससे आग ने तेजी से विकराल रूप धारण कर लिया। बहुत से परिवारों की आशियाने व जरूरी सामान जलकर राख हो गए। एक बच्चा घायल हुआ है और इलाज चल रहा है।

राहत-कार्रवाई

प्रतिक्रिया-टीम ने तुरंत इलाके को घेर लिया। DFS अधिकारियों ने आसपास के लोगों को जल्दी सुरक्षित स्थानों पर जाने का निर्देश दिया।

“हमने पुलिस से कहा है कि भीड़ को पास न आने दें,” DFS सूत्र ने बताया।

रिठाला मेट्रो

राहत दल अब पुनर्वास एवं माध्यमिक सहायता की तैयारी कर रहे हैं—लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि इस तरह की झुग्गी बस्तियों में सुरक्षा मानदंड कितने बनाए गए थे?

बड़ा सवाल: क्या हाई-रिस्क इलाकों की तैयारी पर्याप्त है?

यह घटना हमें दो अहम विषय पर सोचने को मजबूर करती है:

झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाकों में वातानुकूलित खतरे (जैसे गैस सिलेंडर, तंग गलियाँ, निकासी की कमी) कितने प्रबंधित हैं? ऐसी आपदाएँ केवल अग्निशमन सेवा का विषय नहीं, बल्कि सामुदायिक सुरक्षा और लॉक-डाउन-प्रूफ रहने की व्यवस्था हैं। अभी तक ऐसा माना जाता है कि “घटिया बस्तियों” में हादसे हादसों की तरह स्वीकार कर लिए जाते हैं—लेकिन यह आँचर यह साबित करता है कि यह सोच अब पर्याप्त नहीं है।

एक दृश्य या एक अलार्म?

रात में जलते झुग्गियों का दृश्य सिर्फ फोटो नहीं—यह एक रियल-टाइम चेतावनी है। जब तंग-गलियों में सिलेंडर ब्लास्ट जैसी घटना हो सकती है, तो यह सिर्फ इस बस्ती का मसला नहीं—यह नगर प्रशासन, योजना-निर्माताओं व सार्वजनिक सुरक्षा की प्रणाली का परीक्षण है। हमें यह सोचना होगा कि क्या सिर्फ अग्नि-सुरक्षा गाड़ियाँ बढ़ानी पर्याप्त हैं या पहले से तैयारी, निकासी व्यवस्था, गैस-सिलेंडर-सुरक्षा, और जागरूकता जैसी चीजें भी जरूरी हैं।

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आसाराम बापू को मिली जमानत : Gujarat High Court का बड़ा फैसला, Justice या Sympathy?

आसाराम बापू

स्वयंभू संत आसाराम बापू, जिन्हें कभी लाखों अनुयायी “गुरुदेव” कहकर पुकारते थे, अब जेल की सलाखों के पीछे एक दोषी के रूप में जाने जाते हैं। 2013 में दर्ज हुए रेप केस में उन्हें आजीवन कारावास (Life Imprisonment) की सजा सुनाई गई थी। ये मामला उस नाबालिग पीड़िता से जुड़ा था, जो उनके जोधपुर आश्रम में पढ़ने गई थी। करीब 11 साल से जेल में सजा काट रहे आसाराम के केस में अब गुजरात हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है।

Gujarat High Court का फैसला

7 नवंबर 2025 को गुजरात हाईकोर्ट ने आसाराम बापू को 6 महीने की अंतरिम जमानत (interim medical bail) दी। ये जमानत उनकी सजा को खत्म नहीं करती बल्कि सिर्फ इलाज के उद्देश्य से दी गई है। कोर्ट ने कहा कि यह राहत “मानवीय आधार” पर दी गई है क्योंकि उनकी उम्र अब 84 से ऊपर है और स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है।

कोर्ट में क्या हुआ

अदालत में आसाराम के वकीलों ने तर्क दिया कि उनकी उम्र 84 वर्ष है।वे दिल की बीमारी, हाईपरटेंशन, थाइरॉइड, एनीमिया और पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं।जेल अस्पताल की सुविधाएं उनकी स्थिति के अनुरूप नहीं हैं। वहीं, राज्य सरकार और पीड़िता के वकील ने इसका कड़ा विरोध किया।

आसाराम बापू

राज्य का कहना था कि जेल में पर्याप्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है और उन्हें बाहर जाने की जरूरत नहीं। लेकिन अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा — “स्वास्थ्य और जीवन का अधिकार (Right to Life and Health) संविधान का मूल हिस्सा है। इलाज से वंचित रखना मानवीय दृष्टि से उचित नहीं।”

कोर्ट की शर्तें

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह जमानत सिर्फ मेडिकल उपचार के लिए है। आसाराम को कोई भी सार्वजनिक, धार्मिक या प्रवचन कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं होगी। वे पुलिस निरीक्षण में रहेंगे और इलाज की संपूर्ण जानकारी अदालत व पुलिस को देनी होगी।

इसके अलावा—

  • हर 15 दिन में मेडिकल रिपोर्ट जमा करनी होगी।
  • स्थान बदलने से पहले स्थानीय प्रशासन को सूचना देना अनिवार्य है।
  • यदि किसी प्रकार का उल्लंघन पाया गया, तो जमानत तुरंत रद्द की जा सकती है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर राजस्थान सरकार या पीड़िता पक्ष सुप्रीम कोर्ट में इस आदेश को चुनौती देता है, तो गुजरात सरकार भी ऐसा कर सकती है।

पहले भी मिली थी राहत

इससे पहले भी राजस्थान हाईकोर्ट ने इसी आधार पर उन्हें 6 महीने की राहत दी थी। उस समय भी तर्क यही था कि उम्र और स्वास्थ्य बिगड़ने के चलते उनका जेल में रहना खतरनाक हो सकता है। हालांकि, हर बार राहत सीमित अवधि और कड़ी शर्तों के साथ ही दी गई।

सवाल जो अब उठ रहे हैं

यह फैसला कई नैतिक और कानूनी सवाल खड़े करता है:

  1. क्या गंभीर अपराधों में “मानवीय आधार” पर जमानत देना न्यायसंगत है?
  2. क्या अदालत द्वारा लगाई गई शर्तों का पालन असल में कराया जा सकेगा?
  3. क्या समाज में ऐसे फैसले धार्मिक प्रभाव या सार्वजनिक भावना से प्रभावित लगते हैं?

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत ने संविधान के “Right to Health” सिद्धांत को ध्यान में रखकर निर्णय दिया, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि राहत अस्थायी है।

जनभावना: दो हिस्सों में बंटा समाज

समाज इस फैसले को लेकर बंटा हुआ नज़र आ रहा है ;

  • एक वर्ग कहता है: “बीमारी किसी की सजा नहीं हो सकती, इलाज का हक सबको है।”
  • दूसरा वर्ग मानता है: “इतना गंभीर अपराध और फिर बार-बार राहत — ये न्याय नहीं, नरमी है।”

कानून बनाम करुणा का संतुलन

“Asaram Bapu Bail Case” एक बार फिर सवाल उठाता है;

  • क्या कानून को कभी-कभी करुणा के लिए झुकना चाहिए?
  • या न्याय की कठोरता ही समाज में संतुलन रखती है?

फिलहाल, आसाराम बापू जेल से बाहर होंगे — पर केवल अस्पताल तक सीमित, जहां उनका इलाज जारी रहेगा और अदालत की नजर भी हर पल उन पर रहेगी।

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वन्दे मातरम् के हुए 150 वर्ष पूरे, देश भर में हो रहा है महामहोत्सव का आयोजन

राष्ट्रगीत

क्या जन गण मन ही है हमारा राष्ट्रगीत? वन्दे मातरम् के हुए 150 वर्ष पूरे!हो रहा है महामहोत्सव का आयोजन? भारत का प्रतिष्ठित राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् आज 150 वां वर्ष पूरा कर रहा है — यह समय सिर्फ एक गीत का नहीं, बल्कि हमारे स्वतंत्रता-संग्राम, राष्ट्रीय एकता और संस्कृति की अदम्य आवाज़ का महोत्सव है।

रचना और प्रारंभिक यात्रा

इस गीत को Bankim Chandra Chatterjee ने 9 नवंबर 1875 को बंगदर्शन नामक साहित्यिक पत्रिका में प्रकाशित किया था। बाद में यह गीत उनकी प्रसिद्ध कृति Anandamath (1882) में शामिल हुआ। गीत का अर्थ है: “माँ भूमि, मैं तुझे प्रणाम करता हूँ” (“Mother, I bow to Thee”)।

स्वतंत्रता-संग्राम में महत्व

इस गीत ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज उठाने में एक प्रेरक भूमिका निभाई। Rabindranath Tagore ने इसे 1896 में Indian National Congress के अधिवेशन में प्रथम सार्वजनिक रूप से गाया। 1905 में “Bande Mataram” संप्रदाय की स्थापना हुई और यह गीत जन-आन्दोलन में एक नारा बन गया।

आज की प्रासंगिकता & उत्सव

24 जनवरी 1950 को, Dr. Rajendra Prasad की अध्यक्षता में रूपरेखा बनी कि ‘जना गण मन’ (Nation Anthem) के साथ ‘वन्दे मातरम्’ को समान सम्मान मिलेगा। देशभर में 7 नवंबर 2024 से 7 नवंबर 2026 तक इस गीत के वर्ष-भर महोत्सव का आयोजन किया गया है।

वन्दे मातरम्
Vande Mataram

समारोहों में समावेश हैं: उद्घाटन कार्यक्रम, विशेष डाक टिकट और सिक्का जारी करना, विद्यालयों-कॉलेजों-सांस्कृतिक संस्थानों में सामूहिक गान-प्रदर्शनी-वाद-विवाद।

क्यों आज भी मायने रखता है?

‘वन्दे मातरम्’ सिर्फ आधिकारिक गीत नहीं — यह एक भाव-जागृति है, जिसने विविधता-भरे भारत को एक सूत्र में बाँधा। यह गीत हमें याद दिलाता है कि मां-भूमि का सम्मान, बलिदान, एकता और राष्ट्रीय गर्व कितने महत्वपूर्ण हैं। आज की पीढ़ी-के लिए — यह प्रेरणा है कि हम सिर्फ भूतकाल के ही नहीं, भविष्य के भी निर्माणकर्ता हैं।

‘वन्दे मातरम्’ — यह केवल शब्द-अनुच्छेद नहीं, बल्कि हमारी आत्मा, इतिहास और आने वाले कल का मंत्र है। 150 साल बाद भी ये शब्द हमें जोड़ते हैं, गर्व से भरते हैं और अगली पीढ़ी को स्वाभिमान-और-जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाते हैं।

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गरीब का पलटा पासा : 11 Cr की लॉटरी, पूरे शहर में हड़कंप! कैसे हुआ चमत्कार?

11 Cr की लॉटरी

राजस्थान के कोटपुतली जिले के 32 वर्षीय अमित सेहरा, जो हर सुबह ठेला लेकर सब्ज़ी-फल बेचने निकलते, उनकी किस्मत को एक छोटा टिकट पलट कर रख गया। अमित ने पंजाब की दिवाली बंपर लॉटरी का टिकट मात्र ₹500 में बठिंडा से ख़रीदा — उस टिकट (नंबर A438586) ने उन्हें लगभग 11 Cr की लॉटरी दिला दिया। उन्होंने उस टिकट के लिए अपने दोस्त से पैसे उधार लिए थे। उनकी पत्नी के टिकट पर भी ₹1,000 का छोटा इनाम निकला था।

जीत की खुशी और नए सपने

उस जीत के बाद अमित का जीवन पूरी तरह बदल गया। उन्होंने बताया : “मेरी सारी गरीबी आज खत्म हो गई है।” वे पहली योजना बच्चों की पढ़ाई, कर्ज-चुकाना और पक्का घर बनवाने की बना रहे हैं। उनके दोस्त को मदद के तौर पर उन्होंने ₹1 लाख देना का वादा भी किया है, जो टिकट के पैसे देने में साथ था।

11 Cr की लॉटरी

मेहनत, अवसर और उम्मीद की प्रेरणा

अमित की सुबह सुबह 5 बजे ठेले के साथ निकलने की आदत और दिन भर मेहनत—आज उस मेहनत का रंग दिखा। उनकी कहानी हर छोटे व्यवसायी, रेहड़ीवाले और रोज़-कमाने-खाने वालों के लिए प्रेरणा बन गई है—कि अगर उम्मीद हो, तो मौका भी आ सकता है।

सपने बड़े हो सकते हैं

यह घटना दिखाती है कि एक छोटा-सा भरोसा, थोड़ी सी किस्मत और थोड़ी सी मदद मिल जाए तो सपने सच हो सकते हैं।

“आज ठेले वाले की रेहड़ी, कल करोड़पति की कहानी बन गई” — अमित सेहरा ने यह साबित कर दिखाया है।

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Name Change या Game Change? – इस्लामपुर से ईश्वरपुर तक की पूरी कहानी पढ़ें नाम बदला, पहचान बदली

इस्लामपुर

महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाते हुए सांगली ज़िले के इस्लामपुर का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर “ईश्वरपुर” (Ishwarpur) कर दिया है। 3 नवंबर 2025 को राज्य सरकार ने केंद्र की मंज़ूरी और Survey of India की स्वीकृति मिलने के बाद गजट नोटिफिकेशन जारी किया। इसके साथ ही इस्लामपुर नगर परिषद का नाम भी बदलकर अब “उरुण-ईश्वरपुर नगर परिषद” कर दिया गया है। रेलवे, डाक विभाग, राजस्व और सभी सरकारी रिकॉर्ड्स में नए नाम को अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

कैसे शुरू हुई ईश्वरपुर की मांग?

यह बदलाव अचानक नहीं आया—स्थानीय जनता और नेताओं की वर्षों पुरानी माँग अब पूरी हुई है।18 जुलाई 2025 को महाराष्ट्र विधानसभा ने इस नाम परिवर्तन का प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा था।अक्टूबर 2025 में Survey of India ने इसे औपचारिक मंज़ूरी दी।और नवंबर में, गृह मंत्रालय (Home Ministry) की अंतिम स्वीकृति के बाद अधिसूचना जारी कर दी गई। स्थानीय BJP नेता गोपीचंद पडालकर और मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने इस परिवर्तन के लिए लगातार पैरवी की थी।

जनता की प्रतिक्रिया — जश्न और बहस दोनों

नए नाम की घोषणा के साथ ही ईश्वरपुर में माहौल उत्सव जैसा रहा—सड़कों पर मिठाई बंटी, पटाखे फूटे, और लोगों ने “ईश्वरपुर हमारा गौरव” जैसे नारे लगाए।

  • समर्थकों का कहना है : “यह बदलाव सिर्फ नाम नहीं, हमारी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान की वापसी है।”
  • विरोधियों का तर्क : “हमने सड़क, पानी और विकास के लिए आवाज़ उठाई थी—नाम बदलने से क्या बदलेगा?”

इस तरह यह फैसला गौरव बनाम विकास की बहस को और गहराई दे गया है।

इस्लामपुर

महाराष्ट्र में नाम बदलने की लहर

ईश्वरपुर का यह फैसला महाराष्ट्र में चल रही नाम-परिवर्तन श्रृंखला का नया अध्याय है। पहले ही औरंगाबाद को छत्रपति संभाजीनगर,उस्मानाबाद को धराशिव,अहमदनगर को अहिल्यानगर नाम दिया जा चुका है।राज्य सरकार का कहना है कि यह बदलाव “जनभावनाओं और सांस्कृतिक चेतना” का प्रतीक है।

राजनीति और चुनावी समीकरणों से जुड़ा कदम?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला स्थानीय स्वशासन चुनावों के ठीक पहले जनता के भावनात्मक जुड़ाव को साधने की रणनीति भी हो सकता है। हालाँकि सरकार ने स्पष्ट कहा है— “यह निर्णय किसी राजनीति का नहीं, बल्कि जनता की इच्छा और संस्कृति के सम्मान का है।”

नया नाम, नया अध्याय — Ishwarpur की कहानी शुरू

ईश्वरपुर के इस नाम परिवर्तन ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है— क्या नाम बदलने से पहचान बदल जाती है, या असली बदलाव विकास और समानता से आता है? फिलहाल, इस ऐतिहासिक कदम ने पूरे महाराष्ट्र का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। ईश्वरपुर अब सिर्फ एक नाम नहीं—यह महाराष्ट्र की नई सांस्कृतिक कहानी का प्रतीक बन गया है।

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अनुनय सूद की मौत पर खुला बड़ा राज, परिवार ने तोड़ी चुप्पी, जानिए पूरी खबर

अनुनय सूद

सोशल मीडिया की दुनिया से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। जाने-माने ट्रैवल इन्फ्लुएंसर और फोटोग्राफर अनुनय सूद का मात्र 32 साल की उम्र में निधन हो गया है। उनके परिवार ने 6 नवंबर 2025 को उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट के ज़रिए इस खबर की पुष्टि की। इस खबर के बाद से ही उनके लाखों फॉलोअर्स और पूरी ट्रैवल कम्युनिटी में शोक की लहर है।

परिवार का बयान और फैंस से अपील

अनुनय सूद के परिवार ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हुए लिखा — “बहुत दुख के साथ हम अपने प्रिय अनुनय सूद के निधन की खबर साझा कर रहे हैं। कृपया इस कठिन समय में हमारी निजता का सम्मान करें।” परिवार ने यह भी कहा कि वे चाहते हैं लोग उनके घर के बाहर या निजी स्थानों पर भीड़ न लगाएं और उनकी याद में शांति बनाए रखें।

मौत का कारण क्या था?

फिलहाल, अनुनय सूद की मौत का आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उनका निधन लास वेगास (अमेरिका) में हुआ। उनकी आखिरी इंस्टाग्राम पोस्ट भी लास वेगास की थी, जिसमें उन्होंने लक्ज़री कारों के बीच वीकेंड बिताने की बात कही थी। कुछ रिपोर्ट्स और Reddit चर्चाओं में हार्ट अटैक को संभावित कारण बताया जा रहा है, हालांकि परिवार ने इस पर कोई पुष्टि नहीं की है।

अनुनय सूद

कौन थे अनुनय सूद?

नोएडा में जन्मे अनुनय सूद बाद में दुबई में बस गए थे। उन्होंने अपनी पहचान एक ट्रैवल कंटेंट क्रिएटर और ड्रोन फोटोग्राफर के रूप में बनाई। उनके शानदार ड्रोन शॉट्स, लग्ज़री ट्रैवल वीडियोज़ और सिनेमैटिक कंटेंट ने उन्हें सोशल मीडिया पर अलग पहचान दिलाई।

  • Instagram : 1.4 मिलियन से ज़्यादा फॉलोअर्स
  • YouTube : लगभग 3.8 लाख सब्सक्राइबर्स

Forbes India “Top 100 Digital Stars” में लगातार तीन साल (2022, 2023, 2024) शामिल उनकी मेहनत, लग्ज़री ट्रैवल्स और प्रेरणादायक वीडियोज़ ने उन्हें युवा पीढ़ी का रोल मॉडल बना दिया था।

फैंस और साथी क्रिएटर्स की प्रतिक्रियाएं

अनुनय सूद की मौत की खबर सुनकर सोशल मीडिया पर फैंस ने गहरा दुख जताया है। कई मशहूर ट्रैवल इन्फ्लुएंसर्स और यूट्यूबर्स ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि “उन्होंने हर किसी को दुनिया को अलग नज़रिए से देखने की प्रेरणा दी।”

अनुनय सूद की विरासत

उनकी अचानक हुई मौत ने यह याद दिलाया कि सफलता और प्रसिद्धि के बीच भी जिंदगी कितनी नाज़ुक होती है। उनकी बनाई खूबसूरत तस्वीरें और वीडियोज़ आने वाले समय में भी उनके फैंस को प्रेरित करती रहेंगी।

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Mirzapur Train Accident : क्यों हुआ मिर्जापुर ट्रेन हादसा? वजह जानकर आप भी दंग रह जाएंगे

Mirzapur Train Accident

बुधवार सुबह उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में एक बड़ा रेल हादसा (Mirzapur Train Accident) हुआ, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई। यह हादसा चूनार जंक्शन पर हुआ, जब कुछ यात्री रेलवे ट्रैक पार कर रहे थे और उसी दौरान एक तेज रफ्तार ट्रेन ने उन्हें टक्कर मार दी। घटना ने इलाके में अफरा-तफरी मचा दी और रेलवे सुरक्षा पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब सिर्फ एक दिन पहले छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुए रेल हादसे में 11 लोगों की जान गई थी। लगातार दो दिनों में दो बड़े हादसों ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर चिंताएँ बढ़ा दी हैं।

कैसे हुआ हादसा

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सुबह के समय कुछ यात्री प्लेटफॉर्म की ओर जाने के लिए ट्रैक पार कर रहे थे। उसी दौरान तेज रफ्तार ट्रेन आई और देखते ही देखते छह लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। हादसा इतना भीषण था कि मौके पर ही सभी की मौत हो गई।

स्थानीय लोगों ने तुरंत रेलवे अधिकारियों और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची रेलवे पुलिस और प्रशासनिक टीम ने राहत और बचाव कार्य शुरू किया। सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

सुरक्षा पर उठे सवाल

रेलवे ट्रैक पार करना देशभर में एक आम लेकिन खतरनाक प्रथा बन चुकी है। हर साल सैकड़ों लोग इसी लापरवाही के कारण अपनी जान गंवाते हैं। इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने फुट ओवर ब्रिज (FOB) और सुरक्षा चेतावनी बोर्ड लगाने की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों। रेलवे प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं और यह पता लगाया जा रहा है कि हादसे के वक्त ट्रैक पर मौजूद लोगों को चेतावनी क्यों नहीं दी गई।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

एक चश्मदीद ने बताया, “हर दिन लोग इसी रास्ते से ट्रैक पार करते हैं क्योंकि दूसरी ओर जाने के लिए कोई पुल नहीं है। हमने कई बार अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।”

लगातार हादसे और सुरक्षा की ज़रूरत

दो दिनों में दो बड़े रेल हादसों ने देश में रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए जागरूकता अभियान, सुरक्षा निगरानी, और आधुनिक ट्रैक क्रॉसिंग सिस्टम की तत्काल जरूरत है।

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पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट में गैस सिलेंडर ब्लास्ट से मचा हड़कंप, 12 घायल – दो की हालत नाज़ुक

सिलेंडर ब्लास्ट

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की इमारत में एक भीषण गैस सिलेंडर ब्लास्ट हुआ, जिससे कम से कम 12 लोग घायल हो गए। यह हादसा सुप्रीम कोर्ट के बेसमेंट में हुआ, जहां एयर-कंडीशनिंग सिस्टम की मरम्मत का काम चल रहा था।

इस्लामाबाद के आईजीपी अली नासिर रिज़वी ने बताया कि विस्फोट कैंटीन में गैस रिसाव के कारण हुआ, जो पिछले कई दिनों से चल रहा था। धमाका इतना तेज था कि उसकी गूंज से पूरी सुप्रीम कोर्ट इमारत हिल गई। मौके पर अफरा-तफरी मच गई और जज, वकील और कर्मचारी अपनी जान बचाने के लिए इमारत से बाहर भागे।

सिलेंडर ब्लास्ट

कोर्टरूम नंबर 6 को भारी नुकसान

धमाके से कोर्टरूम नंबर 6 को गंभीर नुकसान पहुंचा है। हादसे के वक्त मरम्मत कार्य में लगे कर्मचारी सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए। घायलों को तुरंत नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

  • 3 लोगों को PIMS अस्पताल में भर्ती किया गया
  • 9 लोगों को पॉलीक्लिनिक अस्पताल ले जाया गया

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, दो घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। इनमें एक AC तकनीशियन शामिल है, जिसके शरीर का लगभग 80% हिस्सा जल गया है।

 कैंटीन में हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार, यह धमाका सुप्रीम कोर्ट की स्टाफ कैंटीन में हुआ, जो सिर्फ कर्मचारियों के लिए है। वहां मरम्मत का काम चल रहा था, तभी गैस लीकेज के कारण सिलेंडर फट गया। राहत और बचाव दल ने तुरंत मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया और सभी घायलों को अस्पताल भेजा।

सिलेंडर ब्लास्ट

 जांच के आदेश

घटना के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने विस्फोट के कारणों की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि लापरवाही से गैस लीक होने के बावजूद समय पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसके चलते यह बड़ा हादसा हुआ।

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तमिलनाडु के सीएम स्टालिन का सख्त रुख : कोयंबटूर गैंगरेप केस में एक महीने में चार्जशीट दाखिल करने का आदेश

गैंगरेप

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने कोयंबटूर में हुई पीड़ादायक गैंगरेप की घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे “अमानवीय” और “निर्दय अपराध” करार देते हुए पुलिस को एक महीने के भीतर चार्जशीट दाखिल करने और आरोपियों को “सबसे सख्त सजा” दिलाने के निर्देश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

यह दर्दनाक घटना 2 नवंबर (रविवार रात) को कोयंबटूर एयरपोर्ट के पीछे एक सुनसान इलाके में हुई। 20 वर्षीय पीजी छात्रा अपने दोस्त के साथ कार में बैठी थी, तभी तीन युवक वहां पहुंचे। उन्होंने गाड़ी का शीशा तोड़ दिया और छात्रा के दोस्त पर दरांती से हमला कर दिया, जिससे वह बेहोश हो गया।

हमलावरों ने छात्रा को चाकू की नोक पर अगवा किया और एक सुनसान जगह पर ले जाकर गैंगरेप किया। बाद में छात्रा को पुलिस ने लगभग सुबह 4 बजे बरामद किया और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। पीड़िता की हालत अब स्थिर बताई जा रही है।

तीन आरोपी गिरफ्तार, एनकाउंटर के बाद पकड़े गए

कोयंबटूर पुलिस ने इस मामले में 7 स्पेशल टीमें गठित कीं और करीब 300 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच के दौरान पुलिस को सुराग मिले और मंगलवार सुबह वेल्लकिनारू इलाके में तीनों संदिग्धों का ठिकाना पता चला। पुलिस के अनुसार, जब टीम ने आरोपियों को पकड़ने की कोशिश की, तो उन्होंने हथियारों से हमला कर भागने की कोशिश की। आत्मरक्षा में पुलिस ने गोली चलाई, जिसमें तीनों के पैरों में गोली लगी।

गैंगरेप

आरोपियों की पहचान सतीश उर्फ़ करुपसामी, गुना उर्फ़ थवासी और कार्तिक उर्फ़ कलीश्वरन के रूप में हुई है — ये सभी दिहाड़ी मजदूर हैं और इन पर पहले से हत्या, लूटपाट और मारपीट जैसे मामले दर्ज हैं। तीनों को कोयंबटूर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

सीएम स्टालिन बोले — “ऐसे अपराधों के लिए कोई माफी नहीं”

मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने सोशल मीडिया और बयान के जरिए कहा — “कोयंबटूर में जो घटना घटी है, वह अमानवीय और क्रूर अपराध है। मैंने पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं कि चार्जशीट एक महीने में दाखिल की जाए और दोषियों को अधिकतम सजा दिलाई जाए।”

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार महिलाओं की सुरक्षा को लेकर “शून्य सहनशीलता नीति” पर काम कर रही है और किसी भी अपराधी को छोड़ा नहीं जाएगा।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज

इस घटना को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी उबाल है। AIADMK नेता एडप्पडी के. पलानीस्वामी ने कहा कि “स्टालिन सरकार में महिलाओं की सुरक्षा पूरी तरह से खत्म हो चुकी है।” वहीं बीजेपी नेताओं ने मुख्यमंत्री से जवाब मांगा कि राज्य में “सुरक्षित शहर” का दावा अब झूठा साबित हो रहा है।

जनता और सोशल मीडिया पर आक्रोश

सोशल मीडिया पर इस घटना की कड़ी निंदा हो रही है। लोग मांग कर रहे हैं कि अपराधियों को “उदाहरण बनने लायक सजा” दी जाए। ट्विटर पर #JusticeForCoimbatoreStudent ट्रेंड कर रहा है।

मुख्य बिंदु एक नज़र में:

  • घटना : 2 नवंबर की रात कोयंबटूर एयरपोर्ट के पीछे
  • पीड़िता : 20 वर्षीय पीजी छात्रा
  • आरोपी : तीन दिहाड़ी मजदूर, पूर्व में अपराधी रिकॉर्ड
  • कार्रवाई : एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार
  • सीएम का आदेश : एक महीने में चार्जशीट और अधिकतम सजा
  • विपक्ष : DMK सरकार पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर निशाना

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छत्तीसगढ़ में भयानक रेल हादसा : बिलासपुर के पास MEMU ट्रेन और मालगाड़ी की भीषण टक्कर, कई की दर्दनाक मौत

रेल हादसा

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में मंगलवार शाम एक बड़ा रेल हादसा हो गया, जब एक MEMU पैसेंजर ट्रेन एक मालगाड़ी से जोरदार टक्कर खा गई। हादसा इतना भीषण था कि पैसेंजर ट्रेन का इंजन और पहला कोच पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और वह मालगाड़ी के ऊपर चढ़ गया।

रेलवे सूत्रों के अनुसार, यह दुर्घटना शाम करीब 4 बजे बिलासपुर और गतौरा रेलवे स्टेशन के बीच हुई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कम से कम दो लोगों की मौत हुई है और कई यात्री घायल हैं। राहत और बचाव कार्य तेजी से जारी है।

कैसे हुआ हादसा

बताया जा रहा है कि गेवरा रोड से बिलासपुर जा रही MEMU लोकल ट्रेन (संख्या 68733) पटरी पर खड़ी एक मालगाड़ी से टकरा गई। यह टक्कर इतनी तेज थी कि ट्रेन का अगला हिस्सा मालगाड़ी के इंजन पर चढ़ गया। कई यात्रियों को ट्रेन के डिब्बों में फंसे होने की खबर है।

स्थानीय लोगों ने हादसे के तुरंत बाद पुलिस और रेलवे अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद रेलवे की बचाव टीमें, फायर ब्रिगेड और NDRF के जवान मौके पर पहुंचे और फंसे यात्रियों को निकालने का अभियान शुरू किया।

रेल हादसा

बचाव कार्य और घायलों की हालत

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक तरुण प्रकाश और बिलासपुर के मंडल रेल प्रबंधक राजमल खोईवाल ने घटनास्थल का दौरा किया और राहत कार्यों की निगरानी की।

घायलों को तुरंत एम्बुलेंस से बिलासपुर जिला अस्पताल और CIMS हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। रेलवे PRO ने बताया कि सभी घायलों के इलाज की पूरी व्यवस्था की गई है।

आईजी संजीव शुक्ला ने बताया कि “कई लोग घायल हुए हैं और एक व्यक्ति को डिब्बे से निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।”

रेल यातायात पर असर

यह हादसा बिलासपुर-कटनी रेलमार्ग पर हुआ है, जो देश के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है। हादसे के बाद इस रूट पर रेल यातायात पूरी तरह रोक दिया गया है। कई ट्रेनों को डाइवर्ट या रद्द कर दिया गया है। रेलवे ने कहा है कि ट्रैक की मरम्मत के बाद ही सेवाएं बहाल की जाएंगी।

जांच के आदेश

रेल मंत्रालय ने हादसे के कारणों की जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रारंभिक जांच में सिग्नलिंग फेल्योर या मानवीय गलती की संभावना जताई जा रही है। वरिष्ठ रेलवे अधिकारी मौके पर जांच में जुटे हैं।

रेल हादसा

रेलवे ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर

यात्रियों और उनके परिजनों की सहायता के लिए रेलवे ने आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं —

घटना स्थल: 9752485499 , 8602007202

पेंड्रा रोड : 8294730162

इन नंबरों पर कॉल करके यात्री अपने परिजनों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

लोगों में गुस्सा और सवाल

स्थानीय लोगों ने रेलवे प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सिग्नलिंग सिस्टम में खामी पहले से थी, लेकिन उसे समय पर ठीक नहीं किया गया। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इस घटना को लेकर रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

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अयोध्या में भव्य ध्वजारोहण समारोह : 25 नवंबर को पीएम मोदी फहराएंगे धर्म ध्वजा

ध्वजा

रामनगरी अयोध्या एक बार फिर ऐतिहासिक पल की गवाह बनने जा रही है। 25 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर के मुख्य शिखर पर 21 फुट ऊंची धर्म ध्वजा फहराएंगे। यह आयोजन मंदिर निर्माण के पूरा होने की आधिकारिक घोषणा के रूप में देखा जा रहा है। यह विशेष दिन राम विवाह पंचमी के शुभ अवसर पर मनाया जाएगा। अयोध्या में इस मौके पर भव्य समारोह की तैयारियां जोरों पर हैं — शहर को फूलों, रोशनी और भगवा झंडों से सजाया जा रहा है।

समारोह के खास पहलू

  • प्रधानमंत्री मोदी 161 फुट ऊंचे मंदिर शिखर पर ध्वज फहराएंगे।
  • इस आयोजन में 8,000 से 10,000 विशेष अतिथि शामिल होंगे, जिनमें RSS प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद रहेंगे।
  • कार्यक्रम के दौरान रामलला के दरबार में विशेष पूजा-अर्चना होगी।

आम श्रद्धालुओं के लिए 25 नवंबर को मंदिर के दर्शन अस्थायी रूप से बंद रहेंगे, लेकिन सीमित संख्या में भक्तों को कुबेर टीला तक जाने की अनुमति मिल सकती है।

ध्वजा

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

प्रधानमंत्री के आगमन को देखते हुए अयोध्या में तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की जा रही है। शहर के प्रवेश द्वारों पर अतिरिक्त चेकपोस्ट लगाए गए हैं और ड्रोन से निगरानी की जा रही है।

मोदी का अयोध्या से जुड़ा संकल्प

यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री मोदी के उस वादे का प्रतीक भी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब तक राम मंदिर का निर्माण पूरा नहीं हो जाता, वे अयोध्या नहीं जाएंगे। वे इससे पहले 5 अगस्त 2020 को भूमि पूजन और 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए थे।

आस्था और गौरव का संगम

यह ध्वजारोहण न केवल मंदिर निर्माण की सफलता का प्रतीक है, बल्कि भारत की आस्था, संस्कृति और एकता का उत्सव भी है। अयोध्या इस दिन फिर से जगमगाएगी और दुनिया के सामने भारत के आध्यात्मिक गौरव का प्रतीक बनेगी।

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मासूम की चीख से गूंजा स्कूल, 9 साल की बच्ची ने चौथी मंज़िल से लगाई छलांग – shocking CCTV

बच्ची

राजस्थान के जयपुर में स्थित Neerja Modi School के मंसरोवर शाखा में शुक्रवार दोपहर एक नौ वर्षीय बच्ची (कक्षा 4) ने चौथी मंजिल से छलांग लगा दी और गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में मृत घोषित हो गई। घटना ने स्कूल, माता-पिता और पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया।

सन्नाटा, अफरातफरी और अनसुलझे सवाल

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बच्ची ने स्कूल की रेलिंग पर चढ़कर छलांग लगाई। उसकी चीख सुनकर स्टाफ पहुंचा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। CCTV फुटेज में यह दिखा है कि बच्ची नीचे गिरने से पहले रेलिंग से ऊपर थी।

परिवार ने स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है — कहा जा रहा है कि घटनास्थल से खून के धब्बे मिटाए गए थे। पुलिस इस मामले की गहरी जांच कर रही है।

सुरक्षा से लेकर मानसिक स्वास्थ्य तक: स्कूलों और पेरेंट्स के सामने बड़े सवाल

  • क्या स्कूल की सुरक्षा-व्यवस्था पर्याप्त थी: चौथी मंजिल तक पहुंचने की अनुमति कैसे मिली?
  • क्या बच्चों को अकेले-अकेले रहने, डरने या किसी परेशानी को महसूस करने पर काउंसलिंग/सहायता मिलती है?
  • क्या माता-पिता और शिक्षक बच्चों के भावनात्मक संकेतों को पहचानते हैं — जैसे डर, उदासी, अकेलापन?

बच्ची

क्या करें माता-पिता और स्कूल?

बच्चों से रोज़ खुलकर संवाद करें — सिर्फ नंबर नहीं, उनकी भावनाओं को सुनें।

स्कूल में मेंटल हेल्थ काउंसलिंग, सुरक्षा गार्ड, सीसीटीवी एवं इमरजेंसी हेल्पलाइन अनिवार्य होनी चाहिए।

शिक्षक-प्रबंधन को समय-समय पर बच्चों के व्यवहार-परिवर्तन, डर या परेशानी पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

दर्द, सवाल और सीख — “अपने बच्चे की चुप्पी को ज़रूर सुनें”

यह हादसा सिर्फ एक परिवार का नहीं — साल दर साल बढ़ते स्कूल-सुरक्षा और स्वास्थ्य-प्रश्नों का प्रतीक है। बच्चों का डर, अकेलापन या मानसिक असहायपन कभी उस उम्र तक नहीं दिखता जब तक बहुत देर हो जाए।

अब सवाल है: क्या हमारे बच्चे सच में खुश, सुरक्षित और सुनने योग्य हैं?

हमारी जिम्मेदारी है कि सुनें, समझें और समय पर कदम उठाएँ — ताकि मासूम आवाज़ें किसी और ‘अलविदा’ से पहले सुनी जा सकें।

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Commercial LPG सिलेंडर हुआ सस्ता : कारोबारियों को मिली बड़ी राहत, जानिए आपके शहर में नए रेट

LPG

देशभर के कारोबारियों के लिए राहत की खबर है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 1 नवंबर 2025 से कमर्शियल LPG सिलेंडर के दामों में कटौती की है। नई दरें आज से लागू हो गई हैं। अब होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबारियों को गैस सिलेंडर के खर्च में थोड़ी राहत मिलेगी।

इस बार 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में ₹4.50 से ₹6.50 तक की कमी की गई है। वहीं, घरेलू 14.2 किलो सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

LPG

नए LPG रेट्स आपके शहर में

  • दिल्ली : ₹1,590.50
  • मुंबई : ₹1,542
  • कोलकाता : ₹1,694
  • चेन्नई : ₹1,750

त्योहारी और शादी के सीजन से पहले हुई यह कीमतों में कटौती व्यापारियों के लिए बड़ी राहत साबित होगी। घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतें अप्रैल 2025 से स्थिर हैं।

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CBSE Board Exam 2026 : 17 फरवरी से शुरू होंगी 10वीं-12वीं की परीक्षाएं, जानें पूरा शेड्यूल और नया बदलाव

CBSE

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की तारीखों की आधिकारिक घोषणा कर दी है। बोर्ड की ओर से जारी शेड्यूल के अनुसार, परीक्षाएं 17 फरवरी 2026 से शुरू होकर 9 अप्रैल 2026 तक चलेंगी।

कक्षा 10वीं और 12वीं का पूरा शेड्यूल

कक्षा 10वीं : 17 फरवरी से 18 मार्च 2026 तक

कक्षा 12वीं : 17 फरवरी से 9 अप्रैल 2026 तक

परीक्षा का समय : सुबह 10:30 बजे से एक ही शिफ्ट में सभी पेपर होंगे।

सीबीएसई ने इस बार लगभग पांच महीने पहले ही डेट शीट जारी कर दी है, ताकि छात्र अपनी तैयारी को समय पर शुरू कर सकें।

CBSE

NEP 2020 के तहत बड़ा बदलाव

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुसार, कक्षा 10वीं के छात्रों के लिए दो बोर्ड परीक्षाओं की व्यवस्था शुरू की जा रही है। पहली परीक्षा फरवरी-मार्च में और दूसरी मई 2026 में होने की संभावना है। इसका उद्देश्य छात्रों पर से परीक्षा का तनाव कम करना और सीखने की प्रक्रिया को लचीला बनाना है।

स्कूलों के लिए जरूरी निर्देश

CBSE ने सभी स्कूलों को ‘List of Candidates (LOC)’ तैयार करते समय छात्रों की जानकारी—नाम, जन्मतिथि, विषय कोड और APAAR ID—सही तरह से सत्यापित करने के निर्देश दिए हैं। डेटा में गलती मिलने पर आगे चलकर एडमिट कार्ड और रिजल्ट में दिक्कतें हो सकती हैं।

CBSE

कितने छात्र होंगे शामिल?

इस साल लगभग 45 लाख छात्र कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होने की उम्मीद है। आधिकारिक वेबसाइट पर मिलेगी अपडेटेड डेटशीट छात्र और अभिभावक विषयवार विस्तृत टाइमटेबल और अन्य जानकारी के लिए सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर नज़र रखें।

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Trailblazer Tenzin Yangki : अरुणाचल की पहली महिला IPS ने तोड़ा सब रिकॉर्ड

Tenzin Yangki

तवांग-जिले से आने वाली Tenzin Yangki ने Union Public Service Commission (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा 2022 में All India Rank 545 हासिल कर और आदिलु, कठिन क्षेत्र से निकलकर अरुणाचल प्रदेश की पहली महिला IPS अधिकारी बन गईं। उनका चयन AGMUT कैडर में हुआ और उन्होंने Sardar Vallabhbhai Patel National Police Academy, हैदराबाद में ट्रेनिंग पूरी की।

परिवारिक पृष्ठभूमि: सेवा और आदर्श की विरासत

Tenzin के पिता स्व. Thupten Tempa IAS अधिकारी व मंत्री थे और उनकी माता Jigmi Choden APPSC अधिकारी और सरल जीवन जीने वाली पूर्व सचिव थीं। परिवार में देश-सेवा का भाव था, जिसने Tenzin को छोटी उम्र से ही प्रेरणा दी।

शैक्षणिक सफर: Warwick-JNU से IPS तक

Tenzin ने यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक से BSc (Philosophy, Politics, Economics) किया और फिर JNU से MA तथा MPhil इन इंटरनेशनल रिलेशनस।

2017 में उन्होंने APPSC पास किया, इसके बाद प्रशासनिक अनुभव लिया और फिर UPSC में सफलता पाई।

Tenzin Yangki

सफलता का सफर: संघर्ष, जुनून और जज़्बा

दुर्गम पहाड़ी इलाके, सीमित संसाधन और समाज-अपेक्षाओं के बीच Tenzin ने हिम्मत नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा है: “Being first is never easy… Don’t be afraid of walking alone today – others will follow.”

उनकी यह उपलब्धि सिर्फ निजी नहीं, बल्कि पूरे उत्तर-पूर्व की लड़कियों के लिए प्रेरणा बन गई है।

प्रेरक संदेश—Tenzin Yangki की जुबानी

“सपनों की ऊँचाई और जड़ों की गहराई दोनों जरूरी हैं। समाज की हर बंदिश तोड़ो, खुद पर भरोसा रखो—रास्ता खुद-ब-खुद बन जाता है।”

“अगर मैं सीमांत जिले से IPS बन सकती हूं, तो देश की हर बेटी कुछ भी कर सकती है।”

उनका यह संदेश हर उस लड़की तक पहुँच रहा है जो असंभव को संभव बनाना चाहती है।

समाज और युवा बेटियों के लिए मिसाल

Tenzin की उपलब्धि यह दिखाती है कि जज़्बा, अनुशासन, शिक्षा और परिवार-समर्थन से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। उन्होंने उत्तर-पूर्व की नई पहचान “सशक्त, शिक्षित और साहसी” का पर्याय बनकर पेश की है।

Tenzin Yangki सिर्फ पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि बदलाव की मिसाल हैं। उनका सफर साबित करता है कि संघर्ष, जज़्बा और सेवा-भावना से कोई भी महिला-उम्मीदवार देश-सेवा की ऊँचाइयों तक पहुँच सकती है। आज इस तवांग-की बेटी ने यह दिखा दिया है कि “पहले चलना असान नहीं होता, लेकिन दूसरों के लिए राह आसान कर देना उसकी असली जीत है।”

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ORS Drinks Ka Comeback – क्या फिर शुरू होगी चीनी से भरी सेहत की धोखाधड़ी?

ORS Drinks

कुछ हफ़्ते पहले Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) ने एक अहम निर्देश जारी किया — अब कोई भी फूड या बेवरेज ब्रांड सिर्फ इसलिए “ORS Drinks”, “Hydra ORS”, “Smart ORS” जैसे टैग या नाम नहीं लगा सकता जब तक उसका फॉर्मूला World Health Organization (WHO) की मानक दिशानिर्देशों के अनुरूप न हो।

बड़ा कारण था: बाजार में कई ड्रिंक्स “ओआरएस” के नाम पर बिक रहे थे — लेकिन असलियत में वे हाई-शुगर, नकली इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक्स थे जिन्हें दस्त या निर्जलीकरण (dehydration) में इस्तेमाल किया जा रहा था। इससे खासकर बच्चों का स्वास्थ्य जोखिम में रहा।

डॉक्टरों और बाल-स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस बैन का स्वागत किया—उनका कहना था कि यह कदम लाखों जानों को बचाने वाला है।

दबाव और ‘ब्रेक’—क्या हुआ?

लेकिन इस बीच बड़ी कंपनियों ने खामोश नहीं बैठे। उन्होंने कोर्ट में याचिका दायर की और लाखों रुपये के “ओआरएस-ब्रांडेड” स्टॉक्स की वैल्यू को लेकर दबाव बनाया। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने इस बैन पर अस्थायी तौर पर ‘स्टे’ लगा दिया—यानि अब वही पुराने मॉडल के फेक ORS-ड्रिंक्स फिर बाजार में आने की राह पर लग सकते हैं।

ORS Drinks

इस बीच यह भी उभरा कि ORS-टैग वाले ड्रिंक मार्केट का एक बहुत बड़ा सेक्टर बन चुके थे—₹1,000 करोड़ + तक का आंकड़ा सामने था।

विशेषज्ञों की चेतावनियाँ

प्रसिद्द बच्चों के चिकित्सक Dr Sivaranjani Santosh ने कहा कि ये नकली “ओआरएस” ड्रिंक्स बेहद ख़तरनाक थे—इनमें शुगर का स्तर WHO के मानक से १० गुना तक अधिक पाया गया। उनका मानना है कि यह सिर्फ शब्द का मुद्दा नहीं—यह मासूम बच्चों की जान से खेलने वाला विषय है।

इस कदम को लेकर प्रश्न उठ रहे हैं: क्या स्वास्थ्य की जगह फर्क आर्थिक हितों ने ले ली है? क्या नियामक सही दिशा में कदम उठा रहा है या दबाव में फंसा हुआ है?

स्वास्थ्य बनाम मुनाफा

यह मामला बताता है कि जब “ज़िंदगियाँ” बाज़ार की शर्तों के सामने आती हैं, तो सवाल कौन-सा पक्ष अपनी जीत दर्ज करेगा—जनस्वास्थ्य या कंपनियों का मुनाफा? अब जिम्मेदारी उपभोक्ताओं, डॉक्टरों और नियामकों की है कि वे जागरूक रहें। लेबल पढ़ें, सामग्री जांचें और “ओआरएस” नाम वाले किसी भी पैकेट को डॉक्टर की सलाह के बिना स्वीकार न करें। आज यह मामला सिर्फ टैग का नहीं—यह भविष्य की पीढ़ियों की सेहत की लड़ाई है।

सामान्य नागरिक का सबसे पक्का हथियार है — जागरूकता। Labels पढ़ें, उत्पाद की जाँच करें और जब भी “too good to be true” लगे — सवाल उठाएँ।आपके इस बारे में क्या विचार हैं,नीचे कमेंट करें।

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Cyclone Montha ने Eastern India में मचाया कहर, क्या हम फिर से तैयारी से चूके?

Cyclone Montha

अक्टूबर 2025 के अंतिम दिनों में बंगाल की खाड़ी में एक निम्न-दबाव क्षेत्र विकसित हुआ, जिसे Cyclone Montha नाम दिया गया। यह धीरे-धीरे गहराता गया और 28-29 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के काकीनाडा तट के पास गंभीर स्पर्द्धा (Severe Cyclonic Storm) की श्रेणी में लैंडफॉल हुआ। हवाओं की गति 90-110 किमी/घंटा तक दर्ज की गई।

किन राज्यों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर?

लैंडफॉल के सिलसिले में तटीय आंध्र प्रदेश बुरी तरह प्रभावित हुआ—पेड़ों के उखड़ने, बिजली खंभों के गिरने और भारी बारिश की वजह से सड़कों पर पानी भर गया। इसके साथ ही Odisha के आठ जिलों में रेड-अलर्ट जारी किया गया। Jharkhand, West Bengal और Chhattisgarh में भी अगले 30-31 अक्टूबर तक भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

राहत-और-बचाव आँच में

सरकारों ने हजारों लोगों को सुरक्षित क्षेत्रों में स्थानांतरित किया। आंध्र में 38,000 से अधिक लोग इवैक्यूएट किए गए। राज्यीय बचाव दल, एनडीआरएफ (NDRF)-एसडीआरएफ (SDRF) सक्रिय हैं। स्कूल-कॉलेज बंद किए गए और तटीय इलाकों में ड्रोन और नावों की मदद से राहत काम जारी है।

Cyclone Montha

जान-माल के नुकसान और अभी तक का आकलन

आंध्र प्रदेश ने इस तूफान से लगभग ₹53 बिलियन (US $603 million) का नुकसान आंका है, जिसमें सबसे अधिक असर कृषि क्षेत्र पर हुआ—लगभग ₹8.68 बिलियन। उधर, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कम-से-कम एक व्यक्ति की मौत हुई और कई पशु प्रभावित हुए।

आगे क्या जोखिम है?

मौसम विभाग के मुताबिक, तूफान कमजोर होते हुए भी 31 अक्टूबर तक झारखंड-बिहार-छत्तीसगढ़ में भारी-बहुत भारी बारिश की संभावना बनाये हुए है। यह चक्रवात एक बार फिर यह साबित करता है कि तटीय और अंतःक्षेत्रीय राज्यों को जलवायु-चक्र व इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयारियों को लेकर सतर्क रहना होगा। अब सवाल यह है—अगली बार बेहतर तैयारी होगी या फिर हम “चक्रवात का इंतज़ार” करते रहेंगे?

Cyclone Montha ने अपने साथ केवल बारिश-हवा नहीं बल्कि हमारी आपदा-प्रबंधन क्षमताओं पर भी सवाल किया है,राहत-कार्य तेजी से चल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हमें यह याद रखना होगा—तैयारी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

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मुंबई पवई बंधक कांड : 17 बच्चों को छुड़ाने के दौरान आरोपी रोहित आर्य की मौत, सभी बच्चे सुरक्षित

पवई

मुंबई के पवई इलाके में गुरुवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जब एक व्यक्ति ने एक एक्टिंग स्टूडियो में लगभग 20 बच्चों को बंधक बना लिया। पुलिस के एक घंटे से अधिक चले बचाव अभियान के बाद सभी बच्चों को सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि आरोपी रोहित आर्य की ऑपरेशन के दौरान मौत हो गई।

क्या था पूरा मामला?

यह घटना आरए स्टूडियो, पवई की है, जहां आरोपी रोहित आर्य ने बच्चों को “ऑडिशन” के बहाने बुलाया था। पुलिस के अनुसार, आर्य मानसिक रूप से परेशान था और उसने एक वीडियो संदेश जारी कर प्रशासन से बात करने की मांग की थी। उसने धमकी दी थी कि अगर उसकी बातें नहीं सुनी गईं तो वह बच्चों को नुकसान पहुँचा सकता है। संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) सत्यनारायण ने बताया कि आर्य के पास एक ऐसा हथियार था जो “बंदूक जैसा दिखता था।” जब पुलिस टीम अंदर दाखिल हुई, तो उसने एयर गन से फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में गोली लगने से वह घायल हुआ और अस्पताल में उसकी मौत हो गई।

पवई

क्यों हुआ यह कांड?

प्राथमिक जांच में सामने आया है कि रोहित आर्य सरकारी स्कूल प्रोजेक्ट के भुगतान न मिलने से नाराज़ था। वह इस मुद्दे पर पूर्व शिक्षा मंत्री से बातचीत करना चाहता था। पुलिस का कहना है कि वह पिछले कुछ दिनों से स्टूडियो में फर्जी ऑडिशन का आयोजन कर रहा था।

पुलिस और फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई

मुंबई पुलिस और फायर ब्रिगेड की संयुक्त टीम ने लगभग एक घंटे तक चले ऑपरेशन में सभी बच्चों को सुरक्षित बचा लिया। मौके पर भीड़ जमा न हो, इसके लिए पूरे इलाके को सील कर दिया गया था।

मुंबई का यह बंधक कांड शहर में सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े करता है। फिलहाल सभी बच्चे सुरक्षित और सकुशल हैं, जबकि पुलिस ने घटना की गहराई से जांच शुरू कर दी है।

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तुर्की में 6.1 तीव्रता का भूकंप : पश्चिमी इलाके में हड़कंप, कई इमारतें क्षतिग्रस्त, लोग रातभर सड़कों पर

तुर्की

पश्चिमी तुर्की सोमवार देर रात एक शक्तिशाली भूकंप से कांप उठा। रिक्टर पैमाने पर 6.1 तीव्रता वाले इस भूकंप ने कई शहरों में तबाही मचा दी और लोगों में अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया। भूकंप का केंद्र बालिकेसिर प्रांत के सिंदिरगी (Sındırgı) शहर में था, जो जमीन से लगभग 6 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था।

तुर्की की आपदा और आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी (AFAD) के अनुसार, यह झटका स्थानीय समयानुसार रात 10:48 बजे महसूस किया गया। भूकंप इतना शक्तिशाली था कि इसके झटके इस्तांबुल, इज़मिर, बर्सा और मनीसा जैसे प्रमुख शहरों तक महसूस किए गए।

नुकसान का जायजा और राहत कार्य

प्रारंभिक रिपोर्टों के मुताबिक, सिंदिरगी क्षेत्र में तीन खाली इमारतें और एक दो मंजिला दुकान ढह गईं। राहत एजेंसियों का कहना है कि ये इमारतें पहले के भूकंपों से पहले ही कमजोर हो चुकी थीं।

कोई जनहानि नहीं : अब तक किसी के मारे जाने की खबर नहीं मिली है।

दो लोग घायल : घबराहट में गिरने से दो लोग हल्के रूप से घायल हुए, जिन्हें पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

तुर्की

भूकंप के बाद लोग घरों से बाहर निकलकर सड़कों पर आ गए। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई और लोग पूरी रात खुले में डरे-सहमे रहे। आफ्टरशॉक (भूकंप के बाद के झटके) भी महसूस किए गए, जिससे डर और बढ़ गया।

तुर्की में भूकंप का इतिहास

तुर्की विश्व के सबसे भूकंप-संवेदनशील देशों में से एक है। यह देश सीरिया-अनातोलियन फॉल्ट लाइन पर स्थित है, जहां भूकंपीय गतिविधियां लगातार होती रहती हैं। वर्ष 2023 में आए विनाशकारी भूकंप में तुर्की और सीरिया में 53,000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। हाल का यह भूकंप उस त्रासदी की याद ताजा कर गया है।

सरकार की अपील और अगली तैयारी

तुर्की सरकार ने सभी राहत एजेंसियों को सतर्क रहने और क्षतिग्रस्त इलाकों में तुरंत सर्वे शुरू करने के निर्देश दिए हैं। AFAD और स्थानीय प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों ने लोगों से घरों की संरचना जांचने और आफ्टरशॉक से सावधान रहने की सलाह दी है।

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Justice सूर्यकांत बने देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश, 24 नवंबर को संभालेंगे पदभार

मुख्य न्यायाधीश

देश की न्यायपालिका में एक नया अध्याय जुड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में नियुक्त किया गया है। केंद्र सरकार के न्याय विभाग (Department of Justice) ने गुरुवार को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी है।

जस्टिस सूर्यकांत 24 नवंबर 2025 को मुख्य न्यायाधीश का पदभार संभालेंगे। वे मौजूदा CJI जस्टिस जे.बी. पारदीवाला का स्थान लेंगे, जो 23 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

न्यायाधीश

जस्टिस सूर्यकांत का सफर

जन्म 10 फरवरी 1962 को हुआ। उन्होंने 1984 में हरियाणा के हिसार जिला अदालत से अपने वकालत करियर की शुरुआत की और एक साल बाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की। वे हरियाणा के एडवोकेट जनरल भी रहे। जनवरी 2004 में उन्हें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। इसके बाद वे हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने और फिर 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत हुए।

मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल 9 फरवरी 2027 तक रहेगा। सुप्रीम कोर्ट में रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण संविधान पीठों (Constitution Benches) का हिस्सा बनकर अहम फैसले दिए हैं।

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शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव : बुधवार की तेजी गुरुवार को गिरावट में बदली

शेयर बाजार

भारतीय शेयर बाजार में इस हफ्ते जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। बुधवार को आई जबरदस्त तेजी के बाद गुरुवार को बाजार ने करवट बदली और भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। दो दिनों के इस उतार-चढ़ाव ने निवेशकों की उम्मीदों और मुनाफे — दोनों को झटका दिया।

29 अक्टूबर : निफ्टी और सेंसेक्स में जोरदार तेजी, ऑल-टाइम हाई के करीब पहुंचा बाजार

बुधवार को शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी रही। BSE सेंसेक्स 368.97 अंक की बढ़त के साथ 84,997.13 पर बंद हुआ। NSE निफ्टी 117.70 अंक उछलकर 26,053.90 के स्तर पर पहुंच गया। यह तेजी मुख्य रूप से वैश्विक बाजारों में सकारात्मक रुझान, अमेरिकी फेड की ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों, और घरेलू निवेशकों की खरीदारी से प्रेरित थी। बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली।

HDFC Bank, Infosys, Maruti Suzuki और TCS जैसे शेयरों ने बाजार को ऊपर खींचा। निफ्टी अपने ऑल-टाइम हाई 26,100 के स्तर को छूने के करीब पहुंच गया था।

शेयर बाजार

30 अक्टूबर : एक दिन में पलटी तस्वीर, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में

गुरुवार को बाजार ने अचानक ब्रेक लगा दिए।

सेंसेक्स 592.67 अंक (0.70%) गिरकर 84,404.46 पर बंद हुआ। निफ्टी 176.05 अंक (0.68%) की गिरावट के साथ 25,877.85 पर आ गया। इस गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति में एक ही दिन में करीब ₹3.5 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त टिप्पणी, FII द्वारा भारी बिकवाली, और वैश्विक बाजारों की कमजोरी इस गिरावट के मुख्य कारण रहे। रिलायंस, टाटा स्टील, और SBI जैसे दिग्गज शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मुनाफावसूली हावी रही।

निवेशकों के लिए संकेत

मार्केट विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट एक स्वाभाविक करेक्शन (natural correction) है और फिलहाल 25,800–26,000 के दायरे में सपोर्ट बनता दिख रहा है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लंबी अवधि के निवेशक घबराएं नहीं, बल्कि अच्छी कंपनियों में हर गिरावट पर धीरे-धीरे निवेश बढ़ाएं।

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दिल्ली में क्यों फेल हुई आर्टिफिशियल बारिश? मौसम की बेरुखी बनी सबसे बड़ी वजह

आर्टिफिशियल बारिश

दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए आर्टिफिशियल बारिश कराने की बहुप्रतीक्षित कोशिश असफल हो गई है। IIT कानपुर के विशेषज्ञों के नेतृत्व में किया गया यह क्लाउड सीडिंग का पहला परीक्षण था, लेकिन मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण यह बारिश कराने में नाकाम रहा।

क्या है असफलता का कारण?

क्लाउड सीडING की सफलता पूरी तरह से मौसम की कुछ खास स्थितियों पर निर्भर करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक के लिए आसमान में पर्याप्त मात्रा में नमी वाले घने बादलों का होना अनिवार्य है।

बादलों की कमी:

परीक्षण के समय दिल्ली के आसमान में ऐसे बादल मौजूद नहीं थे जो कृत्रिम बारिश के लिए उपयुक्त हों। इस प्रक्रिया के लिए कम ऊंचाई वाले और नमी से भरे  ‘क्यूम्यलस ‘बादलों की जरूरत होती है, जो उस दिन नहीं थे।

हवा में नमी का अभाव:

क्लाउड सीडिंग में सिल्वर आयोडाइड जैसे रसायन बादलों में मौजूद नमी को संघनित करके बारिश की बूंदों में बदलते हैं। यदि हवा ही सूखी हो और नमी की मात्रा बहुत कम हो, तो यह प्रक्रिया सफल नहीं हो सकती। गुरुवार को दिल्ली की हवा में नमी का स्तर काफी कम था।

आर्टिफिशियल बारिश

अनुकूल तापमान का न होना:

इस प्रक्रिया के लिए बादलों का तापमान भी एक निश्चित स्तर (आमतौर पर शून्य से नीचे) पर होना चाहिए, ताकि बर्फ के कण बन सकें जो बाद में पिघलकर बारिश के रूप में गिरें। ये सभी अनुकूल परिस्थितियाँ एक साथ न मिलने के कारण परीक्षण विफल हो गया।

IIT कानपुर की टीम ने पहले ही स्पष्ट किया था कि यह सफलता की गारंटी नहीं है, बल्कि यह मौसम पर निर्भर करेगा। सरकार का कहना है कि यह एक पायलट प्रोजेक्ट था और भविष्य में मौसम अनुकूल होने पर दोबारा प्रयास किया जाएगा।

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अमेज़ॅन में फिर बड़ी Layoffs : हजारों कर्मचारियों को टेक्स्ट मैसेज से मिली नौकरी जाने की सूचना

अमेज़ॅन

ई-कॉमर्स दिग्गज अमेज़ॅन ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर कॉर्पोरेट जगत को चौंका दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने 14,000 से 30,000 तक कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का निर्णय लिया है। हैरानी की बात यह है कि कई कर्मचारियों को टेक्स्ट मैसेज या ईमेल के ज़रिए ही नौकरी से निकाले जाने की सूचना दी गई।

यह कदम 2022-23 में हुई 27,000 कर्मचारियों की छंटनी के बाद अमेज़ॅन की अब तक की सबसे बड़ी कटौती मानी जा रही है।

छंटनी की वजह — AI और लागत में कटौती

अमेज़ॅन के अनुसार, यह फैसला कंपनी की AI (Artificial Intelligence) और ऑटोमेशन तकनीक को अपनाने की रणनीति का हिस्सा है। कंपनी अपने परिचालन खर्च को घटाकर दक्षता बढ़ाना चाहती है। साथ ही, महामारी के दौरान हुई ओवरहायरिंग यानी ज़रूरत से ज़्यादा भर्तियों को भी अब संतुलित किया जा रहा है।

हालांकि, कंपनी ने हाल ही में मुनाफे में भारी वृद्धि दर्ज की थी, ऐसे में यह छंटनी उद्योग जगत और कर्मचारियों के लिए चौंकाने वाली साबित हुई है।

अमेज़ॅन

भारत में भी असर

अमेज़ॅन की इस वैश्विक छंटनी का असर भारत में भी देखने को मिलेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश में 800 से 1,000 कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। इसका असर खासकर फाइनेंस, मार्केटिंग, HR और टेक्नोलॉजी विभागों पर पड़ेगा।

टेक इंडस्ट्री में छंटनी की लहर

2025 में माइक्रोसॉफ्ट, इंटेल और TCS जैसी कई कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर छंटनी के बाद, अमेज़ॅन की यह घोषणा टेक सेक्टर में बढ़ती अस्थिरता को और गहरा कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह ट्रेंड दिखाता है कि AI के बढ़ते प्रभाव के चलते कई पारंपरिक नौकरियों का भविष्य अब अस्थिर होता जा रहा है।

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बोइंग को 777X प्रोग्राम में झटका, 5 अरब डॉलर का नुकसान और डिलीवरी 2027 तक टली

बोइंग

दुनिया की दिग्गज विमान निर्माता कंपनी बोइंग (Boeing) को अपने महत्वाकांक्षी 777X जेट प्रोग्राम में देरी के कारण एक बड़ा झटका लगा है। कंपनी ने बताया कि उसे इस प्रोजेक्ट में लगभग 4.9 अरब डॉलर (करीब ₹41,000 करोड़) का नुकसान झेलना पड़ा है। इसके चलते बोइंग की तीसरी तिमाही में कुल घाटा 5.4 अरब डॉलर तक पहुँच गया है।

देरी की वजह क्या है

बोइंग ने बताया कि 777X विमान की प्रमाणन प्रक्रिया (Certification) में अमेरिकी एविएशन रेगुलेटर FAA से मंजूरी मिलने में उम्मीद से ज्यादा समय लग रहा है। इस कारण कंपनी ने विमान की पहली डिलीवरी की तारीख को फिर से आगे बढ़ा दिया है — अब यह 2027 में होगी, जबकि पहले यह 2026 तय की गई थी। दरअसल, यह प्रोजेक्ट 2020 में लॉन्च होना था, लेकिन लगातार तकनीकी और नियामक कारणों से इसकी टाइमलाइन बढ़ती चली गई।

कंपनी का बयान

बोइंग के सीईओ केली ऑर्टबर्ग (Kelly Ortberg) ने कहा, “हम 777X शेड्यूल में देरी से निराश हैं, लेकिन विमान उड़ान परीक्षण में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। हमें पता है कि प्रमाणन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अभी बहुत काम बाकी है।”

बोइंग

लगातार बढ़ता नुकसान

777X प्रोग्राम में अब तक बोइंग को कुल 15 अरब डॉलर से ज्यादा का झटका लग चुका है। यह स्थिति तब आई है जब कंपनी पहले से ही 737 MAX हादसों (2018-2019) के बाद से FAA की कड़ी निगरानी में है।

एयरबस को मिला फायदा

बोइंग की मुश्किलों का फायदा उसके प्रतिद्वंद्वी एयरबस (Airbus) को मिल रहा है, जिसका A350 मॉडल वाइडबॉडी विमान बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।

कंपनी पर बढ़ता दबाव

यह बोइंग की लगातार 17वीं घाटे वाली तिमाही है, जो बताती है कि कंपनी अब भी अपने पुराने संकटों से उबर नहीं पाई है। हालांकि, बोइंग ने उम्मीद जताई है कि 777X की सफल डिलीवरी के बाद उसके वित्तीय हालात में सुधार आएगा।

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China’s Influencer Crackdown : अब बिना Degree सोशल मीडिया पर नहीं देंगे Advice

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अक्टूबर 2025 में Cyberspace Administration of China (CAC) ने एक बेहद कड़ा नियम लागू किया, जिसके तहत चीन में सोशल-मीडिया प्लेटफॉर्म्स (जैसे Douyin, Weibo, Bilibili) पर अब स्वास्थ्य, कानून, शिक्षा, वित्त जैसे संवेदनशील विषयों पर रील्स या कंटेंट तभी बनाई जा सकती है जब कंटेंट क्रिएटर (Influencer) के पास संबद्ध यूनिवर्सिटी डिग्री, प्रोफेशनल सर्टिफिकेट या प्रमाणित प्रशिक्षण हो।

इसके साथ ही प्लेटफॉर्म्स को इन क्रिएटर्स की योग्यता प्रमाणित करनी होगी और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ, तो अकाउंट सस्पेंड होने या 100,000 युआन तक के जुर्माने के दायरे में आ जाएंगे।

क्यों लिया गया यह फैसला?

सरकार की दलील यह है कि सोशल-मीडिया ऑनलाइन सलाह, चिकित्सा टिप्स, वित्तीय गाइडेंस आदि के ज़रिए झूठी या खतरनाक जानकारी का माध्यम बन गया था। शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून जैसे क्षेत्रों में अनपढ़ या गैर-प्रमाणित प्रभावितों (influencers) की बढ़ती पहुँच ने उपभोक्ताओं को जोखिम में डाल दिया था।इसलिए इस पॉलिसी का उद्देश्य नागरिकों को भरोसेमंद और प्रमाणित स्रोतों से जानकारी तक पहुँच देना बताया गया है — “मisinformation” को रोकना और डिजिटल जानकारी की विश्वसनीयता बढ़ाना।

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कैसे लागू होगी और क्या होगा असर?

  • अब प्लेटफॉर्म्स को अपने कंटेंट क्रिएटर्स की डिग्री, सर्टिफिकेट या प्रोफेशनल लाइसेंस जैसी योग्यताओं का सत्यापन करना अनिवार्य है।
  • नियमों का उल्लंघन करने पर क्रिएटर का अकाउंट सस्पेंड हो सकता है, साथ ही प्लेटफॉर्म को भी ज़िम्मेदारी उठानी होगी।
  • इस पॉलिसी के बाद सोशल-मीडिया पर “अनसर्टिफाइड” सलाह का बाजार कम होगा, लेकिन इसके साथ एक बड़े बदलाव का डर भी है: आत्म-निर्मित क्रिएटर्स, जन-भावना सम्बन्धी कंटेंट निर्माता और लोक-स्टाइल इंफ्लुएंसर्स को स्थान कम मिल सकता है।

सामाजिक और डिजिटल प्रभाव

  • इस नए नियम से सोशल-मीडिया की खुली बातचीत और जन-आधारित क्रिएशन पर सवाल खड़ा हो गया है।
  • एक ओर जहाँ जानकारी की गुणवत्ता बढ़ सकती है, वहीं दूसरी ओर वह क्रिएटर्स जिनके पास पेशेवर डिग्री-लाइसेंस नहीं है, अब “प्रोफेशनल Advice” देने से वंचित हो सकते हैं।
  • सोशल-मीडिया का वह “जन-स्थल” जहाँ लोग अपनी जिंदगी के अनुभव, टिप्स, स्टोरीज़ साझा करते थे, आज “प्रमाण-मंत्र” वाली जगह बन सकती है।

आलोचक कह रहे हैं कि यह शासन-नियंत्रण (state control) की दिशा में एक कदम हो सकता है — जहाँ दृष्टिकोण, राय या अनुभव की जगह केवल डिग्री-धारी विशेषज्ञों की आवाज तक सीमित हो जाए।  चीन का यह नया कानून एक संकेत है कि डिजिटल-दुनिया में ‘विश्वसनीयता’ और ‘जवाबदेही’ कौन तय करेगा — क्रिएटर या प्लेटफॉर्म या सरकार।

अगर सही तरीके से लागू हुआ, तो यह नियम लोगों को गलत-सलाह से बचा सकता है। लेकिन यदि सीमाबद्ध रूप से इस्तेमाल हुआ, तो यह स्वतंत्र विचार, क्रिएटिविटी और जन-आवाज के लिए चुनौती भी बन सकता है। सोशल-मीडिया यूजर के रूप में यह हमारी जिम्मेदारी है — सलाह लेने से पहले पूछें: “क्या मुझे वह व्यक्ति सलाह दे रहा है जिसकी प्रमाण-योग्यता है। आपकी इस बारे में क्या राय है?आपके देश में ये कानून होना चाहिए?नीचे कमेंट करके बताएं।

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Road Revolution : हाईवे पर लगे QR Codes से पता चलेगा कौन, कितना और कब — Gadkari का बड़ा फैसला

हाईवे

बेंगलुरु की उद्यमी अनुराधा तिवारी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था—“5 रुपये के बिस्किट पर सारी डिटेल्स छप सकती हैं तो 100 करोड़ की सड़क पर क्यों नहीं?” यह सवाल वायरल हुआ और सड़क निर्माण-परदर्शिता को लेकर जन-चिंता का रूप ले गया। उनकी इस पहल ने शासन-स्वीकृति पाने वाला विचार जन्म दिया—जहाँ हाईवे के हर पैच, कॉन्ट्रैक्टर, अधिकारी और निर्माण डेट कम-से-कम आम नागरिक के सामने हो सके।

मंत्री का ऐलान : पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम

नितिन गडकरी, केंद्रीय सड़क-परिवहन और राजमार्ग मंत्री, ने खुले मंच पर घोषणा की कि अब हर राष्ट्रीय हाईवे परियोजना पर एक QR Code लगेगा जिसमें यूनिक जानकारी मिलेगी—प्रोजेक्ट लागत, ठेकेदार का नाम, अधिकारी, डेटलाइन, मेंटेनेंस जिम्मेदारी आदि।

“अब जनता खुद देखेगी कि खराब सड़क किसकी है—कॉन्ट्रैक्टर की, अधिकारी की या मंत्री की।” उन्होंने कहा।

हालाँकि इस दिशा में अभी आधिकारिक प्रेस रिलीज़ या विस्तृत सरकारी गज़ेट में QR-कोड हिसाब से लागू होने की पुष्टि सार्वजनिक नहीं मिली है, लेकिन सोशल मीडिया और जन-मंचों पर चर्चा तेज़ है।

हाईवे

क्या जानकारी मिलेगी QR Code से?

  • कौन ठेकेदार परियोजना का जिम्मेदार है?
  • कार्य की अनुमानित लागत, अवधि और तिथियाँ क्या थीं?
  • किस अधिकारी-मंत्री ने समीक्षा की?
  • मेंटेनेंस का जिम्मेदार कौन है और शिकायत के लिए कौन संपर्क करेगा?

यह प्रणाली सड़क निर्माण और रख-रखाव में जवाबदेही ला सकती है, भ्रष्टाचार और घटिया क्वालिटी पर आंच ला सकती है।

लाभ और चुनौतियाँ

लाभ:

आम नागरिक को सड़क परियोजनाओं में सीधे जानकारी मिलना शुरू होगी।कमजोर-क्वालिटी वाले रोड्स के लिए जवाबदेही तय होगी।ट्रांसपेरेंसी से इंफ्रास्ट्रक्चर पर भरोसा बढ़ेगा।

चुनौतियाँ:

ठेकेदार, अधिकारी या मंत्री की जानकारी सार्वजनिक होने से प्राइवेसी और सुरक्षा-चिंताएँ उठ सकती हैं।QR-कोड पर भरोसा तभी होगा जब डेटा समय-सापेक्ष और सत्य हो।ज़मीनी स्तर पर इस व्यवस्था की निगरानी और क्रियान्वयन चुनौती बना हुआ है—केवल घोषणा से काम नहीं चलेगा।

यह विचार सिर्फ तकनीक का नहीं—यह “लोक-सत्ता की जानकारी आम जनता तक” पहुँचाने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है। अनुराधा तिवारी जैसी नागरिक-सक्रियता और गडकरी-मंत्रालय की राजनीतिक इच्छाशक्ति के मेल से यदि यह व्यवस्था सही मायने में लागू होती है, तो यह भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर पारदर्शिता की मिसाल बन सकती है।

लेकिन जैसे हर रोड बनाना मुश्किल होता है, वैसे ही इस सिस्टम को भी जमीनी असर देने के लिए समय, निगरानी और सक्रिय जनता-सहयोग की जरूरत होगी। आने वाले समय में यह देखने लायक होगा कि QR Code की यह पहल सिर्फ स्लोगन बनी रहती है या भारतीय सड़क उपयोगकर्ता-अनुभव में असल बदलाव लाती है।

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कॉमेडी के बादशाह Satish Shah नहीं रहे – पर उनके किरदार आज भी ज़िंदा हैं”

Satish Shah

रंगमंच से मनोरंजन की ऊँचाइयाँ

25 जून 1951 को मुंबई में जन्मे Satish Shah ने अपनी कला-यात्रा की शुरुआत थिएटर और फिल्म प्रशिक्षण से की। उन्होंने सेंट ज़ेवियर कॉलेज के बाद Film and Television Institute of India (FTII) से एक्टिंग की बारीकियाँ सीखीं। 1978 में उनकी पहली फिल्म ‘Arvind Desai Ki Ajeeb Dastaan’ रिलीज हुई थी। उनकी प्रतिभा जल्द ही टीवी और बॉलीवुड दोनों में पहचान बनी।

महान किरदार और कुछ जीवन की कड़िया:-

1983 की क्लासिक फिल्म ‘Jaane Bhi Do Yaaro’ में D’Mello का किरदार उन्हें पहचान दिला गया—कॉमेडी में गहरी पकड़ और चरित्र-विविधता का मास्टरसेस।  टीवी पर उनका नाम 1984-की सीरियल ‘Yeh Jo Hai Zindagi’ (जहाँ उन्होंने हर एपिसोड में अलग किरदार निभाया) और ‘Sarabhai vs Sarabhai’ में Indravadhan Sarabhai के रूप में प्रसिद्ध हो गया।

बॉलीवुड में उन्होंने ‘कल हो ना हो’, ‘मैं हूँ ना’, ‘ओम शांति ओम’ जैसे हिट फिल्मों में दिखा, लेकिन उन्हें सबसे यादगार बना दिया उनका कॉमिक-टाइमिंग, सरल अंदाज और हर किरदार में जान डालने की कला।

Satish Shah

अंतिम क्षण और परिवार की भावनाएँ

25 अक्टूबर 2025 को मुंबई में Satish Shah ने 74 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। किडनी फेल्योर उनकी मौत का कारण था। अस्पताल की टीम उनके निवास स्थान पर गई थी लेकिन उन्हें पुनर्जीवित नहीं किया जा सका। उनकी पत्नी Madhu Shah और करीबी मित्रों-सहकर्मियों ने स्पर्श-भरे शब्दों में कहा कि एक युग समाप्त हो गया है – वह सिर्फ अभिनेता नहीं थे, दिलों में बसे रहने वाले कलाकार थे।

विरासत: हंसी, सादगी और पीछे छोड़ी यादें

Satish Shah ने मनोरंजन की दुनिया को ये सिखाया कि हँसी सिर्फ पल भर का मनोरंजन नहीं—वो दिल से जुड़े शब्द, भाव और यादें बनती है। उनके किरदार आज भी दिलों में हैं; लोग “Indravadhan सराभाई”, “D’Mello” जैसे नाम सुनते ही मुस्कुराते हैं। उनका जाना सिर्फ एक अभिनेता का निधन नहीं—यह उन सभी कलाकारों, थिएटर-प्रिय लोगों और टीवी-दर्शकों के लिए भावुक क्षण है।

एक युग का समापन

आज जब हर जनरेशन ‘Sarabhai vs Sarabhai’ या ‘Jaane Bhi Do Yaaro’ देखती है, Satish Shah अमर हो जाते हैं—हँसी में, यादों में, और उस अपनापन में जो उन्होंने ऑडियंस को दिया। उनकी कमी महसूस होगी—पर उनकी कला, व्यक्तित्व और मुस्कान के साथ हमारी-आपकी यादों में हमेशा जिंदा रहेंगे।

आपने उनकी कौन सी फिल्म देखी है,नीचे कमेंट में जरूर बताएं।

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Thailand की ‘Mother of the Nation’ का Farewell – Queen Sirikit 93 की उम्र में चली गईं

Sirikit

शुरुआत: कैसे बनीं Queen Mother

Sirikit Kitiyakara का जन्म 12 अगस्त 1932 को बैंकॉक के एक राजघराने में हुआ था। उनके पिता विदेश मंत्री थे और उनका बचपन पेरिस में बीता। 1950 में उन्होंने Bhumibol Adulyadej (King Rama IX) से विवाह किया और उसी वर्ष थाईलैंड की रानी बनीं। 1956 में राजा की भिक्षुता के दौरान उन्हें संवैधानिक रूप से रीजेंट भी नियुक्त किया गया — इस तरह वे देश की दूसरी रानी रीजेंट बनीं।

सेवा और विरासत: समाज-सेवा की अनकही कहानी

Queen Sirikit ने ग्रामीण विकास, महिला-शिक्षा, स्वास्थ्य, पारंपरिक हस्तशिल्प और सिल्क इंडस्ट्री के पुनरुत्थान जैसे कई सामाजिक कार्यों को आगे बढ़ाया। उन्होंने थाई रेशम उद्योग को नए आयाम दिए और पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय रहीं। उनके जन्मदिन (12 अगस्त) को थाईलैंड में मदर्स डे के रूप में मनाया जाता है, जिसे देश ने “रानी-माँ” के सम्मान में स्थापित किया।

अंतिम अलविदा: निधन और राष्ट्रीय शोक

24 अक्टूबर 2025 को बैंकॉक के एक अस्पताल में Queen Sirikit ने 93 वर्ष की आयु में अंतिम सांस लीं। उनकी हालत सेप्सिस (रक्त संक्रमण) के कारण गंभीर हो गई थी और वे लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं।

Sirikit

थाईलैंड के राज-आधिकारिक घराने ने पूरे देश में एक-साल की राजकीय शोक-मुद्रा घोषित की है। सरकारी कार्यालयों में झंडे आधा झुके थे और लोगों को कम-से-कम 90 दिन तक काले या गहरे रंग के वस्त्र पहनने का निर्देश दिया गया।

क्यों याद रखें रानी सिरीकित को?

उनकी मुस्कान सिर्फ शाही उपस्थिति नहीं थी — वे जनता की “माँ” बनीं, जिन्होंने हर-वर्ग तक पहुँच बनाई। उनकी उपस्थिति, शैली, संस्कार और काम करने का तरीका आज भी थाईलैंड और दुनिया भर में प्रेरणा है। उनका जाना सिर्फ एक शाही महिला का नहीं — यह एक युग की समाप्ति है, जिसमें आत्म-समर्पण, करुणा और संस्कृति का मेल था।

आज जब थाईलैंड के लोग बुद्धिमत्ता और संवेदनशीलता से भरी रानी सिरीकित को याद कर रहे हैं — तो हम भी उनके जीवन की उस चमक-वाली याद को स्वीकार करते हैं। उनकी विरासत हमें यह सिखाती है कि बड़े-बड़े तख्त और पद सिर्फ सम्मान नहीं — जिम्मेदारी का प्रतीक होते हैं। उनका जीवन, काम और आदर्श अमर रहेगा — रानी सिरीकित, शांति से विश्राम करें।

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NOTAM Showdown : क्यों भारत-पाक सीमा पर एयरस्पेस हुआ बंद और क्या है अगला पड़ाव?

NOTAM

नोटाम क्या है?

“NOTICE TO AIR MISSIONS” या NOTAM एक ऐसा आधिकारिक अलर्ट है जिसे एविएशन अथॉरिटी द्वारा पायलटों, एयरलाइंस और ऑपरेशन टीमों को जारी किया जाता है। यह सूचित करता है कि किसी विशेष इलाके, एयरस्पेस कॉरिडोर, या समय-सीमा में कुछ प्रतिबंध, सैन्य गतिविधि, मिसाइल टेस्ट या उड़ानों का शिफ्ट होना हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, जब कोई बड़ा मिलिट्री अभ्यास चल रहा हो या सीमा पर सुरक्षा अलर्ट हो, तब NOTAM के माध्यम से नागरिक और वाणिज्यिक फ्लाइट्स को जानकारी दी जाती है।

इस प्रकार, NOTAM सिर्फ एयरलाइंस का मामला नहीं — यह किसी क्षेत्र की सुरक्षा, सामरिक तैयारी और अंतरराष्ट्रीय वायु-निगरानी का संकेत भी बन जाती है।

30 अक्टूबर-11 नवंबर 2025: क्यों जारी हुआ यह NOTAM?

भारत ने 30 अक्टूबर से 10/11 नवंबर 2025 तक राजस्थान-गुजरात के पास अपनी पश्चिमी सीमा के पास एक बड़े संयुक्त मिलिट्री अभ्यास Exercise Trishul की घोषणा की। इस दौरान 28 000 फीट से नीचे की उड़ानों के लिए अस्थायी प्रतिबंध लगा दिए गए और NOTAM के तहत नागरिक एवं वाणिज्यिक रूट्स में बदलाव किया गया।

यह अभ्यास भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना द्वारा मिलकर संचालित किया जा रहा था, जिसका लक्ष्य पश्चिमी सीमा पर युद्ध-तैयारी, त्वरित रिस्पांस क्षमताएँ और खतरनाक इलाकों में संचालन क्षमता को बढ़ाना था। ऐसे में एयरस्पेस को सुरक्षित रखने और संचालन को व्यवस्थित करने के लिए NOTAM जारी करना रणनीतिक रूप से समझदारी भरा कदम था।

NOTAM

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और एयरस्पेस विवाद

भारतीय NOTAM के बाद पाकिस्तान ने भी पीछे नहीं हटे। उन्होंने 28-29 अक्टूबर को अपनी मध्य और दक्षिण एयरस्पेस में नागरिक उड़ानों के लिए प्रतिबंध लगाया। इसके साथ ही यह संकेत भी मिला कि दोनों देशों में एयरस्पेस को लेकर एक तरह की टकराव-स्थिति बनी हुई है।

इस तरह, NOTAM और एयरस्पेस ब्लॉकेज सिर्फ तकनीकी कदम नहीं—ये रणनीतिक संदेश हैं कि सीमा पर भी हालात निगरानी में हैं और मिलिट्री तैयारियाँ चल रही हैं।

किसका है असर? एविएशन, सुरक्षा और नागरिक

इस तरह के एयरस्पेस बंदी या नियंत्रण से नागरिक उड़ानों को कुछ चुनौतियाँ आती हैं:

  • फ्लाइट्स को लंबा रूट लेना पड़ सकता है, जिससे ईंधन व समय बढ़ सकते हैं
  • एयरलाइंस और पायलटों को अस्थायी रूप से रूट शिफ्ट करना पड़ता है
  • सुरक्षा स्तर बढ़ जाता है, लेकिन इससे एयर-कमर्सिक गतिविधियों में अस्थिरता आ सकती है

फिर भी, ये सब उस बड़े उद्देश्य के लिए हैं कि मिलिट्री अभ्यास शांतिपूर्ण और नियंत्रित माहौल में हो सके—जहाँ कहीं भी अचानक संकट उठ खड़ा हो सके।

आगे क्या हो सकता है?

30 अक्टूबर से निर्धारित अभ्यास के बाद सहमति-रिव्यू होगा और संभवतः नए NOTAM या रूट अपडेट जारी होंगे। भारत ने इसे स्पष्ट कर दिया है कि यह अभ्यास हमले का संकेत नहीं, बल्कि तैयारियों और रक्षा संबंधी क्षमता की जाँच का हिस्सा है।

उम्मीद है कि अभ्यास शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न होगा और दोनों देशों के बीच सीमावर्ती तनाव कम होगा—लेकिन एयरस्पेस-हिस्ट्री इस बात की याद दिलाती है कि “टकराव प्रयोग” को हमेशा नजरअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उम्मीद है कि इस लेख ने आपके लिए एयरस्पेस विवाद, NOTAM का महत्व और सीमा-यान रक्षा की रणनीति को स्पष्ट किया होगा। क्या आप सोचते हैं कि इस तरह के अभ्यास और NOTAM से सीमा पर वास्तविक युद्ध-जोखिम कम होते हैं, या ये सिर्फ सिग्नल-शो है?

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पटना में छठ पूजा 2025 पर सुरक्षा अलर्ट : 6 घाटों को प्रशासन ने किया “खतरनाक” घोषित, जानिए किन घाटों पर नहीं करनी चाहिए पूजा

छठ पूजा

बिहार की राजधानी पटना में लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा 2025 को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। लेकिन श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पटना जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। प्रशासन ने गंगा नदी के किनारे स्थित छह घाटों को खतरनाक और पूजा-अर्चना के लिए अनुपयुक्त घोषित किया है। इस संबंध में एक आधिकारिक एडवाइजरी भी जारी की गई है, जिसमें लोगों से अपील की गई है कि वे इन घाटों पर न जाएं और केवल सुरक्षित घाटों पर ही अर्घ्य दें।

ये हैं 6 खतरनाक घोषित घाट

प्रशासन द्वारा जिन घाटों को “खतरनाक (Dangerous)” बताया गया है, उनमें शामिल हैं:

  1. कंटाही घाट
  2. राजापुर पुल घाट
  3. पहलवान घाट
  4. बांस घाट
  5. बुद्धा घाट
  6. (एक अन्य घाट, जिसे निरीक्षण के बाद सूची में जोड़ा गया है)

छठ पूजा

इन घाटों पर तेज जल प्रवाह, दलदल, फिसलन और गहराई के कारण हादसे का खतरा बना रहता है। जिला प्रशासन ने कहा है कि इन स्थानों पर किसी भी प्रकार की पूजा गतिविधि या अर्घ्यदान करना जीवन के लिए जोखिम भरा हो सकता है।

प्रशासन के सुरक्षा इंतज़ाम

जिलाधिकारी (DM) चंद्रशेखर सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) राजीव मिश्रा ने शहर के सभी घाटों का निरीक्षण किया है। सुरक्षा को लेकर कई सख्त कदम उठाए गए हैं —

 बैरिकेडिंग : खतरनाक घाटों को लाल कपड़े और लोहे की जालियों से घेरकर सील किया जाएगा ताकि कोई भी व्यक्ति गलती से भी वहां प्रवेश न कर सके।

सुरक्षा बलों की तैनाती : हर असुरक्षित घाट पर मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारी तैनात रहेंगे जो लोगों को वहां जाने से रोकेंगे।

वैकल्पिक घाटों की व्यवस्था: प्रशासन ने करीब 100 सुरक्षित घाटों पर विशेष तैयारियां की हैं। इन घाटों पर सफाई, प्रकाश व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और पहुंच मार्ग को दुरुस्त किया जा रहा है। NDRF और SDRF की टीमें: किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमें मुस्तैद रहेंगी।

छठ पूजा

छठ पूजा 2025 की तिथियां

इस वर्ष छठ पूजा 2025 का शुभ पर्व 25 अक्टूबर को नहाय-खाय से आरंभ हुआ है और 28 अक्टूबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ समाप्त होगा।चार दिनों तक चलने वाला यह पर्व बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के अलावा पूरे देश में बड़ी आस्था और श्रद्धा से मनाया जाता है। लाखों श्रद्धालु गंगा और अन्य नदियों के घाटों पर पूजा करने पहुंचते हैं।

भक्तों से प्रशासन की अपील

पटना प्रशासन ने सभी व्रतियों और श्रद्धालुओं से अनुरोध किया है कि वे केवल सुरक्षित और स्वीकृत घाटों पर ही पूजा करें।

जिलाधिकारी ने कहा — “हमारा उद्देश्य है कि हर व्रती और श्रद्धालु सुरक्षित रूप से छठ महापर्व संपन्न कर सके। इसलिए किसी भी असुरक्षित घाट की ओर न जाएं और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।”

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दिल्ली में ‘गला घोंटू गैंग’ का कुख्यात सदस्य मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार, पुलिस ने बरामद की पिस्टल

गला घोंटू गैंग

राजधानी दिल्ली में अपराध जगत को हिलाकर रखने वाले ‘गला घोंटू गैंग’ के एक कुख्यात सदस्य को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने यह कार्रवाई शनिवार देर रात की, जिसमें आरोपी हिमांशु सिंह (23) घायल हो गया। पुलिस ने बताया कि हिमांशु के दाहिने पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया।

क्या है मामला?

दिल्ली पुलिस को बीते कुछ दिनों से इस गैंग की गतिविधियों की कई शिकायतें मिल रही थीं। यह गिरोह रात के समय राहगीरों और डिलीवरी बॉयज़ को निशाना बनाकर उनका गला घोंटकर लूटपाट करने के लिए कुख्यात है।

हिमांशु सिंह पर आरोप है कि 22 अक्टूबर को उसने अपने साथी के साथ पुल प्रहलादपुर इलाके में डोमिनोज के एक डिलीवरी बॉय पर हमला किया था। दोनों ने स्कूटी पर जा रहे युवक का गला घोंटकर उससे नकदी और मोबाइल फोन लूट लिया था। इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने खुद संज्ञान लिया और पुल प्रहलादपुर थाने के SHO को लाइन हाजिर कर दिया गया था।

मुठभेड़ कैसे हुई?

STF को शनिवार रात सूचना मिली कि आरोपी हिमांशु अपने साथियों के साथ बदरपुर बॉर्डर इलाके में आने वाला है। पुलिस टीम ने मौके पर घेराबंदी की, लेकिन हिमांशु ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं, जिसमें आरोपी के पैर में गोली लग गई और वह गिर पड़ा।

गला घोंटू गैंग

मौके से पुलिस ने एक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल, दो जिंदा कारतूस और एक बाइक बरामद की है। पुलिस के अनुसार, आरोपी पर पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें लूट, चोरी और हत्या के प्रयास के केस शामिल हैं।

‘गला घोंटू गैंग’ का खौफ

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह गैंग दिल्ली और हरियाणा के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय है। ये अपराधी मुख्यतः डिलीवरी एजेंट्स, कैब ड्राइवर्स और राहगीरों को निशाना बनाते हैं। ये लोग अपने शिकार का गला दबाकर बेहोश कर देते हैं और फिर लूटपाट करके फरार हो जाते हैं।

पुलिस की कार्रवाई जारी

दिल्ली पुलिस STF अब गैंग के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह का नेटवर्क बड़ा है और कई छोटे अपराधी इससे जुड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

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ओडिशा में चक्रवात ‘मोंथा’ का अलर्ट : 27 अक्टूबर से भारी बारिश और तेज़ हवाओं की चेतावनी, मछुआरों को समुद्र से दूर रहने के निर्देश

चक्रवात

बंगाल की खाड़ी में तेजी से सक्रिय हो रहा निम्न दबाव का क्षेत्र आने वाले दिनों में एक भयंकर चक्रवात का रूप ले सकता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि 27 अक्टूबर से ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भारी से बहुत भारी बारिश और तेज़ हवाएं चलने की संभावना है।

बंगाल की खाड़ी में उठ रहा चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’

IMD के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बना यह सिस्टम 25 अक्टूबर तक डिप्रेशन (अवदाब) और 26 अक्टूबर तक डीप डिप्रेशन (गहरा अवदाब) में बदल जाएगा। संभावना है कि 27 अक्टूबर की सुबह तक यह ‘मोंथा’ नामक चक्रवाती तूफान का रूप ले लेगा। हालांकि, यह ओडिशा के तट से सीधे टकराएगा या नहीं, इस पर अभी स्पष्टता नहीं है, लेकिन इसके असर से कई जिलों में भारी बारिश तय मानी जा रही है।

चक्रवात

IMD ने जारी किया येलो अलर्ट, सरकार हाई अलर्ट पर

  • ओडिशा सरकार ने संभावित खतरे को देखते हुए आपदा प्रबंधन टीमों को सतर्क कर दिया है।
  • पूरे राज्य में येलो अलर्ट जारी किया गया है।
  • मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है।
  • 40–60 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।
  • तटीय जिलों में स्थानीय प्रशासन को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि “सरकार पूरी तरह सतर्क है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। लोगों को अफवाहों पर ध्यान न देकर प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए।”

27 से 29 अक्टूबर तक भारी बारिश की संभावना

मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात ‘मोंथा’ के असर से 27 से 29 अक्टूबर तक राज्य के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। खास तौर पर पुरी, गंजाम, केंद्रपाड़ा, जगतसिंहपुर, भद्रक और बालासोर जैसे तटीय जिलों में सबसे अधिक असर पड़ने की संभावना है।

चक्रवात

छठ पूजा पर पड़ सकता है असर

यह चक्रवात छठ पूजा के समय दस्तक दे सकता है, जिससे ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटीय जिलों में उत्सव के कार्यक्रमों पर असर पड़ सकता है। विशेष रूप से उत्तर और दक्षिण 24 परगना, पूर्वी और पश्चिमी मेदिनीपुर में भी भारी बारिश और तेज हवाओं का पूर्वानुमान है।

मौसम विशेषज्ञों की राय

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में इस समय समुद्र का तापमान सामान्य से अधिक है, जो चक्रवात बनने के लिए अनुकूल स्थिति पैदा कर रहा है। अगर यह सिस्टम और मजबूत हुआ तो “मोंथा” गंभीर चक्रवाती तूफान (Severe Cyclonic Storm) का रूप भी ले सकता है।

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दिल्ली में बड़ा आतंकी हमला टला : ISIS मॉड्यूल का भंडाफोड़, 2 संदिग्ध गिरफ्तार, त्योहारों से पहले पुलिस ने बचाई राजधानी

आतंकी हमला

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने त्योहारों से पहले एक बड़ी आतंकी हमला को नाकाम करते हुए ISIS से प्रेरित आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने दिल्ली और मध्य प्रदेश में एक साथ छापेमारी कर दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया, जो राजधानी में आत्मघाती हमला (Suicide Attack) करने की तैयारी में थे।

गिरफ्तार आरोपी कौन हैं?

गिरफ्तार किए गए दोनों संदिग्धों की पहचान इस प्रकार है:

  • मोहम्मद अदनान खान (19) – दिल्ली के सादिक नगर का निवासी
  • अदनान खान (20) – भोपाल, मध्य प्रदेश का निवासी

पुलिस जांच में पता चला है कि दोनों आरोपी दिल्ली के भीड़-भाड़ वाले इलाकों, जैसे एक बड़े शॉपिंग मॉल और एक पब्लिक पार्क, में IED ब्लास्ट करने की फिराक में थे।

आतंकी हमला

छापेमारी में क्या-क्या बरामद हुआ?

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दोनों के ठिकानों से कई खतरनाक चीजें जब्त कीं, जो उनके मंसूबों को साफ दर्शाती हैं:

  • घर में छिपाकर रखे गए प्लास्टिक बम और मोलोटोव कॉकटेल (पेट्रोल बम)
  • ISIS का झंडा और “निष्ठा की शपथ” लेते हुए वीडियो
  • बम बनाने के मैनुअल और कट्टरपंथी प्रचार सामग्री
  • टाइमर क्लॉक, वायर, और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस

पुलिस के मुताबिक, ये सभी आइटम दिल्ली में किसी बड़े आतंकी धमाके की योजना से जुड़े थे।

विदेशी हैंडलर के संपर्क में थे आरोपी

पूछताछ में खुलासा हुआ है कि दोनों युवक सीरिया में बैठे एक विदेशी हैंडलर के संपर्क में थे। वे सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने और युवाओं को भर्ती करने का काम कर रहे थे। दिल्ली पुलिस ने अब इंटरनेशनल एजेंसियों से भी संपर्क साधा है ताकि हैंडलर की लोकेशन और नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

पहले भी गिरफ्तार हो चुका था भोपाल का आरोपी

दिल्ली पुलिस के अनुसार, भोपाल निवासी अदनान खान को साल 2024 में UAPA कानून के तहत उत्तर प्रदेश ATS ने गिरफ्तार किया था। उसने कथित रूप से ज्ञानवापी मस्जिद मामले में एक जज को धमकी दी थी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया था। जमानत पर रिहा होने के बाद वह फिर से ISIS मॉड्यूल से जुड़ गया और सक्रिय रूप से साजिश रचने लगा।

आतंकी हमला

पुलिस जांच जारी, नेटवर्क पर नज़र

दोनों आरोपियों को तीन दिन की पुलिस रिमांड में भेजा गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इनके नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है और क्या राजधानी या अन्य राज्यों में भी इसी तरह के मॉड्यूल सक्रिय हैं।

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा — “हमने एक बड़ी साजिश को विफल किया है। त्योहारों से पहले राजधानी में किसी बड़े हमले की कोशिश नाकाम कर दी गई है।”

त्योहारों के मौसम में बढ़ाई गई सुरक्षा

इस घटना के बाद दिल्ली, भोपाल और आसपास के इलाकों में सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया है। त्योहारों के दौरान भीड़-भाड़ वाले इलाकों, बाजारों और धार्मिक स्थलों पर पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई है। इंटेलिजेंस एजेंसियां अब इस मॉड्यूल से जुड़े ऑनलाइन चैट्स और फंडिंग सोर्स की भी जांच कर रही हैं।

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सिंगापुर में भारतीय नर्स को यौन शोषण के मामले में 1 साल 2 महीने की जेल और 2 कोड़ों की सज़ा, अदालत ने कहा – “ऐसे अपराधों के लिए कोई सहानुभूति नहीं

सिंगापुर

सिंगापुर की एक अदालत ने एक भारतीय नर्स को यौन शोषण (Molestation) के मामले में दोषी करार देते हुए 1 साल 2 महीने की जेल और 2 कोड़ों (strokes of the cane) की सज़ा सुनाई है। आरोपी एक प्रीमियम प्राइवेट अस्पताल में स्टाफ नर्स के पद पर कार्यरत था। अदालत ने यह सख्त फैसला उस समय सुनाया जब आरोपी ने अदालत में अपना अपराध कबूल कर लिया।

मामला क्या है?

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना सिंगापुर के एक प्रतिष्ठित अस्पताल में हुई थी, जहाँ आरोपी नर्स ने ड्यूटी के दौरान एक महिला के साथ अशोभनीय हरकत (molestation) की। घटना के बाद पीड़िता ने तुरंत अस्पताल प्रशासन और पुलिस को इसकी जानकारी दी। जांच के दौरान पुलिस ने CCTV फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया।

आरोपी ने अदालत में माना अपराध

सुनवाई के दौरान आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार किया और कहा कि उसने गलती की है। अदालत ने उसके अपराध स्वीकार करने को ध्यान में रखते हुए कुछ रियायत दी, लेकिन अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसे कड़ी सज़ा दी गई। अदालत ने कहा कि इस तरह की हरकतें सिंगापुर के सख्त कानूनों के तहत गंभीर अपराध मानी जाती हैं।

सिंगापुर में ऐसे मामलों पर सख्त कानून

सिंगापुर में यौन उत्पीड़न या अश्लील हरकतों से जुड़े मामलों पर बेहद कड़ा कानून लागू है। दोषी पाए जाने पर न केवल जेल बल्कि कोड़े मारने (caning) की सज़ा भी दी जाती है। यह सज़ा अपराध की गंभीरता और पीड़िता पर पड़े मानसिक असर को देखते हुए तय की जाती है।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि, “महिलाओं की गरिमा के खिलाफ ऐसे अपराध किसी भी सभ्य समाज में अस्वीकार्य हैं। सिंगापुर में इस तरह के अपराधों के लिए कोई सहानुभूति नहीं दिखाई जाएगी।”

सिंगापुर में बढ़ रही कड़ी कार्रवाई

पिछले कुछ वर्षों में सिंगापुर सरकार ने विदेशी नागरिकों द्वारा किए गए यौन अपराधों पर भी कड़ी कार्रवाई की है। कार्यस्थल, अस्पताल और सार्वजनिक स्थलों पर महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इस मामले ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि कानून के सामने कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी देश का हो, समान रूप से जिम्मेदार है।

भारतीय समुदाय में चर्चा

सिंगापुर में बसे भारतीय समुदाय के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। बहुत से लोग इसे चेतावनी के तौर पर देख रहे हैं, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह की हरकत करने से पहले दस बार सोचे। वहीं, भारतीय दूतावास ने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

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World War II का बम मिला बोलपुर में, सेना ने 1 महीने बाद किया सफलतापूर्वक विस्फोट! गांव में मची हलचल, फिर आई राहत की सांस

बम

अजय नदी के किनारे मिलने वाला द्वितीय विश्व युद्ध का पुराना मोर्टार शेल एक महीने की सुरक्षा के बाद भारतीय सेना की बम निरोधक टीम ने बुधवार को नियंत्रित विस्फोट कर निष्क्रिय कर दिया। रेत निकालते समय ग्रामीणों को मिली जंग लगी गोलक मिलने पर पुलिस को सूचना दी गई; तब से क्षेत्र को घेरकर सुरक्षा में रखा गया था।

पानागढ़ की विशेषज्ञ टीम ने मौके पर आकर पहले बम के चारों ओर सुरक्षा उपाय किए — नदी तल में गड्ढा खोदा और रेत के बोरे लगाकर विस्फोट का असर कम किया गया। नियंत्रित विस्फोट के समय आस-पास के लोग दहशत में आए, कुछ दूर के घरों की खिड़कियाँ हिलीं, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। केवल पास की खेती में मामूली नुकसान और एक बड़ा गड्ढा देखने को मिला।

बम

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बम ब्रिटिश काल के सैन्य अभ्यास का अवशेष था जो वर्षों में बाढ़ के पानी से बहकर यहां आया होगा। ग्रामीणों ने राहत जताई और कहा कि अब उन्हें चैन मिला है। यह घटना याद दिलाती है कि इतिहास कई बार आज भी खतरनाक रूप में सामने आ सकता है — पर सुरक्षा बलों की तत्परता से बड़ा जोखिम टल गया।

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ISRO नवंबर में लॉन्च करेगा CMS-03 सैटेलाइट : भारत की संचार शक्ति को मिलेगा नया आसमानी सहारा

ISRO

भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ISRO (Indian Space Research Organisation) नवंबर 2025 में अपने अगले प्रमुख मिशन CMS-03 कम्युनिकेशन सैटेलाइट को लॉन्च करने की तैयारी में जुट गई है। यह मिशन भारत की सैटेलाइट कम्युनिकेशन नेटवर्क को और मजबूत करने के साथ-साथ देशभर में ब्रॉडकास्टिंग, टेलीकॉम, टेली-एजुकेशन और डिजास्टर मैनेजमेंट सेवाओं को नई गति देने वाला साबित होगा।

CMS-03 को सतीश धवन स्पेस सेंटर, श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा, और इसे GSLV (Geosynchronous Satellite Launch Vehicle) के जरिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। यह सैटेलाइट भारत के मौजूदा संचार उपग्रहों की क्षमता को बढ़ाएगा और देश के डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर में अहम भूमिका निभाएगा।

क्या है CMS-03 सैटेलाइट?

CMS-03 एक अत्याधुनिक संचार उपग्रह (Communication Satellite) है, जिसे Extended-C frequency band में काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में दूरसंचार सेवाओं की क्षमता को बढ़ाना है।

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यह सैटेलाइट विशेष रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में मदद करेगा:

  • टीवी ब्रॉडकास्टिंग और नेटवर्क सेवाएं टेलीमेडिसिन और ई-हेल्थकेयर
  • टेली-एजुकेशन और ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म्स
  • आपदा प्रबंधन और राहत सेवाएं

CMS-03 की कवरेज न केवल भारतीय मुख्यभूमि बल्कि अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप तक फैली होगी, जिससे भारत के दूरस्थ इलाकों में भी मजबूत संचार नेटवर्क सुनिश्चित होगा।

लॉन्च प्रक्रिया और ऑर्बिट डिटेल्स

ISRO इस सैटेलाइट को पहले Geosynchronous Transfer Orbit (GTO) में स्थापित करेगा। इसके बाद, मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी (MCF), हासन के वैज्ञानिक जटिल ऑर्बिट रेज़िंग मैन्युवर्स के ज़रिए CMS-03 को लगभग 36,000 किलोमीटर ऊँचाई पर स्थित Geostationary Orbit में स्थापित करेंगे। GSLV रॉकेट, जो कई सफल मिशनों का हिस्सा रह चुका है, इस बार भी अपने भरोसेमंद प्रदर्शन से CMS-03 को अंतरिक्ष में सही स्थान तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाएगा।

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भारत की डिजिटल मजबूती की नई उड़ान

CMS-03 की सफलता भारत के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण होगी। यह न केवल डिजिटल इंडिया मिशन को गति देगा, बल्कि भारत को स्पेस-बेस्ड कम्युनिकेशन में आत्मनिर्भर बनाएगा। इसरो लगातार अपने संचार उपग्रहों को अपग्रेड कर रहा है ताकि देश को विदेशी तकनीक पर निर्भर न रहना पड़े। CMS-03 इस दिशा में एक और मजबूत कदम है, जो भारत को वैश्विक स्पेस इंडस्ट्री में अग्रणी बनाने की दिशा में आगे ले जाएगा।

ISRO का विजन

इसरो ने एक बार फिर यह साबित किया है कि उसका लक्ष्य केवल अंतरिक्ष अन्वेषण तक सीमित नहीं है, बल्कि वह राष्ट्र निर्माण और सामाजिक विकास के लिए भी अंतरिक्ष तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। CMS-03 मिशन इस बात का प्रतीक है कि भारत न केवल अंतरिक्ष में उड़ान भर रहा है, बल्कि हर नागरिक तक तकनीकी सुविधा पहुँचाने के मिशन पर है।

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छठी के भोज में मौत का निवाला : छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में जहरीला खाना खाने से 5 लोगों की मौत, दर्जनों बीमार

छठी के भोज

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर ज़िले के एक दूरस्थ गांव में श्राद्ध भोज (छठी के भोजन) के बाद हुई खाद्य विषाक्तता (Food Poisoning) की घटना ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया है। इस दुखद हादसे में 5 लोगों की मौत हो गई है, जिनमें एक दो महीने का शिशु भी शामिल है, जबकि 20 से अधिक ग्रामीणों की हालत गंभीर बनी हुई है।

दुंगा गांव में ‘श्राद्ध भोज’ बना मातम का कारण

यह घटना अबूझमाड़ क्षेत्र के दुंगा गांव में हुई, जहां 14 अक्टूबर को एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद श्राद्ध भोज का आयोजन किया गया था। गांव के लोग पारंपरिक रूप से इस भोज में शामिल हुए और भोजन करने के कुछ ही घंटों बाद उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी लक्षणों से पीड़ित हो गए। अगले एक सप्ताह के भीतर, पांच लोगों की मौत हो गई। मृतकों में एक दो महीने का बच्चा, बुधरी (25), बुधाराम (24), लक्के (45) और उर्मिला (25) शामिल हैं।

पहाड़ों और नदी पार कर पहुंची मेडिकल टीम

दुंगा गांव की स्थिति बेहद दुर्गम है — यहां न तो सड़क है, न नेटवर्क, जिसके कारण प्रशासन को जानकारी 21 अक्टूबर को ही मिल सकी। नारायणपुर कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगई ने तुरंत स्वास्थ्य विभाग की टीम को गांव भेजा। डॉक्टरों को इंद्रावती नदी नाव से पार कर गांव तक पहुंचना पड़ा। गांव पहुंचने पर टीम ने पाया कि 20 से ज्यादा लोग उल्टी-दस्त से पीड़ित हैं और दो लोगों को मलेरिया भी है। एक 60 वर्षीय महिला की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसे स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती किया गया है।

दूषित भोजन से फैला संक्रमण, जांच जारी

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) टी.आर. कुँवर ने बताया कि प्रारंभिक जांच में खाना दूषित होने की संभावना जताई गई है।खाद्य नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं ताकि सटीक कारण का पता लगाया जा सके। स्वास्थ्य विभाग की टीम फिलहाल गांव में घर-घर जाकर इलाज और जागरूकता अभियान चला रही है।

छठी के भोज

ग्रामीणों को दी गई चेतावनी और सावधानी के निर्देश

स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से कहा है कि वे ताज़ा भोजन करें, उबला हुआ पानी पिएं, और भोजन को खुला न छोड़ें, ताकि संक्रमण और न फैले। स्थानीय प्रशासन ने गांव में अस्थायी स्वास्थ्य शिविर भी स्थापित किया है।

जनता में शोक और प्रशासन में हलचल

इस घटना ने पूरे नारायणपुर जिले में दुख और गुस्से की लहर पैदा कर दी है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दोषियों की पहचान होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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Pollution पर ‘Rain Bomb’ : Artificial Rain से दिल्ली में शुरू होगी सफाई की बारिश

Artificial Rain

हर साल की तरह इस बार भी दिवाली के बाद दिल्ली की हवा ज़हरीली हो चुकी है। आसमान पर छाई धुंध, सांस लेने में कठिनाई और AQI का ‘खतरनाक’ स्तर पार करना राजधानी के लिए सामान्य हो गया है। ऐसे में दिल्ली सरकार ने एक अनोखा कदम उठाया है—कृत्रिम वर्षा (Artificial Rain) का। यह वही तकनीक है जो दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों—जैसे चीन, यूएई और अमेरिका—में प्रदूषण और सूखे से निपटने के लिए इस्तेमाल की जाती है।

कृत्रिम वर्षा क्या होती है और कैसे होती है बारिश की ‘इंजीनियरिंग’?

कृत्रिम वर्षा या Cloud Seeding एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें हवाई जहाज या विशेष ड्रोन की मदद से बादलों में सिल्वर आयोडाइड, सोडियम क्लोराइड या ड्राई आइस जैसे रसायन छोड़े जाते हैं। ये कण बादलों में मौजूद जलवाष्प को आकर्षित करते हैं, जिससे छोटे कण आपस में मिलकर बड़ी बूंदों में बदल जाते हैं, और अंततः बारिश होती है। इस प्रक्रिया को एक तरह की “मानव-निर्मित बारिश” कहा जा सकता है, जिसका इस्तेमाल अक्सर सूखा, प्रदूषण या फसल संकट की स्थिति में किया जाता है।

दिल्ली का प्रयोग: विज्ञान और उम्मीद का संगम

दिल्ली सरकार ने IIT Kanpur और मौसम विभाग के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर देश का सबसे बड़ा क्लाउड सीडिंग अभियान शुरू करने का फैसला किया है। यह प्रयोग अक्टूबर 2025 के अंतिम सप्ताह में होने जा रहा है, जब मौसम विभाग ने बादलों की पर्याप्त उपस्थिति की संभावना जताई है। योजना के तहत विशेष विमान दिल्ली के ऊपर उड़ान भरेंगे और जब बादल नमी से भर जाएंगे, तब उनमें सीडिंग फ्लेयर्स छोड़े जाएंगे। इसके बाद कुछ ही घंटों में बारिश होने की उम्मीद रहेगी, जो हवा में फैले जहरीले कणों को नीचे गिरा देगी।

Artificial Rain

क्यों जरूरी बना यह कदम?

दिवाली के बाद पराली के धुएं, पटाखों और ट्रैफिक के उत्सर्जन से दिल्ली की हवा में घातक स्तर का स्मॉग बन जाता है। अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ जाती है और बच्चे-बुजुर्ग सबसे ज़्यादा प्रभावित होते हैं। ऐसे में सरकार के पास तुरंत राहत देने का कोई और तरीका नहीं बचता। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कृत्रिम वर्षा सफल रहती है तो इससे PM 2.5 और PM 10 जैसे खतरनाक कणों की मात्रा 40-50% तक घट सकती है।

वैज्ञानिकों की राय और सामने आने वाली चुनौतियाँ

हालांकि यह कदम सराहनीय है, लेकिन वैज्ञानिक इसे स्थायी समाधान नहीं मानते। उनका कहना है कि क्लाउड सीडिंग तभी सफल होती है जब बादलों में पर्याप्त नमी हो—अन्यथा यह तकनीक बेअसर साबित होती है। इसके अलावा, रसायनों के पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर भी सवाल हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रयोग के बाद बारिश के पानी की वैज्ञानिक जांच की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इससे पीने के पानी या मिट्टी पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।

दिल्ली सरकार की तैयारी और लोगों के लिए एडवाइजरी

सरकार ने मौसम विभाग, IIT Kanpur और नागरिक संस्थाओं के साथ मिलकर समन्वय तंत्र तैयार किया है। यदि बारिश होती है, तो ट्रैफिक, बिजली और जल निकासी की विशेष व्यवस्थाएँ सक्रिय की जाएँगी। स्कूलों, अस्पतालों और आम नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है—विशेषकर खुले पानी के संपर्क और अचानक मौसम बदलने के मामलों में।

उम्मीद की बारिश या अस्थायी राहत?

29 अक्टूबर 2025 को दिल्ली में होने वाली यह कृत्रिम वर्षा सिर्फ एक वैज्ञानिक प्रयोग नहीं, बल्कि दिल्लीवासियों की “सांस की जंग” में नई उम्मीद है। यह कदम निश्चित रूप से तात्कालिक राहत दे सकता है, लेकिन प्रदूषण की असली लड़ाई तब जीती जाएगी जब वाहन उत्सर्जन, पराली जलाने और औद्योगिक धुएं जैसे मूल कारणों पर नियंत्रण होगा।

अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो यह भारत के पर्यावरण इतिहास में एक नया अध्याय लिखेगा—जहाँ विज्ञान, प्रशासन और समाज मिलकर साफ हवा के सपने को साकार करने की दिशा में बढ़ेंगे।

क्या आप सोचते हैं कि Artificial Rain सचमुच दिल्ली की हवा को बदल पाएगी?

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Chhath Puja 2025 – Tradition vs Modernity, कैसे बदल रहा है सूर्य उपासना का ये महापर्व

Chhath Puja

Chhath Puja मुख्य रूप से भारत के बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है, और अब मेट्रो-शहरों व विदेश में बसे भारतीय समुदायों द्वारा भी उत्साह से मनाया जा रहा है। इस बार छठ पूजा 2025 में 25 अक्टूबर (शनिवार) से 28 अक्टूबर (मंगलवार) तक चार दिवसीय कार्यक्रम के रूप में होगा।

चार दिनों की कथा: परंपरा, अनुशासन और भक्तिपूर्वक तपस्या

पहला दिन – नहाय-खाय (Saturday, 25 Oct): व्रती सुबह जलाशय में स्नान कर पवित्र शाकाहारी भोजन ग्रहण करते हैं और सात्विक जीवन की ओर कदम बढ़ाते हैं।

दूसरा दिन – खरना (Sunday, 26 Oct): दिनभर व्रत रखते हुए शाम को गुड़-चावल की खीर, रोटी व फल से व्रत खोलते हैं; इसके बाद निर्जला उपवास शुरू होता है।

तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य (Monday, 27 Oct): घाटों पर संध्या सूर्य को जल तथा प्रसाद अर्पित किया जाता है—बांस की सूप-डाली में ठेकुआ, कच्चा गन्ना, नारियल रखकर।

चौथा दिन – उषा अर्घ्य और पारण (Tuesday, 28 Oct): उगते सवेरे सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण होता है। परिवार-समाज के लिए मंगल और संतान-सुख की प्रार्थना के साथ पर्व समापन पाता है।

Chhath Puja

पूजा की धार्मिक, सांस्कृतिक व वैज्ञानिक गरिमा

Chhath Puja मूर्तिपूजा नहीं—यह सूर्य (जीवन-स्रोत) और छठी मैया (प्राकृतिक ऊर्जा की देवी) की उपासना है। इस पर्व में न सिर्फ आस्था बल्कि पर्यावरण-सह-सम्बंध, स्वच्छता, सामूहिकता और सरलता का भाव प्रकट होता है। मिट्टी के दीये, बांस-सूप, जैविक प्रसाद जैसे पहलू इस पर्व को पर्यावरण-अनुकूल और समयोचित बनाते हैं।

घाटों पर लाखों व्रती एक साथ नदी-तट पर खड़े हो, सूर्य को अर्घ्य देते हैं—यह दृश्य लोक-कला, समाज-बंधन और प्रकृति-भक्ति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।

सामाजिक असर और आधुनिक संदर्भ

Chhath Puja के दौरान जात-पांत, गरीबी-धनी भेद गौण हो जाते हैं; सभी एक-साथ घाट पर इकट्ठा होते हैं। यह नारी-शक्ति, परिवार-समाज की एकजुटता और प्रकृति-मानव सम्बन्ध की प्रतिमूर्ति बन जाता है।

साथ ही, पर्व के चलते रेल-विमान यात्राओं में कटौती-बढ़ोतरी, शहर-गाँव के बीच गतिशीलता और फेस्टिव सीजन में इसकी सामाजिक-आर्थिक भूमिका बढ़ जाती है।

छठ पूजा सिर्फ परंपरा नहीं, प्रतीक है जीवन-संघ का

Chhath Puja कठोर व्रत, शुद्धता, आस्था, पर्यावरणीय चेतना और भारतीय संस्कृति की गहराई का महापर्व है। यह केवल सूर्य को अर्घ्य देने का उत्सव नहीं — बल्कि मानव-प्रकृति-समाज की त्रिवेणी है।

25–28 अक्टूबर 2025 में जब घाटों पर दीए जलेंगे, गीत गूंजेंगे और सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा — बस उस पवित्र क्षण में हर भक्त, हर परिवार, सम्पूर्ण समाज उज्ज्वल-भविष्य का संकल्प लेगा।

क्या आप इस वर्ष छठ पूजा घाट पर जायेंगे? किस-किस राज्य से हैं आप?आपके राज्य में छठ पूजा मनायी जाती है या नहीं नीचे कमेंट में जरूर बताएं!

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कर्नूल बस हादसा : हैदराबाद-बेंगलुरु हाइवे पर लगी भीषण आग में 20 से ज्यादा यात्रियों की मौत, देखें पूरी रिपोर्ट

कर्नूल

आंध्र प्रदेश के कर्नूल ज़िले में शुक्रवार (24 अक्टूबर 2025) की तड़के एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ। हैदराबाद से बेंगलुरु जा रही एक निजी वोल्वो बस में भीषण आग लगने से कम से कम 20 यात्रियों की दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा चिन्नाटेकुर गांव (कल्लूर मंडल) के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (NH-44) पर हुआ, जिससे आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

कैसे हुआ हादसा

प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस के मुताबिक, V Kaveri Travels की यह प्राइवेट स्लीपर बस करीब 41 यात्रियों को लेकर बेंगलुरु जा रही थी। रात करीब 3:00 से 3:30 बजे के बीच तेज बारिश के दौरान बस ने एक मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी, जिससे उसका फ्यूल टैंक फट गया और अचानक आग भड़क उठी।

कुछ ही सेकंड में पूरी बस आग की लपटों में घिर गई। उस वक्त ज्यादातर यात्री गहरी नींद में थे, इसलिए कई लोगों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला। हादसे में बाइक सवार की भी मौके पर मौत हो गई।

कर्नूल

बचने वालों ने बताई भयावह कहानी

जिन यात्रियों ने किसी तरह अपनी जान बचाई, उन्होंने बताया कि आग इतनी तेज़ी से फैली कि मुख्य दरवाजा जाम हो गया और अंदर धुआं भर गया। कई यात्रियों ने आपातकालीन खिड़कियाँ तोड़कर किसी तरह बाहर छलांग लगाई। एक यात्री ने बताया, “मैं नींद से उठा तो चारों तरफ आग थी। हम लोगों ने पीछे की खिड़की तोड़ी और किसी तरह बाहर निकले।” लगभग 21 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, लेकिन बाकी लोग लपटों में फँस गए।

राहत और बचाव कार्य

हादसे की जानकारी मिलते ही फायर ब्रिगेड, पुलिस और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुँचीं। लेकिन तब तक बस पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी। कर्नूल कलेक्टर डॉ. ए. सिरी और एसपी ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। प्रशासन ने बताया कि अब तक 11 शवों की पहचान हो चुकी है, जबकि अन्य की पहचान डीएनए जांच के ज़रिए की जाएगी।

सरकार और नेताओं की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर गहरा शोक जताते हुए मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 की सहायता राशि देने की घोषणा की। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने हादसे पर दुख व्यक्त किया और अधिकारियों को तुरंत राहत कार्य तेज़ करने के निर्देश दिए। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी अपनी संवेदनाएँ व्यक्त कीं और पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

कर्नूल

कंट्रोल रूम स्थापित

पीड़ितों के परिवारों की मदद के लिए जिला प्रशासन ने कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। रेस्क्यू टीम लगातार मौके पर काम कर रही है और मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।

जांच जारी

पुलिस ने बताया कि हादसे की विस्तृत जांच जारी है। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, टक्कर के बाद बस में लगी आग ने इतनी तेज़ी से फैलाव किया कि यात्रियों को बचने का मौका नहीं मिला। साथ ही, बस के इमरजेंसी एग्जिट सिस्टम की विफलता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

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सूरज की रौशनी से दौड़ेगी भारत की रेल – ‘सोलर क्रांति’ के साथ भारत कर रहा है हरित भविष्य की ओर तेज़ सफर

सोलर

भारत ने पर्यावरण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (BLW), वाराणसी में देश का पहला ऐसा पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुआ है, जिसमें रेलवे ट्रैक के बीच सोलर पैनल लगाए गए हैं। इस अनोखी पहल ने न केवल रेलवे के ग्रीन मिशन को नई गति दी है, बल्कि यह दिखाया है कि कैसे सीमित संसाधनों का उपयोग करते हुए स्थायी ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है।

कैसे तैयार हुआ यह सोलर ट्रैक सिस्टम

BLW के प्रांगण में करीब 70 मीटर लंबे ट्रैक हिस्से पर कुल 28 सोलर मॉड्यूल लगाए गए हैं। इन पैनलों की कुल क्षमता 15 किलोवाट पीक (kWp) है। अधिकारियों के मुताबिक, इस सिस्टम से सालभर में लगभग 3.21 लाख यूनिट बिजली पैदा होगी। यह ऊर्जा BLW परिसर की जरूरतों को पूरा करेगी और बिजली खर्च को घटाने में मदद करेगी।

बिना ज़मीन अधिग्रहण के, ट्रैक से सीधे बिजली

इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए कोई अतिरिक्त ज़मीन नहीं ली गई। रेलवे की 1.2 लाख किलोमीटर लंबी पटरी नेटवर्क के बीच अक्सर खाली जगह रहती है।

सोलर

 

इसी का उपयोग करते हुए BLW ने यह नवाचार (Innovation) पेश किया — जहाँ ट्रेनों की आवाजाही और बिजली उत्पादन एक साथ संभव हुआ। यह “Dual-Use Infrastructure” का शानदार उदाहरण बन गया है।

तकनीकी चुनौतियाँ और उनका समाधान

ट्रेन के लगातार गुजरने से ट्रैक में कंपन और धूल का स्तर अधिक रहता है। इन चुनौतियों को देखते हुए इंजीनियरों ने सोलर पैनल्स को रबर माउंटिंग पैड्स और इपॉक्सी एडहेसिव की मदद से लगाया है।

यह डिज़ाइन रिमूवेबल सोलर सिस्टम कहलाता है — यानी जरूरत पड़ने पर पैनल्स को आसानी से हटाकर ट्रैक की मरम्मत की जा सकती है और फिर दोबारा जोड़ा जा सकता है।

पैनल्स की दक्षता और उपयोगिता

प्रत्येक सोलर मॉड्यूल का वजन लगभग 31.8 किलोग्राम है और इनकी औसत दक्षता 21% तक है। यह सिस्टम धूल-रोधी, वॉटरप्रूफ और मौसम-प्रतिरोधी है, जिससे ट्रैक की स्थिति या ट्रेन मूवमेंट पर कोई असर नहीं पड़ता। इससे उत्पादन भी स्थिर और सुरक्षित रहता है।

ग्रीन एनर्जी मिशन की दिशा में बड़ा कदम

रेलवे का यह पायलट प्रोजेक्ट केवल एक तकनीकी प्रयोग नहीं, बल्कि एक सस्टेनेबल ट्रांसपोर्टेशन मॉडल का प्रतीक है। अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो इसे देशभर के प्रमुख स्टेशनों और रूट्स पर लागू किया जाएगा। इससे भारतीय रेलवे का नेट-ज़ीरो कार्बन एमिशन लक्ष्य तेजी से हासिल किया जा सकेगा।

भविष्य की झलक: ट्रैक जो रोशनी भी देगा

सोचिए, आने वाले समय में जब ट्रेनें दौड़ेंगी, तो वही पटरियां देश को ऊर्जा भी देंगी। यह विचार सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि भारत की हरित विकास यात्रा का प्रतीक है — जहाँ इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और पर्यावरण, तीनों साथ कदम मिला रहे हैं।

रोशनी की पटरियों पर दौड़ता भारत

रेलवे के इस प्रयोग ने साबित कर दिया है कि नवाचार केवल मशीनों में नहीं, सोच में होता है। अब भारत के ट्रैक पर केवल लोहे की नहीं, सौर ऊर्जा की चमकती किरणें भी दौड़ेंगी। यह पहल आने वाले दशक में रेलवे को आत्मनिर्भर, स्वच्छ और तकनीकी रूप से अग्रणी बना सकती है।

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कानपुर में हड़कंप : बिहार जा रही फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन पर पथराव, यात्रियों में मचा अफरा-तफरी

कानपुर

त्योहारों के मौसम में घर लौट रहे लोगों के लिए एक डराने वाली खबर सामने आई है। कानपुर में अज्ञात लोगों ने अहमदाबाद से दरभंगा जा रही फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन पर अचानक पथराव कर दिया, जिससे यात्रियों में दहशत फैल गई। यह घटना शनिवार रात भीमसेन स्टेशन के आउटर सिग्नल के पास हुई।

कैसे हुई घटना

जानकारी के मुताबिक, अहमदाबाद-दरभंगा क्लोन हमसफर एक्सप्रेस (09465) उस समय भीमसेन स्टेशन के आउटर सिग्नल पर खड़ी थी, जब कुछ अज्ञात लोगों ने ट्रेन पर जोरदार पथराव शुरू कर दिया।इस पथराव में लोको पायलट के पास वाली खिड़की का शीशा टूट गया, जबकि कई बोगियों की खिड़कियों पर भी निशान पड़े। अचानक हुए हमले से ट्रेन में सवार सैकड़ों यात्री सहम गए।

ट्रेन में परिवारों के साथ यात्रा कर रहे कई यात्री बच्चों को लेकर सीटों के नीचे छिप गए। कुछ यात्रियों ने अपनी खिड़कियां बंद कर लीं और मदद के लिए चिल्लाने लगे।

ड्राइवर की सूझबूझ से टली बड़ी घटना

हमले के बाद ट्रेन के ड्राइवर ने तुरंत रेलवे कंट्रोल रूम को सूचना दी।सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और जीआरपी (GRP) की टीमें मौके पर पहुंचीं, लेकिन तब तक पथराव करने वाले लोग फरार हो चुके थे। बाद में ट्रेन को कानपुर सेंट्रल स्टेशन लाया गया, जहां सुरक्षा अधिकारियों ने पूरी स्थिति की जांच की।

कानपुर

एफआईआर दर्ज, जांच शुरू

इस घटना पर भीमसेन स्टेशन मास्टर की शिकायत के आधार पर आधा दर्जन अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। RPF और GRP की टीमें सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही हैं ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके। पुलिस का कहना है कि जल्द ही अपराधियों को पकड़ा जाएगा।

त्योहारों की भीड़ में सुरक्षा पर उठे सवाल

यह ट्रेन हर साल दिवाली और छठ पूजा के मौके पर चलाई जाती है, ताकि गुजरात और महाराष्ट्र में काम करने वाले लोग बिहार-झारखंड वापस जा सकें।इन दिनों ट्रेनों में जबरदस्त भीड़ है — कई यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ रहा है। ऐसे में इस पथराव की घटना ने रेल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रेलवे प्रशासन ने कहा है कि – “त्योहारी सीजन में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जा रहे हैं। यात्रियों से अपील है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत जानकारी रेलवे हेल्पलाइन को दें।”

पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं

कानपुर में यह पहली बार नहीं है जब ट्रेन पर पथराव हुआ हो। इससे पहले वंदे भारत एक्सप्रेस पर भी पथराव की घटनाएं हो चुकी हैं। रेलवे सूत्रों के अनुसार, कई बार ऐसे पथराव रेलवे ट्रैक किनारे बसे इलाकों से किए जाते हैं। इस पर रोक लगाने के लिए RPF अब “रेल सुरक्षा सिपाही” पहल के तहत ग्रामीणों को ट्रेन सुरक्षा से जोड़ने की योजना पर काम कर रही है।

यात्रियों की मांग – “सुरक्षा बढ़ाओ, डर में सफर नहीं करना चाहते”

घटना के बाद कानपुर सेंट्रल पर पहुंचे यात्रियों ने बताया कि वे अब डर में सफर कर रहे हैं। एक यात्री ने कहा – “हम साल में एक बार घर जाते हैं, वो भी डर में। रेलवे को अब सुरक्षा बढ़ानी ही होगी।”

त्योहारी भीड़ के बीच इस तरह की घटनाएं न सिर्फ यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डालती हैं बल्कि रेलवे प्रशासन की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाती हैं। उम्मीद है कि जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उन्हें सख्त सजा दी जाएगी ताकि भविष्य में कोई ऐसी हरकत करने की हिम्मत न करे।

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Bank Holiday Alert : क्या सोमवार को बैंक बंद है या छुटियाँ कैंसिल ?

बैंक

इस वर्ष की दिवाली (Festival of Lights) 20 अक्टूबर 2025 सोमवार को पड़ रही है, लेकिन भारत के विभिन्न राज्यों में बैंक शाखाओं के खुलने-बंद होने को लेकर भारी असमंजस है। अनेक राज्यों में बैंक 20 अक्टूबर को बंद, जबकि दूसरे राज्यों में 21 या 22 अक्टूबर को ही बैंक शाखाएँ बंद होंगी।

वजह: क्यों अलग-अलग राज्यों में छुट्टियाँ?

बैंक छुट्टियों का निर्धारण Reserve Bank of India (RBI) के अंतर्गत “Negotiable Instruments Act” के अनुरूप होता है, जिसमें प्रत्येक राज्य की स्थानीय पर्व-परंपरा को ध्यान में रखते हुए छुट्टियों की सूची बनती है।  इस कारण एक ही दिवाली पर विभिन्न राज्यों में बैंक बंद-खुलने की तारीखें अलग-अलग बन जाती हैं।

कहाँ बैंक सोमवार को बंद – कहाँ खुले रहेंगे?

रिपोर्ट की गई है कि दिल्ली, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, असम, पश्चिम बंगाल जैसे लगभग 21 राज्यों में 20 अक्टूबर (सोमवार) को बैंक बंद रहेंगे।वहीं कुछ राज्यों-शहरों में बैंक 21 या 22 अक्टूबर को बंद रहेंगे क्योंकि वहाँ दिवाली या सम्बंधित पर्व दूसरे दिन मनाया जा रहा है।

बैंक

क्या डिजिटल बैंकिंग सेवा प्रभावित होगी?

भले ही शाखाएँ बंद हों, डिजिटल बैंकिंग, नेट-बैंकिंग, UPI और एटीएम सेवाएँ अधिकांश राज्यों में चालू रहने की संभावना है।  इसका अर्थ यह हुआ कि बैंक जाकर लेन-देने की बजाय पहले से तैयारी करना बेहतर रहेगा — खासकर चेक क्लियरेंस, बड़ी ट्रांजैक्शन या दस्तावेज संबंधी काम के लिए।

क्या करें ग्राहकों को?

  • अगर किसी महत्वपूर्ण बैंकिंग काम (जैसे चेक क्लियरेंस, कैश ट्रांजैक्शन, दस्तावेज जमा) की ज़रूरत है, तो शाखा खुलने वाले दिन से पहले उसे पूरा कर लें।
  • अपनी राज्य-वार बैंक छुट्टी सूची RBI या सम्बंधित बैंक की वेबसाइट पर चेक करें।
  • छुट्टी वाले दिन ऑनलाइन बैंकिंग या मोबाइल ऐप का उपयोग करना सुनिश्चित करें ताकि लेन-देह में परेशानी न आए।

दिवाली-पर्यन्त बैंक छुट्टियाँ सिर्फ जगह-जगह शाखा बंद होने की जानकारी नहीं, बल्कि बैंकिंग व्यवहार-योजना का पूर्व-निर्धारण भी मांगती हैं। जहाँ 20 अक्टूबर को अधिकांश राज्यों में बैंक बंद रहेंगे, वहीं कुछ जगहों पर यह छुट्टी 21 या 22 अक्टूबर तक चलेगी। इसलिए इस त्योहार पर बैंकिंग काम सोच-समझ कर करें — ताकि उत्सव के बीच बैंकिंग सेवाओं की कमी से परेशानी न हो।

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2025 की दिवाली क्यों है खास : जानें शुभ मुहूर्त, तिथि का महत्व और इस बार के खास योग

दिवाली

रोशनी का महापर्व, दीपावली, 2025 में एक विशेष तिथि पर पड़ रहा है, जिसने इसे ज्योतिषीय और धार्मिक दोनों दृष्टियों से खास बना दिया है। इस साल दिवाली 20 अक्टूबर, सोमवार को मनाई जाएगी। पंचांग की गणना के अनुसार, इस दिन बन रहे शुभ योग और पूजन के लिए प्रदोष काल व्यापिनी अमावस्या का होना इसे अत्यंत पुण्यकारी बना रहा है।

तिथि को लेकर संशय दूर: 20 अक्टूबर को ही लक्ष्मी पूजा

हर साल की तरह 2025 में भी कार्तिक अमावस्या की तिथि को लेकर थोड़ा संशय था, क्योंकि अमावस्या तिथि दो दिन स्पर्श कर रही है।

  •  अमावस्या तिथि का आरंभ: 20 अक्टूबर 2025, दोपहर लगभग 03:44 बजे।
  •  अमावस्या तिथि का समापन: 21 अक्टूबर 2025, शाम लगभग 05:54 बजे।

चूंकि लक्ष्मी पूजन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में किया जाता है और 20 अक्टूबर को अमावस्या तिथि प्रदोष काल में व्याप्त रहेगी, इसलिए ज्योतिषविदों ने सर्वसम्मति से 20 अक्टूबर (सोमवार) को ही दिवाली मनाना और लक्ष्मी-गणेश का पूजन करना शास्त्र सम्मत माना है। 21 अक्टूबर को अमावस्या का स्नान और दान किया जाएगा।

दिवाली

लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त

इस बार की दिवाली स्थिर लग्न और शुभ चौघड़िया के साथ आ रही है, जो धन-धान्य और समृद्धि के लिए अत्यंत फलदायी है।

  •  लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त: 20 अक्टूबर, शाम 07:08 बजे से रात 08:18 बजे तक। (अवधि: लगभग 1 घंटा 10 मिनट)
  •  प्रदोष काल: शाम 05:46 बजे से रात 08:18 बजे तक।
  •  वृष लग्न (स्थिर लग्न): कई पंचांगों के अनुसार लक्ष्मी पूजा का यह समय वृष स्थिर लग्न के साथ भी ओवरलैप करेगा, जो माँ लक्ष्मी की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

पांच दिवसीय दीपोत्सव का कैलेंडर

इस साल 2025 का दीपोत्सव (Diwali) पूरे 5 दिनों तक चलेगा :

  •   धनतेरस (धन त्रयोदशी): 18 अक्टूबर (शनिवार)
  •   नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली/काली चौदस): 20 अक्टूबर (सोमवार) – इस दिन सुबह नरक चतुर्दशी और शाम को लक्ष्मी पूजा होगी।
  •   दीपावली (लक्ष्मी पूजा): 20 अक्टूबर (सोमवार)
  •   गोवर्धन पूजा / अन्नकूट: 22 अक्टूबर (बुधवार)
  •   भाई दूज (यमा द्वितीया): 23 अक्टूबर (गुरुवार)

2025 की यह दिवाली तिथि और शुभ मुहूर्त के सही तालमेल के कारण विशेष है, जब भक्तगण मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा कर जीवन में सुख, समृद्धि और प्रकाश का आह्वान करेंगे।

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अयोध्या दीपोत्सव 2025 : 29 लाख दीयों से जगमगाएगी रामनगरी, सीएम योगी करेंगे प्रभु श्रीराम का राजतिलक

अयोध्या

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की नगरी अयोध्या एक बार फिर रोशनी, भक्ति और आस्था के संगम में डूबी हुई है। दीपोत्सव 2025 का आगाज़ हो चुका है और पूरी अयोध्या राममय हो उठी है। इस बार का दीपोत्सव अब तक का सबसे भव्य आयोजन बताया जा रहा है — सरयू नदी के किनारे 29 लाख से अधिक दीये जलाकर एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी है।

सीएम योगी करेंगे प्रभु श्रीराम का राजतिलक

इस दीपोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण होगा रामकथा पार्क में प्रभु श्रीराम का राजतिलक समारोह। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान के स्वरूपों की अगवानी करेंगे — जो पुष्पक विमान रूपी हेलीकॉप्टर से पधारेंगे।

सीएम योगी विधि-विधान से प्रभु श्रीराम का राज्याभिषेक करेंगे। इस अवसर पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उप मुख्यमंत्री, और राज्य सरकार के कई मंत्री भी मौजूद रहेंगे। रामकथा पार्क को राजमहल की तरह सजाया गया है और पूरा क्षेत्र “जय श्रीराम” के नारों से गूंज उठा है।

लाखों दीपों से जगमगाएगी राम की पैड़ी

सरयू तट पर 56 घाटों पर इस बार 26 से 29 लाख दीये जलाए जाएंगे। इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने की तैयारी है।

दीयों को सजाने, उनमें तेल और बाती डालने का काम अवध विश्वविद्यालय के 30,000 से अधिक स्वयंसेवकों द्वारा किया जा रहा है। पूरा शहर सुनहरी रोशनी में नहाया हुआ है — हर गली, मंदिर, और घाट पर दीपों की कतारें भक्ति का अद्भुत दृश्य बना रही हैं।

अयोध्या

संस्कृति और श्रद्धा का संगम

दीपोत्सव की शुरुआत भव्य शोभायात्रा से हुई, जिसमें देशभर की संस्कृतियों को दर्शाती 22 झांकियां निकाली गईं। इसके अलावा रामलीला मंडलियों ने देश और विदेश से आकर रामायण के प्रसंगों को मंचित किया। शाम को सरयू तट पर 2100 वेदाचार्य एक साथ महाआरती करेंगे, जिसके बाद लेज़र शो, ड्रोन शो और आतिशबाज़ी से पूरा आसमान रोशनी से भर जाएगा।

हर साल और भव्य होता जा रहा दीपोत्सव

2017 में जब सीएम योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव की शुरुआत की थी, तब सिर्फ 1.71 लाख दीपक जलाए गए थे। आज, नौवें दीपोत्सव में यह संख्या करीब 29 लाख तक पहुंच गई है — यानी 15 गुना से ज्यादा वृद्धि। यह आयोजन न केवल आस्था का प्रतीक बन चुका है, बल्कि अयोध्या को विश्व पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान भी दे रहा है।

अयोध्या में श्रद्धालुओं की बाढ़

दीपोत्सव को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे हैं। इस साल अब तक 23 करोड़ से अधिक श्रद्धालु श्रीरामलला के दर्शन कर चुके हैं — जो एक नया रिकॉर्ड है। शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, 5,000 से अधिक पुलिसकर्मी और 200 ड्रोन निगरानी में तैनात हैं।

सीएम योगी का संदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को दीपोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए कहा — “अयोध्या की यह दिव्यता और भव्यता पूरे विश्व में रामराज्य की भावना को जगाएगी। यह आयोजन सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना का उत्सव है।”

अयोध्या का दीपोत्सव अब सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं रहा — यह भारत की संस्कृति, एकता और आस्था का जीवंत प्रतीक बन चुका है। जब सरयू किनारे लाखों दीप एक साथ जलेंगे, तो पूरी दुनिया फिर से गूंज उठेगी — “दीप जलें हजारों, फिर भी कम लगें राम तुम्हारे नाम के आगे।”

क्या चाहो तो मैं इस खबर के लिए एक पोस्टर (9:16 फॉर्मेट) भी बना दूँ — जिसमें “अयोध्या दीपोत्सव 2025” का खूबसूरत विजुअल हो?

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बेंगलुरु कॉलेज में सनसनीखेज वारदात : जूनियर छात्र ने सीनियर के साथ वॉशरूम में किया बलात्कार, पुलिस ने की गिरफ्तारी

बेंगलुरु

बेंगलुरु के एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज में घटी एक भयावह घटना ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया है। यहां 21 वर्षीय छात्र जीवन गौड़ा को अपनी सीनियर छात्रा के साथ कॉलेज के पुरुष वॉशरूम में बलात्कार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। यह घटना 10 अक्टूबर 2025 को कॉलेज कैंपस में हुई थी, जबकि शिकायत 15 अक्टूबर को दर्ज की गई।

घटना कैसे हुई – पूरा घटनाक्रम

पुलिस और पीड़िता के बयान के अनुसार, आरोपी और पीड़िता एक-दूसरे को पहले से जानते थे। दोनों एक ही बैच के छात्र थे, लेकिन आरोपी कुछ विषयों में बैकलॉग आने के कारण जूनियर रह गया था। 10 अक्टूबर की दोपहर, लंच ब्रेक के दौरान आरोपी ने पीड़िता को फोन कर कहा कि वह उससे कुछ सामान — खासकर उसकी जैकेट — लौटाना चाहता है। पीड़िता जब कॉलेज के आर्किटेक्चर ब्लॉक में उससे मिलने पहुंची, तो आरोपी ने अचानक उसे जबर्दस्ती चूम लिया। पीड़िता ने तुरंत खुद को छुड़ाया और लिफ्ट से नीचे जाने लगी, लेकिन आरोपी ने उसका पीछा किया।

नीचे पहुंचकर आरोपी ने उसे छठी मंजिल पर पुरुषों के वॉशरूम में खींच लिया, दरवाज़ा बंद किया और उसके साथ बलात्कार किया। घटना के दौरान पीड़िता का एक दोस्त उसे फोन कर रहा था, मगर आरोपी ने उसका फोन छीन लिया ताकि वह मदद न मांग सके। इस भयावह कृत्य के बाद आरोपी ने उसी शाम पीड़िता को फोन करके पूछा — “क्या तुम्हें गोली चाहिए?” (गर्भनिरोधक गोली के संदर्भ में)।

पीड़िता ने यह बात अपने कुछ दोस्तों से साझा की, जिन्होंने उसे पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। हालांकि, वह शुरुआत में अपने माता-पिता की प्रतिक्रिया से डरकर कुछ दिन चुप रही। अंततः 15 अक्टूबर को उसने अपने माता-पिता को सब कुछ बताया और फिर हनुमंतनगर पुलिस स्टेशन जाकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।

बेंगलुरु

पुलिस की कार्रवाई और जांच

शिकायत दर्ज होते ही पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की। आरोपी जीवन गौड़ा को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया गया और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 (बलात्कार) के तहत मामला दर्ज किया गया। आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। दोनों का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और पुलिस ने आरोपी को अपराध स्थल पर ले जाकर नाट्य रूपांतरण (spot mahazar) करवाया है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी ने अपना बचाव करते हुए कहा है कि संबंध सहमति से बने थे, जबकि पीड़िता ने साफ कहा है कि यह जबरन बलात्कार था। पुलिस ने कहा है कि वे दोनों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष निकालेंगे।

सीसीटीवी और जांच की चुनौती

इस मामले में जांच को एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है — जिस मंजिल पर यह वारदात हुई, वहां कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था। इस वजह से घटना का वीडियो सबूत मौजूद नहीं है। हालांकि, पुलिस ने आरोपी के मोबाइल फोन और कॉल रिकॉर्ड्स जब्त कर लिए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि घटना के बाद आरोपी ने पीड़िता से क्या बातचीत की थी।

बेंगलुरु

कॉलेज प्रशासन की प्रतिक्रिया

कॉलेज प्रशासन ने इस मामले पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए आरोपी छात्र को तत्काल निलंबित कर दिया है। साथ ही, कॉलेज ने आंतरिक जांच समिति (Internal Inquiry Committee) का गठन किया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई। कॉलेज ने छात्रों को सुरक्षा का भरोसा दिलाते हुए कहा कि “ऐसी घटनाएं बर्दाश्त नहीं की जाएंगी, और यदि किसी छात्रा या छात्र को कोई असुरक्षा महसूस हो, तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें।”

वर्तमान स्थिति

पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है। आरोपी वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है और पुलिस ने अदालत से फॉरेंसिक रिपोर्ट और डिजिटल सबूतों के लिए समय मांगा है। यह मामला न सिर्फ कॉलेज प्रशासन, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र के लिए सुरक्षा और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है — खासकर उन जगहों पर जहां छात्रों को सबसे सुरक्षित महसूस करना चाहिए था।

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भारत का अपना स्पेस स्टेशन : 2035 तक ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ बनेगा हकीकत, पहला मॉड्यूल 2028 में लॉन्च होगा

स्पेस स्टेशन

भारत अब अंतरिक्ष की दुनिया में एक नई ऊंचाई छूने जा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने ऐलान किया है कि भारत 2035 तक अपना खुद का स्पेस स्टेशन बनाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का नाम होगा भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station – BAS)। इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने बताया कि इस स्पेस स्टेशन का पहला मॉड्यूल 2028 तक अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। यह मिशन भारत के लिए वैसा ही ऐतिहासिक कदम है, जैसा अमेरिका के लिए International Space Station (ISS) था या चीन के लिए Tiangong Station है। इससे भारत उन कुछ चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जिनके पास अपना मानवयुक्त स्पेस स्टेशन होगा।

कैसा होगा भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS)?

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन पूरी तरह से मॉड्यूलर डिजाइन पर आधारित होगा — यानी इसे कई हिस्सों में बनाया जाएगा और चरणबद्ध तरीके से अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।
पहला मॉड्यूल : इसका पहला हिस्सा, जिसे “प्रारंभिक मॉड्यूल” कहा जा रहा है, लगभग 10 टन वजनी होगा। इसे 2028 में लॉन्च किया जाएगा।
पूरा स्टेशन : जब सभी मॉड्यूल जुड़ जाएंगे, तब स्टेशन का कुल वजन 52 टन होगा और इसमें पांच मुख्य मॉड्यूल होंगे।
स्थिति (Orbit) : BAS को पृथ्वी की Low Earth Orbit (LEO) में, लगभग 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया जाएगा।

स्पेस स्टेशन

यह स्टेशन ऐसा डिज़ाइन किया जा रहा है कि भविष्य में इसमें और भी मॉड्यूल जोड़े जा सकें। यह कई वर्षों तक अंतरिक्ष में काम करेगा और वैज्ञानिकों को सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण (Microgravity) में शोध करने की सुविधा देगा। भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन और प्रशिक्षित अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा कि “भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन एक तरह का ‘6 BHK अपार्टमेंट इन ऑर्बिट’ होगा, जहाँ अंतरिक्ष यात्री लंबे समय तक रह सकेंगे और प्रयोग कर पाएँगे।”

मिशन का मकसद क्या है?

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य है भारत की स्पेस साइंस, मेडिसिन, और टेक्नोलॉजी रिसर्च को अगले स्तर तक ले जाना।
यह स्टेशन एक राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रयोगशाला की तरह काम करेगा, जहाँ देश-विदेश के वैज्ञानिक माइक्रोग्रैविटी में प्रयोग कर सकेंगे।

BAS में कई उन्नत तकनीकें शामिल होंगी:

  • डॉकिंग सिस्टम : जिससे अलग-अलग मॉड्यूल जुड़ सकेंगे।
  • लाइफ सपोर्ट सिस्टम : जो अंतरिक्ष यात्रियों को ऑक्सीजन, तापमान नियंत्रण और पानी उपलब्ध कराएगा।
  • कम्युनिकेशन और एनर्जी सिस्टम : ताकि स्टेशन पृथ्वी से निरंतर जुड़ा रहे।
  • माइक्रोग्रैविटी लैब : जहाँ भौतिकी, जीवविज्ञान, औषधि निर्माण और सामग्री विज्ञान पर प्रयोग होंगे।

इस स्टेशन की मदद से भारत दीर्घकालिक अंतरिक्ष मिशन चलाने की क्षमता हासिल करेगा, जिससे भविष्य में चंद्रमा और मंगल ग्रह पर भी मानव मिशन की राह आसान होगी।

स्पेस स्टेशन

गगनयान मिशन से जुड़ा अगला कदम

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का सपना सीधे तौर पर गगनयान मिशन से जुड़ा है। गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है, जिसे 2027 में लॉन्च किए जाने की योजना है। इस मिशन में भारत के चार टेस्ट पायलटों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा, जो पहले से रूस और भारत में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।गगनयान की तकनीकें — जैसे क्रू मॉड्यूल, लाइफ सपोर्ट सिस्टम और सेफ रिएंट्री टेक्नोलॉजी — BAS के लिए आधार बनेंगी। इस तरह, गगनयान की सफलता भारत के स्पेस स्टेशन की दिशा में पहला ठोस कदम साबित होगी।

अगला लक्ष्य: 2040 तक चाँद पर भारतीय

इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने बताया कि भारत का अगला बड़ा मिशन होगा —
2040 तक एक भारतीय को चाँद पर भेजना और सुरक्षित वापसी कराना। इसके लिए इसरो भविष्य में नए भारी रॉकेट इंजन, डीप स्पेस मिशन तकनीक, और लंबे समय तक मानव मिशन की तैयारी कर रहा है। भारत पहले ही चंद्रयान और मंगलयान मिशनों से यह साबित कर चुका है कि वह अंतरिक्ष अनुसंधान में आत्मनिर्भर और नवाचारी देश है।

भारत के लिए गौरव का क्षण

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) की योजना केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह भारत की वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति बनने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। जब यह स्टेशन 2035 में पूरी तरह सक्रिय होगा, तब भारत उन देशों की कतार में होगा, जिनके पास स्वतंत्र मानवयुक्त स्पेस स्टेशन चलाने की क्षमता है — जैसे अमेरिका, रूस और चीन। यह परियोजना भारत की “विकसित भारत 2047” की दृष्टि से भी जुड़ी है, जिसमें देश विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर है।

संक्षेप में

  • भारत का अपना स्पेस स्टेशन 2035 तक तैयार होगा।
  • पहला मॉड्यूल 2028 में लॉन्च होगा।
  • स्टेशन 450 किलोमीटर ऊँचाई पर पृथ्वी की कक्षा में रहेगा।
  • इसका मुख्य लक्ष्य वैज्ञानिक रिसर्च और लंबे समय तक मानव मिशन की तैयारी है।
  • 2040 तक भारत चाँद पर मानव भेजने का लक्ष्य भी रखता है।

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) न केवल भारत के अंतरिक्ष इतिहास का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट होगा, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा भी बनेगा।
इस मिशन के साथ भारत यह साबित कर देगा कि वह अब सिर्फ अंतरिक्ष की खोज नहीं कर रहा, बल्कि वहाँ अपना ठिकाना बनाने की तैयारी में है।

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BAN ON USE OF ORS – किसके लिए, क्यों और कब?

ORS

पिछले कई सालों से बाजार में ऐसे ड्रिंक्स बिक रहे थे जो ‘ORS’ नाम के साथ पैक किया जाता था।इन्हें मेडिकल स्टोर्स, किराना, यहां तक कि अस्पतालों में भी धड़ल्ले से बेचा जा रहा था। मिठास, फ्रूट फ्लेवर और खूब सारे ब्रांड;लेकिन असली ORS फॉर्मूले वाला इलाज इनमें नहीं था। ज्यादातर कंपनियाँ “ORS” नाम बेचने में लगी थीं, जबकि उनके ड्रिंक में 10 गुना ज्यादा शुगर और कम इलेक्ट्रोलाइट्स मिलते थे। असलियत तब सामने आई जब कई बच्चे और मरीज दुकानों से “ORS Drink” ले गए और वो बीमार हो गए।

कैसे बढ़ा विवाद?

हैदराबाद की डॉक्टर सिवरांजनी संतोश पिछले 8 साल से इस फेक लेबलिंग के खिलाफ लड़ रही थीं। सोशल मीडिया, याचिका और सीधा FSSAI पर दबाव डालकर उन्होंने यह दिखाया कि किस तरह बच्चों और मरीजों के साथ धोखा हो रहा है। कई बच्चे, जिनको डायरिया या बर्न के बाद शरीर में पानी की कमी थी, उन्हें मेडिकल ORS के बजाय वही पैकेट वाला ड्रिंक दिया गया जिसमें असली रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन का फॉर्मूला ही नहीं था। उनकी जर्नी देशभर के माता-पिता के लिए चेतावनी साबित हुई।

ORS

सरकार का फैसला: अब कोई कंपनी “ORS” शब्द नहीं बेच सकेगी

15 अक्टूबर 2025 को FSSAI ने सख्त आदेश जारी करते हुए बोला—कोई भी ब्रांड, कोई भी ग्रोसरी, फ्रूट जूस, इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक, या रेडी-टू-ड्रिंक प्रोडक्ट अपने नाम, लेबल, पैकिंग, या विज्ञापन में “ORS” नहीं लिख सकेगा, जब तक WHO का असली फॉर्मूला न हो।

पुराने आदेश, जिसमें डिस्क्लेमर की छूट थी, सब वापस ले लिया गया। अब सिर्फ मेडिकल दुकान, फार्मा ब्रांड और डॉक्टर द्वारा दिया गया WHO अप्रूव्ड ORS ही मार्केट में मिलेगा।

असर: कौन-कौन ब्रांड बाहर, क्या बदल जाएगा?

सभी लोकल और नेशनल ब्रांड, जिनका ORS ड्रिंक था—सबको रीलबलिंग, नया नाम और नई फॉर्मूला की प्रक्रिया करनी होगी।दुकानें और मेडिकल स्टोर्स को आदेश दिया गया—फेक ORS या फ्लेवर्ड ORS बेचने पर लाइसेंस-सीज़ और भारी जुर्माना लगेगा।जिन मरीजों और बच्चों को फेक ORS की वजह से नुकसान हुआ था, उनकी सुरक्षा अब बढ़ेगी।असली ORS—जिसमें सटीक शुगर, इलेक्ट्रोलाइट और सॉल्ट बैलेंस हो, वही WHO स्टैण्डर्ड रहेगा।

पब्लिक हेल्थ और भविष्य

अब असली ORS—डायरिया, डिहाइड्रेशन, बर्न या मेडिकल एमरजेंसी में जान बचाने के लिए वैज्ञानिक प्रमाण के साथ बिकेगा।

फेक प्रोडक्ट, मार्केटिंग और सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट पर शिकंजा कस गया है।

डॉक्टर, मरीज और माता-पिता—सबको राहत मिली है; बच्चों की जान बचाने में ये आदेश महत्वपूर्ण शाबित होगा।

जनता की जीत

अब से भारत में ‘ORS’ सिर्फ असली इलाज रहेगा, न कि मीठा धोखा! डॉक्टर सिवरांजनी और जागरूक लोगों की मेहनत से FSSAI के इस फैसले ने देशभर में 8 साल का संघर्ष जीत में बदल दिया।

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अमृतसर-सहरसा गरीब रथ एक्सप्रेस में लगी आग, महिला यात्री झुलसी — बड़ा हादसा टला

गरीब रथ

शनिवार सुबह अमृतसर से सहरसा जा रही गरीब रथ एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 12204) में अचानक आग लग गई। हादसा पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले के सरहिंद रेलवे स्टेशन के पास हुआ। घटना में एक महिला यात्री झुलस गई, हालांकि गनीमत रही कि कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई।

कैसे हुआ हादसा

सुबह करीब 7:30 बजे, जब ट्रेन सरहिंद स्टेशन से अंबाला की ओर कुछ ही दूरी पर थी, तभी यात्रियों ने एक कोच से धुआं उठता देखा। ड्राइवर ने तुरंत ट्रेन रोक दी। कुछ ही मिनटों में आग ने तीन डिब्बों, जिनमें एक एसी कोच (G19) भी शामिल था, को अपनी चपेट में ले लिया। ट्रेन रुकते ही यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और लोग अपने-अपने सामान लेकर बाहर निकलने लगे।

बचाव कार्य में तेजी

सूचना मिलते ही सरहिंद नगर कौंसिल की दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। रेलवे अधिकारियों और स्थानीय पुलिस ने यात्रियों को सुरक्षित निकालने में मदद की।

 

रेलवे के अनुसार, सभी यात्री सुरक्षित हैं, केवल एक महिला यात्री झुलस गई है जो अपना सामान निकालते समय घायल हुई। उसे तुरंत सरहिंद के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

गरीब रथ

शॉर्ट सर्किट बना आग का कारण

प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। रेलवे ने संबंधित डिब्बों को ट्रेन से अलग कर दिया है और सुरक्षा जांच के बाद ट्रेन को आगे सहरसा की ओर रवाना करने की तैयारी की जा रही है।

रेलवे की प्रतिक्रिया

नॉर्दर्न रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई और स्थिति पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया गया है। रेलवे ने कहा कि “आग लगने की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया। प्रभावित कोचों की जांच के लिए तकनीकी टीम गठित कर दी गई है।”

यात्रियों में डर और भगदड़

घटना के दौरान ट्रेन में सवार यात्रियों ने बताया कि आग लगते ही कोच में धुआं भर गया और लोगों में घबराहट फैल गई। कई यात्री कोच के दरवाजे खोलकर बाहर कूदने लगे। एक यात्री ने बताया, “हमने तुरंत चेन खींची और ट्रेन रुकने पर सभी बाहर निकल आए। रेलवे और दमकल विभाग ने समय रहते आग बुझा दी, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।”

जांच जारी

रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और जीआरपी ने मौके का मुआयना किया और बयान दर्ज किए। अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन की वायरिंग और एसी सिस्टम की जांच के आदेश दिए गए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।

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Israel-Hamas War Ended? क्या अब गाजा में लौटेगी Real Peace या फिर होगी नई जंग की शुरुआत?

Israel-Hamas

Israel-Hamas के बीच इस संघर्ष की शुरुआत एक भयंकर तूफ़ान की तरह हुई—7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इज़राइल पर अचानक हमला किया गया। जवाब में इज़राइल ने गाजा पर दबदबा जमा दिया—बारूद फूटा, बमबारी, ग्राउंड ऑपरेशन, और नाकेबंदी ने मिलकर एक दो साल लंबे विनाश का सफर बना दिया। इस युद्व ने न केवल मानवीय संकट को जन्म दिया बल्कि राजनीति, कूटनीति और जीवन की सीमाओं को भी चुनौती दी।

आंकड़ों की धार: मौत, तबाही और त्रासदी

  • गाजा से मिल रही रिपोर्ट्स के अनुसार, इस लड़ाई में 67,200 से ज़्यादा फिलिस्तीनी नागरिक मारे गए हैं।
  • सैकड़ों हजार घायल हुए, अस्पताल बर्बाद हुए, स्कूल, बुनियादी ढांचे — लगभग हर चीज — तबाह हो गई।
  • इज़राइल में  रिपोर्ट के अनुसर 1139 मौते हुई है।
  • अब भी हजारों शव मलबे में दबे मिले हैं, कई परिवारों ने अब तक अपनों को खो दिया है या उनसे बिछड़ गए हैं।

Ceasefire की ओर पहला कदम

2025 के अक्टूबर में अचानक हलचल महसूस हुई—मिस्र, क़तर और अमेरिका की मध्यस्थता में इज़राइल और हमास ने Sharm el-Sheikh में पहला चरण Ceasefire Deal साइन किया। इस डील के तहत दोनों पक्षों ने बंदियों की अदला-बदली, सैनिकों की सीमित वापसी, और मानवीय राहत की अनुमति देने पर सहमति दी। इज़राइल ने कहा कि वह अपने लड़ाकू वाहनों को कुछ ज़मीनों से हटा लेगा, और हमास को शहरों की सुरक्षा शासन और निगरानी देने का दायित्व होगा। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इस समझौते का स्वागत किया, कहा कि यह “पैलेस्टीन की स्वायत्तता और दो-राज्य समाधान की दिशा में” एक महत्वपूर्ण कदम है।

Israel-Hamas

नए सवाल: शांति कितनी टिकेगी?

हालाँकि यह समझौता इतिहास का पल था, लेकिन वास्तवीकता ज़मीनी है और चुनौतियाँ भारी हैं। कुछ इलाकों में अभी भी हवाई हमले हो रहे हैं—Ceasefire लागू होते ही भी गोलीबारी की खबरें आईं। दूसरी समस्या है भरोसे की कमी—दोनों पक्षों पर शक बरकरार है कि कहीं फिर से संघर्ष की शुरुआत न हो जाए।

गाजा की अर्थव्यवस्था बुरी तरह टूट चुकी है, सड़कों पर बुनियादी सेवाओं की कमी और बुनियादी राहत सामग्री तक पहुंच न हो पाना एक बड़ी चुनौती है। इज़राइल का आंतरिक दबाव, हमास के कट्टरपंथी गुटों की मौजूदगी, और मध्यस्थों की भूमिका—सब मिलकर इस शांति को स्थायी करने की राह को कठिन बना देते हैं।

इस युद्व ने एक बार फिर याद दिलाया कि शांति सिर्फ एक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि भरोसा, कार्रवाई और न्याय का मिलाजुला सफर है। Ceasefire ने आशा दी है, मगर अब देखना यह है कि कब तक यह आशा साकार होती है या फिर से संघर्ष की आग में धंस जाएगी।

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सरकार और Zomato की साझेदारी से गिग वर्कर्स को मिलेगा बड़ा अवसर : हर साल 2.5 लाख नई नौकरियां बनेंगी

Zomato

भारत में तेजी से बढ़ती गिग इकॉनमी (Gig Economy) को औपचारिक रूप देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (Ministry of Labour & Employment) ने ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी Zomato के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के तहत हर साल लगभग 2.5 लाख नई नौकरियों के अवसर नेशनल करियर सर्विस (NCS) पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएंगे।

समझौते पर हस्ताक्षर नई दिल्ली में मंगलवार को हुए, जिसमें केंद्रीय श्रम एवं रोजगार और युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, राज्यमंत्री शोभा करंदलाजे और श्रम सचिव वंदना गुर्नानी उपस्थित रहीं।

गिग वर्कर्स के लिए बनेगा नया ‘Aggregator’ Category

इस समझौते के तहत NCS पोर्टल पर एक नया “Aggregator” सेक्शन जोड़ा जाएगा, जहां Zomato अपने डिलीवरी पार्टनर्स और अन्य गिग वर्कर्स के लिए लचीले रोजगार के अवसर सूचीबद्ध करेगा। इससे युवाओं और महिलाओं को टेक्नोलॉजी-सक्षम, सम्मानजनक और औपचारिक रोजगार तक पहुंच मिलेगी।

डॉ. मांडविया ने कहा, “यह कदम युवाओं और महिलाओं को गरिमामय, तकनीक-आधारित जीविकोपार्जन से जोड़ेगा। यह प्लेटफ़ॉर्म इकॉनमी की नौकरियों को औपचारिक रोजगार व्यवस्था में एकीकृत करने की दिशा में बड़ा कदम है।”

NCS पोर्टल की बढ़ती सफलता

2015 में शुरू किया गया नेशनल करियर सर्विस (NCS) पोर्टल अब तक 7.7 करोड़ से अधिक नौकरियों का सृजन कर चुका है। यह पोर्टल देशभर के नियोक्ताओं और नौकरी तलाशने वालों के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बन चुका है।

 

श्रम सचिव वंदना गुर्नानी ने कहा कि दिवाली के आसपास पोर्टल पर Zomato की नई जॉब लिस्टिंग शुरू होगी, जिससे युवाओं को त्योहार के मौसम में अतिरिक्त रोजगार के अवसर मिलेंगे।

सामाजिक सुरक्षा कवरेज में बड़ी बढ़ोतरी

उन्होंने आगे बताया कि भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज (Social Security Coverage) में उल्लेखनीय सुधार हुआ है — जो 2015 में 19% था, वह अब 2025 में बढ़कर 64.3% तक पहुंच गया है। इस कवरेज से लगभग 94 करोड़ नागरिकों को लाभ मिल रहा है।

Zomato

राज्यमंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के सभी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया जाए।

‘विकसित भारत 2047’ और PM-VBRY से जुड़ा मिशन

यह पहल सरकार के प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) और विकसित भारत 2047 विज़न का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है। इस दिशा में सरकार टेक्नोलॉजी, प्रशिक्षण और उद्यमशीलता के माध्यम से नए युग की रोजगार व्यवस्था को बढ़ावा दे रही है।

Zomato के साथ साझेदारी का व्यापक प्रभाव

Zomato के साथ हुआ यह समझौता श्रम मंत्रालय की निजी क्षेत्र के साथ 15वीं बड़ी साझेदारी है। इससे पहले मंत्रालय Amazon, Swiggy, Rapido, Zepto जैसी 14 अन्य कंपनियों के साथ भी MoU पर हस्ताक्षर कर चुका है, जिनके ज़रिए अब तक 5 लाख से अधिक रोजगार अवसर सृजित किए जा चुके हैं। Zomato ने बयान जारी कर कहा कि कंपनी हर महीने 20,000 से अधिक रोजगार अवसर पोस्ट करेगी, जिससे युवाओं को लचीले व औपचारिक काम के मौके मिलेंगे।

भारत की गिग इकॉनमी का भविष्य

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में गिग इकॉनमी अगले पांच वर्षों में $455 बिलियन के स्तर तक पहुंच सकती है। सरकार और निजी क्षेत्र के इस तरह के सहयोग से लाखों युवाओं को नए अवसर मिलेंगे और देश की आर्थिक गतिशीलता को मजबूती मिलेगी। डॉ. मांडविया ने अंत में कहा “हमारा उद्देश्य केवल नौकरियां देना नहीं, बल्कि युवाओं को सम्मानजनक, सुरक्षित और स्थायी रोजगार से जोड़ना है। Zomato के साथ यह साझेदारी उसी दिशा में एक ठोस कदम है।”

Zomato और श्रम मंत्रालय के बीच हुआ यह समझौता न केवल गिग वर्कर्स को औपचारिक रोजगार व्यवस्था से जोड़ने में मदद करेगा, बल्कि भारत के श्रम बाज़ार को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएगा। यह पहल सरकार की “विकसित भारत 2047” की दृष्टि को साकार करने में एक और मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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सेंट्रल बैंकों की सुनामी खरीद : गोल्ड ETFs ने रचा इतिहास, Dhanteras पर ₹1.3 लाख तक पहुंच सकता है सोना

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सोना एक बार फिर निवेशकों का सबसे बड़ा “सेफ हेवन” बनकर उभरा है। सेंट्रल बैंकों और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) की अभूतपूर्व खरीदारी ने गोल्ड की कीमतों को नए शिखर पर पहुंचा दिया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, सितंबर 2025 में भारतीय गोल्ड ETFs में अब तक की सबसे बड़ी मासिक इनफ्लो दर्ज हुई — $902 मिलियन, जो अगस्त के $232 मिलियन की तुलना में 285% ज्यादा है।

इस बूम के चलते भारत के गोल्ड ETF का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) अब $10 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। SMC ग्लोबल सिक्योरिटीज की हेड ऑफ कमोडिटी रिसर्च वंदना भारती के अनुसार, “सेंट्रल बैंकों और ETFs की मजबूत खरीदारी, रिकॉर्ड कीमतों के बावजूद जारी है। गिरते फिएट करंसी पर भरोसे में कमी और ब्याज दरों में संभावित कटौती ने सोने की कीमतों को मजबूती दी है।”

सितंबर में भारतीय गोल्ड ETF निवेशों के मामले में भारत ने दुनिया में चौथा स्थान हासिल किया, अमेरिका, ब्रिटेन और स्विट्जरलैंड के बाद। साल की शुरुआत से सितंबर तक भारतीय गोल्ड ETFs में $2.18 बिलियन का इनफ्लो दर्ज हुआ, जो अब तक के सभी वार्षिक रिकॉर्ड को पार कर गया।

 वैश्विक कारक भी दे रहे हैं सोने को रफ्तार

दुनिया भर में बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनावों ने निवेशकों को सुरक्षित विकल्पों की ओर मोड़ दिया है। अमेरिका और चीन के बीच नए व्यापारिक तनाव तथा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में संभावित कटौती की उम्मीदों ने डॉलर को कमजोर किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए सोना और आकर्षक बन गया है।

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रिलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अजीत मिश्रा ने बताया : “वैश्विक अनिश्चितता, जियोपॉलिटिकल तनाव और फेड की रेट-कट उम्मीदों ने गोल्ड रैली को मजबूत किया है।” अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 13 अक्टूबर को पहली बार $4,000 प्रति औंस के पार जाकर $4,076 प्रति औंस पर पहुंच गया।

दूसरी ओर, दुनियाभर के सेंट्रल बैंक डॉलर रिजर्व पर निर्भरता घटाकर गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं। इससे सोने के लिए एक मजबूत प्राइस फ्लोर (Price Floor) बन गया है। खुदरा निवेशक भी मुद्रास्फीति और करेंसी डिप्रिसिएशन से बचाव के लिए गोल्ड को तरजीह दे रहे हैं।

धनतेरस 2025 पर सोने का क्या रहेगा भाव?

बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस साल धनतेरस पर सोना ₹1,20,000 से ₹1,30,000 प्रति 10 ग्राम के बीच कारोबार कर सकता है। हालांकि, विशेषज्ञ फिलहाल ₹1.5 लाख के स्तर को पार करने की संभावना से इनकार कर रहे हैं। अजीत मिश्रा का कहना है, “अगर कोई बड़ी आर्थिक या भू-राजनीतिक घटना नहीं होती, तो सोना ₹1.5 लाख तक तुरंत नहीं पहुंचेगा। निकट भविष्य में ₹1,26,000 से ₹1,28,000 का दायरा अधिक यथार्थवादी है।”

वहीं, ऑगमॉन्ट गोल्ड के रिसर्च हेड रेनीशा चैनानी का मानना है कि अगर मौजूदा आर्थिक परिस्थितियां इसी तरह बनी रहीं, तो सोना मध्य से लेकर 2026 के अंत तक ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है। उनका कहना है कि, “भारत में निवेश का स्वरूप बदल रहा है। अब शहरी निवेशक फिजिकल गोल्ड के बजाय ETFs में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं — खासकर तब, जब कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर हैं।”

संक्षेप में –

  • सितंबर 2025 में भारत के गोल्ड ETF में $902 मिलियन की रिकॉर्ड इनफ्लो
  • कुल AUM पहुंचा $10 बिलियन — अब तक का सबसे ऊंचा स्तर
  • भारत बना दुनिया का चौथा सबसे बड़ा गोल्ड ETF निवेशक
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना पहली बार $4,000 प्रति औंस के पार
  • Dhanteras 2025 पर सोना ₹1.2 से ₹1.3 लाख के बीच रहने का अनुमान
  • 2026 तक ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंचने की संभावना

सेंट्रल बैंकों की गोल्ड-खरीद रणनीति, ETFs में ऐतिहासिक निवेश और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता ने सोने को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है। निवेशक अब इसे केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि एक मजबूत वित्तीय कवच (financial hedge) के रूप में देख रहे हैं। आने वाले महीनों में, गोल्ड मार्केट भारत सहित दुनिया भर में निवेश ट्रेंड की दिशा तय कर सकता है।

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Uttarakhand’s Education Reform : पहला राज्य जिसने Madrasa Board को पूरी तरह खत्म किया

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उत्तराखंड ने अक्टूबर 2025 में शिक्षा के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा है, जब राज्य सरकार ने Minority Education Bill, 2025 को पारित कर Madrasa Board Act, 2016 और संबंधित नियमों को समाप्त करने का ऐलान किया। इस बिल की मंज़ूरी मिलने के बाद, अब राज्य के सभी मदरसे एवं अल्पसंख्यक विद्यालयों को Uttarakhand State Minority Education Authority (USMEA) के तहत काम करना होगा और Board of School Education Uttarakhand से मान्यता लेनी होगी।

कानूनी बदलाव: मदरसा बोर्ड से मुख्यधारा तक

इस नए कानून के अनुसार, Madrasa Board Act, 2016 और Non-Government Arabic & Persian Madrasa Recognition Rules, 2019 को 1 जुलाई 2026 से प्रभावी रूप से समाप्त कर दिया जाएगा।

इसका मतलब है कि मदरसे अब अलग प्रणाली से नहीं चलेंगे, बल्कि उन्हें समान शिक्षा मानदंडों, पारदर्शी मूल्यांकन और मुख्यधारा के पाठ्यक्रम (NEP-2020, NCF) के अनुरूप तैयार होना होगा।

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अधिकार क्षेत्रों का विस्तार: सभी अल्पसंख्यक शामिल होंगे

पहले अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों में मान्यता सिर्फ मुस्लिम-समुदाय के मदरसे ही पाते थे। अब इस बिल के अनुसार, Sikh, Jain, Christian, Buddhist और Parsi संस्थाएँ भी उसी मान्यता और सामाजिक अधिकार की श्रेणी में आएँगी।

यह कदम शिक्षा में समानता को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है—हर बच्चा, चाहे किसी समुदाय से हो, मुख्यधारा की शिक्षा और बेहतर अवसर पाने में पीछे न रहे।

कार्यवाही और लागू होने की प्रक्रिया

राज्य सरकार ने इस कानून को अगस्त 2025 में कैबिनेट की मंज़ूरी दी थी और बाद में विधानसभा सत्र में पारित किया गया था।

1 जुलाई 2026 से सभी अल्पसंख्यक विद्यालयों और मदरसों को नई व्यवस्था के तहत USMEA से पंजीकरण करना अनिवार्य होगा, और जो संस्थाएँ इस नियम का पालन नहीं करेंगी, उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी।

समर्थन और विवाद: संतुलन की चुनौती

मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने कहा कि यह निर्णय पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में है।

वहीं, कुछ अल्पसंख्यक संगठन इस बदलाव को धार्मिक शिक्षा की स्वायत्तता पर हमला मान रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि क्या इस नई व्यवस्था में धार्मिक, सांस्कृतिक और भाषाई विविधता का सम्मान होगा या नहीं।

उत्तराखंड द्वारा पास किया गया this reform एक बड़े और साहसिक कदम की तरह है — मदरसा बोर्ड को खत्म कर, शिक्षा को समान दर्जा देना, और समाज में समान अवसर सुनिश्चित करना। यह न केवल इस राज्य के लिए, बल्कि पूरे देश के शिक्षा नीतियों के लिए मिसाल बन सकता है कि कैसे अल्पसंख्यक शिक्षा को मुख्यधारा में शामिल कर सामाजिक न्याय और विकास को आगे बढ़ाया जाए।

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India’s First Mrs. Universe Crown : Sherry Singh का Golden Moment जिसने भारत को कर दिया Proud

Mrs. Universe

2025 की अक्टूबर की बात है, जब भारत ने दुनिया के सामने एक ऐसा इतिहास रचा जिसे कोई भूल नहीं पाएगा। दिल्ली की Sherry Singh ने Okada, Manila, Philippines में आयोजित Mrs. Universe 2025 के फिनाले में धमाकेदार प्रदर्शन किया—120 से अधिक देशों की प्रतिभागियों को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने वह महिला ताज जीता जिसे भारत ने कभी नहीं जीता था। यह वह पल था जब देश का नाम गर्व के साथ दुनिया की मानचित्र पर चमका।

शुरुआत और तैयारी

Sherry ने पहले Mrs. India 2025 का खिताब जीता और उसी से प्रेरणा लेकर विश्व मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। प्रतियोगिता में उनका विषय था महिला सशक्तिकरण और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता—दो ऐसे मुद्दे जो दिल से करीब हैं। उनके आत्मविश्वास, निर्भीक अंदाज़ और गहरा संदेश जजेस और दर्शकों को उसी वक्त लुभा गया।

मुकाबले का नतीजा

शेरी सिंह ने Mrs. Universe 2025 का खिताब जीता, जबकि रनर-अप स्थान पर Saint Petersburg (रूस) को रखा गया। इसके अतिरिक्त Philippines, Asia और Russia को क्रमशः 2nd, 3rd और 4th रनर-अप स्थान मिले। प्रतियोगिता में USA, Japan, UAE और अन्य देशों की प्रतिभाएँ भी शामिल थीं।

Mrs. Universe

Mrs. Universe क्यों खास मंच है?

यह प्रतियोगिता सिर्फ सुंदरता नहीं देखती—शिक्षा, नेतृत्व, सामाजिक जिम्मेदारी, आत्मविश्वास और सामुदायिक योगदान भी महत्वपूर्ण है। 2025 संस्करण में खास फोकस mental health और empowerment पर था। यह मंच उन महिलाओं को पहचान देता है जो सौंदर्य के साथ सामाजिक चेतना और उद्यमशीलता को भी साथ ले चलती हैं।

क्या संदेश देती है यह जीत?

Sherry Singh की यह जीत नई पीढ़ी की महिलाओं को प्रेरणा देती है कि यदि संकल्प हो, तो कोई भी सपना दूर नहीं है। यह ताज केवल एक व्यक्ति की नहीं—सभी भारतीय महिलाओं की शक्ति, संघर्ष और आत्मविश्वास की जीत है। इस जीत ने भारत की अंतरराष्ट्रीय पेजेंट्री प्रतिष्ठा को एक नया आयाम दिया।

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Karnataka Menstrual Leave : महिला कर्मचारियों के लिए ऐतिहासिक राहत—कामकाजी संस्कृति में बदलाव

Menstrual Leave

9 अक्टूबर, 2025 को कर्नाटक सरकार ने एक ऐसा ऐतिहासिक निर्णय लिया जिसने कामकाजी महिलाओं के अधिकारों और स्वास्थ्य की स्वीकृति को नई दिशा दी है। कैबिनेट ने Menstrual Leave Policy, 2025 को मंज़ूरी दी, जिसके तहत अब राज्य भर के सरकारी और निजी कार्यालयों, IT, garment फैक्ट्रियों और मल्टीनेशनल कंपनियों सहित हर सेक्टर में महिला कर्मचारियों को हर महीने एक दिन पेड मासिक धर्म अवकाश मिलेगा, यानी साल में कुल 12 दिन। यह नीति तुरंत लागू हो गई है।

प्रस्तावना और समीक्षा

इस नीति की शुरुआत 2024 में हुई थी जब प्रस्तावित था कि साल में केवल 6 दिन की छुट्टी दी जाए। लेकिन समाज और महिला श्रमिक संगठनों की सक्रिय मांगों, सार्वजनिक deliberations और समितियों की रिपोर्टों के बाद यह प्रस्ताव बढ़ा कर 12 दिन प्रतिवर्ष कर दिया गया। कैबिनेट ने इसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया, जिससे यह नीति अधिक व्यापक और महिलाओं की ज़रूरतों को बेहतर समझने वाली बनी।

प्रभाव और बची चुनौतियाँ

यह नीति हर उस महिला कर्मचारी पर लागू होगी जो सरकारी या निजी क्षेत्र में है — चाहे वह garment उद्योग हो, IT कंपनी हो, स्टेशनरी फैक्ट्री हो या मल्टीनेशनल संगठन। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नौकरी देने वाले इस अवकाश को देना अनिवार्य होगा और अगर कोई नकारेगा, तो जुर्माना लग सकता है। हालाँकि, कई विशेषज्ञों और उद्योग संघों ने आगाह किया है कि नीति के नियमों को महिलाओं के अनुकूल और stigma-free बनाया जाए। कई कार्यस्थल इस तरह की छुट्टी को लेकर संकोच कर सकते हैं, या इसे misuse के डर से resist कर सकते हैं।

Menstrual Leave

तुलना : भारत के अन्य राज्यों से

Bihar और Odisha में सरकार ने पहले ही यह नीति लागू की है, किंतु केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए। केरल ने महिला छात्रों और प्रशिक्षणकर्ताओं के लिए कुछ समान छूट-नीतियाँ लागू की हैं। इस तरह कर्नाटक देश का पहला राज्य बन गया है जहाँ नीति सरकारी और निजी दोनों सेक्टरों में समान रूप से लागू होगी।

महिलाओं, समाज और सरकार की नई उम्मीद

यह नीति सिर्फ़ एक छुट्टी की पेशकश नहीं है, बल्कि उस समझ और सम्मान का प्रतीक है जो माहवारी के दौरान महिला स्वास्थ्य की चुनौतियों को स्वीकार करता है। राज्य सरकार, श्रम विभाग और राजनीतिक नेतृत्व ने इसे एक “progressive law” बताया है, जो inclusive workplace culture को बढ़ावा देगा। लेकिन असली असर तब होगा जब इस नीति को वास्तविक जीवन में लागू करते समय नियुक्ति, उत्तीर्णता और करियर-विकास में किसी प्रकार का भेद-भाव न हो; और workplace harassment या negatively biased hiring जैसे जोखिमों से महिलाओं को सुरक्षा मिले।

Karnataka Menstrual Leave Policy, 2025 ने साबित कर दिया है कि महिलाओं के अधिकारों के मामले में हिंद महासागरीय दक्षिण भारत में एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। प्रत्येक महीने एक दिन की यह पेड छुट्टी कामकाजी महिलाओं को राहत देगी, लेकिन इसे सफल बनाने के लिए ज़रूर है कि समाज, कंपनियाँ और कार्यस्थल इसे सिर्फ़ कानून न मानें, बल्कि अपनी सोच और व्यवहार में भी शामिल करें। यह केवल एक दिन की छुट्टी नहीं, सम्मान और स्वास्थ्य की जीत है।

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Maria Corina Machado को मिला 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार : लोकतंत्र की बहाली के लिए मिला सम्मान

Maria Corina Machado

वेनेजुएला में लोकतंत्र की बहाली और मानवाधिकारों के लिए वर्षों से चल रहे संघर्ष का दुनिया ने बड़ा सम्मान किया है। नॉर्वे की नोबेल समिति ने शुक्रवार को घोषणा की कि 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता Maria Corina Machado को दिया जाएगा। उन्हें यह पुरस्कार उनके साहस, नेतृत्व और अपने देश में लोकतांत्रिक मूल्यों को पुनर्स्थापित करने की दिशा में किए गए अथक प्रयासों के लिए मिला है।

तानाशाही के खिलाफ लोकतंत्र की आवाज़

Maria Corina Machado पिछले एक दशक से भी अधिक समय से वेनेजुएला की सत्तावादी सरकार के खिलाफ संघर्ष का चेहरा रही हैं। उन्होंने लगातार राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार की आलोचना की है और देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग उठाई है। कई बार उन्हें गिरफ्तारियों और धमकियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

Maria Corina Machado

मचाडो को जनता का व्यापक समर्थन प्राप्त है, खासकर उन युवाओं और महिलाओं से जो अपने देश में बदलाव चाहती हैं। उनकी राजनीतिक पार्टी और आंदोलन “Vente Venezuela” लंबे समय से लोकतांत्रिक सुधारों और पारदर्शी शासन के लिए आवाज उठा रहा है।

नोबेल समिति ने की उनके साहस की सराहना

नोबेल समिति ने अपने बयान में कहा कि Maria Corina Machado “एक ऐसे समय में लोकतंत्र की प्रतीक हैं जब दुनिया के कई हिस्सों में तानाशाही ताकतें मजबूत हो रही हैं।”

समिति ने यह भी कहा, “उनका शांतिपूर्ण और दृढ़ नेतृत्व इस बात का उदाहरण है कि नागरिक शक्ति कैसे बिना हिंसा के शासन में बदलाव ला सकती है। उनका संघर्ष न सिर्फ वेनेजुएला के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा है।”

ट्रंप सहित कई नामों को पछाड़ा

इस साल नोबेल शांति पुरस्कार के दावेदारों की सूची में कई चर्चित नाम थे, जिनमें पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल थे। ट्रंप को इस सूची में मध्य पूर्व में शांति समझौतों की पहल के लिए नामित किया गया था। हालांकि, समिति ने अंततः एक ऐसी नेता को चुना जो जमीनी स्तर पर संघर्ष कर रही हैं और जिनका काम सीधे तौर पर नागरिकों के जीवन से जुड़ा है।

Maria Corina Machado

वेनेजुएला के लिए आशा की किरण

इस पुरस्कार ने न केवल Maria Corina Machado की व्यक्तिगत उपलब्धियों को सम्मानित किया है, बल्कि वेनेजुएला के लोकतंत्र समर्थक आंदोलन को भी एक नई ऊर्जा दी है। देश के भीतर और प्रवासी समुदायों में यह खबर बड़े उत्साह के साथ स्वागत की गई।

सोशल मीडिया पर मचाडो को “La Voz de la Libertad (स्वतंत्रता की आवाज़)” कहा जा रहा है|

मचाडो की प्रतिक्रिया

पुरस्कार की घोषणा के बाद Maria Corina Machado ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा – “यह सम्मान मेरे लिए नहीं, बल्कि हर उस वेनेजुएलावासी के लिए है जिसने आज़ादी में विश्वास बनाए रखा। हमारा संघर्ष जारी रहेगा जब तक हमारे देश में सच्चा लोकतंत्र वापस नहीं आता।”

नोबेल शांति पुरस्कार का महत्व

नोबेल शांति पुरस्कार दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक है, जो हर साल उन व्यक्तियों या संगठनों को दिया जाता है जिन्होंने शांति, मानवाधिकार और लोकतंत्र के लिए उल्लेखनीय कार्य किए हों। इस पुरस्कार के साथ न केवल 1 करोड़ स्वीडिश क्रोना (करीब ₹7.5 करोड़ रुपये) की राशि दी जाती है, बल्कि यह वैश्विक मंच पर असाधारण मान्यता का प्रतीक भी है।

Maria Corina Machado की यह जीत सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों की जीत है जो तानाशाही के खिलाफ लोकतंत्र और मानवाधिकारों के लिए खड़े हैं। नोबेल समिति के इस फैसले ने यह संदेश दिया है कि शांति का मार्ग हमेशा संवाद, साहस और जनता की आवाज़ से होकर गुजरता है।

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Alakh Pandey Net Worth 2025 : फिजिक्सवाला के फाउंडर ने शाहरुख खान को छोड़ा पीछे, ₹14,510 करोड़ की संपत्ति से बने अरबपति

Alakh Pandey

हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2025 ने इस साल भारत के धनाढ्य व्यक्तियों की लिस्ट में बड़ा बदलाव दिखाया है। एड-टेक प्लेटफॉर्म ‘फिजिक्सवाला’ (Physics Wallah) के संस्थापक Alakh Pandey अब बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान से भी ज्यादा अमीर बन गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, Alakh Pandey की कुल संपत्ति ₹14,510 करोड़ तक पहुंच गई है, जबकि शाहरुख खान की नेटवर्थ ₹12,490 करोड़ आंकी गई है।

223% की जबरदस्त वृद्धि 

पिछले साल की तुलना में Alakh Pandey की नेटवर्थ में 223% की भारी बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने मात्र एक कमरे से पढ़ाना शुरू किया था और आज उनकी कंपनी Physics Wallah करोड़ों छात्रों के लिए सीखने का भरोसेमंद मंच बन चुकी है। कंपनी ने ऑनलाइन क्लासेस से लेकर ऑफलाइन कोचिंग सेंटर्स, डिजिटल ऐप्स और टेस्ट सीरीज़ तक अपने बिज़नेस को मजबूत किया है।

शाहरुख खान की संपत्ति ₹12,490 करोड़, लेकिन अलख पांडे ने ली बढ़त

हुरुन इंडिया रिच लिस्ट के अनुसार, शाहरुख खान की संपत्ति में भी 71% की वृद्धि दर्ज की गई है। उनकी नेटवर्थ अब ₹12,490 करोड़ (लगभग $1.4 बिलियन) है।

उनकी आमदनी के मुख्य स्रोत हैं:

  • Red Chillies Entertainment
  • IPL टीम कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) में हिस्सेदारी
  • ब्रांड एंडोर्समेंट्स और विज्ञापन

लेकिन इस बार, एक शिक्षक और उद्यमी ने एक सुपरस्टार को पीछे छोड़कर भारत में सफलता की नई मिसाल कायम की है।

Alakh Pandey

 

नेटवर्थ तुलना (2025)

अलख पांडे (Physics Wallah) ₹14,510 करोड़ +223%

शाहरुख खान (Bollywood Superstar) ₹12,490 करोड़ +71%

Physics Wallah : शिक्षा जगत का डिजिटल क्रांति केंद्र

Physics Wallah अब सिर्फ एक यूट्यूब चैनल नहीं, बल्कि एक एड-टेक साम्राज्य है। कंपनी UPSC, SSC, GATE और मेडिकल जैसे नए कोर्सेज़ में भी विस्तार कर चुकी है। साथ ही, Alakh Pandey ने हाल ही में AI-आधारित लर्निंग सिस्टम लॉन्च करने की घोषणा की है ताकि छात्रों को और अधिक पर्सनलाइज्ड लर्निंग अनुभव मिल सके। अलख पांडे की मेहनत, विनम्रता और मिशन शिक्षा की कहानी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है। उनका यह सफर बताता है कि अगर इरादा सच्चा हो, तो शिक्षा भी संपत्ति बन सकती है।

निष्कर्ष

2025 की हुरुन इंडिया रिच लिस्ट ने यह साफ कर दिया है कि भारत में सफलता अब सिर्फ फिल्म या बिज़नेस इंडस्ट्री तक सीमित नहीं है — शिक्षा और टेक्नोलॉजी भी नई आर्थिक ताकत बन चुकी हैं। Alakh Pandey का यह मुकाम न सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि “ज्ञान अब धन का नया आधार है।

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Patna Metro Inauguration : 6 अक्टूबर को इतिहास बना, देखिए कैसे बदला शहर का नज़ारा

Patna Metro

6 अक्टूबर 2025, दोपहर 11 बजे — यह वह पल था जिसे बिहारवासियों ने दशकों से इंतजार किया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री की मौजूदगी में ISBT डिपो से Patna Metro के पहले चरण का उद्घाटन किया गया। अगले ही दिन, यानी 7 अक्टूबर से आम जनता के लिए मेट्रो सेवा शुरू हो जाएगी। इस एक कदम के साथ, पटना अब उन चुनिंदा शहरों में शामिल हो गया है जहाँ आधुनिक और तेज़ मेट्रो यातायात उपलब्ध है।

शुरुआत का सपना: कब, कैसे और क्यों

मेट्रो का विचार सालों पुराना है, लेकिन इसकी गाथा 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शिलान्यास के साथ शुरू हुई। परियोजना की अनुमानित लागत ₹13,365 करोड़ तय की गई और Delhi Metro Rail Corporation (DMRC) को जनरल कंसल्टेंट नामित किया गया।

निर्माण कार्य 2020 में शुरू हुआ, और कोविड-19 व भूमि अधिग्रहण की चुनौतियों के बावजूद, काम गति पकड़ते हुए आगे बढ़ा। परीक्षण और समापन प्रक्रियाएँ 2025 के मध्य में पूरी हुईं, और अब यह पटनावासियों को एक नया दृश्य देने के लिए तैयार है।

रूट, स्टेशन और पहले चरण की सेवा

पहला चरण “ब्लू लाइन / नॉर्थ–साउथ” विचाराधीन रूट है जो Patna Junction से New ISBT / Patliputra Bus Terminal तक फैला है।

Phase-1 में दो कॉरिडोर शामिल हैं:

  • ईस्ट–वेस्ट : Danapur Cantonment से Khemni Chak (लगभग 16.86 किमी, 12 स्टेशन)
  • नॉर्थ–साउथ (Blue Line): Patna Junction से New ISBT (लगभग 14.5 किमी, 12 स्टेशन)

फिलहाल उद्घाटन के समय ISBT — Bhootnath — Zero Mile (या भूतनाथ रोड) के बीच सीमित सेवा दी जा रही है। बाकी सेक्शन्स अगले 2–3 वर्षों में क्रमशः खुलेंगे।

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किराया, समय और सुविधाएं

  • किराया: न्यूनतम ₹15, अधिकतम ₹30
  • समय: सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक
  • फ्रीक्वेंसी: लगभग हर 20 मिनट में ट्रेन चलेगी
  • क्षमता: एक कोच में लगभग 300 लोग संभव, एक ट्रिप में लगभग 900 यात्री
  • सुविधाएँ: CCTV, चार्जिंग स्टेशन, मधुबनी कलाकृति (स्थानीय कलाकृति), महिला एवं दिव्यांगों के लिए आरक्षित सीटें

परिवर्तन का मतलब: पटना और बिहार के लिए

इस मेट्रो लॉन्च से पटना की सड़क जाम की समस्या कम होगी, सार्वजनिक वाहनों का दबाव घटेगा और शहर को हर हिस्से से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। यह सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट प्लान नहीं है, बल्कि पटना को स्मार्ट, हरित और जीवन स्तर बेहतर करने की दिशा में बड़ा कदम है। इसके अलावा, इस सफलता से बिहार के अन्य शहरों जैसे गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर में भी मेट्रो- जैसे प्रोजेक्टों को नए गति मिलेगी।

6 अक्टूबर 2025 की दोपहर पटना ने इतिहास लिखा — मेट्रो उद्घाटन ने दिखा दिया कि बड़े सपने, सही योजनाओं और समयबद्ध निष्पादन से कैसे संभव होते हैं। अब यह मेट्रो पटना की गलियों में दौड़ेगी, लेकिन यह दौड़ सिर्फ लोकेशन नहीं, उम्मीद, विकास और बदलाव की होगी |

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Gold Price Record 2025 : सोने की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ

Gold Price

भारत में Gold Price रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। त्योहारों के सीजन में जहां सोने की चमक बाजार में दिख रही है, वहीं आम लोगों के लिए इसकी कीमतें “सपनों जैसी” बन चुकी हैं। शुक्रवार को केरल में सोना ₹640 प्रति पवन महंगा हुआ और रेट ₹87,560 प्रति पवन (लगभग $985) पहुंच गया। वहीं, प्रति ग्राम सोना ₹10,945 तक चढ़ गया। देशभर में 24 कैरेट सोना ₹1,19,400 प्रति 10 ग्राम के पार चला गया है — जो पिछले साल के दशहरे की तुलना में 48% की जबरदस्त वृद्धि है। 2024 में यह दर ₹78,000 थी, यानी सिर्फ एक साल में ₹41,000 से ज्यादा की छलांग।

सोने की बिक्री घटी 25%, लेकिन मूल्य में 35% की बढ़ोतरी

इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, इस बार दशहरे में सोने की बिक्री मात्रा 24 टन से घटकर 18 टन रह गई, यानी लगभग 25% की कमी। हालांकि, बढ़े दामों के कारण कुल बिक्री मूल्य में 30-35% तक की वृद्धि दर्ज की गई है।

IBJA के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता ने बताया —  “पिछले साल दशहरे पर 24 टन सोना बिका था। इस बार कीमत ₹1.16 लाख प्रति 10 ग्राम रही, जिसने मांग पर सीधा असर डाला है।” महंगे दामों के चलते उपभोक्ताओं की खरीदारी की रणनीति बदल गई है। अब ग्राहक नया सोना खरीदने के बजाय पुराने गहनों को एक्सचेंज कर रहे हैं।

Gold Price

दक्षिण भारत के प्रमुख ज्वेलर जोसे अलुक्कास के प्रबंध निदेशक वर्गीज़ अलुक्कास ने कहा — “10-20 ग्राम के गोल्ड बार की बिक्री बढ़ी है। ग्राहक 18K, 14K और 9K डायमंड ज्वेलरी के बजाय गोल्ड ज्वेलरी पसंद कर रहे हैं। पुराने सोने का एक्सचेंज इस दशहरे में 55-60% तक पहुंच गया है।” कई ग्राहक अब गोल्ड बार और कॉइन में निवेश कर रहे हैं, ताकि शादी के मौसम में उसे ज्वेलरी में बदल सकें। दिवाली तक ₹1.22 लाख तक पहुंच सकता है सोना, वैश्विक बाजार में $4,200/oz का अनुमान-

  • विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की तेजी फिलहाल रुकने वाली नहीं है।
  • अंदाजा है कि दिवाली तक भारत में सोना ₹1,22,000 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है।
  • UBS और अंतरराष्ट्रीय बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, गोल्ड की अंतरराष्ट्रीय कीमतें $4,000 से $4,200 प्रति औंस तक जा सकती हैं।

इस उछाल के पीछे कई कारण हैं

  • अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती की संभावना
  • डॉलर की कमजोरी और वैश्विक मंदी की आशंका
  • निवेशकों का “सेफ-हेवन” एसेट की ओर रुझान
  • जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताएं और क्रूड ऑयल में उतार-चढ़ाव

भारत की परंपरा और निवेश का बदलता चेहरा

भारत में सोना केवल धातु नहीं, बल्कि परंपरा और आस्था का प्रतीक है। लेकिन अब कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि के चलते यह “भावनात्मक खरीदारी” से हटकर रणनीतिक निवेश का रूप ले रहा है। ज्वेलरी ब्रांड अब लाइटवेट डिजाइन, कम कैरेट ज्वेलरी और ईएमआई ऑफर्स के जरिए ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। वहीं, मेट्रो शहरों में गोल्ड डिजिटल इन्वेस्टमेंट ऐप्स और ETF का चलन भी बढ़ा है।

Gold Price

महंगाई के बीच भी निवेशकों का भरोसा कायम

हालांकि महंगाई से ग्राहकों की जेब पर बोझ बढ़ा है, लेकिन निवेशकों के लिए यह दौर फायदेमंद है। शेयर बाजार की अस्थिरता और रुपये की कमजोरी के बीच सोना एक बार फिर सबसे सुरक्षित निवेश विकल्प (Safe Haven Asset) बन गया है। कई बैंक और फाइनेंशियल एनालिस्ट्स का मानना है कि अगर वैश्विक अस्थिरता जारी रही तो सोना 2026 की शुरुआत तक 20% और महंगा हो सकता है।

सोने की बढ़ती चमक, लेकिन जेबों पर बढ़ता बोझ त्योहारों के इस सीजन में जहां सोने की चमक पहले से कहीं ज्यादा दिखाई दे रही है, वहीं यह आम उपभोक्ता के लिए महंगाई की मार बन गई है।भारत का सोने से रिश्ता बरकरार है, लेकिन उसका स्वरूप बदल गया है —

अब यह “गहनों की खरीद” नहीं, बल्कि निवेश और मूल्य संरक्षण की रणनीति बन चुका है। अगर यही रफ्तार जारी रही, तो आने वाले महीनों में सोना भारत की सबसे महंगी और प्रतिष्ठित पूंजीगत संपत्ति बन जाएगा।

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Attention Full Moon Lovers- 6 अक्टूबर को दिखेगा 14% बड़ा और 30% ज्यादा चमकदार चाँद (Supermoon)

Full Moon

जब रात गहरी होती है और आसमान शांत, चाँद अपनी पूरी चमक (Full Moon) में आ जाता है — वह पल अक्सर हमें मंत्रमुग्ध कर देता है। लेकिन इस अक्टूबर 2025 की रात कुछ अलग ही होगी। क्योंकि 6–7 अक्टूबर की पूर्णिमा को यह सिर्फ पूर्णिमा नहीं, बल्कि सुपरमून होगी — जिसे पारंपरिक रूप से Harvest Moon भी कहा जाता है। यह वही रात है जब चाँद धरती के सबसे करीब आएगा और पूरे आकाश में सुनहरी रौशनी बिखेरेगा।

सुपरमून क्या है?

सुपरमून वह क्षण है जब पूर्णिमा (Full Moon) और चाँद का Perigee (धरती के सबसे नजदीकी बिंदु) एक साथ होते हैं। इस वजह से चाँद सामान्य से लगभग 14% बड़ा और 30% अधिक चमकीला दिखने लगता है। इस बार इस सुपरमून को विशेष बनाता है कि यह 2025 की पहली सुपरमून होगी, और इसके बाद इस वर्ष और भी दो सुपरमून होंगे। चाँद की कक्षा गोल नहीं होती — वह अंडाकार होती है, और एक Full Moon जब धरती के पास हो तो वह सुपरमून बन जाता है।

Full Moon

तारीख, समय और देखे कैसे?

दिन : 6 अक्टूबर शाम से लेकर 7 अक्टूबर की सुबह तक

उत्कर्ष समय : Full moon करीब-करीब 11:47 p.m. EDT (यह भारत में लगभग 9:18 a.m. IST का समय हो सकता है)

दिखाई देने का क्षेत्र : पूरब दिशा में खुला आसमान, बिना बहुत अधिक लाइट पॉल्यूशन वाले स्थान

उपकरण : नंगी आँख से देख सकते हैं, लेकिन बाइनाक्यूलर या टेलीस्कोप से चाँद की सतह की विशेषताएँ भी दिखाई देंगी

Harvest Moon की कहानी और इसका महत्व

Harvest Moon उस पूर्णिमा को कहा जाता है जो autumnal equinox के पास हो, ताकि किसान देर रात तक फसल काट सकें। इस वर्ष यह पूर्णिमा equinox से सबसे करीब है, इसलिए यह Harvest Moon कहलाती है।  यह चाँद आसमान में सुनहले और नारंगी रंग में नज़र आएगा — विशेष तौर पर चंद्रोदय के समय। इसके साथ ही, शनि (Saturn) ग्रह भी आसमान में चाँद के पास दिखाई दे सकता है, जिससे दृश्य और भी खास होगा।

ध्यान देने योग्य बातें

  • बादल, धुंध या बारिश दृश्य को बाधित कर सकती है।
  • शहरों में लाइट पॉल्यूशन होने के कारण सबसे अच्छा दृश्य गांवों या खुली जगहों पर मिलेगा।
  • शूटिंग स्टार्स जैसे Draconid Meteor Shower भी इसी अवधि में आसमान में लौटने वाले हैं, मगर चाँद की चमक उन्हें छिपाए रख सकती है।

6–7 अक्टूबर 2025 की रात सिर्फ चाँद का जश्न नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की अद्भुतता का प्रदर्शन होगी। जब आप उस सुनहरी चाँद की ओर देखेंगे, सोचिए कि यह न सिर्फ हमारी धरती का उपहार है, बल्कि एक प्राकृतिक तमाशा जिसे हर किसी ने समय पर देखना चाहिए।

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कृषि शिक्षा में ऐतिहासिक सुधार : अब देशभर की 20% सीटें ICAR परीक्षा से भरेंगी, 3,000 छात्रों को मिलेगा सीधा लाभ

कृषि शिक्षा

भारत सरकार ने कृषि शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की है कि देशभर के सभी कृषि विश्वविद्यालयों में स्नातक स्तर की 20 प्रतिशत सीटें अब भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा आयोजित अखिल भारतीय प्रतियोगी परीक्षा (AIEEA) के माध्यम से भरी जाएंगी। यह नई व्यवस्था शैक्षणिक सत्र 2025-26 से लागू होगी, जिससे देशभर में लगभग 3,000 छात्रों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

सरकार का यह कदम “वन नेशन, वन एग्रीकल्चर, वन टीम” के विज़न के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य देश की कृषि शिक्षा प्रणाली में एकरूपता लाना और योग्य छात्रों को समान अवसर प्रदान करना है।

अब तक क्या थी स्थिति?

अब तक देश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया राज्य सरकारों के अधीन होती थी। प्रत्येक राज्य के विश्वविद्यालय अपने-अपने नियम, पात्रता मानदंड और परीक्षा प्रणाली अपनाते थे। उदाहरण के लिए, कुछ विश्वविद्यालय केवल उन्हीं छात्रों को प्रवेश देते थे जिन्होंने 12वीं कक्षा में कृषि या बायोलॉजी विषय पढ़ा हो, जबकि अन्य जगहों पर फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स (PCM) वाले छात्र आवेदन नहीं कर सकते थे।

इस व्यवस्था के कारण कई मेधावी छात्र, जिन्होंने विज्ञान या अन्य विषयों के साथ कृषि में रुचि दिखाई थी, प्रवेश पाने से वंचित रह जाते थे। इसके अलावा, अलग-अलग राज्यों की परीक्षाओं और कट-ऑफ में अंतर होने से पारदर्शिता की कमी महसूस की जाती थी।

कृषि शिक्षा

नई व्यवस्था से क्या बदलेगा?

नई प्रणाली के तहत देशभर में कृषि स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश प्रक्रिया ICAR परीक्षा के माध्यम से एक समान होगी। यानी अब छात्र को किसी विशेष राज्य की सीमा या पात्रता शर्तों में बंधना नहीं पड़ेगा। इस परीक्षा के लिए 12वीं कक्षा में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी, मैथ्स या एग्रीकल्चर जैसे विषयों का संयोजन रखने वाले छात्र आवेदन कर सकेंगे। इससे विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमियों से आने वाले छात्रों को समान अवसर मिलेगा।

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा — “हमारा उद्देश्य कृषि शिक्षा को अधिक सुलभ, पारदर्शी और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। यह कदम न केवल छात्रों के लिए लाभदायक होगा, बल्कि देश को भविष्य में बेहतर प्रशिक्षित कृषि वैज्ञानिक और उद्यमी प्रदान करेगा।”

कितनी सीटें शामिल होंगी और किसे होगा लाभ?

कृषि मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, देशभर में कृषि स्नातक कोर्स की लगभग 3,121 सीटों में से 20 प्रतिशत (लगभग 624 सीटें) अब ICAR परीक्षा के ज़रिए भरी जाएंगी। इस निर्णय से सीधे तौर पर करीब 3,000 छात्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इनमें से अधिकांश वे छात्र होंगे, जो अब तक राज्यस्तरीय नियमों के कारण प्रवेश से वंचित रह जाते थे। इसके अलावा, लगभग 2,700 सीटें (85%) कृषि या इंटर-एग्रीकल्चर विषय समूह के छात्रों के लिए उपलब्ध रहेंगी, जिससे ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों को भी पर्याप्त अवसर मिलेंगे।

कृषि क्षेत्र के लिए क्या मायने रखता है यह फैसला?

भारत कृषि प्रधान देश है, लेकिन कृषि शिक्षा में अब तक एकीकृत नीति की कमी महसूस की जाती रही है। इस नई व्यवस्था से न केवल देशभर के विश्वविद्यालयों में समान मानक लागू होंगे, बल्कि छात्रों को भी अपने पसंदीदा संस्थान में प्रवेश पाने के लिए समान प्रतिस्पर्धा का मंच मिलेगा। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुधार कृषि शिक्षा के स्तर और गुणवत्ता दोनों को ऊँचा उठाएगा।

दिल्ली कृषि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. सुरेश मिश्रा के अनुसार — “यह फैसला भारतीय कृषि शिक्षा में मील का पत्थर साबित होगा। जब प्रवेश प्रक्रिया एक समान होगी, तो पूरे देश से प्रतिभाशाली छात्र एक ही प्लेटफॉर्म पर आएंगे। इससे रिसर्च, इनोवेशन और टेक्नोलॉजी के स्तर में भी सुधार देखने को मिलेगा।”

छात्रों की प्रतिक्रिया

छात्रों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे अवसरों की समानता बढ़ेगी।

दिल्ली की छात्रा रिया वर्मा, जो 12वीं में PCM विषय लेकर पढ़ाई कर रही हैं, ने कहा — “पहले हमें लगता था कि कृषि में दाखिला सिर्फ बायोलॉजी वालों को मिलता है। लेकिन अब ICAR परीक्षा के ज़रिए हमें भी मौका मिलेगा। यह वास्तव में एक न्यायसंगत निर्णय है।”

वहीं आंध्र प्रदेश के एक किसान परिवार से आने वाले छात्र विनय रेड्डी ने कहा — “कृषि शिक्षा तक पहुँच अब आसान हो जाएगी। मुझे उम्मीद है कि इस परीक्षा के ज़रिए देश के ग्रामीण इलाकों के बच्चों को भी बड़े संस्थानों तक पहुँचने का मौका मिलेगा।”

भविष्य की दिशा

सरकार ने संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में कृषि स्नातकोत्तर (PG) और डॉक्टरेट (PhD) स्तर के कोर्सों में भी इसी तरह की राष्ट्रीय प्रवेश प्रणाली लागू की जा सकती है। इससे कृषि शिक्षा का पूरा ढांचा एकीकृत और पारदर्शी बन सकेगा। साथ ही, कृषि मंत्रालय अब विश्वविद्यालयों को आधुनिक तकनीक, जैविक खेती, और एग्री-स्टार्टअप्स से जोड़ने की दिशा में नई नीतियाँ बनाने की तैयारी में है, ताकि विद्यार्थी केवल पारंपरिक खेती नहीं बल्कि नवाचार आधारित कृषि व्यवसाय की ओर भी प्रेरित हों।

कुल मिलाकर, कृषि शिक्षा में यह सुधार सिर्फ प्रवेश प्रक्रिया का बदलाव नहीं बल्कि एक सिस्टमिक रिफॉर्म है। ICAR परीक्षा के ज़रिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रवेश मिलने से छात्रों को समान अवसर, विश्वविद्यालयों को विविध प्रतिभा, और देश को एक बेहतर कृषि भविष्य मिलेगा। यह निर्णय आने वाले वर्षों में भारत की कृषि शिक्षा प्रणाली को अधिक आधुनिक, समावेशी और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा।

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Huajiang Grand Canyon Bridge : चीन का इंजीनियरिंग चमत्कार जिसने नामुमकिन को मुमकिन किया

Huajiang Grand Canyon Bridge

दुनिया की सबसे ऊँची पुल का खिताब अब चीन के गुइझोऊ (Guizhou) प्रांत के Huajiang Grand Canyon Bridge के नाम है। तीन साल में तैयार हुई यह इंजीनियरिंग उपलब्धि न सिर्फ तकनीकी कौशल का प्रतीक है बल्कि मानव धैर्य और नवाचार का भी एक शानदार उदाहरण है। लगभग 283 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 2,360 करोड़ रुपये) की लागत से बने इस पुल ने उन बाधाओं को पार किया जिन्हें कभी असंभव माना जाता था।

कठिन भूगोल और चुनौतियाँ

गुइझोऊ का क्षेत्र अपने करास्ट (karst) परिदृश्य और गहरी घाटियों के लिए जाना जाता है। यहाँ की ढलानें बेहद खड़ी हैं और हवाएँ अक्सर तूफ़ानी रफ्तार से बहती हैं। इंजीनियरों को पुल की नींव डालते समय सिर्फ संरचना ही नहीं, बल्कि तापमान तक को नियंत्रित रखना पड़ा। विशालकाय कंक्रीट डालने के दौरान ज़रा सी असमानता पूरी संरचना को प्रभावित कर सकती थी।

प्रोजेक्ट मैनेजर वू झाओमिंग, जो Guizhou Transportation Investment Group से जुड़े हैं, ने कहा: “टीम को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कंक्रीट डालते समय तापमान को स्थिर रखना, खड़ी घाटियों को मजबूत करना और क्षेत्र की बदनाम तेज़ हवाओं से निपटना सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल था।”

Huajiang Grand Canyon Bridge

अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल

इस पुल का निर्माण पारंपरिक तकनीकों से संभव नहीं था। प्रोजेक्ट टीम ने कई अत्याधुनिक उपकरणों और तकनीकों का सहारा लिया, जिनमें शामिल हैं:

  • सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम, ताकि पुल के हर हिस्से को मिलीमीटर-लेवल सटीकता के साथ जोड़ा जा सके।
  • ड्रोन तकनीक, जो कठिन इलाकों में सर्वेक्षण और निगरानी के लिए इस्तेमाल हुई।
  • स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम, जिससे रियल-टाइम डाटा मिल सके और संरचना की मजबूती की पुष्टि होती रहे।
  • अल्ट्रा-हाई-स्ट्रेंथ मटीरियल्स, जो सामान्य स्टील और कंक्रीट से कहीं अधिक ताकतवर हैं और अत्यधिक ऊँचाई पर भी स्थिरता बनाए रखते हैं।

इंजीनियरिंग उपलब्धियाँ और पेटेंट

Huajiang Grand Canyon Bridge ने अपने डिजाइन और निर्माण तकनीकों के दम पर 21 पेटेंट हासिल किए हैं। इनमें सबसे अहम है पुल का एंटी-विंड रेसिस्टेंस डिजाइन, जो 2,000 फीट से भी अधिक ऊँचाई पर तेज़ हवाओं को झेल सकता है। यही नहीं, इस प्रोजेक्ट में विकसित कई नई तकनीकों को अब चीन के राष्ट्रीय ब्रिज कंस्ट्रक्शन मानकों में शामिल कर लिया गया है।

सुरक्षा और परीक्षण

ट्रैफिक के लिए खोलने से पहले पुल को कठोर परीक्षणों से गुज़ारा गया। इसमें 96 ट्रकों को, जिनका कुल वजन 3,300 टन था, अलग-अलग हिस्सों पर खड़ा किया गया ताकि संरचना पर दबाव और संतुलन को परखा जा सके। साथ ही, 400 से अधिक सेंसर लगाए गए, जो हर छोटी से छोटी हलचल और दबाव को मॉनिटर करते रहे। इन सभी परीक्षणों ने यह सुनिश्चित किया कि पुल आने वाले दशकों तक सुरक्षित और स्थिर बना रहेगा।

आर्थिक और सामाजिक महत्व

इस पुल का सबसे बड़ा फायदा स्थानीय लोगों को मिला है। पहले जहां घाटी को पार करने में दो घंटे लगते थे, वहीं अब यह दूरी महज़ दो मिनट में पूरी की जा सकती है। इसे स्थानीय मीडिया ने मज़ाकिया अंदाज में “Faster than making Maggi” कहकर प्रचारित किया।

तेज़ कनेक्टिविटी से न सिर्फ यात्रा का समय घटेगा, बल्कि पर्यटन और व्यापार को भी नई उड़ान मिलेगी। गुइझोऊ, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए जाना जाता है, अब देश-विदेश के और भी अधिक सैलानियों को आकर्षित कर सकेगा।

Huajiang Grand Canyon Bridge

वैश्विक प्रभाव और प्रतिष्ठा

Huajiang Grand Canyon Bridge ने चीन को एक बार फिर साबित किया है कि वह आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग में दुनिया से आगे है। इससे पहले चीन ने कई रिकॉर्ड-तोड़ पुल बनाए हैं, लेकिन यह प्रोजेक्ट सबसे अलग है। यह न सिर्फ दुनिया का सबसे ऊँचा पुल है बल्कि यह उन तमाम शंकाओं को भी दूर करता है कि क्या करास्ट परिदृश्य जैसी कठिन ज़मीन पर इतने बड़े पैमाने की संरचना संभव है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इसे “Engineering Marvel” और “Symbol of Human Ingenuity” जैसे विशेषणों से नवाज़ा है।

भविष्य के लिए प्रेरणा

यह पुल सिर्फ एक यातायात परियोजना नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए प्रेरणा है। यह दिखाता है कि सही तकनीक, धैर्य और टीमवर्क से कोई भी चुनौती असंभव नहीं है। साथ ही, इसने दुनिया भर के इंजीनियरों और आर्किटेक्ट्स को यह सिखाया है कि पर्यावरणीय और भौगोलिक बाधाओं को किस तरह नवाचार से हराया जा सकता है।

Huajiang Grand Canyon Bridge आधुनिक इंजीनियरिंग का ऐसा चमत्कार है जिसने दुनिया को दिखा दिया कि इंसान के लिए कोई ऊँचाई बहुत ज़्यादा नहीं होती। गहरी घाटियों और तेज़ हवाओं के बीच खड़ा यह पुल सिर्फ लोहे और कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि मानव जज़्बे और तकनीकी क्षमता का जिंदा सबूत है। यह न केवल गुइझोऊ प्रांत को बल्कि पूरे चीन को गर्व की एक नई वजह दे रहा है।

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इंदौर दशहरा 2025 विवाद : शूर्पणखा दहन बनाम रावण दहन, परंपरा, कानून और सामाजिक संवेदनाओं की जंग

शूर्पणखा दहन

इंदौर में इस दशहरे पर एक ऐसा कार्यक्रम चर्चा में आया है जिसने सामाजिक संवेदनाओं और कानूनी सीमाओं की नई जंग छेड़ दी है। ‘ नामक संगठन ने घोषणा की कि इस साल रावण दहन की परंपरा के बजाय ‘शूर्पणखा दहन’ होगा, जिसमें 11 महिलाओं के चेहरे वाले पुतले जलाए जाएंगे, जिन पर हत्या या अन्य गंभीर अपराध के आरोप हैं।

आरोप, सार्वजनिक प्रतिक्रिया और कानूनी हस्तक्षेप

आयोजकों का कहना है कि यह प्रतीकात्मक विरोध है—बुराई को पुरुष या महिला से नहीं बाँधा जा सकता, न्याय चाहते हैं कि अपराधी हो, चाहे उसका लिंग कोई भी हो। पर इस कार्यक्रम ने समाज में नाराजियों की खाईं खोल दी। कुछ लोग इसे “आधुनिक जागरूकता” मान रहे हैं, जबकि कईयोन ने यह कहा कि न्यायालयीन स्वीकृति के बिना सार्वजनिक स्थान पर किसी महिला का पुतला जलाना “मानव सम्मान” के खिलाफ है।

इसी बीच मध्यप्रदेश हाई कोर्ट, इंदौर बेंच ने सरकार को निर्देश दिया है कि किसी का पुतला जलाना सुनिश्चित रूप से रोका जाए, जब तक कि कोई न्यायालयीन निर्णय ना आए। कोर्ट ने साफ कहा कि किसी का मामला विचाराधीन है तो उस व्यक्ति को सार्वजनिक ध्वज प्रदर्शनी या दहन के माध्यम से अपराधी घोषित नहीं किया जा सकता।

शूर्पणखा दहन

“संवेदनाएँ vs दर्शकवाद”: क्या बदल गई है दशहरे की परंपरा?

दशहरे की परंपरा कि रावण की मूर्ति जलकर बुराई का अंत हो, प्रतीक है। लेकिन जब प्रतीक बदल जाए और उस दूसरी ओर मानवीय भावनाओं, न्याय की प्रक्रिया और सार्वजनिक संगति की सीमाएँ उभर आएँ, तो सवाल बनता है—क्या संबंधों और संवेदनाओं का अहिटान सामाजिक न्याय की कीमत पर हो रहा है?

कुछ लोगों का मानना है कि ऐसे प्रदर्शन सामाजिक जागरूकता बढ़ाते हैं, अपराधियों को शर्मिंदा करते हैं। लेकिन विरोधियों का तर्क है कि ख़ाकी-कानूनी प्रक्रिया को नजरअंदाज़ करना और सार्वजनिक रूप से किसी को आरोपी मान लेना संविधान सुरक्षा के सिद्धांतों के खिलाफ है। नुकसान सिर्फ नाम का नहीं, प्रतिष्ठा और आत्मसम्मान का हो सकता है।

कानूनी स्थिति: अपराधी बनाना अदालत का काम है

भारतीय न्यायप्रणाली में सिद्धांत है—“एक व्यक्ति दोषी तब माना जाए जब न्यायालय फैसला करे।” IPC या अन्य कानूनों में ऐसा कोई अधिकार नहीं है कि सार्वजनिक आयोजनों में विचाराधीन आरोपियों को अभियुक्त घोषित कर पुतला जलाया जाए। हालाँकि, सार्वजनिक_ORDER और मानव गरिमा का संरक्षण संविधान में दर्ज है।

उदाहरण के लिए, Madras High Court ने कहा है कि केवल effigy-burning होना, अपने आप में दंडनीय अपराध नहीं है—जबतक वह सार्वजनिक सुरक्षा या कानून-व्यवस्था को प्रभावित न करे। इंदौर की हाई कोर्ट की ताज़ा कार्रवाई इस बात की याद दिलाती है कि कानून सिर्फ परंपराओं से ऊपर है। जब न्याय प्रक्रिया अधूरी हो, नाम मात्र के आरोप सार्वजनिक रूप से उजागर होने लगें, तब संवैधानाओं और अधिकारों की रक्षा करना ज़रूरी है।

समाज का पल: परंपरा जहाँ खिंचाव में है

इस घटना ने हमें यह दिखाया है कि समाज कितने हिस्सों में बंटा है—परंपरावादी, न्याय-प्रेमी, संवेदनशील दृष्टिकोण रखने वाले। कुछ का कहना है कि महिलाएँ भी “रावण” बन जाएँ, अगर अपराध साबित हो। दूसरों का कहना है कि न्याय ज़रूरी है लेकिन सार्वजनिक न्याय नहीं, अदालत की निर्णय प्रक्रिया ज़रूरी है। और कुछ यह मानते हैं कि परंपरा को बदला जा सकता है लेकिन सम्मान की सीमाएँ होती हैं।

इस दशहरे पर हमें क्या सीख मिलती है?

इंदौर की ‘Shurpanakha Dahan’ सिर्फ पुतले जलाने की कहानी नहीं है; यह कानून, नैतिकता और सामाजिक मंथन की कहानी है। जीत-हार नहीं, सम्मान, विचार और न्याय की सच्ची परीक्षा है। इस विवाद ने साफ किया है कि परंपरा तब तक बनी रह सकती है जब वह दूसरों की गरिमा के साथ मिलकर हो—और कि बदलाव तब ही स्वीकार्य है जब वह संवेदनशीलता और न्याय की कसौटी पर खरा उतरे।

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Energy Jackpot : अंडमान से मिली गैस, भारत ने बढ़ाया आत्मनिर्भरता का कदम

अंडमान

भारत ने ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। अंडमान सागर की गहराइयों में प्राकृतिक गैस का बड़ा भंडार मिलने की पुष्टि हुई है, जिसे देश की ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने वाला कदम माना जा रहा है। यह खोज सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने की और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसे “ऊर्जा के अवसरों का महासागर” बताया।

खोज का स्थान और प्रक्रिया

गैस भंडार ‘श्री विजयपुरम-2’ कुएं में मिला है, जो अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से सिर्फ 17 किलोमीटर दूर समुद्र में स्थित है। ड्रिलिंग के दौरान समुद्र की सतह से 295 मीटर नीचे पानी में काम किया गया। 2,212 से 2,250 मीटर की गहराई में गैस के पुख्ता सबूत मिले, और Intermittent Flaring (गैस की लपटें) भी देखी गई। इसके बाद नमूनों को काकीनाडा में जांच के लिए भेजा गया, जहां पाया गया कि गैस में 87% मीथेन मौजूद है। यह उच्च गुणवत्ता वाली ऊर्जा का प्रतीक है और विशेषज्ञ इसे “जैकपॉट” कह रहे हैं।

अंडमान

क्यों है यह खोज ऐतिहासिक?

1. आयात पर निर्भरता कम होगी : भारत अपनी गैस की लगभग 50% और कच्चे तेल की 90% जरूरत आयात करता है। अंडमान में मिली यह गैस आयात बिल घटाने और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने में मदद कर सकती है।

2. ‘समुद्र मंथन’ मिशन की बड़ी सफलता : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘राष्ट्रीय डीप वाटर एक्सप्लोरेशन मिशन’ (समुद्र मंथन) का यह पहला बड़ा नतीजा है। इसका लक्ष्य गहरे समुद्र में छिपे तेल और गैस संसाधनों को खोजकर भारत को आत्मनिर्भर बनाना है।

3. आर्थिक और औद्योगिक लाभ : घरेलू उद्योगों को सस्ती और स्थायी ऊर्जा मिलेगी, जिससे उत्पादन लागत कम होगी और अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

4. भूगर्भीय महत्व : मंत्री पुरी ने कहा कि यह खोज प्रमाण है कि अंडमान बेसिन हाइड्रोकार्बन से समृद्ध है, जैसे म्यांमार से इंडोनेशिया तक फैला भूगर्भीय क्षेत्र।

भारत की वर्तमान ऊर्जा स्थिति

भारत की प्राकृतिक गैस खपत लगातार बढ़ रही है। 2024–25 के आंकड़ों के अनुसार, देश को लगभग 150 BCM (बिलियन क्यूबिक मीटर) गैस की जरूरत थी, जिसमें से आधा आयातित है। पेट्रोलियम और गैस आयात पर भारत हर साल 80–90 अरब डॉलर खर्च करता है। इस खोज के बाद देश को लंबी अवधि की ऊर्जा सुरक्षा और खर्च में कमी का अवसर मिलेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह भंडार व्यावसायिक रूप से लाभकारी साबित होता है, तो भारत डीप वॉटर एक्सप्लोरेशन के क्षेत्र में वैश्विक मानचित्र पर अपनी स्थिति मजबूत करेगा।

अंडमान

अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य

दुनिया भर में ऊर्जा संसाधनों की प्रतिस्पर्धा तेज है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद गैस की कीमतों में उछाल और आपूर्ति संकट ने घरेलू उत्पादन की आवश्यकता बढ़ा दी है। अंडमान खोज के बाद भारत अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है और आयात पर निर्भरता घटा सकता है।

आगे की राह

हालांकि, भंडार का वास्तविक आकार और व्यावसायिक निकालने की संभावना का मूल्यांकन अभी बाकी है। आने वाले महीनों में फिजिबिलिटी स्टडी और विस्तृत परीक्षण होंगे। यदि सब ठीक रहा, तो यह खोज आने वाले दशकों तक भारत की ऊर्जा नीति और आर्थिक रणनीति में अहम भूमिका निभा सकती है।

अंडमान सागर की गहराइयों से निकली यह प्राकृतिक गैस भारत के लिए सिर्फ एक ऊर्जा संसाधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, आर्थिक विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का प्रतीक है। यह खोज भारत को ऊर्जा स्वतंत्रता की नई ऊँचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखती है और देश को आयात-आधारित मॉडल से घरेलू ऊर्जा पर निर्भरता की ओर मजबूत कदम बढ़ाने में मदद करेगी।

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Lulu से लेकर Phoenix तक : इंडिया के 5 सबसे बड़े मॉल्स की पूरी कहानी

इंडिया के 5 सबसे बड़े मॉल्स

इंडिया के 5 सबसे बड़े मॉल्स : भारत पिछले दो दशकों में सिर्फ़ आईटी और स्टार्टअप्स का ही नहीं बल्कि रिटेल और शॉपिंग डेस्टिनेशन का भी हब बन चुका है। देश में अब ऐसे-ऐसे मॉल मौजूद हैं जो न सिर्फ़ शॉपिंग का मज़ा देते हैं, बल्कि एंटरटेनमेंट, खाने-पीने और फैमिली टाइम बिताने का भी बेहतरीन … Read more

Navratri 2025 Dates Out – 9 रातें देवी माँ की आराधना और विजयदशमी का पावन संदेश

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Navratri का नाम लेते ही मन में एक अलग ही ऊर्जा और श्रद्धा का भाव जाग उठता है। यह सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि शक्ति, भक्ति और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। इस साल शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर 2025, सोमवार से शुरू होकर 1 अक्टूबर 2025, बुधवार तक चलेगी। इसके बाद 2 अक्टूबर, गुरुवार को … Read more

PM मोदी ने लॉन्च किया National Makhana Board: बिहार के किसानों को मिलेगा Global Market का रास्ता

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16 सितंबर 2025 को बिहार के पूर्णिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने National Makhana Board का शुभारंभ किया। यह कदम केंद्र सरकार के Budget 2025 के अंतरगत उठाया गया है, जिसका उद्देश्य  किसानों को सीधा लाभ पहुंचाना, उत्पादन और प्रोसेसिंग को बढ़ावा देना और भारत के Makhana Export को दुनिया के बड़े बाज़ारों तक ले जाना … Read more

Dehradun Cloudburst 2025 : अचानक बढ़े जलस्तर ने मचाई तबाही, 13 मृतक और 16 लोग अब भी गुमशुदा

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घर बैठे कमाई – जियो कस्टमर एसोसिएट प्रोग्राम वर्क फ्रॉम होम के 5 फायदे के साथ काम करने का सुनहरा मौका

वर्क फ्रॉम होम

जियो का वर्क फ्रॉम होम प्रोग्राम आज के बदलते समय में नौकरी की परिभाषा काफी बदल चुकी है। अब लोग केवल दफ्तर जाकर काम करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि घर बैठे भी रोजगार के नए अवसर तलाश रहे हैं। इसी दिशा में भारत की अग्रणी दूरसंचार कंपनी रिलायंस जियो ने एक अनोखी पहल की … Read more

Global Peace Index 2025 : भारत और आइसलैंड के बीच में है ज़मीन आसमान का अंतर। हम इतने पीछे कैसे आ गए – क्या है करण ?

Global Peace Index

Global Peace Index 2025 की रिपोर्ट हाल ही में जारी की गई है, जिसमें दुनिया के सबसे शांतिपूर्ण और अशांत देशों की रैंकिंग सामने आई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, आइसलैंड एक बार फिर दुनिया का सबसे शांतिपूर्ण देश बना हुआ है। वहीं, भारत को 115वां स्थान मिला है, जो चिंतन और सुधार की दिशा … Read more

BAU Sabour का Historic Achievement : Linseed Research में मिला Best AICRP Award और 1st Patent Bihar

BAU Sabour

Agricultural University BAU Sabour, Bhagalpur ने वर्ष 2025 में कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय को “Best AICRP–Linseed Centre Award 2024–25” से सम्मानित किया गया है,और देश का पहला स्वदेशी Patent in Linseed भी अपने नाम किया है। इस सफलता ने Linseed Research को एक नया मुकाम दिया है– … Read more

पटना साहिब के मंगल तालाब में पर्यटन विकास की नई पहल, NNT Developers को मिला ठेका

NNT Developers

पटना साहिब स्थित ऐतिहासिक मंगल तालाब को पर्यटकों के लिए और आकर्षक बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। NNT Developers को यहाँ पर्यटन विकास परियोजना का ठेका सौंपा गया है। इस परियोजना पर करीब 12.91 करोड़ रुपये की लागत आएगी और इसे 18 महीनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित … Read more

आख़िर कौन बना World’s Richest Person सिर्फ 1 दिन में Net Worth में $100 Billion का धमाका! Elon Musk OUT

World's Richest Person

Oracle के Larry Ellison ने रचा इतिहास – अब वो हैं World’s Richest Person -10 सितंबर 2025 की रात ग्लोबल बिज़नेस वर्ल्ड के लिए किसी धमाके से कम नहीं रही। Oracle के सह-संस्थापक लैरी एलिसन (Larry Ellison) ने एक ही दिन में कमाल कर दिया — Elon Musk को पीछे छोड़ते हुए वो बन गए … Read more

Indian Network problem : समुद्री केबल्स की बड़ी खराबी से भारत में नेटवर्क ठप, लेकिन जल्द मिलेगी राहत”

Indian Network problem

Indian Network Problem और अंतरराष्ट्रीय फाइबर ऑप्टिक केबल में आई बड़ी खराबी ने वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इस घटना का असर भारत सहित एशिया और मध्य पूर्व के कई देशों पर पड़ा है। यूज़र्स लगातार इंटरनेट स्पीड में गिरावट और कनेक्टिविटी की समस्या का सामना कर रहे हैं। कुछ … Read more

Alwar Religion Scam : 52 मासूमों का ब्रेनवॉश उजागर, पुलिस की बड़ी कार्रवाई और बच्चों की आज़ादी की उम्मीद

Alwar Religion Scam

Alwar Religion Scam – राजस्थान के अलवर जिले में एक मिशनरी हॉस्टल पर छापा मारने के बाद पता चला कि बच्चों को रख के धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है।अभी तक की खबरों में अनुसर 52 बच्चे से मिले हैं जिन्हे शिक्षा की आड़ में ईसाई धर्म अपने बारे में कहा जा रहा था और … Read more

Chandra Grahan : चंद्र ग्रहण 2025 – ‘ब्लड मून’ का भव्य नजारा और ग्रहण के दौरान जरूरी सावधानिया”

Chandra Grahan

Chandra Grahan आज 7 सितंबर को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) लगने जा रहा है। चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जिस चांद और सूर्य के बीच हमारी पृथ्वी आ जाती है, और इस करण से पृथ्वी की छाया चांद पर पड़ती है, और इसे ही हम चंद्र ग्रहण कहते हैं।पूर्ण  चंद्र ग्रहण को … Read more

Sunday Special : Bihar, UP, Tamil Nadu, MP, Punjab Big Plans – But Who’s Winning the Growth Race?

Sunday Special

Sunday special 1. Bihar Approved “Chief Minister Women’s Employment Scheme” (₹10 k start-up grant per family woman) Cleared seven new government medical colleges in Kishanganj, Katihar, Rohtas, Shivhar, Lakhisarai, Arwal and Sheikhpura Adopted Bihar Industrial Investment Promotion Package 2025 (free land, tax breaks, subsidies) Created 3,233 new government posts across departments Laid foundation/inaugurated ₹899.46 crore … Read more

Unbelievable Murti in Chhattisgarh – देखिए कैसे गोबर से बनी मां सरस्वती की प्रतिमा ने देश को किया हैरान

Unbelievable Murti in Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ की धरती पर चमत्कारी कला: जब गोबर से रची मां सरस्वती की भव्य प्रतिमा, संस्कार और पर्यावरण दोनों का सम्मान! छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के निमोरा गांव के मूर्तिकार पीलूराम साहू ने एक अनूठी पहल के तहत गाय के गोबर से मां सरस्वती की प्रतिमा का निर्माण किया है। … Read more

The Mysterious Village of Maharashtra : भारत का वह रहस्यमयी गाँव जहाँ ‘हनुमान जी’ का नाम लेना भी मना है!

The Mysterious Village of Maharashtra – भारत विविधताओं और परंपराओं का देश है — जहाँ हर गाँव की अपनी अलग कहानी होती है। लेकिन महाराष्ट्र के एक गाँव में जो परंपरा आज भी निभाई जा रही है, वह आपको हैरान कर देगी। यह कहानी है एक ऐसे गाँव की, जहाँ हनुमान जी की पूजा नहीं … Read more